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Monday, 22 July 2013

तुझे दिल की बात बता दूं-मैं सुन्दर हूँ १९७१


इस ब्लॉग के पाठकों का स्वागत है एक बार फिर से. 

फ़िल्मी गीतों ने हमें बहुत कुछ सिखाया है. शेर शायरी न आती हो तो
प्रेम का इज़हार गीत गा कर कर दो वगैरह वगैरह.....

बेबी डॉल से लगा कर उडद दाल तक हमने सालों के फ़िल्मी सफर में
बहुत कुछ देखा है. फ़िल्मी बेबी डॉल बहुतेरी आयीं हैं अभी तक. प्रभाव
बहुत कम छोड़ पायी हैं दर्शकों के मन पर.

आज आपको सत्तर के दशक की एक प्रभावशाली डॉल से मिलवाते हैं.
फिल्म का नाम है -मैं सुन्दर हूँ. फिल्म के नाम से लगता है मानो ये
नायिका के बारे में जिक्र हो रहा हो. अगर ऐसा है तो एकदम सटीक है

गाना पी टी एक्सरसाइज़ से भरपूर है. गर इसमें एक दो लाइन औरत
होतीं तो संभवतः इस प्रकार से होतीं -तुझे क्या मैं पी टी सिखा दूं, नहीं नहीं,
नहीं नहीं किसी को सिखा देगी तू,

गीत मधुर है और जयकिशन की धुन तैर रही है आनंद बक्षी के बोलों पर.यूँ कहें
आनंद बक्षी के बोल तैर रहें हैं जयकिशन की धुन पर. जो भी हो कुछ हो ज़रूर रहा है
गौर तलब है इस फिल्म के गीतों को बक्षी साहब ने ही लिखा है. शंकर जयकिशन के
पुराने साथी शैलेन्द्र और हसरत के गीत इस फिल्म में नहीं हैं.



गीत के बोल:

नहीं नहीं नहीं , नहीं बताऊंगी

तुझे दिल की बात बता दूं
नहीं नहीं, नहीं नहीं
किसी को बता देगी तू
कहानी बना देगी तू

इस राधा ने खेली अपने श्याम से होली भी
इस राधा ने खेली अपने श्याम से होली भी
होली क्या सपने में खेली आंख मिचोली भी
तुझे मैं ये खेल सिखा दूं
नहीं नहीं, नहीं नहीं
किसी दिन दगा देगी तू,
कहानी बना देगी तू

तुझे दिल की बात बता दूं
नहीं नहीं, नहीं नहीं
किसी को बता देगी तू
कहानी बना देगी तू

अपनी जुल्फों से अपनी ज़ंजीर बनायीं है
अपनी जुल्फों से अपनी ज़ंजीर बनायीं है
मैंने ख्यालों में कोई तस्वीर बनायीं है
तुझे वो तस्वीर दिखा दूं
नहीं नहीं, नहीं नहीं
किसी को दिखा देगी तू
कहानी बना देगी तू 

तुझे दिल की बात बता दूं
नहीं नहीं, नहीं नहीं
किसी को बता देगी तू
कहानी बना देगी तू
.................................................................................
Tujhe dil ki baat bata doon-Main sundar hoon 1971


Wednesday, 20 July 2011

ये रात भी है जवान-डॉक्टर एक्स १९७१

सोनिक ओमी की जोड़ी द्वारा बनायीं गई एक धुन वाला गीत सुनते हैं.
फिल्म का नाम आपने शायद ही सुना हो-डॉक्टर एक्स. इस फिल्म के
गीत भी एक्स रे के माध्यम से ढूँढने पढते हैं. दुर्लभ जो हैं. हेलन पर
फिल्माए गए काफी गीत आप सुन चुके होंगे. इसको भी सुनिए. इसमें
भी वो सब मसाला है जो एक कैबरे गीत में होना चाहिए. आकर्षक
संगीत, झकास बोल और आशा भोंसले की आवाज़.




