फिल्म दुनिया के कुछ सम्पूर्ण मनोरंजन प्रदान करने वाले कलाकारों
में से एक और अपने समय में युवा पीढ़ी के प्रतिनिधि शम्मी कपूर
इस फानी दुनिया को अलविदा कह गए. काफी समय से बीमारी से
जूझ रहे शम्मी अपने अंतिम समय तक भी जीवन का भरपूर आनंद
उठाते रहे.
उनके नृत्य वाले गीत दर्शकों को ज्यादा पसंद आते हैं. मैं आज प्रस्तुत
कर रहा हूँ एक दर्द भरा गीत जो मुझे उनके ऊपर फिल्माए गए गीतों
में सबसे ज्यादा पसंद है. गीत में बहुत गहरी बात कह दी गयी है.
गीत एस एह बिहारी साहब का है और इसका संगीत तैयार किया है
ओ पी नय्यर ने. आवाज़ रफ़ी कि है और गीत में बज रही सैक्सोफोन
कि ध्वनि मनोहारी सिंह कि साँसों के सहयोग से आ रही है. गीत दिल
को छू लेने वाला है और कुछ हद तक झंझोड़ने वाला भी.
गीत के बोल:
है दुनिया उसी कि ज़माना उसी का
मोहब्बत में जो हो गया हो किसी का
है दुनिया उसी कि ज़माना उसी का
मोहब्बत में जो हो गया हो किसी का
लुटा जो मुसाफिर दिल के सफर में
है जन्नत ये दुनिया उसकी नज़र में
लुटा जो मुसाफिर दिल के सफर में
है जन्नत ये दुनिया उसकी नज़र में
उसी ने है लूटा मज़ा जिंदगी का
मोहब्बत में जो हो गया हो किसी का
है सजदे के काबिल हर वो दीवाना
कि जो बन गया हो तस्वीर-ऐ-जाना
है सजदे के काबिल हर वो दीवाना
कि जो बन गया हो तस्वीर-ऐ-जाना
करो एहतराम उसकी दीवानगी का
मोहब्बत में जो हो गया हो किसी का
बर्बाद होना जिसकी अदा हो
दर्द-ऐ-मोहब्बत जिसकी दवा हो
बर्बाद होना जिसकी अदा हो
दर्द-ऐ-मोहब्बत जिसकी दवा हो
सताएगा क्या गम उसे जिंदगी का
मोहब्बत में जो हो गया हो किसी का
......................................
Hai duniya usi ki-Kashmir ki kali 1964
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Wednesday, 17 August 2011
Tuesday, 2 August 2011
ये चाँद सा रोशन चेहरा-काश्मीर की कली १९६४
प्रस्तुत गीत में ऐसा क्या खास है जो जनता इसे बेहद पसंद करती है, खोजिये !
जवाब बहुत से हैं- शम्मी कपूर का शरारती उछल्कूदियाना अंदाज़ है, शर्मिला टैगोर
की खूबसूरती और बिनाका स्माइल है, कश्मीर की मुफ्त सैर है, एस एच बिहारी
के बोल हैं, ओ पी नय्यर का जादुई संगीत है और रफ़ी की मोहक आवाज़ है।
बस बोलों में एक बेसिक फॉल्ट है वो ये कि झील सी ऑंखें नायिका की ज़रूर होंगी
मगर नीला रंग नायक की आँखों का है। अब गीत बढ़िया हो तो फॉल्ट वॉल्ट गए
तेल लेने, है न ?
इतना विवरण पर्याप्त है या पांच पन्ने का निबंध लिखूं.............
गीत के बोल:
ये चाँद सा रोशन चेहरा
जुल्फों का रंग सुनहरा
ये झील सी नीली ऑंखें
कोई राज़ है उनमें गहरा
तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया
ये चाँद सा रोशन चेहरा
जुल्फों का रंग सुनहरा
ये झील सी नीली ऑंखें
कोई राज़ है उनमें गहरा
तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया
एक चीज़ क़यामत भी है
लोगों से सुना करते थे
तुम्हें देख के मैंने माना
वो ठीक कहा करते थे
वो ठीक कहा करते थे
है चाल में तेरी ज़ालिम
कुछ ऐसी बाला का जादू
सौ बार संभाला दिल को
मगर हो के रहा बेकाबू
तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया
ये चाँद सा रोशन चेहरा
जुल्फों का रंग सुनहरा
ये झील सी नीली ऑंखें
कोई राज़ है उनमें गहरा
तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया
हर सुबह किरण की लाली
है रंग तेरे गालों का
हर शाम की चादर काली
साया है तेरे बालों का
हर सुबह किरण की लाली
है रंग तेरे गालों का
हर शाम की चादर काली
साया है तेरे बालों का
साया है तेरे बालों का
तू बलखाती एक नदिया
हर मौज तेरी अंगडाई
जो इन मौजों में डूबा
उसने ही दुनिया पायी
तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया
ये चाँद सा रोशन चेहरा
जुल्फों का रंग सुनहरा
ये झील सी नीली ऑंखें
कोई राज़ है उनमें गहरा
तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया
मैं खोज में हूँ मंजिल की
और मंजिल पास है मेरे
मुखड़े से हटा दो आँचल
हो जाएँ दूर अँधेरे
हो जाएँ दूर अँधेरे
माना के ये जलवे तेरे
कर देंगे मुझे दीवाना
जी भर के ज़रा मैं देखूं
अंदाज़ तेरा मस्ताना
तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया
ये चाँद सा रोशन चेहरा
जुल्फों का रंग सुनहरा
ये झील सी नीली ऑंखें
कोई राज़ है उनमें गहरा
तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया
तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया
......................................
Ye chand sa roshan chehra-Kashmir ki kali 1964
जवाब बहुत से हैं- शम्मी कपूर का शरारती उछल्कूदियाना अंदाज़ है, शर्मिला टैगोर
की खूबसूरती और बिनाका स्माइल है, कश्मीर की मुफ्त सैर है, एस एच बिहारी
के बोल हैं, ओ पी नय्यर का जादुई संगीत है और रफ़ी की मोहक आवाज़ है।
बस बोलों में एक बेसिक फॉल्ट है वो ये कि झील सी ऑंखें नायिका की ज़रूर होंगी
मगर नीला रंग नायक की आँखों का है। अब गीत बढ़िया हो तो फॉल्ट वॉल्ट गए
तेल लेने, है न ?
इतना विवरण पर्याप्त है या पांच पन्ने का निबंध लिखूं.............
गीत के बोल:
ये चाँद सा रोशन चेहरा
जुल्फों का रंग सुनहरा
ये झील सी नीली ऑंखें
कोई राज़ है उनमें गहरा
तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया
ये चाँद सा रोशन चेहरा
जुल्फों का रंग सुनहरा
ये झील सी नीली ऑंखें
कोई राज़ है उनमें गहरा
तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया
एक चीज़ क़यामत भी है
लोगों से सुना करते थे
तुम्हें देख के मैंने माना
वो ठीक कहा करते थे
वो ठीक कहा करते थे
है चाल में तेरी ज़ालिम
कुछ ऐसी बाला का जादू
सौ बार संभाला दिल को
मगर हो के रहा बेकाबू
तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया
ये चाँद सा रोशन चेहरा
जुल्फों का रंग सुनहरा
ये झील सी नीली ऑंखें
कोई राज़ है उनमें गहरा
तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया
हर सुबह किरण की लाली
है रंग तेरे गालों का
हर शाम की चादर काली
साया है तेरे बालों का
हर सुबह किरण की लाली
है रंग तेरे गालों का
हर शाम की चादर काली
साया है तेरे बालों का
साया है तेरे बालों का
तू बलखाती एक नदिया
हर मौज तेरी अंगडाई
जो इन मौजों में डूबा
उसने ही दुनिया पायी
तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया
ये चाँद सा रोशन चेहरा
जुल्फों का रंग सुनहरा
ये झील सी नीली ऑंखें
कोई राज़ है उनमें गहरा
तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया
मैं खोज में हूँ मंजिल की
और मंजिल पास है मेरे
मुखड़े से हटा दो आँचल
हो जाएँ दूर अँधेरे
हो जाएँ दूर अँधेरे
माना के ये जलवे तेरे
कर देंगे मुझे दीवाना
जी भर के ज़रा मैं देखूं
अंदाज़ तेरा मस्ताना
तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया
ये चाँद सा रोशन चेहरा
जुल्फों का रंग सुनहरा
ये झील सी नीली ऑंखें
कोई राज़ है उनमें गहरा
तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया
तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया
......................................
