रामसे ब्रदर्स ने हिंदी में कई भूतिया फ़िल्में बनाई हैं। इनमें से एक हिट फिल्म
का मधुर गीत पेश है आज। गीत में भूत नहीं है मगर कैमरा ऐसे घूम रहा है
मानो उसमें भूत घुस गया हो। सन १९८४ कि फिल्म "पुराना मंदिर" काफी चली
हुई फिल्म है । आरती गुप्ता नामक अभिनेत्री पर फिल्माए गये गीत को गाया है
आशा भोंसले ने। उल्लेखनीय है कि अभिनेत्री आरती गुप्ता रामसे ब्रदर्स की कई
भूतिया फिल्मों में देखी गई हैं । ये हालाँकि बतौर नायिका उनकी पहली फिल्म है
इसके पहले तक उनको फिल्मों में सहायक भूमिकाएं मिलती रहीं।
'पसंद अपनी अपनी', जैसे आपको ध्यान हो आई. एस. जौहर की कई फिल्मों में
आपने सोनिया साहनी नाम की अभिनेत्री को देखा है। हर निर्देशक और खेमे के
अपने पसंदीदा कलाकार होते हैं।
गीत लिखा है अमित खन्ना ने और इसकी धुन बनाई है अजीत सिंह ने।
वो बीते दिन याद हैं
वो पलछिन याद हैं
गुज़ारे तेरे संग जो
लगा के तुझे अंग जो
बाहों में तेरी
सिमटना हो मेरा
जुल्फों में मेरी
लिपटना हो तेरा
समय सब ले गया
बस यादें दे गया
क्यूँ टूटे सपने ?
वो गुजरी ज़िन्दगी
तेरी मेरी ख़ुशी
मोहब्बत का जहाँ
वो चाहत का समां
तरसती चिलमनें
बहकती धडकनें
वो नगमे साथ साथ
जो हमने थे बुने
वो थक के सो गये
हवा में खो गये
क्यूँ टूटे सपने ?
..........................
Wo beete din yaad hain-Purana Mandir 1984
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Wednesday, 15 February 2012
Thursday, 8 December 2011
ये देस परदेस -देस परदेस १९७८
एक गीत पेश है जिसने मुझे काफी प्रभावित किया और देव आनंद
के साथ साथ किशोर कुमार को भी ज्यादा पसंद करने की वजहें
बनायीं वो है फिल्म देस परदेस का गीत-ये देस परदेस। देस परदेस
हिंदी फिल्म सिनेमा का एक मील का पत्थर है। संभवतः ये देव आनंद
के निर्देशन वाली अंतिम बड़ी हिट फिल्म थी। इसके बाद आई लूटमार
भी काफी चली मगर इस फिल्म जैसा प्रभाव नहीं जगा पाई।
फिल्म देस परदेस के सभी गीत हिट हुए और आज भी उतने ही चाव से
सुने जाते हैं। रेडियो-अदरक लहसुन भी कई बार इस फिल्म के गीत
बजाते मिल जाते हैं। फ़िल्म के बाकी गीतों में और प्रस्तुत गीत में क्या
फर्क रहा मेरे लिए:देस परदेस के अन्य गीत मैं भी साथ साथ गुनगुनाने की
कोशिश करता और फिल्म के शीर्षक गीत को केवल ध्यान से सुनता। कुछ गीत
केवल तल्लीनता से सुनने में ही आनंद आता और उन गीतों के साथ अपनी
आवाज़ की मिलावट करके कानों पर बोझ डालना मेरे हिसाब से उचित नहीं
है।
गीत के बोल:
ये देस परदेस
हे, खुशियाँ यहीं पे
मिलेंगी हमें रे
सपना है अपना
ये देस परदेस
खुशियाँ यहीं पे
मिलेंगी हमें रे
अपना है अपना
ये देस परदेस
वही पुराने हैं, सारे फसाने,
नया है लेकिन जहाँ
अरे रस्ते नये हैं, ये मन्ज़िल नई है
लेकिन वही आसमाँ
सपना है सपना
अपना है अपना
ये देस परदेस
अकेला नहीं हूँ मैं, तेरे बिना
संग मेरे तेरी याद है
मिलकर खिलें फूल हर रंग के,
बस यही मेरी फरियाद है
सपना है सपना
अपना है अपना
ये देस परदेस
...............................
