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Monday, 22 July 2013

धक्कम धक्का हुआ-कामयाब १९८४

गीतों में विज्ञान के प्रयोग पर चर्चा हो जाए. एक शब्द है-बल .कोई भी कार्य
करने के समय इसकी याद अवश्य आती है. यहाँ तात्पर्य रस्सी में पड़े
बल से कतई नहीं है जी और न ही बल-प्रयोग से . व्हाट एन आईडिया सर जी

धक्का मुक्की करना-इसमें बल का प्रयोग होता है. इस गीत को सुन लीजिए
आपको भौतिकी के सिद्धांत याद आना शुरू हो जायेंगे.

फिल्म का नाम है कामयाब . ये जब रिलीज़ हुयी थी तब उस समय चूने पुते
पोस्टरों पर लिखा होता था-काम्याब, जिसे पढ़ कर सहज ही अनुमान हो जाता था
कि कामयाब होने के लिए पढाई लिखाई की ज़रूरत नहीं वरन माथे पर चमकते
सितारे होना आवश्यक है. जनाब इस फिल्म का निर्देशन काफी पढ़े लिखे निर्देशक
ने किया था जो नाम के आगे अपनी बी. ए. की डिग्री लगाते थे.

प्यार पक्का करने के लिए किसी मजबूत जोड़ वाले चिपकाऊ पदार्थ की ज़रूरत नहीं
धक्का मुक्की से भी ये पक्का हो सकता है.

क्या गीत है, वाह. ऑंखें हरी हो जाती हैं ऐसे गीत देख कर. दो चोटी वाली
नायिकाएं, नारियल के पेड़, हरे भरे खेत.

नायिका शायद संगीतकार से प्रेरित है. उसने भी गहनों का काफी वजन लाद रखा है.
उम्मीद है संगीतकार को आप पहचान ही गए होंगे. गायक गायिका हैं-आशा और किशोर.

मोटे चश्मे वाले कृपया अपना चश्मा लगा कर वीडियो देखने अन्यथा ऐसा महसूस होगा
कि सरसों से भरी और राई से भरी बोरियां उछल रही हों. 



गीत के बोल:

धक्कम धक्का हुआ
प्यार बड़ा पक्का हुआ
धक्कम धक्का हुआ
प्यार बड़ा पक्का हुआ
....................

Dhakkam dhakka hua-Kaamyab 1984

Saturday, 4 February 2012

शरबती तेरी आँखों की-ब्लैकमेल १९७३

आँखों पर मीलों मील लम्बे अफ़साने आपको मिल जायेंगे साहित्य और
फ़िल्मी गीतों में। गीतकार राजेंद्र कृष्ण ने भी आँखों पर तरह तरह के गीत
लिखे हैं। प्रस्तुत गीत जो कि फिल्म ब्लैकमेल का गीत है में आँखों को शरबती
कि उपमा प्रदान की गई है। 'शरबती' शब्द अक्सर आप दो चीज़ों का जिक्र होने
पर सुना करते होंगे-आँखें और गेंहू। शरबती गेंहू अच्छी क़िस्म का गेंहू माना
जाता है ।


गीत में नायिका की वेश भूषा देख कर शायद आपको देव आनंद की याद आ जाये।
एक बात मुझे हमेशा से चौंकती रही है-फिल्म में नायक नायिका धूल में लोट लगा
लें या मैदान में गुलाटियां खा लें उनके कपडे ज़रा भी गंदे नहीं होते?





गीत के बोल:

मैं डूब डूब जाता हूँ

शरबती तेरी आँखों की, हा
झील सी गहराई में
शरबती तेरी आँखों की
झील सी गहराई में
मैं डूब डूब जाता हूँ

फूलों को तूने रंगत दे दी
सूरज को उजाला, उजाला
सूरज को उजाला
जुल्फों से तूने पानी छटका
तारों की बन गई माला
देखो तारों की बन गई माला
होंठ हैं तेरे दो पैमाने
होंठ तेरे दो पैमाने
पैमानों की मस्ती में
डूब डूब जाता हूँ

शरबती तेरी आँखों की, हा
झील सी गहराई में
शरबती तेरी आँखों की
झील सी गहराई में
मैं डूब डूब जाता हूँ

भूले से जो तू बाग़ में जाये
पत्ता पत्ता डोले
रे डोले पत्ता पत्ता डोले
तिरछी नज़रें जिधर भी फेंके
भड़के सौ सौ शोले, रे शोले
भड़के सौ सौ शोले

गाल हैं तेरे दो अंगारे
गाल हैं तेरे दो अंगारे
अंगारों की गर्मी में
डूब डूब जाता हूँ

शरबती तेरी आँखों की, हा
झील सी गहराई में
शरबती तेरी आँखों की
झील सी गहराई में
मैं डूब डूब
मैं डूब डूब
मैं डूब डूब जाता हूँ
......................................
Sharbati teri ankhon ki-Blackmail 1973

Monday, 30 January 2012

कोमल मधुर चतुर -कैदी १९८४

आज आपको बप्पी दा का कम्पोज़ किया एक गीत सुनवाने का मन कर रहा था
अपनी सूची देखने पर पता चला आप सुन चुके हैं एक बार फिल्म कैदी का गीत
कोई बात नहीं इस फिल्म का दूसरा गीत सुन लेते हैं । गीतकार इन्दीवर को इस
गीत में साहित्यिक शब्द प्रयोग करने के लिए काफी जगह मिली है।

बप्पी लहरी को वर्तमान पीढ़ी "डर्टी पिक्चर" के संगीत निर्देशक के रूप में
पहचानती है। चलिए एक बार फिर से स्वर्ण युक्त(तकरीबन ९-१० किलो)
संगीत निर्देशक के सोने की झंकार वाला संगीत श्रोताओं को एक बार फिर से
सुनने को मिला।

नायक नायिका हैं जीतेंद्र और माधवी। गायक गायिका हैं-किशोर और लता।
नायक जीतेंद्र को चुस्त दुरुस्त रखने में ३०+ का जितना हाथ है उतना ऐसे
फुर्तीले नृत्य वाले गीतों को भी हाथ है। इसको हम कैलोरी जलाने वाला गीत
कह सकते हैं। इसको देख कर आपकी आँखों की भी अच्छी कसरत हो जावेगी।



गीत के बोल:

कोमल मधुर चतुर चपल तेरा हर अंग
सर्वांग सुंदरी
कोमल मधुर चतुर चपल तेरा हर अंग
सर्वांग सुंदरी
स्वर्ग के लोक से आई तेरे लिए
तू भी आ
आ आ आ आ आ आ आ आ आ

कोमल मधुर चतुर चपल तेरा हर अंग
सर्वांग सुंदरी

तन तेरा मन्दिरम मन तेरा सुन्दरम
अर्पणं तुझपे है जीवनं यौवनम
तन तेरा मन्दिरम मन तेरा सुन्दरम
अर्पणं तुझपे है जीवनं यौवनम
नैन को नैन से प्राण को प्राण से तू मिला
आ आ आ आ आ आ आ आ आ

कोमल मधुर चतुर चपल तेरा हर अंग
सर्वांग सुंदरी

जब भी लूं मैं जनम तू बने वल्लभं
जप किये ताप किये तब मिले दर्शनं
जब भी लूं मैं जनम तू बने वल्लभं
जप किये ताप किये तब मिले दर्शनं
ये हमारा मिलन देगा धरती को
नाम एक नया

