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Saturday, 29 October 2011

तौबा तौबा तौबा -पासपोर्ट १९६१

कुछ फ़िल्में भूली बिसरी कहलाती हैं तो कुछ भूली भटकी और बची-खुची
फिल्मों को गुम भुला दी गई फ़िल्में बोला जाता है। बोलने के तरीके बस
जुदा हैं सबके, आशय उनका एक ही रहता है।

एक गुमनाम इस फिल्म पासपोर्ट से एक थोड़ा लोकप्रिय गीत सुनवाया
था आपको पहले। इसी फिल्म से गीता दत्त का गाया अगला गीत सुनते हैं
जो हेलन पर फिल्माया गया है। जनता एक मदिरालय में एकत्रित है और
इसमें एक नर्तकी नृत्य कौशल दिखलाते हुए गा रही है। हेलन को ऐसे दृश्यों
में आपने कई फिल्मों में देखा होगा। ऐसे गीतों के लिए पहले के समय में
गीता दत्त की आवाज़ को प्राथमिकता दी जाती थी वो स्थान बाद में आशा भोंसले
की आवाज़ ने ले लिया।

गीत लिखा है कमर जलालाबादी ने बाद इसकी धुन बनाई है संगीतकार जोड़ी
कल्याणजी-आनंदजी ने। कल्याणजी आनंदजी ने अपनी शुरूआती फिल्मों
में गीता दत्त से उन्होंने कुछ गीत अवश्य गवाए। गीत में आपको गुज़रे
ज़माने के मशहूर खलनायक के. एन. सिंह और चरित्र अभिनेता नजीर हुसैन
भी दिखलाई दे जायेंगे।





गीत के बोल:

तौबा तौबा तौबा
हॉय तौबा मेरी मान
तौबा तौबा तौबा
ओ तौबा मेरी मान
ले के मेरे दिल को
बनो ना बेईमान
हो ले के मेरे दिल को
बनो ना बेईमान

तौबा तौबा तौबा
हो तौबा मेरी मान
तौबा तौबा तौबा
हो तौबा मेरी मान
ले के मेरे दिल को
बनो ना बेईमान
हो ले के मेरे दिल को
बनो ना बेईमान

जाने चमन की रंगीन बहारें
किस को पुकारें, किसको पुकारें
जाने चमन की रंगीन बहारें
किस को पुकारें, किसको पुकारें
देखी है ऐसी बहारें कहाँ

तौबा तौबा तौबा
हो तौबा मेरी मान
तौबा तौबा तौबा
हो तौबा मेरी मान
ले के मेरे दिल को
बनो ना बेईमान
हो ले के मेरे दिल को
बनो ना बेईमान


दुनिया में लाखों बांके जवान हैं
मेरी अदा पे सब मेहरबान हैं
दुनिया में लाखों बांके जवान हैं
मेरी अदा पे सब मेहरबान हैं
तुमसे ही ज़ालिम को दिल क्यूँ दिया

तौबा तौबा तौबा
हो तौबा मेरी मान
तौबा तौबा तौबा
हो तौबा मेरी मान
ले के मेरे दिल को
बनो ना बेईमान
हो ले के मेरे दिल को
बनो ना बेईमान

हम ने तुम्हीं से आँख मिलायी
महफ़िल में क्यूँ ये तन्हाई
हम ने तुम्हीं से आँख मिलायी
महफ़िल में क्यूँ ये तन्हाई
हम हैं तुम्हारे तुम्हारी कसम

तौबा तौबा तौबा
हो तौबा मेरी मान
तौबा तौबा तौबा
हो तौबा मेरी मान
ले के मेरे दिल को
बनो ना बेईमान
हो ले के मेरे दिल को
बनो ना बेईमान
................................
Tauba tauba ho-Passport 1961

Friday, 1 July 2011

मुखड़े पे गेसू आ गये-पायल की झंकार १९६८

गेसू, बाल, केश, जुल्फें, लट इन शब्दों का प्रयोग गीतकार नारी
विषयक पंक्तियों की रचना में ही किया करते हैं। जिन नायकों
के बाल लम्बे होते हैं उनके लिए शायद पैरोडी में कभी कोई गीत
बना हो तो हो, अन्यथा नारी के सौंदर्य में चार चाँद लगाने वाली
केश राशि ही गीतकारों को लुभाती रही है।

