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Friday, 27 January 2012

मैं हूँ झुम झुम झुम झुम झुमरू-झुमरू १९६१

गीतों को सुनते सुनते कुछ अंतराल के बाद उसकी बारीकियां पकड़ में
आने लगती हैं और गुनगुनाने वाले का मुगालता ख़त्म हो जाता है कि वह
इसे बढ़िया ढंग से गा रहा है। ये बात दीगर है कि कुछ ओर्केस्ट्रा के कलाकारों
को ये मुगालता ता-उम्र बना रहता है। आज आपको एक गीत ऐसा सुनवाते हैं
जिसे मैंने जितनी बार इधर उधार सुना बिगड़ा हुआ ही सुना। इसकी हू-ब-हू
कॉपी करना असंभव है। गीत कठिनतम गीतों में से एक है और गायक का
अनूठा अंदाज़ इसमें अपने चरम पर है।

फिल्म का नाम है झुमरू और ये फिल्म का शीर्षक गीत है। गीत लिखा है
मजरूह सुल्तानपुरी ने और इसकी धुन स्वयं किशोर कुमार ने बनाई है ।

गीत के बोलों में जो योड्लिंग के साथ साथ कुछ अन्य शब्दों का समावेश भी
है जिसे आप स्वयं समझिये।



गीत के बोल:

मैं हूँ झुम झुम झुम झुम झुमरू
फक्कड़ घुँघरू बन के घूमूं
मैं ये प्यार का गीत सुनाता चला
मंजिल पे मेरी नज़र
मैं दुनिया से बेखबर
बीती बातों पे धूल उड़ाता चला

मैं हूँ झुम झुम झुम झुम झुमरू
फक्कड़ घुँघरू बन के घूमूं
मैं ये प्यार का गीत सुनाता चला
मंजिल पे मेरी नज़र
मैं दुनिया से बेखबर
बीती बातों पे धूल उड़ाता चला


मैं हूँ झुम झुम झुम झुम झुमरू
फक्कड़ घुँघरू बन के घूमूं
साथ में हमसफ़र ना कोई कारवां,
भोला भाला सीधा साधा
लेकिन दिल का हूँ शहज़ादा
है ये मेरी ज़मीन ये मेरा आसमान


मैं हूँ झुम झुम झुम झुम झुमरू
फक्कड़ घुँघरू बन के घूमूं
प्यार सीने मैं है हर किसी के लिए
मुजको प्यारा हर इंसान
दिलवालों पे हूँ कुर्बान
ज़िन्दगी है मेरी ज़िन्दगी के लिए


मैं हूँ झुम झुम झुम झुम झुमरू
फक्कड़ घुँघरू बन के घूमूं
मैं ये प्यार का गीत सुनाता चला
मंजिल पे मेरी नज़र
मैं दुनिया से बेखबर
बीती बातों पे धूल उड़ाता चला

....................................
Main hoon jhum jhum jhum jhum jhumroo-jhumroo 1961

Saturday, 8 October 2011

लुट गई मैं तो आज हो रामा-झूठा सच १९८४

फिल्म अभिनेत्री रेखा हर दशक के साथ नए रूप-संस्करण में दिखाई दीं
इसीलिए उनको अंग्रेजी की 'दिवा' कहा जाता है। गौरतलब है की उन्होंने
अपनी काय को योग के ज़रिये आकर्षक बना लिया और ८० के दशक में
फिल्मकारों ने उनके लिए विशेष दृश्य फिल्मों में तैयार किये उनके सौंदर्य
को आम दर्शक से रु-ब-रु कराने के लिए। रेखा के ऊपर फिल्माया गया और
एक कम सुना गया एक गीत सुनते हैं आज, फिल्म 'झूठा सच' से जिसमें उनके
साथ नायक हैं-धर्मेन्द्र।

गीत लिखा है मजरूह सुल्तानपुरी ने और इसकी धुन बनाई है आर. डी. बर्मन
ने। गीत गया है आशा भोंसले ने।



गीत के बोल:

लुट गई मैं तो आज हो रामा
खुली सड़क पर खड़ी खड़ी
लुट गई मैं तो आज हो रामा
खुली सड़क पर खड़ी खडी

लुट गई मैं तो, लुट गई
लुट गई मैं तो आज हो रामा
हो रामा हो रामा है दिया हो रामा
खुली सड़क पर खड़ी खड़ी

............................................
Lut gayi main to-Jhootha Sach 1984

Monday, 12 September 2011

तुम भी चलो-ज़मीर १९७५

इस गीत में घोड़े ने बहुत अच्छा अभिनय किया है। अमिताभ बच्चन और
सायरा तो कमाल के कलाकार हैं ही, मगर हमें फिल्म के बाकी कलाकारों के
अभिनय पर भी तो कभी कभी गौर फ़रमा लेना चाहिए ना। अमिताभ बच्चन
और सायरा बानो पर फिल्माए गीत को पहली बार जनता ने सुना था सन १९७५
में और तबसे इस गीत को निरंतर सुना जा रहा है। बोल थोड़े प्रेरणा दायक हैं।
सपन चक्रवर्ती ने इस गीत कि धुन बनाई है। उनका संगीत आर डी बर्मन के
संगीत के करीब सा लगता है। आशा और किशोर के गाये इस गीत को लिखा
है मजरूह सुल्तानपुरी ने।



गीत के बोल:

तुम भी चलो हम भी चलें
चलती रहे ज़िन्दगी
तुम भी चलो हम भी चलें
चलती रहे ज़िन्दगी

ना ज़मीन मंजिल ना आसमान
ज़िन्दगी है ज़िन्दगी

तुम भी चलो ला ला ला ला
हम भी चलें ला ला ला ला
चलती रहे ज़िन्दगी, ला ला ला

पीछे देखे ना कभी मुद के राहों में
हो, झूमे मेरा दिल तुम्हें ले के बाँहों में

धडकनों की जुबां नित कहे दास्तान
प्यार के झिलमिल छाओं में पलती रहे ज़िन्दगी

तुम भी चलो हम भी चलें
चलती रहे ज़िन्दगी
ना ज़मीन मंजिल ना आसमान
ज़िन्दगी है ज़िन्दगी

तुम भी चलो हम भी चलें
चलती रहे ज़िन्दगी

बहते चलें हम मस्ती के धारों में
हो ओ ओ, गूंजे यही धुन सदा दिल के तारों में
अब रुके ना कहीं प्यार का कारवां
नित नई रुत के रंग में ढलती रहे ज़िन्दगी

तुम भी चलो हम भी चलें
चलती रहे ज़िन्दगी
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Tum bhi chalo-Zameer 1975

Sunday, 28 August 2011

चाहूँगा मैं तुझे साँझ सवेरे -दोस्ती १९६४

आज आपको बढ़िया ऑंखें धुलाई वाला सामान दिखाते हैं और सुनवाते हैं। फिल्म

दोस्ती के सभी गीत लगभग दिल को झंझोड़ने वाले हैं। निस्संदेह, सोना पिघला

के शब्दों, धुन और गायकी पर मढ़ दिया गया सा प्रतीत होता है।



फिल्म दोस्ती के सभी गीत सुपर हिट की श्रेणी में आते हैं सिवाए लता मंगेशकर

के गाये गीत के।



गीत हर सिचुऐशन पर फिट होने वाला है-चाहे आप इसे दोस्ती के लिए उपयोग

कर लें, चाहे प्रेमिका के लिए या फिर सर्वशक्तिमान कि आराधना के लिए। बस ईश्वर

की आराधना के लिए इसमें से 'यार' शब्द को हटा के दूसरा फिट करना पड़ेगा।

वैसे भी सयाने कहते हैं-दोस्ती करना है तो ईश्वर से करो।



आदमी जब नितांत अकेला होता है या हो जाता है तो केवल ईश्वर उसके साथ होता है।

बस उसे पहचान नहीं पाता मनुष्य। वो किस रूप में और कहाँ आ जाये, उसकी माया

वो ही जाने।







गीत के बोल:



चाहूँगा मैं तुझे साँझ सवेरे

फिर भी कभी अब नाम को तेरे

आवाज़ मैं न दूँगा, आवाज़ मैं न दूँगा



चाहूँगा मैं तुझे साँझ सवेरे

फिर भी कभी अब नाम को तेरे

आवाज़ मैं न दूँगा, आवाज़ मैं न दूँगा



देख मुझे सब है पता

सुनता है तू मन की सदा

देख मुझे सब है पता

सुनता है तू मन की सदा

मितवा,

मेरे यार तुझको बार बार

आवाज़ मैं न दूँगा, आवाज़ मैं न दूँगा



चाहूँगा मैं तुझे साँझ सवेरे

फिर भी कभी अब नाम को तेरे

आवाज़ मैं न दूँगा, आवाज़ मैं न दूँगा



चाहूँगा मैं तुझे साँझ सवेरे



दर्द भी तू चैन भी तू

दरस भी तू नैन भी तू

दर्द भी तू चैन भी तू

दरस भी तू नैन भी तू

मितवा

मेरे यार तुझको बार बार

आवाज़ मैं न दूँगा, आवाज़ मैं न दूँगा



चाहूँगा मैं तुझे साँझ सवेरे

फिर भी कभी अब नाम को तेरे

आवाज़ मैं न दूँगा, आवाज़ मैं न दूँगा

आवाज़ मैं न दूँगा, आवाज़ मैं न दूँगा



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Chahoonga main tujhe sanjh savere-Dosti 1964

Sunday, 21 August 2011

मच गया शोर सारी नगरी रे-खुद्दार १९८२

आज जन्माष्टमी क पर्व है। आइये इस अवसर पर आपको एक गीत

सुनवाते हैं अमिताभ और परवीन बॉबी पर फिल्माया गया फिल्म

खुद्दार से है। मजरूह सुल्तानपुरी ने इस गीत को लिखा है और धुन

बनायीं है राजेश रोशन ने। इस गीत को गाया है लता मंगेशकर और

किशोर कुमार ने। मटकी फोड़ कार्यक्रम इस अवसर पर अवश्य होता

है। इस गीत में उसका भी आनंद ले लीजिये।











गीत के बोल:



मच गया शोर सारी नगरी रे, सारी नगरी रे

आया बिरज का बांका संभाल तेरी गगरी रे

आया बिरज का बांका संभाल तेरी गगरी रे

मच गया शोर सारी नगरी रे, सारी नगरी रे

आया बिरज का बांका संभाल तेरी गगरी रे

हो आया बिरज का बांका संभाल तेरी गगरी रे



देखो अरे देखो कहीं ऐसा न हो जाए

चोरी करे माखन तेरा जिया भी चुराए

देखो अरे देखो कहीं ऐसा न हो जाए

चोरी करे माखन तेरा जिया भी चुराए

अरे धमकता है इतना तू किसको

डरता है कौन आने दे उसको

डरता है कौन आने दे उसको

ऐसे न बहुत बोलो

मत ठुमक ठुमक दोलो

चिल्लाओगी बहुत गोरी

जब उलट देगा तोरी

गगरी आ के बीच डगरी रे



मच गया शोर सारी नगरी रे, सारी नगरी रे

आया बिरज का बांका संभाल तेरी गगरी रे

आया बिरज का बांका संभाल तेरी गगरी रे



ला रा ला ला ला रा ला ला ला

ला रा ला ला ला रा ला ला ला



जाने क्या करता अगर होता कहीं गोरा

जा के जमुना में ज़रा शक्ल देखे छोरा

जाने क्या करता अगर होता कहीं गोरा

जा के जमुना में ज़रा शक्ल देखे छोरा

बिंदिया चमकाती रस्ते में न जा

मनचला भी है गोकुल का राजा

मनचला भी है गोकुल का राजा

पड़ जाये नहीं पाला राधा से कहीं लाला

फिर रोयेगा गोविंदा मारेंगी ऐसा फंदा

गर गर से बंधेगी ऐसी चुनरी रे



मच गया शोर सारी नगरी रे, सारी नगरी रे

आया बिरज का बांका संभाल तेरी गगरी रे

हो ओ ओ आया बिरज का बांका संभाल तेरी गगरी रे



अरे मच गया शोर सारी नगरी रे, सारी नगरी रे

आया बिरज का बांका संभाल तेरी गगरी रे

हो आया बिरज का बांका संभाल तेरी गगरी रे

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Mach Gaya Shor Sari Nagri-Khuddar 1982

Tuesday, 9 August 2011

सूनी सूनी अँखियों में-लाल दुपट्टा मलमल का १९८८

आपकोइल्म फिल्म लाल दुपट्टा मलमल का एक गीत सुनवाया था. अब

सुनते हैं इसी फिल्म का एक और हिट गीत. इसे गाया है अनुराधा पौडवाल

और सुरेश वाडकर ने. साहिल चड्ढा और विवरली पर इसे फिल्माया गया है.

सुन्दर हसीं वादियों में इसका फिल्मांकन हुआ है. गीत मजरूह का लिखा हुआ

है और संगीत दिया है आनंद मिलिंद ने.







गीत के बोल:



सूनी सूनी अँखियों में जुगनूं चमक उठे

सूनी सूनी अँखियों में जुगनूं चमक उठे

जब से मिला है तेरा प्यार

तुमने तो जैसे मेरा रंग ही बदल दिया

कहां थे अभी तक यार

सूनी सूनी अँखियों में जुगनूं चमक उठे



सूनी सूनी अँखियों में जुगनूं चमक उठे

जब से मिला है तेरा प्यार

सूनी सूनी अँखियों में जुगनूं चमक उठे

जब से मिला है तेरा प्यार

तुमने तो जैसे मेरा रंग ही बदल दिया

कहां थे अभी तक यार



सूनी सूनी अँखियों में जुगनूं चमक उठे



कल भी यही जहां था लेकिन था फीका फीका

गुलों ने खिलना शमा ने जलना तेरी नज़र से सीखा

कल भी यही जहां था लेकिन था फीका फीका

गुलों ने खिलना शमा ने जलना तेरी नज़र से सीखा

आज ज़रा देखो मेरी दुनिया का रूप सिंगार



सूनी सूनी अँखियों में जुगनूं चमक उठे



मैं भी बुझी बुझी थी चाहत की आरज़ू में

चहक उठी हूँ मेरे मिलन के गुलाब की खुशबू में

मैं भी बुझी बुझी थी चाहत की आरज़ू में

चहक उठी हूँ मेरे मिलन के गुलाब की खुशबू में

मेरा हँसना मेरा गाना सब तेरा उपकार



सूनी सूनी अँखियों में जुगनूं चमक उठे

जब से मिला है तेरा प्यार

तुमने तो जैसे मेरा रंग ही बदल दिया

कहां थे अभी तक यार

...................................