कोमल मधुर चतुर चपल तेरा हर अंग
सर्वांग सुंदरी
स्वर्ग के लोक से आई तेरे लिए
तू भी आ
आ आ आ आ आ आ आ आ आ

कोमल मधुर चतुर चपल तेरा हर अंग
सर्वांग सुंदरी
.............................
Komal madhur chatur-Qaidi 1984

Friday, 27 January 2012

मैं हूँ झुम झुम झुम झुम झुमरू-झुमरू १९६१

गीतों को सुनते सुनते कुछ अंतराल के बाद उसकी बारीकियां पकड़ में
आने लगती हैं और गुनगुनाने वाले का मुगालता ख़त्म हो जाता है कि वह
इसे बढ़िया ढंग से गा रहा है। ये बात दीगर है कि कुछ ओर्केस्ट्रा के कलाकारों
को ये मुगालता ता-उम्र बना रहता है। आज आपको एक गीत ऐसा सुनवाते हैं
जिसे मैंने जितनी बार इधर उधार सुना बिगड़ा हुआ ही सुना। इसकी हू-ब-हू
कॉपी करना असंभव है। गीत कठिनतम गीतों में से एक है और गायक का
अनूठा अंदाज़ इसमें अपने चरम पर है।

फिल्म का नाम है झुमरू और ये फिल्म का शीर्षक गीत है। गीत लिखा है
मजरूह सुल्तानपुरी ने और इसकी धुन स्वयं किशोर कुमार ने बनाई है ।

गीत के बोलों में जो योड्लिंग के साथ साथ कुछ अन्य शब्दों का समावेश भी
है जिसे आप स्वयं समझिये।



गीत के बोल:

मैं हूँ झुम झुम झुम झुम झुमरू
फक्कड़ घुँघरू बन के घूमूं
मैं ये प्यार का गीत सुनाता चला
मंजिल पे मेरी नज़र
मैं दुनिया से बेखबर
बीती बातों पे धूल उड़ाता चला

मैं हूँ झुम झुम झुम झुम झुमरू
फक्कड़ घुँघरू बन के घूमूं
मैं ये प्यार का गीत सुनाता चला
मंजिल पे मेरी नज़र
मैं दुनिया से बेखबर
बीती बातों पे धूल उड़ाता चला


मैं हूँ झुम झुम झुम झुम झुमरू
फक्कड़ घुँघरू बन के घूमूं
साथ में हमसफ़र ना कोई कारवां,
भोला भाला सीधा साधा
लेकिन दिल का हूँ शहज़ादा
है ये मेरी ज़मीन ये मेरा आसमान


मैं हूँ झुम झुम झुम झुम झुमरू
फक्कड़ घुँघरू बन के घूमूं
प्यार सीने मैं है हर किसी के लिए
मुजको प्यारा हर इंसान
दिलवालों पे हूँ कुर्बान
ज़िन्दगी है मेरी ज़िन्दगी के लिए


मैं हूँ झुम झुम झुम झुम झुमरू
फक्कड़ घुँघरू बन के घूमूं
मैं ये प्यार का गीत सुनाता चला
मंजिल पे मेरी नज़र
मैं दुनिया से बेखबर
बीती बातों पे धूल उड़ाता चला

....................................
Main hoon jhum jhum jhum jhum jhumroo-jhumroo 1961

Thursday, 8 December 2011

ये देस परदेस -देस परदेस १९७८

एक गीत पेश है जिसने मुझे काफी प्रभावित किया और देव आनंद
के साथ साथ किशोर कुमार को भी ज्यादा पसंद करने की वजहें
बनायीं वो है फिल्म देस परदेस का गीत-ये देस परदेस। देस परदेस
हिंदी फिल्म सिनेमा का एक मील का पत्थर है। संभवतः ये देव आनंद
के निर्देशन वाली अंतिम बड़ी हिट फिल्म थी। इसके बाद आई लूटमार
भी काफी चली मगर इस फिल्म जैसा प्रभाव नहीं जगा पाई।

फिल्म देस परदेस के सभी गीत हिट हुए और आज भी उतने ही चाव से
सुने जाते हैं। रेडियो-अदरक लहसुन भी कई बार इस फिल्म के गीत
बजाते मिल जाते हैं। फ़िल्म के बाकी गीतों में और प्रस्तुत गीत में क्या
फर्क रहा मेरे लिए:देस परदेस के अन्य गीत मैं भी साथ साथ गुनगुनाने की
कोशिश करता और फिल्म के शीर्षक गीत को केवल ध्यान से सुनता। कुछ गीत
केवल तल्लीनता से सुनने में ही आनंद आता और उन गीतों के साथ अपनी
आवाज़ की मिलावट करके कानों पर बोझ डालना मेरे हिसाब से उचित नहीं
है।



गीत के बोल:

ये देस परदेस

हे, खुशियाँ यहीं पे
मिलेंगी हमें रे
सपना है अपना
ये देस परदेस

खुशियाँ यहीं पे
मिलेंगी हमें रे
अपना है अपना
ये देस परदेस

वही पुराने हैं, सारे फसाने,
नया है लेकिन जहाँ
अरे रस्ते नये हैं, ये मन्ज़िल नई है
लेकिन वही आसमाँ
सपना है सपना
अपना है अपना
ये देस परदेस

अकेला नहीं हूँ मैं, तेरे बिना
संग मेरे तेरी याद है
मिलकर खिलें फूल हर रंग के,
बस यही मेरी फरियाद है
सपना है सपना
अपना है अपना
ये देस परदेस
...............................
Ye des pardes-Des Pardes 1978

Tuesday, 6 December 2011

बोलो क्या हमको दोगे -छुपा रुस्तम १९७३

निस्संदेह ये वर्ष कला और सिनेमा जगत के लिए त्रासदायी रहा है। इस वर्ष
अनेक नामचीन हस्तियों ने नश्वर संसार से विदा ली। उन कलाकारों की बस यादें
ही चित्र, चलचित्र और आवाज़ के रूप में हमें उनकी उपस्थिति का एहसास कराती
रहेंगी।

देव आनंद मेरे पसंदीदा कलाकारों में से एक हैं। उनके १-२ गीत रोज ही याद आ
जाते हैं। परसों के रोज मुझे एक गीत विशेष रूप से याद आया वो है फिल्म
छुपा रुस्तम का गीत-बोलो क्या हमको दोगे। इसमें शुरू में केवल 'आंय' बोला गया
है देव आनंद द्वारा। ये एक शब्द ही उनके अंदाज़ को बयां करने के लिए काफी है।
अब ये आप बूझिये कि ये शब्द किशोर कुमार की आवाज़ में है या स्वयं देव आनंद
की आवाज़ में। किशोर कुमार जिन्होंने देव आनंद के लिए विशेष तौर पर गीत गाये ,
यूँ कहिये पार्श्व गायन के मामले में वे या तो स्वयं के लिए या फिर केवल देव आनंद
के लिए ही परदे पर गीत गाते। ये सिलसिला कम से कम सन १९६९ में आई आराधना
के पहले तक तो चला। कभी कभी तो ये लगने लगता जैसे देव आनंद स्वयं परदे पर
गीत गा रहे हों। तय है कि किशोर के गाये देव आनंद अभिनीत गीतों में अतिरिक्त ऊर्जा
का संचार होता महसूस होता है।