Ye chand sa roshan chehra-Kashmir ki kali 1964
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OP Nayyar,
SH Bihari,
Shammi Kapoor,
Sharmila Tagore
Saturday, 16 July 2011
हुस्न चला कुछ ऐसी चाल-ब्लफ़ मास्टर १९६३
कभी कभी आप किसी गीत को यकायक गुनगुनाना शुरू कर देते हैं, आज
आपको ऐसा ही गीत सुनवा रहे हैं जो एकदम से दिमाग में आया है अभी.
मनमोहन देसाई ने अपने करियर की शुरुआत से ही शायद बड़े सितारों के
साथ काम करना शुरू कर दिया था. सन १९६३ की फिल्म ब्लफ़ मास्टर के
निर्देशक वही हैं. इसमें शम्मी कपूर और सायरा बानो प्रमुख कलाकार हैं.
हिंदी फिल्म जगत में अक्सर ही निर्देशक से ज्यादा निर्माता की चली है और
कभी कभी इसी वजह से भी फिल्म पिट जाया करती. निर्माता की पसंद कुछ
होती, निर्देशक की कुछ और, इस सूरत में एक राय नहीं बन पाने से निर्देशक
को काम करने में आनंद नहीं आता. जहाँ निर्देशक की पसंद का ख्याल रखा
जाता वो फ़िल्में थोड़ी बेहतर होतीं. ये उन निर्देशकों के बारे में बात की जा रही
है जो निर्देशन की कला में निपुण हैं.
ब्लफ़ मास्टर में शायद स्टार कास्ट बढ़िया है समय के हिसाब से. इसमें उस
समय के नामचीन खलनायक प्राण भी मौजूद हैं.
गीत राजेंद्र कृष्ण का लिखा हुआ है जिसे संगीत में बांधने का काम किया है
कल्याणजी आनंदजी ने. इसे गा रहे हैं लता और रफ़ी.
नायक नायिका पिकनिक पर हैं और उनके साथ के बर्तन भांडे से लगता है
पर्याप्त खाद्य सामग्री है उसमें और जो जनाना सवारियां बड़ी गाडी से उतरी हैं
वे भी खा पी कर तृप्त हो सकती हैं.
गीत के बोल:
अरे हुस्न चला कुछ ऐसी चाल
दीवाने का पूछ न हाल
हुस्न चला कुछ ऐसी चाल
दीवाने का पूछ न हाल
प्यार की क़सम कमाल हो गया, हाय
प्यार की क़सम कमाल हो गया
अजी दिल को अब तक है इंकार
आँखें कर बैठीं इकरार
प्यार की क़सम कमाल हो गया, हाय
प्यार की क़सम कमाल हो गया
दिल को अब तक है इंकार
आँखें कर बैठीं इकरार
प्यार की क़सम कमाल हो गया
हो ओ ओ ओ, कभी पास आएँ कभी दूर जाएँ
के हैं दिल चुराने की लाखों अदाएँ
नहीं तीर निकला अभी तक कमान से
नहीं तीर निकला अभी तक कमान से
कोई उनसे कह दे कि दिल को बचाएँ
कि दिल को बचाएँ
हाय, हुस्न चला कुछ ऐसी चाल
दीवाने का पूछ ना हाल
प्यार की क़सम कमाल हो गया, हाय
प्यार की क़सम कमाल हो गया
दिल को अब तक है इंकार
आँखें कर बैठीं इकरार
प्यार की क़सम कमाल हो गया, हाय
प्यार की क़सम कमाल हो गया
कहाँ तक रहोगे ये दामन बचा के
के मुश्किल है बचना निशाने पे आ के
हमारा है क्या हम तो मिट के रहेंगे
हमारा है क्या हम तो मिट के रहेंगे
जहाँ तुमने देखा ज़रा मुस्करा के
ज़रा मुस्करा के
दिल को अब तक है इंकार
आँखें कर बैठीं इकरार
प्यार की क़सम कमाल हो गया, हाय
प्यार की क़सम कमाल हो गया
अरे हुस्न चला कुछ ऐसी चाल
दीवाने का पूछ ना हाल
प्यार की क़सम कमाल हो गया, हाय
प्यार की क़सम कमाल हो गया
हो ओ ओ ओ,ये दिन हैं तुम्हारे ज़माना तुम्हारा
निगाहें उधर हैं इधर है इशारा
ये पैग़ाम देते हैं ज़ुल्फ़ों के साये
ये पैग़ाम देते हैं ज़ुल्फ़ों के साये
चला आए जो है मोहब्बत का मारा
मोहब्बत का मारा
उफ़,हुस्न चला कुछ ऐसी चाल
दीवाने का पूछ ना हाल
प्यार की क़सम कमाल हो गया, हाय
प्यार की क़सम कमाल हो गया
दिल को अब तक है इंकार
आँखें कर बैठीं इकरार
प्यार की क़सम कमाल हो गया, हाय
प्यार की क़सम कमाल हो गया
.................................
Husn chala kuchh aisi chal-Bluff Master 1963
आपको ऐसा ही गीत सुनवा रहे हैं जो एकदम से दिमाग में आया है अभी.
मनमोहन देसाई ने अपने करियर की शुरुआत से ही शायद बड़े सितारों के
साथ काम करना शुरू कर दिया था. सन १९६३ की फिल्म ब्लफ़ मास्टर के
निर्देशक वही हैं. इसमें शम्मी कपूर और सायरा बानो प्रमुख कलाकार हैं.
हिंदी फिल्म जगत में अक्सर ही निर्देशक से ज्यादा निर्माता की चली है और
कभी कभी इसी वजह से भी फिल्म पिट जाया करती. निर्माता की पसंद कुछ
होती, निर्देशक की कुछ और, इस सूरत में एक राय नहीं बन पाने से निर्देशक
को काम करने में आनंद नहीं आता. जहाँ निर्देशक की पसंद का ख्याल रखा
जाता वो फ़िल्में थोड़ी बेहतर होतीं. ये उन निर्देशकों के बारे में बात की जा रही
है जो निर्देशन की कला में निपुण हैं.
ब्लफ़ मास्टर में शायद स्टार कास्ट बढ़िया है समय के हिसाब से. इसमें उस
समय के नामचीन खलनायक प्राण भी मौजूद हैं.
गीत राजेंद्र कृष्ण का लिखा हुआ है जिसे संगीत में बांधने का काम किया है
कल्याणजी आनंदजी ने. इसे गा रहे हैं लता और रफ़ी.
नायक नायिका पिकनिक पर हैं और उनके साथ के बर्तन भांडे से लगता है
पर्याप्त खाद्य सामग्री है उसमें और जो जनाना सवारियां बड़ी गाडी से उतरी हैं
वे भी खा पी कर तृप्त हो सकती हैं.
गीत के बोल:
अरे हुस्न चला कुछ ऐसी चाल
दीवाने का पूछ न हाल
हुस्न चला कुछ ऐसी चाल
दीवाने का पूछ न हाल
प्यार की क़सम कमाल हो गया, हाय
प्यार की क़सम कमाल हो गया
अजी दिल को अब तक है इंकार
आँखें कर बैठीं इकरार
प्यार की क़सम कमाल हो गया, हाय
प्यार की क़सम कमाल हो गया
दिल को अब तक है इंकार
आँखें कर बैठीं इकरार
प्यार की क़सम कमाल हो गया
हो ओ ओ ओ, कभी पास आएँ कभी दूर जाएँ
के हैं दिल चुराने की लाखों अदाएँ
नहीं तीर निकला अभी तक कमान से
नहीं तीर निकला अभी तक कमान से
कोई उनसे कह दे कि दिल को बचाएँ
कि दिल को बचाएँ
हाय, हुस्न चला कुछ ऐसी चाल
दीवाने का पूछ ना हाल
प्यार की क़सम कमाल हो गया, हाय
प्यार की क़सम कमाल हो गया
दिल को अब तक है इंकार
आँखें कर बैठीं इकरार
प्यार की क़सम कमाल हो गया, हाय
प्यार की क़सम कमाल हो गया
कहाँ तक रहोगे ये दामन बचा के
के मुश्किल है बचना निशाने पे आ के
हमारा है क्या हम तो मिट के रहेंगे
हमारा है क्या हम तो मिट के रहेंगे
जहाँ तुमने देखा ज़रा मुस्करा के
ज़रा मुस्करा के
दिल को अब तक है इंकार
आँखें कर बैठीं इकरार
प्यार की क़सम कमाल हो गया, हाय
प्यार की क़सम कमाल हो गया
अरे हुस्न चला कुछ ऐसी चाल
दीवाने का पूछ ना हाल
प्यार की क़सम कमाल हो गया, हाय
प्यार की क़सम कमाल हो गया
हो ओ ओ ओ,ये दिन हैं तुम्हारे ज़माना तुम्हारा
निगाहें उधर हैं इधर है इशारा
ये पैग़ाम देते हैं ज़ुल्फ़ों के साये
ये पैग़ाम देते हैं ज़ुल्फ़ों के साये
चला आए जो है मोहब्बत का मारा
मोहब्बत का मारा
उफ़,हुस्न चला कुछ ऐसी चाल
दीवाने का पूछ ना हाल
प्यार की क़सम कमाल हो गया, हाय
प्यार की क़सम कमाल हो गया
दिल को अब तक है इंकार
आँखें कर बैठीं इकरार
प्यार की क़सम कमाल हो गया, हाय
प्यार की क़सम कमाल हो गया
.................................
