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Thursday, 14 June 2012

वो हसीं दर्द दे दो-हमसाया १९६८

आज एक मकान में सूखते कपड़ों के बीच एक साये(petticoat) को सूखते  
देख एक कहावत याद आई-गर्दिश में साया भी साथ छोड़ देता है। उस
कहावत के याद आते आते एक हमसाये की याद भी आई जो अचानक
से गायब हो गया था समय के थपेड़ों में। लोग क्यूँ गायब हो जाते हैं
इसका पुख्ता जवाब मिलना असंभव सा है।

खैर फिल्म हमसाया से एक बेहद लोकप्रिय गीत सुनते हैं आज जिसे
गाया है आशा भोंसले ने। इसे फिल्माया गया है माला सिन्हा और जॉय
मुखर्जी पर। माला सिन्हा पर फिल्माए लता के गाये हिट गीत आपने
बहुतेरे सुने होंगे, ये दुर्लभ सा है। क्यूँ ना हो, फिल्म में संगीत नैयर का
जो है। अब नैयर हैं तो लता के गीत आपको फिल्म में कैसे मिल सकते
हैं भाई ? गीत शेवान रिज़वी साहब ने लिखा है

गीत क्या है जनाब   आवाज़ और वाद्य यंत्रों की आवाजों का अद्भुत मिश्रण
है और किसी भी आवाज़ की अनुपस्थिति की कल्पना करना असंभव सा
है। गीत की ताल मनमोहक किस्म की है जो दिमाग की सीढियां तुरंत ही
चढ़ जाती है।




गीत के बोल:

वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ
वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ
वो निगाह मुझ पे डालो, कि मैं ज़िंदगी बना लूँ

वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ

मैं तुमसे मांगती हूँ, ज़रा अपना हाथ दे दो
मुझे आज ज़िंदगी की, वो सुहागरात दे दो
जिसे ले के कुछ मांगूं, और मांग में सजा लूँ

वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ
वो निगाह मुझ पे डालो, कि मैं ज़िंदगी बना लूँ

वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ

मेरी आरज़ू तो देखो, तुम्हें सामने बिठा कर
कभी दिल के पास लाकर, कभी दिलरुबा बना कर
कोई दास्तान सुन लूँ, कोई दास्तां सुना लूँ

वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ
वो निगाह मुझ पे डालो, कि मैं ज़िंदगी बना लूँ

वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ

मैंने प्यार के अलावा कभी तुमसे कुछ ना माँगा
तुम्हें जाने क्या समझ कर मैंने हर कदम पे चाहा
मेरा आज फैसला है तुम्हें हमसफ़र बना लूं

वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ
वो निगाह मुझ पे डालो, कि मैं ज़िंदगी बना लूँ

वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ
..........................................
Wo haseen dard de do-Humsaya 1968

Friday, 15 July 2011

आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे-ब्रह्मचारी १९६८

आपको एक सूचना प्रधान गीत सुनवाते हैं. इसके मुखड़े के बोल ही
ऐसे हैं की लगता है सूचना दी जा रही हो. अपने ज़माने में आम श्रोता
और बाद के ज़माने में ओर्केस्ट्रा के कलाकारों और श्रोताओं का पसंदीदा
ये गीत है फिल्म ब्रह्मचारी से. गीत लिखा है शैलेन्द्र ने और इसे गाया
है रफ़ी और सुमन कल्याणपुर ने. संगीत तो आप पहचान ही गए होंगे
नहीं? तो, आपको पोस्ट के अंत में बतायेंगे.

आपको इसका विवरण ऐसे सुनाते हैं जैसे किसी किरकिट के मैच की
कमेंट्री सुनाई जाती है. - साड़े पांच इंच की मुस्कान के साथ एक
गिटार भांजता युवक गीत में सर्वप्रथम दिखाई देता है. इसके बाद प्रश्न
सूचक अंदाज़ में नायक नायिका की ओर कदम बढ़ा कर उससे कुछ
करने की इच्छा जाहिर करता है इशारों में जिसे नायिका शायद अभी
समझ नहीं पायी है. और जैसे ही नायक उसका हाथ पकड़ कर एक
चक्कर उसको खिलाता है नायिका खुशी से दायें बाएं होती हुई हाथ
झटकते हुए नाचना शुरू कर देती है मानो किसी खिलौने को चाबी दे
दी गयी हो. उसके बाद नायक बड़ी टांगने की पेटी(हारमोनियम)जैसे
दिखने वाले किसी वाद्य को बजाना शुरू कर देता है. मजे की बात ये
है कि वो एक कोर्ड(chord)के सेट पर उँगलियाँ जमाए है और बाकी
का काम बाजा खुद कर रहा है. अब एक विलन से दिखने वाले नौजवान
को देखिये सफ़ेद शेरवानी पहने, इनका नाम प्राण है. नायक नायिका का
गर्दन हिलाने का कार्यक्रम भी जारी है. हमारे स्टेटीशीयन थोड़ी देर में
बतलायेंगे कितनी बार गर्दन हिल गयी और कितनी बार शरीर के बाकी
भाग.

और लीजिए इसी के साथ नायक ने गाना शुरू कर दिया है. और मैंने भी
गीत के बोल लिखना शुरू कर दिया है. नायिका "अच्छा, तो क्या" जुमले
बोलने के बाद जो नायक गा रहा है वही दोहराना शुरू कर देती है जैसे कोई
ट्यूशन लेता हुआ बच्चा मास्टरजी के पहाडा को याद करते वक्त करता है-
दो एकं दो, दो दूनी चार . इसके बाद नायक एक अंग्रेजी बाजा जिसको हम
सेक्सोफोन कहते हैं, बजाना शुरू कर देता है एक आल राउंडर की तरह.
ऐसे होनहार युवकों की खेल जगत में बहुत ज़रूरत है जो कि समय आने
पर किरकिट का बल्ला छोड़ होकी, फुटबाल वगैरह खेल सकें, ज़रूरत पढ़ने
पर नाव का चप्पू भी चला सकें.