बहुत कम ऐसे कलाकार हुए हैं हिंदी सिनेमा जगत में जिनके गीत देखते समय गीत
और धुन पर से ध्यान कुछ देर के लिए हट जाता है उनमें से एक हैं देव आनंद। उन्हें
सदाबहार यूँ ही नहीं कहा जाता है। वे हमेशा सक्रिय दिखलाई दिए और फिल्म उद्योग
के बाल, युवा, बुज़ुर्ग सभी वर्गों के लिए प्रेरणास्रोत बने रहे।

गीत कम सुना हुआ है इसलिए कम देखा गया भी कह सकते हैं इसको। इस गीत
में जो कि सन ७० के दशक के पूर्वार्ध का गीत है, देव आनंद अपनी पूरी ऊर्जा के
साथ नायिका से कदम ताल मिलते हुए जीवन्तता प्रदान कर रहे हैं। गायक-गायिका हैं
किशोर कुमार और आशा भोंसले। गीत सचिन देव बर्मन की संगीत फैक्ट्री की उपज है
जिसकी रचना की है गीतकार नीरज ने।




गीत के बोल:

पूछो पूछो, पूछो ना
बोलो क्या हमको दोगे
'आंय'
बोलो क्या हमको दोगे
दिल जो हमने तुमको बिना मांगे दे दिया हँसते हँसते
बोलो क्या हमको दोगे
बोलो क्या हमको दोगे
दिल जो हमने तुमको बिना मांगे दे दिया हँसते हँसते
पूछो क्या हमसे लोगे, पूछो
दिल जो हमने तुमसे बिना पूछे ले लिया हँसते हँसते
पूछो क्या हमसे लोगे

बहका करें जो तेरी बाँहों में
महका करें जो तेरी राहों में
बहका करें जो तेरी बाँहों में
महका करें जो तेरी राहों में
देखा करें जो तेरी चाहों में
घर बसा लें जो हम तेरी ही निगाहों में
तो क्या हमको दोगे
बोलो क्या हमको दोगे
दिल जो हमने तुमको बिना मांगे दे दिया हँसते हँसते
बोलो क्या हमको दोगे

हे हे हे हे
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
हो हो हो हो
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला

दुश्मन जलेंगे जब मिलेंगे हम
प्यासे कभी न फिर रहेंगे हम
जल रहा है
बहुत
तो जलने दो
दुश्मन जलेंगे जब मिलेंगे हम
प्यासे कभी न फिर रहेंगे हम
जन्नत बना लेंगे ज़मीन पे हम
खुशियाँ रहेंगी और रहेंगे हम अब
पूछो के तुम क्या हमसे लोगे, पूछो
पूछो क्या हमसे लोगे
दिल जो हमने तुमसे बिना पूछे ले लिया हा हा हा हा
पूछो क्या हमसे लोगे

तेरी बाँहों का जब सहारा हो
रास्ता फिर कितना ही अँधियारा हो
हो हो हो हो, हो हो हो
तेरी बाँहों का जब सहारा हो
रास्ता फिर कितना ही अँधियारा हो
उठते ही तूफ़ान तुम किनारा हो
जो कुछ अपना है वो सब कुछ तुम्हारा
हाँ तो क्या हमको दोगे
बोलो क्या हमको दोगे
दिल जो हमने तुमको बिना मांगे दे दिया हँसते हँसते
बोलो क्या हमको दोगे

पूछो क्या हमसे लोगे
बोलो क्या हमको दोगे
पूछो क्या हमसे
बोलो क्या हमको
पूछो, बोलो
ओ पूछो, बोलो
......................................
Bolo kya hamko doge-Chhupa Rustom 1973

Saturday, 29 October 2011

हम तुम दोनों मिल के-लावा १९८५

आपको एक युगल गीत सुनवाते हैं फिल्म लावा से। राज कपूर
के सबसे छोटे पुत्र जो नायक हैं लावा के, उनके साथ इस फिल्म
में राज कपूर के दूसरे नंबर के पुत्र की बतौर नायक जो पहली
फिल्म थी उसकी नायिका इस फिल्म में मौजूद हैं।

इस गुत्थी को सुलझाते-सुलझाते आपको थोड़ा फ़िल्मी ज्ञान अवश्य
हो जायेगा। गीतकार और संगीतकार क्रमशः वही हैं जिन्होंने फिल्म
अमर प्रेम के लिए गीत लिखे और संगीत दिया।

इस गीत को गाया है दीनानाथ मंगेशकर की सबसे बड़ी सुपुत्री और
फिल्म सितारे अशोक कुमार के सबसे छोटे भाई ने।





गीत के बोल:

हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
ता रा रा रा रा रा रा रा रा

हम तुम दोनों मिल के दिल के गीत बनायेंगे
सरगम के फूलों से सुर संगीत बनायेंगे
जब छाएंगे बादल काले याद करेंगे दुनिया वाले
गीत वो मोहब्बत वाले, गुनगुनायेंगे

हम तुम दोनों मिल के दिल के गीत बनायेंगे
सरगम के फूलों से सुर संगीत बनायेंगे
जब छाएंगे बादल काले याद करेंगे दुनिया वाले
गीत वो मोहब्बत वाले, गुनगुनायेंगे

हम तुम दोनों मिल के दिल के गीत बनायेंगे

जब जब तुमको प्यार पुकारे
तुम आ जाना पास हमारे
जब जब तुमको प्यार पुकारे
तुम आ जाना पास हमारे
अब क्या आना अब क्या जाना
हम हर दम हैं साथ तुम्हारे
पल दूर को हम एक दूजे से दूर ना जायेंगे

हम तुम दोनों मिल के दिल के गीत बनायेंगे

सुनते रहना हम बोलेंगे
कुछ मत कहना हम बोलेंगे
सुनते रहना हम बोलेंगे
कुछ मत कहना हम बोलेंगे
दे तुमको आवाज़ जो कोई
तुम चुप रहना हम बोलेंगे
एक दूजे के नाम से हमको लोग बुलाएँगे

हम तुम दोनों मिल के दिल के गीत बनायेंगे

इतना प्यार करें हम कम है
प्यार है सागर दिल शबनम है
इतना प्यार करें हम कम है
प्यार है सागर दिल शबनम है
अरे कांटे चुभते हैं सीने में
कैसा फूलों का मौसम है
बादल भी बरसे तो दिल में आग लगायेंगे

हम तुम दोनों मिल के दिल के गीत बनायेंगे
जब छाएंगे बादल काले याद करेंगे दुनिया वाले
गीत वो मोहब्बत वाले, गुनगुनायेंगे

हम तुम दोनों मिल के दिल के गीत बनायेंगे
सरगम के फूलों से सुर संगीत बनायेंगे
....................................
Hum tum donon mil ke-Laava 1985

Friday, 28 October 2011

गलियों गलियों-स्वामी दादा १९८२

टी वी पर इतने सारे घोटाले दिखाए जाते हैं और इतने लुभावने कार्यक्रम
आते हैं कि आम आदमी भी करोडपति बन जाने के ख्वाब देखने लगता है।
मीडिया मसाले लगा कर घोटालों की ख़बरें पेश करता है। गौर करने लायक
बात ये है कि इन सबके बीच कहीं भी पांच रूपये के नोट और चिल्लर के गायब
हो जाने का समाचार नहीं मिलता है, जिसकी वजह से आज आम जनता काफी
परेशान और जबरन अनावश्यक वस्तुएं खरीदने को मजबूर है, जहाँ देखो चिल्लर
का टोटा या उसकी कमी का रोना।

