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Monday, 16 December 2013

सूनी रे सजरिया-नमक हराम १९७३

दो वक्त की रोटी का चक्कर बड़ा बुरा. किया क्या जाए इसके बिना काम
नहीं चलता है. बोलने की बक बक इतनी हो गयी पिछले दिनों कि इधर से
ध्यान न चाहते हुए भी हट गया. हिन्दुस्तान की सरज़मीं पर मौजूद कई
इन्टरनेट कनेक्शन इतने तेज चला करते हैं कि आज एड्रेस टाइप करो,
साईट कल खुलने की गारंटी.

पाठकों से क्षमा याचना सहित अगली प्रस्तुति हाज़िर है. सन १९७३ की फिल्म

 नमक हराम से. हृषिकेश  मुखर्जी निर्देशित इस फिल्म में दो सुपर स्टार मौजूद
हैं। हृषिकेश मुखर्जी क हिसाब से इसे अलग हट के बनी फिल्म कहा जा सकता है.
वो  हलकी फुलकी फिल्मों के लिए ज्यादा पहचाने गए हैं. ये थोड़ी गंभीर किस्म की
फिल्म है . फिल्म के बाकी गेटों के लिहाज़ से प्रस्तुत गीत भी थोडा अलग है.
पुरानी अनेक फिल्मों में आपको मुजरा ज़रूर मिलेगा मानो बिना उसके फिल्म
बनाना असंभव हो. ऐसा ही कुछ मुझे इस फिल्म को देख के महसूस हुआ.

बहरहाल जो भी हो गीत सुनिए जो एक महिला युगल गीत है आशा भोंसले और
उषा मंगेशकर का गाया हुआ. आशा कि आवाज़ पर जयश्री टी होंठ हिला रही हैं
दूसरी अभिनेत्री को मैं पहचान नहीं पा रहा हूँ.








गीत के बोल:

सूनी, सूनी रे सजरिया साजन बिन तेरे
सूनी रे सजरिया साजन बिन तेरे
सूनी रे सजरिया साजन बिन तेरे

हो भई मैं बाँवरिया हाय राम
भई मैं बाँवरिया साजन बिन तेरे

सूनी रे सजरिया साजन बिन तेरे
सूनी रे सजरिया साजन बिन तेरे


रिमझिम काहे को बरसे रे बदरा
बह गया धुल के नैनों से कजरा

रिमझिम काहे को
रिमझिम हाँ
रिमझिम काहे को बरसे रे बदरा
बह गया धुल के नैनों से कजरा

अबके बरस सावन से पूछो
छाई क्यूँ बदरिया हाय राम

छाई क्यूँ बदरिया साजन बिन तेरे

सूनी रे सजरिया साजन बिन तेरे
सूनी रे सजरिया साजन बिन ते

लोग न जाने ऐसे जीते हैं कैसे
लोग न जाने ऐसे जीते हैं कैसे
तुमसे बिछड के हम तो मर गए जैसे
लोग न जाने ऐसे
लोग न हाँ हाँ हाँ
लोग न हाँ हाँ हाँ
लोग न जाने ऐसे जीते हैं कैसे
तुमसे बिछड के हम तो मर गए जैसे
ऐसे निगोडी बिरहा की रैना 
बीते न सांवरिया हाय राम
बीते न सांवरिया साजन बिन तेरे

सूनी रे सजरिया साजन बिन तेरे
सूनी रे सजरिया साजन बिन तेरे
सूनी रे सजरिया साजन बिन तेरे

_____________________________
Sooni re sajariya-Namak Haram 1973
 

Monday, 18 July 2011

मैं भोला भाला हूँ-भोला भाला १९७८

फिल्म भोला भाला में राजेश खन्ना दोहरी भूमिका में हैं.
एक तो है भोला भाला युवक जो बीमा का एजेंट है. दूसरा
है डाकू.साईकिल पर हिंदी फिल्मों का नायक कम चला करता
है. नायक ने साईकिल भी चलायी लेकिन फिल्म नहीं चली.
कहानी में दम होना बहुत ज़रूरी है. ये पहली शर्त होती है
फिल्म के चलने में. गीत अच्छे हैं मगर वो भी फिल्म की
मदद नहीं कर पाए बॉक्स ऑफिस पर.

ये फिल्म का शीर्षक गीत है, आनंद बक्षी का लिखा और किशोर
का गाया हुआ. इसके संगीतकार हैं राहुल देव बर्मन.



गीत के बोल:

मैं भोला भाला हूँ
भोले दिल वाला हूँ

अरे मैं भोला भाला हूँ
भोले दिल वाला हूँ

दुनिया मुझको क्या जाने
दुनिया से निराला हूँ

मैं भोला भाला हूँ

मैं कहा राम राम
सब ठीक ठाक है ना

देस विदेस की बातें मैं क्या समझूं मैं क्या जानूं
..................................
Main bhola bhala hoon-Bhola bhala 1978

Sunday, 17 July 2011

ये शाम मस्तानी-कटी पतंग १९७०

इस गीत के बारे में कुछ भी लिखना व्यर्थ है. इतनी बार इसे सुन लिया
गया है और इतनी दफे इसका जगह जगह उल्लेख हुआ है कि अब ज्यादा
लिखने कि गुंजाईश नहीं बची है सिवाए इसके गीतकार और संगीतकार के
नाम के. आनंद बक्षी ने लिखा और आर. डी. बर्मन ने इसका संगीत
तैयार किया है. फिल्म का नाम आपको मालूम ही है-गुलशन नंदा के
उपन्यास पर आधारित फिल्म कटी पतंग.



