आँखों पर मीलों मील लम्बे अफ़साने आपको मिल जायेंगे साहित्य और
फ़िल्मी गीतों में। गीतकार राजेंद्र कृष्ण ने भी आँखों पर तरह तरह के गीत
लिखे हैं। प्रस्तुत गीत जो कि फिल्म ब्लैकमेल का गीत है में आँखों को शरबती
कि उपमा प्रदान की गई है। 'शरबती' शब्द अक्सर आप दो चीज़ों का जिक्र होने
पर सुना करते होंगे-आँखें और गेंहू। शरबती गेंहू अच्छी क़िस्म का गेंहू माना
जाता है ।
गीत में नायिका की वेश भूषा देख कर शायद आपको देव आनंद की याद आ जाये।
एक बात मुझे हमेशा से चौंकती रही है-फिल्म में नायक नायिका धूल में लोट लगा
लें या मैदान में गुलाटियां खा लें उनके कपडे ज़रा भी गंदे नहीं होते?
गीत के बोल:
मैं डूब डूब जाता हूँ
शरबती तेरी आँखों की, हा
झील सी गहराई में
शरबती तेरी आँखों की
झील सी गहराई में
मैं डूब डूब जाता हूँ
फूलों को तूने रंगत दे दी
सूरज को उजाला, उजाला
सूरज को उजाला
जुल्फों से तूने पानी छटका
तारों की बन गई माला
देखो तारों की बन गई माला
होंठ हैं तेरे दो पैमाने
होंठ तेरे दो पैमाने
पैमानों की मस्ती में
डूब डूब जाता हूँ
शरबती तेरी आँखों की, हा
झील सी गहराई में
शरबती तेरी आँखों की
झील सी गहराई में
मैं डूब डूब जाता हूँ
भूले से जो तू बाग़ में जाये
पत्ता पत्ता डोले
रे डोले पत्ता पत्ता डोले
तिरछी नज़रें जिधर भी फेंके
भड़के सौ सौ शोले, रे शोले
भड़के सौ सौ शोले
गाल हैं तेरे दो अंगारे
गाल हैं तेरे दो अंगारे
अंगारों की गर्मी में
डूब डूब जाता हूँ
शरबती तेरी आँखों की, हा
झील सी गहराई में
शरबती तेरी आँखों की
झील सी गहराई में
मैं डूब डूब
मैं डूब डूब
मैं डूब डूब जाता हूँ
......................................
Sharbati teri ankhon ki-Blackmail 1973
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Saturday, 4 February 2012
Saturday, 28 January 2012
मुझे ऐसा मिला मोती-पिघलता आसमान १९८५
इस गीत को देख कर जाने क्यूँ 'बर्फ पर निबंध' याद आ जाता है ।
इस्कूल में एक बार निबंध लिखने का कार्यक्रम हुआ(अक्सर हो जाया
करता था) । हमने तो हाथ खड़े कर दिए और मार खा ली मगर एक
निबंध जो पढने को मिला वो इस प्रकार से था- बर्फ आइस फैक्ट्री से
आती है। ये बड़ी बड़ी सिल्लियों के आकर में आती है । इसे तोड़ कर
और बिना तोड़े भी बेचा जाता है। तोड़ फोड़ करने के बाद इसका प्रयोग
गन्ने के रस को ठंडा करने और उसकी मात्रा बढ़ाने के लिए किया जाता है।
इसे पिघलने से बचाने के लिए बोरे में लपेट कर रखा जाता है......................
उसे बाद के हिस्से में कुछ इस प्रकार से था- जो बर्फ हिंदी फिल्मों में
दिखाई जाती है वो दूसरी किस्म की बर्फ होती है । वो खाने के काम नहीं आती ।
वो कश्मीर में पायी जाती है जिसके ऊपर फिल्म के हीरो हीरोइन नाचते- कूदते
और गाना गाते हैं।
गीत है फिल्म पिघलता आसमान का जिसे देख कर दर्शक ज्यादा नहीं पिघले
और फिल्म थोड़ा बहुत चलने के बाद सिनेमा गृहों से गायब हो गई।
गीत के बोल:
आ आ आ आ आ आ आ आ आ
मुझे ऐसा मिला मोती
ऐसा मोती कोई सागर में ना होगा
मुझे ऐसा मिला मोती
ऐसा मोती कोई सागर में ना होगा
मुझे ऐसा मिला तारा
ऐसा तारा कोई अम्बर में ना होगा
तन जिसका है मनभावन
मन जिसका पवन पवन
तन जिसका है मनभावन
मन जिसका पवन पवन
ऐसे वो मिला जैसे के मिले
प्यासी धरती को सावन
मुझे ऐसा मिला मोती
ऐसा मोती कोई सागर में ना होगा
मुझे ऐसा मिला तारा
ऐसा तारा कोई अम्बर में ना होगा
महलों से मैं कब मानी
दौलत को ना दौलत जानी
महलों से मैं कब मानी
दौलत को ना दौलत जानी
सारा ही जहाँ सूरत देखे
मैं सीरत की दीवानी
मुझे ऐसा मिला मोती
ऐसा मोती कोई सागर में ना होगा
मुझे ऐसा मिला तारा
ऐसा तारा कोई अम्बर में ना होगा
वो ज़फ़ा करें सह लूंगी
वो गिला करें सह लूंगी
वो ज़फ़ा करें सह लूंगी
वो गिला करें सह लूंगी
जिस हाल में वो रखे मुझको
उस हाल में मैं रह लूंगी
मुझे ऐसा मिला मोती
ऐसा मोती कोई सागर में ना होगा
मुझे ऐसा मिला तारा
ऐसा तारा कोई अम्बर में ना होगा
...................................
