माचिस की अगली तीली प्रस्तुत है. मेरा मतलब; माचिस फिल्म का
अगला गीत सुनिए. जैसा की गीत के नीचे लिखे कमेन्ट में जिक्र है-
गीत गंभीरता से सुनने की आवश्यकता है. तनाव और चिंता के क्षणों
में भी कुछ देर आनंद किस तरह लिया जा सकता है, शायद यही
सन्देश देता सा सुनाई देता है ये गीत. गुलज़ार के लिखे इस गीत को
चार गायक गा रहे हैं -हरिहरन, सुरेश वाडकर, विनोद सहगल और के.के.
ये गीत भी काफी सुना गया जनता द्वारा.
गीत में ओम पूरी को भी दो पंक्तियाँ गाते दिखाया गया है.
छोड़ आए हम, वो गलियाँ
छोड़ आए हम, वो गलियाँ
छोड़ आए हम, वो गलियाँ
छोड़ आए हम, वो गलियाँ
जहाँ तेरे पैरों के, कँवल गिरा करते थे
हँसे तो दो गालों में, भँवर पड़ा करते थे
जहाँ तेरे पैरों के, कँवल गिरा करते थे
हँसे तो दो गालों में, भँवर पड़ा करते थे
हे, तेरी कमर के बल पे, नदी मुड़ा करती थी
हँसी तेरी सुन सुन के, फ़सल पका करती थी
छोड़ आए हम, वो गलियाँ
छोड़ आए हम, वो गलियाँ
हो, जहाँ तेरी एड़ी से, धूप उड़ा करती थी
सुना है उस चौखट पे, अब शाम रहा करती है
जहाँ तेरी एड़ी से, धूप उड़ा करती थी
सुना है उस चौखट पे, अब शाम रहा करती है
लटों से उलझी-लिपटी, इक रात हुआ करती थी
हो,कभी कभी तकिये पे, वो भी मिला करती है
छोड़ आए हम, वो गलियाँ
छोड़ आए हम, वो गलियाँ
दिल दर्द का टुकड़ा है, पत्थर की डली सी है
इक अंधा कुआँ है या, इक बंद गली सी है
इक छोटा सा लम्हा है, जो ख़त्म नहीं होता
मैं लाख जलाता हूँ, यह भस्म नहीं होता
यह भस्म नहीं होता
छोड़ आए हम, वो गलियाँ
वो गलियाँ
छोड़ आए हम, वो गलियाँ
.............................
Chhod aaye hum-Maachis 1996
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Sunday, 21 August 2011
Tuesday, 9 August 2011
सूनी सूनी अँखियों में-लाल दुपट्टा मलमल का १९८८
आपकोइल्म फिल्म लाल दुपट्टा मलमल का एक गीत सुनवाया था. अब
सुनते हैं इसी फिल्म का एक और हिट गीत. इसे गाया है अनुराधा पौडवाल
और सुरेश वाडकर ने. साहिल चड्ढा और विवरली पर इसे फिल्माया गया है.
सुन्दर हसीं वादियों में इसका फिल्मांकन हुआ है. गीत मजरूह का लिखा हुआ
है और संगीत दिया है आनंद मिलिंद ने.
गीत के बोल:
सूनी सूनी अँखियों में जुगनूं चमक उठे
सूनी सूनी अँखियों में जुगनूं चमक उठे
जब से मिला है तेरा प्यार
तुमने तो जैसे मेरा रंग ही बदल दिया
कहां थे अभी तक यार
सूनी सूनी अँखियों में जुगनूं चमक उठे
सूनी सूनी अँखियों में जुगनूं चमक उठे
जब से मिला है तेरा प्यार
सूनी सूनी अँखियों में जुगनूं चमक उठे
जब से मिला है तेरा प्यार
तुमने तो जैसे मेरा रंग ही बदल दिया
कहां थे अभी तक यार
सूनी सूनी अँखियों में जुगनूं चमक उठे
कल भी यही जहां था लेकिन था फीका फीका
गुलों ने खिलना शमा ने जलना तेरी नज़र से सीखा
कल भी यही जहां था लेकिन था फीका फीका
गुलों ने खिलना शमा ने जलना तेरी नज़र से सीखा
आज ज़रा देखो मेरी दुनिया का रूप सिंगार
सूनी सूनी अँखियों में जुगनूं चमक उठे
मैं भी बुझी बुझी थी चाहत की आरज़ू में
चहक उठी हूँ मेरे मिलन के गुलाब की खुशबू में
मैं भी बुझी बुझी थी चाहत की आरज़ू में
चहक उठी हूँ मेरे मिलन के गुलाब की खुशबू में
मेरा हँसना मेरा गाना सब तेरा उपकार
सूनी सूनी अँखियों में जुगनूं चमक उठे
जब से मिला है तेरा प्यार
तुमने तो जैसे मेरा रंग ही बदल दिया
कहां थे अभी तक यार
...................................
Sooni sooni ankhiyon mein-Lal Dupatta malmal ka 1988
सुनते हैं इसी फिल्म का एक और हिट गीत. इसे गाया है अनुराधा पौडवाल
और सुरेश वाडकर ने. साहिल चड्ढा और विवरली पर इसे फिल्माया गया है.
सुन्दर हसीं वादियों में इसका फिल्मांकन हुआ है. गीत मजरूह का लिखा हुआ
है और संगीत दिया है आनंद मिलिंद ने.