नायक नायिका का परिचय करवा दिया जाए इसी बीच जब तक सेक्सोफोन की
आवाज़ सुनाई देती है. नायक है शम्मी कपूर और नायिका हैं मुमताज़. अगले
ब्रेक में आपको गायक गायिकाओं के बारे में बतलायेंगे. और लीजिए वही नृत्य
फिर से चालू है अंग्रेजी के ट्विस्ट नृत्य से प्रेरित और इसमें हाथ झटकने की
देसी मिलावट है. इसको करने के पहले बस इतना करना होता है ,हाथ पानी
से धो ले और उसे पोंछें नहीं. बस ट्विस्ट नृत्य करते करते हाथ झटकिये,
हाथ अपने आप सूख जायेंगे. शम्मी कपूर के सर हिलाने की ट्रेडमार्क अदा को
नायिका भी इस गीत में दोहरा रही हैं. इस अदा का फायदा ये है कि अगर
आपके सर पर आटे का खुला डब्बा गिर पड़े तो इस प्रक्रिया को ३ मिनट तक
करने से आपके बालों पर चिपका,गिरा आटा एकदम झड कर अलग हो जायेगा.

सेक्सोफोन की आवाज़ बंद होते ही कैमरे ने भी झूम के अपना सर घुमा लिया है
और वो पार्टी में मौजूद लोगों की शक्लें पहचानने का एक मौका दे रहा है.

नायिका उसी अंदाज़ में पंक्तियाँ दोहराती है जिस अंदाज़ में नायक ने गाना शुरू
किया था. नायक "तो क्या" बोलता हुआ बीच में कूद पढता है जैसे किसी खिडकी
से कूद कर अंदर आया हो.

बाकी की कमेंट्री चटके(कमेन्ट)लगने के पश्चात उपलब्ध कराई जायेगी. ......



गीत के बोल:

आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर ज़बान पर
सबको मालूम है और सबको खबर हो गयी
आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर ज़बान पर
अच्छा !
सबको मालूम है और सबको खबर हो गयी
तो क्या
आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर ज़बान पर
सबको मालूम है और सबको खबर हो गयी

हमने तो प्यार में ऐसा काम कर लिया
प्यार की राह में अपना नाम कर लिया
हमने तो प्यार में ऐसा काम कर लिया
प्यार की राह में अपना नाम कर लिया
प्यार की राह में अपना नाम कर लिया

आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर ज़बान पर
अच्छा !
सबको मालूम है और सबको खबर हो गयी
तो क्या
आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर ज़बान पर
सबको मालूम है और सबको खबर हो गयी

दो बदन एक दिन एक जान हो गए
मंज़िलें एक हुईं हमसफ़र बन गए
दो बदन एक दिन एक जान हो गए
मंज़िलें एक हुईं हमसफ़र बन गए
मंज़िलें एक हुईं हमसफ़र बन गए

आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर ज़बान पर
अच्छा !
सबको मालूम है और सबको खबर हो गयी
तो क्या
आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर ज़बान पर
सबको मालूम है और सबको खबर हो गयी

क्यों भला हम डरें दिल के मालिक हैं हम
हर जनम में तुझे अपना माना सनम
क्यों भला हम डरें दिल के मालिक हैं हम
हर जनम में तुझे अपना माना सनम
हर जनम में तुझे अपना माना सनम


आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर ज़बान पर
अच्छा !
सबको मालूम है और सबको खबर हो गयी
तो क्या
आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर ज़बान पर
सबको मालूम है और सबको खबर हो गयी

..................................
Ajkal tere mere pyar ke charche-Brahmachari 1968

Monday, 11 July 2011

शर्म आती है मगर आज ये कहना होगा-पड़ोसन १९६८

लता मंगेशकर का गाया गीत सुनिए और देखिये फिल्म पड़ोसन
से। इसे परदे पर गा रही हैं सायरा बानो। सन १९६८ की फिल्म
पड़ोसन के गीत लिखे हैं राजेंद्र कृष्ण ने और इस फिल्म में संगीत
दिया है राहुल देव बर्मन ने। सुनील दत्त और किशोर कुमार इस
फिल्म के प्रमुख नायक हैं।

कोयल की बोली, संतूर की आवाज़ और प्रणय गीतों की सी बजने
वाली शहनाई ये सब लता की आवाज़ के साथ क़यामत सी ढा रही
हैं।




गीत के बोल:

शर्म आती है मगर आज ये कहना होगा
अब हमें आप के क़दमों ही में रहना होगा
शर्म आती है मगर आज ये कहना होगा
अब हमें आप के क़दमों ही में रहना होगा

शर्म आती है मगर

आप से रूठ के हम जितना जिये ख़ाक जिये
आप से रूठ के हम जितना जिये ख़ाक जिये
कई इल्ज़ाम लिये और कई इल्ज़ाम दिये
आज के बाद मगर कुछ भी न कहना होगा
अब हमें आप के क़दमों ही में रहना होगा

देर के बाद समझे हैं मोहब्बत क्या है
अब हमें चाँद के झूमर की ज़रुरत क्या है
प्यार से बढ़ के भला कौन सा गहना होगा
अब हमें आप के क़दमों ही में रहना होगा

शर्म आती है मगर आज ये कहना होगा

आप के प्यार का बीमार हमारा दिल है
आप के प्यार का बीमार हमारा दिल है
आप के ग़म का खरीदार हमारा दिल है
आप को अपना कोई दर्द न सहना होगा

अब हमें आप के क़दमों ही में रहना होगा

शर्म आती है मगर आज ये कहना होगा
शर्म आती है
..................................
Sharm aati hai magar-Padosan 1968

Friday, 1 July 2011

मुखड़े पे गेसू आ गये-पायल की झंकार १९६८

गेसू, बाल, केश, जुल्फें, लट इन शब्दों का प्रयोग गीतकार नारी
विषयक पंक्तियों की रचना में ही किया करते हैं। जिन नायकों
के बाल लम्बे होते हैं उनके लिए शायद पैरोडी में कभी कोई गीत
बना हो तो हो, अन्यथा नारी के सौंदर्य में चार चाँद लगाने वाली
केश राशि ही गीतकारों को लुभाती रही है।

आपको फिल्म पायल की झंकार से दो गीत सुनवा चुके हैं। आइये तीसरा
गीत सुनते हैं जो किशोर कुमार की आवाज़ में एकल गीत है। गीत लम्बा
है और इसके अंतरे के बीच के ध्वनियों के टुकड़े भी बड़े हैं।

इस फिल्म में किशोर कुमार से शेर शायरी और कविता बुलवाई गई है, जो
अनूठा सा प्रयोग है। किशोर कुमार की दिलकश आवाज़ में वो सब सामान
संगीत प्रेमियों के लिए अमूल्य निधि सरीखी है।

