इस गीत को देख कर जाने क्यूँ 'बर्फ पर निबंध' याद आ जाता है ।
इस्कूल में एक बार निबंध लिखने का कार्यक्रम हुआ(अक्सर हो जाया
करता था) । हमने तो हाथ खड़े कर दिए और मार खा ली मगर एक
निबंध जो पढने को मिला वो इस प्रकार से था- बर्फ आइस फैक्ट्री से
आती है। ये बड़ी बड़ी सिल्लियों के आकर में आती है । इसे तोड़ कर
और बिना तोड़े भी बेचा जाता है। तोड़ फोड़ करने के बाद इसका प्रयोग
गन्ने के रस को ठंडा करने और उसकी मात्रा बढ़ाने के लिए किया जाता है।
इसे पिघलने से बचाने के लिए बोरे में लपेट कर रखा जाता है......................
उसे बाद के हिस्से में कुछ इस प्रकार से था- जो बर्फ हिंदी फिल्मों में
दिखाई जाती है वो दूसरी किस्म की बर्फ होती है । वो खाने के काम नहीं आती ।
वो कश्मीर में पायी जाती है जिसके ऊपर फिल्म के हीरो हीरोइन नाचते- कूदते
और गाना गाते हैं।
गीत है फिल्म पिघलता आसमान का जिसे देख कर दर्शक ज्यादा नहीं पिघले
और फिल्म थोड़ा बहुत चलने के बाद सिनेमा गृहों से गायब हो गई।
गीत के बोल:
आ आ आ आ आ आ आ आ आ
मुझे ऐसा मिला मोती
ऐसा मोती कोई सागर में ना होगा
मुझे ऐसा मिला मोती
ऐसा मोती कोई सागर में ना होगा
मुझे ऐसा मिला तारा
ऐसा तारा कोई अम्बर में ना होगा
तन जिसका है मनभावन
मन जिसका पवन पवन
तन जिसका है मनभावन
मन जिसका पवन पवन
ऐसे वो मिला जैसे के मिले
प्यासी धरती को सावन
मुझे ऐसा मिला मोती
ऐसा मोती कोई सागर में ना होगा
मुझे ऐसा मिला तारा
ऐसा तारा कोई अम्बर में ना होगा
महलों से मैं कब मानी
दौलत को ना दौलत जानी
महलों से मैं कब मानी
दौलत को ना दौलत जानी
सारा ही जहाँ सूरत देखे
मैं सीरत की दीवानी
मुझे ऐसा मिला मोती
ऐसा मोती कोई सागर में ना होगा
मुझे ऐसा मिला तारा
ऐसा तारा कोई अम्बर में ना होगा
वो ज़फ़ा करें सह लूंगी
वो गिला करें सह लूंगी
वो ज़फ़ा करें सह लूंगी
वो गिला करें सह लूंगी
जिस हाल में वो रखे मुझको
उस हाल में मैं रह लूंगी
मुझे ऐसा मिला मोती
ऐसा मोती कोई सागर में ना होगा
मुझे ऐसा मिला तारा
ऐसा तारा कोई अम्बर में ना होगा
...................................
Mujhe aisa mila moti-Pighalta Aasman 1985
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Saturday, 28 January 2012
Thursday, 14 July 2011
मारा ठुमका बदल गयी चाल -क्रांति १९८१
आपको ठुमकेदार गीत सुनवाते हैं एक. फिल्म का नाम है क्रांति.
अपने समय की बड़ी हिट फिल्म थी ये. गीत भी इसके सुपर हिट
थे. गीत फिल्माया गया है परवीन बोबी पर. गीत लिखा है प्रसिद्द
गीतकार संतोष आनंद ने जिनकी पहचान देश भक्ति गीतों के लिए
ज्यादा है. उन्होंने मनोज कुमार की फिल्मों में ही गीत ज्यादा लिखे
हैं.
गीत में दिखने वाले कुछ और कलाकारों के नाम इस प्रकार से हैं-
प्रदीप कुमार, धीरज कुमार, शशिकला और टॉम आल्टर. बाकी के
अगर मैं पहचान पाता तो फिल्म जगत वाले मुझे ऑनररी पी एच डी
दे देते ना.
गीत के बोल:
पिला दे साकी मिला के हमको
शराब आधी गुलाब आधा, हिक
मिलेगा रोज ये हश्र तुम्हें भी
हजाब आधा सबाब आधा
मारा ठुमका, आ
मारा ठुमका बदल गयी चाल मितवा
देखो देखो रे हमरा कमाल मितवा
देखो देखो रे हमरा कमाल मितवा
मारा ठुमका बदल गयी चाल मितवा
देखो देखो रे हमरा कमाल, हिक
देखो देखो रे हमरा कमाल मितवा
मैं चिड़ी रे चिड़ी देख मैं तो उडी
मैं चिड़ी रे चिड़ी देख मैं तो उडी
अपने बाबुल की मैं तो अकेली कुडी
आशियाना बना ले मुझे घर में बसा ले
आशियाना बना ले मुझे घर में बसा ले
मेरा क्या है मैं जा के मुडी न मुडी
मुडी न मुडी, मुडी न मुडी
मार डालूंगी खुद को संभाल मितवा
देखो देखो रे हमरा कमाल मितवा
देखो देखो रे हमरा कमाल मितवा
मारा ठुमका, आ
मारा ठुमका बदल गयी चाल मितवा
देखो देखो रे हमरा कमाल मितवा
कोई आये भी न कोई जाए भी ना
कोई आये भी न कोई जाए भी ना
आज से अपना नाटक शुरू हो गया
पहले लैला मरेगी फिर मजनू मरेगा
पहले लैला मरेगी फिर मजनू मरेगा
फिर दोनों को जिंदा किया जायेगा,
किया जायेगा, किया जायेगा
नीला अम्बर मैं कर दूँगी लाल मितवा
देखो देखो रे हमरा कमाल मितवा
.................................
