आपको एक गीत सुनवाया था सन १९८३ की मनोरंजक फिल्म 'वो सात दिन' से।
भटक गया, चटक गया वगैरह वगैरह । फिल्म से एक और मनोरंजक गीत सुन
लिया जाये आज। अनिल कपूर इस फिल्म के नायक हैं और किरायेदार की भूमिका
में हैं. पद्मिनी कोल्हापुरे हैं इस फिल्म की नायिका जो कि फिल्म के कथानक अनुसार
मकान मालिक की सुपुत्री है । गीत सामान्य अर्थ वाला है मगर आप इसे असामान्य
अर्थ वाला भी समझ सकते हैं। गायिका हैं आशा भोंसले। ज़ाहिर सी बात है -गीत में
अनाड़ी किसको बोला जा रहा है ये पांचवी फेल बच्चा भी बतला सकता है। अनाड़ी के
साथ जो छोटी उम्र का खिलाडी है उस कलाकार का नाम "मास्टर राजू" है।
गीत के बोल:
फ़रमाइश पर उपलब्ध करवाए जायेंगे
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Sunday, 12 February 2012
Sunday, 10 July 2011
हिंदी फ़िल्म में बरसात ६- रिमझिम रिमझिम-१९४२ ऐ लव स्टोरी १९९३
बारिश के मौसम में एक गीत और याद आ गया. सन १९४२ की
फ़िल्मी प्रेम कथा से अगला गीत पेश है.
फ़िल्मी बरसात वाला ये गीत अनिल कपूर और मनीषा कोइराला
पर फ़िल्माया गया है.
गीत के बोल:
रिमझिम रिमझिम रुमझुम रुमझुम
भीगी भीगी रुत में तुम हम हम तुम
चलते हैं, चलते हैं
बजता है जलतरंग टीन की छत पे जब
मोतियों जैसा जल बरसे
बूंदों की ये छड़ी लायी है वो घडी
जिसके लिए हम तरसे
हो हो हो,
बजता है जलतरंग टीन की छत पे जब
मोतियों जैसा जल बरसे
बूंदों की ये छड़ी लायी है वो घडी
जिसके लिए हम तरसे
हा हा हा रिमझिम रिमझिम रुमझुम रुमझुम
भीगी भीगी रुत में तुम हम हम तुम
हो चलते हैं, चलते हैं
बादल की चादरें ओढ़े हैं वादियाँ,
सारी दिशायें सोयी हैं
सपनों के गाँव में भीगी सी छाव में
दो आत्माएं खोयी हैं
हो बादल की चादरें ओढ़े हैं वादियाँ,
सारी दिशायें सोयी हैं
सपनों के गाँव में भीगी सी छाव
में दो आत्माएं खोयी हैं
रिमझिम रिमझिम ,ला ला
रुमझुम रुमझुम , ला ला
भीगी भीगी रुत में ,हा हा
तुम हम हम तुम
हो चलते हैं, चलते हैं
आयी हैं देखने झीलों के आईने,
बालों को खोले घटाएं
राह है धुंआ धुंआ जायेंगे हम कहाँ,
आओ यहीं रह जायें
हो हो हो आयी हैं देखने झीलों के आईने,
बालों को खोले घटाएं
राह है धुंआ धुंआ जायेंगे हम कहाँ,
आओ यहीं रह जायें
रिमझिम रिमझिम,रिमझिम
रुमझुम रुमझुम,रुमझुम
भीगी भीगी रुत में, हे हे
तुम हम हम तुम
हो चलते हैं, चलते हैं
रिमझिम रिमझिम
रिमझिम रिमझिम
रुमझुम रुमझुम
रुमझुम रुमझुम
भीगी भीगी रुत में
भीगी भीगी रुत में
हो चलते है, चलते है
...................................
Rimjhim rimjhim-1942 A Love Story
फ़िल्मी प्रेम कथा से अगला गीत पेश है.
फ़िल्मी बरसात वाला ये गीत अनिल कपूर और मनीषा कोइराला
पर फ़िल्माया गया है.