Mujhe aisa mila moti-Pighalta Aasman 1985
इस्कूल में एक बार निबंध लिखने का कार्यक्रम हुआ(अक्सर हो जाया
करता था) । हमने तो हाथ खड़े कर दिए और मार खा ली मगर एक
निबंध जो पढने को मिला वो इस प्रकार से था- बर्फ आइस फैक्ट्री से
आती है। ये बड़ी बड़ी सिल्लियों के आकर में आती है । इसे तोड़ कर
और बिना तोड़े भी बेचा जाता है। तोड़ फोड़ करने के बाद इसका प्रयोग
गन्ने के रस को ठंडा करने और उसकी मात्रा बढ़ाने के लिए किया जाता है।
इसे पिघलने से बचाने के लिए बोरे में लपेट कर रखा जाता है......................
उसे बाद के हिस्से में कुछ इस प्रकार से था- जो बर्फ हिंदी फिल्मों में
दिखाई जाती है वो दूसरी किस्म की बर्फ होती है । वो खाने के काम नहीं आती ।
वो कश्मीर में पायी जाती है जिसके ऊपर फिल्म के हीरो हीरोइन नाचते- कूदते
और गाना गाते हैं।
गीत है फिल्म पिघलता आसमान का जिसे देख कर दर्शक ज्यादा नहीं पिघले
और फिल्म थोड़ा बहुत चलने के बाद सिनेमा गृहों से गायब हो गई।
गीत के बोल:
आ आ आ आ आ आ आ आ आ
मुझे ऐसा मिला मोती
ऐसा मोती कोई सागर में ना होगा
मुझे ऐसा मिला मोती
ऐसा मोती कोई सागर में ना होगा
मुझे ऐसा मिला तारा
ऐसा तारा कोई अम्बर में ना होगा
तन जिसका है मनभावन
मन जिसका पवन पवन
तन जिसका है मनभावन
मन जिसका पवन पवन
ऐसे वो मिला जैसे के मिले
प्यासी धरती को सावन
मुझे ऐसा मिला मोती
ऐसा मोती कोई सागर में ना होगा
मुझे ऐसा मिला तारा
ऐसा तारा कोई अम्बर में ना होगा
महलों से मैं कब मानी
दौलत को ना दौलत जानी
महलों से मैं कब मानी
दौलत को ना दौलत जानी
सारा ही जहाँ सूरत देखे
मैं सीरत की दीवानी
मुझे ऐसा मिला मोती
ऐसा मोती कोई सागर में ना होगा
मुझे ऐसा मिला तारा
ऐसा तारा कोई अम्बर में ना होगा
वो ज़फ़ा करें सह लूंगी
वो गिला करें सह लूंगी
वो ज़फ़ा करें सह लूंगी
वो गिला करें सह लूंगी
जिस हाल में वो रखे मुझको
उस हाल में मैं रह लूंगी
मुझे ऐसा मिला मोती
ऐसा मोती कोई सागर में ना होगा
मुझे ऐसा मिला तारा
ऐसा तारा कोई अम्बर में ना होगा
...................................
