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Thursday, 14 June 2012

मैं तेरे साथ हूँ जहाँ तू है -पत्थर 1985

फिल्म उद्योग में समय समय पर बदलाव होते रहते हैं। कई बदलावों को
दर्शक स्वीकार लेते हैं और कई बदलावों को सिरे से ख़ारिज कर दिया जाता है।
कला फिल्मों को थोडा बहुत व्यावसायिक फार्मूले का तड़का भी लगाया जाने
लगा 80 के दशक के भीतर .

80 के दशक में कुछ खुरदुरे चेहरे वाले अभिनेताओं ने फिल्म उद्योग में दस्तक दी। 
अर्ध सत्य की सफलता के बाद जनता ओम पुरी को पहचानने लगी। इसी के चलते 
उनको कुछ व्यावसायिक फ़िल्में भी मिलीं जिनमें से कुछ चलीं तो कुछ फ्लॉप हो गयीं। 

इस गीत में आपको दो कलाकार दिखाई देंगे-अनुराधा पटेल और ओम पुरी । फिल्म  का 
नाम है पत्थर और इस फिल्म में राम लक्ष्मण का संगीत है। गीत गा रही हैं आशा भोंसले . 



गीत के बोल :

मैं तेरे साथ  हूँ जहाँ तू है 
मैं तेरे साथ  हूँ जहाँ तू है 
दिल की धरती का आसमान तू है
दिल की धरती का आसमान तू है

 मैं तेरे साथ  हूँ जहाँ तू है

तेरे सीने में आग है मेरी
तेरे सीने
तेरे सीने में आग में है मेरी
तेरे सीने में आग में है मेरी
मेरी आँखों में जाने जान तू है
मेरी आँखों में जाने जान तू है 
दिल की धरती का आसमान तू है

मैं तेरे साथ  हूँ जहाँ तू है

जिसकी खातिर भटक रहा हूँ मैं
जिसकी खातिर भटक रहा हूँ मैं
जिसकी खातिर भटक रहा हूँ मैं 
मेरी मंजिल का वो निशान तू है
मेरी मंजिल का वो निशान तू है

दिल की धरती का आसमान तू है

मैं तेरे साथ  हूँ जहाँ तू है

चैन आये न अब  आये करार आये
चैन आये
चैन आये न अब  आये करार आये
 चैन आये न अब  आये करार आये 
मुझको आवाज़ दे कहाँ तू है
मुझको आवाज़ दे कहाँ तू है
दिल की धरती का आसमान तू है

मैं तेरे साथ  हूँ जहाँ तू है
मैं तेरे साथ  हूँ जहाँ तू है
..........................................................................
Main tere saath hoon jahan too hai-Patthar 1985

Saturday, 28 January 2012

मुझे ऐसा मिला मोती-पिघलता आसमान १९८५

इस गीत को देख कर जाने क्यूँ 'बर्फ पर निबंध' याद आ जाता है ।
इस्कूल में एक बार निबंध लिखने का कार्यक्रम हुआ(अक्सर हो जाया
करता था) । हमने तो हाथ खड़े कर दिए और मार खा ली मगर एक
निबंध जो पढने को मिला वो इस प्रकार से था- बर्फ आइस फैक्ट्री से
आती है। ये बड़ी बड़ी सिल्लियों के आकर में आती है । इसे तोड़ कर
और बिना तोड़े भी बेचा जाता है। तोड़ फोड़ करने के बाद इसका प्रयोग
गन्ने के रस को ठंडा करने और उसकी मात्रा बढ़ाने के लिए किया जाता है।
इसे पिघलने से बचाने के लिए बोरे में लपेट कर रखा जाता है......................
उसे बाद के हिस्से में कुछ इस प्रकार से था- जो बर्फ हिंदी फिल्मों में
दिखाई जाती है वो दूसरी किस्म की बर्फ होती है । वो खाने के काम नहीं आती ।
वो कश्मीर में पायी जाती है जिसके ऊपर फिल्म के हीरो हीरोइन नाचते- कूदते
और गाना गाते हैं।

गीत है फिल्म पिघलता आसमान का जिसे देख कर दर्शक ज्यादा नहीं पिघले
और फिल्म थोड़ा बहुत चलने के बाद सिनेमा गृहों से गायब हो गई।



गीत के बोल:

आ आ आ आ आ आ आ आ आ
मुझे ऐसा मिला मोती
ऐसा मोती कोई सागर में ना होगा
मुझे ऐसा मिला मोती
ऐसा मोती कोई सागर में ना होगा
मुझे ऐसा मिला तारा
ऐसा तारा कोई अम्बर में ना होगा

तन जिसका है मनभावन
मन जिसका पवन पवन
तन जिसका है मनभावन
मन जिसका पवन पवन
ऐसे वो मिला जैसे के मिले
प्यासी धरती को सावन

मुझे ऐसा मिला मोती
ऐसा मोती कोई सागर में ना होगा
मुझे ऐसा मिला तारा
ऐसा तारा कोई अम्बर में ना होगा

