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Thursday, 8 December 2011

ये देस परदेस -देस परदेस १९७८

एक गीत पेश है जिसने मुझे काफी प्रभावित किया और देव आनंद
के साथ साथ किशोर कुमार को भी ज्यादा पसंद करने की वजहें
बनायीं वो है फिल्म देस परदेस का गीत-ये देस परदेस। देस परदेस
हिंदी फिल्म सिनेमा का एक मील का पत्थर है। संभवतः ये देव आनंद
के निर्देशन वाली अंतिम बड़ी हिट फिल्म थी। इसके बाद आई लूटमार
भी काफी चली मगर इस फिल्म जैसा प्रभाव नहीं जगा पाई।

फिल्म देस परदेस के सभी गीत हिट हुए और आज भी उतने ही चाव से
सुने जाते हैं। रेडियो-अदरक लहसुन भी कई बार इस फिल्म के गीत
बजाते मिल जाते हैं। फ़िल्म के बाकी गीतों में और प्रस्तुत गीत में क्या
फर्क रहा मेरे लिए:देस परदेस के अन्य गीत मैं भी साथ साथ गुनगुनाने की
कोशिश करता और फिल्म के शीर्षक गीत को केवल ध्यान से सुनता। कुछ गीत
केवल तल्लीनता से सुनने में ही आनंद आता और उन गीतों के साथ अपनी
आवाज़ की मिलावट करके कानों पर बोझ डालना मेरे हिसाब से उचित नहीं
है।



गीत के बोल:

ये देस परदेस

हे, खुशियाँ यहीं पे
मिलेंगी हमें रे
सपना है अपना
ये देस परदेस

खुशियाँ यहीं पे
मिलेंगी हमें रे
अपना है अपना
ये देस परदेस

वही पुराने हैं, सारे फसाने,
नया है लेकिन जहाँ
अरे रस्ते नये हैं, ये मन्ज़िल नई है
लेकिन वही आसमाँ
सपना है सपना
अपना है अपना
ये देस परदेस

अकेला नहीं हूँ मैं, तेरे बिना
संग मेरे तेरी याद है
मिलकर खिलें फूल हर रंग के,
बस यही मेरी फरियाद है
सपना है सपना
अपना है अपना
ये देस परदेस
...............................
Ye des pardes-Des Pardes 1978

Tuesday, 19 July 2011

आप कहें और हम न आयें-देस परदेस १९७८

आपको जब पिछले दफे देस परदेस का गीत सुनाया था तब एक मित्र का
जिक्र किया था जिन्होंने रोते-धोते ज़माने के गीत ब्लॉग पर प्रस्तुत करने
की सलाह दी थी. उनकी सलाह अमल में लायी गयी लेकिन क्या किया
जाए फ़िल्मी मसाले पर इतने ब्लॉग और वेबसाइट उपलब्ध हैं कि पाठक
के सामने समस्या होती है क्या पढ़े और क्या न पढ़े. पूरे अंतरजाल पर
इतना गहरा जाल है साईट और ब्लॉग का कि विषय चुनाव भी एक समस्या
सरीखा हो जात है - आलू प्याज के भाव पढ़ें या ताजे घोटालों का विवरण.

अब सुनते हैं फिल्म देस परदेस से दूसरा गीत जो लता मंगेशकर ने गाया है
अभिनेत्री टीना मुनीम के लिए. संगीतकार राजेश रोशन ने जितने भी लता
के एकल गीत बनाये हैं उनमें से सबसे बढ़िया ५६ चुन लीजिए और इसको
आप उस सूची में ज़रूर पाएंगे. गीत लिखा है अमित खन्ना ने. विडियो में
से एक अंतरा नदारद है .

गीत 'स्टेज' पर गाया जा रहा है अतः इसे इसी श्रेणी में रख लेते हैं. आगे
चल के उप-श्रेणियाँ भी बना लेंगे-४ फीट का स्टेज, १० फीट ऊंचा स्टेज इत्यादि



गीत के बोल:


आप कहें और हम न आयें, ऐसे तो हालात नहीं, ओ
मँज़िल पे पहुँचेंगे कैसे, आपका जब तक साथ नहीं, ओ
आप कहें और हम न आयें, ऐसे तो हालात नहीं, ओ

चाहने वालों की आज दुनिया में चाहने वाले आ गए
उल्फ़त की मय आँखों से लो आज पिलाने आ गए
आप पियें और आप न झूमें आपके बस की बात नहीं, ओ
मँज़िल पे पहुँचेंगे कैसे आपका जब तक साथ नहीं

कसा हुआ है तीर हुस्न का, ज़रा सम्भल के रहियेगा
नज़र नज़र को मारेगी तो, कातिल हमें न कहियेगा
चाल चली है सोच के हमने इस खेल में अपनी मात नहीं, ओ

पास आ के ये आपके हमें होने लगा एहसास है
दम है तो बस आपके दमसे आप ही से साँस है
बयान करें जो हाल-ए-दिल को ऐसे कोई जज़्बात नहीं, ओ

आप कहें और हम न आयें, ऐसे तो हालात नहीं
मँज़िल पे पहुँचेंगे कैसे, आपका जब तक साथ नहीं
....................................
Aap kahen aur ham na aayen-Des Pardes 1978

Monday, 18 July 2011

मैं भोला भाला हूँ-भोला भाला १९७८

फिल्म भोला भाला में राजेश खन्ना दोहरी भूमिका में हैं.
एक तो है भोला भाला युवक जो बीमा का एजेंट है. दूसरा
है डाकू.साईकिल पर हिंदी फिल्मों का नायक कम चला करता
है. नायक ने साईकिल भी चलायी लेकिन फिल्म नहीं चली.
कहानी में दम होना बहुत ज़रूरी है. ये पहली शर्त होती है
फिल्म के चलने में. गीत अच्छे हैं मगर वो भी फिल्म की
मदद नहीं कर पाए बॉक्स ऑफिस पर.

ये फिल्म का शीर्षक गीत है, आनंद बक्षी का लिखा और किशोर
का गाया हुआ. इसके संगीतकार हैं राहुल देव बर्मन.