Sooni sooni ankhiyon mein-Lal Dupatta malmal ka 1988

Thursday, 4 August 2011

तुमने रख तो ली-लाल दुपट्टा मलमल का १९८८

८० के दशक में डिस्को-खिसको के बाद जो लहर आई वो थी गज़लों की.
शुरुआत गुलाम अली के साथ हुई जिन्होंने फिल्म निकाह के लिए अपनी
एक गज़ल के उपयोग की अनुमति दी. उसी के साथ फिल्म में सलमा आगा
की 'मुंह से न्यूनतम और नाक से अधिकतम निकलती आवाज़' में भी कुछ
ग़ज़लें थीं जो जनता को खूब पसंद आयीं. जनता की पसंद के बारे में कुछ
भी निश्चित नहीं कहा जा सकता है. अभी हाल के कुछ वर्षों में नाक से गाने
वालों की दूकान चल निकली है.

तो बात हम गज़ल की कर रहे थे. गज़ल मीटर और किलोमीटर सभी में
निकल आई. एक के बाद एक गज़ल गायक निकल आये जैसे बरसात में
मेंढक निकल आते हैं. इनमें कुछ नामचीन थे जिन्होंने अपनी छाप सब जगह
छोड़ी तो कुछ ऐसे भी थे जो पानी के धब्बे की तरह धूप निकलने के साथ
गायब होते गए.

इस दौर में जिसने सबसे ज्यादा प्रसिद्धि हासिल की वो थे मयखाना किंग -
पंकज उधास. उनकी बदौलत गज़ल खास महफिलों से निकल कर टेम्पो,
बस, बैलगाडी और ट्रक में भी सुनाई देने लगी. इसकी एक वजह उनकी
गज़लों की गति तेज होना भी रहा. संगीत पक्ष उनकी गज़लों का प्रबल रहा
जिससे जनता को गुनगुनाने में आसानी हो गयी. आम जनता उनको पंकज
उदास कहती. ये एक विडम्बना सरीखी होती क्यूंकि पंकज उधास ने उदास
किस्म की ग़ज़लें नहीं गायीं. वैसे भी आम जनता कई नामों को तोड़ मरोड़
कर ही बोलती है.

प्रस्तुत गीत है फिल्म लाल दुपट्टा मलमल का. फिल्म में टी सीरीज़ का काफी
दखल है. निर्माण में और संगीत में इस ग्रुप का काफी पैसा लगा. ग्रुप की
फैवरेट गायिका अनुराधा पौडवाल की आवाज़ में लगभग सारे गीत हैं. प्रस्तुत
गीत युगल गीत है जिसमें अनुराधा पौडवाल के साथ पंकज उधास की आवाज़ है.
गीत मजरूह सुल्तानपुरी का लिखा हुआ है जो एक बड़ी वजह है फिल्म के गीत
लोकप्रिय होने की. संगीत है आनंद मिलिंद का.





तुमने रख तो ली तस्वीर हमारी
तुमने रख तो ली तस्वीर हमारी
पर ये न हो के जिस तरह मौसम बदलता है
वैसे ही तुमको भी देखूं रंग बदलते हुए
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ

तुमने रख तो ली तस्वीर हमारी
तुमने रख तो ली तस्वीर हमारी
पर ये न हो के जिस तरह मौसम बदलता है
वैसे ही तुमको भी देखूं रंग बदलते हुए
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ

हमने रख तो ली तस्वीर तुम्हारी
पर यूँ भी है के जिस तरह मौसम बदलता है
तस्वीरों को भी देखा है रंग बदलते हुए
तस्वीरों को भी देखा है रंग बदलते हुए
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ


आज तो मिल कर शाद रहे काश ये कल भी याद रहे
बात तो जब है जाने-जहाँ ध्यान मेरा मेरे बाद रहे
बन तो बैठें हैं तकदीर हमारी

हमने रख तो ली तस्वीर तुम्हारी
पर यूँ भी है के जिस तरह मौसम बदलता है
तस्वीरों को भी देखा है रंग बदलते हुए
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ

तुम जैसे इन राहों में कितने चले और छूट गए
कितने हसीं रोके वादे दिल की तरह से टूट गए
काश न टूटे तस्वीर हमारी

तुमने रख तो ली तस्वीर हमारी
पर ये न हो के जिस तरह मौसम बदलता है
वैसे ही तुमको भी देखूं रंग बदलते हुए
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ

हमने रख तो ली तस्वीर तुम्हारी
पर यूँ भी है के जिस तरह मौसम बदलता है
तस्वीरों को भी देखा है रंग बदलते हुए
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
....................................................
Tumne Rakh To Li Tasveer Hamari-Lal Dupatta Malmal Ka 1988

Monday, 1 August 2011

यार की गली दिन बहार का हाय-उल्टा सीधा १९८१

राजेश रोशन के संगीत निर्देशन में सुनिए एक गीत फिल्म उल्टा सीधा
से। इस युगल गीत को गाया है किशोर कुमार और लता मंगेशकर ने।
गीत मजरूह का लिखा हुआ है। उन बिरले गीतों में से एक है जिनमें
राज बब्बर को किशोर कुमार की आवाज़ पर होंठ हिलाने का मौका मिला
है। रति अग्निहोत्री को कई गीत मिले हैं लता मंगेशकर की आवाज़ वाले।
फिल्म दुनिया की गिनती की लंबी अभिनेत्रियों में से एक रति हमेशा अपने
नायकों से ज्यादा लंबी सी दिखाई देती रहीं।

राजश्री वालों को इस दुर्लभ विडियो को लोड करने के लिए सहृदय धन्यवाद।




गीत के बोल:

हो, हो
आ आ आ आ आ आ हो हो
यार की गली दिन बहार का हाय
आ गया मज़ा आज प्यार का हाय
यार की गली दिन बहार का हाय
आ गया मज़ा आज प्यार का हाय
हो हो, हो हो, हो हो हो हो हो

यार की गली दिन बहार का हाय
आ गया मज़ा आज प्यार का हाय
हो हो, हो हो, हो हो हो हो हो

एक तेरी नज़र है एक मेरी नज़र है
एक तेरी नज़र है एक मेरी नज़र है
बीच में अब नहीं यार कोई
पर्दा है न दीवार कोई
बस इसी का तो इंतज़ार था हाय
आ गया मज़ा आज प्यार का हाय
हो हो, हो हो, हो हो हो हो हो

बात छुप छुप के मेरी जान कर नहीं
राज़ अपना है किसी का डर नहीं
बात छुप छुप के मेरी जान कर नहीं
राज़ अपना है किसी का डर नहीं
प्यार कर ले आज तो दिल खोल के आ
रोज दिलबर मिलेगा कहाँ ऐसा हसीं मौका आ
हाथ से मिला हाथ यार का हाये
आ गया मज़ा आज प्यार का हाय
हो हो, हो हो, हो हो हो हो हो

ला ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला

दिल तेरा भी प्यासा दिल मेरा भी प्यासा
दिल तेरा भी प्यासा, प्यासा
दिल मेरा भी प्यासा ,प्यासा
यूँ डूबे मोहब्बत में जानी
के सर से गुजार जाए पानी
इस कदर दिल बेकरार था हाय
आ गया मज़ा आज प्यार का हाय


यार की गली दिन बहार का हाय
अरे, आ गया मज़ा आज प्यार का हाय
हो हो, हो हो, हो हो हो हो हो
...............................
Yaar ki gali-Ulta Seedha 1981

तेरा आसरा है एक तेरा ही सहारा-धुआं १९८१

आज आपको एक भक्ति गीत सुनवाते हैं फिल्म धुन से जो
सन १९८१ की फिल्म है. मजरूह के लिखे, लता मंगेशकर के
गाये और राहुल देव बर्मन के स्वरबद्ध इस गीत को फिल्माया
गया है राखी पर. धुआं एक सस्पेंस फिल्म है जो कम
चलने वाली फिल्मों की श्रेणी में आती है.