Husn chala kuchh aisi chal-Bluff Master 1963
Friday, 15 July 2011
आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे-ब्रह्मचारी १९६८
आपको एक सूचना प्रधान गीत सुनवाते हैं. इसके मुखड़े के बोल ही
ऐसे हैं की लगता है सूचना दी जा रही हो. अपने ज़माने में आम श्रोता
और बाद के ज़माने में ओर्केस्ट्रा के कलाकारों और श्रोताओं का पसंदीदा
ये गीत है फिल्म ब्रह्मचारी से. गीत लिखा है शैलेन्द्र ने और इसे गाया
है रफ़ी और सुमन कल्याणपुर ने. संगीत तो आप पहचान ही गए होंगे
नहीं? तो, आपको पोस्ट के अंत में बतायेंगे.
आपको इसका विवरण ऐसे सुनाते हैं जैसे किसी किरकिट के मैच की
कमेंट्री सुनाई जाती है. - साड़े पांच इंच की मुस्कान के साथ एक
गिटार भांजता युवक गीत में सर्वप्रथम दिखाई देता है. इसके बाद प्रश्न
सूचक अंदाज़ में नायक नायिका की ओर कदम बढ़ा कर उससे कुछ
करने की इच्छा जाहिर करता है इशारों में जिसे नायिका शायद अभी
समझ नहीं पायी है. और जैसे ही नायक उसका हाथ पकड़ कर एक
चक्कर उसको खिलाता है नायिका खुशी से दायें बाएं होती हुई हाथ
झटकते हुए नाचना शुरू कर देती है मानो किसी खिलौने को चाबी दे
दी गयी हो. उसके बाद नायक बड़ी टांगने की पेटी(हारमोनियम)जैसे
दिखने वाले किसी वाद्य को बजाना शुरू कर देता है. मजे की बात ये
है कि वो एक कोर्ड(chord)के सेट पर उँगलियाँ जमाए है और बाकी
का काम बाजा खुद कर रहा है. अब एक विलन से दिखने वाले नौजवान
को देखिये सफ़ेद शेरवानी पहने, इनका नाम प्राण है. नायक नायिका का
गर्दन हिलाने का कार्यक्रम भी जारी है. हमारे स्टेटीशीयन थोड़ी देर में
बतलायेंगे कितनी बार गर्दन हिल गयी और कितनी बार शरीर के बाकी
भाग.
और लीजिए इसी के साथ नायक ने गाना शुरू कर दिया है. और मैंने भी
गीत के बोल लिखना शुरू कर दिया है. नायिका "अच्छा, तो क्या" जुमले
बोलने के बाद जो नायक गा रहा है वही दोहराना शुरू कर देती है जैसे कोई
ट्यूशन लेता हुआ बच्चा मास्टरजी के पहाडा को याद करते वक्त करता है-
दो एकं दो, दो दूनी चार . इसके बाद नायक एक अंग्रेजी बाजा जिसको हम
सेक्सोफोन कहते हैं, बजाना शुरू कर देता है एक आल राउंडर की तरह.
ऐसे होनहार युवकों की खेल जगत में बहुत ज़रूरत है जो कि समय आने
पर किरकिट का बल्ला छोड़ होकी, फुटबाल वगैरह खेल सकें, ज़रूरत पढ़ने
पर नाव का चप्पू भी चला सकें.
नायक नायिका का परिचय करवा दिया जाए इसी बीच जब तक सेक्सोफोन की
आवाज़ सुनाई देती है. नायक है शम्मी कपूर और नायिका हैं मुमताज़. अगले
ब्रेक में आपको गायक गायिकाओं के बारे में बतलायेंगे. और लीजिए वही नृत्य
फिर से चालू है अंग्रेजी के ट्विस्ट नृत्य से प्रेरित और इसमें हाथ झटकने की
देसी मिलावट है. इसको करने के पहले बस इतना करना होता है ,हाथ पानी
से धो ले और उसे पोंछें नहीं. बस ट्विस्ट नृत्य करते करते हाथ झटकिये,
हाथ अपने आप सूख जायेंगे. शम्मी कपूर के सर हिलाने की ट्रेडमार्क अदा को
नायिका भी इस गीत में दोहरा रही हैं. इस अदा का फायदा ये है कि अगर
आपके सर पर आटे का खुला डब्बा गिर पड़े तो इस प्रक्रिया को ३ मिनट तक
करने से आपके बालों पर चिपका,गिरा आटा एकदम झड कर अलग हो जायेगा.
सेक्सोफोन की आवाज़ बंद होते ही कैमरे ने भी झूम के अपना सर घुमा लिया है
और वो पार्टी में मौजूद लोगों की शक्लें पहचानने का एक मौका दे रहा है.
नायिका उसी अंदाज़ में पंक्तियाँ दोहराती है जिस अंदाज़ में नायक ने गाना शुरू
किया था. नायक "तो क्या" बोलता हुआ बीच में कूद पढता है जैसे किसी खिडकी
से कूद कर अंदर आया हो.
बाकी की कमेंट्री चटके(कमेन्ट)लगने के पश्चात उपलब्ध कराई जायेगी. ......
गीत के बोल:
आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर ज़बान पर
सबको मालूम है और सबको खबर हो गयी
आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर ज़बान पर
अच्छा !
सबको मालूम है और सबको खबर हो गयी
तो क्या
आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर ज़बान पर
सबको मालूम है और सबको खबर हो गयी
हमने तो प्यार में ऐसा काम कर लिया
प्यार की राह में अपना नाम कर लिया
हमने तो प्यार में ऐसा काम कर लिया
प्यार की राह में अपना नाम कर लिया
प्यार की राह में अपना नाम कर लिया
आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर ज़बान पर
अच्छा !
सबको मालूम है और सबको खबर हो गयी
तो क्या
आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर ज़बान पर
सबको मालूम है और सबको खबर हो गयी
दो बदन एक दिन एक जान हो गए
मंज़िलें एक हुईं हमसफ़र बन गए
दो बदन एक दिन एक जान हो गए
मंज़िलें एक हुईं हमसफ़र बन गए
मंज़िलें एक हुईं हमसफ़र बन गए
आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर ज़बान पर
अच्छा !
सबको मालूम है और सबको खबर हो गयी
तो क्या
आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर ज़बान पर
सबको मालूम है और सबको खबर हो गयी
क्यों भला हम डरें दिल के मालिक हैं हम
हर जनम में तुझे अपना माना सनम
क्यों भला हम डरें दिल के मालिक हैं हम
हर जनम में तुझे अपना माना सनम
हर जनम में तुझे अपना माना सनम
आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर ज़बान पर
अच्छा !
सबको मालूम है और सबको खबर हो गयी
तो क्या
आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर ज़बान पर
सबको मालूम है और सबको खबर हो गयी
..................................
Ajkal tere mere pyar ke charche-Brahmachari 1968
ऐसे हैं की लगता है सूचना दी जा रही हो. अपने ज़माने में आम श्रोता
और बाद के ज़माने में ओर्केस्ट्रा के कलाकारों और श्रोताओं का पसंदीदा
ये गीत है फिल्म ब्रह्मचारी से. गीत लिखा है शैलेन्द्र ने और इसे गाया
है रफ़ी और सुमन कल्याणपुर ने. संगीत तो आप पहचान ही गए होंगे
नहीं? तो, आपको पोस्ट के अंत में बतायेंगे.
आपको इसका विवरण ऐसे सुनाते हैं जैसे किसी किरकिट के मैच की
कमेंट्री सुनाई जाती है. - साड़े पांच इंच की मुस्कान के साथ एक
गिटार भांजता युवक गीत में सर्वप्रथम दिखाई देता है. इसके बाद प्रश्न
सूचक अंदाज़ में नायक नायिका की ओर कदम बढ़ा कर उससे कुछ
करने की इच्छा जाहिर करता है इशारों में जिसे नायिका शायद अभी
समझ नहीं पायी है. और जैसे ही नायक उसका हाथ पकड़ कर एक
चक्कर उसको खिलाता है नायिका खुशी से दायें बाएं होती हुई हाथ
झटकते हुए नाचना शुरू कर देती है मानो किसी खिलौने को चाबी दे
दी गयी हो. उसके बाद नायक बड़ी टांगने की पेटी(हारमोनियम)जैसे
दिखने वाले किसी वाद्य को बजाना शुरू कर देता है. मजे की बात ये
है कि वो एक कोर्ड(chord)के सेट पर उँगलियाँ जमाए है और बाकी
का काम बाजा खुद कर रहा है. अब एक विलन से दिखने वाले नौजवान
को देखिये सफ़ेद शेरवानी पहने, इनका नाम प्राण है. नायक नायिका का
गर्दन हिलाने का कार्यक्रम भी जारी है. हमारे स्टेटीशीयन थोड़ी देर में
बतलायेंगे कितनी बार गर्दन हिल गयी और कितनी बार शरीर के बाकी
भाग.