गीत के बोल:

मैं भोला भाला हूँ
भोले दिल वाला हूँ

अरे मैं भोला भाला हूँ
भोले दिल वाला हूँ

दुनिया मुझको क्या जाने
दुनिया से निराला हूँ

मैं भोला भाला हूँ

मैं कहा राम राम
सब ठीक ठाक है ना

देस विदेस की बातें मैं क्या समझूं मैं क्या जानूं
..................................
Main bhola bhala hoon-Bhola bhala 1978

Sunday, 17 July 2011

बोतल से इक बात चली है-घर १९७८

गाने के लिए किसी सिचुएशन का होना ज़रूरी नहीं है किसी फिल्म में.
कभी कभी जबरन भी गीत ठूंसे जाते हैं किसी व्यक्ति विशेष की फ़रमाइश
पर. एक ऐसा ही गीत सुनवाते हैं आपको फिल्म घर से.

गीत फिल्माया गया है विनोद महरा और रेखा पर. गुलज़ार के लिखे बोलों
को सुरों में ढाला है आर डी बर्मन ने. आशा और रफ़ी इस गीत के गायक
हैं. जैसा की गुलज़ार के अधिकांश गीतों में होता है चाँद की विशेष सेवा
इस गीत में भी की गयी है.

कोका कोला की पुरानी बोतल कैसी दिखती थी ये कोका कोला प्रेमी जान
पाएंगे इस गीत से.



गीत के बोल:

बोतल से इक बात चली है
काग उड़ा के रात चली है

बोतल से इक बात चली है
काग उड़ा के रात चली है ,हो
तु रु रु तु, तु रु रु तु ,तु रु तु तु
तु रु रु तु, तु रु रु तु, तु रु तु तु

हो, बोतल से इक बात चली है
तू रु रु तू
काग उड़ा के रात चली है

आज की मय बहुत मीठी है
आज तो आँख मिला के पीना
चांद की मिसरी घुल जायेगी
चाँद से होंठ लगा के पीना

हो
तु रु रु तु तु रु रु तु तु रु तु तु
तु रु रु तु तु रु रु तु तु रु तु तु
हो, बोतल से इक बात चली है
काग उड़ा के रात चली है
हो, बोतल से इक बात चली है
काग उड़ा के रात चली है

वादों वाली रात आयी है
आज की रात इनकार ना करना
अपने दिन और रात ना पूछो
तुमसे जीना तुमपे मरना

तु रु रु तु तु रु रु तु तु रु तु तु
तु रु रु तु तु रु रु तु तु रु तु तु

हो, बोतल से इक बात चली है
तू रु रु तू
काग उड़ा के रात चली है
बोतल से इक बात चली है
काग उड़ा के रात चली है
ल ल ल ल ल ल ल ल

.....................................
Botal se ek baat chali hai-Ghar 1978

Saturday, 9 July 2011

बादल तो आये-दिल्लगी १९७८

राजेश रोशन ने भी और संगीतकारों की तरह लता मंगेशकर
के लिए विशेष धुनें बनायीं. कुछ गीत उनमें से ऐसे हैं जो
जनता के द्वारा ज्यादा नहीं सुने गए. धर्मेन्द्र, हेमा मालिनी
अभिनीत फिल्म 'दिल्लगी ' से एक मधुर गीत सुनवा रहे
हैं आपको. सन १९७८ में इस गीत का पदार्पण हुआ था .




गीत के बोल :

बादल तो आये लहरों के साये
ओ आने वाले पर तुम न आये
बादल तो आये लहरों के साये
ओ आने वाले पर तुम न आये

तुम ज़िन्दगी में यूँ मेरी आ कर
गुम हो गए हो ऐसे मुझको भुला कर
मैं प्यार तेरा दिल में सजा कर
बैठी हूँ कब से आस लगा कर

दुःख मेरे दिल के होंठों पे आये
ओ आने वाले पर तुम तो न आये

आवाज़ मेरी आ जाओ सुन के
रौंदो ना सपने हाय मेरे नयन के
इस पार तुमसे किसी भी जतन से
मैं राज़ अपने सारे कह दूँगी मन के

ख़ामोश रह के ये दर्द पाए
ओ आने वाले पर तुम तो न आये

बादल तो आये लहरों के साये
ओ आने वाले पर तुम तो न आये
तुम तो न आये

........................
Baadal to aaye-Dillagi 1978

Wednesday, 29 June 2011

मेरा प्यार शालीमार-शालीमार १९७८

इस फिल्म के रिलीज़ होने के पहले तक यही मालूम था कि शालीमार
नाम का एक मशहूर बाग़ काश्मीर में है, जिसे मुग़ल सम्राट शाहजहाँ
ने सन १६४१ में बनवाया था।

देसी विदेशी सितारों से सज्जित फिल्म शालीमार सन १९७८ में आई।
फिल्म का संगीत चर्चित हुआ और खूब बजे इसके गाने। इसका शीर्षक
गीत कहीं खो सा गया। आशा भोंसले की आवाज़ में आइये सुनें इस
फिल्म का शीर्षक गीत जो जीनत अमां पर फिल्माया गया है।






गीत के बोल:

मेरा प्यार शालीमार
तेरा प्यार शालीमार
हम दोनों बेकरार
आँखों में इंतज़ार

मेरा प्यार शालीमार
हो तेरा प्यार शालीमार
हम दोनों बेकरार
आँखों में इंतज़ार

मेरा प्यार शालीमार
हो तेरा प्यार शालीमार

ये जिसको मिल जाये
उसका दिल खिल जाये
ये जिसको मिल जाये
उसका दिल खिल जाये
हो जाये ज़िंदगी बेकार

मेरा प्यार शालीमार
हो तेरा प्यार शालीमार

ये पत्थर ये रूबी
ये दोनों महबूबी
ये पत्थर ये रूबी
ये दोनों महबूबी
हर कोई है इसका ख़रीदार

मेरा प्यार शालीमार
हो तेरा प्यार शालीमार
हम दोनों बेकरार
आँखों में इंतज़ार

मेरा प्यार शालीमार
हो तेरा प्यार शालीमार
....................
Mera pyar shalimar-Shalimar 1978

