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Wednesday, 10 August 2011

मेरे ख़्वाबों में ख़यालों में छुपे-हनी मून १९६०

फिल्म हनी मून से एक गीत और सुनते हैं जो युगल गीत कहलाता

है । इसे गाया है लता मंगेशकर और मुकेश ने। गाया तो मुकेश ने है

और लता की आवाज़ में केवल 'हूँ हाँ' का प्रयोग किया है संगीतकार

सलिल चौधरी ने। उनको वैसे भी लता की आवाज़ को ऊंचे सुर में

निकलवाने का शौक रहा है। जो भी हो, इस गीत में जो 'हूँ हाँ' है वो

कर्णप्रिय लगती है। गीत एक नाव में फिल्माया गया है और इसे आप

नाव -गीत की श्रेणी में रख सकते हैं।



सुना जाता है कि ये गीत मनोज कुमार पर फिल्माया गया है। जब

किसी गीत का विडियो उपलब्ध नहीं होता यू ट्यूब पर तो ऐसी ही

पत्रकारी भाषा का प्रयोग करने की इच्छा जागृत हो जाती है। इस

गीत का विडियो सीधे आप देख पाएंगे यू ट्यूब पर ही क्यूंकि इसकी

एम्बेडिंग डिस्एबल की हुई है।















गीत के बोल:





मेरे ख़्वाबों में ख़यालों में छुपे

एक दिन मीत मेरे मेरी गली आप चले आएंगे

कभी तो होगी बहारों की नज़र

आएगी ऐसी लहर आर्ज़ू के फूल मुस्कुराएंगे



मेरे ख़्वाबों में ख़यालों में



मैं उनकी रँग भरी याद लिए खो सा गया

उनका हर ज़िक्र मेरा एक नया गीत बना

मेरे गीतों के मचलते हुए स्वर

उनके आँगन में उतर उन्हें मेरे पास खींच लाएंगे





मेरे ख़्वाबों में ख़यालों में



हिरन की बन रही है चाल ये मद्होश नज़र

वो मेरे पास हैं दुनिया की नहीं मुझको खबर

दूर दुनिया से ज़माने से परे

चाँद तारों के तले हम भी एक आशियाँ बनाएंगे





मेरे ख़्वाबों में ख़यालों में



यकीन है मुझको मेरा प्यार न रूठेगा कभी

साज़-ए-दिल का कोई भी तार न टूटेगा कभी

दिल के इस तार की झनकार के संग

बढ़ते-बढ़ते ये कदम मँज़िलों को खुद ही पहुँच जाएंगे





मेरे ख़्वाबों में ख़यालों में छुपे

एक दिन मीत मेरे मेरी गली आप चले आएंगे

मेरे ख़्वाबों में ख़यालों में

.......................................

Mere khwabon mein khayalon mein-Honeymoon 1960

आहा रे मगन मेरा-हनी मून १९६०

एक गीत सुना जाये सन 1960 से. लेखराज भाखरी निर्देशित फिल्म

हनी-मून से ये गीत लिया गया है टिर्र टुर्र वाली ध्वनियों से युक्त ये

गीत लाता मंगेशकर ने गाया है जिसे सईदा खान नमक अभिनेत्री पर

फिल्माया गया है. फिल्म के नायक हैं मनोज कुमार. शैलेन्द्र के बोल

हैं और धुन सलिल चौधरी की. गीत ऐसा है की इसपर आप चाहें तो

नाच भी सकते हैं और चाहे तो ख़ामोशी से भी आनंद ले सकते हैं.

ये लता मंगेशकर के कम सुने गए गीतों में से एक है.