गीत के बोल:

ये रात भी है जवान
सुन ले दिल की जुबान
ओ जानेजान
शराबी है समां तुझसे

ये रात भी है जवान
सुन ले दिल की जुबान
ओ जानेजान
शराबी है समां तुझसे, हिक

ओऊ, ओऊ

मेरी अदाओं पे लुटाया
लाखों ने दिल
मेरी ही राहों में पे बिछाया
लाखों ने दिल
मेरी अदाओं पे लुटाया
लाखों ने दिल
मेरी ही राहों में पे बिछाया
लाखों ने दिल
दिल में मेरे तू ही समाया

शराबी है समां तुझसे,
आ हा आ हा हे

ये रात भी है जवान
सुन ले दिल की जुबान
ओ जानेजान
शराबी है समां तुझसे, ह्यक

मैंने तो खुद को निखारा
तेरे लिए
गोरे बदन को संवारा
तेरे लिए
आये हाय, मैंने तो खुद को निखारा
तेरे लिए
गोरे बदन को संवारा
तेरे लिए
तेरी नशीली निगाहों ने मारा
शराबी है समां तुझसे,
आ हा आ हा हे

ये रात भी है जवान
सुन ले दिल की जुबान
ओ जानेजान
शराबी है समां तुझसे,
आ हा आ हा हे

ये रात भी है जवान
सुन ले दिल की जुबान
ओ जानेजान
शराबी है समां तुझसे, ह्यक
............................
Ye raat bhi hai jawan-Doctor X 1971

Tuesday, 19 July 2011

सुनो सुनो एक बात कहूँ -मेमसाब १९७१

नाव नायक नायिका के साथ घूम रही है या नायक नायिका नाव में बैठ
के घूम रहे हैं बूझिये इस गीत में.

विनोद खन्ना के साथ योगिता बाली हैं और दोनों स्टीमर में गीत गा
रहे हैं. यू ट्यूब के बहाने इस गीत को अरसे बाद सुनने का मौका मिल
गया. आत्मा राम की फिल्म है इसलिए संगीत ठीक ठाक है इसका.
गीत लिखा है वर्मा मालिक ने और धुन बनायीं है सोनिक ओमी ने.

इस गीत में जो तेरा-मेरा बोला जा रहा है वो आसानी से याद रह जाता है.
गीत कि खूबी ये है कि ये कई संगीतकारों कि याद दिला देता है, कभी
शंकर जयकिशन की, कभी आर डी बर्मन की तो कभी कल्याणजी आनंदजी
की, तो किसी जगह मदन मोहन की और जहाँ जगह बची है वहां वहां
लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की.

गाना खत्म होते होते बोट का आकार बदल जाता है और वो छोटा जहाज बन
जाती है. फिल्मांकन बढ़िया जगहों पर हुआ लगता है इस गीत का.




गीत के बोल:

सुनो सुनो एक बात कहूँ
कहो जी पिया मैं सुनती हूँ
कि तेरा मेरा,
कभी ये साथ न छूटे
बात न टूटे
चाहे, चाहे ये दुनिया रूठे

सुनो सुनो एक बात कहूँ
कहो जी पिया मैं सुनती हूँ
कि तेरा मेरा,
कभी ये साथ न छूटे
बात न टूटे
चाहे, चाहे ये दुनिया रूठे

लहरों से है मिले किनारे
हो ओ, लहरों से है मिले किनारे
फूलों से भी मिले नज़ारे
किसी का कोई, किसी का कोई
मुझको तेरे सहारे
आ आ आ , बहता पानी है मेरा दामन
हो ओ ओ ,बहता पानी है मेरा दामन
छोडूं न मैं तेरा दामन
ऐसे मिलूँ मैं तुझ में ओ गोरी
जैसे पानी में चन्दन
जैसे हो पानी में चन्दन

यही तमन्ना करती हूँ
सदा मैं तेरे संग रहूँ
कि तेरा मेरा,
कभी ये साथ न छूटे
बात न टूटे
चाहे, चाहे ये दुनिया रूठे