आपको फिल्म पायल की झंकार से दो गीत सुनवा चुके हैं। आइये तीसरा
गीत सुनते हैं जो किशोर कुमार की आवाज़ में एकल गीत है। गीत लम्बा
है और इसके अंतरे के बीच के ध्वनियों के टुकड़े भी बड़े हैं।

इस फिल्म में किशोर कुमार से शेर शायरी और कविता बुलवाई गई है, जो
अनूठा सा प्रयोग है। किशोर कुमार की दिलकश आवाज़ में वो सब सामान
संगीत प्रेमियों के लिए अमूल्य निधि सरीखी है।

इसी कड़ी में एक गीत है-मुखड़े पे गेसू आ गये. इस गीत की पञ्च लाइन है
"आधे इधर आधे उधर। चूंकि अधिकतर बालिकाएं, कन्यायें,युवतियां और
महिलाएं बीच में से मांग निकलती है, उनकी केश राशि दोनों तरफ बराबर
फैलाव लिए होती हैं।

गीत में प्राकृतिक सौंदर्य भी आपको भरपूर मिलेगा। कुछ समय पहले
आपने ओलिम्पिक में आपने एक प्रतियोगिता ज़रूर देखी होगी जिसका
नाम है -synchronized swimming। इसका देसी संस्करण आप इस
गीत में देख लीजिये जो कितने साल पहले हमारा फिल्म निर्देशक
दर्शकों को दिखा चुका है। बहते हुए झरने और नदी की धार के बीच
नायिका और उसकी सहेलियों की अठखेलियों पर कमर जलालाबादी
के बोल और संगीतकार सी रामचंद्र की सॉफ्ट सी धुन एक सुखमय सा
प्रभाव बनती है।



गीत के बोल:

मुखड़े पे गेसू आ गये
आधे इधर आधे उधर
आधे इधर आधे उधर
चंदा पे बादल छा गये
आधे इधर आधे उधर
आधे इधर आधे उधर

आज हमने रूप देखा
चांदनी के भेस में
आज हमने रूप देखा
चांदनी के भेस में
एक परदेसी बेचारा
लुट गया परदेस में
एक परदेसी बेचारा
लुट गया परदेस में
दिल के दुश्मन आ गये
आधे इधर आधे उधर
आधे इधर आधे उधर

मुखड़े पे गेसू आ गये
आधे इधर आधे उधर
आधे इधर आधे उधर

तुझको मालिक ने बनाया
ख़ास अपने हाथ से
तुझ को मालिक ने बनाया
ख़ास अपने हाथ से
सुबह से मुखड़ा बनाया
और जुल्फें रात से
सुबह से मुखड़ा बनाया
और जुल्फें रात से
फूल खिल कर आ गये
आधे इधर आधे उधर
आधे इधर आधे उधर

मुखड़े पे गेसू आ गये
आधे इधर आधे उधर
आधे इधर आधे उधर
.....................................
Mukhde pe gesoo aa gaye-Payal ki jhankar 1968

तू आये ना आये-पायल की झंकार १९६८

आज इच्छा हुई कि फिल्म पायल की झंकार(१९६८) से आपको गायक
किशोर कुमार का गाया गीत सुनवाया जाये, मगर पहले सुनवाते हैं
एक उत्तम कोटि का दर्द भरा गीत, जिसे फिल्माया गया है दक्षिण भारत
की अभिनेत्री ज्योति लक्ष्मी पर। ये कितनी हिंदी फिल्मों में दिखाई दीं मुझे
मालूम नहीं मगर इस फिल्म में वे किशोर कुमार का 'परफेक्ट मैच' हैं।
एक और हिंदी फिल्म है जिसमें वे मौजूद हैं-रानी और जानी (१९७३)