आहा रे मगन मेरा चंचल मन निस दिन गुन-गुन

कुछ अपनी ही धुन में गाये

आहा रे मगन मेरा चंचल मन निस दिन गुन-गुन

कुछ अपनी ही धुन में गाये

पग पायल बाजे रुन झुन झुन सजना मेरे सुन

तुझ बिन अब रहा नहीं जाये



जब से दिल में तू आया है इक जादू सा मुझपे छाया है

जब से दिल में तू आया है इक जादू सा मुझपे छाया है

इक लहर तेरी आयी है तेरे गीतों में दिल लहराया है

मेरे घर में चंदा उतर आया है



आहा रे मगन मेरा चंचल मन निस दिन गुन-गुन

कुछ अपनी ही धुन में गाये

पग पायल बाजे रुन झुन झुन सजना मेरे सुन

तुझ बिन अब रहा नहीं जाये



चाँद जब दिख जाता है मुझे तेरी ही याद दिलाता है

चाँद जब दिख जाता है मुझे तेरी ही याद दिलाता है

नींद फिर उड़ जाती है, तेरे सपनों में दिल खो जाता है

ना जाने मुझे क्या हो जाता है



आहा रे मगन मेरा चंचल मन निस दिन गुन-गुन

कुछ अपनी ही धुन में गाये

पग पायल बाजे रुन झुन झुन सजना मेरे सुन

तुझ बिन अब रहा नहीं जाये



ये जो दिन चले जायेंगे फिर मुडके कभी नहीं आयेंगे

ये जो दिन चले जायेंगे फिर मुडके कभी नहीं आयेंगे

तुम सजन पछताओगे और हम भी बहुत पछताएंगे

ये अरमान दिल में ही रह जायेंगे



आहा रे मगन मेरा चंचल मन निस दिन गुन-गुन

कुछ अपनी ही धुन में गाये

पग पायल बाजे रुन झुन झुन सजना मेरे सुन

तुझ बिन अब रहा नहीं जाये

..........................................

Aha re magan-Honeymoon 1960

Tuesday, 2 August 2011

पुरवा सुहानी आई रे –पूरब और पश्चिम १९७०

पुरुष के समर्पण के चरम के बारे में 'पूरब और पश्चिम' फिल्म के
पिछले गीत में चर्चा हुई थी। इस फिल्म में नारी का इंतज़ार भी है।
गीत में दिखाई देने वाली देसी बाला फिल्म के नायक से मन ही मन
प्यार करती है। फिल्म का नायक विलायती बाला से प्रेम करता है। इस
प्रेम त्रिकोण में चौथा कोण प्रस्तुत गीत में प्रकट होकर मुखर होता है
जो ढोल बजा रहा है-नायक नंबर दो यानि विनोद खन्ना । वो देसी
बाला से प्रेम करता है। गीत का आकर्षण नायिका नंबर एक के चुस्त
कपडे और नायिका नंबर दो का आकर्षक नृत्य है।

इस खालिस देसी धुन को तैयार किया है कल्याणजी आनंदजी ने और गीत
में कहानी कही है इन्दीवर ने।






गीत के बोल:

ढोली ढोल बजाना
ताल से ताल मिलाना
ढोली ढोला ढोली ढोला
ढोली ढोल बजाना
ता ता थैया तक तक थैया
ताल से ताल मिलाना


पुरवा सुहानी आई रे पुरवा
पुरवा सुहानी आई रे पुरवा
ऋतुओं की रानी आई रे पुरवा
मेरे रुके नहीं पांव
प्रीत पे जवानी छाई रे, पुरवा

पुरवा सुहानी आई रे पुरवा

मौसम का मुसाफिर खड़ा रस्ते में
ला ला ला ला ला ला ला ला ला
हो ओ मौसम का मुसाफिर खड़ा रस्ते में
उसके हाथों सब कुछ लुटा सस्ते में
छोटी सी उमरिया है
लंबी सी डगरिया रे
जीवन है परछाई रे, पुरवा

पुरवा सुहानी आई रे पुरवा

हो ढोली ढोल बजाना
हो ताल से ताल मिलाना

कर ले कर भी ले प्यार की पूजा
ना ना ना ना ना ना ना ना
हो, कर ले कर भी ले प्यार की पूजा
प्यार के रंग पे चढ़े न रंग दूजा
क्या ये कोई सपना है
मेरे लिए अपना है
बात मेरी बन आई रे पुरवा

पुरवा सुहानी आई रे पुरवा

हो मीरा सी दीवानी रे नाचे मस्तानी
मीरा सी दीवानी रे नाचे मस्तानी
होंठों पर हैं गम तो आँखों में पानी
घुँघरू दीवाने हुए
रिश्ते पुराने हुए
गीत में कहानी गाई रे पुरवा

पुरवा सुहानी आई रे पुरवा
पुरवा सुहानी आई रे पुरवा
ऋतुओं की रानी आई रे पुरवा
मेरे रुके नहीं पांव
प्रीत पे जवानी छाई रे, पुरवा

