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Monday, 12 September 2011

तुम भी चलो-ज़मीर १९७५

इस गीत में घोड़े ने बहुत अच्छा अभिनय किया है। अमिताभ बच्चन और
सायरा तो कमाल के कलाकार हैं ही, मगर हमें फिल्म के बाकी कलाकारों के
अभिनय पर भी तो कभी कभी गौर फ़रमा लेना चाहिए ना। अमिताभ बच्चन
और सायरा बानो पर फिल्माए गीत को पहली बार जनता ने सुना था सन १९७५
में और तबसे इस गीत को निरंतर सुना जा रहा है। बोल थोड़े प्रेरणा दायक हैं।
सपन चक्रवर्ती ने इस गीत कि धुन बनाई है। उनका संगीत आर डी बर्मन के
संगीत के करीब सा लगता है। आशा और किशोर के गाये इस गीत को लिखा
है मजरूह सुल्तानपुरी ने।



गीत के बोल:

तुम भी चलो हम भी चलें
चलती रहे ज़िन्दगी
तुम भी चलो हम भी चलें
चलती रहे ज़िन्दगी

ना ज़मीन मंजिल ना आसमान
ज़िन्दगी है ज़िन्दगी

तुम भी चलो ला ला ला ला
हम भी चलें ला ला ला ला
चलती रहे ज़िन्दगी, ला ला ला

पीछे देखे ना कभी मुद के राहों में
हो, झूमे मेरा दिल तुम्हें ले के बाँहों में

धडकनों की जुबां नित कहे दास्तान
प्यार के झिलमिल छाओं में पलती रहे ज़िन्दगी

तुम भी चलो हम भी चलें
चलती रहे ज़िन्दगी
ना ज़मीन मंजिल ना आसमान
ज़िन्दगी है ज़िन्दगी

तुम भी चलो हम भी चलें
चलती रहे ज़िन्दगी

बहते चलें हम मस्ती के धारों में
हो ओ ओ, गूंजे यही धुन सदा दिल के तारों में
अब रुके ना कहीं प्यार का कारवां
नित नई रुत के रंग में ढलती रहे ज़िन्दगी

तुम भी चलो हम भी चलें
चलती रहे ज़िन्दगी
------------------------------
Tum bhi chalo-Zameer 1975

Tuesday, 2 August 2011

पुरवा सुहानी आई रे –पूरब और पश्चिम १९७०

पुरुष के समर्पण के चरम के बारे में 'पूरब और पश्चिम' फिल्म के
पिछले गीत में चर्चा हुई थी। इस फिल्म में नारी का इंतज़ार भी है।
गीत में दिखाई देने वाली देसी बाला फिल्म के नायक से मन ही मन
प्यार करती है। फिल्म का नायक विलायती बाला से प्रेम करता है। इस
प्रेम त्रिकोण में चौथा कोण प्रस्तुत गीत में प्रकट होकर मुखर होता है
जो ढोल बजा रहा है-नायक नंबर दो यानि विनोद खन्ना । वो देसी
बाला से प्रेम करता है। गीत का आकर्षण नायिका नंबर एक के चुस्त
कपडे और नायिका नंबर दो का आकर्षक नृत्य है।

इस खालिस देसी धुन को तैयार किया है कल्याणजी आनंदजी ने और गीत
में कहानी कही है इन्दीवर ने।






गीत के बोल:

ढोली ढोल बजाना
ताल से ताल मिलाना
ढोली ढोला ढोली ढोला
ढोली ढोल बजाना
ता ता थैया तक तक थैया
ताल से ताल मिलाना


पुरवा सुहानी आई रे पुरवा
पुरवा सुहानी आई रे पुरवा
ऋतुओं की रानी आई रे पुरवा
मेरे रुके नहीं पांव
प्रीत पे जवानी छाई रे, पुरवा

पुरवा सुहानी आई रे पुरवा

मौसम का मुसाफिर खड़ा रस्ते में
ला ला ला ला ला ला ला ला ला
हो ओ मौसम का मुसाफिर खड़ा रस्ते में
उसके हाथों सब कुछ लुटा सस्ते में
छोटी सी उमरिया है
लंबी सी डगरिया रे
जीवन है परछाई रे, पुरवा

