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Friday, 27 January 2012

मैं हूँ झुम झुम झुम झुम झुमरू-झुमरू १९६१

गीतों को सुनते सुनते कुछ अंतराल के बाद उसकी बारीकियां पकड़ में
आने लगती हैं और गुनगुनाने वाले का मुगालता ख़त्म हो जाता है कि वह
इसे बढ़िया ढंग से गा रहा है। ये बात दीगर है कि कुछ ओर्केस्ट्रा के कलाकारों
को ये मुगालता ता-उम्र बना रहता है। आज आपको एक गीत ऐसा सुनवाते हैं
जिसे मैंने जितनी बार इधर उधार सुना बिगड़ा हुआ ही सुना। इसकी हू-ब-हू
कॉपी करना असंभव है। गीत कठिनतम गीतों में से एक है और गायक का
अनूठा अंदाज़ इसमें अपने चरम पर है।

फिल्म का नाम है झुमरू और ये फिल्म का शीर्षक गीत है। गीत लिखा है
मजरूह सुल्तानपुरी ने और इसकी धुन स्वयं किशोर कुमार ने बनाई है ।

गीत के बोलों में जो योड्लिंग के साथ साथ कुछ अन्य शब्दों का समावेश भी
है जिसे आप स्वयं समझिये।



गीत के बोल:

मैं हूँ झुम झुम झुम झुम झुमरू
फक्कड़ घुँघरू बन के घूमूं
मैं ये प्यार का गीत सुनाता चला
मंजिल पे मेरी नज़र
मैं दुनिया से बेखबर
बीती बातों पे धूल उड़ाता चला

मैं हूँ झुम झुम झुम झुम झुमरू
फक्कड़ घुँघरू बन के घूमूं
मैं ये प्यार का गीत सुनाता चला
मंजिल पे मेरी नज़र
मैं दुनिया से बेखबर
बीती बातों पे धूल उड़ाता चला


मैं हूँ झुम झुम झुम झुम झुमरू
फक्कड़ घुँघरू बन के घूमूं
साथ में हमसफ़र ना कोई कारवां,
भोला भाला सीधा साधा
लेकिन दिल का हूँ शहज़ादा
है ये मेरी ज़मीन ये मेरा आसमान


मैं हूँ झुम झुम झुम झुम झुमरू
फक्कड़ घुँघरू बन के घूमूं
प्यार सीने मैं है हर किसी के लिए
मुजको प्यारा हर इंसान
दिलवालों पे हूँ कुर्बान
ज़िन्दगी है मेरी ज़िन्दगी के लिए


मैं हूँ झुम झुम झुम झुम झुमरू
फक्कड़ घुँघरू बन के घूमूं
मैं ये प्यार का गीत सुनाता चला
मंजिल पे मेरी नज़र
मैं दुनिया से बेखबर
बीती बातों पे धूल उड़ाता चला

....................................
Main hoon jhum jhum jhum jhum jhumroo-jhumroo 1961

Saturday, 29 October 2011

तौबा तौबा तौबा -पासपोर्ट १९६१

कुछ फ़िल्में भूली बिसरी कहलाती हैं तो कुछ भूली भटकी और बची-खुची
फिल्मों को गुम भुला दी गई फ़िल्में बोला जाता है। बोलने के तरीके बस
जुदा हैं सबके, आशय उनका एक ही रहता है।

एक गुमनाम इस फिल्म पासपोर्ट से एक थोड़ा लोकप्रिय गीत सुनवाया
था आपको पहले। इसी फिल्म से गीता दत्त का गाया अगला गीत सुनते हैं
जो हेलन पर फिल्माया गया है। जनता एक मदिरालय में एकत्रित है और
इसमें एक नर्तकी नृत्य कौशल दिखलाते हुए गा रही है। हेलन को ऐसे दृश्यों
में आपने कई फिल्मों में देखा होगा। ऐसे गीतों के लिए पहले के समय में
गीता दत्त की आवाज़ को प्राथमिकता दी जाती थी वो स्थान बाद में आशा भोंसले
की आवाज़ ने ले लिया।

गीत लिखा है कमर जलालाबादी ने बाद इसकी धुन बनाई है संगीतकार जोड़ी
कल्याणजी-आनंदजी ने। कल्याणजी आनंदजी ने अपनी शुरूआती फिल्मों
में गीता दत्त से उन्होंने कुछ गीत अवश्य गवाए। गीत में आपको गुज़रे
ज़माने के मशहूर खलनायक के. एन. सिंह और चरित्र अभिनेता नजीर हुसैन
भी दिखलाई दे जायेंगे।





गीत के बोल:

