पुरुष के समर्पण के चरम के बारे में 'पूरब और पश्चिम' फिल्म के
पिछले गीत में चर्चा हुई थी। इस फिल्म में नारी का इंतज़ार भी है।
गीत में दिखाई देने वाली देसी बाला फिल्म के नायक से मन ही मन
प्यार करती है। फिल्म का नायक विलायती बाला से प्रेम करता है। इस
प्रेम त्रिकोण में चौथा कोण प्रस्तुत गीत में प्रकट होकर मुखर होता है
जो ढोल बजा रहा है-नायक नंबर दो यानि विनोद खन्ना । वो देसी
बाला से प्रेम करता है। गीत का आकर्षण नायिका नंबर एक के चुस्त
कपडे और नायिका नंबर दो का आकर्षक नृत्य है।
इस खालिस देसी धुन को तैयार किया है कल्याणजी आनंदजी ने और गीत
में कहानी कही है इन्दीवर ने।
गीत के बोल:
ढोली ढोल बजाना
ताल से ताल मिलाना
ढोली ढोला ढोली ढोला
ढोली ढोल बजाना
ता ता थैया तक तक थैया
ताल से ताल मिलाना
पुरवा सुहानी आई रे पुरवा
पुरवा सुहानी आई रे पुरवा
ऋतुओं की रानी आई रे पुरवा
मेरे रुके नहीं पांव
प्रीत पे जवानी छाई रे, पुरवा
पुरवा सुहानी आई रे पुरवा
मौसम का मुसाफिर खड़ा रस्ते में
ला ला ला ला ला ला ला ला ला
हो ओ मौसम का मुसाफिर खड़ा रस्ते में
उसके हाथों सब कुछ लुटा सस्ते में
छोटी सी उमरिया है
लंबी सी डगरिया रे
जीवन है परछाई रे, पुरवा
पुरवा सुहानी आई रे पुरवा
हो ढोली ढोल बजाना
हो ताल से ताल मिलाना
कर ले कर भी ले प्यार की पूजा
ना ना ना ना ना ना ना ना
हो, कर ले कर भी ले प्यार की पूजा
प्यार के रंग पे चढ़े न रंग दूजा
क्या ये कोई सपना है
मेरे लिए अपना है
बात मेरी बन आई रे पुरवा
पुरवा सुहानी आई रे पुरवा
हो मीरा सी दीवानी रे नाचे मस्तानी
मीरा सी दीवानी रे नाचे मस्तानी
होंठों पर हैं गम तो आँखों में पानी
घुँघरू दीवाने हुए
रिश्ते पुराने हुए
गीत में कहानी गाई रे पुरवा
पुरवा सुहानी आई रे पुरवा
पुरवा सुहानी आई रे पुरवा
ऋतुओं की रानी आई रे पुरवा
मेरे रुके नहीं पांव
प्रीत पे जवानी छाई रे, पुरवा
पुरवा सुहानी आई रे पुरवा
हो ढोली ढोल बजाना
हो ताल से ताल मिलाना
ढोली ढोल बजाना
ताल से ताल मिलाना
...................................
Purwa suhani aayi re-Purab aur paschim 1970
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Tuesday, 2 August 2011
Tuesday, 19 July 2011
सुनो सुनो एक बात कहूँ -मेमसाब १९७१
नाव नायक नायिका के साथ घूम रही है या नायक नायिका नाव में बैठ
के घूम रहे हैं बूझिये इस गीत में.
विनोद खन्ना के साथ योगिता बाली हैं और दोनों स्टीमर में गीत गा
रहे हैं. यू ट्यूब के बहाने इस गीत को अरसे बाद सुनने का मौका मिल
गया. आत्मा राम की फिल्म है इसलिए संगीत ठीक ठाक है इसका.
गीत लिखा है वर्मा मालिक ने और धुन बनायीं है सोनिक ओमी ने.
इस गीत में जो तेरा-मेरा बोला जा रहा है वो आसानी से याद रह जाता है.
गीत कि खूबी ये है कि ये कई संगीतकारों कि याद दिला देता है, कभी
शंकर जयकिशन की, कभी आर डी बर्मन की तो कभी कल्याणजी आनंदजी
की, तो किसी जगह मदन मोहन की और जहाँ जगह बची है वहां वहां
लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की.
गाना खत्म होते होते बोट का आकार बदल जाता है और वो छोटा जहाज बन
जाती है. फिल्मांकन बढ़िया जगहों पर हुआ लगता है इस गीत का.
गीत के बोल:
सुनो सुनो एक बात कहूँ
कहो जी पिया मैं सुनती हूँ
कि तेरा मेरा,
कभी ये साथ न छूटे
बात न टूटे
चाहे, चाहे ये दुनिया रूठे
सुनो सुनो एक बात कहूँ
कहो जी पिया मैं सुनती हूँ
कि तेरा मेरा,
कभी ये साथ न छूटे
बात न टूटे
चाहे, चाहे ये दुनिया रूठे
लहरों से है मिले किनारे
हो ओ, लहरों से है मिले किनारे
फूलों से भी मिले नज़ारे
किसी का कोई, किसी का कोई
मुझको तेरे सहारे
आ आ आ , बहता पानी है मेरा दामन
हो ओ ओ ,बहता पानी है मेरा दामन
छोडूं न मैं तेरा दामन
ऐसे मिलूँ मैं तुझ में ओ गोरी
जैसे पानी में चन्दन
जैसे हो पानी में चन्दन
यही तमन्ना करती हूँ
सदा मैं तेरे संग रहूँ
कि तेरा मेरा,
कभी ये साथ न छूटे
बात न टूटे
चाहे, चाहे ये दुनिया रूठे
ये जो मेरा सारा जीवन
हो ओ ओ ये जो मेरा सारा जीवन
है गोरी ये तेरे अर्पण
तू ही तो मेरे प्यार की मूरत
मैं हूँ तेरा ही दर्पण
आ आ आ दिल मेरा तो है घबराया
हो ओ ओ दिल मेरा तो है घबराया
दुनिया से है मुझे दर आया
मैंने तो चलती आंधी में साजन
आशा का दीपक जलाया
आशा का दीप जलाया
इस दीपक से प्यार करूं
जनम जनम तक साथ रहूँ
कि तेरा मेरा,
कभी ये साथ न छूटे
बात न टूटे
चाहे, चाहे ये दुनिया रूठे
सुनो सुनो एक बात कहूँ
कहो जी पिया मैं सुनती हूँ
कि तेरा मेरा,
कभी ये साथ न छूटे
बात न टूटे
चाहे, चाहे ये दुनिया रूठे
....................................
