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Monday, 16 December 2013

सूनी रे सजरिया-नमक हराम १९७३

दो वक्त की रोटी का चक्कर बड़ा बुरा. किया क्या जाए इसके बिना काम
नहीं चलता है. बोलने की बक बक इतनी हो गयी पिछले दिनों कि इधर से
ध्यान न चाहते हुए भी हट गया. हिन्दुस्तान की सरज़मीं पर मौजूद कई
इन्टरनेट कनेक्शन इतने तेज चला करते हैं कि आज एड्रेस टाइप करो,
साईट कल खुलने की गारंटी.

पाठकों से क्षमा याचना सहित अगली प्रस्तुति हाज़िर है. सन १९७३ की फिल्म

 नमक हराम से. हृषिकेश  मुखर्जी निर्देशित इस फिल्म में दो सुपर स्टार मौजूद
हैं। हृषिकेश मुखर्जी क हिसाब से इसे अलग हट के बनी फिल्म कहा जा सकता है.
वो  हलकी फुलकी फिल्मों के लिए ज्यादा पहचाने गए हैं. ये थोड़ी गंभीर किस्म की
फिल्म है . फिल्म के बाकी गेटों के लिहाज़ से प्रस्तुत गीत भी थोडा अलग है.
पुरानी अनेक फिल्मों में आपको मुजरा ज़रूर मिलेगा मानो बिना उसके फिल्म
बनाना असंभव हो. ऐसा ही कुछ मुझे इस फिल्म को देख के महसूस हुआ.

बहरहाल जो भी हो गीत सुनिए जो एक महिला युगल गीत है आशा भोंसले और
उषा मंगेशकर का गाया हुआ. आशा कि आवाज़ पर जयश्री टी होंठ हिला रही हैं
दूसरी अभिनेत्री को मैं पहचान नहीं पा रहा हूँ.








गीत के बोल:

सूनी, सूनी रे सजरिया साजन बिन तेरे
सूनी रे सजरिया साजन बिन तेरे
सूनी रे सजरिया साजन बिन तेरे

हो भई मैं बाँवरिया हाय राम
भई मैं बाँवरिया साजन बिन तेरे

सूनी रे सजरिया साजन बिन तेरे
सूनी रे सजरिया साजन बिन तेरे


रिमझिम काहे को बरसे रे बदरा
बह गया धुल के नैनों से कजरा

रिमझिम काहे को
रिमझिम हाँ
रिमझिम काहे को बरसे रे बदरा
बह गया धुल के नैनों से कजरा

अबके बरस सावन से पूछो
छाई क्यूँ बदरिया हाय राम

छाई क्यूँ बदरिया साजन बिन तेरे

सूनी रे सजरिया साजन बिन तेरे
सूनी रे सजरिया साजन बिन ते

लोग न जाने ऐसे जीते हैं कैसे
लोग न जाने ऐसे जीते हैं कैसे
तुमसे बिछड के हम तो मर गए जैसे
लोग न जाने ऐसे
लोग न हाँ हाँ हाँ
लोग न हाँ हाँ हाँ
लोग न जाने ऐसे जीते हैं कैसे
तुमसे बिछड के हम तो मर गए जैसे
ऐसे निगोडी बिरहा की रैना 
बीते न सांवरिया हाय राम
बीते न सांवरिया साजन बिन तेरे

सूनी रे सजरिया साजन बिन तेरे
सूनी रे सजरिया साजन बिन तेरे
सूनी रे सजरिया साजन बिन तेरे

_____________________________
Sooni re sajariya-Namak Haram 1973
 

Thursday, 25 October 2012

दीवारों का जंगल-दीवार १९७५

यश चोपड़ा के जाने से हिंदी फिल्म सिनेमा का एक
चैप्टर बंद हो गया है. इस चैप्टर में सफलता के कई
अफ़साने लिखे हुए हैं. प्रगतिशील से परिवर्तनशील सभी
दौरों से गुज़रते हुए उन्होंने दर्शकों के समक्ष कई अनमोल
फ़िल्में पेश कीं.

उनको फिल्म सिनेमा का दर्शक प्रेम कहानियों और प्रेम
त्रिकोणों के लिए ज्यादा जानता है. एक विशिष्ट बात उनके
पूरे फ़िल्मी कैरियर में रही कि उनकी फिल्मों के संगीत का
स्तर बेहतर रहा और संगीत लोकप्रिय रहा. उनके खाते में
फ़िल्मी दुनिया का एक उपकार दर्ज है वो है- महानायक की
दूसरी पारी की सफल शुरुआत करवाना. फिल्म मोहब्बतें
आपको ज़रूर ही अभी तक याद होगी.

चलिए ज़रा लीक से हट कर उनकी निर्देशित एक फिल्म का
गीत सुनते हैं जो ज़रा फिलोसोफिक है. गीत साहिर का लिखा
हुआ है जिसे मन्ना डे ने स्वर दिया है और संगीत तैयार किया
है राहुल देव बर्मन ने.




गीत के बोल:

दीवारों का जंगल जिसका आबादी है नाम
बाहर से चुप चुप लगता है अंदर है कोहराम

दीवारों के इस जंगल में भटक रहे इंसान
अपने अपने उलझे दामन झटक रहे इंसान
अपनी विपदा छोड़ते आये
अपनी विपदा छोड़ते आये कौन किसी के गाम

बाहर से चुप चुप लगता है अंदर है कोहराम

सीने खाली ऑंखें सूनी चेहरों पर हैरानी
सीने खाली ऑंखें सूनी चेहरों पर हैरानी
जितने घने हंगामें इसमें उतनी घनी वीरानी
रातें कातिल सुबहें मुजरिम
रातें कातिल सुबहें मुजरिम, मुजरिम है हर शाम

बाहर से चुप चुप लगता है अंदर है कोहराम
 
-------------------------------------------------
Deewaron ka jangal-Deewar 1975



Monday, 30 January 2012

कभी हंसी और कभी रहम-भला मानुस १९७९

आज आपको एक टाई-खींचू गीत सुनवाते हैं। नायिका बहुत ही प्यार से
नायक के गले में बंधी टाई खींच रही है जैसे कोई चरवाहा अपनी
प्यारी भैंस के गले में बंधी रस्सी खींचता है। गीत है फिल्म भला मानुस
से जिसके दो चर्चित गीत आपको सुनवा चुके हैं पहले ।

हिंदी फिल्मों में ऐसे गीत कम हैं जिसमें नायिका नायक की टांग खींचती
नज़र आती है। शायद पुरुष प्रधान मानसिकता ये करने से रोकती है ।

गीत मनोरंजक है इसलिए टिप्पणी भी रोचक होने से पाठक का आनंद
डेढ़ गुना हो जाता है। गीत शायद ही अपने कभी सुना या देखा हो।
खैर, अगर आप आर डी बर्मन भक्त हैं तो मैं आपकी तसल्ली के लिए
अपना चैनल बदल लेता हूँ और कहता हूँ -वह क्या छुपा नगीना है।
इसका फिल्मांकन भी ज़बरदस्त है । गायकी ज़बरदस्त है, संगीत
ज़बरदस्त है, नायक ज़बरदस्त है, नायिका ज़बरदस्त है। उनकी अदाकारी
ज़बरदस्त है और गीत में दिख रहे बाकी के कलाकार भी ज़बरदस्त है।
और तो और शायद आपको मालूम हो फिल्म "ज़बरदस्त" में भी
आर डी बर्मन का ही ज़बरदस्त म्युज़िक है।