गीत के बोल:
सूनी सूनी अँखियों में जुगनूं चमक उठे
सूनी सूनी अँखियों में जुगनूं चमक उठे
जब से मिला है तेरा प्यार
तुमने तो जैसे मेरा रंग ही बदल दिया
कहां थे अभी तक यार
सूनी सूनी अँखियों में जुगनूं चमक उठे
सूनी सूनी अँखियों में जुगनूं चमक उठे
जब से मिला है तेरा प्यार
सूनी सूनी अँखियों में जुगनूं चमक उठे
जब से मिला है तेरा प्यार
तुमने तो जैसे मेरा रंग ही बदल दिया
कहां थे अभी तक यार
सूनी सूनी अँखियों में जुगनूं चमक उठे
कल भी यही जहां था लेकिन था फीका फीका
गुलों ने खिलना शमा ने जलना तेरी नज़र से सीखा
कल भी यही जहां था लेकिन था फीका फीका
गुलों ने खिलना शमा ने जलना तेरी नज़र से सीखा
आज ज़रा देखो मेरी दुनिया का रूप सिंगार
सूनी सूनी अँखियों में जुगनूं चमक उठे
मैं भी बुझी बुझी थी चाहत की आरज़ू में
चहक उठी हूँ मेरे मिलन के गुलाब की खुशबू में
मैं भी बुझी बुझी थी चाहत की आरज़ू में
चहक उठी हूँ मेरे मिलन के गुलाब की खुशबू में
मेरा हँसना मेरा गाना सब तेरा उपकार
सूनी सूनी अँखियों में जुगनूं चमक उठे
जब से मिला है तेरा प्यार
तुमने तो जैसे मेरा रंग ही बदल दिया
कहां थे अभी तक यार
...................................
Sooni sooni ankhiyon mein-Lal Dupatta malmal ka 1988
Monday, 11 July 2011
तेरा कुछ खोया हो तो ढूंढ दें -नैया १९७९
फ़िल्म नैया सन १९७९ की फ़िल्म है. इस फ़िल्म के गीत मुझे अच्छे
लगते हैं, कोई विशेष वजह नहीं, बस यूँ ही . आज इस फ़िल्म से
आपको एक बिलकुल अनसुना सा गीत सुनवाते हैं येसुदास का गाया
हुआ. बोल और संगीत रवीन्द्र जैन के हैं. येसुदास के साथ आवाज़ है
सुरेश वाडकर की.
प्रशांत नंदा के साथ आप ज़रीना वहाब को इस फ़िल्म के गीत में देखेंगे.
बलदेव खोसा उस कलाकार का नाम है जो बाद में परदे पर अवतरित होता
है. दोनों फिल्म में सहनायक हैं. दूल्हे के भेस में हैं दिनेश ठाकुर .
कुछ कलाकारों की उपस्थिति से फिल्म ऑफ-बीट सी लगने लगती है.
दिनेश ठाकुर की उपस्थिति भी ऐसा ही काम करती है जानकार दर्शकों के
लिए.
ज़रीना वहाब शायद फ़िल्म इतिहास की उन चुनिन्दा अभिनेत्रियों में से हैं
जिहोनें बहुत से नायकों के साथ फिल्मों में काम किया जिनमें कुछ अनजान
से चेहरे और उस समय के उभरते नायक भी हैं.
गीत कर्णप्रिय है और इसका फिल्मांकन भी बांध के रखने वाला है.
गीत के बोल :
तेरा कुछ खोया हो तो ढूंढ दें
दिल न दुखा मान भी जा
गीता रानी, गीता रानी हंस दे ज़रा
हंस दे ओ गीता रानी हंस दे ज़रा
तेरा कुछ खोया हो तो ढूंढ दें
कभी दिल टूटा हो तो जोड़ दें
दिल न दुखा मान भी जा
गीता रानी, गीता रानी हंस दे ज़रा
हंस दे ओ गीता रानी हंस दे ज़रा
सावन में आवन का न्यौता
भेजा है मनभावन को
न्यौता भेजा है मनभावन को
हो ओ ओ हमने तो एक देव को सौंपा
तेरे रूप के चन्दन को
गोरी तेरे रूप के चन्दन को
हैरान सा सजन तेरा
गीता रानी, गीता रानी हंस दे ज़रा
हंस दे ओ गीता रानी हंस दे ज़रा
एक माझी के घर से तू गोरी
राजमहल में जाएगी
जाएगी, राजमहल में जाएगी
हो ओ ओ जो सुख हमने सपने में देखे
वो सारे सुख पायेगी
पायेगी ,वो सारे सुख पायेगी
देना नहीं हमको भुला
गीता रानी, गीता रानी हंस दे ज़रा
हंस दे ओ गीता रानी हंस दे ज़रा
मैं दूंगा तुझे कजरा बिंदिया
मैं रचा दूंगा मेहँदी महावर
खुद को बंधक रख के लूँगा
सोना करूंगा वो तुझपे निछावर
हाथों की चूड़ियाँ
मैं दूंगा
पाँव के बिछुआ
मैं दूंगा
क्या चुनरी साडी
मैं दूंगा
मैं दूंगा, मैं दूंगा, मैं दूंगा, हे
मिल के तुझे देंगे सजा
गीता रानी, गीता रानी हंस दे ज़रा
हंस दे ओ गीता रानी हंस दे ज़रा
तेरा कुछ खोया हो तो ढूंढ दें
कभी दिल टूटा हो तो जोड़ दें
हमरा कहा मान भी जा
गीता रानी गीता रानी हंस दे ज़रा
हंस दे ओ गीता रानी हंस दे ज़रा
....................................
