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Tuesday, 30 August 2011

फिर तेरी याद नए गीत सुनाने आई-बेखबर १९६५

कुछ भूले बिसरे गीत ऐसे भी हैं जो कम प्रसिद्द संगीतकारों द्वारा बनाये गए मगर

उन्हें सुनकर आपको ऐसा लगेगा की किसी नियमित रूप से सुनाई देने वाले नाम

ने इन्हें बनाया हो. ऐसे गीत अधिकतर आपको गुमनाम फिल्मों में मिलेंगे. आज

आपको एक और भूला हुआ गीत सुनवा रहे हैं.



ये गीत है फिल्म बेखबर से जिसे लिखा राजा मेहँदी अली खान ने और इसका संगीत

बनाया है एस मोहिंदर ने. सरदार मोहिंदर सिंह सरना जो इनका पूरा नाम है, के

संगीत से मैं काफी प्रभावित हूँ. उनके संगीत की गुणवत्ता बहुत ही आला दर्जे की है.

उन्होंने कम फिल्मों में संगीत दिया मगर जितना भी दिया वो अनमोल खजाने जैसा

है.



गीत सुनकर आपको कहीं लगेगा कि ये चित्रगुप्त की धुन है तो कभी लगेगा मदन मोहन

की बंदिश है.





गीत के बोल:



फिर तेरी याद नए गीत सुनाने आई

फिर तेरी याद नए गीत सुनाने आई

दिल की दुनिया में नए दीप जलाने आई

फिर तेरी याद नए गीत सुनाने आई



ये ख्यालों में भी, ख्वाबों में भी, तडपाती है

मुस्कुराती हुयी ये कह के चली आती है

मैं तुझे इश्क के शोलों से बचने आई



फिर तेरी याद नए गीत सुनाने आई



याद-ऐ-महबूब इधर आ, मैं तुझे प्यार करूं

याद-ऐ-महबूब इधर आ, मैं तुझे प्यार करूं

तू अगर जान भी मांगे तो न इनकार करूं

एक दीवाने से प्यार क्यों जताने आई



फिर तेरी याद नए गीत सुनाने आई

दिल की दुनिया में नए दीप जलाने आई

फिर तेरी याद नए गीत सुनाने आई

.......................................

Phir teree yad naye geet-Bekhabar 1965

Tuesday, 2 August 2011

मैं तो तेरे हसीन ख्यालों में-संग्राम १९६५

गुमनाम फिल्मों में इतने नायब रत्न छुपे पढ़े हैं कि खोजने लग जाओ तो
थाह ही नहीं मिले। ऐसा ही एक मधुर गीत आपको सुनवाते हैं आज।

जुलाई ३१ तारीख को रफ़ी की पुण्यतिथि थी। रफ़ी ने जितनी तन्मयता से
भजन गाये उतने ही डूब के रोमांटिक गीत गाये। एक सीधे सरल स्वभाव
वाला व्यक्ति कैसे चमत्कार कर सकता है इस गीत के माध्यम से महसूस
कर लीजिए। एक कम प्रसिद्ध संगीतकार जोड़ी-लाला असर सत्तार ने इस
गीत की धुन बनाई है। रफ़ी के सरल व्यव्हार के चलते कई गुमनाम और
संघर्षरत संगीतकारों को भी बेहतरीन नगमे बनाने का मौका मिल गया।

दारा सिंह और रंधावा नाम के दो प्रसिद्ध पहलवान हुए हैं। दोनों इस फिल्म में
मौजूद हैं। फिल्म में दो नायिकाएं हैं-अरुणा ईरानी और गीतांजलि। अब चूंकि
इस गीत के कलाकार दारा सिंह और अरुणा ईरानी जैसे नहीं लग रहे अतः हम
मान लेते हैं दूसरे नायक और नायिका पर ये गीत फिल्माया गया है।





मैं तो तेरे हसीन ख्यालों में खो गया
मैं तो तेरे हसीन ख्यालों में खो गया
दुनिये ये कह रही है के, दीवाना हो गया

मैं तो तेरे हसीन ख्यालों में खो गया

ये हुस्न तेरा खिलता हुआ सा गुलाब है
ये हुस्न तेरा खिलता हुआ सा गुलाब है
ऑंखें तेरी हसीन कमाल का शबाब है
तू लाजवाब है
वो खुशनसीब है तेरी महफ़िल में जो गया

मैं तो तेरे हसीन ख्यालों में खो गया

कोई न जिसको समझा तू एक ऐसा राग है
कोई न जिसको समझा तू एक ऐसा राग है
मुझको भी आज अपने मुक़द्दर पे नाज़ है
तू दिल नवाज़ है
आशिक हूँ तेरी जुल्फों के साये में खो गया

मैं तो तेरे हसीन ख्यालों में खो गया

दामन छुडा के जाओ न इतने गुरूर से
दामन छुडा के जाओ न इतने गुरूर से
क्या है कसूर पूछते हैं हम हुज़ूर से
देखो न दूर से
कर दो खता मुआफ जो होना था हो गया