ये जो मेरा सारा जीवन
हो ओ ओ ये जो मेरा सारा जीवन
है गोरी ये तेरे अर्पण
तू ही तो मेरे प्यार की मूरत
मैं हूँ तेरा ही दर्पण
आ आ आ दिल मेरा तो है घबराया
हो ओ ओ दिल मेरा तो है घबराया
दुनिया से है मुझे दर आया
मैंने तो चलती आंधी में साजन
आशा का दीपक जलाया
आशा का दीप जलाया
इस दीपक से प्यार करूं
जनम जनम तक साथ रहूँ

कि तेरा मेरा,
कभी ये साथ न छूटे
बात न टूटे
चाहे, चाहे ये दुनिया रूठे

सुनो सुनो एक बात कहूँ
कहो जी पिया मैं सुनती हूँ
कि तेरा मेरा,
कभी ये साथ न छूटे
बात न टूटे
चाहे, चाहे ये दुनिया रूठे
....................................
Suno suno ek baat kahoon-Memsaab 1971

Tuesday, 12 July 2011

आयो कहाँ से घनश्याम-बुड्ढा मिल गया १९७१

मन्ना डे की लाजवाब, बेमिसाल गायकी का एक शानदार नमूना।
सुनते रहिये बस । इसको सुनकर मैं कभी नहीं थकता । फिल्म
बुड्ढा मिल गया में इसे फिल्माया गया है प्रसिद्द चरित्र अभिनेता
ओमप्रकाश पर. फिल्म बुड्ढा मिल गया में इसे फिल्माया गया है
प्रसिद्द चरित्र अभिनेता ओमप्रकाश पर. गीत के अंत में नायिका
अर्चना की आवाज़ है. पोस्ट का ड्राफ्ट २ साल से पढ़ा हुआ था आज
सोचा इसे पोस्ट कर ही दिया जाए.







गाने के बोल:

हाँ हाँ आं, आ आ आ , रे

आयो कहाँ से घनश्याम
आयो कहाँ से घनश्याम

रैना बितायी किस धाम
रैना बितायी किस धाम
हाय राम

आयो कहाँ से घनश्याम
आयो कहाँ से घनश्याम

रात की जागी रे,
रात की जागी रे
अँखियाँ हैं तोरी
रात की जागी रे
अँखियाँ हैं तोरी
हो रही गली गली
जिया की चोरी
हो रही गली गली
जिया की चोरी
हो नहीं जाना बदनाम
हाय राम

आयो कहाँ से घनश्याम
हाय राम
आयो कहाँ से घनश्याम
आयो कहाँ से घनश्याम

सज धज तुमरी का कहूं रसिया
ध नि ध ध , ध नि ध ध, म ध प्,
म प् म, रे म गा, म ग सा नि सा नि सा
नि सा ग म ग,सा गा म प् नि गा म,
प् नि सा गा म सा नि नि प् म गा सा म प्

सज धज ठुमरी का कहूं रसिया
ऐसे लगे तेरे हाथों में बंसिया
ऐसे लगे तेरे हाथों में बंसिया
जैसे कटारी लियो थाम
जैसे कटारी लियो थाम
हाय राम

आयो कहाँ से घनश्याम
आयो कहाँ से घनश्याम
आयो कहाँ से घनश्याम
आयो कहाँ से घनश्याम


मैं न कहूं कछु
मोसे न रूठो
मैं न कहूं कछु
मोसे न रूठो
तुम ख़ुद अपने जियरा से पूछो
तुम ख़ुद अपने जियरा से पूछो
बीती कहाँ पे कल शाम

आयो कहाँ से घनश्याम
आयो कहाँ से घनश्याम
श्याम,
आयो कहाँ से घनश्याम
श्याम रे
आयो कहाँ से घनश्याम
...........................
Aayo kahan se ghanshyam-Buddha mil gaya 1971

Saturday, 2 July 2011

दर्पण को देखा-उपासना १९७१

थोड़ा साहित्यिक हुआ जाये फिर से ? कुछ संगीत प्रेमियों का
दोमुंहापन कभी कभी खटकता है मुझे। अगर 'आईना' बोलें तो
साहित्यिक नहीं होता मगर जब 'दर्पण' बोल दिया तो साहित्यिक
हो गया। दरअसल हम खिचड़ी भाषा युग में जी रहे हैं जिसकी
हिंगलिश ने भी कस के वाट लगा दी है जो धीरे धीरे कई किलोवाट
तक हो जाएगी।