तौबा तौबा तौबा
हॉय तौबा मेरी मान
तौबा तौबा तौबा
ओ तौबा मेरी मान
ले के मेरे दिल को
बनो ना बेईमान
हो ले के मेरे दिल को
बनो ना बेईमान

तौबा तौबा तौबा
हो तौबा मेरी मान
तौबा तौबा तौबा
हो तौबा मेरी मान
ले के मेरे दिल को
बनो ना बेईमान
हो ले के मेरे दिल को
बनो ना बेईमान

जाने चमन की रंगीन बहारें
किस को पुकारें, किसको पुकारें
जाने चमन की रंगीन बहारें
किस को पुकारें, किसको पुकारें
देखी है ऐसी बहारें कहाँ

तौबा तौबा तौबा
हो तौबा मेरी मान
तौबा तौबा तौबा
हो तौबा मेरी मान
ले के मेरे दिल को
बनो ना बेईमान
हो ले के मेरे दिल को
बनो ना बेईमान


दुनिया में लाखों बांके जवान हैं
मेरी अदा पे सब मेहरबान हैं
दुनिया में लाखों बांके जवान हैं
मेरी अदा पे सब मेहरबान हैं
तुमसे ही ज़ालिम को दिल क्यूँ दिया

तौबा तौबा तौबा
हो तौबा मेरी मान
तौबा तौबा तौबा
हो तौबा मेरी मान
ले के मेरे दिल को
बनो ना बेईमान
हो ले के मेरे दिल को
बनो ना बेईमान

हम ने तुम्हीं से आँख मिलायी
महफ़िल में क्यूँ ये तन्हाई
हम ने तुम्हीं से आँख मिलायी
महफ़िल में क्यूँ ये तन्हाई
हम हैं तुम्हारे तुम्हारी कसम

तौबा तौबा तौबा
हो तौबा मेरी मान
तौबा तौबा तौबा
हो तौबा मेरी मान
ले के मेरे दिल को
बनो ना बेईमान
हो ले के मेरे दिल को
बनो ना बेईमान
................................
Tauba tauba ho-Passport 1961

Sunday, 11 September 2011

जाने कैसा छाने लगा नशा ये प्यार का-ज़बक १९६१

फिल्म ज़बक और फिल्म काली टोपी ला रुमाल का संगीत एक जैसा सुनाई
पढता है, क्यूँ ना हो, दोनों फिल्मों में चित्रगुप्त का संगीत जो है। सन ६१ से
रंगीन फिल्मों का दौर शुरू हुआ, ऐसा कहा जाता । कुछ फ़िल्में आधी रंगीन
बनीं तो कुछ पूरी रंगीन। ज़बक का किस्सा भी कुछ ऐसा ही है। फिल्म के
निर्देशक हैं होमी वाडिया। वाडिया पौराणिक और ऐतिहासिक फिल्मों के लिए
जाने जाते हैं। गीत प्रेम धवन ने लिखा है और गा रही हैं लता मंगेशकर।





गीत के बोल:


जाने कैसा छाने लगा नशा ये प्यार का
थोड़ा थोड़ा आने लगा मज़ा बहार का
जाने कैसा छाने लगा नशा ये प्यार का
थोड़ा थोड़ा आने लगा मज़ा बहार का

दिल जो मिले, गुल से खिले, जान गए हमराज़ नए
दिल जो मिले, गुल से खिले, जान गए हमराज़ नए
तुझसे सनम, तेरी कसम, सीख किए अंदाज़ नए
गई दिलको उड़ा, तेरी शोख़ अदा, मेरा बस न चला

जाने कैसा छाने लगा नशा ये प्यार का
थोड़ा थोड़ा आने लगा मज़ा बहार का

दिल थे जवां, रात हसीं ऐसे में तुमसे आँख लड़ी
दिल थे जवां, रात हसीं ऐसे में तुमसे आँख लड़ी
कैसे बुझे दिलके लगी अब तो ये मुश्किल आन पड़ी
ऐसा दर्द मिला, नहीं जिसकी दवा, तेरे प्यार के सिवा

जाने कैसा छाने लगा नशा ये प्यार ने
थोड़ा थोड़ा आने लगा मज़ा बहार का
................................................
Jaane kaisa chhane laga-Zabak 1961

Saturday, 6 August 2011

बादलों बरसो नयन की कोर से-सम्पूर्ण रामायण १९६१

फिल्म सम्पूर्ण रामायण से एक गीत सुनिए लाता मंगेशकर की आवाज़ में.
गीत भरत व्यास का है और संगीत वसंत देसाई का. अनीता गुहा नाम की
अभिनेत्री पर इसे फिल्माया गया है. भरत व्यास के गीत में आप फ़िल्मी
गैर फ़िल्मी दोनों प्रकार की कविता का आनंद ले सकते हैं. फ़िल्मी कविता
में कभी कभार छेड़-छाड़ हो जाती है धुन बनाते वक्त.