मैं तो तेरे हसीन ख्यालों में खो गया
मैं तो तेरे हसीन ख्यालों में खो गया
दुनिये ये कह रही है के, दीवाना हो गया

मैं तो तेरे हसीन ख्यालों में खो गया
...................................
Main to tere haseen khayalon mein-Sangram 1965

Sunday, 17 July 2011

बहारों थाम लो अब दिल-नमस्ते जी १९६५

जी एस कोहली एक गुणी संगीतकार थे. वे ओ पी नय्यर के सहायक
भी रहे. उनके संगीत में कहीं कहीं ओ पी नय्यर के संगीत की छाप
सुनाई पढ़ती. इस गीत में मगर आप पाएंगे कि शैली कल्याणजी आनंदजी
की शैली के नज़दीक है. घंटियों की टुनटुनाहट के साथ गीत शुरू होता है.

बतौर स्वतंत्र संगीत निर्देशक उन्होंने कई फिल्मों में संगीत दिया. नमस्ते जी
फिल्म भी एक है जिनमें उनके संगीतबद्ध गीत हैं. महमूद और अमिता पर
फिल्माए गए इस युगल गीत को लिखा अनजान ने, गाया है मुकेश और
लता मंगेशकर ने.

नायिका अमिता कुछ अच्छी 'ऐ' ग्रेड फ़िल्में करने के बाद 'बी' ग्रेड फिल्मों
में दिखाई देने लगीं और धीमे धीमे फ़िल्मी दुनिया से गायब सी हो गयीं.

फिल्म नमस्ते जी को भी बी या सी ग्रेड फिल्मों में गिना जाता है. फिल्म का
ये सबसे लोकप्रिय गीत है जो यहाँ प्रस्तुत है.





गीत के बोल:


बहारों थाम लो अब दिल मेरा महबूब आता है
हो शरारत कर न नाज़ुक दिल शरम से डूब जाता है

बहारों थाम लो अब दिल

क़हर अंदाज़ हैं तेरे, क़यामत हैं तेरी बातें
हो ओ ओ ओ
हो मेरी तो जान ले लेंगी ये बातें ये मुलाक़ातें
मुलाक़ातें
सनम शरमाए जब ऐसे मज़ा कुछ और आता है
हो शरारत कर न नाज़ुक दिल शरम से डूब जाता है

बहारों थाम लो अब दिल

लबों पर ये हँसी क़ातिल ग़ज़ब जादू निगाहों में
हो ओ ओ ओ
हो क़सम तुझको मोहब्बत की मचल न ऐसे राहों में
ऐसे राहों में
मचल जाता है दिल जब रू-ब-रू दिलदार आता है
हो शरारत कर न नाज़ुक दिल शरम से डूब जाता है

बहारों थाम लो अब दिल
..............................................
Baharon tham lo ab dil-Namaste ji 1965

Saturday, 16 July 2011

दिन ढल जाए हाय रात ना जाए-गाईड १९६५

कुछ गीत कठिन होना भी ज़रूरी हैं. अगर हर गीत आम आदमी
गुनगुनाते-गुनगुनाते गाने लग जाए तो पार्श्व गायन के लिए लंबी
कतार लग जायेगी. सुनने में सरल सा लगता ये गीत तो ऐसा है
कि मंजे हुए गायक भी इसे गाते समय डगमगा जाते हैं और इस
गीत की खूबी ये है कि संगीत के बिना इसको गुनगुनाने पर कुछ
रिक्तता का आभास होता है. इस तरीके से बना है ये कि बिना
संगीत के टुकड़ों के ये न तो गुनगुनाने में अच्छा लगता है और
शायद सुनने में भी न लगे. इसको ही कहते हैं बोल और धुन का
एक दूसरे से कस कर बंधा होना.

प्रस्तुत गीत है फिल्म गाईड से जो हिंदी फिल्म सिनेमा इतिहास का
एक मील का पत्थर है. शैलेन्द्र के लिखे गीत को स्वरबद्ध किया है
संगीतकार सचिन देव बर्मन ने. इस गीत को कातिल बनाने में
सैक्सोफोन ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी है जो कि मनोहारी सिंह ने
बजायी है. उम्मीद है इसमें बजी बांसुरी ज़रूर प्रसिद्द बांसुरी वादक
हरिप्रसाद चौरसिया की ही होगी.