पुरवा सुहानी आई रे पुरवा

हो ढोली ढोल बजाना
हो ताल से ताल मिलाना

कर ले कर भी ले प्यार की पूजा
ना ना ना ना ना ना ना ना
हो, कर ले कर भी ले प्यार की पूजा
प्यार के रंग पे चढ़े न रंग दूजा
क्या ये कोई सपना है
मेरे लिए अपना है
बात मेरी बन आई रे पुरवा

पुरवा सुहानी आई रे पुरवा

हो मीरा सी दीवानी रे नाचे मस्तानी
मीरा सी दीवानी रे नाचे मस्तानी
होंठों पर हैं गम तो आँखों में पानी
घुँघरू दीवाने हुए
रिश्ते पुराने हुए
गीत में कहानी गाई रे पुरवा

पुरवा सुहानी आई रे पुरवा
पुरवा सुहानी आई रे पुरवा
ऋतुओं की रानी आई रे पुरवा
मेरे रुके नहीं पांव
प्रीत पे जवानी छाई रे, पुरवा

पुरवा सुहानी आई रे पुरवा

हो ढोली ढोल बजाना
हो ताल से ताल मिलाना
ढोली ढोल बजाना
ताल से ताल मिलाना
...................................
Purwa suhani aayi re-Purab aur paschim 1970

Friday, 29 July 2011

कोई जब तुम्हारा ह्रदय तोड़ दे –पूरब और पश्चिम १९७०

पुरुष वर्ग के समर्पण की इन्तेहा, कुछ अतिशयोक्ति सा लगता
ये गीत अपवाद स्वरुप समाज में आपको कहानी रूप में कहीं न
कहीं ज़रूर मिल जायेगा. ऐसा नहीं है कि केवल नारी ही इंतज़ार
करती है, कहीं पुरुष भी प्रतीक्षा कर लिया करता है. फिल्म में
नायिका का चरित्र विलायत में रहने वाली पाश्चात्य सभ्यता में पली
बढ़ी युवती का है. नायक देसी परम्पराओं को निभाने वाला एक
“सादा जीवन उच्च विचार” के साथ देशप्रेम की भावना से ओत
प्रोत युवक है. अब इतने विवरण से आपको नायक को पहचानने
में दिक्कत नहीं होना चाहिए.

जैसा कि हिंदी फिल्मों की कहानी की अनिवार्य मांग है-नायक
को नायिका से प्रेम हो जाता है. अब नायिका को अपने रंग ढंग
में ढालने के लिए और उसे वापस देसी संस्कृति की ओर लाने
के प्रयास में नायक ये गीत गाता है.

गीत इन्दीवर का लिखा हुआ है और निस्संदेह इसे उनके द्वारा
रहित गीतों में से सर्वाधिक लोकप्रिय का दर्ज़ा भी प्राप्त है. गीत
कि गुणवत्ता पर प्रश्न चिन्ह नहीं लगाया जा सकता. नपा तुला सा
है ये और उतनी ही नपी तुली धुन बनायीं है कल्याणजी आनंदजी
ने जिसे स्वर मुकेश ने दिया है.






गीत के बोल:

कोई जब तुम्हारा ह्रदय तोड़ दे –पूरब और पश्चिम १९७०
तडपता हुआ जब कोई छोड़ दे
तब तुम मेरे पास आना प्रिये
मेरा दर खुला है खुला ही रहेगा तुम्हारे लिए

अभी तुमको मेरी ज़रूरत नहीं
बहुत चाहने वाले मिल जायेंगे
अभी रूप का एक सागर हो तुम
कमल जितने चाहोगी खिल जायेंगे
दर्पण तुम्हें जब डराने लगे
जवानी भी दामन छुड़ाने लगे
तब तुम मेरे पास आना प्रिये
मेरा सर झुका है झुका ही रहेगा तुम्हारे लिए

कोई जब तुम्हारा ह्रदय तोड़ दे

कोई शर्त होती नहीं प्यार में
मगर प्यार शर्तों पे तुमने किया
नज़र में सितारे जो चमके ज़रा
बुझाने लगीं आरती का दिया
जब अपनी नज़र में ही गिरने लगो
अंधेरों में अपने ही घिरने लगो
तब तुम मेरे पास आना प्रिये
ये दीपक जला है जला ही रहेगा तुम्हारे लिए

कोई जब तुम्हारा ह्रदय तोड़ दे
तडपता हुआ जब कोई छोड़ दे
तब तुम मेरे पास आना प्रिये
मेरा दर खुला है खुला ही रहेगा तुम्हारे लिए
...................................
Koi jab tumhara hriday tod de-Purab aur paschim 1970

Saturday, 16 July 2011

हुस्न चला कुछ ऐसी चाल-ब्लफ़ मास्टर १९६३

कभी कभी आप किसी गीत को यकायक गुनगुनाना शुरू कर देते हैं, आज
आपको ऐसा ही गीत सुनवा रहे हैं जो एकदम से दिमाग में आया है अभी.