गीत के बोल:

तेरा आसरा है एक तेरा ही सहारा
तेरा आसरा है एक तेरा ही सहारा
तू ही जो नहीं कौन है फिर हमारा
तेरा आसरा है एक तेरा ही सहारा
तेरा आसरा है

हो, तू जलसागर हमको बहा ले
अपनी ही लहरों में उठा के,
हो ओ ओ ओ ओ ओ
तेरे किनारे कब से खड़े हैं
जनम जनम के प्यासे
ऐसी बुझा के लगे न दुबारा

तेरा आसरा है एक तेरा ही सहारा
तेरा आसरा है एक तेरा ही सहारा
तू ही जो नहीं कौन है फिर हमारा
तेरा आसरा है

कैसी सभा ये तूने सजाई
सब एक दूजे से पराये
हो ओ ओ ओ ओ ओ
तू चाहे देखे सबका तमाशा
हमसे तो देखा न जाए
क्या तेरे प्यार का यही फल है सारा

तेरा आसरा है एक तेरा ही सहारा
तेरा आसरा है एक तेरा ही सहारा
तू ही जो नहीं कौन है फिर हमारा
तेरा आसरा है एक तेरा ही सहारा
तेरा आसरा है
...................................
Tera aasra hai-Dhuan 1981

Monday, 25 July 2011

आज तो मेरी हँसी उडाई-गोमती के किनारे १९७२

मजरूह के लिखे संवेदना को झंझोड़ने वाले गीतों में से एक है फ़िल्म
गोमती के किनारे से लता मंगेशकर का गाया हुआ ये गीत। मीना कुमारी
की इस अन्तिम फ़िल्म का निर्देशन सावन कुमार टाक ने किया था, जनता
को देखने को नहीं मिली। अब ज़रूर इस फिल्म की सी डी, डी वी डी मिलने
लगी है। मौका मिले तो एक बार अवश्य देखिएगा इसे।

लखनऊ शहर गोमती नदी के किनारे बसा हुआ है. इस फिल्म की कथा
कुछ कुछ यही इंगित करती है कि इस शहर की ही एक कहानी है ये.
लखनऊ की संस्कृति से मुजरा शब्द अछूता नहीं रहा कभी। तवायफ़ और
उनके नृत्य संगीत इत्यादि पर प्रकाश डालता जनादेश का एक लेख ज़रूर
पढ़ें- पहले बदनाम, फिर गुमनाम

गीत आदम जात के दोमुंहेपन पर करारा तमाचा सा है। आदमी के नंगेपन
की इन्तेहा ये है कि वो जिस जगह से इस नश्वर संसार में प्रकट होता है,
सयाना होने पर बार बार वहीँ जाना चाहता है। प्रकट होने के वक्त के कष्ट
को वो भूल कर उन गलियारों में वो आनंद ढूँढने लगता है। हवस के अन्धों
को रिश्ते, समाज रीति-रिवाज सब दिखलाई देने बंद हो जाते हैं। अपना
खुद का घर तो ऐसे लोगों का अपवाद होता है और वे पैसे के बल पर घर
से बाहर कोई भी बदतमीजी करने के लिए स्वतन्त्र होते हैं। मर्यादा और
परंपरा की दुहाई देने वाले बाहर निकल कर खुद अनियंत्रित और अमर्यादित
हो जाते हैं । सामाजिक ढांचे को सबसे ज्यादा क्षति साधन समर्थ और संकीर्ण
मानसिकता वाले लोग पहुंचाते हैं। गीत के अंतिम अंतरे में इसी बात पर
गौर किया गया है।

कोठे पर बैठे कलाकारों में आप आई. एस. जौहर को आसानी से पहचान
पाएंगे।




गाने के बोल:

आज तो मेरी हंसी उडाई
जैसे भी चाह पुकारा
आज तो मेरी हंसी उडाई
जैसे भी चाह पुकारा
कल जो मुझे इन गलियों में लाया
वो भी था हाथ तुम्हारा

आज तो मेरी हंसी उडाई
जैसे भी चाह पुकारा

लुटे यहाँ चमन अंधेरों ने
बिके यहाँ बदन अंधेरों में
लुटे यहाँ चमन अंधेरों ने
बिके यहाँ बदन अंधेरों में
भूली भटकी इस बस्ती में, हो ओ ओ
रूप की चांदी रात के सोने का व्यापार है सारा
कल जो मुझे इन गलियों में लाया
वो भी था हाथ तुम्हारा

आज तो मेरी हंसी उडाई
जैसे भी चाह पुकारा

सोचा कभी मैं भी हूँ एक इंसान भी
मैं भी कभी बहन भी हूँ कभी माँ भी
सोचा कभी मैं भी हूँ एक इंसान भी
मैं भी कभी बहन भी हूँ कभी माँ भी
तुम तो प्यासी प्यासी ऑंखें ले के, हो ओ ओ
करने को आये मेरे लबों पर मेरे लहू का नज़ारा
कल जो मुझे इन गलियों में लाया
वो भी था हाथ तुम्हारा

आज तो मेरी हंसी उडाई
जैसे भी चाह पुकारा

सबको गुनाहों में मगन देखा
देखा शरीफों का चलन देखा
सबको गुनाहों में मगन देखा
देखा शरीफों का चलन देखा
सबकी इनायत हाय देखी मैंने, हो ओ ओ
मेरे ही दिल के टुकड़े को मेरा आशिक कह कर पुकारा
कल जो मुझे इन गलियों में लाया
वो भी था हाथ तुम्हारा
..................................
Aaj to meri hansi udaai-Gomti ke kinare 1972

Tuesday, 19 July 2011

ठंडी हवा ये चांदनी सुहानी-झुमरू १९६१

कुछ सदाबहार धुनें दूसरे देशों की भीं सदाबहार धुनें हुआ करती हैं.
सन १९५५ के जूलियस ला रोसा के "डोमानी" को ही लीजिए. ये
आनंदित करने वाली धुन है. बोल आपके समझ आयें तो मुझे
भी मदद ज़रूर कीजियेगा समझने में.

सन १९६१ में इसका देसी संस्करण अवतरित हुआ फिल्म झुमरू में.
इस गीत को किशोर के सबसे ज्यादा पसंद किये जाने वाले गीतों
में स्थान प्राप्त है. गीत का देसीकरण होने पर उसमें आशा भोसले
की आवाज़ में शुरुआती गुनगुनाहट और किशोर की योडलिंग मिलायी
गयी-लीजिए तैयार एक कर्णप्रिय हिंदी गीत. फिल्म के गीत मजरूह
सुल्तानपुरी ने लिखे हैं और संगीत स्वयं किशोर कुमार का है.

इसको कहते हैं अच्छे संगीत का ग्लोबलायिजेशन. ये होना ज़रूर चाहिए
मगर मर्यादाओं के भीतर. क्रेडिट देने के मामले में हम हमेशा पीछे ही
रहते हैं. यू ट्यूब पर गीत के नीचे छपे कमेन्ट ज़रूर पढ़ें, आनंद आएगा.