और लीजिए इसी के साथ नायक ने गाना शुरू कर दिया है. और मैंने भी
गीत के बोल लिखना शुरू कर दिया है. नायिका "अच्छा, तो क्या" जुमले
बोलने के बाद जो नायक गा रहा है वही दोहराना शुरू कर देती है जैसे कोई
ट्यूशन लेता हुआ बच्चा मास्टरजी के पहाडा को याद करते वक्त करता है-
दो एकं दो, दो दूनी चार . इसके बाद नायक एक अंग्रेजी बाजा जिसको हम
सेक्सोफोन कहते हैं, बजाना शुरू कर देता है एक आल राउंडर की तरह.
ऐसे होनहार युवकों की खेल जगत में बहुत ज़रूरत है जो कि समय आने
पर किरकिट का बल्ला छोड़ होकी, फुटबाल वगैरह खेल सकें, ज़रूरत पढ़ने
पर नाव का चप्पू भी चला सकें.
नायक नायिका का परिचय करवा दिया जाए इसी बीच जब तक सेक्सोफोन की
आवाज़ सुनाई देती है. नायक है शम्मी कपूर और नायिका हैं मुमताज़. अगले
ब्रेक में आपको गायक गायिकाओं के बारे में बतलायेंगे. और लीजिए वही नृत्य
फिर से चालू है अंग्रेजी के ट्विस्ट नृत्य से प्रेरित और इसमें हाथ झटकने की
देसी मिलावट है. इसको करने के पहले बस इतना करना होता है ,हाथ पानी
से धो ले और उसे पोंछें नहीं. बस ट्विस्ट नृत्य करते करते हाथ झटकिये,
हाथ अपने आप सूख जायेंगे. शम्मी कपूर के सर हिलाने की ट्रेडमार्क अदा को
नायिका भी इस गीत में दोहरा रही हैं. इस अदा का फायदा ये है कि अगर
आपके सर पर आटे का खुला डब्बा गिर पड़े तो इस प्रक्रिया को ३ मिनट तक
करने से आपके बालों पर चिपका,गिरा आटा एकदम झड कर अलग हो जायेगा.
सेक्सोफोन की आवाज़ बंद होते ही कैमरे ने भी झूम के अपना सर घुमा लिया है
और वो पार्टी में मौजूद लोगों की शक्लें पहचानने का एक मौका दे रहा है.
नायिका उसी अंदाज़ में पंक्तियाँ दोहराती है जिस अंदाज़ में नायक ने गाना शुरू
किया था. नायक "तो क्या" बोलता हुआ बीच में कूद पढता है जैसे किसी खिडकी
से कूद कर अंदर आया हो.
बाकी की कमेंट्री चटके(कमेन्ट)लगने के पश्चात उपलब्ध कराई जायेगी. ......
गीत के बोल:
आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर ज़बान पर
सबको मालूम है और सबको खबर हो गयी
आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर ज़बान पर
अच्छा !
सबको मालूम है और सबको खबर हो गयी
तो क्या
आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर ज़बान पर
सबको मालूम है और सबको खबर हो गयी
हमने तो प्यार में ऐसा काम कर लिया
प्यार की राह में अपना नाम कर लिया
हमने तो प्यार में ऐसा काम कर लिया
प्यार की राह में अपना नाम कर लिया
प्यार की राह में अपना नाम कर लिया
आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर ज़बान पर
अच्छा !
सबको मालूम है और सबको खबर हो गयी
तो क्या
आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर ज़बान पर
सबको मालूम है और सबको खबर हो गयी
दो बदन एक दिन एक जान हो गए
मंज़िलें एक हुईं हमसफ़र बन गए
दो बदन एक दिन एक जान हो गए
मंज़िलें एक हुईं हमसफ़र बन गए
मंज़िलें एक हुईं हमसफ़र बन गए
आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर ज़बान पर
अच्छा !
सबको मालूम है और सबको खबर हो गयी
तो क्या
आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर ज़बान पर
सबको मालूम है और सबको खबर हो गयी
क्यों भला हम डरें दिल के मालिक हैं हम
हर जनम में तुझे अपना माना सनम
क्यों भला हम डरें दिल के मालिक हैं हम
हर जनम में तुझे अपना माना सनम
हर जनम में तुझे अपना माना सनम
आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर ज़बान पर
अच्छा !
सबको मालूम है और सबको खबर हो गयी
तो क्या
आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर ज़बान पर
सबको मालूम है और सबको खबर हो गयी
..................................
Ajkal tere mere pyar ke charche-Brahmachari 1968
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Monday, 11 July 2011
ऐहसान तेरा होगा मुझ पर २-जंगली १९६१
लता की आवाज़ में ये गीत आप सुन चुके हैं अब सूना
जाए रफ़ी की आवाज़ में जो ज्यादा लोकप्रिय है. शम्मी कपूर
इसको परदे पर गा रहे हैं. वो जो अलसाया नशीलापन है जिनमें
ये पंक्तियाँ गई जा रही हैं- "रोने कहोगे रो लेंगे अब" , वो रफ़ी
की आवाज़ की एक विशेष खूबी है.
गीत के बोल:
ऐहसान तेरा होगा मुझ पर
दिल चाहता है वो कहने दो, मुझे
तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे
पलकों की छाँव में रहने दो
ऐहसान तेरा होगा मुझ पर
दिल चाहता है वो कहने दो, मुझे
तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे
पलकों की छाँव में रहने दो
ऐहसान तेरा होगा मुझ पर
तुमने मुझको हँसना सिखाया
तुमने मुझको हँसना सिखाया
रोने कहोगे रो लेंगे अब
आँसू का हमारे ग़म ना करो
वो बहते तो बहने दो, मुझे
तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे
पलकों की छाँव में रहने दो
ऐहसान तेरा होगा मुझ पर
चाहे बना दो चाहे मिटा दो
चाहे बना दो चाहे मिटा दो
मर भी गए तो देंगे दुआएँ
उड़-उड़ के कहेंगी खाक सनम
ये दर्द-ए-मुहब्बत सहने दो, मुझे
तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे
पलकों की छाँव में रहने दो
ऐहसान तेरा होगा मुझ पर
दिल चाहता है वो कहने दो, मुझे
तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे
पलकों की छाँव में रहने दो
..............................
Ehsan tera hoga mujh par 2-Junglee
जाए रफ़ी की आवाज़ में जो ज्यादा लोकप्रिय है. शम्मी कपूर
इसको परदे पर गा रहे हैं. वो जो अलसाया नशीलापन है जिनमें
ये पंक्तियाँ गई जा रही हैं- "रोने कहोगे रो लेंगे अब" , वो रफ़ी
की आवाज़ की एक विशेष खूबी है.
गीत के बोल:
ऐहसान तेरा होगा मुझ पर
दिल चाहता है वो कहने दो, मुझे
तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे
पलकों की छाँव में रहने दो
ऐहसान तेरा होगा मुझ पर
दिल चाहता है वो कहने दो, मुझे
तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे
पलकों की छाँव में रहने दो
ऐहसान तेरा होगा मुझ पर
तुमने मुझको हँसना सिखाया
तुमने मुझको हँसना सिखाया
रोने कहोगे रो लेंगे अब
आँसू का हमारे ग़म ना करो
वो बहते तो बहने दो, मुझे
तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे
पलकों की छाँव में रहने दो
ऐहसान तेरा होगा मुझ पर
चाहे बना दो चाहे मिटा दो
चाहे बना दो चाहे मिटा दो
मर भी गए तो देंगे दुआएँ
उड़-उड़ के कहेंगी खाक सनम
ये दर्द-ए-मुहब्बत सहने दो, मुझे
तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे
पलकों की छाँव में रहने दो
ऐहसान तेरा होगा मुझ पर
दिल चाहता है वो कहने दो, मुझे
तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे
पलकों की छाँव में रहने दो
..............................