गीत के बोल:

ये शाम मस्तानी,
मदहोश किए जाए,
मुझे डोर कोई खींचे,
तेरी ओर लिए जाए

दूर रहती है तू,
मेरे पास आती नहीं,
होठों पे तेरे
कभी प्यास आती नहीं,
ऐसा लगे जैसे कि तू,
हँस के जहर कोई पिए जाये

ये शाम मस्तानी,
मदहोश किए जाए,
मुझे डोर कोई खींचे,
तेरी ओर लिए जाए

बात जब मैं करूँ,
मुझे रोक देती है क्यों,
तेरी मीठी नजर
मुझे टोक देती है क्यों
तेरी हया, तेरी शरम,
तेरी कसम मेरे होंठ सिये जाए

ये शाम मस्तानी,
मदहोश किए जाए,
मुझे डोर कोई खींचे,
तेरी ओर लिए जाए

एक रूठी हुई
तकदीर जैसे कोई,
खामोश ऐसे है तू
तसवीर जैसे कोई
तेरी नजर बन के जुबां,
लेकिन तेरे पैगाम दिए जाए

ये शाम मस्तानी,
मदहोश किए जाए,
मुझे डोर कोई खींचे,
तेरी ओर लिए जाए
.................................
Ye shaam mastani-Kati Patang 1970

Wednesday, 13 July 2011

काहे को बुलाया मुझे बालमा-हमशक्ल १९७४

जैसे मोगली सीरियल के शीर्षक गीत "चड्डी पहन के फूल खिला है"
पसंद आने की कोई विशेष वजह नहीं है वैसे ही प्रस्तुत गीत के पसंद
आने के पीछे भी कोई ख़ास कारण नहीं है। इसको सुनते सुनते कान
पक गये हैं। आकर्षक धुन एकमात्र जायज़ वजह हो सकती है इस गीत
को इतनी बार सुन लिया है कि याद नहीं। इसकी शुरूआती "हाय हाय"
और "जा तोसे बोलूं ना, घूँघट खोलूं ना" बोल दिमाग में बैठ से गये हैं।

ये आकर्षक युगल गीत है राजेश खन्ना के डबल डोज़ वाली अर्थात डबल रोल
वाली फिल्म हमशकल से। इसका एक गीत आपको सुनवा चुके हैं पहले
जिसमें मौसमी चटर्जी थीं राजेश खन्ना के साथ और 'झूम ना झूम ना'
कर रही थीं।



गीत के बोल:

हाय हाय
काहे को बुलाया
काहे को बुलाया मुझे बालमा प्यार में नाम से
प्यार के नाम से
काहे को बुलाया मुझे बालमा प्यार में नाम से
प्यार के नाम से

राधा ने यही पूछा था एक दिन रूठ कर श्याम से
रूठ कर श्याम से

जा तोसे बोलूँ ना घूँघटा खोलूँ ना डोलूँ ना मैं संग तेरे
जा तोसे बोलूँ ना घूँघटा खोलूँ ना डोलूँ ना मैं संग तेरे
रोज़ जो तुम रूठोगी ऐसे गुज़रेंगे दिन मेरे कैसे
जीने नहीं देगा मुझे चार दिन प्यार आराम से
प्यार आराम से

काहे को बुलाया मुझे बालमा प्यार में नाम से
प्यार के नाम से

काली घटाओं में, ठंडी हवाओं में, आओ कहें हाल दिल का
काली घटाओं में, ठंडी हवाओं में, आओ कहें हाल दिल का
ओ, प्यार में दिन तो ढल जाता है, रात का जादू चल जाता है
जिया लगता है धड़कने पिया, आजकल शाम से
आजकल शाम से

राधा ने यही पूछा था एक दिन रूठ कर श्याम से
रूठ कर श्याम से

तौबा मैं क्या करूँ
तौबा मैं क्या करूँ बदनामी से डरूँ
मोहे बड़ी लाज आए
हमने कोई की है चोरी, प्यार किया है हमने गोरी
लोगों से जो हम ऐसे डरने लगे तो गए काम से
तो गए काम से

काहे को बुलाया मुझे बालमा प्यार में नाम से
प्यार के नाम से

राधा ने यही पूछा था एक दिन रूठ कर श्याम से
रूठ कर श्याम से
...................................
Kaahe ko bulaya-Humshakal 1974

