फिल्म नरम गरम से एक गीत और याद आया फिल्म खट्टा मीठा
का। निहायत ही खुशनुमा और उम्मीदें जगाने वाला गीत है ये।
इस फिल्म के कथानक ने मुझे काफी प्रभावित किया।
गीत का सार है-थोड़ा ही तो चाहिए। जीवन में थोड़ा थोड़ा सब
कुछ प्रसाद स्वरुप मिलता रहे तो आनंद ही आनंद है। आनंद तो है
मगर थोड़े में संतोष करने पर ही।
गीत लिखा है गुलज़ार ने और इसे गाया है किशोर कुमार एवं
लता मंगेशकर ने। इसे आप राजेश रोशन द्वारा संगीतबद्ध सर्वश्रेष्ठ
रचनाओं में से एक गिन सकते हैं। गुलज़ार बिना कुछ अलग हट के
और कुछ लीक से हटकर बने गीतों की आप कल्पना नहीं कर सकते
हैं. भारतीय सिनेमा का एक अवश्यक तत्त्व से हैं गुलज़ार। गुलज़ार
को हिंदी फ़िल्मी गीत में प्रयोगधर्मिता का मसीहा कहें तो अतिशयोक्ति
नहीं होना चाहिए।
गीत को आप परफेक्ट युगल गीत कह सकते हैं। ऐसे गीत सुनने में बेहद
रोचक लगते हैं जिसमें दो शब्द गायक, दो शब्द गायिका गाये। इसे आप
अकेले गुनगुनाएं तो आनंद नहीं आएगा। साथ में कोई होना ज़रूरी है इसे
गुनगुनाने के लिए। खुशकिस्मत हैं वो लोग जिन्हें साथ में कोई ना कोई
गुनगुनाने वाला मिलता है।
गीत में आपको महानायक अमिताभ की एक झलक दिख जाएगी।
हुं हुं हुं, हे हे हे, ला ला ला ला ला ला
थोड़ा है थोड़े की ज़रूरत है
ज़िंदगी फिर भी अहा ख़ूबसूरत है
थोड़ा है थोड़े की ज़रूरत है
जिस दिन पैसा होगा
वो दिन कैसा होगा
उस दिन पहिये घूमेंगे
और क़िस्मत के लब चूमेंगे
बोलो ऐसा होगा
थोड़ा है थोड़े की ज़रूरत है
सुन सुन सुन हवा चली, सबा चली
तेरे आँचल से उड़ के घटा चली
सुन सुन सुन कहाँ चली कहाँ चली
मैं छूने ज़रा आसमाँ चली
बादल पे उड़ना होगा
थोड़ा है, थोड़े की
ज़रूरत है, हाँ ज़रूरत है, हो ज़रूरत है
हमने सपना देखा है
कोई अपना देखा है
हमने सपना देखा है
कोई अपना देखा है
जब रात का घूँघट उतरेगा
और दिन की डोली गुज़रेगी
तब सपना पूरा होगा
थोड़ा है, थोड़े की
ज़रूरत है
ज़िंदगी, फिर भी अहा, ख़ूबसूरत है
थोड़ा है, थोड़े की, ज़रूरत है
..............................................
Thoda hai thode ki zaroorat-Khatta Meetha 1977
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Sunday, 28 August 2011
Sunday, 17 July 2011
आप आए तो खयाल-ए-दिल-ए-नाशाद-गुमराह १९६३
गीत को अगर एक पंक्ति या वाक्य में लिखा जाए तो यूँ होगा -
आप जले पर नमक छिडकने चले आये. इसी बात को कई
पहलुओं के साथ आहिस्ता से कहा गया है इस गीत में साहिर द्वारा.
आखिर में सब बातों को याद करने के लिए अफ़सोस भी व्यक्त
किया गया है.
