आँखों पर मीलों मील लम्बे अफ़साने आपको मिल जायेंगे साहित्य और
फ़िल्मी गीतों में। गीतकार राजेंद्र कृष्ण ने भी आँखों पर तरह तरह के गीत
लिखे हैं। प्रस्तुत गीत जो कि फिल्म ब्लैकमेल का गीत है में आँखों को शरबती
कि उपमा प्रदान की गई है। 'शरबती' शब्द अक्सर आप दो चीज़ों का जिक्र होने
पर सुना करते होंगे-आँखें और गेंहू। शरबती गेंहू अच्छी क़िस्म का गेंहू माना
जाता है ।
गीत में नायिका की वेश भूषा देख कर शायद आपको देव आनंद की याद आ जाये।
एक बात मुझे हमेशा से चौंकती रही है-फिल्म में नायक नायिका धूल में लोट लगा
लें या मैदान में गुलाटियां खा लें उनके कपडे ज़रा भी गंदे नहीं होते?
गीत के बोल:
मैं डूब डूब जाता हूँ
शरबती तेरी आँखों की, हा
झील सी गहराई में
शरबती तेरी आँखों की
झील सी गहराई में
मैं डूब डूब जाता हूँ
फूलों को तूने रंगत दे दी
सूरज को उजाला, उजाला
सूरज को उजाला
जुल्फों से तूने पानी छटका
तारों की बन गई माला
देखो तारों की बन गई माला
होंठ हैं तेरे दो पैमाने
होंठ तेरे दो पैमाने
पैमानों की मस्ती में
डूब डूब जाता हूँ
शरबती तेरी आँखों की, हा
झील सी गहराई में
शरबती तेरी आँखों की
झील सी गहराई में
मैं डूब डूब जाता हूँ
भूले से जो तू बाग़ में जाये
पत्ता पत्ता डोले
रे डोले पत्ता पत्ता डोले
तिरछी नज़रें जिधर भी फेंके
भड़के सौ सौ शोले, रे शोले
भड़के सौ सौ शोले
गाल हैं तेरे दो अंगारे
गाल हैं तेरे दो अंगारे
अंगारों की गर्मी में
डूब डूब जाता हूँ
शरबती तेरी आँखों की, हा
झील सी गहराई में
शरबती तेरी आँखों की
झील सी गहराई में
मैं डूब डूब
मैं डूब डूब
मैं डूब डूब जाता हूँ
......................................
Sharbati teri ankhon ki-Blackmail 1973
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Saturday, 4 February 2012
Saturday, 28 January 2012
मुझे ऐसा मिला मोती-पिघलता आसमान १९८५
इस गीत को देख कर जाने क्यूँ 'बर्फ पर निबंध' याद आ जाता है ।
इस्कूल में एक बार निबंध लिखने का कार्यक्रम हुआ(अक्सर हो जाया
करता था) । हमने तो हाथ खड़े कर दिए और मार खा ली मगर एक
निबंध जो पढने को मिला वो इस प्रकार से था- बर्फ आइस फैक्ट्री से
आती है। ये बड़ी बड़ी सिल्लियों के आकर में आती है । इसे तोड़ कर
और बिना तोड़े भी बेचा जाता है। तोड़ फोड़ करने के बाद इसका प्रयोग
गन्ने के रस को ठंडा करने और उसकी मात्रा बढ़ाने के लिए किया जाता है।
इसे पिघलने से बचाने के लिए बोरे में लपेट कर रखा जाता है......................
उसे बाद के हिस्से में कुछ इस प्रकार से था- जो बर्फ हिंदी फिल्मों में
दिखाई जाती है वो दूसरी किस्म की बर्फ होती है । वो खाने के काम नहीं आती ।
वो कश्मीर में पायी जाती है जिसके ऊपर फिल्म के हीरो हीरोइन नाचते- कूदते
और गाना गाते हैं।
गीत है फिल्म पिघलता आसमान का जिसे देख कर दर्शक ज्यादा नहीं पिघले
और फिल्म थोड़ा बहुत चलने के बाद सिनेमा गृहों से गायब हो गई।
गीत के बोल:
आ आ आ आ आ आ आ आ आ
मुझे ऐसा मिला मोती
ऐसा मोती कोई सागर में ना होगा
मुझे ऐसा मिला मोती
ऐसा मोती कोई सागर में ना होगा
मुझे ऐसा मिला तारा
ऐसा तारा कोई अम्बर में ना होगा
तन जिसका है मनभावन
मन जिसका पवन पवन
तन जिसका है मनभावन
मन जिसका पवन पवन
ऐसे वो मिला जैसे के मिले
प्यासी धरती को सावन
मुझे ऐसा मिला मोती
ऐसा मोती कोई सागर में ना होगा
मुझे ऐसा मिला तारा
ऐसा तारा कोई अम्बर में ना होगा
महलों से मैं कब मानी
दौलत को ना दौलत जानी
महलों से मैं कब मानी
दौलत को ना दौलत जानी
सारा ही जहाँ सूरत देखे
मैं सीरत की दीवानी
मुझे ऐसा मिला मोती
ऐसा मोती कोई सागर में ना होगा
मुझे ऐसा मिला तारा
ऐसा तारा कोई अम्बर में ना होगा
वो ज़फ़ा करें सह लूंगी
वो गिला करें सह लूंगी
वो ज़फ़ा करें सह लूंगी
वो गिला करें सह लूंगी
जिस हाल में वो रखे मुझको
उस हाल में मैं रह लूंगी
मुझे ऐसा मिला मोती
ऐसा मोती कोई सागर में ना होगा
मुझे ऐसा मिला तारा
ऐसा तारा कोई अम्बर में ना होगा
...................................
Mujhe aisa mila moti-Pighalta Aasman 1985
इस्कूल में एक बार निबंध लिखने का कार्यक्रम हुआ(अक्सर हो जाया
करता था) । हमने तो हाथ खड़े कर दिए और मार खा ली मगर एक
निबंध जो पढने को मिला वो इस प्रकार से था- बर्फ आइस फैक्ट्री से
आती है। ये बड़ी बड़ी सिल्लियों के आकर में आती है । इसे तोड़ कर
और बिना तोड़े भी बेचा जाता है। तोड़ फोड़ करने के बाद इसका प्रयोग
गन्ने के रस को ठंडा करने और उसकी मात्रा बढ़ाने के लिए किया जाता है।
इसे पिघलने से बचाने के लिए बोरे में लपेट कर रखा जाता है......................
उसे बाद के हिस्से में कुछ इस प्रकार से था- जो बर्फ हिंदी फिल्मों में
दिखाई जाती है वो दूसरी किस्म की बर्फ होती है । वो खाने के काम नहीं आती ।
वो कश्मीर में पायी जाती है जिसके ऊपर फिल्म के हीरो हीरोइन नाचते- कूदते
और गाना गाते हैं।
गीत है फिल्म पिघलता आसमान का जिसे देख कर दर्शक ज्यादा नहीं पिघले
और फिल्म थोड़ा बहुत चलने के बाद सिनेमा गृहों से गायब हो गई।
गीत के बोल:
आ आ आ आ आ आ आ आ आ
मुझे ऐसा मिला मोती
ऐसा मोती कोई सागर में ना होगा
मुझे ऐसा मिला मोती
ऐसा मोती कोई सागर में ना होगा
मुझे ऐसा मिला तारा
ऐसा तारा कोई अम्बर में ना होगा
तन जिसका है मनभावन
मन जिसका पवन पवन
तन जिसका है मनभावन
मन जिसका पवन पवन
ऐसे वो मिला जैसे के मिले
प्यासी धरती को सावन
मुझे ऐसा मिला मोती
ऐसा मोती कोई सागर में ना होगा
मुझे ऐसा मिला तारा
ऐसा तारा कोई अम्बर में ना होगा
महलों से मैं कब मानी
दौलत को ना दौलत जानी
महलों से मैं कब मानी
दौलत को ना दौलत जानी
सारा ही जहाँ सूरत देखे
मैं सीरत की दीवानी
मुझे ऐसा मिला मोती
ऐसा मोती कोई सागर में ना होगा
मुझे ऐसा मिला तारा
ऐसा तारा कोई अम्बर में ना होगा
वो ज़फ़ा करें सह लूंगी
वो गिला करें सह लूंगी
वो ज़फ़ा करें सह लूंगी
वो गिला करें सह लूंगी
जिस हाल में वो रखे मुझको
उस हाल में मैं रह लूंगी
मुझे ऐसा मिला मोती
ऐसा मोती कोई सागर में ना होगा
मुझे ऐसा मिला तारा
ऐसा तारा कोई अम्बर में ना होगा
...................................
Mujhe aisa mila moti-Pighalta Aasman 1985
Saturday, 29 October 2011
तौबा तौबा तौबा -पासपोर्ट १९६१
कुछ फ़िल्में भूली बिसरी कहलाती हैं तो कुछ भूली भटकी और बची-खुची
फिल्मों को गुम भुला दी गई फ़िल्में बोला जाता है। बोलने के तरीके बस
जुदा हैं सबके, आशय उनका एक ही रहता है।
एक गुमनाम इस फिल्म पासपोर्ट से एक थोड़ा लोकप्रिय गीत सुनवाया
था आपको पहले। इसी फिल्म से गीता दत्त का गाया अगला गीत सुनते हैं
जो हेलन पर फिल्माया गया है। जनता एक मदिरालय में एकत्रित है और
इसमें एक नर्तकी नृत्य कौशल दिखलाते हुए गा रही है। हेलन को ऐसे दृश्यों
में आपने कई फिल्मों में देखा होगा। ऐसे गीतों के लिए पहले के समय में
गीता दत्त की आवाज़ को प्राथमिकता दी जाती थी वो स्थान बाद में आशा भोंसले
की आवाज़ ने ले लिया।
गीत लिखा है कमर जलालाबादी ने बाद इसकी धुन बनाई है संगीतकार जोड़ी
कल्याणजी-आनंदजी ने। कल्याणजी आनंदजी ने अपनी शुरूआती फिल्मों
में गीता दत्त से उन्होंने कुछ गीत अवश्य गवाए। गीत में आपको गुज़रे
ज़माने के मशहूर खलनायक के. एन. सिंह और चरित्र अभिनेता नजीर हुसैन
भी दिखलाई दे जायेंगे।
गीत के बोल:
तौबा तौबा तौबा
हॉय तौबा मेरी मान
तौबा तौबा तौबा
ओ तौबा मेरी मान
ले के मेरे दिल को
बनो ना बेईमान
हो ले के मेरे दिल को
बनो ना बेईमान
तौबा तौबा तौबा
हो तौबा मेरी मान
तौबा तौबा तौबा
हो तौबा मेरी मान
ले के मेरे दिल को
बनो ना बेईमान
हो ले के मेरे दिल को
बनो ना बेईमान
जाने चमन की रंगीन बहारें
किस को पुकारें, किसको पुकारें
जाने चमन की रंगीन बहारें
किस को पुकारें, किसको पुकारें
देखी है ऐसी बहारें कहाँ
तौबा तौबा तौबा
हो तौबा मेरी मान
तौबा तौबा तौबा
हो तौबा मेरी मान
ले के मेरे दिल को
बनो ना बेईमान
हो ले के मेरे दिल को
बनो ना बेईमान
दुनिया में लाखों बांके जवान हैं
मेरी अदा पे सब मेहरबान हैं
दुनिया में लाखों बांके जवान हैं
मेरी अदा पे सब मेहरबान हैं
तुमसे ही ज़ालिम को दिल क्यूँ दिया
तौबा तौबा तौबा
हो तौबा मेरी मान
तौबा तौबा तौबा
हो तौबा मेरी मान
ले के मेरे दिल को
बनो ना बेईमान
हो ले के मेरे दिल को
बनो ना बेईमान
हम ने तुम्हीं से आँख मिलायी
महफ़िल में क्यूँ ये तन्हाई
हम ने तुम्हीं से आँख मिलायी
महफ़िल में क्यूँ ये तन्हाई
हम हैं तुम्हारे तुम्हारी कसम
तौबा तौबा तौबा
हो तौबा मेरी मान
तौबा तौबा तौबा
हो तौबा मेरी मान
ले के मेरे दिल को
बनो ना बेईमान
हो ले के मेरे दिल को
बनो ना बेईमान
................................
Tauba tauba ho-Passport 1961
फिल्मों को गुम भुला दी गई फ़िल्में बोला जाता है। बोलने के तरीके बस
जुदा हैं सबके, आशय उनका एक ही रहता है।
एक गुमनाम इस फिल्म पासपोर्ट से एक थोड़ा लोकप्रिय गीत सुनवाया
था आपको पहले। इसी फिल्म से गीता दत्त का गाया अगला गीत सुनते हैं
जो हेलन पर फिल्माया गया है। जनता एक मदिरालय में एकत्रित है और
इसमें एक नर्तकी नृत्य कौशल दिखलाते हुए गा रही है। हेलन को ऐसे दृश्यों
में आपने कई फिल्मों में देखा होगा। ऐसे गीतों के लिए पहले के समय में
गीता दत्त की आवाज़ को प्राथमिकता दी जाती थी वो स्थान बाद में आशा भोंसले
की आवाज़ ने ले लिया।
गीत लिखा है कमर जलालाबादी ने बाद इसकी धुन बनाई है संगीतकार जोड़ी
कल्याणजी-आनंदजी ने। कल्याणजी आनंदजी ने अपनी शुरूआती फिल्मों
में गीता दत्त से उन्होंने कुछ गीत अवश्य गवाए। गीत में आपको गुज़रे
ज़माने के मशहूर खलनायक के. एन. सिंह और चरित्र अभिनेता नजीर हुसैन
भी दिखलाई दे जायेंगे।
गीत के बोल:
तौबा तौबा तौबा
हॉय तौबा मेरी मान
तौबा तौबा तौबा
ओ तौबा मेरी मान
ले के मेरे दिल को
बनो ना बेईमान
हो ले के मेरे दिल को
बनो ना बेईमान
तौबा तौबा तौबा
हो तौबा मेरी मान
तौबा तौबा तौबा
हो तौबा मेरी मान
ले के मेरे दिल को
बनो ना बेईमान
हो ले के मेरे दिल को
बनो ना बेईमान
जाने चमन की रंगीन बहारें
किस को पुकारें, किसको पुकारें
जाने चमन की रंगीन बहारें
किस को पुकारें, किसको पुकारें
देखी है ऐसी बहारें कहाँ
तौबा तौबा तौबा
हो तौबा मेरी मान
तौबा तौबा तौबा
हो तौबा मेरी मान
ले के मेरे दिल को
बनो ना बेईमान
हो ले के मेरे दिल को
बनो ना बेईमान
दुनिया में लाखों बांके जवान हैं
मेरी अदा पे सब मेहरबान हैं
दुनिया में लाखों बांके जवान हैं
मेरी अदा पे सब मेहरबान हैं
तुमसे ही ज़ालिम को दिल क्यूँ दिया
तौबा तौबा तौबा
हो तौबा मेरी मान
तौबा तौबा तौबा
हो तौबा मेरी मान
ले के मेरे दिल को
बनो ना बेईमान
हो ले के मेरे दिल को
बनो ना बेईमान
हम ने तुम्हीं से आँख मिलायी
महफ़िल में क्यूँ ये तन्हाई
हम ने तुम्हीं से आँख मिलायी
महफ़िल में क्यूँ ये तन्हाई
हम हैं तुम्हारे तुम्हारी कसम
तौबा तौबा तौबा
हो तौबा मेरी मान
तौबा तौबा तौबा
हो तौबा मेरी मान
ले के मेरे दिल को
बनो ना बेईमान
हो ले के मेरे दिल को
बनो ना बेईमान
................................
