अब आपको सुनवाते हैं एक और हिट फिल्म से एक हिट गीत जो
किशोर कुमार की आवाज़ में है। फिल्म का शीर्षक गीत ज़रूर अमित कुमार
यानि किशोर कुमार के पुत्र की आवाज़ में है। ये कुछ उन बिरली फिल्मों
में से है जिसमें पिता पुत्र दोनों की आवाजों में गीत मौजूद हैं। प्रस्तुत
गीत फिल्माया गया है फिरोज खान के छोटे भाई अकबर खान और रंजीता
पर। अकबर संजय खान से छोटे हैं। उनकी संगीत की समझ काफी अच्छी है ।
फिल्म में कल्याणजी आनंदजी की सेवाएं ली गयीं और उन्होंने कतई निराश
नहीं किया और एक से बढ़ कर एक गीत बनाये फिल्म के लिए। नायक
एक गैराज में मिस्त्री है इसलिए एक विशेष क़िस्म का खटारा वाहन इस गीत
में आप देखेंगे। लड़की पटाने के लिए उपयुक्त गीत है ये। इसमें उपमाओं और
दावों का अतिरेक सा है। मनचली भाषा में ऐसे गीतों को कहते है-फुल्तू पुटास
गीत। गीत लिखा है एम् जी हशमत साहब ने।
अरे तू क्या जाने तुझमें क्या है
तेरी मोहब्बत मेरा खुदा है
हुस्न क़यामत चाल क़यामत
गाल पे बिखरे बाल क़यामत
चलती फिरती आफत हो तुम
आफत पे दिल मेरा फ़िदा है
तू है ज़मीन पर सूनी है जन्नत
कौन करे अब उससे मोहब्बत
खुदा परेशां तुझको बना के
हुस्न खुदाई तुझमें बसा के कर
फिर न बनेगी तुझसी हसीना
सारा हुस्न तो तुझमें भरा है
तेरी शक्ल जब उसने बनाई
प्यार की खुशबू हवा में आई
झूम उठे सब नशे में बादल
नशे में मैं भी तो हो गया पागल
झूमें नशे में चाँद और तारे
मेरी तरह तेरे प्यार के मारे
सूरज के दिल में आग है तेरी
इश्क में तेरे वो भी जला है
हाथ में तेरा हाथ रहे तो
दुनिया से टकरा सकता हूँ
नोच के सूरज चंद सितारे
इस धरती पे ला सकता हूँ
दूर न होना दिल को लगा के
रख दूंगा वरना दुनिया जला के
तेरे बिना मैं जी न सकूंगा
तेरी मोहब्बत मेरा खुदा है
अरे तू क्या जाने तुझमें क्या है
तेरी मोहब्बत मेरा खुदा है
तेरी मोहब्बत मेरा खुदा है
तेरी मोहब्बत मेरा खुदा है
तेरी मोहब्बत मेरा खुदा है
तेरी मोहब्बत मेरा खुदा है
.............................
Too kya jaane tujh mein kya hai-Haadsa 1983
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Tuesday, 2 August 2011
Saturday, 16 July 2011
मैं भोली हसीना -वो जो हसीना १९८३
प्यार वो खूबसूरत एहसास है कि उसका असर सभी उम्र वालों
पर बराबर होता है. बस ग्राम और किलोग्राम का फर्क हो जाता है.
सबका इसे ज़ाहिर करने का तरीका जुदा होता है. अंतरमुखी व्यक्ति
इसे अपने शांत अंदाज़ में व्यक्त करता है और बहिर्मुखी व्यक्ति ढोल
ढमाके के साथ . अब एक जवान लड़की पूरी उछल कूद कर के इसे
कैसे बतला सकती है इस गीत के ज़रिये बताया गया है. गीत नैचुरल
लगता है और इसमें बिलकुल फ्री स्टाइल स्नान और नृत्य किया गया
है. व्याकुलता मिश्रित छटपटाहट किसे कहते हैं देखिये इस गीत में.
रंजीता और प्रेमा नारायण इसमें प्रमुख कलाकार हैं.