गीत में, नायिका असमंजस में है-क्यूँ है-थोड़ा प्रकाश डालते हैं-
फिल्म उपासना में मुमताज़ संजय खान से प्रेम करती हैं।
संजय खान को मुमताज़ मजबूरीवश छोडती है जिसके लिए उस
दुष्ट महकमे के लोग ज़िम्मेदार होते हैं जिनके लिए वो अनजाने
में काम करती है। एक गुंडे की चम्पी करने के बाद जब वो भाग
रही होती है तभी फिरोज खान कि कार से टकरा जाती है। फिरोज
खान उसे घर ले आता है और उसकी देखभाल करता है । जब वो
ठीक हो जाती है तब उसे गीत सुनाता है। नायिका के ठीक होने की
प्रक्रिया में नायक उससे प्रेम करने लगता है। शराफत के ज़माने
का गीत है इसलिए नायक घुमा फिर के उससे अपने प्रेम का इज़हार
कर रहा है और अपनी बदनसीबी की गिला रो रहा है।

या तो नायिका किसी नए सम्बन्ध में नहीं उलझना चाहती या फिर
उसकी मानसिक स्तिथि नायक की भावनाओं को समझने लायक
नहीं हुई है। ज्यादा जाने के लिए देखें फिल्म उपासना।

मुकेश के सबसे लोकप्रिय गीतों में इसकी गिनती होती है । इसे लिखा
है इन्दीवर ने और इसकी धुन बनाई है कल्याणजी आनंदजी ने। गीत
में सरल हिंदी बोलों का समावेश है और ये उतना साहित्यिक नहीं जितना
की पब्लिक इसको बतलाती है। इसके अलावा इसमें उर्दू शब्द भी
बहुतेरे हैं।



गीत के बोल:

दर्पण को देखा
तूने जब जब किया श्रृंगार

दर्पण को देखा
तूने जब जब किया श्रृंगार

फूलों को देखा
तूने जब जब आई बाहर

एक बदनसीब हूँ मैं
एक बदनसीब हूँ मैं
एक बदनसीब हूँ मैं,
मुझे नहीं देखा एक बार

दर्पण को देखा
तूने जब जब किया श्रृंगार

सूरज की पहली किरणों को
देखा तूने अलसाते हुए
सूरज की पहली किरणों को
देखा तूने अलसाते हुए
रातों में तारों को देखा
सपनो में खो जाते हुए

यूं किसी ना किसी बहाने
यूं किसी ना किसी बहाने
तूने देखा सब संसार
तूने देखा सब संसार

दर्पण को देखा
तूने जब जब किया श्रृंगार

काजल की किस्मत क्या कहिये
नैनों में तुमने बसाया है
काजल की किस्मत क्या कहिये
नैनों में तुमने बसाया है
आँचल की किस्मत क्या कहिये
तुमने अंग लगाया है

हसरत ही रही मेरे दिल में
हसरत ही रही मेरे दिल में
बनूँ तेरे गले का हार
बनूँ तेरे गले का हार

दर्पण को देखा
तूने जब जब किया श्रृंगार

फूलों को देखा
तूने जब जब आई बाहर

एक बदनसीब हूँ मैं
एक बदनसीब हूँ मैं
एक बदनसीब हूँ मैं,
मुझे नहीं देखा एक बार

दर्पण को देखा
तूने जब जब किया श्रृंगार
...............................
Darpan ko dekha-Upasana 1969

Saturday, 25 June 2011

तेरे होंठों के दो फूल-पारस १९७१

पारस फिल्म से तीसरा गीत पेश है जो कि एक युगल गीत है
मुकेश और लता की आवाजों में। होंठों को फूलों का दर्ज़ा प्रदान
किया है कुछ कवियों ने और गीत रचईताओं ने। पंखुड़ियों से
तुलना सामान्य विशेषण है लेकिन फूल कहना उसके दर्जे को
बढ़ाना है। वही हाल है जब नायिका आँखों के दो तारों की बात
करती है। गीतकार ने दोनों के लिए एक स्टार से विशेषण का
इस्तेमाल किया हैं। संतुलन ऐसे ही बनाया जाता है ।

