आपको एक गीत सुनवाया था सन १९८३ की मनोरंजक फिल्म 'वो सात दिन' से।
भटक गया, चटक गया वगैरह वगैरह । फिल्म से एक और मनोरंजक गीत सुन
लिया जाये आज। अनिल कपूर इस फिल्म के नायक हैं और किरायेदार की भूमिका
में हैं. पद्मिनी कोल्हापुरे हैं इस फिल्म की नायिका जो कि फिल्म के कथानक अनुसार
मकान मालिक की सुपुत्री है । गीत सामान्य अर्थ वाला है मगर आप इसे असामान्य
अर्थ वाला भी समझ सकते हैं। गायिका हैं आशा भोंसले। ज़ाहिर सी बात है -गीत में
अनाड़ी किसको बोला जा रहा है ये पांचवी फेल बच्चा भी बतला सकता है। अनाड़ी के
साथ जो छोटी उम्र का खिलाडी है उस कलाकार का नाम "मास्टर राजू" है।
गीत के बोल:
फ़रमाइश पर उपलब्ध करवाए जायेंगे
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Sunday, 12 February 2012
Thursday, 21 July 2011
नशा ये कैसा..उडीबाबा उडीबाबा -विधाता १९८२
भोंपू और ग्रामोफोन से याद आया कि पड़ोस के मोहल्ले में एक
चच्चा रहा करते थे गानों के शौक़ीन। उनके पास एक बार हमने
फरमाइश की-चच्चा वो गाना तो सुनवा दो- का का कि की कु
कू कं कः उड़े बाबा, बड़े बाबा, छोटे बाबा। चच्चा ने गाने की
फजीहत पर पहले तो नाक भोंह सिकोड़ी फिर बोले ऐसे बेहूदा
गाने सुनते हो ! कुछ सहगल वेह्गल सुना करो। चच्चा शायद
वो फिल्म देख आये थे, वे फिल्मों के भी बड़े शौक़ीन थे और
फर्स्ट डे फर्स्ट शो के तकरीबन २०० से ज्यादा रिकॉर्ड उनके नाम
पर थे। टिकट लाइन की धींगामुश्ती में उनके कपडे भी कभी कभार
फट जाया करते। उनकी कलाबाजियों से ही हम अंदाज़ा लगाते कि
फिल्म देखना भी एक टेडी खीर हो सकता है।
८० के दशक में सुपरमैन के कॉमिक्स की एंट्री हुई अपने देश में।
उसने छोटे बड़े सभी को आकर्षित किया। उन छोटों और बड़ों में
बॉलीवुड के निर्देशक निर्माता भी शामिल हैं। उसका एक प्रभाव आप
इस गीत में देखेंगे।
संजू को फिल्म इंडस्ट्री में संजू बाबा बोला जाता है, उस हिसाब से
ये गीत बिलकुल सही फिट होता है सिचुऐशन पर ।
गीत के बोल:
आ आ
आ आ ई ई ऊ ऊ ऐ ऐ
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
आ आ
आ आ ई ई ऊ ऊ ऐ ऐ
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
आ आ
आ आ ई ई ऊ ऊ ऐ ऐ
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
बाबा उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
बाबा उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
नशा ये कैसा उडी बाबा
मुझे हो गया उडी बाबा
नशा ये कैसा मुझे हो गया
दिल मेरा खो गया
आ आ ई ई ऊ ऊ ऐ ऐ
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
आ आ ई ई ऊ ऊ ऐ ऐ
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
बाबा उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
बाबा उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
हे,
हा आ आ आ, हा आ आ आ
हा आ आ आ, हा आ आ आ
बैंग बैंग, आ
बैंग बैंग, आ
बैंग बैंग, आ
बैंग
ओ मैं आ गयी जाने किधर
मुझको नहीं इसकी खबर
दीवानी लड़की ये लगती ऐसे दीवानों की महफ़िल है
यहाँ पे आना आसान हैं पर यहाँ से जाना मुश्किल है
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
बाबा उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
नशा ये कैसा उडी बाबा
मुझे हो गया उडी बाबा
नशा ये कैसा मुझे हो गया
दिल मेरा खो गया
आ आ ई ई ऊ ऊ ऐ ऐ
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
बाबा उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
बाबा उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
हा आ आ आ, हा आ आ आ
हा आ आ आ, हा आ आ आ
बैंग बैंग, आ
बैंग बैंग, आ
बैंग बैंग, आ
बैंग
ओ कितनी हसीं ये रात है
क्या ये मेरी बारात है
हा हा, थोड़ी देर में तेरा दूल्हा राजा यहाँ पे आएगा
अपनी रानी को डोली में बिठा के तुझे ले जायेगा
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
बाबा उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
नशा ये कैसा उडी बाबा
मुझे हो गया उडी बाबा
नशा ये कैसा मुझे हो गया
दिल मेरा खो गया
आ आ ई ई ऊ ऊ ऐ ऐ
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
आ आ ई ई ऊ ऊ ऐ ऐ
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
बाबा उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
बाबा उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
आ आ ई ई ऊ ऊ ऐ ऐ
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
आ आ ई ई ऊ ऊ ऐ ऐ
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
...............................