अरबों रूपये के घोटाले होने के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था टिकी हुयी है, ये शायद
हमारा मजबूत विश्वास ही है जो सब झेल जाता है। और वो भी बर्दाश्त करने के माद्दे
से भी बहुत बाहर जा कर।

एक गीत है जिसमें पांच के नोट का जिक्र है, आज भी प्रासंगिक है। ये है सन १९८२ की
फिल्म स्वामी दादा का गीत। गीत कानों को सुकून प्रदान करने वाला है।



गीत के बोल:

पांच के नोट में अब क्या दम है ?
हो हो हो, दस का नोट सिगरट को भी कम है
हो हो हो, अब हरे नोट का मोल है क्या
सोचो कुछ ऊंची बात ज़रा
अब बात करो तो लाखों की
देखेंगे ख्वाब करोड़ों के

गलियों गलियों ख़ाक बहुत दिन हमने छानी
हो, बदला है अब दौर बादल जाएगी कहानी
हो, एक बंजारन कल बनेगी महलों की रानी
हो ओ ओ ओ
गलियों गलियों ख़ाक बहुत दिन हमने छानी
बदला है अब दौर बादल जाएगी कहानी
हो,एक बंजारन कल बनेगी महलों की रानी

हो ओ ओ ओ
गलियों गलियों ख़ाक बहुत दिन हमने छानी

आज संवर के देखा जो दर्पण
अपनी नज़र से शर्मा गई
किस के हुनर का चल गया जादू
कहाँ से कहाँ आ गई
ओ, मेरा हाथ

इस हीरे के हार में क्या है अपना मोल तो अंको
तुम क्या हो क्या बन सकते हो अपने दिल में झांको
झूठे नकली सपने देखे,
झूठे नकली सपने देखे, असली बात ना जानी
हो ओ ओ ओ

गलियों गलियों ख़ाक बहुत दिन हमने छानी
हो, बदला है अब दौर बादल जाएगी कहानी

मिल के मेरे साथ चलो तो वो दुनिया दिखलाऊँ
जीते जी वो जन्नत कैसे मिलती है बतलाऊँ
तुमको मसीहा मान लिया है अब जाना है और कहाँ
तुमसे मिले तो देखे उजाले वरना धुआं थे दोनों जहाँ
बदलें हम और यूँ बदलें,
बदलें हम और यूँ बदलें, हो दुनिया को हैरानी
हो ओ ओ ओ

गलियों गलियों ख़ाक बहुत दिन हमने छानी
हो, बदला है अब दौर बादल जाएगी कहानी
हो,एक बंजारन कल बनेगी महलों की रानी

हो ओ ओ ओ
गलियों गलियों ख़ाक बहुत दिन हमने छानी
.........................................
Galiyon galiyon-Swami Dada 1982

हाँ पहली बार-और कौन १९७९

एक निहायत ही रोमांटिक गीत सुनवाते हैं आपको। एक थोड़ी कम
जानी पहचानी सी फिल्म से मगर बहुत पहचाने से संगीतकार की धुन
पर ये नगमा तैरता है। कुछ ऐसे दुर्लभ गीत हैं हिंदी फिल्म संगीत के
खजाने में जिनमें गिटार की आवाज़ के साथ किशोर की आवाज़ का
कातिलाना मिश्रण है। ये भी एक ऐसा ही गीत है जो मेरे ख्याल से
नॉन-रोमांटिक लोगों को भी उतना ही भाता है जितना रोमांटिक किस्म
के लोगों को। फिल्म एक भूतिया फिल्म है निर्देशन निर्माण व निर्देशन
रामसे ब्रदर्स ने किया है।

गीत जनता को इतना भाया कि इसका विडियो पॉप अल्बम वाले अंदाज़
में बनाया गया जिसे आपने हाल ही में २-३ वर्ष पूर्व देखा होगा टी वी चैनलों
पर। गीत अमित खन्ना का लिखा हुआ है जिनके लिखे और बप्पी के स्वरबद्ध
किये हिट गीत आप फिल्म चलते-चलते में सुन चुके हैं। बस एक ही चीज़
नहीं समझ आई इस गीत में-लड़की ने हाथ पकड़ कर क्या बोला? फिल्म में
इन्द्रजीत, पद्मिनी कपिला और रूपेश कुमार प्रमुख कलाकार हैं। पद्मिनी कपिला
फिल्मों के लिए उतना चर्चित नहीं हुईं जितनी वे नवीन निश्चल के साथ नाम जोड़े
जाने की वजह से हुईं।




गीत के बोल:


हाँ पहली बार
हाँ पहली बार
एक लड़की मेरा हाथ पकड़ कर बोली
हाँ रे हाँ

हाँ पहली बार
हाँ पहली बार
एक लड़की मेरा हाथ पकड़ कर बोली
हाँ रे हाँ

हाँ पहली बार

किसी को ना पता चला क्या हो गया
ऐसी मिली नज़रें के दिल खो गया
किसी को ना पता चला क्या हो गया
ऐसी मिली नज़रें के दिल खो गया
चुपके से वो पहलू में आ
चुपके से वो पहलू में आ
बोली मुझे आ रे आ

हाँ पहली बार
हाँ पहली बार
एक लड़की मेरा हाथ पकड़ कर बोली
हाँ रे हाँ

हाँ पहली बार

नशा आँखों में अब छाने लगा हैं
मज़ा जीने का अब आने लगा हैं
नशा आँखों में अब छाने लगा हैं
मज़ा जीने का अब आने लगा हैं
साथ है वो पास है वो
साथ है वो पास है वो
आज नहीं ना रे ना

हाँ पहली बार
हाँ पहली बार
एक लड़की मेरा हाथ पकड़ कर बोली
हाँ रे हाँ

हाँ पहली बार

साँसों में सांस जब मिल जाएगी
कली सपनों की खिल जाएगी
साँसों में सांस जब मिल जाएगी
कली सपनों की खिल जाएगी
कल का मुझे याद नहीं
कल का मुझे याद नहीं
आज की बात वाह रे वाह

हाँ पहली बार
हाँ पहली बार
एक लड़की मेरा हाथ पकड़ कर बोली
हाँ रे हाँ

हाँ पहली बार
.............................
Haan pehli baar-Aur Kaun 1979

Thursday, 27 October 2011

वो एक निगाह क्या मिली-हाफ टिकट १९६२

फिल्म हाफ टिकट जो सन १९६२ की फिल्म है उसने सभी पीढ़ी और आयु वर्ग
के दर्शकों को आनंदित किया और आज भी कर रही है। किशोर कुमार गज़ब के
कलाकार थे। उन्हें संपूर्ण कलाकार यूँ ही नहीं बोला जाता है। कल ही किसी चैनल
के विज्ञापन पर देखा कि किशोर की फ़िल्में दिखलाई जाने वाली हैं। उनकी फिल्मों
का दर्शकों को बेसब्री से इंतजार रहता है।

