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Friday, 28 October 2011

गलियों गलियों-स्वामी दादा १९८२

टी वी पर इतने सारे घोटाले दिखाए जाते हैं और इतने लुभावने कार्यक्रम
आते हैं कि आम आदमी भी करोडपति बन जाने के ख्वाब देखने लगता है।
मीडिया मसाले लगा कर घोटालों की ख़बरें पेश करता है। गौर करने लायक
बात ये है कि इन सबके बीच कहीं भी पांच रूपये के नोट और चिल्लर के गायब
हो जाने का समाचार नहीं मिलता है, जिसकी वजह से आज आम जनता काफी
परेशान और जबरन अनावश्यक वस्तुएं खरीदने को मजबूर है, जहाँ देखो चिल्लर
का टोटा या उसकी कमी का रोना।

अरबों रूपये के घोटाले होने के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था टिकी हुयी है, ये शायद
हमारा मजबूत विश्वास ही है जो सब झेल जाता है। और वो भी बर्दाश्त करने के माद्दे
से भी बहुत बाहर जा कर।

एक गीत है जिसमें पांच के नोट का जिक्र है, आज भी प्रासंगिक है। ये है सन १९८२ की
फिल्म स्वामी दादा का गीत। गीत कानों को सुकून प्रदान करने वाला है।



गीत के बोल:

पांच के नोट में अब क्या दम है ?
हो हो हो, दस का नोट सिगरट को भी कम है
हो हो हो, अब हरे नोट का मोल है क्या
सोचो कुछ ऊंची बात ज़रा
अब बात करो तो लाखों की
देखेंगे ख्वाब करोड़ों के

गलियों गलियों ख़ाक बहुत दिन हमने छानी
हो, बदला है अब दौर बादल जाएगी कहानी
हो, एक बंजारन कल बनेगी महलों की रानी
हो ओ ओ ओ
गलियों गलियों ख़ाक बहुत दिन हमने छानी
बदला है अब दौर बादल जाएगी कहानी
हो,एक बंजारन कल बनेगी महलों की रानी

हो ओ ओ ओ
गलियों गलियों ख़ाक बहुत दिन हमने छानी

आज संवर के देखा जो दर्पण
अपनी नज़र से शर्मा गई
किस के हुनर का चल गया जादू
कहाँ से कहाँ आ गई
ओ, मेरा हाथ

इस हीरे के हार में क्या है अपना मोल तो अंको
तुम क्या हो क्या बन सकते हो अपने दिल में झांको
झूठे नकली सपने देखे,
झूठे नकली सपने देखे, असली बात ना जानी
हो ओ ओ ओ

गलियों गलियों ख़ाक बहुत दिन हमने छानी
हो, बदला है अब दौर बादल जाएगी कहानी

मिल के मेरे साथ चलो तो वो दुनिया दिखलाऊँ
जीते जी वो जन्नत कैसे मिलती है बतलाऊँ
तुमको मसीहा मान लिया है अब जाना है और कहाँ
तुमसे मिले तो देखे उजाले वरना धुआं थे दोनों जहाँ
बदलें हम और यूँ बदलें,
बदलें हम और यूँ बदलें, हो दुनिया को हैरानी
हो ओ ओ ओ

गलियों गलियों ख़ाक बहुत दिन हमने छानी
हो, बदला है अब दौर बादल जाएगी कहानी
हो,एक बंजारन कल बनेगी महलों की रानी

हो ओ ओ ओ
गलियों गलियों ख़ाक बहुत दिन हमने छानी
.........................................
Galiyon galiyon-Swami Dada 1982