इसी कड़ी में एक गीत है-मुखड़े पे गेसू आ गये. इस गीत की पञ्च लाइन है
"आधे इधर आधे उधर। चूंकि अधिकतर बालिकाएं, कन्यायें,युवतियां और
महिलाएं बीच में से मांग निकलती है, उनकी केश राशि दोनों तरफ बराबर
फैलाव लिए होती हैं।

गीत में प्राकृतिक सौंदर्य भी आपको भरपूर मिलेगा। कुछ समय पहले
आपने ओलिम्पिक में आपने एक प्रतियोगिता ज़रूर देखी होगी जिसका
नाम है -synchronized swimming। इसका देसी संस्करण आप इस
गीत में देख लीजिये जो कितने साल पहले हमारा फिल्म निर्देशक
दर्शकों को दिखा चुका है। बहते हुए झरने और नदी की धार के बीच
नायिका और उसकी सहेलियों की अठखेलियों पर कमर जलालाबादी
के बोल और संगीतकार सी रामचंद्र की सॉफ्ट सी धुन एक सुखमय सा
प्रभाव बनती है।



गीत के बोल:

मुखड़े पे गेसू आ गये
आधे इधर आधे उधर
आधे इधर आधे उधर
चंदा पे बादल छा गये
आधे इधर आधे उधर
आधे इधर आधे उधर

आज हमने रूप देखा
चांदनी के भेस में
आज हमने रूप देखा
चांदनी के भेस में
एक परदेसी बेचारा
लुट गया परदेस में
एक परदेसी बेचारा
लुट गया परदेस में
दिल के दुश्मन आ गये
आधे इधर आधे उधर
आधे इधर आधे उधर

मुखड़े पे गेसू आ गये
आधे इधर आधे उधर
आधे इधर आधे उधर

तुझको मालिक ने बनाया
ख़ास अपने हाथ से
तुझ को मालिक ने बनाया
ख़ास अपने हाथ से
सुबह से मुखड़ा बनाया
और जुल्फें रात से
सुबह से मुखड़ा बनाया
और जुल्फें रात से
फूल खिल कर आ गये
आधे इधर आधे उधर
आधे इधर आधे उधर

मुखड़े पे गेसू आ गये
आधे इधर आधे उधर
आधे इधर आधे उधर
.....................................
Mukhde pe gesoo aa gaye-Payal ki jhankar 1968

तू आये ना आये-पायल की झंकार १९६८

आज इच्छा हुई कि फिल्म पायल की झंकार(१९६८) से आपको गायक
किशोर कुमार का गाया गीत सुनवाया जाये, मगर पहले सुनवाते हैं
एक उत्तम कोटि का दर्द भरा गीत, जिसे फिल्माया गया है दक्षिण भारत
की अभिनेत्री ज्योति लक्ष्मी पर। ये कितनी हिंदी फिल्मों में दिखाई दीं मुझे
मालूम नहीं मगर इस फिल्म में वे किशोर कुमार का 'परफेक्ट मैच' हैं।
एक और हिंदी फिल्म है जिसमें वे मौजूद हैं-रानी और जानी (१९७३)

इस गीत में उनके चेहरे के भाव किसी मंजी हुई अभिनेत्री के जैसे चेहरे पर
आते-जाते हैं। इस गीत को देखने से भी प्रभाव पढता है जितना कि इसको
सुनने का। संगीतकार सी रामचंद्र की सक्रियता कुछ कम हुई थी सन १९६०
के बाद। इस गीत में लगभग वही प्रभाव है जो राजेंद्र कृष्ण लिखित और
सी. रामचंद्र द्वारा निर्देशित ५० के दशक के गीतों में आपको मिलता है ।
प्रस्तुत गीत लिखा है कमर जलालाबादी ने। विडम्बना है कि इतना मधुर
गीत भी अनसुना सा रह गया फिल्म के ना चलने की वजह से। इस गीत
को लता मंगेशकर ने गाया है।



गीत के बोल:

तू आये ना आये मगर जाने वाले
आये ना आये मगर जाने वाले
तेरी याद आ आ कर रुलाया करेगी,
रुलाया करेगी
जो देखेगी रोता है कोई अकेला
देखेगी रोता है कोई अकेला
तो खुद भी वो आंसू बहाया करेगी,
बहाया करेगी

तू आये ना आये

जिधर से गया तू ये राहें हमेशा
तरसती रहेंगी तेरी वापसी को
उधार से हवा भी जो आया करेगी
उधार से हवा भी जो आया करेगी
तेरा नाम लेकर सताया करेगी

तू आये ना आये

जो रातों को तारे ये पूछेंगे मुझसे
बता तू भी क्यों रात भर जागती है
कहूँगी मेरी नींद बस में नहीं है
कहूँगी मेरी नींद बस में नहीं है
ये बिरहन बहाने बनाया करेगी
तू आये ना आये

जहान मेरी आँखों का पानी गिरेगा
तेरी याद के फूल खिलते रहेंगे
सवेरे-सवेरे जो आएगी शबनम
सवेरे-सवेरे जो आएगी शबनम
तो दिल थाम कर लौट जाया करेगी

तू आये ना आये
.............................
Too aaye na aaye-Payal Ki Jhankar 1968

Thursday, 30 June 2011

मैं टूटी हुई एक नैया हूँ-आदमी १९६८

फिल्म आदमी के तीन गीत आप सुन ही चुके हैं। अब
सुनते हैं चौथा गीत। ये दर्द भरा या यूँ कहिये नैराश्य के
भावों को उभारता गीत है। गायक ने जिस गंभीर तरीके
से उस मूड को उभारा है वो बहुत तारीफ़-ए-काबिल है।
शकील बदायूनी के बोलों को धुन प्रदान की है नौशाद
ने। इस गीत के लिए दिलीप कुमार से उपयुक्त नायक
कौन हो सकता है भला ? एक दुविधा सी है और नायक
अपन आप को नायिका के हवाले करना चाहता है मगर
गीत के अंत में वो अकेला छोड़ देने की ख्वाहिश ज़ाहिर
कर ही देता है।




गीत के बोल:

मैं टूटी हुई इक नैया हूँ मुझे चाहे जिधर ले जाओ
मैं टूटी हुई इक नैया हूँ मुझे चाहे जिधर ले जाओ
जी चाहे डुबो दो मौजों में या साहिल पे ले जाओ