बात आहिस्ता से भले ही कही गयी हो मगर महेंद्र कपूर की बुलंद
आवाज़ में है. महेंद्र कपूर को दो फिल्मों के गीत से बहुत फायदा
हुआ-गुमराह और हमराज़. दोनों ही फिल्मों में रवि का संगीत है.
एक फ़िल्मी गीत को रेकोर्ड करने के लिए साजिंदों की कितनी जमात
हो सकती है इस गीत से अंदाजा लगाइए. ये बात दीगर है कि इन
साजिंदों को गायकों की तुलना में चवन्नी या अठन्नी ही प्राप्त होती है.
और शायद एक बात और गौर करने लायक है-सितार बजाने वाले शास्त्रीय
संगीत के कलाकार आराम से नीचे खुली जगह में बैठ के सितार वादन
करते हैं, यहाँ टीन की छोटी फोल्डिंग कुर्सी पर असुविधाजनक तरीके से
साजिन्दे सितार बजने की चेष्टा कर रहे हैं.
गीत के बोल:
आप आए तो खयाल-ए-दिल-ए-नाशाद आया
आप आए तो खयाल-ए-दिल-ए-नाशाद आया
कितने भूले हुए ज़ख्मों का पता याद आया
आप आए
आप के लब पे कभी अपना भी नाम आया था
शोख नजरों सी मुहब्बत का सलाम आया था
उम्र भर साथ निभाने का पयाम आया था
उम्र भर साथ निभाने का पयाम आया था
आपको देख के वो अहदे वफा याद आया
कितने भूले हुए ज़ख्मों का पता याद आया
आप आए तो खयाल-ए-दिल-ए-नाशाद आया
आप आए
रूह में जल उठे बुझती हुई यादों के दिए
कैसे दीवाने थे हम आपको पाने के लिए
यूँ तो कुछ कम नहीं जो आपने एहसान किए
यूँ तो कुछ कम नहीं जो आपने एहसान किए
पर जो मांगे से ना पाया वो सिला याद आया
कितने भूले हुए ज़ख्मों का पता याद आया
आप आए तो खयाल-ए-दिल-ए-नाशाद आया
आप आए
आज वो बात नहीं फिर भी कोई बात तो है
मेरे हिस्से में ये हल्की सी मुलाकात तो है
ग़ैर का हो के भी ये हुस्न मेरे साथ तो है
ग़ैर का हो के भी ये हुस्न मेरे साथ तो है
हाय किस वक्त मुझे कब का गिला याद आया
कितने भूले हुए ज़ख्मों का पता याद आया
आप आए तो खयाल-ए-दिल-ए-नाशाद आया
आप आए
.......................................
Aap aaye to khayal-e-dil-e-nashaad-Gumrah 1963
आप जले पर नमक छिडकने चले आये. इसी बात को कई
पहलुओं के साथ आहिस्ता से कहा गया है इस गीत में साहिर द्वारा.
आखिर में सब बातों को याद करने के लिए अफ़सोस भी व्यक्त
किया गया है.
बात आहिस्ता से भले ही कही गयी हो मगर महेंद्र कपूर की बुलंद
आवाज़ में है. महेंद्र कपूर को दो फिल्मों के गीत से बहुत फायदा
हुआ-गुमराह और हमराज़. दोनों ही फिल्मों में रवि का संगीत है.
एक फ़िल्मी गीत को रेकोर्ड करने के लिए साजिंदों की कितनी जमात
हो सकती है इस गीत से अंदाजा लगाइए. ये बात दीगर है कि इन
साजिंदों को गायकों की तुलना में चवन्नी या अठन्नी ही प्राप्त होती है.
और शायद एक बात और गौर करने लायक है-सितार बजाने वाले शास्त्रीय
संगीत के कलाकार आराम से नीचे खुली जगह में बैठ के सितार वादन
करते हैं, यहाँ टीन की छोटी फोल्डिंग कुर्सी पर असुविधाजनक तरीके से
साजिन्दे सितार बजने की चेष्टा कर रहे हैं.