गीत के बोल:
रिमझिम रिमझिम रुमझुम रुमझुम
भीगी भीगी रुत में तुम हम हम तुम
चलते हैं, चलते हैं
बजता है जलतरंग टीन की छत पे जब
मोतियों जैसा जल बरसे
बूंदों की ये छड़ी लायी है वो घडी
जिसके लिए हम तरसे
हो हो हो,
बजता है जलतरंग टीन की छत पे जब
मोतियों जैसा जल बरसे
बूंदों की ये छड़ी लायी है वो घडी
जिसके लिए हम तरसे
हा हा हा रिमझिम रिमझिम रुमझुम रुमझुम
भीगी भीगी रुत में तुम हम हम तुम
हो चलते हैं, चलते हैं
बादल की चादरें ओढ़े हैं वादियाँ,
सारी दिशायें सोयी हैं
सपनों के गाँव में भीगी सी छाव में
दो आत्माएं खोयी हैं
हो बादल की चादरें ओढ़े हैं वादियाँ,
सारी दिशायें सोयी हैं
सपनों के गाँव में भीगी सी छाव
में दो आत्माएं खोयी हैं
रिमझिम रिमझिम ,ला ला
रुमझुम रुमझुम , ला ला
भीगी भीगी रुत में ,हा हा
तुम हम हम तुम
हो चलते हैं, चलते हैं
आयी हैं देखने झीलों के आईने,
बालों को खोले घटाएं
राह है धुंआ धुंआ जायेंगे हम कहाँ,
आओ यहीं रह जायें
हो हो हो आयी हैं देखने झीलों के आईने,
बालों को खोले घटाएं
राह है धुंआ धुंआ जायेंगे हम कहाँ,
आओ यहीं रह जायें
रिमझिम रिमझिम,रिमझिम
रुमझुम रुमझुम,रुमझुम
भीगी भीगी रुत में, हे हे
तुम हम हम तुम
हो चलते हैं, चलते हैं
रिमझिम रिमझिम
रिमझिम रिमझिम
रुमझुम रुमझुम
रुमझुम रुमझुम
भीगी भीगी रुत में
भीगी भीगी रुत में
हो चलते है, चलते है
...................................
Rimjhim rimjhim-1942 A Love Story
Saturday, 11 June 2011
रूठ न जाना-१९४२ ऐ लव स्टोरी १९९३
सभी फिल्म निर्देशक जब कोई पीरियड फिल्म या ऐतिहासिक
फिल्म बनाते हैं तो दावा करते हैं की उन्होंने उस समय पर काफी
रिसर्च की। ऐसा ही इस फिल्म के मामले में भी हुआ। उस समय के
माहौल, पहनावे इत्यादि पर भले ही रिसर्च की गई हो, कहीं कहीं
ऐसा महसूस होता है जैसे ये १९८४ का युग का कोई दृश्य १९४२ की
बनी हुई पालिश से पोत के पेश कर दिया गया हो।
विधु विनोद चोपड़ा की फिल्मों का छायांकन बढ़िया होता है। आइये
देखें और सुनें १९४२ एक प्रेम कथा फिल्म से तीसरा गीत जो कुमार सानू
की आवाज़ में है। जावेद अख्तर का लिखा गीत आर डी बर्मन द्वारा
संगीतबद्ध है।
गीत के बोल:
रूठ न जाना तुम से कहूं तो
मैं इन आँखों में जो रहूँ तो
तुम ये जानो या न जानो
तुम ये मानो या न मानो
मेरे जैसा दीवाना तुम पाओगे नहीं
याद करोगे मैं जो न हूँ तो
रूठ न जाना तुम से कहूं तो
मेरी ये दीवानगी कभी न होगी कम
जितने भी चाहे तुम कर लो सितम
मुझसे बोलो या न बोलो
मुझको देखो या न देखो
ये भी माना मुझसे
मिलने आओगे नहीं
सारे सितम हंस के में सहूँ तो
रूठ न जाना तुमसे कहूं तो
प्रेम के दरिया में लहरें हज़ार
लहरों में जो भी डूबा हुवा वोही पार
प्रेम के दरिया में लहरें हज़ार
लहरों में जो भी डूबा हुवा वोही पार
ऊँची नीची, नीची ऊँची
नीची ऊँची ऊँची नीची
लहरों में तुम देखूं कैसे आओगे नहीं
में इन लहरों मैं जो रहूँ तो
रूठ न जाना तुम से कहूं तो
मैं इन आँखों में जो रहूँ तो
तुम ये जानो या न जानो
तुम ये मानो या न मानो
मेरे जैसा दीवाना तुम पाओगे नहीं
याद करोगे मैं जो न हूँ तो
रूठ न जाना तुम से कहूं तो
मैं इन आँखों में जो रहूँ तो
..................................
