आज आपको एक टाई-खींचू गीत सुनवाते हैं। नायिका बहुत ही प्यार से
नायक के गले में बंधी टाई खींच रही है जैसे कोई चरवाहा अपनी
प्यारी भैंस के गले में बंधी रस्सी खींचता है। गीत है फिल्म भला मानुस
से जिसके दो चर्चित गीत आपको सुनवा चुके हैं पहले ।
हिंदी फिल्मों में ऐसे गीत कम हैं जिसमें नायिका नायक की टांग खींचती
नज़र आती है। शायद पुरुष प्रधान मानसिकता ये करने से रोकती है ।
गीत मनोरंजक है इसलिए टिप्पणी भी रोचक होने से पाठक का आनंद
डेढ़ गुना हो जाता है। गीत शायद ही अपने कभी सुना या देखा हो।
खैर, अगर आप आर डी बर्मन भक्त हैं तो मैं आपकी तसल्ली के लिए
अपना चैनल बदल लेता हूँ और कहता हूँ -वह क्या छुपा नगीना है।
इसका फिल्मांकन भी ज़बरदस्त है । गायकी ज़बरदस्त है, संगीत
ज़बरदस्त है, नायक ज़बरदस्त है, नायिका ज़बरदस्त है। उनकी अदाकारी
ज़बरदस्त है और गीत में दिख रहे बाकी के कलाकार भी ज़बरदस्त है।
और तो और शायद आपको मालूम हो फिल्म "ज़बरदस्त" में भी
आर डी बर्मन का ही ज़बरदस्त म्युज़िक है।
कभी हंसी और कभी रहम आता है तेरे हाल पे
कभी हंसी और कभी रहम आता है तेरे हाल पे
मेड इन यू एस ऐ का लेबल लगा है देसी माल पे
मेड इन यू एस ऐ का लेबल लगा है देसी माल पे
अरे, कभी हंसी और कभी रहम आता है तेरे हाल पे
मेड इन यू एस ऐ का लेबल लगा है देसी माल पे
असली पर नकली का पर्दा क्या डाला है साले
झूठी चमक में और कोई होंगे फँस जाने वाले
असली पर नकली का पर्दा क्या डाला है साले
झूठी चमक में और कोई होंगे फँस जाने वाले
रंग ये तू दिखाना किसी और को
मैं तो प्यार से एक तमाचा दूँगी तेरे गाल पे
कभी हंसी और कभी रहम आता है तेरे हाल पे
मेड इन यू एस ऐ का लेबल लगा है देसी माल पे
देश है अब आज़ाद हमारा मिली हमें आजादी
अब हम अपनी मर्ज़ी से ही करेंगे अपनी शादी
देश है अब आज़ाद हमारा मिली हमें आजादी
अब हम अपनी मर्ज़ी से ही करेंगे अपनी शादी
नारियां अब किसी बात में कम नहीं, हो हो हो
ऐसे नचवायेंगी मर्दों को तबले की ताल पे
कभी हंसी और कभी रहम आता है तेरे हाल पे
कभी हंसी और कभी रहम आता है तेरे हाल पे
मेड इन यू एस ऐ का लेबल लगा है देसी माल पे
हा हा हा
.....................................
Kabhi hansi aur kabhi raham-Bhala manus 1979
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Monday, 30 January 2012
Friday, 27 January 2012
गुमसुम क्यूँ है सनम-भला मानुस १९७९
एक फिल्म आई थी कसमे वादे जिसके निर्देशक रमेश बहल थे। फिल्म
के साउंड ट्रेक यानि एल. पी. पर एक गाना उपलब्ध है आशा भोंसले का
गाया हुआ जो फिल्म में आपको कहीं नज़र नहीं आएगा। फिल्म कसमे वादे
में रणधीर कपूर और नीतू सिंह की जोड़ी है। रणधीर कपूर ने एक फिल्म
प्रोड्यूस की 'भला-मानुस' जिसमें उन्होंने ये गीत ले लिया। गीत का वीडिओ
देख कर लगता है मानो ये ज्यों का त्यों फिल्म में फिट कर दिया गया हो।
गायक की आवाज़ को वाद्य यन्त्र की तरह कैसे इस्तेमाल किया जाता है उसका
एक बढ़िया उदाहरण है ये गीत। गुलशन बावरा के लिखे गीत की धुन बनाई है
राहुल देव बर्मन ने। तबियत से इस गीत की धुन तैयार की गई है। मगर हर
कर्णप्रिय गीत की नियति "प्राण जाये पर वचन न जाये " के गीत "चैन से
हमको कभी " जैसी नहीं होती है जो फिल्म में से निकाले जाने के बाद भी
बेहद लोकप्रिय और अमर हो जाये।
गीत के बोल:
हो गुमसुम क्यों है सनम
अब ज़रा मान जा
प्यार का ये मौसम है
ऐसे में दिल न जला
गुमसुम क्यों है सनम
अब ज़रा मान जा
प्यार का ये मौसम है
ऐसे में दिल न जला
गुमसुम क्यों है सनम
गुमसुम क्यों है सनम
जाने बूझे नज़र चुराए
दिल की बातें समझ न पाए
ओ सितमगर देख अब तो, हो जा मेहरबान
जाने बूझे नज़र चुराए
दिल की बातें समझ न पाए
ओ सितमगर देख अब तो, हो जा मेहरबान
दर्द दिया है तो दे दे दवा
गुमसुम क्यों है सनम
अब ज़रा मान जा
प्यार का ये मौसम है
ऐसे में दिल न जला
गुमसुम क्यों है सनम
गुमसुम क्यों है सनम
कब से है बेक़रार ये दिल
कब से कहती हूँ झूम के मिल
ओ अनादी बन खिलाड़ी ले ले बाहों में
कब से है बेक़रार ये दिल
कब से कहती हूँ झूम के मिल
ओ अनादी बन खिलाड़ी ले ले बाहों में
कैसे पिया से मेरा पला पडा
गुमसुम क्यों है सनम
अब ज़रा मान जा
प्यार का ये मौसम है
ऐसे में दिल न जला
गुमसुम क्यों है सनम
गुमसुम क्यों है सनम
.............................................
Gum sum kyun hai sanam-Bhala manus 1979
के साउंड ट्रेक यानि एल. पी. पर एक गाना उपलब्ध है आशा भोंसले का
गाया हुआ जो फिल्म में आपको कहीं नज़र नहीं आएगा। फिल्म कसमे वादे
में रणधीर कपूर और नीतू सिंह की जोड़ी है। रणधीर कपूर ने एक फिल्म
प्रोड्यूस की 'भला-मानुस' जिसमें उन्होंने ये गीत ले लिया। गीत का वीडिओ
देख कर लगता है मानो ये ज्यों का त्यों फिल्म में फिट कर दिया गया हो।
गायक की आवाज़ को वाद्य यन्त्र की तरह कैसे इस्तेमाल किया जाता है उसका
एक बढ़िया उदाहरण है ये गीत। गुलशन बावरा के लिखे गीत की धुन बनाई है
राहुल देव बर्मन ने। तबियत से इस गीत की धुन तैयार की गई है। मगर हर
कर्णप्रिय गीत की नियति "प्राण जाये पर वचन न जाये " के गीत "चैन से
हमको कभी " जैसी नहीं होती है जो फिल्म में से निकाले जाने के बाद भी
बेहद लोकप्रिय और अमर हो जाये।
गीत के बोल:
हो गुमसुम क्यों है सनम
अब ज़रा मान जा
प्यार का ये मौसम है
ऐसे में दिल न जला
गुमसुम क्यों है सनम
अब ज़रा मान जा
प्यार का ये मौसम है
ऐसे में दिल न जला
गुमसुम क्यों है सनम
गुमसुम क्यों है सनम
जाने बूझे नज़र चुराए
दिल की बातें समझ न पाए
ओ सितमगर देख अब तो, हो जा मेहरबान
जाने बूझे नज़र चुराए
दिल की बातें समझ न पाए
ओ सितमगर देख अब तो, हो जा मेहरबान
दर्द दिया है तो दे दे दवा
गुमसुम क्यों है सनम
अब ज़रा मान जा
प्यार का ये मौसम है
ऐसे में दिल न जला
गुमसुम क्यों है सनम
गुमसुम क्यों है सनम
कब से है बेक़रार ये दिल
कब से कहती हूँ झूम के मिल
ओ अनादी बन खिलाड़ी ले ले बाहों में
कब से है बेक़रार ये दिल
कब से कहती हूँ झूम के मिल
ओ अनादी बन खिलाड़ी ले ले बाहों में
कैसे पिया से मेरा पला पडा
गुमसुम क्यों है सनम
अब ज़रा मान जा
प्यार का ये मौसम है
ऐसे में दिल न जला
गुमसुम क्यों है सनम
गुमसुम क्यों है सनम
.............................................