गीत के बोल:
आप आए तो खयाल-ए-दिल-ए-नाशाद आया
आप आए तो खयाल-ए-दिल-ए-नाशाद आया
कितने भूले हुए ज़ख्मों का पता याद आया
आप आए
आप के लब पे कभी अपना भी नाम आया था
शोख नजरों सी मुहब्बत का सलाम आया था
उम्र भर साथ निभाने का पयाम आया था
उम्र भर साथ निभाने का पयाम आया था
आपको देख के वो अहदे वफा याद आया
कितने भूले हुए ज़ख्मों का पता याद आया
आप आए तो खयाल-ए-दिल-ए-नाशाद आया
आप आए
रूह में जल उठे बुझती हुई यादों के दिए
कैसे दीवाने थे हम आपको पाने के लिए
यूँ तो कुछ कम नहीं जो आपने एहसान किए
यूँ तो कुछ कम नहीं जो आपने एहसान किए
पर जो मांगे से ना पाया वो सिला याद आया
कितने भूले हुए ज़ख्मों का पता याद आया
आप आए तो खयाल-ए-दिल-ए-नाशाद आया
आप आए
आज वो बात नहीं फिर भी कोई बात तो है
मेरे हिस्से में ये हल्की सी मुलाकात तो है
ग़ैर का हो के भी ये हुस्न मेरे साथ तो है
ग़ैर का हो के भी ये हुस्न मेरे साथ तो है
हाय किस वक्त मुझे कब का गिला याद आया
कितने भूले हुए ज़ख्मों का पता याद आया
आप आए तो खयाल-ए-दिल-ए-नाशाद आया
आप आए
.......................................
Aap aaye to khayal-e-dil-e-nashaad-Gumrah 1963
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Wednesday, 19 January 2011
ओ जानेवाले हो सके तो लौट के आना-बंदिनी १९६३
फिल्म बंदिनी के इस गीत के लिए भी किसी विवरण की
आवश्यकता नहीं है क्यूंकि ये गीत अपने आप में अपने
अनूठेपन का विवरण देता सुनाई पढता है। फिल्म सिनेमा
इतिहास के सबसे उम्दा विरह गीतों में से एक है ये।
गीत के बोल:
ओ जाने वाले हो सके तो लौट के आना
ओ हो ओ ओ ओ
ओ जाने वाले हो सके तो लौट के आना
ये घाट तू ये बाट कहीं भूल न जाना
जाने वाले हो सके तो लौट के आना
बचपन के तेरे मीत तेरे संग के सहारे
बचपन के तेरे मीत तेरे संग के सहारे
ढूँढेंगे तुझे गली-गली सब ये ग़म के मारे
पूछेगी हर निगाह कल तेरा ठिकाना
हो ओ ओ ओ
जाने वाले हो सके तो लौट के आना
हो ओ ओ ओ
हो ओ ओ ओ
दे दे के ये आवाज़ कोई हर घड़ी बुलाए
दे दे के ये आवाज़ कोई हर घड़ी बुलाए
फिर जाए जो उस पार कभी लौट के न आए
है भेद ये कैसा कोई कुछ तो बताना
हो ओ ओ ओ
जाने वाले हो सके तो लौट के आना
ये घाट तू ये बाट कहीं भूल न जाना
हो ओ ओ ओ
जाने वाले हो सके तो लौट के आना
.................................