Maara thumka-Kranti 1981
अपने समय की बड़ी हिट फिल्म थी ये. गीत भी इसके सुपर हिट
थे. गीत फिल्माया गया है परवीन बोबी पर. गीत लिखा है प्रसिद्द
गीतकार संतोष आनंद ने जिनकी पहचान देश भक्ति गीतों के लिए
ज्यादा है. उन्होंने मनोज कुमार की फिल्मों में ही गीत ज्यादा लिखे
हैं.
गीत में दिखने वाले कुछ और कलाकारों के नाम इस प्रकार से हैं-
प्रदीप कुमार, धीरज कुमार, शशिकला और टॉम आल्टर. बाकी के
अगर मैं पहचान पाता तो फिल्म जगत वाले मुझे ऑनररी पी एच डी
दे देते ना.
गीत के बोल:
पिला दे साकी मिला के हमको
शराब आधी गुलाब आधा, हिक
मिलेगा रोज ये हश्र तुम्हें भी
हजाब आधा सबाब आधा
मारा ठुमका, आ
मारा ठुमका बदल गयी चाल मितवा
देखो देखो रे हमरा कमाल मितवा
देखो देखो रे हमरा कमाल मितवा
मारा ठुमका बदल गयी चाल मितवा
देखो देखो रे हमरा कमाल, हिक
देखो देखो रे हमरा कमाल मितवा
मैं चिड़ी रे चिड़ी देख मैं तो उडी
मैं चिड़ी रे चिड़ी देख मैं तो उडी
अपने बाबुल की मैं तो अकेली कुडी
आशियाना बना ले मुझे घर में बसा ले
आशियाना बना ले मुझे घर में बसा ले
मेरा क्या है मैं जा के मुडी न मुडी
मुडी न मुडी, मुडी न मुडी
मार डालूंगी खुद को संभाल मितवा
देखो देखो रे हमरा कमाल मितवा
देखो देखो रे हमरा कमाल मितवा
मारा ठुमका, आ
मारा ठुमका बदल गयी चाल मितवा
देखो देखो रे हमरा कमाल मितवा
कोई आये भी न कोई जाए भी ना
कोई आये भी न कोई जाए भी ना
आज से अपना नाटक शुरू हो गया
पहले लैला मरेगी फिर मजनू मरेगा
पहले लैला मरेगी फिर मजनू मरेगा
फिर दोनों को जिंदा किया जायेगा,
किया जायेगा, किया जायेगा
नीला अम्बर मैं कर दूँगी लाल मितवा
देखो देखो रे हमरा कमाल मितवा
.................................
Maara thumka-Kranti 1981
Friday, 24 June 2011
लोग कहते हैं तो सच ही-ये दिल किसको दूं १९६३
आपको एक माउथ ओर्गनिया और उछलकूदियाना गीत
सुनवाते हैं। जिस गीत की शुरुआत ऐसी उछल कूद से होती
है उसके लिए कोई उपयुक्त श्रेणी मुझे समझ नहीं आती। माउथ
ओरगन अर्थात मुंह से बजाय जाने वाला बाजा। मुंह से वैसे
तो कई चीज़ें बजायी जाती हैं और बजायी जा सकती हैं मगर
सबसे सोबर किस्म का नाम इसी बाजे का है जिसको माउथ
ओरगन कहा जाता है।
गाँव देहात में कभी इस बाजे के लिए एक शब्द भी सुना था
मैंने-विलायती पुंगी। तो आइये इस विलायती पुंगी की आवाज़
का आनंद उठाया जाये। फिल्म का शीषक गीत कह सकते हैं
आप से क्यूंकि फिल्म के नाम के उच्चारण से ही ये गीत
शुरू हो रहा है। गीत तेज़ गति वाला है और याहू-चाहे कोई
मुझे जंगली कहे की याद दिलाता है। उस गीत में शम्मी हैं
तो इस गीत में शशि।
गीत के बोल:
ये दिल किसको दूं
ये दिल किसको दूं
लोग कहते हैं कोई सच ही कहते होंगे
लोग कहते हैं तो सच ही कहते होंगे
मैं हूँ दीवाना, दिल है मस्ताना
गम से बेगाना
मैं हूँ दीवाना, दिल है मस्ताना
गम से बेगाना
लोग कहते हैं तो सच ही कहते होंगे
लोग कहते हैं तो सच ही कहते होंगे
धरती बिछौना मेरा
तारे खिलौना मेरा
राहों में उड़ते जुगनू
चंडी और सोना मेरा
मैं दिलवाला हूँ
मैं मतवाला हूँ
ना मैं दौलतमंद हूँ
ना मैं जन्नतमंद हूँ
दिल का करार मांगूं रे
मैं सच्चा प्यार मांगूं रे
दिल का करार मांगूं रे
मैं सच्चा प्यार मांगूं रे
ये दिल किसको दूं
ये दिल किसको दूं
लोग कहते हैं कोई सच ही कहते होंगे
लोग कहते हैं तो सच ही कहते होंगे
मैं हूँ दीवाना, दिल है मस्ताना
गम से बेगाना
मैं हूँ दीवाना, दिल है मस्ताना
गम से बेगाना
लोग कहते हैं तो सच ही कहते होंगे
मस्त कलंदर हूँ मैं
दिल का सिकंदर हूँ मैं
कोई ना समझे मुझको
गहरा समुन्दर हूँ मैं
मैं शहजादा हूँ
मैं शहजादा हूँ
यूँ तो सादा हूँ
ना है शैतान से रिश्ता ना मैं हूँ फ़रिश्ता
मैं तो आदम का बेटा हूँ
मैं तो हव्वा का बेटा हूँ
मैं तो आदम का बेटा हूँ
मैं तो हव्वा का बेटा हूँ
ये दिल किसको दूं
ये दिल किसको दूं
लोग कहते हैं कोई सच ही कहते होंगे
लोग कहते हैं तो सच ही कहते होंगे
मैं हूँ दीवाना, दिल है मस्ताना
गम से बेगाना
मैं हूँ दीवाना, दिल है मस्ताना
गम से बेगाना
लोग कहते हैं तो सच ही कहते होंगे
.............................