फिल्म में किशोर कुमार के साथ मधुबाला हैं। खलनायक के रोल में हैं प्राण जिनका
काम पूरी फिल्म में नायक का पीछा करना है। उसी पीछा करो अभियान के तहत
नायक और खलनायक एक थिएटर के मंच पर पहुँच जाते हैं। बचा ले मुझे की गुहार
लगाता नायक नर्तकी से मदद के लिए कह रहा है और पूरी नाच मण्डली नायक को
बचाने में सहयोग करने लगती है। किशोर कुमार और लता मंगेशकर का गाया ये
युगल गीत देखने और सुनने दोनों में आनंद देता है। नर्तकी की भूमिका में हैं हेलन।

सलिल चौधरी ने अपने मूड और पसंद के मुताबिक एक विलायती ख़ुशबू वाली देसी
धुन तैयार की है। उन्हें फ्यूज़न बहुत पसंद था और जटिल स्वर लहरियों की रचना
उनकी आदत सा बन चुका था। गीत के बोल शैलेन्द्र कि लेखनी से निकले हैं।



गीत के बोल:

ता रा रा रा रा रा रा रा ता रा रा रा रा
आ हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
आ हा हा हा हा हा हा

वो मेरे पीछे हाथ धो के पड़ा है
बचल ले मुझे बचा ले मुझे
वो मेरे पीछे हाथ धो के पड़ा है
बचल ले मुझे बचा ले मुझे

वो इक निगाह क्या मिली तबीयतें मचल गयीं
वो इक निगाह क्या मिली तबीयतें मचल गयीं
ज़रा वो मुस्कुरा दिए शमाएँ जैसे जल गयीं
ज़रा वो मुस्कुरा दिए शमाएँ जैसे जल गयीं
वो इक निगाह क्या मिली तबीयतें मचल गयीं
वो इक निगाह क्या मिली तबीयतें मचल गयीं

आ हा हा हा हा हा हा हा
हा हा हा हा हा हा
हे हे हे हे हे हे
हा हा हा हा हा हा

कबसे दिल को इस घडी का इंतजार था
शाम सहर मेरा प्यार बेक़रार था
कबसे दिल को इस घडी का इंतजार था
शाम सहर मेरा प्यार बेक़रार था,
हे हे, सितारा वो चमक उठा तो किस्मतें बदल गयीं
सितारा वो चमक उठा तो किस्मतें बदल गयीं

वो इक निगाह क्या मिली तबीयतें मचल गयीं
वो इक निगाह क्या मिली तबीयतें मचल गयीं

मीता मीठा लाइलाज एक दर्द था
क्या बताऊँ दिल को मेरे कैसा मर्ज़ था
मीता मीठा ला-इलाज़ एक दर्द था
क्या बताऊँ दिल को मेरे कैसा मर्ज़ था
हे हे, मरीज-ए-इश्क जी सकेंगे हालतें संभल गयीं
मरीज-ए-इश्क इसपे जी सकेंगे हालतें संभल गयीं

वो इक निगाह क्या मिली तबीयतें मचल गयीं
वो इक निगाह क्या मिली तबीयतें मचल गयीं
हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा
हा हा हा हा हा हा हा
he हा हा हा हा हा हा हा
हा हा हा हा हा

जी फिरा के यार में कैसी बेकसी
कैसे पास आयें राह सूझती ना थी
जी फिरा के यार में कैसी बेकसी
कैसे पास आयें राह सूझती ना थी
तेरा हज़ार शुक्रिया मुसीबतें वो ताल गयीं
तेरा हज़ार शुक्रिया मुसीबतें वो ताल गयीं

वो इक निगाह क्या मिली तबीयतें मचल गयीं
वो इक निगाह क्या मिली तबीयतें मचल गयीं
ज़रा वो मुस्कुरा दिए शमाएँ जैसे जल गयीं
ज़रा वो मुस्कुरा दिए शमाएँ जैसे जल गयीं
वो इक निगाह क्या मिली तबीयतें मचल गयीं
वो इक निगाह क्या मिली तबीयतें मचल गयीं
............................................
Wo ek nigah-Half Ticket 1962

Wednesday, 26 October 2011

जब चाहा यारा तुमने-ज़बरदस्त १९८५

आपको फिल्म 'ज़बर दस्त' से तीन गीत सुनवाए जा चुके हैं। फिल्म
ज़बरदस्त बहुसितारा फ्लॉप फिल्म है जो कुछ उम्दा गीतों से सजी
हुयी है। आइये सुनें इस फिल्म का सबसे चर्चित गीत जिसे आपके
कान एक ना एक बार ज़रूर सुन चुके होंगे। ये गीत चित्रहार के
ज़माने में कई बार टी वी पर दिखाई दे जाता था। गीत में बैगपाइपर
की ध्वनि का बढ़िया प्रयोग है। गीत आनंद बक्षी का लिखा हुआ और
किशोर कुमार द्वारा गाया गया है। फिल्म में संगीत पंचम
का है।

श्रेणी बनाने क शौक़ीन इसे बैगपाइपर हिट्स की श्रेणी में रख सकते हैं।
(वो वाला बैगपाइपर नहीं-बोतल में भरे रंगीन पेय के विज्ञापन वाला)
पंचम ने इस वाद्य का बढ़िया प्रयोग फिल्म "हम किसी से कम नहीं" के
गीत में भी किया है और वो गीत भी किशोर कुमार का गाया हुआ है।




गीत के बोल:

जब चाहा यारा तुमने, आँखों से मारा तुमने
होंठों से ज़िन्दा कर दिया
अरे तुम्हारी मर्ज़ी पे चल रहें हैं, ख़ता हमारी क्या हो

जब चाहा यारा तुमने, आँखों से मारा तुमने
होंठों से ज़िन्दा कर दिया

चलो जी हम बुरे सही, चलो जी हम झूठे हैं
मग़र इनहीं निगाहों से हज़ारों दिल टूटे हैं
चलो जी हम बुरे सही, चलो जी हम झूठे हैं
मग़र इनहीं निगाहों से हज़ारों दिल टूटे हैं
अरे, कसम से कहना, हमारी सूरत नहीं है प्यारी क्या हो

जब चाहा यारा तुमने, आँखों से मारा तुमने
होंठों से ज़िन्दा कर दिया

समझ सको तो हमसफ़र, हमें तुम अपना जानो
उधर नहीं इधर चलो, कभी तो कहना मानो
समझ सको तो हमसफ़र, हमें तुम अपना जानो
उधर नहीं इधर चलो, कभी तो कहना मानो
समझ सको तो हमसफ़र, हमें तुम अपना जानो
उधर नहीं इधर चलो, कभी तो कहना मानो
अरे, लिपट के पूछो , के आगे मर्ज़ी है अब हमारी क्या हो

जब चाहा यारा तुमने, आँखों से मारा तुमने
होंठों से ज़िन्दा कर दिया
अरे तुम्हारी मर्ज़ी पे चल रहें हैं, ख़ता हमारी क्या हो

जब चाहा यारा तुमने, आँखों से मारा तुमने
होंठों से ज़िन्दा कर दिया
..............................................
Jab chaha yaara tumne-Zabardast 1985