प्यार अँधा होता है और बहरा होता है ये साबित करने के कुछ
प्रतीकों की ज़रुरत पढ़ती है कभी कभी। प्यार में हरी घास भी
पालक पनीर नज़र आने लग जाती है। ये वो खुश-खुमारी है
जिसके आगे अच्छे अच्छे पानी भर लेते हैं। प्यार में लॉजिक
इत्यादि नहीं चला करते हैं। इस मामले में अक्सर भैंस का
आकार अकल से बड़ा ही मालूम पढता है।

गीत कि धुन इमानदारी से कहूं तो- आकर्षक है और ये आनंदित
करने वाला गीत है। गीत का फिल्मांकन भी उम्दा किस्म का है।
इसके अलावा इस गीत में सभी elements मौजूद हैं फ़िल्मी
गीत के, नायक नायिका ने स्नान भी कर लिया है गीत में।

कल्याणजी आनंदजी भाई ने देसी ख़ुशबू वाले संगीत के सहारे
अपनी गाडी इतनी दूर तक दौडाई कि अति शास्त्रीयता की खुमारी
से ग्रसित संगीतकार भी दांतों तले ऊँगली दबाते नज़र आये।




गीत के बोल:

तेरे होंठों के दो फूल प्यारे-प्यारे
तेरे होंठों के दो फूल प्यारे-प्यारे
मेरे प्यार की बहारों के नज़ारे
अब मुझे चमन से क्या लेना, क्या लेना

तेरी आँखों के दो तारे प्यारे-प्यारे
मेरी रातों के चमकते सितारे
अब मुझे गगन से क्या लेना, क्या लेना

तेरे होंठों के दो फूल प्यारे-प्यारे

तेरी काया कंचन-कंचन किरणों का है जिसमें बसेरा
तेरी साँसें महकी-महकी तेरी ज़ुल्फ़ों में ख़ुशबू का डेरा
तेरा महके अंग-अंग जैसे सोने में सुगंध
मुझे चंदन-वन से क्या लेना, क्या लेना

तेरी आँखों के दो तारे प्यारे-प्यारे
मेरी रातों के चमकते सितारे

मैने देखा जबसे तुझको मेरे सपने हुए सिंदूरी
तुझे पा के मेरे जीवन-धन हर कमी हुई मेरी पूरी
पिया एक तेरा प्यार मेरे सोलह सिंगार
मुझे अब दर्पण से क्या लेना, क्या लेना

तेरे होंठों के दो फूल प्यारे-प्यारे
मेरे प्यार की बहारों के नज़ारे

तेरा मुखड़ा दमके-चमके जैसे सागर पे चमके सवेरा
तेरी बाँहें प्यार के झूले तेरी बाँहों में झूले मन मेरा
तेरी मीठी हर बात
तेरी मीठी हर बात
रस की है बरसात
हमें अब सावन से क्या लेना, क्या लेना

तेरे होंठों के दो फूल प्यारे-प्यारे
तेरी आँखों के दो तारे प्यारे-प्यारे
अब मुझे चमन से क्या लेना, क्या लेना
अब मुझे गगन से क्या लेना, क्या लेना

हमें क्या लेना, क्या लेना
हमें क्या लेना, क्या लेना
.................................
Tere honthon ke do phool-Paaras 1971

सजना के सामने मैं तो रहूंगी-पारस १९७१

यकायक, अचानक, तुरंत फुरंत जब कोई गीत याद आता है
है तो उसे सुनवाने कि इच्छा हो ही जाती है। अभिनेत्री राखी
को आपने अधिकांश चलचित्रों में भारतीय नारी की पोषाक
और वेश भूषा में ही देखा होगा। आज आपको एक ऐसा गीत
सुनवाते हैं जिसमें वे विलायती बाला जैसी नज़र आती हैं।
इन्दीवर के लिखे गीत को गा रही हैं आशा भोंसले और गीत
की तर्ज़ बनाई है कल्याणजी आनंदजी ने।



गीत के बोल :

सजना के सामने मैं तो रहूंगी चुप, चुप
आ हा, सजना के सामने मैं तो रहूंगी चुप
बोल उठी अँखियाँ तो क्या होगा
हाय हाय क्या होगा
बोल उठी अँखियाँ तो क्या होगा
हाय हाय क्या होगा
अंखियों में छ गया नशा भीगा भीगा
अंखियों में छ गया नशा भीगा भीगा
जान गई सखियाँ तो क्या होगा
हाय हाय क्या होगा
जान गई !