Sunday, 12 June 2011

मैं कौन सा गीत सुनाऊँ-दिल्लगी १९७८

एक फुरसती ज़माना था जब जनता नदी नाले के किनारे बैठा करती,
गप शाप मारती और गीत गाती और सुनती। उस दौर की कल्पना
करना भी शायद आधुनिक युग में affordable नहीं है। साफ़ सुथरी
फ़िल्में बनाने के लिए विख्यात बासु चटर्जी की इस फिल्म ने
ज्यादा बिज़नेस नहीं किया मगर जनता द्वारा सराही अवश्य
गई। ये जी जनाब सराहने वाली जनता है ना, उसके बलबूते पर
बॉलीवुड की रोजी रोटी नहीं चलती। वो चलती है जब सिनेमा हॉल
की आगे की सीट से पीछे की सीट तक जगह ना बची हो। जिसे हम
चवन्नी क्लास कहते हैं, कई नामचीन नायकों की रोजी रोटी वहीँ से
निकल के आई। कभी कभार आंशिक कडकी के चलते हम भी उस
क्लास का आनंद उठा चुके हैं।

बासु की खूबी ये है कि उन्होंने हमारे इर्द गिर्द के और आम जीवन
के सामान्यतया ना छुए जाने वाले पहलुओं को बहुत सहजता से
प्रस्तुत किया परदे पर, दर्शक को यही लगा जैसे वो रोजमर्रा की
कोई आम घटना से रूबरू हो रहा हो। बाकी के निर्देशक अवास्तविकता
को वास्तविकता में तब्दील करने का प्रयत्न करते रहे और बासु चटर्जी
वास्तविकता को सरलता से प्रस्तुत करने में। शत प्रतिशत वास्तविक
हम किसी भी फ़िल्मी कथानक को नहीं कह सकते क्यूंकि नाटकीयता
आवश्यक तत्त्व है मंच और फिल्मों का। फर्क करना होता है हमें तो
बस नाटकीयता, जीवंत नाटकीयता, अति नाटकीयता, फूहड़ता और
मूढ़ता में । कल्पनाशीलता जब इनमे से किसी भी एक तत्त्व से चिपक
जाती है तो उसी तत्त्व विशेष को बढावा देती है। कल्पनाशीलता निर्देशक
के पास होना पहली अनिवार्य शर्त है, उसके बाद नंबर आता है कलाकारों
का। कल्पनाशीलता प्रस्तुतीकरण को बेहतर बनाने का काम करती है।

प्रस्तुत गीत में आपको जो कलाकार दिखाई देंगे उनके नाम इस
प्रकार से हैं-धर्मेन्द्र, असरानी, हेमा मालिनी और मिठू मुखर्जी।
पांचवे शख्स को शायद आप ना पहचान पायें तो आपको एक क्लू
देता हूँ-महाभारत सीरियल में मामा शकुनि की भूमिका निभाने
वाला कलाकार।



गीत के बोल:

मैं कौन सा गीत सुनाऊँ
क्या गाऊं जो पिया बस जाये
तेरे तन मन में
खिल जाएँ सोयी कलियाँ, हाय कलियाँ
और बहारें आयें सूनी बगियाँ में

ये कैसे अचानक बिना कोई आहट
चले आये हो तुम मेरी ज़िन्दगी में
तुम्हें आज पा कर मैं सब कुछ भुला कर
मगन हो के डूबी हुई हूँ ख़ुशी में

इतने ही रंग सलोने, हाय सलोने
भर गये हैं मेरे खाली सावन में

मैं कौन सा गीत सुनाऊँ
क्या गाऊं जो पिया बस जाये
तेरे तन मन में

कभी तुम सहारा बनोगे हमारा
मैं ये बात कल तक नहीं मानती थी
मगर आज कैसे ये लगता है जैसे
मैं हर जनम में तुम्हें जानती थी
लगता है सारी दुनिया, सारी दुनिया
भर गई है जैसे सज के कण कण में

मैं कौन सा गीत सुनाऊँ
क्या गाऊं जो पिया बस जाये
तेरे तन मन में
खिल जाएँ सोयी कलियाँ, हाय कलियाँ
और बहारें आयें सूनी बगियाँ में

.....................................
Main kaun sa geet sunaaon-Dillagi 1978

Friday, 20 May 2011

अब से पहले तो दिल की ये हालत-नवाब साहब १९७८

आपसे भूले-बिसरे और बिछुड़े गीत सुनवाने का वादा है हमारा।
फ़िल्में आती हैं चली जाती हैं मगर कुछ गीत जुबान पर चढ़
जाते हैं उतरने का नाम ही नहीं लेते। ऐसा एक गीत है सन १९७८
की फिल्म नवाब साहब से। इसमें आपको दो चेहरे दिखलाई
देंगे रेहाना सुल्तान और तमन्ना। तमन्ना नमक कलाकार इस
गीत को परदे पर गा रही हैं। पार्श्व गायन किया है उषा मंगेशकर
ने। साहिर लुधियानवी के लिखे बोलों को धुन में ढाला है
संगीतकार सी अर्जुन ने, जी हाँ वही सफलता के कई रेकोर्ड ध्वस्त
करने वाली फिल्म 'जय संतोषी माँ' के संगीतकार। ये गीत हिंदी
फिल्म संगीत में शायद सी अर्जुन के आखिरी उल्लेखनीय धमाकों
में से एक धमाका है। दो अंतरों के बाद आपको परीक्षित साहनी
दिखाई देंगे । गौरतलब है कि जुमला-"आज क्या हो गया" गीत में
३० बार दोहराया गया है। गाने की पञ्च-लाइन भी यही है।



गीत के बोल:


अब से पहले तो ये दिल की हालत न थी
अब से पहले तो ये दिल की हालत न थी
आज क्या हो गया, आज क्या हो गया
आज क्या हो गया, आज क्या हो गया
ज़िंदगी दूसरों की अमानत न थी
ज़िंदगी दूसरों की अमानत न थी
आज क्या हो गया, आज क्या हो गया
आज क्या हो गया, आज क्या हो गया