Mujhe aisa mila moti-Pighalta Aasman 1985
Saturday, 25 June 2011
तेरे होंठों के दो फूल-पारस १९७१
पारस फिल्म से तीसरा गीत पेश है जो कि एक युगल गीत है
मुकेश और लता की आवाजों में। होंठों को फूलों का दर्ज़ा प्रदान
किया है कुछ कवियों ने और गीत रचईताओं ने। पंखुड़ियों से
तुलना सामान्य विशेषण है लेकिन फूल कहना उसके दर्जे को
बढ़ाना है। वही हाल है जब नायिका आँखों के दो तारों की बात
करती है। गीतकार ने दोनों के लिए एक स्टार से विशेषण का
इस्तेमाल किया हैं। संतुलन ऐसे ही बनाया जाता है ।
प्यार अँधा होता है और बहरा होता है ये साबित करने के कुछ
प्रतीकों की ज़रुरत पढ़ती है कभी कभी। प्यार में हरी घास भी
पालक पनीर नज़र आने लग जाती है। ये वो खुश-खुमारी है
जिसके आगे अच्छे अच्छे पानी भर लेते हैं। प्यार में लॉजिक
इत्यादि नहीं चला करते हैं। इस मामले में अक्सर भैंस का
आकार अकल से बड़ा ही मालूम पढता है।
गीत कि धुन इमानदारी से कहूं तो- आकर्षक है और ये आनंदित
करने वाला गीत है। गीत का फिल्मांकन भी उम्दा किस्म का है।
इसके अलावा इस गीत में सभी elements मौजूद हैं फ़िल्मी
गीत के, नायक नायिका ने स्नान भी कर लिया है गीत में।
कल्याणजी आनंदजी भाई ने देसी ख़ुशबू वाले संगीत के सहारे
अपनी गाडी इतनी दूर तक दौडाई कि अति शास्त्रीयता की खुमारी
से ग्रसित संगीतकार भी दांतों तले ऊँगली दबाते नज़र आये।
गीत के बोल:
तेरे होंठों के दो फूल प्यारे-प्यारे
तेरे होंठों के दो फूल प्यारे-प्यारे
मेरे प्यार की बहारों के नज़ारे
अब मुझे चमन से क्या लेना, क्या लेना
तेरी आँखों के दो तारे प्यारे-प्यारे
मेरी रातों के चमकते सितारे
अब मुझे गगन से क्या लेना, क्या लेना
तेरे होंठों के दो फूल प्यारे-प्यारे
तेरी काया कंचन-कंचन किरणों का है जिसमें बसेरा
तेरी साँसें महकी-महकी तेरी ज़ुल्फ़ों में ख़ुशबू का डेरा
तेरा महके अंग-अंग जैसे सोने में सुगंध
मुझे चंदन-वन से क्या लेना, क्या लेना
तेरी आँखों के दो तारे प्यारे-प्यारे
मेरी रातों के चमकते सितारे
मैने देखा जबसे तुझको मेरे सपने हुए सिंदूरी
तुझे पा के मेरे जीवन-धन हर कमी हुई मेरी पूरी
पिया एक तेरा प्यार मेरे सोलह सिंगार
मुझे अब दर्पण से क्या लेना, क्या लेना
तेरे होंठों के दो फूल प्यारे-प्यारे
मेरे प्यार की बहारों के नज़ारे
तेरा मुखड़ा दमके-चमके जैसे सागर पे चमके सवेरा
तेरी बाँहें प्यार के झूले तेरी बाँहों में झूले मन मेरा
तेरी मीठी हर बात
तेरी मीठी हर बात
रस की है बरसात
हमें अब सावन से क्या लेना, क्या लेना
तेरे होंठों के दो फूल प्यारे-प्यारे
तेरी आँखों के दो तारे प्यारे-प्यारे
अब मुझे चमन से क्या लेना, क्या लेना
अब मुझे गगन से क्या लेना, क्या लेना
हमें क्या लेना, क्या लेना
हमें क्या लेना, क्या लेना
.................................
Tere honthon ke do phool-Paaras 1971
मुकेश और लता की आवाजों में। होंठों को फूलों का दर्ज़ा प्रदान
किया है कुछ कवियों ने और गीत रचईताओं ने। पंखुड़ियों से
तुलना सामान्य विशेषण है लेकिन फूल कहना उसके दर्जे को
बढ़ाना है। वही हाल है जब नायिका आँखों के दो तारों की बात
करती है। गीतकार ने दोनों के लिए एक स्टार से विशेषण का
इस्तेमाल किया हैं। संतुलन ऐसे ही बनाया जाता है ।
प्यार अँधा होता है और बहरा होता है ये साबित करने के कुछ
प्रतीकों की ज़रुरत पढ़ती है कभी कभी। प्यार में हरी घास भी
पालक पनीर नज़र आने लग जाती है। ये वो खुश-खुमारी है
जिसके आगे अच्छे अच्छे पानी भर लेते हैं। प्यार में लॉजिक
इत्यादि नहीं चला करते हैं। इस मामले में अक्सर भैंस का
आकार अकल से बड़ा ही मालूम पढता है।
गीत कि धुन इमानदारी से कहूं तो- आकर्षक है और ये आनंदित
करने वाला गीत है। गीत का फिल्मांकन भी उम्दा किस्म का है।