ओ रातों को, रातों को ?
आ हा रातों को
रातों को उड़ उड़ के कहती है निंदिया
ऐ री लागेगी कब मेरे माथे पे बिंदिया
मन की अभी तक मन में छुपी है
फ़ैल गई, फ़ैल गई बतियाँ तो क्या होगा
हाय हाय क्या होगा

सजना के
सजना के सामने मैं तो रहूंगी चुप, चुप

हो ओ ऐसी लगी
कैसी लगी ?
हा हा ऐसी लगी
ऐसी लगी आग मेरे सीने में प्रीत की
हाय याद आये घडी घडी अनदेखे मीत की
दिन तो गुज़रूंगी कर कर के बतियाँ
गुजरी ना
गुजरी ना रतियाँ तो क्या होगा
हाय हाय क्या होगा
क्या होगा ?

सजना के सामने मैं तो रहूंगी चुप, चुप

हा चोरी चोरी
चोरी चोरी ?
आ हा चोरी चोरी
चोरी चोरी सपने में आता है कोई
फिर उसके ख्यालों में रहूँ खोयी खोयी
बान के दीवानी लिख दी जो मैंने
पकड़ी गई
पकड़ी गई पतियाँ तो क्या होगा
हाय हाय क्या होगा

सजना के
सजना के सामने मैं तो रहूंगी चुप, चुप
आ हा सजना के सामने मैं तो रहूंगी चुप
बोल उठी अँखियाँ तो क्या होगा
हाय हाय क्या होगा
बोल उठी अँखियाँ तो क्या होगा
हाय हाय क्या होगा
बोल उठी अँखियाँ तो क्या होगा
हाय हाय क्या होगा
...............................
Sajna ke samne main to rahoongi-Paaras 1971

Wednesday, 8 June 2011

ज़ुबाँ पे दर्द भरी दास्ताँ चली आई-मर्यादा १९७१

चली आई, कौन ? वही भूली दास्तान ख्यालों में फिर से। फिर वो
भूली सी याद आई है, आई ज़रूर है मगर मुकेश के गीत की शक्ल
में।

आज मुकेश का एक अमर गीत सुना-वक़्त करता जो वफ़ा तो दिल
भारी सा हो आया और इसी गफलत और सिलसिले में एक और दर्द
भरा गीत याद आया ।

आइये सुनें राजेश खन्ना के ऊपर फिल्माया गया मुकेश का गाया
खूबसूरत गीत जो फिल्म मर्यादा(१९७१) से लिया गया है। मुकेश
के इस लोकप्रिय गीत के बोल लिखे हैं आनंद बक्षी ने और धुन
बनाई है कल्याणजी आनंदजी ने।



गीत के बोल:

ज़ुबाँ पे दर्द भरी दास्ताँ चली आई
ज़ुबाँ पे दर्द भरी दास्ताँ चली आई
बहार आने से पहले खिजां चली आई
ज़ुबाँ पे दर्द भरी दास्ताँ चली आई

ख़ुशी की चाह में मैं ने उठाये रंज बड़े
ख़ुशी की चाह में मैं ने उठाये रंज बड़े
मेरा नसीब की मेरे क़दम जहाँ भी पड़े
ये बदनसीबी मेरी भी वहाँ चली आई

ज़ुबाँ पे दर्द भरी दास्ताँ चली आई

उदास रात है वीरान दिल की महफ़िल है
उदास रात है वीरान दिल की महफ़िल है
न हमसफ़र है कोई और न कोई मंज़िल है
ये ज़िंदगी मुझे लेकर कहाँ चली आई