Rooth na jaana-1942 a love story
फिल्म बनाते हैं तो दावा करते हैं की उन्होंने उस समय पर काफी
रिसर्च की। ऐसा ही इस फिल्म के मामले में भी हुआ। उस समय के
माहौल, पहनावे इत्यादि पर भले ही रिसर्च की गई हो, कहीं कहीं
ऐसा महसूस होता है जैसे ये १९८४ का युग का कोई दृश्य १९४२ की
बनी हुई पालिश से पोत के पेश कर दिया गया हो।
विधु विनोद चोपड़ा की फिल्मों का छायांकन बढ़िया होता है। आइये
देखें और सुनें १९४२ एक प्रेम कथा फिल्म से तीसरा गीत जो कुमार सानू
की आवाज़ में है। जावेद अख्तर का लिखा गीत आर डी बर्मन द्वारा
संगीतबद्ध है।
गीत के बोल:
रूठ न जाना तुम से कहूं तो
मैं इन आँखों में जो रहूँ तो
तुम ये जानो या न जानो
तुम ये मानो या न मानो
मेरे जैसा दीवाना तुम पाओगे नहीं
याद करोगे मैं जो न हूँ तो
रूठ न जाना तुम से कहूं तो
मेरी ये दीवानगी कभी न होगी कम
जितने भी चाहे तुम कर लो सितम
मुझसे बोलो या न बोलो
मुझको देखो या न देखो
ये भी माना मुझसे
मिलने आओगे नहीं
सारे सितम हंस के में सहूँ तो
रूठ न जाना तुमसे कहूं तो
प्रेम के दरिया में लहरें हज़ार
लहरों में जो भी डूबा हुवा वोही पार
प्रेम के दरिया में लहरें हज़ार
लहरों में जो भी डूबा हुवा वोही पार
ऊँची नीची, नीची ऊँची
नीची ऊँची ऊँची नीची
लहरों में तुम देखूं कैसे आओगे नहीं
में इन लहरों मैं जो रहूँ तो
रूठ न जाना तुम से कहूं तो
मैं इन आँखों में जो रहूँ तो
तुम ये जानो या न जानो
तुम ये मानो या न मानो
मेरे जैसा दीवाना तुम पाओगे नहीं
याद करोगे मैं जो न हूँ तो
रूठ न जाना तुम से कहूं तो
मैं इन आँखों में जो रहूँ तो
..................................
Rooth na jaana-1942 a love story
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RD Burman
Thursday, 19 May 2011
बटाटा वडा-हिफाज़त १९८७
आपको सन १९४१ के गीत के जिक्र के वक़्त बताया था कि फिल्म निर्माण
की तकनीक ने इस कदर विकास किया कि ज़मीन पर रेंगते रेंगते गीत गाते
नायक नायिका हवा में उड़ कर भी गीत गाने लगे। विशेष प्रभावों के माध्यम
से ये संभव हुआ। प्रस्तुत गीत में भी एक ऐसा ही प्रभाव है।
लगभग सभी खाने पीने की चीज़ें गीतों के माध्यम से बोलिवुडियों ने याद
कर ली हैं। बॉलीवुड की उत्पत्ति हुई है बम्बई में तो बटाटा वडा कैसे
भुलाया जा सकता है। आम और ख़ास दोनों वर्गों को समान रूप से प्रिय
ये बम्बैया खाना आपको शहर में हर जगह आसानी से और उत्तम गुणवत्ता
वाला मिल जायेगा। इसे जनता नाश्ते और खाने में जैसे चाहे खाती है,
चटनी के साथ, बिना चटनी के।
फिल्म में कहानी कुछ यूँ है-नायक नायिका एक बटाटा वडे की दुकान
पर पहुँच जाते हैं, वहां बटाटा बड़े बनाने वाली महिला वडे के मसाले
में गलती से भांग डाल देती है। भांग वाले वडे खाने के बाद क्या होता है
वो इस गीत में आप देखिये। गीत का मसाला तैयार किया है आनंद बक्षी
ने और इसको धुन में तल कर स्वादिष्ट बनाया है आर डी बर्मन ने। गाने
वाले कलाकार हैं-एस पी बालसुब्रमण्यम और एस जानकी ।
गीत के बोल:
बटाटा वडा हे
बटाटा वडा
दिल नहीं देना था, देना पड़ा