लता मंगेशकर की आवाज़ है, गौहर कानपुरी के बोल हैं और राम-लक्ष्मण
का संगीत है.
गीत के बोल:
मैं भोली हसीना
बनी जो नगीना
कहीं की रही न हाय
होय रब्बा मुझे क्या हो गया
हुआ क्या हसीना
मेरा बचपन खो गया
मैं भोली हसीना
बनी जो नगीना
कहीं की रही न हाय
होय रब्बा मुझे क्या हो गया
हुआ क्या हसीना
मेरा बचपन खो गया
धक् धक् धक् धडके जिगर
पल पल पल फडके नज़र
धक् धक् धक् धडके जिगर
पल पल पल फडके नज़र
पग पग पर लगता है डर
डर से कहीं जाऊं न मर
नींद नहीं नैना कटत नहीं रैना
पडत नहीं चाइना हाय
होय रब्बा मुझे क्या हो गया
हुआ क्या हसीना
मेरा बचपन खो गया
छोटा लगे दिन लंबी लगे रात
पहले तो न थी ऐसी कोई बात
छोटा लगे दिन लंबी लगे रात
पहले तो न थी ऐसी कोई बात
बैरी हुआ दिल तौबा दिल की जात
ऐसे मौके पे छोड़ा मेरा साथ
मैं बेला चमेली थी सब की सहेली
फिरूं अब अकेली हाय
होय रब्बा मुझे क्या हो गया
हुआ क्या हसीना
मेरा बचपन खो गया
मैं भोली हसीना
बनी जो नगीना
कहीं की रही न हाय
होय रब्बा मुझे क्या हो गया
हुआ क्या हसीना
मेरा बचपन खो गया
......................................................
Main bholi haseena-Woh jo haseena 1983
पर बराबर होता है. बस ग्राम और किलोग्राम का फर्क हो जाता है.
सबका इसे ज़ाहिर करने का तरीका जुदा होता है. अंतरमुखी व्यक्ति
इसे अपने शांत अंदाज़ में व्यक्त करता है और बहिर्मुखी व्यक्ति ढोल
ढमाके के साथ . अब एक जवान लड़की पूरी उछल कूद कर के इसे
कैसे बतला सकती है इस गीत के ज़रिये बताया गया है. गीत नैचुरल
लगता है और इसमें बिलकुल फ्री स्टाइल स्नान और नृत्य किया गया
है. व्याकुलता मिश्रित छटपटाहट किसे कहते हैं देखिये इस गीत में.
रंजीता और प्रेमा नारायण इसमें प्रमुख कलाकार हैं.
लता मंगेशकर की आवाज़ है, गौहर कानपुरी के बोल हैं और राम-लक्ष्मण
का संगीत है.
गीत के बोल:
मैं भोली हसीना
बनी जो नगीना
कहीं की रही न हाय
होय रब्बा मुझे क्या हो गया
हुआ क्या हसीना
मेरा बचपन खो गया
मैं भोली हसीना
बनी जो नगीना
कहीं की रही न हाय
होय रब्बा मुझे क्या हो गया
हुआ क्या हसीना
मेरा बचपन खो गया
धक् धक् धक् धडके जिगर
पल पल पल फडके नज़र
धक् धक् धक् धडके जिगर
पल पल पल फडके नज़र
पग पग पर लगता है डर
डर से कहीं जाऊं न मर
नींद नहीं नैना कटत नहीं रैना
पडत नहीं चाइना हाय
होय रब्बा मुझे क्या हो गया
हुआ क्या हसीना
मेरा बचपन खो गया
छोटा लगे दिन लंबी लगे रात
पहले तो न थी ऐसी कोई बात
छोटा लगे दिन लंबी लगे रात
