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Monday, 16 December 2013

सूनी रे सजरिया-नमक हराम १९७३

दो वक्त की रोटी का चक्कर बड़ा बुरा. किया क्या जाए इसके बिना काम
नहीं चलता है. बोलने की बक बक इतनी हो गयी पिछले दिनों कि इधर से
ध्यान न चाहते हुए भी हट गया. हिन्दुस्तान की सरज़मीं पर मौजूद कई
इन्टरनेट कनेक्शन इतने तेज चला करते हैं कि आज एड्रेस टाइप करो,
साईट कल खुलने की गारंटी.

पाठकों से क्षमा याचना सहित अगली प्रस्तुति हाज़िर है. सन १९७३ की फिल्म

 नमक हराम से. हृषिकेश  मुखर्जी निर्देशित इस फिल्म में दो सुपर स्टार मौजूद
हैं। हृषिकेश मुखर्जी क हिसाब से इसे अलग हट के बनी फिल्म कहा जा सकता है.
वो  हलकी फुलकी फिल्मों के लिए ज्यादा पहचाने गए हैं. ये थोड़ी गंभीर किस्म की
फिल्म है . फिल्म के बाकी गेटों के लिहाज़ से प्रस्तुत गीत भी थोडा अलग है.
पुरानी अनेक फिल्मों में आपको मुजरा ज़रूर मिलेगा मानो बिना उसके फिल्म
बनाना असंभव हो. ऐसा ही कुछ मुझे इस फिल्म को देख के महसूस हुआ.

बहरहाल जो भी हो गीत सुनिए जो एक महिला युगल गीत है आशा भोंसले और
उषा मंगेशकर का गाया हुआ. आशा कि आवाज़ पर जयश्री टी होंठ हिला रही हैं
दूसरी अभिनेत्री को मैं पहचान नहीं पा रहा हूँ.








गीत के बोल:

सूनी, सूनी रे सजरिया साजन बिन तेरे
सूनी रे सजरिया साजन बिन तेरे
सूनी रे सजरिया साजन बिन तेरे

हो भई मैं बाँवरिया हाय राम
भई मैं बाँवरिया साजन बिन तेरे

सूनी रे सजरिया साजन बिन तेरे
सूनी रे सजरिया साजन बिन तेरे


रिमझिम काहे को बरसे रे बदरा
बह गया धुल के नैनों से कजरा

रिमझिम काहे को
रिमझिम हाँ
रिमझिम काहे को बरसे रे बदरा
बह गया धुल के नैनों से कजरा

अबके बरस सावन से पूछो
छाई क्यूँ बदरिया हाय राम

छाई क्यूँ बदरिया साजन बिन तेरे

सूनी रे सजरिया साजन बिन तेरे
सूनी रे सजरिया साजन बिन ते

लोग न जाने ऐसे जीते हैं कैसे
लोग न जाने ऐसे जीते हैं कैसे
तुमसे बिछड के हम तो मर गए जैसे
लोग न जाने ऐसे
लोग न हाँ हाँ हाँ
लोग न हाँ हाँ हाँ
लोग न जाने ऐसे जीते हैं कैसे
तुमसे बिछड के हम तो मर गए जैसे
ऐसे निगोडी बिरहा की रैना 
बीते न सांवरिया हाय राम
बीते न सांवरिया साजन बिन तेरे

सूनी रे सजरिया साजन बिन तेरे
सूनी रे सजरिया साजन बिन तेरे
सूनी रे सजरिया साजन बिन तेरे

_____________________________
Sooni re sajariya-Namak Haram 1973
 

Saturday, 4 February 2012

शरबती तेरी आँखों की-ब्लैकमेल १९७३

आँखों पर मीलों मील लम्बे अफ़साने आपको मिल जायेंगे साहित्य और
फ़िल्मी गीतों में। गीतकार राजेंद्र कृष्ण ने भी आँखों पर तरह तरह के गीत
लिखे हैं। प्रस्तुत गीत जो कि फिल्म ब्लैकमेल का गीत है में आँखों को शरबती
कि उपमा प्रदान की गई है। 'शरबती' शब्द अक्सर आप दो चीज़ों का जिक्र होने
पर सुना करते होंगे-आँखें और गेंहू। शरबती गेंहू अच्छी क़िस्म का गेंहू माना
जाता है ।


गीत में नायिका की वेश भूषा देख कर शायद आपको देव आनंद की याद आ जाये।
एक बात मुझे हमेशा से चौंकती रही है-फिल्म में नायक नायिका धूल में लोट लगा
लें या मैदान में गुलाटियां खा लें उनके कपडे ज़रा भी गंदे नहीं होते?





गीत के बोल:

मैं डूब डूब जाता हूँ

शरबती तेरी आँखों की, हा
झील सी गहराई में
शरबती तेरी आँखों की
झील सी गहराई में
मैं डूब डूब जाता हूँ

फूलों को तूने रंगत दे दी
सूरज को उजाला, उजाला
सूरज को उजाला
जुल्फों से तूने पानी छटका
तारों की बन गई माला
देखो तारों की बन गई माला
होंठ हैं तेरे दो पैमाने
होंठ तेरे दो पैमाने
पैमानों की मस्ती में
डूब डूब जाता हूँ

शरबती तेरी आँखों की, हा
झील सी गहराई में
शरबती तेरी आँखों की
झील सी गहराई में
मैं डूब डूब जाता हूँ

भूले से जो तू बाग़ में जाये
पत्ता पत्ता डोले
रे डोले पत्ता पत्ता डोले
तिरछी नज़रें जिधर भी फेंके
भड़के सौ सौ शोले, रे शोले
भड़के सौ सौ शोले

गाल हैं तेरे दो अंगारे
गाल हैं तेरे दो अंगारे
अंगारों की गर्मी में
डूब डूब जाता हूँ

शरबती तेरी आँखों की, हा
झील सी गहराई में
शरबती तेरी आँखों की
झील सी गहराई में
मैं डूब डूब
मैं डूब डूब
मैं डूब डूब जाता हूँ
......................................
Sharbati teri ankhon ki-Blackmail 1973