Gum sum kyun hai sanam-Bhala manus 1979
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Friday, 28 October 2011
हाँ पहली बार-और कौन १९७९
एक निहायत ही रोमांटिक गीत सुनवाते हैं आपको। एक थोड़ी कम
जानी पहचानी सी फिल्म से मगर बहुत पहचाने से संगीतकार की धुन
पर ये नगमा तैरता है। कुछ ऐसे दुर्लभ गीत हैं हिंदी फिल्म संगीत के
खजाने में जिनमें गिटार की आवाज़ के साथ किशोर की आवाज़ का
कातिलाना मिश्रण है। ये भी एक ऐसा ही गीत है जो मेरे ख्याल से
नॉन-रोमांटिक लोगों को भी उतना ही भाता है जितना रोमांटिक किस्म
के लोगों को। फिल्म एक भूतिया फिल्म है निर्देशन निर्माण व निर्देशन
रामसे ब्रदर्स ने किया है।
गीत जनता को इतना भाया कि इसका विडियो पॉप अल्बम वाले अंदाज़
में बनाया गया जिसे आपने हाल ही में २-३ वर्ष पूर्व देखा होगा टी वी चैनलों
पर। गीत अमित खन्ना का लिखा हुआ है जिनके लिखे और बप्पी के स्वरबद्ध
किये हिट गीत आप फिल्म चलते-चलते में सुन चुके हैं। बस एक ही चीज़
नहीं समझ आई इस गीत में-लड़की ने हाथ पकड़ कर क्या बोला? फिल्म में
इन्द्रजीत, पद्मिनी कपिला और रूपेश कुमार प्रमुख कलाकार हैं। पद्मिनी कपिला
फिल्मों के लिए उतना चर्चित नहीं हुईं जितनी वे नवीन निश्चल के साथ नाम जोड़े
जाने की वजह से हुईं।
गीत के बोल:
हाँ पहली बार
हाँ पहली बार
एक लड़की मेरा हाथ पकड़ कर बोली
हाँ रे हाँ
हाँ पहली बार
हाँ पहली बार
एक लड़की मेरा हाथ पकड़ कर बोली
हाँ रे हाँ
हाँ पहली बार
किसी को ना पता चला क्या हो गया
ऐसी मिली नज़रें के दिल खो गया
किसी को ना पता चला क्या हो गया
ऐसी मिली नज़रें के दिल खो गया
चुपके से वो पहलू में आ
चुपके से वो पहलू में आ
बोली मुझे आ रे आ
हाँ पहली बार
हाँ पहली बार
एक लड़की मेरा हाथ पकड़ कर बोली
हाँ रे हाँ
हाँ पहली बार
नशा आँखों में अब छाने लगा हैं
मज़ा जीने का अब आने लगा हैं
नशा आँखों में अब छाने लगा हैं
मज़ा जीने का अब आने लगा हैं
साथ है वो पास है वो
साथ है वो पास है वो
आज नहीं ना रे ना
हाँ पहली बार
हाँ पहली बार
एक लड़की मेरा हाथ पकड़ कर बोली
हाँ रे हाँ
हाँ पहली बार
साँसों में सांस जब मिल जाएगी
कली सपनों की खिल जाएगी
साँसों में सांस जब मिल जाएगी
कली सपनों की खिल जाएगी
कल का मुझे याद नहीं
कल का मुझे याद नहीं
आज की बात वाह रे वाह
हाँ पहली बार
हाँ पहली बार
एक लड़की मेरा हाथ पकड़ कर बोली
हाँ रे हाँ
हाँ पहली बार
.............................
Haan pehli baar-Aur Kaun 1979
जानी पहचानी सी फिल्म से मगर बहुत पहचाने से संगीतकार की धुन
पर ये नगमा तैरता है। कुछ ऐसे दुर्लभ गीत हैं हिंदी फिल्म संगीत के
खजाने में जिनमें गिटार की आवाज़ के साथ किशोर की आवाज़ का
कातिलाना मिश्रण है। ये भी एक ऐसा ही गीत है जो मेरे ख्याल से
नॉन-रोमांटिक लोगों को भी उतना ही भाता है जितना रोमांटिक किस्म
के लोगों को। फिल्म एक भूतिया फिल्म है निर्देशन निर्माण व निर्देशन
रामसे ब्रदर्स ने किया है।
गीत जनता को इतना भाया कि इसका विडियो पॉप अल्बम वाले अंदाज़
में बनाया गया जिसे आपने हाल ही में २-३ वर्ष पूर्व देखा होगा टी वी चैनलों
पर। गीत अमित खन्ना का लिखा हुआ है जिनके लिखे और बप्पी के स्वरबद्ध
किये हिट गीत आप फिल्म चलते-चलते में सुन चुके हैं। बस एक ही चीज़
नहीं समझ आई इस गीत में-लड़की ने हाथ पकड़ कर क्या बोला? फिल्म में
इन्द्रजीत, पद्मिनी कपिला और रूपेश कुमार प्रमुख कलाकार हैं। पद्मिनी कपिला
फिल्मों के लिए उतना चर्चित नहीं हुईं जितनी वे नवीन निश्चल के साथ नाम जोड़े
जाने की वजह से हुईं।
गीत के बोल:
हाँ पहली बार
हाँ पहली बार
एक लड़की मेरा हाथ पकड़ कर बोली
हाँ रे हाँ
हाँ पहली बार
हाँ पहली बार
एक लड़की मेरा हाथ पकड़ कर बोली
हाँ रे हाँ
हाँ पहली बार
किसी को ना पता चला क्या हो गया
ऐसी मिली नज़रें के दिल खो गया
किसी को ना पता चला क्या हो गया
ऐसी मिली नज़रें के दिल खो गया
चुपके से वो पहलू में आ
चुपके से वो पहलू में आ
बोली मुझे आ रे आ
हाँ पहली बार
हाँ पहली बार
एक लड़की मेरा हाथ पकड़ कर बोली
हाँ रे हाँ
हाँ पहली बार
नशा आँखों में अब छाने लगा हैं
मज़ा जीने का अब आने लगा हैं
नशा आँखों में अब छाने लगा हैं
मज़ा जीने का अब आने लगा हैं
साथ है वो पास है वो
साथ है वो पास है वो
आज नहीं ना रे ना
हाँ पहली बार
हाँ पहली बार
एक लड़की मेरा हाथ पकड़ कर बोली
हाँ रे हाँ
हाँ पहली बार
साँसों में सांस जब मिल जाएगी
कली सपनों की खिल जाएगी
साँसों में सांस जब मिल जाएगी
कली सपनों की खिल जाएगी
कल का मुझे याद नहीं
कल का मुझे याद नहीं
आज की बात वाह रे वाह
हाँ पहली बार
हाँ पहली बार
एक लड़की मेरा हाथ पकड़ कर बोली
हाँ रे हाँ
हाँ पहली बार
.............................
Haan pehli baar-Aur Kaun 1979
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Wednesday, 3 August 2011
आप अगर आप न होते-गृह प्रवेश १९७९
नायिका नंबर दो का घर में प्रवेश हो चुका है। ये है फिल्म गृह प्रवेश
से दूसरा गीत। गीत में संजीव कुमार और सारिका अपने अपने भावों
का अनुसार प्रदर्शन कर रहे हैं। कुछ रोमांस कुछ रोमांच वाला ये गीत
कर्णप्रिय है। गुलज़ार के बोल, सुलक्षणा पंडित की आवाज़ और कनु रॉय
का संगीत है। आनंद लीजिए।
उल्लेखनीय है कि कनु रॉय ने एक और लीक से हट के बनी फिल्म
आविष्कार में भी संगीत दिया है।
गीत के बोल:
आप अगर आप न होते तो भला क्या होते
लोग कहते हैं कि पत्थर के मसीहा होते
संगेमरमर के तराशे हुए चेहरे पे अगर
आ आ आ आ आ आ आ
संगेमरमर के तराशे हुए चेहरे पे अगर
आपके हँसने का अंदाज़ यही होता मगर
वो जो शरमा के झुका लेते हैं आप नज़र
ऐसे शरमाने पे हम कैसे न फ़िदा होते
आप अगर आप न होते तो भला क्या होते
लोग कहते हैं कि पत्थर के मसीहा होते
आपके माथे पे बसती है जवां शाम सहर
आपके माथे पे बसती है जवां शाम सहर
अच्छी लगती है हमें आपकी पेशानी मगर
वो जो माथे पे पसीना उभर आती है मगर
ऐसे माथे पे भला क्यों न लोग फ़िदा होते
आप अगर आप न होते तो भला क्या होते
लोग कहते हैं कि पत्थर के मसीहा होते
.......................................
Aap agar aaap na hote-Griha Pravesh 1979
से दूसरा गीत। गीत में संजीव कुमार और सारिका अपने अपने भावों
का अनुसार प्रदर्शन कर रहे हैं। कुछ रोमांस कुछ रोमांच वाला ये गीत
कर्णप्रिय है। गुलज़ार के बोल, सुलक्षणा पंडित की आवाज़ और कनु रॉय
का संगीत है। आनंद लीजिए।
उल्लेखनीय है कि कनु रॉय ने एक और लीक से हट के बनी फिल्म
आविष्कार में भी संगीत दिया है।
गीत के बोल:
आप अगर आप न होते तो भला क्या होते
लोग कहते हैं कि पत्थर के मसीहा होते
संगेमरमर के तराशे हुए चेहरे पे अगर
आ आ आ आ आ आ आ
संगेमरमर के तराशे हुए चेहरे पे अगर
आपके हँसने का अंदाज़ यही होता मगर
वो जो शरमा के झुका लेते हैं आप नज़र
ऐसे शरमाने पे हम कैसे न फ़िदा होते
आप अगर आप न होते तो भला क्या होते
लोग कहते हैं कि पत्थर के मसीहा होते
आपके माथे पे बसती है जवां शाम सहर
आपके माथे पे बसती है जवां शाम सहर
अच्छी लगती है हमें आपकी पेशानी मगर
वो जो माथे पे पसीना उभर आती है मगर
ऐसे माथे पे भला क्यों न लोग फ़िदा होते
आप अगर आप न होते तो भला क्या होते
लोग कहते हैं कि पत्थर के मसीहा होते
.......................................
Aap agar aaap na hote-Griha Pravesh 1979
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ज़िंदगी फूलों की नहीं-गृह प्रवेश 1979
आइये कुछ अलग हट के बनी फिल्मों से गीत सुने जाएँ । सबसे पहले
सुनते हैं कुछ ज्यादा ही हट के बनी फिल्म गृह प्रवेश से एक गीत।
बुद्धिजीवी दो प्रकार के होते हैं-नैसर्गिक और निर्मित। पहले वाले पैदाइशी
होते हैं और दुसरे वालों को जनता दर्ज़ा प्रदान करती है। हमारे देश के कुछ
बुद्धिजीवियों की खूबी है कि वे न समझ आने वाली चीज़ों पर भी वाह वाह
कर उठते हैं। आम जनता जब समझ में कुछ नहीं आता हो तो वो उन
बुद्धिजीवियों की राय और सहमति पर निर्भर हो जाती है ।
फिल्म के कथानक को थकानक कहा जाए तो भी फर्क नहीं पड़ेगा। इसको
समझने के लिए दिमाग खपाने की ज़रूरत पढ़ती है। संजीव कुमार और
शर्मीला टैगोर ने अपने अपने हिस्से का बढ़िया अभिनय किया है। १९७९
में बनी इस फिल्म को समय से आगे की बताते हैं कुछ लोग।
प्रस्तुत गीत फिल्म के टाइटल के साथ सुनाई पढता है इसलिए इसमें गीत का
आनंद लेने के अलावा कोई कन्फ्यूज़न नहीं है। गीत गुलज़ार का लिखा हुआ
है जिसे गा रहे हैं भूपेंद्र। संगीत तैयार किया है कनु रॉय ने।
गीत के बोल:
ज़िंदगी फूलों की नहीं
फूलों की तरह महकी रहे
ज़िंदगी फूलों की नहीं
फूलों की तरह महकी रहे
ज़िंदगी
जब कोई कहीं गुल खिलता है
आवाज़ नहीं आती लेकिन
आवाज़ नहीं आती लेकिन
खुशबू की खबर आ जाती है
खुशबू महकी रहे
ज़िंदगी
जब राह कहीं कोई मुड़ती है
मंजिल का पता तो होता नहीं
मंजिल का पता तो होता नहीं
इक राह पे राह मिल जाती है
राहें मुड़ती रहें
ज़िंदगी
.....................................