Log kehte hain to sach hi-Ye dil kisko doon 1963
सुनवाते हैं। जिस गीत की शुरुआत ऐसी उछल कूद से होती
है उसके लिए कोई उपयुक्त श्रेणी मुझे समझ नहीं आती। माउथ
ओरगन अर्थात मुंह से बजाय जाने वाला बाजा। मुंह से वैसे
तो कई चीज़ें बजायी जाती हैं और बजायी जा सकती हैं मगर
सबसे सोबर किस्म का नाम इसी बाजे का है जिसको माउथ
ओरगन कहा जाता है।
गाँव देहात में कभी इस बाजे के लिए एक शब्द भी सुना था
मैंने-विलायती पुंगी। तो आइये इस विलायती पुंगी की आवाज़
का आनंद उठाया जाये। फिल्म का शीषक गीत कह सकते हैं
आप से क्यूंकि फिल्म के नाम के उच्चारण से ही ये गीत
शुरू हो रहा है। गीत तेज़ गति वाला है और याहू-चाहे कोई
मुझे जंगली कहे की याद दिलाता है। उस गीत में शम्मी हैं
तो इस गीत में शशि।
गीत के बोल:
ये दिल किसको दूं
ये दिल किसको दूं
लोग कहते हैं कोई सच ही कहते होंगे
लोग कहते हैं तो सच ही कहते होंगे
मैं हूँ दीवाना, दिल है मस्ताना
गम से बेगाना
मैं हूँ दीवाना, दिल है मस्ताना
गम से बेगाना
लोग कहते हैं तो सच ही कहते होंगे
लोग कहते हैं तो सच ही कहते होंगे
धरती बिछौना मेरा
तारे खिलौना मेरा
राहों में उड़ते जुगनू
चंडी और सोना मेरा
मैं दिलवाला हूँ
मैं मतवाला हूँ
ना मैं दौलतमंद हूँ
ना मैं जन्नतमंद हूँ
दिल का करार मांगूं रे
मैं सच्चा प्यार मांगूं रे
दिल का करार मांगूं रे
मैं सच्चा प्यार मांगूं रे
ये दिल किसको दूं
ये दिल किसको दूं
लोग कहते हैं कोई सच ही कहते होंगे
लोग कहते हैं तो सच ही कहते होंगे
मैं हूँ दीवाना, दिल है मस्ताना
गम से बेगाना
मैं हूँ दीवाना, दिल है मस्ताना
गम से बेगाना
लोग कहते हैं तो सच ही कहते होंगे
मस्त कलंदर हूँ मैं
दिल का सिकंदर हूँ मैं
कोई ना समझे मुझको
गहरा समुन्दर हूँ मैं
मैं शहजादा हूँ
मैं शहजादा हूँ
यूँ तो सादा हूँ
ना है शैतान से रिश्ता ना मैं हूँ फ़रिश्ता
मैं तो आदम का बेटा हूँ
मैं तो हव्वा का बेटा हूँ
मैं तो आदम का बेटा हूँ
मैं तो हव्वा का बेटा हूँ
ये दिल किसको दूं
ये दिल किसको दूं
लोग कहते हैं कोई सच ही कहते होंगे
लोग कहते हैं तो सच ही कहते होंगे
मैं हूँ दीवाना, दिल है मस्ताना
गम से बेगाना
मैं हूँ दीवाना, दिल है मस्ताना
गम से बेगाना
लोग कहते हैं तो सच ही कहते होंगे
.............................