Monday, 11 July 2011

वो शाम कुछ अजीब थी-ख़ामोशी १९६९

फिर आज डूब जाने को मन करता है तुम्हारी गहरी आवाज़ के समुन्दर में.
किसी किशोर कुमार के भक्त ने ये उदगार प्रकट किये थे इस गीत के लिए
बरसों पहले. मैं भी कुछ सहमत हूँ उस भक्त की भावना से. इस गीत में
अतिरिक्त आयाम है जो इसे सामान्य गीतों की श्रेणी से अलग करके विशिष्ट
की श्रेणी में रखता है. हेमंत कुमार ने जितने मन लगा के खुद के गाये और
लता मंगेशकर वाले गीत बनाये हैं उसी तबियत से इस गीत को भी बनाया
है. किशोर कुमार के सर्वश्रेठ गीतों में से एक आज सुनते हैं फिल्म ख़ामोशी
से. सन १९६९ की फिल्म ख़ामोशी का हर एक गीत नायब रत्न है. बोल लिखे
हैं गुलज़ार ने . गीत का फिल्मांकन एक नाव में हुआ है. इसका फिल्मांकन
बढ़िया है और गीत एक संक्षिप्त कथा के माफिक लगता है.

नायक राजेश खन्ना इस फिल्म में एक मनोरोगी की हैं और वहीदा रहमान एक
मनोचिकित्सक की भूमिका में हैं . पिछले रोगी (धर्मेन्द्र) का इलाज करते करते
वह उससे प्रेम करने लगती है. नायिका का मानसिक द्वन्द इस गीत में बखूबी
दर्शाया गया है. मन को बांटना वाकई मुश्किल काम है.

विरोधाभास का भाव भी है इस गीत में. नायक खुशनुमा ख्याल में है और
नायिका उसके काँधे पर सर रख कर रो रही है. इस गीत की एडिटिंग ज़बरदस्त
है और उस एडिटिंग वाले कलाकार को नमन.

अंत में गीत मरहम का सा काम करता है नायिका के लिए और वो मरीज को
अपना प्रेमी समझ कर उससे लिपट जाती है.




गीत के बोल:

वो शाम कुछ अजीब थी, ये शाम भी अजीब है
वो कल भी पास-पास थी, वो आज भी करीब है

वो शाम कुछ अजीब थी, ये शाम भी अजीब है
वो कल भी पास-पास थी, वो आज भी करीब है

झुकी हुई निगाह में, कहीं मेरा ख़याल था
दबी दबी हँसीं में इक, हसीन सा सवाल था
मैं सोचता था, मेरा नाम गुनगुना रही है वो
मैं सोचता था, मेरा नाम गुनगुना रही है वो
न जाने क्यूँ लगा मुझे, के मुस्कुरा रही है वो

वो शाम कुछ अजीब थी

मेरा ख़याल हैं अभी, झुकी हुई निगाह में
खिली हुई हँसी भी है, दबी हुई सी चाह में
मैं जानता हूँ, मेरा नाम गुनगुना रही है वो
मैं जानता हूँ, मेरा नाम गुनगुना रही है वो
यही ख़याल है मुझे, के साथ आ रही है वो

वो शाम कुछ अजीब थी, ये शाम भी अजीब है
वो कल भी पास पास थी, वो आज भी करीब है
......................................
Wo shaam kuchh ajeeb thi-Khamoshi 1969

Saturday, 18 June 2011

ये मेरा जीवन तेरे लिए -बाबू १९८५

आप फिल्म बाबू(१९८५) के दो गीत पहले सुन चुके हैं,
अब सुनिए किशोर का गाया फिल्म का एक और गीत।
फिल्म में राजेश खन्ना का नाम बाबू हो। वो अपना सारा
जीवन एक परिवार के लिए समर्पित कर देता है। उस
परिवार की बच्ची के साथ नायक गीत गा रहा है। फिल्म
का ये गीत भी काफी लोकप्रिय है। बोल एक बार फिर से
मजरूह के हैं और संगीत राजेश रोशन का।




गीत के बोल:


ये मेरा जीवन तेरे लिए है
ये मेरा जीवन तेरे लिए है
जीवन का सपना तेरे लिए है
माँग ले हँस के क्या चाहिए तुझे
माँग ले हँस के क्या चाहिए तुझे
मेरी तो दुनिया तेरे लिए है

ये मेरा जीवन

hurrr ha ha

डाली पे बैठी छोटी सी चिड़िया
काँधे पे मेरे नन्हीं सी गुड़िया
डाली पे बैठी छोटी सी चिड़िया
काँधे पे मेरे नन्हीं सी गुड़िया
चिड़िया से भी सुन्दर मेरी गुड़िया
चिड़िया से भी सुन्दर मेरी गुड़िया

ये मेरा जीवन तेरे लिए है
जीवन का सपना तेरे लिए है
माँग ले हँस के क्या चाहिए तुझे
मेरी तो दुनिया तेरे लिए है

ये मेरा जीवन

देखा था सपना जो ज़िन्दगी का
ये भी तो वैसा ही दिन है ख़ुशी का
देखा था सपना जो ज़िन्दगी का
ये भी तो वैसा ही दिन है ख़ुशी का
जीने का ढंग तुझसे मैने सीखा
जीने का ढंग तुझसे मैने सीखा

ये मेरा जीवन तेरे लिए है
जीवन का सपना तेरे लिए है
माँग ले हँस के क्या चाहिए तुझे
मेरी तो दुनिया तेरे लिए है