कभी हंसी और कभी रहम आता है तेरे हाल पे
कभी हंसी और कभी रहम आता है तेरे हाल पे
मेड इन यू एस ऐ का लेबल लगा है देसी माल पे
मेड इन यू एस ऐ का लेबल लगा है देसी माल पे

अरे, कभी हंसी और कभी रहम आता है तेरे हाल पे
मेड इन यू एस ऐ का लेबल लगा है देसी माल पे

असली पर नकली का पर्दा क्या डाला है साले
झूठी चमक में और कोई होंगे फँस जाने वाले
असली पर नकली का पर्दा क्या डाला है साले
झूठी चमक में और कोई होंगे फँस जाने वाले

रंग ये तू दिखाना किसी और को
मैं तो प्यार से एक तमाचा दूँगी तेरे गाल पे

कभी हंसी और कभी रहम आता है तेरे हाल पे
मेड इन यू एस ऐ का लेबल लगा है देसी माल पे

देश है अब आज़ाद हमारा मिली हमें आजादी
अब हम अपनी मर्ज़ी से ही करेंगे अपनी शादी
देश है अब आज़ाद हमारा मिली हमें आजादी
अब हम अपनी मर्ज़ी से ही करेंगे अपनी शादी
नारियां अब किसी बात में कम नहीं, हो हो हो
ऐसे नचवायेंगी मर्दों को तबले की ताल पे

कभी हंसी और कभी रहम आता है तेरे हाल पे
कभी हंसी और कभी रहम आता है तेरे हाल पे
मेड इन यू एस ऐ का लेबल लगा है देसी माल पे
हा हा हा
.....................................
Kabhi hansi aur kabhi raham-Bhala manus 1979

Friday, 27 January 2012

गुमसुम क्यूँ है सनम-भला मानुस १९७९

एक फिल्म आई थी कसमे वादे जिसके निर्देशक रमेश बहल थे। फिल्म
के साउंड ट्रेक यानि एल. पी. पर एक गाना उपलब्ध है आशा भोंसले का
गाया हुआ जो फिल्म में आपको कहीं नज़र नहीं आएगा। फिल्म कसमे वादे
में रणधीर कपूर और नीतू सिंह की जोड़ी है। रणधीर कपूर ने एक फिल्म
प्रोड्यूस की 'भला-मानुस' जिसमें उन्होंने ये गीत ले लिया। गीत का वीडिओ
देख कर लगता है मानो ये ज्यों का त्यों फिल्म में फिट कर दिया गया हो।

गायक की आवाज़ को वाद्य यन्त्र की तरह कैसे इस्तेमाल किया जाता है उसका
एक बढ़िया उदाहरण है ये गीत। गुलशन बावरा के लिखे गीत की धुन बनाई है
राहुल देव बर्मन ने। तबियत से इस गीत की धुन तैयार की गई है। मगर हर
कर्णप्रिय गीत की नियति "प्राण जाये पर वचन न जाये " के गीत "चैन से
हमको कभी " जैसी नहीं होती है जो फिल्म में से निकाले जाने के बाद भी
बेहद लोकप्रिय और अमर हो जाये।



गीत के बोल:

हो गुमसुम क्यों है सनम
अब ज़रा मान जा
प्यार का ये मौसम है
ऐसे में दिल न जला

गुमसुम क्यों है सनम
अब ज़रा मान जा
प्यार का ये मौसम है
ऐसे में दिल न जला

गुमसुम क्यों है सनम
गुमसुम क्यों है सनम

जाने बूझे नज़र चुराए
दिल की बातें समझ न पाए
ओ सितमगर देख अब तो, हो जा मेहरबान
जाने बूझे नज़र चुराए
दिल की बातें समझ न पाए
ओ सितमगर देख अब तो, हो जा मेहरबान
दर्द दिया है तो दे दे दवा

गुमसुम क्यों है सनम
अब ज़रा मान जा
प्यार का ये मौसम है
ऐसे में दिल न जला

गुमसुम क्यों है सनम
गुमसुम क्यों है सनम

कब से है बेक़रार ये दिल
कब से कहती हूँ झूम के मिल
ओ अनादी बन खिलाड़ी ले ले बाहों में
कब से है बेक़रार ये दिल
कब से कहती हूँ झूम के मिल
ओ अनादी बन खिलाड़ी ले ले बाहों में
कैसे पिया से मेरा पला पडा
गुमसुम क्यों है सनम
अब ज़रा मान जा
प्यार का ये मौसम है
ऐसे में दिल न जला

गुमसुम क्यों है सनम
गुमसुम क्यों है सनम
.............................................
Gum sum kyun hai sanam-Bhala manus 1979

Saturday, 29 October 2011

हम तुम दोनों मिल के-लावा १९८५

आपको एक युगल गीत सुनवाते हैं फिल्म लावा से। राज कपूर
के सबसे छोटे पुत्र जो नायक हैं लावा के, उनके साथ इस फिल्म
में राज कपूर के दूसरे नंबर के पुत्र की बतौर नायक जो पहली
फिल्म थी उसकी नायिका इस फिल्म में मौजूद हैं।

इस गुत्थी को सुलझाते-सुलझाते आपको थोड़ा फ़िल्मी ज्ञान अवश्य
हो जायेगा। गीतकार और संगीतकार क्रमशः वही हैं जिन्होंने फिल्म
अमर प्रेम के लिए गीत लिखे और संगीत दिया।

इस गीत को गाया है दीनानाथ मंगेशकर की सबसे बड़ी सुपुत्री और
फिल्म सितारे अशोक कुमार के सबसे छोटे भाई ने।





गीत के बोल:

हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
ता रा रा रा रा रा रा रा रा

हम तुम दोनों मिल के दिल के गीत बनायेंगे
सरगम के फूलों से सुर संगीत बनायेंगे
जब छाएंगे बादल काले याद करेंगे दुनिया वाले
गीत वो मोहब्बत वाले, गुनगुनायेंगे

हम तुम दोनों मिल के दिल के गीत बनायेंगे
सरगम के फूलों से सुर संगीत बनायेंगे
जब छाएंगे बादल काले याद करेंगे दुनिया वाले
गीत वो मोहब्बत वाले, गुनगुनायेंगे

हम तुम दोनों मिल के दिल के गीत बनायेंगे

जब जब तुमको प्यार पुकारे
तुम आ जाना पास हमारे
जब जब तुमको प्यार पुकारे
तुम आ जाना पास हमारे
अब क्या आना अब क्या जाना
हम हर दम हैं साथ तुम्हारे
पल दूर को हम एक दूजे से दूर ना जायेंगे

हम तुम दोनों मिल के दिल के गीत बनायेंगे

सुनते रहना हम बोलेंगे
कुछ मत कहना हम बोलेंगे
सुनते रहना हम बोलेंगे
कुछ मत कहना हम बोलेंगे
दे तुमको आवाज़ जो कोई
तुम चुप रहना हम बोलेंगे
एक दूजे के नाम से हमको लोग बुलाएँगे

हम तुम दोनों मिल के दिल के गीत बनायेंगे

इतना प्यार करें हम कम है
प्यार है सागर दिल शबनम है
इतना प्यार करें हम कम है
प्यार है सागर दिल शबनम है
अरे कांटे चुभते हैं सीने में
कैसा फूलों का मौसम है
बादल भी बरसे तो दिल में आग लगायेंगे