Suno suno ek baat kahoon-Memsaab 1971
के घूम रहे हैं बूझिये इस गीत में.
विनोद खन्ना के साथ योगिता बाली हैं और दोनों स्टीमर में गीत गा
रहे हैं. यू ट्यूब के बहाने इस गीत को अरसे बाद सुनने का मौका मिल
गया. आत्मा राम की फिल्म है इसलिए संगीत ठीक ठाक है इसका.
गीत लिखा है वर्मा मालिक ने और धुन बनायीं है सोनिक ओमी ने.
इस गीत में जो तेरा-मेरा बोला जा रहा है वो आसानी से याद रह जाता है.
गीत कि खूबी ये है कि ये कई संगीतकारों कि याद दिला देता है, कभी
शंकर जयकिशन की, कभी आर डी बर्मन की तो कभी कल्याणजी आनंदजी
की, तो किसी जगह मदन मोहन की और जहाँ जगह बची है वहां वहां
लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की.
गाना खत्म होते होते बोट का आकार बदल जाता है और वो छोटा जहाज बन
जाती है. फिल्मांकन बढ़िया जगहों पर हुआ लगता है इस गीत का.
गीत के बोल:
सुनो सुनो एक बात कहूँ
कहो जी पिया मैं सुनती हूँ
कि तेरा मेरा,
कभी ये साथ न छूटे
बात न टूटे
चाहे, चाहे ये दुनिया रूठे
सुनो सुनो एक बात कहूँ
कहो जी पिया मैं सुनती हूँ
कि तेरा मेरा,
कभी ये साथ न छूटे
बात न टूटे
चाहे, चाहे ये दुनिया रूठे
लहरों से है मिले किनारे
हो ओ, लहरों से है मिले किनारे
फूलों से भी मिले नज़ारे
किसी का कोई, किसी का कोई
मुझको तेरे सहारे
आ आ आ , बहता पानी है मेरा दामन
हो ओ ओ ,बहता पानी है मेरा दामन
छोडूं न मैं तेरा दामन
ऐसे मिलूँ मैं तुझ में ओ गोरी
जैसे पानी में चन्दन
जैसे हो पानी में चन्दन
यही तमन्ना करती हूँ
सदा मैं तेरे संग रहूँ
कि तेरा मेरा,
कभी ये साथ न छूटे
बात न टूटे
चाहे, चाहे ये दुनिया रूठे
ये जो मेरा सारा जीवन
हो ओ ओ ये जो मेरा सारा जीवन
है गोरी ये तेरे अर्पण
तू ही तो मेरे प्यार की मूरत
मैं हूँ तेरा ही दर्पण
आ आ आ दिल मेरा तो है घबराया
हो ओ ओ दिल मेरा तो है घबराया
दुनिया से है मुझे दर आया
मैंने तो चलती आंधी में साजन
आशा का दीपक जलाया
आशा का दीप जलाया
इस दीपक से प्यार करूं
जनम जनम तक साथ रहूँ
कि तेरा मेरा,
कभी ये साथ न छूटे
बात न टूटे
चाहे, चाहे ये दुनिया रूठे
सुनो सुनो एक बात कहूँ
कहो जी पिया मैं सुनती हूँ
कि तेरा मेरा,
कभी ये साथ न छूटे
बात न टूटे
चाहे, चाहे ये दुनिया रूठे
....................................
Suno suno ek baat kahoon-Memsaab 1971
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Saturday, 16 July 2011
रोज़ शाम आती थी-इम्तिहान १९७४
अभिनेत्री नूतन और तनूजा का कैरियर साठ के और सत्तर के दशक में
साथ साथ चला. नूतन ने तो जल्दी ही अपना ऊंचा मुकाम हासिल कर
लिया फिल्म जगत में मगर तनूजा को काफी संघर्ष के बावजूद, (यहाँ
संघर्ष का तात्पर्य अभिनय कला से हैं न कि फ़िल्में पाने के लिए संघर्ष
से) वो स्थान नहीं मिल पाया की उनकी किसी एक फिल्म को दर्शक
याद करें. प्रस्तुत गीत लिया गया है फिल्म इम्तिहान से जो सन १९७४
की फिल्म है. मजरूह के आकर्षक बोलों को स्वर दिया है लता मंगेशकर
ने. फिल्म में संगीत है लक्ष्मीकांत प्यारेलाल का. इस गीत में विनोद खन्ना
ने बेहतर अभिनय किया है. नायिका के कपडे कुछ अजीब से लगेंगे आपको
सन ७० के आस पास और बाद में कुछ एक फ़िल्में ऐसी आयीं जिनमें
नायकों और नायिकाओं की पोशाकें कुतूहल का विषय हुआ करती थीं.
गीत में कैमरे के साथ एक फ़िल्टर लगाया गया है जिससे सुनहरी धूप वाले
समय को भी शाम बना दिया गया है. ये करिश्मा पकड़ में आ जाता है
गीत के बीच में, जहाँ आधी धूप आधी छांव वाली कहानी दिखाई देती है.
ये होता है अन्तर शुरू होते समय. ऐसे कारनामे विडियो का मज़ा किरकिरा
कर देते हैं.
गीत के बोल:
ला ला ला ला ला ला ला ला ला
रोज़ शाम आती थी मगर ऐसी न थी
रोज़ रोज़ घटा छाती थी मगर ऐसी न थी
रोज़ शाम आती थी मगर ऐसी न थी
रोज़ रोज़ घटा छाती थी मगर ऐसी न थी
ये आज मेरी ज़िन्दगी में कौन आ गया
रोज़ शाम आती थी मगर ऐसी न थी
रोज़ रोज़ घटा छाती थी मगर ऐसी न थी
डाली में ये किसका हाथ करे इशारे बुलाए मुझे
झूमती चंचल हवा छूके तन गुदगुदाए मुझे
हौले हौले धीरे धीरे कोई गीत मुझको सुनाए
प्रीत मन में जगाए
खुली आँख सपने दिखाए
दिखाए दिखाए दिखाए
खुली आँख सपने दिखाए
ये आज मेरी ज़िन्दगी में कौन आ गया
रोज़ शाम आती थी मगर ऐसी न थी
रोज़ रोज़ घटा छाती थी मगर ऐसी न थी
अरमानों का रंग है जहाँ पलकें उठाती हूँ मैं
हँस हँस के है देखती जो भी मूरत बनाती हूँ मैं
जैसे कोई मोहे छेड़े दिल खो और भी जाती हूँ मैं
जगमगाती हूँ मैं
दीवानी हुई जाती हूँ मैं
दीवानी दीवानी दीवानी
दीवानी हुई जाती हूँ मैं
ये आज मेरी ज़िन्दगी में कौन आ गया
रोज़ शाम आती थी मगर ऐसी न थी
रोज़ रोज़ घटा छाती थी मगर ऐसी न थी
....................................