सुगठित भारी काया और गोल भरे चेहरे वाली अभिनेत्री अनीता गुहा धार्मिक
फिल्मों में काफी दिखाई दीं. गौरतलब है उन्होंने किशोर कुमार के साथ फिल्म
चाचा जिंदाबाद में काम किया है.







बादलों
बादलों बरसो नयन की कोर से
बिजलियों कड़को ह्रदय की ओर से
ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
बादलों बरसो नयन की कोर से

ऐ घटाओं गर्जना को थाम लो
ऐ घटाओं गर्जना को थाम लो
आज मेरे करुण स्वर से काम लो
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
आज मेरे,
आज मेरे करुण स्वर से काम लो
बंध गया सावन नयन की डोर से

बादलों
बादलों बरसो नयन की कोर से

ज़हर को अमृत समझ कर पी रही
ज़हर को अमृत समझ कर पी रही
मीन जल बिन दीन हो कर जी रही
प्राण तड़पे भाग्य के झकझोर से

बादलों
बादलों बरसो नयन की कोर से
बिजलियों कड़को ह्रदय की ओर से
ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
बादलों बरसो नयन की कोर से
....................................
Badlon barso nayan ki kor se-Sampoorna Ramayana 1961

Wednesday, 3 August 2011

जाने कैसे सपनों में-अनुराधा १९६१

श्वेत श्याम युग से एक मधुर गीत पेश है सन १९६१ से। फिल्म का

नाम है अनुराधा। इस फिल्म के साथ जो हस्तियाँ जुडी हुई हैं उनके

बारे में थोड़ी बकर बकर कर लेते हैं।



फिल्म के संगीतकार हैं प्रख्यात सितार वादक पंडित रविशंकर। फिल्म

कि नायिका हैं ख्यात सुंदरी लीला नायडू जिन्होनें गिनी चुनी फ़िल्में कीं

फिल्म के नायक है बलराज साहनी जिन्होंने फिल्म में एक डॉक्टर की

भूमिका निभाई है। फिल्म का निर्देशन प्रख्यात निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी

ने किया है। फिल्म के गीत लिखे है शैलेन्द्र ने।









गीत के बोल:



जाने कैसे सपनों मैं खो गयी अँखियां

मैं तो हूँ जागी मोरी सो गयी अँखियां



जाने कैसे सपनों मैं खो गयी अँखियां

मैं तो हूँ जागी मोरी सो गयी अँखियां



अजब दीवानी भई मोसे अन्जानी भई

अजब दीवानी भई मोसे अन्जानी भई

पल में पराई देखो हो गयी अँखियां

मैं तो हूँ जागी मोरी सो गयी अँखियां



जाने कैसे सपनों मैं खो गयी अँखियां

मैं तो हूँ जागी मोरी सो गयी अँखियां



मन उजियारा छाया, जग उजियारा छाया

मन उजियारा छाया, जग उजियारा छाया

जगमग दीप संजो गयी अँखियां

मैं तो हूँ जागी मोरी सो गयी अँखियां



जाने कैसे सपनों मैं खो गयी अँखियां

मैं तो हूँ जागी मोरी सो गयी अँखियां



कोई मन भा गया जलवा जला गया

कोई मन भा गया जलवा जला गया

मन के दो मोतिया पिरो गयी अँखियाँ





जाने कैसे सपनों मैं खो गयी अँखियां

मैं तो हूँ जागी मोरी सो गयी अँखियां

...................................

Jaane kaise sapnon mein-Anuradha 1961

Tuesday, 19 July 2011

ठंडी हवा ये चांदनी सुहानी-झुमरू १९६१

कुछ सदाबहार धुनें दूसरे देशों की भीं सदाबहार धुनें हुआ करती हैं.
सन १९५५ के जूलियस ला रोसा के "डोमानी" को ही लीजिए. ये
आनंदित करने वाली धुन है. बोल आपके समझ आयें तो मुझे
भी मदद ज़रूर कीजियेगा समझने में.

सन १९६१ में इसका देसी संस्करण अवतरित हुआ फिल्म झुमरू में.
इस गीत को किशोर के सबसे ज्यादा पसंद किये जाने वाले गीतों
में स्थान प्राप्त है. गीत का देसीकरण होने पर उसमें आशा भोसले
की आवाज़ में शुरुआती गुनगुनाहट और किशोर की योडलिंग मिलायी
गयी-लीजिए तैयार एक कर्णप्रिय हिंदी गीत. फिल्म के गीत मजरूह
सुल्तानपुरी ने लिखे हैं और संगीत स्वयं किशोर कुमार का है.