बटाटा वडा हे
बटाटा वडा
प्यार नहीं करना था, करना पड़ा
बटाटा वडा, हे
बटाटा वडा
बटाटा वडा, बटाटा वडा
होते जो होश मं हम
ऐसे ना झूम जाते
अच्छा यही था पहले
हम तुम ना पास आते
हो ओ ओ ओ ओ
अब दूर जाना है मुश्किल बड़ा
बटाटा वडा, हे
बटाटा वडा
दिल नहीं देना था, देना पड़ा
बटाटा वडा, डा डा डा डा डा
बटाटा वडा
लगता है आज दिल के
अरमान निकाल रहे हैं
कैसी है आग जिस में
हम दोनों जल रहे हैं
जा ठन्डे पानी का
ले आ तू घड़ा
बटाटा वडा है
बटाटा वडा हा हा हा हा हा
दिल नहीं देना था, देना पड़ा
हो हो हो हो हो हो हो
बटाटा वडा, बटाटा वडा
मस्ती में दिल की कश्ती
जाये ना डूब अपनी
डूबे के पार उतरे
जोड़ी है खूब अपनी
तू भी है कंवारी
मैं भी हूँ छडा, हा हा हा हा हा
बटाटा वडा, आ हा हा
बटाटा वडा आ हा हा हा
दिल नहीं देना था, देना पड़ा
बटाटा वडा, आ हा हा
बटाटा वडा, टा वडा
टा वडा
........................
Batata Wada-Hifazat 1987
की तकनीक ने इस कदर विकास किया कि ज़मीन पर रेंगते रेंगते गीत गाते
नायक नायिका हवा में उड़ कर भी गीत गाने लगे। विशेष प्रभावों के माध्यम
से ये संभव हुआ। प्रस्तुत गीत में भी एक ऐसा ही प्रभाव है।
लगभग सभी खाने पीने की चीज़ें गीतों के माध्यम से बोलिवुडियों ने याद
कर ली हैं। बॉलीवुड की उत्पत्ति हुई है बम्बई में तो बटाटा वडा कैसे
भुलाया जा सकता है। आम और ख़ास दोनों वर्गों को समान रूप से प्रिय
ये बम्बैया खाना आपको शहर में हर जगह आसानी से और उत्तम गुणवत्ता
वाला मिल जायेगा। इसे जनता नाश्ते और खाने में जैसे चाहे खाती है,
चटनी के साथ, बिना चटनी के।
फिल्म में कहानी कुछ यूँ है-नायक नायिका एक बटाटा वडे की दुकान
पर पहुँच जाते हैं, वहां बटाटा बड़े बनाने वाली महिला वडे के मसाले
में गलती से भांग डाल देती है। भांग वाले वडे खाने के बाद क्या होता है
वो इस गीत में आप देखिये। गीत का मसाला तैयार किया है आनंद बक्षी
ने और इसको धुन में तल कर स्वादिष्ट बनाया है आर डी बर्मन ने। गाने
वाले कलाकार हैं-एस पी बालसुब्रमण्यम और एस जानकी ।
गीत के बोल:
बटाटा वडा हे
बटाटा वडा
दिल नहीं देना था, देना पड़ा
बटाटा वडा हे
बटाटा वडा
प्यार नहीं करना था, करना पड़ा
बटाटा वडा, हे
बटाटा वडा
बटाटा वडा, बटाटा वडा
होते जो होश मं हम
ऐसे ना झूम जाते
अच्छा यही था पहले
हम तुम ना पास आते
हो ओ ओ ओ ओ
अब दूर जाना है मुश्किल बड़ा
बटाटा वडा, हे
बटाटा वडा
दिल नहीं देना था, देना पड़ा
बटाटा वडा, डा डा डा डा डा
बटाटा वडा
लगता है आज दिल के
अरमान निकाल रहे हैं
कैसी है आग जिस में
हम दोनों जल रहे हैं
जा ठन्डे पानी का
ले आ तू घड़ा
बटाटा वडा है
बटाटा वडा हा हा हा हा हा
दिल नहीं देना था, देना पड़ा
हो हो हो हो हो हो हो
बटाटा वडा, बटाटा वडा
मस्ती में दिल की कश्ती
जाये ना डूब अपनी
डूबे के पार उतरे
जोड़ी है खूब अपनी
तू भी है कंवारी
मैं भी हूँ छडा, हा हा हा हा हा
बटाटा वडा, आ हा हा
बटाटा वडा आ हा हा हा
दिल नहीं देना था, देना पड़ा
बटाटा वडा, आ हा हा
बटाटा वडा, टा वडा
टा वडा
........................