हम तुम दोनों मिल के दिल के गीत बनायेंगे
जब छाएंगे बादल काले याद करेंगे दुनिया वाले
गीत वो मोहब्बत वाले, गुनगुनायेंगे

हम तुम दोनों मिल के दिल के गीत बनायेंगे
सरगम के फूलों से सुर संगीत बनायेंगे
....................................
Hum tum donon mil ke-Laava 1985

Wednesday, 26 October 2011

जब चाहा यारा तुमने-ज़बरदस्त १९८५

आपको फिल्म 'ज़बर दस्त' से तीन गीत सुनवाए जा चुके हैं। फिल्म
ज़बरदस्त बहुसितारा फ्लॉप फिल्म है जो कुछ उम्दा गीतों से सजी
हुयी है। आइये सुनें इस फिल्म का सबसे चर्चित गीत जिसे आपके
कान एक ना एक बार ज़रूर सुन चुके होंगे। ये गीत चित्रहार के
ज़माने में कई बार टी वी पर दिखाई दे जाता था। गीत में बैगपाइपर
की ध्वनि का बढ़िया प्रयोग है। गीत आनंद बक्षी का लिखा हुआ और
किशोर कुमार द्वारा गाया गया है। फिल्म में संगीत पंचम
का है।

श्रेणी बनाने क शौक़ीन इसे बैगपाइपर हिट्स की श्रेणी में रख सकते हैं।
(वो वाला बैगपाइपर नहीं-बोतल में भरे रंगीन पेय के विज्ञापन वाला)
पंचम ने इस वाद्य का बढ़िया प्रयोग फिल्म "हम किसी से कम नहीं" के
गीत में भी किया है और वो गीत भी किशोर कुमार का गाया हुआ है।




गीत के बोल:

जब चाहा यारा तुमने, आँखों से मारा तुमने
होंठों से ज़िन्दा कर दिया
अरे तुम्हारी मर्ज़ी पे चल रहें हैं, ख़ता हमारी क्या हो

जब चाहा यारा तुमने, आँखों से मारा तुमने
होंठों से ज़िन्दा कर दिया

चलो जी हम बुरे सही, चलो जी हम झूठे हैं
मग़र इनहीं निगाहों से हज़ारों दिल टूटे हैं
चलो जी हम बुरे सही, चलो जी हम झूठे हैं
मग़र इनहीं निगाहों से हज़ारों दिल टूटे हैं
अरे, कसम से कहना, हमारी सूरत नहीं है प्यारी क्या हो

जब चाहा यारा तुमने, आँखों से मारा तुमने
होंठों से ज़िन्दा कर दिया

समझ सको तो हमसफ़र, हमें तुम अपना जानो
उधर नहीं इधर चलो, कभी तो कहना मानो
समझ सको तो हमसफ़र, हमें तुम अपना जानो
उधर नहीं इधर चलो, कभी तो कहना मानो
समझ सको तो हमसफ़र, हमें तुम अपना जानो
उधर नहीं इधर चलो, कभी तो कहना मानो
अरे, लिपट के पूछो , के आगे मर्ज़ी है अब हमारी क्या हो

जब चाहा यारा तुमने, आँखों से मारा तुमने
होंठों से ज़िन्दा कर दिया
अरे तुम्हारी मर्ज़ी पे चल रहें हैं, ख़ता हमारी क्या हो

जब चाहा यारा तुमने, आँखों से मारा तुमने
होंठों से ज़िन्दा कर दिया
..............................................
Jab chaha yaara tumne-Zabardast 1985

Friday, 21 October 2011

सोना, सोना रूपा लायो रे-जोशीला १९७३

जोशीला नाम की एक फिल्म है सन १९७३ की। इसमें देव आनंद और
हेमा मालिनी प्रमुख कलाकार हैं। इस फिल्म को देख कर दर्शकों में जोश
जगा हो या ना हो, गीतों के श्रोताओं में जोश अवश्य ही जगा। फिल्म में
कुछ यादगार गीत हैं। आज आपको सुनवाते हैं आशा भोंसले का गाया थोड़ा
अलग सा गीत। वैसे आर डी बर्मन ने उनके लिए बहुतेरे अलग-हट-के गीत
बनाये हैं। फिल्म की खूबी साहिर लुधियानवी के लिखे गीत हैं। गीत भी कुछ
लीक से हट कर लिखा गया प्रतीत होता है।

वैसे ये पोस्ट भी अलग हट के ही है। इसे मैंने बिलकुल अलग हट के स्थान पर
लिखा था। रेलवे स्टेशन के प्लेटफोर्म पर लगी बेंच पर बैठ के। एक परिवार
के साथ दो छोटे छौने(बच्चे) चले जा रहे थे जिसमें से एक के जूतों से चूं चूं की
आवाज़ आ रही थी , उसे सुन के मुझे इस गीत का शुरूआती संगीत याद आया।
बच्चों के जूतों में चूं चूं की आवाज़ करने वाली आईटम का इस्तेमाल काफी पुराना
हो चुका है मगर सुनने में अच्छा लगता है। अगर किसी डोकरे के जूते में वही फिट
कर दिए जाएँ तो पब्लिक कहेगी-अरे मूंह से तो चूं चूं कम थी जो पैरों से भी करने
लगा बुड़ऊ?

गीत फिल्माया गया है नायिका हेमा मालिनी और अन्य बॉलीवुड में रोजी-रोटी
के लिए रोजाना जद्दो-जहद करने वाले अन्य अनजान से महत्वाकांक्षी सहयोगी
कलाकारों पर।

दर्शक दीर्घा में जो दो अन्य कलाकार हैं उनके नाम इस प्रकार से हैं-सुधीर और बिंदु।
गीत के बीच में दो अन्य महिला कलाकार दिखते हैं वे हैं- सुलोचना और पद्मा खन्ना।
गीत में आगे आपको इफ्तेखार भी पुलिस ऑफिसर की भूमिका में नज़र आयेंगे।

गीत कुछ हाई-फ्रीक्वेंसी ख्यालों से बंधा हुआ है। फिर भी आपको बतलाये देते हैं कि
फिल्म की सिचुएशन के मुताबिक ये नायिका द्वारा नायक की भाव भंगिमाओं और
कृत्यों के ऊपर कटाक्ष सा है। नायिका को ये लगता है कि नायक धन के लोभ में
कुछ आड़ी टेडी हरकतें कर रहा है।




गीत के बोल:


रु रु, रु, रु रु

ओ, सोना, सोना रूपा, सोना रूपा
सोना रूपा लायो रे
सोना रे, सोना
सोना रूपा, सोना रूपा लायो रे
ये सोना, ले जा रे
ये रूपा, ले जा रे
मुझे तो, दिल दे जा
मुझे तो, दिल दे जा

आ, सोना मिले तो लोग आजकल दिल को कभी ना लें
प्रीत के मुंह पर कालिख मल दें, प्यार को ठोकर दें
ओ सखी री, अब है ज़माना दूसरा
आ आ आ आ आ आ आ
सोना, सोना रे
सोना रूपा, सोना रूपा लायो रे
ये सोना, ले जा रे
ये रूपा, ले जा रे
मुझे तो, दिल दे जा
मुझे तो, दिल दे जा