Log kehte hain to sach hi-Ye dil kisko doon 1963
Wednesday, 22 June 2011
चूड़ियाँ बाज़ार से मंगवा दे-सुहाना सफ़र १९७०
फ़िल्मी गीतों की कई श्रेणियां हैं-चूड़ी हिट, बिंदी हिट, कंगना हिट,
घाघरा हिट, चोली हिट, परदेसी हिट, विदेशी हिट इत्यादि ।
हमारे एक मित्र को श्रेणियां बनाने का बड़ा शौक है। दो श्रेणी वे
बनाते, दो हम उन्हें मुफ्त में सुझा देते, कभी वे खुश होते तो
कभी वे सुनकर सर खुजाते। इसको यूँ पढ़ें-कभी वे सर पीटते
कभी हम। उसका किस्सा फिर कभी।
आइये आपको एक बहुत दिन से ना सुना एक गीत सुनवाते हैं
जिसमें नायिका नायक से चूड़ियाँ लाने की फरमाइश कर रही है।
उसके बाद बैयाँ पकड़ने का आकर्षक ऑफर भी दिया जा रहा है।
होली का अवसर है और इसमें हुडदंग, डांस, शोरगुल और गीत के
बोल सभी का मिश्रण है। कुल मिला कर ये फ़िल्मी मसालेदार खिचड़ी
सुनने में स्वादिष्ट सी है।
गीत के बोल:
चूड़ियाँ बाज़ार से मंगवा दे रे पहले सैयां
पकड़ फिर बैयाँ
पकड़ फिर बैयाँ, ओ
पकड़ फिर बैयाँ
चूड़ियाँ बाज़ार से मंगवा दे रे पहले सैयां
पकड़ फिर बैयाँ
पकड़ फिर बैयाँ, ओ
पकड़ फिर बैयाँ
रेशमी सलवार तो दिलवा दे रे पहले सैयां
पकड़ फिर बैयाँ
पकड़ फिर बैयाँ, हो
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
गोरे मुखड़े से गोरी सरका दे
हा आ आ आ
गोरे मुखड़े से गोरी सरका दे
चुनर रंग लेने दे
कच्चा रंग है उतार जायेगा
नज़र रंग लेने दे
जो उतरे ना फिर अंग से
मोहे रंग दे ऐसे रंग से
प्यार ज़रा गुलाल में मिला ले हो पहले सैयां
पकड़ फिर बैयाँ
पकड़ फिर बैयाँ, ओ
पकड़ फिर बैयाँ
चूड़ियाँ बाज़ार से मंगवा दे रे पहले सैयां
पकड़ फिर बैयाँ
पकड़ फिर बैयाँ, हो
माने बात जो तू एक मेरी
हा आ आ आ आ
माने बात जो तू एक मेरी
मैं मानूं सौ बातें
तेरे कदमें में डाल दूं ला के
ज़माने की सौगातें
पहले ले दे मुझको घाघरा
फिर ले चल मुझे आगरा
ताजमहल की सैर तो करवा दे रे पहले सैयां
पकड़ फिर बैयाँ
पकड़ फिर बैयाँ, ओ
पकड़ फिर बैयाँ
चूड़ियाँ बाज़ार से मंगवा दे रे पहले सैयां
पकड़ फिर बैयाँ
पकड़ फिर बैयाँ, हो
............................
Choodiyan bazaar se-Suhana Safar 1970
घाघरा हिट, चोली हिट, परदेसी हिट, विदेशी हिट इत्यादि ।
हमारे एक मित्र को श्रेणियां बनाने का बड़ा शौक है। दो श्रेणी वे
बनाते, दो हम उन्हें मुफ्त में सुझा देते, कभी वे खुश होते तो
कभी वे सुनकर सर खुजाते। इसको यूँ पढ़ें-कभी वे सर पीटते
कभी हम। उसका किस्सा फिर कभी।
आइये आपको एक बहुत दिन से ना सुना एक गीत सुनवाते हैं
जिसमें नायिका नायक से चूड़ियाँ लाने की फरमाइश कर रही है।
उसके बाद बैयाँ पकड़ने का आकर्षक ऑफर भी दिया जा रहा है।
होली का अवसर है और इसमें हुडदंग, डांस, शोरगुल और गीत के
बोल सभी का मिश्रण है। कुल मिला कर ये फ़िल्मी मसालेदार खिचड़ी
सुनने में स्वादिष्ट सी है।
गीत के बोल:
चूड़ियाँ बाज़ार से मंगवा दे रे पहले सैयां
पकड़ फिर बैयाँ
पकड़ फिर बैयाँ, ओ
पकड़ फिर बैयाँ
चूड़ियाँ बाज़ार से मंगवा दे रे पहले सैयां
पकड़ फिर बैयाँ
पकड़ फिर बैयाँ, ओ
पकड़ फिर बैयाँ
रेशमी सलवार तो दिलवा दे रे पहले सैयां
पकड़ फिर बैयाँ
पकड़ फिर बैयाँ, हो
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
गोरे मुखड़े से गोरी सरका दे
हा आ आ आ
गोरे मुखड़े से गोरी सरका दे
चुनर रंग लेने दे
कच्चा रंग है उतार जायेगा
नज़र रंग लेने दे
जो उतरे ना फिर अंग से
मोहे रंग दे ऐसे रंग से
प्यार ज़रा गुलाल में मिला ले हो पहले सैयां
पकड़ फिर बैयाँ
पकड़ फिर बैयाँ, ओ
पकड़ फिर बैयाँ
चूड़ियाँ बाज़ार से मंगवा दे रे पहले सैयां
पकड़ फिर बैयाँ
पकड़ फिर बैयाँ, हो
माने बात जो तू एक मेरी
हा आ आ आ आ
माने बात जो तू एक मेरी
मैं मानूं सौ बातें
तेरे कदमें में डाल दूं ला के
ज़माने की सौगातें
पहले ले दे मुझको घाघरा
फिर ले चल मुझे आगरा
ताजमहल की सैर तो करवा दे रे पहले सैयां
पकड़ फिर बैयाँ
पकड़ फिर बैयाँ, ओ
पकड़ फिर बैयाँ
चूड़ियाँ बाज़ार से मंगवा दे रे पहले सैयां
पकड़ फिर बैयाँ
पकड़ फिर बैयाँ, हो
............................