इस गीत में उनके चेहरे के भाव किसी मंजी हुई अभिनेत्री के जैसे चेहरे पर
आते-जाते हैं। इस गीत को देखने से भी प्रभाव पढता है जितना कि इसको
सुनने का। संगीतकार सी रामचंद्र की सक्रियता कुछ कम हुई थी सन १९६०
के बाद। इस गीत में लगभग वही प्रभाव है जो राजेंद्र कृष्ण लिखित और
सी. रामचंद्र द्वारा निर्देशित ५० के दशक के गीतों में आपको मिलता है ।
प्रस्तुत गीत लिखा है कमर जलालाबादी ने। विडम्बना है कि इतना मधुर
गीत भी अनसुना सा रह गया फिल्म के ना चलने की वजह से। इस गीत
को लता मंगेशकर ने गाया है।



गीत के बोल:

तू आये ना आये मगर जाने वाले
आये ना आये मगर जाने वाले
तेरी याद आ आ कर रुलाया करेगी,
रुलाया करेगी
जो देखेगी रोता है कोई अकेला
देखेगी रोता है कोई अकेला
तो खुद भी वो आंसू बहाया करेगी,
बहाया करेगी

तू आये ना आये

जिधर से गया तू ये राहें हमेशा
तरसती रहेंगी तेरी वापसी को
उधार से हवा भी जो आया करेगी
उधार से हवा भी जो आया करेगी
तेरा नाम लेकर सताया करेगी

तू आये ना आये

जो रातों को तारे ये पूछेंगे मुझसे
बता तू भी क्यों रात भर जागती है
कहूँगी मेरी नींद बस में नहीं है
कहूँगी मेरी नींद बस में नहीं है
ये बिरहन बहाने बनाया करेगी
तू आये ना आये

जहान मेरी आँखों का पानी गिरेगा
तेरी याद के फूल खिलते रहेंगे
सवेरे-सवेरे जो आएगी शबनम
सवेरे-सवेरे जो आएगी शबनम
तो दिल थाम कर लौट जाया करेगी

तू आये ना आये
.............................
Too aaye na aaye-Payal Ki Jhankar 1968

Friday, 24 June 2011

लोग कहते हैं तो सच ही-ये दिल किसको दूं १९६३

आपको एक माउथ ओर्गनिया और उछलकूदियाना गीत
सुनवाते हैं। जिस गीत की शुरुआत ऐसी उछल कूद से होती
है उसके लिए कोई उपयुक्त श्रेणी मुझे समझ नहीं आती। माउथ
ओरगन अर्थात मुंह से बजाय जाने वाला बाजा। मुंह से वैसे
तो कई चीज़ें बजायी जाती हैं और बजायी जा सकती हैं मगर
सबसे सोबर किस्म का नाम इसी बाजे का है जिसको माउथ
ओरगन कहा जाता है।

गाँव देहात में कभी इस बाजे के लिए एक शब्द भी सुना था
मैंने-विलायती पुंगी। तो आइये इस विलायती पुंगी की आवाज़
का आनंद उठाया जाये। फिल्म का शीषक गीत कह सकते हैं
आप से क्यूंकि फिल्म के नाम के उच्चारण से ही ये गीत
शुरू हो रहा है। गीत तेज़ गति वाला है और याहू-चाहे कोई
मुझे जंगली कहे की याद दिलाता है। उस गीत में शम्मी हैं
तो इस गीत में शशि।



गीत के बोल:

ये दिल किसको दूं
ये दिल किसको दूं
लोग कहते हैं कोई सच ही कहते होंगे
लोग कहते हैं तो सच ही कहते होंगे
मैं हूँ दीवाना, दिल है मस्ताना
गम से बेगाना
मैं हूँ दीवाना, दिल है मस्ताना
गम से बेगाना
लोग कहते हैं तो सच ही कहते होंगे
लोग कहते हैं तो सच ही कहते होंगे

धरती बिछौना मेरा
तारे खिलौना मेरा
राहों में उड़ते जुगनू
चंडी और सोना मेरा
मैं दिलवाला हूँ
मैं मतवाला हूँ
ना मैं दौलतमंद हूँ
ना मैं जन्नतमंद हूँ
दिल का करार मांगूं रे
मैं सच्चा प्यार मांगूं रे
दिल का करार मांगूं रे
मैं सच्चा प्यार मांगूं रे