अब से पहले तो ये दिल की हालत न थी
अब से पहले तो ये दिल की हालत न थी
आज क्या हो गया, आज क्या हो गया
आज क्या हो गया, आज क्या हो गया

कोई देखे हमें, कोई चाहे हमें, और सराहे हमें
कोई देखे हमें, कोई चाहे हमें, और सराहे हमें
ये तमन्ना, ये ख़्वाहिश, ये हसरत न थी
ये तमन्ना, ये ख़्वाहिश, ये हसरत न थी
आज क्या हो गया, आज क्या हो गया

अब से पहले, पहले
अब से पहले तो ये दिल की हालत न थी
आज क्या हो गया, आज क्या हो गया
आज क्या हो गया, आज क्या हो गया

अपने अंदाज़ पर नाज़ करते थे हम, हमको अपनी कसम
अपने अंदाज़ पर नाज़ करते थे हम, हमको अपनी कसम
ग़ैर से बात करने की फ़ुरसत न थी
ग़ैर से बात करने की फ़ुरसत न थी
आज क्या हो गया, आज क्या हो गया

अब से पहले, पहले
अब से पहले तो ये दिल की हालत न थी
आज क्या हो गया, आज क्या हो गया
आज क्या हो गया, आज क्या हो गया

एक बुत आज क्यूँ कर खुदा बन गया, मुद्द 'आ' बन गया
एक बुत आज क्यूँ कर खुदा बन गया, मुद्द 'आ' बन गया
हमको तो सर झुकाने की आदत ना थी
हमको तो सर झुकाने की आदत ना थी
आज क्या हो गया, आज क्या हो गया

अब से पहले, पहले
अब से पहले तो ये दिल की हालत न थी
आज क्या हो गया, आज क्या हो गया
आज क्या हो गया, आज क्या हो गया
....................................................
Ab se pehle...aaj kya ho gaya-Nawab Sahab 1978

Wednesday, 18 May 2011

ये नैना ये काजल-दिल से मिले दिल १९७८

एक अनजान सी जोड़ी पर फिल्माया गया एक बेहतरीन गीत सुनिए।
फिल्म की एडिटिंग ख़राब किस्म की है। गीत झटके से शुरू होता है जैसे
नायक नायिका और निर्देशक, उनिते के अन्य लोग सब जल्दी में हों। फिल्म
एक हिट फिल्म की श्रेणी में आती है जिसके गीत भी बहुत बजे थे उन दिनों।
फिल्म के नायक हैं भीष्म कोहली जो फिल्म के निर्देशक भी हैं। उनके साथ
श्यामली नामक अभिनेत्री है। भीष्म और श्यामली दोनों को इस फिल्म से कोई
फ़ायदा नहीं हुआ, उन्हें आगे शायद ही किसी और फिल्म में देखा गया हो। एक
बात आप ज़रूर महसूस करेंगे, नायक के चेहरे, हाव भाव में २० टका देव आनंद
की अदाओं की मिलावट है। २० टका किस्मत भी अगर साथ होती तो शायद
भीष्म की फ़िल्मी गाडी चलती रहती। गीत लिखा है अमित खन्ना ने और
संगीत तैयार किया है बप्पी लहरी ने। गीत का फिल्मांकन अच्छा है और
निर्देशक के ड्रेस-सेंस की दाद देना पड़ेगी। अगर आप अपना नज़र का चश्मा उतार
कर गीत देखें तो यही लगेगा की ७० के दशक की कोई देव आनंद की फिल्म
का गीत देख रहे हों।




गीत के बोल :

ये नैना ये काजल
ये जुल्फें ये आँचल

ये नैना ये काजल
ये जुल्फें ये आँचल
खूबसूरत सी हो तुम ग़ज़ल
कभी दिल हो कभी धड़कन
कभी शोला कभी शबनम
तुम ही हो तुम मेरी हमदम
ज़िन्दगी तुम मेरी
मेरी तुम ज़िन्दगी

मेरी आँखों से देखो मेरी नज़रों से जानो
मेरी आँखों से देखो मेरी नज़रों से जानो
तुम माला हम मोती
हम दीपक तुम ज्योति

ये नैना ये काजल
ये जुल्फें ये आँचल
खूबसूरत सी हो तुम ग़ज़ल
कभी दिल हो कभी धड़कन
कभी शोला कभी शबनम
तुम ही हो तुम मेरी हमदम

सपनों का पनघट हो
आशा का झुरमुट हो
सपनों का पनघट हो
आशा का झुरमुट हो
तुम नदिया हम धारा
तुम चंदा हम तारा

ये नैना ये काजल
ये जुल्फें ये आँचल
खूबसूरत सी हो तुम ग़ज़ल
कभी दिल हो कभी धड़कन
कभी शोला कभी शबनम
तुम ही हो तुम मेरी हमदम

मेरी साँसों से पूछो
मेरी आहों को समझो
मेरी साँसों से पूछो
मेरी आहों को समझो
तुम पूजा हम पुजारी
तुम किस्मत हम जारी

ये नैना ये काजल
ये जुल्फें ये आँचल
खूबसूरत सी हो तुम ग़ज़ल
कभी दिल हो कभी धड़कन
कभी शोला कभी शबनम
तुम ही हो तुम मेरी हमदम
ज़िन्दगी तुम मेरी
मेरी तुम ज़िन्दगी
...............................................................
Ye naina ye kajal-Dil se mile dil 1978

Monday, 16 May 2011

हम हैं प्यार की डगर के- दो मुसाफिर १९७८

कोलगेट स्माइल प्लीज़। निर्देशक ने नायक को शायद यही निर्देश
दिया होगा इस गीत के फिल्मांकन की शुरुआत में। पिछले गीत
में कल्याणजी आनंदजी के जिक्र से ये गीत याद आ गया। सन १९७८
की फिल्म दो मुसाफिर से ये युगल गीत लिया गया है। शशि कपूर
और रेखा पर फिल्माए गाये इस गीत में लता और रफ़ी की आवाजें हैं।
थोड़ा धीमा और कर्णप्रिय गीत है ये। ये उस दौर का गीत है जब अभिनेत्री
रेखा ने योग करना शुरू नहीं किया था। खड़े तो नायक नायिका हैं समुद्र
के किनारे और गीत में जिक्र नदी का है। इतने सुन्दर गीत में इतना तो
नज़र अंदाज़ किया ही जा सकता है, है ना ?