गीत के बोल:

आ, आ आ आ आ आ
दिन ढल जाए हाय रात ना जाए,
तू तो ना आए तेरी याद सताए
दिन ढल जाए हाय रात ना जाए,
तू तो ना आए तेरी याद सताए
दिन ढल जाए

प्यार में जिनके सब जग छोड़ा,
और हुए बदनाम,
उनके ही हाथों हाल हुआ ये,
बैठे हैं दिल को थाम,
अपने कभी थे, अब हैं पराए

दिन ढल जाए हाय रात ना जाए,
तू तो ना आए तेरी याद सताए
दिन ढल जाए

ऐसी ही रिमझिम, ऐसी फुहारें,
ऐसी ही थी बरसात,
खुद से जुदा और जग से पराए,
हम दोनों थे साथ,
फिर से वो सावन अब क्यों ना आए

दिन ढल जाए हाय रात ना जाए,
तू तो ना आए तेरी याद सताए
दिन ढल जाए

दिल के मेरे पास हो इतने,
फिर भी हो कितने दूर,
तुम मुझसे, मैं दिल से परेशान,
दोनों हैं मजबूर,
ऐसे में किसको कौन मनाए

दिन ढल जाए हाय रात ना जाए,
तू तो ना आए तेरी याद सताए
दिन ढल जाए
..........................
Din dhal jaaye-Guide 1964

Thursday, 16 June 2011

धीरे रे चलो-जौहर महमूद इन गोवा १९६५

आपको कुछ गंभीर से गीत सुना दिए अब एक मस्त गीत सुनवाते हैं।
मुकेश के लोकप्रिय गीतों में से एक और श्वेत श्याम युग से इसे परदे
पर गा रहे हैं ए एस जौहर और उनकी फैवरेट अभिनेत्री सोनिया साहनी
बांकी हिरनिया का किरदार निभा रही हैं। जौहर अच्छे अभिनेता
थे। इस गीत में वो किसी कुशल रोमांटिक नायक जैसे गीत गाने कि
कुशल कवायद कर रहे हैं।




गीत के बोल:

धीरे रे चलो मोरी बांकी हिरनिया
धीरे रे चलो मोरी बांकी हिरनिया
कमर ना लचके हाय सजनिया


धीरे रे चलो मोरी बांकी हिरनिया
धीरे रे चलो मोरी बांकी हिरनिया

तेरी बिखरी जुल्फें देख देख ये
मस्त घटा शरमाई, हो देखो
मस्त घटा शरमाई
तेरा रूप जो देखा झूम झूम ली
बिजली ने ली अंगडाई, हो ली
बिजली ने अंगडाई
काले बाल गोरा रूप
जैसे साये में हो धूप
तुझे देख जिया भरमा ही गया

ओ, धीरे रे चलो मोरी बांकी हिरनिया
धीरे रे चलो मोरी बांकी हिरनिया
कमर ना लचके हाय सजनिया

धीरे रे चलो मोरी बांकी हिरनिया
धीरे रे चलो मोरी बांकी हिरनिया

क्यूँ दिल की राहें छोड़ छोड़ ये
फूल चला कारों पे,
ये फूल चला कारों पे
तेरा पिघले ऐसे रूप के जैसे
मोम हो अंगारों पे जैसे
मोम हो अंगारों पे
तेरा मुखड़ा गुलाबी तेरी चाल शराबी
मुझे राम कसम नशा हो ही गया


ओ, धीरे रे चलो मोरी बांकी हिरनिया
धीरे रे चलो मोरी बांकी हिरनिया
कमर ना लचके हाय सजनिया

धीरे रे चलो मोरी बांकी हिरनिया
धीरे रे चलो मोरी बांकी हिरनिया
................................
Dheere re chalo-Johar Mehmood in Goa 1965

Saturday, 28 May 2011

काहे को बीन बजाये सपेरे-सहेली १९६५

जब से वो बीन वाला गाना सुना है फिल्म कैदी का, तब से बीन वाले
गाने बहुत याद आ रहे हैं। एक और सुन लीजिये-ये है सन १९६५ की
फिल्म सहेली से। फिल्म नागिन(जिसमें हेमंत कुमार का संगीत
था) के लिए एक गीत में 'क्ले वायलिन' से बीन की ध्वनि निकालने
वाले कल्याणजी भाई और रवि ने अपने अपने तरीके से बीन की
आवाज़ का इस्तेमाल किया। सबसे ज्यादा इस्तेमाल आपको कल्याणजी
आनंदजी के गीतों में मिलेगा, रवि के इक्का दुक्का गीत ही हैं। गौरतलब
है कि फिल्म नागिन के पदार्पण तक ना तो संगीतकार कल्याणजी और
ना ही रवि का नाम ज्यादा लोगों को मालूम था। बतौर स्वतंत्र संगीतकार
रवि ने पहली फिल्म की-वचन(१९५५) और कल्याणजी वीरजी शाह ने की
वो थी सम्राट चन्द्रगुप्त (१९५८) । फिल्म सहेली में संगीतकार भाइयों की जोड़ी-
कल्याणजी आनंदजी ने संगीत दिया है। बाकी की चर्चा फिर कभी। फिलहाल ये गीत
सुनिए। अर्जुन हिंगोरानी के निर्देशन में बनी फिल्म सहेली में कई मधुर गीत हैं।
गीत लिखा है शमीम जयपुरी ने। इस फिल्म के कुछ गीत इन्दीवर ने भी
लिखे हैं। ये गीत विडियो देखने के बाद ज्यादा बढ़िया लगने लगा है।
धन्यवाद् यू ट्यूब और उसके दयालु अपलोडर्स का। इतना तो तय है कि
कल्पना इस गीत में ज्यादा खूबसूरत नज़र आती हैं बजाये फिल्म प्रोफ़ेसर
के गीत -मैं चली मैं चली के।