ज़ुबाँ पे दर्द भरी दास्ताँ चली आई
बहार आने से पहले खिजान चली आई
ज़ुबाँ पे दर्द भरी दास्ताँ चली आई
...............................
Zuban pe dard bhari dastaan-Maryada 1971

Monday, 23 May 2011

डोली में बिठाई के कहार-अमर प्रेम १९७१

अभिनेत्री शर्मिला टैगोर की शायद सबसे यादगार फिल्मों
में से एक है-अमर प्रेम, सन १९७१ की फिल्म जो एक मील का
पत्थर फिल्म भी है हिंदी सिनेमा इतिहास की। फिल्म एक से
बढ़ कर एक नायब गीतों से भरी हुई है। फिल्म के ३ गीत मुझे
बेहद पसंद हैं, प्रस्तुत गीत उनमें से एक है। इस फिल्म के गीत
आनंद बक्षी के लिखे हुए हैं। संगीत तैयार किया है आर डी बर्मन
ने। इस गीत को आर डी के पिता सचिन देव बर्मन ने गाया है। ये
संभवतः पुत्र के संगीत निर्देशन में पिता का गाया हुआ एकमात्र
गीत है। एस. डी. बर्मन ने हिंदी में कम ही गीत गाये हैं, मगर जितने
भी गाये हैं वे गुणवत्ता की दृष्टि से उत्तम की श्रेणी में आते हैं। उनकी
भारी सी, खनक और खरखराहट के मिश्रण वाली आवाज़ में अजीब
आकर्षण है। गीत को बांसुरी कि आवाज़ ने और मर्मस्पर्शी बना दिया
है। गीत फिल्म में दो हिस्सों में सुनाई देता है। उस दयालु आत्मा का
धन्यवाद् जिसने दोनों हिस्सों को जोड़कर यू-ट्यूब पर प्रस्तुत किया है।




गीत के बोल:

हो रामा रे, हो रामा

डोली में बिठाई के कहार
डोली में बिठाई के कहार
लाये मोहे सजना के द्वार
हो, डोली में बिठाई के कहार

बीते दिन खुशियों के चार
दे के दुख मन को हजार
डोली में बिठाई के कहार

मर के निकलना था, हो
मर के निकलना था घर से सँवरिया के,
जीते-जी निकलना पड़ा
फूलों जैसे पावों में पड़ गए छाले,
काँटों पे जो चलना पड़ा
पतझड़, बन गई
पतझड़, ओ बन गई
पतझड़ बैरन बहार।

डोली में बिठाई के कहार

जितने हैं अनसुन मेरी, ओ
जितने हैं आँसू मेरी अँखियों में उतना
नदिया में नाहि रे नीर
ओ लिखने वाले तूने लिख दी ये कैसी मेरी,
टूटी नैया जैसी तकदीर।
रूठा मांझी, ओ मांझी
रूठा मांझी, ओ मांझी रे
रूठा माँझी टूटे पतवार।

डोली में बिठाई के कहार

टूटा पहले मेरा मन हो
टूटा पहले मनवा में, चूड़ियाँ टूटीं,
हुए सारे सपने यूँ चूर
कैसा हुआ धोखा आया, पवन का झोंका,
मिट गया मेरा सिंदूर।
लुट गए ओ रामा
लुट गए ओ रामा मेरे
लुट गए सोलह श्रृंगार

डोली में बिठाई के कहार
लाये मोहे सजना के द्वार
हो, डोली में बिठाई के कहार
..................................
Doli mein bithayi ke kahar-Amar prem 1971

Tuesday, 23 November 2010

मन मेरा तुझको माँगे -पारस १९७१

बिना विवरण के गीत सुन लीजिये एक फिल्म पारस(१९७१) से।
यह गायिका सुमन कल्याणपुर का एक लोकप्रिय गीत है।

गायिका : सुमन कल्याणपुर
गीतकार: इन्दीवर
संगीतकार: कल्याणजी आनंदजी।



गीत के बोल:

मन मेरा तुझको माँगे, दूर दूर तू भागे
मन मेरा तुझको माँगे और दूर दूर तू भागे
मैं ऐसी उलझी सैयाँ
तेरा प्यार बना है देखो भूल भुलैया
तेरा प्यार बना है देखो भूल भुलैया