मनमोहन देसाई ने अपने करियर की शुरुआत से ही शायद बड़े सितारों के
साथ काम करना शुरू कर दिया था. सन १९६३ की फिल्म ब्लफ़ मास्टर के
निर्देशक वही हैं. इसमें शम्मी कपूर और सायरा बानो प्रमुख कलाकार हैं.

हिंदी फिल्म जगत में अक्सर ही निर्देशक से ज्यादा निर्माता की चली है और
कभी कभी इसी वजह से भी फिल्म पिट जाया करती. निर्माता की पसंद कुछ
होती, निर्देशक की कुछ और, इस सूरत में एक राय नहीं बन पाने से निर्देशक
को काम करने में आनंद नहीं आता. जहाँ निर्देशक की पसंद का ख्याल रखा
जाता वो फ़िल्में थोड़ी बेहतर होतीं. ये उन निर्देशकों के बारे में बात की जा रही
है जो निर्देशन की कला में निपुण हैं.

ब्लफ़ मास्टर में शायद स्टार कास्ट बढ़िया है समय के हिसाब से. इसमें उस
समय के नामचीन खलनायक प्राण भी मौजूद हैं.

गीत राजेंद्र कृष्ण का लिखा हुआ है जिसे संगीत में बांधने का काम किया है
कल्याणजी आनंदजी ने. इसे गा रहे हैं लता और रफ़ी.

नायक नायिका पिकनिक पर हैं और उनके साथ के बर्तन भांडे से लगता है
पर्याप्त खाद्य सामग्री है उसमें और जो जनाना सवारियां बड़ी गाडी से उतरी हैं
वे भी खा पी कर तृप्त हो सकती हैं.





गीत के बोल:

अरे हुस्न चला कुछ ऐसी चाल
दीवाने का पूछ न हाल
हुस्न चला कुछ ऐसी चाल
दीवाने का पूछ न हाल
प्यार की क़सम कमाल हो गया, हाय
प्यार की क़सम कमाल हो गया

अजी दिल को अब तक है इंकार
आँखें कर बैठीं इकरार
प्यार की क़सम कमाल हो गया, हाय
प्यार की क़सम कमाल हो गया

दिल को अब तक है इंकार
आँखें कर बैठीं इकरार
प्यार की क़सम कमाल हो गया

हो ओ ओ ओ, कभी पास आएँ कभी दूर जाएँ
के हैं दिल चुराने की लाखों अदाएँ
नहीं तीर निकला अभी तक कमान से
नहीं तीर निकला अभी तक कमान से
कोई उनसे कह दे कि दिल को बचाएँ
कि दिल को बचाएँ

हाय, हुस्न चला कुछ ऐसी चाल
दीवाने का पूछ ना हाल
प्यार की क़सम कमाल हो गया, हाय
प्यार की क़सम कमाल हो गया

दिल को अब तक है इंकार
आँखें कर बैठीं इकरार
प्यार की क़सम कमाल हो गया, हाय
प्यार की क़सम कमाल हो गया

कहाँ तक रहोगे ये दामन बचा के
के मुश्किल है बचना निशाने पे आ के
हमारा है क्या हम तो मिट के रहेंगे
हमारा है क्या हम तो मिट के रहेंगे
जहाँ तुमने देखा ज़रा मुस्करा के
ज़रा मुस्करा के

दिल को अब तक है इंकार
आँखें कर बैठीं इकरार
प्यार की क़सम कमाल हो गया, हाय
प्यार की क़सम कमाल हो गया

अरे हुस्न चला कुछ ऐसी चाल
दीवाने का पूछ ना हाल
प्यार की क़सम कमाल हो गया, हाय
प्यार की क़सम कमाल हो गया