Roz shaam aati thi-Imtihaan 1974
साथ साथ चला. नूतन ने तो जल्दी ही अपना ऊंचा मुकाम हासिल कर
लिया फिल्म जगत में मगर तनूजा को काफी संघर्ष के बावजूद, (यहाँ
संघर्ष का तात्पर्य अभिनय कला से हैं न कि फ़िल्में पाने के लिए संघर्ष
से) वो स्थान नहीं मिल पाया की उनकी किसी एक फिल्म को दर्शक
याद करें. प्रस्तुत गीत लिया गया है फिल्म इम्तिहान से जो सन १९७४
की फिल्म है. मजरूह के आकर्षक बोलों को स्वर दिया है लता मंगेशकर
ने. फिल्म में संगीत है लक्ष्मीकांत प्यारेलाल का. इस गीत में विनोद खन्ना
ने बेहतर अभिनय किया है. नायिका के कपडे कुछ अजीब से लगेंगे आपको
सन ७० के आस पास और बाद में कुछ एक फ़िल्में ऐसी आयीं जिनमें
नायकों और नायिकाओं की पोशाकें कुतूहल का विषय हुआ करती थीं.
गीत में कैमरे के साथ एक फ़िल्टर लगाया गया है जिससे सुनहरी धूप वाले
समय को भी शाम बना दिया गया है. ये करिश्मा पकड़ में आ जाता है
गीत के बीच में, जहाँ आधी धूप आधी छांव वाली कहानी दिखाई देती है.
ये होता है अन्तर शुरू होते समय. ऐसे कारनामे विडियो का मज़ा किरकिरा
कर देते हैं.
गीत के बोल:
ला ला ला ला ला ला ला ला ला
रोज़ शाम आती थी मगर ऐसी न थी
रोज़ रोज़ घटा छाती थी मगर ऐसी न थी
रोज़ शाम आती थी मगर ऐसी न थी
रोज़ रोज़ घटा छाती थी मगर ऐसी न थी
ये आज मेरी ज़िन्दगी में कौन आ गया
रोज़ शाम आती थी मगर ऐसी न थी
रोज़ रोज़ घटा छाती थी मगर ऐसी न थी
डाली में ये किसका हाथ करे इशारे बुलाए मुझे
झूमती चंचल हवा छूके तन गुदगुदाए मुझे
हौले हौले धीरे धीरे कोई गीत मुझको सुनाए
प्रीत मन में जगाए
खुली आँख सपने दिखाए
दिखाए दिखाए दिखाए
खुली आँख सपने दिखाए
ये आज मेरी ज़िन्दगी में कौन आ गया
रोज़ शाम आती थी मगर ऐसी न थी
रोज़ रोज़ घटा छाती थी मगर ऐसी न थी
अरमानों का रंग है जहाँ पलकें उठाती हूँ मैं
हँस हँस के है देखती जो भी मूरत बनाती हूँ मैं
जैसे कोई मोहे छेड़े दिल खो और भी जाती हूँ मैं
जगमगाती हूँ मैं
दीवानी हुई जाती हूँ मैं
दीवानी दीवानी दीवानी
दीवानी हुई जाती हूँ मैं
ये आज मेरी ज़िन्दगी में कौन आ गया
रोज़ शाम आती थी मगर ऐसी न थी
रोज़ रोज़ घटा छाती थी मगर ऐसी न थी
....................................
Roz shaam aati thi-Imtihaan 1974
Thursday, 14 July 2011
काम लेते नहीं बन्दूक से-कच्चे धागे १९७३
फिल्म कच्चे धागे का एक अलोकप्रिय लेकिन कर्णप्रिय सीमाओं के
भीतर बना हुआ गीत सुनवा रहे हैं आज. इसमें आप विनोद खन्ना को
देखेंगे मधुबाला के जैसी दिखने वाली नायिका सोना के साथ जो परदे
पर नाचती हुई गीत गा रही हैं.
डाकुओं पर बनी फिल्म में मुजरा या वैसा कोई गीत अवश्य ही
मिलता है. आजकल इसका नाम आईटम सोंग हो गया है जैसा कि
आपने देखा फिल्म चाइना गीत में-छम्मा छम्मा . फर्क इतना
आया है कि पहले ये गाने कम प्रसिद्द तारिकाओं को दिए जाते थे
अब नामी गिरामी नायिकाओं को.
गीत के बोल :
आ आ आ आ आ आ आ आ
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
हा आ आ आ आ आ आ आ
जा रे जा ओ दीवाने तू क्या जाने
अनजाने
बात करते हैं,
रे बात करते हैं जब माशूक से
काम लेते नहीं बन्दूक से
बात करते हैं जब माशूक से
काम लेते नहीं बन्दूक से
जा रे जा ओ दीवाने तू क्या जाने
अनजाने
बात करते हैं,
रे बात करते हैं जब माशूक से
काम लेते नहीं बन्दूक से
बात करते हैं जब माशूक से
काम लेते नहीं बन्दूक से
गोरी गोरी मोरी कलाई न मरोड़ो रे
रंगी बेरंगी मेरी चूड़ियाँ न तोड़ो रे
गोरी गोरी ओ हो हो,
कलाई मोरी ओ हो हो,
गोरी गोरी मोरी कलाई न मरोड़ो रे
रंगी बेरंगी मेरी चूड़ियाँ न तोड़ो रे
ओ हो हो,
कर मुझ से मोहब्बत लडाई न कर
चोट लग जाए
रे चोट लग जाए न भूल चूक से
काम लेते नहीं बन्दूक से
बात करते हैं जब माशूक से
काम लेते नहीं बन्दूक से
आशिक की हलकी सी एक मुस्कान से
माशूक मारे जाते हैं जान से
आशिक की हलकी सी एक मुस्कान से
माशूक मारे जाते हैं जान से
हो हो हो
कोई जी में बसा हो तो फिर जी में
हूक उठती है
रे हूक उठती है कोयल की कूक से
काम लेते नहीं बन्दूक से
बात करते हैं जब माशूक से
काम लेते नहीं बन्दूक से
आ आ आ आ आ आ आ आ
आँखों आँखों में मज़ा लेते हैं प्यार का
सर को झुका के दिल मांगते हैं यार का
आँखों आँखों में मज़ा लेते हैं प्यार का
सर को झुका के दिल मांगते हैं यार का
हो हो हो
जिद न कर सितमगर तू है बेखबर
टूट जाते हैं
रे टूट जाते हैं दिल इस सलूक से
काम लेते नहीं बन्दूक से
बात करते हैं जब माशूक से
काम लेते नहीं बन्दूक से
..........................