Tauba tauba ho-Passport 1961
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KN Singh,
Nazir Hussain,
Passport,
Qamar Jalalabadi
Tuesday, 2 August 2011
तू क्या जाने तुझ में क्या है-हादसा १९८३
अब आपको सुनवाते हैं एक और हिट फिल्म से एक हिट गीत जो
किशोर कुमार की आवाज़ में है। फिल्म का शीर्षक गीत ज़रूर अमित कुमार
यानि किशोर कुमार के पुत्र की आवाज़ में है। ये कुछ उन बिरली फिल्मों
में से है जिसमें पिता पुत्र दोनों की आवाजों में गीत मौजूद हैं। प्रस्तुत
गीत फिल्माया गया है फिरोज खान के छोटे भाई अकबर खान और रंजीता
पर। अकबर संजय खान से छोटे हैं। उनकी संगीत की समझ काफी अच्छी है ।
फिल्म में कल्याणजी आनंदजी की सेवाएं ली गयीं और उन्होंने कतई निराश
नहीं किया और एक से बढ़ कर एक गीत बनाये फिल्म के लिए। नायक
एक गैराज में मिस्त्री है इसलिए एक विशेष क़िस्म का खटारा वाहन इस गीत
में आप देखेंगे। लड़की पटाने के लिए उपयुक्त गीत है ये। इसमें उपमाओं और
दावों का अतिरेक सा है। मनचली भाषा में ऐसे गीतों को कहते है-फुल्तू पुटास
गीत। गीत लिखा है एम् जी हशमत साहब ने।
अरे तू क्या जाने तुझमें क्या है
तेरी मोहब्बत मेरा खुदा है
हुस्न क़यामत चाल क़यामत
गाल पे बिखरे बाल क़यामत
चलती फिरती आफत हो तुम
आफत पे दिल मेरा फ़िदा है
तू है ज़मीन पर सूनी है जन्नत
कौन करे अब उससे मोहब्बत
खुदा परेशां तुझको बना के
हुस्न खुदाई तुझमें बसा के कर
फिर न बनेगी तुझसी हसीना
सारा हुस्न तो तुझमें भरा है
तेरी शक्ल जब उसने बनाई
प्यार की खुशबू हवा में आई
झूम उठे सब नशे में बादल
नशे में मैं भी तो हो गया पागल
झूमें नशे में चाँद और तारे
मेरी तरह तेरे प्यार के मारे
सूरज के दिल में आग है तेरी
इश्क में तेरे वो भी जला है
हाथ में तेरा हाथ रहे तो
दुनिया से टकरा सकता हूँ
नोच के सूरज चंद सितारे
इस धरती पे ला सकता हूँ
दूर न होना दिल को लगा के
रख दूंगा वरना दुनिया जला के
तेरे बिना मैं जी न सकूंगा
तेरी मोहब्बत मेरा खुदा है
अरे तू क्या जाने तुझमें क्या है
तेरी मोहब्बत मेरा खुदा है
तेरी मोहब्बत मेरा खुदा है
तेरी मोहब्बत मेरा खुदा है
तेरी मोहब्बत मेरा खुदा है
तेरी मोहब्बत मेरा खुदा है
.............................
Too kya jaane tujh mein kya hai-Haadsa 1983
किशोर कुमार की आवाज़ में है। फिल्म का शीर्षक गीत ज़रूर अमित कुमार
यानि किशोर कुमार के पुत्र की आवाज़ में है। ये कुछ उन बिरली फिल्मों
में से है जिसमें पिता पुत्र दोनों की आवाजों में गीत मौजूद हैं। प्रस्तुत
गीत फिल्माया गया है फिरोज खान के छोटे भाई अकबर खान और रंजीता
पर। अकबर संजय खान से छोटे हैं। उनकी संगीत की समझ काफी अच्छी है ।
फिल्म में कल्याणजी आनंदजी की सेवाएं ली गयीं और उन्होंने कतई निराश
नहीं किया और एक से बढ़ कर एक गीत बनाये फिल्म के लिए। नायक
एक गैराज में मिस्त्री है इसलिए एक विशेष क़िस्म का खटारा वाहन इस गीत
में आप देखेंगे। लड़की पटाने के लिए उपयुक्त गीत है ये। इसमें उपमाओं और
दावों का अतिरेक सा है। मनचली भाषा में ऐसे गीतों को कहते है-फुल्तू पुटास
गीत। गीत लिखा है एम् जी हशमत साहब ने।
अरे तू क्या जाने तुझमें क्या है
तेरी मोहब्बत मेरा खुदा है
हुस्न क़यामत चाल क़यामत
गाल पे बिखरे बाल क़यामत
चलती फिरती आफत हो तुम
आफत पे दिल मेरा फ़िदा है
तू है ज़मीन पर सूनी है जन्नत
कौन करे अब उससे मोहब्बत
खुदा परेशां तुझको बना के
हुस्न खुदाई तुझमें बसा के कर
फिर न बनेगी तुझसी हसीना
सारा हुस्न तो तुझमें भरा है
तेरी शक्ल जब उसने बनाई
प्यार की खुशबू हवा में आई
झूम उठे सब नशे में बादल
नशे में मैं भी तो हो गया पागल
झूमें नशे में चाँद और तारे
मेरी तरह तेरे प्यार के मारे
सूरज के दिल में आग है तेरी
इश्क में तेरे वो भी जला है
हाथ में तेरा हाथ रहे तो
दुनिया से टकरा सकता हूँ
नोच के सूरज चंद सितारे
इस धरती पे ला सकता हूँ
दूर न होना दिल को लगा के
रख दूंगा वरना दुनिया जला के
तेरे बिना मैं जी न सकूंगा
तेरी मोहब्बत मेरा खुदा है
अरे तू क्या जाने तुझमें क्या है
तेरी मोहब्बत मेरा खुदा है
तेरी मोहब्बत मेरा खुदा है
तेरी मोहब्बत मेरा खुदा है
तेरी मोहब्बत मेरा खुदा है
तेरी मोहब्बत मेरा खुदा है
.............................
Too kya jaane tujh mein kya hai-Haadsa 1983
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1983,
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Haadsa,
Kalyanji Anandji,
Kishore Kumar,
MG Hashmat,
Ranjeeta
पुरवा सुहानी आई रे –पूरब और पश्चिम १९७०
पुरुष के समर्पण के चरम के बारे में 'पूरब और पश्चिम' फिल्म के
पिछले गीत में चर्चा हुई थी। इस फिल्म में नारी का इंतज़ार भी है।
गीत में दिखाई देने वाली देसी बाला फिल्म के नायक से मन ही मन
प्यार करती है। फिल्म का नायक विलायती बाला से प्रेम करता है। इस
प्रेम त्रिकोण में चौथा कोण प्रस्तुत गीत में प्रकट होकर मुखर होता है
जो ढोल बजा रहा है-नायक नंबर दो यानि विनोद खन्ना । वो देसी
बाला से प्रेम करता है। गीत का आकर्षण नायिका नंबर एक के चुस्त
कपडे और नायिका नंबर दो का आकर्षक नृत्य है।
इस खालिस देसी धुन को तैयार किया है कल्याणजी आनंदजी ने और गीत
में कहानी कही है इन्दीवर ने।
गीत के बोल:
ढोली ढोल बजाना
ताल से ताल मिलाना
ढोली ढोला ढोली ढोला
ढोली ढोल बजाना
ता ता थैया तक तक थैया
ताल से ताल मिलाना
पुरवा सुहानी आई रे पुरवा
पुरवा सुहानी आई रे पुरवा
ऋतुओं की रानी आई रे पुरवा
मेरे रुके नहीं पांव
प्रीत पे जवानी छाई रे, पुरवा
पुरवा सुहानी आई रे पुरवा
मौसम का मुसाफिर खड़ा रस्ते में
ला ला ला ला ला ला ला ला ला
हो ओ मौसम का मुसाफिर खड़ा रस्ते में
उसके हाथों सब कुछ लुटा सस्ते में
छोटी सी उमरिया है
लंबी सी डगरिया रे
जीवन है परछाई रे, पुरवा
पुरवा सुहानी आई रे पुरवा
हो ढोली ढोल बजाना
हो ताल से ताल मिलाना
कर ले कर भी ले प्यार की पूजा
ना ना ना ना ना ना ना ना
हो, कर ले कर भी ले प्यार की पूजा
प्यार के रंग पे चढ़े न रंग दूजा
क्या ये कोई सपना है
मेरे लिए अपना है
बात मेरी बन आई रे पुरवा
पुरवा सुहानी आई रे पुरवा
हो मीरा सी दीवानी रे नाचे मस्तानी
मीरा सी दीवानी रे नाचे मस्तानी
होंठों पर हैं गम तो आँखों में पानी
घुँघरू दीवाने हुए
रिश्ते पुराने हुए
गीत में कहानी गाई रे पुरवा
पुरवा सुहानी आई रे पुरवा
पुरवा सुहानी आई रे पुरवा
ऋतुओं की रानी आई रे पुरवा
मेरे रुके नहीं पांव
प्रीत पे जवानी छाई रे, पुरवा
पुरवा सुहानी आई रे पुरवा
हो ढोली ढोल बजाना
हो ताल से ताल मिलाना
ढोली ढोल बजाना
ताल से ताल मिलाना
...................................
Purwa suhani aayi re-Purab aur paschim 1970
पिछले गीत में चर्चा हुई थी। इस फिल्म में नारी का इंतज़ार भी है।
गीत में दिखाई देने वाली देसी बाला फिल्म के नायक से मन ही मन
प्यार करती है। फिल्म का नायक विलायती बाला से प्रेम करता है। इस
प्रेम त्रिकोण में चौथा कोण प्रस्तुत गीत में प्रकट होकर मुखर होता है
जो ढोल बजा रहा है-नायक नंबर दो यानि विनोद खन्ना । वो देसी
बाला से प्रेम करता है। गीत का आकर्षण नायिका नंबर एक के चुस्त
कपडे और नायिका नंबर दो का आकर्षक नृत्य है।
इस खालिस देसी धुन को तैयार किया है कल्याणजी आनंदजी ने और गीत
में कहानी कही है इन्दीवर ने।
गीत के बोल:
ढोली ढोल बजाना
ताल से ताल मिलाना
ढोली ढोला ढोली ढोला
ढोली ढोल बजाना
ता ता थैया तक तक थैया
ताल से ताल मिलाना
पुरवा सुहानी आई रे पुरवा
पुरवा सुहानी आई रे पुरवा
ऋतुओं की रानी आई रे पुरवा
मेरे रुके नहीं पांव
प्रीत पे जवानी छाई रे, पुरवा
पुरवा सुहानी आई रे पुरवा
मौसम का मुसाफिर खड़ा रस्ते में
ला ला ला ला ला ला ला ला ला
हो ओ मौसम का मुसाफिर खड़ा रस्ते में
उसके हाथों सब कुछ लुटा सस्ते में
छोटी सी उमरिया है
लंबी सी डगरिया रे
जीवन है परछाई रे, पुरवा
पुरवा सुहानी आई रे पुरवा
हो ढोली ढोल बजाना
हो ताल से ताल मिलाना
कर ले कर भी ले प्यार की पूजा
ना ना ना ना ना ना ना ना
हो, कर ले कर भी ले प्यार की पूजा
प्यार के रंग पे चढ़े न रंग दूजा
क्या ये कोई सपना है
मेरे लिए अपना है
बात मेरी बन आई रे पुरवा
पुरवा सुहानी आई रे पुरवा
हो मीरा सी दीवानी रे नाचे मस्तानी
मीरा सी दीवानी रे नाचे मस्तानी
होंठों पर हैं गम तो आँखों में पानी
घुँघरू दीवाने हुए
रिश्ते पुराने हुए
गीत में कहानी गाई रे पुरवा
पुरवा सुहानी आई रे पुरवा
पुरवा सुहानी आई रे पुरवा
ऋतुओं की रानी आई रे पुरवा
मेरे रुके नहीं पांव
प्रीत पे जवानी छाई रे, पुरवा
पुरवा सुहानी आई रे पुरवा
हो ढोली ढोल बजाना
हो ताल से ताल मिलाना
ढोली ढोल बजाना
ताल से ताल मिलाना
...................................
Purwa suhani aayi re-Purab aur paschim 1970
Friday, 29 July 2011
कोई जब तुम्हारा ह्रदय तोड़ दे –पूरब और पश्चिम १९७०
पुरुष वर्ग के समर्पण की इन्तेहा, कुछ अतिशयोक्ति सा लगता
ये गीत अपवाद स्वरुप समाज में आपको कहानी रूप में कहीं न
कहीं ज़रूर मिल जायेगा. ऐसा नहीं है कि केवल नारी ही इंतज़ार
करती है, कहीं पुरुष भी प्रतीक्षा कर लिया करता है. फिल्म में
नायिका का चरित्र विलायत में रहने वाली पाश्चात्य सभ्यता में पली
बढ़ी युवती का है. नायक देसी परम्पराओं को निभाने वाला एक
“सादा जीवन उच्च विचार” के साथ देशप्रेम की भावना से ओत
प्रोत युवक है. अब इतने विवरण से आपको नायक को पहचानने
में दिक्कत नहीं होना चाहिए.
जैसा कि हिंदी फिल्मों की कहानी की अनिवार्य मांग है-नायक
को नायिका से प्रेम हो जाता है. अब नायिका को अपने रंग ढंग
में ढालने के लिए और उसे वापस देसी संस्कृति की ओर लाने
के प्रयास में नायक ये गीत गाता है.
गीत इन्दीवर का लिखा हुआ है और निस्संदेह इसे उनके द्वारा
रहित गीतों में से सर्वाधिक लोकप्रिय का दर्ज़ा भी प्राप्त है. गीत
कि गुणवत्ता पर प्रश्न चिन्ह नहीं लगाया जा सकता. नपा तुला सा
है ये और उतनी ही नपी तुली धुन बनायीं है कल्याणजी आनंदजी
ने जिसे स्वर मुकेश ने दिया है.
गीत के बोल:
कोई जब तुम्हारा ह्रदय तोड़ दे –पूरब और पश्चिम १९७०
तडपता हुआ जब कोई छोड़ दे
तब तुम मेरे पास आना प्रिये
मेरा दर खुला है खुला ही रहेगा तुम्हारे लिए
अभी तुमको मेरी ज़रूरत नहीं
बहुत चाहने वाले मिल जायेंगे
अभी रूप का एक सागर हो तुम
कमल जितने चाहोगी खिल जायेंगे
दर्पण तुम्हें जब डराने लगे
जवानी भी दामन छुड़ाने लगे
तब तुम मेरे पास आना प्रिये
मेरा सर झुका है झुका ही रहेगा तुम्हारे लिए
कोई जब तुम्हारा ह्रदय तोड़ दे
कोई शर्त होती नहीं प्यार में
मगर प्यार शर्तों पे तुमने किया
नज़र में सितारे जो चमके ज़रा
बुझाने लगीं आरती का दिया
जब अपनी नज़र में ही गिरने लगो
अंधेरों में अपने ही घिरने लगो
तब तुम मेरे पास आना प्रिये
ये दीपक जला है जला ही रहेगा तुम्हारे लिए
कोई जब तुम्हारा ह्रदय तोड़ दे
तडपता हुआ जब कोई छोड़ दे
तब तुम मेरे पास आना प्रिये
मेरा दर खुला है खुला ही रहेगा तुम्हारे लिए
...................................