Zindagi phoolon ki nahin-Griha Pravesh 1979
सुनते हैं कुछ ज्यादा ही हट के बनी फिल्म गृह प्रवेश से एक गीत।
बुद्धिजीवी दो प्रकार के होते हैं-नैसर्गिक और निर्मित। पहले वाले पैदाइशी
होते हैं और दुसरे वालों को जनता दर्ज़ा प्रदान करती है। हमारे देश के कुछ
बुद्धिजीवियों की खूबी है कि वे न समझ आने वाली चीज़ों पर भी वाह वाह
कर उठते हैं। आम जनता जब समझ में कुछ नहीं आता हो तो वो उन
बुद्धिजीवियों की राय और सहमति पर निर्भर हो जाती है ।
फिल्म के कथानक को थकानक कहा जाए तो भी फर्क नहीं पड़ेगा। इसको
समझने के लिए दिमाग खपाने की ज़रूरत पढ़ती है। संजीव कुमार और
शर्मीला टैगोर ने अपने अपने हिस्से का बढ़िया अभिनय किया है। १९७९
में बनी इस फिल्म को समय से आगे की बताते हैं कुछ लोग।
प्रस्तुत गीत फिल्म के टाइटल के साथ सुनाई पढता है इसलिए इसमें गीत का
आनंद लेने के अलावा कोई कन्फ्यूज़न नहीं है। गीत गुलज़ार का लिखा हुआ
है जिसे गा रहे हैं भूपेंद्र। संगीत तैयार किया है कनु रॉय ने।
गीत के बोल:
ज़िंदगी फूलों की नहीं
फूलों की तरह महकी रहे
ज़िंदगी फूलों की नहीं
फूलों की तरह महकी रहे
ज़िंदगी
जब कोई कहीं गुल खिलता है
आवाज़ नहीं आती लेकिन
आवाज़ नहीं आती लेकिन
खुशबू की खबर आ जाती है
खुशबू महकी रहे
ज़िंदगी
जब राह कहीं कोई मुड़ती है
मंजिल का पता तो होता नहीं
मंजिल का पता तो होता नहीं
इक राह पे राह मिल जाती है
राहें मुड़ती रहें
ज़िंदगी
.....................................
Zindagi phoolon ki nahin-Griha Pravesh 1979
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Wednesday, 20 July 2011
तुझे देख कर जग वाले पर -सावन को आने दो १९७९
वर्ष १९७९ में येसुदास की आवाज़ हिंदी सिनेमा संगीत क्षेत्र में जितनी गूंजी
उतनी किसी और गायक की नहीं. अगला गीत सुनवाते हैं आपको फिल्म
सावन को आने दो से. इस सुपरहिट फिल्म से दो गीत आप पहले सुन चुके
हैं.
इस बार नायिका वही हैं-ज़रीना वहाब लेकिन नायक बदल गए हैं और वो हैं
अरुण गोविल. इस गीत को लिखा है इन्दीवर ने और इसकी धुन बनायीं है
संगीतकार राजकमल ने.
गीत के बोल:
तुझे देख कर जग वाले पर
तुझे देख कर जग वाले पर यकीन नहीं क्यूँ कर होगा
तुझे देख कर जग वाले पर यकीन नहीं क्यूँ कर होगा
जिसकी रचना इतनी सुन्दर वो कितना सुन्दर होगा
वो कितना सुन्दर होगा
ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
आ आ आ आ आ आ आ आ आ
तुझे देखने को मैं क्या हर दर्पण तरसा करता है
तुझे देखने को मैं क्या हर दर्पण तरसा करता है
ज्यों तुलसी के बिरवा को हर आंगन तरसा करता है
हर आंगन तरसा करता है
अंग अंग तेरा रस की गंगा, हो हो हो हो हो
अंग अंग तेरा रस की गंगा रूप का वो सागर होगा
जिसकी रचना इतनी सुन्दर वो कितना सुन्दर होगा
वो कितना सुन्दर होगा
ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
राग रंग रस का संगम आधार तू प्रेम कहानी का
राग रंग रस का संगम आधार तू प्रेम कहानी का
मेरे प्यासे मन में यूँ उतरी ज्यूं रेत में झरना पानी का
ज्यूं रेत में झरना पानी का
अपना रूप दिखाने को
अपना रूप दिखाने को तेरे रूप में खुद ईश्वर होगा
जिसकी रचना इतनी सुन्दर वो कितना सुन्दर होगा
वो कितना सुन्दर होगा
............................................
Tujhe dekh kar jag wale par-Sawan ko aane do 1979
उतनी किसी और गायक की नहीं. अगला गीत सुनवाते हैं आपको फिल्म
सावन को आने दो से. इस सुपरहिट फिल्म से दो गीत आप पहले सुन चुके
हैं.
इस बार नायिका वही हैं-ज़रीना वहाब लेकिन नायक बदल गए हैं और वो हैं
अरुण गोविल. इस गीत को लिखा है इन्दीवर ने और इसकी धुन बनायीं है
संगीतकार राजकमल ने.
गीत के बोल:
तुझे देख कर जग वाले पर
तुझे देख कर जग वाले पर यकीन नहीं क्यूँ कर होगा
तुझे देख कर जग वाले पर यकीन नहीं क्यूँ कर होगा
जिसकी रचना इतनी सुन्दर वो कितना सुन्दर होगा
वो कितना सुन्दर होगा
ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
आ आ आ आ आ आ आ आ आ
तुझे देखने को मैं क्या हर दर्पण तरसा करता है
तुझे देखने को मैं क्या हर दर्पण तरसा करता है
ज्यों तुलसी के बिरवा को हर आंगन तरसा करता है
हर आंगन तरसा करता है
अंग अंग तेरा रस की गंगा, हो हो हो हो हो
अंग अंग तेरा रस की गंगा रूप का वो सागर होगा
जिसकी रचना इतनी सुन्दर वो कितना सुन्दर होगा
वो कितना सुन्दर होगा
ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
राग रंग रस का संगम आधार तू प्रेम कहानी का
राग रंग रस का संगम आधार तू प्रेम कहानी का
मेरे प्यासे मन में यूँ उतरी ज्यूं रेत में झरना पानी का
ज्यूं रेत में झरना पानी का
अपना रूप दिखाने को
अपना रूप दिखाने को तेरे रूप में खुद ईश्वर होगा
जिसकी रचना इतनी सुन्दर वो कितना सुन्दर होगा
वो कितना सुन्दर होगा
............................................
Tujhe dekh kar jag wale par-Sawan ko aane do 1979
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Rajkamal,
Sawan ko aane do,
Yesudas,
Zarina Wahab
ओ गोरिया रे-नैया १९७९
फिल्म नैया का एक गीत आपको सुनवाया था, अब सुनिए इस फिल्म का
सबसे लोकप्रिय गीत. किसी फिल्म के अलोकप्रिय गीत पहले इसलिए सुनवाए
जाते हैं ताकि आपका अनसुने मधुए गीतों से परिचय हो जाए.
प्रस्तुत गीत येसुदास की आवाज़ में एकल गीत है. नाव में चप्पू चलाते हुए
नायक गीत गा रहा है. गीत संगीत दोनों रवींद्र जैन के हैं. इस गीत में नाविक
नायिका को धन्यवाद दे रहा है जिसकी वजह से उसकी टूटी फूटी नाव सज गयी
है. रवींद्र जैन ने येसुदास को पर्याप्त अवसर दिए गाने के उसी तरह बप्पी लहरी
ने भी येसुदास से कई कर्णप्रिय गीत गवाए. इस मामले में इन दोनों को धन्यवाद
देना ज़रूरी है. येसुदास बेहद प्रतिभाशाली गायक हैं जिनका नाम दक्षिण भारत में
फ़िल्मी हो या कर्नाटक संगीत दोनों क्षेत्र में आदर के साथ लिया जाता है.
रवींद्र जैन की टीम में बांसुरी वादक बेहद सुरीले हैं. इस गीत में भी बांसुरी की
तानें मनमोहक हैं. रवींद्र जैन ने संगीत में अपनी अलग शैली विकसित की और
उनके कुछ गीतों में ध्वनि संयोजन जटिल भी मिलेगा आपको. और वो जटिलता
सलिल चौधरी की याद दिला देती है.
एक अच्छा विडियो गीत प्रकृति के बीच शीर्षासन, व्यायाम, ऊंची इमारतों पर
उठक बैठक किये बिना भी बनाया जा सकता है.
ओ गोरिया रे, ओ गोरिया रे
तेरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव
ओ तेरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव
ओ गोरिया रे, ओ गोरिया रे
तेरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव
ओ तेरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव
नैया तो हमारा घर आँगना
इसी से ही पाना और माँगना
नैया तो हमारा घर आँगना
इसी से ही पाना और माँगना
गोरी ये दुआएं देना ज़रूर
माँझी से नैया हो नहीं दूर
हो गोरिया रे, ओ गोरिया रे
तेरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव
ओ तेरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव
सब को किनारे पहुँचायेगा
माँझी तो किनारा तभी पायेगा
सब को किनारे पहुँचायेगा
माँझी तो किनारा तभी पायेगा
गहरी नदी का ओर न छोर
लहरों से ज़्यादा मनवा में शोर
ओ गोरिया रे, ओ गोरिया रे
तेरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव
ओ तेरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव
अपना तो नित यही काम है
आने जाने वालों को सलाम है
अपना तो नित यही काम है
आने जाने वालों को सलाम है
कभी कभी आना इस नाव में
इक घर तेरा है मेरे गाँव में
ओ गोरिया रे, ओ गोरिया रे
तेरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव
ओ तेरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव
.........................................
O goriya re-Naiya 1979
सबसे लोकप्रिय गीत. किसी फिल्म के अलोकप्रिय गीत पहले इसलिए सुनवाए
जाते हैं ताकि आपका अनसुने मधुए गीतों से परिचय हो जाए.