मैं टूटी हुई इक नैया हूँ मुझे चाहे जिधर ले जाओ

एक तुम ही सहारा हो मेरा जीवन की अँधेरी रातों में
दुनिया की ख़ुशी तक़दीर का ग़म सब कुछ है तुम्हारे हाथों में
अब चाहे इधर ले जाओ मुझे या चाहे उधर ले जाओ

मैं टूटी हुई इक नैया हूँ मुझे चाहे जिधर ले जाओ

मायूस नज़र मजबूर क़दम उजड़ा हुआ आलम है दिल का
जीना भी ये कोई जीना है मुँह देख सकूँ ना मंज़िल का
बीते हुए दिन मिल जाएँ जहाँ मुझे ऐसी डगर ले जाओ -२

मैं टूटी हुई इक नैया हूँ मुझे चाहे जिधर ले जाओ

आँसू न बहाओ मेरे लिए ग़म मुझको अकेले सहने दो
टूटे न तुम्हारा नाज़ुक दिल ये दर्द मुझी तक रहने दो
अब छोड़ दो मुझको राहों में या दूर नगर ले जाओ

मैं टूटी हुई इक नैया हूँ मुझे चाहे जिधर ले जाओ
......................................
Main tooti hui ek naiya hoon-Aadmi 1968

कौन रोकेगा अब प्यार का रास्ता-एक कली मुस्काई १९६८

लगे हाथ 'एक कली मुस्काई' फिल्म का तीसरा गीत भी सुन ही
लिया जाये। शायद इस गीत का विडियो उपलब्ध नहीं है यू ट्यूब
पर। खुशनुमा सा गीत है और सितार का भरपूर इस्तेमाल हुआ है
इसमें।






गीत के बोल:

कौन रोकेगा अब प्यार का रास्ता
मैं तो पी की नगरिया जाने लगी
आज बैठे-बिठाए ये क्या हो गया
दिल की हर बात आँखों में आने लगी
दिल की हर बात आँखों में आने लगी
मैं तो पी की नगरिया जाने लगी

आ गए, आ गए, मुस्कुराने के दिन
आ गए, आ गए, मुस्कुराने के दिन
लड़खड़ाने के दिन, गुनगुनाने के दिन
लड़खड़ाने के दिन, गुनगुनाने के दिन
मैने पायल तो पाँवों में बाँधी नहीं
और आवाज़
और आवाज़ घुँघरू की आने लगी
और आवाज़ घुँघरू की आने लगी
मैं तो पी की नगरिया जाने लगी

कोई राहों में कलियाँ बिछाने लगा
कोई राहों में कलियाँ बिछाने लगा
और इशारों से मुझको बुलाने लगा
और इशारों से मुझको बुलाने लगा
मैने दर्पण अभी तक तो देखा नहीं
meri बिंदिया मगर झिलमिलाने लगी
meri बिंदिया मगर झिलमिलाने लगी
मैं तो पी की नगरिया जाने लगी

आज कैसी चली भीगी-भीगी पवन
आज कैसी चली भीगी-भीगी पवन
लहलहाने लगा मेरा नाज़ुक बदन
लहलहाने लगा मेरा नाज़ुक बदन
मैने पलकें अभी तक झुकाई नहीं
नींद क्यूँ मेरी आँखों में आने लगी
मैं तो पी की नगरिया जाने लगी

कौन रोकेगा अब प्यार का रास्ता
मैं तो पी की नगरिया जाने लगी
मैं तो पी की नगरिया जाने लगी
मैं तो पी की नगरिया जाने लगी
....................................
Kaun rokega ab....main to pee ki nagariya-Ek kali muskayi 1968

Wednesday, 29 June 2011

न तुम बेवफ़ा हो-एक कली मुस्काई १९६८

ज़िन्दगी के सफ़र में कुछ ऐसे मुसाफिर मिलते हैं जो
बहुत दूर साथ चलने का वादा/ड्रामा कर के किसी मोड़ पर
बिछड़ जाते हैं या गधे के सर से सींग की तरह गायब हो
जाते हैं।

अगर अलगाव या बिछुड़न के लिए परिस्थितियां जिम्मेदार
होती हैं तो मामला ५०:५० अन्यथा प्रस्तुत गीत की पंक्तियाँ
दोहराते हुए दिल को ढाढ़स बंधाना पढता है। गीत में नायक
के जाते ही नायिका अपने दिल का गुबार बाहर निकाल रही
है।

मदन मोहन के रचे लता के गाये गीतों में से तकरीबन ५०
गीत मुझे बेहद पसंद हैं। ये उनमें से एक है। इसे मुझे सुनते
हुए कई साल हो गये ।

गीत में मीरा नामक अभिनेत्री दिखाई दे रही हैं। राजेंद्र कृष्ण
के बोलों को आवाज़ दी है लता मंगेशकर ने।



गीत के बोल:


न तुम बेवफ़ा हो न हम बेवफ़ा हैं
न तुम बेवफ़ा हो न हम बेवफ़ा हैं
मगर क्या करें अपनी राहें जुदा हैं

न तुम बेवफ़ा हो न हम बेवफ़ा हैं

जहाँ ठंडी-ठंडी हवा चल रही है
जहाँ ठंडी-ठंडी हवा चल रही है
किसी की मोहब्बत वहाँ जल रही है
ज़मीं-आसमां हमसे दोनों खफ़ा हैं

न तुम बेवफ़ा हो न हम बेवफ़ा हैं

अभी कल तलक़ तो मुहब्बत जवाँ थी
अभी कल तलक़ तो मुहब्बत जवाँ थी
मिलन ही मिलन था जुदाई कहाँ थी
मगर आज दोनों ही बेआसरा हैं

न तुम बेवफ़ा हो न हम बेवफ़ा हैं

ज़माना कहे मेरी राहों में आ जा
ज़माना कहे मेरी राहों में आ जा
मुहब्बत कहे मेरी बाँहों में आ जा
वो समझें ना मजबूरियाँ अपनी क्या हैं

न तुम बेवफ़ा हो न हम बेवफ़ा हैं

मगर क्या करें अपनी राहें जुदा हैं
न तुम बेवफ़ा हो न हम बेवफ़ा हैं
.............................
Na tum bewafa ho-Ek Kali Muskayi 1968