Tera kuchh khoya ho to-Naiya 1979
लगते हैं, कोई विशेष वजह नहीं, बस यूँ ही . आज इस फ़िल्म से
आपको एक बिलकुल अनसुना सा गीत सुनवाते हैं येसुदास का गाया
हुआ. बोल और संगीत रवीन्द्र जैन के हैं. येसुदास के साथ आवाज़ है
सुरेश वाडकर की.
प्रशांत नंदा के साथ आप ज़रीना वहाब को इस फ़िल्म के गीत में देखेंगे.
बलदेव खोसा उस कलाकार का नाम है जो बाद में परदे पर अवतरित होता
है. दोनों फिल्म में सहनायक हैं. दूल्हे के भेस में हैं दिनेश ठाकुर .
कुछ कलाकारों की उपस्थिति से फिल्म ऑफ-बीट सी लगने लगती है.
दिनेश ठाकुर की उपस्थिति भी ऐसा ही काम करती है जानकार दर्शकों के
लिए.
ज़रीना वहाब शायद फ़िल्म इतिहास की उन चुनिन्दा अभिनेत्रियों में से हैं
जिहोनें बहुत से नायकों के साथ फिल्मों में काम किया जिनमें कुछ अनजान
से चेहरे और उस समय के उभरते नायक भी हैं.
गीत कर्णप्रिय है और इसका फिल्मांकन भी बांध के रखने वाला है.
गीत के बोल :
तेरा कुछ खोया हो तो ढूंढ दें
दिल न दुखा मान भी जा
गीता रानी, गीता रानी हंस दे ज़रा
हंस दे ओ गीता रानी हंस दे ज़रा
तेरा कुछ खोया हो तो ढूंढ दें
कभी दिल टूटा हो तो जोड़ दें
दिल न दुखा मान भी जा
गीता रानी, गीता रानी हंस दे ज़रा
हंस दे ओ गीता रानी हंस दे ज़रा
सावन में आवन का न्यौता
भेजा है मनभावन को
न्यौता भेजा है मनभावन को
हो ओ ओ हमने तो एक देव को सौंपा
तेरे रूप के चन्दन को
गोरी तेरे रूप के चन्दन को
हैरान सा सजन तेरा
गीता रानी, गीता रानी हंस दे ज़रा
हंस दे ओ गीता रानी हंस दे ज़रा
एक माझी के घर से तू गोरी
राजमहल में जाएगी
जाएगी, राजमहल में जाएगी
हो ओ ओ जो सुख हमने सपने में देखे
वो सारे सुख पायेगी
पायेगी ,वो सारे सुख पायेगी
देना नहीं हमको भुला
गीता रानी, गीता रानी हंस दे ज़रा
हंस दे ओ गीता रानी हंस दे ज़रा
मैं दूंगा तुझे कजरा बिंदिया
मैं रचा दूंगा मेहँदी महावर
खुद को बंधक रख के लूँगा
सोना करूंगा वो तुझपे निछावर
हाथों की चूड़ियाँ
मैं दूंगा
पाँव के बिछुआ
मैं दूंगा
क्या चुनरी साडी
मैं दूंगा
मैं दूंगा, मैं दूंगा, मैं दूंगा, हे
मिल के तुझे देंगे सजा
गीता रानी, गीता रानी हंस दे ज़रा
हंस दे ओ गीता रानी हंस दे ज़रा
तेरा कुछ खोया हो तो ढूंढ दें
कभी दिल टूटा हो तो जोड़ दें
हमरा कहा मान भी जा
गीता रानी गीता रानी हंस दे ज़रा
हंस दे ओ गीता रानी हंस दे ज़रा
....................................