प्रस्तुत गीत येसुदास की आवाज़ में एकल गीत है. नाव में चप्पू चलाते हुए
नायक गीत गा रहा है. गीत संगीत दोनों रवींद्र जैन के हैं. इस गीत में नाविक
नायिका को धन्यवाद दे रहा है जिसकी वजह से उसकी टूटी फूटी नाव सज गयी
है. रवींद्र जैन ने येसुदास को पर्याप्त अवसर दिए गाने के उसी तरह बप्पी लहरी
ने भी येसुदास से कई कर्णप्रिय गीत गवाए. इस मामले में इन दोनों को धन्यवाद
देना ज़रूरी है. येसुदास बेहद प्रतिभाशाली गायक हैं जिनका नाम दक्षिण भारत में
फ़िल्मी हो या कर्नाटक संगीत दोनों क्षेत्र में आदर के साथ लिया जाता है.
रवींद्र जैन की टीम में बांसुरी वादक बेहद सुरीले हैं. इस गीत में भी बांसुरी की
तानें मनमोहक हैं. रवींद्र जैन ने संगीत में अपनी अलग शैली विकसित की और
उनके कुछ गीतों में ध्वनि संयोजन जटिल भी मिलेगा आपको. और वो जटिलता
सलिल चौधरी की याद दिला देती है.
एक अच्छा विडियो गीत प्रकृति के बीच शीर्षासन, व्यायाम, ऊंची इमारतों पर
उठक बैठक किये बिना भी बनाया जा सकता है.
ओ गोरिया रे, ओ गोरिया रे
तेरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव
ओ तेरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव
ओ गोरिया रे, ओ गोरिया रे
तेरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव
ओ तेरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव
नैया तो हमारा घर आँगना
इसी से ही पाना और माँगना
नैया तो हमारा घर आँगना
इसी से ही पाना और माँगना
गोरी ये दुआएं देना ज़रूर
माँझी से नैया हो नहीं दूर
हो गोरिया रे, ओ गोरिया रे
तेरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव
ओ तेरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव
सब को किनारे पहुँचायेगा
माँझी तो किनारा तभी पायेगा
सब को किनारे पहुँचायेगा
माँझी तो किनारा तभी पायेगा
गहरी नदी का ओर न छोर
लहरों से ज़्यादा मनवा में शोर
ओ गोरिया रे, ओ गोरिया रे
तेरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव
ओ तेरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव
अपना तो नित यही काम है
आने जाने वालों को सलाम है
अपना तो नित यही काम है
आने जाने वालों को सलाम है
कभी कभी आना इस नाव में
इक घर तेरा है मेरे गाँव में
ओ गोरिया रे, ओ गोरिया रे
तेरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव
ओ तेरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव
.........................................
O goriya re-Naiya 1979
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Monday, 11 July 2011
तेरा कुछ खोया हो तो ढूंढ दें -नैया १९७९
फ़िल्म नैया सन १९७९ की फ़िल्म है. इस फ़िल्म के गीत मुझे अच्छे
लगते हैं, कोई विशेष वजह नहीं, बस यूँ ही . आज इस फ़िल्म से
आपको एक बिलकुल अनसुना सा गीत सुनवाते हैं येसुदास का गाया
हुआ. बोल और संगीत रवीन्द्र जैन के हैं. येसुदास के साथ आवाज़ है
सुरेश वाडकर की.
प्रशांत नंदा के साथ आप ज़रीना वहाब को इस फ़िल्म के गीत में देखेंगे.
बलदेव खोसा उस कलाकार का नाम है जो बाद में परदे पर अवतरित होता
है. दोनों फिल्म में सहनायक हैं. दूल्हे के भेस में हैं दिनेश ठाकुर .
कुछ कलाकारों की उपस्थिति से फिल्म ऑफ-बीट सी लगने लगती है.
दिनेश ठाकुर की उपस्थिति भी ऐसा ही काम करती है जानकार दर्शकों के
लिए.
ज़रीना वहाब शायद फ़िल्म इतिहास की उन चुनिन्दा अभिनेत्रियों में से हैं
जिहोनें बहुत से नायकों के साथ फिल्मों में काम किया जिनमें कुछ अनजान
से चेहरे और उस समय के उभरते नायक भी हैं.
गीत कर्णप्रिय है और इसका फिल्मांकन भी बांध के रखने वाला है.
गीत के बोल :
तेरा कुछ खोया हो तो ढूंढ दें
दिल न दुखा मान भी जा
गीता रानी, गीता रानी हंस दे ज़रा
हंस दे ओ गीता रानी हंस दे ज़रा
तेरा कुछ खोया हो तो ढूंढ दें
कभी दिल टूटा हो तो जोड़ दें
दिल न दुखा मान भी जा
गीता रानी, गीता रानी हंस दे ज़रा
हंस दे ओ गीता रानी हंस दे ज़रा
सावन में आवन का न्यौता
भेजा है मनभावन को
न्यौता भेजा है मनभावन को
हो ओ ओ हमने तो एक देव को सौंपा
तेरे रूप के चन्दन को
गोरी तेरे रूप के चन्दन को
हैरान सा सजन तेरा
गीता रानी, गीता रानी हंस दे ज़रा
हंस दे ओ गीता रानी हंस दे ज़रा
एक माझी के घर से तू गोरी
राजमहल में जाएगी
जाएगी, राजमहल में जाएगी
हो ओ ओ जो सुख हमने सपने में देखे
वो सारे सुख पायेगी
पायेगी ,वो सारे सुख पायेगी
देना नहीं हमको भुला
गीता रानी, गीता रानी हंस दे ज़रा
हंस दे ओ गीता रानी हंस दे ज़रा
मैं दूंगा तुझे कजरा बिंदिया
मैं रचा दूंगा मेहँदी महावर
खुद को बंधक रख के लूँगा
सोना करूंगा वो तुझपे निछावर
हाथों की चूड़ियाँ
मैं दूंगा
पाँव के बिछुआ
मैं दूंगा
क्या चुनरी साडी
मैं दूंगा
मैं दूंगा, मैं दूंगा, मैं दूंगा, हे
मिल के तुझे देंगे सजा
गीता रानी, गीता रानी हंस दे ज़रा
हंस दे ओ गीता रानी हंस दे ज़रा
तेरा कुछ खोया हो तो ढूंढ दें
कभी दिल टूटा हो तो जोड़ दें
हमरा कहा मान भी जा
गीता रानी गीता रानी हंस दे ज़रा
हंस दे ओ गीता रानी हंस दे ज़रा
....................................
Tera kuchh khoya ho to-Naiya 1979
लगते हैं, कोई विशेष वजह नहीं, बस यूँ ही . आज इस फ़िल्म से
आपको एक बिलकुल अनसुना सा गीत सुनवाते हैं येसुदास का गाया
हुआ. बोल और संगीत रवीन्द्र जैन के हैं. येसुदास के साथ आवाज़ है
सुरेश वाडकर की.
प्रशांत नंदा के साथ आप ज़रीना वहाब को इस फ़िल्म के गीत में देखेंगे.
बलदेव खोसा उस कलाकार का नाम है जो बाद में परदे पर अवतरित होता
है. दोनों फिल्म में सहनायक हैं. दूल्हे के भेस में हैं दिनेश ठाकुर .
कुछ कलाकारों की उपस्थिति से फिल्म ऑफ-बीट सी लगने लगती है.
दिनेश ठाकुर की उपस्थिति भी ऐसा ही काम करती है जानकार दर्शकों के
लिए.
ज़रीना वहाब शायद फ़िल्म इतिहास की उन चुनिन्दा अभिनेत्रियों में से हैं
जिहोनें बहुत से नायकों के साथ फिल्मों में काम किया जिनमें कुछ अनजान
से चेहरे और उस समय के उभरते नायक भी हैं.
गीत कर्णप्रिय है और इसका फिल्मांकन भी बांध के रखने वाला है.
गीत के बोल :
तेरा कुछ खोया हो तो ढूंढ दें
दिल न दुखा मान भी जा
गीता रानी, गीता रानी हंस दे ज़रा
हंस दे ओ गीता रानी हंस दे ज़रा
तेरा कुछ खोया हो तो ढूंढ दें
कभी दिल टूटा हो तो जोड़ दें
दिल न दुखा मान भी जा
गीता रानी, गीता रानी हंस दे ज़रा
हंस दे ओ गीता रानी हंस दे ज़रा
सावन में आवन का न्यौता
भेजा है मनभावन को
न्यौता भेजा है मनभावन को
हो ओ ओ हमने तो एक देव को सौंपा
तेरे रूप के चन्दन को
गोरी तेरे रूप के चन्दन को
हैरान सा सजन तेरा
गीता रानी, गीता रानी हंस दे ज़रा
हंस दे ओ गीता रानी हंस दे ज़रा
एक माझी के घर से तू गोरी
राजमहल में जाएगी
जाएगी, राजमहल में जाएगी
हो ओ ओ जो सुख हमने सपने में देखे
वो सारे सुख पायेगी
पायेगी ,वो सारे सुख पायेगी
देना नहीं हमको भुला
गीता रानी, गीता रानी हंस दे ज़रा
हंस दे ओ गीता रानी हंस दे ज़रा
मैं दूंगा तुझे कजरा बिंदिया
मैं रचा दूंगा मेहँदी महावर
खुद को बंधक रख के लूँगा
सोना करूंगा वो तुझपे निछावर
हाथों की चूड़ियाँ
मैं दूंगा
पाँव के बिछुआ
मैं दूंगा
क्या चुनरी साडी
मैं दूंगा
मैं दूंगा, मैं दूंगा, मैं दूंगा, हे
मिल के तुझे देंगे सजा
गीता रानी, गीता रानी हंस दे ज़रा
हंस दे ओ गीता रानी हंस दे ज़रा
तेरा कुछ खोया हो तो ढूंढ दें
कभी दिल टूटा हो तो जोड़ दें
हमरा कहा मान भी जा
गीता रानी गीता रानी हंस दे ज़रा
हंस दे ओ गीता रानी हंस दे ज़रा
....................................