महलों से मैं कब मानी
दौलत को ना दौलत जानी
महलों से मैं कब मानी
दौलत को ना दौलत जानी
सारा ही जहाँ सूरत देखे
मैं सीरत की दीवानी

मुझे ऐसा मिला मोती
ऐसा मोती कोई सागर में ना होगा
मुझे ऐसा मिला तारा
ऐसा तारा कोई अम्बर में ना होगा

वो ज़फ़ा करें सह लूंगी
वो गिला करें सह लूंगी
वो ज़फ़ा करें सह लूंगी
वो गिला करें सह लूंगी
जिस हाल में वो रखे मुझको
उस हाल में मैं रह लूंगी

मुझे ऐसा मिला मोती
ऐसा मोती कोई सागर में ना होगा
मुझे ऐसा मिला तारा
ऐसा तारा कोई अम्बर में ना होगा
...................................
Mujhe aisa mila moti-Pighalta Aasman 1985

Saturday, 29 October 2011

हम तुम दोनों मिल के-लावा १९८५

आपको एक युगल गीत सुनवाते हैं फिल्म लावा से। राज कपूर
के सबसे छोटे पुत्र जो नायक हैं लावा के, उनके साथ इस फिल्म
में राज कपूर के दूसरे नंबर के पुत्र की बतौर नायक जो पहली
फिल्म थी उसकी नायिका इस फिल्म में मौजूद हैं।

इस गुत्थी को सुलझाते-सुलझाते आपको थोड़ा फ़िल्मी ज्ञान अवश्य
हो जायेगा। गीतकार और संगीतकार क्रमशः वही हैं जिन्होंने फिल्म
अमर प्रेम के लिए गीत लिखे और संगीत दिया।

इस गीत को गाया है दीनानाथ मंगेशकर की सबसे बड़ी सुपुत्री और
फिल्म सितारे अशोक कुमार के सबसे छोटे भाई ने।





गीत के बोल:

हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
ता रा रा रा रा रा रा रा रा

हम तुम दोनों मिल के दिल के गीत बनायेंगे
सरगम के फूलों से सुर संगीत बनायेंगे
जब छाएंगे बादल काले याद करेंगे दुनिया वाले
गीत वो मोहब्बत वाले, गुनगुनायेंगे

हम तुम दोनों मिल के दिल के गीत बनायेंगे
सरगम के फूलों से सुर संगीत बनायेंगे
जब छाएंगे बादल काले याद करेंगे दुनिया वाले
गीत वो मोहब्बत वाले, गुनगुनायेंगे

हम तुम दोनों मिल के दिल के गीत बनायेंगे

जब जब तुमको प्यार पुकारे
तुम आ जाना पास हमारे
जब जब तुमको प्यार पुकारे
तुम आ जाना पास हमारे
अब क्या आना अब क्या जाना
हम हर दम हैं साथ तुम्हारे
पल दूर को हम एक दूजे से दूर ना जायेंगे

हम तुम दोनों मिल के दिल के गीत बनायेंगे

सुनते रहना हम बोलेंगे
कुछ मत कहना हम बोलेंगे
सुनते रहना हम बोलेंगे
कुछ मत कहना हम बोलेंगे
दे तुमको आवाज़ जो कोई
तुम चुप रहना हम बोलेंगे
एक दूजे के नाम से हमको लोग बुलाएँगे

हम तुम दोनों मिल के दिल के गीत बनायेंगे

इतना प्यार करें हम कम है
प्यार है सागर दिल शबनम है
इतना प्यार करें हम कम है
प्यार है सागर दिल शबनम है
अरे कांटे चुभते हैं सीने में
कैसा फूलों का मौसम है
बादल भी बरसे तो दिल में आग लगायेंगे

हम तुम दोनों मिल के दिल के गीत बनायेंगे
जब छाएंगे बादल काले याद करेंगे दुनिया वाले
गीत वो मोहब्बत वाले, गुनगुनायेंगे

हम तुम दोनों मिल के दिल के गीत बनायेंगे
सरगम के फूलों से सुर संगीत बनायेंगे
....................................
Hum tum donon mil ke-Laava 1985

Wednesday, 26 October 2011

जब चाहा यारा तुमने-ज़बरदस्त १९८५

आपको फिल्म 'ज़बर दस्त' से तीन गीत सुनवाए जा चुके हैं। फिल्म
ज़बरदस्त बहुसितारा फ्लॉप फिल्म है जो कुछ उम्दा गीतों से सजी
हुयी है। आइये सुनें इस फिल्म का सबसे चर्चित गीत जिसे आपके
कान एक ना एक बार ज़रूर सुन चुके होंगे। ये गीत चित्रहार के
ज़माने में कई बार टी वी पर दिखाई दे जाता था। गीत में बैगपाइपर
की ध्वनि का बढ़िया प्रयोग है। गीत आनंद बक्षी का लिखा हुआ और
किशोर कुमार द्वारा गाया गया है। फिल्म में संगीत पंचम
का है।