इसके अलावा इस गीत में सभी elements मौजूद हैं फ़िल्मी
गीत के, नायक नायिका ने स्नान भी कर लिया है गीत में।
कल्याणजी आनंदजी भाई ने देसी ख़ुशबू वाले संगीत के सहारे
अपनी गाडी इतनी दूर तक दौडाई कि अति शास्त्रीयता की खुमारी
से ग्रसित संगीतकार भी दांतों तले ऊँगली दबाते नज़र आये।
गीत के बोल:
तेरे होंठों के दो फूल प्यारे-प्यारे
तेरे होंठों के दो फूल प्यारे-प्यारे
मेरे प्यार की बहारों के नज़ारे
अब मुझे चमन से क्या लेना, क्या लेना
तेरी आँखों के दो तारे प्यारे-प्यारे
मेरी रातों के चमकते सितारे
अब मुझे गगन से क्या लेना, क्या लेना
तेरे होंठों के दो फूल प्यारे-प्यारे
तेरी काया कंचन-कंचन किरणों का है जिसमें बसेरा
तेरी साँसें महकी-महकी तेरी ज़ुल्फ़ों में ख़ुशबू का डेरा
तेरा महके अंग-अंग जैसे सोने में सुगंध
मुझे चंदन-वन से क्या लेना, क्या लेना
तेरी आँखों के दो तारे प्यारे-प्यारे
मेरी रातों के चमकते सितारे
मैने देखा जबसे तुझको मेरे सपने हुए सिंदूरी
तुझे पा के मेरे जीवन-धन हर कमी हुई मेरी पूरी
पिया एक तेरा प्यार मेरे सोलह सिंगार
मुझे अब दर्पण से क्या लेना, क्या लेना
तेरे होंठों के दो फूल प्यारे-प्यारे
मेरे प्यार की बहारों के नज़ारे
तेरा मुखड़ा दमके-चमके जैसे सागर पे चमके सवेरा
तेरी बाँहें प्यार के झूले तेरी बाँहों में झूले मन मेरा
तेरी मीठी हर बात
तेरी मीठी हर बात
रस की है बरसात
हमें अब सावन से क्या लेना, क्या लेना
तेरे होंठों के दो फूल प्यारे-प्यारे
तेरी आँखों के दो तारे प्यारे-प्यारे
अब मुझे चमन से क्या लेना, क्या लेना
अब मुझे गगन से क्या लेना, क्या लेना
हमें क्या लेना, क्या लेना
हमें क्या लेना, क्या लेना
.................................
Tere honthon ke do phool-Paaras 1971
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Rakhi,
Sanjeev Kumar
सजना के सामने मैं तो रहूंगी-पारस १९७१
यकायक, अचानक, तुरंत फुरंत जब कोई गीत याद आता है
है तो उसे सुनवाने कि इच्छा हो ही जाती है। अभिनेत्री राखी
को आपने अधिकांश चलचित्रों में भारतीय नारी की पोषाक
और वेश भूषा में ही देखा होगा। आज आपको एक ऐसा गीत
सुनवाते हैं जिसमें वे विलायती बाला जैसी नज़र आती हैं।
इन्दीवर के लिखे गीत को गा रही हैं आशा भोंसले और गीत
की तर्ज़ बनाई है कल्याणजी आनंदजी ने।
गीत के बोल :
सजना के सामने मैं तो रहूंगी चुप, चुप
आ हा, सजना के सामने मैं तो रहूंगी चुप
बोल उठी अँखियाँ तो क्या होगा
हाय हाय क्या होगा
बोल उठी अँखियाँ तो क्या होगा
हाय हाय क्या होगा
अंखियों में छ गया नशा भीगा भीगा
अंखियों में छ गया नशा भीगा भीगा
जान गई सखियाँ तो क्या होगा
हाय हाय क्या होगा
जान गई !
ओ रातों को, रातों को ?
आ हा रातों को
रातों को उड़ उड़ के कहती है निंदिया
ऐ री लागेगी कब मेरे माथे पे बिंदिया
मन की अभी तक मन में छुपी है
फ़ैल गई, फ़ैल गई बतियाँ तो क्या होगा
हाय हाय क्या होगा
सजना के
सजना के सामने मैं तो रहूंगी चुप, चुप
हो ओ ऐसी लगी
कैसी लगी ?
हा हा ऐसी लगी
ऐसी लगी आग मेरे सीने में प्रीत की
हाय याद आये घडी घडी अनदेखे मीत की
दिन तो गुज़रूंगी कर कर के बतियाँ
गुजरी ना
गुजरी ना रतियाँ तो क्या होगा
हाय हाय क्या होगा
क्या होगा ?
सजना के सामने मैं तो रहूंगी चुप, चुप
हा चोरी चोरी
चोरी चोरी ?
आ हा चोरी चोरी
चोरी चोरी सपने में आता है कोई
फिर उसके ख्यालों में रहूँ खोयी खोयी
बान के दीवानी लिख दी जो मैंने
पकड़ी गई
पकड़ी गई पतियाँ तो क्या होगा
हाय हाय क्या होगा
सजना के
सजना के सामने मैं तो रहूंगी चुप, चुप
आ हा सजना के सामने मैं तो रहूंगी चुप
बोल उठी अँखियाँ तो क्या होगा
हाय हाय क्या होगा
बोल उठी अँखियाँ तो क्या होगा
हाय हाय क्या होगा
बोल उठी अँखियाँ तो क्या होगा
हाय हाय क्या होगा
...............................