Tuesday, 12 April 2011

जो गुज़र रही है मुझपर-मेरे हुज़ूर १९६८

सन १९६७ वाले पिछले गीत के सुरीले प्यानो ने एक और सुरीले
गीत की याद ताज़ा करवा दी। उल्लेखनीय है कि ये गीत एक साल बाद
यानि कि १९६८ में प्रकट हुआ। इस गीत में प्यानो के उस्ताद शंकर
जयकिशन का जादू है। संगीतकार जोड़ी शंकर जयकिशन ने प्यानो
का बहुत इस्तेमाल किया है अपने गीतों में। ये भी ऐसा ही एक गीत
है जिसमें गीत का कद कलाकारों के अभिनय से बड़ा प्रतीत होगा
आपको। ये मेरा एक पसंदीदा गीत है। गीत परदे पर गा रहे हैं
राजकुमार। गीत के बोल और कलाकारों के हाव भाव से आप
अचम्भे में पढ़ जायेंगे कि ख़ुशी का इज़हार हो रहा है या दुःख का।
इस भाव को भांपने के लिए आपको ये फिल्म देखनी पड़ेगी। वैसे
अगर आप माला सिन्हा का चेहरा ध्यान से देखेंगे तो कुछ कुछ
समझ पाएंगे कि क्या माजरा है।

हसरत जयपुरी के लिखे बोलों में प्राण फूंके हैं मोहम्मद रफ़ी ने
संगीतकार शंकर जयकिशन के इशारों पर।

..........................



गीत के बोल:

हा आ आ , हा आ आ आ

जो गुज़र रही है मुझपर उसे कैसे मैं बताऊँ
जो गुज़र रही है मुझपर उसे कैसे मैं बताऊँ
वो ख़ुशी मिली है मुझको, मैं ख़ुशी से मर ना जाऊं
वो ख़ुशी मिली है मुझको, मैं ख़ुशी से मर ना जाऊं

मेरे दिल की धडकनों का ये पयाम तुमको पहुंचे
मैं तुम्हारा हमनशीन हूँ ये सलाम तुमको पहुंचे
उसे बंदगी मैं समझूं जो तुम्हारे काम आऊँ

वो ख़ुशी मिली है मुझको, मैं ख़ुशी से मर ना जाऊं
हाँ, जो गुज़र रही है मुझपर उसे कैसे मैं बताऊँ

मेरे दिल की महफिलों में वो मुकाम है तुम्हारा
के खुदा के बाद लब पर, बस नाम है तुम्हारा
मेरी आरजू यही है, मैं तुम्हारे गीत गाऊँ

वो ख़ुशी मिली है मुझको, मैं ख़ुशी से मर ना जाऊं
हाँ, जो गुज़र रही है मुझपर उसे कैसे मैं बताऊँ

.......................................
Jo guzar rahi hai mujhpar-Mere huzoor 1968

Friday, 4 February 2011

छलकाएं जाम-मेरे हमदम मेरे दोस्त १९६८

फिल्म मेरे हमदम मेरे दोस्त के ४ गीत आपको सुनवा चुके
हैं। आइये एक और गीत सुनें। गीत मजरूह साहब का लिखा
हुआ है और संगीत लक्ष्मीकांत प्यारेलाल का। इतने ही विवरण से
काम चला लीजिये और गीत का आनंद उठाइए। बस इतना ध्यान
दीजिये की पहले फ्रेम में जो शख्स गिटार बजा रहा है वो फ़िल्मकार
और नायक ओ पी रल्हन का कुम्भ के मेले में buइछ्दा भाई जैसा
दिख रहा है।






गीत के बोल:


छलकाएं जाम आइये आपकी आँखों के नाम
होंठों के नाम

फूल जैसे तन के जलवे, ये रँग-ओ-बू के
ये रँग-ओ-बू के
आज जाम-ए-मय उठे, इन होंठों को छू के
इन होंठों को छू के
लचकाइये शाख-ए-बदन, लहराइये ज़ुल्फों की शाम

छलकाएं जाम आइये आपकी आँखों के नाम
होंठों के नाम

आपका ही नाम लेकर, पी है सभी ने
पी है सभी ने
आप पर धड़क रहे हैं, प्यालों के सीने
प्यालों के सीने
यहाँ अजनबी कोई नहीं, ये है आपकी महफ़िल तमाम

छलकाएं जाम आइये आपकी आँखों के नाम
होंठों के नाम

कौन हर किसी की बाहें, बाहों में डाल ले
बाहों में डाल ले
जो नज़र को शाख लाए, वो ही सम्भाल ले
वो ही सम्भाल ले
दुनिया को हो औरों की धुन, हमको तो है साक़ी से काम

छलकाएं जाम आइये आपकी आँखों के नाम
होंठों के नाम

Monday, 31 January 2011

हुई शाम उन का ख़याल- मेरे हमदम मेरे दोस्त १९६८

आज गुलाम अली की एक मशहूर ग़ज़ल सुन रहा था -
"बिछड़ के भी मुझे तुझसे ये बदगुमानी है " , कि अचानक
यादों के ठीकरे इधर उधर फूटना शुरू हो गए और ठीकरों के
टुकड़ों ने मन को थोडा कुरेद दिया। दिमाग कितना भी भुलाना
चाहे मगर यादें लौट लौट कर आपको दुखाती अवश्य हैं।
कुछ लोग जोर का झटका धीरे से लगा के रवाना हो जाया
करते हैं तो कुछ हल्का सा झटका जोर से लगा कर। दोनों ही
स्तिथियों में मनाव मन को कष्ट अवश्य होता है । ठीकरे से
तुलना इसलिए कि गई क्यूंकि उन ख्यालों का स्वर अक्सर
एक सा ही होता है। ऐसे में एक गीत याद आया और वो आज
पेश-ए-खिदमत है। मजरूह के लाजवाब बोलों को दिल में
सनसनी पैदा करने वाली धुन से सजाया है संगीतकार
लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने और गीत को रूह दी है रफ़ी ने।




गीत के बोल :


हुई शाम उन का ख़याल आ गया
वही ज़िंदगी का सवाल आ गया

अभी तक तो होंठों पे था तबस्सुम का एक सिलसिला
बहुत शादमां थे हम उनको भुलाकर
अचानक ये क्या हो गया
कि चेहरे पे रंग-ए-मलाल आ गया