गीत के बोल:

आ आ आ आ आ आ आ आ
ओ ओ ओ ओ ओ , ओ ओ ओ ओ ओ
ओ ओ ओ ओ ओ, ओ ओ

कहे तू बीन बजाये संपेरे
कहे तू बीन बजाये

कहे तू बीन बजाये संपेरे
कहे तू बीन बजाये

बैरी लगी में और लगाये
कौन तुझे समझाए
संपेरे, कहे तू बीन बजाये

अब मैं तोसे प्रीत निभाऊं
या के जग की रीत निभाऊं
हो ओ ओ अब मैं तोसे प्रीत निभाऊं
या के जग की रीत निभाऊं

जग रोके और मन बहकाए

कहे तू बीन बजाये संपेरे
कहे तू बीन बजाये
संपेरे, कहे तू बीन बजाये

नाचत नाचत गिर गिर जाऊं
कैसे नटखट को समझाऊँ
हो ओ ओ नाचत नाचत गिर गिर जाऊं
कैसे नटखट को समझाऊँ

बेदर्दी तोहे लाज ना आये

कहे तू बीन बजाये संपेरे
कहे तू बीन बजाये

बैरी लगी में और लगाये
कौन तुझे समझाए
संपेरे, कहे तू बीन बजाये
............................................
Kahe too been bajaye sanpere-Saheli 1964

Wednesday, 12 January 2011

लोग पीते हैं लड़खड़ाते हैं - फरार १९६५

फरार नाम से कई फ़िल्में बन चुकी हैं। १९५५ से लगा के
सन १९७५ तक हर दस साल के अंतर पर एक फिल्म बनी।
१९८५ में कोई नहीं बनी। चौथी फरार आई ९० के दशक
में। प्रस्तुत श्वेत श्याम युग के गीत को आदिरूप हेमंत कुमार
गीत कहा जा सकता है।

बंगला सिनेमा के अनिल चटर्जी पर इसे फिल्माया गया है।
कैफ़ी आज़मी के लिखे बोलों कि धुन भी हेमंत कुमार ने ही
बनाई है। इस तरह से वे गायक-संगीतकार दोनों ही हैं इस
गीत के। लोग पीते हैं तो लड़खड़ाते ही हैं मगर साथ साथ
वे क्या करते हैं ये हमें गीतों और गजलों के माध्यम से
आसानी से पता चल जाता है। हीरो दुखी क्यूँ है- क्या उसे
अंग्रेजी दारु की बोतल में देसी ठर्रा भर के परोस दिया गया है
या फिर कोई और वजह, जाने के लिए आपको देखना पड़ेगी
फिल्म फरार।




गीत के बोल:

लोग पीते हैं लड़खड़ाते हैं
दिल से दुनिया का ग़म मिटाते हैं
लोग पीते हैं लड़खड़ाते हैं
दिल से दुनिया का ग़म मिटाते हैं
एक हम हैं के तेरी महफ़िल में
प्यासे आते हैं प्यासे जाते हैं

खुश हैं सब और ख़ुशी नहीं मिलती
जिंदा हैं ज़िन्दगी नहीं मिलती
जल रहे हैं चराग में धोखे
जल रहे हैं चराग में धोखे
और कहीं रौशनी नहीं मिलती
रौशनी का फरेब खाते हैं
रौशनी का फरेब खाते हैं
प्यासे आते हैं प्यासे जाते हैं

लोग पीते हैं लड़खड़ाते हैं

महकी महकी हुयी फ़ज़ा को सलाम
बहकी बहकी हुयी हवा को सलाम
इन बहारों से तो भली है खिज़ां
इन बहारों से तो भली है खिजां
इन बहारों की हर अदा को सलाम
जिनमें सौ ज़ख्म मुस्कुराते हैं
जिनमें सौ ज़ख्म मुस्कुराते हैं
प्यासे आते हैं प्यासे जाते हैं

लोग पीते हैं लड़खड़ाते हैं
दिल से दुनिया का ग़म मिटाते हैं
एक हम हैं के तेरी महफ़िल में
प्यासे आते हैं प्यासे जाते हैं

..........................................
Log peete hain ladkhadate hain-Faraar 1955