Monday, 12 September 2011

तुम भी चलो-ज़मीर १९७५

इस गीत में घोड़े ने बहुत अच्छा अभिनय किया है। अमिताभ बच्चन और
सायरा तो कमाल के कलाकार हैं ही, मगर हमें फिल्म के बाकी कलाकारों के
अभिनय पर भी तो कभी कभी गौर फ़रमा लेना चाहिए ना। अमिताभ बच्चन
और सायरा बानो पर फिल्माए गीत को पहली बार जनता ने सुना था सन १९७५
में और तबसे इस गीत को निरंतर सुना जा रहा है। बोल थोड़े प्रेरणा दायक हैं।
सपन चक्रवर्ती ने इस गीत कि धुन बनाई है। उनका संगीत आर डी बर्मन के
संगीत के करीब सा लगता है। आशा और किशोर के गाये इस गीत को लिखा
है मजरूह सुल्तानपुरी ने।



गीत के बोल:

तुम भी चलो हम भी चलें
चलती रहे ज़िन्दगी
तुम भी चलो हम भी चलें
चलती रहे ज़िन्दगी

ना ज़मीन मंजिल ना आसमान
ज़िन्दगी है ज़िन्दगी

तुम भी चलो ला ला ला ला
हम भी चलें ला ला ला ला
चलती रहे ज़िन्दगी, ला ला ला

पीछे देखे ना कभी मुद के राहों में
हो, झूमे मेरा दिल तुम्हें ले के बाँहों में

धडकनों की जुबां नित कहे दास्तान
प्यार के झिलमिल छाओं में पलती रहे ज़िन्दगी

तुम भी चलो हम भी चलें
चलती रहे ज़िन्दगी
ना ज़मीन मंजिल ना आसमान
ज़िन्दगी है ज़िन्दगी

तुम भी चलो हम भी चलें
चलती रहे ज़िन्दगी

बहते चलें हम मस्ती के धारों में
हो ओ ओ, गूंजे यही धुन सदा दिल के तारों में
अब रुके ना कहीं प्यार का कारवां
नित नई रुत के रंग में ढलती रहे ज़िन्दगी

तुम भी चलो हम भी चलें
चलती रहे ज़िन्दगी
------------------------------
Tum bhi chalo-Zameer 1975

चाँद रात तुम हो साथ-हाफ टिकट १९६२

बिलकुल बॉलीवुड का मसालिया विडियो है ये, मगर थोड़ा अलग कह
सकते हैं क्यूंकि इसमें किशोर कुमार और मधुबाला हैं। किशोर कुमार
की उछल-कूद और मधुबाला की अदाओं से भरपूर,लता और किशोर के
गाये इस युगल गीत को सुननेवालों का मानना है कि ये रात में सुनने में
ज्यादा आनंद देता है। फिल्म का नाम है हाफ टिकट। शैलेन्द्र के लिखे
गीत की तर्ज़ बनाई है सलिल चौधरी ने। फिल्म हाफ टिकट के तकरीबन
सभी गीत सुनने में आनंद देते हैं. इसके अलावा फिल्म में लता और किशोर
का गाया एक युगल गीत और है जिसे हम आगे सुनेंगे।




गीत के बोल:

डी डी डी डी डेई
डो डो डो डो डोऊ ऊ
डी डी डी डी डेई

चाँद रात तुम हो साथ
क्या करें जी अब तो
दिल मचल मचल गया
चाँद रात तुम हो साथ
क्या करें जी अब तो
दिल मचल मचल गया

दिल का ऐतबार क्या
क्या करोगे जी कल
जो ये बदल बदल गया

जुल्मी नज़र कैसी निडर दिल चुरा लिया
जाने किस अजब से देश में बुला लिया
जुल्मी नज़र कैसी निडर दिल चुरा लिया
जाने किस अजब से देश में बुला लिया

ये भी कोई दिल है क्या
जहाँ मौका मिला फिसल फिसल गया

चाँद रात तुम हो साथ
क्या करें जी अब तो
दिल मचल मचल गया

दिल का ऐतबार क्या
क्या करोगे जी कल
जो ये बदल बदल गया

सुनिए ज़रा मैंने कहा मत सताइए
अपने आप अपनी राह लौट जाइये
सुनिए ज़रा मैंने कहा मत सताइए
अपने आप अपनी राह लौट जाइये

ये वो राहें नहीं
जिसपे चल के कोई
संभल संभल गया

चाँद रात तुम हो साथ
क्या करें जी अब तो
दिल मचल मचल गया

दिल का ऐतबार क्या
क्या करोगे जी कल
जो ये बदल बदल गया

बहके कदम अब तो सनम बांह थाम लो
अपनी नज़र अपनी निगाहों से काम लो
बहके कदम अब तो सनम बांह थाम लो
अपनी नज़र अपनी निगाहों से काम लो

आपका क्या गया
फूल सा मेरा दिल
कुचल कुचल गया

चाँद रात तुम हो साथ
क्या करें जी अब तो
दिल मचल मचल गया

दिल का ऐतबार क्या
क्या करोगे जी कल
जो ये बदल बदल गया
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Chand raat tum ho saath-Half Ticket 1962

Sunday, 28 August 2011

थोडा है थोड़े की ज़रूरत है-खट्टा मीठा १९७७

फिल्म नरम गरम से एक गीत और याद आया फिल्म खट्टा मीठा

का। निहायत ही खुशनुमा और उम्मीदें जगाने वाला गीत है ये।

इस फिल्म के कथानक ने मुझे काफी प्रभावित किया।



गीत का सार है-थोड़ा ही तो चाहिए। जीवन में थोड़ा थोड़ा सब

कुछ प्रसाद स्वरुप मिलता रहे तो आनंद ही आनंद है। आनंद तो है

मगर थोड़े में संतोष करने पर ही।



गीत लिखा है गुलज़ार ने और इसे गाया है किशोर कुमार एवं

लता मंगेशकर ने। इसे आप राजेश रोशन द्वारा संगीतबद्ध सर्वश्रेष्ठ

रचनाओं में से एक गिन सकते हैं। गुलज़ार बिना कुछ अलग हट के

और कुछ लीक से हटकर बने गीतों की आप कल्पना नहीं कर सकते

हैं. भारतीय सिनेमा का एक अवश्यक तत्त्व से हैं गुलज़ार। गुलज़ार

को हिंदी फ़िल्मी गीत में प्रयोगधर्मिता का मसीहा कहें तो अतिशयोक्ति

नहीं होना चाहिए।



गीत को आप परफेक्ट युगल गीत कह सकते हैं। ऐसे गीत सुनने में बेहद

रोचक लगते हैं जिसमें दो शब्द गायक, दो शब्द गायिका गाये। इसे आप

अकेले गुनगुनाएं तो आनंद नहीं आएगा। साथ में कोई होना ज़रूरी है इसे

गुनगुनाने के लिए। खुशकिस्मत हैं वो लोग जिन्हें साथ में कोई ना कोई

गुनगुनाने वाला मिलता है।



गीत में आपको महानायक अमिताभ की एक झलक दिख जाएगी।







हुं हुं हुं, हे हे हे, ला ला ला ला ला ला



थोड़ा है थोड़े की ज़रूरत है

ज़िंदगी फिर भी अहा ख़ूबसूरत है

थोड़ा है थोड़े की ज़रूरत है



जिस दिन पैसा होगा

वो दिन कैसा होगा

उस दिन पहिये घूमेंगे

और क़िस्मत के लब चूमेंगे

बोलो ऐसा होगा



थोड़ा है थोड़े की ज़रूरत है



सुन सुन सुन हवा चली, सबा चली

तेरे आँचल से उड़ के घटा चली



सुन सुन सुन कहाँ चली कहाँ चली

मैं छूने ज़रा आसमाँ चली

बादल पे उड़ना होगा

थोड़ा है, थोड़े की

ज़रूरत है, हाँ ज़रूरत है, हो ज़रूरत है



हमने सपना देखा है

कोई अपना देखा है

हमने सपना देखा है

कोई अपना देखा है

जब रात का घूँघट उतरेगा

और दिन की डोली गुज़रेगी

तब सपना पूरा होगा

थोड़ा है, थोड़े की

ज़रूरत है

ज़िंदगी, फिर भी अहा, ख़ूबसूरत है

थोड़ा है, थोड़े की, ज़रूरत है

..............................................