Tera kuchh khoya ho to-Naiya 1979
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Monday, 6 June 2011
काली घटा छाई-काली घटा १९७९
जब भी कोई अमिताभ की फिल्म का गाना याद आता है तो साथ ही
साथ शशि कपूर की फिल्म का भी कोई गीत याद आ जाता है। अब
आपको सुनवाते हैं शशि कपूर और रेखा अभिनीत सन १९७९ की फिल्म
काली घटा से एक गीत। ये गीत फिल्म में एकल और युगल दोनों संस्करण
में उपलब्ध है। आज आपको सुनवा रहे हैं लता मंगेशकर का एकल गीत
जो रेखा पर फिल्माया गया है। आवाज़ लता की है, बोल आनंद बक्षी के
और संगीत लक्ष्मीकांत प्यारेलाल का।
गीत के बोल:
काली घटा छाई प्रेम रुत आई
आई आई आई आई तेरी याद आई
काली घटा छाई प्रेम रुत आई
आई आई आई आई तेरी याद आई
तुझे ढूंढें मेरे नैन
नहीं नींद नहीं चैन
काली घटा छाई प्रेम रुत आई
यूँ ही नहीं चली आयीं बहारें
फूल यूँ ही नहीं खिले
यूँ ही नहीं चली आयीं बहारें
फूल यूँ ही नहीं खिले
कुछ तो है कारण
इतने युगों से
दो प्रेमी नहीं मिले
छोटा सा जीवन
लम्बी जुदाई
काली घटा छाई प्रेम रुत आई
आई आई आई आई तेरी याद आई
काली घटा छाई प्रेम रुत आई
आई आई आई आई तेरी याद आई
तुझे ढूंढें मेरे नैन
नहीं नींद नहीं चैन
काली घटा छाई प्रेम रुत आई
आई आई आई आई तेरी याद आई
.......................................
Kali ghata chhayi(solo)-Kali ghata 1979
साथ शशि कपूर की फिल्म का भी कोई गीत याद आ जाता है। अब
आपको सुनवाते हैं शशि कपूर और रेखा अभिनीत सन १९७९ की फिल्म
काली घटा से एक गीत। ये गीत फिल्म में एकल और युगल दोनों संस्करण
में उपलब्ध है। आज आपको सुनवा रहे हैं लता मंगेशकर का एकल गीत
जो रेखा पर फिल्माया गया है। आवाज़ लता की है, बोल आनंद बक्षी के
और संगीत लक्ष्मीकांत प्यारेलाल का।
गीत के बोल:
काली घटा छाई प्रेम रुत आई
आई आई आई आई तेरी याद आई
काली घटा छाई प्रेम रुत आई
आई आई आई आई तेरी याद आई
तुझे ढूंढें मेरे नैन
नहीं नींद नहीं चैन
काली घटा छाई प्रेम रुत आई
यूँ ही नहीं चली आयीं बहारें
फूल यूँ ही नहीं खिले
यूँ ही नहीं चली आयीं बहारें
फूल यूँ ही नहीं खिले
कुछ तो है कारण
इतने युगों से
दो प्रेमी नहीं मिले
छोटा सा जीवन
लम्बी जुदाई
काली घटा छाई प्रेम रुत आई
आई आई आई आई तेरी याद आई
काली घटा छाई प्रेम रुत आई
आई आई आई आई तेरी याद आई
तुझे ढूंढें मेरे नैन
नहीं नींद नहीं चैन
काली घटा छाई प्रेम रुत आई
आई आई आई आई तेरी याद आई
.......................................
Kali ghata chhayi(solo)-Kali ghata 1979
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Sunday, 15 May 2011
तुम्हारे बिन गुज़ारे हैं कई दिन -आत्माराम १९७९
शंकर जयकिशन का संगीत हिंदी फिल्म संगीत की अमूल्य
निधि कहा जाता है। उनके संगीत में आपको वाद्य यंत्रों
का प्रचुर प्रयोग मिलेगा। सन १९७१ में जयकिशन के अवसान
के बाद शंकर अकेले ही संगीत तैयार करते रहे। उन्होंने
जोड़ी का नाम यथावत रखा-शंकर जयकिशन। आम श्रोता
तक इस प्रकार की जानकारी नहीं पहुँच पाती। वो केवल गीत
सुन सुन कर खुश हो लेता है। लता और रफ़ी के गाये युगल
गीत आपने कई सुने होंगे लेकिन कितने आप याद रख पाते
हैं वो अलग बात है। ये गीत सन ८० के आस पास बहुत बजा
करता था। इसकी फिल्म कब आई कब गई कुछ मालूम
नहीं पढ़ा। बरसों बाद जानकारी मिली कि ये शत्रुघ्न सिन्हा
और विद्या सिन्हा अभिनीत फिल्म आत्माराम से है। फिल्म में
आत्माराम का चरित्र शत्रुघ्न ने निभाया है। सिन्हा-सिन्हा की
जोड़ी वाली शायद ही कोई और फिल्म बनी हो । गीत में नायिका
नायक को उकसाती प्रतीत हो रही है और नायक दूर भाग रहा है।
ऐसा क्यूँ है ये जानने के लिए आपको फिल्म एक बार अवश्य देखना
पड़ेगी। फिल्म का निर्माण और निर्देशन सोहनलाल कँवर ने किया,
वही सोहनलाल जिनकी अधिकतर फिल्मों में आपको शंकर जयकिशन
का संगीत मिलेगा। इनकी जो फ़िल्में ज्यादा लोकप्रिय है वो है मनोज
कुमार अभिनीत बेईमान और राजेश खन्ना अभिनीत धनवान।
सन १९७५ की फिल्म सन्यासी के बाद शंकर-जयकिशन के नाम को
लोग भूलने लगे। इस गीत से उन्होंने फिर एक बार अपनी उपस्थिति
दर्ज करायी और उस समय के बने कर्णप्रिय युगल गीतों में इसे उच्च
स्थान दिलवाया। ये बात और है कि लक्ष्मी प्यारे कल्याणजी आनंदजी
और बप्पी लहरी के दौर में वे लम्बे समय तक नहीं टिक पाए।
गीत के बोल:
तुम्हारे बिन गुज़ारे हैं कई दिन अब ना गुजरेंगे
तुम्हारे बिन गुज़ारे हैं कई दिन अब ना गुजरेंगे
जो दिल में आ गई है हम वो कर ही गुजरेंगे
खबर क्या थी के अपने भी सितारे ऐसे बिगड़ेंगे
खबर क्या थी के अपने भी सितारे ऐसे बिगड़ेंगे
के जो पूजा के काबिल हैं वो ही यूँ रंग बदलेंगे
तुम्हारे बिन गुज़ारे हैं कई दिन अब ना गुजरेंगे
कई दिन बाद फिर ये साज ये सिंगार पाया है
नहीं मालूम था के आप यूँ इनकार कर देंगे
तुम्हें कैसे बताएं क्या हमारे साथ गुजरी है
तुम्हारे ख्वाब टूटेंगे अगर सच बात कह देंगे
नगे
तुम्हारे बिन गुज़ारे हैं कई दिन अब ना गुजरेंगे
तुम्हारी एक ना मानेंगे करेंगे आज मनमानी
बहुत तरसाया है तुमने नहीं अब और तरसेंगे
सताया तो नहीं करते कभी किस्मत के मारों को
किसी की जान जाएगी किसी के अरमान निकलेंगे
तुम्हारे बिन गुज़ारे हैं कई दिन अब ना गुजरेंगे
जो दिल में आ गई है हम वो कर ही गुजरेंगे
तुम्हारे बिन गुज़ारे हैं कई दिन अब ना गुजरेंगे
मनाया तुमको कितनी बार लेकिन तुम नहीं माने
तो अब मजबूर होकर हम शरारत पर भी उतरेंगे
हकीकत क्या है ये पहले बता देते तो अच्छा था
खुद अपने जाल से ही हम ना जाने कैसे निकलेंगे
तुम्हारे बिन गुज़ारे हैं कई दिन अब ना गुजरेंगे
जो दिल में आ गई है हम वो कर ही गुजरेंगे
तुम्हारे बिन गुज़ारे हैं, कई दिन अब ना गुजरेंगे
...........................................................................
Tumhare bin guzare hain-Atmaram 1979
निधि कहा जाता है। उनके संगीत में आपको वाद्य यंत्रों
का प्रचुर प्रयोग मिलेगा। सन १९७१ में जयकिशन के अवसान
के बाद शंकर अकेले ही संगीत तैयार करते रहे। उन्होंने
जोड़ी का नाम यथावत रखा-शंकर जयकिशन। आम श्रोता
तक इस प्रकार की जानकारी नहीं पहुँच पाती। वो केवल गीत
सुन सुन कर खुश हो लेता है। लता और रफ़ी के गाये युगल
गीत आपने कई सुने होंगे लेकिन कितने आप याद रख पाते
हैं वो अलग बात है। ये गीत सन ८० के आस पास बहुत बजा
करता था। इसकी फिल्म कब आई कब गई कुछ मालूम
नहीं पढ़ा। बरसों बाद जानकारी मिली कि ये शत्रुघ्न सिन्हा
और विद्या सिन्हा अभिनीत फिल्म आत्माराम से है। फिल्म में
आत्माराम का चरित्र शत्रुघ्न ने निभाया है। सिन्हा-सिन्हा की
जोड़ी वाली शायद ही कोई और फिल्म बनी हो । गीत में नायिका
नायक को उकसाती प्रतीत हो रही है और नायक दूर भाग रहा है।
ऐसा क्यूँ है ये जानने के लिए आपको फिल्म एक बार अवश्य देखना
पड़ेगी। फिल्म का निर्माण और निर्देशन सोहनलाल कँवर ने किया,
वही सोहनलाल जिनकी अधिकतर फिल्मों में आपको शंकर जयकिशन
का संगीत मिलेगा। इनकी जो फ़िल्में ज्यादा लोकप्रिय है वो है मनोज
कुमार अभिनीत बेईमान और राजेश खन्ना अभिनीत धनवान।
सन १९७५ की फिल्म सन्यासी के बाद शंकर-जयकिशन के नाम को
लोग भूलने लगे। इस गीत से उन्होंने फिर एक बार अपनी उपस्थिति
दर्ज करायी और उस समय के बने कर्णप्रिय युगल गीतों में इसे उच्च
स्थान दिलवाया। ये बात और है कि लक्ष्मी प्यारे कल्याणजी आनंदजी
और बप्पी लहरी के दौर में वे लम्बे समय तक नहीं टिक पाए।
गीत के बोल:
तुम्हारे बिन गुज़ारे हैं कई दिन अब ना गुजरेंगे
तुम्हारे बिन गुज़ारे हैं कई दिन अब ना गुजरेंगे
जो दिल में आ गई है हम वो कर ही गुजरेंगे
खबर क्या थी के अपने भी सितारे ऐसे बिगड़ेंगे
खबर क्या थी के अपने भी सितारे ऐसे बिगड़ेंगे
के जो पूजा के काबिल हैं वो ही यूँ रंग बदलेंगे
तुम्हारे बिन गुज़ारे हैं कई दिन अब ना गुजरेंगे
कई दिन बाद फिर ये साज ये सिंगार पाया है
नहीं मालूम था के आप यूँ इनकार कर देंगे
तुम्हें कैसे बताएं क्या हमारे साथ गुजरी है
तुम्हारे ख्वाब टूटेंगे अगर सच बात कह देंगे
नगे
तुम्हारे बिन गुज़ारे हैं कई दिन अब ना गुजरेंगे
तुम्हारी एक ना मानेंगे करेंगे आज मनमानी
बहुत तरसाया है तुमने नहीं अब और तरसेंगे
सताया तो नहीं करते कभी किस्मत के मारों को
किसी की जान जाएगी किसी के अरमान निकलेंगे
तुम्हारे बिन गुज़ारे हैं कई दिन अब ना गुजरेंगे
जो दिल में आ गई है हम वो कर ही गुजरेंगे
तुम्हारे बिन गुज़ारे हैं कई दिन अब ना गुजरेंगे
मनाया तुमको कितनी बार लेकिन तुम नहीं माने
तो अब मजबूर होकर हम शरारत पर भी उतरेंगे
हकीकत क्या है ये पहले बता देते तो अच्छा था
खुद अपने जाल से ही हम ना जाने कैसे निकलेंगे
तुम्हारे बिन गुज़ारे हैं कई दिन अब ना गुजरेंगे
जो दिल में आ गई है हम वो कर ही गुजरेंगे
तुम्हारे बिन गुज़ारे हैं, कई दिन अब ना गुजरेंगे
...........................................................................