श्रेणी बनाने क शौक़ीन इसे बैगपाइपर हिट्स की श्रेणी में रख सकते हैं।
(वो वाला बैगपाइपर नहीं-बोतल में भरे रंगीन पेय के विज्ञापन वाला)
पंचम ने इस वाद्य का बढ़िया प्रयोग फिल्म "हम किसी से कम नहीं" के
गीत में भी किया है और वो गीत भी किशोर कुमार का गाया हुआ है।




गीत के बोल:

जब चाहा यारा तुमने, आँखों से मारा तुमने
होंठों से ज़िन्दा कर दिया
अरे तुम्हारी मर्ज़ी पे चल रहें हैं, ख़ता हमारी क्या हो

जब चाहा यारा तुमने, आँखों से मारा तुमने
होंठों से ज़िन्दा कर दिया

चलो जी हम बुरे सही, चलो जी हम झूठे हैं
मग़र इनहीं निगाहों से हज़ारों दिल टूटे हैं
चलो जी हम बुरे सही, चलो जी हम झूठे हैं
मग़र इनहीं निगाहों से हज़ारों दिल टूटे हैं
अरे, कसम से कहना, हमारी सूरत नहीं है प्यारी क्या हो

जब चाहा यारा तुमने, आँखों से मारा तुमने
होंठों से ज़िन्दा कर दिया

समझ सको तो हमसफ़र, हमें तुम अपना जानो
उधर नहीं इधर चलो, कभी तो कहना मानो
समझ सको तो हमसफ़र, हमें तुम अपना जानो
उधर नहीं इधर चलो, कभी तो कहना मानो
समझ सको तो हमसफ़र, हमें तुम अपना जानो
उधर नहीं इधर चलो, कभी तो कहना मानो
अरे, लिपट के पूछो , के आगे मर्ज़ी है अब हमारी क्या हो

जब चाहा यारा तुमने, आँखों से मारा तुमने
होंठों से ज़िन्दा कर दिया
अरे तुम्हारी मर्ज़ी पे चल रहें हैं, ख़ता हमारी क्या हो

जब चाहा यारा तुमने, आँखों से मारा तुमने
होंठों से ज़िन्दा कर दिया
..............................................
Jab chaha yaara tumne-Zabardast 1985

Wednesday, 10 August 2011

दिल की इस दहलीज़ पर-कभी अजनबी थे १९८५

हिंदी फिल्म संगीत क्षेत्र में कई संगीतकार आये जिन्होंने एक दो गीत

से ही सही अपनी छाप अवश्य छोड़ी। एक मधुर गीत सुनवाते हैं आपको

'कभी अजनबी थे ' फिल्म से। फिल्म में संगीत विजय सिंह का है।



जनता को शायद किरकिट और फिल्लम का घालमेल पसंद नहीं आया

अतः ये दर्शकों के लिए भी अजनबी सी हो गई। गीत अलबत्ता खूब सुनाई

दिए इसके।



फिल्म में क्रिकेट खिलाडी भी दिखाई देंगे आपको अगर इस फिल्म को

देखने का मौका आपको मिले। सैयद किरमानी और वेस्ट इंडीज़ टीम के

प्रख्यात कप्तान क्लाइव लॉयड भी इस फिल्म में हैं।



गीत में आपको दिखाई देंगे अमिताभ की फिल्मों के आवश्यक तत्त्व रहे-

राम शेट्टी जो संदीप को रेडियो पर बज रहे गीत सुनने के लिए आमंत्रित

कर रहे हैं।







गीत के बोल:



दिल की इस दहलीज़ तक जो मेहमान बन के आये

जो मेहमान बन के आये

शाम की तनहाइयों में उनकी उल्फत के ये साये

प्यार का तूफ़ान लाये



चाँद यादो का अब सहारा है, प्यार का दर्द भी गवारा है

साथ किसी के जो बीते थे, वो लम्हे थे ख्वाबों के

खुशनुमा सपना था कोई, नींद में हम मुस्कुराये

हम मुस्कुराये

शाम की तनहाइयों में उनकी उल्फत के ये साये

प्यार का तूफ़ान लाये



दिल की इस दहलीज़ तक जो मेहमान बन के आये

जो मेहमान बन के आये



रात गुमसुम है आसमान चुप है, दर्द में डूबे कहकशां चुप है

रात का राही चाँद अकेला, अपने सफ़र में है तनहा

रात के ख्वाबो में शायद, कोई सुबह मुस्कुराये

सुबह मुस्कुराये

शाम की तनहाइयों में उनकी उल्फत के ये साये

प्यार का तूफ़ान लाये



दिल की इस दहलीज़ तक जो मेहमान बन के आये

जो मेहमान बन के आये

जो मेहमान बन के आये

......................................