Thoda hai thode ki zaroorat-Khatta Meetha 1977

Sunday, 21 August 2011

मच गया शोर सारी नगरी रे-खुद्दार १९८२

आज जन्माष्टमी क पर्व है। आइये इस अवसर पर आपको एक गीत

सुनवाते हैं अमिताभ और परवीन बॉबी पर फिल्माया गया फिल्म

खुद्दार से है। मजरूह सुल्तानपुरी ने इस गीत को लिखा है और धुन

बनायीं है राजेश रोशन ने। इस गीत को गाया है लता मंगेशकर और

किशोर कुमार ने। मटकी फोड़ कार्यक्रम इस अवसर पर अवश्य होता

है। इस गीत में उसका भी आनंद ले लीजिये।











गीत के बोल:



मच गया शोर सारी नगरी रे, सारी नगरी रे

आया बिरज का बांका संभाल तेरी गगरी रे

आया बिरज का बांका संभाल तेरी गगरी रे

मच गया शोर सारी नगरी रे, सारी नगरी रे

आया बिरज का बांका संभाल तेरी गगरी रे

हो आया बिरज का बांका संभाल तेरी गगरी रे



देखो अरे देखो कहीं ऐसा न हो जाए

चोरी करे माखन तेरा जिया भी चुराए

देखो अरे देखो कहीं ऐसा न हो जाए

चोरी करे माखन तेरा जिया भी चुराए

अरे धमकता है इतना तू किसको

डरता है कौन आने दे उसको

डरता है कौन आने दे उसको

ऐसे न बहुत बोलो

मत ठुमक ठुमक दोलो

चिल्लाओगी बहुत गोरी

जब उलट देगा तोरी

गगरी आ के बीच डगरी रे



मच गया शोर सारी नगरी रे, सारी नगरी रे

आया बिरज का बांका संभाल तेरी गगरी रे

आया बिरज का बांका संभाल तेरी गगरी रे



ला रा ला ला ला रा ला ला ला

ला रा ला ला ला रा ला ला ला



जाने क्या करता अगर होता कहीं गोरा

जा के जमुना में ज़रा शक्ल देखे छोरा

जाने क्या करता अगर होता कहीं गोरा

जा के जमुना में ज़रा शक्ल देखे छोरा

बिंदिया चमकाती रस्ते में न जा

मनचला भी है गोकुल का राजा

मनचला भी है गोकुल का राजा

पड़ जाये नहीं पाला राधा से कहीं लाला

फिर रोयेगा गोविंदा मारेंगी ऐसा फंदा

गर गर से बंधेगी ऐसी चुनरी रे



मच गया शोर सारी नगरी रे, सारी नगरी रे

आया बिरज का बांका संभाल तेरी गगरी रे

हो ओ ओ आया बिरज का बांका संभाल तेरी गगरी रे



अरे मच गया शोर सारी नगरी रे, सारी नगरी रे

आया बिरज का बांका संभाल तेरी गगरी रे

हो आया बिरज का बांका संभाल तेरी गगरी रे

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Mach Gaya Shor Sari Nagri-Khuddar 1982

Wednesday, 17 August 2011

मेरी बहना दीवानी है-अँधा कानून १९८३

१३ अगस्त को एक पोस्ट ज़रूर आनी चाहिए थी वो थी रक्षा बंधन स्पेशल। अब

प्रस्तुत है। गीत है फिल्म अंधा कानून से जो सन १९८३ की फिल्म है। फिल्म

में दक्षिण और उत्तर भारत के महानायक दोनों मौजूद हैं और उनके साथ हेमा

मालिनी और माधवी नायिकाएं हैं। प्रस्तुत गीत फिल्माया गया है रजनीकांत और

हेमा मालिनी पर जिन्होनें इस फिल्म में भाई बहन की भूमिकाएं निभाई हैं ।



गीत ख़ासा लोकप्रिय रहा फिल्म के बाकी गीतों की तरह। लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने

सन १९८३ की कई हिट फिल्मों में संगीत दिया और ये भी कहा जा सकता है कि

उनकी सन १९८३ की फिल्मों के गीत सुपर हिट रहे। फिल्म में हेमा की भूमिका एक

पुलिस इन्स्पेक्टर की है।







गीत के बोल:





मेरी बहना

हो मेरी बहना दीवानी है

मेरी बहना दीवानी है

पर वो समझती है

सबसे वो सयानी है

मेरा भैया

हो मेरा भैया दीवाना है

पर वो समझता है

सबसे वो सयाना है

मेरी बहना

हो मेरा भैया



रक्षा करे भगवन तुम्हारी

रक्षा करे भगवन तुम्हारी

तुमसे है हर बात हमारी

डर मत बहना बांध दे राखी

उस रब पर सब छोड़ दे बाकी

दुनिया आनी जानी है



मेरी बहना दीवानी है

पर वो समझती है

सबसे वो सयानी है

मेरा भैया

हो मेरी बहना



राखी का त्यौहार मनाएं

राखी का त्यौहार मनाएं

आओ झूमें नाचें गायें

आओ झूमें नाचें गायें

याद वो आई रात अँधेरी

एक बहन थी और भी मेरी

उसका बाकी क़र्ज़ है मुझ पर

उसका बदला फ़र्ज़ है मुझ पर

जिसकी ये कहानी है



मेरी बहना दीवानी है

पर वो समझती है

सबसे वो सयानी है

मेरा भैया दीवाना है

पर वो समझता है

सबसे वो सयाना है

मेरी बहना

हो मेरा भैया

...............................

Meri behna deewani hai-Andha Kanoon 1983

Wednesday, 10 August 2011

अटका अटका दिल मेरा-होशियार १९८४

बिना विवरण के भी एक गीत सुन लीजिए आज। ये होशियार सा गीत

है फिल्म होशियार से। कैलोरी कैसे कम की जाये इस गीत से सीख सकते

हैं आप.







गीत के बोल:



अगर आप वाकई इस गीत को सुन रहे हैं तो बोलों के लिए

लिए चटका(कमेन्ट) लगा दें एक

.................................