Tumhare bin guzare hain-Atmaram 1979
Monday, 10 January 2011
तुम हो मेरे दिल की धड़कन-मंजिल १९७९
अमिताभ बच्चन की हिट फ़िल्में जनता को याद हैं। कुछ फ्लॉप
फ़िल्में भी हैं उनकी, जिनके मधुर गीत अक्सर इधर उधार बजा
करते हैं। परंपरा के अनुसार हम आपको उनकी कम देखी गई
फिल्म से कम सुना हुआ गीत सुनवाते हैं। ये गीत योगेश का लिखा,
किशोर कुमार का गाया हुआ और आर. डी. बर्मन द्वारा संगीतबद्ध है।
अब आप ये मत पूछियेगा कि परदे पर तानपुरा दिख रहा है और
गीत में गिटार की आवाज़ आ रही है। ये एक आधुनिक तानपुरा है
जो गिटार की आवाज़ निकालता है। तबला भी विशेष है जिसमें से
कांगो-बांगो की आवाज़ निकलती है।
गीत के बोल:
तुम हो मेरी दिल की धड़कन
तुम बिन लगे ना मन
तुम को ही ढूँढा करते हैं
हर पल मेरे दो नयन
तुम हो मेरी दिल की धड़कन
तुम बिन लगे ना मन
तुम को ही ढूँढा करते हैं
हर पल मेरे दो नयन
तुम जो नहीं तो कैसी ख़ुशी
मायूसियों में डूबी है ज़िन्दगी
मुझे तुम बिन हर पलछिन
दस्ता हैं सूनापन
तुम हो मेरे दिल की धड़कन
तुम बिन लगे ना मन
तुम को ही ढूँढा करते हैं
हर पल मेरे दो नयन
तुम्हें जो देखा तो पलकों तले
लाखों दिए से देखो जलने लगे
मेरा तन मन मेरा जीवन
तुमसे ही है मगन
तुम हो मेरी दिल की धड़कन
तुम बिन लगे ना मन
तुम को ही ढूँढा करते हैं
हर पल मेरे दो नयन
.........................................
Tum ho meri dil ki dhadkan-Manzil 1979
फ़िल्में भी हैं उनकी, जिनके मधुर गीत अक्सर इधर उधार बजा
करते हैं। परंपरा के अनुसार हम आपको उनकी कम देखी गई
फिल्म से कम सुना हुआ गीत सुनवाते हैं। ये गीत योगेश का लिखा,
किशोर कुमार का गाया हुआ और आर. डी. बर्मन द्वारा संगीतबद्ध है।
अब आप ये मत पूछियेगा कि परदे पर तानपुरा दिख रहा है और
गीत में गिटार की आवाज़ आ रही है। ये एक आधुनिक तानपुरा है
जो गिटार की आवाज़ निकालता है। तबला भी विशेष है जिसमें से
कांगो-बांगो की आवाज़ निकलती है।
गीत के बोल:
तुम हो मेरी दिल की धड़कन
तुम बिन लगे ना मन
तुम को ही ढूँढा करते हैं
हर पल मेरे दो नयन
तुम हो मेरी दिल की धड़कन
तुम बिन लगे ना मन
तुम को ही ढूँढा करते हैं
हर पल मेरे दो नयन
तुम जो नहीं तो कैसी ख़ुशी
मायूसियों में डूबी है ज़िन्दगी
मुझे तुम बिन हर पलछिन
दस्ता हैं सूनापन
तुम हो मेरे दिल की धड़कन
तुम बिन लगे ना मन
तुम को ही ढूँढा करते हैं
हर पल मेरे दो नयन
तुम्हें जो देखा तो पलकों तले
लाखों दिए से देखो जलने लगे
मेरा तन मन मेरा जीवन
तुमसे ही है मगन
तुम हो मेरी दिल की धड़कन
तुम बिन लगे ना मन
तुम को ही ढूँढा करते हैं
हर पल मेरे दो नयन
.........................................
Tum ho meri dil ki dhadkan-Manzil 1979
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Manzil,
RD Burman,
Yogesh
Saturday, 4 December 2010
तुम्हारा प्यार चाहिए-मनोकामना १९७९
राज किरण के नाम से एक गीत याद आ गया।
मधुर गीत है ये और इसे गाया है स्वयं संगीत
निर्देशक ने।
कम बजट वाली फिल्मों में से एक मनोकामना
सन १९७९ की फिल्म है। कल्पना अय्यर से मुखातिब
राज किरण समुद्र किनारे खड़े हुए ये गीत गा रहे हैं।
इस गीत को संगीत प्रेमी अच्छे रोमांटिक गीतों
में गिन लेते हैं। मैंने अच्छे(तथाकथित) संगीत प्रेमी
शब्द प्रयोग नहीं किया है ! कल्पना आयर को आपने
खलनायिका या डांसर की भूमिका में ही देखा होगा।
इसमें उन्हें नायिका की भूमिका में देख के आश्चर्य
तो नहीं हो रहा आपको ? छरहरी काया और तीखे
नाक नक्श वाली कल्पना की बतौर नायिका पारी लम्बी
नहीं खिंची। इन्दीवर के लिखे गीत को स्वरबद्ध किया
और गाया है बप्पी लहरी ने ।
गीत के बोल:
प्यार चाहिए मुझे जीने के लिए
तुम्हारा प्यार चाहिए मुझे जीने के लिए
मुझको हर घडी दीदार चाहिए
तुम्हारा प्यार चाहिए मुझे जीने के लिए
रूप रंग पर सदियों से मरता आया
सदियों से ये ज़माना
मैं मन की सुन्दरता देखूं
प्यार का मैं दीवाना
तुम्हारा प्यार चाहिए मुझे जीने के लिए
तूफ़ान में बाँहों की पतवार चाहिए
तुम्हारा प्यार चाहिए मुझे जीने के लिए
मेरे सिवा तुम और किसी को
दिल में ना आने दोगी
फूलों की तो बात ही क्या है
काँटों के साथ चलोगी
तुम्हारा प्यार चाहिए मुझे जीने के लिए
दिन रात वफ़ा का इकरार चाहिए
तुम्हारा प्यार चाहिए मुझे जीने के लिए
मधुर गीत है ये और इसे गाया है स्वयं संगीत
निर्देशक ने।
कम बजट वाली फिल्मों में से एक मनोकामना
सन १९७९ की फिल्म है। कल्पना अय्यर से मुखातिब
राज किरण समुद्र किनारे खड़े हुए ये गीत गा रहे हैं।
इस गीत को संगीत प्रेमी अच्छे रोमांटिक गीतों
में गिन लेते हैं। मैंने अच्छे(तथाकथित) संगीत प्रेमी
शब्द प्रयोग नहीं किया है ! कल्पना आयर को आपने
खलनायिका या डांसर की भूमिका में ही देखा होगा।
इसमें उन्हें नायिका की भूमिका में देख के आश्चर्य
तो नहीं हो रहा आपको ? छरहरी काया और तीखे
नाक नक्श वाली कल्पना की बतौर नायिका पारी लम्बी
नहीं खिंची। इन्दीवर के लिखे गीत को स्वरबद्ध किया
और गाया है बप्पी लहरी ने ।
गीत के बोल:
प्यार चाहिए मुझे जीने के लिए
तुम्हारा प्यार चाहिए मुझे जीने के लिए
मुझको हर घडी दीदार चाहिए
तुम्हारा प्यार चाहिए मुझे जीने के लिए
रूप रंग पर सदियों से मरता आया
सदियों से ये ज़माना
मैं मन की सुन्दरता देखूं
प्यार का मैं दीवाना
तुम्हारा प्यार चाहिए मुझे जीने के लिए
तूफ़ान में बाँहों की पतवार चाहिए
तुम्हारा प्यार चाहिए मुझे जीने के लिए
मेरे सिवा तुम और किसी को
दिल में ना आने दोगी
फूलों की तो बात ही क्या है
काँटों के साथ चलोगी
तुम्हारा प्यार चाहिए मुझे जीने के लिए
दिन रात वफ़ा का इकरार चाहिए
तुम्हारा प्यार चाहिए मुझे जीने के लिए
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Thursday, 25 November 2010
ऐसी वैसी ना समझ सजना -जानी दुश्मन १९७९
रीना रॉय फिल्मों में सुनील दत्त और शत्रुघ्न सिन्हा के साथ बहुत
देखी गयीं। एक फिल्म है जिसमे सुनील दत्त और शत्रुघ्न सिन्हा
दोनों मौजूद हैं। इसमें उनकी जोड़ी बनाई गई है सुनील दत्त के साथ।
शत्रुघ्न रीना के पीछे भागते नज़र आते हैं और रेखा शत्रुघ्न के पीछे।
इस गीत में रीना शत्रुघ्न को जवाब दे रही हैं गीत के माध्यम से।
बड़ा ही कन्फ्युज़ियाना जवाब है जिससे ये स्पष्ट नहीं होता कि नायिका
के मन में क्या है। फिल्म इसलिए तो देखी जाती है। सारी कहानी यहाँ
छाप दी तो मज़ा किरकिरा हो जायेगा ना। गायिका हैं आशा भोंसले
और गीत लिखा है वर्मा मालिक ने।
गीत के बोल:
ऐसी वैसी ना समझ सजना
ऐसी वैसी ना समझ सजना
जान दे दूँगी या जान ले लूंगी
ऐसी वैसी ना समझ सजना
ऐसी वैसी ना समझ सजना
जान दे दूँगी या जान ले लूंगी
ऐसी वैसी ना समझ सजना
इतने तो मेरा दिल भी जानता ज़रूर है
कितनी तू मेरे पास है और कितनी तू दूर है
काटों या फूल जो भी चाहे इसपे डाल दे
