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Tuesday, 6 December 2011

बोलो क्या हमको दोगे -छुपा रुस्तम १९७३

निस्संदेह ये वर्ष कला और सिनेमा जगत के लिए त्रासदायी रहा है। इस वर्ष
अनेक नामचीन हस्तियों ने नश्वर संसार से विदा ली। उन कलाकारों की बस यादें
ही चित्र, चलचित्र और आवाज़ के रूप में हमें उनकी उपस्थिति का एहसास कराती
रहेंगी।

देव आनंद मेरे पसंदीदा कलाकारों में से एक हैं। उनके १-२ गीत रोज ही याद आ
जाते हैं। परसों के रोज मुझे एक गीत विशेष रूप से याद आया वो है फिल्म
छुपा रुस्तम का गीत-बोलो क्या हमको दोगे। इसमें शुरू में केवल 'आंय' बोला गया
है देव आनंद द्वारा। ये एक शब्द ही उनके अंदाज़ को बयां करने के लिए काफी है।
अब ये आप बूझिये कि ये शब्द किशोर कुमार की आवाज़ में है या स्वयं देव आनंद
की आवाज़ में। किशोर कुमार जिन्होंने देव आनंद के लिए विशेष तौर पर गीत गाये ,
यूँ कहिये पार्श्व गायन के मामले में वे या तो स्वयं के लिए या फिर केवल देव आनंद
के लिए ही परदे पर गीत गाते। ये सिलसिला कम से कम सन १९६९ में आई आराधना
के पहले तक तो चला। कभी कभी तो ये लगने लगता जैसे देव आनंद स्वयं परदे पर
गीत गा रहे हों। तय है कि किशोर के गाये देव आनंद अभिनीत गीतों में अतिरिक्त ऊर्जा
का संचार होता महसूस होता है।

बहुत कम ऐसे कलाकार हुए हैं हिंदी सिनेमा जगत में जिनके गीत देखते समय गीत
और धुन पर से ध्यान कुछ देर के लिए हट जाता है उनमें से एक हैं देव आनंद। उन्हें
सदाबहार यूँ ही नहीं कहा जाता है। वे हमेशा सक्रिय दिखलाई दिए और फिल्म उद्योग
के बाल, युवा, बुज़ुर्ग सभी वर्गों के लिए प्रेरणास्रोत बने रहे।

गीत कम सुना हुआ है इसलिए कम देखा गया भी कह सकते हैं इसको। इस गीत
में जो कि सन ७० के दशक के पूर्वार्ध का गीत है, देव आनंद अपनी पूरी ऊर्जा के
साथ नायिका से कदम ताल मिलते हुए जीवन्तता प्रदान कर रहे हैं। गायक-गायिका हैं
किशोर कुमार और आशा भोंसले। गीत सचिन देव बर्मन की संगीत फैक्ट्री की उपज है
जिसकी रचना की है गीतकार नीरज ने।




गीत के बोल:

पूछो पूछो, पूछो ना
बोलो क्या हमको दोगे
'आंय'
बोलो क्या हमको दोगे
दिल जो हमने तुमको बिना मांगे दे दिया हँसते हँसते
बोलो क्या हमको दोगे
बोलो क्या हमको दोगे
दिल जो हमने तुमको बिना मांगे दे दिया हँसते हँसते
पूछो क्या हमसे लोगे, पूछो
दिल जो हमने तुमसे बिना पूछे ले लिया हँसते हँसते
पूछो क्या हमसे लोगे

बहका करें जो तेरी बाँहों में
महका करें जो तेरी राहों में
बहका करें जो तेरी बाँहों में
महका करें जो तेरी राहों में
देखा करें जो तेरी चाहों में
घर बसा लें जो हम तेरी ही निगाहों में
तो क्या हमको दोगे
बोलो क्या हमको दोगे
दिल जो हमने तुमको बिना मांगे दे दिया हँसते हँसते
बोलो क्या हमको दोगे

हे हे हे हे
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
हो हो हो हो
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला

दुश्मन जलेंगे जब मिलेंगे हम
प्यासे कभी न फिर रहेंगे हम
जल रहा है
बहुत
तो जलने दो
दुश्मन जलेंगे जब मिलेंगे हम
प्यासे कभी न फिर रहेंगे हम
जन्नत बना लेंगे ज़मीन पे हम
खुशियाँ रहेंगी और रहेंगे हम अब
पूछो के तुम क्या हमसे लोगे, पूछो
पूछो क्या हमसे लोगे
दिल जो हमने तुमसे बिना पूछे ले लिया हा हा हा हा
पूछो क्या हमसे लोगे

तेरी बाँहों का जब सहारा हो
रास्ता फिर कितना ही अँधियारा हो
हो हो हो हो, हो हो हो
तेरी बाँहों का जब सहारा हो
रास्ता फिर कितना ही अँधियारा हो
उठते ही तूफ़ान तुम किनारा हो
जो कुछ अपना है वो सब कुछ तुम्हारा
हाँ तो क्या हमको दोगे
बोलो क्या हमको दोगे
दिल जो हमने तुमको बिना मांगे दे दिया हँसते हँसते
बोलो क्या हमको दोगे

पूछो क्या हमसे लोगे
बोलो क्या हमको दोगे
पूछो क्या हमसे
बोलो क्या हमको
पूछो, बोलो
ओ पूछो, बोलो
......................................
Bolo kya hamko doge-Chhupa Rustom 1973

Friday, 21 October 2011

सोना, सोना रूपा लायो रे-जोशीला १९७३

जोशीला नाम की एक फिल्म है सन १९७३ की। इसमें देव आनंद और
हेमा मालिनी प्रमुख कलाकार हैं। इस फिल्म को देख कर दर्शकों में जोश
जगा हो या ना हो, गीतों के श्रोताओं में जोश अवश्य ही जगा। फिल्म में
कुछ यादगार गीत हैं। आज आपको सुनवाते हैं आशा भोंसले का गाया थोड़ा
अलग सा गीत। वैसे आर डी बर्मन ने उनके लिए बहुतेरे अलग-हट-के गीत
बनाये हैं। फिल्म की खूबी साहिर लुधियानवी के लिखे गीत हैं। गीत भी कुछ
लीक से हट कर लिखा गया प्रतीत होता है।

वैसे ये पोस्ट भी अलग हट के ही है। इसे मैंने बिलकुल अलग हट के स्थान पर
लिखा था। रेलवे स्टेशन के प्लेटफोर्म पर लगी बेंच पर बैठ के। एक परिवार
के साथ दो छोटे छौने(बच्चे) चले जा रहे थे जिसमें से एक के जूतों से चूं चूं की
आवाज़ आ रही थी , उसे सुन के मुझे इस गीत का शुरूआती संगीत याद आया।
बच्चों के जूतों में चूं चूं की आवाज़ करने वाली आईटम का इस्तेमाल काफी पुराना
हो चुका है मगर सुनने में अच्छा लगता है। अगर किसी डोकरे के जूते में वही फिट
कर दिए जाएँ तो पब्लिक कहेगी-अरे मूंह से तो चूं चूं कम थी जो पैरों से भी करने
लगा बुड़ऊ?

गीत फिल्माया गया है नायिका हेमा मालिनी और अन्य बॉलीवुड में रोजी-रोटी
के लिए रोजाना जद्दो-जहद करने वाले अन्य अनजान से महत्वाकांक्षी सहयोगी
कलाकारों पर।

दर्शक दीर्घा में जो दो अन्य कलाकार हैं उनके नाम इस प्रकार से हैं-सुधीर और बिंदु।
गीत के बीच में दो अन्य महिला कलाकार दिखते हैं वे हैं- सुलोचना और पद्मा खन्ना।
गीत में आगे आपको इफ्तेखार भी पुलिस ऑफिसर की भूमिका में नज़र आयेंगे।