Friday, 21 October 2011

सोना, सोना रूपा लायो रे-जोशीला १९७३

जोशीला नाम की एक फिल्म है सन १९७३ की। इसमें देव आनंद और
हेमा मालिनी प्रमुख कलाकार हैं। इस फिल्म को देख कर दर्शकों में जोश
जगा हो या ना हो, गीतों के श्रोताओं में जोश अवश्य ही जगा। फिल्म में
कुछ यादगार गीत हैं। आज आपको सुनवाते हैं आशा भोंसले का गाया थोड़ा
अलग सा गीत। वैसे आर डी बर्मन ने उनके लिए बहुतेरे अलग-हट-के गीत
बनाये हैं। फिल्म की खूबी साहिर लुधियानवी के लिखे गीत हैं। गीत भी कुछ
लीक से हट कर लिखा गया प्रतीत होता है।

वैसे ये पोस्ट भी अलग हट के ही है। इसे मैंने बिलकुल अलग हट के स्थान पर
लिखा था। रेलवे स्टेशन के प्लेटफोर्म पर लगी बेंच पर बैठ के। एक परिवार
के साथ दो छोटे छौने(बच्चे) चले जा रहे थे जिसमें से एक के जूतों से चूं चूं की
आवाज़ आ रही थी , उसे सुन के मुझे इस गीत का शुरूआती संगीत याद आया।
बच्चों के जूतों में चूं चूं की आवाज़ करने वाली आईटम का इस्तेमाल काफी पुराना
हो चुका है मगर सुनने में अच्छा लगता है। अगर किसी डोकरे के जूते में वही फिट
कर दिए जाएँ तो पब्लिक कहेगी-अरे मूंह से तो चूं चूं कम थी जो पैरों से भी करने
लगा बुड़ऊ?

गीत फिल्माया गया है नायिका हेमा मालिनी और अन्य बॉलीवुड में रोजी-रोटी
के लिए रोजाना जद्दो-जहद करने वाले अन्य अनजान से महत्वाकांक्षी सहयोगी
कलाकारों पर।

दर्शक दीर्घा में जो दो अन्य कलाकार हैं उनके नाम इस प्रकार से हैं-सुधीर और बिंदु।
गीत के बीच में दो अन्य महिला कलाकार दिखते हैं वे हैं- सुलोचना और पद्मा खन्ना।
गीत में आगे आपको इफ्तेखार भी पुलिस ऑफिसर की भूमिका में नज़र आयेंगे।

गीत कुछ हाई-फ्रीक्वेंसी ख्यालों से बंधा हुआ है। फिर भी आपको बतलाये देते हैं कि
फिल्म की सिचुएशन के मुताबिक ये नायिका द्वारा नायक की भाव भंगिमाओं और
कृत्यों के ऊपर कटाक्ष सा है। नायिका को ये लगता है कि नायक धन के लोभ में
कुछ आड़ी टेडी हरकतें कर रहा है।




गीत के बोल:


रु रु, रु, रु रु

ओ, सोना, सोना रूपा, सोना रूपा
सोना रूपा लायो रे
सोना रे, सोना
सोना रूपा, सोना रूपा लायो रे
ये सोना, ले जा रे
ये रूपा, ले जा रे
मुझे तो, दिल दे जा
मुझे तो, दिल दे जा

आ, सोना मिले तो लोग आजकल दिल को कभी ना लें
प्रीत के मुंह पर कालिख मल दें, प्यार को ठोकर दें
ओ सखी री, अब है ज़माना दूसरा
आ आ आ आ आ आ आ
सोना, सोना रे
सोना रूपा, सोना रूपा लायो रे
ये सोना, ले जा रे
ये रूपा, ले जा रे
मुझे तो, दिल दे जा
मुझे तो, दिल दे जा

आ, सोना मिले तो लोग आजकल दिल को कभी ना लें
प्रीत के मुंह पर कालिख मल दें प्यार को ठोकर दें
ओ सखी री, अब है ज़माना दूसरा
आ आ आ आ आ आ आ आ
सोना, सोना रे
सोना रूपा, सोना रूपा लायो रे

जादू भरे इशारे सब झूठे हैं
मतलब भरे सहारे सब छूटे हैं
या बा
वादे कभी ना सुनना पछताएगी
सपने कभी ना बुनना लुट जायेगी
ओ ओ ओ सखी री, अब है ज़माना दूसरा
आ आ आ
सोना, सोना रे
सोना रूपा, सोना रूपा लायो रे
ये सोना, ले जा रे
ये रूपा, ले जा रे
मुझे तो दिल दे जा
मुझे तो दिल दे जा
ला ला ला ला ला ला ला ला
सोना, सोना रे

पलकों तले ठिकाना कोई मांगे ना
दिल का भरा खजाना कोई मांगे ना
या बा
अपना इन्हें ना बना संसारी हैं
सदमे पड़ेंगे कहना व्यापारी हैं
ओ सखी री अब है ज़माना दूसरा
आ आ आ
सोना, सोना रे
सोना रूपा, सोना रूपा लायो रे
ये सोना, ले जा रे
ये रूपा, ले जा रे
मुझे तो दिल दे जा
मुझे तो दिल दे जा

आ, सोना मिले तो लोग आजकल दिल को कभी ना लें
प्रीत के मुंह पर कालिख मल दें प्यार को ठोकर दें
ओ ओ ओ सखी री अब है ज़माना दूसरा
आ आ आ आ आ आ आ
सोना, सोना रे
सोना रूपा, सोना रूपा लायो रे
सोना, सोना रे
........................
Sona Rupa Layo Re-Joshila 1973

Tuesday, 2 August 2011

चंपा चमेली-गाय और गोरी १९७३

फिल्म गाय और गोरी से एक गीत और सुनवाते हैं आपको। ये फिल्माया
गया है जया भादुड़ी और साथी कलाकारों पर। गीत लता मंगेशकर की आवाज़
में है और ऊंचे सुर से शुरू होता है। नटखटिया अंदाज़ वाला ये गीत एक
बैलगाडी में बैठ के गाया जा रहा है । गीत में रामू और श्यामू नामक दो
बैल भी अभिनय कर रहे हैं।




गीत के बोल:

चंपा चमेली काहे सहेली
हम निकली अकेली
रुत ऐसी जैसे कोई पहेली
पांव में पायल होंठों पे राग
भाग भाग भाग
भाग भाग भाग भाग
भाग मेरे रामू
जाग मेरे श्यामू
भाग मेरे रामू जाग मेरे श्यामू
चल जल्दी से चल
लंबी डगर छोटी उमर
अनमोल हर एक पल
चल चल चल चल
भाग मेरे रामू जाग मेरे श्यामू
चल जल्दी से चल
लंबी डगर छोटी उमर
अनमोल हर एक पल
चल चल चल चल
भाग मेरे रामू जाग मेरे श्यामू