Koi jab tumhara hriday tod de-Purab aur paschim 1970
ये गीत अपवाद स्वरुप समाज में आपको कहानी रूप में कहीं न
कहीं ज़रूर मिल जायेगा. ऐसा नहीं है कि केवल नारी ही इंतज़ार
करती है, कहीं पुरुष भी प्रतीक्षा कर लिया करता है. फिल्म में
नायिका का चरित्र विलायत में रहने वाली पाश्चात्य सभ्यता में पली
बढ़ी युवती का है. नायक देसी परम्पराओं को निभाने वाला एक
“सादा जीवन उच्च विचार” के साथ देशप्रेम की भावना से ओत
प्रोत युवक है. अब इतने विवरण से आपको नायक को पहचानने
में दिक्कत नहीं होना चाहिए.
जैसा कि हिंदी फिल्मों की कहानी की अनिवार्य मांग है-नायक
को नायिका से प्रेम हो जाता है. अब नायिका को अपने रंग ढंग
में ढालने के लिए और उसे वापस देसी संस्कृति की ओर लाने
के प्रयास में नायक ये गीत गाता है.
गीत इन्दीवर का लिखा हुआ है और निस्संदेह इसे उनके द्वारा
रहित गीतों में से सर्वाधिक लोकप्रिय का दर्ज़ा भी प्राप्त है. गीत
कि गुणवत्ता पर प्रश्न चिन्ह नहीं लगाया जा सकता. नपा तुला सा
है ये और उतनी ही नपी तुली धुन बनायीं है कल्याणजी आनंदजी
ने जिसे स्वर मुकेश ने दिया है.
गीत के बोल:
कोई जब तुम्हारा ह्रदय तोड़ दे –पूरब और पश्चिम १९७०
तडपता हुआ जब कोई छोड़ दे
तब तुम मेरे पास आना प्रिये
मेरा दर खुला है खुला ही रहेगा तुम्हारे लिए
अभी तुमको मेरी ज़रूरत नहीं
बहुत चाहने वाले मिल जायेंगे
अभी रूप का एक सागर हो तुम
कमल जितने चाहोगी खिल जायेंगे
दर्पण तुम्हें जब डराने लगे
जवानी भी दामन छुड़ाने लगे
तब तुम मेरे पास आना प्रिये
मेरा सर झुका है झुका ही रहेगा तुम्हारे लिए
कोई जब तुम्हारा ह्रदय तोड़ दे
कोई शर्त होती नहीं प्यार में
मगर प्यार शर्तों पे तुमने किया
नज़र में सितारे जो चमके ज़रा
बुझाने लगीं आरती का दिया
जब अपनी नज़र में ही गिरने लगो
अंधेरों में अपने ही घिरने लगो
तब तुम मेरे पास आना प्रिये
ये दीपक जला है जला ही रहेगा तुम्हारे लिए
कोई जब तुम्हारा ह्रदय तोड़ दे
तडपता हुआ जब कोई छोड़ दे
तब तुम मेरे पास आना प्रिये
मेरा दर खुला है खुला ही रहेगा तुम्हारे लिए
...................................
Koi jab tumhara hriday tod de-Purab aur paschim 1970
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Thursday, 21 July 2011
नशा ये कैसा..उडीबाबा उडीबाबा -विधाता १९८२
भोंपू और ग्रामोफोन से याद आया कि पड़ोस के मोहल्ले में एक
चच्चा रहा करते थे गानों के शौक़ीन। उनके पास एक बार हमने
फरमाइश की-चच्चा वो गाना तो सुनवा दो- का का कि की कु
कू कं कः उड़े बाबा, बड़े बाबा, छोटे बाबा। चच्चा ने गाने की
फजीहत पर पहले तो नाक भोंह सिकोड़ी फिर बोले ऐसे बेहूदा
गाने सुनते हो ! कुछ सहगल वेह्गल सुना करो। चच्चा शायद
वो फिल्म देख आये थे, वे फिल्मों के भी बड़े शौक़ीन थे और
फर्स्ट डे फर्स्ट शो के तकरीबन २०० से ज्यादा रिकॉर्ड उनके नाम
पर थे। टिकट लाइन की धींगामुश्ती में उनके कपडे भी कभी कभार
फट जाया करते। उनकी कलाबाजियों से ही हम अंदाज़ा लगाते कि
फिल्म देखना भी एक टेडी खीर हो सकता है।
८० के दशक में सुपरमैन के कॉमिक्स की एंट्री हुई अपने देश में।
उसने छोटे बड़े सभी को आकर्षित किया। उन छोटों और बड़ों में
बॉलीवुड के निर्देशक निर्माता भी शामिल हैं। उसका एक प्रभाव आप
इस गीत में देखेंगे।
संजू को फिल्म इंडस्ट्री में संजू बाबा बोला जाता है, उस हिसाब से
ये गीत बिलकुल सही फिट होता है सिचुऐशन पर ।
गीत के बोल:
आ आ
आ आ ई ई ऊ ऊ ऐ ऐ
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
आ आ
आ आ ई ई ऊ ऊ ऐ ऐ
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
आ आ
आ आ ई ई ऊ ऊ ऐ ऐ
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
बाबा उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
बाबा उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
नशा ये कैसा उडी बाबा
मुझे हो गया उडी बाबा
नशा ये कैसा मुझे हो गया
दिल मेरा खो गया
आ आ ई ई ऊ ऊ ऐ ऐ
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
आ आ ई ई ऊ ऊ ऐ ऐ
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
बाबा उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
बाबा उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
हे,
हा आ आ आ, हा आ आ आ
हा आ आ आ, हा आ आ आ
बैंग बैंग, आ
बैंग बैंग, आ
बैंग बैंग, आ
बैंग
ओ मैं आ गयी जाने किधर
मुझको नहीं इसकी खबर
दीवानी लड़की ये लगती ऐसे दीवानों की महफ़िल है
यहाँ पे आना आसान हैं पर यहाँ से जाना मुश्किल है
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
बाबा उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
नशा ये कैसा उडी बाबा
मुझे हो गया उडी बाबा
नशा ये कैसा मुझे हो गया
दिल मेरा खो गया
आ आ ई ई ऊ ऊ ऐ ऐ
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
बाबा उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
बाबा उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
हा आ आ आ, हा आ आ आ
हा आ आ आ, हा आ आ आ
बैंग बैंग, आ
बैंग बैंग, आ
बैंग बैंग, आ
बैंग
ओ कितनी हसीं ये रात है
क्या ये मेरी बारात है
हा हा, थोड़ी देर में तेरा दूल्हा राजा यहाँ पे आएगा
अपनी रानी को डोली में बिठा के तुझे ले जायेगा
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
बाबा उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
नशा ये कैसा उडी बाबा
मुझे हो गया उडी बाबा
नशा ये कैसा मुझे हो गया
दिल मेरा खो गया
आ आ ई ई ऊ ऊ ऐ ऐ
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
आ आ ई ई ऊ ऊ ऐ ऐ
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
बाबा उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
बाबा उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
आ आ ई ई ऊ ऊ ऐ ऐ
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
आ आ ई ई ऊ ऊ ऐ ऐ
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
...............................
Nasha ye kaisa...udibaba-Vidhata 1982
चच्चा रहा करते थे गानों के शौक़ीन। उनके पास एक बार हमने
फरमाइश की-चच्चा वो गाना तो सुनवा दो- का का कि की कु
कू कं कः उड़े बाबा, बड़े बाबा, छोटे बाबा। चच्चा ने गाने की
फजीहत पर पहले तो नाक भोंह सिकोड़ी फिर बोले ऐसे बेहूदा
गाने सुनते हो ! कुछ सहगल वेह्गल सुना करो। चच्चा शायद
वो फिल्म देख आये थे, वे फिल्मों के भी बड़े शौक़ीन थे और
फर्स्ट डे फर्स्ट शो के तकरीबन २०० से ज्यादा रिकॉर्ड उनके नाम
पर थे। टिकट लाइन की धींगामुश्ती में उनके कपडे भी कभी कभार
फट जाया करते। उनकी कलाबाजियों से ही हम अंदाज़ा लगाते कि
फिल्म देखना भी एक टेडी खीर हो सकता है।
८० के दशक में सुपरमैन के कॉमिक्स की एंट्री हुई अपने देश में।
उसने छोटे बड़े सभी को आकर्षित किया। उन छोटों और बड़ों में
बॉलीवुड के निर्देशक निर्माता भी शामिल हैं। उसका एक प्रभाव आप
इस गीत में देखेंगे।
संजू को फिल्म इंडस्ट्री में संजू बाबा बोला जाता है, उस हिसाब से
ये गीत बिलकुल सही फिट होता है सिचुऐशन पर ।
गीत के बोल:
आ आ
आ आ ई ई ऊ ऊ ऐ ऐ
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
आ आ
आ आ ई ई ऊ ऊ ऐ ऐ
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
आ आ
आ आ ई ई ऊ ऊ ऐ ऐ
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
बाबा उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
बाबा उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
नशा ये कैसा उडी बाबा
मुझे हो गया उडी बाबा
नशा ये कैसा मुझे हो गया
दिल मेरा खो गया
आ आ ई ई ऊ ऊ ऐ ऐ
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
आ आ ई ई ऊ ऊ ऐ ऐ
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
बाबा उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
बाबा उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
हे,
हा आ आ आ, हा आ आ आ
हा आ आ आ, हा आ आ आ
बैंग बैंग, आ
बैंग बैंग, आ
बैंग बैंग, आ
बैंग
ओ मैं आ गयी जाने किधर
मुझको नहीं इसकी खबर
दीवानी लड़की ये लगती ऐसे दीवानों की महफ़िल है
यहाँ पे आना आसान हैं पर यहाँ से जाना मुश्किल है
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
बाबा उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
नशा ये कैसा उडी बाबा
मुझे हो गया उडी बाबा
नशा ये कैसा मुझे हो गया
दिल मेरा खो गया
आ आ ई ई ऊ ऊ ऐ ऐ
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
बाबा उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
बाबा उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
हा आ आ आ, हा आ आ आ
हा आ आ आ, हा आ आ आ
बैंग बैंग, आ
बैंग बैंग, आ
बैंग बैंग, आ
बैंग
ओ कितनी हसीं ये रात है
क्या ये मेरी बारात है
हा हा, थोड़ी देर में तेरा दूल्हा राजा यहाँ पे आएगा
अपनी रानी को डोली में बिठा के तुझे ले जायेगा
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
बाबा उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
नशा ये कैसा उडी बाबा
मुझे हो गया उडी बाबा
नशा ये कैसा मुझे हो गया
दिल मेरा खो गया
आ आ ई ई ऊ ऊ ऐ ऐ
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
आ आ ई ई ऊ ऊ ऐ ऐ
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
बाबा उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
बाबा उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
आ आ ई ई ऊ ऊ ऐ ऐ
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
आ आ ई ई ऊ ऊ ऐ ऐ
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
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Nasha ye kaisa...udibaba-Vidhata 1982
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Saturday, 16 July 2011
हुस्न चला कुछ ऐसी चाल-ब्लफ़ मास्टर १९६३
कभी कभी आप किसी गीत को यकायक गुनगुनाना शुरू कर देते हैं, आज
आपको ऐसा ही गीत सुनवा रहे हैं जो एकदम से दिमाग में आया है अभी.
मनमोहन देसाई ने अपने करियर की शुरुआत से ही शायद बड़े सितारों के
साथ काम करना शुरू कर दिया था. सन १९६३ की फिल्म ब्लफ़ मास्टर के
निर्देशक वही हैं. इसमें शम्मी कपूर और सायरा बानो प्रमुख कलाकार हैं.
हिंदी फिल्म जगत में अक्सर ही निर्देशक से ज्यादा निर्माता की चली है और
कभी कभी इसी वजह से भी फिल्म पिट जाया करती. निर्माता की पसंद कुछ
होती, निर्देशक की कुछ और, इस सूरत में एक राय नहीं बन पाने से निर्देशक
को काम करने में आनंद नहीं आता. जहाँ निर्देशक की पसंद का ख्याल रखा
जाता वो फ़िल्में थोड़ी बेहतर होतीं. ये उन निर्देशकों के बारे में बात की जा रही
है जो निर्देशन की कला में निपुण हैं.
ब्लफ़ मास्टर में शायद स्टार कास्ट बढ़िया है समय के हिसाब से. इसमें उस
समय के नामचीन खलनायक प्राण भी मौजूद हैं.
गीत राजेंद्र कृष्ण का लिखा हुआ है जिसे संगीत में बांधने का काम किया है
कल्याणजी आनंदजी ने. इसे गा रहे हैं लता और रफ़ी.
नायक नायिका पिकनिक पर हैं और उनके साथ के बर्तन भांडे से लगता है
पर्याप्त खाद्य सामग्री है उसमें और जो जनाना सवारियां बड़ी गाडी से उतरी हैं
वे भी खा पी कर तृप्त हो सकती हैं.
गीत के बोल:
अरे हुस्न चला कुछ ऐसी चाल
दीवाने का पूछ न हाल
हुस्न चला कुछ ऐसी चाल
दीवाने का पूछ न हाल
प्यार की क़सम कमाल हो गया, हाय
प्यार की क़सम कमाल हो गया
अजी दिल को अब तक है इंकार
आँखें कर बैठीं इकरार
प्यार की क़सम कमाल हो गया, हाय
प्यार की क़सम कमाल हो गया
दिल को अब तक है इंकार
आँखें कर बैठीं इकरार
प्यार की क़सम कमाल हो गया
हो ओ ओ ओ, कभी पास आएँ कभी दूर जाएँ
के हैं दिल चुराने की लाखों अदाएँ
नहीं तीर निकला अभी तक कमान से
नहीं तीर निकला अभी तक कमान से
कोई उनसे कह दे कि दिल को बचाएँ
कि दिल को बचाएँ
हाय, हुस्न चला कुछ ऐसी चाल
दीवाने का पूछ ना हाल
प्यार की क़सम कमाल हो गया, हाय
प्यार की क़सम कमाल हो गया
दिल को अब तक है इंकार
आँखें कर बैठीं इकरार
प्यार की क़सम कमाल हो गया, हाय
प्यार की क़सम कमाल हो गया
कहाँ तक रहोगे ये दामन बचा के
के मुश्किल है बचना निशाने पे आ के
हमारा है क्या हम तो मिट के रहेंगे
हमारा है क्या हम तो मिट के रहेंगे
जहाँ तुमने देखा ज़रा मुस्करा के
ज़रा मुस्करा के
दिल को अब तक है इंकार
आँखें कर बैठीं इकरार
प्यार की क़सम कमाल हो गया, हाय
प्यार की क़सम कमाल हो गया
अरे हुस्न चला कुछ ऐसी चाल
दीवाने का पूछ ना हाल
प्यार की क़सम कमाल हो गया, हाय
प्यार की क़सम कमाल हो गया
हो ओ ओ ओ,ये दिन हैं तुम्हारे ज़माना तुम्हारा
निगाहें उधर हैं इधर है इशारा
ये पैग़ाम देते हैं ज़ुल्फ़ों के साये
ये पैग़ाम देते हैं ज़ुल्फ़ों के साये
चला आए जो है मोहब्बत का मारा
मोहब्बत का मारा
उफ़,हुस्न चला कुछ ऐसी चाल
दीवाने का पूछ ना हाल
प्यार की क़सम कमाल हो गया, हाय
प्यार की क़सम कमाल हो गया
दिल को अब तक है इंकार
आँखें कर बैठीं इकरार
प्यार की क़सम कमाल हो गया, हाय
प्यार की क़सम कमाल हो गया
.................................