गीत कुछ हाई-फ्रीक्वेंसी ख्यालों से बंधा हुआ है। फिर भी आपको बतलाये देते हैं कि
फिल्म की सिचुएशन के मुताबिक ये नायिका द्वारा नायक की भाव भंगिमाओं और
कृत्यों के ऊपर कटाक्ष सा है। नायिका को ये लगता है कि नायक धन के लोभ में
कुछ आड़ी टेडी हरकतें कर रहा है।




गीत के बोल:


रु रु, रु, रु रु

ओ, सोना, सोना रूपा, सोना रूपा
सोना रूपा लायो रे
सोना रे, सोना
सोना रूपा, सोना रूपा लायो रे
ये सोना, ले जा रे
ये रूपा, ले जा रे
मुझे तो, दिल दे जा
मुझे तो, दिल दे जा

आ, सोना मिले तो लोग आजकल दिल को कभी ना लें
प्रीत के मुंह पर कालिख मल दें, प्यार को ठोकर दें
ओ सखी री, अब है ज़माना दूसरा
आ आ आ आ आ आ आ
सोना, सोना रे
सोना रूपा, सोना रूपा लायो रे
ये सोना, ले जा रे
ये रूपा, ले जा रे
मुझे तो, दिल दे जा
मुझे तो, दिल दे जा

आ, सोना मिले तो लोग आजकल दिल को कभी ना लें
प्रीत के मुंह पर कालिख मल दें प्यार को ठोकर दें
ओ सखी री, अब है ज़माना दूसरा
आ आ आ आ आ आ आ आ
सोना, सोना रे
सोना रूपा, सोना रूपा लायो रे

जादू भरे इशारे सब झूठे हैं
मतलब भरे सहारे सब छूटे हैं
या बा
वादे कभी ना सुनना पछताएगी
सपने कभी ना बुनना लुट जायेगी
ओ ओ ओ सखी री, अब है ज़माना दूसरा
आ आ आ
सोना, सोना रे
सोना रूपा, सोना रूपा लायो रे
ये सोना, ले जा रे
ये रूपा, ले जा रे
मुझे तो दिल दे जा
मुझे तो दिल दे जा
ला ला ला ला ला ला ला ला
सोना, सोना रे

पलकों तले ठिकाना कोई मांगे ना
दिल का भरा खजाना कोई मांगे ना
या बा
अपना इन्हें ना बना संसारी हैं
सदमे पड़ेंगे कहना व्यापारी हैं
ओ सखी री अब है ज़माना दूसरा
आ आ आ
सोना, सोना रे
सोना रूपा, सोना रूपा लायो रे
ये सोना, ले जा रे
ये रूपा, ले जा रे
मुझे तो दिल दे जा
मुझे तो दिल दे जा

आ, सोना मिले तो लोग आजकल दिल को कभी ना लें
प्रीत के मुंह पर कालिख मल दें प्यार को ठोकर दें
ओ ओ ओ सखी री अब है ज़माना दूसरा
आ आ आ आ आ आ आ
सोना, सोना रे
सोना रूपा, सोना रूपा लायो रे
सोना, सोना रे
........................
Sona Rupa Layo Re-Joshila 1973

Wednesday, 17 August 2011

मेरी बहना दीवानी है-अँधा कानून १९८३

१३ अगस्त को एक पोस्ट ज़रूर आनी चाहिए थी वो थी रक्षा बंधन स्पेशल। अब

प्रस्तुत है। गीत है फिल्म अंधा कानून से जो सन १९८३ की फिल्म है। फिल्म

में दक्षिण और उत्तर भारत के महानायक दोनों मौजूद हैं और उनके साथ हेमा

मालिनी और माधवी नायिकाएं हैं। प्रस्तुत गीत फिल्माया गया है रजनीकांत और

हेमा मालिनी पर जिन्होनें इस फिल्म में भाई बहन की भूमिकाएं निभाई हैं ।



गीत ख़ासा लोकप्रिय रहा फिल्म के बाकी गीतों की तरह। लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने

सन १९८३ की कई हिट फिल्मों में संगीत दिया और ये भी कहा जा सकता है कि

उनकी सन १९८३ की फिल्मों के गीत सुपर हिट रहे। फिल्म में हेमा की भूमिका एक

पुलिस इन्स्पेक्टर की है।







गीत के बोल:





मेरी बहना

हो मेरी बहना दीवानी है

मेरी बहना दीवानी है

पर वो समझती है

सबसे वो सयानी है

मेरा भैया

हो मेरा भैया दीवाना है

पर वो समझता है

सबसे वो सयाना है

मेरी बहना

हो मेरा भैया



रक्षा करे भगवन तुम्हारी

रक्षा करे भगवन तुम्हारी

तुमसे है हर बात हमारी

डर मत बहना बांध दे राखी

उस रब पर सब छोड़ दे बाकी

दुनिया आनी जानी है



मेरी बहना दीवानी है

पर वो समझती है

सबसे वो सयानी है

मेरा भैया

हो मेरी बहना



राखी का त्यौहार मनाएं

राखी का त्यौहार मनाएं

आओ झूमें नाचें गायें

आओ झूमें नाचें गायें

याद वो आई रात अँधेरी

एक बहन थी और भी मेरी

उसका बाकी क़र्ज़ है मुझ पर

उसका बदला फ़र्ज़ है मुझ पर

जिसकी ये कहानी है



मेरी बहना दीवानी है

पर वो समझती है

सबसे वो सयानी है

मेरा भैया दीवाना है

पर वो समझता है

सबसे वो सयाना है

मेरी बहना

हो मेरा भैया

...............................

Meri behna deewani hai-Andha Kanoon 1983

Wednesday, 13 July 2011

मेरी पायलिया गीत तेरे गाये-जुगनू १९७३

एक किलो के करीब गहने पहन कर नाचना आसान नहीं होता.
गीत प्रस्तुत है फिल्म जुगनू से. लता मंगेशकर का गाया और
हेमा मालिनी पर फिल्माया गया ये गीत मुझे तब से पसंद है
जबसे इसे फिल्म रिलीज़ के बाद पहली बार सुना था . हेमा
मालिनी फिल्म के अनुसार एक स्टेज शो में नाच रही हैं. उनका
नृत्य आनंदित करने वाला है और सिनेमा हॉल के अनुभव के
आधार पर मैंने पाया कि हर वर्ग का दर्शक इसको ध्यान से देख
कर खुश हो रहा था.

इस गीत पर गांव की नौटंकी में भी एक डांस देखा था जो कि डांस
मच्छर के भिनभिनाने जैसा था.

इस गीत की 'टुर्र रर्र रा टिपर टिपर' वाली ध्वनि आकर्षित करती
रही सदा. ये गीत इस बात का सबूत है कि सचिन देव बर्मन का
संगीत जैसे जैसे उनकी उम्र बढती गयी, जवान होता गया. सन
१९७३ में लता के गाये और संगीतकारों के गीतों से तुलना इस गीत
से कर के देख लीजिए, खुद आपको अंदाज़ा हो जायेगा कि उनके
संगीत में समय के साथ बदलाव होते चले हैं और उन्होंने दूसरों से
बेहतर धुनें बनाने का प्रयास किया है. एक बात तो ज़रूर है, आप
इस गीत की सन ५० के गीतों से तुलना नहीं कर सकते. सचिन देव
बर्मन के ज्ञानी भक्त फिल्म जुगनू के गीत को ख़ारिज कर देते हैं
क्यूंकि वे इसकी "फैली हुई सपनों की बाहें-घर नंबर ४४" तुलना करने
लग जाते हैं.