ऐसे न चल हौले हौले
लंबा सफर गिन डोले , डोले
ऐसे न चल हौले हौले
लंबा सफर गिन डोले
घूंघट न खोले गोरी शर्माए हाय
रस्ते में किसी से नज़र न लड़ जाए
हो अम्बर पे बादल धरती पे आग
भाग भाग भाग भाग
भाग मेरे रामू
जाग मेरे श्यामू
चल जल्दी से चल
लंबी डगर छोटी उमर
अनमोल हर एक पल
चल चल चल
भाग मेरे रामू जाग मेरे श्यामू

पीछे शहर गांव आगे
दैया री दैया डर लागे, लागे
पीछे शहर गांव आगे
दैया री दैया डर लागे
रूप के चोरों की है ये नगरिया
मेले से मैं लायी मलमल की चुनरिया
हो, मुखड़े पे झूमे जुल्फों के नाग
भाग भाग भाग भाग
भाग मेरे रामू
जाग मेरे श्यामू
चल जल्दी से चल
लंबी डगर छोटी उमर
अनमोल हर एक पल
चल चल चल
भाग मेरे रामू जाग मेरे श्यामू
.............................
Champa chameli-Gaai aur gori 1973

गोरी ओ गोरी प्रेम कर ले-गाय और गोरी १९७३

आइये एक गीत सुनें फिल्म गाय और गोरी से। गीत किशोर कुमार की
आवाज़ में है, गीत आनंद बक्षी का है और संगीत लक्ष्मीकांत प्यारेलाल
का। शत्रुघ्न सिन्हा और 'पता नहीं कौन कौन' पर गीत फिल्माया गया है।

गीत में क्या हो रहा है, क्यूँ हो रहा है देख के पता लगाइए।




गीत के बोल:


गोरी ओ गोरी प्रेम कर ले
ऐसा प्रेमी फिर ना मिलेगा
गोरी ओ गोरी प्रेम कर ले
ऐसा प्रेमी फिर ना मिलेगा
आ तेरे बालों में ये फूल लगा दूँ
के ऐसा फूल फिर ना खिलेगा

गोरी ओ गोरी

जब तेरे दिल से, हाँ
जब तेरे दिल से, हो
जब तेरे दिल से मेरा दिल टकराएगा
जब तेरे दिल से मेरा दिल टकराएगा
तेरी क़सम बस मज़ा आ जाएगा
डोलेगी धरती
डोलेगी धरती और अम्बर हिलेगा


गोरी ओ गोरी
फिर न कहना आवाज़ न दी
प्रेम कर ले
ऐसा प्रेमी फिर ना मिलेगा
गोरी ओ गोरी

बातें करेंगे मुलाक़ाते करेंगे हाँ
बातें करेंगे हाँ
बातें करेंगे हम चुपके-चुपके
बातें करेंगे हम चुपके-चुपके
चोरी-चोरी मिलेंगे दुनिया से छुप के
किसी को भी
किसी को भी कुछ पता ना चलेगा
ऐसा प्रेमी फिर ना मिलेगा

गोरी ओ गोरी
फिर न कहना आवाज़ न दी
प्रेम कर ले
ऐसा प्रेमी फिर ना मिलेगा
आ तेरे बालों में ये फूल लगा दूँ
के ऐसा फूल फिर ना खिलेगा
गोरी ओ गोरी प्रेम कर ले
ऐसा प्रेमी फिर ना मिलेगा
गोरी ओ गोरी
................................
Gori o gori-Gaai aur gori 1973

Sunday, 17 July 2011

किसका रस्ता देखे-जोशीला १९७३

जेल की सलाखों के पीछे बंद नौजवान एक दिमाग का दही बनाने
वाला गीत कैसे गा सकता है. सोचने वाली बात है.

पढ़ा लिखा नौकरीपेशा नायक हालातों के चलते सलाखों के पीछे पहुँच
जाता है. वहाँ वो इस उम्मीद में गीत गा रहा है मानो नक्कारखाने
में तूती की आवाज़ सुनने वाला कोई आ जायेगा. और, आ भी जाता
है, सुन्दर नायिका जिसके आने के बाद उसकी जिंदगी में फिर से बहार
लौटने वाली है. अपनी यादों में लुडकते लड़खड़ाते वो आखिर मंजिल की
सीढ़ियों पर फिर से पहुँच जाता है. दो नायिकाएं दिखाई देती हैं गीत
में-राखी और हेमा मालिनी. जेलर की भूमिका में हैं मनमोहन कृष्ण.

बोल साहिर के हैं और धुन राहुल देव बर्मन की. गायक को आप पहचान
ही गए होंगे. गीत की पञ्च लाइन है-कोई नहीं जो यूँ ही जहाँ में, बाँटे
पीर पराई.



गीत के बोल:

किसका रस्ता देखे ऐ दिल ऐ सौदाई

किसका रस्ता देखे ऐ दिल ऐ सौदाई
मीलों है ख़ामोशी, बरसों है तन्हाई
भूली दुनिया कभी की, तुझे भी मुझे भी
फिर क्यों आँख भर आई

हो, किसका रस्ता देखे ऐ दिल ऐ सौदाई

कोई भी साया नहीं राहों में
कोई भी आएगा ना बाहों में
तेरे लिए मेरे लिए, कोई नहीं रोनेवाला ओ
झूठा भी नाता नहीं चाहों में
हाय, तू ही क्यों डूबा रहे आहों में
कोई किसी संग मरे, ऐसा नहीं होने वाला
कोई नहीं जो यूँ ही जहाँ में, बाँटे पीर पराई

हो, किसका रस्ता देखे ऐ दिल ऐ सौदाई

तुझे क्या बीती हुई रातों से
मुझे क्या खोई हुई बातों से
सेज नहीं चिता सही, जो भी मिले सोना होगा
गई जो डोरी छूटी हाथों से
हो, लेना क्या टूटे हुए साथों से
खुशी जहाँ माँगी तूने, वहीं मुझे रोना होगा
ना कोई तेरा ना कोई मेरा, फिर किसकी याद आई

हो, किसका रस्ता देखे ऐ दिल ऐ सौदाई
मीलों है ख़ामोशी, बरसों है तन्हाई
भूली दुनिया कभी की, तुझे भी मुझे भी
फिर क्यों आँख भर आई

किसका रस्ता देखे ऐ दिल ऐ सौदाई
............................................
Kiska rasta dekhe-Joshila 1973

Thursday, 14 July 2011

काम लेते नहीं बन्दूक से-कच्चे धागे १९७३

फिल्म कच्चे धागे का एक अलोकप्रिय लेकिन कर्णप्रिय सीमाओं के
भीतर बना हुआ गीत सुनवा रहे हैं आज. इसमें आप विनोद खन्ना को
देखेंगे मधुबाला के जैसी दिखने वाली नायिका सोना के साथ जो परदे
पर नाचती हुई गीत गा रही हैं.