Atka atka dil mera-Hoshiyar 1984

Tuesday, 9 August 2011

करेगा ज़माना क्या-ज़बरदस्त १९८५

बार्बी डॉल डांस देखिये फिल्म ज़बरदस्त से। पिछले कुछ गीतों में हमने
बात की थी कि रति अग्निहोत्री की लम्बाई ज्यादा है और वे अपने कई
साथी नायकों से लंबी हैं। इस गीत को इस तरह से फिल्माया गया है
कि राजीव कपूर की लम्बाई और उनकी लम्बाई बराबर दिखती है। ये
ज़बरदस्ती उछलो-कूदो नृत्य वाले गीत को गाया है किशोर कुमार ने और
आशा भोंसले ने।

श्रेणी बनाने का शौकीनों के लिए सुझाव-इस गीत को आप डार्लिंग गीत कह सकते
हैं। गीत आनंद बख्शी ने लिखा है और धुन है आर डी बर्मन की।






हो करेगा ज़माना क्या, सच को छुपाना क्या
दुनिया को आओ बतला दें
हो करेगा ज़माना क्या, सच को छुपाना क्या
दुनिया को आओ बतला दें
तुम हो मेरे, हम हैं तेरे
डार्लिंग, है ना बोलो है ना

हो हो हो हो हो हो हो हो हो
करेगा ज़माना क्या, सच को छुपाना क्या
दुनिया को आओ बतला दें
करेगा ज़माना क्या, सच को छुपाना क्या
दुनिया को आओ बतला दें
तुम हो मेरे, हम हैं तेरे
डार्लिंग, है ना बोलो है ना

हो हो हो

हे, मेरा सब कुछ तेरे लिए, तेरा सब कुछ मेरे लिए
बोलो बोलो
मेरा सब कुछ तेरे लिए, तेरा सब कुछ मेरे लिए
आखिर को है
हाँ आखिर को हैं बीवी मियां
डार्लिंग है ना बोलो है ना

हो हो हो हो हो हो हो हो हो
करेगा ज़माना क्या, सच को छुपाना क्या
दुनिया को आओ बतला दें

आए हुए बड़ी दूर से हैं, हम तो यहाँ मई-जून से हैं
आए हुए बड़ी दूर से हैं, हम तो यहाँ मई-जून से हैं
और आज ही
और आज ही, है वापसी
डार्लिंग है न बोलो है न

हो हो हो हो हो हो हो हो हो
करेगा ज़माना क्या, सच को छुपाना क्या
दुनिया को आओ बतला दें
........................................
Karega zamana kya-Zabardast 1985

Saturday, 6 August 2011

चाकू चले तेरे लिए बाजारों में-ज़लज़ला १९८८

पुरानी ज़लज़ला से गीत सुन लिया आपने, अब नए ज़लज़ले से मिलवाते
हैं आपको। बहुसितारा और बिलकुल फ्लॉप फिल्म से एक युगल गीत पेश
है किशोर कुमार और कविता कृष्णमूर्ती की आवाजों में।

इस गीत में आपको राजीव कपूर और विजयेता पंडित। तलवार भांजने वाले
चरित्र अभिनेताओं के नाम हैं-पिंचू कपूर और बीरबल। कुछ कोमेडी कुछ
तोड़ी मरोड़ी के मिश्रण वाला ये गीत पचास टका आनंद देता है और पचास
टका बोरियत। गीत इन्दीवर का लिखा हुआ है और धुन है आर डी बर्मन की ।
इन्दीवर की कलम की धार इस गीत में भी बरकरार है-मुलाहिजा फरमाएं
गीत के पहले और दूसरे अंतरे में कविता की आवाज़ वाले हिस्सों पर।





गीत के बोल:

अरे चाकू चले तेरे लिए बाज़ारों में
जंग छिड़े तेरे लिए दो यारों में

तूफ़ान तेरी जवानी
हुस्न है वो बाला
अरे दिलवालों की दुनिया में
आया है है है ज़लज़ला , ज़लज़ला

हो, चाकू चले मेरे लिए बाज़ारों में
जंग छिड़े मेरे लिए दो यारों में
बदकिस्मत इश्क का ये चल निकला सिलसिला
अरे दिलवालों की दुनिया में
आया है है है ज़लज़ला , ज़लज़ला

दुनिया के तीरों से
चलती शमशीरों से
तुझको बचा के मैं लाया
मेरा जिगर देख
दिल देख मेरा तू
कबसे ये दिल तुझपे आया

हो, दुनिया से मुझको बचा लाया
लेकिन मुझे कौन तुझसे कौन बचाएगा
तूने जो कर दी कोई मेहरबानी
जवानी पे दाग लग जायेगा
घर कैसे जाऊंगी
मैं तो मर जाऊंगी
अरे घरवालों की दुनिया में
आएगा आ आ ज़लज़ला, ज़लज़ला

हो, होंठों को बालों को
कानों को गालों को
दूर से देखा करूंगा
प्यार का परमिट मिलेगा ना जब तक
तब तक ना तुझको छुऊँगा
हो मैं भी हसीं
और तू भी जवान जानी
बज जाये कब तेरी घंटी
मुझको छुएगा ना छेड़ेगा तू
इसकी भी क्या है गारंटी
पहले मैं नाम जोडूंगा
फिर इतना प्यार करूंगा
अरे दुनिया की आबादी में
आएगा गा गा ज़लज़ला, ज़लज़ला

अरे चाकू चले मेरे लिए बाज़ारों में
जंग छिड़े मेरे लिए दो यारों में

अरे तूफ़ान तेरी जवानी
हुस्न है वो बाला
अरे दिलवालों की दुनिया में
आया है है है ज़लज़ला , ज़लज़ला
ज़लज़ला , ज़लज़ला
........................................
Are chaku chale tere liye-Zalzala 1988

Thursday, 4 August 2011

आज रोना पड़ा तो समझे-गर्ल फ्रेंड १९६०

गंभीर किस्म के बोल और लाजवाब गायकी के साथ दैवीय संगीत का
मिश्रण है इस गीत में। किशोर कुमार और वहीदा रहमान अभिनीत फिल्म
गर्ल फ्रेंड से ये गीत लिया गया है जिसे स्वयं किशोर कुमार ने गाया है।
साहिर लुधियानवी के बोलों को सुरों में पिरोया है हेमंत कुमार ने।

ये एक सदाबाहर गीत है जिसे आप आसानी से गुनगुना सकते है। इसे
आज भी सुनिए तो ताज़ा सा लगता है। इसके बोल ऐसे हैं जो आपको
दुनिया की हकीकत से साक्षात्कार करते चलते हैं और जैसे सुख-दुःख
की तुलना की जाती है गीतकार ने रोना-हंसना को सहज तरीके से सरल
शब्दों के जाल में बांध दिया है। यहाँ पर आ के शैलेन्द्र और साहिर के
अंदाज़ का संगम हो जाता है।




गीत के बोल:

आज रोना पड़ा तो समझे
हँसने का मोल क्या है
अपना सपना, खोना पड़ा तो समझे
आज रोना पड़ा तो समझे
हँसने का मोल क्या है
अपना सपना खोना पड़ा तो समझे

ख़्वाबों की हक़ीक़त क्या थी
अरमानों की क़ीमत क्या थी
अपनों की मुहब्बत क्या थी
ग़ैर होना पड़ा तो समझे

आज रोना पड़ा तो समझे

सुख मिलता है किस मुश्किल से
क्या करती है दुनिया दिल से
इस रंग भरी महफ़िल से
दूर होना पड़ा तो समझे

आज रोना पड़ा तो समझे

निकले थे जिन्हें अपनाने
वो लोग थे सब बेगाने
इस बात को हम दीवाने
चैन खोना पड़ा तो समझे

आज रोना पड़ा तो समझे
हँसने का मोल क्या है
अपना सपना खोना पड़ा तो समझे
.......................................
Aaj rona pada to samjhe-Girl Friend 1960
 
 
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