Ye des pardes-Des Pardes 1978
के साथ साथ किशोर कुमार को भी ज्यादा पसंद करने की वजहें
बनायीं वो है फिल्म देस परदेस का गीत-ये देस परदेस। देस परदेस
हिंदी फिल्म सिनेमा का एक मील का पत्थर है। संभवतः ये देव आनंद
के निर्देशन वाली अंतिम बड़ी हिट फिल्म थी। इसके बाद आई लूटमार
भी काफी चली मगर इस फिल्म जैसा प्रभाव नहीं जगा पाई।
फिल्म देस परदेस के सभी गीत हिट हुए और आज भी उतने ही चाव से
सुने जाते हैं। रेडियो-अदरक लहसुन भी कई बार इस फिल्म के गीत
बजाते मिल जाते हैं। फ़िल्म के बाकी गीतों में और प्रस्तुत गीत में क्या
फर्क रहा मेरे लिए:देस परदेस के अन्य गीत मैं भी साथ साथ गुनगुनाने की
कोशिश करता और फिल्म के शीर्षक गीत को केवल ध्यान से सुनता। कुछ गीत
केवल तल्लीनता से सुनने में ही आनंद आता और उन गीतों के साथ अपनी
आवाज़ की मिलावट करके कानों पर बोझ डालना मेरे हिसाब से उचित नहीं
है।
गीत के बोल:
ये देस परदेस
हे, खुशियाँ यहीं पे
मिलेंगी हमें रे
सपना है अपना
ये देस परदेस
खुशियाँ यहीं पे
मिलेंगी हमें रे
अपना है अपना
ये देस परदेस
वही पुराने हैं, सारे फसाने,
नया है लेकिन जहाँ
अरे रस्ते नये हैं, ये मन्ज़िल नई है
लेकिन वही आसमाँ
सपना है सपना
अपना है अपना
ये देस परदेस
अकेला नहीं हूँ मैं, तेरे बिना
संग मेरे तेरी याद है
मिलकर खिलें फूल हर रंग के,
बस यही मेरी फरियाद है
सपना है सपना
अपना है अपना
ये देस परदेस
...............................
Ye des pardes-Des Pardes 1978
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Friday, 28 October 2011
हाँ पहली बार-और कौन १९७९
एक निहायत ही रोमांटिक गीत सुनवाते हैं आपको। एक थोड़ी कम
जानी पहचानी सी फिल्म से मगर बहुत पहचाने से संगीतकार की धुन
पर ये नगमा तैरता है। कुछ ऐसे दुर्लभ गीत हैं हिंदी फिल्म संगीत के
खजाने में जिनमें गिटार की आवाज़ के साथ किशोर की आवाज़ का
कातिलाना मिश्रण है। ये भी एक ऐसा ही गीत है जो मेरे ख्याल से
नॉन-रोमांटिक लोगों को भी उतना ही भाता है जितना रोमांटिक किस्म
के लोगों को। फिल्म एक भूतिया फिल्म है निर्देशन निर्माण व निर्देशन
रामसे ब्रदर्स ने किया है।
गीत जनता को इतना भाया कि इसका विडियो पॉप अल्बम वाले अंदाज़
में बनाया गया जिसे आपने हाल ही में २-३ वर्ष पूर्व देखा होगा टी वी चैनलों
पर। गीत अमित खन्ना का लिखा हुआ है जिनके लिखे और बप्पी के स्वरबद्ध
किये हिट गीत आप फिल्म चलते-चलते में सुन चुके हैं। बस एक ही चीज़
नहीं समझ आई इस गीत में-लड़की ने हाथ पकड़ कर क्या बोला? फिल्म में
इन्द्रजीत, पद्मिनी कपिला और रूपेश कुमार प्रमुख कलाकार हैं। पद्मिनी कपिला
फिल्मों के लिए उतना चर्चित नहीं हुईं जितनी वे नवीन निश्चल के साथ नाम जोड़े
जाने की वजह से हुईं।
गीत के बोल:
हाँ पहली बार
हाँ पहली बार
एक लड़की मेरा हाथ पकड़ कर बोली
हाँ रे हाँ
हाँ पहली बार
हाँ पहली बार
एक लड़की मेरा हाथ पकड़ कर बोली
हाँ रे हाँ
हाँ पहली बार
किसी को ना पता चला क्या हो गया
ऐसी मिली नज़रें के दिल खो गया
किसी को ना पता चला क्या हो गया
ऐसी मिली नज़रें के दिल खो गया
चुपके से वो पहलू में आ
चुपके से वो पहलू में आ
बोली मुझे आ रे आ
हाँ पहली बार
हाँ पहली बार
एक लड़की मेरा हाथ पकड़ कर बोली
हाँ रे हाँ
हाँ पहली बार
नशा आँखों में अब छाने लगा हैं
मज़ा जीने का अब आने लगा हैं
नशा आँखों में अब छाने लगा हैं
मज़ा जीने का अब आने लगा हैं
साथ है वो पास है वो
साथ है वो पास है वो
आज नहीं ना रे ना
हाँ पहली बार
हाँ पहली बार
एक लड़की मेरा हाथ पकड़ कर बोली
हाँ रे हाँ
हाँ पहली बार
साँसों में सांस जब मिल जाएगी
कली सपनों की खिल जाएगी
साँसों में सांस जब मिल जाएगी
कली सपनों की खिल जाएगी
कल का मुझे याद नहीं
कल का मुझे याद नहीं
आज की बात वाह रे वाह
हाँ पहली बार
हाँ पहली बार
एक लड़की मेरा हाथ पकड़ कर बोली
हाँ रे हाँ
हाँ पहली बार
.............................