आ, सोना मिले तो लोग आजकल दिल को कभी ना लें
प्रीत के मुंह पर कालिख मल दें प्यार को ठोकर दें
ओ सखी री, अब है ज़माना दूसरा
आ आ आ आ आ आ आ आ
सोना, सोना रे
सोना रूपा, सोना रूपा लायो रे

जादू भरे इशारे सब झूठे हैं
मतलब भरे सहारे सब छूटे हैं
या बा
वादे कभी ना सुनना पछताएगी
सपने कभी ना बुनना लुट जायेगी
ओ ओ ओ सखी री, अब है ज़माना दूसरा
आ आ आ
सोना, सोना रे
सोना रूपा, सोना रूपा लायो रे
ये सोना, ले जा रे
ये रूपा, ले जा रे
मुझे तो दिल दे जा
मुझे तो दिल दे जा
ला ला ला ला ला ला ला ला
सोना, सोना रे

पलकों तले ठिकाना कोई मांगे ना
दिल का भरा खजाना कोई मांगे ना
या बा
अपना इन्हें ना बना संसारी हैं
सदमे पड़ेंगे कहना व्यापारी हैं
ओ सखी री अब है ज़माना दूसरा
आ आ आ
सोना, सोना रे
सोना रूपा, सोना रूपा लायो रे
ये सोना, ले जा रे
ये रूपा, ले जा रे
मुझे तो दिल दे जा
मुझे तो दिल दे जा

आ, सोना मिले तो लोग आजकल दिल को कभी ना लें
प्रीत के मुंह पर कालिख मल दें प्यार को ठोकर दें
ओ ओ ओ सखी री अब है ज़माना दूसरा
आ आ आ आ आ आ आ
सोना, सोना रे
सोना रूपा, सोना रूपा लायो रे
सोना, सोना रे
........................
Sona Rupa Layo Re-Joshila 1973

Saturday, 8 October 2011

लुट गई मैं तो आज हो रामा-झूठा सच १९८४

फिल्म अभिनेत्री रेखा हर दशक के साथ नए रूप-संस्करण में दिखाई दीं
इसीलिए उनको अंग्रेजी की 'दिवा' कहा जाता है। गौरतलब है की उन्होंने
अपनी काय को योग के ज़रिये आकर्षक बना लिया और ८० के दशक में
फिल्मकारों ने उनके लिए विशेष दृश्य फिल्मों में तैयार किये उनके सौंदर्य
को आम दर्शक से रु-ब-रु कराने के लिए। रेखा के ऊपर फिल्माया गया और
एक कम सुना गया एक गीत सुनते हैं आज, फिल्म 'झूठा सच' से जिसमें उनके
साथ नायक हैं-धर्मेन्द्र।

गीत लिखा है मजरूह सुल्तानपुरी ने और इसकी धुन बनाई है आर. डी. बर्मन
ने। गीत गया है आशा भोंसले ने।



गीत के बोल:

लुट गई मैं तो आज हो रामा
खुली सड़क पर खड़ी खड़ी
लुट गई मैं तो आज हो रामा
खुली सड़क पर खड़ी खडी

लुट गई मैं तो, लुट गई
लुट गई मैं तो आज हो रामा
हो रामा हो रामा है दिया हो रामा
खुली सड़क पर खड़ी खड़ी

............................................
Lut gayi main to-Jhootha Sach 1984

Sunday, 28 August 2011

इक बात सुनी है चाचाजी-नरम गरम १९८१

हिंदी फिल्मों में अभिनेता-गायक, अभिनेत्री-गायिका बहुत हुए हैं. समय

समय पर अनियमित गायक अभिनेताओं की सेवाएं भी ली गयीं. कुछ अलग

हट के दिखने सुनाने की कोशिश में भी कभी ऐसे प्रयोग हुए. किसी ने सोचा

भी न होगा कि शत्रुघ्न सिन्हा की खरखरी आवाज़ में कोई गीत सुनने को मिलेगा.

ये करिश्मा हुआ फिल्म नरम गरम में जिसमें उन्होंने सुषमा श्रेष्ठ के साथ एक

युगल गीत गाया. संगीतकार हैं आर डी बर्मन जिन्होंने ये करिश्मा करवाया

गुलज़ार के बोलों पर. इसमें संभावित खाते पीते घर से आने वाली दुल्हन को

चाची "बुलडोज़र" का संबोधन दिया जा रहा है. गीत में दिख रही दुबली पतली

कन्या का नाम किरण वैराले है और उसने फिल्म में शत्रुघ्न की भतीजी का रोल

किया है.







गीत के बोल:





हाँ

इक बात सुनी है चाचाजी बतलाने वाली है

इक बात सुनी है चाचाजी बतलाने वाली है

अरे घर में एक अनोखी चीज़ आने वाली है

हाँ रे भैया ने फिर कोई लड़की देखी है

तेरी चाची- बुलडोज़र, आने वाली है



इक बात सुनी है चाचाजी बतलाने वाली है



दिन और रात की खिट-पिट होगी होर्न बजायेगी

अच्छे ख़ासे घर को वो गैराज बनायेगी

दिन और रात की खिट-पिट होगी होर्न बजायेगी

अच्छे ख़ासे घर को वो गैराज बनायेगी

अरे आप को ऐं वैं चाची से खतरा लगता है

शादी हो जाये तो फिर देखें कैसा लगता है

अरे आयेगी ही अब तो वो जो आने वाली है



इक बात सुनी है चाचाजी बतलाने वाली है

हाँ घर में एक अनोखी चीज़ आने वाली है

हाँ रे भैया ने फिर कोई लड़की देखी है

तेरी चाची- बुलडोज़र, आने वाली है



जाने अब क्या होगा वो क्या हाल बनायेगी

मूँह से खाता था वो नाकों चने चबवायेगी

जाने अब क्या होगा वो क्या हाल बनायेगी

मूँह से खाता था वो नाकों चने चबवायेगी

गोभी आलू बने तो कहना आलू गोभी दे

हाल न खाना माल न खाना, खाना बाकी जो भी दे

अरे आयेगी ही अब तो वो जो आने वाली है



इक बात सुनी है चाचाजी बतलाने वाली है

हाँ घर में एक अनोखी चीज़ आने वाली है

हाँ रे भैया ने फिर कोई लड़की देखी है

तेरी चाची- बुलडोज़र, आने वाली है

..............................................