कि चेहरे पे रंग-ए-मलाल आ गया
हुई शाम उन का ख़याल आ गया

हमें तो यही था गुरूर गम-ए-यार है हम से दूर
वही ग़म जिसे हमने किस-किस जतन से
निकाला था इस दिल से दूर
वो चलकर क़यामात की चाल आ गया
वो चलकर क़यामात की चाल आ गया

हुई शाम उन का ख़याल आ गया
................................................
Hui shaam unka khayal-Mere humdum mere dost 1968

Saturday, 22 January 2011

अल्लाह ये अदा- मेरे हमदम मेरे दोस्त १९६८

फिल्म मेरे हमदम मरे दोस्त के दो मधुर गीत -
ना जा कहीं अब ना जा और चलो सजना आपको
सुनवाए जा चुके हैं भरी भरकम विवरण के साथ
इस गीत को कम विवरण के साथ ही सुन लीजिये।
गीत एक पार्टी में गया जा रहा है। नायिका मुमताज़
इसको परदे पर गा रही हैं, धर्मेन्द्र और शर्मिला
बाकी श्रोताओं के साथ इसको ध्यान से सुन रहे हैं।
गीत में सत्तर प्रतिशत क़व्वाली का आनंद मिलेगा।
इस तरह से ये टू इन वन गीत हुआ।



गीत के बोल:

अल्लाह ये अदा कैसी है इन हसीनों में
अल्लाह ये अदा कैसी है इन हसीनों में
रूठे पल में ना माने महीनों में
रूठे पल में ना माने महीनों में
अल्लाह ये अदा कैसी है इन हसीनों में
अल्लाह ये अदा कैसी है इन हसीनों में

आहें भर भर के इल्तज़ा कर के
आहें भर भर के इल्तज़ा कर के

हमने देखा है ये हैं पत्थर के
हाँ, हमने देखा है ये हैं पत्थर के

जो मनाओ
जो मनाओ ना माने महीनों में
जो मनाओ ना माने महीनों में

अल्लाह यह अदा कैसी है इन हसीनों में
अल्लाह

चाहे भी हम तो इनको
चाहे भी हम तो इनको
ज़ालिम कहाँ ना जाये
शिकवा है उनसे दिल को
शिकवा है उनसे दिल को , के दिल को
के जिनको देखे से प्यार आये, हाय

अल्लाह यह अदा कैसी है इन हसीनों में
अल्लाह यह अदा कैसी है इन हसीनों में
अल्लाह

चमक आँखों में है सितारों की
चमक आँखों में है सितारों की
छाँव छाओं मुखड़े पे है बहारों की
छाँव मुखड़े पे है बहारों की

बस दिल ही
बस दिल ही
बस दिल ही
बस दिल ही नहीं इनके सीनों में
बस दिल ही नहीं इनके सीनों में

अल्लाह , अल्लाह , यह अदा, ये अदा
कैसी है इन हसीनों में, अल्लाह

हो हो , ओ ओ ओ ओ, हो ओ ओ ओ
चाहत में चीज़ क्या है
चाहत में चीज़ क्या है
यह रंग यह जवानी
उन पर लुटाने वाले
हो, उन पर लुटाने वाले
लुटाये बैठे हैं जिंदगानी, हाय

अल्लाह यह अदा कैसी है इन हसीनों में
अल्लाह यह अदा कैसी है इन हसीनों में
अल्लाह

चाहे राज़ी वो ना रहे फिर भी
चाहे राज़ी वो ना रहे फिर भी
साड़ी महफ़िल में वो तो है फिर भी
हाँ साड़ी महफ़िल में वो तो है फिर भी

खूबसूरत, हाय
खूबसूरत हज़ारों हसीनों में
खूबसूरत हज़ारों हसीनों में

अल्लाह यह अदा कैसी है इन हसीनों में
अल्लाह यह अदा कैसी है इन हसीनों में
अल्लाह

अल्लाह यह अदा कैसी है इन हसीनों में, हसीनों में
रूठे पल में ना माने ना माने महीनों में, महीनों में

अल्लाह, यह अदा कैसी है इन हसीनों में
अल्लाह
.................................
Allah ye ada kaisi hai-Mere humdam mere dost 1968

मोहे लागी रे-सुहाग रात १९६८

शुरू के ४-५ सेकंड तक ये गीत वी. शांताराम के स्कूल की उपज लगता है
उसके बाद थोड़ी देर के लिए शुद्ध बम्बैया फ़िल्मी हो जाता है। ऐसी स्विचिंग
गीत में चलती रहती है। तेज गति के गीत पर नृत्य भी काफी तेज़ वाला है।


गीत फिल्माया गया है राजश्री और जीतेंद्र पर। इन्दीवर के लिखे और लता
के गाये इस गीत के संगीतकार हैं कल्याणजी आनंदजी । इस फिल्म के गीत
काफी बजे हैं और २-३ गीत अभी भी चलन में हैं जिनको हम आगे सुनेंगे।
फिलहाल इस मोहक नृत्य वाले गीत का आनंद उठाइए।



गीत के बोल:

मोहे लागी रे
मोहे लागी रे लागी रे लागी
जुल्मी उमरिया संवरिया
हाय हाय
सवारिय मैं गिर गिर जाऊं
सवारिय मैं गिर गिर जाऊं

मोहे रोको रे
मोहे रोको रे रोको रे रोको
हो गई बावरिया सांवरिया
ऊई
सांवरिया मैं गिर गिर जाऊं
सांवरिया मैं गिर गिर जाऊं

लागे जबसे ये नैन
गया जियरा का चैन
हाय, तबसे ये नैना ना लागे
लागे जबसे ये नैन
गया जियरा का चैन
हाय, तबसे ये नैना ना लागे
बहकी बहकी है चाल
है अभी से ये हाल
जाने क्या होगा क्या होगा आगे
जाने क्या होगा क्या होगा आगे

मो पे डारो ना
मो पे डारो ना डारो ना डारो
ऐसी नजरिया सांवरिया
हाय
सांवरिया मैं गिर गिर जाऊं
सांवरिया मैं गिर गिर जाऊं

देखो आई बाहर
उसपे तेरा ये प्यार
कैसे अपने जिया को सम्भालूँ
देखो आई बाहर
उसपे तेरा ये प्यार
कैसे अपने जिया को सम्भालूँ