Kaam lete nahin bandook se-Kachche Dhaage 1973
भीतर बना हुआ गीत सुनवा रहे हैं आज. इसमें आप विनोद खन्ना को
देखेंगे मधुबाला के जैसी दिखने वाली नायिका सोना के साथ जो परदे
पर नाचती हुई गीत गा रही हैं.
डाकुओं पर बनी फिल्म में मुजरा या वैसा कोई गीत अवश्य ही
मिलता है. आजकल इसका नाम आईटम सोंग हो गया है जैसा कि
आपने देखा फिल्म चाइना गीत में-छम्मा छम्मा . फर्क इतना
आया है कि पहले ये गाने कम प्रसिद्द तारिकाओं को दिए जाते थे
अब नामी गिरामी नायिकाओं को.
गीत के बोल :
आ आ आ आ आ आ आ आ
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
हा आ आ आ आ आ आ आ
जा रे जा ओ दीवाने तू क्या जाने
अनजाने
बात करते हैं,
रे बात करते हैं जब माशूक से
काम लेते नहीं बन्दूक से
बात करते हैं जब माशूक से
काम लेते नहीं बन्दूक से
जा रे जा ओ दीवाने तू क्या जाने
अनजाने
बात करते हैं,
रे बात करते हैं जब माशूक से
काम लेते नहीं बन्दूक से
बात करते हैं जब माशूक से
काम लेते नहीं बन्दूक से
गोरी गोरी मोरी कलाई न मरोड़ो रे
रंगी बेरंगी मेरी चूड़ियाँ न तोड़ो रे
गोरी गोरी ओ हो हो,
कलाई मोरी ओ हो हो,
गोरी गोरी मोरी कलाई न मरोड़ो रे
रंगी बेरंगी मेरी चूड़ियाँ न तोड़ो रे
ओ हो हो,
कर मुझ से मोहब्बत लडाई न कर
चोट लग जाए
रे चोट लग जाए न भूल चूक से
काम लेते नहीं बन्दूक से
बात करते हैं जब माशूक से
काम लेते नहीं बन्दूक से
आशिक की हलकी सी एक मुस्कान से
माशूक मारे जाते हैं जान से
आशिक की हलकी सी एक मुस्कान से
माशूक मारे जाते हैं जान से
हो हो हो
कोई जी में बसा हो तो फिर जी में
हूक उठती है
रे हूक उठती है कोयल की कूक से
काम लेते नहीं बन्दूक से
बात करते हैं जब माशूक से
काम लेते नहीं बन्दूक से
आ आ आ आ आ आ आ आ
आँखों आँखों में मज़ा लेते हैं प्यार का
सर को झुका के दिल मांगते हैं यार का
आँखों आँखों में मज़ा लेते हैं प्यार का
सर को झुका के दिल मांगते हैं यार का
हो हो हो
जिद न कर सितमगर तू है बेखबर
टूट जाते हैं
रे टूट जाते हैं दिल इस सलूक से
काम लेते नहीं बन्दूक से
बात करते हैं जब माशूक से
काम लेते नहीं बन्दूक से
..........................
Kaam lete nahin bandook se-Kachche Dhaage 1973
Monday, 11 July 2011
मेरे बचपन तू जा जा-कच्चे धागे १९७३
जनता बुढापे में जवानी के लौटने की ख्वाहिश रखती है, मगर इस गीत में
उलटा है. बचपन में जवानी के आने की इच्छा जाहिर की जा रही है. गीत
कन्याओं की भावनाओं को व्यक्त करने वाला है जिसमें ये खूबसूरत ख़याल भी
लाया गया है-किसी के साथ भाग जाऊं ?
गन्ने के खेत में ये गाना फिल्माया गया है. गन्ना है या मक्का, ध्यान से देख
कर मुझे भी बतलाइए . हिंदी फिल्मों में तरह तरह के खेतों में गीत फिल्माए
गए हैं. आगे आपको चने के खेत वाला गीत भी सुनवा देंगे जनाब.
आनंद बक्षी ने इस गीत को लिखा है और लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की बनाई धुन पर
इसे गाया है लता मंगेशकर ने मौसमी चटर्जी के लिए .
गीत के बोल:
मेरे बचपन तू जा जा जवानी को ले आ
मेरे बचपन तू जा जा जवानी को ले आ
जा वे जा तैंनू रब दा वास्ता
जा वे जा तैंनू रब दा वास्ता
मेरे बचपन तू जा जा जवानी को ले आ
जा वे जा तैंनू रब दा वास्ता
जा वे जा तैंनू रब दा वास्ता
आ आ आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ आ आ आ
बेरियाँ नू बेर लग गये वे तौबा
फूलों से झुक गईं डालियाँ
बेरियाँ नू बेर लग गये वे तौबा
फूलों से झुक गईं डालियाँ
जाने मेरे कानों में कब
पहनायेगी माँ बालियाँ
छाई काली घटा आई ठण्डी हवा
जा वे जा तैंनू रब दा वास्ता
जा वे जा तैंनू रब दा वास्ता
लम्बी काली रातों में ऐसा
ना हो कभी मैं जाग जाऊँ
लम्बी काली रातों में ऐसा
ना हो कभी मैं जाग जाऊँ
किसी परदेसी के संग
चुपके से मैं भाग जाऊँ
बैरी जळी से जा इब देर ना लगा
जा वे जा तैंनू रब दा वास्ता
जा वे जा तैंनू रब दा वास्ता
चोरी चोरी पनघट पे बातें
करती हैं बैरन सहेलियां , हो
चोरी चोरी पनघट पे बातें
करती हैं बैरन सहेलियां
जाने कब मेरा प्रीतम
बूझेगा मेरी प्रेम पहेलियाँ
उई माँ ये क्या हुआ
जैसे काँटा चुभ गया
जा वे जा तैंनू रब दा वास्ता
जा वे जा तैंनू रब दा वास्ता
जा वे जा तैंनू रब दा वास्ता
...........................
Mere bachpan too ja-Kachche Dhaage 1973
उलटा है. बचपन में जवानी के आने की इच्छा जाहिर की जा रही है. गीत
कन्याओं की भावनाओं को व्यक्त करने वाला है जिसमें ये खूबसूरत ख़याल भी
लाया गया है-किसी के साथ भाग जाऊं ?