गीत के बोल:

मेरी पायलिया गीत तेरे गाये, हाय
मेरी पायलिया गीत तेरे गाये
चलूँ थम थम के, घुँघरू छनक जाये
मेरी पायलिया गीत तेरे गाये
चलूँ थम थम के, घुँघरू छनक जाये

मेरी पायलिया गीत तेरे गाये

तन डोले रे धितंग तितंग
मन बोले रे धितंग तितंग

अम्बुआ की डाली पे जब कोयल बोले
हौले हौले बिरहन का मन पापी डोले
किसे नींद आये किसे चैन आये
पिया याद आये जिया धड़क जाए

मेरी पायलिया गीत तेरे गाये
चलूँ थम थम के घुँघरू छनक जाये
मेरी पायलिया गीत तेरे गाये

घर बैठी शरमाऊँ गली में न आऊँ
लट बिखरे मन भटके कहीं खो ना जाऊँ
घर बैठी शरमाऊँ गली में न आऊँ
लट बिखरे मन भटके कहीं खो ना जाऊँ
डगर में हाय, नज़र मिल जाये
कमर बलखाये, चुनर सरक जाये

मेरी पायलिया गीत तेरे गाये
चलूँ थम थम के घुँघरू छनक जाये
मेरी पायलिया गीत तेरे गाये

पी मेरे, बिन तेरे, जिया नाहिं लागे
सारी रैना मेरे नैना रहें जागे जागे
पी मेरे, बिन तेरे, जिया नाहिं लागे
सारी रैना मेरे नैना रहें जागे जागे
अगन सी बन में, लगे सावन में
मेरे आँगन में, बिजली चमक जाये

मेरी पायलिया गीत तेरे गाये
चलूँ थम थम के घुँघरू छनक जाये
मेरी पायलिया गीत तेरे गाये
.....................................
Meri payaliya geet tere gaaye-Jugnu 1973

Saturday, 9 July 2011

बादल तो आये-दिल्लगी १९७८

राजेश रोशन ने भी और संगीतकारों की तरह लता मंगेशकर
के लिए विशेष धुनें बनायीं. कुछ गीत उनमें से ऐसे हैं जो
जनता के द्वारा ज्यादा नहीं सुने गए. धर्मेन्द्र, हेमा मालिनी
अभिनीत फिल्म 'दिल्लगी ' से एक मधुर गीत सुनवा रहे
हैं आपको. सन १९७८ में इस गीत का पदार्पण हुआ था .




गीत के बोल :

बादल तो आये लहरों के साये
ओ आने वाले पर तुम न आये
बादल तो आये लहरों के साये
ओ आने वाले पर तुम न आये

तुम ज़िन्दगी में यूँ मेरी आ कर
गुम हो गए हो ऐसे मुझको भुला कर
मैं प्यार तेरा दिल में सजा कर
बैठी हूँ कब से आस लगा कर

दुःख मेरे दिल के होंठों पे आये
ओ आने वाले पर तुम तो न आये

आवाज़ मेरी आ जाओ सुन के
रौंदो ना सपने हाय मेरे नयन के
इस पार तुमसे किसी भी जतन से
मैं राज़ अपने सारे कह दूँगी मन के

ख़ामोश रह के ये दर्द पाए
ओ आने वाले पर तुम तो न आये

बादल तो आये लहरों के साये
ओ आने वाले पर तुम तो न आये
तुम तो न आये

........................
Baadal to aaye-Dillagi 1978

Sunday, 19 June 2011

दुःख सुख की हर एक माला-कुदरत १९८१

कुछ काम अधूरे ही रह जाते हैं। फिल्म संगीत क्षेत्र में भी ऐसे कुछ
वाकये हैं। रफ़ी का गाया ये गीत केवल फिल्म के साउंड ट्रैक पर ही
उपलब्ध है। फिल्म के एल पी रेकोर्ड पर आपको ये गीत नए गायक
चंद्रशेखर गाडगीळ की आवाज़ में मिलेगा। रफ़ी के कुछ अंतिम गीतों
में से एक है और गीत में कुछ अजीब सी कशिश है और जब भी इसको
सुनो, ये गीत मस्तिष्क में उथल पुथल मचा देता है। मजरूह के लिखे
गीत की धुन तैयार की है राहुल देव बर्मन ने और इस फिल्म का शीर्षक
गीत चार हिस्सों में पार्श्व में बजता है।






गीत के बोल:

दुःख सुख की हर एक माला
कुदरत ही पिरोती है
दुःख सुख की हर एक माला
कुदरत ही पिरोती है
हाथों की लकीरों में
ये जागती है सोती है