पहले तो न थी ऐसी कोई बात
बैरी हुआ दिल तौबा दिल की जात
ऐसे मौके पे छोड़ा मेरा साथ
मैं बेला चमेली थी सब की सहेली
फिरूं अब अकेली हाय
होय रब्बा मुझे क्या हो गया
हुआ क्या हसीना
मेरा बचपन खो गया
मैं भोली हसीना
बनी जो नगीना
कहीं की रही न हाय
होय रब्बा मुझे क्या हो गया
हुआ क्या हसीना
मेरा बचपन खो गया
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Main bholi haseena-Woh jo haseena 1983
Wednesday, 19 January 2011
उस्तादी उस्ताद से-उस्तादी से १९८२
फ़िल्मी क़व्वाली एक और ले आये हैं आपकी खिदमत में। ये
फिल्माई गई है रंजीता और विनोद मेहरा पर। थोड़ी कॉमेडी
वाली इस क़व्वाली में हैदराबाद से गाज़ियाबाद की सैर करवा दी
गई है। गीत में आपको मिथुन और गुज़रे ज़माने के हिट हीरो
भगवान भी दिखाई देंगे। गनीमत है जो खातून इसमें गा रही हैं
उन्होंने अपने तुगलकाबाद से होने का दावा पेश नहीं किया।
गीत के बोल :
इश्क का जो दावा जो करते थे
सारी महफ़िल से कहते थे
हाँ, इश्क का जो दावा जो करते थे
सारी महफ़िल से कहते थे
हुस्न का तोड़ेंगे गुरूर वो
जाने फिर मेरे हुज़ूर वो
क्यूँ नहीं आये यहाँ
हो चली है शब् जवान
नहीं अच्छी मोहतरमां
इस कदर भी बेसब्री
हम वो उस्ताद हैं वो
जो कभी हारे ना बाज़ी, हाँ
मर्द का यूँ उलझना
वो भी औरत से तौबा
एक उस्ताद की ये
नहीं है शान क़िबला
कौन असली है डर है
कौन असली है कौन नकली है
कौन असली है डर है
राज़ कैसे खुलेगा
अरे हट
असली हैदर हैं हम
हैदराबाद के
असली हैदर हैं हम
हैदराबाद के
नहीं चलेगी
नहीं चलेगी, हाँ
नहीं चलेगी नहीं चलेगी
उस्तादी उस्ताद से
चुप
बागी हैदर हैं हम
गाज़ियाबाद के
बागी हैदर हैं हम
गाज़ियाबाद के
नहीं चलेगी नहीं चलेगी
नहीं चलेगी नहीं चलेगी
उस्तादी उस्ताद से
असली हैदर हैं हम
हैदराबाद के
हाँ, बागी हैदर हैं हम
गाज़ियाबाद के
हमसे उलझा है जो वो हारा है
छोड़ दो जिद ये माल हमारा है
जान दे देंगे जिद ना छोड़ेंगे
ओ माल हाथों से जाने ना देंगे
तू चीज़ की ऐ
निब्बू बांध निचोड़ा तैनू
क्या चीज़ छिब्बा ते
लगती वांग दिलो वान तैनू
सुनो गज़ियाबादी
खुद को ना समझो बागी
अरे जा हैदराबादी
उड़ा जायेंगे बाज़ी
आ अगर ऐसा दावा है
तो फिर हम भी हैं राज़ी
बच के
टूटे ना शीशा टकरा के फौलाद से
टूटे ना शीशा टकरा के फौलाद से
अजी नहीं चलेगी नहीं चलेगी
नहीं चलेगी नहीं चलेगी
उस्तादी उस्ताद से
असली हैदर हैं हम
हैदराबाद के
बागी हैदर हैं हम
गाज़ियाबाद के
....................................