Sunday, 21 August 2011

मच गया शोर सारी नगरी रे-खुद्दार १९८२

आज जन्माष्टमी क पर्व है। आइये इस अवसर पर आपको एक गीत

सुनवाते हैं अमिताभ और परवीन बॉबी पर फिल्माया गया फिल्म

खुद्दार से है। मजरूह सुल्तानपुरी ने इस गीत को लिखा है और धुन

बनायीं है राजेश रोशन ने। इस गीत को गाया है लता मंगेशकर और

किशोर कुमार ने। मटकी फोड़ कार्यक्रम इस अवसर पर अवश्य होता

है। इस गीत में उसका भी आनंद ले लीजिये।











गीत के बोल:



मच गया शोर सारी नगरी रे, सारी नगरी रे

आया बिरज का बांका संभाल तेरी गगरी रे

आया बिरज का बांका संभाल तेरी गगरी रे

मच गया शोर सारी नगरी रे, सारी नगरी रे

आया बिरज का बांका संभाल तेरी गगरी रे

हो आया बिरज का बांका संभाल तेरी गगरी रे



देखो अरे देखो कहीं ऐसा न हो जाए

चोरी करे माखन तेरा जिया भी चुराए

देखो अरे देखो कहीं ऐसा न हो जाए

चोरी करे माखन तेरा जिया भी चुराए

अरे धमकता है इतना तू किसको

डरता है कौन आने दे उसको

डरता है कौन आने दे उसको

ऐसे न बहुत बोलो

मत ठुमक ठुमक दोलो

चिल्लाओगी बहुत गोरी

जब उलट देगा तोरी

गगरी आ के बीच डगरी रे



मच गया शोर सारी नगरी रे, सारी नगरी रे

आया बिरज का बांका संभाल तेरी गगरी रे

आया बिरज का बांका संभाल तेरी गगरी रे



ला रा ला ला ला रा ला ला ला

ला रा ला ला ला रा ला ला ला



जाने क्या करता अगर होता कहीं गोरा

जा के जमुना में ज़रा शक्ल देखे छोरा

जाने क्या करता अगर होता कहीं गोरा

जा के जमुना में ज़रा शक्ल देखे छोरा

बिंदिया चमकाती रस्ते में न जा

मनचला भी है गोकुल का राजा

मनचला भी है गोकुल का राजा

पड़ जाये नहीं पाला राधा से कहीं लाला

फिर रोयेगा गोविंदा मारेंगी ऐसा फंदा

गर गर से बंधेगी ऐसी चुनरी रे



मच गया शोर सारी नगरी रे, सारी नगरी रे

आया बिरज का बांका संभाल तेरी गगरी रे

हो ओ ओ आया बिरज का बांका संभाल तेरी गगरी रे



अरे मच गया शोर सारी नगरी रे, सारी नगरी रे

आया बिरज का बांका संभाल तेरी गगरी रे

हो आया बिरज का बांका संभाल तेरी गगरी रे

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Mach Gaya Shor Sari Nagri-Khuddar 1982

Wednesday, 3 August 2011

प्यार मुझसे जो किया तुमने-साथ साथ १९८२

अब सुनते हैं दूसरी अलग हट के बनी फिल्म से एक गीत। फिल्म का
नाम है साथ साथ इसका एक गीत आपको सुनवा चुके हैं पहले। अब सुनते
हैं दूसरा गीत जो जगजीत सिंह की आवाज़ में है। विडियो उपलब्ध नहीं है इसका
यू ट्यूब पर अतः ऑडियो से ही काम चला लें। बोल जावेद अख्तर के हैं और
संगीत कुलदीप सिंह का।





गीत के बोल:


प्यार मुझसे जो किया तुमने तो क्या पाओगी
प्यार मुझसे जो किया तुमने तो क्या पाओगी
मेरे हालत की आंधी में बिखर जओगी

प्यार मुझसे जो किया तुमने तो क्या पाओगी

रंज और दर्द की बस्ती का मैं बाशिन्दा हूँ
ये तो बस मैं हूँ के इस हाल में भी ज़िन्दा हूँ
ख्वाब क्यूं देखूँ वो कल जिसपे मैं शर्मिन्दा हूँ
मैं जो शर्मिन्दा हुआ तुम भी तो शरमाओगी