Choodiyan bazaar se-Suhana Safar 1970
Monday, 6 June 2011
फूल बन जाऊँगा-प्यार किये जा १९६६
राजेंद्र कृष्ण का गीत और लक्ष्मीकांत प्यारेलाल का संगीत ? और तो और
शशि कपूर पर महेंद्र कपूर की आवाज़। कुछ अटपटा कोम्बिनाशन है ना।
जो भी हो, ये गीत बढ़िया बन पड़ा है और खासा लोकप्रिय हुआ था। साथ
में आवाज़ है लता मंगेशकर की। शशि के साथ जो खाते पीते घर की
अभिनेत्री हैं उनका नाम है-राजश्री, ये दक्षिण भारत की अभिनेत्री हैं। इस
फिल्म में दो बड़े नामी हास्य कलाकार मौजूद हैं-महमूद और किशोर कुमार।
किशोर कुमार तो फिल्म में नायक हैं और उनकी जोड़ी जमाई गई है कल्पना
के साथ। सभी अभिनेत्रियाँ इस फिल्म की सेहतमंद और तंदुरुस्त हैं।
गीत के बोल:
फूल बन जाऊँगा शर्त ये है मगर
फूल बन जाऊँगा शर्त ये है मगर
अपनी जुल्फों में मुझको सजा लीजिये
अपनी जुल्फों में मुझको सजा लीजिये
ख्वाब बन जाऊंगी शर्त ये है मगर
ख्वाब बन जाऊंगी शर्त ये है मगर
अपनी आँखों में मुझको बसा लीजिये
अपनी आँखों में मुझको बसा लीजिये
कभी कभी सोचूं की तुम मेरे क्या हो
कभी कभी सोचूं की तुम मेरे क्या हो
दर्द हो दिल का, आ आ आ आ आ आ आ
दर्द हो दिल का या तुम दवा हो
दर्द बान जाऊँगा शर्त ये है मगर
दर्द बान जाऊँगा शर्त ये है मगर
दर्द-ए-दिल की मुझी से दवा लीजिये
दर्द-ए-दिल की मुझी से दवा लीजिये
ख्वाब बन जाऊंगी शर्त ये है मगर
अपनी आँखों में मुझको बसा लीजिये
अपनी आँखों में मुझको बसा लीजिये
आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ
तुमने चाह था अफसाना मैं बन गया
तुमने चाह था अफसाना मैं बन गया
बैठे बिथ्लाये दीवाना मैं बन गया
होश में लूंगी, शर्त ये है मगर
होश में लूंगी, शर्त ये है मगर
इक सिवा मेरे सब कुछ भुला दीजिये
इक सिवा मेरे सब कुछ भुला दीजिये
अपनी आँखों में मुझको बसा लीजिये
दुनिया में मेरी जो तुम ही ना आते
दुनिया में मेरी जो तुम ही ना आते
गीत हमारे ऐ ऐ ऐ ऐ ऐ ऐ ऐ
गीत हमारे सितारे ना गाते
गीत बन जाऊँगा शर्त ये है मगर
गीत बन जाऊँगा शर्त ये है मगर
अपने कानों में मुझको जगह दीजिये
अपने कानों में मुझको जगह दीजिये
ख्वाब बन जाऊंगी शर्त ये है मगर
अपनी आँखों में मुझको बसा लीजिये
अपनी आँखों में मुझको बसा लीजिये
फूल बन जाऊँगा शर्त ये है मगर
अपनी जुल्फों में मुझको सजा लीजिये
अपनी जुल्फों में मुझको सजा लीजिये
................................