ये मेरा जीवन

मानो बदल जाए दोनों की मंज़िल
फिर भी रहेगा साथ मेरा दिल
मानो बदल जाए दोनों की मंज़िल
फिर भी रहेगा साथ मेरा दिल
चाहेंगे तो मिलना नहीं मुश्क़िल
चाहेंगे तो मिलना नहीं मुश्क़िल
ये मेरा जीवन तेरे लिए है
जीवन का सपना तेरे लिए है
माँग ले हँस के क्या चाहिए तुझे
मेरी तो दुनिया तेरे लिए है

ये मेरा जीवन
........................
Ye mera jeewan-Babu 1985

Wednesday, 8 June 2011

ज़ुबाँ पे दर्द भरी दास्ताँ चली आई-मर्यादा १९७१

चली आई, कौन ? वही भूली दास्तान ख्यालों में फिर से। फिर वो
भूली सी याद आई है, आई ज़रूर है मगर मुकेश के गीत की शक्ल
में।

आज मुकेश का एक अमर गीत सुना-वक़्त करता जो वफ़ा तो दिल
भारी सा हो आया और इसी गफलत और सिलसिले में एक और दर्द
भरा गीत याद आया ।

आइये सुनें राजेश खन्ना के ऊपर फिल्माया गया मुकेश का गाया
खूबसूरत गीत जो फिल्म मर्यादा(१९७१) से लिया गया है। मुकेश
के इस लोकप्रिय गीत के बोल लिखे हैं आनंद बक्षी ने और धुन
बनाई है कल्याणजी आनंदजी ने।



गीत के बोल:

ज़ुबाँ पे दर्द भरी दास्ताँ चली आई
ज़ुबाँ पे दर्द भरी दास्ताँ चली आई
बहार आने से पहले खिजां चली आई
ज़ुबाँ पे दर्द भरी दास्ताँ चली आई

ख़ुशी की चाह में मैं ने उठाये रंज बड़े
ख़ुशी की चाह में मैं ने उठाये रंज बड़े
मेरा नसीब की मेरे क़दम जहाँ भी पड़े
ये बदनसीबी मेरी भी वहाँ चली आई

ज़ुबाँ पे दर्द भरी दास्ताँ चली आई

उदास रात है वीरान दिल की महफ़िल है
उदास रात है वीरान दिल की महफ़िल है
न हमसफ़र है कोई और न कोई मंज़िल है
ये ज़िंदगी मुझे लेकर कहाँ चली आई

ज़ुबाँ पे दर्द भरी दास्ताँ चली आई
बहार आने से पहले खिजान चली आई
ज़ुबाँ पे दर्द भरी दास्ताँ चली आई
...............................
Zuban pe dard bhari dastaan-Maryada 1971

Wednesday, 18 May 2011

तू मेरा क्या लागे-ऊंचे लोग १९८५

फिल्मकारों की पसंद का भी जवाब नहीं। कई ऐसी ऐसी जोड़ियाँ देखने
को मिलेंगी आपको फिल्मों में कि, दर्शक तक सोचने में विवश हो जाता
है; कम से कम मुझसे ही पूछ लिया होता फिल्म की कास्टिंग कैसे की
जाये। इस मामले में हम थोड़ा डिस्काउंट कर देते हैं क्यूंकि फिल्म का
निर्देशन किया है ब्रज सढाना ने, वही 'विक्टोरिया नंबर २०३' वाले। ब्रज
सढाना ने फिल्म के संगीत पक्ष पर हमेशा ध्यान दिया और उनकी
फ़िल्में चली हो या ना चली हों, गीत ज़रूर दर्शकों को और श्रोताओं को
याद हैं। आपको विश्वजीत और शर्मिला टैगोर अभिनीत फिल्म-
'ये रात फिर ना आएगी' ज़रूर ही याद होगी जिसके सारे गीत लोकप्रिय हैं।

प्रस्तुत गीत में राजेश खन्ना कुछ कुछ वन अधिकारी/कर्मी के जैसे कपडे
पहने हुए हैं और ऐसा लगता है मानो पास के पेड़ों में से सबसे हरा पेड़
निकल कर उनके साथ नाचने लग पड़ा हो। गाना जब तक किशोर कुमार
की आवाज़ निकालता है तब तक उसे ध्यान से सुना जा सकता है। जैसे ही
महिला स्वर उभरता है, आप अपना ध्यान दूसरी ओर लगा सकते हैं।
गीत लिखा है अनजान ने और धुन बनाई है आर डी बर्मन ने।



गीत के बोल:

झिन झिन, झिन झिन झिन झिन तारा
झिन झिन, झिन झिन झिन झिन तारा

झिन झिन, झिन झिन झिन झिन तारा
झिन झिन, झिन झिन झिन झिन तारा

तू मेरा क्या लागे ओ साथिया
तारा झिन झिन, झिन झिन झिन झिन तारा
तारा झिन झिन, झिन झिन झिन झिन तारा
तू मेरा क्या लागे ओ साथिया
लागे ना लागे रे तेरे बिन कहीं जिया
तू मेरा क्या लागे ओ साथिया
लागे ना लागे रे तेरे बिन कहीं जिया