Nasha ye kaisa...udibaba-Vidhata 1982
चच्चा रहा करते थे गानों के शौक़ीन। उनके पास एक बार हमने
फरमाइश की-चच्चा वो गाना तो सुनवा दो- का का कि की कु
कू कं कः उड़े बाबा, बड़े बाबा, छोटे बाबा। चच्चा ने गाने की
फजीहत पर पहले तो नाक भोंह सिकोड़ी फिर बोले ऐसे बेहूदा
गाने सुनते हो ! कुछ सहगल वेह्गल सुना करो। चच्चा शायद
वो फिल्म देख आये थे, वे फिल्मों के भी बड़े शौक़ीन थे और
फर्स्ट डे फर्स्ट शो के तकरीबन २०० से ज्यादा रिकॉर्ड उनके नाम
पर थे। टिकट लाइन की धींगामुश्ती में उनके कपडे भी कभी कभार
फट जाया करते। उनकी कलाबाजियों से ही हम अंदाज़ा लगाते कि
फिल्म देखना भी एक टेडी खीर हो सकता है।
८० के दशक में सुपरमैन के कॉमिक्स की एंट्री हुई अपने देश में।
उसने छोटे बड़े सभी को आकर्षित किया। उन छोटों और बड़ों में
बॉलीवुड के निर्देशक निर्माता भी शामिल हैं। उसका एक प्रभाव आप
इस गीत में देखेंगे।
संजू को फिल्म इंडस्ट्री में संजू बाबा बोला जाता है, उस हिसाब से
ये गीत बिलकुल सही फिट होता है सिचुऐशन पर ।
गीत के बोल:
आ आ
आ आ ई ई ऊ ऊ ऐ ऐ
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
आ आ
आ आ ई ई ऊ ऊ ऐ ऐ
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
आ आ
आ आ ई ई ऊ ऊ ऐ ऐ
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
बाबा उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
बाबा उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
नशा ये कैसा उडी बाबा
मुझे हो गया उडी बाबा
नशा ये कैसा मुझे हो गया
दिल मेरा खो गया
आ आ ई ई ऊ ऊ ऐ ऐ
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
आ आ ई ई ऊ ऊ ऐ ऐ
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
बाबा उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
बाबा उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
हे,
हा आ आ आ, हा आ आ आ
हा आ आ आ, हा आ आ आ
बैंग बैंग, आ
बैंग बैंग, आ
बैंग बैंग, आ
बैंग
ओ मैं आ गयी जाने किधर
मुझको नहीं इसकी खबर
दीवानी लड़की ये लगती ऐसे दीवानों की महफ़िल है
यहाँ पे आना आसान हैं पर यहाँ से जाना मुश्किल है
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
बाबा उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
नशा ये कैसा उडी बाबा
मुझे हो गया उडी बाबा
नशा ये कैसा मुझे हो गया
दिल मेरा खो गया
आ आ ई ई ऊ ऊ ऐ ऐ
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
बाबा उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
बाबा उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
हा आ आ आ, हा आ आ आ
हा आ आ आ, हा आ आ आ
बैंग बैंग, आ
बैंग बैंग, आ
बैंग बैंग, आ
बैंग
ओ कितनी हसीं ये रात है
क्या ये मेरी बारात है
हा हा, थोड़ी देर में तेरा दूल्हा राजा यहाँ पे आएगा
अपनी रानी को डोली में बिठा के तुझे ले जायेगा
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
बाबा उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
नशा ये कैसा उडी बाबा
मुझे हो गया उडी बाबा
नशा ये कैसा मुझे हो गया
दिल मेरा खो गया
आ आ ई ई ऊ ऊ ऐ ऐ
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
आ आ ई ई ऊ ऊ ऐ ऐ
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
बाबा उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
बाबा उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
आ आ ई ई ऊ ऊ ऐ ऐ
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
आ आ ई ई ऊ ऊ ऐ ऐ
उडी बाबा उडी बाबा उडी बाबा
...............................