Phool ban jaoonga-Pyar kiye ja 1966
शशि कपूर पर महेंद्र कपूर की आवाज़। कुछ अटपटा कोम्बिनाशन है ना।
जो भी हो, ये गीत बढ़िया बन पड़ा है और खासा लोकप्रिय हुआ था। साथ
में आवाज़ है लता मंगेशकर की। शशि के साथ जो खाते पीते घर की
अभिनेत्री हैं उनका नाम है-राजश्री, ये दक्षिण भारत की अभिनेत्री हैं। इस
फिल्म में दो बड़े नामी हास्य कलाकार मौजूद हैं-महमूद और किशोर कुमार।
किशोर कुमार तो फिल्म में नायक हैं और उनकी जोड़ी जमाई गई है कल्पना
के साथ। सभी अभिनेत्रियाँ इस फिल्म की सेहतमंद और तंदुरुस्त हैं।
गीत के बोल:
फूल बन जाऊँगा शर्त ये है मगर
फूल बन जाऊँगा शर्त ये है मगर
अपनी जुल्फों में मुझको सजा लीजिये
अपनी जुल्फों में मुझको सजा लीजिये
ख्वाब बन जाऊंगी शर्त ये है मगर
ख्वाब बन जाऊंगी शर्त ये है मगर
अपनी आँखों में मुझको बसा लीजिये
अपनी आँखों में मुझको बसा लीजिये
कभी कभी सोचूं की तुम मेरे क्या हो
कभी कभी सोचूं की तुम मेरे क्या हो
दर्द हो दिल का, आ आ आ आ आ आ आ
दर्द हो दिल का या तुम दवा हो
दर्द बान जाऊँगा शर्त ये है मगर
दर्द बान जाऊँगा शर्त ये है मगर
दर्द-ए-दिल की मुझी से दवा लीजिये
दर्द-ए-दिल की मुझी से दवा लीजिये
ख्वाब बन जाऊंगी शर्त ये है मगर
अपनी आँखों में मुझको बसा लीजिये
अपनी आँखों में मुझको बसा लीजिये
आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ
तुमने चाह था अफसाना मैं बन गया
तुमने चाह था अफसाना मैं बन गया
बैठे बिथ्लाये दीवाना मैं बन गया
होश में लूंगी, शर्त ये है मगर
होश में लूंगी, शर्त ये है मगर
इक सिवा मेरे सब कुछ भुला दीजिये
इक सिवा मेरे सब कुछ भुला दीजिये
अपनी आँखों में मुझको बसा लीजिये
दुनिया में मेरी जो तुम ही ना आते
दुनिया में मेरी जो तुम ही ना आते
गीत हमारे ऐ ऐ ऐ ऐ ऐ ऐ ऐ
गीत हमारे सितारे ना गाते
गीत बन जाऊँगा शर्त ये है मगर
गीत बन जाऊँगा शर्त ये है मगर
अपने कानों में मुझको जगह दीजिये
अपने कानों में मुझको जगह दीजिये
ख्वाब बन जाऊंगी शर्त ये है मगर
अपनी आँखों में मुझको बसा लीजिये
अपनी आँखों में मुझको बसा लीजिये
फूल बन जाऊँगा शर्त ये है मगर
अपनी जुल्फों में मुझको सजा लीजिये
अपनी जुल्फों में मुझको सजा लीजिये
................................
Phool ban jaoonga-Pyar kiye ja 1966
Sunday, 28 November 2010
मेरी निगाह ने क्या काम-मोहब्बत इसको कहते हैं १९६५
एक गंभीर किस्म का रोमांटिक गीत पेश है। फिल्म
'मोहब्बत इसको कहते हैं' का एक रोमांटिक युगल गीत
आपको सुनवाया जा चुका है। अब सुनिए रफ़ी की
आवाज़ में एकल गीत। संतुलन, तहजीब और दायरे
के भीतर घूमते इस गीत में सभी कुछ इतने आहिस्ता
से कहा जा रहा है कि किसी को तनिक भी अटपटा ना
लगे और बात भी बान जाए। परदे पर इस गीत को
मराठी सिनेमा के नामचीन कलाकार रमेश देव गा रहे हैं
और हमारे रोमांटिक हीरो शशि कपूर बिस्तर पर
पड़े पड़े सुन रहे हैं। गीत शायद अभिनेत्री नंदा के लिए
गाया जा रहा है। गीत में फ्लेश बैक का दृश्य खूबसूरती
से इस्तेमाल किया गया है जिसमे शशि कपूर और नंदा
लगभग गीत की एक एक पंक्ति पर अभिनय करते नज़र
आ रहे हैं।
गीत के बोल:
मेरी निगाह ने क्या काम लाजवाब किया
मेरी निगाह ने क्या काम लाजवाब किया
उन्हीं को लाखों हसीनों में इंतेखाब किया
मेरी निगाह ने क्या
वो आये घर में बाहर आ के रुक गई जैसे
वो आये घर में बाहर आ के रुक गई जैसे
फिजा में फूलों की डाली सी झुक गई जैसे
कुछ इस अदा से किसी शोख ने हिजाब किया
कुछ इस अदा से किसी शोख ने हिजाब किया
मेरी निगाह ने क्या
वो ज़ुल्फ़-ए-नाज़ खुली खुल के कुछ ढलक सी गई
सितारे टूट पड़े चांदनी छलक सी गई
जो मैंने चेहरा-ए-जाना को बेनकाब किया
मेरी निगाह ने क्या काम लाजवाब किया
मेरी निगाह ने क्या
के मेरे गीत में वो रंग है नजाकत है