Sunday, 12 December 2010

ऐसे तो ना देखो-भीगी रात १९६५

इसके मुखड़े के बोल पढ़ के तीन देवियाँ के गाने की
गलतफ़हमी हो जाती है। वो गीत रफ़ी का गाया एकल
गीत था जबकि प्रस्तुत गीत सुमन और रफ़ी का गाया
युगल गीत है। कालिदास के निर्देशन में बनी फिल्म
भीगी रात का संगीत अच्छा है। हमारी कोशिश है
की आपको पहले कम प्रचलित और कम सुने गए गीत
सुनवाए जाएँ ताकि आपको कुछ अतिरिक्त जानकारी मिलती
रहे। रईसी वाला गीत है। नायक नायिका कार में बैठ
के घूमने निकले है और गीत भी गाते हैं। गीत के
नीचे आपको एक कमेन्ट मिलेगा-grossly underrated for
obvious रेअसोंस- इस तरह की टिप्पणियों से अर्थ निकलना
बड़ी टेढ़ी खीर होता है। या तो लिखने वाला ये कहना
चाहता है कि रफ़ी और सुमन के गाये युगल गीत लता-रफ़ी
के गाये युगल गीतों की तुलना में कमतर आंके जाते हैं
या उसका इशारा दूसरे संगीतकारों और रोशन के
संगीत में तुलना से है। फिलहाल सम्भावना पहले कारण
की ज्यादा नज़र आ रही है। सुमन को प्रथम श्रेणी की
गायिका मानने से कई संगीत प्रेमी इनकार जो करते हैं
सीधी वजह उनकी आवाज़ लता की आवाज़ के सबसे निकट
होना। खैर ये तुलना वुलना का चक्कर छोड़ें और सुनें इस
मधुर गीत को।




भीगी रात के पिछले गीत में नायिका रूठी हुई थी। इसमें थोड़ी
खुश नज़र आ रही है और कुछ खिसियाने अंदाज़ में नायक के
साथ गीत गाना शुरू करती हैं-जैसे कहना चाह रही हों-"शर्म से
यहीं गड़ जाएँ ना कहीं हम" !!




गीत के बोल:

ऐसे तो ना देखिये के बहक जाएँ कहीं हम
आखिर को एक इंसान हैं फ़रिश्ता तो नहीं हम

हाय, ऐसी ना कहो बात के मर जाएँ यहीं हम
आखिर को एक इंसान है फ़रिश्ता तो नहीं हम

अंगडाई सी लेती है जो ख़ुशबू भरी जुल्फें
ख़ुशबू भरी जुल्फें
गिरती हैं तेरे सुर्ख लबों पर तेरी जुल्फें
लबों पर तेरी जुल्फें
जुल्फें ना तेरी चूम लें
जुल्फें ना तेरी चूम लें ऐ माहजबीं हम
आखिर को एक इंसान हैं फ़रिश्ता तो नहीं हम

आ हा हा, आ आ आ आ आ, हं हं हं हं हं

सुन सुन के तेरी बात नशा छाने लगा है
नशा छाने लगा है
खुद अपने भी प्यार तो कुछ आने लगा है
है ऐ ऐ, आने लगा है।

रखना है कहीं पाँव तो
रखना है कहीं पाँव तो रखते हैं कहीं हम
आखिर को एक इंसान है फ़रिश्ता तो नहीं हम

भीगा सा ये रुख-ए-नाज़ ये हल्का सा पसीना
ये हल्का सा पसीना
हाय
ये नाचती आँखों के भंवर दिल का सफीना
दिल का सफीना
सोचा है के अब डूब के
सोचा है के अब डूब के रह जाएँ यहीं हम
आखिर को एक इंसान हैं फ़रिश्ता तो नहीं हम

हाय, ऐसी ना कहो बात के मर जाएँ यहीं हम
आखिर को एक इंसान हैं फ़रिश्ता तो नहीं हम

आ हा हा, आ आ आ आ आ, हं हं हं हं हं
हं हं हं हं हं हं हं
......................................................................
Aise to na dekhiye ke behak jayen-Bheegi Raat 1965

मोहब्बत से देखा खफा हो गए हैं-भीगी रात १९६५

रोशन ने अपने कैरियर के उत्तरार्ध में गीत की ध्वनियों
में हल्का ईको प्रभाव का काफी प्रयोग किया। ये अक्सर
गायक की आवाज़ के लिए प्रयोग में लायी जाती। कुछ
गीतों में वाद्य यन्त्र के साथ भी इसका प्रयोग हुआ है मगर
सुनने वाले का ध्यान वाद्य यन्त्र के साथ हुए खिलवाड़ पर
कम जाता है इसलिए उसको अभी नज़रअंदाज़ कर के
चलते हैं।

रफ़ी के गाये रोमांटिक गीतों के सृजन कर्ताओं में केवल
ओ पी नय्यर और शंकर जयकिशन ही नहीं बल्कि रोशन
भी शामिल हैं। ये गीत लिखा है मजरूह ने और इसे रुपहले
परदे पर गा रहे हैं प्रदीप कुमार । साथ में जो अभिनेत्री हैं
वो मीना कुमारी हैं।



गीत के बोल:

मोहब्बत से देखा खफा हो गए हैं
हसीं आज कल के खुदा हो गए हैं
हसीं आज कल के खुदा हो गए हैं