Ek baat suni hai chacha ji-Naram Garam 1981

Tuesday, 9 August 2011

करेगा ज़माना क्या-ज़बरदस्त १९८५

बार्बी डॉल डांस देखिये फिल्म ज़बरदस्त से। पिछले कुछ गीतों में हमने
बात की थी कि रति अग्निहोत्री की लम्बाई ज्यादा है और वे अपने कई
साथी नायकों से लंबी हैं। इस गीत को इस तरह से फिल्माया गया है
कि राजीव कपूर की लम्बाई और उनकी लम्बाई बराबर दिखती है। ये
ज़बरदस्ती उछलो-कूदो नृत्य वाले गीत को गाया है किशोर कुमार ने और
आशा भोंसले ने।

श्रेणी बनाने का शौकीनों के लिए सुझाव-इस गीत को आप डार्लिंग गीत कह सकते
हैं। गीत आनंद बख्शी ने लिखा है और धुन है आर डी बर्मन की।






हो करेगा ज़माना क्या, सच को छुपाना क्या
दुनिया को आओ बतला दें
हो करेगा ज़माना क्या, सच को छुपाना क्या
दुनिया को आओ बतला दें
तुम हो मेरे, हम हैं तेरे
डार्लिंग, है ना बोलो है ना

हो हो हो हो हो हो हो हो हो
करेगा ज़माना क्या, सच को छुपाना क्या
दुनिया को आओ बतला दें
करेगा ज़माना क्या, सच को छुपाना क्या
दुनिया को आओ बतला दें
तुम हो मेरे, हम हैं तेरे
डार्लिंग, है ना बोलो है ना

हो हो हो

हे, मेरा सब कुछ तेरे लिए, तेरा सब कुछ मेरे लिए
बोलो बोलो
मेरा सब कुछ तेरे लिए, तेरा सब कुछ मेरे लिए
आखिर को है
हाँ आखिर को हैं बीवी मियां
डार्लिंग है ना बोलो है ना

हो हो हो हो हो हो हो हो हो
करेगा ज़माना क्या, सच को छुपाना क्या
दुनिया को आओ बतला दें

आए हुए बड़ी दूर से हैं, हम तो यहाँ मई-जून से हैं
आए हुए बड़ी दूर से हैं, हम तो यहाँ मई-जून से हैं
और आज ही
और आज ही, है वापसी
डार्लिंग है न बोलो है न

हो हो हो हो हो हो हो हो हो
करेगा ज़माना क्या, सच को छुपाना क्या
दुनिया को आओ बतला दें
........................................
Karega zamana kya-Zabardast 1985

Saturday, 6 August 2011

चाकू चले तेरे लिए बाजारों में-ज़लज़ला १९८८

पुरानी ज़लज़ला से गीत सुन लिया आपने, अब नए ज़लज़ले से मिलवाते
हैं आपको। बहुसितारा और बिलकुल फ्लॉप फिल्म से एक युगल गीत पेश
है किशोर कुमार और कविता कृष्णमूर्ती की आवाजों में।

इस गीत में आपको राजीव कपूर और विजयेता पंडित। तलवार भांजने वाले
चरित्र अभिनेताओं के नाम हैं-पिंचू कपूर और बीरबल। कुछ कोमेडी कुछ
तोड़ी मरोड़ी के मिश्रण वाला ये गीत पचास टका आनंद देता है और पचास
टका बोरियत। गीत इन्दीवर का लिखा हुआ है और धुन है आर डी बर्मन की ।
इन्दीवर की कलम की धार इस गीत में भी बरकरार है-मुलाहिजा फरमाएं
गीत के पहले और दूसरे अंतरे में कविता की आवाज़ वाले हिस्सों पर।





गीत के बोल:

अरे चाकू चले तेरे लिए बाज़ारों में
जंग छिड़े तेरे लिए दो यारों में

तूफ़ान तेरी जवानी
हुस्न है वो बाला
अरे दिलवालों की दुनिया में
आया है है है ज़लज़ला , ज़लज़ला

हो, चाकू चले मेरे लिए बाज़ारों में
जंग छिड़े मेरे लिए दो यारों में
बदकिस्मत इश्क का ये चल निकला सिलसिला
अरे दिलवालों की दुनिया में
आया है है है ज़लज़ला , ज़लज़ला

दुनिया के तीरों से
चलती शमशीरों से
तुझको बचा के मैं लाया
मेरा जिगर देख
दिल देख मेरा तू
कबसे ये दिल तुझपे आया

हो, दुनिया से मुझको बचा लाया
लेकिन मुझे कौन तुझसे कौन बचाएगा
तूने जो कर दी कोई मेहरबानी
जवानी पे दाग लग जायेगा
घर कैसे जाऊंगी
मैं तो मर जाऊंगी
अरे घरवालों की दुनिया में
आएगा आ आ ज़लज़ला, ज़लज़ला

हो, होंठों को बालों को
कानों को गालों को
दूर से देखा करूंगा
प्यार का परमिट मिलेगा ना जब तक
तब तक ना तुझको छुऊँगा
हो मैं भी हसीं
और तू भी जवान जानी
बज जाये कब तेरी घंटी
मुझको छुएगा ना छेड़ेगा तू
इसकी भी क्या है गारंटी
पहले मैं नाम जोडूंगा
फिर इतना प्यार करूंगा
अरे दुनिया की आबादी में
आएगा गा गा ज़लज़ला, ज़लज़ला

अरे चाकू चले मेरे लिए बाज़ारों में
जंग छिड़े मेरे लिए दो यारों में

अरे तूफ़ान तेरी जवानी
हुस्न है वो बाला
अरे दिलवालों की दुनिया में
आया है है है ज़लज़ला , ज़लज़ला
ज़लज़ला , ज़लज़ला
........................................
Are chaku chale tere liye-Zalzala 1988

Monday, 1 August 2011

तेरा आसरा है एक तेरा ही सहारा-धुआं १९८१

आज आपको एक भक्ति गीत सुनवाते हैं फिल्म धुन से जो
सन १९८१ की फिल्म है. मजरूह के लिखे, लता मंगेशकर के
गाये और राहुल देव बर्मन के स्वरबद्ध इस गीत को फिल्माया
गया है राखी पर. धुआं एक सस्पेंस फिल्म है जो कम
चलने वाली फिल्मों की श्रेणी में आती है.





गीत के बोल:

तेरा आसरा है एक तेरा ही सहारा
तेरा आसरा है एक तेरा ही सहारा
तू ही जो नहीं कौन है फिर हमारा
तेरा आसरा है एक तेरा ही सहारा
तेरा आसरा है

हो, तू जलसागर हमको बहा ले
अपनी ही लहरों में उठा के,
हो ओ ओ ओ ओ ओ
तेरे किनारे कब से खड़े हैं
जनम जनम के प्यासे
ऐसी बुझा के लगे न दुबारा

तेरा आसरा है एक तेरा ही सहारा
तेरा आसरा है एक तेरा ही सहारा
तू ही जो नहीं कौन है फिर हमारा
तेरा आसरा है

कैसी सभा ये तूने सजाई
सब एक दूजे से पराये
हो ओ ओ ओ ओ ओ
तू चाहे देखे सबका तमाशा
हमसे तो देखा न जाए
क्या तेरे प्यार का यही फल है सारा

तेरा आसरा है एक तेरा ही सहारा
तेरा आसरा है एक तेरा ही सहारा
तू ही जो नहीं कौन है फिर हमारा
तेरा आसरा है एक तेरा ही सहारा
तेरा आसरा है
...................................
Tera aasra hai-Dhuan 1981

Monday, 25 July 2011

आज तो मेरी हँसी उडाई-गोमती के किनारे १९७२

मजरूह के लिखे संवेदना को झंझोड़ने वाले गीतों में से एक है फ़िल्म
गोमती के किनारे से लता मंगेशकर का गाया हुआ ये गीत। मीना कुमारी
की इस अन्तिम फ़िल्म का निर्देशन सावन कुमार टाक ने किया था, जनता
को देखने को नहीं मिली। अब ज़रूर इस फिल्म की सी डी, डी वी डी मिलने
लगी है। मौका मिले तो एक बार अवश्य देखिएगा इसे।