दुःख सुख की हर एक माला
कुदरत ही पिरोती है

यादों की शमा ये बने
भूले नज़रों में कभी
आने वाले कल पे हँसे
खिलती बहारों में कभी
एक हाथ में अँधियारा
एक हाथ में ज्योति है

दुःख सुख की हर एक माला
कुदरत ही पिरोती है

आहों के ज़नाजे दिल में
आँखों में चिताएं गम की
उड़ गई आस दिल से
चली वो हवाएं गम की
तूफ़ान के सीने में ये
चैन से सोती है

दुःख सुख की हर एक माला
कुदरत ही पिरोती है

खुद को छुपाने वालों का
पल पल ये पीछा ये करे
सजा देती है ये ऐसी
तन मन छलनी करे
फिर दिल का हर एक घाव
अश्कों से ये धोती है

दुःख सुख की हर एक माला
कुदरत ही पिरोती है
हाथों की लकीरों में
ये जागती है सोती है
दुःख सुख की हर एक माला
कुदरत ही पिरोती है
...........................
Dukh sukh ki har ek maala-Kudrat 1981

Sunday, 12 June 2011

मैं कौन सा गीत सुनाऊँ-दिल्लगी १९७८

एक फुरसती ज़माना था जब जनता नदी नाले के किनारे बैठा करती,
गप शाप मारती और गीत गाती और सुनती। उस दौर की कल्पना
करना भी शायद आधुनिक युग में affordable नहीं है। साफ़ सुथरी
फ़िल्में बनाने के लिए विख्यात बासु चटर्जी की इस फिल्म ने
ज्यादा बिज़नेस नहीं किया मगर जनता द्वारा सराही अवश्य
गई। ये जी जनाब सराहने वाली जनता है ना, उसके बलबूते पर
बॉलीवुड की रोजी रोटी नहीं चलती। वो चलती है जब सिनेमा हॉल
की आगे की सीट से पीछे की सीट तक जगह ना बची हो। जिसे हम
चवन्नी क्लास कहते हैं, कई नामचीन नायकों की रोजी रोटी वहीँ से
निकल के आई। कभी कभार आंशिक कडकी के चलते हम भी उस
क्लास का आनंद उठा चुके हैं।

बासु की खूबी ये है कि उन्होंने हमारे इर्द गिर्द के और आम जीवन
के सामान्यतया ना छुए जाने वाले पहलुओं को बहुत सहजता से
प्रस्तुत किया परदे पर, दर्शक को यही लगा जैसे वो रोजमर्रा की
कोई आम घटना से रूबरू हो रहा हो। बाकी के निर्देशक अवास्तविकता
को वास्तविकता में तब्दील करने का प्रयत्न करते रहे और बासु चटर्जी
वास्तविकता को सरलता से प्रस्तुत करने में। शत प्रतिशत वास्तविक
हम किसी भी फ़िल्मी कथानक को नहीं कह सकते क्यूंकि नाटकीयता
आवश्यक तत्त्व है मंच और फिल्मों का। फर्क करना होता है हमें तो
बस नाटकीयता, जीवंत नाटकीयता, अति नाटकीयता, फूहड़ता और
मूढ़ता में । कल्पनाशीलता जब इनमे से किसी भी एक तत्त्व से चिपक
जाती है तो उसी तत्त्व विशेष को बढावा देती है। कल्पनाशीलता निर्देशक
के पास होना पहली अनिवार्य शर्त है, उसके बाद नंबर आता है कलाकारों
का। कल्पनाशीलता प्रस्तुतीकरण को बेहतर बनाने का काम करती है।

प्रस्तुत गीत में आपको जो कलाकार दिखाई देंगे उनके नाम इस
प्रकार से हैं-धर्मेन्द्र, असरानी, हेमा मालिनी और मिठू मुखर्जी।
पांचवे शख्स को शायद आप ना पहचान पायें तो आपको एक क्लू
देता हूँ-महाभारत सीरियल में मामा शकुनि की भूमिका निभाने
वाला कलाकार।