Dil ki is dehleez-Kabhi ajnabi the 1985

Tuesday, 9 August 2011

करेगा ज़माना क्या-ज़बरदस्त १९८५

बार्बी डॉल डांस देखिये फिल्म ज़बरदस्त से। पिछले कुछ गीतों में हमने
बात की थी कि रति अग्निहोत्री की लम्बाई ज्यादा है और वे अपने कई
साथी नायकों से लंबी हैं। इस गीत को इस तरह से फिल्माया गया है
कि राजीव कपूर की लम्बाई और उनकी लम्बाई बराबर दिखती है। ये
ज़बरदस्ती उछलो-कूदो नृत्य वाले गीत को गाया है किशोर कुमार ने और
आशा भोंसले ने।

श्रेणी बनाने का शौकीनों के लिए सुझाव-इस गीत को आप डार्लिंग गीत कह सकते
हैं। गीत आनंद बख्शी ने लिखा है और धुन है आर डी बर्मन की।






हो करेगा ज़माना क्या, सच को छुपाना क्या
दुनिया को आओ बतला दें
हो करेगा ज़माना क्या, सच को छुपाना क्या
दुनिया को आओ बतला दें
तुम हो मेरे, हम हैं तेरे
डार्लिंग, है ना बोलो है ना

हो हो हो हो हो हो हो हो हो
करेगा ज़माना क्या, सच को छुपाना क्या
दुनिया को आओ बतला दें
करेगा ज़माना क्या, सच को छुपाना क्या
दुनिया को आओ बतला दें
तुम हो मेरे, हम हैं तेरे
डार्लिंग, है ना बोलो है ना

हो हो हो

हे, मेरा सब कुछ तेरे लिए, तेरा सब कुछ मेरे लिए
बोलो बोलो
मेरा सब कुछ तेरे लिए, तेरा सब कुछ मेरे लिए
आखिर को है
हाँ आखिर को हैं बीवी मियां
डार्लिंग है ना बोलो है ना

हो हो हो हो हो हो हो हो हो
करेगा ज़माना क्या, सच को छुपाना क्या
दुनिया को आओ बतला दें

आए हुए बड़ी दूर से हैं, हम तो यहाँ मई-जून से हैं
आए हुए बड़ी दूर से हैं, हम तो यहाँ मई-जून से हैं
और आज ही
और आज ही, है वापसी
डार्लिंग है न बोलो है न

हो हो हो हो हो हो हो हो हो
करेगा ज़माना क्या, सच को छुपाना क्या
दुनिया को आओ बतला दें
........................................
Karega zamana kya-Zabardast 1985

Thursday, 4 August 2011

सारे जग की तू माता-तेरी पूजा करे संसार १९८५

१९८५ में एक धार्मिक फिल्म बनी थी-तेरी पूजा करे संसार. ठाकुर तपस्वी
के निर्देशन में बनी इस फिल्म से महेंद्र कपूर का गाया एक भक्ति गीत सुनवा
रहे हैं आज आपको.

राजश्री वालों की दरियादिली है कि उन्होंने पूरी फिल्म ही यू ट्यूब पर अपलोड कर
दी है. फिल्म का लिंक दे रहा हूँ इसे देख कर गीत का आनंद भी ले लीजिए.
बोल ठाकुर तपस्वी के हैं और संगीत है एस मदन का. गीत में महेंद्र कपूर का
साथ दिया है सविता साथी ने.




गीत के बोल:

सारे जग की तू माता
अम्बे जगदम्बे माता
सारे जग की तू माता
जो भी तेरे दर पे आया
मांगी मुरादें पाता

माता तेरे दर्शन को नंगे पाँव नित आऊँ
नारियल पान सुपारी मेवा तुझे भोग लगाऊं

मेहरों वाली माँ सारे जग पे मेहर करो
शरण में जो आये टिहरी उसके पाप हरो

बाबा ने अपने बेटे को है ठुकराया
एक माँ है तू मैया सीने से जिसे लगाया
ऊंचे पहाड़ों वाली ऊंची है तेरी शान
जग को वार देती है तेरी शक्ति महान

मैं हूँ प्राणी इंसान मैया मैं हूँ भूलनहार
हो गयी है भूल मुझसे बख्श दो बख्शनहार

ज्योता वाली माँ मेरे मन की ज्योत जगा
वर्षों से मैं प्यासा मेरी प्यास बुझा

सारे जग की तू माता
अम्बे जगदम्बे माता
सारे जग की तू माता
जो भी तेरे दर पे आया
मांगी मुरादें पाता
....................................
Saare jag ki too mata-teri pooja kare sansar 1985

Tuesday, 19 July 2011

दिल क्या है एक शीशा है -लावा १९८५

८० के दशक में चला जाए. एक फिल्म है लावा जिसके गाने बहुत बजे थे
और फिल्म फ्लॉप थी. इस फिल्म से एक युगल गीत सुनवाते हैं आपको .
इसको युगल गीत कहना शायद उचित नहीं होगा क्यूंकि इसमें तीसरा कोण
भी मौजूद है यानि कि तीसरी आवाज़. ये फिल्म प्रेम त्रिकोण पर आधारित
है.