काटों या फूल जो भी चाहे इसपे डाल दे
मैंने तो ज़िन्दगी का दामन बिछ दिया
मैंने तो ज़िन्दगी का दामन बिछ दिया
दामन बिछ दिया
अभी तू ना समझे, मुझे अपना हाँ
मुझे अपना हाय, मुझे अपना
ऐसी वैसी ना समझ सजना
ऐसी वैसी ना समझ सजना
जान दे दूँगी या जान ले लूंगी
ऐसी वैसी ना समझ सजना
जो देख रहा हूँ कहीं ख्वाब तो नहीं है
काटों के बीच छुपा कहीं गुलाब तो नहीं है
इस कदर तू आ दिल के करीब है
इस कदर तू आ दिल के करीब है
लगता है मेरे प्यार का तू नसीब है
नसीब है
मैंने जो कहा उसे याद, हाँ याद
ज़रा याद रखना
ऐसी वैसी ना समझ सजना
ऐसी वैसी ना समझ सजना
जान दे दूँगी या जान ले लूंगी
ऐसी वैसी ना समझ सजना
देखी गयीं। एक फिल्म है जिसमे सुनील दत्त और शत्रुघ्न सिन्हा
दोनों मौजूद हैं। इसमें उनकी जोड़ी बनाई गई है सुनील दत्त के साथ।
शत्रुघ्न रीना के पीछे भागते नज़र आते हैं और रेखा शत्रुघ्न के पीछे।
इस गीत में रीना शत्रुघ्न को जवाब दे रही हैं गीत के माध्यम से।
बड़ा ही कन्फ्युज़ियाना जवाब है जिससे ये स्पष्ट नहीं होता कि नायिका
के मन में क्या है। फिल्म इसलिए तो देखी जाती है। सारी कहानी यहाँ
छाप दी तो मज़ा किरकिरा हो जायेगा ना। गायिका हैं आशा भोंसले
और गीत लिखा है वर्मा मालिक ने।
गीत के बोल:
ऐसी वैसी ना समझ सजना
ऐसी वैसी ना समझ सजना
जान दे दूँगी या जान ले लूंगी
ऐसी वैसी ना समझ सजना
ऐसी वैसी ना समझ सजना
जान दे दूँगी या जान ले लूंगी
ऐसी वैसी ना समझ सजना
इतने तो मेरा दिल भी जानता ज़रूर है
कितनी तू मेरे पास है और कितनी तू दूर है
काटों या फूल जो भी चाहे इसपे डाल दे
काटों या फूल जो भी चाहे इसपे डाल दे
मैंने तो ज़िन्दगी का दामन बिछ दिया
मैंने तो ज़िन्दगी का दामन बिछ दिया
दामन बिछ दिया
अभी तू ना समझे, मुझे अपना हाँ
मुझे अपना हाय, मुझे अपना
ऐसी वैसी ना समझ सजना
ऐसी वैसी ना समझ सजना
जान दे दूँगी या जान ले लूंगी
ऐसी वैसी ना समझ सजना
जो देख रहा हूँ कहीं ख्वाब तो नहीं है
काटों के बीच छुपा कहीं गुलाब तो नहीं है
इस कदर तू आ दिल के करीब है
इस कदर तू आ दिल के करीब है
लगता है मेरे प्यार का तू नसीब है
नसीब है
मैंने जो कहा उसे याद, हाँ याद
ज़रा याद रखना
ऐसी वैसी ना समझ सजना
ऐसी वैसी ना समझ सजना
जान दे दूँगी या जान ले लूंगी
ऐसी वैसी ना समझ सजना
Tuesday, 23 November 2010
ओ मेरी जान-जानी दुश्मन १९७९
जम्पिंग जैक साहब का एक गीत और सुना जाए। थोडा तेज़ गति वाला ये
गीत कसा हुआ है फिल्मांकन में। फिल्म जानी दुश्मन के लगभग सारे गीत
देखने लायक हैं। इस गीत में भी उनकी जम्पिंग न्यूनतम है। लोग खामखाँ
उनके नाम के साथ जम्पिंग शब्द लगा देते हैं।
किशोर कुमार के साथ गीत गा रही हैं अनुराधा पौडवाल। संगीतकार जोड़ी
लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने समय के साथ चलते हुए नए गायक, गायिकाओं को
अवसर दिया और उनकी ये स्ट्राटेजी सफल भी रही। अनुराधा पौडवाल के
कैरियर के पहले कुछ गीतों में से एक है ये।
परदे पर आपको जीतेंद्र और नीतू सिंह की जोड़ी दिखाई देगी जो पेड़ों के इर्द गिर्द
डांस डॉयरेक्टर के इशारों पर नाच रहे हैं।
गीत के बोल:
ओ हो हो हो हो हो
हो हो हो हे हे हे
ओ मेरी जान
बोल मेरी जान
अरे ओ मेरी जान
बोल मेरी जान
तेरी आँखों ने क्या जादू किया
मैं भी गया मेरा दिल भी गया
ओ मेरी जान
बोल मेरी जान
ओ मेरी जान
बोल मेरी जान
तू नीदों में सपने पिरो गया
उस दिन से मुझे कुछ हो गया
ओ मेरी जान
बोल मेरी जान
अरे ओ मेरी जान
बोल मेरी जान
तेरी आँखों ने क्या जादू किया
मैं भी गया मेरा दिल भी गया
प्यार जो किया तो भुलाना ना मुझे
छोड़ जाना ना मुझे तडपाना ना मुझे
ना छोड़ना मुझे, तडपाना ना मुझे
प्यार जो किया तो भुलाना ना मुझे
छोड़ जाना ना मुझे तडपाना ना मुझे
मेरे प्यार को है तेरा आसरा
आबाद तुझसे है मेरा जहान
ओ मेरी जान
बोल मेरी जान
ओ मेरी जान
बोल मेरी जान
तू नीदों में सपने पिरो गया
उस दिन से मुझे कुछ हो गया
हर घडी अब मुझे यही काम है
तेरी याद है या तेरा नाम है
या तेरी याद है या तेरा नाम है
हर घडी अब मुझे यही काम है
तेरी याद है या तेरा नाम है
तेरे मिलने से धड़कन ने अंगडाई ली
दिल की तमन्ना हुई है जवान
ओ मेरी जान
बोल मेरी जान
अरे ओ मेरी जान
बोल मेरी जान
तेरी आँखों ने क्या जादू किया
मैं भी गया मेरा दिल भी गया
खुल गए ज़िन्दगी के नए रास्ते
तू मेरे वास्ते, मैं तेरे वास्ते
तू मेरे वास्ते, मैं तेरे वास्ते
खुल गए ज़िन्दगी के नए रास्ते
तू मेरे वास्ते, मैं तेरे वास्ते
है मोहब्बत के मालिक तेरा शुक्रिया
समझो अगर मेरे दिल की जुबां
ओ मेरी जान
बोल मेरी जान
ओ मेरी जान
बोल मेरी जान
तू नीदों में सपने पिरो गया
तेरी आँखों ने क्या जादू किया
मैं भी गया मेरा दिल भी गया
गीत कसा हुआ है फिल्मांकन में। फिल्म जानी दुश्मन के लगभग सारे गीत
देखने लायक हैं। इस गीत में भी उनकी जम्पिंग न्यूनतम है। लोग खामखाँ
उनके नाम के साथ जम्पिंग शब्द लगा देते हैं।
किशोर कुमार के साथ गीत गा रही हैं अनुराधा पौडवाल। संगीतकार जोड़ी
लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने समय के साथ चलते हुए नए गायक, गायिकाओं को
अवसर दिया और उनकी ये स्ट्राटेजी सफल भी रही। अनुराधा पौडवाल के
कैरियर के पहले कुछ गीतों में से एक है ये।
परदे पर आपको जीतेंद्र और नीतू सिंह की जोड़ी दिखाई देगी जो पेड़ों के इर्द गिर्द
डांस डॉयरेक्टर के इशारों पर नाच रहे हैं।
गीत के बोल:
ओ हो हो हो हो हो
हो हो हो हे हे हे
ओ मेरी जान
बोल मेरी जान
अरे ओ मेरी जान
बोल मेरी जान
तेरी आँखों ने क्या जादू किया
मैं भी गया मेरा दिल भी गया
ओ मेरी जान
बोल मेरी जान
ओ मेरी जान
बोल मेरी जान
तू नीदों में सपने पिरो गया
उस दिन से मुझे कुछ हो गया
ओ मेरी जान
बोल मेरी जान
अरे ओ मेरी जान
बोल मेरी जान
तेरी आँखों ने क्या जादू किया
मैं भी गया मेरा दिल भी गया
प्यार जो किया तो भुलाना ना मुझे
छोड़ जाना ना मुझे तडपाना ना मुझे
ना छोड़ना मुझे, तडपाना ना मुझे
प्यार जो किया तो भुलाना ना मुझे
छोड़ जाना ना मुझे तडपाना ना मुझे
मेरे प्यार को है तेरा आसरा
आबाद तुझसे है मेरा जहान
ओ मेरी जान
बोल मेरी जान
ओ मेरी जान
बोल मेरी जान
तू नीदों में सपने पिरो गया
उस दिन से मुझे कुछ हो गया
हर घडी अब मुझे यही काम है
तेरी याद है या तेरा नाम है
या तेरी याद है या तेरा नाम है
हर घडी अब मुझे यही काम है
तेरी याद है या तेरा नाम है
तेरे मिलने से धड़कन ने अंगडाई ली
दिल की तमन्ना हुई है जवान
ओ मेरी जान
बोल मेरी जान
अरे ओ मेरी जान
बोल मेरी जान
तेरी आँखों ने क्या जादू किया
मैं भी गया मेरा दिल भी गया
खुल गए ज़िन्दगी के नए रास्ते
तू मेरे वास्ते, मैं तेरे वास्ते
तू मेरे वास्ते, मैं तेरे वास्ते
खुल गए ज़िन्दगी के नए रास्ते
तू मेरे वास्ते, मैं तेरे वास्ते
है मोहब्बत के मालिक तेरा शुक्रिया
समझो अगर मेरे दिल की जुबां