डाकुओं पर बनी फिल्म में मुजरा या वैसा कोई गीत अवश्य ही
मिलता है. आजकल इसका नाम आईटम सोंग हो गया है जैसा कि
आपने देखा फिल्म चाइना गीत में-छम्मा छम्मा . फर्क इतना
आया है कि पहले ये गाने कम प्रसिद्द तारिकाओं को दिए जाते थे
अब नामी गिरामी नायिकाओं को.




गीत के बोल :


आ आ आ आ आ आ आ आ
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
हा आ आ आ आ आ आ आ

जा रे जा ओ दीवाने तू क्या जाने
अनजाने
बात करते हैं,
रे बात करते हैं जब माशूक से
काम लेते नहीं बन्दूक से
बात करते हैं जब माशूक से
काम लेते नहीं बन्दूक से

जा रे जा ओ दीवाने तू क्या जाने
अनजाने
बात करते हैं,
रे बात करते हैं जब माशूक से
काम लेते नहीं बन्दूक से
बात करते हैं जब माशूक से
काम लेते नहीं बन्दूक से

गोरी गोरी मोरी कलाई न मरोड़ो रे
रंगी बेरंगी मेरी चूड़ियाँ न तोड़ो रे
गोरी गोरी ओ हो हो,
कलाई मोरी ओ हो हो,
गोरी गोरी मोरी कलाई न मरोड़ो रे
रंगी बेरंगी मेरी चूड़ियाँ न तोड़ो रे
ओ हो हो,
कर मुझ से मोहब्बत लडाई न कर
चोट लग जाए
रे चोट लग जाए न भूल चूक से
काम लेते नहीं बन्दूक से

बात करते हैं जब माशूक से
काम लेते नहीं बन्दूक से

आशिक की हलकी सी एक मुस्कान से
माशूक मारे जाते हैं जान से
आशिक की हलकी सी एक मुस्कान से
माशूक मारे जाते हैं जान से
हो हो हो
कोई जी में बसा हो तो फिर जी में
हूक उठती है
रे हूक उठती है कोयल की कूक से
काम लेते नहीं बन्दूक से

बात करते हैं जब माशूक से
काम लेते नहीं बन्दूक से

आ आ आ आ आ आ आ आ

आँखों आँखों में मज़ा लेते हैं प्यार का
सर को झुका के दिल मांगते हैं यार का
आँखों आँखों में मज़ा लेते हैं प्यार का
सर को झुका के दिल मांगते हैं यार का
हो हो हो
जिद न कर सितमगर तू है बेखबर
टूट जाते हैं
रे टूट जाते हैं दिल इस सलूक से
काम लेते नहीं बन्दूक से

बात करते हैं जब माशूक से
काम लेते नहीं बन्दूक से
..........................
Kaam lete nahin bandook se-Kachche Dhaage 1973

Wednesday, 13 July 2011

मेरी पायलिया गीत तेरे गाये-जुगनू १९७३

एक किलो के करीब गहने पहन कर नाचना आसान नहीं होता.
गीत प्रस्तुत है फिल्म जुगनू से. लता मंगेशकर का गाया और
हेमा मालिनी पर फिल्माया गया ये गीत मुझे तब से पसंद है
जबसे इसे फिल्म रिलीज़ के बाद पहली बार सुना था . हेमा
मालिनी फिल्म के अनुसार एक स्टेज शो में नाच रही हैं. उनका
नृत्य आनंदित करने वाला है और सिनेमा हॉल के अनुभव के
आधार पर मैंने पाया कि हर वर्ग का दर्शक इसको ध्यान से देख
कर खुश हो रहा था.

इस गीत पर गांव की नौटंकी में भी एक डांस देखा था जो कि डांस
मच्छर के भिनभिनाने जैसा था.

इस गीत की 'टुर्र रर्र रा टिपर टिपर' वाली ध्वनि आकर्षित करती
रही सदा. ये गीत इस बात का सबूत है कि सचिन देव बर्मन का
संगीत जैसे जैसे उनकी उम्र बढती गयी, जवान होता गया. सन
१९७३ में लता के गाये और संगीतकारों के गीतों से तुलना इस गीत
से कर के देख लीजिए, खुद आपको अंदाज़ा हो जायेगा कि उनके
संगीत में समय के साथ बदलाव होते चले हैं और उन्होंने दूसरों से
बेहतर धुनें बनाने का प्रयास किया है. एक बात तो ज़रूर है, आप
इस गीत की सन ५० के गीतों से तुलना नहीं कर सकते. सचिन देव
बर्मन के ज्ञानी भक्त फिल्म जुगनू के गीत को ख़ारिज कर देते हैं
क्यूंकि वे इसकी "फैली हुई सपनों की बाहें-घर नंबर ४४" तुलना करने
लग जाते हैं.