Sajna ke samne main to rahoongi-Paaras 1971
है तो उसे सुनवाने कि इच्छा हो ही जाती है। अभिनेत्री राखी
को आपने अधिकांश चलचित्रों में भारतीय नारी की पोषाक
और वेश भूषा में ही देखा होगा। आज आपको एक ऐसा गीत
सुनवाते हैं जिसमें वे विलायती बाला जैसी नज़र आती हैं।
इन्दीवर के लिखे गीत को गा रही हैं आशा भोंसले और गीत
की तर्ज़ बनाई है कल्याणजी आनंदजी ने।
गीत के बोल :
सजना के सामने मैं तो रहूंगी चुप, चुप
आ हा, सजना के सामने मैं तो रहूंगी चुप
बोल उठी अँखियाँ तो क्या होगा
हाय हाय क्या होगा
बोल उठी अँखियाँ तो क्या होगा
हाय हाय क्या होगा
अंखियों में छ गया नशा भीगा भीगा
अंखियों में छ गया नशा भीगा भीगा
जान गई सखियाँ तो क्या होगा
हाय हाय क्या होगा
जान गई !
ओ रातों को, रातों को ?
आ हा रातों को
रातों को उड़ उड़ के कहती है निंदिया
ऐ री लागेगी कब मेरे माथे पे बिंदिया
मन की अभी तक मन में छुपी है
फ़ैल गई, फ़ैल गई बतियाँ तो क्या होगा
हाय हाय क्या होगा
सजना के
सजना के सामने मैं तो रहूंगी चुप, चुप
हो ओ ऐसी लगी
कैसी लगी ?
हा हा ऐसी लगी
ऐसी लगी आग मेरे सीने में प्रीत की
हाय याद आये घडी घडी अनदेखे मीत की
दिन तो गुज़रूंगी कर कर के बतियाँ
गुजरी ना
गुजरी ना रतियाँ तो क्या होगा
हाय हाय क्या होगा
क्या होगा ?
सजना के सामने मैं तो रहूंगी चुप, चुप
हा चोरी चोरी
चोरी चोरी ?
आ हा चोरी चोरी
चोरी चोरी सपने में आता है कोई
फिर उसके ख्यालों में रहूँ खोयी खोयी
बान के दीवानी लिख दी जो मैंने
पकड़ी गई
पकड़ी गई पतियाँ तो क्या होगा
हाय हाय क्या होगा
सजना के
सजना के सामने मैं तो रहूंगी चुप, चुप
आ हा सजना के सामने मैं तो रहूंगी चुप
बोल उठी अँखियाँ तो क्या होगा
हाय हाय क्या होगा
बोल उठी अँखियाँ तो क्या होगा
हाय हाय क्या होगा
बोल उठी अँखियाँ तो क्या होगा
हाय हाय क्या होगा
...............................
Sajna ke samne main to rahoongi-Paaras 1971
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Sanjeev Kumar
Saturday, 11 June 2011
मिले मिले दो बदन-ब्लैकमेल १९७३
गणित के हिसाब से देखा जाये तो जिस गाने को दो लोग
गायें वो-दोगाना, जिसे तीन लोग गायें वो तीनगाना और
जिसे चार गायक गायें वो चारगाना। पिछले गीत से एक
और गीत ध्यान में आया है, लगे हाथ वो भी सुन/देख
लीजिये।
आपको केवल दोगाना ही सुनवा रहे हैं। ये भी ऐसे याद आया
कि जिस गीत में गायक-गायिका गीत की पंक्तियाँ एक साथ
गाते हैं वो पूर्ण दोगाना लगता है। ऐसा एक और गीत है जिसमें
गायक-गायिका ने बहुत सी पंक्तियाँ साथ साथ गई हैं। धक् चिक
धक् चिक वाली ताल के साथ ये गीत आगे बढ़ता है और कब
ख़त्म हो जाता है मालूम नहीं पढता। ये मधुर गीत है फिल्म
ब्लैकमेल से। इसके संगीत के अटपटे होने की वजह आप केवल
इसका विडियो देख कर ही जान पाएंगे। एक बात बताएं-इसको
देखकर हिंदी की कोई कहावत याद आती है आपको ?
गीत के बोल:
मिले मिले दो बदन खिले खिले दो चमन
ये ज़िन्दगी कम ही सही कोई ग़म नहीं
मिले मिले दो बदन खिले खिले दो चमन
ये ज़िन्दगी कम ही सही कोई ग़म नहीं
देर से आई आई तो बहार
अंगारों पे सोकर जागा प्यार
तूफ़ानों में फूल खिलाए
तूफ़ानों में फूल खिलाए कैसा ये मिलन
मिले मिले दो बदन खिले खिले दो चमन
ये ज़िन्दगी कम ही सही कोई ग़म नहीं
होंठ वही हैं है वही मुस्कान
अब तक क्यों कर दबे रहे अरमान
बीते दिनों को भूल ही जाएँ
बीते दिनों को भूल ही जाएँ अब हम-तुम सजन
मिले मिले दो बदन खिले खिले दो चमन
ये ज़िन्दगी कम ही सही कोई ग़म नहीं
..................................