मर जाते राहों में
हम तेरी बाहों में
आ के जी गये
जुल्फों के साये में
हम दिल के सारे गम
हंस के पी गये
मर जाते राहों में
हम तेरी बाहों में
आ के जी गये
जुल्फों के साये में
हम दिल के सारे गम
हंस के पी गये

तूने ही फिर जीना सिखला दिया
तारा झिन झिन, झिन झिन झिन झिन तारा
लागे ना लागे रे तेरे बिन कहीं जिया

दिन बीते बातों में
बातों की यादों में
झूमे दिल जहाँ
रातों की नींदों में
नीदों के ख्वाबों में
तू ही तू यहाँ
दिन बीते बातों में
बातों की यादों में
झूमे दिल जहाँ
रातों की नींदों में
नीदों के ख्वाबों में
तू ही तू यहाँ


बिन पूछे बिन मांगे दिल ले लिया
तारा झिन झिन, झिन झिन झिन झिन तारा
लागे ना लागे रे तेरे बिन कहीं जिया


तू मेरा क्या लागे ओ साथिया
तू मेरा क्या लागे ओ साथिया
लागे ना लागे रे तेरे बिन कहीं जिया
झिन झिन, झिन झिन झिन झिन तारा
झिन झिन, झिन झिन झिन झिन तारा
..........................................
Too mera kya laage-Oonche log 1985

Friday, 21 January 2011

मैंने तुमको पिया कह दिया-नौकरी १९७८

हम चाहे कुछ भी कहें या फ़िल्मी पत्रकार चाहे जो समीक्षा करें,
राजेश खन्ना के ऊपर फिल्माए गए गीत कुछ अतिरिक्त जीवन्तता
वाले होते हैं। पिछले सुमधुर गीत के बाद आपको सुनवाते हैं
लता मंगेशकर का गाया एक अनजान सी फिल्म नौकरी से एक
गीत । ये गीत भी आनंद बक्षी की कलम की देन है मगर इसमें
संगीतकार छोटे बर्मन साहब हैं। पिछले गीत में राजेश खन्ना सफ़ेद
कुरता पहने हुए थे इस गीत में हल्का आसमानी रंग का है।

नायिका भी बदल गई हैं इस गीत में-अब आप देखेंगे जाहिरा को ।
जाहिरा अच्छे नाक नक्श होने के बावजूद ज्यादा फिल्मों में नहीं
नज़र आयीं। इस गीत को मैं एक क्यूट सोंग कहता हूँ, और आप ?



गीत के बोल:

मैंने तुमको पिया कह दिया
मैंने तुमको पिया कह दिया
अब कहने को क्या रह गया ?
अब कहने को क्या रह गया ?

सुनो तुमको पिया कह दिया
पिया तुमको पिया कह दिया

कहो क्या एक मुलाकात में
रहा क्या अब मेरे हाथ में
कहो क्या एक मुलाकात में
रहा क्या अब मेरे हाथ में

सारी बातें हैं इस बात में
पिया तुमको पिया कह दिया

मैंने तुमको पिया कह दिया
मैंने तुमको पिया कह दिया

कहने सुनने में ही सब है क्या
इन सवालों का मतलब है क्या
कहने सुनने में ही सब है क्या
इन सवालों का मतलब है क्या

पूछता है जहाँ अब ये क्या
प्यार हमने किया कह दिया

मैंने तुमको पिया कह दिया
अब कहने को क्या रह गया ?
अब कहने को क्या रह गया ?

पिया तुमको पिया कह दिया
मैंने तुमको पिया कह दिया

हिंदी फिल्म में बरसात-हम तुम तुम हम हम तुम -त्याग १९७७

आपको सुनवाते हैं एक बर्मन ब्रांड का लता-किशोर युगल गीत।
ये भी एक बरसाती गीत है मगर बरसात दूसरे अंतरे में होगी।
इस गीत की सबसे बड़ी विशेषता बता दूं-कलाकारों की कुछ ख़ास
खूबियाँ अपने चरम पर हैं-जैसे शर्मिला के गालों के गड्ढे कुछ
ज्यादा स्पष्ट और बड़े नज़र आ रहे हैं। उनकी एक और ख़ास बात
ये है कि अभिनय करते वक़्त उनके होंठ काफी कंपकंपाते हैं
विशेषकर रोने धोने वाले दृश्यों में। इस गीत में वे काफी गदगद
हैं फिर भी होंठ कंपकंपा रहे हैं।

राजेश खन्ना जो गर्दन हिला हिला कर अभिनय किया करते थे
उनकी गर्दन भी कुछ ज्यादा ही घूम रही है इस गीत में। मानना
पड़ेगा गीत के फिल्मांकन करनेवाले के दिमाग को, जिसने दोनों
के USP का बखूबी प्रयोग किया है।

गीत आनंद बक्षी का लिखा हुआ है और इसके संगीतकार हैं
एस डी बर्मन जिनकी ये आखिरी प्रदर्शित फिल्म है । काफी
कर्णप्रिय गीत है ये ।