गीत लिखा है एम् जी हशमत ने । फिल्म का शीर्षक गीत है ये और फिल्म
में २-३ बार सुनाई देता है।




गीत के बोल:

हम हैं प्यार की , प्यार की ,
डगर के दो मुसाफिर
डगर के दो मुसाफिर
हम हैं प्यार की डगर के दो मुसाफिर
हो संग संग रहने का वादा हमारा
वादा हमारा लो वादा हमारा

हम हैं प्यार की, प्यार की,
डगर के दो मुसाफिर
डगर के दो मुसाफिर

जैसे नदिया का गहरा पानी
बन के बादल अम्बर चूमे
जैसे अपने प्यार की धुन
धरती सुने सागर सुने
प्यार ही ईश्वर प्यार ही पूजा
प्यार ही ईश्वर प्यार ही पूजा
प्यार से बढ़ के ना कोई

हम हैं प्यार की, प्यार की,
डगर के दो मुसाफिर
डगर के दो मुसाफिर

जैसे तन और मन का संगम
सांसों का संगीत सुनाये
ऐसे अपने प्यार की सरगम'
जनम जनम से ये दोहराए
हर प्रेमी में बसे थे हम तुम
हर प्रेमी में बसे थे हम तुम
और ना दूजा कोई

हम हैं प्यार की, प्यार की,
डगर के दो मुसाफिर
डगर के दो मुसाफिर

हो संग संग रहने का वादा हमारा
वादा हमारा लो वादा हमारा
हम हैं प्यार की डगर के दो मुसाफिर
डगर के दो मुसाफिर
डगर के दो मुसाफिर
.........................................
Hum hain pyar ki dagar ke-Do musafir 1978

Sunday, 3 April 2011

आजकल पांव ज़मीन पर-घर १९७५

बल्ले बल्ले हो गया जी, ये शब्द सुने मैंने कल जब भारत की
टीम ने विश्व कप जीता। तमाम प्रकार के नारे स्लोगन सुनाई दे
गये जिन्हें सुने हुए एक अरसा हो गया था । ये सब नारे सुनने को
मेरे भी कान सन १९८३ के बाद से तरस रहे थे।

मित्रों, क्षमा चाहूँगा होली के अवसर पर आपसे मुखातिब नहीं
हो पाया। रोजी रोटी कभी कभी ज्यादा चक्कर खिला दिया करती है।
इस चक्कर घिन्निये दौर में से कुछ समय निकाल कर आज जंग
लगे दिमाग को कुछ साफ़ करने की कोशिश करता हूँ।

तो साहब मार्च का पूरा महीना वर्ल्ड कप फीवर में गुज़रा। अब
भाफ्रत की टीम ने कप जीत लिया है तो कई दर्शक भी फूले
नहीं समा रहे। ऐसे में एक गीत पेश है जो खिलाडियों और
दर्शकों दोनों की भावनाओं को शायद समझा सके। ये मौका
ज़बरदस्त दिया टीम इंडिया ने देश की सवा अरब आबादी को
जश्न मनाने का।

गुलज़ार का लिखा ये गीत लता मंगेशकर ने गाया है और धुन
बनाई है राहुल देव बर्मन ने।



गीत के बोल:

आजकल पांव ज़मीन पर नहीं पढ़ते मेरे
आजकल पांव ज़मीन पर नहीं पढ़ते मेरे
बोलो देखा है कभी तुमने मुझे उड़ते हुए

आजकल पांव ज़मीन पर नहीं पढ़ते मेरे

जब भी थामा है तेरा हाथ तो देखा है
जब भी थामा है तेरा हाथ तो देखा है
लोग कहते हैं की बस हाथ की रेखा है
हमने देखा है जो तकदीरों को जुड़ते हुए

आजकल पांव ज़मीन पर नहीं पढ़ते मेरे
बोलो देखा है कभी तुमने मुझे उड़ते हुए

आजकल पांव ज़मीन पर नहीं पढ़ते मेरे

नींद सी रहती है हल्का सा नशा रहता है
रात दिन आँखों में एक तेरा पता रहता है
पर लगी आँखों को देखा है कभी उड़ते हुए

आजकल पांव ज़मीन पर नहीं पढ़ते मेरे
बोलो देखा है कभी तुमने मुझे उड़ते हुए

आजकल पांव ज़मीन पर नहीं पढ़ते मेरे

जाने क्या होता है हर बात पे कुछ होता है
दिन में कुछ होता है और रात में कुछ होता है
थाम लेना जो कभी देखो हमें उड़ते हुए

आजकल पांव ज़मीन पर नहीं पढ़ते मेरे
बोलो देखा है कभी तुमने मुझे उड़ते हुए

आजकल पांव ज़मीन पर नहीं पढ़ते मेरे

Friday, 21 January 2011

मैंने तुमको पिया कह दिया-नौकरी १९७८

हम चाहे कुछ भी कहें या फ़िल्मी पत्रकार चाहे जो समीक्षा करें,
राजेश खन्ना के ऊपर फिल्माए गए गीत कुछ अतिरिक्त जीवन्तता
वाले होते हैं। पिछले सुमधुर गीत के बाद आपको सुनवाते हैं
लता मंगेशकर का गाया एक अनजान सी फिल्म नौकरी से एक
गीत । ये गीत भी आनंद बक्षी की कलम की देन है मगर इसमें
संगीतकार छोटे बर्मन साहब हैं। पिछले गीत में राजेश खन्ना सफ़ेद
कुरता पहने हुए थे इस गीत में हल्का आसमानी रंग का है।

नायिका भी बदल गई हैं इस गीत में-अब आप देखेंगे जाहिरा को ।
जाहिरा अच्छे नाक नक्श होने के बावजूद ज्यादा फिल्मों में नहीं
नज़र आयीं। इस गीत को मैं एक क्यूट सोंग कहता हूँ, और आप ?