Ustadi ustad se-Ustadi Ustad se 1982
फिल्माई गई है रंजीता और विनोद मेहरा पर। थोड़ी कॉमेडी
वाली इस क़व्वाली में हैदराबाद से गाज़ियाबाद की सैर करवा दी
गई है। गीत में आपको मिथुन और गुज़रे ज़माने के हिट हीरो
भगवान भी दिखाई देंगे। गनीमत है जो खातून इसमें गा रही हैं
उन्होंने अपने तुगलकाबाद से होने का दावा पेश नहीं किया।
गीत के बोल :
इश्क का जो दावा जो करते थे
सारी महफ़िल से कहते थे
हाँ, इश्क का जो दावा जो करते थे
सारी महफ़िल से कहते थे
हुस्न का तोड़ेंगे गुरूर वो
जाने फिर मेरे हुज़ूर वो
क्यूँ नहीं आये यहाँ
हो चली है शब् जवान
नहीं अच्छी मोहतरमां
इस कदर भी बेसब्री
हम वो उस्ताद हैं वो
जो कभी हारे ना बाज़ी, हाँ
मर्द का यूँ उलझना
वो भी औरत से तौबा
एक उस्ताद की ये
नहीं है शान क़िबला
कौन असली है डर है
कौन असली है कौन नकली है
कौन असली है डर है
राज़ कैसे खुलेगा
अरे हट
असली हैदर हैं हम
हैदराबाद के
असली हैदर हैं हम
हैदराबाद के
नहीं चलेगी
नहीं चलेगी, हाँ
नहीं चलेगी नहीं चलेगी
उस्तादी उस्ताद से
चुप
बागी हैदर हैं हम
गाज़ियाबाद के
बागी हैदर हैं हम
गाज़ियाबाद के
नहीं चलेगी नहीं चलेगी
नहीं चलेगी नहीं चलेगी
उस्तादी उस्ताद से
असली हैदर हैं हम
हैदराबाद के
हाँ, बागी हैदर हैं हम
गाज़ियाबाद के
हमसे उलझा है जो वो हारा है
छोड़ दो जिद ये माल हमारा है
जान दे देंगे जिद ना छोड़ेंगे
ओ माल हाथों से जाने ना देंगे
तू चीज़ की ऐ
निब्बू बांध निचोड़ा तैनू
क्या चीज़ छिब्बा ते
लगती वांग दिलो वान तैनू
सुनो गज़ियाबादी
खुद को ना समझो बागी
अरे जा हैदराबादी
उड़ा जायेंगे बाज़ी
आ अगर ऐसा दावा है
तो फिर हम भी हैं राज़ी
बच के
टूटे ना शीशा टकरा के फौलाद से
टूटे ना शीशा टकरा के फौलाद से
अजी नहीं चलेगी नहीं चलेगी
नहीं चलेगी नहीं चलेगी
उस्तादी उस्ताद से
असली हैदर हैं हम
हैदराबाद के
बागी हैदर हैं हम
गाज़ियाबाद के
....................................
Ustadi ustad se-Ustadi Ustad se 1982
Sunday, 16 January 2011
एक दिन तुम-अंखियों के झरोखों से-१९७८
कुछ कुछ टकीला-शकीला के सॉफ्ट म्यूज़िक की याद दिलाता
ये गीत आकर्षक धुन में बंधा हुआ है। युवा प्रेम-आलाप पर बनी
साफ़ सुथरी फिल्म 'अंखियों के झरोखों से' फिल्म से लिया गया
ये गीत आज भी सुनने में कानों को सुकून देता है। नायक सचिन
और रंजीता पर फिल्माए गए इस गीत को लिखा और स्वरबद्ध
किया है रवीन्द्र जैन ने। रवीन्द्र जैन के इस गीत को सुनने के बाद
शायद उनकी versatility पर प्रश्नचिन्ह लगाने वालों को पुनः
विचार अवश्य करना चाहिए। प्रेमी दुनिया से किस कदर बेखबर
हो जाते हैं उसका अनूठा फिल्मांकन किया गया है इस गीत में।
गीत के बोल:
एक दिन तुम बहुत बड़े बनोगे एक दिन
चाँद से चमक उठोगे एक दिन
Will you forget me then?
How I can
Tell me, how I can
एक दिन तुम बहुत बड़े बनोगे एक दिन
चाँद से चमक उठोगे एक दिन
Will you forget me then?
How I can
Tell me, how I कैन
मान लो कहीं की शहजादी
बैठी हो तुम्हारे लिए ऑंखें बिछाए
और उसे जिद हो के वो शादी
किसी से ना करेगी तुम्हारे सिवा
Will you forget me then?