फिल्म डिम्पल कपाडिया की दूसरी पारी की फिल्म है जिसमें नायक राजीव कपूर
उनसे ज्यादा युवा नज़र आते हैं. इस कहानी के तीसरे कोण हैं राज बब्बर. एक
पार्टी में ये गीत गाया जा रहा है. आशा भोंसले के साथ किशोर कुमार और
शैलेन्द्र सिंह की आवाजें हैं. गीत में बॉलीवुड के रिटायर्ड और सेमी-रिटायर्ड
कलाकारों को रोज़गार मिला है-मदन पुरी, राजेंद्र नाथ, नरेन्द्र नाथ,सुधीर और
रमा विज़. गीत में आपको कुलभूषण खरबन्दा भी कहीं नज़र आ जायेंगे जो
फिल्म की मुख्य स्टार कास्ट का हिस्सा हैं .




गीत के बोल:

ता रा रा रा रा रा , ता रा रा रा रा रा
ला रा रा रा , रा रा रा रा रा रा

दिल क्या है एक शीशा है
शीशे में एक तस्वीर है
तस्वीर पे लिखा है तेरा नाम तुझे सलाम

दिल क्या है एक शीशा है
शीशे में एक तस्वीर है
तस्वीर पे लिखा है तेरा नाम तुझे सलाम

सुन रहे हैं लोग ये
दास्तान दिल थाम के
सुन रहे हैं लोग ये
दास्तान दिल थाम के
नाम मेरा जुड गया
साथ तेरे नाम के
इस प्यार में हम हो गए बदनाम तुझे सलाम

दिल क्या है एक शीशा है
शीशे में एक तस्वीर है
तस्वीर पे लिखा है तेरा नाम तुझे सलाम

आज इस दुनिया की सब
हमने सब रस्में तोड़ दीं
हो, आज इस दुनिया की सब
हमने सब रस्में तोड़ दीं
एक वादा कर लिया
सारी कसमें तोड़ दीं
आँखों ने दिल को दे दिया पैगाम तुझे सलाम

दिल क्या है एक शीशा है
शीशे में एक तस्वीर है
तस्वीर पे लिखा है तेरा नाम तुझे सलाम

जिंदगी भर के लिए
ये मोहब्बत कम न हो
जिंदगी भर के लिए
ये मोहब्बत कम न हो
दिल लगाये वो जिसे
जान का भी गम न हो
हर एक के बस का नहीं ये काम तुझे सलाम

दिल क्या है एक शीशा है
शीशे में एक तस्वीर है
तस्वीर पे लिखा है तेरा नाम तुझे सलाम

................................
Dil kya hai ek sheesha hai-Laava 1985

Saturday, 18 June 2011

ये मेरा जीवन तेरे लिए -बाबू १९८५

आप फिल्म बाबू(१९८५) के दो गीत पहले सुन चुके हैं,
अब सुनिए किशोर का गाया फिल्म का एक और गीत।
फिल्म में राजेश खन्ना का नाम बाबू हो। वो अपना सारा
जीवन एक परिवार के लिए समर्पित कर देता है। उस
परिवार की बच्ची के साथ नायक गीत गा रहा है। फिल्म
का ये गीत भी काफी लोकप्रिय है। बोल एक बार फिर से
मजरूह के हैं और संगीत राजेश रोशन का।




गीत के बोल:


ये मेरा जीवन तेरे लिए है
ये मेरा जीवन तेरे लिए है
जीवन का सपना तेरे लिए है
माँग ले हँस के क्या चाहिए तुझे
माँग ले हँस के क्या चाहिए तुझे
मेरी तो दुनिया तेरे लिए है

ये मेरा जीवन

hurrr ha ha

डाली पे बैठी छोटी सी चिड़िया
काँधे पे मेरे नन्हीं सी गुड़िया
डाली पे बैठी छोटी सी चिड़िया
काँधे पे मेरे नन्हीं सी गुड़िया
चिड़िया से भी सुन्दर मेरी गुड़िया
चिड़िया से भी सुन्दर मेरी गुड़िया

ये मेरा जीवन तेरे लिए है
जीवन का सपना तेरे लिए है
माँग ले हँस के क्या चाहिए तुझे
मेरी तो दुनिया तेरे लिए है

ये मेरा जीवन

देखा था सपना जो ज़िन्दगी का
ये भी तो वैसा ही दिन है ख़ुशी का
देखा था सपना जो ज़िन्दगी का
ये भी तो वैसा ही दिन है ख़ुशी का
जीने का ढंग तुझसे मैने सीखा
जीने का ढंग तुझसे मैने सीखा

ये मेरा जीवन तेरे लिए है
जीवन का सपना तेरे लिए है
माँग ले हँस के क्या चाहिए तुझे
मेरी तो दुनिया तेरे लिए है