गन्ने के खेत में ये गाना फिल्माया गया है. गन्ना है या मक्का, ध्यान से देख
कर मुझे भी बतलाइए . हिंदी फिल्मों में तरह तरह के खेतों में गीत फिल्माए
गए हैं. आगे आपको चने के खेत वाला गीत भी सुनवा देंगे जनाब.
आनंद बक्षी ने इस गीत को लिखा है और लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की बनाई धुन पर
इसे गाया है लता मंगेशकर ने मौसमी चटर्जी के लिए .
गीत के बोल:
मेरे बचपन तू जा जा जवानी को ले आ
मेरे बचपन तू जा जा जवानी को ले आ
जा वे जा तैंनू रब दा वास्ता
जा वे जा तैंनू रब दा वास्ता
मेरे बचपन तू जा जा जवानी को ले आ
जा वे जा तैंनू रब दा वास्ता
जा वे जा तैंनू रब दा वास्ता
आ आ आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ आ आ आ
बेरियाँ नू बेर लग गये वे तौबा
फूलों से झुक गईं डालियाँ
बेरियाँ नू बेर लग गये वे तौबा
फूलों से झुक गईं डालियाँ
जाने मेरे कानों में कब
पहनायेगी माँ बालियाँ
छाई काली घटा आई ठण्डी हवा
जा वे जा तैंनू रब दा वास्ता
जा वे जा तैंनू रब दा वास्ता
लम्बी काली रातों में ऐसा
ना हो कभी मैं जाग जाऊँ
लम्बी काली रातों में ऐसा
ना हो कभी मैं जाग जाऊँ
किसी परदेसी के संग
चुपके से मैं भाग जाऊँ
बैरी जळी से जा इब देर ना लगा
जा वे जा तैंनू रब दा वास्ता
जा वे जा तैंनू रब दा वास्ता
चोरी चोरी पनघट पे बातें
करती हैं बैरन सहेलियां , हो
चोरी चोरी पनघट पे बातें
करती हैं बैरन सहेलियां
जाने कब मेरा प्रीतम
बूझेगा मेरी प्रेम पहेलियाँ
उई माँ ये क्या हुआ
जैसे काँटा चुभ गया
जा वे जा तैंनू रब दा वास्ता
जा वे जा तैंनू रब दा वास्ता
जा वे जा तैंनू रब दा वास्ता
...........................
Mere bachpan too ja-Kachche Dhaage 1973
Thursday, 28 April 2011
थोडा सा एतबार कीजिये-चौकीदार १९७३
इस गीत को मैंने फिल्म की रिलीज़ के आस पास पहली बार
ध्यान से सुना था। इसके ध्वनि संयोजन ने मुझे आकृष्ट किया
था। उसके बाद १-२ बार और सुनाई दिया ये, फिर ऐसा लगा
जैसे इसको रेडियो वाले सुनना भूल गए हैं। ऐसा ही होता है
जब फिल्म फ्लॉप हो जाया करती है। लता मंगेशकर की आवाज़
के प्रयोग से कई मधुर गीत देने वाले संगीतकार मदन मोहन ने
आशा के लिए एक अच्छी धुन बनाई ज़रूर मगर वो समय के
प्रवाह के साथ गुम हो गई। इस गीत की छाप आपको संगीतकार
सोनिक ओमी के संगीत में आशा के गाये गीतों में मिलेगी।
विडियो देख कर आपको ज़रूर लगेगा कि ये गीत शायद किसी मुजरे
के लिए बनाया गया था और फिल्म दिया गया सहनायिका के एकल
नृत्य पर। नाचने वाली नायिका जयश्री टी हालाँकि एक आला दर्जे की
नर्तकी हैं मगर इस गीत के बोलों के साथ उनके नृत्य का मेल कुछ
तेल और पानी के असंभव से collodial suspension जैसा लगता है।
दूसरे "दिल भी पहलु से जुदा हो जाये" पंक्तियों के दौरान कौनसा दिल
व कौनसे पहलू से जुदा होने की बात की जा रही है समझ नहीं आई।
एक बात तो तय है जी, होटल के लाल कारपेट की अच्छी तरह से
सफाई हो गई होगी।
गीत के बोल:
थोडा सा ऐतबार कीजिये
हाँ आ आ आ आ थोड़ा सा ऐतबार कीजिये
फिर ज़रा सा इंतजार कीजिये
फिर ज़रा सा इंतजार कीजिये
थोडा सा ऐतबार कीजिये
हाँ आ आ आ आ थोड़ा सा ऐतबार कीजिये
प्यार की आरजू है
प्यार की जुस्तजू है
प्यार की आरजू है
प्यार की जुस्तजू है
तो पहले अपने दिल को बेकरार कीजिये
अपने दिल को बेकरार कीजिये
हाँ आ आ आ आ थोड़ा सा ऐतबार कीजिये
जाने कब इश्क में क्या हो जाये
बन्दा बन्दे का खुदा हो जाये
आप भी यार के
आप भी यार के दर पे रह जाएँ
दिल भी पहलू से जुदा हो जाये
दिल भी पहलू से जुदा हो जाये
जो सच हो तो
जो सच हो तो फिर प्यार कीजिये
फिर ज़रा सा इंतजार कीजिये
फिर ज़रा सा इंतजार कीजिये
थोडा सा ऐतबार कीजिये
हाँ आ आ आ आ थोड़ा सा ऐतबार कीजिये
दिल पे काबू ना हो तो
गैर के घर जाओ सनम
हो ओ ओ सनम जाओ जाओ सनम
दिल पे काबू ना हो तो
गैर के घर जाओ सनम
एक ही रात के वादे पे ना बहलाओ सनम
आँखें छू लो, आ आ आ आ
आँखें छू लो मगर हाथ से ना छूना बदन
खुद तडपाओ हमको भी तडपाओ सनम
हमको भी बेकरार कीजिये
हमको भी हमको भी
हमको भी बेकरार कीजिये
फिर ज़रा सा इंतजार कीजिये
फिर ज़रा सा इंतजार कीजिये
थोडा सा ऐतबार कीजिये
हाँ आ आ आ आ थोड़ा सा ऐतबार कीजिये
ध्यान से सुना था। इसके ध्वनि संयोजन ने मुझे आकृष्ट किया
था। उसके बाद १-२ बार और सुनाई दिया ये, फिर ऐसा लगा
जैसे इसको रेडियो वाले सुनना भूल गए हैं। ऐसा ही होता है
जब फिल्म फ्लॉप हो जाया करती है। लता मंगेशकर की आवाज़
के प्रयोग से कई मधुर गीत देने वाले संगीतकार मदन मोहन ने
आशा के लिए एक अच्छी धुन बनाई ज़रूर मगर वो समय के