गीत के बोल:

मैं कौन सा गीत सुनाऊँ
क्या गाऊं जो पिया बस जाये
तेरे तन मन में
खिल जाएँ सोयी कलियाँ, हाय कलियाँ
और बहारें आयें सूनी बगियाँ में

ये कैसे अचानक बिना कोई आहट
चले आये हो तुम मेरी ज़िन्दगी में
तुम्हें आज पा कर मैं सब कुछ भुला कर
मगन हो के डूबी हुई हूँ ख़ुशी में

इतने ही रंग सलोने, हाय सलोने
भर गये हैं मेरे खाली सावन में

मैं कौन सा गीत सुनाऊँ
क्या गाऊं जो पिया बस जाये
तेरे तन मन में

कभी तुम सहारा बनोगे हमारा
मैं ये बात कल तक नहीं मानती थी
मगर आज कैसे ये लगता है जैसे
मैं हर जनम में तुम्हें जानती थी
लगता है सारी दुनिया, सारी दुनिया
भर गई है जैसे सज के कण कण में

मैं कौन सा गीत सुनाऊँ
क्या गाऊं जो पिया बस जाये
तेरे तन मन में
खिल जाएँ सोयी कलियाँ, हाय कलियाँ
और बहारें आयें सूनी बगियाँ में

.....................................
Main kaun sa geet sunaaon-Dillagi 1978

Sunday, 19 December 2010

आ जा तेरी याद आई-चरस १९७६

विलायत के नज़ारों वाला फिल्म चरस का गीत पेश है। इस गीत
की शुरुआत में गीतकार की आवाज़ है। जी हाँ ये भारी सी पंजाबी
लहजे वाली आवाज़ आनंद बक्षी की है। इन्होने कुछ फ़िल्मी गीत भी
गाये हैं । बाकी दो आवाजें आप बखूबी पहचानते हैं-लता और रफ़ी की।
परदे पर जो जोड़ी है वो श्रीमान देओल और श्रीमती देओल की है। ये
श्रीमान श्रीमती इस फिल्म के आने के बाद ही बने थे। प्रस्तुत गीत एक
सुपर हिट गीत है और अभी भी रेडियो पर नियमित रूप से बजता सुनाई
देता है।




गीत के बोल:

आनंद बक्षी: दिल इंसान का एक तराजू
जो इन्साफ को तोले
अपनी जगह पर प्यार है कायम
धरती अम्बर डोले
सब से बड़ा सच एक जगत में
भेद अनेक जो खोले
प्रेम बिना जीवन सूना
ये पागल प्रेमी बोले

लता :कि आ जा तेरी याद आयी
कि आ जा तेरी याद आयी
कि आ जा तेरी याद आयी
ओ बालम हरजाई
कि आ जा तेरी याद आयी

रफ़ी:कि आ जा तेरी याद आयी
कि आ जा तेरी याद आयी
कि आ जा तेरी याद आयी
ओ बालम हरजाई
कि आ जा तेरी याद आयी

लता: ज़ालिम कितनी देर लगा दी
तुमने आते आते
अब आये जो अब ना आते
तो हम जान से जाते
दिल दीवाना दीवाने को हम कैसे समझाते
देते राम दुहाई
कि आ जा तेरी याद आयी

रफ़ी: फुर्सत भी है मौसम भी है
मन है रंग रलियों में
छुप गयी है तू खुशबू बन के
शायद इन कलियों में
मैंने तुझको कितना ढूँढा आवारा गलियों में
यह आवाज़ लगाई
कि आ जा तेरी याद आयी

लता: मस्त हवा ने बात कोई
ऐसी कह दी कानों में
जैसे कोई मदिरा भर दे
खाली पैमानों में
तड़पा डाला आज मचलते दिल के अरमानों ने
रुत ने ली अंगडाई
कि आ जा तेरी याद आयी
कि आ जा तेरी याद आयी
.......................................................
Aa jaa teri yaad aayi-Charas 1976
 
 
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