Haan pehli baar-Aur Kaun 1979
जानी पहचानी सी फिल्म से मगर बहुत पहचाने से संगीतकार की धुन
पर ये नगमा तैरता है। कुछ ऐसे दुर्लभ गीत हैं हिंदी फिल्म संगीत के
खजाने में जिनमें गिटार की आवाज़ के साथ किशोर की आवाज़ का
कातिलाना मिश्रण है। ये भी एक ऐसा ही गीत है जो मेरे ख्याल से
नॉन-रोमांटिक लोगों को भी उतना ही भाता है जितना रोमांटिक किस्म
के लोगों को। फिल्म एक भूतिया फिल्म है निर्देशन निर्माण व निर्देशन
रामसे ब्रदर्स ने किया है।
गीत जनता को इतना भाया कि इसका विडियो पॉप अल्बम वाले अंदाज़
में बनाया गया जिसे आपने हाल ही में २-३ वर्ष पूर्व देखा होगा टी वी चैनलों
पर। गीत अमित खन्ना का लिखा हुआ है जिनके लिखे और बप्पी के स्वरबद्ध
किये हिट गीत आप फिल्म चलते-चलते में सुन चुके हैं। बस एक ही चीज़
नहीं समझ आई इस गीत में-लड़की ने हाथ पकड़ कर क्या बोला? फिल्म में
इन्द्रजीत, पद्मिनी कपिला और रूपेश कुमार प्रमुख कलाकार हैं। पद्मिनी कपिला
फिल्मों के लिए उतना चर्चित नहीं हुईं जितनी वे नवीन निश्चल के साथ नाम जोड़े
जाने की वजह से हुईं।
गीत के बोल:
हाँ पहली बार
हाँ पहली बार
एक लड़की मेरा हाथ पकड़ कर बोली
हाँ रे हाँ
हाँ पहली बार
हाँ पहली बार
एक लड़की मेरा हाथ पकड़ कर बोली
हाँ रे हाँ
हाँ पहली बार
किसी को ना पता चला क्या हो गया
ऐसी मिली नज़रें के दिल खो गया
किसी को ना पता चला क्या हो गया
ऐसी मिली नज़रें के दिल खो गया
चुपके से वो पहलू में आ
चुपके से वो पहलू में आ
बोली मुझे आ रे आ
हाँ पहली बार
हाँ पहली बार
एक लड़की मेरा हाथ पकड़ कर बोली
हाँ रे हाँ
हाँ पहली बार
नशा आँखों में अब छाने लगा हैं
मज़ा जीने का अब आने लगा हैं
नशा आँखों में अब छाने लगा हैं
मज़ा जीने का अब आने लगा हैं
साथ है वो पास है वो
साथ है वो पास है वो
आज नहीं ना रे ना
हाँ पहली बार
हाँ पहली बार
एक लड़की मेरा हाथ पकड़ कर बोली
हाँ रे हाँ
हाँ पहली बार
साँसों में सांस जब मिल जाएगी
कली सपनों की खिल जाएगी
साँसों में सांस जब मिल जाएगी
कली सपनों की खिल जाएगी
कल का मुझे याद नहीं
कल का मुझे याद नहीं
आज की बात वाह रे वाह
हाँ पहली बार
हाँ पहली बार
एक लड़की मेरा हाथ पकड़ कर बोली
हाँ रे हाँ
हाँ पहली बार
.............................
Haan pehli baar-Aur Kaun 1979
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Tuesday, 19 July 2011
आप कहें और हम न आयें-देस परदेस १९७८
आपको जब पिछले दफे देस परदेस का गीत सुनाया था तब एक मित्र का
जिक्र किया था जिन्होंने रोते-धोते ज़माने के गीत ब्लॉग पर प्रस्तुत करने
की सलाह दी थी. उनकी सलाह अमल में लायी गयी लेकिन क्या किया
जाए फ़िल्मी मसाले पर इतने ब्लॉग और वेबसाइट उपलब्ध हैं कि पाठक
के सामने समस्या होती है क्या पढ़े और क्या न पढ़े. पूरे अंतरजाल पर
इतना गहरा जाल है साईट और ब्लॉग का कि विषय चुनाव भी एक समस्या
सरीखा हो जात है - आलू प्याज के भाव पढ़ें या ताजे घोटालों का विवरण.