गीत के बोल:

मेरी पायलिया गीत तेरे गाये, हाय
मेरी पायलिया गीत तेरे गाये
चलूँ थम थम के, घुँघरू छनक जाये
मेरी पायलिया गीत तेरे गाये
चलूँ थम थम के, घुँघरू छनक जाये

मेरी पायलिया गीत तेरे गाये

तन डोले रे धितंग तितंग
मन बोले रे धितंग तितंग

अम्बुआ की डाली पे जब कोयल बोले
हौले हौले बिरहन का मन पापी डोले
किसे नींद आये किसे चैन आये
पिया याद आये जिया धड़क जाए

मेरी पायलिया गीत तेरे गाये
चलूँ थम थम के घुँघरू छनक जाये
मेरी पायलिया गीत तेरे गाये

घर बैठी शरमाऊँ गली में न आऊँ
लट बिखरे मन भटके कहीं खो ना जाऊँ
घर बैठी शरमाऊँ गली में न आऊँ
लट बिखरे मन भटके कहीं खो ना जाऊँ
डगर में हाय, नज़र मिल जाये
कमर बलखाये, चुनर सरक जाये

मेरी पायलिया गीत तेरे गाये
चलूँ थम थम के घुँघरू छनक जाये
मेरी पायलिया गीत तेरे गाये

पी मेरे, बिन तेरे, जिया नाहिं लागे
सारी रैना मेरे नैना रहें जागे जागे
पी मेरे, बिन तेरे, जिया नाहिं लागे
सारी रैना मेरे नैना रहें जागे जागे
अगन सी बन में, लगे सावन में
मेरे आँगन में, बिजली चमक जाये

मेरी पायलिया गीत तेरे गाये
चलूँ थम थम के घुँघरू छनक जाये
मेरी पायलिया गीत तेरे गाये
.....................................
Meri payaliya geet tere gaaye-Jugnu 1973

Monday, 11 July 2011

मेरे बचपन तू जा जा-कच्चे धागे १९७३

जनता बुढापे में जवानी के लौटने की ख्वाहिश रखती है, मगर इस गीत में
उलटा है. बचपन में जवानी के आने की इच्छा जाहिर की जा रही है. गीत
कन्याओं की भावनाओं को व्यक्त करने वाला है जिसमें ये खूबसूरत ख़याल भी
लाया गया है-किसी के साथ भाग जाऊं ?

गन्ने के खेत में ये गाना फिल्माया गया है. गन्ना है या मक्का, ध्यान से देख
कर मुझे भी बतलाइए . हिंदी फिल्मों में तरह तरह के खेतों में गीत फिल्माए
गए हैं. आगे आपको चने के खेत वाला गीत भी सुनवा देंगे जनाब.

आनंद बक्षी ने इस गीत को लिखा है और लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की बनाई धुन पर
इसे गाया है लता मंगेशकर ने मौसमी चटर्जी के लिए .




गीत के बोल:

मेरे बचपन तू जा जा जवानी को ले आ
मेरे बचपन तू जा जा जवानी को ले आ
जा वे जा तैंनू रब दा वास्ता
जा वे जा तैंनू रब दा वास्ता
मेरे बचपन तू जा जा जवानी को ले आ
जा वे जा तैंनू रब दा वास्ता
जा वे जा तैंनू रब दा वास्ता

आ आ आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ आ आ आ
बेरियाँ नू बेर लग गये वे तौबा
फूलों से झुक गईं डालियाँ
बेरियाँ नू बेर लग गये वे तौबा
फूलों से झुक गईं डालियाँ
जाने मेरे कानों में कब
पहनायेगी माँ बालियाँ
छाई काली घटा आई ठण्डी हवा
जा वे जा तैंनू रब दा वास्ता
जा वे जा तैंनू रब दा वास्ता

लम्बी काली रातों में ऐसा
ना हो कभी मैं जाग जाऊँ
लम्बी काली रातों में ऐसा
ना हो कभी मैं जाग जाऊँ
किसी परदेसी के संग
चुपके से मैं भाग जाऊँ
बैरी जळी से जा इब देर ना लगा
जा वे जा तैंनू रब दा वास्ता
जा वे जा तैंनू रब दा वास्ता

चोरी चोरी पनघट पे बातें
करती हैं बैरन सहेलियां , हो
चोरी चोरी पनघट पे बातें
करती हैं बैरन सहेलियां
जाने कब मेरा प्रीतम
बूझेगा मेरी प्रेम पहेलियाँ
उई माँ ये क्या हुआ
जैसे काँटा चुभ गया

जा वे जा तैंनू रब दा वास्ता
जा वे जा तैंनू रब दा वास्ता
जा वे जा तैंनू रब दा वास्ता
...........................
Mere bachpan too ja-Kachche Dhaage 1973

Friday, 1 July 2011

दो घूँट मुझे भी पिला दे-झील के उस पार १९७३

कहते हैं जो दिखता है वो बिकता है। दुकानदारी में ये
सिद्धांत बहुत काम का है। ब्लॉग जगत में भी यही बात
लागू होती है। मेरे ब्लॉग पर भी लागू होती है। मुझे अभी
तक विलायती या अप्रवासी हिंदी प्रेमी भारतीयों में से केवल
२-३ बंधु ही ऐसे मिले जो ब्लॉग पर नियमित रूप से नज़र
डाला करते हैं। इस ब्लॉग को बेहतर बनाने के सुझाव और
टिप्पणियों की ज़रुरत महसूस होती है कभी कभी। स्वतः
प्रेरणा से एक सीमा तक ही कुछ किया जा सकता है।

आइये आपको आज एक फरमाइशी गीत सुनवाते हैं। ये गीत है
फिल्म झील के उस पार से। गीत फिल्माया गया है मुमताज़ पर।
मुमताज़ के साथ जो कलाकार हैं परदे पर, उनका नाम अनवर
हुसैन है जो अभिनेत्री नर्गिस के भाई हैं।

इस गीत को आप शराबी गीतों की श्रेणी में रख लीजिये।






दो घूँट मुझे भी पिला दे शराबी,
देख फिर होता है क्या

हो, दो घूँट मुझे भी पिला दे शराबी,
देख फिर होता है क्या
बालमा रे, ज़ालिमा,
अरे अरे अरे अरे,
आग पानी मैं लगा दे ज़रा सी,
देख फिर होता है क्या

हो, दो घूँट मुझे भी पिला दे शराबी,
देख फिर होता है क्या


गाऊंगी रे, नाचूंगी रे
तेरे लिए आज से मैं
आये शरम, लेकिन बलम ,
मर जाऊंगी लाज से मैं
गाऊंगी रे, नाचूंगी रे
तेरे लिए आज से मैं
आये शरम, लेकिन बलम,
मर जाऊंगी लाज से मैं
बालमा रे, ज़ालिमा,
अरे अरे अरे अरे,
लाज का ये घूंघट उठा दे शराबी,
देख फिर होता है क्या