ये दिल किसको दूं
ये दिल किसको दूं

लोग कहते हैं कोई सच ही कहते होंगे
लोग कहते हैं तो सच ही कहते होंगे
मैं हूँ दीवाना, दिल है मस्ताना
गम से बेगाना
मैं हूँ दीवाना, दिल है मस्ताना
गम से बेगाना
लोग कहते हैं तो सच ही कहते होंगे

मस्त कलंदर हूँ मैं
दिल का सिकंदर हूँ मैं
कोई ना समझे मुझको
गहरा समुन्दर हूँ मैं
मैं शहजादा हूँ
मैं शहजादा हूँ
यूँ तो सादा हूँ
ना है शैतान से रिश्ता ना मैं हूँ फ़रिश्ता
मैं तो आदम का बेटा हूँ
मैं तो हव्वा का बेटा हूँ
मैं तो आदम का बेटा हूँ
मैं तो हव्वा का बेटा हूँ

ये दिल किसको दूं
ये दिल किसको दूं

लोग कहते हैं कोई सच ही कहते होंगे
लोग कहते हैं तो सच ही कहते होंगे
मैं हूँ दीवाना, दिल है मस्ताना
गम से बेगाना
मैं हूँ दीवाना, दिल है मस्ताना
गम से बेगाना
लोग कहते हैं तो सच ही कहते होंगे
.............................
Log kehte hain to sach hi-Ye dil kisko doon 1963

Monday, 20 June 2011

तुम रूठ के मत जाना- फागुन १९५८

मधुबाला के नाम से ये गीत मुझे बार बार याद आ जाता है-
मैं सोया अँखियाँ मीचे। इस गीत को सुनते सुनते मुझे भी
नींद आ जाती है। गीत के विडियो ऑडियो दोनों में नशा
सा है। गीत इतनी सौम्यता से गाया और फिल्माया गया है
कि इसकी सादगी से भी नशा सा होने लगता है। एक बार इसे
अवश्य सुनें और देखें।

आज आपको एक और गीत सुनवाते हैं फिल्म फागुन से।
ये भी युगल गीत है आशा और रफ़ी की आवाजों में। कमर
जलालाबादी के सरल बोलों पर धुन तैयार की है संगीतकार
ओ पी नय्यर ने। फागुन फिल्म सन १९५८ की एक बड़ी हिट
फिल्म थी। सफलता में फिल्म के संगीत का भी बहुत बड़ा
योगदान था।

एक कविता पाठ की तरह सा ये गीत विरह गीत के रूप में प्रस्तुत
किया गया है फिल्म में। जैसे फिल्म फागुन के गीत एक दूसरे के
निकट के सम्बन्धी से सुनाई देते हैं वैसे ही इस गीत में रोती हुई
नायिका सुचित्रा सेन की दूर की रिश्तेदार सी दिखाई देती है।





गीत के बोल:


तुम रूठ के मत जाना
तुम रूठ के मत जाना
मुझसे क्या शिकवा दीवाना है दीवाना
मुझसे क्या शिकवा दीवाना है दीवाना

क्यों हो गया बेगाना
क्यों हो गया बेगाना
तेरा-मेरा क्या रिश्ता ये तूने नहीं जाना
तेरा-मेरा क्या रिश्ता ये तूने नहीं जाना

मैं लाख हूँ बेगाना
मैं लाख हूँ बेगाना
फिर ये तड़प कैसी इतना तो बता जाना
फिर ये तड़प कैसी इतना तो बता जाना

फ़ुरसत हो तो आ जाना
फ़ुरसत हो तो आ जाना
अपने ही हाथों से मेरी दुनिया मिटा जाना
अपने ही हाथों से मेरी दुनिया मिटा जाना

तुम रूठ के मत जाना
तुम रूठ के मत जाना
मुझसे क्या शिकवा दीवाना है दीवाना
मुझसे क्या शिकवा दीवाना है दीवाना