के मेरे गीत में वो रंग है नजाकत है
के सब उसी निगाह-ए-नाज़ की इनायत है
के मुझ से जर्रे को चमका के आफ़ताब किया
मेरी निगाह ने क्या काम लाजवाब किया
उन्हीं को लाखों हसीनों में इंतेखाब किया
'मोहब्बत इसको कहते हैं' का एक रोमांटिक युगल गीत
आपको सुनवाया जा चुका है। अब सुनिए रफ़ी की
आवाज़ में एकल गीत। संतुलन, तहजीब और दायरे
के भीतर घूमते इस गीत में सभी कुछ इतने आहिस्ता
से कहा जा रहा है कि किसी को तनिक भी अटपटा ना
लगे और बात भी बान जाए। परदे पर इस गीत को
मराठी सिनेमा के नामचीन कलाकार रमेश देव गा रहे हैं
और हमारे रोमांटिक हीरो शशि कपूर बिस्तर पर
पड़े पड़े सुन रहे हैं। गीत शायद अभिनेत्री नंदा के लिए
गाया जा रहा है। गीत में फ्लेश बैक का दृश्य खूबसूरती
से इस्तेमाल किया गया है जिसमे शशि कपूर और नंदा
लगभग गीत की एक एक पंक्ति पर अभिनय करते नज़र
आ रहे हैं।
गीत के बोल:
मेरी निगाह ने क्या काम लाजवाब किया
मेरी निगाह ने क्या काम लाजवाब किया
उन्हीं को लाखों हसीनों में इंतेखाब किया
मेरी निगाह ने क्या
वो आये घर में बाहर आ के रुक गई जैसे
वो आये घर में बाहर आ के रुक गई जैसे
फिजा में फूलों की डाली सी झुक गई जैसे
कुछ इस अदा से किसी शोख ने हिजाब किया
कुछ इस अदा से किसी शोख ने हिजाब किया
मेरी निगाह ने क्या
वो ज़ुल्फ़-ए-नाज़ खुली खुल के कुछ ढलक सी गई
सितारे टूट पड़े चांदनी छलक सी गई
जो मैंने चेहरा-ए-जाना को बेनकाब किया
मेरी निगाह ने क्या काम लाजवाब किया
मेरी निगाह ने क्या
के मेरे गीत में वो रंग है नजाकत है
के मेरे गीत में वो रंग है नजाकत है
के सब उसी निगाह-ए-नाज़ की इनायत है
के मुझ से जर्रे को चमका के आफ़ताब किया
मेरी निगाह ने क्या काम लाजवाब किया
उन्हीं को लाखों हसीनों में इंतेखाब किया
Wednesday, 24 November 2010
कुछ ऐसे बंधन होते हैं-फ़रिश्ता या कातिल १९७७
आपको सन १९५९ की फिल्म सावन से एक युगल गीत सुनवाया था
लता और मुकेश का जिसका संगीत हंसराज बहल ने तैयार किया था।
आइये अब १८ साल बाद यानि कि १९७७ से एक गीत सुनवाते हैं। इस
मधुर गीत को संगीत की लहर पर चढ़ाया है कल्याणजी आनंदजी
ने। एक बात ज़रूर गौर फरमाएं की १८ साल बाद भी गायकों की आवाज़
का जादुई असर बरकरार है। कल्याणजी आनंदजी और हंसराज बहल
अलग अलग दौर के संगीतकार हैं, उनमे तुलना भी बेतुकी सी बात है।
उसके अलावा हंसराज बहल थे पंजाबी मूल के, तो कल्याणजी आनंदजी
की जोड़ी ठेठ गुजराती।
यहाँ केवल दोनों द्वारा तैयार कि गई सॉफ्ट माय लोदीज़ का जिक्र किया
गया है। फिल्म फ़रिश्ता या कातिल कोई बॉक्स ऑफिस पर कमाल
दिखाने वाली फिल्म नहीं थी। इसके बाकी के गीत भी शायद ही आपने
सुने हों।
शशि कपूर और रेखा पर ये मधुए गीत फिल्माया गया है। रेखा
का चेहरा कुछ गोल सा नज़र आता है इस गीत में जो उनके चेहरे की
सामान्य बनावट से थोडा अलग हट के दिख रहा है :प
रेगिस्तान की ख़ामोशी के साथ ये गीत कदम ताल मिलकर चलता सा
प्रतीत हो रहा है। हालाँकि समय के साथ साथ सुर ताल के संगम में
भी बदलाव आते चलते हैं फिर भी इसे अच्छे कर्णप्रिय गीतों की श्रेणी
में रखा जा सकता है। रेगिस्तान में फिल्माया गया सबसे कर्णप्रिय गीत
शायद फिल्म सेहरा का ही है जिसे आप सुन चुके हैं। फर्क सिर्फ इतना है
की सेहरा का फिल्मकार बेहतर था तो फ़रिश्ता या कातिल फिल्म के
कलाकार ज्यादा expressive।
वाकई, ज़िन्दगी में कुछ बंधन बिन बांधे जुड़ जाते हैं और जुड़ने के बाद
जीवन भर तड़पाते हैं। ऐसे बंधनों को अमूमन प्यार का बंधन कहा जाता
है।
कल्याणजी आनंदजी और इन्दीवर का साथ बहुत फिल्मों में रहा है। एक
बारगी सुनने में तो ये गीत इन्दीवर का लिखा सा लगता है, मगर जनाब
ये गीत अनजान ने लिखा है।
गीत के बोल:
कुछ ऐसे
कुछ ऐसे बंधन होते हैं
जो बिन बांधे बांध जाते हैं
कुछ ऐसे बंधन होते हैं