हो ओ ओ ओ,ये दिन हैं तुम्हारे ज़माना तुम्हारा
निगाहें उधर हैं इधर है इशारा
ये पैग़ाम देते हैं ज़ुल्फ़ों के साये
ये पैग़ाम देते हैं ज़ुल्फ़ों के साये
चला आए जो है मोहब्बत का मारा
मोहब्बत का मारा

उफ़,हुस्न चला कुछ ऐसी चाल
दीवाने का पूछ ना हाल
प्यार की क़सम कमाल हो गया, हाय
प्यार की क़सम कमाल हो गया

दिल को अब तक है इंकार
आँखें कर बैठीं इकरार
प्यार की क़सम कमाल हो गया, हाय
प्यार की क़सम कमाल हो गया
.................................
Husn chala kuchh aisi chal-Bluff Master 1963

Monday, 11 July 2011

शर्म आती है मगर आज ये कहना होगा-पड़ोसन १९६८

लता मंगेशकर का गाया गीत सुनिए और देखिये फिल्म पड़ोसन
से। इसे परदे पर गा रही हैं सायरा बानो। सन १९६८ की फिल्म
पड़ोसन के गीत लिखे हैं राजेंद्र कृष्ण ने और इस फिल्म में संगीत
दिया है राहुल देव बर्मन ने। सुनील दत्त और किशोर कुमार इस
फिल्म के प्रमुख नायक हैं।

कोयल की बोली, संतूर की आवाज़ और प्रणय गीतों की सी बजने
वाली शहनाई ये सब लता की आवाज़ के साथ क़यामत सी ढा रही
हैं।




गीत के बोल:

शर्म आती है मगर आज ये कहना होगा
अब हमें आप के क़दमों ही में रहना होगा
शर्म आती है मगर आज ये कहना होगा
अब हमें आप के क़दमों ही में रहना होगा

शर्म आती है मगर

आप से रूठ के हम जितना जिये ख़ाक जिये
आप से रूठ के हम जितना जिये ख़ाक जिये
कई इल्ज़ाम लिये और कई इल्ज़ाम दिये
आज के बाद मगर कुछ भी न कहना होगा
अब हमें आप के क़दमों ही में रहना होगा

देर के बाद समझे हैं मोहब्बत क्या है
अब हमें चाँद के झूमर की ज़रुरत क्या है
प्यार से बढ़ के भला कौन सा गहना होगा
अब हमें आप के क़दमों ही में रहना होगा

शर्म आती है मगर आज ये कहना होगा

आप के प्यार का बीमार हमारा दिल है
आप के प्यार का बीमार हमारा दिल है
आप के ग़म का खरीदार हमारा दिल है
आप को अपना कोई दर्द न सहना होगा

अब हमें आप के क़दमों ही में रहना होगा

शर्म आती है मगर आज ये कहना होगा
शर्म आती है
..................................
Sharm aati hai magar-Padosan 1968

ऐहसान तेरा होगा मुझ पर २-जंगली १९६१

लता की आवाज़ में ये गीत आप सुन चुके हैं अब सूना
जाए रफ़ी की आवाज़ में जो ज्यादा लोकप्रिय है. शम्मी कपूर
इसको परदे पर गा रहे हैं. वो जो अलसाया नशीलापन है जिनमें
ये पंक्तियाँ गई जा रही हैं- "रोने कहोगे रो लेंगे अब" , वो रफ़ी
की आवाज़ की एक विशेष खूबी है.



गीत के बोल:

ऐहसान तेरा होगा मुझ पर
दिल चाहता है वो कहने दो, मुझे
तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे
पलकों की छाँव में रहने दो

ऐहसान तेरा होगा मुझ पर
दिल चाहता है वो कहने दो, मुझे
तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे
पलकों की छाँव में रहने दो

ऐहसान तेरा होगा मुझ पर

तुमने मुझको हँसना सिखाया
तुमने मुझको हँसना सिखाया
रोने कहोगे रो लेंगे अब
आँसू का हमारे ग़म ना करो
वो बहते तो बहने दो, मुझे
तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे
पलकों की छाँव में रहने दो

ऐहसान तेरा होगा मुझ पर

चाहे बना दो चाहे मिटा दो
चाहे बना दो चाहे मिटा दो
मर भी गए तो देंगे दुआएँ
उड़-उड़ के कहेंगी खाक सनम
ये दर्द-ए-मुहब्बत सहने दो, मुझे
तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे
पलकों की छाँव में रहने दो