प्रवाह के साथ गुम हो गई। इस गीत की छाप आपको संगीतकार
सोनिक ओमी के संगीत में आशा के गाये गीतों में मिलेगी।
विडियो देख कर आपको ज़रूर लगेगा कि ये गीत शायद किसी मुजरे
के लिए बनाया गया था और फिल्म दिया गया सहनायिका के एकल
नृत्य पर। नाचने वाली नायिका जयश्री टी हालाँकि एक आला दर्जे की
नर्तकी हैं मगर इस गीत के बोलों के साथ उनके नृत्य का मेल कुछ
तेल और पानी के असंभव से collodial suspension जैसा लगता है।
दूसरे "दिल भी पहलु से जुदा हो जाये" पंक्तियों के दौरान कौनसा दिल
व कौनसे पहलू से जुदा होने की बात की जा रही है समझ नहीं आई।
एक बात तो तय है जी, होटल के लाल कारपेट की अच्छी तरह से
सफाई हो गई होगी।
गीत के बोल:
थोडा सा ऐतबार कीजिये
हाँ आ आ आ आ थोड़ा सा ऐतबार कीजिये
फिर ज़रा सा इंतजार कीजिये
फिर ज़रा सा इंतजार कीजिये
थोडा सा ऐतबार कीजिये
हाँ आ आ आ आ थोड़ा सा ऐतबार कीजिये
प्यार की आरजू है
प्यार की जुस्तजू है
प्यार की आरजू है
प्यार की जुस्तजू है
तो पहले अपने दिल को बेकरार कीजिये
अपने दिल को बेकरार कीजिये
हाँ आ आ आ आ थोड़ा सा ऐतबार कीजिये
जाने कब इश्क में क्या हो जाये
बन्दा बन्दे का खुदा हो जाये
आप भी यार के
आप भी यार के दर पे रह जाएँ
दिल भी पहलू से जुदा हो जाये
दिल भी पहलू से जुदा हो जाये
जो सच हो तो
जो सच हो तो फिर प्यार कीजिये
फिर ज़रा सा इंतजार कीजिये
फिर ज़रा सा इंतजार कीजिये
थोडा सा ऐतबार कीजिये
हाँ आ आ आ आ थोड़ा सा ऐतबार कीजिये
दिल पे काबू ना हो तो
गैर के घर जाओ सनम
हो ओ ओ सनम जाओ जाओ सनम
दिल पे काबू ना हो तो
गैर के घर जाओ सनम
एक ही रात के वादे पे ना बहलाओ सनम
आँखें छू लो, आ आ आ आ
आँखें छू लो मगर हाथ से ना छूना बदन
खुद तडपाओ हमको भी तडपाओ सनम
हमको भी बेकरार कीजिये
हमको भी हमको भी
हमको भी बेकरार कीजिये
फिर ज़रा सा इंतजार कीजिये
फिर ज़रा सा इंतजार कीजिये
थोडा सा ऐतबार कीजिये
हाँ आ आ आ आ थोड़ा सा ऐतबार कीजिये
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Wednesday, 8 December 2010
रुक जाना नहीं तू कहीं हार के-इम्तिहान १९७४
कहते है जीवन है तो संघर्ष है। संघर्ष किस रूप में होगा
ये कोई नहीं जानता। सभी प्राणियों को किसी न किसी
रूप में जूझना पढता है । आइये एक दास्तान पड़ें एक
कुत्ते की जिसने ऑंखें न होने के बावजूद हिम्मत नहीं
हारी। अरे इंसानों इसी से सबक ले लो तुम।
मौका है एक प्रेरणादायक गीत सुनने का। फिल्म
इम्तिहान से किशोर का गाया गीत सुना जाए आज ।
ये सभी को प्रेरित करता है आगे बढ़ने के लिए।
अंधे कुत्ते की अनोखी कहानी
गीत के बोल:
रुक जाना नहीं तू कहीं हार के
काँटों पे चल के मिलेंगे साये बहार के
ओ राही, ओ राही
ओ राही, ओ राही
सूरज देख रुक गया है तेरे आगे झुक गया है
जब कभी ऐसे कोई मस्ताना
निकले है अपनी धुन में दीवाना
शाम सुहानी बन जाते हैं दिन इंतज़ार के
ओ राही, ओ राही
ओ राही, ओ राही
साथी न कारवां है ये तेरा इम्तिहां है
यूँ ही चला चल दिल के सहारे
करती है मंज़िल तुझको इशारे
देख कहीं कोई रोक नहीं ले तुझको पुकार के
ओ राही, ओ राही
ओ राही, ओ राही
नैन आँसू जो लिये हैं ये राहों के दिये हैं
लोगों को उनका सब कुछ दे के
तू तो चला था सपने ही ले के
कोई नहीं तो तेरे अपने हैं सपने ये प्यार के
ओ राही, ओ राही
ओ राही, ओ राही
...............................................
Ruk jaana nahin too kahin haar ke-Imtihaan 1974
ये कोई नहीं जानता। सभी प्राणियों को किसी न किसी
रूप में जूझना पढता है । आइये एक दास्तान पड़ें एक
कुत्ते की जिसने ऑंखें न होने के बावजूद हिम्मत नहीं
हारी। अरे इंसानों इसी से सबक ले लो तुम।
मौका है एक प्रेरणादायक गीत सुनने का। फिल्म
इम्तिहान से किशोर का गाया गीत सुना जाए आज ।
ये सभी को प्रेरित करता है आगे बढ़ने के लिए।
अंधे कुत्ते की अनोखी कहानी
गीत के बोल:
रुक जाना नहीं तू कहीं हार के
काँटों पे चल के मिलेंगे साये बहार के
ओ राही, ओ राही
ओ राही, ओ राही
सूरज देख रुक गया है तेरे आगे झुक गया है
जब कभी ऐसे कोई मस्ताना
निकले है अपनी धुन में दीवाना
शाम सुहानी बन जाते हैं दिन इंतज़ार के
ओ राही, ओ राही
ओ राही, ओ राही
साथी न कारवां है ये तेरा इम्तिहां है
यूँ ही चला चल दिल के सहारे
करती है मंज़िल तुझको इशारे
देख कहीं कोई रोक नहीं ले तुझको पुकार के
ओ राही, ओ राही
ओ राही, ओ राही
नैन आँसू जो लिये हैं ये राहों के दिये हैं
लोगों को उनका सब कुछ दे के
तू तो चला था सपने ही ले के
कोई नहीं तो तेरे अपने हैं सपने ये प्यार के
ओ राही, ओ राही
ओ राही, ओ राही
...............................................