Tera kuchh khoya ho to-Naiya 1979
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Monday, 30 May 2011
नज़र ने नज़र से क्या कहा-सल्तनत १९८६
जूही चावला के गीत के लिए एक फ़रमाइश आई। बहुत दिन हुए उनको
परदे पर देखे। आइये उनकी पदार्पण फिल्म से एक गीत सुना जाये।
जूही चावला कि गिनती भी प्रतिभाशाली और संजीदा कलाकारों में
होती है। गीत में आपको दिखलाई देंगे जूही के साथ एक और नवोदित
कलाकार करण कपूर। शशि कपूर के पुत्र करण इस फिल्म के
पहले तक बॉम्बे डाईंग के बुश्शर्ट के विज्ञापन में दिखा करते थे।
माँ के रंग वाले लेकिन पिता के जैसे नैन-नक्श वाले करण की किस्मत
शायद पिता की तरह बुलंद नहीं रही और वे ज्यादा फिल्मों में आगे दिखाई
नहीं दिए। सल्तनत एक बहुसितारा फिल्म है जो फ्लॉप हो गई थी।
प्रस्तिउट गीत गा रह हैं सुरेश वाडकर और साधना सरगम। हसन
कमाल के लिखे बोलोंबोल की धुन तैयार की है कल्याणजी आनंदजी ने।
गीत के बोल:
नज़र ने नज़र से क्या कहा
मेरी जान मेरी जान ये बता
हो, नज़र ने नज़र से क्या कहा
मेरी जान मेरी जान ये बता
हो ओ ओ, कहूं क्या नज़र ने क्या कहा
आती है मुझको हया
जो है मेरे दिल में
वही तेरे दिल
एक बार कह दे तू
हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ
ना ना
नज़र ने नज़र से क्या कहा
आती है मुझको हया
हो ओ ओ, जागे हैं अरमान जान ले जाने जान
अजी जानूं ना
हो जागे हैं अरमान जान ले जाने जान
जानूं ना
कर ले एक एहसान मान ले जाने जान
मानूं ना
पहले वफ़ा का इकरार कर ले
हाज़िर है फिर मेरी जान
हाँ हाँ हाँ हाँ
नज़र ने नज़र से क्या कहा
मेरी जान मेरी जान ये बता
हो ओ ओ, कहूं क्या नज़र ने क्या कहा
आती है मुझको हया
ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला
वादा कर ये हाथ आज से छूटे ना
ना छूटेगा
हो, वादा कर ये हाथ आज से छूटे ना
ना छूटेगा
साथ रहे दिन रात साथ ये छूटे ना
ना छूटेगा
उल्फत में तेरी चाहत में तेरी
ठुकरा दूं सारा जहाँ
हाँ हाँ हाँ हाँ
हाँ हाँ हाँ
नज़र ने नज़र से क्या कहा
मेरी जान मेरी जान ये बता
हो ओ ओ, कहूं क्या नज़र ने क्या कहा
आती है मुझको हया
जो है मेरे दिल में
वही तेरे दिल
एक बार कह दे तू
हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ
हाँ हाँ हाँ
ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला
ho, ला ला ला ला ला ला
.....................................
Nazar ne nazar se kya kaha-Sultanat 1986
परदे पर देखे। आइये उनकी पदार्पण फिल्म से एक गीत सुना जाये।
जूही चावला कि गिनती भी प्रतिभाशाली और संजीदा कलाकारों में
होती है। गीत में आपको दिखलाई देंगे जूही के साथ एक और नवोदित
कलाकार करण कपूर। शशि कपूर के पुत्र करण इस फिल्म के
पहले तक बॉम्बे डाईंग के बुश्शर्ट के विज्ञापन में दिखा करते थे।
माँ के रंग वाले लेकिन पिता के जैसे नैन-नक्श वाले करण की किस्मत
शायद पिता की तरह बुलंद नहीं रही और वे ज्यादा फिल्मों में आगे दिखाई
नहीं दिए। सल्तनत एक बहुसितारा फिल्म है जो फ्लॉप हो गई थी।
प्रस्तिउट गीत गा रह हैं सुरेश वाडकर और साधना सरगम। हसन
कमाल के लिखे बोलोंबोल की धुन तैयार की है कल्याणजी आनंदजी ने।
गीत के बोल:
नज़र ने नज़र से क्या कहा
मेरी जान मेरी जान ये बता
हो, नज़र ने नज़र से क्या कहा
मेरी जान मेरी जान ये बता
हो ओ ओ, कहूं क्या नज़र ने क्या कहा
आती है मुझको हया
जो है मेरे दिल में
वही तेरे दिल
एक बार कह दे तू
हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ
ना ना
नज़र ने नज़र से क्या कहा
आती है मुझको हया
हो ओ ओ, जागे हैं अरमान जान ले जाने जान
अजी जानूं ना
हो जागे हैं अरमान जान ले जाने जान
जानूं ना
कर ले एक एहसान मान ले जाने जान
मानूं ना
पहले वफ़ा का इकरार कर ले
हाज़िर है फिर मेरी जान
हाँ हाँ हाँ हाँ
नज़र ने नज़र से क्या कहा
मेरी जान मेरी जान ये बता
हो ओ ओ, कहूं क्या नज़र ने क्या कहा
आती है मुझको हया
ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला
वादा कर ये हाथ आज से छूटे ना
ना छूटेगा
हो, वादा कर ये हाथ आज से छूटे ना
ना छूटेगा
साथ रहे दिन रात साथ ये छूटे ना
ना छूटेगा
उल्फत में तेरी चाहत में तेरी
ठुकरा दूं सारा जहाँ
हाँ हाँ हाँ हाँ
हाँ हाँ हाँ
नज़र ने नज़र से क्या कहा
मेरी जान मेरी जान ये बता
हो ओ ओ, कहूं क्या नज़र ने क्या कहा
आती है मुझको हया
जो है मेरे दिल में
वही तेरे दिल
एक बार कह दे तू
हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ
हाँ हाँ हाँ
ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला
ho, ला ला ला ला ला ला
.....................................