Yes, I can
If only you can
एक दिन ले गया तुम्हें जो कोई अजनबी
गैर की हो गई जो ये ज़िन्दगी
Will you forget me then?
Gentleman, oh no gentleman
सांस सांस में तुम्हारी ख़ुशबू
किस तरह जियूँगा बोलो तुमको भुला के
दिल पे जा के कर चुकी हो जादू
जानती हो पूछती हो फिर भी सता के
Will you forget me then?
Gentleman, I will gentleman
ला ला ला, ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
ला ला ला, ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला
..................................
Ek din-Ankhiyon ke jharokhon se 1978
ये गीत आकर्षक धुन में बंधा हुआ है। युवा प्रेम-आलाप पर बनी
साफ़ सुथरी फिल्म 'अंखियों के झरोखों से' फिल्म से लिया गया
ये गीत आज भी सुनने में कानों को सुकून देता है। नायक सचिन
और रंजीता पर फिल्माए गए इस गीत को लिखा और स्वरबद्ध
किया है रवीन्द्र जैन ने। रवीन्द्र जैन के इस गीत को सुनने के बाद
शायद उनकी versatility पर प्रश्नचिन्ह लगाने वालों को पुनः
विचार अवश्य करना चाहिए। प्रेमी दुनिया से किस कदर बेखबर
हो जाते हैं उसका अनूठा फिल्मांकन किया गया है इस गीत में।
गीत के बोल:
एक दिन तुम बहुत बड़े बनोगे एक दिन
चाँद से चमक उठोगे एक दिन
Will you forget me then?
How I can
Tell me, how I can
एक दिन तुम बहुत बड़े बनोगे एक दिन
चाँद से चमक उठोगे एक दिन
Will you forget me then?
How I can
Tell me, how I कैन
मान लो कहीं की शहजादी
बैठी हो तुम्हारे लिए ऑंखें बिछाए
और उसे जिद हो के वो शादी
किसी से ना करेगी तुम्हारे सिवा
Will you forget me then?
Yes, I can
If only you can
एक दिन ले गया तुम्हें जो कोई अजनबी
गैर की हो गई जो ये ज़िन्दगी
Will you forget me then?
Gentleman, oh no gentleman
सांस सांस में तुम्हारी ख़ुशबू
किस तरह जियूँगा बोलो तुमको भुला के
दिल पे जा के कर चुकी हो जादू
जानती हो पूछती हो फिर भी सता के
Will you forget me then?
Gentleman, I will gentleman
ला ला ला, ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
ला ला ला, ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला
..................................
Ek din-Ankhiyon ke jharokhon se 1978
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1978,
Ankhiyon ke jharokhon se,
Hemlata,
Ranjeeta,
Ravindra Jain,
Sachin,
Shailendra Singh
Saturday, 4 December 2010
लग जा गले से ऐ तन्हाई-वो जो हसीना
लग जा गले-इस थीम पर आपको एक मधुर गीत सुनवाया
अब सुनिए पुरुष आवाज़ में रंगीन युग से एक निवेदन।
निवेदन नायिका के बजाये तन्हाई से किया जा रहा है।
गीत है फिल्म वो जो हसीना से जिसके दो गीत आपको
सुनवाए जा चुके हैं। इस फिल्म में मिथुन चक्रवर्ती और
रंजीता नायक-नायिका की भूमिकाओं में हैं। रवीन्द्र रावल
के लिखे बोलों को सुर में ढाला है राम-लक्ष्मण (विजय पाटिल)
ने। आवाजें है नितिन मुकेश और उषा मंगेशकर की।
नितिन मुकेश का गाया ये गीत हर समय की युवा पीढ़ी को
भाता रहा है। सरल से शब्दों में दिल की व्यथा कह दी गई
है। गीत की सबसे दमदार पंक्ति है-आग से मैंने प्यास बुझाई !