इसको कहते हैं अच्छे संगीत का ग्लोबलायिजेशन. ये होना ज़रूर चाहिए
मगर मर्यादाओं के भीतर. क्रेडिट देने के मामले में हम हमेशा पीछे ही
रहते हैं. यू ट्यूब पर गीत के नीचे छपे कमेन्ट ज़रूर पढ़ें, आनंद आएगा.




गीत के बोल:

ठण्डी हवा ये चाँदनी सुहानी
ऐ मेरे दिल सुना कोई कहानी
लम्बी सी एक डगर है ज़िंदगानी
ऐ मेरे दिल सुना कोई कहानी

आ हा हा आ, हा आ आ हा हा

सारे हसीं नज़ारे, सपनों में खो गये
सर रख के आसमाँ पे, पर्वत भी सो गये
मेरे दिल, तू सुना, कोई ऐसी दास्तां
जिसको सुनकर, मिले चैन मुझे मेरी जाँ

मंज़िल है अन्जानी
ठण्डी हवा ये चाँदनी सुहानी
ऐ मेरे दिल सुना कोई कहानी

ऐसे मैं चल रहा हूँ पेड़ों की छाँव में
जैसे कोई सितारा बादल के गाँव में
मेरे दिल तू सुना, कोई ऐसी दास्तां
जिसको सुनकर, मिले चैन मुझे मेरी जाँ

मंज़िल है अन्जानी
ठण्डी हवा ये चाँदनी सुहानी
ऐ मेरे दिल सुना कोई कहानी

थोड़ी सी रात बीती, थोड़ी सी राह गई
खामोश रुत ना जाने, क्या बात कह गई
मेरे दिल तू सुना, कोई ऐसी दास्तां
जिसको सुनकर, मिले चैन मुझे मेरी जाँ

मंज़िल है अन्जानी
ठण्डी हवा ये चाँदनी सुहानी
ऐ मेरे दिल सुना कोई कहानी

ठण्डी हवा ये चाँदनी सुहानी
ऐ मेरे दिल सुना कोई कहानी
लम्बी सी एक डगर है ज़िंदगानी
ऐ मेरे दिल सुना कोई कहानी
....................................
Thandi hawa ye chandni suhani-Jhumroo 1961

Monday, 11 July 2011

ऐहसान तेरा होगा मुझ पर २-जंगली १९६१

लता की आवाज़ में ये गीत आप सुन चुके हैं अब सूना
जाए रफ़ी की आवाज़ में जो ज्यादा लोकप्रिय है. शम्मी कपूर
इसको परदे पर गा रहे हैं. वो जो अलसाया नशीलापन है जिनमें
ये पंक्तियाँ गई जा रही हैं- "रोने कहोगे रो लेंगे अब" , वो रफ़ी
की आवाज़ की एक विशेष खूबी है.



गीत के बोल:

ऐहसान तेरा होगा मुझ पर
दिल चाहता है वो कहने दो, मुझे
तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे
पलकों की छाँव में रहने दो

ऐहसान तेरा होगा मुझ पर
दिल चाहता है वो कहने दो, मुझे
तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे
पलकों की छाँव में रहने दो

ऐहसान तेरा होगा मुझ पर

तुमने मुझको हँसना सिखाया
तुमने मुझको हँसना सिखाया
रोने कहोगे रो लेंगे अब
आँसू का हमारे ग़म ना करो
वो बहते तो बहने दो, मुझे
तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे
पलकों की छाँव में रहने दो

ऐहसान तेरा होगा मुझ पर

चाहे बना दो चाहे मिटा दो
चाहे बना दो चाहे मिटा दो
मर भी गए तो देंगे दुआएँ
उड़-उड़ के कहेंगी खाक सनम
ये दर्द-ए-मुहब्बत सहने दो, मुझे
तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे
पलकों की छाँव में रहने दो

ऐहसान तेरा होगा मुझ पर
दिल चाहता है वो कहने दो, मुझे
तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे
पलकों की छाँव में रहने दो
..............................
Ehsan tera hoga mujh par 2-Junglee

Wednesday, 6 July 2011

तसवीर तेरी दिल में-माया १९६१

फिल्म माया के गीत में वायलिन की आवाज़ का जिक्र हम कर चुके
हैं अब सुनिए बांसुरी की मनमोहक तान वाला मधुर युगल गीत।
इसे गाया है लता और रफ़ी ने। ये गीत भी ऊंची तान पर जाता
है और इसे गुनगुनाना आसान नहीं है जबकि सुननेवाला असफल
कोशिश ज़रूर करता है। गीत फिल्माया गया है देव आनंद और माला
माला सिन्हा पर। बोल मजरूह के हैं और संगीत सलिल चौधरी का। गीत
बेहद रोमांटिक है और इसकी सादगी के सभी कायल हैं। सरल और
सौम्य तरीके से अपनी भावनाओं का इज़हार कैसे किया जाये इस
गीत से सीखा जा सकता है।