माना लाखों में एक
पर तू ऐसे ना देख
ठहरो आँचल में नैना छुपा लूं
ठहरो आँचल में नैना छुपा लूं
हाय देखे रे
हाय देखे रे देखे रे देखे
सारी नगरिया सांवरिया
दिया
सांवरिया मैं गिर गिर जाऊं
सांवरिया मैं गिर गिर जाऊं

तेरा मेरा ये मेल
कई सदियों का खेल
तू है काया तो मैं तेरी छाया
तेरा मेरा ये मेल
कई सदियों का खेल
तू है काया तो मैं तेरी छाया

ओ बहारों के फूल मुझको जाना ना भूल
चली आऊंगी जब भी बुलाया
मैं तो प्यासी रे
मैं तो प्यासी रे प्यासी रे प्यासी
प्रीत की बदरिया सांवरिया

सांवरिया मैं गिर गिर जाऊं
सांवरिया मैं गिर गिर जाऊं

मोहे लागी रे लागी रे लागी
जुल्मी उमरिया संवरिया
हा हा हा
सांवरिया मैं गिर गिर जाऊं
सांवरिया मैं गिर गिर जाऊं
......................................
Mohe laagi re laagi re-Suhag Raat 1968

रंग बसंती छा गया-राजा और रंक १९६८

लता और रफ़ी के गाये लगभग ४३० युगल गीतों में से अभी
आपको कुछ ही सुनवाए हैं। आइये अब सुनते हैं एक लोकप्रिय
युगल गीत फिल्म राजा और रंक से। टी वी पर एक पेंट कंपनी
के विज्ञापन को देख कर आज दिमाग में ये गीत कौंधा।
गुलज़ाराना अंदाज़ में पोस्ट की कोंपलें दिमाग से फूटने लगीं और
शब्द पत्तों की मानिंद टपकना शुरू हो गए, पतझड़ का मौसम जो है।
बिखरे हुए अधखाये, साबुत बेरों को बटोर कर आपके लिए छाप दिए हैं ।

तुरही की आवाज़ कुछ अलग सुनाई पढ़ती है और उससे अंदाज़ा लगाया
जा सकता है कि गीत किसी पीरियड या ऐतिहासिक फिल्म से है। साथ
में बांसुरी का भी बढ़िया प्रयोग है इस गीत में।

आनंद बक्षी के लिखे हुए गीत की तर्ज़ बनाई है लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने।




गीत के बोल:

संग बसंती, अंग बसंती, रंग बसंती छा गया
मस्ताना मौसम आ गया

संग बसंती, अंग बसंती, रंग बसंती छा गया
मस्ताना मौसम आ गया

धरती का है आँचल पीला झूमे अम्बर नीला-नीला
सब रंगों से है रंगीला, रंग बसंती

संग बसंती, अंग बसंती, रंग बसंती छा गया
मस्ताना मौसम आ गया
लहराए ये तेरा आँचल सावन के झूलों जैसा
दिल मेरा ले गया है ये तेरा रूप गोरी
सरसों के फूलों जैसा
ओ लहराए ये तेरा आँचल सावन के झूलों जैसा
दिल मेरा ले गया है ये तेरा रूप गोरी
सरसों के फूलों जैसा

जब देखूं जी चाहे मेरा
नाम बसंती रख दूं तेरा
छोडो-छेड़ो न
हो हो हो ओ ओ ओ

तेरी बातें राम दुहाई मनवा लूटा नींद चुराई
सैयां तेरी प्रीत से आई, तंग बसंती

संग बसंती, अंग बसंती, रंग बसंती छा गया
o मस्ताना मौसम आ गया

हो हो हो ओ सुन लो देशवासियों
सुन लो देशवासियों
आज से इस देश में
छोटा-बड़ा कोई न होगा सारे एक सामान होंगे
सुन लो देशवासियों
कोई न होगा भूखा-प्यासा पूरी होगी सबकी आशा
हम हैं राजा
तुम हो कौन नगर के राजे छोटा मुंह बड़ी बात न साजे
झूमो नाचो गाओ बाजे, चंग बसंती

संग बसंती, अंग बसंती, रंग बसंती छा गया
मस्ताना मौसम आ गया

संग बसंती, अंग बसंती, रंग बसंती छा गया
मस्ताना मौसम आ गया

Friday, 14 January 2011

क्या मिलिए ऐसे लोगों से-इज्ज़त १९६८

अजनबियों की भीड़ में नायक पहुँचता है। अजनबियों
के लिए वो जाना पहचाना है, बस वही एक बाकियों को
नहीं पहचानता। उन अजनबियों में से एक उसको भाई कह
कर पुकारती है । ऐसे मौके पर उससे गीत गाने की
गुज़ारिश की जाती है और वो अपने दिल की भड़ास गीत
के माध्यम से निकलता है। गीत के साथ शायद कोई
अंग्रेजी खेल हो रहा है जिसको हम फैंसी ड्रेस के नाम
से पुकारते हैं। इसमें आपको पुराने ज़माने की सब
विलायती नृत्य शैलियों का समावेश मिलेगा। आनंद
उठायें एक contrast वाले गीत का। सर में तेल की पूरी बोतल
बोतल चुपड़े हीरो को देखने का सौभाग्य आपको कम ही
ही फिल्मों में मिला होगा। वो ऐसा है की किरदार की मांग होगी
इसलिए निर्देशक ने नायक को काले रंग से भी पोत डाला है।




गीत के बोल:

क्या मिलिए ऐसे लोगों से,
जिनकी फितरत छुपी रहे,
नकली चेहरा सामने आये,
असली सूरत छुपी रहे,

क्या मिलिए ऐसे लोगों से,
जिनकी फितरत छुपी रहे,
नकली चेहरा सामने आये,
असली सूरत छुपी रहे,

खुद से भी जो खुद को छुपाये,
क्या उनसे पहचान करें,
क्या उनके दामन से लिपटें?,
क्या उनका सम्मान करें?,
जिनकी आधी नीयत उभरे,
आधी नीयत छुपी रहे,
नकली चेहरा सामने आये,
असली सूरत छुपी रहे

दिलदारी का ढोंग रचाकर,
जाल बिछाए बातों का,
जीते जी का रिश्ता कहकर,
सुख ढूंढें कुछ रातों का,
रूह की हसरत लाभ पर आये,
जिस्म की हसरत छुपी रहे,
नकली चेहरा सामने आये,
असली सूरत छुपी रहे