जो बिन बांधे बांध जाते हैं
जो बिन बंधे बांध जाते हैं
जो बिन बंधे बांध जाते हैं
वो जीवन भर तड़पाते हैं
कुछ ऐसे
कुछ ऐसे बंधन होते हैं
जो बिन बांधे बांध जाते हैं
जाने ये कैसा नाता है
हो ओ, जाने ये कैसा नाता है
जो बिन जोड़े जुड़ जाता है
एक दिन मन का पागल पंछी
बिन पंख लगे उड़ जाता है
सूरज छूने की कोशिश में
सूरज छूने की कोशिश में
पंछी के पर जल जाते हैं
कुछ ऐसे
कुछ ऐसे बंधन होते हैं
जो बिन बांधे बांध जाते हैं
जब प्यार की तपती राहों में
हो, ओ जब प्यार की तपती राहों में
दो प्यासे दिल मिल जाते हैं
फिर धुप छाओं बान जाती है
साँसों में फूल खिल जाते हैं
जागी आँखों के ये सपने
जागी आँखों के ये सपने
अक्सर मन को छल जाते हैं
कुछ ऐसे
कुछ ऐसे बंधन होते हैं
जो बिन बांधे बांध जाते हैं
जो बिन बंधे बांध जाते हैं
वो जीवन भर तड़पाते हैं
कुछ ऐसे बंधन होते हैं
जो बिन बांधे बांध जाते हैं
लता और मुकेश का जिसका संगीत हंसराज बहल ने तैयार किया था।
आइये अब १८ साल बाद यानि कि १९७७ से एक गीत सुनवाते हैं। इस
मधुर गीत को संगीत की लहर पर चढ़ाया है कल्याणजी आनंदजी
ने। एक बात ज़रूर गौर फरमाएं की १८ साल बाद भी गायकों की आवाज़
का जादुई असर बरकरार है। कल्याणजी आनंदजी और हंसराज बहल
अलग अलग दौर के संगीतकार हैं, उनमे तुलना भी बेतुकी सी बात है।
उसके अलावा हंसराज बहल थे पंजाबी मूल के, तो कल्याणजी आनंदजी
की जोड़ी ठेठ गुजराती।
यहाँ केवल दोनों द्वारा तैयार कि गई सॉफ्ट माय लोदीज़ का जिक्र किया
गया है। फिल्म फ़रिश्ता या कातिल कोई बॉक्स ऑफिस पर कमाल
दिखाने वाली फिल्म नहीं थी। इसके बाकी के गीत भी शायद ही आपने
सुने हों।
शशि कपूर और रेखा पर ये मधुए गीत फिल्माया गया है। रेखा
का चेहरा कुछ गोल सा नज़र आता है इस गीत में जो उनके चेहरे की
सामान्य बनावट से थोडा अलग हट के दिख रहा है :प
रेगिस्तान की ख़ामोशी के साथ ये गीत कदम ताल मिलकर चलता सा
प्रतीत हो रहा है। हालाँकि समय के साथ साथ सुर ताल के संगम में
भी बदलाव आते चलते हैं फिर भी इसे अच्छे कर्णप्रिय गीतों की श्रेणी
में रखा जा सकता है। रेगिस्तान में फिल्माया गया सबसे कर्णप्रिय गीत
शायद फिल्म सेहरा का ही है जिसे आप सुन चुके हैं। फर्क सिर्फ इतना है
की सेहरा का फिल्मकार बेहतर था तो फ़रिश्ता या कातिल फिल्म के
कलाकार ज्यादा expressive।
वाकई, ज़िन्दगी में कुछ बंधन बिन बांधे जुड़ जाते हैं और जुड़ने के बाद
जीवन भर तड़पाते हैं। ऐसे बंधनों को अमूमन प्यार का बंधन कहा जाता
है।
कल्याणजी आनंदजी और इन्दीवर का साथ बहुत फिल्मों में रहा है। एक
बारगी सुनने में तो ये गीत इन्दीवर का लिखा सा लगता है, मगर जनाब
ये गीत अनजान ने लिखा है।
गीत के बोल:
कुछ ऐसे
कुछ ऐसे बंधन होते हैं
जो बिन बांधे बांध जाते हैं
कुछ ऐसे बंधन होते हैं
जो बिन बांधे बांध जाते हैं
जो बिन बंधे बांध जाते हैं
जो बिन बंधे बांध जाते हैं
वो जीवन भर तड़पाते हैं
कुछ ऐसे
कुछ ऐसे बंधन होते हैं
जो बिन बांधे बांध जाते हैं
जाने ये कैसा नाता है
हो ओ, जाने ये कैसा नाता है
जो बिन जोड़े जुड़ जाता है
एक दिन मन का पागल पंछी
बिन पंख लगे उड़ जाता है
सूरज छूने की कोशिश में
सूरज छूने की कोशिश में
पंछी के पर जल जाते हैं
कुछ ऐसे
कुछ ऐसे बंधन होते हैं
जो बिन बांधे बांध जाते हैं
जब प्यार की तपती राहों में
हो, ओ जब प्यार की तपती राहों में
दो प्यासे दिल मिल जाते हैं
फिर धुप छाओं बान जाती है
साँसों में फूल खिल जाते हैं
जागी आँखों के ये सपने
जागी आँखों के ये सपने
अक्सर मन को छल जाते हैं
कुछ ऐसे
कुछ ऐसे बंधन होते हैं
जो बिन बांधे बांध जाते हैं
जो बिन बंधे बांध जाते हैं
वो जीवन भर तड़पाते हैं
कुछ ऐसे बंधन होते हैं
जो बिन बांधे बांध जाते हैं
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