गीत के बोल :

तसवीर तेरी दिल में,
जिस दिन से उतारी है,

तसवीर तेरी दिल में,
जिस दिन से उतारी है,
फिरूँ तुझे संग ले के,
नए-ऩए रंग ले के,
सपनों की महफिल में

तसवीर तेरी दिल में,
जिस दिन से उतारी है,
फिरूँ तुझे संग ले के,
नए-ऩए रंग ले के,
सपनों की महफिल में

तसवीर तेरी दिल में

माथे की बिंदिया तू है सनम,
नैनों का कजरा पिया तेरा ग़म
माथे की बिंदिया तू है सनम,
नैनों का कजरा पिया तेरा ग़म
नैन के नीचे-नीचे, रहूँ तेरे पीछे-पीछे,
चलूँ किसी मंजिल में

तसवीर तेरी दिल में,
जिस दिन से उतारी है,
फिरूँ तुझे संग ले के,
नए-ऩए रंग ले के,
सपनों की महफिल में

तसवीर तेरी दिल में

तुमसे नज़र जब गई है मिल,
जहाँ हैं कदम तेरे वहीं मेरा दिल
तुमसे नज़र जब गई है मिल,
जहाँ हैं कदम तेरे वहीं मेरा दिल
झुकें जहाँ पलकें तेरी, खुलें जहाँ ज़ुल्फें तेरी,
रहूँ उसी मंज़िल में

तसवीर तेरी दिल में,
जिस दिन से उतारी है,
फिरूँ तुझे संग ले के,
नए-ऩए रंग ले के,
सपनों की महफिल में

तसवीर तेरी दिल में

तूफ़ान उठाएगी दुनिया मगर,
रूक ना सकेगा दिल का सफ़र
तूफ़ान उठाएगी दुनिया मगर,
रूक ना सकेगा दिल का सफ़र
यूँ ही नजर मिलती होगी,
यूँ ही शमाँ जलती होगी,
तेरी-मेरी मंजिल में।

तसवीर तेरी दिल में,
जिस दिन से उतारी है,
फिरूँ तुझे संग ले के,
नए-ऩए रंग ले के,
सपनों की महफिल में

तसवीर तेरी दिल में

............................
Tasveer teri dil mein-Maya 1961

Saturday, 18 June 2011

ऐहसान तेरा होगा मुझ पर १ -जंगली १९६१

आपको एक मधुर और लोकप्रिय गीत सुनवाते हैं फिल्म जंगली से।

इस फिल्म से दूसरा गीत पेश कर रहे हैं ब्लॉग पर। लता मंगेशकर

की आवाज़ में ये गीत फिल्माया गया है सायरा बानो पर। नायिका गीत

के माध्यम से नायक से मोहब्बत कबूल फरमाने की गुज़ारिश कर रही

है। युवा सायरा बानो और युवावस्था की आखिरी सीढ़ी पर खड़े

वाले शम्मी की ये फिल्म जनता द्वारा बेहद पसंद की गई, विशेषकर

इसके गीतों की वजह से। हसरत जयपुरी का लिखा हुआ गीत है और

संगीत शंकर जयकिशन ने तैयार किया है। गीत के अंतरे में लता की

आवाज़ को आप सुरों की ऊंची पट्टी पर पहुँचते पाएंगे। ये केवल एक

दो शब्दों तक ही सीमित है मगर काफी कष्टदायी होता है किसी भी

गायक गायिका के लिए। वैसे भी हिंदी फिल्म संगीतकारों ने लता

मंगेशकर से काफी ऊंची पट्टी वाले गाने गवाए हैं। सलिल चौधरी

साहब उस काम में उस्ताद रहे हैं और उन्होंने एक से बढ़कर एक

सुर खींचने वाले गाने लता को दिए। चलिए गीत सुना जाये, इस मुद्दे

पर चर्चा फिर कभी। गीत थोड़े अलग अंदाज़ में गाया गया है

और आप पाएंगे जैसे खुद सायरा ही ये गीत परदे पर गा रही हों।











गीत के बोल:



एहसान तेरा होगा मुझ पर

दिल चाहता है वो कहने दो, मुझे

तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे

पलकों की छाँव में रहने दो



एहसान तेरा होगा मुझ पर

दिल चाहता है वो कहने दो, मुझे

तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे

पलकों की छाँव में रहने दो



एहसान तेरा होगा मुझ पर



तुमने मुझको हँसना सिखाया

तुमने मुझको हँसना सिखाया

रोने कहोगे रो लेंगे अब

आँसू का हमारे ग़म ना करो

वो बहते तो बहने दो, मुझे

तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे

पलकों की छाँव में रहने दो



एहसान तेरा होगा मुझ पर



चाहे बना दो, चाहे मिटा दो,

चाहे बना दो, चाहे मिटा दो,

मर भी गए तो देंगे दुआएँ

उड़-उड़ के कहेंगी खाक सनम

ये दर्द-ए-मुहब्बत सहने दो, मुझे

तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे

पलकों की छाँव में रहने दो



एहसान तेरा होगा मुझ पर

दिल चाहता है वो कहने दो, मुझे

तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे

पलकों की छाँव में रहने दो

.................................

Ehsan tera hoga mujh par 1-Junglee 1961

Thursday, 2 June 2011

जब कान्हा की मीठी मुरलिया बजे-नाग देवता १९६१

आइये थोड़ा धार्मिक हो जाएँ। भजन सुनें फिल्म नाग देवता से जो
सन १९६१ की फिल्म है। सुमन कल्याणपुर की आवाज़ वाले इस गीत
फिल्माया गया है शशिकला पर। ये एक पौराणिक फिल्म है जिसमें
महिपाल मुख्या भूमिका में हैं। शांतिलाल सोनी फिल्म के निर्देशक हैं
और संगीत दिया है एस एन त्रिपाठी ने। गीत का विडियो यू ट्यूब पर
उपलब्ध ज़रूर है। इसे देखने के लिए ये लिंक क्लिक करना पड़ेगा।
जब कान्हा की मीठी मुरलिया-विडियो






गीत के बोल:

हो, जब कान्हा की मीठी मुरलिया बजे
जब कान्हा की मीठी मुरलिया बजे
किसी को रिझाये किसी को तडपाये
किसी को रिझाये किसी को तडपाये

जब कान्हा की मीठी मुरलिया बजे

पनघट पे नैनों से कर के इशारा
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ हो ओ ओ
नटखट सांवरिया ने मुझको पुकारा
हो ओ ओ बैरन मुरलिया ने जादू सा डाला
बैरन मुरलिया ने जादू सा डाला
कान्हा का बाण हाय तान तान मारा
मैं तो रह गई पनघट पे खड़ी की खड़ी
चला भी नहीं जाये रुका भी नहीं जाये
हाय मैं तो रह गई पनघट पे कड़ी की कड़ी
चला भी नहीं जाये रुका भी नहीं जाये

जब कान्हा की मीठी मुरलिया बजे

मैं भी जो होती कान्हा की बांसुरिया
मैं भी जो होती कान्हा की बांसुरिया
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ हो ओ ओ
हो ओ ओ संग संग मुझे भी रखते सांवरिया
संग संग मुझे भी रखते सांवरिया
हाथों में सजती मैं होंठों से लगती
हाथों में सजती मैं होंठों से लगती
मुझपे जो पढ़ती मोहन की नजरिया
मेरे मन में हैं क्या क्या उमंगें खड़ी
बताई ना जाये छुपायी भी ना जाये
बताई ना जाये छुपायी भी ना जाये

जब कान्हा की मीठी मुरलिया बजे
हा आ आ आ आ आ आ आ मुरलिया बजे
हा आ आ आ आ आ आ आ मुरलिया बजे
हा आ आ आ आ आ आ आ आ आ
मुरलिया बजे
....................................
Jab kanha ki meethi muraliya baje-Naag Devta 1961

Sunday, 12 December 2010

सावन के झूले पड़े-प्यार की प्यास १९६१

मधुर गीतों की श्रृंखला में अगला गीत प्रस्तुत है फिल्म
प्यार की प्यास से। ये सन १९६१ की फिल्म है। गीत के
बोल लिखे हैं पंडित भारत व्यास ने और धुन बनाई है
वसंत देसाई ने। तलत महमूद और लता इस गीत के
गायक गायिका हैं। लता और तलत की आवाज़ में युगल
गीत ऐसे सुनाई पढ़ते हैं मानो रेशम की कोमलता और
शहद की मधुरता का मेल हो।



गीत के बोल:



हो, हो, हो
कहाँ छुपे हो मन के मितवा
नैना भये उदासे
छलक रहा है दुःख का सागर
हम प्यासे के प्यासे

हो, हो, हो, हो
सावन के झूले पड़े
सावन के झूले पड़े
सैयां जी हमें तुम कहाँ भूले पड़े
ओ, ओ, ओ