Ruk jaana nahin too kahin haar ke-Imtihaan 1974
Tuesday, 23 November 2010
नहीं लगता हाय दिल तेरे बिना -जेल यात्रा १९८१
एक गीत फिल्म जेल यात्रा से। उनींदे से विनोद खन्ना हडबडा के उठ
बैठते हैं जब कानों में नायिका रीना रॉय का गीत सुनाई पड़ता है। पूरे
गीत में वो हैरान से दिख रहे हैं। मजरूह के लिखे और लता मंगेशकर
के गाये गीत को संगीत में बांधा है राहुल देव बर्मन ने। इस गीत के बाद
आपको वो दो गीत सुनवायेंगे जो जेल यात्रा के इस गीत को सुनने के
बाद याद आते हैं।
गीत के बोल:
नहीं लगता हाय दिल तेरे बिना नहीं लगता
नहीं लगता हाय दिल तेरे बिना नहीं लगता
आज गले मिलके मर जाऊं
एक यही है रास्ता
तन्हा रहना रोज तड़पना
मुझसे ना हो सकता
नहीं लगता, लगता
नहीं लगता हाय दिल तेरे बिना नहीं लगता
हो नहीं लगता हाय दिल तेरे बिना नहीं लगता
आज गले मिलके मर जाऊं
एक यही है रास्ता
तन्हा रहना रोज तड़पना
मुझसे ना हो सकता
नहीं लगता हाय दिल तेरे बिना नहीं लगता
हो नहीं लगता हाय दिल तेरे बिना नहीं लगता
इसे कहाँ ले के जाऊं मैं
के दो घडी चैन पाऊँ मैं
शोला सा रंग है
जलता बुझता अंग है
तेरी लगी कैसी बुझाऊँ मैं
आज मिलन की ओढ़ लगा दे
एक यही है रास्ता
तन्हा रहना रोज तड़पना
मुझसे ना हो सकता
नहीं लगता लगता
नहीं लगता हाय दिल तेरे बिना नहीं लगता
हो नहीं लगता हाय दिल तेरे बिना नहीं लगता
पिया बाहर फिर से आई है
नई वजह फिर से लायी है
मैं फिर से खो गई
दीवानी सी हो गई
मुझा पकड़ हाय दुहाई है
यारों की बाहों में गिर जाऊं
एक यही है रास्ता
तन्हा रहना रोज तड़पना
मुझसे ना हो सकता
नहीं लगता लगता
नहीं लगता हाय दिल तेरे बिना नहीं लगता
हो नहीं लगता हाय दिल तेरे बिना नहीं लगता
आज गले मिलके मर जाऊं
एक यही है रास्ता
तन्हा रहना रोज तड़पना
मुझसे ना हो सकता
नहीं लगता हाय दिल तेरे बिना नहीं लगता
हो नहीं लगता हाय दिल तेरे बिना नहीं लगता
बैठते हैं जब कानों में नायिका रीना रॉय का गीत सुनाई पड़ता है। पूरे
गीत में वो हैरान से दिख रहे हैं। मजरूह के लिखे और लता मंगेशकर
के गाये गीत को संगीत में बांधा है राहुल देव बर्मन ने। इस गीत के बाद
आपको वो दो गीत सुनवायेंगे जो जेल यात्रा के इस गीत को सुनने के
बाद याद आते हैं।
गीत के बोल:
नहीं लगता हाय दिल तेरे बिना नहीं लगता
नहीं लगता हाय दिल तेरे बिना नहीं लगता
आज गले मिलके मर जाऊं
एक यही है रास्ता
तन्हा रहना रोज तड़पना
मुझसे ना हो सकता
नहीं लगता, लगता
नहीं लगता हाय दिल तेरे बिना नहीं लगता
हो नहीं लगता हाय दिल तेरे बिना नहीं लगता
आज गले मिलके मर जाऊं
एक यही है रास्ता
तन्हा रहना रोज तड़पना
मुझसे ना हो सकता
नहीं लगता हाय दिल तेरे बिना नहीं लगता
हो नहीं लगता हाय दिल तेरे बिना नहीं लगता
इसे कहाँ ले के जाऊं मैं
के दो घडी चैन पाऊँ मैं
शोला सा रंग है
जलता बुझता अंग है
तेरी लगी कैसी बुझाऊँ मैं
आज मिलन की ओढ़ लगा दे
एक यही है रास्ता
तन्हा रहना रोज तड़पना
मुझसे ना हो सकता
नहीं लगता लगता
नहीं लगता हाय दिल तेरे बिना नहीं लगता
हो नहीं लगता हाय दिल तेरे बिना नहीं लगता
पिया बाहर फिर से आई है
नई वजह फिर से लायी है
मैं फिर से खो गई
दीवानी सी हो गई
मुझा पकड़ हाय दुहाई है
यारों की बाहों में गिर जाऊं
एक यही है रास्ता
तन्हा रहना रोज तड़पना
मुझसे ना हो सकता
नहीं लगता लगता
नहीं लगता हाय दिल तेरे बिना नहीं लगता
हो नहीं लगता हाय दिल तेरे बिना नहीं लगता
आज गले मिलके मर जाऊं
एक यही है रास्ता
तन्हा रहना रोज तड़पना
मुझसे ना हो सकता
नहीं लगता हाय दिल तेरे बिना नहीं लगता
हो नहीं लगता हाय दिल तेरे बिना नहीं लगता
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Monday, 22 November 2010
दे दे दे दे दे दे ज़रा-बॉम्बे ४०५ मील .