Ehsan tera hoga mujh par 2-Junglee
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Saturday, 18 June 2011
ऐहसान तेरा होगा मुझ पर १ -जंगली १९६१
आपको एक मधुर और लोकप्रिय गीत सुनवाते हैं फिल्म जंगली से।
इस फिल्म से दूसरा गीत पेश कर रहे हैं ब्लॉग पर। लता मंगेशकर
की आवाज़ में ये गीत फिल्माया गया है सायरा बानो पर। नायिका गीत
के माध्यम से नायक से मोहब्बत कबूल फरमाने की गुज़ारिश कर रही
है। युवा सायरा बानो और युवावस्था की आखिरी सीढ़ी पर खड़े
वाले शम्मी की ये फिल्म जनता द्वारा बेहद पसंद की गई, विशेषकर
इसके गीतों की वजह से। हसरत जयपुरी का लिखा हुआ गीत है और
संगीत शंकर जयकिशन ने तैयार किया है। गीत के अंतरे में लता की
आवाज़ को आप सुरों की ऊंची पट्टी पर पहुँचते पाएंगे। ये केवल एक
दो शब्दों तक ही सीमित है मगर काफी कष्टदायी होता है किसी भी
गायक गायिका के लिए। वैसे भी हिंदी फिल्म संगीतकारों ने लता
मंगेशकर से काफी ऊंची पट्टी वाले गाने गवाए हैं। सलिल चौधरी
साहब उस काम में उस्ताद रहे हैं और उन्होंने एक से बढ़कर एक
सुर खींचने वाले गाने लता को दिए। चलिए गीत सुना जाये, इस मुद्दे
पर चर्चा फिर कभी। गीत थोड़े अलग अंदाज़ में गाया गया है
और आप पाएंगे जैसे खुद सायरा ही ये गीत परदे पर गा रही हों।
गीत के बोल:
एहसान तेरा होगा मुझ पर
दिल चाहता है वो कहने दो, मुझे
तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे
पलकों की छाँव में रहने दो
एहसान तेरा होगा मुझ पर
दिल चाहता है वो कहने दो, मुझे
तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे
पलकों की छाँव में रहने दो
एहसान तेरा होगा मुझ पर
तुमने मुझको हँसना सिखाया
तुमने मुझको हँसना सिखाया
रोने कहोगे रो लेंगे अब
आँसू का हमारे ग़म ना करो
वो बहते तो बहने दो, मुझे
तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे
पलकों की छाँव में रहने दो
एहसान तेरा होगा मुझ पर
चाहे बना दो, चाहे मिटा दो,
चाहे बना दो, चाहे मिटा दो,
मर भी गए तो देंगे दुआएँ
उड़-उड़ के कहेंगी खाक सनम
ये दर्द-ए-मुहब्बत सहने दो, मुझे
तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे
पलकों की छाँव में रहने दो
एहसान तेरा होगा मुझ पर
दिल चाहता है वो कहने दो, मुझे
तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे
पलकों की छाँव में रहने दो
.................................
Ehsan tera hoga mujh par 1-Junglee 1961
इस फिल्म से दूसरा गीत पेश कर रहे हैं ब्लॉग पर। लता मंगेशकर
की आवाज़ में ये गीत फिल्माया गया है सायरा बानो पर। नायिका गीत
के माध्यम से नायक से मोहब्बत कबूल फरमाने की गुज़ारिश कर रही
है। युवा सायरा बानो और युवावस्था की आखिरी सीढ़ी पर खड़े
वाले शम्मी की ये फिल्म जनता द्वारा बेहद पसंद की गई, विशेषकर
इसके गीतों की वजह से। हसरत जयपुरी का लिखा हुआ गीत है और
संगीत शंकर जयकिशन ने तैयार किया है। गीत के अंतरे में लता की
आवाज़ को आप सुरों की ऊंची पट्टी पर पहुँचते पाएंगे। ये केवल एक
दो शब्दों तक ही सीमित है मगर काफी कष्टदायी होता है किसी भी
गायक गायिका के लिए। वैसे भी हिंदी फिल्म संगीतकारों ने लता
मंगेशकर से काफी ऊंची पट्टी वाले गाने गवाए हैं। सलिल चौधरी
साहब उस काम में उस्ताद रहे हैं और उन्होंने एक से बढ़कर एक
सुर खींचने वाले गाने लता को दिए। चलिए गीत सुना जाये, इस मुद्दे
पर चर्चा फिर कभी। गीत थोड़े अलग अंदाज़ में गाया गया है
और आप पाएंगे जैसे खुद सायरा ही ये गीत परदे पर गा रही हों।
गीत के बोल:
एहसान तेरा होगा मुझ पर
दिल चाहता है वो कहने दो, मुझे
तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे
पलकों की छाँव में रहने दो
एहसान तेरा होगा मुझ पर
दिल चाहता है वो कहने दो, मुझे
तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे
पलकों की छाँव में रहने दो
एहसान तेरा होगा मुझ पर
तुमने मुझको हँसना सिखाया
तुमने मुझको हँसना सिखाया
रोने कहोगे रो लेंगे अब
आँसू का हमारे ग़म ना करो
वो बहते तो बहने दो, मुझे
तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे
पलकों की छाँव में रहने दो
एहसान तेरा होगा मुझ पर
चाहे बना दो, चाहे मिटा दो,
चाहे बना दो, चाहे मिटा दो,
मर भी गए तो देंगे दुआएँ
उड़-उड़ के कहेंगी खाक सनम
ये दर्द-ए-मुहब्बत सहने दो, मुझे
तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे
पलकों की छाँव में रहने दो
एहसान तेरा होगा मुझ पर
दिल चाहता है वो कहने दो, मुझे
तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे
पलकों की छाँव में रहने दो
.................................
Ehsan tera hoga mujh par 1-Junglee 1961
Tuesday, 7 June 2011
ज़िन्दगी क्या है-प्यार किया तो डरना क्या १९६३
आपने नई "प्यार किया तो डरना क्या" का गीत सुन लिया, अब सुनिए
शम्मी कपूर वाली फिल्म से एक गीत। गीत श्वेत श्याम है और दर्द
भरा है, पिछले गीत के विपरीत। गीत का फिल्मांकन बढ़िया है और
गीत भी मधुर है। शकील बदायूनीं के लिखे गीत को संगीत से संवारा
है रवि ने। ज़िन्दगी कितनी खाली खाली हो सकती है इस गीत को पूरा
देखने और सुनने के बाद अहसास होता है।
शम्मी कपूर पर फिल्माए गये खुशनुमा गीत आपने कई देखे होंगे मगर
उनके दर्द भरे गीत याद रख पाना आसान नहीं है। उनकी छबि उछल
कूद वाले और रोमांटिक गीत गाने वाले नायक की रही है। अपने शुरूआती
दौर में उन्होंने ज़रूर कुछ रुलाने वाले गीत गाये, कुछ तो ऐसे हैं जिनकी
धुन ही रोती सी सुनाई देती है।
गीत के बोल:
ज़िन्दगी क्या है ग़म का दरिया है
न जीना यहाँ बस में न मरना यहाँ बस में
अजब दुनिया है
ज़िन्दगी क्या है
झूठी हैं दुनिया की बहारें रंग हैं सारे कच्चे
झूठी हैं दुनिया की बहारें रंग हैं सारे कच्चे
वक़्त पड़े तो थाम लें दामन फूल से काँटे अच्छे
इस गुलशन में क़दम-क़दम पर एक नया धोखा है
नया धोखा है
ज़िन्दगी क्या है ग़म का दरिया है
न जीना यहाँ बस में न मरना यहाँ बस में
अजब दुनिया है
ज़िन्दगी क्या है
जब इन्सान अकेला था तो दुख भी न थे जीवन में
जब इन्सान अकेला था तो दुख भी न थे जीवन में
पाया जब हमराही उसने डूब गया उलझन में
ये दुनिया है बेगानों की कौन यहाँ अपना है
यहाँ अपना है
ज़िन्दगी क्या है ग़म का दरिया है
न जीना यहाँ बस में न मरना यहाँ बस में
अजब दुनिया है
ज़िन्दगी क्या है
हाय रे वो इन्सान के जिसको ग़म की नज़र लग जाए
हाय रे वो इन्सान के जिसको ग़म की नज़र लग जाए
चुपके-चुपके आहें भरे और मुँह से न कुछ कह पाए
दिल अपना हँसता है खुद पर और कभी रोता है
और कभी रोता है
ज़िन्दगी क्या है ग़म का दरिया है
न जीना यहाँ बस में न मरना यहाँ बस में
अजब दुनिया है
ज़िन्दगी क्या है
...................................
