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Friday, 27 January 2012

मैं हूँ झुम झुम झुम झुम झुमरू-झुमरू १९६१

गीतों को सुनते सुनते कुछ अंतराल के बाद उसकी बारीकियां पकड़ में
आने लगती हैं और गुनगुनाने वाले का मुगालता ख़त्म हो जाता है कि वह
इसे बढ़िया ढंग से गा रहा है। ये बात दीगर है कि कुछ ओर्केस्ट्रा के कलाकारों
को ये मुगालता ता-उम्र बना रहता है। आज आपको एक गीत ऐसा सुनवाते हैं
जिसे मैंने जितनी बार इधर उधार सुना बिगड़ा हुआ ही सुना। इसकी हू-ब-हू
कॉपी करना असंभव है। गीत कठिनतम गीतों में से एक है और गायक का
अनूठा अंदाज़ इसमें अपने चरम पर है।

फिल्म का नाम है झुमरू और ये फिल्म का शीर्षक गीत है। गीत लिखा है
मजरूह सुल्तानपुरी ने और इसकी धुन स्वयं किशोर कुमार ने बनाई है ।

गीत के बोलों में जो योड्लिंग के साथ साथ कुछ अन्य शब्दों का समावेश भी
है जिसे आप स्वयं समझिये।



गीत के बोल:

मैं हूँ झुम झुम झुम झुम झुमरू
फक्कड़ घुँघरू बन के घूमूं
मैं ये प्यार का गीत सुनाता चला
मंजिल पे मेरी नज़र
मैं दुनिया से बेखबर
बीती बातों पे धूल उड़ाता चला

मैं हूँ झुम झुम झुम झुम झुमरू
फक्कड़ घुँघरू बन के घूमूं
मैं ये प्यार का गीत सुनाता चला
मंजिल पे मेरी नज़र
मैं दुनिया से बेखबर
बीती बातों पे धूल उड़ाता चला


मैं हूँ झुम झुम झुम झुम झुमरू
फक्कड़ घुँघरू बन के घूमूं
साथ में हमसफ़र ना कोई कारवां,
भोला भाला सीधा साधा
लेकिन दिल का हूँ शहज़ादा
है ये मेरी ज़मीन ये मेरा आसमान


मैं हूँ झुम झुम झुम झुम झुमरू
फक्कड़ घुँघरू बन के घूमूं
प्यार सीने मैं है हर किसी के लिए
मुजको प्यारा हर इंसान
दिलवालों पे हूँ कुर्बान
ज़िन्दगी है मेरी ज़िन्दगी के लिए


मैं हूँ झुम झुम झुम झुम झुमरू
फक्कड़ घुँघरू बन के घूमूं
मैं ये प्यार का गीत सुनाता चला
मंजिल पे मेरी नज़र
मैं दुनिया से बेखबर
बीती बातों पे धूल उड़ाता चला

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Main hoon jhum jhum jhum jhum jhumroo-jhumroo 1961

Tuesday, 19 July 2011

ठंडी हवा ये चांदनी सुहानी-झुमरू १९६१

कुछ सदाबहार धुनें दूसरे देशों की भीं सदाबहार धुनें हुआ करती हैं.
सन १९५५ के जूलियस ला रोसा के "डोमानी" को ही लीजिए. ये
आनंदित करने वाली धुन है. बोल आपके समझ आयें तो मुझे
भी मदद ज़रूर कीजियेगा समझने में.

सन १९६१ में इसका देसी संस्करण अवतरित हुआ फिल्म झुमरू में.
इस गीत को किशोर के सबसे ज्यादा पसंद किये जाने वाले गीतों
में स्थान प्राप्त है. गीत का देसीकरण होने पर उसमें आशा भोसले
की आवाज़ में शुरुआती गुनगुनाहट और किशोर की योडलिंग मिलायी
गयी-लीजिए तैयार एक कर्णप्रिय हिंदी गीत. फिल्म के गीत मजरूह
सुल्तानपुरी ने लिखे हैं और संगीत स्वयं किशोर कुमार का है.

इसको कहते हैं अच्छे संगीत का ग्लोबलायिजेशन. ये होना ज़रूर चाहिए
मगर मर्यादाओं के भीतर. क्रेडिट देने के मामले में हम हमेशा पीछे ही
रहते हैं. यू ट्यूब पर गीत के नीचे छपे कमेन्ट ज़रूर पढ़ें, आनंद आएगा.




गीत के बोल:

ठण्डी हवा ये चाँदनी सुहानी
ऐ मेरे दिल सुना कोई कहानी
लम्बी सी एक डगर है ज़िंदगानी
ऐ मेरे दिल सुना कोई कहानी

आ हा हा आ, हा आ आ हा हा

सारे हसीं नज़ारे, सपनों में खो गये
सर रख के आसमाँ पे, पर्वत भी सो गये
मेरे दिल, तू सुना, कोई ऐसी दास्तां
जिसको सुनकर, मिले चैन मुझे मेरी जाँ

मंज़िल है अन्जानी
ठण्डी हवा ये चाँदनी सुहानी
ऐ मेरे दिल सुना कोई कहानी

ऐसे मैं चल रहा हूँ पेड़ों की छाँव में
जैसे कोई सितारा बादल के गाँव में
मेरे दिल तू सुना, कोई ऐसी दास्तां
जिसको सुनकर, मिले चैन मुझे मेरी जाँ

मंज़िल है अन्जानी
ठण्डी हवा ये चाँदनी सुहानी
ऐ मेरे दिल सुना कोई कहानी

थोड़ी सी रात बीती, थोड़ी सी राह गई
खामोश रुत ना जाने, क्या बात कह गई
मेरे दिल तू सुना, कोई ऐसी दास्तां
जिसको सुनकर, मिले चैन मुझे मेरी जाँ

मंज़िल है अन्जानी
ठण्डी हवा ये चाँदनी सुहानी
ऐ मेरे दिल सुना कोई कहानी

ठण्डी हवा ये चाँदनी सुहानी
ऐ मेरे दिल सुना कोई कहानी
लम्बी सी एक डगर है ज़िंदगानी
ऐ मेरे दिल सुना कोई कहानी
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Thandi hawa ye chandni suhani-Jhumroo 1961
 
 
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