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Wednesday, 15 June 2011

कौन अंजाम-ए-उल्फत नहीं जानता-हेरा फेरी १९७६

ये दिमाग भी कमबख्त बहुत कबाड़ा किस्म की चीज़ है, मटर पनीर
खाते खाते जूता पालिश की ख़ाली होती डब्बी याद आ जाती है तो
नहाते नहाते पेट्रोल पम्प दिखाई देने लगता है ।

आज एक पुराने मित्र की याद हो आई। जो मित्र दिल के करीब थे
समय ने उनको इतना दूर कर दिया कि अब उनकी यादों के सिवा
कुछ बचा नहीं है दोस्ती के नाम पे। कुछ दूसरी दुनिया पहुँच
गये तो कुछ मोह माया में उलझ कर रह गये। आपको फिल्म हेरा फेरी
का एक गीत सुनवाया था-बरसों पुराना ये याराना। फिल्म हेरा फेरी से
एक गीत आपको और सुनवाते हैं। ये सायरा बानो और अमिताभ बच्चन
पर फिल्माया गया है।




गीत के बोल:

कौन अंजाम-ए-उल्फत नहीं जानता
कौन अंजाम-ए-उल्फत नहीं जानता
मगर क्या करूं ये दिल दीवाना
नहीं मानता नहीं मानता
नहीं मानता दिल नहीं मानता

कौन अंजाम-ए-उल्फत नहीं जानता

मौत से जो डरे, प्यार वो क्या करे
प्यार में तो यही मौत है ज़िन्दगी
जान क्या चीज़ है प्यार के सामने
साथ छूते ना छूते ये दिल की लगी
ये ना होता तो फिर प्यार की राह में
ख़ाक दर दर की कोई दीवाना
नहीं छानता नहीं छानता
नहीं मानता दिल नहीं मानता

कौन अंजाम-ए-उल्फत नहीं जानता

लैला शीरी हो या हीर या सोहनी
मर के भी उनकी सूरत सितारों में है
जिस के दिल का लहू घुल गया प्यार में
आज तक उनकी ख़ुशबू बहारों में है
कुछ तो है वरना दिल मेरा तेरे लिए
जान देने की जिद जाने-जाना
नहीं ठानता, नहीं ठानता
नहीं मानता दिल नहीं मानता

कौन अंजाम-ए-उल्फत नहीं जानता
कौन अंजाम-ए-उल्फत नहीं जानता
मगर क्या करूं ये दिल दीवाना
नहीं मानता नहीं मानता
नहीं मानता दिल नहीं मानता
............................
Kaun anjaam-e-ulfat nahin jaanta-Hera Pheri 1976

Sunday, 19 December 2010

आ जा तेरी याद आई-चरस १९७६

विलायत के नज़ारों वाला फिल्म चरस का गीत पेश है। इस गीत
की शुरुआत में गीतकार की आवाज़ है। जी हाँ ये भारी सी पंजाबी
लहजे वाली आवाज़ आनंद बक्षी की है। इन्होने कुछ फ़िल्मी गीत भी
गाये हैं । बाकी दो आवाजें आप बखूबी पहचानते हैं-लता और रफ़ी की।
परदे पर जो जोड़ी है वो श्रीमान देओल और श्रीमती देओल की है। ये
श्रीमान श्रीमती इस फिल्म के आने के बाद ही बने थे। प्रस्तुत गीत एक
सुपर हिट गीत है और अभी भी रेडियो पर नियमित रूप से बजता सुनाई
देता है।




गीत के बोल:

आनंद बक्षी: दिल इंसान का एक तराजू
जो इन्साफ को तोले
अपनी जगह पर प्यार है कायम
धरती अम्बर डोले
सब से बड़ा सच एक जगत में
भेद अनेक जो खोले
प्रेम बिना जीवन सूना
ये पागल प्रेमी बोले

लता :कि आ जा तेरी याद आयी
कि आ जा तेरी याद आयी
कि आ जा तेरी याद आयी
ओ बालम हरजाई
कि आ जा तेरी याद आयी

रफ़ी:कि आ जा तेरी याद आयी
कि आ जा तेरी याद आयी
कि आ जा तेरी याद आयी
ओ बालम हरजाई
कि आ जा तेरी याद आयी

लता: ज़ालिम कितनी देर लगा दी
तुमने आते आते
अब आये जो अब ना आते
तो हम जान से जाते
दिल दीवाना दीवाने को हम कैसे समझाते
देते राम दुहाई
कि आ जा तेरी याद आयी

रफ़ी: फुर्सत भी है मौसम भी है
मन है रंग रलियों में
छुप गयी है तू खुशबू बन के
शायद इन कलियों में
मैंने तुझको कितना ढूँढा आवारा गलियों में
यह आवाज़ लगाई
कि आ जा तेरी याद आयी

लता: मस्त हवा ने बात कोई
ऐसी कह दी कानों में
जैसे कोई मदिरा भर दे
खाली पैमानों में
तड़पा डाला आज मचलते दिल के अरमानों ने
रुत ने ली अंगडाई
कि आ जा तेरी याद आयी
कि आ जा तेरी याद आयी
.......................................................
Aa jaa teri yaad aayi-Charas 1976