Zindagi kya hai-Pyar kiya to darna kya 1963
शम्मी कपूर वाली फिल्म से एक गीत। गीत श्वेत श्याम है और दर्द
भरा है, पिछले गीत के विपरीत। गीत का फिल्मांकन बढ़िया है और
गीत भी मधुर है। शकील बदायूनीं के लिखे गीत को संगीत से संवारा
है रवि ने। ज़िन्दगी कितनी खाली खाली हो सकती है इस गीत को पूरा
देखने और सुनने के बाद अहसास होता है।
शम्मी कपूर पर फिल्माए गये खुशनुमा गीत आपने कई देखे होंगे मगर
उनके दर्द भरे गीत याद रख पाना आसान नहीं है। उनकी छबि उछल
कूद वाले और रोमांटिक गीत गाने वाले नायक की रही है। अपने शुरूआती
दौर में उन्होंने ज़रूर कुछ रुलाने वाले गीत गाये, कुछ तो ऐसे हैं जिनकी
धुन ही रोती सी सुनाई देती है।
गीत के बोल:
ज़िन्दगी क्या है ग़म का दरिया है
न जीना यहाँ बस में न मरना यहाँ बस में
अजब दुनिया है
ज़िन्दगी क्या है
झूठी हैं दुनिया की बहारें रंग हैं सारे कच्चे
झूठी हैं दुनिया की बहारें रंग हैं सारे कच्चे
वक़्त पड़े तो थाम लें दामन फूल से काँटे अच्छे
इस गुलशन में क़दम-क़दम पर एक नया धोखा है
नया धोखा है
ज़िन्दगी क्या है ग़म का दरिया है
न जीना यहाँ बस में न मरना यहाँ बस में
अजब दुनिया है
ज़िन्दगी क्या है
जब इन्सान अकेला था तो दुख भी न थे जीवन में
जब इन्सान अकेला था तो दुख भी न थे जीवन में
पाया जब हमराही उसने डूब गया उलझन में
ये दुनिया है बेगानों की कौन यहाँ अपना है
यहाँ अपना है
ज़िन्दगी क्या है ग़म का दरिया है
न जीना यहाँ बस में न मरना यहाँ बस में
अजब दुनिया है
ज़िन्दगी क्या है
हाय रे वो इन्सान के जिसको ग़म की नज़र लग जाए
हाय रे वो इन्सान के जिसको ग़म की नज़र लग जाए
चुपके-चुपके आहें भरे और मुँह से न कुछ कह पाए
दिल अपना हँसता है खुद पर और कभी रोता है
और कभी रोता है
ज़िन्दगी क्या है ग़म का दरिया है
न जीना यहाँ बस में न मरना यहाँ बस में
अजब दुनिया है
ज़िन्दगी क्या है
...................................
Zindagi kya hai-Pyar kiya to darna kya 1963
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Friday, 3 June 2011
मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा-पगला कहीं का १९७०
'वेदांत के सिद्धांत' और 'आबरा का डबरा' एक दूसरे के पर्याय हैं। वेदांत एक
मित्र मण्डली का सदस्य है। अकाउंटिंग के पेशे में नहीं होता तो शायद वो
एक सफल राजनीतिक वक्ता या सम्पादकीय लिखने वाला पत्रकार बन
सकता था। किन किन चीज़ों के parallel draw करता था वो, हमारे दिमाग
के कल्पना-कोष से बाहर होते थे। इतनी सफाई और चतुराई के साथ ही
वो विषय परिवर्तन करता कि कब 'मूंग की दाल' से दिल्ली के 'जंतर मंतर'
के बारे में जानकारी शुरू हो जाती, पता ही नहीं चलता। उसकी इसी खूबी
के चलते उसको उसी के समकक्ष एक मित्र ने 'आबरा का डबरा, की पदवी
भी दे डाली। आज आपको अपने मित्र की पसंद का एक गीत सुनाता हूँ।
गीत लिखा है हसरत जयपुरी ने जिन्होंने शंकर जयकिशन के लिए कई
रोमांटिक गीत लिखे। आवाज़ मन्ना डे की है। गीत में आपको कई हास्य
कलाकार दिखाई देंगे नायक शम्मी कपूर और नायिका आशा पारेख के
अलावा।
गीत के बोल:
क्यूँ मारा, क्यूँ मारा
क्यूँ मारा, क्यूँ मारा
क्यूँ क्यूँ क्यूँ क्यूँ क्यूँ क्यूँ क्यूँ
मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा
वो खेत में चारा चरती थी
तेरे बाप का वो क्या करती थी
हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ, हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ
मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा
वो खेत में चारा चरती थी
तेरे बाप का वो क्या करती थी
हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ, हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ
मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा
वो लड्डू पड़े खाती है, हाँ
वो पेड़ों पे चढ़ जाती है, हाँ
वो लड्डू पड़े खाती है
वो पेड़ों पे चढ़ जाती है
ये मच्छर बीन बजाते हैं
वो अपना राग सुनती है
वो छुम्मक छुम्मक नाचे जब मैं दिल का बजाऊँ
मैं दिल का बजाऊँ एक तारा
मेरी भैंस को डंडा
मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा
वो खेत में चारा चरती थी
तेरे बाप का वो क्या करती थी
मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा
अरे घर का ये एक स्टेशन है, हाँ
ये झंडी प्यारी प्यारी है
अरे घर का ये एक स्टेशन है
ये झंडी प्यारी प्यारी है
हम सब तो रेल के डिब्बे हैं
वो अपनी इंजन गाडी है
वो गुस्सा जब भी करती है
तो बन जाती है
तो बन जाती है, अंगारा
मेरी भैंस को डंडा
मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा
वो खेत में चारा चरती थी
तेरे बाप का वो क्या करती थी
मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा
बंधू रे बंधू रे
वो जान से बढ़ कर प्यारी है
बंधू रे, बंधू रे
क्या बोलूं मैं,
क्या बोलूं मैं एक कटारी है
बंधू रे, बंधू रे
वो जान से बढ़ कर प्यारी है, हाँ
क्या बोलूं मैं एक कटारी है, हाँ
वो जान से बढ़ कर प्यारी है
क्या बोलूं मैं एक कटारी है
कजरारी उसकी अँखियाँ हैं
इस बात से अपनी यारी है
मैंने तो अपनी कल्लो का है नाम रखा
है नाम रखा, जहान आरा
मेरी भैंस को डंडा
मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा
वो खेत में चारा चरती थी
तेरे बाप का वो क्या करती थी
मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा
मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा
वो खेत में चारा चरती थी
तेरे बाप का वो क्या करती थी
हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ, हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ
मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा
वो खेत में चारा चरती थी
तेरे बाप का वो क्या करती थी
हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ, हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ
मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा
वो खेत में चारा चरती थी
तेरे बाप का वो क्या करती थी
हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ, हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ
मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा
.................................
Meri bhains ko danda kyun maara-Pagla kahin ka 1970
मित्र मण्डली का सदस्य है। अकाउंटिंग के पेशे में नहीं होता तो शायद वो
एक सफल राजनीतिक वक्ता या सम्पादकीय लिखने वाला पत्रकार बन
सकता था। किन किन चीज़ों के parallel draw करता था वो, हमारे दिमाग
के कल्पना-कोष से बाहर होते थे। इतनी सफाई और चतुराई के साथ ही
वो विषय परिवर्तन करता कि कब 'मूंग की दाल' से दिल्ली के 'जंतर मंतर'
के बारे में जानकारी शुरू हो जाती, पता ही नहीं चलता। उसकी इसी खूबी
के चलते उसको उसी के समकक्ष एक मित्र ने 'आबरा का डबरा, की पदवी
भी दे डाली। आज आपको अपने मित्र की पसंद का एक गीत सुनाता हूँ।
गीत लिखा है हसरत जयपुरी ने जिन्होंने शंकर जयकिशन के लिए कई
रोमांटिक गीत लिखे। आवाज़ मन्ना डे की है। गीत में आपको कई हास्य
कलाकार दिखाई देंगे नायक शम्मी कपूर और नायिका आशा पारेख के
अलावा।
गीत के बोल:
क्यूँ मारा, क्यूँ मारा
क्यूँ मारा, क्यूँ मारा
क्यूँ क्यूँ क्यूँ क्यूँ क्यूँ क्यूँ क्यूँ
मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा
वो खेत में चारा चरती थी
तेरे बाप का वो क्या करती थी
हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ, हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ
मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा
वो खेत में चारा चरती थी
तेरे बाप का वो क्या करती थी
हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ, हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ
मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा
वो लड्डू पड़े खाती है, हाँ
वो पेड़ों पे चढ़ जाती है, हाँ
वो लड्डू पड़े खाती है
वो पेड़ों पे चढ़ जाती है
ये मच्छर बीन बजाते हैं
वो अपना राग सुनती है
वो छुम्मक छुम्मक नाचे जब मैं दिल का बजाऊँ
मैं दिल का बजाऊँ एक तारा
मेरी भैंस को डंडा
मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा
वो खेत में चारा चरती थी
तेरे बाप का वो क्या करती थी
मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा
अरे घर का ये एक स्टेशन है, हाँ
ये झंडी प्यारी प्यारी है
अरे घर का ये एक स्टेशन है
ये झंडी प्यारी प्यारी है
हम सब तो रेल के डिब्बे हैं
वो अपनी इंजन गाडी है
वो गुस्सा जब भी करती है
तो बन जाती है
तो बन जाती है, अंगारा
मेरी भैंस को डंडा
मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा
वो खेत में चारा चरती थी
तेरे बाप का वो क्या करती थी
मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा
बंधू रे बंधू रे
वो जान से बढ़ कर प्यारी है
बंधू रे, बंधू रे
क्या बोलूं मैं,
क्या बोलूं मैं एक कटारी है
बंधू रे, बंधू रे
वो जान से बढ़ कर प्यारी है, हाँ
क्या बोलूं मैं एक कटारी है, हाँ
वो जान से बढ़ कर प्यारी है
क्या बोलूं मैं एक कटारी है
कजरारी उसकी अँखियाँ हैं
इस बात से अपनी यारी है
मैंने तो अपनी कल्लो का है नाम रखा
है नाम रखा, जहान आरा
मेरी भैंस को डंडा
मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा
वो खेत में चारा चरती थी
तेरे बाप का वो क्या करती थी
मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा
मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा
वो खेत में चारा चरती थी
तेरे बाप का वो क्या करती थी
हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ, हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ
मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा
वो खेत में चारा चरती थी
तेरे बाप का वो क्या करती थी
हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ, हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ
मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा
वो खेत में चारा चरती थी
तेरे बाप का वो क्या करती थी
हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ, हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ
मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा
.................................