अदाओं में थी सादगी अब से पहले
हो ओ ओ, अदाओं में थी सादगी अब से पहले
वल्लाह
कहाँ रंग थे ये सुनहरे रुपहले
हो ओ ओ नज़र मिलते ही
नज़र मिलते ही क्या से क्या हो गए हैं
हसीं आज कल के खुदा हो गए हैं

किसी मोड़ पे बन के सूरज निकलना
हो ओ ओ, किसी मोड़ पे बन के सूरज निकलना
तौबा
कहीं धुप में चाँदनी बन के चलाना
हो ओ ओ जिधर देखो जलवा
जिधर देखो जलवानुमां हो गए हैं
हसीं आज कल के खुदा हो गए हैं

यहाँ तो लगा दिल पे एक ज़ख्म गहरा
हो ओ ओ, यहाँ तो लगा दिल पे एक ज़ख्म गहरा
हाय
वहां सिर्फ उनका ये अंदाज़ ठहरा
हो ओ ओ खता कर के भी
खता कर के भी बे-खता हो गए हैं

हसीं आज कल के खुदा हो गए हैं
........................................................
Mohabbat se dekha khafa ho gaye-Bheegi Raat 1965

Tuesday, 7 December 2010

गम छोड़ के मनाओ रंगरेली -गुमनाम १९६५

फिल्म गुमनाम से एक गीत पेश है जो कि समुद्र किनारे
फिल्माया गया है और ढेर सारे कलाकारों को आप इस गीत
में देखेंगे उनमे से एक हैं हेलन जो कि परदे पर इस गीत को
गा रही हैं। जिस प्रोडक्ट का वर्णन पिछली पोस्ट में किया गया
था वो इधर उपलब्ध नहीं है मगर ये शोर्ट ड्रेस वाला एक सोबर
गीत है जिसे आप देख कर आनंदित होंगे।

फिल्म का नाम ही बस गुमनाम है। ये अपने समय की एक
प्रसिद्ध होरर फिल्म थी । बहु सितारा फिल्म के इस गीत में
आपको नंदा, प्राण और मदन पुरी दिखाई देंगे हेलन के अलावा।

गीत में बैगपाइपर नाम के वाद्य का इस्तेमाल किया गया है।
गीत लिखा है हसरत जयपुरी ने और धुन बनाई है शंकर जयकिशन
ने। गायिका की आवाज़ आप पहचानते ही होंगे।



गीत के बोल:

हो इस दुनिया में जीना है तो सुन लो मेरी बात
हो इस दुनिया में जीना है तो सुन लो मेरी बात
गम छोड़ के मनाओ रंगरेली
और मान लो जों कहे किट्टी केली
गम छोड़ के मनाओ रंगरेली
और मान लो जों कहे किट्टी केली

जीना उसका जीना है जो हँसते गाते जी ले
जुल्फों की घनघोर घटा में नैन के सागर पी ले
जीना उसका जीना है जो हँसते गाते जी ले
जुल्फों की घनघोर घटा में नैन के सागर पी ले

जो करना है आज ही कर लो कल को किसने देखा
आई है रंगीन बहारें ले के दिन रंगीले।

हो इस दुनिया में जीना है तो सुन लो मेरी बात
इस दुनिया में जीना है तो सुन लो मेरी बात
गम छोड़ के मनाओ रंगरेली
और मान लो जों कहे किट्टी केली
गम छोड़ के मनाओ रंगरेली
और मान लो जों कहे किट्टी केली

मैं अलबेली चिंगारी हूँ नाचूं और लहराओं
दामन दामन फूल खिलाऊँ और खुशियाँ बरसाऊँ
मैं अलबेली चिंगारी हूँ नाचूं और लहराओं
दामन दामन फूल खिलाऊँ और खुशियाँ बरसाऊँ


दुनियावालों तुम क्या जानो जीने की ये बातें
आओ मेरे नज़दीक तो मैं ये बातें समझाऊँ

हो इस दुनिया में जीना है तो सुन लो मेरी बात
इस दुनिया में जीना है तो सुन लो मेरी बात
गम छोड़ के मनाओ रंगरेली
और मान लो जों कहे किट्टी केली
गम छोड़ के मनाओ रंगरेली
और मान लो जों कहे किट्टी केली

जो भी होगा हम देखेंगे गम से क्यूँ घबराएँ
इस दुनिया के बाग़ में लाखों पंछी आये जाएँ
जो भी होगा हम देखेंगे गम से क्यूँ घबराएँ
इस दुनिया के बाग़ में लाखों पंछी आये जाएँ

ऐश के बन्दों ऐश करो तुम छोडो ये ख़ामोशी
लोग हुए हैं जिंदादिल हैं जो चाहे कर जाएँ

हो इस दुनिया में जीना है तो सुन लो मेरी बात
इस दुनिया में जीना है तो सुन लो मेरी बात
गम छोड़ के मनाओ रंगरेली
और मान लो जों कहे किट्टी केली
गम छोड़ के मनाओ रंगरेली
और मान लो जों कहे किट्टी केली
....................................................................
Gham Chhod Ke Manao Rangreli-Gumnaam 1965