Friday, 3 December 2010

गोरी तेरा गाँव बड़ा प्यारा-चितचोर १९७६

७० के दशक में सन ७५ की ढिशुम ढिशुम वाली शोले
के बाद पब्लिक ने बहुत से ढिच्क्युन ढिच्क्युन आवाजों
वाली मार धाड़ भरी फ़िल्में देखी। उसी के साथ साथ
कुछ साफ़ सुथरी और पारिवारिक घरेलू किस्म की फिल्में
भी बनती रहीं। सन १९७६ में आई और गाँव की प्रष्ठभूमि
पर बनी चितचोर भी ऐसी ही एक फिल्म है। सीधी साधी
कहानी और कर्णप्रिय गीतों वाली इस फिल्म को जनता
ने बेहद पसंद किया। आइये इस फिल्म का लोकप्रिय गीत
सुनें जो येसुदास का गाया हुआ है। बोल और संगीत दोनों
रवीन्द्र जैन के हैं। गीत से एक नया शब्द सीखने को मिला
-चन्द्रमधु ।



गीत के बोल:

गोरी तेरा गाँव बड़ा प्यारा
मैं तो गया मारा आ के यहाँ रे
उस पर रूप तेरा सादा
चन्द्रमधु आधा आधा जवाँ रे

गोरी तेरा गाँव बड़ा प्यारा
मैं तो गया मारा आ के यहाँ रे
आ के यहाँ रे

जी करता है मोर कि पैरों में
पायलिया पहना दूँ
कुहू कुहू गाति कोयलिया को
फूलों क गहना दूँ

यहीं घर अपना बनाने को, पंछी करे देखो
तिनके जमा रे तिनके जमा रे

गोरी तेरा गाँव बड़ा प्यारा
मैं तो गया मारा आ के यहाँ रे
आके यहाँ रे

रंग बिरंगे फूल खिले हैं
लोग भी फूलों जैसे
आ जाये इक बार यहाँ जो
जायेगा फिर कैसे
झर झर झरते हुए झरने, मन को लगे हरने
ऐसा कहाँ रे ऐसा कहाँ रे

उसपर रूप तेरा सादा
चन्द्रमधु आधा, आधा जवाँ रे
आधा जवाँ रे

परदेसी अन्जान को ऐसे
कोई नहीं अपनाता
तुम लोगों से जुड़ गया जैसे
जनम जनम का नाता
अपने धुन में मगन डोले, लोग यहाँ बोले
दिल की ज़बाँ रे दिल की ज़बाँ रे

गोरी तेरा गाँव बड़ा प्यारा
मैं तो गया मारा आ के यहाँ रे

उसपर रूप तेरा सादा
चन्द्रमधु आधा
आधा जवाँ रे

Saturday, 20 November 2010

वादा करो जानम-सबसे बड़ा रुपैया १९७६

फिल्म सबसे बड़ा रुपैया के बारे में आपको काफी जानकारी इस
पोस्ट में दी गई थी। अब आप सुनिए इस फिल्म का सबसे
लोकप्रिय गीत जो मधुर भी है। इस गीत को विनोद मेहरा और
मौसमी चटर्जी पर फिल्माया गया है। गीत के बोल मजरूह के हैं
और संगीत बासु-मनोहारी का। गायक कलाकार हैं-किशोर और
लता। हर संगीत प्रेमी अपने कलेक्शन में कुछ अक्सर सुनने
वाले गीत रखता है। ये एक ऐसा ही गीत है। इसको आप अक्सर
सुन सकते हैं । ऐसी मेलोडिज़ को ही सॉफ्ट मेलोडिज़ कहा जाता है।




गीत के बोल:


वादा करो जानम ना छोड़ोगे ये दामन
ज़माना चाहे छूटे
बाँधी है जो दिल से अब ये डोर
ज़िन्दगी भर ना टूटे

वादा करो जानम ना छोड़ोगे ये दामन
ज़माना चाहे छूटे
बाँधी है जो दिल से अब ये डोर
ज़िन्दगी भर ना टूटे

वादा करो जानम ना छोड़ोगे ये दामन
ज़माना चाहे छूटे

बदलें ना हम तुम कभी
रुत ये बदलती रहे
दो दिलों की ये बात चलती ही रहे

हो ओ ओ, आके बहारों की छाँव
जाती रहे ढलती रहे
ना फिरे ये नज़र दिल से दिल ना रूठे
ज़माना चाहे छूटे

वादा करो जानम ना छोड़ोगे ये दामन
ज़माना चाहे छूटे
बाँधी है जो दिल से अब ये डोर
ज़िन्दगी भर ना टूटे

वादा करो जानम ना छोड़ोगे ये दामन
ज़माना चाहे छूटे

होने देंगे ऐसा ना हम कल को ज़माना हँसे
यूं करें प्यार का नाम दुनिया याद करे
हमपे गिरे बिजलियाँ आंधी के तूफ़ान चलें
हाथ से ये तेरा आँचल अब ना छूटे
ज़माना चाहे छूटे

वादा करो जानम ना छोड़ोगे ये दामन
ज़माना चाहे छूटे
बाँधी है जो दिल से अब ये डोर
ज़िन्दगी भर ना टूटे

वादा करो जानम ना छोड़ोगे ये दामन
ज़माना चाहे छूटे
हूँ ऊं ऊं ऊं ज़माना चाहे छूटे
हूँ ऊं ऊं ऊं ज़माना चाहे छूटे
.......................................
Wada karo jaanam-Sabse bada rupaiya 1976
 
 
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