पुरवा सुहानी आई रे पुरवा

हो ढोली ढोल बजाना
हो ताल से ताल मिलाना
ढोली ढोल बजाना
ताल से ताल मिलाना
...................................
Purwa suhani aayi re-Purab aur paschim 1970

Friday, 29 July 2011

कोई जब तुम्हारा ह्रदय तोड़ दे –पूरब और पश्चिम १९७०

पुरुष वर्ग के समर्पण की इन्तेहा, कुछ अतिशयोक्ति सा लगता
ये गीत अपवाद स्वरुप समाज में आपको कहानी रूप में कहीं न
कहीं ज़रूर मिल जायेगा. ऐसा नहीं है कि केवल नारी ही इंतज़ार
करती है, कहीं पुरुष भी प्रतीक्षा कर लिया करता है. फिल्म में
नायिका का चरित्र विलायत में रहने वाली पाश्चात्य सभ्यता में पली
बढ़ी युवती का है. नायक देसी परम्पराओं को निभाने वाला एक
“सादा जीवन उच्च विचार” के साथ देशप्रेम की भावना से ओत
प्रोत युवक है. अब इतने विवरण से आपको नायक को पहचानने
में दिक्कत नहीं होना चाहिए.

जैसा कि हिंदी फिल्मों की कहानी की अनिवार्य मांग है-नायक
को नायिका से प्रेम हो जाता है. अब नायिका को अपने रंग ढंग
में ढालने के लिए और उसे वापस देसी संस्कृति की ओर लाने
के प्रयास में नायक ये गीत गाता है.

गीत इन्दीवर का लिखा हुआ है और निस्संदेह इसे उनके द्वारा
रहित गीतों में से सर्वाधिक लोकप्रिय का दर्ज़ा भी प्राप्त है. गीत
कि गुणवत्ता पर प्रश्न चिन्ह नहीं लगाया जा सकता. नपा तुला सा
है ये और उतनी ही नपी तुली धुन बनायीं है कल्याणजी आनंदजी
ने जिसे स्वर मुकेश ने दिया है.






गीत के बोल:

कोई जब तुम्हारा ह्रदय तोड़ दे –पूरब और पश्चिम १९७०
तडपता हुआ जब कोई छोड़ दे
तब तुम मेरे पास आना प्रिये
मेरा दर खुला है खुला ही रहेगा तुम्हारे लिए

अभी तुमको मेरी ज़रूरत नहीं
बहुत चाहने वाले मिल जायेंगे
अभी रूप का एक सागर हो तुम
कमल जितने चाहोगी खिल जायेंगे
दर्पण तुम्हें जब डराने लगे
जवानी भी दामन छुड़ाने लगे
तब तुम मेरे पास आना प्रिये
मेरा सर झुका है झुका ही रहेगा तुम्हारे लिए

कोई जब तुम्हारा ह्रदय तोड़ दे

कोई शर्त होती नहीं प्यार में
मगर प्यार शर्तों पे तुमने किया
नज़र में सितारे जो चमके ज़रा
बुझाने लगीं आरती का दिया
जब अपनी नज़र में ही गिरने लगो
अंधेरों में अपने ही घिरने लगो
तब तुम मेरे पास आना प्रिये
ये दीपक जला है जला ही रहेगा तुम्हारे लिए

कोई जब तुम्हारा ह्रदय तोड़ दे
तडपता हुआ जब कोई छोड़ दे
तब तुम मेरे पास आना प्रिये
मेरा दर खुला है खुला ही रहेगा तुम्हारे लिए
...................................
Koi jab tumhara hriday tod de-Purab aur paschim 1970

Thursday, 28 July 2011

इब्तिदा-ए-इश्क में हम -हरियाली और रास्ता १९६२

आज फरियाली का नाश्ता करते हुए एक फिल्म का नाम याद आया
हरियाली और रास्ता. फिल्म सन १९६२ की है जनाब. गीत एक युगल
गीत है लता और मुकेश की आवाजों में. गीत हलके फुल्के मूड वाला
है जिसे अपनी अपनी फ्री इस्टाइल में गाया जा रहा है परदे पर. फैशनेबल
स्वेटर के साथ सरकारी दफ्तर के चपरासी की टोपी का कुछ अजीब सा
कोम्बिनेशन लिए नायक बर्फीले पहाड़ों में कामगार मजदूर सरीखी दिख
रही नायिका के साथ गीत गा रहा है. बर्फीले इलाकों में ऐसी टोपी पहने
शायद ही आप किसी को देखें. अब शायद आप समझ गए होंगे कि फिल्म
जगत में इस जुमले का प्रयोग ज्यादा क्यूँ होता है-"अलग हट के"
नायक नायिका अति गदगद हैं उसकी क्या वज़ह है इसके लिए आपको एक
बार फिल्म अवश्य देखना पड़ेगी.