गीत के बोल:

हम तुम तुम हम हम तुम
एक नदी के हैं दो किनारे
हम तुम तुम हम हम तुम
कैसे मिलेंगे प्रीतम हो प्यारे

हम तुम तुम हम हम तुम
ऐसे मिलेंगे कि देखेंगे सारे

हम तुम तुम हम हम तुम

दूर क्या है पास क्या है
सुन ओ जीवन साथी
आर पार बहती धार
हमको है मिलाती
दूर क्या है पास क्या है
सुन ओ जीवन साथी
आर पार बहती धार
हमको है मिलाती

जीवन है जबसे ना जाने कब से
जीवन है जबसे ना जाने कब से
हम हैं तुम्हारे तुम हो हमारे

हम तुम तुम हम हम तुम
ऐसे मिलेंगे कि देखेंगे सारे

हम तुम तुम हम हम तुम

मान लेते हैं के चलो
तुमने ये कहा है
दिल मगर हमारा जाने
क्यूँ धड़क रहा है
मान लेते हैं के चलो
तुमने ये कहा है
दिल मगर हमारा जाने
क्यूँ धड़क रहा है

भीगे नज़ारे जैसे ये सारे
भीगे नज़ारे जैसे ये सारे
भीग ना जाएँ यूँ नैना हमारे

हम तुम तुम हम हम तुम
ऐसे मिलेंगे कि देखेंगे सारे

हम तुम तुम हम हम तुम

Thursday, 20 January 2011

झूम झूम आहा ...कल की फिकर-भोला भाला १९७८

चुम्बकीय प्रभाव के बिना मानव शरीर बेकार है। ये सिद्धांत लगभग
जीवन के हर क्षेत्र में महसूस कर सकते हैं आप। कितनी अभिनेत्रियाँ
आयीं और गयीं लेकिन सफलता और प्रसिद्धि कुछ के खाते में ही लिखी
थी।

भानुरेखा गणेशन उन भाग्यशाली अभिनेत्रियों में से एक हैं जिन्हें दर्शकों
ने पहली फिल्म सावन भादो से ही सर आँखों पर बिठाया। रेखा की ख़ास
बात ये है कि उनके सामान्य से लगने वाले गीत भी आकर्षक लगने लगते
हैं। ये उस चुम्बकीय प्रभाव कि वजह से है जो उन्हें ईश्वरीय देन है। गौर तलब
है हम केवल इस प्रभाव की बात कर रहे हैं। अभिनय के मामले में रेखा में
बहुत आगे चल के सुधर आया जब वे बॉलीवुड के सबसे प्रसिद्ध महानायक
के साथ फिल्मों में दिखाई देना शुरू हुयीं।

आनंद बक्षी के लिखे दार्शनिक से गीत की धुन बनाई है राहुल देव बर्मन ने।




गीत के बोल:

झूम झूम आ हा, झूम झूम आ हा
झूम झूम आ हा, झूम झूम आ हा
झूम झूम आ हा, झूम झूम आ हा
झूम झूम आ हा, झूम झूम आ हा
झूम झूम आ हा आ हा आ हा आ हा
आ हा
कल की फिकर करेगा जो वो दीवाना होगा
कल की फिकर करेगा जो वो दीवाना होगा
ज़िन्दगी है आज का दिन कल मर जाना होगा
कल की फिकर करेगा जो वो दीवाना होगा
ज़िन्दगी है आज का दिन कल मर जाना होगा

जीने का शौक है तो ज़िन्दगी को लूट लो
जीने का शौक है तो ज़िन्दगी को लूट लो
पीने का शौक है सागर किसी का छीन लो
इस जवानी की तरह एक कहानी की तरह
इस जवानी की तरह एक कहानी की तरह
झूम झूम आ हा, झूम झूम आ हा

कल ये सागर होगा ना ये पैमाना होगा
ज़िन्दगी है आज का दिन कल मर जाना होगा
ज़िन्दगी है आज का दिन कल मर जाना होगा

मिल जाता यार तो ये प्यार हम ना लूटते
मिल जाता यार तो ये प्यार हम ना लूटते
हम दिल ना तोड़ते जो दिल ना टूटते
के करें हम क्या करें
क्या जियें हम क्या मारें
के करें हम क्या करें
क्या जियें हम क्या मारें

झूम झूम आ हा, झूम झूम आ हा

ये खिलौने तोड़ के दिल बहलाना होगा
ये खिलौने तोड़ के दिल बहलाना होगा
ज़िन्दगी है आज का दिन कल मर जाना होगा
ज़िन्दगी है आज का दिन कल मर जाना होगा

कल की फिकर करेगा जो वो दीवाना होगा
ज़िन्दगी है आज का दिन कल मर जाना होगा
ज़िन्दगी है आज का दिन कल मर जाना होगा
..........................................
Kal ki fikar karega-Bhola bhala 1978