Sunday, 28 November 2010

मेरी निगाह ने क्या काम-मोहब्बत इसको कहते हैं १९६५

एक गंभीर किस्म का रोमांटिक गीत पेश है। फिल्म
'मोहब्बत इसको कहते हैं' का एक रोमांटिक युगल गीत
आपको सुनवाया जा चुका है। अब सुनिए रफ़ी की
आवाज़ में एकल गीत। संतुलन, तहजीब और दायरे
के भीतर घूमते इस गीत में सभी कुछ इतने आहिस्ता
से कहा जा रहा है कि किसी को तनिक भी अटपटा ना
लगे और बात भी बान जाए। परदे पर इस गीत को
मराठी सिनेमा के नामचीन कलाकार रमेश देव गा रहे हैं
और हमारे रोमांटिक हीरो शशि कपूर बिस्तर पर
पड़े पड़े सुन रहे हैं। गीत शायद अभिनेत्री नंदा के लिए
गाया जा रहा है। गीत में फ्लेश बैक का दृश्य खूबसूरती
से इस्तेमाल किया गया है जिसमे शशि कपूर और नंदा
लगभग गीत की एक एक पंक्ति पर अभिनय करते नज़र
आ रहे हैं।




गीत के बोल:


मेरी निगाह ने क्या काम लाजवाब किया
मेरी निगाह ने क्या काम लाजवाब किया

उन्हीं को लाखों हसीनों में इंतेखाब किया

मेरी निगाह ने क्या

वो आये घर में बाहर आ के रुक गई जैसे
वो आये घर में बाहर आ के रुक गई जैसे
फिजा में फूलों की डाली सी झुक गई जैसे

कुछ इस अदा से किसी शोख ने हिजाब किया
कुछ इस अदा से किसी शोख ने हिजाब किया

मेरी निगाह ने क्या

वो ज़ुल्फ़-ए-नाज़ खुली खुल के कुछ ढलक सी गई
सितारे टूट पड़े चांदनी छलक सी गई
जो मैंने चेहरा-ए-जाना को बेनकाब किया

मेरी निगाह ने क्या काम लाजवाब किया
मेरी निगाह ने क्या

के मेरे गीत में वो रंग है नजाकत है
के मेरे गीत में वो रंग है नजाकत है
के सब उसी निगाह-ए-नाज़ की इनायत है
के मुझ से जर्रे को चमका के आफ़ताब किया

मेरी निगाह ने क्या काम लाजवाब किया
उन्हीं को लाखों हसीनों में इंतेखाब किया

Monday, 22 November 2010

लिखा है तेरी आँखों में-तीन देवियाँ १९६५

अभिनेत्री नंदा और भारतीय नारी की छबि एक दूसरे के पर्याय लगते
थे रुपहले परदे पर। एक फिल्म आई थी सन में -तीन देवियाँ। इस फिल्म
में देव आनंद के साथ तीन देवियों ने काम किया था। ये हैं-नंदा, कल्पना और
सिमी ग्रेवाल। फिल्म में कुछ यूँ होता है की तीनों देवियाँ देव आनन्द पर फ़िदा
हो जाती हैं और शायद तीनों पर देव आनंद। अब समस्या तीन में से एक को चुनने
की है। फिल्म के अंत में फिल्म का नायक देव आनंद एक मनोवैज्ञानिक के पास
जाता है। वहां उसे समाधान मिल जाता है। भुट्टा खाने वाली अभिनेत्री ही उसकी
पसंद मालूम पढ़ती है। ज्ञात हो फिल्म के एक दृश्य में देव आनंद और नंदा भुट्टे
का आनंद लेते नज़र आते हैं। भुट्टे का आनंद लेने के साथ दोनों एक गीत गाते हैं।
आइये वही गीत सुनें। हिंदी फिल्म जगत का ये सबसे मधुर भुट्टा-गीत है। वैसे
कई गीत हैं जो बाजरे के खेत में भी फिल्माए गए हैं। निर्देशक अमरजीत का जवाब
नहीं जिन्होंने भुट्टे(मकई) के खेत को भी खूबसूरत बना डाला। मजरूह के बोल,
एस. डी. बर्मन का संगीत और आवाजें लता, किशोर की हैं।



गीत के बोल:

लिखा है तेरी आँखों में, किसका अफ़साना
लिखा है तेरी आँखों में, किसका अफ़साना
अगर इसे समझ सको, मुझे भी समझाना

लिखा है तेरी आँखों में, किसका अफ़साना

जवाब सा किसी तमन्ना का,
लिखा तो है मगर अधूरा सा
अरे ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
जवाब सा किसी तमन्ना का,
लिखा तो है मगर अधूरा सा
हो ओ ओ कैसी न हो मेरी हर बात अधूरी,
अभी हूँ आधा दीवाना