ये नैना जो तुम से लड़े
गोरी जी तोरी पलकन के नीचे खड़े

सावन के झूले पड़े

तुम नहीं आये हमको भूले
हमरे अंगना फुलवा ना फूले
हमको अकेली देख सहेली
कहती है क्यूँ ना खिलती चमेली
बेलरिया ना मंडवे चढ़े
सैयां जी हमें तुम कहाँ भूले पड़े

ओ, ओ, ओ

ये नैना जो तुम से लड़े
गोरी जी तोरी पलकन के नीचे खड़े

सावन के झूले पड़े
हो, ओ ओ ओ

तोरे दिल में हमरा दिल है
जैसे तोरे नैन में तिल है
हमरे मिलन बिन ये मनभावन
सावन भी तो क्या है सावन
पीपल के पतवे झडे
तोरे मोरे जब तक ना नैना लड़े

सावन के झूले पड़े
हो, ओ ओ ओ
......................................
Sawan ke jhoole pade-Pyar ki pyaas 1961

साज़-ए-दिल छेड़ दे-पासपोर्ट १९६१

सुन्दर , खूबसूरत और ब्यूटिफुल इन तीन शब्दों में इस
गीत को बयां किया जा सकता है। वजह-साफ़ है, धुन
बढ़िया है, बोल बढ़िया है और नायिका भी बढ़िया है, नायक
भी स्मार्ट है। और क्या चाहिए विडियो गीत में हमको।
कल्याणजी आनंदजी की सबसे पहली कुछ फिल्मों में
से एक है-पासपोर्ट। यूँ कहें तो कल्याणजी आनंदजी की जोड़ी
बनने के बाद लता और रफ़ी का गाया दूसरा युगल गीत।
इसके पहले वे कल्याणजी वीर जी शाह के संगीत निर्देशन
में ६ युगल गीत गा चुके थे। गीत लिखा है फारूख कैसर ने
और इसे फिल्माया गया है मधुबाला और प्रदीप कुमार पर।
मुखड़े को थोडा अलग तरीके से गवाया गया है। हर पंक्ति
दो दो बार गाई जा रही है फिर भी अटपटी नहीं लगती।




गीत के बोल:

साज-ए-दिल छेड़ दे
साज-ए-दिल छेड़ दे
क्या हसीं रात है
क्या हसीं रात है
कुछ नहीं चाहिए
कुछ नहीं चाहिए
तू अगर साथ है
तू अगर साथ है

साज-ए-दिल छेड़ दे

मुझे चाँद क्यूँ ताकता है
मुझे चाँद क्यूँ ताकता है
मेरा कौन ये लगता है
मुझे शक यही होता है
मुझे शक यही होता है
मेरे चाँद से ये जलता है
हमें इसकी क्या परवाह है
हमें इसकी क्या परवाह है

साज-ए-दिल छेड़ दे

तेरे दर पे सर झुक जाए
तेरे दर पे सर झुक जाए
यही ज़िन्दगी रुक जाए
कली दिल की ये खिल जाए
कली दिल की ये खिल जाए
ख़ुशी प्यार की मिल जाए
कभी फिर गमी ना आये
कभी फिर गमी ना आये

साज-ए-दिल छेड़ दे
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Saaz-e-dil chhed de-Passport 1961

Sunday, 28 November 2010

जीत ही लेंगे बाज़ी हम तुम-शोला और शबनम १९६१

एक और फ्लेश बैक वाला गीत सुन लिया जाए।

धर्मेन्द्र ने कई रोमांटिक फिल्मों में अभिनय किया है।
ये उनके फ़िल्मी जीवन के प्रथम दौर की फिल्म है
साहब क्या लाजवाब गीत मिला उनको परदे पर
जिसे हम सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ कर्णप्रिय युगल गीतों
में गिनते हैं। धर्मेन्द्र के साथ परदे पर 'तरला' नामक
अभिनेत्री हैं जिन्हें मैंने किसी और फिल्म में देखा
हो याद नहीं। गीत लिखा है ..... ने और पिछले गीत की
तरह इसकी धुन भी बनाई है खय्याम ने। बस गीतकार
बदल गए हैं-कैफ़ी आज़मी। खय्याम ने जितना भी संगीत
दिया वो सौम्य किस्म का है। कभी कभार ही उन्होंने
शोरगुल वाले फार्मूले का इस्तेमाल किया है। उनके
संगीतबद्ध ठेठ पंजाबी गीत भी कर्णप्रिय हैं। फ़िल्म 'शोला और
शबनम' के इस गीत में बस दूसरे अंतरे की एक पंक्ति ही
सुनने में खटकती है जहाँ नायक कहता है-तू भी पल भर
रूठे ना । ये पंक्ति पहली पंक्ति के साथ मेल नहीं खाती।


गीत के बोल:

फूल को ढूंढें प्यासा भंवरा
दीपक को परवाना

दुनिया अपने रब को पुकारे
दुनिया अपने रब को पुकारे
तुझको तेरा दीवाना
आ जा, आ जा, आ जा, आ जा

जीत ही लेंगे बाज़ी हम तुम
खेल अधूरा छूटे ना

प्यार का बंधन
जनम का बंधन
जनम का बंधन टूटे ना
प्यार का बंधन टूटे ना

जीत ही लेंगे बाज़ी हम तुम
खेल अधूरा छूटे ना

प्यार का बंधन
जनम का बंधन
जनम का बंधन टूटे ना

आ आ हा हा हा आ आ

मिलता है जहाँ धरती से गगन
मिलता है जहाँ धरती से गगन
आओ वहीँ हम जाएँ

तू मेरे लिए
मैं तेरे लिए
तू मेरे लिए
मैं तेरे लिए

इस दुनिया को ठुकराएँ
इस दुनिया को ठुकराएँ

दूर बसा लें दिल की जन्नत
जिसको ज़माना लुटे ना

प्यार का बंधन
जनम का बंधन
जनम का बंधन टूटे ना

प्यार का बंधन टूटे ना

हं हं हं ला ला ला ला ला
आ आ आ आ आ आ आ आ आ हं हं हं हं

मिलने की ख़ुशी ना मिलने का गम
ख़त्म ये झगडे हो जाएँ
मिलने की ख़ुशी ना मिलने का गम
ख़त्म ये झगडे हो जाएँ

तू तू ना रहे
मैं मैं ना रहूँ
तू तू ना रहे
मैं मैं ना रहूँ

एक दूजे में खो जाएँ
एक दूजे में खो जाएँ

मैं भी ना छोडूं पल भर दामन
मैं भी ना छोडूं पल भर दामन
तू भी पल भर रूठे ना

प्यार का बंधन
जनम का बंधन
जनम का बंधन टूटे ना

प्यार का बंधन टूटे ना

प्यार का बंधन
जनम का बंधन
जनम का बंधन टूटे ना

प्यार का बंधन टूटे ना

Saturday, 20 November 2010

आंसू समझ के क्यूँ मुझे-छाया १९६१

दो फिल्मों के गीत सुनने में मुझे हमेशा कन्फ्यूज़न होता । वो हैं
छाया और माया । दोनों फ़िल्में सन १९६१ में आयीं। दोनों में ही
सलिल चौधरी का संगीत है। आइये इस फिल्म से आपको एक
मधुर गाना सुनवाया जाए। सुनील दत्त और आशा पारेख अभिनीत
फिल्म छाया में सुनील दत्त के लिए सलिल ने तलत महमूद की
आवाज़ का इस्तेमाल किया है, और कुछ अविस्मर्णीय रचनाएँ दी
हिंदी फिल्म संगीत जगत को। प्रस्तुत गीत कर्णप्रिय तो है ही साथ
साथ इसे गुनगुनाना कठिन कार्य है। लम्बी सांस लेने की ज़रुरत
पढ़ती है बीच बीच में। इस फिल्म के गीत राजेंद्र कृष्ण ने लिखे हैं।



गीत के बोल:

आंसू समझ के क्यूँ मुझे आँख से तुमने गिरा दिया
मोती किसी के प्यार का मिटटी में क्यूँ मिला दिया
आंसू समझ के क्यूँ मुझे

जो ना चमन में खिल सका मैं वो गरीब फूल हूँ
जो ना चमन में खिल सका मैं वो गरीब फूल हूँ
जो कुछ भी हूँ बाहर की छोटी सी एक भूल हूँ
जिस ने खिला के खुद मुझे खुद ही मुझे भुला दिया

आंसू समझ के क्यूँ मुझे आँख से तुमने गिरा दिया
आंसू समझ के क्यूँ मुझे

नगमा हूँ कब मगर मुझे अपने पे कोई नाज़ था
नगमा हूँ कब मगर मुझे अपने पे कोई नाज़ था
गाया गया हूँ जिस पे मैं टूटा हुआ वो साज़ था
जिस ने सुना वो हंस दिया, हंस के मुझे रुला दिया

आंसू समझ के क्यूँ मुझे आँख से तुमने गिरा दिया
आंसू समझ के क्यूँ मुझे

मेरी खता मुआफ मैं भूले से आ गया यहाँ
मेरी खता मुआफ मैं भूले से आ गया यहाँ
वरना मुझे भी है खबर मेरा नहीं है ये जहाँ
डूब चला था नींद में अच्छा किया जगा दिया

आंसू समझ के क्यूँ मुझे आँख से तुमने गिरा दिया
आंसू समझ के क्यूँ मुझे
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Ansoo samajh ke kyun mujhe-Chhaya 1961
 
 
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