गीत लिखा है हसरत जयपुरइ ने और इसकी धुन बनायीं है शंकर जयकिशन
ने. फिल्म के सबसे लोकप्रिय गीतों में इसकी गिनती होती है.





गीत के बोल:

इब्तिदा-ए-इश्क़ में हम सारी रात जागे
अल्ला जाने क्या होगा आगे
मौला जाने क्या होगा आगे
दिल में तेरी उलफ़त के बंधने लगे धागे,
अल्ला जाने क्या होगा आगे
मौला जाने क्या होगा आगे

क्या कहूँ कुछ कहाँ नहीं जाए
बिन कहे भी रहा नहीं जाए
रात-रात भर करवट मैं बदलूँ
दर्द दिल का सहा नहीं जाए
नींद मेरी आँखों से दूर-दूर भागे,
अल्ला जाने क्या होगा आगे
मौला जाने क्या होगा आगे

दिल में जागी प्रीत की ज्वाला
जबसे मैंने होश सम्भाला
मैं हूँ तेरे प्यार की सीमा
तू मेरा राही मतवाला
मेरे मन की बीना में तेरे राग जागे,
अल्ला जाने क्या होगा आगे
मौला जाने क्या होगा आगे

तूने जब से आँख मिलाई
दिल से इक आवाज़ ये आई
चल के अब तारों में रहेंगे
प्यार के हम तो हैं सौदाई
मुझको तेरी सूरत भी चाँद रात लागे,
अल्ला जाने क्या होगा आगे
मौला जाने क्या होगा आगे
....................................
Ibteda-e-ishq mein ham-Hariyali aur rasta 1962

Saturday, 18 December 2010

कसमे वादे प्यार वफ़ा सब बातें हैं-उपकार १९६७

बहुत दिन हो गए आपको प्रेरणा और प्रेरणादायक गीतों के
बारे में कुछ बताये हुए। कुछ गीत वे होते हैं जिनसे श्रोता
प्रेरणा लेते हैं। कुछ गीत ऐसे होते हैं जिनसे संगीतकार
प्रेरणा लेते हैं। आज हम ऐसे गीत के बारे में बात करेंगे
जो संगीतकारों के संभावित आदान प्रदान से तैयार हुआ।

एक फिल्म आई थी सन १९६७ में- उपकार जिसका ये गीत-
कसमे वादे प्यार वफ़ा सब बातें हैं बातों का क्या-बहुत ही
लोकप्रिय हुआ था। इस गीत को तमिल भाषा में संगीतकार
इलाया राजा ने भी तैयार किया-Kanavu Kaanum । दोनों
गीत आपके लिए प्रस्तुत हैं। तमिल भाषा मुझे नहीं आती मगर
इतना अंदाजा लगाया जा सकता है की गीत के बोल ज़रूर सत्य
वचन जैसे ही होंगे।

ऐसा समझा जाता है कि दोनों संगीतकार एक दूसरे से प्रेरित
हुए। जैसे भौतिकी में होता है-mutual induction वैसे ही इस
संगीत के असर को हम कह सकते हैं-mutual inspiration।

फिल्म उपकार का गीत परदे पर गा रहे हैं प्रसिद्ध खलनायक
और चरित्र अभिनेता-प्राण । नैराश्य के भावों को उन्होंने
बहुत ही उम्दा ढंग से प्रदर्शित किया है। गीत इन्दीवर की
कलम से निकला है। इस गीत के लिए सन १९६८ में गायक
मन्ना डे को सर्वश्रेष्ठ गायक का राष्ट्रीय पुरस्कार भी दिया गया।

फिल्म उपकार का विडियो गीत:



तमिल फिल्म "ningal kedavai(Neengal Kettavai)-1984" का विडियो गीत:
Lyrics:Kaviyarasu Vairamuthu, Music:Ilaiyaraja, Singer-Yesudas



हिंदी गीत के बोल:

कसमे वादे प्यार वफ़ा सब बातें हैं बातों का क्या
कसमे वादे प्यार वफ़ा सब बातें हैं बातों का क्या
कोई किसी का नहीं ये झूठे नाते हैं नातों का क्या