गीत के बोल:

मैंने तुमको पिया कह दिया
मैंने तुमको पिया कह दिया
अब कहने को क्या रह गया ?
अब कहने को क्या रह गया ?

सुनो तुमको पिया कह दिया
पिया तुमको पिया कह दिया

कहो क्या एक मुलाकात में
रहा क्या अब मेरे हाथ में
कहो क्या एक मुलाकात में
रहा क्या अब मेरे हाथ में

सारी बातें हैं इस बात में
पिया तुमको पिया कह दिया

मैंने तुमको पिया कह दिया
मैंने तुमको पिया कह दिया

कहने सुनने में ही सब है क्या
इन सवालों का मतलब है क्या
कहने सुनने में ही सब है क्या
इन सवालों का मतलब है क्या

पूछता है जहाँ अब ये क्या
प्यार हमने किया कह दिया

मैंने तुमको पिया कह दिया
अब कहने को क्या रह गया ?
अब कहने को क्या रह गया ?

पिया तुमको पिया कह दिया
मैंने तुमको पिया कह दिया

Thursday, 20 January 2011

झूम झूम आहा ...कल की फिकर-भोला भाला १९७८

चुम्बकीय प्रभाव के बिना मानव शरीर बेकार है। ये सिद्धांत लगभग
जीवन के हर क्षेत्र में महसूस कर सकते हैं आप। कितनी अभिनेत्रियाँ
आयीं और गयीं लेकिन सफलता और प्रसिद्धि कुछ के खाते में ही लिखी
थी।

भानुरेखा गणेशन उन भाग्यशाली अभिनेत्रियों में से एक हैं जिन्हें दर्शकों
ने पहली फिल्म सावन भादो से ही सर आँखों पर बिठाया। रेखा की ख़ास
बात ये है कि उनके सामान्य से लगने वाले गीत भी आकर्षक लगने लगते
हैं। ये उस चुम्बकीय प्रभाव कि वजह से है जो उन्हें ईश्वरीय देन है। गौर तलब
है हम केवल इस प्रभाव की बात कर रहे हैं। अभिनय के मामले में रेखा में
बहुत आगे चल के सुधर आया जब वे बॉलीवुड के सबसे प्रसिद्ध महानायक
के साथ फिल्मों में दिखाई देना शुरू हुयीं।

आनंद बक्षी के लिखे दार्शनिक से गीत की धुन बनाई है राहुल देव बर्मन ने।




गीत के बोल:

झूम झूम आ हा, झूम झूम आ हा
झूम झूम आ हा, झूम झूम आ हा
झूम झूम आ हा, झूम झूम आ हा
झूम झूम आ हा, झूम झूम आ हा
झूम झूम आ हा आ हा आ हा आ हा
आ हा
कल की फिकर करेगा जो वो दीवाना होगा
कल की फिकर करेगा जो वो दीवाना होगा
ज़िन्दगी है आज का दिन कल मर जाना होगा
कल की फिकर करेगा जो वो दीवाना होगा
ज़िन्दगी है आज का दिन कल मर जाना होगा

जीने का शौक है तो ज़िन्दगी को लूट लो
जीने का शौक है तो ज़िन्दगी को लूट लो
पीने का शौक है सागर किसी का छीन लो
इस जवानी की तरह एक कहानी की तरह
इस जवानी की तरह एक कहानी की तरह
झूम झूम आ हा, झूम झूम आ हा

कल ये सागर होगा ना ये पैमाना होगा
ज़िन्दगी है आज का दिन कल मर जाना होगा
ज़िन्दगी है आज का दिन कल मर जाना होगा

मिल जाता यार तो ये प्यार हम ना लूटते
मिल जाता यार तो ये प्यार हम ना लूटते
हम दिल ना तोड़ते जो दिल ना टूटते
के करें हम क्या करें
क्या जियें हम क्या मारें
के करें हम क्या करें
क्या जियें हम क्या मारें

झूम झूम आ हा, झूम झूम आ हा

ये खिलौने तोड़ के दिल बहलाना होगा
ये खिलौने तोड़ के दिल बहलाना होगा
ज़िन्दगी है आज का दिन कल मर जाना होगा
ज़िन्दगी है आज का दिन कल मर जाना होगा

कल की फिकर करेगा जो वो दीवाना होगा
ज़िन्दगी है आज का दिन कल मर जाना होगा
ज़िन्दगी है आज का दिन कल मर जाना होगा
..........................................
Kal ki fikar karega-Bhola bhala 1978

Sunday, 16 January 2011

एक दिन तुम-अंखियों के झरोखों से-१९७८

कुछ कुछ टकीला-शकीला के सॉफ्ट म्यूज़िक की याद दिलाता
ये गीत आकर्षक धुन में बंधा हुआ है। युवा प्रेम-आलाप पर बनी
साफ़ सुथरी फिल्म 'अंखियों के झरोखों से' फिल्म से लिया गया
ये गीत आज भी सुनने में कानों को सुकून देता है। नायक सचिन
और रंजीता पर फिल्माए गए इस गीत को लिखा और स्वरबद्ध
किया है रवीन्द्र जैन ने। रवीन्द्र जैन के इस गीत को सुनने के बाद
शायद उनकी versatility पर प्रश्नचिन्ह लगाने वालों को पुनः
विचार अवश्य करना चाहिए। प्रेमी दुनिया से किस कदर बेखबर
हो जाते हैं उसका अनूठा फिल्मांकन किया गया है इस गीत में।



गीत के बोल:



एक दिन तुम बहुत बड़े बनोगे एक दिन
चाँद से चमक उठोगे एक दिन
Will you forget me then?
How I can
Tell me, how I can


एक दिन तुम बहुत बड़े बनोगे एक दिन
चाँद से चमक उठोगे एक दिन
Will you forget me then?
How I can
Tell me, how I कैन

मान लो कहीं की शहजादी
बैठी हो तुम्हारे लिए ऑंखें बिछाए
और उसे जिद हो के वो शादी
किसी से ना करेगी तुम्हारे सिवा
Will you forget me then?

Yes, I can
If only you can

एक दिन ले गया तुम्हें जो कोई अजनबी
गैर की हो गई जो ये ज़िन्दगी
Will you forget me then?