अब सुनते हैं फिल्म देस परदेस से दूसरा गीत जो लता मंगेशकर ने गाया है
अभिनेत्री टीना मुनीम के लिए. संगीतकार राजेश रोशन ने जितने भी लता
के एकल गीत बनाये हैं उनमें से सबसे बढ़िया ५६ चुन लीजिए और इसको
आप उस सूची में ज़रूर पाएंगे. गीत लिखा है अमित खन्ना ने. विडियो में
से एक अंतरा नदारद है .
गीत 'स्टेज' पर गाया जा रहा है अतः इसे इसी श्रेणी में रख लेते हैं. आगे
चल के उप-श्रेणियाँ भी बना लेंगे-४ फीट का स्टेज, १० फीट ऊंचा स्टेज इत्यादि
गीत के बोल:
आप कहें और हम न आयें, ऐसे तो हालात नहीं, ओ
मँज़िल पे पहुँचेंगे कैसे, आपका जब तक साथ नहीं, ओ
आप कहें और हम न आयें, ऐसे तो हालात नहीं, ओ
चाहने वालों की आज दुनिया में चाहने वाले आ गए
उल्फ़त की मय आँखों से लो आज पिलाने आ गए
आप पियें और आप न झूमें आपके बस की बात नहीं, ओ
मँज़िल पे पहुँचेंगे कैसे आपका जब तक साथ नहीं
कसा हुआ है तीर हुस्न का, ज़रा सम्भल के रहियेगा
नज़र नज़र को मारेगी तो, कातिल हमें न कहियेगा
चाल चली है सोच के हमने इस खेल में अपनी मात नहीं, ओ
पास आ के ये आपके हमें होने लगा एहसास है
दम है तो बस आपके दमसे आप ही से साँस है
बयान करें जो हाल-ए-दिल को ऐसे कोई जज़्बात नहीं, ओ
आप कहें और हम न आयें, ऐसे तो हालात नहीं
मँज़िल पे पहुँचेंगे कैसे, आपका जब तक साथ नहीं
....................................
Aap kahen aur ham na aayen-Des Pardes 1978
जिक्र किया था जिन्होंने रोते-धोते ज़माने के गीत ब्लॉग पर प्रस्तुत करने
की सलाह दी थी. उनकी सलाह अमल में लायी गयी लेकिन क्या किया
जाए फ़िल्मी मसाले पर इतने ब्लॉग और वेबसाइट उपलब्ध हैं कि पाठक
के सामने समस्या होती है क्या पढ़े और क्या न पढ़े. पूरे अंतरजाल पर
इतना गहरा जाल है साईट और ब्लॉग का कि विषय चुनाव भी एक समस्या
सरीखा हो जात है - आलू प्याज के भाव पढ़ें या ताजे घोटालों का विवरण.
अब सुनते हैं फिल्म देस परदेस से दूसरा गीत जो लता मंगेशकर ने गाया है
अभिनेत्री टीना मुनीम के लिए. संगीतकार राजेश रोशन ने जितने भी लता
के एकल गीत बनाये हैं उनमें से सबसे बढ़िया ५६ चुन लीजिए और इसको
आप उस सूची में ज़रूर पाएंगे. गीत लिखा है अमित खन्ना ने. विडियो में
से एक अंतरा नदारद है .
गीत 'स्टेज' पर गाया जा रहा है अतः इसे इसी श्रेणी में रख लेते हैं. आगे
चल के उप-श्रेणियाँ भी बना लेंगे-४ फीट का स्टेज, १० फीट ऊंचा स्टेज इत्यादि
गीत के बोल:
आप कहें और हम न आयें, ऐसे तो हालात नहीं, ओ
मँज़िल पे पहुँचेंगे कैसे, आपका जब तक साथ नहीं, ओ
आप कहें और हम न आयें, ऐसे तो हालात नहीं, ओ
चाहने वालों की आज दुनिया में चाहने वाले आ गए
उल्फ़त की मय आँखों से लो आज पिलाने आ गए
आप पियें और आप न झूमें आपके बस की बात नहीं, ओ
मँज़िल पे पहुँचेंगे कैसे आपका जब तक साथ नहीं
कसा हुआ है तीर हुस्न का, ज़रा सम्भल के रहियेगा
नज़र नज़र को मारेगी तो, कातिल हमें न कहियेगा
चाल चली है सोच के हमने इस खेल में अपनी मात नहीं, ओ
पास आ के ये आपके हमें होने लगा एहसास है
दम है तो बस आपके दमसे आप ही से साँस है
बयान करें जो हाल-ए-दिल को ऐसे कोई जज़्बात नहीं, ओ
आप कहें और हम न आयें, ऐसे तो हालात नहीं
मँज़िल पे पहुँचेंगे कैसे, आपका जब तक साथ नहीं
....................................