गीत के बोल:

ठण्डी हवा ये चाँदनी सुहानी
ऐ मेरे दिल सुना कोई कहानी
लम्बी सी एक डगर है ज़िंदगानी
ऐ मेरे दिल सुना कोई कहानी

आ हा हा आ, हा आ आ हा हा

सारे हसीं नज़ारे, सपनों में खो गये
सर रख के आसमाँ पे, पर्वत भी सो गये
मेरे दिल, तू सुना, कोई ऐसी दास्तां
जिसको सुनकर, मिले चैन मुझे मेरी जाँ

मंज़िल है अन्जानी
ठण्डी हवा ये चाँदनी सुहानी
ऐ मेरे दिल सुना कोई कहानी

ऐसे मैं चल रहा हूँ पेड़ों की छाँव में
जैसे कोई सितारा बादल के गाँव में
मेरे दिल तू सुना, कोई ऐसी दास्तां
जिसको सुनकर, मिले चैन मुझे मेरी जाँ

मंज़िल है अन्जानी
ठण्डी हवा ये चाँदनी सुहानी
ऐ मेरे दिल सुना कोई कहानी

थोड़ी सी रात बीती, थोड़ी सी राह गई
खामोश रुत ना जाने, क्या बात कह गई
मेरे दिल तू सुना, कोई ऐसी दास्तां
जिसको सुनकर, मिले चैन मुझे मेरी जाँ

मंज़िल है अन्जानी
ठण्डी हवा ये चाँदनी सुहानी
ऐ मेरे दिल सुना कोई कहानी

ठण्डी हवा ये चाँदनी सुहानी
ऐ मेरे दिल सुना कोई कहानी
लम्बी सी एक डगर है ज़िंदगानी
ऐ मेरे दिल सुना कोई कहानी
....................................
Thandi hawa ye chandni suhani-Jhumroo 1961

Sunday, 17 July 2011

ठण्डी पवन चले-फूटपाथ १९५३

एक गीत सुनवाते हैं आपको तीन गायकों की आवाजों में . ये लिया
गया है फिल्म फुटपाथ से . इस फिल्म का ये चौथा गीत है ब्लॉग पर.
तलत महमूद के साथ प्रेमलता और आशिमा बैनर्जी की आवाजें हैं.


ऐसे शोर्ट एंड स्वीट गीत बहुत भाते हैं मुझे क्यूंकि बोल लिखने में भी
ज्यादा कसरत नहीं करना पढ़ती है. गीत सरदार जाफरी का लिखा हुआ है
या मजरूह का, इस बारे में कोई प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध नहीं है
अतः हम दोनों के नाम टैग में डाल देते हैं.




गीत के बोल:

ठण्डी पवन चले
साँझ ढले
कू कू कोयल बोले
जिया डोले जिया डोले
पवन चले

प्यारे-प्यारे बाल सँवारे
शाम आई ले के नज़ारे
प्यारे-प्यारे बाल सँवारे
शाम आई ले के नज़ारे

नीले-नीले पीले-पीले
नीले-नीले पीले-पीले
देखो गगन में भी फूल खिले
पवन चले

चन्दा-तारे करें इशारे
आओ खेलें हमें पुकारे
चन्दा-तारे करें इशारे
आओ खेलें हमें पुकारे

कह दो चुन्नू, कह दो मुन्नू
कह दो चुन्नू, कह दो मुन्नू
रात होने को है हम चले
पवन चले

ठण्डी पवन चले
साँझ ढले
कू कू कोयल बोले
जिया डोले जिया डोले
पवन चले
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Thandi pawan Chale-Footpath 1953

Saturday, 16 July 2011

रोज़ शाम आती थी-इम्तिहान १९७४

अभिनेत्री नूतन और तनूजा का कैरियर साठ के और सत्तर के दशक में
साथ साथ चला. नूतन ने तो जल्दी ही अपना ऊंचा मुकाम हासिल कर
लिया फिल्म जगत में मगर तनूजा को काफी संघर्ष के बावजूद, (यहाँ
संघर्ष का तात्पर्य अभिनय कला से हैं न कि फ़िल्में पाने के लिए संघर्ष
से) वो स्थान नहीं मिल पाया की उनकी किसी एक फिल्म को दर्शक
याद करें. प्रस्तुत गीत लिया गया है फिल्म इम्तिहान से जो सन १९७४
की फिल्म है. मजरूह के आकर्षक बोलों को स्वर दिया है लता मंगेशकर
ने. फिल्म में संगीत है लक्ष्मीकांत प्यारेलाल का. इस गीत में विनोद खन्ना
ने बेहतर अभिनय किया है. नायिका के कपडे कुछ अजीब से लगेंगे आपको
सन ७० के आस पास और बाद में कुछ एक फ़िल्में ऐसी आयीं जिनमें
नायकों और नायिकाओं की पोशाकें कुतूहल का विषय हुआ करती थीं.

गीत में कैमरे के साथ एक फ़िल्टर लगाया गया है जिससे सुनहरी धूप वाले
समय को भी शाम बना दिया गया है. ये करिश्मा पकड़ में आ जाता है
गीत के बीच में, जहाँ आधी धूप आधी छांव वाली कहानी दिखाई देती है.
ये होता है अन्तर शुरू होते समय. ऐसे कारनामे विडियो का मज़ा किरकिरा
कर देते हैं.




गीत के बोल:

ला ला ला ला ला ला ला ला ला
रोज़ शाम आती थी मगर ऐसी न थी
रोज़ रोज़ घटा छाती थी मगर ऐसी न थी
रोज़ शाम आती थी मगर ऐसी न थी
रोज़ रोज़ घटा छाती थी मगर ऐसी न थी
ये आज मेरी ज़िन्दगी में कौन आ गया
रोज़ शाम आती थी मगर ऐसी न थी
रोज़ रोज़ घटा छाती थी मगर ऐसी न थी

डाली में ये किसका हाथ करे इशारे बुलाए मुझे
झूमती चंचल हवा छूके तन गुदगुदाए मुझे
हौले हौले धीरे धीरे कोई गीत मुझको सुनाए
प्रीत मन में जगाए
खुली आँख सपने दिखाए
दिखाए दिखाए दिखाए
खुली आँख सपने दिखाए

ये आज मेरी ज़िन्दगी में कौन आ गया
रोज़ शाम आती थी मगर ऐसी न थी
रोज़ रोज़ घटा छाती थी मगर ऐसी न थी

अरमानों का रंग है जहाँ पलकें उठाती हूँ मैं
हँस हँस के है देखती जो भी मूरत बनाती हूँ मैं
जैसे कोई मोहे छेड़े दिल खो और भी जाती हूँ मैं
जगमगाती हूँ मैं
दीवानी हुई जाती हूँ मैं
दीवानी दीवानी दीवानी
दीवानी हुई जाती हूँ मैं

ये आज मेरी ज़िन्दगी में कौन आ गया
रोज़ शाम आती थी मगर ऐसी न थी
रोज़ रोज़ घटा छाती थी मगर ऐसी न थी
....................................
Roz shaam aati thi-Imtihaan 1974

Friday, 15 July 2011

राजा बना मेरा छैला कैसा -गरम मसाला १९७२

काफी मसालेदार गीतों से भरपूर थी फिल्म गरम मसाला।
इस नाम से दो फ़िल्में बन चुकी हैं। एक तो कुछ साल पहले
ही आई थी। बहुत से कलाकारों की भीड़ वाला ये गीत काफी
मनोरंजक है। कैमरा ऐसे कोण पे ज्यादा घूमा है कि सिनेमा
हाल के आगे की बेंच वाले दर्शकों को इसे देखने में ज्यादा आनंद
आया होगा। गीत में अरुणा ईरानी, बिंदु, महमूद, जीवन
और टुनटुन ऐसे कलाकार हैं जिन्हें आप आसानी से पहचान
जायेंगे। गीत मजरूह का लिखा हुआ है इसलिए इसपर सरसरी
तौर पर निगाह फेर लेने की गलती ना करें, इसे ध्यान से
एक बार अवश्य सुनें। आशा भोंसले के गाये इस गीत की
तर्ज़ बनाई है राहुल देव बर्मन ने । इस गरम मसाले (गीत)
को पचाने(समझने) में आपको थोडा वक्त ज़रूर लगेगा.