Nazar ne nazar se kya kaha-Sultanat 1986
Tuesday, 12 April 2011
देखो ये कौन आया-सवेरे वाली गाडी १९८६
सन १९८६ के कम गाने इस ब्लॉग पर शामिल हुए हैं अभी तक।
जो गीत मुझे पसंद हैं सन ८६ के उनमे से एक और प्रस्तुत है
आज आपके लिए। फिल्म भले ना चली हो, इसके गाने मुझे
ज़रूर हौंट करते रहते हैं। ये एक युगल गीत है सुरेश वाडकर
और आशा भोंसले की आवाज़ में। मेरे ख्याल से आर. डी. बर्मन
ने सुरेश वाडकर की आवाज़ का और संगीतकारों की तुलना में
बेहतर इस्तेमाल किया है। सनी देवल और पूनम ढिल्लों पर
फिल्माए गाये इस गीत में एक आवाज़ और भी है जो गीत के
शुरू में है जिसके बारे में मैं ये सुनिश्चित नहीं कर पाया की ये
एस. जानकी की आवाज़ है या चित्रा की। दोनों ही दक्षिण भारत
की नामचीन गायिकाएं हैं। उल्लेखनीय है कि इस फिल्म में इन
दोनों गायिकाओं ने एक भी गीत नहीं गाया है।
अगर ये फिल्म राजस्थानी पृष्ठभूमि पर बनी है तो यही बात खटकने
वाली है कि इसमें दक्षिण भारतीय सी सुनाई पढने वाली आवाजों
का प्रयोग पार्श्व में क्यूँ किया गया है। हालाँकि ये शिकायत आगे
सुनाई देने वाले मधुर गीत के बाद लगभग ख़त्म सी हो जाती है।
गाने में तोते का होना ज़रूरी था या नहीं ये आप निश्चित कीजिये ।
गीत के बोल:
देखो ये कौन आया
देखो ये कौन आया
मुझको उड़ा लाया
मुझको उड़ा लाया
देखो ये कौन आया
देखो ये कौन आया
मेरी सदा पे भूल के रास्ता
ऐ दिल ये कौन आया
मुझको उड़ा लाया
मुझको उड़ा लाया
किसकी सदा पे झोंका हवा का
मुझको उड़ा लाया
देखो ये कौन आया
हा आ आ आ आ आ
मुझको उड़ा लाया
मेरे वीराने को किसने सजा दिया
हाँ, मेरे वीराने को किसने सजा दिया
रौनक ज़रा देखो
ओ,रौनक ज़रा देखो
कुछ तो नहीं है
क्या जाने तुमको कैसा नशा छाया
देखो ये कौन आया
देखो ये कौन आया
बातें बनाते हो क्यूँ सच्चे झूठे
हाँ, बातें बनाते हो क्यूँ सच्चे झूठे
सपने दिखाते हो
सपने दिखाते हो
हो, फिर से तो कहना
मैंने सुना नहीं क्या तुमने फ़रमाया
मुझको उड़ा लाया
हा आ आ आ आ आ
मुझको उड़ा लाया
आ मेरी बाँहों में बैठा हूँ कबसे
हाँ, आ मेरी बाँहों में बैठा हूँ कबसे
मैं तेरी राहों में
हो मैं तेरी राहों में
जलते हुए भी जबसे पड़ा है
दिल पे तेरा साया
देखो ये कौन आया
ओ,देखो ये कौन आया
मेरी सदा पे भूल के रास्ता
ऐ दिल ये कौन आया
मुझको उड़ा लाया
हो ओ ओ ओ ओ ओ
मुझको उड़ा लाया
किसकी सदा पे झोंका हवा का
मुझको उड़ा लाया
ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला
जो गीत मुझे पसंद हैं सन ८६ के उनमे से एक और प्रस्तुत है
आज आपके लिए। फिल्म भले ना चली हो, इसके गाने मुझे
ज़रूर हौंट करते रहते हैं। ये एक युगल गीत है सुरेश वाडकर
और आशा भोंसले की आवाज़ में। मेरे ख्याल से आर. डी. बर्मन
ने सुरेश वाडकर की आवाज़ का और संगीतकारों की तुलना में
बेहतर इस्तेमाल किया है। सनी देवल और पूनम ढिल्लों पर
फिल्माए गाये इस गीत में एक आवाज़ और भी है जो गीत के
शुरू में है जिसके बारे में मैं ये सुनिश्चित नहीं कर पाया की ये
एस. जानकी की आवाज़ है या चित्रा की। दोनों ही दक्षिण भारत
की नामचीन गायिकाएं हैं। उल्लेखनीय है कि इस फिल्म में इन
दोनों गायिकाओं ने एक भी गीत नहीं गाया है।
अगर ये फिल्म राजस्थानी पृष्ठभूमि पर बनी है तो यही बात खटकने
वाली है कि इसमें दक्षिण भारतीय सी सुनाई पढने वाली आवाजों
का प्रयोग पार्श्व में क्यूँ किया गया है। हालाँकि ये शिकायत आगे
सुनाई देने वाले मधुर गीत के बाद लगभग ख़त्म सी हो जाती है।
गाने में तोते का होना ज़रूरी था या नहीं ये आप निश्चित कीजिये ।
गीत के बोल:
देखो ये कौन आया
देखो ये कौन आया
मुझको उड़ा लाया
मुझको उड़ा लाया
देखो ये कौन आया
देखो ये कौन आया
मेरी सदा पे भूल के रास्ता
ऐ दिल ये कौन आया
मुझको उड़ा लाया
मुझको उड़ा लाया