Aap kahen aur ham na aayen-Des Pardes 1978
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Saturday, 9 July 2011
बादल तो आये-दिल्लगी १९७८
राजेश रोशन ने भी और संगीतकारों की तरह लता मंगेशकर
के लिए विशेष धुनें बनायीं. कुछ गीत उनमें से ऐसे हैं जो
जनता के द्वारा ज्यादा नहीं सुने गए. धर्मेन्द्र, हेमा मालिनी
अभिनीत फिल्म 'दिल्लगी ' से एक मधुर गीत सुनवा रहे
हैं आपको. सन १९७८ में इस गीत का पदार्पण हुआ था .
गीत के बोल :
बादल तो आये लहरों के साये
ओ आने वाले पर तुम न आये
बादल तो आये लहरों के साये
ओ आने वाले पर तुम न आये
तुम ज़िन्दगी में यूँ मेरी आ कर
गुम हो गए हो ऐसे मुझको भुला कर
मैं प्यार तेरा दिल में सजा कर
बैठी हूँ कब से आस लगा कर
दुःख मेरे दिल के होंठों पे आये
ओ आने वाले पर तुम तो न आये
आवाज़ मेरी आ जाओ सुन के
रौंदो ना सपने हाय मेरे नयन के
इस पार तुमसे किसी भी जतन से
मैं राज़ अपने सारे कह दूँगी मन के
ख़ामोश रह के ये दर्द पाए
ओ आने वाले पर तुम तो न आये
बादल तो आये लहरों के साये
ओ आने वाले पर तुम तो न आये
तुम तो न आये
........................
Baadal to aaye-Dillagi 1978
के लिए विशेष धुनें बनायीं. कुछ गीत उनमें से ऐसे हैं जो
जनता के द्वारा ज्यादा नहीं सुने गए. धर्मेन्द्र, हेमा मालिनी
अभिनीत फिल्म 'दिल्लगी ' से एक मधुर गीत सुनवा रहे
हैं आपको. सन १९७८ में इस गीत का पदार्पण हुआ था .
गीत के बोल :
बादल तो आये लहरों के साये
ओ आने वाले पर तुम न आये
बादल तो आये लहरों के साये
ओ आने वाले पर तुम न आये
तुम ज़िन्दगी में यूँ मेरी आ कर
गुम हो गए हो ऐसे मुझको भुला कर
मैं प्यार तेरा दिल में सजा कर
बैठी हूँ कब से आस लगा कर
दुःख मेरे दिल के होंठों पे आये
ओ आने वाले पर तुम तो न आये
आवाज़ मेरी आ जाओ सुन के
रौंदो ना सपने हाय मेरे नयन के
इस पार तुमसे किसी भी जतन से
मैं राज़ अपने सारे कह दूँगी मन के
ख़ामोश रह के ये दर्द पाए
ओ आने वाले पर तुम तो न आये
बादल तो आये लहरों के साये
ओ आने वाले पर तुम तो न आये
तुम तो न आये
........................