Mile mile do badan-Blackmail 1973
गायें वो-दोगाना, जिसे तीन लोग गायें वो तीनगाना और
जिसे चार गायक गायें वो चारगाना। पिछले गीत से एक
और गीत ध्यान में आया है, लगे हाथ वो भी सुन/देख
लीजिये।
आपको केवल दोगाना ही सुनवा रहे हैं। ये भी ऐसे याद आया
कि जिस गीत में गायक-गायिका गीत की पंक्तियाँ एक साथ
गाते हैं वो पूर्ण दोगाना लगता है। ऐसा एक और गीत है जिसमें
गायक-गायिका ने बहुत सी पंक्तियाँ साथ साथ गई हैं। धक् चिक
धक् चिक वाली ताल के साथ ये गीत आगे बढ़ता है और कब
ख़त्म हो जाता है मालूम नहीं पढता। ये मधुर गीत है फिल्म
ब्लैकमेल से। इसके संगीत के अटपटे होने की वजह आप केवल
इसका विडियो देख कर ही जान पाएंगे। एक बात बताएं-इसको
देखकर हिंदी की कोई कहावत याद आती है आपको ?
गीत के बोल:
मिले मिले दो बदन खिले खिले दो चमन
ये ज़िन्दगी कम ही सही कोई ग़म नहीं
मिले मिले दो बदन खिले खिले दो चमन
ये ज़िन्दगी कम ही सही कोई ग़म नहीं
देर से आई आई तो बहार
अंगारों पे सोकर जागा प्यार
तूफ़ानों में फूल खिलाए
तूफ़ानों में फूल खिलाए कैसा ये मिलन
मिले मिले दो बदन खिले खिले दो चमन
ये ज़िन्दगी कम ही सही कोई ग़म नहीं
होंठ वही हैं है वही मुस्कान
अब तक क्यों कर दबे रहे अरमान
बीते दिनों को भूल ही जाएँ
बीते दिनों को भूल ही जाएँ अब हम-तुम सजन
मिले मिले दो बदन खिले खिले दो चमन
ये ज़िन्दगी कम ही सही कोई ग़म नहीं
..................................
Mile mile do badan-Blackmail 1973
Saturday, 29 January 2011
कितनी खूबसूरत ये तस्वीर है-बेमिसाल १९८२
अमिताभ की कई खुशनुमा सी फ़िल्में भी आयीं। ये फिल्म उतनी
खुशनुमा नहीं है जितनी नाम से या गीतों से लगती है। इसका अंत
दुखांत है और थोड़ा अलग हटके है। फिल्म में दो नायक हैं और
एक नायिका। कन्फ्यूज़न बरकरार रहता है जब तक एक नायक
और एकमात्र नायिका की शादी नहीं हो जाती। इस गीत में तीनों
चरित्र एक गीत गा रहे हैं और कश्मीर कि प्रशंसा में कसीदे काढ रहे
हैं। विनोद मेहरा और रखी हैं अमिताभ के अलावा इस गीत में।
आनंद बक्षी के लिखे गीत को स्वर दिया है लता, किशोर और सुरेश
वाडकर ने। संगीत है आर डी बर्मन का।
गीत के बोल:
कितनी खूबसूरत ये तस्वीर है
मौसम बेमिसाल बेनज़ीर है
ये कशमीर है, ये कशमीर है
पर्वतों के दरमियाँ हैं
जन्नतों की तरमियाँ हैं
आज के दिन हम यहाँ हैं
साथी ये हमारी तकदीर है
कितनी खूबसूरत ये तस्वीर है
ये कशमीर है, ये कशमीर है
इस ज़मीन से आसमान से
फूलों के इस गुलसिताँ से
जाना मुश्किल है यहाँ से
इस ज़मीन से आसमान से
फुलों के इस गुलसिताँ से
जाना मुशकिल है यहाँ से
तौबा ये हवा है या जंज़ीर है
कितनी खूबसूरत ये तस्वीर है
ये कशमीर है, ये कशमीर है
ऐ सखी देख तो नज़ारा
एक अकेला बेसहारा
कौन है वो हम कहारा
मुझसा कोई आशिक़ ये दिलजीर है
अरे, कितनी खूबसूरत ये तस्वीर है
ये कश्मीर है, ये कश्मीर है
..............................................