लखनऊ शहर गोमती नदी के किनारे बसा हुआ है. इस फिल्म की कथा
कुछ कुछ यही इंगित करती है कि इस शहर की ही एक कहानी है ये.
लखनऊ की संस्कृति से मुजरा शब्द अछूता नहीं रहा कभी। तवायफ़ और
उनके नृत्य संगीत इत्यादि पर प्रकाश डालता जनादेश का एक लेख ज़रूर
पढ़ें- पहले बदनाम, फिर गुमनाम

गीत आदम जात के दोमुंहेपन पर करारा तमाचा सा है। आदमी के नंगेपन
की इन्तेहा ये है कि वो जिस जगह से इस नश्वर संसार में प्रकट होता है,
सयाना होने पर बार बार वहीँ जाना चाहता है। प्रकट होने के वक्त के कष्ट
को वो भूल कर उन गलियारों में वो आनंद ढूँढने लगता है। हवस के अन्धों
को रिश्ते, समाज रीति-रिवाज सब दिखलाई देने बंद हो जाते हैं। अपना
खुद का घर तो ऐसे लोगों का अपवाद होता है और वे पैसे के बल पर घर
से बाहर कोई भी बदतमीजी करने के लिए स्वतन्त्र होते हैं। मर्यादा और
परंपरा की दुहाई देने वाले बाहर निकल कर खुद अनियंत्रित और अमर्यादित
हो जाते हैं । सामाजिक ढांचे को सबसे ज्यादा क्षति साधन समर्थ और संकीर्ण
मानसिकता वाले लोग पहुंचाते हैं। गीत के अंतिम अंतरे में इसी बात पर
गौर किया गया है।

कोठे पर बैठे कलाकारों में आप आई. एस. जौहर को आसानी से पहचान
पाएंगे।




गाने के बोल:

आज तो मेरी हंसी उडाई
जैसे भी चाह पुकारा
आज तो मेरी हंसी उडाई
जैसे भी चाह पुकारा
कल जो मुझे इन गलियों में लाया
वो भी था हाथ तुम्हारा

आज तो मेरी हंसी उडाई
जैसे भी चाह पुकारा

लुटे यहाँ चमन अंधेरों ने
बिके यहाँ बदन अंधेरों में
लुटे यहाँ चमन अंधेरों ने
बिके यहाँ बदन अंधेरों में
भूली भटकी इस बस्ती में, हो ओ ओ
रूप की चांदी रात के सोने का व्यापार है सारा
कल जो मुझे इन गलियों में लाया
वो भी था हाथ तुम्हारा

आज तो मेरी हंसी उडाई
जैसे भी चाह पुकारा

सोचा कभी मैं भी हूँ एक इंसान भी
मैं भी कभी बहन भी हूँ कभी माँ भी
सोचा कभी मैं भी हूँ एक इंसान भी
मैं भी कभी बहन भी हूँ कभी माँ भी
तुम तो प्यासी प्यासी ऑंखें ले के, हो ओ ओ
करने को आये मेरे लबों पर मेरे लहू का नज़ारा
कल जो मुझे इन गलियों में लाया
वो भी था हाथ तुम्हारा

आज तो मेरी हंसी उडाई
जैसे भी चाह पुकारा

सबको गुनाहों में मगन देखा
देखा शरीफों का चलन देखा
सबको गुनाहों में मगन देखा
देखा शरीफों का चलन देखा
सबकी इनायत हाय देखी मैंने, हो ओ ओ
मेरे ही दिल के टुकड़े को मेरा आशिक कह कर पुकारा
कल जो मुझे इन गलियों में लाया
वो भी था हाथ तुम्हारा
..................................
Aaj to meri hansi udaai-Gomti ke kinare 1972

Tuesday, 19 July 2011

दिल क्या है एक शीशा है -लावा १९८५

८० के दशक में चला जाए. एक फिल्म है लावा जिसके गाने बहुत बजे थे
और फिल्म फ्लॉप थी. इस फिल्म से एक युगल गीत सुनवाते हैं आपको .
इसको युगल गीत कहना शायद उचित नहीं होगा क्यूंकि इसमें तीसरा कोण
भी मौजूद है यानि कि तीसरी आवाज़. ये फिल्म प्रेम त्रिकोण पर आधारित
है.

फिल्म डिम्पल कपाडिया की दूसरी पारी की फिल्म है जिसमें नायक राजीव कपूर
उनसे ज्यादा युवा नज़र आते हैं. इस कहानी के तीसरे कोण हैं राज बब्बर. एक
पार्टी में ये गीत गाया जा रहा है. आशा भोंसले के साथ किशोर कुमार और
शैलेन्द्र सिंह की आवाजें हैं. गीत में बॉलीवुड के रिटायर्ड और सेमी-रिटायर्ड
कलाकारों को रोज़गार मिला है-मदन पुरी, राजेंद्र नाथ, नरेन्द्र नाथ,सुधीर और
रमा विज़. गीत में आपको कुलभूषण खरबन्दा भी कहीं नज़र आ जायेंगे जो
फिल्म की मुख्य स्टार कास्ट का हिस्सा हैं .




गीत के बोल:

ता रा रा रा रा रा , ता रा रा रा रा रा
ला रा रा रा , रा रा रा रा रा रा

दिल क्या है एक शीशा है
शीशे में एक तस्वीर है
तस्वीर पे लिखा है तेरा नाम तुझे सलाम

दिल क्या है एक शीशा है
शीशे में एक तस्वीर है
तस्वीर पे लिखा है तेरा नाम तुझे सलाम

सुन रहे हैं लोग ये
दास्तान दिल थाम के
सुन रहे हैं लोग ये
दास्तान दिल थाम के
नाम मेरा जुड गया
साथ तेरे नाम के
इस प्यार में हम हो गए बदनाम तुझे सलाम

दिल क्या है एक शीशा है
शीशे में एक तस्वीर है
तस्वीर पे लिखा है तेरा नाम तुझे सलाम

आज इस दुनिया की सब
हमने सब रस्में तोड़ दीं
हो, आज इस दुनिया की सब
हमने सब रस्में तोड़ दीं
एक वादा कर लिया
सारी कसमें तोड़ दीं
आँखों ने दिल को दे दिया पैगाम तुझे सलाम

दिल क्या है एक शीशा है
शीशे में एक तस्वीर है
तस्वीर पे लिखा है तेरा नाम तुझे सलाम

जिंदगी भर के लिए
ये मोहब्बत कम न हो
जिंदगी भर के लिए
ये मोहब्बत कम न हो
दिल लगाये वो जिसे
जान का भी गम न हो
हर एक के बस का नहीं ये काम तुझे सलाम

दिल क्या है एक शीशा है
शीशे में एक तस्वीर है
तस्वीर पे लिखा है तेरा नाम तुझे सलाम

................................
Dil kya hai ek sheesha hai-Laava 1985

Monday, 18 July 2011

मैं भोला भाला हूँ-भोला भाला १९७८

फिल्म भोला भाला में राजेश खन्ना दोहरी भूमिका में हैं.
एक तो है भोला भाला युवक जो बीमा का एजेंट है. दूसरा
है डाकू.साईकिल पर हिंदी फिल्मों का नायक कम चला करता
है. नायक ने साईकिल भी चलायी लेकिन फिल्म नहीं चली.
कहानी में दम होना बहुत ज़रूरी है. ये पहली शर्त होती है
फिल्म के चलने में. गीत अच्छे हैं मगर वो भी फिल्म की
मदद नहीं कर पाए बॉक्स ऑफिस पर.