.................................
Tum rooth ke mat jaana-Phagun 1958

Thursday, 16 June 2011

धीरे रे चलो-जौहर महमूद इन गोवा १९६५

आपको कुछ गंभीर से गीत सुना दिए अब एक मस्त गीत सुनवाते हैं।
मुकेश के लोकप्रिय गीतों में से एक और श्वेत श्याम युग से इसे परदे
पर गा रहे हैं ए एस जौहर और उनकी फैवरेट अभिनेत्री सोनिया साहनी
बांकी हिरनिया का किरदार निभा रही हैं। जौहर अच्छे अभिनेता
थे। इस गीत में वो किसी कुशल रोमांटिक नायक जैसे गीत गाने कि
कुशल कवायद कर रहे हैं।




गीत के बोल:

धीरे रे चलो मोरी बांकी हिरनिया
धीरे रे चलो मोरी बांकी हिरनिया
कमर ना लचके हाय सजनिया


धीरे रे चलो मोरी बांकी हिरनिया
धीरे रे चलो मोरी बांकी हिरनिया

तेरी बिखरी जुल्फें देख देख ये
मस्त घटा शरमाई, हो देखो
मस्त घटा शरमाई
तेरा रूप जो देखा झूम झूम ली
बिजली ने ली अंगडाई, हो ली
बिजली ने अंगडाई
काले बाल गोरा रूप
जैसे साये में हो धूप
तुझे देख जिया भरमा ही गया

ओ, धीरे रे चलो मोरी बांकी हिरनिया
धीरे रे चलो मोरी बांकी हिरनिया
कमर ना लचके हाय सजनिया

धीरे रे चलो मोरी बांकी हिरनिया
धीरे रे चलो मोरी बांकी हिरनिया

क्यूँ दिल की राहें छोड़ छोड़ ये
फूल चला कारों पे,
ये फूल चला कारों पे
तेरा पिघले ऐसे रूप के जैसे
मोम हो अंगारों पे जैसे
मोम हो अंगारों पे
तेरा मुखड़ा गुलाबी तेरी चाल शराबी
मुझे राम कसम नशा हो ही गया


ओ, धीरे रे चलो मोरी बांकी हिरनिया
धीरे रे चलो मोरी बांकी हिरनिया
कमर ना लचके हाय सजनिया

धीरे रे चलो मोरी बांकी हिरनिया
धीरे रे चलो मोरी बांकी हिरनिया
................................
Dheere re chalo-Johar Mehmood in Goa 1965

Saturday, 28 May 2011

ये काफिला है प्यार का-लेख १९४९

फिल्म आशिक के गीत से एक और युगल गीत याद आया आशा भोंसले
और मुकेश का गाया हुआ। आशा है आपने नहीं सुना होगा इसे पहले और
आप इसे एक बार अवश्य ही सुनना चाहेंगे। मोतीलाल और सुरैया अभिनीत
फिल्म लेख से ये गीत लिया गया है। कमर जलालाबादी के लिखे बोलों को
सुरों में पिरोया है संगीतकार कृष्ण दयाल ने। फ़िल्मी गीतों के काफिले
अक्सर प्यार के ही हुआ करते हैं और ये काफिले काफी पुराने हैं। गीतकार
कमर जलालाबादी का लिखा गीत बहुत दिन बाद शामिल किया है ब्लॉग पर।
संगीतकार कृष्ण दयाल के कुछ और गीत हम शामिल करेंगे आगे इस
ब्लॉग पर, टटोलते रहिये हिंदी फिल्म संगीत का खज़ाना





गीत के बोल:

ये क़ाफ़िला है प्यार का चलता ही जाएगा
ये क़ाफ़िला है प्यार का चलता ही जाएगा

ये क़ाफ़िला है प्यार का चलता ही जाएगा
जी भर के हँस ले गा ले ये दिन फिर न आएगा
ये क़ाफ़िला है प्यार का चलता ही जाएगा

इस क़ाफ़िले के साथ हँसी भी है अश्क़ भी
इस क़ाफ़िले के साथ हँसी भी है अश्क़ भी
गाएगा कोई और कोई आँसू बहाएगा
इस क़ाफ़िले के साथ हँसी भी है अश्क़ भी
गाएगा कोई और कोई आँसू बहाएगा