किसकी सदा पे झोंका हवा का
मुझको उड़ा लाया
देखो ये कौन आया
हा आ आ आ आ आ
मुझको उड़ा लाया
मेरे वीराने को किसने सजा दिया
हाँ, मेरे वीराने को किसने सजा दिया
रौनक ज़रा देखो
ओ,रौनक ज़रा देखो
कुछ तो नहीं है
क्या जाने तुमको कैसा नशा छाया
देखो ये कौन आया
देखो ये कौन आया
बातें बनाते हो क्यूँ सच्चे झूठे
हाँ, बातें बनाते हो क्यूँ सच्चे झूठे
सपने दिखाते हो
सपने दिखाते हो
हो, फिर से तो कहना
मैंने सुना नहीं क्या तुमने फ़रमाया
मुझको उड़ा लाया
हा आ आ आ आ आ
मुझको उड़ा लाया
आ मेरी बाँहों में बैठा हूँ कबसे
हाँ, आ मेरी बाँहों में बैठा हूँ कबसे
मैं तेरी राहों में
हो मैं तेरी राहों में
जलते हुए भी जबसे पड़ा है
दिल पे तेरा साया
देखो ये कौन आया
ओ,देखो ये कौन आया
मेरी सदा पे भूल के रास्ता
ऐ दिल ये कौन आया
मुझको उड़ा लाया
हो ओ ओ ओ ओ ओ
मुझको उड़ा लाया
किसकी सदा पे झोंका हवा का
मुझको उड़ा लाया
ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला
Saturday, 29 January 2011
कितनी खूबसूरत ये तस्वीर है-बेमिसाल १९८२
अमिताभ की कई खुशनुमा सी फ़िल्में भी आयीं। ये फिल्म उतनी
खुशनुमा नहीं है जितनी नाम से या गीतों से लगती है। इसका अंत
दुखांत है और थोड़ा अलग हटके है। फिल्म में दो नायक हैं और
एक नायिका। कन्फ्यूज़न बरकरार रहता है जब तक एक नायक
और एकमात्र नायिका की शादी नहीं हो जाती। इस गीत में तीनों
चरित्र एक गीत गा रहे हैं और कश्मीर कि प्रशंसा में कसीदे काढ रहे
हैं। विनोद मेहरा और रखी हैं अमिताभ के अलावा इस गीत में।
आनंद बक्षी के लिखे गीत को स्वर दिया है लता, किशोर और सुरेश
वाडकर ने। संगीत है आर डी बर्मन का।
गीत के बोल:
कितनी खूबसूरत ये तस्वीर है
मौसम बेमिसाल बेनज़ीर है
ये कशमीर है, ये कशमीर है
पर्वतों के दरमियाँ हैं
जन्नतों की तरमियाँ हैं
आज के दिन हम यहाँ हैं
साथी ये हमारी तकदीर है
कितनी खूबसूरत ये तस्वीर है
ये कशमीर है, ये कशमीर है
इस ज़मीन से आसमान से
फूलों के इस गुलसिताँ से
जाना मुश्किल है यहाँ से
इस ज़मीन से आसमान से
फुलों के इस गुलसिताँ से
जाना मुशकिल है यहाँ से
तौबा ये हवा है या जंज़ीर है
कितनी खूबसूरत ये तस्वीर है
ये कशमीर है, ये कशमीर है
ऐ सखी देख तो नज़ारा
एक अकेला बेसहारा
कौन है वो हम कहारा
मुझसा कोई आशिक़ ये दिलजीर है
अरे, कितनी खूबसूरत ये तस्वीर है
ये कश्मीर है, ये कश्मीर है
..............................................
Kitni khoobsurat ye tasveer hai-Bemisaal 1982
खुशनुमा नहीं है जितनी नाम से या गीतों से लगती है। इसका अंत
दुखांत है और थोड़ा अलग हटके है। फिल्म में दो नायक हैं और
एक नायिका। कन्फ्यूज़न बरकरार रहता है जब तक एक नायक
और एकमात्र नायिका की शादी नहीं हो जाती। इस गीत में तीनों
चरित्र एक गीत गा रहे हैं और कश्मीर कि प्रशंसा में कसीदे काढ रहे
हैं। विनोद मेहरा और रखी हैं अमिताभ के अलावा इस गीत में।
आनंद बक्षी के लिखे गीत को स्वर दिया है लता, किशोर और सुरेश
वाडकर ने। संगीत है आर डी बर्मन का।
गीत के बोल:
कितनी खूबसूरत ये तस्वीर है
मौसम बेमिसाल बेनज़ीर है
ये कशमीर है, ये कशमीर है
पर्वतों के दरमियाँ हैं
जन्नतों की तरमियाँ हैं
आज के दिन हम यहाँ हैं
साथी ये हमारी तकदीर है
कितनी खूबसूरत ये तस्वीर है
ये कशमीर है, ये कशमीर है
इस ज़मीन से आसमान से
फूलों के इस गुलसिताँ से
जाना मुश्किल है यहाँ से
इस ज़मीन से आसमान से
फुलों के इस गुलसिताँ से
जाना मुशकिल है यहाँ से
तौबा ये हवा है या जंज़ीर है
कितनी खूबसूरत ये तस्वीर है
ये कशमीर है, ये कशमीर है
ऐ सखी देख तो नज़ारा
एक अकेला बेसहारा
कौन है वो हम कहारा
मुझसा कोई आशिक़ ये दिलजीर है
अरे, कितनी खूबसूरत ये तस्वीर है
ये कश्मीर है, ये कश्मीर है
..............................................