गीत के बोल:

हा ली हा ली
राजा बना मोरा छैला कैसा
देखो मोरी गुइयाँ रे
राजा बना मोरा छैला कैसा
देखो मोरी गुइयाँ रे
आओ गोरी गोरी बैयाँ वारो
ले ले के बलैयां, हा
सदके हो के डारो
आंचरवा की छैयां
झिलमिल झिलमिल
राजा बना
राजा बना मोरा छैला कैसा
देखो मोरी गुइयाँ रे
आओ गोरी गोरी बैयाँ वारो
ले ले के बलैयां रे

रहे सदा राजा के पास हीरा मोती घूंघरा
क्या हुआ जो ये रूप का लालची है ज़रा
हा हा
रहे सदा राजा के पास हीरा मोती घूंघरा
क्या हुआ जो ये रूप का लालची है ज़रा
अरे ऐसे देखे मोहे जैसे मोरा सैयां
दैया, दैया

राजा बना
राजा बना मोरा छैला कैसा
देखो मोरी गुइयाँ रे
आओ गोरी गोरी बैयाँ वारो
ले ले के बलैयां रे

ऐसा भोला ऐसा नादान देखा नहीं, हां, कहीं
आगे है कौन पीछे है कौन जानता ही नहीं
हा हा
ऐसा भोला ऐसा नादान देखा नहीं, हां, कहीं
आगे है कौन पीछे है कौन जानता भी नहीं
इसी से मैं आई दौडी पैयां सैयां
छम छम छम छम

राजा बना रे रे
राजा बना मोरा छैला कैसा
देखो मोरी गुइयाँ रे
आओ गोरी गोरी बैयाँ वारो
ले ले के बलैयां रे

राजा का तो नौकर भी है कैसा प्यारा, हा, प्यारा
ऐसा कई घंटे से चूर बैठा है बेचारा, हा हा
राजा का तो नौकर भी है कैसा प्यारा, हा, प्यारा
ऐसा कई घंटे से चूर बैठा है बेचारा, हा हा
अरे इसके बजे बारह, दुआ करो कोई
ढम ढम ढम ढम

राजा बना
राजा बना मोरा छैला कैसा
देखो मोरी गुइयाँ रे
आओ गोरी गोरी बैयाँ वारो
ले ले के बलैयां रे
सदके हो के डारो
आंचरवा की छैयां
झिलमिल झिलमिल

राजा बना
राजा बना मोरा छैला कैसा
देखो मोरी गुइयाँ
.......................................
Raaja bana mora chhaila kaisa-Garam Masala 1972

Tuesday, 12 July 2011

आयो कहाँ से घनश्याम-बुड्ढा मिल गया १९७१

मन्ना डे की लाजवाब, बेमिसाल गायकी का एक शानदार नमूना।
सुनते रहिये बस । इसको सुनकर मैं कभी नहीं थकता । फिल्म
बुड्ढा मिल गया में इसे फिल्माया गया है प्रसिद्द चरित्र अभिनेता
ओमप्रकाश पर. फिल्म बुड्ढा मिल गया में इसे फिल्माया गया है
प्रसिद्द चरित्र अभिनेता ओमप्रकाश पर. गीत के अंत में नायिका
अर्चना की आवाज़ है. पोस्ट का ड्राफ्ट २ साल से पढ़ा हुआ था आज
सोचा इसे पोस्ट कर ही दिया जाए.







गाने के बोल:

हाँ हाँ आं, आ आ आ , रे

आयो कहाँ से घनश्याम
आयो कहाँ से घनश्याम

रैना बितायी किस धाम
रैना बितायी किस धाम
हाय राम

आयो कहाँ से घनश्याम
आयो कहाँ से घनश्याम

रात की जागी रे,
रात की जागी रे
अँखियाँ हैं तोरी
रात की जागी रे
अँखियाँ हैं तोरी
हो रही गली गली
जिया की चोरी
हो रही गली गली
जिया की चोरी
हो नहीं जाना बदनाम
हाय राम

आयो कहाँ से घनश्याम
हाय राम
आयो कहाँ से घनश्याम
आयो कहाँ से घनश्याम

सज धज तुमरी का कहूं रसिया
ध नि ध ध , ध नि ध ध, म ध प्,
म प् म, रे म गा, म ग सा नि सा नि सा
नि सा ग म ग,सा गा म प् नि गा म,
प् नि सा गा म सा नि नि प् म गा सा म प्

सज धज ठुमरी का कहूं रसिया
ऐसे लगे तेरे हाथों में बंसिया
ऐसे लगे तेरे हाथों में बंसिया
जैसे कटारी लियो थाम
जैसे कटारी लियो थाम
हाय राम

आयो कहाँ से घनश्याम
आयो कहाँ से घनश्याम
आयो कहाँ से घनश्याम
आयो कहाँ से घनश्याम


मैं न कहूं कछु
मोसे न रूठो
मैं न कहूं कछु
मोसे न रूठो
तुम ख़ुद अपने जियरा से पूछो
तुम ख़ुद अपने जियरा से पूछो
बीती कहाँ पे कल शाम

आयो कहाँ से घनश्याम
आयो कहाँ से घनश्याम
श्याम,
आयो कहाँ से घनश्याम
श्याम रे
आयो कहाँ से घनश्याम
...........................
Aayo kahan se ghanshyam-Buddha mil gaya 1971

एक दिन हँसाना-बेनाम १९७४

एक लोरी सुनवाते हैं आपको फिल्म बेनाम से. बच्चों को सुलाना
कितना दुष्कर कार्य होता है इस गीत से आपको समझ आएगा या
यूँ कहें मेमोरी रिफ्रेश हो जाएगी आपकी. जिनके बच्चे होने वाले हों
वे इस गीत को देख कर आगे आने वाली परेशानी के लिए अपने
आपको मानसिक रूप से तैयार कर लें.

ये बात और है अगर आपकी आवाज़ मधुर है तभी गीत गायें अन्यथा
बच्चा घबरा कर, और जोर से भां भां करता रोने लगेगा, सोने के बजाये

लेखनी से मियां-बीबी की समस्या हल की है मजरूह सुल्तानपुरी ने और
आवाज़ से लता मंगेशकर ने राहुल देव बर्मन की धुन पर.