Nasha ye kaisa...udibaba-Vidhata 1982
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Tuesday, 17 May 2011
आया शबाब आया-हम हैं लाजवाब १९८४
फिल्म का नाम लाजवाब रख देने से ही लाजवाब फिल्म नहीं बन
जाती। लाजवाब बनाने के लिए लाजवाब नुस्खे लाजवाब तरीके से
पेश करना पढ़ते हैं। कई बार तो यूँ हो जाता है कि नुस्खा आजमाते
आजमाते पुराना पड़ जाता है। जुकाम की दवाई तैयार करते करते
सर्दी निकाल जाती है। या फिर नुस्खा नुक्स में तब्दील हो जाता है।
आइये फिल्म हम हैं लाजवाब फिल्म का दूसरा गीत सुनें। एक गीत
आपको पहले सुनवाया जा चुका है-कोई परदेसी आया परदेस में।
ये गीत लता के स्वर में है, जिसकी रचना की है आनंद बक्षी ने
और संगीत तैयार किया आर डी बर्मन ने। रोचक गीत है, देखिये
'फुल गांवडी नौटंकी' शहरी लेबल वाली।
गीत के बोल:
आया शबाब आया खाना ख़राब आया
आया शबाब आया खाना ख़राब आया
आइना मैंने देखा
आइना मैंने देखा इतना हिजाब आया
आया शबाब आया खाना ख़राब आया
पायल का कोई घुँघरू
छन से छनक गया तो
पायल का कोई घुँघरू
छन से छनक गया तो
क्या हो गया ज़रा सा
आँचल सरक गया तो
इतनी सी बात पर क्यों
इतनी सी बात पर क्यों
इतना हिजाब आया
आया शबाब आया खाना ख़राब आया
आइना मैंने देखा
आइना मैंने देखा इतना हिजाब आया
आया शबाब आया खाना ख़राब आया
आया शबाब आया खाना ख़राब आया
जाती। लाजवाब बनाने के लिए लाजवाब नुस्खे लाजवाब तरीके से
पेश करना पढ़ते हैं। कई बार तो यूँ हो जाता है कि नुस्खा आजमाते
आजमाते पुराना पड़ जाता है। जुकाम की दवाई तैयार करते करते
सर्दी निकाल जाती है। या फिर नुस्खा नुक्स में तब्दील हो जाता है।
आइये फिल्म हम हैं लाजवाब फिल्म का दूसरा गीत सुनें। एक गीत
आपको पहले सुनवाया जा चुका है-कोई परदेसी आया परदेस में।
ये गीत लता के स्वर में है, जिसकी रचना की है आनंद बक्षी ने
और संगीत तैयार किया आर डी बर्मन ने। रोचक गीत है, देखिये
'फुल गांवडी नौटंकी' शहरी लेबल वाली।
गीत के बोल:
आया शबाब आया खाना ख़राब आया
आया शबाब आया खाना ख़राब आया
आइना मैंने देखा
आइना मैंने देखा इतना हिजाब आया
आया शबाब आया खाना ख़राब आया
पायल का कोई घुँघरू
छन से छनक गया तो
पायल का कोई घुँघरू