लिखा है तेरी आँखों में, किसका अफ़साना
अगर इसे समझ सको, मुझे भी समझाना

लिखा है तेरी आँखों में, किसका अफ़साना

जो कुछ नहीं तो ये इशारे क्यूँ,
ठहर गए मेरे सहारे क्यूँ
अरे ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
जो कुछ नहीं तो ये इशारे क्यूँ,
ठहर गए मेरे सहारे क्यूँ

थोड़ा सा हसीनों का सहारा ले के चलना,
है मेरी आदत रोज़ाना

लिखा है तेरी आँखों में, किसका अफ़साना
अगर इसे समझ सको, मुझे भी समझाना
लिखा है तेरी आँखों में, किसका अफ़साना

यहाँ वहाँ फ़िज़ा में आवारा,
अभी तलक़ ये दिल है बेचारा
अरे ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
यहाँ वहाँ फ़िज़ा में आवारा,
अभी तलक़ ये दिल है बेचारा

हो ओ ओ, दिल को तेरे तो हम ख़ाक ना समझे
तुझी को हमने पहचाना

लिखा है तेरी आँखों में, किसका अफ़साना
अगर इसे समझ सको, मुझे भी समझाना
लिखा है तेरी आँखों में, किसका अफ़साना

तुमसे अच्छा कौन है-जानवर १९६५

हसरत जयपुरी शंकर जयकिशन और रफ़ी की तिकड़ी ने बहुत से
रोमांटिक गीत दिए हैं फिल्म जगत को, इनमे से कुछ एक गीत
तेज़ गति वाले भी हैं। ये गीत थोडा तेज़ है और शम्मी कपूर के लिए
विशेष तौर पर बनाया सा प्रतीत होता है, जिस गति से शम्मी की
गर्दन हिलती थी उसी गति से मिलती जुलती गीत की गति भी है।
कम्बल नृत्य से गीत शुरू होता है। शम्मी कपूर के साथ राजश्री की
जोड़ी है फिल्म में जिसे हम ब्रह्मचारी फिल्म में भी देख सकते हैं।
गीत के दूसरे अंतरे में आप जोगिंग और कबड्डी डांस भी देखेंगे।
तीसरे अंतरे के पहले देसी बालाओं का लोकप्रिय लंगड़ी खेल दिखेगा।



गीत के बोल:

हो, तुम से अच्छा कौन है
दिल लो जिगर लो जान लो
हम तुम्हारे हैं सनम
तुम हमें पहचान लो

हो, तुम से अच्छा कौन है
दिल लो जिगर लो जान लो
हम तुम्हारे हैं सनम
तुम हमें पहचान लो

मैं हूँ वो झोंका, मस्त हवा का
संग तुम्हारे, चलता रहूँगा
जब से हुयी है, तुम से मोहब्बत
मिलता रहा हूँ, मिलता रहूँगा
मैं हूँ वो झोंका, मस्त हवा का
संग तुम्हारे, चलता रहूँगा
जब से हुयी है, तुम से मोहब्बत
मिलता रहा हूँ, मिलता रहूँगा

हो ओ ओ ओ, तुम से अच्छा कौन है
दिल लो जिगर लो जान लो
हम तुम्हारे हैं सनम
तुम हमें पहचान लो

ओ, तुम से अच्छा कौन है
दिल लो जिगर लो जान लो
हम तुम्हारे हैं सनम
तुम हमें पहचान लो

सीने में दिल है, दिल में तुम्ही हो
तुम में हमारी, छोटी सी जान है
तुम हो सलामत, हम को नहीं गम
तुम से हमारी, दुनिया जवान है
सीने में दिल है, दिल में तुम्ही हो
तुम में हमारी, छोटी सी जान है
तुम हो सलामत, हम को नहीं गम
तुम से हमारी, दुनिया जवान है

हो ओ ओ ओ, तुम से अच्छा कौन है
दिल लो जिगर लो जान लो
हम तुम्हारे हैं सनम
तुम हमें पहचान लो

ओ, तुम से अच्छा कौन है
दिल लो जिगर लो जान लो
हम तुम्हारे हैं सनम
तुम हमें पहचान लो

मर के भी देखा, मर ना सके हम
दिल की लगी ने, हम को बचाया
तेरी नज़र का, जादू है शायद
जिसने हमें फिर, जिंदा बनाया
मर के भी देखा, मर ना सके हम
दिल की लगी ने, हम को बचाया
तेरी नज़र का, जादू है शायद
जिसने हमें फिर, जिंदा बनाया

हो ओ ओ ओ, तुम से अच्छा कौन है
दिल लो जिगर लो जान लो
हम तुम्हारे हैं सनम
तुम हमें पहचान लो

ओ, तुम से अच्छा कौन है
दिल लो जिगर लो जान लो
हम तुम्हारे हैं सनम
तुम हमें पहचान लो
 
 
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