हो, दो घूँट मुझे भी पिला दे शराबी,
देख फिर होता है क्या

किस काम का ये जाम है
इसमें मज़ा वोह नहीं है
भर के भी यह ख़ाली सा है
इसमें नशा वो नहीं है
किस काम का ये जाम है
इसमें मज़ा वो नहीं है
भर के भी यह ख़ाली सा है
इसमें नशा वो नहीं है
साक़िया रे, साक़िया,
अरे अरे अरे अरे,
प्यार थोड़ा इस में मिला दे शराबी,
देख फिर होता है क्या

हो, दो घूँट मुझे भी पिला दे शराबी,
देख फिर होता है क्या

इस पे लिखा, इस में लिखा
आये मज़ा आज ऐसे,
तडपे जिया ऐसे मेरा
बुलबुल कोई कैद जैसे
इस पे लिखा, इस में लिखा
आये मज़ा आज ऐसे,
तड़पे जिया ऐसे मेरा
बुलबुल कोई कैद जैसे
थोड़ी या पे रंज़िया,
अरे अरे अरे अरे, एक बार,
एक बार, पहरा हटा दे शराबी,
देख फिर होता है क्या

दो घूँट मुझे भी पिला दे शराबी,
देख फिर होता है क्या
..............................
Do ghoot mujhe bhi pila de-Jheel ke us paar 1973

Saturday, 11 June 2011

मिले मिले दो बदन-ब्लैकमेल १९७३

गणित के हिसाब से देखा जाये तो जिस गाने को दो लोग
गायें वो-दोगाना, जिसे तीन लोग गायें वो तीनगाना और
जिसे चार गायक गायें वो चारगाना। पिछले गीत से एक
और गीत ध्यान में आया है, लगे हाथ वो भी सुन/देख
लीजिये।

आपको केवल दोगाना ही सुनवा रहे हैं। ये भी ऐसे याद आया
कि जिस गीत में गायक-गायिका गीत की पंक्तियाँ एक साथ
गाते हैं वो पूर्ण दोगाना लगता है। ऐसा एक और गीत है जिसमें
गायक-गायिका ने बहुत सी पंक्तियाँ साथ साथ गई हैं। धक् चिक
धक् चिक वाली ताल के साथ ये गीत आगे बढ़ता है और कब
ख़त्म हो जाता है मालूम नहीं पढता। ये मधुर गीत है फिल्म
ब्लैकमेल से। इसके संगीत के अटपटे होने की वजह आप केवल
इसका विडियो देख कर ही जान पाएंगे। एक बात बताएं-इसको
देखकर हिंदी की कोई कहावत याद आती है आपको ?




गीत के बोल:


मिले मिले दो बदन खिले खिले दो चमन
ये ज़िन्दगी कम ही सही कोई ग़म नहीं
मिले मिले दो बदन खिले खिले दो चमन
ये ज़िन्दगी कम ही सही कोई ग़म नहीं

देर से आई आई तो बहार
अंगारों पे सोकर जागा प्यार
तूफ़ानों में फूल खिलाए
तूफ़ानों में फूल खिलाए कैसा ये मिलन

मिले मिले दो बदन खिले खिले दो चमन
ये ज़िन्दगी कम ही सही कोई ग़म नहीं

होंठ वही हैं है वही मुस्कान
अब तक क्यों कर दबे रहे अरमान
बीते दिनों को भूल ही जाएँ
बीते दिनों को भूल ही जाएँ अब हम-तुम सजन

मिले मिले दो बदन खिले खिले दो चमन
ये ज़िन्दगी कम ही सही कोई ग़म नहीं
..................................
Mile mile do badan-Blackmail 1973

Sunday, 15 May 2011

मुस्कुराती हुई एक हुस्न की तस्वीर-दामन और आग १९७३

कुछ शब्दों का साथ ऐसा लगता है-made for each other,
जैसे 'साबुन और झाग'। शब्दों के ऐसे युग्मों का प्रयोग फिल्म
के नाम ईजाद करने में अक्सर किया जाता है।

आइये आपको बिना समय गंवाए एक गीत सुनाया जाये।
इस मधुर युगल गीत को गाया है रफ़ी के साथ आशा भोंसले ने।
शंकर जयकिशन के संगीत के बावजूद इस फिल्म ने कोई
करिश्मा नहीं किया जिससे इसके निर्माता निर्देशक की लागत
और मेहनत वसूल हो। गीत में जो कलाकार दिखलाई पढ़ रहे हैं
उनके नाम इस प्रकार से हैं, नायक:संजय खान, नायिका:सायरा बानो।



गीत के बोल:

मुस्कुराती हुई एक हुस्न की तस्वीर हो तुम
मुस्कुराती हुई एक हुस्न की तस्वीर हो तुम
कल जो देखा था उसी ख्वाब की ताबीर हो तुम

ऐसा लगता है मेरे प्यार की तकदीर हो तुम
ऐसा लगता है मेरे प्यार की तकदीर हो तुम
कल जो देखा था उसी ख्वाब की ताबीर हो तुम

मुस्कुराती हुई एक हुस्न की तस्वीर हो तुम

मेरा सपना हुआ पूरा जो मुलाक़ात हुयी
प्यार से प्यार मिला प्यार की कुछ बात हुयी
मेरा सपना हुआ पूरा जो मुलाक़ात हुयी
प्यार से प्यार मिला प्यार की कुछ बात हुयी
जिसको पाया है दुआ ने वोही तासीर हो तुम
जिसको पाया है दुआ ने वोही तासीर हो तुम

कल जो देखा था उसी ख्वाब की ताबीर हो तुम
ऐसा लगता है मेरे प्यार की तकदीर हो तुम

मेरे साथी मुझे जीने का सहारा तो मिला
मेरी भटकी हुयी नैया को किनारा तो मिला
मेरे साथी मुझे जीने का सहारा तो मिला
मेरी भटकी हुयी नैया को किनारा तो मिला
जो मेरे हाथ पे लिखी है वो तहरीर हो तुम
जो मेरे हाथ पे लिखी है वो तहरीर हो तुम

कल जो देखा था उसी ख्वाब की ताबीर हो तुम

मुस्कुराती हुई एक हुस्न की तस्वीर हो तुम
................................................................
Muskurati huyi ek husn ki-Daman aur aag 1973