छन से छनक गया तो
क्या हो गया ज़रा सा
आँचल सरक गया तो
इतनी सी बात पर क्यों
इतनी सी बात पर क्यों
इतना हिजाब आया
आया शबाब आया खाना ख़राब आया
आइना मैंने देखा
आइना मैंने देखा इतना हिजाब आया
आया शबाब आया खाना ख़राब आया
आया शबाब आया खाना ख़राब आया
Friday, 4 February 2011
नज़र से फूल चुनती है नज़र-अहिस्ता अहिस्ता
नए चेहरों पर फिल्माया गया एक गीत पेश है। फिल्म रिलीज़
के वक़्त दोनों ही चेहरे नए थे। पद्मिनी कोल्हापुरे को ज़रूर जनता
पहचानने लगी थी तब तक। फिल्म का नाम है-अहिस्ता अहिस्ता
और प्रस्तुत गीत फिल्म का शीर्षक गीत है। फिल्म के गीत काफी
लोकप्रिय थे रिलीज़ के वक़्त और उसके बाद इक्का दुक्का गीत आज
भी सुनाई दे जाते हैं कभी। गीत नक्श लायलपुरी का लिखा हुआ है
और संगीत तैयार किया है खय्याम ने। आशा भोंसले और अनवर
इसके पार्श्व गायक हैं। नायक हैं शशि कपूर के सुपुत्र कुणाल कपूर।
गीत के बोल :
नजर से फूल चुनती हैं नजर
नजर से फूल चुनती हैं नजर, आहिस्ता, आहिस्ता
आहिस्ता, आहिस्ता
मोहब्बत रंग लाती हैं मगर
मोहब्बत रंग लाती हैं मगर, आहिस्ता, आहिस्ता
आहिस्ता, आहिस्ता
दुआएं दे रहे हैं पेड, मौसम जोगिया सा हैं
तुम्हारा साथ है् जब से, हर एक मंझर नया सा हैं
दुआएं दे रहे हैं पेड, मौसम जोगिया सा हैं
तुम्हारा साथ है् जब से, हर एक मंझर नया सा हैं
हसीं लगने लगी हर रहगुजर,
आहिस्ता, आहिस्ता
बहुत अच्छे हो तुम, फिर भी हमे तुम से हया क्यों है
तुम ही बोलो हमारे दरमियाँ ये फासला क्यों हैं
बहुत अच्छे हो तुम, फिर भी हमे तुमसे हया क्यों है
तुम ही बोलो हमारे दरमियाँ ये फासला क्यों हैं
मजा जब हैं के तय हो ये सफर, आहिस्ता, आहिस्ता
आहिस्ता, आहिस्ता
हमेशा से अकेलेपन में कोई मुस्कुराता हैं
ये रिश्ता प्यार का हैं, आसमां से बन के आता हैं
हमेशा से अकेलेपन में कोई मुस्कुराता हैं
ये रिश्ता प्यार का हैं, आसमां से बनके आता हैं
मगर होती हैं दिल को ये खबर, आहिस्ता, आहिस्ता
आहिस्ता, आहिस्ता
नजर से फूल चुनती हैं नजर, आहिस्ता, आहिस्ता
आहिस्ता, आहिस्ता
मोहब्बत रंग लाती हैं मगर, आहिस्ता, आहिस्ता
आहिस्ता, आहिस्ता
...................................................