Husn chala kuchh aisi chal-Bluff Master 1963
आपको ऐसा ही गीत सुनवा रहे हैं जो एकदम से दिमाग में आया है अभी.
मनमोहन देसाई ने अपने करियर की शुरुआत से ही शायद बड़े सितारों के
साथ काम करना शुरू कर दिया था. सन १९६३ की फिल्म ब्लफ़ मास्टर के
निर्देशक वही हैं. इसमें शम्मी कपूर और सायरा बानो प्रमुख कलाकार हैं.
हिंदी फिल्म जगत में अक्सर ही निर्देशक से ज्यादा निर्माता की चली है और
कभी कभी इसी वजह से भी फिल्म पिट जाया करती. निर्माता की पसंद कुछ
होती, निर्देशक की कुछ और, इस सूरत में एक राय नहीं बन पाने से निर्देशक
को काम करने में आनंद नहीं आता. जहाँ निर्देशक की पसंद का ख्याल रखा
जाता वो फ़िल्में थोड़ी बेहतर होतीं. ये उन निर्देशकों के बारे में बात की जा रही
है जो निर्देशन की कला में निपुण हैं.
ब्लफ़ मास्टर में शायद स्टार कास्ट बढ़िया है समय के हिसाब से. इसमें उस
समय के नामचीन खलनायक प्राण भी मौजूद हैं.
गीत राजेंद्र कृष्ण का लिखा हुआ है जिसे संगीत में बांधने का काम किया है
कल्याणजी आनंदजी ने. इसे गा रहे हैं लता और रफ़ी.
नायक नायिका पिकनिक पर हैं और उनके साथ के बर्तन भांडे से लगता है
पर्याप्त खाद्य सामग्री है उसमें और जो जनाना सवारियां बड़ी गाडी से उतरी हैं
वे भी खा पी कर तृप्त हो सकती हैं.
गीत के बोल:
अरे हुस्न चला कुछ ऐसी चाल
दीवाने का पूछ न हाल
हुस्न चला कुछ ऐसी चाल
दीवाने का पूछ न हाल
प्यार की क़सम कमाल हो गया, हाय
प्यार की क़सम कमाल हो गया
अजी दिल को अब तक है इंकार
आँखें कर बैठीं इकरार
प्यार की क़सम कमाल हो गया, हाय
प्यार की क़सम कमाल हो गया
दिल को अब तक है इंकार
आँखें कर बैठीं इकरार
प्यार की क़सम कमाल हो गया
हो ओ ओ ओ, कभी पास आएँ कभी दूर जाएँ
के हैं दिल चुराने की लाखों अदाएँ
नहीं तीर निकला अभी तक कमान से
नहीं तीर निकला अभी तक कमान से
कोई उनसे कह दे कि दिल को बचाएँ
कि दिल को बचाएँ
हाय, हुस्न चला कुछ ऐसी चाल
दीवाने का पूछ ना हाल
प्यार की क़सम कमाल हो गया, हाय
प्यार की क़सम कमाल हो गया
दिल को अब तक है इंकार
आँखें कर बैठीं इकरार
प्यार की क़सम कमाल हो गया, हाय
प्यार की क़सम कमाल हो गया
कहाँ तक रहोगे ये दामन बचा के
के मुश्किल है बचना निशाने पे आ के
हमारा है क्या हम तो मिट के रहेंगे
हमारा है क्या हम तो मिट के रहेंगे
जहाँ तुमने देखा ज़रा मुस्करा के
ज़रा मुस्करा के
दिल को अब तक है इंकार
आँखें कर बैठीं इकरार
प्यार की क़सम कमाल हो गया, हाय
प्यार की क़सम कमाल हो गया
अरे हुस्न चला कुछ ऐसी चाल
दीवाने का पूछ ना हाल
प्यार की क़सम कमाल हो गया, हाय
प्यार की क़सम कमाल हो गया
हो ओ ओ ओ,ये दिन हैं तुम्हारे ज़माना तुम्हारा
निगाहें उधर हैं इधर है इशारा
ये पैग़ाम देते हैं ज़ुल्फ़ों के साये
ये पैग़ाम देते हैं ज़ुल्फ़ों के साये
चला आए जो है मोहब्बत का मारा
मोहब्बत का मारा
उफ़,हुस्न चला कुछ ऐसी चाल
दीवाने का पूछ ना हाल
प्यार की क़सम कमाल हो गया, हाय
प्यार की क़सम कमाल हो गया
दिल को अब तक है इंकार
आँखें कर बैठीं इकरार
प्यार की क़सम कमाल हो गया, हाय
प्यार की क़सम कमाल हो गया
.................................
Husn chala kuchh aisi chal-Bluff Master 1963
Saturday, 2 July 2011
दर्पण को देखा-उपासना १९७१
थोड़ा साहित्यिक हुआ जाये फिर से ? कुछ संगीत प्रेमियों का
दोमुंहापन कभी कभी खटकता है मुझे। अगर 'आईना' बोलें तो
साहित्यिक नहीं होता मगर जब 'दर्पण' बोल दिया तो साहित्यिक
हो गया। दरअसल हम खिचड़ी भाषा युग में जी रहे हैं जिसकी
हिंगलिश ने भी कस के वाट लगा दी है जो धीरे धीरे कई किलोवाट
तक हो जाएगी।
गीत में, नायिका असमंजस में है-क्यूँ है-थोड़ा प्रकाश डालते हैं-
फिल्म उपासना में मुमताज़ संजय खान से प्रेम करती हैं।
संजय खान को मुमताज़ मजबूरीवश छोडती है जिसके लिए उस
दुष्ट महकमे के लोग ज़िम्मेदार होते हैं जिनके लिए वो अनजाने
में काम करती है। एक गुंडे की चम्पी करने के बाद जब वो भाग
रही होती है तभी फिरोज खान कि कार से टकरा जाती है। फिरोज
खान उसे घर ले आता है और उसकी देखभाल करता है । जब वो
ठीक हो जाती है तब उसे गीत सुनाता है। नायिका के ठीक होने की
प्रक्रिया में नायक उससे प्रेम करने लगता है। शराफत के ज़माने
का गीत है इसलिए नायक घुमा फिर के उससे अपने प्रेम का इज़हार
कर रहा है और अपनी बदनसीबी की गिला रो रहा है।
या तो नायिका किसी नए सम्बन्ध में नहीं उलझना चाहती या फिर
उसकी मानसिक स्तिथि नायक की भावनाओं को समझने लायक
नहीं हुई है। ज्यादा जाने के लिए देखें फिल्म उपासना।
मुकेश के सबसे लोकप्रिय गीतों में इसकी गिनती होती है । इसे लिखा
है इन्दीवर ने और इसकी धुन बनाई है कल्याणजी आनंदजी ने। गीत
में सरल हिंदी बोलों का समावेश है और ये उतना साहित्यिक नहीं जितना
की पब्लिक इसको बतलाती है। इसके अलावा इसमें उर्दू शब्द भी
बहुतेरे हैं।
गीत के बोल:
दर्पण को देखा
तूने जब जब किया श्रृंगार
दर्पण को देखा
तूने जब जब किया श्रृंगार
फूलों को देखा
तूने जब जब आई बाहर
एक बदनसीब हूँ मैं
एक बदनसीब हूँ मैं
एक बदनसीब हूँ मैं,
मुझे नहीं देखा एक बार
दर्पण को देखा
तूने जब जब किया श्रृंगार
सूरज की पहली किरणों को
देखा तूने अलसाते हुए
सूरज की पहली किरणों को
देखा तूने अलसाते हुए
रातों में तारों को देखा
सपनो में खो जाते हुए
यूं किसी ना किसी बहाने
यूं किसी ना किसी बहाने
तूने देखा सब संसार
तूने देखा सब संसार
दर्पण को देखा
तूने जब जब किया श्रृंगार
काजल की किस्मत क्या कहिये
नैनों में तुमने बसाया है
काजल की किस्मत क्या कहिये
नैनों में तुमने बसाया है
आँचल की किस्मत क्या कहिये
तुमने अंग लगाया है
हसरत ही रही मेरे दिल में
हसरत ही रही मेरे दिल में
बनूँ तेरे गले का हार
बनूँ तेरे गले का हार
दर्पण को देखा
तूने जब जब किया श्रृंगार
फूलों को देखा
तूने जब जब आई बाहर
एक बदनसीब हूँ मैं
एक बदनसीब हूँ मैं
एक बदनसीब हूँ मैं,
मुझे नहीं देखा एक बार
दर्पण को देखा
तूने जब जब किया श्रृंगार
...............................
Darpan ko dekha-Upasana 1969
दोमुंहापन कभी कभी खटकता है मुझे। अगर 'आईना' बोलें तो
साहित्यिक नहीं होता मगर जब 'दर्पण' बोल दिया तो साहित्यिक
हो गया। दरअसल हम खिचड़ी भाषा युग में जी रहे हैं जिसकी
हिंगलिश ने भी कस के वाट लगा दी है जो धीरे धीरे कई किलोवाट
तक हो जाएगी।
गीत में, नायिका असमंजस में है-क्यूँ है-थोड़ा प्रकाश डालते हैं-
फिल्म उपासना में मुमताज़ संजय खान से प्रेम करती हैं।
संजय खान को मुमताज़ मजबूरीवश छोडती है जिसके लिए उस
दुष्ट महकमे के लोग ज़िम्मेदार होते हैं जिनके लिए वो अनजाने
में काम करती है। एक गुंडे की चम्पी करने के बाद जब वो भाग
रही होती है तभी फिरोज खान कि कार से टकरा जाती है। फिरोज
खान उसे घर ले आता है और उसकी देखभाल करता है । जब वो
ठीक हो जाती है तब उसे गीत सुनाता है। नायिका के ठीक होने की
प्रक्रिया में नायक उससे प्रेम करने लगता है। शराफत के ज़माने
का गीत है इसलिए नायक घुमा फिर के उससे अपने प्रेम का इज़हार
कर रहा है और अपनी बदनसीबी की गिला रो रहा है।
या तो नायिका किसी नए सम्बन्ध में नहीं उलझना चाहती या फिर
उसकी मानसिक स्तिथि नायक की भावनाओं को समझने लायक
नहीं हुई है। ज्यादा जाने के लिए देखें फिल्म उपासना।
मुकेश के सबसे लोकप्रिय गीतों में इसकी गिनती होती है । इसे लिखा
है इन्दीवर ने और इसकी धुन बनाई है कल्याणजी आनंदजी ने। गीत
में सरल हिंदी बोलों का समावेश है और ये उतना साहित्यिक नहीं जितना
की पब्लिक इसको बतलाती है। इसके अलावा इसमें उर्दू शब्द भी
बहुतेरे हैं।
गीत के बोल:
दर्पण को देखा
तूने जब जब किया श्रृंगार
दर्पण को देखा
तूने जब जब किया श्रृंगार
फूलों को देखा
तूने जब जब आई बाहर
एक बदनसीब हूँ मैं
एक बदनसीब हूँ मैं
एक बदनसीब हूँ मैं,
मुझे नहीं देखा एक बार
दर्पण को देखा
तूने जब जब किया श्रृंगार
सूरज की पहली किरणों को
देखा तूने अलसाते हुए
सूरज की पहली किरणों को
देखा तूने अलसाते हुए
रातों में तारों को देखा
सपनो में खो जाते हुए
यूं किसी ना किसी बहाने
यूं किसी ना किसी बहाने
तूने देखा सब संसार
तूने देखा सब संसार
दर्पण को देखा
तूने जब जब किया श्रृंगार
काजल की किस्मत क्या कहिये
नैनों में तुमने बसाया है
काजल की किस्मत क्या कहिये
नैनों में तुमने बसाया है
आँचल की किस्मत क्या कहिये
तुमने अंग लगाया है
हसरत ही रही मेरे दिल में
हसरत ही रही मेरे दिल में
बनूँ तेरे गले का हार
बनूँ तेरे गले का हार
दर्पण को देखा
तूने जब जब किया श्रृंगार
फूलों को देखा
तूने जब जब आई बाहर
एक बदनसीब हूँ मैं
एक बदनसीब हूँ मैं
एक बदनसीब हूँ मैं,
मुझे नहीं देखा एक बार
दर्पण को देखा
तूने जब जब किया श्रृंगार
...............................
Darpan ko dekha-Upasana 1969
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Mukesh,
Mumtaz,
Upasana
Saturday, 25 June 2011
तेरे होंठों के दो फूल-पारस १९७१
पारस फिल्म से तीसरा गीत पेश है जो कि एक युगल गीत है
मुकेश और लता की आवाजों में। होंठों को फूलों का दर्ज़ा प्रदान
किया है कुछ कवियों ने और गीत रचईताओं ने। पंखुड़ियों से
तुलना सामान्य विशेषण है लेकिन फूल कहना उसके दर्जे को
बढ़ाना है। वही हाल है जब नायिका आँखों के दो तारों की बात
करती है। गीतकार ने दोनों के लिए एक स्टार से विशेषण का
इस्तेमाल किया हैं। संतुलन ऐसे ही बनाया जाता है ।
प्यार अँधा होता है और बहरा होता है ये साबित करने के कुछ
प्रतीकों की ज़रुरत पढ़ती है कभी कभी। प्यार में हरी घास भी
पालक पनीर नज़र आने लग जाती है। ये वो खुश-खुमारी है
जिसके आगे अच्छे अच्छे पानी भर लेते हैं। प्यार में लॉजिक
इत्यादि नहीं चला करते हैं। इस मामले में अक्सर भैंस का
आकार अकल से बड़ा ही मालूम पढता है।
गीत कि धुन इमानदारी से कहूं तो- आकर्षक है और ये आनंदित
करने वाला गीत है। गीत का फिल्मांकन भी उम्दा किस्म का है।
इसके अलावा इस गीत में सभी elements मौजूद हैं फ़िल्मी
गीत के, नायक नायिका ने स्नान भी कर लिया है गीत में।
कल्याणजी आनंदजी भाई ने देसी ख़ुशबू वाले संगीत के सहारे
अपनी गाडी इतनी दूर तक दौडाई कि अति शास्त्रीयता की खुमारी
से ग्रसित संगीतकार भी दांतों तले ऊँगली दबाते नज़र आये।
गीत के बोल:
तेरे होंठों के दो फूल प्यारे-प्यारे
तेरे होंठों के दो फूल प्यारे-प्यारे
मेरे प्यार की बहारों के नज़ारे
अब मुझे चमन से क्या लेना, क्या लेना
तेरी आँखों के दो तारे प्यारे-प्यारे
मेरी रातों के चमकते सितारे
अब मुझे गगन से क्या लेना, क्या लेना
तेरे होंठों के दो फूल प्यारे-प्यारे
तेरी काया कंचन-कंचन किरणों का है जिसमें बसेरा
तेरी साँसें महकी-महकी तेरी ज़ुल्फ़ों में ख़ुशबू का डेरा
तेरा महके अंग-अंग जैसे सोने में सुगंध
मुझे चंदन-वन से क्या लेना, क्या लेना
तेरी आँखों के दो तारे प्यारे-प्यारे
मेरी रातों के चमकते सितारे
मैने देखा जबसे तुझको मेरे सपने हुए सिंदूरी
तुझे पा के मेरे जीवन-धन हर कमी हुई मेरी पूरी
पिया एक तेरा प्यार मेरे सोलह सिंगार
मुझे अब दर्पण से क्या लेना, क्या लेना
तेरे होंठों के दो फूल प्यारे-प्यारे
मेरे प्यार की बहारों के नज़ारे
तेरा मुखड़ा दमके-चमके जैसे सागर पे चमके सवेरा
तेरी बाँहें प्यार के झूले तेरी बाँहों में झूले मन मेरा
तेरी मीठी हर बात
तेरी मीठी हर बात
रस की है बरसात
हमें अब सावन से क्या लेना, क्या लेना
तेरे होंठों के दो फूल प्यारे-प्यारे
तेरी आँखों के दो तारे प्यारे-प्यारे
अब मुझे चमन से क्या लेना, क्या लेना
अब मुझे गगन से क्या लेना, क्या लेना
हमें क्या लेना, क्या लेना
हमें क्या लेना, क्या लेना
.................................