O jaanewale ho sake to-Bandini 1963
आवश्यकता नहीं है क्यूंकि ये गीत अपने आप में अपने
अनूठेपन का विवरण देता सुनाई पढता है। फिल्म सिनेमा
इतिहास के सबसे उम्दा विरह गीतों में से एक है ये।
गीत के बोल:
ओ जाने वाले हो सके तो लौट के आना
ओ हो ओ ओ ओ
ओ जाने वाले हो सके तो लौट के आना
ये घाट तू ये बाट कहीं भूल न जाना
जाने वाले हो सके तो लौट के आना
बचपन के तेरे मीत तेरे संग के सहारे
बचपन के तेरे मीत तेरे संग के सहारे
ढूँढेंगे तुझे गली-गली सब ये ग़म के मारे
पूछेगी हर निगाह कल तेरा ठिकाना
हो ओ ओ ओ
जाने वाले हो सके तो लौट के आना
हो ओ ओ ओ
हो ओ ओ ओ
दे दे के ये आवाज़ कोई हर घड़ी बुलाए
दे दे के ये आवाज़ कोई हर घड़ी बुलाए
फिर जाए जो उस पार कभी लौट के न आए
है भेद ये कैसा कोई कुछ तो बताना
हो ओ ओ ओ
जाने वाले हो सके तो लौट के आना
ये घाट तू ये बाट कहीं भूल न जाना
हो ओ ओ ओ
जाने वाले हो सके तो लौट के आना
.................................
O jaanewale ho sake to-Bandini 1963
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Thursday, 16 December 2010
मेरे जीवन के पथ पर छाई-अनजान १९४१
३० के दशक से लेकर आज तक बॉलीवुड में बहुत बदलाव हुए
हैं। होलिवुड कि तरह इसको पूर्ण विकसित तो नहीं मगर बेहद
विकासशील कह कर बुलाया जा सकता है। अधोसंरचना का भी
ज़बरदस्त विकास हुआ है। सन ८५ में हमें पहली ३-डी फिल्म
देखने को मिली जिसका नाम था शिवा का इन्साफ। ३-डी फिल्म
शिवा का इन्साफ में जैकी श्रोफ नायक हैं। ३-डी का अर्थ है
त्रियामी ।
दृश्य श्रव्य प्रभाव में क्या फर्क आया-जहाँ सन ३०-४० के दशक
में नायक नायिका एक ही जगह खड़े होकर थोडा बहुत हिल डुल
कर गाते थे वहीँ ८० के दशक में उन्होंने विशेष तकनीक के माध्यम
से हवा में उड़ कर भी गाना शुरू कर दिया।
आज पेश है एक पुरानी फिल्म अनजान का गीत जिसे फिल्माया
गया है अशोक कुमार और देविका रानी पर। अशोक कुमार अपने
ज़माने के एक बड़े स्टार थे। फिल्म 'किस्मत' ने उन्हें सुपर स्टार का
दर्ज़ा दिया था।
गीत एक युगल गीत है और आकर्षक धुन में बंधा हुआ है। इसके
गीतकार हैं पंडित प्रदीप । संगीत दिया है प्रसिद्ध बांसुरी वादक
पन्नालाल घोष ने। इसको गाया भी सितारों ने ही है-अशोक कुमार
और देविका रानी ने। प्रश्नोत्तर वाले गीतों में हिंदी सिनेमा इतिहास
के सबसे पहले गीतों में गिन लीजिये इसको आप।
गीत के बोल:
मेरे जीवन के पथ पर छाई ये कौन
पूनम की चांदनी
कौन
पूनम की चांदनी
मेरे जीवन के पथ पर छाई ये कौन
पूनम की चांदनी
अरे
मधुर मधुर मन भाई
मधुर मधुर मन भाई
ये कौन
नहीं मधुर मधुर मन भाई
पूनम की चांदनी
मेरे जीवन के पथ पर छाई ये कौन
पूनम की चांदनी
धीमे-धीमे मेरी कुटी में
धीमे-धीमे मेरी कुटी में
इठलाती हुई बलखाती हुई
इठलाती हुई बलखाती हुई
चुपचाप कहीं से आई
चुपचाप कहीं से आई
ये कौन
चुपचाप कहीं से आई
पूनम की चांदनी
मेरे जीवन के पथ पर छाई ये कौन
पूनम की चांदनी
कौन पारी ये स्वर्ग से उतारी
कौन पारी ये स्वर्ग से उतारी
बड़ी लाज भरी मेरे आस पास
खेलन लागी रस रंग रास
खेलन लागी रस रंग रास
पल-पल ले कर अंगडाई
पल-पल ले कर अंगडाई
ये कौन
पल-पल ले कर अंगडाई
पूनम की चांदनी
मेरे जीवन के पथ पर छाई ये कौन
पूनम की चांदनी
तुम कौन
पूनम की चांदनी
............................................