Baadal to aaye-Dillagi 1978
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Sunday, 12 June 2011
मैं कौन सा गीत सुनाऊँ-दिल्लगी १९७८
एक फुरसती ज़माना था जब जनता नदी नाले के किनारे बैठा करती,
गप शाप मारती और गीत गाती और सुनती। उस दौर की कल्पना
करना भी शायद आधुनिक युग में affordable नहीं है। साफ़ सुथरी
फ़िल्में बनाने के लिए विख्यात बासु चटर्जी की इस फिल्म ने
ज्यादा बिज़नेस नहीं किया मगर जनता द्वारा सराही अवश्य
गई। ये जी जनाब सराहने वाली जनता है ना, उसके बलबूते पर
बॉलीवुड की रोजी रोटी नहीं चलती। वो चलती है जब सिनेमा हॉल
की आगे की सीट से पीछे की सीट तक जगह ना बची हो। जिसे हम
चवन्नी क्लास कहते हैं, कई नामचीन नायकों की रोजी रोटी वहीँ से
निकल के आई। कभी कभार आंशिक कडकी के चलते हम भी उस
क्लास का आनंद उठा चुके हैं।
बासु की खूबी ये है कि उन्होंने हमारे इर्द गिर्द के और आम जीवन
के सामान्यतया ना छुए जाने वाले पहलुओं को बहुत सहजता से
प्रस्तुत किया परदे पर, दर्शक को यही लगा जैसे वो रोजमर्रा की
कोई आम घटना से रूबरू हो रहा हो। बाकी के निर्देशक अवास्तविकता
को वास्तविकता में तब्दील करने का प्रयत्न करते रहे और बासु चटर्जी
वास्तविकता को सरलता से प्रस्तुत करने में। शत प्रतिशत वास्तविक
हम किसी भी फ़िल्मी कथानक को नहीं कह सकते क्यूंकि नाटकीयता
आवश्यक तत्त्व है मंच और फिल्मों का। फर्क करना होता है हमें तो
बस नाटकीयता, जीवंत नाटकीयता, अति नाटकीयता, फूहड़ता और
मूढ़ता में । कल्पनाशीलता जब इनमे से किसी भी एक तत्त्व से चिपक
जाती है तो उसी तत्त्व विशेष को बढावा देती है। कल्पनाशीलता निर्देशक
के पास होना पहली अनिवार्य शर्त है, उसके बाद नंबर आता है कलाकारों
का। कल्पनाशीलता प्रस्तुतीकरण को बेहतर बनाने का काम करती है।
प्रस्तुत गीत में आपको जो कलाकार दिखाई देंगे उनके नाम इस
प्रकार से हैं-धर्मेन्द्र, असरानी, हेमा मालिनी और मिठू मुखर्जी।
पांचवे शख्स को शायद आप ना पहचान पायें तो आपको एक क्लू
देता हूँ-महाभारत सीरियल में मामा शकुनि की भूमिका निभाने
वाला कलाकार।
गीत के बोल:
मैं कौन सा गीत सुनाऊँ
क्या गाऊं जो पिया बस जाये
तेरे तन मन में
खिल जाएँ सोयी कलियाँ, हाय कलियाँ
और बहारें आयें सूनी बगियाँ में
ये कैसे अचानक बिना कोई आहट
चले आये हो तुम मेरी ज़िन्दगी में
तुम्हें आज पा कर मैं सब कुछ भुला कर
मगन हो के डूबी हुई हूँ ख़ुशी में
इतने ही रंग सलोने, हाय सलोने
भर गये हैं मेरे खाली सावन में
मैं कौन सा गीत सुनाऊँ
क्या गाऊं जो पिया बस जाये
तेरे तन मन में
कभी तुम सहारा बनोगे हमारा
मैं ये बात कल तक नहीं मानती थी
मगर आज कैसे ये लगता है जैसे
मैं हर जनम में तुम्हें जानती थी
लगता है सारी दुनिया, सारी दुनिया
भर गई है जैसे सज के कण कण में
मैं कौन सा गीत सुनाऊँ
क्या गाऊं जो पिया बस जाये
तेरे तन मन में
खिल जाएँ सोयी कलियाँ, हाय कलियाँ
और बहारें आयें सूनी बगियाँ में
.....................................
Main kaun sa geet sunaaon-Dillagi 1978
गप शाप मारती और गीत गाती और सुनती। उस दौर की कल्पना
करना भी शायद आधुनिक युग में affordable नहीं है। साफ़ सुथरी
फ़िल्में बनाने के लिए विख्यात बासु चटर्जी की इस फिल्म ने
ज्यादा बिज़नेस नहीं किया मगर जनता द्वारा सराही अवश्य
गई। ये जी जनाब सराहने वाली जनता है ना, उसके बलबूते पर
बॉलीवुड की रोजी रोटी नहीं चलती। वो चलती है जब सिनेमा हॉल
की आगे की सीट से पीछे की सीट तक जगह ना बची हो। जिसे हम
चवन्नी क्लास कहते हैं, कई नामचीन नायकों की रोजी रोटी वहीँ से
निकल के आई। कभी कभार आंशिक कडकी के चलते हम भी उस
क्लास का आनंद उठा चुके हैं।
बासु की खूबी ये है कि उन्होंने हमारे इर्द गिर्द के और आम जीवन
के सामान्यतया ना छुए जाने वाले पहलुओं को बहुत सहजता से
प्रस्तुत किया परदे पर, दर्शक को यही लगा जैसे वो रोजमर्रा की
कोई आम घटना से रूबरू हो रहा हो। बाकी के निर्देशक अवास्तविकता
को वास्तविकता में तब्दील करने का प्रयत्न करते रहे और बासु चटर्जी
वास्तविकता को सरलता से प्रस्तुत करने में। शत प्रतिशत वास्तविक
हम किसी भी फ़िल्मी कथानक को नहीं कह सकते क्यूंकि नाटकीयता