ओ मेरी जान
बोल मेरी जान
ओ मेरी जान
बोल मेरी जान
तू नीदों में सपने पिरो गया
तेरी आँखों ने क्या जादू किया
मैं भी गया मेरा दिल भी गया
Monday, 22 November 2010
तेरे हाथों में पहना के चूड़ियाँ -जानी दुश्मन १९७९
एक सुपर डुपर हिट गीत सुना जाए। आप सोच रहे होंगे किसी
काली पीली फिल्म से होगा। नहीं जी, ये तो रंगीन युग वाला है जी।
शादी स्पेशल युग(९० का दशक) के बहुत पहले बना हुआ है जी ये तो।
१९७९ की फिल्म जानी दुश्मन में ये गीत है। सुनते ही आपको याद
आएगा की इसको खूब बजते सुना था जगह जगह। दूरदर्शन के
चित्रहार पर भी इसे खूब देखा गया था। उस समय एक ही तो गीत वाला
कार्यक्रम हुआ करता था-चित्रहार। उसेक अलावा विडियो गीत देखने का
कोई जरिया नहीं हुआ करता था। गीत अच्छी खासी कसरत करवा देता
है, सितारों की भीड़ जो है इसमें। राज कुमार कोहली निर्देशित फिल्म
में काफी भव्य सेट इस्तेमाल किये गए थे। इस गीत के फिल्मांकन में
सबसे ज्यादा व्यय हुआ होगा। इस गीत में 'जम्पिंग जैक' साहब ने जो
वस्त्र पहन रखे हैं उनकी नक़ल काफी देखने को मिली थी फिल्म के
रिलीज़ के कुछ समय बाद। एक बात तो तय है कि इस गीत में जीतू
भाई ने अपनी ट्रेड मार्क जम्पिंग बहुत कम की है ।
गीत में आपको जो कलाकार दिखाई देंगे उनके नाम इस प्रकार से हैं-
जीतेंद्र, नीतू सिंह, बिंदिया गोस्वामी, और सारिका।
गीत के बोल:
तेरे हाथों में पहना के चूड़ियाँ, ओ चूड़ियाँ
हाथों में पहना के चूड़ियाँ
ओ तेरे हाथों में पहना के चूड़ियाँ
के मौज बंजारा ले गया, हाय
के मौज बंजारा ले गया, ले गया
तेरे हाथों में पहना के चूड़ियाँ
तूने दिल तक तो मेरा ले लिया, ओ ले लिया
दिल तक तो मेरा ले लिया
तूने दिल तक तो मेरा ले लिया
के वो क्या बेचारा ले गया, हाय
के वो क्या बेचारा ले गया, ले गया
तूने दिल तक तो मेरा ले लिया
मेरे सामने ही कोई बेगाना
मेरे सामने ही कोई बेगाना
के रूप का नज़ारा ले गया, हाय
के रूप का नज़ारा ले गया ले गया
तू जलता है क्यों रे दीवाने
दीवाने,
तू जलता है क्यों रे दीवाने
के वो क्या तुम्हारा ले गया, हाय
के वो क्या तुम्हारा ले गया, ले गया
तेरे हाथों में पहना के चूड़ियाँ
हो, इसे मेरे ही तू नाम लगा दे
इसे मेरे ही तू नाम लगा दे
जवानी तेरे किस काम की
इसे मेरे ही तू नाम लगा दे
जवानी तेरे किस काम की
दिल लेगा मेरा कोई दिलवाला
दिल लेगा मेरा कोई दिलवाला
ये बात नहीं तेरे बस की, बस की
आज हुस्न का जलवा दे-दे
आज हुस्न का जलवा दे-दे
तो कल से मैं तौबा कर लूं हाय
तो कल से मैं तौबा कर लूं, कर लूं
आज हुस्न का जलवा दे-दे
साल सत्रह संभाला इसे मैंने
ओ मैंने
साल सत्रह संभाला इसे मैंने
रे ऐसे कैसे तुझे सौंप दूं, हाय
ऐसे कैसे तुझे सौंप दूं , सौंप दूं
तेरे हाथों में पहना के चूड़ियाँ
तेरे होंठों से लिपट जाऊं सजनी
मैं सुर्खी का रंग बन के हाय
तेरे होंठों से लिपट जाऊं सजनी
मैं सुर्खी का रंग बन के
तेरे जैसे कई
तेरे जैसे कई लुट गए कुंवारे
पायल मेरी जब छनके जब छनके,
जब छनके
गोरा रंग ना किसी का होवे
गोरा रंग ना किसी का होवे
के सारा जग बैरी हो जाए
सारा जग बैरी हो जाए, हो जाए
सारे जग से निपट लूं अकेली, अकेली
सारे जग से निपट लूं अकेली
के पहले तू जो मेरा हो जाए, हाय
के पहले तू जो मेरा हो जाए, हो जाए
छोडो झगडे मिला लो दिल को
छोडो झगडे मिला लो दिल को
रहो ना ऐसे तन-तन के, हाय
ना रहो ऐसे तन तन के, तन तन के
तेरे घर में उजाला कर दे
तेरे घर में उजाला कर दे
तू ले जा इसे दूल्हा बन के हाय
तू ले जा इसे दुल्हन बन के
दूल्हा बन के
काली पीली फिल्म से होगा। नहीं जी, ये तो रंगीन युग वाला है जी।
शादी स्पेशल युग(९० का दशक) के बहुत पहले बना हुआ है जी ये तो।
१९७९ की फिल्म जानी दुश्मन में ये गीत है। सुनते ही आपको याद
आएगा की इसको खूब बजते सुना था जगह जगह। दूरदर्शन के
चित्रहार पर भी इसे खूब देखा गया था। उस समय एक ही तो गीत वाला
कार्यक्रम हुआ करता था-चित्रहार। उसेक अलावा विडियो गीत देखने का
कोई जरिया नहीं हुआ करता था। गीत अच्छी खासी कसरत करवा देता
है, सितारों की भीड़ जो है इसमें। राज कुमार कोहली निर्देशित फिल्म
में काफी भव्य सेट इस्तेमाल किये गए थे। इस गीत के फिल्मांकन में
सबसे ज्यादा व्यय हुआ होगा। इस गीत में 'जम्पिंग जैक' साहब ने जो
वस्त्र पहन रखे हैं उनकी नक़ल काफी देखने को मिली थी फिल्म के
रिलीज़ के कुछ समय बाद। एक बात तो तय है कि इस गीत में जीतू
भाई ने अपनी ट्रेड मार्क जम्पिंग बहुत कम की है ।
गीत में आपको जो कलाकार दिखाई देंगे उनके नाम इस प्रकार से हैं-
जीतेंद्र, नीतू सिंह, बिंदिया गोस्वामी, और सारिका।
गीत के बोल:
तेरे हाथों में पहना के चूड़ियाँ, ओ चूड़ियाँ
हाथों में पहना के चूड़ियाँ
ओ तेरे हाथों में पहना के चूड़ियाँ
के मौज बंजारा ले गया, हाय
के मौज बंजारा ले गया, ले गया
तेरे हाथों में पहना के चूड़ियाँ
तूने दिल तक तो मेरा ले लिया, ओ ले लिया
दिल तक तो मेरा ले लिया
तूने दिल तक तो मेरा ले लिया
के वो क्या बेचारा ले गया, हाय
के वो क्या बेचारा ले गया, ले गया
तूने दिल तक तो मेरा ले लिया
मेरे सामने ही कोई बेगाना
मेरे सामने ही कोई बेगाना
के रूप का नज़ारा ले गया, हाय
के रूप का नज़ारा ले गया ले गया
तू जलता है क्यों रे दीवाने
दीवाने,
तू जलता है क्यों रे दीवाने
के वो क्या तुम्हारा ले गया, हाय
के वो क्या तुम्हारा ले गया, ले गया
तेरे हाथों में पहना के चूड़ियाँ
हो, इसे मेरे ही तू नाम लगा दे
इसे मेरे ही तू नाम लगा दे
जवानी तेरे किस काम की
इसे मेरे ही तू नाम लगा दे
जवानी तेरे किस काम की
दिल लेगा मेरा कोई दिलवाला
दिल लेगा मेरा कोई दिलवाला
ये बात नहीं तेरे बस की, बस की
आज हुस्न का जलवा दे-दे
आज हुस्न का जलवा दे-दे
तो कल से मैं तौबा कर लूं हाय
तो कल से मैं तौबा कर लूं, कर लूं
आज हुस्न का जलवा दे-दे
साल सत्रह संभाला इसे मैंने
ओ मैंने
साल सत्रह संभाला इसे मैंने
रे ऐसे कैसे तुझे सौंप दूं, हाय
ऐसे कैसे तुझे सौंप दूं , सौंप दूं
तेरे हाथों में पहना के चूड़ियाँ
तेरे होंठों से लिपट जाऊं सजनी
मैं सुर्खी का रंग बन के हाय
तेरे होंठों से लिपट जाऊं सजनी
मैं सुर्खी का रंग बन के
तेरे जैसे कई
तेरे जैसे कई लुट गए कुंवारे
पायल मेरी जब छनके जब छनके,
जब छनके
गोरा रंग ना किसी का होवे
गोरा रंग ना किसी का होवे
के सारा जग बैरी हो जाए
सारा जग बैरी हो जाए, हो जाए
सारे जग से निपट लूं अकेली, अकेली
सारे जग से निपट लूं अकेली
के पहले तू जो मेरा हो जाए, हाय
के पहले तू जो मेरा हो जाए, हो जाए
छोडो झगडे मिला लो दिल को
छोडो झगडे मिला लो दिल को
रहो ना ऐसे तन-तन के, हाय
ना रहो ऐसे तन तन के, तन तन के
तेरे घर में उजाला कर दे
तेरे घर में उजाला कर दे
तू ले जा इसे दूल्हा बन के हाय
तू ले जा इसे दुल्हन बन के
दूल्हा बन के
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