Gentleman, oh no gentleman

सांस सांस में तुम्हारी ख़ुशबू
किस तरह जियूँगा बोलो तुमको भुला के
दिल पे जा के कर चुकी हो जादू
जानती हो पूछती हो फिर भी सता के
Will you forget me then?

Gentleman, I will gentleman

ला ला ला, ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
ला ला ला, ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला
..................................
Ek din-Ankhiyon ke jharokhon se 1978

Thursday, 6 January 2011

हिंदी फिल्मों में बरसात -मैं तो कारे बदरवा से हारी -देवता १९७८

फिल्म देवता से एक और गीत सुनिए। ये गीत है गायिका लता मंगेशकर
की आवाज़ में और बरसाती गीत भी कह सकते हैं इसको। बेंजामिन गिलानी
को आप अवश्य ही पहचानते होंगे। ये दूरदर्शन के कुछ सीरिअल में दिखाई दिया
करते थे। नायिका हैं शबाना आज़मी। गुलज़ार के लिखे बोलों को धुन में जकड़ा
है आर डी बर्मन ने। ये फिल्म का कम सुना गया गीत है मगर मेरे हिसाब से
सबसे ज्यादा सुनने लायक यही है। इसका संगीत कुछ अलग हटके है और धुन
थोड़ी तेज़ भी लगती है।




गीत के बोल:


मैं तो कारे बदरवा से हारी
.........................................

बाकी के बोल डिमांड पर..........................
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Main to kaare badarwa se haari-Devta 1978

Monday, 27 December 2010

कसमे वादे निभाएंगे हम-कसमे वादे १९७८

गुलशन बावरा की लेखनी भी कमाल की है। उन्होंने भी अपने बुजुर्ग गीतकारों
के मानिंद सरलता को अपना हथियार बनाया गीत लेखन के मामले में।
उनके लिखे कुछ गीत काव्यात्मक उपमाओं से परिपूर्ण हैं तो कुछ
बेहद सरल बोल चाल की भाषा वाले। सरलता की वजह से उनके कई
गीत श्रोताओं को गुनगुनाने में आसानी होती है। एक ऐसा ही गीत
सुनिए जिसके लिए उम्दा किस्म की धुन तैयार की थी राहुल देव बर्मन ने
फिल्म कसमे वाडे के लिए. गीत गा रहे हैं लता और किशोर। इसे
फिल्माया गया है अमिताभ बच्चन और राखी पर। ये फिल्म का सबसे
लोकप्रिय गीत है। वैसे तो इस फिल्म का संगीत खूब बजा है। रिलीज़ के वक़्त
इसके सभी गाने सुनाई देते थे जिसमे एक स्वयं संगीतकार की आवाज़ में
गाया हुआ गीत भी शामिल है जिसे हम आगे सुनेंगे इस ब्लॉग पर।





गीत के बोल:

हो ओ, हो ओ हो हो, हे हे
हो हो हो, हे हे हे


कसमें वादे निभाएंगे हम
मिलते रहेंगे जनम जनम

देखा मैंने तुझको तो मुझे ऐसा लगा
बरसों का सोया हुआ, प्यार मेरा जगा
तू हैं दिया, मैं हूँ बाती,
आ जा मेरे जीवन साथी

कसमें वादे निभाएंगे हम
मिलते रहेंगे जनम जनम

चेहरों से हो अनजाने हम, दिल तो दिल को पहचाने
कभी प्यार नहीं मरता है, पागल प्रेमी ही जाने
आ जाती हैं लैब पे खुद ही, भूली बिसरी बात

कसमें वादे निभाएंगे हम
मिलते रहेंगे जनम जनम

तू हैं मेरे जीने का सहारा, सदियों पुराना है साथ हमारा
तू हैं दिया, मैं हूँ बाती,
आ जा मेरे जीवन साथी

कसमें वादे निभाएंगे हम
मिलते रहेंगे जनम जनम

Tuesday, 21 December 2010

चाँद चुरा के लाया हूँ -देवता १९७८

आज फिल्म देवता से गीत सुनिए। ना ना, ये वो पुरानी देवता फिल्म
नहीं है जिसमें सी रामचंद्र का संगीत है। ये तो सन १९७८ में आई
संजीव कुमार और शबाना आज़मी की जोड़ी वाली फिल्म है जिसमें
उनके साथ एक और प्रतिभाशाली कलाकार डैनी ने काम किया। इस
फिल्म का संगीत काफी सुना गया और सराहा गया।

बदलाव के लिए आपको आज फिल्म का सबसे लोकप्रिय गीत पहले
सुनवाते हैं। इसे गाया है लता और किशोर ने। बोल हैं एक नामचीन
गीतकार के और संगीत है आर दी बर्मन का। इस फिल्म का प्रोमो रेडियो
पर खूब बजा करता और उसमें संजीव कुमार का एक डॉयलॉग सुनवाया
जाता जिसे हम अगली पोस्ट में पढेंगे। बोल किसके हैं पहचानिए और
ना पहचान पायें तभी गीत के टैग देखें।



गीत के बोल:

चाँद चुरा के लाया हूँ
चाँद चुरा के लाया हूँ
चल बैठें चर्च के पीछे
हो, ना कोई देखे ना पहचाने
बैठें पेड़ के नीचे
अरे चल बैठें चर्च के पीछे

कल बापू जाग गए थे मेरी लाज की सोचो
कल बापू जाग गए थे मेरी लाज की सोचो
अरे जो होना था कल हुआ था
आज तो आज की सोचो
जाग गए तो
जागने दो
अच्छा
हाँ
तो फिर चल बैठें चर्च के पीछे
ओ चाँद चुरा के लाई हूँ
ओ चाँद चुरा के लाई हूँ
चल बैठें चर्च के पीछे

चल दरिया पर कश्ती ले चल दूर कहीं बह जाएँ
चल दरिया पर कश्ती ले चल दूर कहीं बह जाएँ
हो ढूँढ ना पाएँ बस्ती वाले साहिल से कह जाएँ
बोल दिया तो
बोलने दो ना
अच्छा
हाँ
तो फिर चल बैठें चर्च के पीछे