ये मेरा जीवन

मानो बदल जाए दोनों की मंज़िल
फिर भी रहेगा साथ मेरा दिल
मानो बदल जाए दोनों की मंज़िल
फिर भी रहेगा साथ मेरा दिल
चाहेंगे तो मिलना नहीं मुश्क़िल
चाहेंगे तो मिलना नहीं मुश्क़िल
ये मेरा जीवन तेरे लिए है
जीवन का सपना तेरे लिए है
माँग ले हँस के क्या चाहिए तुझे
मेरी तो दुनिया तेरे लिए है

ये मेरा जीवन
........................
Ye mera jeewan-Babu 1985

Monday, 13 June 2011

ऐ हवा मेरे संग चल-बाबू १९८५

आपको फिल्म बाबू(राजेश खन्ना वाली) का एक गीत पहले
सुनवाया था। अब सुनिए रति अग्निहोत्री के ऊपर फिल्माया गया
लता मंगेशकर का गाया एक गीत। फिल्म रिलीज़ के वक़्त और
उसके २-३ साल बाद तक ये गीत बहुत बजा था। गाँव और गाँव
जैसे शहरों के मेले में नौटंकी में इस गीत के ऊपर स्कूल के बच्चों
वाली पी. टी. कसरत जैसी मुद्राओं में नौटंकी की काबिल डांसर्स
नृत्य किया करती थीं। वैसे इस गीत में नायिका जो नृत्य कर रही
है वो थोड़ा ही बेहतर है। गीत की ताल और गीत के फिल्मांकन
में ज्यादा तादतम्य नहीं है लेकिन बाकी मसाला काफी है गीत
में आपको बहलाने के लिए। ढप ढप और टपर टपर की ताल
राजेश रोशन के संगीत की विशेषता है। दीपक पाराशर नाम
के कलाकार रति अग्निहोत्री के साथ आपको परदे पर दिखाई
देंगे। नृत्य देख के मुझे कुछ भ्रष्ट भाषा के शब्द याद आ जाते हैं
- उच्कंती, कूदंती, बल्खंती और नाचंती।

गीत मजरूह सुल्तानपुरी का लिखा हुआ है इसलिए आपको इसके
बोल सुहाने लगेंगे। मजरूह के ज़माने तक दिल में हलचल ही मचा
करती थी आजकल के दौर में होने लगी है- सन सनन साँय साँय।





गीत के बोल:

ऐ हवा मेरे संग संग चल
मेरे दिल में हुई हलचल

ऐ हवा मेरे संग संग चल
मेरे दिल में हुई हलचल

कहे दरिया का पानी कल कल
तुझे आस मिलन की हर पल

ऐ हवा मेरे संग संग चल
मेरे दिल में हुई हलचल

रुक ना सकूं मैं दौड़ी आऊँ
फिर कुछ सोच के मैं घबराऊँ
रुक ना सकूं मैं दौड़ी आऊँ
फिर कुछ सोच के मैं घबराऊँ

ऐ हवा मेरे संग संग चल
मेरे दिल में हुई हलचल

तूने कैसा जादू किया है
बिन डोर के मुझे बांध दिया है
तूने कैसा जादू किया है
बिन डोर के मुझे बांध दिया है

ऐ हवा मेरे संग संग चल
मेरे दिल में हुई हलचल

कठपुतली सी नाच रही हूँ
कैसे कहूं तुझे ढूंढ रही हूँ
कठपुतली सी नाच रही हूँ
कैसे कहूं तुझे ढूंढ रही हूँ

ऐ हवा मेरे संग संग चल
मेरे दिल में हुई हलचल

कहे दरिया का पानी कल कल
तुझे आस मिलन की हर पल

ऐ हवा मेरे संग संग चल
मेरे दिल में हुई हलचल
...............................
Ae hawa mere sang sang chal-Babu 1985

Saturday, 11 June 2011

हम चुप हैं -फासले १९८५

बरसों से हम सुनते आये-कुछ मीठा हो जाये। एक विज्ञापन
ने इसको अपने तरीके से सुनाया। गीत और विज्ञापन से आदमी
के फंडे ज़ल्दी क्लीयर होते हैं। अब हम अपने अंदाज़ में कहते
हैं-कुछ हरा भरा हो जाये। गीत में हरियाली भरपूर है और हम
इसे पर्यावरण प्रेमी गीतों की कतार में लगा सकते हैं। हर आदमी
का अपना नजरिया होता है गीत को देखने का। अब भैंस और
बकरी चराने वाला ढूंढेगा कि ऐसी जगह कहाँ है जहाँ गद्देदार
घास हो जिसे जानवर जी भर के चर सकें और चराने वाला उसपर
लोट भी लगा सके। । जंगल पर ज्यादती कर के चूल्हा जलाने वाला
अपने हिसाब से देखेगा गीत को, कहाँ ऐसे पेड़ मिलेंगे जिससे हमेशा
का मुफ्त ईंधन मिलता रहे। अगर फिल्म यश चोपड़ा द्वारा निर्मित/
निर्देशित है तो फिर आपको प्लेन का टिकट लेकर बाहर के देश में
ही ढूंढना पड़ेगा ऐसे स्थानों को।