ये फिल्म का शीर्षक गीत है, आनंद बक्षी का लिखा और किशोर
का गाया हुआ. इसके संगीतकार हैं राहुल देव बर्मन.



गीत के बोल:

मैं भोला भाला हूँ
भोले दिल वाला हूँ

अरे मैं भोला भाला हूँ
भोले दिल वाला हूँ

दुनिया मुझको क्या जाने
दुनिया से निराला हूँ

मैं भोला भाला हूँ

मैं कहा राम राम
सब ठीक ठाक है ना

देस विदेस की बातें मैं क्या समझूं मैं क्या जानूं
..................................
Main bhola bhala hoon-Bhola bhala 1978

Sunday, 17 July 2011

किसका रस्ता देखे-जोशीला १९७३

जेल की सलाखों के पीछे बंद नौजवान एक दिमाग का दही बनाने
वाला गीत कैसे गा सकता है. सोचने वाली बात है.

पढ़ा लिखा नौकरीपेशा नायक हालातों के चलते सलाखों के पीछे पहुँच
जाता है. वहाँ वो इस उम्मीद में गीत गा रहा है मानो नक्कारखाने
में तूती की आवाज़ सुनने वाला कोई आ जायेगा. और, आ भी जाता
है, सुन्दर नायिका जिसके आने के बाद उसकी जिंदगी में फिर से बहार
लौटने वाली है. अपनी यादों में लुडकते लड़खड़ाते वो आखिर मंजिल की
सीढ़ियों पर फिर से पहुँच जाता है. दो नायिकाएं दिखाई देती हैं गीत
में-राखी और हेमा मालिनी. जेलर की भूमिका में हैं मनमोहन कृष्ण.

बोल साहिर के हैं और धुन राहुल देव बर्मन की. गायक को आप पहचान
ही गए होंगे. गीत की पञ्च लाइन है-कोई नहीं जो यूँ ही जहाँ में, बाँटे
पीर पराई.



गीत के बोल:

किसका रस्ता देखे ऐ दिल ऐ सौदाई

किसका रस्ता देखे ऐ दिल ऐ सौदाई
मीलों है ख़ामोशी, बरसों है तन्हाई
भूली दुनिया कभी की, तुझे भी मुझे भी
फिर क्यों आँख भर आई

हो, किसका रस्ता देखे ऐ दिल ऐ सौदाई

कोई भी साया नहीं राहों में
कोई भी आएगा ना बाहों में
तेरे लिए मेरे लिए, कोई नहीं रोनेवाला ओ
झूठा भी नाता नहीं चाहों में
हाय, तू ही क्यों डूबा रहे आहों में
कोई किसी संग मरे, ऐसा नहीं होने वाला
कोई नहीं जो यूँ ही जहाँ में, बाँटे पीर पराई

हो, किसका रस्ता देखे ऐ दिल ऐ सौदाई

तुझे क्या बीती हुई रातों से
मुझे क्या खोई हुई बातों से
सेज नहीं चिता सही, जो भी मिले सोना होगा
गई जो डोरी छूटी हाथों से
हो, लेना क्या टूटे हुए साथों से
खुशी जहाँ माँगी तूने, वहीं मुझे रोना होगा
ना कोई तेरा ना कोई मेरा, फिर किसकी याद आई

हो, किसका रस्ता देखे ऐ दिल ऐ सौदाई
मीलों है ख़ामोशी, बरसों है तन्हाई
भूली दुनिया कभी की, तुझे भी मुझे भी
फिर क्यों आँख भर आई

किसका रस्ता देखे ऐ दिल ऐ सौदाई
............................................
Kiska rasta dekhe-Joshila 1973

ये शाम मस्तानी-कटी पतंग १९७०

इस गीत के बारे में कुछ भी लिखना व्यर्थ है. इतनी बार इसे सुन लिया
गया है और इतनी दफे इसका जगह जगह उल्लेख हुआ है कि अब ज्यादा
लिखने कि गुंजाईश नहीं बची है सिवाए इसके गीतकार और संगीतकार के
नाम के. आनंद बक्षी ने लिखा और आर. डी. बर्मन ने इसका संगीत
तैयार किया है. फिल्म का नाम आपको मालूम ही है-गुलशन नंदा के
उपन्यास पर आधारित फिल्म कटी पतंग.



गीत के बोल:

ये शाम मस्तानी,
मदहोश किए जाए,
मुझे डोर कोई खींचे,
तेरी ओर लिए जाए

दूर रहती है तू,
मेरे पास आती नहीं,
होठों पे तेरे
कभी प्यास आती नहीं,
ऐसा लगे जैसे कि तू,
हँस के जहर कोई पिए जाये

ये शाम मस्तानी,
मदहोश किए जाए,
मुझे डोर कोई खींचे,
तेरी ओर लिए जाए

बात जब मैं करूँ,
मुझे रोक देती है क्यों,
तेरी मीठी नजर
मुझे टोक देती है क्यों
तेरी हया, तेरी शरम,
तेरी कसम मेरे होंठ सिये जाए

ये शाम मस्तानी,
मदहोश किए जाए,
मुझे डोर कोई खींचे,
तेरी ओर लिए जाए

एक रूठी हुई
तकदीर जैसे कोई,
खामोश ऐसे है तू
तसवीर जैसे कोई
तेरी नजर बन के जुबां,
लेकिन तेरे पैगाम दिए जाए

ये शाम मस्तानी,
मदहोश किए जाए,
मुझे डोर कोई खींचे,
तेरी ओर लिए जाए
.................................
Ye shaam mastani-Kati Patang 1970

बोतल से इक बात चली है-घर १९७८

गाने के लिए किसी सिचुएशन का होना ज़रूरी नहीं है किसी फिल्म में.
कभी कभी जबरन भी गीत ठूंसे जाते हैं किसी व्यक्ति विशेष की फ़रमाइश
पर. एक ऐसा ही गीत सुनवाते हैं आपको फिल्म घर से.

गीत फिल्माया गया है विनोद महरा और रेखा पर. गुलज़ार के लिखे बोलों
को सुरों में ढाला है आर डी बर्मन ने. आशा और रफ़ी इस गीत के गायक
हैं. जैसा की गुलज़ार के अधिकांश गीतों में होता है चाँद की विशेष सेवा
इस गीत में भी की गयी है.

कोका कोला की पुरानी बोतल कैसी दिखती थी ये कोका कोला प्रेमी जान
पाएंगे इस गीत से.