Kitni khoobsurat ye tasveer hai-Bemisaal 1982
खुशनुमा नहीं है जितनी नाम से या गीतों से लगती है। इसका अंत
दुखांत है और थोड़ा अलग हटके है। फिल्म में दो नायक हैं और
एक नायिका। कन्फ्यूज़न बरकरार रहता है जब तक एक नायक
और एकमात्र नायिका की शादी नहीं हो जाती। इस गीत में तीनों
चरित्र एक गीत गा रहे हैं और कश्मीर कि प्रशंसा में कसीदे काढ रहे
हैं। विनोद मेहरा और रखी हैं अमिताभ के अलावा इस गीत में।
आनंद बक्षी के लिखे गीत को स्वर दिया है लता, किशोर और सुरेश
वाडकर ने। संगीत है आर डी बर्मन का।
गीत के बोल:
कितनी खूबसूरत ये तस्वीर है
मौसम बेमिसाल बेनज़ीर है
ये कशमीर है, ये कशमीर है
पर्वतों के दरमियाँ हैं
जन्नतों की तरमियाँ हैं
आज के दिन हम यहाँ हैं
साथी ये हमारी तकदीर है
कितनी खूबसूरत ये तस्वीर है
ये कशमीर है, ये कशमीर है
इस ज़मीन से आसमान से
फूलों के इस गुलसिताँ से
जाना मुश्किल है यहाँ से
इस ज़मीन से आसमान से
फुलों के इस गुलसिताँ से
जाना मुशकिल है यहाँ से
तौबा ये हवा है या जंज़ीर है
कितनी खूबसूरत ये तस्वीर है
ये कशमीर है, ये कशमीर है
ऐ सखी देख तो नज़ारा
एक अकेला बेसहारा
कौन है वो हम कहारा
मुझसा कोई आशिक़ ये दिलजीर है
अरे, कितनी खूबसूरत ये तस्वीर है
ये कश्मीर है, ये कश्मीर है
..............................................
Kitni khoobsurat ye tasveer hai-Bemisaal 1982
Monday, 27 December 2010
कसमे वादे निभाएंगे हम-कसमे वादे १९७८
गुलशन बावरा की लेखनी भी कमाल की है। उन्होंने भी अपने बुजुर्ग गीतकारों
के मानिंद सरलता को अपना हथियार बनाया गीत लेखन के मामले में।
उनके लिखे कुछ गीत काव्यात्मक उपमाओं से परिपूर्ण हैं तो कुछ
बेहद सरल बोल चाल की भाषा वाले। सरलता की वजह से उनके कई
गीत श्रोताओं को गुनगुनाने में आसानी होती है। एक ऐसा ही गीत
सुनिए जिसके लिए उम्दा किस्म की धुन तैयार की थी राहुल देव बर्मन ने
फिल्म कसमे वाडे के लिए. गीत गा रहे हैं लता और किशोर। इसे
फिल्माया गया है अमिताभ बच्चन और राखी पर। ये फिल्म का सबसे
लोकप्रिय गीत है। वैसे तो इस फिल्म का संगीत खूब बजा है। रिलीज़ के वक़्त
इसके सभी गाने सुनाई देते थे जिसमे एक स्वयं संगीतकार की आवाज़ में
गाया हुआ गीत भी शामिल है जिसे हम आगे सुनेंगे इस ब्लॉग पर।
गीत के बोल:
हो ओ, हो ओ हो हो, हे हे
हो हो हो, हे हे हे
कसमें वादे निभाएंगे हम
मिलते रहेंगे जनम जनम
देखा मैंने तुझको तो मुझे ऐसा लगा
बरसों का सोया हुआ, प्यार मेरा जगा
तू हैं दिया, मैं हूँ बाती,
आ जा मेरे जीवन साथी
कसमें वादे निभाएंगे हम
मिलते रहेंगे जनम जनम
चेहरों से हो अनजाने हम, दिल तो दिल को पहचाने
कभी प्यार नहीं मरता है, पागल प्रेमी ही जाने
आ जाती हैं लैब पे खुद ही, भूली बिसरी बात
कसमें वादे निभाएंगे हम
मिलते रहेंगे जनम जनम
तू हैं मेरे जीने का सहारा, सदियों पुराना है साथ हमारा
तू हैं दिया, मैं हूँ बाती,
आ जा मेरे जीवन साथी
कसमें वादे निभाएंगे हम
मिलते रहेंगे जनम जनम
के मानिंद सरलता को अपना हथियार बनाया गीत लेखन के मामले में।
उनके लिखे कुछ गीत काव्यात्मक उपमाओं से परिपूर्ण हैं तो कुछ
बेहद सरल बोल चाल की भाषा वाले। सरलता की वजह से उनके कई
गीत श्रोताओं को गुनगुनाने में आसानी होती है। एक ऐसा ही गीत
सुनिए जिसके लिए उम्दा किस्म की धुन तैयार की थी राहुल देव बर्मन ने
फिल्म कसमे वाडे के लिए. गीत गा रहे हैं लता और किशोर। इसे
फिल्माया गया है अमिताभ बच्चन और राखी पर। ये फिल्म का सबसे
लोकप्रिय गीत है। वैसे तो इस फिल्म का संगीत खूब बजा है। रिलीज़ के वक़्त