Kitni khoobsurat ye tasveer hai-Bemisaal 1982
Wednesday, 1 December 2010
शाम रंगीन हुई है -कानून और मुजरिम १९८१
मुख्या धारा के सिनेमा से अधिकतर फ़िल्मी पत्रकारों, लेखकों
और नए नवेले ज्यादा प्याज खाने वाले चिट्ठाकारों का मतलब
होता बड़े बड़े निर्देशकों की फ़िल्में। अब उनकी सूची पहले से ही
बंधी हुई होती ही तो वे महिमामंडन भी गिने चुने लोगों का किया
करते हैं। कुछ का हाल तो ये है कि वे पोंडीचेरी के प्राकृतिक सौंदर्य
पे साधिकार लिखते हैं और वहां गुलमोहर और चीड के वृक्षों की
संख्या पर टिप्पणी करते हैं। अमूमन संगीत प्रेमी भी अधिकांश
अवसरों पर अपने अपने फैवरेट ' पिटारी बाई' और 'भोंगड़े भाई'
के आख्यान में ही व्यस्त दिखाई देते हैं। ऐसे में आम जनता को
ये कैसे पता चलेगा कि इतिहास की तह में क्या क्या छुपा हुआ है ।
एक तो इतिहास वो होता है जो बंद कमरे में कुछ लोगों की सीमित
जानकारी के आधार पर लिखा जाता ही जिसमे शब्द जाल ज्यादा
होता है तथ्य कम, कागज़ ज़रूर। ऐसी ऐतिहासिक किताबों के मोटे
मोटे और चिकने से होते हैं। कीमत ऐसी कि आम आदमी की सोच
के बाहर हो। ऐसी कुछ किताबें पढ़ कर भी सयाने लोग मसाला लिखा
करते हैं । दूसरा इतिहास वो जो पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित होता है ।
ऐसा इतिहास भी कम लोगों की पहुँच में होता है। अब मान लीजिये
किसी लेखक ने अपनी आत्मकथा में ये तथ्य छुपाया कि उसकी पीठ में
एग्ज़ीमा था, तो वो आपको उसके निकटस्थ निवासियों से मालूम
पढ़ जायेगा। इतनी फुर्सत किसी को नहीं है जो वास्तविकता जाने
के लिए वर्जिश करे अतः जो सामने प्रस्तुत है उसी को सत्य मानते
हुए इतिश्री कर ली जाती है।
आज एक गीत आपको सुनवाते हैं जो गुमनाम सी अनदेखी फिल्म
कानून और मुजरिम से है- शाम रंगीन हुई है। इस युगल गीत को
गाया है सुरेश वाडकर और उषा मंगेशकर ने। १९८१ में आई फिल्म
कानून और मुजरिम के इस गीत के अलावा फिल्म के बाकी गीत
आपको एल पी रिकॉर्ड के ऊपर ही मिलेंगे।
ये एक ऐसा गीत है जिसकी फरमाइश बहुत आया करती रेडियो पर।
गाँव-गाँव से, मजनू का टीला से और झुमरी तलैया से। बरकाकाना का
नाम भी कभी कभार सुनाई दे जाता । ये बरकाकाना नामक जगह बिहार
से अलग होकर बने राज्य झारखण्ड में मौजूद है ।
सन १९८१ में पुराने दौर के कुछ संगीतकार सक्रिय थे। ख़य्याम ने तो
फिल्म कभी कभी की रेकोर्ड तोड़ सफलता के बाद काफी फिल्मों में संगीत
दिया मगर सी अर्जुन फिल्म 'जय संतोषी माँ' की अपार सफलता के
बावजूद हिंदी फिल्म क्षेत्र में कुछ खास नहीं कर पाए या यूँ कहें उनको
करने नहीं दिया गया ।
सुनिए कैफ़ी आज़मी का लिखा ये गीत जो आज भी सुनने में वही आनंद
देता है जो सन ८१ में दिया करता था।
गीत के बोल:
शाम रंगीन हुई है तेरे आँचल की तरह
सुरमई रंग सजा है तेरे काजल की तरह
पास हो तुम मेरे दिल के मेरे आँचल की तरह
मेरी आँखों में बसे हो मेरे काजल की तरह
शाम रंगीन हुई है तेरे आँचल की तरह
आसमान है मेरे अरमानों का दर्पण जैसे
आसमान है मेरे अरमानों का दर्पण जैसे
दिल यूं धडके मेरा खनके तेरे कंगन जैसे
मस्त हैं आज हवाएं मेरी पायल की तरह
सुरमई रंग सजा है तेरे काजल की तरह
शाम रंगीन हुई है तेरे आँचल की तरह
मेरी हस्ती पे कभी यूं कोई छाया ही ना था
मेरी हस्ती पे कभी यूं कोई छाया ही ना था
तेरे नज़दीक मैं पहले कभी आया ही ना था
मैं हूँ धरती की तरह तुम किसी बादल की तरह
सुरमई रंग सजा है तेरे काजल की तरह
आ आ आ, शाम रंगीन हुयी है तेरे आँचल की तरह
ऐसी रंगीन मुलाक़ात का मतलब क्या है
ऐसी रंगीन मुलाक़ात का मतलब क्या है
इन छलकते हुए जज़्बात का मतलब क्या है
आज हर दर्द भुला दो किसी पागल की तरह
सुरमई रंग सजा है तेरे आँचल की तरह
शाम रंगीन हुई है तेरे आँचल की तरह
पास हो तुम मेरे दिल के मेरे आँचल की तरह
शाम रंगीन हुई है तेरे आँचल की तरह