Monday, 3 January 2011

और कुछ देर ठहर-आखरी ख़त १९६६

राजेश खन्ना के खाते में शायद सबसे ज्यादा रोमांटिक गीत आये हैं।
वैसे तो सभी नायकों के हिस्से में आये होंगे मगर जिन गीतों को सबसे
ज्यादा सुना जाता है उनकी बात हो रही है। शुरूआती दौर में उनके खाते में
रफ़ी के गाये काफी गीत आये, उनमें से जो उल्लेखनीय गीत है वो हम
पहले सुनेंगे इस ब्लॉग पर। ये गीत कैफ़ी आज़मी का लिखा और ख़य्याम
द्वारा संगीतबद्ध गीत है सन १९६६ की फिल्म आखरी ख़त से।



गीत के बोल:

और कुछ देर ठहर और कुछ देर न जा
और कुछ देर ठहर और कुछ देर न जा
और कुछ देर ठहर

रात बाक़ी है अभी रात में रस बाक़ी है
पा के तुझको तुझे पाने की हवस बाक़ी है
और कुछ देर ठहर और कुछ देर न जा
और कुछ देर ठहर और कुछ देर न जा
और कुछ देर ठहर

जिस्म का रंग फ़ज़ा में जो बिखर जायेगा
मेहरबान हुस्न तेरा और निखर जायेगा
लाख ज़ालिम है ज़माना मगर इतना भी नहीं
तू जो बाहों में रहे वक़्त ठहर जायेगा
और कुछ देर ठहर और कुछ देर न जा
और कुछ देर ठहर और कुछ देर न जा
और कुछ देर ठहर

ज़िंदगी अब इन्हीं क़दमों पे लुटा दूँ तो सही
ज़िंदगी अब इन्हीं क़दमों पे लुटा दूँ तो सही
ऐ हसीन बुत मैं ख़ुदा तुझको बना दूँ तो सही
और कुछ देर ठहर और कुछ देर न जा
और कुछ देर ठहर और कुछ देर न जा
और कुछ देर ठहर
....................................
Aur kuchh der thehar-Akhiri khat 1966

Monday, 13 December 2010

रात ने रंग जमाये हैं-चलता पुर्जा १९७७

फिल्म चलता पुर्जा का एक गीत - गए हम दिलदार आपको
सुनवाया जा चुका है। अब आप सुनिए फिल्म से एक कैबरे गीत
या जो नाम आप देना चाहें इस नृत्य को। खरगोश की पूँछ को
सर पे लगा के थोडा अचंभित सी करने वाली पोषक में कौन
कलाकार नाच रही हैं नाम मालूम नहीं। बस हम राजेश खन्ना
और असरानी को पहचान पा रहे हैं। अरे एक और पहचान लिया
ये हैं हिंदी फिल्मों के नामचीन खलनायक-रणजीत। गीत के
बोल कुछ कम भी हो सकते हैं। शायद देखने वाले ने भी नृत्य
करते हुए इसकी एडिटिंग की है, बीच बीच में कुछ बोल गायब
हो जा रहे हैं।



गाने के बोल:

रात ने रंग जमाया है
नया खिलाडी आया है
पहला दांव लगाया है
मेरा दिल घबराया है

रात ने रंग जमाया है
नया खिलाडी आया है
पहला दांव लगाया है
मेरा दिल घबराया है

देखने आज के खेल में
किस्से कौन
किस्से कौन टकराता है
हा, दाव कौन लगता है
हूँ,बेगम, गुलाम बादशाह कौन बनाता है
तुम तुम तुम, ऐ हे हे
घबराता है

सुनो कहो क्या हाल है
सोच रहे हो कमाल है
कहाँ तुम्हारा ख्याल है
सुनो कहो क्या हाल है
सोच रहे हो कमाल है

सबको पत्ता आता है

बेगम, गुलाम बादशाह कौन बनाता है
तेरी बात नहीं यार
तू काहे घबराता है

सारा उसका काम है
किस्मत जिसका नाम है
किसी पे क्या इलज़ाम है
ये खेल यूँही बदनाम है
सारा उसका काम है
किस्मत जिसका नाम है

कोई जीत जाता है
कोई हार जाता है
हा, हिसाब कौन लगता है
हं, बेगम गुलाम बादशाह
तुम तुम तुम
तेरी बात नहीं है यार
तू काहे घबराता है
तू काहे घबराता है
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Raat ne rang jamaya hai-Chalta Purza 1977

Sunday, 21 November 2010

सासू तीरथ ससुरा तीरथ-सौतन १९८३

आपने तरह तरह के तीर्थ स्थलों के बारे में सुना होगा और गए भी
होंगे शायद कुछ जगहों पर। हिंदी फिल्मों में कुछ अलग तीरथ भी
मिला। राजेश खन्ना और टीना मुनीम पर फिल्माया गया रोचक
और मनोरंजक गीत देखिये सावन कुमार टाक की फिल्म सौतन से।
वैसे भी राजेश खन्ना पर फिल्माए गए अधिकतर गीत जीवंत लगते हैं।
ये एक हिट फिल्म है और शायद राजेश खन्ना की सबसे सफल
फिल्मों में से एक। सावन कुमार टाक ने बहुतेरे फ़िल्मी गीत लिखे हैं।
उनके कई गीत सुन कर लगता है जैसे वे कोई पेशेवर फ़िल्मी गीतकार हों।
तुकबंदी के मामले में वे कहीं कहीं आनंद बक्षी से होड़ करते नज़र आते हैं।