कसमे वादे प्यार वफ़ा सब बातें हैं बातों का क्या

होगा मसीहा आ आ आ
होगा मसीहा सामने तेरे
फिर भी न तू बच पायेगा
तेरा अपना, आ आ आ आ आ
तेर अपना खून ही आखिर
तुझको आग लगायेगा
आसमान में, ऐ ऐ
आसमान मे उड़ने वाले मिट्टी में मिल जायेगा

कसमे वादे प्यार वफ़ा सब, बातें हैं बातों का क्या

सुख में तेरे, ऐ ऐ ऐ
सुख में तेरे साथ चलेंगे
दुख में सब मुख मोड़ेंगे
दुनिया वाले, ऐ ऐ ऐ ऐ
दुनिया वाले तेरे बनकर
तेरा ही दिल तोड़ेंगे
देते हैं, ऐ ऐ
देते हैं भगवान को धोखा, इनसान को क्या छोड़ेंगे

कसमे वादे प्यार वफ़ा सब, बातें हैं बातों का क्या
..........................................
Kasme Vaade Pyar Wafa Sab Batein Hain-Upkar 1967

Friday, 3 December 2010

लग जा गले के फिर ये हंसी रात-वो कौन थी १९६४

राज खोसला की सस्पेंस फिल्म से अगला गीत पेश है।
ये फिल्म भी बहुत से पहाड़ी वाले दृश्यों से भरी पड़ी है।
अब पहाड़ी है तो राग पहाड़ी पर आधारित कोई गीत भी
होना चाहिए। है जी है, एक गीत और वो भी सुपर डुपर
हिट गीत। राजा मेहँदी अली खान के बोल और मदन
मोहन का संगीत, परदे पर साधना और परदे के पीछे
लता मंगेशकर की आवाज़। इसका फिल्मांकन भी
ज़ोरदार है। अपनी नायिकाओं को किस तरह बला की
खूबसूरत दिखाया जाए ये फलसफा राज खोसला के गीतों
से सीखे कोई। मदन मोहन की इस रचना का मैं भी बड़ा
दीवाना हूँ । उल्लेखनीय है कि ये गीत सम्पादित स्वरुप
में उपलब्ध है फिल्म के एल. पी. रिकोर्ड पर। फिल्म वाला
वर्जन थोडा लम्बा है और इसमें संगीत के अंश कुछ
ज्यादा हैं। 'लग जा गले' कहने का इससे खूबसूरत अंदाज़
शायद ही आपको देखने को मिले।

इसका आधुनिक और ठेठ तरीका यूँ होगा, नायिका नायक
से बोलेगी -ओये सोणियो यूँ घूर घूर के क्या देख रहे हो,
गले लग जा, ये नाईट शिफ्ट फिर नहीं होगी , गले नहीं
लगा तो तो भूत बन के तेरे गले पड़ जाऊंगी। गीत में
निवेदन की जगह हुक्म होगा। ऐसा होने की संभावना
थोड़ी कम है क्यूंकि रीमिक्स वालों के लिए मदन मोहन
की रचनायें सरदर्द हैं।



गीत के बोल:

लग जा गले हूँ हूँ हूँ , हसीं रात हं हं हं

लग जा गले कि फिर ये हसीं रात हो न हो
शायद फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो

लग जा गले कि फिर ये हसीं रात हो न हो
शायद फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो

लग जा गले से, ऐ

हमको मिली हैं आज, ये घड़ियाँ नसीब से
हमको मिली हैं आज, ये घड़ियाँ नसीब से
जी भर के देख लीजिये हमको क़रीब से
फिर आपके नसीब में ये बात हो न हो
फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो
लग जा गले कि फिर ये हसीं रात हो न हो
शायद फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो

लग जा गले से, ऐ

पास आइये कि हम नहीं आएंगे बार-बार
पास आइये कि हम नहीं आएंगे बार-बार
बाहें गले में डाल के हम रो लें ज़ार-ज़ार
आँखों से फिर ये प्यार की बरसात हो न हो
शायद फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो

लग जा गले कि फिर ये हसीं रात हो न हो
शायद फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो
लग जा गले कि फिर ये हसीं रात हो न हो
शायद फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो

लग जा गले से, ऐ
 
 
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