पास हो तुम मेरे दिल के मेरे आँचल की तरह
और नए नवेले ज्यादा प्याज खाने वाले चिट्ठाकारों का मतलब
होता बड़े बड़े निर्देशकों की फ़िल्में। अब उनकी सूची पहले से ही
बंधी हुई होती ही तो वे महिमामंडन भी गिने चुने लोगों का किया
करते हैं। कुछ का हाल तो ये है कि वे पोंडीचेरी के प्राकृतिक सौंदर्य
पे साधिकार लिखते हैं और वहां गुलमोहर और चीड के वृक्षों की
संख्या पर टिप्पणी करते हैं। अमूमन संगीत प्रेमी भी अधिकांश
अवसरों पर अपने अपने फैवरेट ' पिटारी बाई' और 'भोंगड़े भाई'
के आख्यान में ही व्यस्त दिखाई देते हैं। ऐसे में आम जनता को
ये कैसे पता चलेगा कि इतिहास की तह में क्या क्या छुपा हुआ है ।
एक तो इतिहास वो होता है जो बंद कमरे में कुछ लोगों की सीमित
जानकारी के आधार पर लिखा जाता ही जिसमे शब्द जाल ज्यादा
होता है तथ्य कम, कागज़ ज़रूर। ऐसी ऐतिहासिक किताबों के मोटे
मोटे और चिकने से होते हैं। कीमत ऐसी कि आम आदमी की सोच
के बाहर हो। ऐसी कुछ किताबें पढ़ कर भी सयाने लोग मसाला लिखा
करते हैं । दूसरा इतिहास वो जो पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित होता है ।
ऐसा इतिहास भी कम लोगों की पहुँच में होता है। अब मान लीजिये
किसी लेखक ने अपनी आत्मकथा में ये तथ्य छुपाया कि उसकी पीठ में
एग्ज़ीमा था, तो वो आपको उसके निकटस्थ निवासियों से मालूम
पढ़ जायेगा। इतनी फुर्सत किसी को नहीं है जो वास्तविकता जाने
के लिए वर्जिश करे अतः जो सामने प्रस्तुत है उसी को सत्य मानते
हुए इतिश्री कर ली जाती है।
आज एक गीत आपको सुनवाते हैं जो गुमनाम सी अनदेखी फिल्म
कानून और मुजरिम से है- शाम रंगीन हुई है। इस युगल गीत को
गाया है सुरेश वाडकर और उषा मंगेशकर ने। १९८१ में आई फिल्म
कानून और मुजरिम के इस गीत के अलावा फिल्म के बाकी गीत
आपको एल पी रिकॉर्ड के ऊपर ही मिलेंगे।
ये एक ऐसा गीत है जिसकी फरमाइश बहुत आया करती रेडियो पर।
गाँव-गाँव से, मजनू का टीला से और झुमरी तलैया से। बरकाकाना का
नाम भी कभी कभार सुनाई दे जाता । ये बरकाकाना नामक जगह बिहार
से अलग होकर बने राज्य झारखण्ड में मौजूद है ।
सन १९८१ में पुराने दौर के कुछ संगीतकार सक्रिय थे। ख़य्याम ने तो
फिल्म कभी कभी की रेकोर्ड तोड़ सफलता के बाद काफी फिल्मों में संगीत
दिया मगर सी अर्जुन फिल्म 'जय संतोषी माँ' की अपार सफलता के
बावजूद हिंदी फिल्म क्षेत्र में कुछ खास नहीं कर पाए या यूँ कहें उनको
करने नहीं दिया गया ।
सुनिए कैफ़ी आज़मी का लिखा ये गीत जो आज भी सुनने में वही आनंद
देता है जो सन ८१ में दिया करता था।
गीत के बोल:
शाम रंगीन हुई है तेरे आँचल की तरह
सुरमई रंग सजा है तेरे काजल की तरह
पास हो तुम मेरे दिल के मेरे आँचल की तरह
मेरी आँखों में बसे हो मेरे काजल की तरह
शाम रंगीन हुई है तेरे आँचल की तरह
आसमान है मेरे अरमानों का दर्पण जैसे
आसमान है मेरे अरमानों का दर्पण जैसे
दिल यूं धडके मेरा खनके तेरे कंगन जैसे
मस्त हैं आज हवाएं मेरी पायल की तरह
सुरमई रंग सजा है तेरे काजल की तरह
शाम रंगीन हुई है तेरे आँचल की तरह
मेरी हस्ती पे कभी यूं कोई छाया ही ना था
मेरी हस्ती पे कभी यूं कोई छाया ही ना था
तेरे नज़दीक मैं पहले कभी आया ही ना था
मैं हूँ धरती की तरह तुम किसी बादल की तरह
सुरमई रंग सजा है तेरे काजल की तरह
आ आ आ, शाम रंगीन हुयी है तेरे आँचल की तरह
ऐसी रंगीन मुलाक़ात का मतलब क्या है
ऐसी रंगीन मुलाक़ात का मतलब क्या है
इन छलकते हुए जज़्बात का मतलब क्या है
आज हर दर्द भुला दो किसी पागल की तरह
सुरमई रंग सजा है तेरे आँचल की तरह
शाम रंगीन हुई है तेरे आँचल की तरह
पास हो तुम मेरे दिल के मेरे आँचल की तरह
शाम रंगीन हुई है तेरे आँचल की तरह
पास हो तुम मेरे दिल के मेरे आँचल की तरह
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1981,
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