गीत के बोल:

बोतल से इक बात चली है
काग उड़ा के रात चली है

बोतल से इक बात चली है
काग उड़ा के रात चली है ,हो
तु रु रु तु, तु रु रु तु ,तु रु तु तु
तु रु रु तु, तु रु रु तु, तु रु तु तु

हो, बोतल से इक बात चली है
तू रु रु तू
काग उड़ा के रात चली है

आज की मय बहुत मीठी है
आज तो आँख मिला के पीना
चांद की मिसरी घुल जायेगी
चाँद से होंठ लगा के पीना

हो
तु रु रु तु तु रु रु तु तु रु तु तु
तु रु रु तु तु रु रु तु तु रु तु तु
हो, बोतल से इक बात चली है
काग उड़ा के रात चली है
हो, बोतल से इक बात चली है
काग उड़ा के रात चली है

वादों वाली रात आयी है
आज की रात इनकार ना करना
अपने दिन और रात ना पूछो
तुमसे जीना तुमपे मरना

तु रु रु तु तु रु रु तु तु रु तु तु
तु रु रु तु तु रु रु तु तु रु तु तु

हो, बोतल से इक बात चली है
तू रु रु तू
काग उड़ा के रात चली है
बोतल से इक बात चली है
काग उड़ा के रात चली है
ल ल ल ल ल ल ल ल

.....................................
Botal se ek baat chali hai-Ghar 1978

Friday, 15 July 2011

राजा बना मेरा छैला कैसा -गरम मसाला १९७२

काफी मसालेदार गीतों से भरपूर थी फिल्म गरम मसाला।
इस नाम से दो फ़िल्में बन चुकी हैं। एक तो कुछ साल पहले
ही आई थी। बहुत से कलाकारों की भीड़ वाला ये गीत काफी
मनोरंजक है। कैमरा ऐसे कोण पे ज्यादा घूमा है कि सिनेमा
हाल के आगे की बेंच वाले दर्शकों को इसे देखने में ज्यादा आनंद
आया होगा। गीत में अरुणा ईरानी, बिंदु, महमूद, जीवन
और टुनटुन ऐसे कलाकार हैं जिन्हें आप आसानी से पहचान
जायेंगे। गीत मजरूह का लिखा हुआ है इसलिए इसपर सरसरी
तौर पर निगाह फेर लेने की गलती ना करें, इसे ध्यान से
एक बार अवश्य सुनें। आशा भोंसले के गाये इस गीत की
तर्ज़ बनाई है राहुल देव बर्मन ने । इस गरम मसाले (गीत)
को पचाने(समझने) में आपको थोडा वक्त ज़रूर लगेगा.



गीत के बोल:

हा ली हा ली
राजा बना मोरा छैला कैसा
देखो मोरी गुइयाँ रे
राजा बना मोरा छैला कैसा
देखो मोरी गुइयाँ रे
आओ गोरी गोरी बैयाँ वारो
ले ले के बलैयां, हा
सदके हो के डारो
आंचरवा की छैयां
झिलमिल झिलमिल
राजा बना
राजा बना मोरा छैला कैसा
देखो मोरी गुइयाँ रे
आओ गोरी गोरी बैयाँ वारो
ले ले के बलैयां रे

रहे सदा राजा के पास हीरा मोती घूंघरा
क्या हुआ जो ये रूप का लालची है ज़रा
हा हा
रहे सदा राजा के पास हीरा मोती घूंघरा
क्या हुआ जो ये रूप का लालची है ज़रा
अरे ऐसे देखे मोहे जैसे मोरा सैयां
दैया, दैया

राजा बना
राजा बना मोरा छैला कैसा
देखो मोरी गुइयाँ रे
आओ गोरी गोरी बैयाँ वारो
ले ले के बलैयां रे

ऐसा भोला ऐसा नादान देखा नहीं, हां, कहीं
आगे है कौन पीछे है कौन जानता ही नहीं
हा हा
ऐसा भोला ऐसा नादान देखा नहीं, हां, कहीं
आगे है कौन पीछे है कौन जानता भी नहीं
इसी से मैं आई दौडी पैयां सैयां
छम छम छम छम

राजा बना रे रे
राजा बना मोरा छैला कैसा
देखो मोरी गुइयाँ रे
आओ गोरी गोरी बैयाँ वारो
ले ले के बलैयां रे

राजा का तो नौकर भी है कैसा प्यारा, हा, प्यारा
ऐसा कई घंटे से चूर बैठा है बेचारा, हा हा
राजा का तो नौकर भी है कैसा प्यारा, हा, प्यारा
ऐसा कई घंटे से चूर बैठा है बेचारा, हा हा
अरे इसके बजे बारह, दुआ करो कोई
ढम ढम ढम ढम

राजा बना
राजा बना मोरा छैला कैसा
देखो मोरी गुइयाँ रे
आओ गोरी गोरी बैयाँ वारो
ले ले के बलैयां रे
सदके हो के डारो
आंचरवा की छैयां
झिलमिल झिलमिल

राजा बना
राजा बना मोरा छैला कैसा
देखो मोरी गुइयाँ
.......................................
Raaja bana mora chhaila kaisa-Garam Masala 1972

Wednesday, 13 July 2011

काहे को बुलाया मुझे बालमा-हमशक्ल १९७४

जैसे मोगली सीरियल के शीर्षक गीत "चड्डी पहन के फूल खिला है"
पसंद आने की कोई विशेष वजह नहीं है वैसे ही प्रस्तुत गीत के पसंद
आने के पीछे भी कोई ख़ास कारण नहीं है। इसको सुनते सुनते कान
पक गये हैं। आकर्षक धुन एकमात्र जायज़ वजह हो सकती है इस गीत
को इतनी बार सुन लिया है कि याद नहीं। इसकी शुरूआती "हाय हाय"
और "जा तोसे बोलूं ना, घूँघट खोलूं ना" बोल दिमाग में बैठ से गये हैं।

ये आकर्षक युगल गीत है राजेश खन्ना के डबल डोज़ वाली अर्थात डबल रोल
वाली फिल्म हमशकल से। इसका एक गीत आपको सुनवा चुके हैं पहले
जिसमें मौसमी चटर्जी थीं राजेश खन्ना के साथ और 'झूम ना झूम ना'
कर रही थीं।



गीत के बोल:

हाय हाय
काहे को बुलाया
काहे को बुलाया मुझे बालमा प्यार में नाम से
प्यार के नाम से
काहे को बुलाया मुझे बालमा प्यार में नाम से
प्यार के नाम से

राधा ने यही पूछा था एक दिन रूठ कर श्याम से
रूठ कर श्याम से

जा तोसे बोलूँ ना घूँघटा खोलूँ ना डोलूँ ना मैं संग तेरे
जा तोसे बोलूँ ना घूँघटा खोलूँ ना डोलूँ ना मैं संग तेरे
रोज़ जो तुम रूठोगी ऐसे गुज़रेंगे दिन मेरे कैसे
जीने नहीं देगा मुझे चार दिन प्यार आराम से
प्यार आराम से

काहे को बुलाया मुझे बालमा प्यार में नाम से
प्यार के नाम से

काली घटाओं में, ठंडी हवाओं में, आओ कहें हाल दिल का
काली घटाओं में, ठंडी हवाओं में, आओ कहें हाल दिल का
ओ, प्यार में दिन तो ढल जाता है, रात का जादू चल जाता है
जिया लगता है धड़कने पिया, आजकल शाम से
आजकल शाम से

राधा ने यही पूछा था एक दिन रूठ कर श्याम से
रूठ कर श्याम से

तौबा मैं क्या करूँ
तौबा मैं क्या करूँ बदनामी से डरूँ
मोहे बड़ी लाज आए
हमने कोई की है चोरी, प्यार किया है हमने गोरी
लोगों से जो हम ऐसे डरने लगे तो गए काम से
तो गए काम से

काहे को बुलाया मुझे बालमा प्यार में नाम से
प्यार के नाम से

राधा ने यही पूछा था एक दिन रूठ कर श्याम से
रूठ कर श्याम से
...................................
Kaahe ko bulaya-Humshakal 1974
 
 
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