Thursday, 28 April 2011

थोडा सा एतबार कीजिये-चौकीदार १९७३

इस गीत को मैंने फिल्म की रिलीज़ के आस पास पहली बार
ध्यान से सुना था। इसके ध्वनि संयोजन ने मुझे आकृष्ट किया
था। उसके बाद १-२ बार और सुनाई दिया ये, फिर ऐसा लगा
जैसे इसको रेडियो वाले सुनना भूल गए हैं। ऐसा ही होता है
जब फिल्म फ्लॉप हो जाया करती है। लता मंगेशकर की आवाज़
के प्रयोग से कई मधुर गीत देने वाले संगीतकार मदन मोहन ने
आशा के लिए एक अच्छी धुन बनाई ज़रूर मगर वो समय के
प्रवाह के साथ गुम हो गई। इस गीत की छाप आपको संगीतकार
सोनिक ओमी के संगीत में आशा के गाये गीतों में मिलेगी।
विडियो देख कर आपको ज़रूर लगेगा कि ये गीत शायद किसी मुजरे
के लिए बनाया गया था और फिल्म दिया गया सहनायिका के एकल
नृत्य पर। नाचने वाली नायिका जयश्री टी हालाँकि एक आला दर्जे की
नर्तकी हैं मगर इस गीत के बोलों के साथ उनके नृत्य का मेल कुछ
तेल और पानी के असंभव से collodial suspension जैसा लगता है।
दूसरे "दिल भी पहलु से जुदा हो जाये" पंक्तियों के दौरान कौनसा दिल
व कौनसे पहलू से जुदा होने की बात की जा रही है समझ नहीं आई।

एक बात तो तय है जी, होटल के लाल कारपेट की अच्छी तरह से
सफाई हो गई होगी।



गीत के बोल:

थोडा सा ऐतबार कीजिये
हाँ आ आ आ आ थोड़ा सा ऐतबार कीजिये
फिर ज़रा सा इंतजार कीजिये
फिर ज़रा सा इंतजार कीजिये

थोडा सा ऐतबार कीजिये
हाँ आ आ आ आ थोड़ा सा ऐतबार कीजिये
प्यार की आरजू है
प्यार की जुस्तजू है
प्यार की आरजू है
प्यार की जुस्तजू है
तो पहले अपने दिल को बेकरार कीजिये
अपने दिल को बेकरार कीजिये

हाँ आ आ आ आ थोड़ा सा ऐतबार कीजिये

जाने कब इश्क में क्या हो जाये
बन्दा बन्दे का खुदा हो जाये
आप भी यार के
आप भी यार के दर पे रह जाएँ
दिल भी पहलू से जुदा हो जाये
दिल भी पहलू से जुदा हो जाये
जो सच हो तो
जो सच हो तो फिर प्यार कीजिये
फिर ज़रा सा इंतजार कीजिये
फिर ज़रा सा इंतजार कीजिये

थोडा सा ऐतबार कीजिये
हाँ आ आ आ आ थोड़ा सा ऐतबार कीजिये

दिल पे काबू ना हो तो
गैर के घर जाओ सनम
हो ओ ओ सनम जाओ जाओ सनम
दिल पे काबू ना हो तो
गैर के घर जाओ सनम

एक ही रात के वादे पे ना बहलाओ सनम
आँखें छू लो, आ आ आ आ
आँखें छू लो मगर हाथ से ना छूना बदन
खुद तडपाओ हमको भी तडपाओ सनम
हमको भी बेकरार कीजिये
हमको भी हमको भी
हमको भी बेकरार कीजिये
फिर ज़रा सा इंतजार कीजिये
फिर ज़रा सा इंतजार कीजिये

थोडा सा ऐतबार कीजिये
हाँ आ आ आ आ थोड़ा सा ऐतबार कीजिये

Friday, 21 January 2011

अब तो है तुमसे हर ख़ुशी-अभिमान १९७३

फिल्म अभिमान के पिछले गीत में हमने पुरुष स्वाभिमान को
लगने वाली ठेस का जिक्र किया था। किस प्रकार नारी के अधिक
प्रतिभावान होने को पुरुष हजम नहीं कर पाता है। इस गीत में आप
पाएंगे की नायिका एक के बाद एक बुलंदी की सीढ़ियों को चढ़ती जा
रही है और नायक इन सब के बीच कहीं आपने आप को खोने लगा
है। कुंठित कलाकार का चरित्र अभिनय अमिताभ ने बढ़िया निभाया
है।

एक बात फिर भी तय है कि फिल्म में जया ने अमिताभ से ज्यादा
अच्छा अभिनय किया है।



गीत के बोल:


अब तो है तुम से, हर ख़ुशी अपनी
अब तो है तुम से, हर ख़ुशी अपनी
तुम पे मरना है, ज़िन्दगी अपनी, हो हो
अब तो है तुम से, हर ख़ुशी अपनी

जब हो गया तुम पे, ये दिल दीवाना
जब हो गया तुम से, ये दिल दीवाना
फिर चाहे जो भी कहे, हमको ज़माना
कोई बनाये बातें, चाहे अब जितनी, हो हो


अब तो है तुम से, हर ख़ुशी अपनी

तेरे प्यार में बदनाम दूर दूर हो गए
तेरे प्यार में बदनाम दूर दूर हो गए
तेरे साथ हम भी सनम मशहूर हो गए
देखो कहाँ ले जाये, बेखुदी अपनी, हो हो

अब तो है तुम से, हर ख़ुशी अपनी
तुम पे मरना है, ज़िन्दगी अपनी, हो हो
अब तो है तुम से, हर ख़ुशी अपनी

Thursday, 23 December 2010

कसमें हम अपनी जान की-मेरे गरीब नवाज़ १९७३

अनवर की आवाज़ में एक गीत और सुनते हैं । कुछ पोस्ट पहले आपको
एक गीत सुनवाया था उनका। ये गीत पदार्पण गीत है अनवर का हिंदी
फिल्म जगत में जो लिया गया है फिल्म मेरे गरीब नवाज़ से। इसकी
धुन कमल राजस्थानी की है जिन्हें हम उनके कई मधुर गैर फ़िल्मी गीतों
के लिए पहचानते हैं। परदे पर किस कलाकार ने अभिनय किया है गीत पर
इसकी मुझे कतई जानकारी नहीं है। उम्मीद है आप में से किसी को अवश्य
ही उस कलाकार का नाम मालूम होगा। गीत महबूब सरवर का लिखा हुआ है।





गीत के बोल :