एक अनार दो बीमार। इस श्रेणी में हम आपको पहला गीत सुनवा रहे हैं।
'विक्टोरिया नंबर २०३' वाले बृज सढाना साहब ने ही इस फिल्म का निर्देशन
किया था। एक मसाला फिल्म थी जिसके ज्यादा मात्रा मसालों से कुछ
दर्शकों को अपच हो गई। फिल्म की एडिटिंग में त्रुटियाँ थीं वरना इसको और
बेहतर बनाया जा सकता था। फिल्म का सशक्त पहलू इसके गीत हैं। संगीत
अच्छा है फिल्म का, लेकिन फिल्म के ना चलने की स्तिथि में अक्सर संगीत
भी डब्बे में बंद होकर रह जाता है। वैसा ही कुछ हुआ। खैर छोडिये ये सब और
गीत सुनिए जिसे परदे ओपर शत्रुघ्न और विनोद खन्ना गा रहे हैं जीनत अमान
के लिए । पार्श्व गायन किया है-किशोर कुमार और महेंद्र कपूर ने। इसके बोल है
इन्दीवर साहब के और धुन है कल्यानजी आनंदजी की। गीत की तुकबंदी एकदम
फिट किसम की है और तेज़ गति वाला ये गीत आपको अंत तक बंधे रखेगा।
गीत के बोल:
दे दे दे दे दे दे ज़रा
हमें दे दे ज़रा मंज़ूरी
दे दे दे दे दे दे ज़रा
साथ रहने की तू मंज़ूरी
तेरे लिए हम हैं ज़रूरी
हमारे लिए तू है ज़रूरी
तेरे लिए हम हैं ज़रूरी
हमारे लिए तू है ज़रूरी
बिन तेरे हम हैं अधूरे
बिन तेरे हम हैं अधूरे
ओये हम बिन तू है अधूरी
अरे दे दे दे, दे दे ज़रा मंज़ूरी
हमें दे दे ज़रा मंज़ूरी
तेरी तो हर शर्त करेंगे हम पूरी
पास तेरे वो चीज़ है जो भी देखे हो दीवाना
रंग भी सुन्दर, अंग भी सुन्दर
सुन्दरता का खज़ाना
तू है सुन्दरता का खज़ाना
रूप तिजोरी सौंप दे हमको
कर लेगा कोई चोरी, गोरी
कर लेगा कोई चोरी
सिवा हमारे सब लोगों को एक यही कमजोरी
गोरी, एक यही कमजोरी
अरे कह दे कह दे कह दे ज़रा
तेरी अब क्या है मजबूरी
तेरे लिए हम हैं ज़रूरी
हमारे लिए तू है ज़रूरी
ओ बिन तेरे हम हैं अधूरे
हम बिन तू है अधूरी
अरे दे दे दे, हमें दे दे ज़रा मंज़ूरी
तेरी तो हर शर्त करेंगे हम पूरी
तेरे हाथों में वो जादू
तेरी वो हस्ती है
तीनों दुनिया दे कर तू गर
मिल जाए सस्ती है
गर मिल जाए सस्ती है
तेरा हर गम बाटेंगे हम
हिस्सेदार बना ले
हमको हिस्सेदार बना ले
हमको अपना यार नहीं तो
पहरेदार बना ले,
अपना पहरेदार बना ले
अरे कर दें कर दें कर दें तेरा
हर सपना हम सिन्दूरी
तेरे लिए हम हैं ज़रूरी
हमारे लिए तू है ज़रूरी
बिन तेरे हम हैं अधूरे
हम बिन तू है अधूरी
अरे दे दे दे, हमें दे दे ज़रा मंज़ूरी
तेरी तो हर शर्त करेंगे हम पूरी
'विक्टोरिया नंबर २०३' वाले बृज सढाना साहब ने ही इस फिल्म का निर्देशन
किया था। एक मसाला फिल्म थी जिसके ज्यादा मात्रा मसालों से कुछ
दर्शकों को अपच हो गई। फिल्म की एडिटिंग में त्रुटियाँ थीं वरना इसको और
बेहतर बनाया जा सकता था। फिल्म का सशक्त पहलू इसके गीत हैं। संगीत
अच्छा है फिल्म का, लेकिन फिल्म के ना चलने की स्तिथि में अक्सर संगीत
भी डब्बे में बंद होकर रह जाता है। वैसा ही कुछ हुआ। खैर छोडिये ये सब और
गीत सुनिए जिसे परदे ओपर शत्रुघ्न और विनोद खन्ना गा रहे हैं जीनत अमान
के लिए । पार्श्व गायन किया है-किशोर कुमार और महेंद्र कपूर ने। इसके बोल है
इन्दीवर साहब के और धुन है कल्यानजी आनंदजी की। गीत की तुकबंदी एकदम
फिट किसम की है और तेज़ गति वाला ये गीत आपको अंत तक बंधे रखेगा।
गीत के बोल:
दे दे दे दे दे दे ज़रा
हमें दे दे ज़रा मंज़ूरी
दे दे दे दे दे दे ज़रा
साथ रहने की तू मंज़ूरी
तेरे लिए हम हैं ज़रूरी
हमारे लिए तू है ज़रूरी
तेरे लिए हम हैं ज़रूरी
हमारे लिए तू है ज़रूरी
बिन तेरे हम हैं अधूरे
बिन तेरे हम हैं अधूरे
ओये हम बिन तू है अधूरी
अरे दे दे दे, दे दे ज़रा मंज़ूरी
हमें दे दे ज़रा मंज़ूरी
तेरी तो हर शर्त करेंगे हम पूरी
पास तेरे वो चीज़ है जो भी देखे हो दीवाना
रंग भी सुन्दर, अंग भी सुन्दर
सुन्दरता का खज़ाना
तू है सुन्दरता का खज़ाना
रूप तिजोरी सौंप दे हमको
कर लेगा कोई चोरी, गोरी
कर लेगा कोई चोरी
सिवा हमारे सब लोगों को एक यही कमजोरी
गोरी, एक यही कमजोरी
अरे कह दे कह दे कह दे ज़रा
तेरी अब क्या है मजबूरी
तेरे लिए हम हैं ज़रूरी
हमारे लिए तू है ज़रूरी
ओ बिन तेरे हम हैं अधूरे
हम बिन तू है अधूरी
अरे दे दे दे, हमें दे दे ज़रा मंज़ूरी
तेरी तो हर शर्त करेंगे हम पूरी
तेरे हाथों में वो जादू
तेरी वो हस्ती है
तीनों दुनिया दे कर तू गर
मिल जाए सस्ती है
गर मिल जाए सस्ती है
तेरा हर गम बाटेंगे हम
हिस्सेदार बना ले
हमको हिस्सेदार बना ले
हमको अपना यार नहीं तो
पहरेदार बना ले,
अपना पहरेदार बना ले
अरे कर दें कर दें कर दें तेरा
हर सपना हम सिन्दूरी
तेरे लिए हम हैं ज़रूरी
हमारे लिए तू है ज़रूरी
बिन तेरे हम हैं अधूरे
हम बिन तू है अधूरी
अरे दे दे दे, हमें दे दे ज़रा मंज़ूरी
तेरी तो हर शर्त करेंगे हम पूरी
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