Nazar se phool chunti hai nazar-Ahista ahista 1981
के वक़्त दोनों ही चेहरे नए थे। पद्मिनी कोल्हापुरे को ज़रूर जनता
पहचानने लगी थी तब तक। फिल्म का नाम है-अहिस्ता अहिस्ता
और प्रस्तुत गीत फिल्म का शीर्षक गीत है। फिल्म के गीत काफी
लोकप्रिय थे रिलीज़ के वक़्त और उसके बाद इक्का दुक्का गीत आज
भी सुनाई दे जाते हैं कभी। गीत नक्श लायलपुरी का लिखा हुआ है
और संगीत तैयार किया है खय्याम ने। आशा भोंसले और अनवर
इसके पार्श्व गायक हैं। नायक हैं शशि कपूर के सुपुत्र कुणाल कपूर।
गीत के बोल :
नजर से फूल चुनती हैं नजर
नजर से फूल चुनती हैं नजर, आहिस्ता, आहिस्ता
आहिस्ता, आहिस्ता
मोहब्बत रंग लाती हैं मगर
मोहब्बत रंग लाती हैं मगर, आहिस्ता, आहिस्ता
आहिस्ता, आहिस्ता
दुआएं दे रहे हैं पेड, मौसम जोगिया सा हैं
तुम्हारा साथ है् जब से, हर एक मंझर नया सा हैं
दुआएं दे रहे हैं पेड, मौसम जोगिया सा हैं
तुम्हारा साथ है् जब से, हर एक मंझर नया सा हैं
हसीं लगने लगी हर रहगुजर,
आहिस्ता, आहिस्ता
बहुत अच्छे हो तुम, फिर भी हमे तुम से हया क्यों है
तुम ही बोलो हमारे दरमियाँ ये फासला क्यों हैं
बहुत अच्छे हो तुम, फिर भी हमे तुमसे हया क्यों है
तुम ही बोलो हमारे दरमियाँ ये फासला क्यों हैं
मजा जब हैं के तय हो ये सफर, आहिस्ता, आहिस्ता
आहिस्ता, आहिस्ता
हमेशा से अकेलेपन में कोई मुस्कुराता हैं
ये रिश्ता प्यार का हैं, आसमां से बन के आता हैं
हमेशा से अकेलेपन में कोई मुस्कुराता हैं
ये रिश्ता प्यार का हैं, आसमां से बनके आता हैं
मगर होती हैं दिल को ये खबर, आहिस्ता, आहिस्ता
आहिस्ता, आहिस्ता
नजर से फूल चुनती हैं नजर, आहिस्ता, आहिस्ता
आहिस्ता, आहिस्ता
मोहब्बत रंग लाती हैं मगर, आहिस्ता, आहिस्ता
आहिस्ता, आहिस्ता
...................................................
Nazar se phool chunti hai nazar-Ahista ahista 1981
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Thursday, 2 December 2010
मेरे ख्यालों की रहगुज़र-ये इश्क नहीं आसान १९८४
ज़िगर मुरादाबादी की कुछ पंक्तियाँ यूँ हैं:
ये इश्क नहीं आसान बस इतना समझ लीजिये
एक आग का दरिया है बस डूब के जाना है।
ये फलसफा ज़िन्दगी के ऊपर भी आसानी से लागू होता है।
आपको गायक अनवर हुसैन का एक लाजवाब गीत सुनवाया
था फिल्म "हम हैं लाजवाब" से। मोहम्मद रफ़ी के अवसान के
बाद हिंदी फिल्म संगीत क्षेत्र में पैदा हुए बड़े रिक्त स्थान को कुछ
हद तक भरने का भरोसा पैदा करने वाले गायक ने कुछ गीत
गाये और गुमनामी के अंधेरों में कहीं खो गया। शायद गायक
की अपनी शर्तों पर काम करने का जूनून होने की वजह से ये
गत बनी या समय का फेर कहिये इसको। मामला चाहे जो भी
हो उनसे कमतर प्रतिभा वाले गायक सामने आये या लाये गए
और उन गायकों ने वो सब हासिल कर लिया जिसकी शायद
अनवर अपने फुर्सत के क्षणों में कल्पना मात्र ही कर पाते होंगे।
इसे विडम्बना ही कहिये कि जिस कलाकार को फिल्मों में गाते
सुना जाना चाहिए वो बीयर बार में सोम-रस प्रेमियों का दिल
बहला रहा है। उस कलाकार कि आवाज़ आम श्रोता कि पहुँच
में नहीं है क्यूंकि उनके लिए सार्वजनिक मंच उपलब्ध नहीं है.