प्यार मुझसे जो किया तुमने तो क्या पाओगी

क्यूं मेरे साथ कोई और परेशान रहे
मेरी दुनिया है जो वीरान तो वीरान रहे
ज़िन्दगी का ये सफ़र तुमको तो आसान रहे
हमसफ़र मुझको बनओगी तो पछताओगी

प्यार मुझसे जो किया तुमने तो क्या पाओगी

एक मैं क्या अभी आयेंगे दीवाने कितने
अभी गूंजेगे मुहब्बत के तराने कितने
ज़िन्दगी तुमको सुनायेगी फ़साने कितने
क्यूं समझती हो मुझे भूल नही पाओगी

प्यार मुझसे जो किया तुमने तो क्या पाओगी
.......................................
Pyar mujhse jo kiya tumne-Saath saath 1982

Thursday, 21 July 2011

नशा ये कैसा..उडीबाबा उडीबाबा -विधाता १९८२

भोंपू और ग्रामोफोन से याद आया कि पड़ोस के मोहल्ले में एक
चच्चा रहा करते थे गानों के शौक़ीन। उनके पास एक बार हमने
फरमाइश की-चच्चा वो गाना तो सुनवा दो- का का कि की कु
कू कं कः उड़े बाबा, बड़े बाबा, छोटे बाबा। चच्चा ने गाने की
फजीहत पर पहले तो नाक भोंह सिकोड़ी फिर बोले ऐसे बेहूदा
गाने सुनते हो ! कुछ सहगल वेह्गल सुना करो। चच्चा शायद
वो फिल्म देख आये थे, वे फिल्मों के भी बड़े शौक़ीन थे और
फर्स्ट डे फर्स्ट शो के तकरीबन २०० से ज्यादा रिकॉर्ड उनके नाम
पर थे। टिकट लाइन की धींगामुश्ती में उनके कपडे भी कभी कभार
फट जाया करते। उनकी कलाबाजियों से ही हम अंदाज़ा लगाते कि
फिल्म देखना भी एक टेडी खीर हो सकता है।

८० के दशक में सुपरमैन के कॉमिक्स की एंट्री हुई अपने देश में।
उसने छोटे बड़े सभी को आकर्षित किया। उन छोटों और बड़ों में
बॉलीवुड के निर्देशक निर्माता भी शामिल हैं। उसका एक प्रभाव आप
इस गीत में देखेंगे।

संजू को फिल्म इंडस्ट्री में संजू बाबा बोला जाता है, उस हिसाब से
ये गीत बिलकुल सही फिट होता है सिचुऐशन पर ।




गीत के बोल:



आ आ
आ आ ई ई ऊ ऊ ऐ ऐ
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
आ आ
आ आ ई ई ऊ ऊ ऐ ऐ
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
आ आ
आ आ ई ई ऊ ऊ ऐ ऐ
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा

बाबा उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
बाबा उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा

नशा ये कैसा उडी बाबा
मुझे हो गया उडी बाबा
नशा ये कैसा मुझे हो गया
दिल मेरा खो गया
आ आ ई ई ऊ ऊ ऐ ऐ
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
आ आ ई ई ऊ ऊ ऐ ऐ
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
बाबा उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
बाबा उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा

हे,
हा आ आ आ, हा आ आ आ
हा आ आ आ, हा आ आ आ
बैंग बैंग, आ
बैंग बैंग, आ
बैंग बैंग, आ
बैंग
ओ मैं आ गयी जाने किधर
मुझको नहीं इसकी खबर
दीवानी लड़की ये लगती ऐसे दीवानों की महफ़िल है
यहाँ पे आना आसान हैं पर यहाँ से जाना मुश्किल है

उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
बाबा उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा

नशा ये कैसा उडी बाबा
मुझे हो गया उडी बाबा
नशा ये कैसा मुझे हो गया
दिल मेरा खो गया
आ आ ई ई ऊ ऊ ऐ ऐ
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
बाबा उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
बाबा उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा

हा आ आ आ, हा आ आ आ
हा आ आ आ, हा आ आ आ
बैंग बैंग, आ
बैंग बैंग, आ
बैंग बैंग, आ
बैंग
ओ कितनी हसीं ये रात है
क्या ये मेरी बारात है
हा हा, थोड़ी देर में तेरा दूल्हा राजा यहाँ पे आएगा
अपनी रानी को डोली में बिठा के तुझे ले जायेगा

उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
बाबा उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा

नशा ये कैसा उडी बाबा
मुझे हो गया उडी बाबा
नशा ये कैसा मुझे हो गया
दिल मेरा खो गया
आ आ ई ई ऊ ऊ ऐ ऐ
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
आ आ ई ई ऊ ऊ ऐ ऐ
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
बाबा उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
बाबा उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा

आ आ ई ई ऊ ऊ ऐ ऐ
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
आ आ ई ई ऊ ऊ ऐ ऐ
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
...............................
Nasha ye kaisa...udibaba-Vidhata 1982

Thursday, 3 February 2011

डुगडुगी बाज उठी-ये तो कमाल हो गया १९८२

इस गीत में नायक मदारी बन कर तमाशा दिखा रहा है।
फिल्म उद्योग में निर्देशक असली मदारी होता है जो अपने
बंदरों अर्थात पात्रों को जैसा उसका जी चाहे नचाता है।

फिल्म उद्योग में भी एक भेडचाल होती है। जैसे ही कोई
नए हीरो की फिल्म हिट हो गई उसे अपनी फिल्म में लेने वालों
की कतार लग जाती है। इस फिल्म की कहानी में नायक दोहरी
भूमिकाओं में है। फिल्म एक दूजे के लिए की अपार सफलता
ने कमल हासन के लिए हिंदी फिल्मों के दरवाजे खोल दिए।
कमल हासन एक उम्दा कलाकार और बेहद कुशल नर्तक हैं।
पहले वो केवल एक कुशल नर्तक थे लेकिन समय के साथ साथ
अभिनय में उन्होंने कई मुकाम हासिल कर लिए। तमिल और
तेलुगु सिनेमा में स्थापित होने के बाद ही वे हिंदी फिल्मों में दिखाई
दिए।

ये फिल्म बहुसितारा होने के बावजूद चली नहीं। कथानक कुछ
लचर किस्म का सा है। वैसे आकर्षण के लिए इसमें एक विलायती
नायिका को भी मौका दिया गया था अभिनय का। इन सबके बावजूद
केवल इसके गाने सुनाई दिए और धीरे धीरे जनता, सिवाए कमल
हासन और पूनम ढिल्लों के प्रशंसकों के, फिल्म को भूल गई।

अब साहब हमने तो इसे दो बार देखे है-एक बार सिनेमा हाल में
और एक बार किसी टीवी चैनल पर, तो हम तो इसको चाह कर
भी नहीं भुला पाते ना जी। अब फिल्म याद है तो गाने तो याद होंगे
ही। आपको इस फिल्म का एक गीत सुनवाते हैं आज।

गीत में आपको यादों की बारात फेम विजय अरोड़ा भी नज़र आयेंगे।
विजय अरोड़ा फिल्म और टेलिविज़न संस्थान पुणे से स्वर्ण पदक
प्राप्त कलाकार हैं। आपने पाठ्यक्रम में कितने भी झंडे गाड़े हों, आपकी
किस्मत में गोल्ड मेडल नहीं छपा हो तो आप एक सीमित चढ़ाई ही
जीवन में चढ़ पाते हैं ।