आवश्यक तत्त्व है मंच और फिल्मों का। फर्क करना होता है हमें तो
बस नाटकीयता, जीवंत नाटकीयता, अति नाटकीयता, फूहड़ता और
मूढ़ता में । कल्पनाशीलता जब इनमे से किसी भी एक तत्त्व से चिपक
जाती है तो उसी तत्त्व विशेष को बढावा देती है। कल्पनाशीलता निर्देशक
के पास होना पहली अनिवार्य शर्त है, उसके बाद नंबर आता है कलाकारों
का। कल्पनाशीलता प्रस्तुतीकरण को बेहतर बनाने का काम करती है।
प्रस्तुत गीत में आपको जो कलाकार दिखाई देंगे उनके नाम इस
प्रकार से हैं-धर्मेन्द्र, असरानी, हेमा मालिनी और मिठू मुखर्जी।
पांचवे शख्स को शायद आप ना पहचान पायें तो आपको एक क्लू
देता हूँ-महाभारत सीरियल में मामा शकुनि की भूमिका निभाने
वाला कलाकार।
गीत के बोल:
मैं कौन सा गीत सुनाऊँ
क्या गाऊं जो पिया बस जाये
तेरे तन मन में
खिल जाएँ सोयी कलियाँ, हाय कलियाँ
और बहारें आयें सूनी बगियाँ में
ये कैसे अचानक बिना कोई आहट
चले आये हो तुम मेरी ज़िन्दगी में
तुम्हें आज पा कर मैं सब कुछ भुला कर
मगन हो के डूबी हुई हूँ ख़ुशी में
इतने ही रंग सलोने, हाय सलोने
भर गये हैं मेरे खाली सावन में
मैं कौन सा गीत सुनाऊँ
क्या गाऊं जो पिया बस जाये
तेरे तन मन में
कभी तुम सहारा बनोगे हमारा
मैं ये बात कल तक नहीं मानती थी
मगर आज कैसे ये लगता है जैसे
मैं हर जनम में तुम्हें जानती थी
लगता है सारी दुनिया, सारी दुनिया
भर गई है जैसे सज के कण कण में
मैं कौन सा गीत सुनाऊँ
क्या गाऊं जो पिया बस जाये
तेरे तन मन में
खिल जाएँ सोयी कलियाँ, हाय कलियाँ
और बहारें आयें सूनी बगियाँ में
.....................................
Main kaun sa geet sunaaon-Dillagi 1978
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Dharmendra,
Dillagi,
Gufi Paintal,
Hema Malini,
Lata Mangeshkar,
Mithu Mukharji,
Rajesh Roshan
Wednesday, 18 May 2011
ये नैना ये काजल-दिल से मिले दिल १९७८
एक अनजान सी जोड़ी पर फिल्माया गया एक बेहतरीन गीत सुनिए।
फिल्म की एडिटिंग ख़राब किस्म की है। गीत झटके से शुरू होता है जैसे
नायक नायिका और निर्देशक, उनिते के अन्य लोग सब जल्दी में हों। फिल्म
एक हिट फिल्म की श्रेणी में आती है जिसके गीत भी बहुत बजे थे उन दिनों।
फिल्म के नायक हैं भीष्म कोहली जो फिल्म के निर्देशक भी हैं। उनके साथ
श्यामली नामक अभिनेत्री है। भीष्म और श्यामली दोनों को इस फिल्म से कोई
फ़ायदा नहीं हुआ, उन्हें आगे शायद ही किसी और फिल्म में देखा गया हो। एक
बात आप ज़रूर महसूस करेंगे, नायक के चेहरे, हाव भाव में २० टका देव आनंद
की अदाओं की मिलावट है। २० टका किस्मत भी अगर साथ होती तो शायद
भीष्म की फ़िल्मी गाडी चलती रहती। गीत लिखा है अमित खन्ना ने और
संगीत तैयार किया है बप्पी लहरी ने। गीत का फिल्मांकन अच्छा है और
निर्देशक के ड्रेस-सेंस की दाद देना पड़ेगी। अगर आप अपना नज़र का चश्मा उतार
कर गीत देखें तो यही लगेगा की ७० के दशक की कोई देव आनंद की फिल्म
का गीत देख रहे हों।
गीत के बोल :
ये नैना ये काजल
ये जुल्फें ये आँचल
ये नैना ये काजल
ये जुल्फें ये आँचल
खूबसूरत सी हो तुम ग़ज़ल
कभी दिल हो कभी धड़कन
कभी शोला कभी शबनम
तुम ही हो तुम मेरी हमदम
ज़िन्दगी तुम मेरी
मेरी तुम ज़िन्दगी
मेरी आँखों से देखो मेरी नज़रों से जानो
मेरी आँखों से देखो मेरी नज़रों से जानो
तुम माला हम मोती
हम दीपक तुम ज्योति
ये नैना ये काजल
ये जुल्फें ये आँचल
खूबसूरत सी हो तुम ग़ज़ल
कभी दिल हो कभी धड़कन
कभी शोला कभी शबनम
तुम ही हो तुम मेरी हमदम
सपनों का पनघट हो
आशा का झुरमुट हो
सपनों का पनघट हो
आशा का झुरमुट हो
तुम नदिया हम धारा
तुम चंदा हम तारा
ये नैना ये काजल
ये जुल्फें ये आँचल
खूबसूरत सी हो तुम ग़ज़ल
कभी दिल हो कभी धड़कन
कभी शोला कभी शबनम
तुम ही हो तुम मेरी हमदम
मेरी साँसों से पूछो
मेरी आहों को समझो
मेरी साँसों से पूछो
मेरी आहों को समझो
तुम पूजा हम पुजारी
तुम किस्मत हम जारी
ये नैना ये काजल
ये जुल्फें ये आँचल
खूबसूरत सी हो तुम ग़ज़ल
कभी दिल हो कभी धड़कन
कभी शोला कभी शबनम
तुम ही हो तुम मेरी हमदम
ज़िन्दगी तुम मेरी
मेरी तुम ज़िन्दगी
...............................................................