ओ हो, ओ हो हो
कहो ये प्रीत कैसी, नयी ये रीत कैसी
के भँवरा कली से लजाये
जवानी जले ऐसे, हज़ारों दिये जैसे
पतंगा न क्यूँ पास आये
जलती रही दिल में, मैं पाई तेरी छैयाँ
मैं ऐसी उलझी सैयाँ
तेरा प्यार बना है देखो भूल भुलैया
तेरा प्यार बना है देखो भूल भुलैया

मन मेरा तुझको माँगे दूर दूर तू भागे
मैं ऐसी उलझी सैयाँ
तेरा प्यार बना है देखो भूल भुलैया
तेरा प्यार बना है देखो भूल भुलैया

ओ हो, ओ हो हो
बदल के उजाले हैं तेरे हवाले
सम्भाले बिना कौन तेरे
तू बाँहों में उठा ले
तू सीने में छुपा ले
बहुत ग़म खड़े मुझको घेरे
सहारा लिया तेरा, छुड़ाये तू ही बैयाँ
मैं ऐसी उलझी सैयाँ
तेरा प्यार बना है देखो भूल भुलैया
तेरा प्यार बना है देखो भूल भुलैया

मन मेरा तुझको माँगे, दूर दूर तू भागे
मैं ऐसी उलझी सैयाँ
तेरा प्यार बना है देखो भूल भुलैया
तेरा प्यार बना है देखो भूल भुलैया

Sunday, 21 November 2010

चोरों को सारे नज़र आते हैं चोर-नया ज़माना १९७१

फिल्म नया ज़माना(१९७१) से एक मीठा गीत और सुनवाया जाए आपको।
फिल्म में एक गरीब बाला पर चोरी का इलज़ाम लगाया जाता है। वो गीत
गा कर जवाब दे रही है। गरीब बाला का रोल किया है अरुणा ईरानी ने।
आनंद बक्षी ने इस गीत को लिखा है और इस फिल्म में संगीत है सचिन देव
बर्मन का। १९७१ की फिल्म है और संगीतकार अपने पूरे यौवन के जौहर दिखला
के संगीत दे रहे हैं और अपने पुत्र पंचम को ज़बरदस्त टक्कर देते से प्रतीत
होते हैं। फिल्म नया ज़माना का संगीत काफी सराहा गया और सुना गया।



गीत के बोल:

सौ इलज़ाम लगाये
ओ मेरे नाम लगाये
आपने सौ इलज़ाम लगाये
हूँ, चुप क्यूँ हो गए
कहिये कुछ और

चोरों को सारे नज़र आते हैं चोर
के, चोरों को सारे नज़र आते हैं चोर

सौ इलज़ाम लगाये
ओ मेरे नाम लगाये
आपने सौ इलज़ाम लगाये
कहिये कुछ और

चोरों को सारे नज़र आते हैं चोर
के, चोरों को सारे नज़र आते हैं चोर

मेहरबानी शुक्रिया
घर बुला के बेईज्ज़त किया
हाँ, मेहरबानी शुक्रिया
घर बुला के बेईज्ज़त किया

मेरी तलाशी तो ले ली सरकार
अपने गिरेबान में भी झांकिए एक बार

इस बात पर पे ज़रा कीजिये गौर

के, चोरों को सारे नज़र आते हैं चोर
चोरों को सारे नज़र आते हैं चोर

क्यूँ कि मैं हूँ एक गरीब
बेसहारा और बदनसीब
क्यूँ कि मैं हूँ एक गरीब
बेसहारा और बदनसीब

ताने हजारों सहे हो के मजबूर
पर मैं अब न चुप रहूंगी ऐ हुज़ूर
हाँ हाँ मचा दूँगी आज शोर

के, चोरों को सारे नज़र आते हैं चोर
चोरों को सारे नज़र आते हैं चोर

सौ इलज़ाम लगाये
ओ मेरे नाम लगाये
आपने सौ इलज़ाम लगाये
कहिये कुछ और

चोरों को सारे नज़र आते हैं चोर
चोरों को सारे नज़र आते हैं चोर
 
 
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