उल्लेखीय है कि जिस शख्स ने ये विडियो अपलोड किया है यू ट्यूब
पर, वो शायद विलायती अभिनेत्री ऐन का भाई है , जैसा कि उसने
गीत के विवरण में लिखा है। इसको कहते है सही मायने में देसी नौटंकी
का ग्लोबेलाईजेशन । विलायती नायिका को बोलिवुडीये लटके झटके दिखाते
देखना अनूठा अनुभव है।



गीत के बोल :

गीत के बोलों के लिए चटका लगायें।

Saturday, 29 January 2011

कितनी खूबसूरत ये तस्वीर है-बेमिसाल १९८२

अमिताभ की कई खुशनुमा सी फ़िल्में भी आयीं। ये फिल्म उतनी
खुशनुमा नहीं है जितनी नाम से या गीतों से लगती है। इसका अंत
दुखांत है और थोड़ा अलग हटके है। फिल्म में दो नायक हैं और
एक नायिका। कन्फ्यूज़न बरकरार रहता है जब तक एक नायक
और एकमात्र नायिका की शादी नहीं हो जाती। इस गीत में तीनों
चरित्र एक गीत गा रहे हैं और कश्मीर कि प्रशंसा में कसीदे काढ रहे
हैं। विनोद मेहरा और रखी हैं अमिताभ के अलावा इस गीत में।
आनंद बक्षी के लिखे गीत को स्वर दिया है लता, किशोर और सुरेश
वाडकर ने। संगीत है आर डी बर्मन का।



गीत के बोल:


कितनी खूबसूरत ये तस्वीर है
मौसम बेमिसाल बेनज़ीर है
ये कशमीर है, ये कशमीर है

पर्वतों के दरमियाँ हैं
जन्नतों की तरमियाँ हैं
आज के दिन हम यहाँ हैं
साथी ये हमारी तकदीर है

कितनी खूबसूरत ये तस्वीर है
ये कशमीर है, ये कशमीर है

इस ज़मीन से आसमान से
फूलों के इस गुलसिताँ से
जाना मुश्किल है यहाँ से

इस ज़मीन से आसमान से
फुलों के इस गुलसिताँ से
जाना मुशकिल है यहाँ से
तौबा ये हवा है या जंज़ीर है

कितनी खूबसूरत ये तस्वीर है
ये कशमीर है, ये कशमीर है

ऐ सखी देख तो नज़ारा
एक अकेला बेसहारा
कौन है वो हम कहारा
मुझसा कोई आशिक़ ये दिलजीर है

अरे, कितनी खूबसूरत ये तस्वीर है
ये कश्मीर है, ये कश्मीर है
..............................................
Kitni khoobsurat ye tasveer hai-Bemisaal 1982

Wednesday, 19 January 2011

उस्तादी उस्ताद से-उस्तादी से १९८२

फ़िल्मी क़व्वाली एक और ले आये हैं आपकी खिदमत में। ये
फिल्माई गई है रंजीता और विनोद मेहरा पर। थोड़ी कॉमेडी
वाली इस क़व्वाली में हैदराबाद से गाज़ियाबाद की सैर करवा दी
गई है। गीत में आपको मिथुन और गुज़रे ज़माने के हिट हीरो
भगवान भी दिखाई देंगे। गनीमत है जो खातून इसमें गा रही हैं
उन्होंने अपने तुगलकाबाद से होने का दावा पेश नहीं किया।





गीत के बोल :

इश्क का जो दावा जो करते थे
सारी महफ़िल से कहते थे
हाँ, इश्क का जो दावा जो करते थे
सारी महफ़िल से कहते थे
हुस्न का तोड़ेंगे गुरूर वो
जाने फिर मेरे हुज़ूर वो
क्यूँ नहीं आये यहाँ
हो चली है शब् जवान

नहीं अच्छी मोहतरमां
इस कदर भी बेसब्री
हम वो उस्ताद हैं वो
जो कभी हारे ना बाज़ी, हाँ
मर्द का यूँ उलझना
वो भी औरत से तौबा
एक उस्ताद की ये
नहीं है शान क़िबला