ये क़ाफ़िला है प्यार का चलता ही जाएगा

राही गुज़र न जाएं
राही गुज़र न जाएं मुहब्बत के दिन कहीं
आँखें तरस रही हैं कब आँखें मिलाएगा
आँखें तरस रही हैं कब आँखें मिलाएगा
राही गुज़र न जाएं मुहब्बत के दिन कहीं
आँखें तरस रही हैं कब आँखें मिलाएगा

ये क़ाफ़िला है प्यार का चलता ही जाएगा

इस क़ाफ़िले में
इस क़ाफ़िले में वस्ल भी है और जुदाई भी
इस क़ाफ़िले में वस्ल भी है और जुदाई भी
तू जो भी माँग लेगा तेरे पास आएगा
तू जो भी माँग लेगा तेरे पास आएगा
इस क़ाफ़िले में वस्ल भी है और जुदाई भी
तू जो भी माँग लेगा
तू जो भी माँग लेगा तेरे पास आएगा

ये क़ाफ़िला है प्यार का चलता ही जाएगा
............................
Ye kafila hai pyar ka-Lekh 1949

Monday, 6 December 2010

छम छम घुँघरू बोले-फागुन १९५८

लौट के बुद्धू घर को आये इशटाईल में फिर लौट चलें
काले पीले ज़माने की ओर। सुनिए एक झकास गाना
फिल्म फागुन से। ये है आशा की आवाज़ में एकल गीत।
इसे फिल्माया गया है हिंदी सिनेमा की वीनस मधुबाला
पर। कमर जलालाबादी के बोल, ओ पी नय्यर का संगीत
और आशा की आवाज़ साथ में मधुबाला की मुस्कराहट।
भारत भूषण भी दिखते हैं गीत में, उनकी मुस्कराहट
से कोई फर्क नहीं पढता। वस्तुतः वे गीत में नहीं
प्रकट होते तो भी काम चल जाता।

ओ पी नय्यर ऐसे संगीतकार है एस डी बर्मन के अलावा
जिनकी फिल्मों के एक नहीं वरन पूरे गीत सुनती है जनता।
अंदाज़ा लगाइए दोन ने कितनी मेहनत की होगी ये जानने
में कि जनता को कैसे लुभाया जाए। इन दोनों के कुछ
ही एल्बम औसत दर्जे के होंगे जिनमें से जनता एक आध
गीत सुनती होगी। उदाहरण के लिए फागुन फिल्म के सभी
गीत चाव से सुने जाते हैं।



गीत के बोल:

छम छम घुँघरू बोले
मेरी चाल नशीली डोले
मन गाने लगा समझाने लगा
तू आज किसी की हो ले

छम छम घुँघरू बोले
मेरी चाल नशीली डोले
मन गाने लगा समझाने लगा
तू आज किसी की हो ले

छम छम घुँघरू बोले

जब से तू दिल में सामने लगा
ज़िन्दगी में नया मज़ा आने लगा
जब से तू दिल में सामने लगा
ज़िन्दगी में नया मज़ा आने लगा
बदली है चाल खिल गए गाल
आँखों में सवाल बिखरे हैं बाल

छम छम घुँघरू बोले
मेरी चाल नशीली डोले
मन गाने लगा समझाने लगा
तू आज किसी की हो ले

छम छम घुँघरू बोले


याद रहे पिया मेरा प्यार सच्चा जी
फिर कभी आपसे मिलेंगे अच्छा जी
याद रहे पिया मेरा प्यार सच्चा जी
फिर कभी आपसे मिलेंगे अच्छा जी
आपके ग़ुलाम देते हैं सलाम
देख लिया नाच लाओ जी इनाम

छम छम घुँघरू बोले
मेरी चाल नशीली डोले
मन गाने लगा समझाने लगा
तू आज किसी की हो ले

छम छम घुँघरू बोले
...............................
Chham chham ghunghroo bole-Phagun 1958