प्रश्न ये है कि क्या सुनने वालों या संगीत पेमियों में से पहले कोई
ऐसा नहीं था जिसे गायक की इस गति पर ज़रा भी सहानुभूति
नहीं हुई हो। सवाल अंतरात्मा के जागने का है। समय का फेर
इसी को कहा जाता है। खैर देर आयद दुरुस्त आयद के साथ
गायक के लिए शुभकामनाएं। उन्हें और काम मिले और उनकी
प्रतिभा का paryapt दोहन हो चाहे टी वी पर हो या फिल्मों में।
सच्चे संगीत प्रेमी उन्हें फिर से सुनना चाहते हैं।
जब सितारे गर्दिश में हो तो आपके प्रशंसक ही आपको बिना पहचाने
धक्का मार के निकाल जाते हैं।
अंग्रेजी का दैनिक और उसके रिपोर्टर बधाई के पात्र हैं जिनके प्रयासों
से एक कलाकार को वापस सुनहरे दौर में लौटने का मौका मिल सकता
है। पत्रकारों को ऐसी दैवीय प्रेरणा देने वाली शक्ति को नमन। आइये सुनें
अनवर की आवाज़ में एक ग़ज़ल सुनें जो फिल्म "ये इश्क नहीं आसान"
से है। इस गीत को लिखा आनंद बक्षी ने और संगीत तैयार किया है
लक्ष्मी प्यारे ने। अमिताभ बच्चन की फिल्म कालिया बनाने वाले
फिल्मकार टीनू आनंद ने इस फिल्म का निर्देशन किया है। फिल्म ने
अच्छा व्यवसाय नहीं किया मगर प्रयास सराहनीय कहा जायेगा। फिल्म
का संगीत सुनने लायक है।
गीत के बोल:
मेरे ख्यालों की रहगुज़र से
वो देखिये वो गुज़र रहे हैं
मेरी निगाहों के आसमान से
ज़मीन-ए-दिल पर उतर रहे हैं
ये कैसे मुमकिन है हमनशीनों
ये कैसे मुमकिन है हमनशीनों
के दिल को दिल की खबर ना पहुंचे
के दिल को दिल की खबर ना पहुंचे
उन्हें भी हम याद आते होंगे
के जिनको हम याद कर रहे हैं
मेरे ख्यालों की रहगुज़र से
वो देखिये वो गुज़र रहे हैं
इसी मुहब्बत की रोज़-ओ-शब् हम
इसी मुहब्बत की रोज़-ओ-शब् हम
सुनाया करते थे दास्तानें
सुनाया करते थे दास्तानें
इसी मुहबत का नाम लेते हुवे
भी हम आज डर रहे हैं
मेरे ख्यालों की रहगुज़र से
वो देखिये वो गुज़र रहे हैं
चले हैं थोड़ी ही दूर तक बस
वो साथ मेरे सलीम फिर भी
ये बात मैं कैसे मैं भूल जाऊं
के हम कभी हमसफ़र रहे हैं
मेरी निगाहों के आसमान से
ज़मीन-ए-दिल पर उतर रहे हैं
मेरे ख्यालों की रहगुज़र से
वो देखिये वो गुज़र रहे हैं
ये इश्क नहीं आसान बस इतना समझ लीजिये
एक आग का दरिया है बस डूब के जाना है।
ये फलसफा ज़िन्दगी के ऊपर भी आसानी से लागू होता है।
आपको गायक अनवर हुसैन का एक लाजवाब गीत सुनवाया
था फिल्म "हम हैं लाजवाब" से। मोहम्मद रफ़ी के अवसान के
बाद हिंदी फिल्म संगीत क्षेत्र में पैदा हुए बड़े रिक्त स्थान को कुछ
हद तक भरने का भरोसा पैदा करने वाले गायक ने कुछ गीत
गाये और गुमनामी के अंधेरों में कहीं खो गया। शायद गायक
की अपनी शर्तों पर काम करने का जूनून होने की वजह से ये
गत बनी या समय का फेर कहिये इसको। मामला चाहे जो भी
हो उनसे कमतर प्रतिभा वाले गायक सामने आये या लाये गए
और उन गायकों ने वो सब हासिल कर लिया जिसकी शायद
अनवर अपने फुर्सत के क्षणों में कल्पना मात्र ही कर पाते होंगे।
इसे विडम्बना ही कहिये कि जिस कलाकार को फिल्मों में गाते
सुना जाना चाहिए वो बीयर बार में सोम-रस प्रेमियों का दिल
बहला रहा है। उस कलाकार कि आवाज़ आम श्रोता कि पहुँच
में नहीं है क्यूंकि उनके लिए सार्वजनिक मंच उपलब्ध नहीं है.