कौन असली है डर है
कौन असली है कौन नकली है
कौन असली है डर है
राज़ कैसे खुलेगा
अरे हट
असली हैदर हैं हम
हैदराबाद के
असली हैदर हैं हम
हैदराबाद के
नहीं चलेगी
नहीं चलेगी, हाँ
नहीं चलेगी नहीं चलेगी
उस्तादी उस्ताद से
चुप
बागी हैदर हैं हम
गाज़ियाबाद के
बागी हैदर हैं हम
गाज़ियाबाद के
नहीं चलेगी नहीं चलेगी
नहीं चलेगी नहीं चलेगी
उस्तादी उस्ताद से

असली हैदर हैं हम
हैदराबाद के
हाँ, बागी हैदर हैं हम
गाज़ियाबाद के

हमसे उलझा है जो वो हारा है
छोड़ दो जिद ये माल हमारा है
जान दे देंगे जिद ना छोड़ेंगे
ओ माल हाथों से जाने ना देंगे

तू चीज़ की ऐ
निब्बू बांध निचोड़ा तैनू
क्या चीज़ छिब्बा ते
लगती वांग दिलो वान तैनू
सुनो गज़ियाबादी
खुद को ना समझो बागी
अरे जा हैदराबादी
उड़ा जायेंगे बाज़ी
आ अगर ऐसा दावा है
तो फिर हम भी हैं राज़ी

बच के
टूटे ना शीशा टकरा के फौलाद से
टूटे ना शीशा टकरा के फौलाद से

अजी नहीं चलेगी नहीं चलेगी
नहीं चलेगी नहीं चलेगी
उस्तादी उस्ताद से

असली हैदर हैं हम
हैदराबाद के
बागी हैदर हैं हम
गाज़ियाबाद के
....................................
Ustadi ustad se-Ustadi Ustad se 1982

Monday, 27 December 2010

कोई ये कैसे बताये-अर्थ १९८२

एक सदाबहार गीत-नाम गुम जायेगा सुनते हुए इस गीत का ख्याल आया।
मस्तिष्क में ऐसे गीतों से धुंधली यादें दृष्टिपटल पर कुछ साफ़ सी होकर
उभरना शुरू हो जाती हैं। ऐसा लगता है कहीं कुछ छूट सा गया है कुछ
समय के बहाव के साथ लपकना रह गया। ऐसे ही सुबह दोपहर शाम गुज़र
जाती है और मन कुछ अज्ञात की तलाश में इधर उधर भटकना जारी रखता
है। रोजमर्रा की दौड़ तो बस एक बहाना है मन को थोड़ी देर के लिए फुसलाने
का।

विवाहेतर संबंधों पर फ़िल्में बनती रही हैं हिंदी सिनेमा जगत में परन्तु उनको
दर्शकों की खुली स्वीकृति कभी भी प्राप्त नहीं हुई। ऐसी फ़िल्में अक्सर पुरुष ही
ज्यादा देखने जाया करते। कुछ अतिरिक्त मनोबल वाली महिलाएं भी देख लिया
करती मगर अकेले नहीं, अपने खुले विचारों वाले पतियों के साथ।वैसे मनोबल
के मामले में महिलाएं पुरुषों से मीलों आगे हैं। ये तो प्रकट मनोबल की बात
हो रही है बस। जो अप्रकट है वो अतुलनीय है।

कई बार मैं सोचता हूँ की कैफ़ी आज़मी ने शबाना के लिए कुछ ख़ास गीत लिखे
हैं और कभी लगता ये मन का वहम है। कैफ़ी तो लाजवाब शायर हैं, शबाना पर
फिल्माए गए गीत का बेहतर होना संयोग मात्र हो सकता है। ऐसी कई फ़िल्में हैं
जिनमे शबाना ने अभिनय किया है और फिल्म के गीत कैफ़ी आज़मी के लिखे
हुए हैं।



गीत के बोल:

कोई ये कैसे बताये के वो तनहा क्यूँ है
वो जो अपना था, वो और किसी का क्यों है
यही दुनिया हैं तो फिर, एसी ये दुनिया क्यों है
यही होता हैं तो, आखिर यही होता क्यों है?