Batata Wada-Hifazat 1987
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Anil Kapoor,
Hifazat,
Madhuri Dixit,
RD Burman,
S Janaki,
SP Balasubramaniam
Monday, 11 April 2011
पीना हराम है ना पिलाना हराम है-चमेली की शादी १९८६
मार्च के महीने के अंत में दारू(विलायती, देसी) के ठेके अपने अंतिम
चरण में होते हैं। स्टॉक ख़त्म करने के चक्कर में पुराने ठेकेदार अपना
माल सस्ती दरों में भी बेच दिया करते हैं। उस समय तो साहब
दारुडियों का ये हाल होता है-पाँचों उँगलियाँ घी में, पैर चूल्हे में और
सर कढ़ाई में। कुछ कुछ लोग तो इस हिसाब से सेवन करते हैं मानो
एक साल की क़सर निकाल रहे हों।
आज आपको एक किशोर कुमार का गाया हुआ एक मस्त गीत सुनवाते
हैं, होली की क़सर जो निकालनी है। गीत फिल्म का निर्देशन बासु चटर्जी ने।
एक घासलेटी सी प्रेम कहानी जो हमारे इर्द गिर्द अक्सर सुनाई देती है अलग
अलग डेंसिटी में, उसका जीवंत और वास्तविक चित्रण इस फिल्म में है और
चाहे फिल्म समीक्षक इसको कोई भी दर्ज़ा प्रदान करें, इसे सिनेमा इतिहास
की सर्वाधिक मनोरंजक फिल्मों में गिना जाता है। फिल्म का निर्देशन बासु
चटर्जी ने किया है।
इस फिल्म के पहलुओं पर काफ़ी चर्चा होना बाकी है। पढ़ते रहिये ये ब्लॉग।
पर अनिल कपूर के अलावा जो अन्य कलाकार हैं उनके नाम हैं-हुमा खान
और अनु कपूर। गायक कलाकार हैं-अलका याग्निक और किशोर कुमार ।
गीत के बोल:
पीना हराम है ना पिलाना हराम है
पीना हराम ना पिलाना हराम है
पीने के बाद प्यारे
लडखडाना , लडखडाना
हाँ लडखडाना हराम है
हाँ,पीना हराम है ना पिलाना हराम है
पीना हराम ना पिलाना हराम है
पीने के बाद प्यारे
लडखडाना , बहक जाना
डगमगाना हराम है
नशा,
नशा देखा लाल पानी में देखा अनूठा
नशा देखा लाल पानी में देखा अनूठा
पी के दो घूँट गला घोंट दो ग़मों का
घोंट दो गला
पीने के बाद नज़र आये ना धोखा
खुल जाये भेद दोस्तों दुश्मनों का
तू ही मेरा जिगरी यार है
तुझको जिसपे इतना प्यार है
प्यार ये दिल के आर पार है
दिल तुझपे लट्टू
आंख वही है नाक वही है
बाल वही है चाल वही है
हाँ तू नटवरलाल वही है
मेरा यार नट्टू, निखट्टू
मस्ती है जाम है
हाँ मस्ती है जाम है
हाँ कितना आराम है
हाँ मस्ती है जाम है
हाँ कितना आराम है
पीने के बाद प्यारे
तडफडाना, तिलमिलाना
छटपटाना हराम है
पीना हराम ना पिलाना हराम है
पीने के बाद प्यारे
तडफडाना, तडफडाना
तडफडाना हराम है
हो, जो पीना है तो प्यार के जाम पीना
जो पीना है तो प्यार के जाम पीना
नशा जिसका मरके भी उतरे कभी ना
क्या बात कही
जो ले डूबे तुझको वो पीना क्या पीना
बेहोश हो के भी जीना क्या जीना
सुबह भुला दे शाम भुला दे
दुनिया का हर काम भुला दे
क्या होगा अंजाम भुला दे
जाम का ये जादू
नाम बदल के दे जो झांसा
झांसे से कितनों को फांसा
आखिर उल्टा पढ़ गया पासा
बना तमाशा तू
मय क्यूँ बदनाम है
क्यूँ क्यूँ
हाँ, मय क्यूँ बदनाम है
क्यूँ पीना इलज़ाम है
हाँ, मय क्यूँ बदनाम है
क्यूँ पीना इलज़ाम है
पीने के बाद प्यारे