Tere honthon ke do phool-Paaras 1971
मुकेश और लता की आवाजों में। होंठों को फूलों का दर्ज़ा प्रदान
किया है कुछ कवियों ने और गीत रचईताओं ने। पंखुड़ियों से
तुलना सामान्य विशेषण है लेकिन फूल कहना उसके दर्जे को
बढ़ाना है। वही हाल है जब नायिका आँखों के दो तारों की बात
करती है। गीतकार ने दोनों के लिए एक स्टार से विशेषण का
इस्तेमाल किया हैं। संतुलन ऐसे ही बनाया जाता है ।
प्यार अँधा होता है और बहरा होता है ये साबित करने के कुछ
प्रतीकों की ज़रुरत पढ़ती है कभी कभी। प्यार में हरी घास भी
पालक पनीर नज़र आने लग जाती है। ये वो खुश-खुमारी है
जिसके आगे अच्छे अच्छे पानी भर लेते हैं। प्यार में लॉजिक
इत्यादि नहीं चला करते हैं। इस मामले में अक्सर भैंस का
आकार अकल से बड़ा ही मालूम पढता है।
गीत कि धुन इमानदारी से कहूं तो- आकर्षक है और ये आनंदित
करने वाला गीत है। गीत का फिल्मांकन भी उम्दा किस्म का है।
इसके अलावा इस गीत में सभी elements मौजूद हैं फ़िल्मी
गीत के, नायक नायिका ने स्नान भी कर लिया है गीत में।
कल्याणजी आनंदजी भाई ने देसी ख़ुशबू वाले संगीत के सहारे
अपनी गाडी इतनी दूर तक दौडाई कि अति शास्त्रीयता की खुमारी
से ग्रसित संगीतकार भी दांतों तले ऊँगली दबाते नज़र आये।
गीत के बोल:
तेरे होंठों के दो फूल प्यारे-प्यारे
तेरे होंठों के दो फूल प्यारे-प्यारे
मेरे प्यार की बहारों के नज़ारे
अब मुझे चमन से क्या लेना, क्या लेना
तेरी आँखों के दो तारे प्यारे-प्यारे
मेरी रातों के चमकते सितारे
अब मुझे गगन से क्या लेना, क्या लेना
तेरे होंठों के दो फूल प्यारे-प्यारे
तेरी काया कंचन-कंचन किरणों का है जिसमें बसेरा
तेरी साँसें महकी-महकी तेरी ज़ुल्फ़ों में ख़ुशबू का डेरा
तेरा महके अंग-अंग जैसे सोने में सुगंध
मुझे चंदन-वन से क्या लेना, क्या लेना
तेरी आँखों के दो तारे प्यारे-प्यारे
मेरी रातों के चमकते सितारे
मैने देखा जबसे तुझको मेरे सपने हुए सिंदूरी
तुझे पा के मेरे जीवन-धन हर कमी हुई मेरी पूरी
पिया एक तेरा प्यार मेरे सोलह सिंगार
मुझे अब दर्पण से क्या लेना, क्या लेना
तेरे होंठों के दो फूल प्यारे-प्यारे
मेरे प्यार की बहारों के नज़ारे
तेरा मुखड़ा दमके-चमके जैसे सागर पे चमके सवेरा
तेरी बाँहें प्यार के झूले तेरी बाँहों में झूले मन मेरा
तेरी मीठी हर बात
तेरी मीठी हर बात
रस की है बरसात
हमें अब सावन से क्या लेना, क्या लेना
तेरे होंठों के दो फूल प्यारे-प्यारे
तेरी आँखों के दो तारे प्यारे-प्यारे
अब मुझे चमन से क्या लेना, क्या लेना
अब मुझे गगन से क्या लेना, क्या लेना
हमें क्या लेना, क्या लेना
हमें क्या लेना, क्या लेना
.................................
Tere honthon ke do phool-Paaras 1971
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सजना के सामने मैं तो रहूंगी-पारस १९७१
यकायक, अचानक, तुरंत फुरंत जब कोई गीत याद आता है
है तो उसे सुनवाने कि इच्छा हो ही जाती है। अभिनेत्री राखी
को आपने अधिकांश चलचित्रों में भारतीय नारी की पोषाक
और वेश भूषा में ही देखा होगा। आज आपको एक ऐसा गीत
सुनवाते हैं जिसमें वे विलायती बाला जैसी नज़र आती हैं।
इन्दीवर के लिखे गीत को गा रही हैं आशा भोंसले और गीत
की तर्ज़ बनाई है कल्याणजी आनंदजी ने।
गीत के बोल :
सजना के सामने मैं तो रहूंगी चुप, चुप
आ हा, सजना के सामने मैं तो रहूंगी चुप
बोल उठी अँखियाँ तो क्या होगा
हाय हाय क्या होगा
बोल उठी अँखियाँ तो क्या होगा
हाय हाय क्या होगा
अंखियों में छ गया नशा भीगा भीगा
अंखियों में छ गया नशा भीगा भीगा
जान गई सखियाँ तो क्या होगा
हाय हाय क्या होगा
जान गई !
ओ रातों को, रातों को ?
आ हा रातों को
रातों को उड़ उड़ के कहती है निंदिया
ऐ री लागेगी कब मेरे माथे पे बिंदिया
मन की अभी तक मन में छुपी है
फ़ैल गई, फ़ैल गई बतियाँ तो क्या होगा
हाय हाय क्या होगा
सजना के
सजना के सामने मैं तो रहूंगी चुप, चुप
हो ओ ऐसी लगी
कैसी लगी ?
हा हा ऐसी लगी
ऐसी लगी आग मेरे सीने में प्रीत की
हाय याद आये घडी घडी अनदेखे मीत की
दिन तो गुज़रूंगी कर कर के बतियाँ
गुजरी ना
गुजरी ना रतियाँ तो क्या होगा
हाय हाय क्या होगा
क्या होगा ?
सजना के सामने मैं तो रहूंगी चुप, चुप
हा चोरी चोरी
चोरी चोरी ?
आ हा चोरी चोरी
चोरी चोरी सपने में आता है कोई
फिर उसके ख्यालों में रहूँ खोयी खोयी
बान के दीवानी लिख दी जो मैंने
पकड़ी गई
पकड़ी गई पतियाँ तो क्या होगा
हाय हाय क्या होगा
सजना के
सजना के सामने मैं तो रहूंगी चुप, चुप
आ हा सजना के सामने मैं तो रहूंगी चुप
बोल उठी अँखियाँ तो क्या होगा
हाय हाय क्या होगा
बोल उठी अँखियाँ तो क्या होगा
हाय हाय क्या होगा
बोल उठी अँखियाँ तो क्या होगा
हाय हाय क्या होगा
...............................
Sajna ke samne main to rahoongi-Paaras 1971
है तो उसे सुनवाने कि इच्छा हो ही जाती है। अभिनेत्री राखी
को आपने अधिकांश चलचित्रों में भारतीय नारी की पोषाक
और वेश भूषा में ही देखा होगा। आज आपको एक ऐसा गीत
सुनवाते हैं जिसमें वे विलायती बाला जैसी नज़र आती हैं।
इन्दीवर के लिखे गीत को गा रही हैं आशा भोंसले और गीत
की तर्ज़ बनाई है कल्याणजी आनंदजी ने।
गीत के बोल :
सजना के सामने मैं तो रहूंगी चुप, चुप
आ हा, सजना के सामने मैं तो रहूंगी चुप
बोल उठी अँखियाँ तो क्या होगा
हाय हाय क्या होगा
बोल उठी अँखियाँ तो क्या होगा
हाय हाय क्या होगा
अंखियों में छ गया नशा भीगा भीगा
अंखियों में छ गया नशा भीगा भीगा
जान गई सखियाँ तो क्या होगा
हाय हाय क्या होगा
जान गई !
ओ रातों को, रातों को ?
आ हा रातों को
रातों को उड़ उड़ के कहती है निंदिया
ऐ री लागेगी कब मेरे माथे पे बिंदिया
मन की अभी तक मन में छुपी है
फ़ैल गई, फ़ैल गई बतियाँ तो क्या होगा
हाय हाय क्या होगा
सजना के
सजना के सामने मैं तो रहूंगी चुप, चुप
हो ओ ऐसी लगी
कैसी लगी ?
हा हा ऐसी लगी
ऐसी लगी आग मेरे सीने में प्रीत की
हाय याद आये घडी घडी अनदेखे मीत की
दिन तो गुज़रूंगी कर कर के बतियाँ
गुजरी ना
गुजरी ना रतियाँ तो क्या होगा
हाय हाय क्या होगा
क्या होगा ?
सजना के सामने मैं तो रहूंगी चुप, चुप
हा चोरी चोरी
चोरी चोरी ?
आ हा चोरी चोरी
चोरी चोरी सपने में आता है कोई
फिर उसके ख्यालों में रहूँ खोयी खोयी
बान के दीवानी लिख दी जो मैंने
पकड़ी गई
पकड़ी गई पतियाँ तो क्या होगा
हाय हाय क्या होगा
सजना के
सजना के सामने मैं तो रहूंगी चुप, चुप
आ हा सजना के सामने मैं तो रहूंगी चुप
बोल उठी अँखियाँ तो क्या होगा
हाय हाय क्या होगा
बोल उठी अँखियाँ तो क्या होगा
हाय हाय क्या होगा
बोल उठी अँखियाँ तो क्या होगा
हाय हाय क्या होगा
...............................
Sajna ke samne main to rahoongi-Paaras 1971
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Thursday, 16 June 2011
धीरे रे चलो-जौहर महमूद इन गोवा १९६५
आपको कुछ गंभीर से गीत सुना दिए अब एक मस्त गीत सुनवाते हैं।
मुकेश के लोकप्रिय गीतों में से एक और श्वेत श्याम युग से इसे परदे
पर गा रहे हैं ए एस जौहर और उनकी फैवरेट अभिनेत्री सोनिया साहनी
बांकी हिरनिया का किरदार निभा रही हैं। जौहर अच्छे अभिनेता
थे। इस गीत में वो किसी कुशल रोमांटिक नायक जैसे गीत गाने कि
कुशल कवायद कर रहे हैं।
गीत के बोल:
धीरे रे चलो मोरी बांकी हिरनिया
धीरे रे चलो मोरी बांकी हिरनिया
कमर ना लचके हाय सजनिया
धीरे रे चलो मोरी बांकी हिरनिया
धीरे रे चलो मोरी बांकी हिरनिया
तेरी बिखरी जुल्फें देख देख ये
मस्त घटा शरमाई, हो देखो
मस्त घटा शरमाई
तेरा रूप जो देखा झूम झूम ली
बिजली ने ली अंगडाई, हो ली
बिजली ने अंगडाई
काले बाल गोरा रूप
जैसे साये में हो धूप
तुझे देख जिया भरमा ही गया
ओ, धीरे रे चलो मोरी बांकी हिरनिया
धीरे रे चलो मोरी बांकी हिरनिया
कमर ना लचके हाय सजनिया
धीरे रे चलो मोरी बांकी हिरनिया
धीरे रे चलो मोरी बांकी हिरनिया
क्यूँ दिल की राहें छोड़ छोड़ ये
फूल चला कारों पे,
ये फूल चला कारों पे
तेरा पिघले ऐसे रूप के जैसे
मोम हो अंगारों पे जैसे
मोम हो अंगारों पे
तेरा मुखड़ा गुलाबी तेरी चाल शराबी
मुझे राम कसम नशा हो ही गया
ओ, धीरे रे चलो मोरी बांकी हिरनिया
धीरे रे चलो मोरी बांकी हिरनिया
कमर ना लचके हाय सजनिया
धीरे रे चलो मोरी बांकी हिरनिया
धीरे रे चलो मोरी बांकी हिरनिया
................................
Dheere re chalo-Johar Mehmood in Goa 1965
मुकेश के लोकप्रिय गीतों में से एक और श्वेत श्याम युग से इसे परदे
पर गा रहे हैं ए एस जौहर और उनकी फैवरेट अभिनेत्री सोनिया साहनी
बांकी हिरनिया का किरदार निभा रही हैं। जौहर अच्छे अभिनेता
थे। इस गीत में वो किसी कुशल रोमांटिक नायक जैसे गीत गाने कि
कुशल कवायद कर रहे हैं।
गीत के बोल:
धीरे रे चलो मोरी बांकी हिरनिया
धीरे रे चलो मोरी बांकी हिरनिया
कमर ना लचके हाय सजनिया
धीरे रे चलो मोरी बांकी हिरनिया
धीरे रे चलो मोरी बांकी हिरनिया
तेरी बिखरी जुल्फें देख देख ये
मस्त घटा शरमाई, हो देखो
मस्त घटा शरमाई
तेरा रूप जो देखा झूम झूम ली
बिजली ने ली अंगडाई, हो ली
बिजली ने अंगडाई
काले बाल गोरा रूप
जैसे साये में हो धूप
तुझे देख जिया भरमा ही गया
ओ, धीरे रे चलो मोरी बांकी हिरनिया
धीरे रे चलो मोरी बांकी हिरनिया
कमर ना लचके हाय सजनिया
धीरे रे चलो मोरी बांकी हिरनिया
धीरे रे चलो मोरी बांकी हिरनिया
क्यूँ दिल की राहें छोड़ छोड़ ये
फूल चला कारों पे,
ये फूल चला कारों पे
तेरा पिघले ऐसे रूप के जैसे
मोम हो अंगारों पे जैसे
मोम हो अंगारों पे
तेरा मुखड़ा गुलाबी तेरी चाल शराबी
मुझे राम कसम नशा हो ही गया
ओ, धीरे रे चलो मोरी बांकी हिरनिया
धीरे रे चलो मोरी बांकी हिरनिया
कमर ना लचके हाय सजनिया
धीरे रे चलो मोरी बांकी हिरनिया
धीरे रे चलो मोरी बांकी हिरनिया
................................