प्रश्न ये है कि क्या सुनने वालों या संगीत पेमियों में से पहले कोई
ऐसा नहीं था जिसे गायक की इस गति पर ज़रा भी सहानुभूति
नहीं हुई हो। सवाल अंतरात्मा के जागने का है। समय का फेर
इसी को कहा जाता है। खैर देर आयद दुरुस्त आयद के साथ
गायक के लिए शुभकामनाएं। उन्हें और काम मिले और उनकी
प्रतिभा का paryapt दोहन हो चाहे टी वी पर हो या फिल्मों में।
सच्चे संगीत प्रेमी उन्हें फिर से सुनना चाहते हैं।
जब सितारे गर्दिश में हो तो आपके प्रशंसक ही आपको बिना पहचाने
धक्का मार के निकाल जाते हैं।
अंग्रेजी का दैनिक और उसके रिपोर्टर बधाई के पात्र हैं जिनके प्रयासों
से एक कलाकार को वापस सुनहरे दौर में लौटने का मौका मिल सकता
है। पत्रकारों को ऐसी दैवीय प्रेरणा देने वाली शक्ति को नमन। आइये सुनें
अनवर की आवाज़ में एक ग़ज़ल सुनें जो फिल्म "ये इश्क नहीं आसान"
से है। इस गीत को लिखा आनंद बक्षी ने और संगीत तैयार किया है
लक्ष्मी प्यारे ने। अमिताभ बच्चन की फिल्म कालिया बनाने वाले
फिल्मकार टीनू आनंद ने इस फिल्म का निर्देशन किया है। फिल्म ने
अच्छा व्यवसाय नहीं किया मगर प्रयास सराहनीय कहा जायेगा। फिल्म
का संगीत सुनने लायक है।
गीत के बोल:
मेरे ख्यालों की रहगुज़र से
वो देखिये वो गुज़र रहे हैं
मेरी निगाहों के आसमान से
ज़मीन-ए-दिल पर उतर रहे हैं
ये कैसे मुमकिन है हमनशीनों
ये कैसे मुमकिन है हमनशीनों
के दिल को दिल की खबर ना पहुंचे
के दिल को दिल की खबर ना पहुंचे
उन्हें भी हम याद आते होंगे
के जिनको हम याद कर रहे हैं
मेरे ख्यालों की रहगुज़र से
वो देखिये वो गुज़र रहे हैं
इसी मुहब्बत की रोज़-ओ-शब् हम
इसी मुहब्बत की रोज़-ओ-शब् हम
सुनाया करते थे दास्तानें
सुनाया करते थे दास्तानें
इसी मुहबत का नाम लेते हुवे
भी हम आज डर रहे हैं
मेरे ख्यालों की रहगुज़र से
वो देखिये वो गुज़र रहे हैं
चले हैं थोड़ी ही दूर तक बस
वो साथ मेरे सलीम फिर भी
ये बात मैं कैसे मैं भूल जाऊं
के हम कभी हमसफ़र रहे हैं
मेरी निगाहों के आसमान से
ज़मीन-ए-दिल पर उतर रहे हैं
मेरे ख्यालों की रहगुज़र से
वो देखिये वो गुज़र रहे हैं
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