Mere jeevan ke path par chhayi-Anjaan 1941
हैं। होलिवुड कि तरह इसको पूर्ण विकसित तो नहीं मगर बेहद
विकासशील कह कर बुलाया जा सकता है। अधोसंरचना का भी
ज़बरदस्त विकास हुआ है। सन ८५ में हमें पहली ३-डी फिल्म
देखने को मिली जिसका नाम था शिवा का इन्साफ। ३-डी फिल्म
शिवा का इन्साफ में जैकी श्रोफ नायक हैं। ३-डी का अर्थ है
त्रियामी ।
दृश्य श्रव्य प्रभाव में क्या फर्क आया-जहाँ सन ३०-४० के दशक
में नायक नायिका एक ही जगह खड़े होकर थोडा बहुत हिल डुल
कर गाते थे वहीँ ८० के दशक में उन्होंने विशेष तकनीक के माध्यम
से हवा में उड़ कर भी गाना शुरू कर दिया।
आज पेश है एक पुरानी फिल्म अनजान का गीत जिसे फिल्माया
गया है अशोक कुमार और देविका रानी पर। अशोक कुमार अपने
ज़माने के एक बड़े स्टार थे। फिल्म 'किस्मत' ने उन्हें सुपर स्टार का
दर्ज़ा दिया था।
गीत एक युगल गीत है और आकर्षक धुन में बंधा हुआ है। इसके
गीतकार हैं पंडित प्रदीप । संगीत दिया है प्रसिद्ध बांसुरी वादक
पन्नालाल घोष ने। इसको गाया भी सितारों ने ही है-अशोक कुमार
और देविका रानी ने। प्रश्नोत्तर वाले गीतों में हिंदी सिनेमा इतिहास
के सबसे पहले गीतों में गिन लीजिये इसको आप।
गीत के बोल:
मेरे जीवन के पथ पर छाई ये कौन
पूनम की चांदनी
कौन
पूनम की चांदनी
मेरे जीवन के पथ पर छाई ये कौन
पूनम की चांदनी
अरे
मधुर मधुर मन भाई
मधुर मधुर मन भाई
ये कौन
नहीं मधुर मधुर मन भाई
पूनम की चांदनी
मेरे जीवन के पथ पर छाई ये कौन
पूनम की चांदनी
धीमे-धीमे मेरी कुटी में
धीमे-धीमे मेरी कुटी में
इठलाती हुई बलखाती हुई
इठलाती हुई बलखाती हुई
चुपचाप कहीं से आई
चुपचाप कहीं से आई
ये कौन
चुपचाप कहीं से आई
पूनम की चांदनी
मेरे जीवन के पथ पर छाई ये कौन
पूनम की चांदनी
कौन पारी ये स्वर्ग से उतारी
कौन पारी ये स्वर्ग से उतारी
बड़ी लाज भरी मेरे आस पास
खेलन लागी रस रंग रास
खेलन लागी रस रंग रास
पल-पल ले कर अंगडाई
पल-पल ले कर अंगडाई
ये कौन
पल-पल ले कर अंगडाई
पूनम की चांदनी
मेरे जीवन के पथ पर छाई ये कौन
पूनम की चांदनी
तुम कौन
पूनम की चांदनी
............................................
Mere jeevan ke path par chhayi-Anjaan 1941
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