gईट का विडियो उपलब्ध नहीं है और जिस महाशय ने इस
गीत पर स्लाइड शो बनाया है उसे देख के लगता है कि ये गीत
डिप्रेशन के शिकार लोगों को ज्यादा पसंद आता है।
गीत के बोल:
लग जा गले से ऐ तन्हाई
लग जा गले से ऐ तन्हाई
प्यार मेरा निकला हरजाई
प्यार मेरा निकला हरजाई
लग जा गले से ऐ तन्हाई
प्यार मेरा निकला हरजाई
प्यार मेरा निकला हरजाई
मैं भी रो रो के दूँगी दुहाई
मैं भी रो रो के दूँगी दुहाई
कैसे करूं मैं किसी से गिला
दुनिया में होती तो मिलती वफ़ा
हो, कैसे करूं मैं किसी से गिला
दुनिया में होती तो मिलती वफ़ा
मुझको मोहब्बत रास ना आई
मुझको मोहब्बत रास ना आई
प्यार मेरा निकला हरजाई
प्यार मेरा निकला हरजाई
मैं भी रो रो के दूँगी दुहाई
मैं भी रो रो के दूँगी दुहाई
तू ही बता ऐ मेरी ज़िन्दगी
पहले कहाँ थी ये दीवानगी
हो, तू ही बता ऐ मेरी ज़िन्दगी
पहले कहाँ थी ये दीवानगी
आग से मैंने प्यास बुझाई
आग से मैंने प्यास बुझाई
प्यार मेरा निकला हरजाई
प्यार मेरा निकला हरजाई
मैं भी रो रो के दूँगी दुहाई
मैं भी रो रो के दूँगी दुहाई
अब सुनिए पुरुष आवाज़ में रंगीन युग से एक निवेदन।
निवेदन नायिका के बजाये तन्हाई से किया जा रहा है।
गीत है फिल्म वो जो हसीना से जिसके दो गीत आपको
सुनवाए जा चुके हैं। इस फिल्म में मिथुन चक्रवर्ती और
रंजीता नायक-नायिका की भूमिकाओं में हैं। रवीन्द्र रावल
के लिखे बोलों को सुर में ढाला है राम-लक्ष्मण (विजय पाटिल)
ने। आवाजें है नितिन मुकेश और उषा मंगेशकर की।
नितिन मुकेश का गाया ये गीत हर समय की युवा पीढ़ी को
भाता रहा है। सरल से शब्दों में दिल की व्यथा कह दी गई
है। गीत की सबसे दमदार पंक्ति है-आग से मैंने प्यास बुझाई !
gईट का विडियो उपलब्ध नहीं है और जिस महाशय ने इस
गीत पर स्लाइड शो बनाया है उसे देख के लगता है कि ये गीत
डिप्रेशन के शिकार लोगों को ज्यादा पसंद आता है।
गीत के बोल:
लग जा गले से ऐ तन्हाई
लग जा गले से ऐ तन्हाई
प्यार मेरा निकला हरजाई
प्यार मेरा निकला हरजाई
लग जा गले से ऐ तन्हाई
प्यार मेरा निकला हरजाई
प्यार मेरा निकला हरजाई
मैं भी रो रो के दूँगी दुहाई
मैं भी रो रो के दूँगी दुहाई
कैसे करूं मैं किसी से गिला
दुनिया में होती तो मिलती वफ़ा
हो, कैसे करूं मैं किसी से गिला
दुनिया में होती तो मिलती वफ़ा
मुझको मोहब्बत रास ना आई
मुझको मोहब्बत रास ना आई
प्यार मेरा निकला हरजाई
प्यार मेरा निकला हरजाई
मैं भी रो रो के दूँगी दुहाई
मैं भी रो रो के दूँगी दुहाई
तू ही बता ऐ मेरी ज़िन्दगी
पहले कहाँ थी ये दीवानगी
हो, तू ही बता ऐ मेरी ज़िन्दगी
पहले कहाँ थी ये दीवानगी
आग से मैंने प्यास बुझाई
आग से मैंने प्यास बुझाई
प्यार मेरा निकला हरजाई
प्यार मेरा निकला हरजाई
मैं भी रो रो के दूँगी दुहाई
मैं भी रो रो के दूँगी दुहाई
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