गीत के बोल :

ला ला ला हं हं हं
सो जा रे नींद सुहानी
एक दिन हँसाना एक दिन रुलाना
जीवन की रीत पुरानी
फिर तेरी पलकें काहे को छलकें
सो जा रे नींद सुहानी
एक दिन हँसाना एक दिन रुलाना
जीवन की रीत पुरानी
फिर तेरी पलकें काहे को छलकें
सो जा रे नींद सुहानी

सनन सनन पवन कहे सो जा मिलेगा
तुझको कोई नया खिलौना
मगन मगन सपन में खो जा मिलेगा
दूजा साथी कोई सलोना
दिन कल का नया दिन होगा
फिर कैसी ये परेशानी

एक दिन हँसाना एक दिन रुलाना
जीवन की रीत पुरानी
फिर तेरी पलकें काहे को छलकें
सो जा रे नींद सुहानी

निकलेंगे अभी बहुत जिया के अरमान
जीवन सारा अभी पड़ा है
हो ओ ओ टुकुर टुकुर नयन लिए
न हो रे हैरान
ऊपर वाला बहुत बड़ा है
किर काहे तू पड़ा जागे
अंखियों में लिए पानी
अब तो सो जा

एक दिन हँसाना एक दिन रुलाना
जीवन की रीत पुरानी
फिर तेरी पलकें काहे को छलकें
सो जा रे नींद सुहानी

एक दिन हँसाना एक दिन रुलाना
जीवन की रीत पुरानी
फिर तेरी पलकें काहे को छलकें
सो जा रे नींद सुहानी
..............................
Ek din hansana-Benaam 1974

Wednesday, 6 July 2011

तसवीर तेरी दिल में-माया १९६१

फिल्म माया के गीत में वायलिन की आवाज़ का जिक्र हम कर चुके
हैं अब सुनिए बांसुरी की मनमोहक तान वाला मधुर युगल गीत।
इसे गाया है लता और रफ़ी ने। ये गीत भी ऊंची तान पर जाता
है और इसे गुनगुनाना आसान नहीं है जबकि सुननेवाला असफल
कोशिश ज़रूर करता है। गीत फिल्माया गया है देव आनंद और माला
माला सिन्हा पर। बोल मजरूह के हैं और संगीत सलिल चौधरी का। गीत
बेहद रोमांटिक है और इसकी सादगी के सभी कायल हैं। सरल और
सौम्य तरीके से अपनी भावनाओं का इज़हार कैसे किया जाये इस
गीत से सीखा जा सकता है।



गीत के बोल :

तसवीर तेरी दिल में,
जिस दिन से उतारी है,

तसवीर तेरी दिल में,
जिस दिन से उतारी है,
फिरूँ तुझे संग ले के,
नए-ऩए रंग ले के,
सपनों की महफिल में

तसवीर तेरी दिल में,
जिस दिन से उतारी है,
फिरूँ तुझे संग ले के,
नए-ऩए रंग ले के,
सपनों की महफिल में

तसवीर तेरी दिल में

माथे की बिंदिया तू है सनम,
नैनों का कजरा पिया तेरा ग़म
माथे की बिंदिया तू है सनम,
नैनों का कजरा पिया तेरा ग़म
नैन के नीचे-नीचे, रहूँ तेरे पीछे-पीछे,
चलूँ किसी मंजिल में

तसवीर तेरी दिल में,
जिस दिन से उतारी है,
फिरूँ तुझे संग ले के,
नए-ऩए रंग ले के,
सपनों की महफिल में

तसवीर तेरी दिल में

तुमसे नज़र जब गई है मिल,
जहाँ हैं कदम तेरे वहीं मेरा दिल
तुमसे नज़र जब गई है मिल,
जहाँ हैं कदम तेरे वहीं मेरा दिल
झुकें जहाँ पलकें तेरी, खुलें जहाँ ज़ुल्फें तेरी,
रहूँ उसी मंज़िल में

तसवीर तेरी दिल में,
जिस दिन से उतारी है,
फिरूँ तुझे संग ले के,
नए-ऩए रंग ले के,
सपनों की महफिल में

तसवीर तेरी दिल में

तूफ़ान उठाएगी दुनिया मगर,
रूक ना सकेगा दिल का सफ़र
तूफ़ान उठाएगी दुनिया मगर,
रूक ना सकेगा दिल का सफ़र
यूँ ही नजर मिलती होगी,
यूँ ही शमाँ जलती होगी,
तेरी-मेरी मंजिल में।

तसवीर तेरी दिल में,
जिस दिन से उतारी है,
फिरूँ तुझे संग ले के,
नए-ऩए रंग ले के,
सपनों की महफिल में

तसवीर तेरी दिल में

............................
Tasveer teri dil mein-Maya 1961

Tuesday, 5 July 2011

तेरे बिना ओ मेरे सनम-लक्ष्य १९९४

लक्ष्य नाम से दो फ़िल्में याद हैं। एक तो ये है जिसका गीत आपको
सुनवा रहे हैं आज। दूसरी अभी ६-७ साल पहले आई थी। कुमार सानू
और कविता कृष्णमूर्ति का गाया ये मधुर गीत शायद आपको सुनने
को ना मिला हो। युग बदलने के साथ माधुर्य कहीं गोल ना हो गया हो,
ऐसी शंकाओं को झुठलाता ये गीत यही साबित करता है कि कभी भी
पूरे कुवें में भांग पढ़ी नहीं मिलेगी आपको, थोड़ी कसर बाकी रह ही जाती
है। गीत लिखा है मजरूह सुल्तानपुरी ने । फिल्म में रोनित रॉय और
प्रियंका प्रमुख भूमिकाओं में हैं।



गीत के बोल:

तेरे बिना ओ मेरे सनम
रह ना सकेंगे हम
तेरे बिना ओ मेरे सनम
रह ना सकेंगे हम

ये दिल जान-ए-जाना
माने नहीं दीवाना, तेरी कसम

तेरे बिना ओ मेरे सनम
रह ना सकेंगे हम
तेरे बिना ओ मेरे सनम
रह ना सकेंगे हम

ये दिल जान-ए-जाना
माने नहीं दीवाना, तेरी कसम

तेरे बिना ओ मेरे सनम
रह ना सकेंगे हम
तेरे बिना ओ मेरे सनम
रह ना सकेंगे हम

आ जा मैं कब से आँखें लगाये
राहों में बैठी पलकें बिछाए
ऐसा ना होगा कि जो तू पुकारे
और हम ना आयें चाहत के मारे
आये हो जान-ए-जाना तो आ के नहीं जाना
मेरी कसम

तेरे बिना ओ मेरे सनम
रह ना सकेंगे हम
हो ओ ओ ओ ओ ओ
तेरे बिना ओ मेरे सनम
रह ना सकेंगे हम

अब तो लगी को तू ही बुझाये
लग जा गले से तो चैन आये
ऐसी सिमट जाऊं बाँहों में तेरी
घुल जाएँ साँसें साँसों में तेरी
ज़माने से छुपा लूं मैं दिल में बसा लूं
तुझको सनम

तेरे बिना ओ मेरे सनम
रह ना सकेंगे हम
तेरे बिना ओ मेरे सनम
रह ना सकेंगे हम

ये दिल जान-ए-जाना
माने नहीं दीवाना, तेरी कसम

तेरे बिना ओ मेरे सनम
रह ना सकेंगे हम
तेरे बिना ओ मेरे सनम
रह ना सकेंगे हम

...............................
Tere bina o mere sanam-Laqshya 1994

Monday, 27 June 2011

कौन किसी को बांध सका-कालिया १९८१

कुछ चीज़ों का कुदरती साथ होता है, कुछ का होता अदरकी साथ और
कुछ का हम जबरन बना दिया करते हैं। चोली दामन का साथ एक
जग-जाहिर उदाहरण है। बम्बई के वड़ापाव की ही बात ली जाये। बिना
वडे का पाव या बिना पाव का वडा बम्बई, जिसे हम अब मुंबई कहते हैं,
के निवासियों को थोड़ा अटपटा सा लगता है। ये तो क्षेत्र विशेष का
उदाहरण हो गया।

एक उदाहरण और-कुछ लोगों का मानना है कि मौसंबी के जूस में
ग्लूकोज़ का होना ज़रूरी है। एक ज़माना था जब लगभग हर बीमार
को मौसंबी के रस में ग्लूकोज़ मिला के दिया जाता। अब जो जनता
शौकिया तौर पर बाज़ार में जा कर जूस पीती उसे ग्लूकोज़ नहीं
मिलता तो पूछती-इसमें गुल्लू-कोज़ नहीं मिलाया ?