Meri bhains ko danda kyun maara-Pagla kahin ka 1970
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Monday, 29 November 2010
ओ जानेवाले सुन ज़रा-प्रीत ना जाने रीत १९६६
एक गीत सुनवा रहे हैं आपको श्वेत श्याम युग से
जो लता और रफ़ी का गाया हुआ है। भारी भरकम शरीर के
मालिक शम्मी कपूर अपने समकालीन दुबलों से भी कहीं तेज़
गति से अपने शरीर को हिला डुला लिया करते थे। इसमें सभी
को आश्चर्य होता था। इसीलिए शायद वे औरों से ज्यादा प्रसिद्ध
हुए। उनके नाक नक्श भी औरों से बेहतर थे। गीत सुन कर
आपको आभास होगा कुछ कुछ शंकर जयकिशन के संगीत का,
लेकिन थोडा सा संदेह भी होगा कि ये किसी और कि करामात है।
हाँ जी, ये है कल्याणजी आनंदजी का संगीत है। उस समय के
काफी संगीतकार शंकर जयकिशन प्रभाव में रंगे सुनाई पढ़ते थे
क्युंकि शंकर जयकिशन उस दौर के सबसे सफल संगीतकार
माने जाते थे। इस गीत को फिल्माया गया है बी. सरोजा देवी और
शम्मी कपूर पर। गीत लिखा है कमर जलालाबादी ने।
श्रेणी बनाने के शौकीनों के लिए सन्देश- 'नारियल के झाड' अथवा
'साईकिल' श्रेणी का गीत। जैसा कि फ़िल्मी गीतों में होता आया है
गीत तकरार से शुरू होकर इकरार में बादल जाता है, इसमें भी
ऐसा ही है। तलाक और मैरिज कौंसलिंग वाली संस्थाओं को ऐसे
गीत सुनवाना चाहिए अपने क्लायंट्स को।
गीत के बोल:
ओ जानेवाले सुन ज़रा दिल का माजरा
ओ जानेवाले सुन ज़रा दिल का माजरा
तुझी से हमें प्यार था
तुझी से हमें प्यार है
जाओ जी मैंने सुन लिया ये दिल का माजरा
जाओ जी मैंने सुन लिया ये दिल का माजरा
ना तुम्हे कभी प्यार था
ना तुम्हे अब प्यार है
ओ जानेवाले सुन ज़रा
आ भी जा ज़िन्दगी का जाम लेकर
मेरी जान ना सता इलज़ाम देकर
हम तो जीते हैं तेरा नाम लेकर
तुम तो जीत हो मेरा नाम लेकर
आये हो प्यार का पैगाम लेकर
जाओगे तुम दिले-ए-नादान लेकर
जाओगे तुम दिले-ए-नादान लेकर
ओ जानेवाले सुन ज़रा दिल का माजरा
तुझी से हमें प्यार था
तुझी से हमें प्यार है
जाओ जी मैंने सुन लिया ये दिल का माजरा
ना तुम्हे कभी प्यार था
ना तुम्हे अब प्यार है
ओ जानेवाले सुन ज़रा
जा रे जा देख लिया प्यार तेरा
ये गिला शिकवा है बेकार तेरा
सरबसर झूठा है इकरार तेरा
तुम ही हो मैं हूँ तो बीमार तेरा
कर के मैं जाऊँगा दीदार तेरा
बान के दिखलाऊँगा दिलदार तेरा
बान के दिखलाऊँगा दिलदार तेरा
जाओ जी मैंने सुन लिया ये दिल का माजरा
ना तुम्हे कभी प्यार था
ना तुम्हे अब प्यार है
ओ जानेवाले सुन ज़रा दिल का माजरा
तुझी से हमें प्यार था
तुझी से हमें प्यार है
जाओ जी मैंने सुन लिया
आ तुझे प्यार कि पहचान दे दूं
तू जो कह दे तो अपनी जान दे दूं
तेरे एक नाज़ पे ईमान दे दूं
आ तुझे प्यार का अरमान दे दूं
मौज के पहलू में तूफ़ान दे दूं
चार दिन जीने का सामान दे दूं
चार दिन जीने का सामान दे दूं
चलो जी हुआ फैसला
नहीं कोई अब गिला
तुम्ही से मेरी जीत है
तुम्ही से मरी हार है
चलो जी हुआ फैसला
नहीं कोई अब गिला
तुम्ही से मेरी जीत है
तुम्ही से मरी हार है
................................