ऐहसान तेरा होगा मुझ पर
दिल चाहता है वो कहने दो, मुझे
तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे
पलकों की छाँव में रहने दो
..............................
Ehsan tera hoga mujh par 2-Junglee

Saturday, 18 June 2011

ऐहसान तेरा होगा मुझ पर १ -जंगली १९६१

आपको एक मधुर और लोकप्रिय गीत सुनवाते हैं फिल्म जंगली से।

इस फिल्म से दूसरा गीत पेश कर रहे हैं ब्लॉग पर। लता मंगेशकर

की आवाज़ में ये गीत फिल्माया गया है सायरा बानो पर। नायिका गीत

के माध्यम से नायक से मोहब्बत कबूल फरमाने की गुज़ारिश कर रही

है। युवा सायरा बानो और युवावस्था की आखिरी सीढ़ी पर खड़े

वाले शम्मी की ये फिल्म जनता द्वारा बेहद पसंद की गई, विशेषकर

इसके गीतों की वजह से। हसरत जयपुरी का लिखा हुआ गीत है और

संगीत शंकर जयकिशन ने तैयार किया है। गीत के अंतरे में लता की

आवाज़ को आप सुरों की ऊंची पट्टी पर पहुँचते पाएंगे। ये केवल एक

दो शब्दों तक ही सीमित है मगर काफी कष्टदायी होता है किसी भी

गायक गायिका के लिए। वैसे भी हिंदी फिल्म संगीतकारों ने लता

मंगेशकर से काफी ऊंची पट्टी वाले गाने गवाए हैं। सलिल चौधरी

साहब उस काम में उस्ताद रहे हैं और उन्होंने एक से बढ़कर एक

सुर खींचने वाले गाने लता को दिए। चलिए गीत सुना जाये, इस मुद्दे

पर चर्चा फिर कभी। गीत थोड़े अलग अंदाज़ में गाया गया है

और आप पाएंगे जैसे खुद सायरा ही ये गीत परदे पर गा रही हों।











गीत के बोल:



एहसान तेरा होगा मुझ पर

दिल चाहता है वो कहने दो, मुझे

तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे

पलकों की छाँव में रहने दो



एहसान तेरा होगा मुझ पर

दिल चाहता है वो कहने दो, मुझे

तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे

पलकों की छाँव में रहने दो



एहसान तेरा होगा मुझ पर



तुमने मुझको हँसना सिखाया

तुमने मुझको हँसना सिखाया

रोने कहोगे रो लेंगे अब

आँसू का हमारे ग़म ना करो

वो बहते तो बहने दो, मुझे

तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे

पलकों की छाँव में रहने दो



एहसान तेरा होगा मुझ पर



चाहे बना दो, चाहे मिटा दो,

चाहे बना दो, चाहे मिटा दो,

मर भी गए तो देंगे दुआएँ

उड़-उड़ के कहेंगी खाक सनम

ये दर्द-ए-मुहब्बत सहने दो, मुझे

तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे

पलकों की छाँव में रहने दो



एहसान तेरा होगा मुझ पर

दिल चाहता है वो कहने दो, मुझे

तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे

पलकों की छाँव में रहने दो

.................................

Ehsan tera hoga mujh par 1-Junglee 1961

Wednesday, 15 June 2011

कौन अंजाम-ए-उल्फत नहीं जानता-हेरा फेरी १९७६

ये दिमाग भी कमबख्त बहुत कबाड़ा किस्म की चीज़ है, मटर पनीर
खाते खाते जूता पालिश की ख़ाली होती डब्बी याद आ जाती है तो
नहाते नहाते पेट्रोल पम्प दिखाई देने लगता है ।

आज एक पुराने मित्र की याद हो आई। जो मित्र दिल के करीब थे
समय ने उनको इतना दूर कर दिया कि अब उनकी यादों के सिवा
कुछ बचा नहीं है दोस्ती के नाम पे। कुछ दूसरी दुनिया पहुँच
गये तो कुछ मोह माया में उलझ कर रह गये। आपको फिल्म हेरा फेरी
का एक गीत सुनवाया था-बरसों पुराना ये याराना। फिल्म हेरा फेरी से
एक गीत आपको और सुनवाते हैं। ये सायरा बानो और अमिताभ बच्चन
पर फिल्माया गया है।




गीत के बोल:

कौन अंजाम-ए-उल्फत नहीं जानता
कौन अंजाम-ए-उल्फत नहीं जानता
मगर क्या करूं ये दिल दीवाना
नहीं मानता नहीं मानता
नहीं मानता दिल नहीं मानता

कौन अंजाम-ए-उल्फत नहीं जानता

मौत से जो डरे, प्यार वो क्या करे
प्यार में तो यही मौत है ज़िन्दगी
जान क्या चीज़ है प्यार के सामने
साथ छूते ना छूते ये दिल की लगी
ये ना होता तो फिर प्यार की राह में
ख़ाक दर दर की कोई दीवाना
नहीं छानता नहीं छानता
नहीं मानता दिल नहीं मानता

कौन अंजाम-ए-उल्फत नहीं जानता

लैला शीरी हो या हीर या सोहनी
मर के भी उनकी सूरत सितारों में है
जिस के दिल का लहू घुल गया प्यार में
आज तक उनकी ख़ुशबू बहारों में है
कुछ तो है वरना दिल मेरा तेरे लिए
जान देने की जिद जाने-जाना
नहीं ठानता, नहीं ठानता
नहीं मानता दिल नहीं मानता

कौन अंजाम-ए-उल्फत नहीं जानता
कौन अंजाम-ए-उल्फत नहीं जानता
मगर क्या करूं ये दिल दीवाना
नहीं मानता नहीं मानता
नहीं मानता दिल नहीं मानता
............................
Kaun anjaam-e-ulfat nahin jaanta-Hera Pheri 1976

उड़ के पवन के...रुक जा ऐ हवा-शागिर्द १९६७

एक मधुर गीत सुनवाते हैं आपको लता मंगेशकर
की आवाज़ में। मजरूह सुल्तानपुरी के लिखे गीत की
तर्ज़ बनाई है लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने।

सायरा बानो और जॉय मुखर्जी पर फिल्माया गया ये गीत
आपको फिल्म शागिर्द में देखने को मिलेगा। कर्णप्रिय होने के
साथ साथ दर्शनीय गीत है और इसका आकर्षण पक्षियों की
आवाजें प्रचुर मात्र में सुनाई देती हैं जो इसे खूबसूरत बनाती हैं।

अल्हड, मस्त बोल और अदाओं वाला ये गीत रात्रि के वक़्त सुनने
में सबसे ज्यादा आनंद देता है।



गीत के बोल:


हो ओ ओ ओ
रुक जा, रुक जा, रुक जा

उड़ के पवन के रंग चलूंगी
मैं भी तिहारे संग चलूंगी

रुक जा ऐ हवा, थम जा ऐ बहार
रुक जा ऐ हवा, थम जा ऐ बहार


उड़ के पवन के रंग चलूंगी
मैं भी तिहारे संग चलूंगी

रुक जा ऐ हवा, थम जा ऐ बहार
रुक जा ऐ हवा, थम जा ऐ बहार


परबत परबत तेरी महक है
लट मेरी भी दूर तलक है
देखो रे डाली डाली
देखो रे डाली डाली
खिली मेरे तन की लाली
हो ओ ओ ओ ओ ओ रुक जा
जो तू है वोही मैं हूँ

रुक जा ऐ हवा, थम जा ऐ बहार
रुक जा ऐ हवा, थम जा ऐ बहार

झरना दर्पण ले के निहारे
बूंदों का गहना तन पे संवारे
लहरें झूला झुलायें
लहरें झूला झुलायें
मेरे लिए गीत गएँ
हो ओ ओ ओ ओ ओ रुक जा
पनघट की, मैं हूँ गोरी

रुक जा ऐ हवा, थम जा ऐ बहार
रुक जा, जा ऐ हवा, थम जा ऐ बहार

हो ओ ओ, हो ओ ओ

देख ज़रा सा तू मुझे छू के
पग बजते हैं बिन घुँघरू के
जो तेरी ताल में है
जो तेरी ताल में है
वही मेरी चाल में है
हो ओ ओ ओ ओ ओ रुक जा
मैं हिरनिया, मैं चकोरी

रुक जा ऐ हवा, थम जा ऐ बहार

उड़ के पवन के रंग चलूंगी
मैं भी तिहारे संग चलूंगी

रुक जा ऐ हवा, थम जा ऐ बहार
रुक जा ऐ हवा, थम जा ऐ बहार
...........................
Ud ke pawan ke...ruk ja ae hawa-Shagird 1967