गीत के बोल:

अरे सासू तीरथ, अरे ससुरा तीरथ
सासू तीरथ, ससुरा तीरथ
तीरथ साला साली है
अरे दुनिया के सब तीरथ झूठे
चारों धाम घरवाली है
अरे चारों धाम घरवाली है

सासू तीरथ, ससुरा तीरथ
तीरथ साला साली है
अरे दुनिया के सब तीरथ झूठे
चारों धाम घरवाली है
अरे चारों धाम घरवाली है

बीबी जब रूठे तो याद आती है साली
बीबी जब रूठे तो याद आती है साली
साली जीजा को प्यारी है, वो गोरी हो या काली
लेकिन अपनी किस्मत में तो साला है ना साली है
अरे चारों धाम घरवाली है
चारों धाम घरवाली है

अरे सासू तीरथ, अरे ससुरा तीरथ
तीरथ साला साली है
अरे दुनिया के सब तीरथ झूठे
चारों धाम घरवाली है
अरे चारों धाम घरवाली है

बीबी तो अच्छी वो होती जो नखरे वाली
बीबी तो अच्छी वो होती जो नखरे वाली
दूजों से प्यारी लगती है देती है जब जब गाली
त्वाडी तो सानू पता नहीं
त्वाडी तो सानू पता नहीं
पर साडी ते मखणा वाली है
अरे चारों धाम घरवाली है
चारों धाम घरवाली है

अरे सासू तीरथ, अरे ससुरा तीरथ
तीरथ साला साली है
ae दुनिया के सब तीरथ झूठे
चारों धाम घरवाली है
अरे चारों धाम घरवाली है

बोलो घरवाली की जय
बोलो मखणा वाली की जय
बोलो अपनी भी,.......नहीं नहीं नहीं
घरवाली की......जय

Saturday, 20 November 2010

कहीं दूर जब दिन ढल जाए-आनंद १९७०

हम जनता को उनकी पसंद से भी पहचानते हैं। किसी व्यक्ति
के मूड का अंदाजा कैसे लगाया जा सकता है इसका एक उदाहरण
देता हूँ।

एक सज्जन को मुकेश के गीत पसंद हैं। फिल्म आनंद का ये मशहूर
गीत -"कहीं दूर जब दिन ढल जाए" इन महाशय ने अपनी कालर ट्यून
बना रखा था। जब भी उनको मोबाइल पर रिंग मारो ये गीत सुनाई देता
था। इससे मूड फ्रेश हो जाया करता। ये सिलसिला बहुत दिन तक चला ।
साल भर बाद उनकी कालर ट्यून बदल गई। हिमेश रेशमिया का कोई गीत
उन्होंने कालर ट्यून बना के लगा डाला। उसी के साथ उनके व्यवहार में
बदलाव भी दिखा। उनकी आँखों में अब अक्सर सूअर का बाल दिखाई देता।
इस फेनोमिना की क्या वजह हो सकती है मेरी समझ के बाहर है।

खैर, ये गीत सुनिए आज, जो एक सदाबहार गीत है और फिल्म जगत के
काका अर्थात राजेश खन्ना इसको परदे पर गा रहे हैं। योगेश के लिखे गीत
के लिए धुन बनाई है सलिल चौधरी ने।



गीत के बोल:

कहीं दूर जब दिन ढल जाए
सांझ की दुल्हन बदन चुराए
चुपके से आये

मेरे ख्यालों के आंगन में
कोई सपनों के दीप जलाये
दीप जलाये

कहीं दूर जब दिन ढल जाए
सांझ की दुल्हन बदन चुराए
चुपके से आये

कभी यूँ ही जब हुयीं बोझल साँसें
भर आई बैठे बैठे जब यूँ ही ऑंखें
कभी यूँ ही जब हुयीं बोझल साँसें
भर आई बैठे बैठे जब यूँ ही ऑंखें
कभी मचल के प्यार से चल के
छुए कोई मुझे पर नज़र ना आये
नज़र ना आये

कहीं दूर जब दिन ढल जाए
सांझ की दुल्हन बदन चुराए
चुपके से आये

कहीं तो ये दिल कभी मिल नहीं पाते
कहीं से निकाल आयें जन्मों के नाते
कहीं तो ये दिल कभी मिल नहीं पाते
कहीं से निकाल आयें जन्मों के नाते

है मीठी उलझान बैरी अपना मन
अपना ही हो के सहे दर्द पराये
दर्द पराये

कहीं दूर जब दिन ढल जाए
सांझ की दुल्हन बदन चुराए
चुपके से आये

दिल जाने मेरे सारे भेद ये गहरे
हो गए कैसे मेरे सपने सुनहरे
दिल जाने मेरे सारे भेद ये गहरे
हो गए कैसे मेरे सपने सुनहरे

ये मेरे सपने यही तो हैं अपने
मुझसे जुदा ना होंगे इनके ये साये
इनके ये साये
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Kahin door jab din dhal jaaye-Anand 1970
 
 
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