Dheere re chalo-Johar Mehmood in Goa 1965
Wednesday, 15 June 2011
कौन अंजाम-ए-उल्फत नहीं जानता-हेरा फेरी १९७६
ये दिमाग भी कमबख्त बहुत कबाड़ा किस्म की चीज़ है, मटर पनीर
खाते खाते जूता पालिश की ख़ाली होती डब्बी याद आ जाती है तो
नहाते नहाते पेट्रोल पम्प दिखाई देने लगता है ।
आज एक पुराने मित्र की याद हो आई। जो मित्र दिल के करीब थे
समय ने उनको इतना दूर कर दिया कि अब उनकी यादों के सिवा
कुछ बचा नहीं है दोस्ती के नाम पे। कुछ दूसरी दुनिया पहुँच
गये तो कुछ मोह माया में उलझ कर रह गये। आपको फिल्म हेरा फेरी
का एक गीत सुनवाया था-बरसों पुराना ये याराना। फिल्म हेरा फेरी से
एक गीत आपको और सुनवाते हैं। ये सायरा बानो और अमिताभ बच्चन
पर फिल्माया गया है।
गीत के बोल:
कौन अंजाम-ए-उल्फत नहीं जानता
कौन अंजाम-ए-उल्फत नहीं जानता
मगर क्या करूं ये दिल दीवाना
नहीं मानता नहीं मानता
नहीं मानता दिल नहीं मानता
कौन अंजाम-ए-उल्फत नहीं जानता
मौत से जो डरे, प्यार वो क्या करे
प्यार में तो यही मौत है ज़िन्दगी
जान क्या चीज़ है प्यार के सामने
साथ छूते ना छूते ये दिल की लगी
ये ना होता तो फिर प्यार की राह में
ख़ाक दर दर की कोई दीवाना
नहीं छानता नहीं छानता
नहीं मानता दिल नहीं मानता
कौन अंजाम-ए-उल्फत नहीं जानता
लैला शीरी हो या हीर या सोहनी
मर के भी उनकी सूरत सितारों में है
जिस के दिल का लहू घुल गया प्यार में
आज तक उनकी ख़ुशबू बहारों में है
कुछ तो है वरना दिल मेरा तेरे लिए
जान देने की जिद जाने-जाना
नहीं ठानता, नहीं ठानता
नहीं मानता दिल नहीं मानता
कौन अंजाम-ए-उल्फत नहीं जानता
कौन अंजाम-ए-उल्फत नहीं जानता
मगर क्या करूं ये दिल दीवाना
नहीं मानता नहीं मानता
नहीं मानता दिल नहीं मानता
............................
Kaun anjaam-e-ulfat nahin jaanta-Hera Pheri 1976
खाते खाते जूता पालिश की ख़ाली होती डब्बी याद आ जाती है तो
नहाते नहाते पेट्रोल पम्प दिखाई देने लगता है ।
आज एक पुराने मित्र की याद हो आई। जो मित्र दिल के करीब थे
समय ने उनको इतना दूर कर दिया कि अब उनकी यादों के सिवा
कुछ बचा नहीं है दोस्ती के नाम पे। कुछ दूसरी दुनिया पहुँच
गये तो कुछ मोह माया में उलझ कर रह गये। आपको फिल्म हेरा फेरी
का एक गीत सुनवाया था-बरसों पुराना ये याराना। फिल्म हेरा फेरी से
एक गीत आपको और सुनवाते हैं। ये सायरा बानो और अमिताभ बच्चन
पर फिल्माया गया है।
गीत के बोल:
कौन अंजाम-ए-उल्फत नहीं जानता
कौन अंजाम-ए-उल्फत नहीं जानता
मगर क्या करूं ये दिल दीवाना
नहीं मानता नहीं मानता
नहीं मानता दिल नहीं मानता
कौन अंजाम-ए-उल्फत नहीं जानता
मौत से जो डरे, प्यार वो क्या करे
प्यार में तो यही मौत है ज़िन्दगी
जान क्या चीज़ है प्यार के सामने
साथ छूते ना छूते ये दिल की लगी
ये ना होता तो फिर प्यार की राह में
ख़ाक दर दर की कोई दीवाना
नहीं छानता नहीं छानता
नहीं मानता दिल नहीं मानता
कौन अंजाम-ए-उल्फत नहीं जानता
लैला शीरी हो या हीर या सोहनी
मर के भी उनकी सूरत सितारों में है
जिस के दिल का लहू घुल गया प्यार में
आज तक उनकी ख़ुशबू बहारों में है
कुछ तो है वरना दिल मेरा तेरे लिए
जान देने की जिद जाने-जाना
नहीं ठानता, नहीं ठानता
नहीं मानता दिल नहीं मानता
कौन अंजाम-ए-उल्फत नहीं जानता
कौन अंजाम-ए-उल्फत नहीं जानता
मगर क्या करूं ये दिल दीवाना
नहीं मानता नहीं मानता
नहीं मानता दिल नहीं मानता
............................
Kaun anjaam-e-ulfat nahin jaanta-Hera Pheri 1976
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Saturday, 11 June 2011
मिले मिले दो बदन-ब्लैकमेल १९७३
गणित के हिसाब से देखा जाये तो जिस गाने को दो लोग
गायें वो-दोगाना, जिसे तीन लोग गायें वो तीनगाना और
जिसे चार गायक गायें वो चारगाना। पिछले गीत से एक
और गीत ध्यान में आया है, लगे हाथ वो भी सुन/देख
लीजिये।
आपको केवल दोगाना ही सुनवा रहे हैं। ये भी ऐसे याद आया
कि जिस गीत में गायक-गायिका गीत की पंक्तियाँ एक साथ
गाते हैं वो पूर्ण दोगाना लगता है। ऐसा एक और गीत है जिसमें
गायक-गायिका ने बहुत सी पंक्तियाँ साथ साथ गई हैं। धक् चिक
धक् चिक वाली ताल के साथ ये गीत आगे बढ़ता है और कब
ख़त्म हो जाता है मालूम नहीं पढता। ये मधुर गीत है फिल्म
ब्लैकमेल से। इसके संगीत के अटपटे होने की वजह आप केवल
इसका विडियो देख कर ही जान पाएंगे। एक बात बताएं-इसको
देखकर हिंदी की कोई कहावत याद आती है आपको ?
गीत के बोल:
मिले मिले दो बदन खिले खिले दो चमन
ये ज़िन्दगी कम ही सही कोई ग़म नहीं
मिले मिले दो बदन खिले खिले दो चमन
ये ज़िन्दगी कम ही सही कोई ग़म नहीं
देर से आई आई तो बहार
अंगारों पे सोकर जागा प्यार
तूफ़ानों में फूल खिलाए
तूफ़ानों में फूल खिलाए कैसा ये मिलन
मिले मिले दो बदन खिले खिले दो चमन
ये ज़िन्दगी कम ही सही कोई ग़म नहीं
होंठ वही हैं है वही मुस्कान
अब तक क्यों कर दबे रहे अरमान
बीते दिनों को भूल ही जाएँ
बीते दिनों को भूल ही जाएँ अब हम-तुम सजन
मिले मिले दो बदन खिले खिले दो चमन
ये ज़िन्दगी कम ही सही कोई ग़म नहीं
..................................
Mile mile do badan-Blackmail 1973
गायें वो-दोगाना, जिसे तीन लोग गायें वो तीनगाना और
जिसे चार गायक गायें वो चारगाना। पिछले गीत से एक
और गीत ध्यान में आया है, लगे हाथ वो भी सुन/देख
लीजिये।
आपको केवल दोगाना ही सुनवा रहे हैं। ये भी ऐसे याद आया
कि जिस गीत में गायक-गायिका गीत की पंक्तियाँ एक साथ
गाते हैं वो पूर्ण दोगाना लगता है। ऐसा एक और गीत है जिसमें
गायक-गायिका ने बहुत सी पंक्तियाँ साथ साथ गई हैं। धक् चिक
धक् चिक वाली ताल के साथ ये गीत आगे बढ़ता है और कब
ख़त्म हो जाता है मालूम नहीं पढता। ये मधुर गीत है फिल्म
ब्लैकमेल से। इसके संगीत के अटपटे होने की वजह आप केवल
इसका विडियो देख कर ही जान पाएंगे। एक बात बताएं-इसको
देखकर हिंदी की कोई कहावत याद आती है आपको ?
गीत के बोल:
मिले मिले दो बदन खिले खिले दो चमन
ये ज़िन्दगी कम ही सही कोई ग़म नहीं
मिले मिले दो बदन खिले खिले दो चमन
ये ज़िन्दगी कम ही सही कोई ग़म नहीं
देर से आई आई तो बहार
अंगारों पे सोकर जागा प्यार
तूफ़ानों में फूल खिलाए
तूफ़ानों में फूल खिलाए कैसा ये मिलन
मिले मिले दो बदन खिले खिले दो चमन
ये ज़िन्दगी कम ही सही कोई ग़म नहीं
होंठ वही हैं है वही मुस्कान
अब तक क्यों कर दबे रहे अरमान
बीते दिनों को भूल ही जाएँ
बीते दिनों को भूल ही जाएँ अब हम-तुम सजन
मिले मिले दो बदन खिले खिले दो चमन
ये ज़िन्दगी कम ही सही कोई ग़म नहीं
..................................
Mile mile do badan-Blackmail 1973
Wednesday, 8 June 2011
ज़ुबाँ पे दर्द भरी दास्ताँ चली आई-मर्यादा १९७१
चली आई, कौन ? वही भूली दास्तान ख्यालों में फिर से। फिर वो
भूली सी याद आई है, आई ज़रूर है मगर मुकेश के गीत की शक्ल
में।
आज मुकेश का एक अमर गीत सुना-वक़्त करता जो वफ़ा तो दिल
भारी सा हो आया और इसी गफलत और सिलसिले में एक और दर्द
भरा गीत याद आया ।
आइये सुनें राजेश खन्ना के ऊपर फिल्माया गया मुकेश का गाया
खूबसूरत गीत जो फिल्म मर्यादा(१९७१) से लिया गया है। मुकेश
के इस लोकप्रिय गीत के बोल लिखे हैं आनंद बक्षी ने और धुन
बनाई है कल्याणजी आनंदजी ने।
गीत के बोल:
ज़ुबाँ पे दर्द भरी दास्ताँ चली आई
ज़ुबाँ पे दर्द भरी दास्ताँ चली आई
बहार आने से पहले खिजां चली आई
ज़ुबाँ पे दर्द भरी दास्ताँ चली आई
ख़ुशी की चाह में मैं ने उठाये रंज बड़े
ख़ुशी की चाह में मैं ने उठाये रंज बड़े
मेरा नसीब की मेरे क़दम जहाँ भी पड़े
ये बदनसीबी मेरी भी वहाँ चली आई
ज़ुबाँ पे दर्द भरी दास्ताँ चली आई
उदास रात है वीरान दिल की महफ़िल है
उदास रात है वीरान दिल की महफ़िल है
न हमसफ़र है कोई और न कोई मंज़िल है
ये ज़िंदगी मुझे लेकर कहाँ चली आई
ज़ुबाँ पे दर्द भरी दास्ताँ चली आई
बहार आने से पहले खिजान चली आई
ज़ुबाँ पे दर्द भरी दास्ताँ चली आई
...............................
Zuban pe dard bhari dastaan-Maryada 1971
भूली सी याद आई है, आई ज़रूर है मगर मुकेश के गीत की शक्ल
में।
आज मुकेश का एक अमर गीत सुना-वक़्त करता जो वफ़ा तो दिल
भारी सा हो आया और इसी गफलत और सिलसिले में एक और दर्द
भरा गीत याद आया ।
आइये सुनें राजेश खन्ना के ऊपर फिल्माया गया मुकेश का गाया
खूबसूरत गीत जो फिल्म मर्यादा(१९७१) से लिया गया है। मुकेश
के इस लोकप्रिय गीत के बोल लिखे हैं आनंद बक्षी ने और धुन
बनाई है कल्याणजी आनंदजी ने।
गीत के बोल:
ज़ुबाँ पे दर्द भरी दास्ताँ चली आई
ज़ुबाँ पे दर्द भरी दास्ताँ चली आई
बहार आने से पहले खिजां चली आई
ज़ुबाँ पे दर्द भरी दास्ताँ चली आई
ख़ुशी की चाह में मैं ने उठाये रंज बड़े
ख़ुशी की चाह में मैं ने उठाये रंज बड़े
मेरा नसीब की मेरे क़दम जहाँ भी पड़े
ये बदनसीबी मेरी भी वहाँ चली आई
ज़ुबाँ पे दर्द भरी दास्ताँ चली आई
उदास रात है वीरान दिल की महफ़िल है
उदास रात है वीरान दिल की महफ़िल है
न हमसफ़र है कोई और न कोई मंज़िल है
ये ज़िंदगी मुझे लेकर कहाँ चली आई
ज़ुबाँ पे दर्द भरी दास्ताँ चली आई
बहार आने से पहले खिजान चली आई
ज़ुबाँ पे दर्द भरी दास्ताँ चली आई
...............................
Zuban pe dard bhari dastaan-Maryada 1971
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1971,
Anand Bakshi,
Kalyanji Anandji,
Maryada,
Mukesh,
Rajesh Khanna
Monday, 30 May 2011
नज़र ने नज़र से क्या कहा-सल्तनत १९८६
जूही चावला के गीत के लिए एक फ़रमाइश आई। बहुत दिन हुए उनको
परदे पर देखे। आइये उनकी पदार्पण फिल्म से एक गीत सुना जाये।
जूही चावला कि गिनती भी प्रतिभाशाली और संजीदा कलाकारों में
होती है। गीत में आपको दिखलाई देंगे जूही के साथ एक और नवोदित
कलाकार करण कपूर। शशि कपूर के पुत्र करण इस फिल्म के
पहले तक बॉम्बे डाईंग के बुश्शर्ट के विज्ञापन में दिखा करते थे।
माँ के रंग वाले लेकिन पिता के जैसे नैन-नक्श वाले करण की किस्मत
शायद पिता की तरह बुलंद नहीं रही और वे ज्यादा फिल्मों में आगे दिखाई
नहीं दिए। सल्तनत एक बहुसितारा फिल्म है जो फ्लॉप हो गई थी।
प्रस्तिउट गीत गा रह हैं सुरेश वाडकर और साधना सरगम। हसन
कमाल के लिखे बोलोंबोल की धुन तैयार की है कल्याणजी आनंदजी ने।
गीत के बोल:
नज़र ने नज़र से क्या कहा
मेरी जान मेरी जान ये बता
हो, नज़र ने नज़र से क्या कहा
मेरी जान मेरी जान ये बता
हो ओ ओ, कहूं क्या नज़र ने क्या कहा
आती है मुझको हया
जो है मेरे दिल में
वही तेरे दिल
एक बार कह दे तू
हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ
ना ना
नज़र ने नज़र से क्या कहा
आती है मुझको हया
हो ओ ओ, जागे हैं अरमान जान ले जाने जान
अजी जानूं ना
हो जागे हैं अरमान जान ले जाने जान
जानूं ना
कर ले एक एहसान मान ले जाने जान
मानूं ना
पहले वफ़ा का इकरार कर ले
हाज़िर है फिर मेरी जान
हाँ हाँ हाँ हाँ
नज़र ने नज़र से क्या कहा
मेरी जान मेरी जान ये बता
हो ओ ओ, कहूं क्या नज़र ने क्या कहा
आती है मुझको हया
ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला
वादा कर ये हाथ आज से छूटे ना
ना छूटेगा
हो, वादा कर ये हाथ आज से छूटे ना
ना छूटेगा
साथ रहे दिन रात साथ ये छूटे ना
ना छूटेगा
उल्फत में तेरी चाहत में तेरी
ठुकरा दूं सारा जहाँ
हाँ हाँ हाँ हाँ
हाँ हाँ हाँ
नज़र ने नज़र से क्या कहा
मेरी जान मेरी जान ये बता
हो ओ ओ, कहूं क्या नज़र ने क्या कहा
आती है मुझको हया
जो है मेरे दिल में
वही तेरे दिल
एक बार कह दे तू
हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ
हाँ हाँ हाँ
ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला
ho, ला ला ला ला ला ला
.....................................