O Jaane waale sun zara-Preet na jaane reet 1962
जो लता और रफ़ी का गाया हुआ है। भारी भरकम शरीर के
मालिक शम्मी कपूर अपने समकालीन दुबलों से भी कहीं तेज़
गति से अपने शरीर को हिला डुला लिया करते थे। इसमें सभी
को आश्चर्य होता था। इसीलिए शायद वे औरों से ज्यादा प्रसिद्ध
हुए। उनके नाक नक्श भी औरों से बेहतर थे। गीत सुन कर
आपको आभास होगा कुछ कुछ शंकर जयकिशन के संगीत का,
लेकिन थोडा सा संदेह भी होगा कि ये किसी और कि करामात है।
हाँ जी, ये है कल्याणजी आनंदजी का संगीत है। उस समय के
काफी संगीतकार शंकर जयकिशन प्रभाव में रंगे सुनाई पढ़ते थे
क्युंकि शंकर जयकिशन उस दौर के सबसे सफल संगीतकार
माने जाते थे। इस गीत को फिल्माया गया है बी. सरोजा देवी और
शम्मी कपूर पर। गीत लिखा है कमर जलालाबादी ने।
श्रेणी बनाने के शौकीनों के लिए सन्देश- 'नारियल के झाड' अथवा
'साईकिल' श्रेणी का गीत। जैसा कि फ़िल्मी गीतों में होता आया है
गीत तकरार से शुरू होकर इकरार में बादल जाता है, इसमें भी
ऐसा ही है। तलाक और मैरिज कौंसलिंग वाली संस्थाओं को ऐसे
गीत सुनवाना चाहिए अपने क्लायंट्स को।
गीत के बोल:
ओ जानेवाले सुन ज़रा दिल का माजरा
ओ जानेवाले सुन ज़रा दिल का माजरा
तुझी से हमें प्यार था
तुझी से हमें प्यार है
जाओ जी मैंने सुन लिया ये दिल का माजरा
जाओ जी मैंने सुन लिया ये दिल का माजरा
ना तुम्हे कभी प्यार था
ना तुम्हे अब प्यार है
ओ जानेवाले सुन ज़रा
आ भी जा ज़िन्दगी का जाम लेकर
मेरी जान ना सता इलज़ाम देकर
हम तो जीते हैं तेरा नाम लेकर
तुम तो जीत हो मेरा नाम लेकर
आये हो प्यार का पैगाम लेकर
जाओगे तुम दिले-ए-नादान लेकर
जाओगे तुम दिले-ए-नादान लेकर
ओ जानेवाले सुन ज़रा दिल का माजरा
तुझी से हमें प्यार था
तुझी से हमें प्यार है
जाओ जी मैंने सुन लिया ये दिल का माजरा
ना तुम्हे कभी प्यार था
ना तुम्हे अब प्यार है
ओ जानेवाले सुन ज़रा
जा रे जा देख लिया प्यार तेरा
ये गिला शिकवा है बेकार तेरा
सरबसर झूठा है इकरार तेरा
तुम ही हो मैं हूँ तो बीमार तेरा
कर के मैं जाऊँगा दीदार तेरा
बान के दिखलाऊँगा दिलदार तेरा
बान के दिखलाऊँगा दिलदार तेरा
जाओ जी मैंने सुन लिया ये दिल का माजरा
ना तुम्हे कभी प्यार था
ना तुम्हे अब प्यार है
ओ जानेवाले सुन ज़रा दिल का माजरा
तुझी से हमें प्यार था
तुझी से हमें प्यार है
जाओ जी मैंने सुन लिया
आ तुझे प्यार कि पहचान दे दूं
तू जो कह दे तो अपनी जान दे दूं
तेरे एक नाज़ पे ईमान दे दूं
आ तुझे प्यार का अरमान दे दूं
मौज के पहलू में तूफ़ान दे दूं
चार दिन जीने का सामान दे दूं
चार दिन जीने का सामान दे दूं
चलो जी हुआ फैसला
नहीं कोई अब गिला
तुम्ही से मेरी जीत है
तुम्ही से मरी हार है
चलो जी हुआ फैसला
नहीं कोई अब गिला
तुम्ही से मेरी जीत है
तुम्ही से मरी हार है
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O Jaane waale sun zara-Preet na jaane reet 1962
Monday, 22 November 2010
तुमसे अच्छा कौन है-जानवर १९६५
हसरत जयपुरी शंकर जयकिशन और रफ़ी की तिकड़ी ने बहुत से
रोमांटिक गीत दिए हैं फिल्म जगत को, इनमे से कुछ एक गीत
तेज़ गति वाले भी हैं। ये गीत थोडा तेज़ है और शम्मी कपूर के लिए
विशेष तौर पर बनाया सा प्रतीत होता है, जिस गति से शम्मी की
गर्दन हिलती थी उसी गति से मिलती जुलती गीत की गति भी है।
कम्बल नृत्य से गीत शुरू होता है। शम्मी कपूर के साथ राजश्री की
जोड़ी है फिल्म में जिसे हम ब्रह्मचारी फिल्म में भी देख सकते हैं।
गीत के दूसरे अंतरे में आप जोगिंग और कबड्डी डांस भी देखेंगे।
तीसरे अंतरे के पहले देसी बालाओं का लोकप्रिय लंगड़ी खेल दिखेगा।
गीत के बोल:
हो, तुम से अच्छा कौन है
दिल लो जिगर लो जान लो
हम तुम्हारे हैं सनम
तुम हमें पहचान लो
हो, तुम से अच्छा कौन है
दिल लो जिगर लो जान लो
हम तुम्हारे हैं सनम
तुम हमें पहचान लो
मैं हूँ वो झोंका, मस्त हवा का
संग तुम्हारे, चलता रहूँगा
जब से हुयी है, तुम से मोहब्बत
मिलता रहा हूँ, मिलता रहूँगा
मैं हूँ वो झोंका, मस्त हवा का
संग तुम्हारे, चलता रहूँगा
जब से हुयी है, तुम से मोहब्बत
मिलता रहा हूँ, मिलता रहूँगा
हो ओ ओ ओ, तुम से अच्छा कौन है
दिल लो जिगर लो जान लो
हम तुम्हारे हैं सनम
तुम हमें पहचान लो
ओ, तुम से अच्छा कौन है
दिल लो जिगर लो जान लो
हम तुम्हारे हैं सनम
तुम हमें पहचान लो
सीने में दिल है, दिल में तुम्ही हो
तुम में हमारी, छोटी सी जान है
तुम हो सलामत, हम को नहीं गम
तुम से हमारी, दुनिया जवान है
सीने में दिल है, दिल में तुम्ही हो
तुम में हमारी, छोटी सी जान है
तुम हो सलामत, हम को नहीं गम
तुम से हमारी, दुनिया जवान है
हो ओ ओ ओ, तुम से अच्छा कौन है
दिल लो जिगर लो जान लो
हम तुम्हारे हैं सनम
तुम हमें पहचान लो
ओ, तुम से अच्छा कौन है
दिल लो जिगर लो जान लो
हम तुम्हारे हैं सनम
तुम हमें पहचान लो
मर के भी देखा, मर ना सके हम
दिल की लगी ने, हम को बचाया
तेरी नज़र का, जादू है शायद
जिसने हमें फिर, जिंदा बनाया
मर के भी देखा, मर ना सके हम
दिल की लगी ने, हम को बचाया
तेरी नज़र का, जादू है शायद
जिसने हमें फिर, जिंदा बनाया
हो ओ ओ ओ, तुम से अच्छा कौन है
दिल लो जिगर लो जान लो
हम तुम्हारे हैं सनम
तुम हमें पहचान लो
ओ, तुम से अच्छा कौन है
दिल लो जिगर लो जान लो
हम तुम्हारे हैं सनम
तुम हमें पहचान लो
रोमांटिक गीत दिए हैं फिल्म जगत को, इनमे से कुछ एक गीत
तेज़ गति वाले भी हैं। ये गीत थोडा तेज़ है और शम्मी कपूर के लिए
विशेष तौर पर बनाया सा प्रतीत होता है, जिस गति से शम्मी की
गर्दन हिलती थी उसी गति से मिलती जुलती गीत की गति भी है।
कम्बल नृत्य से गीत शुरू होता है। शम्मी कपूर के साथ राजश्री की
जोड़ी है फिल्म में जिसे हम ब्रह्मचारी फिल्म में भी देख सकते हैं।
गीत के दूसरे अंतरे में आप जोगिंग और कबड्डी डांस भी देखेंगे।
तीसरे अंतरे के पहले देसी बालाओं का लोकप्रिय लंगड़ी खेल दिखेगा।
गीत के बोल:
हो, तुम से अच्छा कौन है
दिल लो जिगर लो जान लो
हम तुम्हारे हैं सनम
तुम हमें पहचान लो
हो, तुम से अच्छा कौन है
दिल लो जिगर लो जान लो
हम तुम्हारे हैं सनम
तुम हमें पहचान लो
मैं हूँ वो झोंका, मस्त हवा का
संग तुम्हारे, चलता रहूँगा
जब से हुयी है, तुम से मोहब्बत
मिलता रहा हूँ, मिलता रहूँगा
मैं हूँ वो झोंका, मस्त हवा का
संग तुम्हारे, चलता रहूँगा
जब से हुयी है, तुम से मोहब्बत
मिलता रहा हूँ, मिलता रहूँगा
हो ओ ओ ओ, तुम से अच्छा कौन है
दिल लो जिगर लो जान लो
हम तुम्हारे हैं सनम
तुम हमें पहचान लो
ओ, तुम से अच्छा कौन है
दिल लो जिगर लो जान लो
हम तुम्हारे हैं सनम
तुम हमें पहचान लो
सीने में दिल है, दिल में तुम्ही हो
तुम में हमारी, छोटी सी जान है
तुम हो सलामत, हम को नहीं गम
तुम से हमारी, दुनिया जवान है
सीने में दिल है, दिल में तुम्ही हो
तुम में हमारी, छोटी सी जान है
तुम हो सलामत, हम को नहीं गम
तुम से हमारी, दुनिया जवान है
हो ओ ओ ओ, तुम से अच्छा कौन है
दिल लो जिगर लो जान लो
हम तुम्हारे हैं सनम
तुम हमें पहचान लो
ओ, तुम से अच्छा कौन है
दिल लो जिगर लो जान लो
हम तुम्हारे हैं सनम
तुम हमें पहचान लो
मर के भी देखा, मर ना सके हम
दिल की लगी ने, हम को बचाया
तेरी नज़र का, जादू है शायद
जिसने हमें फिर, जिंदा बनाया
मर के भी देखा, मर ना सके हम
दिल की लगी ने, हम को बचाया
तेरी नज़र का, जादू है शायद
जिसने हमें फिर, जिंदा बनाया
हो ओ ओ ओ, तुम से अच्छा कौन है
दिल लो जिगर लो जान लो
हम तुम्हारे हैं सनम
तुम हमें पहचान लो
ओ, तुम से अच्छा कौन है
दिल लो जिगर लो जान लो
हम तुम्हारे हैं सनम
तुम हमें पहचान लो
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