Monday, 29 November 2010

ओ जानेवाले सुन ज़रा-प्रीत ना जाने रीत १९६६

एक गीत सुनवा रहे हैं आपको श्वेत श्याम युग से
जो लता और रफ़ी का गाया हुआ है। भारी भरकम शरीर के
मालिक शम्मी कपूर अपने समकालीन दुबलों से भी कहीं तेज़
गति से अपने शरीर को हिला डुला लिया करते थे। इसमें सभी
को आश्चर्य होता था। इसीलिए शायद वे औरों से ज्यादा प्रसिद्ध
हुए। उनके नाक नक्श भी औरों से बेहतर थे। गीत सुन कर
आपको आभास होगा कुछ कुछ शंकर जयकिशन के संगीत का,
लेकिन थोडा सा संदेह भी होगा कि ये किसी और कि करामात है।
हाँ जी, ये है कल्याणजी आनंदजी का संगीत है। उस समय के
काफी संगीतकार शंकर जयकिशन प्रभाव में रंगे सुनाई पढ़ते थे
क्युंकि शंकर जयकिशन उस दौर के सबसे सफल संगीतकार
माने जाते थे। इस गीत को फिल्माया गया है बी. सरोजा देवी और
शम्मी कपूर पर। गीत लिखा है कमर जलालाबादी ने।

श्रेणी बनाने के शौकीनों के लिए सन्देश- 'नारियल के झाड' अथवा
'साईकिल' श्रेणी का गीत। जैसा कि फ़िल्मी गीतों में होता आया है
गीत तकरार से शुरू होकर इकरार में बादल जाता है, इसमें भी
ऐसा ही है। तलाक और मैरिज कौंसलिंग वाली संस्थाओं को ऐसे
गीत सुनवाना चाहिए अपने क्लायंट्स को।



गीत के बोल:

ओ जानेवाले सुन ज़रा दिल का माजरा
ओ जानेवाले सुन ज़रा दिल का माजरा
तुझी से हमें प्यार था
तुझी से हमें प्यार है

जाओ जी मैंने सुन लिया ये दिल का माजरा
जाओ जी मैंने सुन लिया ये दिल का माजरा
ना तुम्हे कभी प्यार था
ना तुम्हे अब प्यार है

ओ जानेवाले सुन ज़रा

आ भी जा ज़िन्दगी का जाम लेकर
मेरी जान ना सता इलज़ाम देकर
हम तो जीते हैं तेरा नाम लेकर
तुम तो जीत हो मेरा नाम लेकर
आये हो प्यार का पैगाम लेकर
जाओगे तुम दिले-ए-नादान लेकर
जाओगे तुम दिले-ए-नादान लेकर

ओ जानेवाले सुन ज़रा दिल का माजरा
तुझी से हमें प्यार था
तुझी से हमें प्यार है

जाओ जी मैंने सुन लिया ये दिल का माजरा
ना तुम्हे कभी प्यार था
ना तुम्हे अब प्यार है

ओ जानेवाले सुन ज़रा

जा रे जा देख लिया प्यार तेरा
ये गिला शिकवा है बेकार तेरा
सरबसर झूठा है इकरार तेरा
तुम ही हो मैं हूँ तो बीमार तेरा
कर के मैं जाऊँगा दीदार तेरा
बान के दिखलाऊँगा दिलदार तेरा
बान के दिखलाऊँगा दिलदार तेरा

जाओ जी मैंने सुन लिया ये दिल का माजरा
ना तुम्हे कभी प्यार था
ना तुम्हे अब प्यार है

ओ जानेवाले सुन ज़रा दिल का माजरा
तुझी से हमें प्यार था
तुझी से हमें प्यार है

जाओ जी मैंने सुन लिया

आ तुझे प्यार कि पहचान दे दूं
तू जो कह दे तो अपनी जान दे दूं
तेरे एक नाज़ पे ईमान दे दूं
आ तुझे प्यार का अरमान दे दूं
मौज के पहलू में तूफ़ान दे दूं
चार दिन जीने का सामान दे दूं
चार दिन जीने का सामान दे दूं

चलो जी हुआ फैसला
नहीं कोई अब गिला
तुम्ही से मेरी जीत है
तुम्ही से मरी हार है

चलो जी हुआ फैसला
नहीं कोई अब गिला
तुम्ही से मेरी जीत है
तुम्ही से मरी हार है
................................
O Jaane waale sun zara-Preet na jaane reet 1962
 
 
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