Nazar ne nazar se kya kaha-Sultanat 1986
परदे पर देखे। आइये उनकी पदार्पण फिल्म से एक गीत सुना जाये।
जूही चावला कि गिनती भी प्रतिभाशाली और संजीदा कलाकारों में
होती है। गीत में आपको दिखलाई देंगे जूही के साथ एक और नवोदित
कलाकार करण कपूर। शशि कपूर के पुत्र करण इस फिल्म के
पहले तक बॉम्बे डाईंग के बुश्शर्ट के विज्ञापन में दिखा करते थे।
माँ के रंग वाले लेकिन पिता के जैसे नैन-नक्श वाले करण की किस्मत
शायद पिता की तरह बुलंद नहीं रही और वे ज्यादा फिल्मों में आगे दिखाई
नहीं दिए। सल्तनत एक बहुसितारा फिल्म है जो फ्लॉप हो गई थी।
प्रस्तिउट गीत गा रह हैं सुरेश वाडकर और साधना सरगम। हसन
कमाल के लिखे बोलोंबोल की धुन तैयार की है कल्याणजी आनंदजी ने।
गीत के बोल:
नज़र ने नज़र से क्या कहा
मेरी जान मेरी जान ये बता
हो, नज़र ने नज़र से क्या कहा
मेरी जान मेरी जान ये बता
हो ओ ओ, कहूं क्या नज़र ने क्या कहा
आती है मुझको हया
जो है मेरे दिल में
वही तेरे दिल
एक बार कह दे तू
हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ
ना ना
नज़र ने नज़र से क्या कहा
आती है मुझको हया
हो ओ ओ, जागे हैं अरमान जान ले जाने जान
अजी जानूं ना
हो जागे हैं अरमान जान ले जाने जान
जानूं ना
कर ले एक एहसान मान ले जाने जान
मानूं ना
पहले वफ़ा का इकरार कर ले
हाज़िर है फिर मेरी जान
हाँ हाँ हाँ हाँ
नज़र ने नज़र से क्या कहा
मेरी जान मेरी जान ये बता
हो ओ ओ, कहूं क्या नज़र ने क्या कहा
आती है मुझको हया
ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला
वादा कर ये हाथ आज से छूटे ना
ना छूटेगा
हो, वादा कर ये हाथ आज से छूटे ना
ना छूटेगा
साथ रहे दिन रात साथ ये छूटे ना
ना छूटेगा
उल्फत में तेरी चाहत में तेरी
ठुकरा दूं सारा जहाँ
हाँ हाँ हाँ हाँ
हाँ हाँ हाँ
नज़र ने नज़र से क्या कहा
मेरी जान मेरी जान ये बता
हो ओ ओ, कहूं क्या नज़र ने क्या कहा
आती है मुझको हया
जो है मेरे दिल में
वही तेरे दिल
एक बार कह दे तू
हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ
हाँ हाँ हाँ
ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला
ho, ला ला ला ला ला ला
.....................................
Nazar ne nazar se kya kaha-Sultanat 1986
Saturday, 28 May 2011
काहे को बीन बजाये सपेरे-सहेली १९६५
जब से वो बीन वाला गाना सुना है फिल्म कैदी का, तब से बीन वाले
गाने बहुत याद आ रहे हैं। एक और सुन लीजिये-ये है सन १९६५ की
फिल्म सहेली से। फिल्म नागिन(जिसमें हेमंत कुमार का संगीत
था) के लिए एक गीत में 'क्ले वायलिन' से बीन की ध्वनि निकालने
वाले कल्याणजी भाई और रवि ने अपने अपने तरीके से बीन की
आवाज़ का इस्तेमाल किया। सबसे ज्यादा इस्तेमाल आपको कल्याणजी
आनंदजी के गीतों में मिलेगा, रवि के इक्का दुक्का गीत ही हैं। गौरतलब
है कि फिल्म नागिन के पदार्पण तक ना तो संगीतकार कल्याणजी और
ना ही रवि का नाम ज्यादा लोगों को मालूम था। बतौर स्वतंत्र संगीतकार
रवि ने पहली फिल्म की-वचन(१९५५) और कल्याणजी वीरजी शाह ने की
वो थी सम्राट चन्द्रगुप्त (१९५८) । फिल्म सहेली में संगीतकार भाइयों की जोड़ी-
कल्याणजी आनंदजी ने संगीत दिया है। बाकी की चर्चा फिर कभी। फिलहाल ये गीत
सुनिए। अर्जुन हिंगोरानी के निर्देशन में बनी फिल्म सहेली में कई मधुर गीत हैं।
गीत लिखा है शमीम जयपुरी ने। इस फिल्म के कुछ गीत इन्दीवर ने भी
लिखे हैं। ये गीत विडियो देखने के बाद ज्यादा बढ़िया लगने लगा है।
धन्यवाद् यू ट्यूब और उसके दयालु अपलोडर्स का। इतना तो तय है कि
कल्पना इस गीत में ज्यादा खूबसूरत नज़र आती हैं बजाये फिल्म प्रोफ़ेसर
के गीत -मैं चली मैं चली के।
गीत के बोल:
आ आ आ आ आ आ आ आ
ओ ओ ओ ओ ओ , ओ ओ ओ ओ ओ
ओ ओ ओ ओ ओ, ओ ओ
कहे तू बीन बजाये संपेरे
कहे तू बीन बजाये
कहे तू बीन बजाये संपेरे
कहे तू बीन बजाये
बैरी लगी में और लगाये
कौन तुझे समझाए
संपेरे, कहे तू बीन बजाये
अब मैं तोसे प्रीत निभाऊं
या के जग की रीत निभाऊं
हो ओ ओ अब मैं तोसे प्रीत निभाऊं
या के जग की रीत निभाऊं
जग रोके और मन बहकाए
कहे तू बीन बजाये संपेरे
कहे तू बीन बजाये
संपेरे, कहे तू बीन बजाये
नाचत नाचत गिर गिर जाऊं
कैसे नटखट को समझाऊँ
हो ओ ओ नाचत नाचत गिर गिर जाऊं
कैसे नटखट को समझाऊँ
बेदर्दी तोहे लाज ना आये
कहे तू बीन बजाये संपेरे
कहे तू बीन बजाये
बैरी लगी में और लगाये
कौन तुझे समझाए
संपेरे, कहे तू बीन बजाये
............................................
Kahe too been bajaye sanpere-Saheli 1964
गाने बहुत याद आ रहे हैं। एक और सुन लीजिये-ये है सन १९६५ की
फिल्म सहेली से। फिल्म नागिन(जिसमें हेमंत कुमार का संगीत
था) के लिए एक गीत में 'क्ले वायलिन' से बीन की ध्वनि निकालने
वाले कल्याणजी भाई और रवि ने अपने अपने तरीके से बीन की
आवाज़ का इस्तेमाल किया। सबसे ज्यादा इस्तेमाल आपको कल्याणजी
आनंदजी के गीतों में मिलेगा, रवि के इक्का दुक्का गीत ही हैं। गौरतलब
है कि फिल्म नागिन के पदार्पण तक ना तो संगीतकार कल्याणजी और
ना ही रवि का नाम ज्यादा लोगों को मालूम था। बतौर स्वतंत्र संगीतकार
रवि ने पहली फिल्म की-वचन(१९५५) और कल्याणजी वीरजी शाह ने की
वो थी सम्राट चन्द्रगुप्त (१९५८) । फिल्म सहेली में संगीतकार भाइयों की जोड़ी-
कल्याणजी आनंदजी ने संगीत दिया है। बाकी की चर्चा फिर कभी। फिलहाल ये गीत
सुनिए। अर्जुन हिंगोरानी के निर्देशन में बनी फिल्म सहेली में कई मधुर गीत हैं।
गीत लिखा है शमीम जयपुरी ने। इस फिल्म के कुछ गीत इन्दीवर ने भी
लिखे हैं। ये गीत विडियो देखने के बाद ज्यादा बढ़िया लगने लगा है।
धन्यवाद् यू ट्यूब और उसके दयालु अपलोडर्स का। इतना तो तय है कि
कल्पना इस गीत में ज्यादा खूबसूरत नज़र आती हैं बजाये फिल्म प्रोफ़ेसर
के गीत -मैं चली मैं चली के।
गीत के बोल:
आ आ आ आ आ आ आ आ
ओ ओ ओ ओ ओ , ओ ओ ओ ओ ओ
ओ ओ ओ ओ ओ, ओ ओ
कहे तू बीन बजाये संपेरे
कहे तू बीन बजाये
कहे तू बीन बजाये संपेरे
कहे तू बीन बजाये
बैरी लगी में और लगाये
कौन तुझे समझाए
संपेरे, कहे तू बीन बजाये
अब मैं तोसे प्रीत निभाऊं
या के जग की रीत निभाऊं
हो ओ ओ अब मैं तोसे प्रीत निभाऊं
या के जग की रीत निभाऊं
जग रोके और मन बहकाए
कहे तू बीन बजाये संपेरे
कहे तू बीन बजाये
संपेरे, कहे तू बीन बजाये
नाचत नाचत गिर गिर जाऊं
कैसे नटखट को समझाऊँ
हो ओ ओ नाचत नाचत गिर गिर जाऊं
कैसे नटखट को समझाऊँ
बेदर्दी तोहे लाज ना आये
कहे तू बीन बजाये संपेरे
कहे तू बीन बजाये
बैरी लगी में और लगाये
कौन तुझे समझाए
संपेरे, कहे तू बीन बजाये
............................................
Kahe too been bajaye sanpere-Saheli 1964
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Monday, 16 May 2011
हम हैं प्यार की डगर के- दो मुसाफिर १९७८
कोलगेट स्माइल प्लीज़। निर्देशक ने नायक को शायद यही निर्देश
दिया होगा इस गीत के फिल्मांकन की शुरुआत में। पिछले गीत
में कल्याणजी आनंदजी के जिक्र से ये गीत याद आ गया। सन १९७८
की फिल्म दो मुसाफिर से ये युगल गीत लिया गया है। शशि कपूर
और रेखा पर फिल्माए गाये इस गीत में लता और रफ़ी की आवाजें हैं।
थोड़ा धीमा और कर्णप्रिय गीत है ये। ये उस दौर का गीत है जब अभिनेत्री
रेखा ने योग करना शुरू नहीं किया था। खड़े तो नायक नायिका हैं समुद्र
के किनारे और गीत में जिक्र नदी का है। इतने सुन्दर गीत में इतना तो
नज़र अंदाज़ किया ही जा सकता है, है ना ?
गीत लिखा है एम् जी हशमत ने । फिल्म का शीर्षक गीत है ये और फिल्म
में २-३ बार सुनाई देता है।
गीत के बोल:
हम हैं प्यार की , प्यार की ,
डगर के दो मुसाफिर
डगर के दो मुसाफिर
हम हैं प्यार की डगर के दो मुसाफिर
हो संग संग रहने का वादा हमारा
वादा हमारा लो वादा हमारा
हम हैं प्यार की, प्यार की,
डगर के दो मुसाफिर
डगर के दो मुसाफिर
जैसे नदिया का गहरा पानी
बन के बादल अम्बर चूमे
जैसे अपने प्यार की धुन
धरती सुने सागर सुने
प्यार ही ईश्वर प्यार ही पूजा
प्यार ही ईश्वर प्यार ही पूजा
प्यार से बढ़ के ना कोई
हम हैं प्यार की, प्यार की,
डगर के दो मुसाफिर
डगर के दो मुसाफिर
जैसे तन और मन का संगम
सांसों का संगीत सुनाये
ऐसे अपने प्यार की सरगम'
जनम जनम से ये दोहराए
हर प्रेमी में बसे थे हम तुम
हर प्रेमी में बसे थे हम तुम
और ना दूजा कोई
हम हैं प्यार की, प्यार की,
डगर के दो मुसाफिर
डगर के दो मुसाफिर
हो संग संग रहने का वादा हमारा
वादा हमारा लो वादा हमारा
हम हैं प्यार की डगर के दो मुसाफिर
डगर के दो मुसाफिर
डगर के दो मुसाफिर
.........................................
Hum hain pyar ki dagar ke-Do musafir 1978
दिया होगा इस गीत के फिल्मांकन की शुरुआत में। पिछले गीत
में कल्याणजी आनंदजी के जिक्र से ये गीत याद आ गया। सन १९७८
की फिल्म दो मुसाफिर से ये युगल गीत लिया गया है। शशि कपूर
और रेखा पर फिल्माए गाये इस गीत में लता और रफ़ी की आवाजें हैं।
थोड़ा धीमा और कर्णप्रिय गीत है ये। ये उस दौर का गीत है जब अभिनेत्री
रेखा ने योग करना शुरू नहीं किया था। खड़े तो नायक नायिका हैं समुद्र
के किनारे और गीत में जिक्र नदी का है। इतने सुन्दर गीत में इतना तो
नज़र अंदाज़ किया ही जा सकता है, है ना ?
गीत लिखा है एम् जी हशमत ने । फिल्म का शीर्षक गीत है ये और फिल्म
में २-३ बार सुनाई देता है।
गीत के बोल:
हम हैं प्यार की , प्यार की ,
डगर के दो मुसाफिर
डगर के दो मुसाफिर
हम हैं प्यार की डगर के दो मुसाफिर
हो संग संग रहने का वादा हमारा
वादा हमारा लो वादा हमारा
हम हैं प्यार की, प्यार की,
डगर के दो मुसाफिर
डगर के दो मुसाफिर
जैसे नदिया का गहरा पानी
बन के बादल अम्बर चूमे
जैसे अपने प्यार की धुन
धरती सुने सागर सुने
प्यार ही ईश्वर प्यार ही पूजा
प्यार ही ईश्वर प्यार ही पूजा
प्यार से बढ़ के ना कोई
हम हैं प्यार की, प्यार की,
डगर के दो मुसाफिर
डगर के दो मुसाफिर
जैसे तन और मन का संगम
सांसों का संगीत सुनाये
ऐसे अपने प्यार की सरगम'
जनम जनम से ये दोहराए
हर प्रेमी में बसे थे हम तुम
हर प्रेमी में बसे थे हम तुम
और ना दूजा कोई
हम हैं प्यार की, प्यार की,
डगर के दो मुसाफिर
डगर के दो मुसाफिर
हो संग संग रहने का वादा हमारा
वादा हमारा लो वादा हमारा
हम हैं प्यार की डगर के दो मुसाफिर
डगर के दो मुसाफिर
डगर के दो मुसाफिर
.........................................