कसमें हम अपनी जान की खाए चले गए
फिर भी वो ऐतबार न लाए चले गए

कह कर गए थे वोह कि न आएंगे अब कभी
कह कर गए थे वोह कि न आएंगे अब कभी
लेकिन खयाल बन के वो आये चले गए
फिर भी वो ऐतबार न लाए चले गए

कसमें हम अपनी जान की

रुस्वाइओं के डर से न दामन भिगो सके
रुस्वाइओं के डर से न दामन भीगो सके
पलकों में आंसुओं को छुपाये चले गए
फिर भी वो ऐतबार न लाए चले गए

कसमें हम अपनी जान की

अनवर सुजूद-ए-शौक़ की मत पूछ इंतहा
अनवर सुजूद-ए-शौक़ की मत पूछ इंतहा
हर हर क़दम पे सर को झुकाये चले गए
फिर भी वो ऐतबार न लाए चले गए

कसमें हम अपनी जान की खाए चले गए

Thursday, 9 December 2010

हर हसीं चीज़ का मैं तलबगार-सौदागर १९७४

संगीतकार रवीन्द्र जैन के हिंदी फिल्म संगीत क्षेत्र में
पदार्पण वाली फिल्म सौदागर(१९७३) से एक गीत और
सुनिए।

अभी हमने कुछ पोस्ट पहले पत्ते वाली चड्डी का जिक्र
किया था। हिंदी फिल्मों का हीरो भी पहना करता है
इसको। अमिताभ को पहले आप पट्टे वाली चड्डी
पहने देखेंगे फिर लुंगी पहने। निर्देशक ने छोटी छोटी
बातों का भी ध्यान रखा है। इतना ज्यादा रखा है कि
बच्चे के पास पहुँचते पहुँचते चड्डी की डिज़ाइन ही
बदल गई।

गुड बनाने का सामान इकठ्ठा किया जा रहा है
कह्जूर का पेड़ से। रस को इकठ्ठा करके पकाया
जायेगा। अब गुड बनाने वाला कोई ऐसा वैसा तो
है नहीं, हिंदी फिल्मों का महानायक है सो वो थक
हारने के बावजूद एक गाना गायेगा और वो भी
किशोर कुमार की आवाज़ में। संगीत देने के अलावा
गीत रचना भी रवीन्द्र जैन की है।




गीत के बोल:


हर हसीं चीज़ का मैं तलबगार हूँ
हर हसीं चीज़ का मैं तलबगार हूँ

रस का फूलों का गीतों का बीमार हूँ
रस का फूलों का गीतों का बीमार हूँ

हर हसीं चीज़ का मैं तलबगार हूँ

सारा गाँव मुझे रसिया कहे
सारा गाँव मुझे रसिया कहे
जो भी देखे मन बसिया कहे
हाय रे जो भी देखे मन बसिया कहे

सब की नज़रों का एक मैं ही दीदार हूँ
रस का फूलों का गीतों का बीमार हूँ

हर हसीं चीज़ का मैं तलबगार हूँ

कोई कहे भंवरा मुझे
कोई दीवाना
भेद मेरे मन का मगर
किसी से ना जाना
कोई कहे भंवरा मुझे
कोई दीवाना
भेद मेरे मन का मगर
किसी से ना जाना

रोना मैंने कभी सीखा नहीं
रोना मैंने कभी सीखा नहीं

चखा जीवन में फल फीका नहीं
हाय रे हाय, चखा जीवन में फल फीका नहीं
मैं तो हर मोल देने को तैयार हूँ
रस का फूलों फूलों का, गीतों गीतों का
बीमार हूँ

हर हसीं चीज़ का मैं तलबगार हूँ
..............................................
Har Haseen Cheez Ka Main Talabgaar Hoon-Saudagar 1973

Sunday, 21 November 2010

सब कुछ मिला तू ना मिला -आरोप १९७३

गीतकार माया गोविन्द पर चर्चा हमने थोड़े समय पहले की थी ।
फिल्म आरोप से उन्होंने अपना फ़िल्मी कैरियर शुरू किया ।
आइये फिल्म आरोप का एक गीत और सुनें। ये एक कैबरे गीत
है जो बिंदु पर फिल्माया गया है। कैबरे गीत है तो स्वाभाविक
तौर पर आवाज़ आशा भोंसले की ही होना चाहिए। संगीत भूपेन
हजारिका का है। एक बरगी सुनने में ऐसा लगता है मानो इस गीत
की रचना आर डी बर्मन ने की हो।



गीत के बोल:

झिन्चक झिन्चाक झिगिंग झिगिंग
झिन्चक झिन्चाक झिगिंग झिगिंग
हो, दिल का जाम
जाने जाना जान

झिन्चक झिन्चाक झिगिंग झिगिंग
हो, झिन्चक झिन्चाक झिगिंग झिगिंग
कितने बीत गए हैं दिन
कितनी बीती रातें मगर दिलरुबा
सब कुछ मिला तू ना मिला
सब कुछ मिला तू ना मिला

हे, पीता जा जाने जान
जाने जाना जानेमन

जला जला के
जला जला के
जला जला के अपना दिल
किया उजाला हमने
झिन्चक झिन्चक झिगिंग झिगिंग
प्यास जगा के होठों में
जाम लिया मौसम ने
प्यास जगा के होठों में
जाम लिया मौसम ने

सब कुछ मिला तू ना मिला
सब कुछ मिला तू ना मिला

ये ये ये ये ये ये
या या या , या या

दो दिनों की,
दो दिनों की
दो दिनों की ज़िन्दगी
क्यूँ ना करें मनमानी
झिन्चक झिन्चाक झिगिंग झिगिंग
बीत ना जाए अरे कहीं
यूँ ही जवानी जानी
बीत ना जाए अरे कहीं
यूँ ही जवानी जानी

सब कुछ मिला तू ना मिला
सब कुछ मिला तू ना मिला

अरे फरेबी,
ऐ, अरे फरेबी
अरे फरेबी जालिम
तूने चुराया है दिल
झिन्चक झिन्चाक झिगिंग झिगिंग
कोई ना जाने मेरे सिवा
कौन है मेरा कातिल
कोई ना जाने मेरे सिवा
कौन है मेरा कातिल

सब कुछ मिला तू ना मिला
सब कुछ मिला तू ना मिला

सब कुछ मिला तू ना मिला
तू ना मिला
हे पीता जा जाने जान
जाने जाना जानेमन
 
 
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