हडबड़ाना, गड़बढ़ाना
बडबडाना हराम है
पीना हराम ना पिलाना हराम है
पीने के बाद प्यारे
लडखडाना, ऐ तडफडाना
हो बडबडाना हराम है
चरण में होते हैं। स्टॉक ख़त्म करने के चक्कर में पुराने ठेकेदार अपना
माल सस्ती दरों में भी बेच दिया करते हैं। उस समय तो साहब
दारुडियों का ये हाल होता है-पाँचों उँगलियाँ घी में, पैर चूल्हे में और
सर कढ़ाई में। कुछ कुछ लोग तो इस हिसाब से सेवन करते हैं मानो
एक साल की क़सर निकाल रहे हों।
आज आपको एक किशोर कुमार का गाया हुआ एक मस्त गीत सुनवाते
हैं, होली की क़सर जो निकालनी है। गीत फिल्म का निर्देशन बासु चटर्जी ने।
एक घासलेटी सी प्रेम कहानी जो हमारे इर्द गिर्द अक्सर सुनाई देती है अलग
अलग डेंसिटी में, उसका जीवंत और वास्तविक चित्रण इस फिल्म में है और
चाहे फिल्म समीक्षक इसको कोई भी दर्ज़ा प्रदान करें, इसे सिनेमा इतिहास
की सर्वाधिक मनोरंजक फिल्मों में गिना जाता है। फिल्म का निर्देशन बासु
चटर्जी ने किया है।
इस फिल्म के पहलुओं पर काफ़ी चर्चा होना बाकी है। पढ़ते रहिये ये ब्लॉग।
पर अनिल कपूर के अलावा जो अन्य कलाकार हैं उनके नाम हैं-हुमा खान
और अनु कपूर। गायक कलाकार हैं-अलका याग्निक और किशोर कुमार ।
गीत के बोल:
पीना हराम है ना पिलाना हराम है
पीना हराम ना पिलाना हराम है
पीने के बाद प्यारे
लडखडाना , लडखडाना
हाँ लडखडाना हराम है
हाँ,पीना हराम है ना पिलाना हराम है
पीना हराम ना पिलाना हराम है
पीने के बाद प्यारे
लडखडाना , बहक जाना
डगमगाना हराम है
नशा,
नशा देखा लाल पानी में देखा अनूठा
नशा देखा लाल पानी में देखा अनूठा
पी के दो घूँट गला घोंट दो ग़मों का
घोंट दो गला
पीने के बाद नज़र आये ना धोखा
खुल जाये भेद दोस्तों दुश्मनों का
तू ही मेरा जिगरी यार है
तुझको जिसपे इतना प्यार है
प्यार ये दिल के आर पार है
दिल तुझपे लट्टू
आंख वही है नाक वही है
बाल वही है चाल वही है
हाँ तू नटवरलाल वही है
मेरा यार नट्टू, निखट्टू
मस्ती है जाम है
हाँ मस्ती है जाम है
हाँ कितना आराम है
हाँ मस्ती है जाम है
हाँ कितना आराम है
पीने के बाद प्यारे
तडफडाना, तिलमिलाना
छटपटाना हराम है
पीना हराम ना पिलाना हराम है
पीने के बाद प्यारे
तडफडाना, तडफडाना
तडफडाना हराम है
हो, जो पीना है तो प्यार के जाम पीना
जो पीना है तो प्यार के जाम पीना
नशा जिसका मरके भी उतरे कभी ना
क्या बात कही
जो ले डूबे तुझको वो पीना क्या पीना
बेहोश हो के भी जीना क्या जीना
सुबह भुला दे शाम भुला दे
दुनिया का हर काम भुला दे
क्या होगा अंजाम भुला दे
जाम का ये जादू
नाम बदल के दे जो झांसा
झांसे से कितनों को फांसा
आखिर उल्टा पढ़ गया पासा
बना तमाशा तू
मय क्यूँ बदनाम है
क्यूँ क्यूँ
हाँ, मय क्यूँ बदनाम है
क्यूँ पीना इलज़ाम है
हाँ, मय क्यूँ बदनाम है
क्यूँ पीना इलज़ाम है
पीने के बाद प्यारे
हडबड़ाना, गड़बढ़ाना
बडबडाना हराम है
पीना हराम ना पिलाना हराम है
पीने के बाद प्यारे
लडखडाना, ऐ तडफडाना
हो बडबडाना हराम है
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