इसके सभी गाने सुनाई देते थे जिसमे एक स्वयं संगीतकार की आवाज़ में
गाया हुआ गीत भी शामिल है जिसे हम आगे सुनेंगे इस ब्लॉग पर।
गीत के बोल:
हो ओ, हो ओ हो हो, हे हे
हो हो हो, हे हे हे
कसमें वादे निभाएंगे हम
मिलते रहेंगे जनम जनम
देखा मैंने तुझको तो मुझे ऐसा लगा
बरसों का सोया हुआ, प्यार मेरा जगा
तू हैं दिया, मैं हूँ बाती,
आ जा मेरे जीवन साथी
कसमें वादे निभाएंगे हम
मिलते रहेंगे जनम जनम
चेहरों से हो अनजाने हम, दिल तो दिल को पहचाने
कभी प्यार नहीं मरता है, पागल प्रेमी ही जाने
आ जाती हैं लैब पे खुद ही, भूली बिसरी बात
कसमें वादे निभाएंगे हम
मिलते रहेंगे जनम जनम
तू हैं मेरे जीने का सहारा, सदियों पुराना है साथ हमारा
तू हैं दिया, मैं हूँ बाती,
आ जा मेरे जीवन साथी
कसमें वादे निभाएंगे हम
मिलते रहेंगे जनम जनम
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Tuesday, 23 November 2010
मन मेरा तुझको माँगे -पारस १९७१
बिना विवरण के गीत सुन लीजिये एक फिल्म पारस(१९७१) से।
यह गायिका सुमन कल्याणपुर का एक लोकप्रिय गीत है।
गायिका : सुमन कल्याणपुर
गीतकार: इन्दीवर
संगीतकार: कल्याणजी आनंदजी।
गीत के बोल:
मन मेरा तुझको माँगे, दूर दूर तू भागे
मन मेरा तुझको माँगे और दूर दूर तू भागे
मैं ऐसी उलझी सैयाँ
तेरा प्यार बना है देखो भूल भुलैया
तेरा प्यार बना है देखो भूल भुलैया
ओ हो, ओ हो हो
कहो ये प्रीत कैसी, नयी ये रीत कैसी
के भँवरा कली से लजाये
जवानी जले ऐसे, हज़ारों दिये जैसे
पतंगा न क्यूँ पास आये
जलती रही दिल में, मैं पाई तेरी छैयाँ
मैं ऐसी उलझी सैयाँ
तेरा प्यार बना है देखो भूल भुलैया
तेरा प्यार बना है देखो भूल भुलैया
मन मेरा तुझको माँगे दूर दूर तू भागे
मैं ऐसी उलझी सैयाँ
तेरा प्यार बना है देखो भूल भुलैया
तेरा प्यार बना है देखो भूल भुलैया
ओ हो, ओ हो हो
बदल के उजाले हैं तेरे हवाले
सम्भाले बिना कौन तेरे
तू बाँहों में उठा ले
तू सीने में छुपा ले
बहुत ग़म खड़े मुझको घेरे
सहारा लिया तेरा, छुड़ाये तू ही बैयाँ
मैं ऐसी उलझी सैयाँ
तेरा प्यार बना है देखो भूल भुलैया
तेरा प्यार बना है देखो भूल भुलैया
मन मेरा तुझको माँगे, दूर दूर तू भागे
मैं ऐसी उलझी सैयाँ
तेरा प्यार बना है देखो भूल भुलैया
तेरा प्यार बना है देखो भूल भुलैया
यह गायिका सुमन कल्याणपुर का एक लोकप्रिय गीत है।
गायिका : सुमन कल्याणपुर
गीतकार: इन्दीवर
संगीतकार: कल्याणजी आनंदजी।
गीत के बोल:
मन मेरा तुझको माँगे, दूर दूर तू भागे
मन मेरा तुझको माँगे और दूर दूर तू भागे
मैं ऐसी उलझी सैयाँ
तेरा प्यार बना है देखो भूल भुलैया
तेरा प्यार बना है देखो भूल भुलैया
ओ हो, ओ हो हो
कहो ये प्रीत कैसी, नयी ये रीत कैसी
के भँवरा कली से लजाये
जवानी जले ऐसे, हज़ारों दिये जैसे
पतंगा न क्यूँ पास आये
जलती रही दिल में, मैं पाई तेरी छैयाँ
मैं ऐसी उलझी सैयाँ
तेरा प्यार बना है देखो भूल भुलैया
तेरा प्यार बना है देखो भूल भुलैया
मन मेरा तुझको माँगे दूर दूर तू भागे
मैं ऐसी उलझी सैयाँ
तेरा प्यार बना है देखो भूल भुलैया
तेरा प्यार बना है देखो भूल भुलैया
ओ हो, ओ हो हो
बदल के उजाले हैं तेरे हवाले
सम्भाले बिना कौन तेरे
तू बाँहों में उठा ले
तू सीने में छुपा ले
बहुत ग़म खड़े मुझको घेरे
सहारा लिया तेरा, छुड़ाये तू ही बैयाँ
मैं ऐसी उलझी सैयाँ
तेरा प्यार बना है देखो भूल भुलैया
तेरा प्यार बना है देखो भूल भुलैया
मन मेरा तुझको माँगे, दूर दूर तू भागे
मैं ऐसी उलझी सैयाँ
तेरा प्यार बना है देखो भूल भुलैया
तेरा प्यार बना है देखो भूल भुलैया
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