Ye naina ye kajal-Dil se mile dil 1978
फिल्म की एडिटिंग ख़राब किस्म की है। गीत झटके से शुरू होता है जैसे
नायक नायिका और निर्देशक, उनिते के अन्य लोग सब जल्दी में हों। फिल्म
एक हिट फिल्म की श्रेणी में आती है जिसके गीत भी बहुत बजे थे उन दिनों।
फिल्म के नायक हैं भीष्म कोहली जो फिल्म के निर्देशक भी हैं। उनके साथ
श्यामली नामक अभिनेत्री है। भीष्म और श्यामली दोनों को इस फिल्म से कोई
फ़ायदा नहीं हुआ, उन्हें आगे शायद ही किसी और फिल्म में देखा गया हो। एक
बात आप ज़रूर महसूस करेंगे, नायक के चेहरे, हाव भाव में २० टका देव आनंद
की अदाओं की मिलावट है। २० टका किस्मत भी अगर साथ होती तो शायद
भीष्म की फ़िल्मी गाडी चलती रहती। गीत लिखा है अमित खन्ना ने और
संगीत तैयार किया है बप्पी लहरी ने। गीत का फिल्मांकन अच्छा है और
निर्देशक के ड्रेस-सेंस की दाद देना पड़ेगी। अगर आप अपना नज़र का चश्मा उतार
कर गीत देखें तो यही लगेगा की ७० के दशक की कोई देव आनंद की फिल्म
का गीत देख रहे हों।
गीत के बोल :
ये नैना ये काजल
ये जुल्फें ये आँचल
ये नैना ये काजल
ये जुल्फें ये आँचल
खूबसूरत सी हो तुम ग़ज़ल
कभी दिल हो कभी धड़कन
कभी शोला कभी शबनम
तुम ही हो तुम मेरी हमदम
ज़िन्दगी तुम मेरी
मेरी तुम ज़िन्दगी
मेरी आँखों से देखो मेरी नज़रों से जानो
मेरी आँखों से देखो मेरी नज़रों से जानो
तुम माला हम मोती
हम दीपक तुम ज्योति
ये नैना ये काजल
ये जुल्फें ये आँचल
खूबसूरत सी हो तुम ग़ज़ल
कभी दिल हो कभी धड़कन
कभी शोला कभी शबनम
तुम ही हो तुम मेरी हमदम
सपनों का पनघट हो
आशा का झुरमुट हो
सपनों का पनघट हो
आशा का झुरमुट हो
तुम नदिया हम धारा
तुम चंदा हम तारा
ये नैना ये काजल
ये जुल्फें ये आँचल
खूबसूरत सी हो तुम ग़ज़ल
कभी दिल हो कभी धड़कन
कभी शोला कभी शबनम
तुम ही हो तुम मेरी हमदम
मेरी साँसों से पूछो
मेरी आहों को समझो
मेरी साँसों से पूछो
मेरी आहों को समझो
तुम पूजा हम पुजारी
तुम किस्मत हम जारी
ये नैना ये काजल
ये जुल्फें ये आँचल
खूबसूरत सी हो तुम ग़ज़ल
कभी दिल हो कभी धड़कन
कभी शोला कभी शबनम
तुम ही हो तुम मेरी हमदम
ज़िन्दगी तुम मेरी
मेरी तुम ज़िन्दगी
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Ye naina ye kajal-Dil se mile dil 1978
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