फिल्मों में भी ऐसे आवश्यक तत्त्व होते हैं। आज आपको अमिताभ की
फिल्म का एक गीत सुनवाते हैं इसमें जो कलाकार परदे पर गीत गा रहा
है उसका नाम है-राम शेट्टी। ये जनाब आपको ८० के दशक की लगभग
हर उस फिल्म में जिसमें अमिताभ ने काम किया है, मिल जायेंगे।

एक समय था जब अमिताभ की फिल्मों में महमूद होते, कभी उनकी
फिल्मों में मुकरी होते। आज आप महसूस करेंगे उनके साथ दो शख्सों
की उपस्थिति-परेश रावल और शरद सक्सेना। समय समय पर ऐसे
आवश्यक तत्वों में बदलाव होता रहा। अमिताभ के पूरे फ़िल्मी
कैरियर को अगर ४ खण्डों में बांटा जाये तो हर दौर की कुछ अलग
विशेषताएं आपको मिलेंगी। इसपर विस्तृत चर्चा फिर कभी।

गीत सुना जाये जिसे लिखा है मजरूह सुल्तानपुरी ने और धुन बनाई
राहुल देव बर्मन ने। गायक कलाकार हैं मोहम्मद रफ़ी।



गीत के बोल:

कौन किसी को बांध सका
हाँ, कौन किसी को बाँध सका
सय्याद तो एक दीवाना है
तोड़ के पिंजरा एक न एक दिन
पंछी को उड़ जाना है

कौन किसी को बांध सका
सय्याद तो एक दीवाना है
तोड़ के पिंजरा एक न एक दिन
पंछी को उड़ जाना है

अंगड़ाई ले कर के जागी है नौजवानी
अंगड़ाई ले कर के जागी है नौजवानी
सपने नये हैं और ज़ंजीर है पुरानी
पहरेदार फ़ांके से
बरसो राम धड़ाके से
होशियार भई सब होशियार
रात अंधेरी, रुत बरखा और
ग़ाफ़िल सारा ज़माना है
तोड़ के पिंजरा एक न एक दिन
पंछी को उड़ जाना है

कौन किसी को बांध सका
सय्याद तो एक दीवाना है
तोड़ के पिंजरा एक न एक दिन
पंछी को उड़ जाना है

हो ओ ओ ओ हो ओ हो ओ
खिड़की से रुकता है झोंका कहीं हवा का ?
हिल जायें दीवारें ऐसा करो धमाका
खिड़की से रुकता है झोंका कहीं हवा का ?
हिल जायें दीवारें ऐसा करो धमाका
बोले ढोल ताशे से
बरसो राम धड़ाके से
होशियार भई सब होशियार
देख के भी न, कोई देखे
ऐसा कुछ रंग जमाना है

तोड़ के पिंजरा, एक न एक दिन, पंछी को उड़ जाना है
कौन किसी को बाँध सका, सय्याद तो इक दीवाना है
तोड़ के पिंजरा, एक न एक दिन, पंछी को उड़ जाना है

कह दो शिकारी से फंदा लगा के देखे
कह दो शिकारी से फंदा लगा के देखे
अब जिसमें हिम्मत हो रस्ते में आ के देखे
निकला शेर हाँके से
बरसो राम धड़ाके से
होशियार भई सब होशियार
जाने वाले को जाना है और
सीना तान के जाना है
तोड़ के पिंजरा एक न एक दिन
पंछी को उड़ जाना है

कौन किसी को बांध सका
सय्याद तो एक दीवाना है
तोड़ के पिंजरा एक न एक दिन
पंछी को उड़ जाना है

कौन किसी को बांध सका
सय्याद तो एक दीवाना है
तोड़ के पिंजरा एक न एक दिन
पंछी को उड़ जाना है
................................
Kaun kisi ko bandh saka-Kaalia 1981

Sunday, 26 June 2011

आसमान के नीचे-ज्वैल थीफ १९६७

फिल्म ज्वैल थीफ का एक गीत शैलेन्द्र ने लिखा और बाकी गीत
मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखे, कारण आपको इस फिल्म का पहला
गीत सुनवाते वक़्त बताया गया था।

इस फिल्म के सभी गीत लोकप्रिय हुए। प्रस्तुत गीत एक फुरसती सा
गीत है, फिल्म की सिचुएशन के हिसाब से। नायक नायिका सज संवर
के बाग़ में गीत गा रहे हैं। देव आनंद का जो सिर पर टोपी रखने का
अंदाज़ है वो काफ़ी सारी ४०-५० के दशक की विलायती फिल्मों में
आप देख सकते हैं। अच्छी बात है, कोई भी स्टाइल जो पसंद आये उसे
अपना लेना चाहिए। इस स्टाइल का बहुत इस्तेमाल हुआ है फिल्मों
में।

वास्को-डी-गामा को धरती पर दूसरे देशों की खोज का श्रेय जाता है
तो हिंदी फिल्मों के निर्देशकों को भी धन्यवाद् देने की ज़रुरत है जिनकी
वजह से हमें दूसरे देशों के बारे में जानकारी मिलती है । आम जनता
विलायत की सैर के ख्वाब देखती रहती है लेकिन ये हसरत फिल्मों के
माध्यम से, अधूरी ही सही, देख देख कर पूरी अवश्य हो जाती है ।

गीत गाया है लता और किशोर ने। गीत की धुन है सचिन देव बर्मन की।
ये काफ़ी घिसा हुआ अर्थात बजा हुआ युगल गीत है और आपने इसको
एक ना एक बार ज़रूर सुना होगा।



गीत के बोल:

आसमान के नीचे,
आसमान के नीचे ...आगे
हम आज अपने पीछे
हम आज अपने पीछे ... फिर
प्यार का जहाँ बसा के चले
कदम के निशां बना के चले

आसमान के नीचे
हम आज अपने पीछे
प्यार का जहाँ बसा के चले
कदम के निशां बना के चले

आसमान के नीचे
हम आज अपने पीछे
प्यार का जहाँ बसा के चले
कदम के निशां बना के चले

तुम चले तो फूल जैसे आँचल के रँग से
सज गई राहें, सज गई राहें
पास आओ मै पहना दूँ चाहत का हार ये
खुली खुली बाहें, खुली खुली बाहें
जिस का हो आँचल खुद ही चमन
कहिये वो क्यूँ हार बाहों के डाले

अरे आसमान के नीचे
हम आज अपने पीछे
प्यार का जहाँ बसा के चले
कदम के निशां बना के चले

बोलती हैं आज आँखें कुछ भी न आज तुम
कहने दो हमको, कहने दो हमको
बेखुदी बढ़ती चली है अब तो ख़ामोश ही
रहने दो हमको, रहने दो हमको
इक बार एक बार, मेरे लिये
कह दो खनकें, लाल होंठों के प्याले

आसमान के नीचे
हम आज अपने पीछे
प्यार का जहाँ बसा के चले
कदम के निशां बना के चले

साथ मेरे चल के देखो आई हैं धूम से
अब की बहारें, अब की बहारें
हर गली हर मोड़ पे वो दोनों के नाम से
हमको पुकारे, तुमको पुकारे
कह दो बहारों से, आए न इधर
उन तक उठ कर, हम नहीं जाने वाले

आसमान के नीचे
हम आज अपने पीछे
प्यार का जहाँ बसा के चले
कदम के निशां बना के चले
...............................
Aasman ke neeche-Jewl Thief 1967
 
 
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