इक ज़रा हाथ बढ़ा दे तो, पकड़ ले दामन
उस के सीने में समा जाए, हमारी धड़कन
इतनी कुर्बत हैं तो फिर फासला इतना क्यों है?

दिल-ए-बरबाद से निकला नहीं अब तक कोई
इक लुटे घर पे दिया करता हैं दस्तक कोई
आस जो टूट गयी हैं फिर से बंधाता क्यों है?

तुम मसर्रत का कहो या इसे गम का रिश्ता
कहते हैं प्यार का रिश्ता हैं जनम का रिश्ता
है जनम का जो ये रिश्ता तो बदलता क्यों है?

Thursday, 16 December 2010

जनम जनम का साथ है हमारा तुम्हारा -भीगी पलकें १९८२

कुछ फिल्मों ने प्रेमियों के मन पर काफी प्रभाव डाला
उनमे से एक है-भीगी पलकें जो सन १९८२ में आई थी।
राज बब्बर और स्मिता पाटिल ने इसमें अभिनय किया है
जो बाद में एक दूसरे के जीवन साथी भी बन गए। ये गीत
मानो उन्हीं के लिए लिखा सा प्रतीत होता है। ये है लता और
रफ़ी के गाये युगल गीतों में से आखिरी एक गीत। इसकी
रेकॉर्डिंग सन १९८० या उससे पहले हो गई होगी । फिल्म
का नाम है-भीगी पलकें जिसमे कलाकारों की पलकें कम
भीगी दिखीं और दर्शकों कि ज्यादा और ये शायद दर्शकों के
लिए ही ऐसा नाम रखा गया होगा। फिल्म को महिला दर्शकों
ने काफी पसंद किया।

गीत की बात की जाए- गीत को सदाबहार गीत का दर्ज़ा प्राप्त
है। गीत लिखा है एम्. जी. हशमत ने और धुन बनाई है जोड़ी
जुगल किशोर-तिलक राज ने। इस फिल्म में स्मिता पाटिल का
अभिनय बेजोड़ है और राज बब्बर उस लेवल पर आने के लिए
संघर्षरत ही दिखे हैं। राज बब्बर समर्थ कलाकार हैं और अपने
कई समकालीनों से बेहतर मगर अभिव्यक्ति के मामले में
स्मिता उनसे कई कदम आगे हैं। फिल्म में अगर केवल एक
नाम स्मिता पाटिल का हो तो बस यही बहाना बहुत है फिल्म
देखने का।



गीत के बोल:

जनम जनम का साथ हैं तुम्हारा हमारा, तुम्हारा हमारा
अगर ना मिलते इस जीवन में, लेते जनम दोबारा

जनम जनम का साथ हैं तुम्हारा हमारा, तुम्हारा हमारा
अगर ना मिलते इस जीवन में, लेते जनम दोबारा

जब से घूमे धरती, सूरज चाँद सितारे
तब से मेरी निगाहें, समझे तेरे इशारे
रूप बदल कर साजन मैंने, फिर से तुम्हे पुकारा

जनम जनम का साथ हैं तुम्हारा हमारा, तुम्हारा हमारा
अगर ना मिलते इस जीवन में, लेते जनम दोबारा

प्यार के पंख लगा के, दूर कहीं उड़ जायें
जहाँ हवाएं गम की, हम तक पहुच ना पायें
खुशियों की ख़ुशबू से महके, घर संसार हमारा

जनम जनम का साथ हैं तुम्हारा हमारा, तुम्हारा हमारा
अगर ना मिलते इस जीवन में, लेते जनम दोबारा
...........................................
Janam Janam Ka Sath Hai Hamara Tumhara-Bheegi Palkein 1982
 
 
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