आपको आज एक युगल गीत सुनवाते हैं सन १९८५ से। शिव हरी
नाम की ख्यातनाम संगीतकार जोड़ी ने इस गीत की धुन बनाई है।
हरी प्रसाद चौरसिया और शिव कुमार शर्मा शास्त्रीय संगीत की बहुत
बड़ी हस्तियाँ हैं। फिल्म सिलसिला से शुरू हुआ उनका फ़िल्मी सफ़र
थोड़े समय ही चला और शायद बोलीवुड की तिकड़मबाजियों और पेंचों
से पाला पढने के बाद उन्होंने फैसला किया होगा कि शास्त्रीय संगीत
पर ध्यान देना ही बेहतर है। वैसे भी फिल्मों में उलझने से उनका
शास्त्रीय संगीत के सफ़र में रुकावटें ज़रूर आई होंगी कुछ समय के
लिए ही सही। ये अटकल और अनुमान मात्र है, हो सकता है वजह
कुछ और हो।

गीत लिखा है शहरयार ने जिन्होंने उमराव जान जैसी फिल्म के गीत
भी लिखे हैं। गीत गाया है किशोर कुमार और लता मंगेशकर ने।




geet ke bol:

हम चुप हैं कि दिल सुन रहे हैं
धड़कनों को आहटों को
साँसें रुक सी गई हैं

हम चुप हैं कि दिल सुन रहे हैं
धड़कनों को आहटों को
साँसें रुक सी गई हैं

हम चुप हैं कि दिल सुन रहे हैं

देखो अब दुनिया को गौर से
पहले से नई पहले से हसीं
हम तुमको मिलना था मिल गए
क्या ये आसमाँ कौन ये ज़मीं
हम जो देखें तुमको देखें
साँसें रुक सी गई हैं

हम चुप हैं कि दिल सुन रहे हैं
धड़कनों को आहटों को
साँसें रुक सी गई हैं

हम चुप हैं कि दिल सुन रहे हैं


लफ़्ज़ों में जिनको ना कह सके
आँखों से कहें होंठों से सुनें
ख़ुशबू के साए में बैठ के
फूल हम चुनें ख़्वाब हम बुनें
इसके आगे कुछ ना सोचें
साँसें रुक सी गई हैं

हम चुप हैं कि दिल सुन रहे हैं
धड़कनों को आहटों को
साँसें रुक सी गई हैं

हम चुप हैं कि दिल सुन रहे हैं

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Hum chup hain-Faasle 1985

Wednesday, 18 May 2011

तू मेरा क्या लागे-ऊंचे लोग १९८५

फिल्मकारों की पसंद का भी जवाब नहीं। कई ऐसी ऐसी जोड़ियाँ देखने
को मिलेंगी आपको फिल्मों में कि, दर्शक तक सोचने में विवश हो जाता
है; कम से कम मुझसे ही पूछ लिया होता फिल्म की कास्टिंग कैसे की
जाये। इस मामले में हम थोड़ा डिस्काउंट कर देते हैं क्यूंकि फिल्म का
निर्देशन किया है ब्रज सढाना ने, वही 'विक्टोरिया नंबर २०३' वाले। ब्रज
सढाना ने फिल्म के संगीत पक्ष पर हमेशा ध्यान दिया और उनकी
फ़िल्में चली हो या ना चली हों, गीत ज़रूर दर्शकों को और श्रोताओं को
याद हैं। आपको विश्वजीत और शर्मिला टैगोर अभिनीत फिल्म-
'ये रात फिर ना आएगी' ज़रूर ही याद होगी जिसके सारे गीत लोकप्रिय हैं।

प्रस्तुत गीत में राजेश खन्ना कुछ कुछ वन अधिकारी/कर्मी के जैसे कपडे
पहने हुए हैं और ऐसा लगता है मानो पास के पेड़ों में से सबसे हरा पेड़
निकल कर उनके साथ नाचने लग पड़ा हो। गाना जब तक किशोर कुमार
की आवाज़ निकालता है तब तक उसे ध्यान से सुना जा सकता है। जैसे ही
महिला स्वर उभरता है, आप अपना ध्यान दूसरी ओर लगा सकते हैं।
गीत लिखा है अनजान ने और धुन बनाई है आर डी बर्मन ने।



गीत के बोल:

झिन झिन, झिन झिन झिन झिन तारा
झिन झिन, झिन झिन झिन झिन तारा

झिन झिन, झिन झिन झिन झिन तारा
झिन झिन, झिन झिन झिन झिन तारा

तू मेरा क्या लागे ओ साथिया
तारा झिन झिन, झिन झिन झिन झिन तारा
तारा झिन झिन, झिन झिन झिन झिन तारा
तू मेरा क्या लागे ओ साथिया
लागे ना लागे रे तेरे बिन कहीं जिया
तू मेरा क्या लागे ओ साथिया
लागे ना लागे रे तेरे बिन कहीं जिया