Sunday, 15 May 2011

मुस्कुराती हुई एक हुस्न की तस्वीर-दामन और आग १९७३

कुछ शब्दों का साथ ऐसा लगता है-made for each other,
जैसे 'साबुन और झाग'। शब्दों के ऐसे युग्मों का प्रयोग फिल्म
के नाम ईजाद करने में अक्सर किया जाता है।

आइये आपको बिना समय गंवाए एक गीत सुनाया जाये।
इस मधुर युगल गीत को गाया है रफ़ी के साथ आशा भोंसले ने।
शंकर जयकिशन के संगीत के बावजूद इस फिल्म ने कोई
करिश्मा नहीं किया जिससे इसके निर्माता निर्देशक की लागत
और मेहनत वसूल हो। गीत में जो कलाकार दिखलाई पढ़ रहे हैं
उनके नाम इस प्रकार से हैं, नायक:संजय खान, नायिका:सायरा बानो।



गीत के बोल:

मुस्कुराती हुई एक हुस्न की तस्वीर हो तुम
मुस्कुराती हुई एक हुस्न की तस्वीर हो तुम
कल जो देखा था उसी ख्वाब की ताबीर हो तुम

ऐसा लगता है मेरे प्यार की तकदीर हो तुम
ऐसा लगता है मेरे प्यार की तकदीर हो तुम
कल जो देखा था उसी ख्वाब की ताबीर हो तुम

मुस्कुराती हुई एक हुस्न की तस्वीर हो तुम

मेरा सपना हुआ पूरा जो मुलाक़ात हुयी
प्यार से प्यार मिला प्यार की कुछ बात हुयी
मेरा सपना हुआ पूरा जो मुलाक़ात हुयी
प्यार से प्यार मिला प्यार की कुछ बात हुयी
जिसको पाया है दुआ ने वोही तासीर हो तुम
जिसको पाया है दुआ ने वोही तासीर हो तुम

कल जो देखा था उसी ख्वाब की ताबीर हो तुम
ऐसा लगता है मेरे प्यार की तकदीर हो तुम

मेरे साथी मुझे जीने का सहारा तो मिला
मेरी भटकी हुयी नैया को किनारा तो मिला
मेरे साथी मुझे जीने का सहारा तो मिला
मेरी भटकी हुयी नैया को किनारा तो मिला
जो मेरे हाथ पे लिखी है वो तहरीर हो तुम
जो मेरे हाथ पे लिखी है वो तहरीर हो तुम

कल जो देखा था उसी ख्वाब की ताबीर हो तुम

मुस्कुराती हुई एक हुस्न की तस्वीर हो तुम
................................................................
Muskurati huyi ek husn ki-Daman aur aag 1973

Monday, 3 January 2011

ओ नीले पर्बतों की धारा-आदमी और इंसान १९६९

आज का पहला गीत पेश है फिल्म आदमी और इंसान से।
साहिर के लिखे बोलों पर तर्ज़ बनाई है रवि ने। आशा और
महेंद्र कपूर इसको गा रहे हैं धर्मेन्द्र और सायरा बानो के लिए ।



गीत के बोल:

ओ नीले पर्बतों की धारा
आयी ढूँढने किनारा, बड़ी दूर से
सब को सहारा चाहिये
कोई हमारा चाहिये

ओ नीले पर्बतों की धारा
आयी ढूँढने किनारा, बड़ी दूर से
सब को सहारा चाहिये
कोई हमारा चाहिये

ला ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला ला

फूल में जैसे फूल की खुशबू
दिल में है यूँ तेरा बसेरा
धरती से अम्बर तक फैला
चाहत की बाहों का घेरा

हो ओ ओ
ओ नीले पर्बतों की धारा
आयी ढूँढने किनारा, बड़ी दूर से
सब को सहारा चाहिये
कोई हमारा चाहिये

ला ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला ला

सूरज पीछे घूमे धरती
साँझ के पीछे घूमे सवेरा
जिस नाते ने इन को बाँधे
वो नाता है तेरा मेरा

हो ओ ओ
ओ नीले पर्बतों की धारा
आयी ढूँढने किनारा, बड़ी दूर से
सब को सहारा चाहिये
कोई हमारा चाहिये

ओ नीले पर्बतों की धारा
आयी ढूँढने किनारा, बड़ी दूर से
सब को सहारा चाहिये
कोई हमारा चाहिये
 
 
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