Hum hain pyar ki dagar ke-Do musafir 1978
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Monday, 11 April 2011
पीना हराम है ना पिलाना हराम है-चमेली की शादी १९८६
मार्च के महीने के अंत में दारू(विलायती, देसी) के ठेके अपने अंतिम
चरण में होते हैं। स्टॉक ख़त्म करने के चक्कर में पुराने ठेकेदार अपना
माल सस्ती दरों में भी बेच दिया करते हैं। उस समय तो साहब
दारुडियों का ये हाल होता है-पाँचों उँगलियाँ घी में, पैर चूल्हे में और
सर कढ़ाई में। कुछ कुछ लोग तो इस हिसाब से सेवन करते हैं मानो
एक साल की क़सर निकाल रहे हों।
आज आपको एक किशोर कुमार का गाया हुआ एक मस्त गीत सुनवाते
हैं, होली की क़सर जो निकालनी है। गीत फिल्म का निर्देशन बासु चटर्जी ने।
एक घासलेटी सी प्रेम कहानी जो हमारे इर्द गिर्द अक्सर सुनाई देती है अलग
अलग डेंसिटी में, उसका जीवंत और वास्तविक चित्रण इस फिल्म में है और
चाहे फिल्म समीक्षक इसको कोई भी दर्ज़ा प्रदान करें, इसे सिनेमा इतिहास
की सर्वाधिक मनोरंजक फिल्मों में गिना जाता है। फिल्म का निर्देशन बासु
चटर्जी ने किया है।
इस फिल्म के पहलुओं पर काफ़ी चर्चा होना बाकी है। पढ़ते रहिये ये ब्लॉग।
पर अनिल कपूर के अलावा जो अन्य कलाकार हैं उनके नाम हैं-हुमा खान
और अनु कपूर। गायक कलाकार हैं-अलका याग्निक और किशोर कुमार ।
गीत के बोल:
पीना हराम है ना पिलाना हराम है
पीना हराम ना पिलाना हराम है
पीने के बाद प्यारे
लडखडाना , लडखडाना
हाँ लडखडाना हराम है
हाँ,पीना हराम है ना पिलाना हराम है
पीना हराम ना पिलाना हराम है
पीने के बाद प्यारे
लडखडाना , बहक जाना
डगमगाना हराम है
नशा,
नशा देखा लाल पानी में देखा अनूठा
नशा देखा लाल पानी में देखा अनूठा
पी के दो घूँट गला घोंट दो ग़मों का
घोंट दो गला
पीने के बाद नज़र आये ना धोखा
खुल जाये भेद दोस्तों दुश्मनों का
तू ही मेरा जिगरी यार है
तुझको जिसपे इतना प्यार है
प्यार ये दिल के आर पार है
दिल तुझपे लट्टू
आंख वही है नाक वही है
बाल वही है चाल वही है
हाँ तू नटवरलाल वही है
मेरा यार नट्टू, निखट्टू
मस्ती है जाम है
हाँ मस्ती है जाम है
हाँ कितना आराम है
हाँ मस्ती है जाम है
हाँ कितना आराम है
पीने के बाद प्यारे
तडफडाना, तिलमिलाना
छटपटाना हराम है
पीना हराम ना पिलाना हराम है
पीने के बाद प्यारे
तडफडाना, तडफडाना
तडफडाना हराम है
हो, जो पीना है तो प्यार के जाम पीना
जो पीना है तो प्यार के जाम पीना
नशा जिसका मरके भी उतरे कभी ना
क्या बात कही
जो ले डूबे तुझको वो पीना क्या पीना
बेहोश हो के भी जीना क्या जीना
सुबह भुला दे शाम भुला दे
दुनिया का हर काम भुला दे
क्या होगा अंजाम भुला दे
जाम का ये जादू
नाम बदल के दे जो झांसा
झांसे से कितनों को फांसा
आखिर उल्टा पढ़ गया पासा
बना तमाशा तू
मय क्यूँ बदनाम है
क्यूँ क्यूँ
हाँ, मय क्यूँ बदनाम है
क्यूँ पीना इलज़ाम है
हाँ, मय क्यूँ बदनाम है
क्यूँ पीना इलज़ाम है
पीने के बाद प्यारे
हडबड़ाना, गड़बढ़ाना
बडबडाना हराम है
पीना हराम ना पिलाना हराम है
पीने के बाद प्यारे
लडखडाना, ऐ तडफडाना
हो बडबडाना हराम है
चरण में होते हैं। स्टॉक ख़त्म करने के चक्कर में पुराने ठेकेदार अपना
माल सस्ती दरों में भी बेच दिया करते हैं। उस समय तो साहब
दारुडियों का ये हाल होता है-पाँचों उँगलियाँ घी में, पैर चूल्हे में और
सर कढ़ाई में। कुछ कुछ लोग तो इस हिसाब से सेवन करते हैं मानो
एक साल की क़सर निकाल रहे हों।
आज आपको एक किशोर कुमार का गाया हुआ एक मस्त गीत सुनवाते
हैं, होली की क़सर जो निकालनी है। गीत फिल्म का निर्देशन बासु चटर्जी ने।
एक घासलेटी सी प्रेम कहानी जो हमारे इर्द गिर्द अक्सर सुनाई देती है अलग
अलग डेंसिटी में, उसका जीवंत और वास्तविक चित्रण इस फिल्म में है और
चाहे फिल्म समीक्षक इसको कोई भी दर्ज़ा प्रदान करें, इसे सिनेमा इतिहास
की सर्वाधिक मनोरंजक फिल्मों में गिना जाता है। फिल्म का निर्देशन बासु
चटर्जी ने किया है।
इस फिल्म के पहलुओं पर काफ़ी चर्चा होना बाकी है। पढ़ते रहिये ये ब्लॉग।
पर अनिल कपूर के अलावा जो अन्य कलाकार हैं उनके नाम हैं-हुमा खान
और अनु कपूर। गायक कलाकार हैं-अलका याग्निक और किशोर कुमार ।
गीत के बोल:
पीना हराम है ना पिलाना हराम है
पीना हराम ना पिलाना हराम है
पीने के बाद प्यारे
लडखडाना , लडखडाना
हाँ लडखडाना हराम है
हाँ,पीना हराम है ना पिलाना हराम है
पीना हराम ना पिलाना हराम है
पीने के बाद प्यारे
लडखडाना , बहक जाना
डगमगाना हराम है
नशा,
नशा देखा लाल पानी में देखा अनूठा
नशा देखा लाल पानी में देखा अनूठा
पी के दो घूँट गला घोंट दो ग़मों का
घोंट दो गला
पीने के बाद नज़र आये ना धोखा
खुल जाये भेद दोस्तों दुश्मनों का
तू ही मेरा जिगरी यार है
तुझको जिसपे इतना प्यार है
प्यार ये दिल के आर पार है
दिल तुझपे लट्टू
आंख वही है नाक वही है
बाल वही है चाल वही है
हाँ तू नटवरलाल वही है
मेरा यार नट्टू, निखट्टू
मस्ती है जाम है
हाँ मस्ती है जाम है
हाँ कितना आराम है
हाँ मस्ती है जाम है
हाँ कितना आराम है
पीने के बाद प्यारे
तडफडाना, तिलमिलाना
छटपटाना हराम है
पीना हराम ना पिलाना हराम है
पीने के बाद प्यारे
तडफडाना, तडफडाना
तडफडाना हराम है
हो, जो पीना है तो प्यार के जाम पीना
जो पीना है तो प्यार के जाम पीना
नशा जिसका मरके भी उतरे कभी ना
क्या बात कही
जो ले डूबे तुझको वो पीना क्या पीना
बेहोश हो के भी जीना क्या जीना
सुबह भुला दे शाम भुला दे
दुनिया का हर काम भुला दे
क्या होगा अंजाम भुला दे
जाम का ये जादू
नाम बदल के दे जो झांसा
झांसे से कितनों को फांसा
आखिर उल्टा पढ़ गया पासा
बना तमाशा तू
मय क्यूँ बदनाम है
क्यूँ क्यूँ
हाँ, मय क्यूँ बदनाम है
क्यूँ पीना इलज़ाम है
हाँ, मय क्यूँ बदनाम है
क्यूँ पीना इलज़ाम है
पीने के बाद प्यारे
हडबड़ाना, गड़बढ़ाना
बडबडाना हराम है
पीना हराम ना पिलाना हराम है
पीने के बाद प्यारे
लडखडाना, ऐ तडफडाना
हो बडबडाना हराम है
Saturday, 22 January 2011
मोहे लागी रे-सुहाग रात १९६८
शुरू के ४-५ सेकंड तक ये गीत वी. शांताराम के स्कूल की उपज लगता है
उसके बाद थोड़ी देर के लिए शुद्ध बम्बैया फ़िल्मी हो जाता है। ऐसी स्विचिंग
गीत में चलती रहती है। तेज गति के गीत पर नृत्य भी काफी तेज़ वाला है।
गीत फिल्माया गया है राजश्री और जीतेंद्र पर। इन्दीवर के लिखे और लता
के गाये इस गीत के संगीतकार हैं कल्याणजी आनंदजी । इस फिल्म के गीत
काफी बजे हैं और २-३ गीत अभी भी चलन में हैं जिनको हम आगे सुनेंगे।
फिलहाल इस मोहक नृत्य वाले गीत का आनंद उठाइए।
गीत के बोल:
मोहे लागी रे
मोहे लागी रे लागी रे लागी
जुल्मी उमरिया संवरिया
हाय हाय
सवारिय मैं गिर गिर जाऊं
सवारिय मैं गिर गिर जाऊं
मोहे रोको रे
मोहे रोको रे रोको रे रोको
हो गई बावरिया सांवरिया
ऊई
सांवरिया मैं गिर गिर जाऊं
सांवरिया मैं गिर गिर जाऊं
लागे जबसे ये नैन
गया जियरा का चैन
हाय, तबसे ये नैना ना लागे
लागे जबसे ये नैन
गया जियरा का चैन
हाय, तबसे ये नैना ना लागे
बहकी बहकी है चाल
है अभी से ये हाल
जाने क्या होगा क्या होगा आगे
जाने क्या होगा क्या होगा आगे
मो पे डारो ना
मो पे डारो ना डारो ना डारो
ऐसी नजरिया सांवरिया
हाय
सांवरिया मैं गिर गिर जाऊं
सांवरिया मैं गिर गिर जाऊं
देखो आई बाहर
उसपे तेरा ये प्यार
कैसे अपने जिया को सम्भालूँ
देखो आई बाहर
उसपे तेरा ये प्यार
कैसे अपने जिया को सम्भालूँ
माना लाखों में एक
पर तू ऐसे ना देख
ठहरो आँचल में नैना छुपा लूं
ठहरो आँचल में नैना छुपा लूं
हाय देखे रे
हाय देखे रे देखे रे देखे
सारी नगरिया सांवरिया
दिया
सांवरिया मैं गिर गिर जाऊं
सांवरिया मैं गिर गिर जाऊं
तेरा मेरा ये मेल
कई सदियों का खेल
तू है काया तो मैं तेरी छाया
तेरा मेरा ये मेल
कई सदियों का खेल
तू है काया तो मैं तेरी छाया
ओ बहारों के फूल मुझको जाना ना भूल
चली आऊंगी जब भी बुलाया
मैं तो प्यासी रे
मैं तो प्यासी रे प्यासी रे प्यासी
प्रीत की बदरिया सांवरिया
सांवरिया मैं गिर गिर जाऊं
सांवरिया मैं गिर गिर जाऊं
मोहे लागी रे लागी रे लागी
जुल्मी उमरिया संवरिया
हा हा हा
सांवरिया मैं गिर गिर जाऊं
सांवरिया मैं गिर गिर जाऊं
......................................
Mohe laagi re laagi re-Suhag Raat 1968
उसके बाद थोड़ी देर के लिए शुद्ध बम्बैया फ़िल्मी हो जाता है। ऐसी स्विचिंग
गीत में चलती रहती है। तेज गति के गीत पर नृत्य भी काफी तेज़ वाला है।
गीत फिल्माया गया है राजश्री और जीतेंद्र पर। इन्दीवर के लिखे और लता
के गाये इस गीत के संगीतकार हैं कल्याणजी आनंदजी । इस फिल्म के गीत
काफी बजे हैं और २-३ गीत अभी भी चलन में हैं जिनको हम आगे सुनेंगे।
फिलहाल इस मोहक नृत्य वाले गीत का आनंद उठाइए।
गीत के बोल:
मोहे लागी रे
मोहे लागी रे लागी रे लागी
जुल्मी उमरिया संवरिया
हाय हाय
सवारिय मैं गिर गिर जाऊं
सवारिय मैं गिर गिर जाऊं
मोहे रोको रे
मोहे रोको रे रोको रे रोको
हो गई बावरिया सांवरिया
ऊई
सांवरिया मैं गिर गिर जाऊं
सांवरिया मैं गिर गिर जाऊं
लागे जबसे ये नैन
गया जियरा का चैन
हाय, तबसे ये नैना ना लागे
लागे जबसे ये नैन
गया जियरा का चैन
हाय, तबसे ये नैना ना लागे
बहकी बहकी है चाल
है अभी से ये हाल
जाने क्या होगा क्या होगा आगे
जाने क्या होगा क्या होगा आगे
मो पे डारो ना
मो पे डारो ना डारो ना डारो
ऐसी नजरिया सांवरिया
हाय
सांवरिया मैं गिर गिर जाऊं
सांवरिया मैं गिर गिर जाऊं
देखो आई बाहर
उसपे तेरा ये प्यार
कैसे अपने जिया को सम्भालूँ
देखो आई बाहर
उसपे तेरा ये प्यार
कैसे अपने जिया को सम्भालूँ
माना लाखों में एक
पर तू ऐसे ना देख
ठहरो आँचल में नैना छुपा लूं
ठहरो आँचल में नैना छुपा लूं
हाय देखे रे
हाय देखे रे देखे रे देखे
सारी नगरिया सांवरिया
दिया
सांवरिया मैं गिर गिर जाऊं
सांवरिया मैं गिर गिर जाऊं
तेरा मेरा ये मेल
कई सदियों का खेल
तू है काया तो मैं तेरी छाया
तेरा मेरा ये मेल
कई सदियों का खेल
तू है काया तो मैं तेरी छाया
ओ बहारों के फूल मुझको जाना ना भूल
चली आऊंगी जब भी बुलाया
मैं तो प्यासी रे
मैं तो प्यासी रे प्यासी रे प्यासी
प्रीत की बदरिया सांवरिया
सांवरिया मैं गिर गिर जाऊं
सांवरिया मैं गिर गिर जाऊं
मोहे लागी रे लागी रे लागी
जुल्मी उमरिया संवरिया
हा हा हा
सांवरिया मैं गिर गिर जाऊं
सांवरिया मैं गिर गिर जाऊं
......................................
Mohe laagi re laagi re-Suhag Raat 1968
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