जिनके ज़ुल्म से दुखी है जनता,
हर बस्ती हर गावों में,
दया धरम की बात करें वो,
बैठ के सजी सभाओं में,
दान का चर्चा घर घर पहुंचे,
लूट की दौलत छुपी रहे,
नकली चेहरा सामने आये,
असली सूरत छुपी रहे

देखें इन नकली चेहेरों की,
कब तक जय जय कार चले,
उजले कपड़ों की तह में,
कब तक काला संसार चले,
कब तक लोगों की नज़रों से,
छुपी हकीकत छुपी रहे,
नकली चेहरा सामने आये,
असली सूरत छुपी रहे

क्या मिलिए ऐसे लोगों से,
जिनकी फितरत छुपी रहे,
नकली चेहरा सामने आये,
असली सूरत छुपी रहे
...........................
Kya miliye aise logon se-Izzat 1968

Monday, 3 January 2011

ये दिल नहीं है-आबरू १९६८

फिल्म आबरू के ३ गीत आपको सुनवा चुके हैं। अब सुनते हैं एक
गीत जो शायद ही आपको कभी सुनाई दिया हो। इस गीत के बोल
अच्छे हैं इसलिए इसको एक बार ज़रूर सुन लिया जाए। जी एस रावल
के लिखे गीत की तर्ज़ बनाई है सोनिक ओमी ने। गायक हैं रफ़ी। कोई
दीपक कुमार साहब पर इसे फिल्माया गया है। गीत में आपको विम्मी
नाम की नायिका भी दिखाई देंगी।



गीत के बोल:


ये दिल नहीं कि जिसके सहारे जीते हैं
लहू का जाम है जो सुबह-ओ-शाम पीते हैं

ये दिल नहीं है

छुपाया लाख मगर इश्क़ है नहीं छुपता
छुपाया लाख मगर इश्क़ है नहीं छुपता
ये अश्क़ आँख में आया हुआ नहीं रुकता
कि आग लगती है
कि आग लगती है जब आँसुओं को पीते हैं
लहू का जाम है जो सुबह-ओ-शाम पीते हैं

ये दिल नहीं है

कभी क़रार न आएगा हमको जीने से
कभी क़रार न आएगा हमको जीने से
इलाज ज़हर का होता है ज़हर पीने से
कि सर पे मौत का
कि सर पे मौत का साया है फिर भी जीते हैं
लहू का जाम है जो सुबह-ओ-शाम पीते हैं

ये दिल नहीं है
...................................
जो अंतरा विडियो से गयाबं है वो इस प्रकार है:

तड़प-तड़प के निकालेंगे दिल के अरमाँ हम
तड़प-तड़प के निकालेंगे दिल के अरमाँ हम
करेंगे रंज से पैदा ख़ुशी के समाँ हम
कि ग़मों की नोक से
कि ग़मों की नोक से दिल के ज़ख़्म सीते हैं
लहू का जाम है जो सुबह-ओ-शाम पीते हैं

ये दिल नहीं कि जिसके सहारे जीते हैं
ये दिल नहीं कि जिसके सहारे जीते हैं

.........................................................................

Ye dil nahin hai-Aabroo 1968

Friday, 10 December 2010

वादियाँ मेरा दामन १ -अभिलाषा १९६८

अब कुछ डाक्युमेंट्री वाले अंदाज़ में विवरण हो जाए
तो कैसा रहे। तो शुरू किया जाए-ये फिल्म अमित बोस ने
डायरेक्ट की है। इस फिल्म की कहानी सतीश भटनागर
ने लिखी है। इस फिल्म में संजय खान हीरो हैं और नंदा
हेरोइन। संजय खान के चरित्र का नाम अरुण है तो नंदा
के चरित्र का नाम रितु। संजय खान जैसा कि आप जानते
ही होंगे नायक फिरोज खान के छोटे भाई हैं। संजय से
छोटा एक और भाई है जिसका नाम है-अकबर खान।
अभिनेत्री नंदा के भाई बहनों की जानकारी नहीं है। गीत
में आप एक कार भी देखेंगे बड़ी सी, जिसका मॉडल पता
नहीं है, गूगल पर सर्च करना पड़ेगा। एक पहाड़ी सी दिखने
रही है जिसपर नायक नायिका दिखाई दे रहे हैं। थोड़े
बहुत संवाद बोलने के बाद नायक गाना गाने लगता है।
नायिका को संवाद का आखिरी हिस्सा पसंद नहीं आया
और वो उससे दूर भाग खड़ी होती है। ज़ाहिर सी बात है कि
अपने मुंह मियां मिट्ठू कोई बनेगा तो कहाँ से सुहाएगा
किसी को। अब आपको गीत के बाकी विवरण देखना हो
तो जैसे डाक्युमेंट्री के अंत में आते हैं उसी अंदाज़ में गाने
के टैग पढ़ डालिए, आपको मालूम पढ़ जायेगा कि गीत में
किस किस ने अपना योगदान दिया है । सर्वप्रथम आएगा
फिल्म किस सन में प्रकट हुई, फिर आएगा गीतकार का नाम,
उसके बाद गायक, नायिका, संगीतकार और अंत में मिलेगा
फिल्म के नायक का नाम।





गीत के बोल:

वादियाँ मेरा दामन रास्ते मेरी बाहें
जाओ मेरे सिवा तुम कहाँ जाओगे।
वादियाँ मेरा दामन रास्ते मेरी बाहें
जाओ मेरे सिवा तुम कहाँ जाओगे।

वादियाँ मेरा दामन

जब चुराओगे तन तुम किसी बात से
जब चुराओगे तन तुम किसी बात से
शाख-ए-गिल छेड़ देगी मेरे हाथ से
अपनी ही ज़ुल्फ़ को और उलझोगे

वादियाँ मेरा दामन रास्ते मेरी बाहें
जाओ मेरे सिवा तुम कहाँ जाओगे।

वादियाँ मेरा दामन

जबसे मिलने लगीं तुमसे राहें मेरी

जबसे मिलने लगीं तुमसे राहें मेरी
चाँद सूरज बनी दो निगाहें मेरी
तुम कहीं भी रहो तुम नज़र आओगे।

वादियाँ मेरा दामन रास्ते मेरी बाहें
जाओ मेरे सिवा तुम कहाँ जाओगे।

वादियाँ मेरा दामन
...................................................

Wadiyan Mera Daaman-Abhilasha 1968
 
 
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