मर जाते राहों में
हम तेरी बाहों में
आ के जी गये
जुल्फों के साये में
हम दिल के सारे गम
हंस के पी गये
मर जाते राहों में
हम तेरी बाहों में
आ के जी गये
जुल्फों के साये में
हम दिल के सारे गम
हंस के पी गये

तूने ही फिर जीना सिखला दिया
तारा झिन झिन, झिन झिन झिन झिन तारा
लागे ना लागे रे तेरे बिन कहीं जिया

दिन बीते बातों में
बातों की यादों में
झूमे दिल जहाँ
रातों की नींदों में
नीदों के ख्वाबों में
तू ही तू यहाँ
दिन बीते बातों में
बातों की यादों में
झूमे दिल जहाँ
रातों की नींदों में
नीदों के ख्वाबों में
तू ही तू यहाँ


बिन पूछे बिन मांगे दिल ले लिया
तारा झिन झिन, झिन झिन झिन झिन तारा
लागे ना लागे रे तेरे बिन कहीं जिया


तू मेरा क्या लागे ओ साथिया
तू मेरा क्या लागे ओ साथिया
लागे ना लागे रे तेरे बिन कहीं जिया
झिन झिन, झिन झिन झिन झिन तारा
झिन झिन, झिन झिन झिन झिन तारा
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Too mera kya laage-Oonche log 1985

Thursday, 20 January 2011

तेरी मेहरबानियाँ-तेरी मेहरबानियाँ १९८५

लेब्रेडोर नस्ल का कुत्ता काफ़ी घरेलू माना जाता है।
ये परिवार के सदस्यों से काफी हिल-मिल जाता है।
इस फिल्म में एक काले रंग का लेब्रेडोर प्रजाति कुत्ता
है जिसने बढ़िया अभिनय किया है। उसी की मेहरबानियों
के इर्द गिर्द इस फिल्म की कहानी घूमती है। साथ में हैं नायक
जैकी श्रोफ और नायिका स्वप्ना। प्रस्तुत गीत फिल्म का
शीर्षक गीत है और इसे गाया है शब्बीर कुमार ने।
इस फिल्म को जनता प्यार से "कुत्ते की मेहरबानियाँ"
भी बुलाती है। गीत एस एच बिहारी का लिखा हुआ है जिन्हें
हम ओ पी नय्यर के साथ की वजह से ज्यादा जानते हैं।



गीत के बोल:

गीत के बोलों के लिए चटका(comment) लगायें

Saturday, 20 November 2010

शाम हुई चढ़ आई रे बदरिया-आखिर क्यों १९८५

'क' शब्द से राकेश रोशन का पुराना नाता लगता है ।
इस फिल्म के नाम में भी एक शब्द है जो 'क' से
शुरू होता है। उनके ससुर जे. ओमप्रकाश को 'अ'
अक्षर से विशेष लगाव था। इस फिल्म के निर्देशक
जे. ओमप्रकाश ही हैं। ये एक सफल फिल्म है। इसके
गीत भी फुरसत और तबियत से तैयार किये गए हैं ।
गीत के बोल, धुन और स्मिता का अभिनय सभी कुछ
लाजवाब है। स्मिता पाटिल ने भारतीय नारी की छबि
खूबसूरत ढंग से निखारी थी हिंदी फिल्मों में। "कोई जब
तुम्हारा ह्रदय तोड़ दे" , "फूल तुम्हे भेजा है ख़त में"
वाले इन्दीवर साहब के बोल हैं इसमें और सुर दिए हैं
स्वर सम्राज्ञी लता मंगेशकर ने।





गीत के बोल :

आ आ आ, आ आ आ, आ आ
हूँ ऊं ऊं ऊं ऊं ऊं ऊं ऊं ऊं ऊं ऊं ऊं

शाम हुई चढ़ आई रे बदरिया
शाम हुई चढ़ आई रे बदरिया
अबहूँ न आये मोरे श्याम संवरिया
शाम हुई चढ़ आई रे बदरिया
अबहूँ न आये मोरे श्याम संवरिया
शाम हुई चढ़ आई रे बदरिया
शाम हुई चढ़ आई रे बदरिया

हो ओ ओ ओ
हा आ आ आ

अनछुए होंठ मेरे खोये खोये नैन मेरे
गूंजते हैं पर्णों में मधुर मधुर बोल तेरे
मेरे साथ बैन करे, हो
मेरे साथ बैन करे मोरी अटरिया

शाम हुई चढ़ आई रे बदरिया
शाम हुई चढ़ आई रे बदरिया

सोलह बरस बीते गिन गिन रतियाँ
पी से मिलन चली संग की सखियाँ
अब तो ले लो पिया, हो
अब तो ले लो पिया आ के खबरिया

शाम हुई चढ़ आई रे बदरिया

प् नि सा रे नि सा रे नि सा रे नि ध प्
आ आ आ आ आ आ आ आ आ

शाम हुई चढ़ आई रे बदरिया
अबहूँ न आये मोरे श्याम संवरिया
शाम हुई चढ़ आई रे बदरिया
शाम हुई चढ़ आई रे बदरिया
 
 
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