Friday, 26 November 2010

हमका धोखा हुई गवा-बेशरम १९७८

आपने पिछली एक पोस्ट में कल्याणजी आनंदजी के
संगीत निर्देशन में लता मंगेशकर का गाया एक गीत सुना
था जो फिल्म कर्मयोगी से लिया गया था। गीत फिल्माया
गया था रीना रॉय पर। अब अभिनेत्री बदल देते हैं जी।

अब आपको लता का एक और गीत सुनवाते हैं जो शर्मिला
टैगोर पर फिल्माया गया है फिल्म बेशरम(१९७८) में।
अमिताभ बच्चन टैगोर टैगोर कि जोड़ी वाली ये फिल्म
ज्यादा नहीं चली बस यही एक गीत रेडुआ पर बज बज के
इस फिल्म कि यादें ताज़ा करता रहा। गौरतलब है कि इस
फिल्म में अमजद खान भी हैं जो शायद फिल्म शोले के
बाद सीधे इसी फिल्म में अमिताभ के साथ दिखाई दिए।

गाने की एक खूबी बस बतलाऊँगा आपको-इसमें नृत्य तो
बढ़िया हो ही रहा है साथ साथ संगीतमय कपडा धुलाई हो
रही है।

आम आदमी की भाषा में बात करें तो- शर्मिला सामने बैठी
बिंदु को चिढाने के लिए इत्ता अच्छा नाच रही है-के-मैं भी
तेरे जैसे ठुमके लगा सकती हूँ।




गीत के बोल:

चोरी चोरी चुपके चुपके
मिलने मैं आती थी
प्यार भरी बतियान मैं,
रोज़ सुनती थी
मगर तुम ना समझे
हमका धोखा हुई गवा
धोखा हुई गवा
मगर तुम ना समझे
हमका धोखा हुई गवा
धोखा हुई गवा

चोरी चोरी चुपके चुपके
मिलने मैं आती थी
प्यार भरी बतियान मैं,
रोज़ सुनती थी
मगर तुम ना समझे
हमका धोखा हुई गवा
धोखा हुई गवा
धोखा हुई गवा
हाय हाय, धोखा हुई गवा

याद करो, याद करो वो बातें
तारों भरी रातें
जब हम मिले थे नदिया किनारे
चंदा ने चुपके चुपके
बदली से छुप के
हंस कर किये थे वो जो इशारे
वो चंदा के इशारे
मैं समझ गई थी सारे

मगर तुम ना समझे
हमका धोखा हुई गवा
धोखा हुई गवा
धोखा हुई गवा
हाय राम धोखा हुई गवा

तुमने हमें ना जाना
ना जाना
तुमने हमें ना जाना
बड़े नादान हो, बड़े नादान हो
हमने तुम्हे पहचाना
बड़े बेईमान हो, बड़े बेईमान हो
संग बैठे हो सौतन के,
यहाँ टुकड़े हो गए मन के

मगर तुम ना समझे
हमका धोखा हुई गवा
धोखा हुई गवा
धोखा हुई गवा
हाय राम, धोखा हुई गवा

Wednesday, 24 November 2010

एक बात कहूं मैं सजना-कर्मयोगी १९७८

रीना रॉय का नाम काफी लोग भूल चुके हैं सिवा उन लोगों के
जो रीना के ज़बरदस्त फैन हैं। एक गीत सुनवाते हैं आपको
लता मंगेशकर का गाया हुआ जो रीना रॉय पर फिल्माया गया
है फिल्म कर्मयोगी में। इस फिल्म में उनके साथ नायक हैं
जीतेंद्र। ये गीत मुझे बहुत पसंद है। इसका विडियो देखें या
ना देखें गीत की मधुरता पर कोई फर्क नहीं पढने वाला। अलबत्ता
रीना रॉय की खूबसूरत मुस्कान देखने के लिए आपको ये गीत
अवश्य देखना पड़ेगा। और नहीं देख्नेगे तो जितनी तबियत से
रीना रॉय फैन ने इस विडियो को अपलोड किया है उसका दिल
भी दुखेगा ना।

मैं तो बस इतना बताना चाह रहा था की रीना रॉय को गायिका
लता मंगेशकर के कुछ बहुत बढ़िया गीत मिले परदे पर।
आपको कालीचरण का 'जा रे जा ओ हरजाई' तो याद होगा ही,
या फिर जे पी दत्ता की ग़ुलामी का "मेरे पी को पवन" याद कीजिये।

संगीत तैयार किया है कल्याणजी आनंदजी ने और इसके बोल
लिखे हैं वर्मा मालिक ने। अब ना कहियेगा कि कल्याणजी आनंदजी
ने केवल इन्दीवर के साथ ही काम किया है।



गीत के बोल:

एक बात कहूं मैं सजना
एक बात कहूं मैं सजना
तुझको मैं समझ के अपना

दिल चाहे मेरा तेरे संग रहना
दिल चाहे मेरा तेरे संग रहना
रहना
ये बात किसीसे ना कहना, ना कहना
ये बात किसीसे ना कहना

एक बात कहूं मैं सजना

बिन सोचे बिन समझे
मैं तो हो गई तेरे बस में
हो ओ, हो गई तेरे बस में
देखो तेरी मेरी एक बात है जो
हाँ ये बात रहे आपस में
जिन नैनों ने तुझको चाह
आज मिले वो नैना
ये बात किसीसे ना कहना, ना कहना
ये बात किसीसे ना कहना

एक बात कहूं मैं सजना

तेरी याद से, तेरे प्यार से
मेरी धड़कन ने कर ली सगाई
हो ओ, धड़कन ने कर ली सगाई
तुझे पा लिया, अपना लिया
मुझे ना समझना परायी
चाहती हूँ जीवन भर मैं
तेरे सपनों में रहना
ये बात किसीसे ना कहना, ना कहना
ये बात किसीसे ना कहना

एक बात कहूं मैं सजना
तुझको मैं समझ के अपना
दिल चाहे मेरा तेरे संग रहना, रहना
ये बात किसीसे ना कहना, ना कहना
ये बात किसीसे ना कहना

एक बात कहूं मैं सजना
 
 
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