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Wednesday, 26 October 2011

जब चाहा यारा तुमने-ज़बरदस्त १९८५

आपको फिल्म 'ज़बर दस्त' से तीन गीत सुनवाए जा चुके हैं। फिल्म
ज़बरदस्त बहुसितारा फ्लॉप फिल्म है जो कुछ उम्दा गीतों से सजी
हुयी है। आइये सुनें इस फिल्म का सबसे चर्चित गीत जिसे आपके
कान एक ना एक बार ज़रूर सुन चुके होंगे। ये गीत चित्रहार के
ज़माने में कई बार टी वी पर दिखाई दे जाता था। गीत में बैगपाइपर
की ध्वनि का बढ़िया प्रयोग है। गीत आनंद बक्षी का लिखा हुआ और
किशोर कुमार द्वारा गाया गया है। फिल्म में संगीत पंचम
का है।

श्रेणी बनाने क शौक़ीन इसे बैगपाइपर हिट्स की श्रेणी में रख सकते हैं।
(वो वाला बैगपाइपर नहीं-बोतल में भरे रंगीन पेय के विज्ञापन वाला)
पंचम ने इस वाद्य का बढ़िया प्रयोग फिल्म "हम किसी से कम नहीं" के
गीत में भी किया है और वो गीत भी किशोर कुमार का गाया हुआ है।




गीत के बोल:

जब चाहा यारा तुमने, आँखों से मारा तुमने
होंठों से ज़िन्दा कर दिया
अरे तुम्हारी मर्ज़ी पे चल रहें हैं, ख़ता हमारी क्या हो

जब चाहा यारा तुमने, आँखों से मारा तुमने
होंठों से ज़िन्दा कर दिया

चलो जी हम बुरे सही, चलो जी हम झूठे हैं
मग़र इनहीं निगाहों से हज़ारों दिल टूटे हैं
चलो जी हम बुरे सही, चलो जी हम झूठे हैं
मग़र इनहीं निगाहों से हज़ारों दिल टूटे हैं
अरे, कसम से कहना, हमारी सूरत नहीं है प्यारी क्या हो

जब चाहा यारा तुमने, आँखों से मारा तुमने
होंठों से ज़िन्दा कर दिया

समझ सको तो हमसफ़र, हमें तुम अपना जानो
उधर नहीं इधर चलो, कभी तो कहना मानो
समझ सको तो हमसफ़र, हमें तुम अपना जानो
उधर नहीं इधर चलो, कभी तो कहना मानो
समझ सको तो हमसफ़र, हमें तुम अपना जानो
उधर नहीं इधर चलो, कभी तो कहना मानो
अरे, लिपट के पूछो , के आगे मर्ज़ी है अब हमारी क्या हो

जब चाहा यारा तुमने, आँखों से मारा तुमने
होंठों से ज़िन्दा कर दिया
अरे तुम्हारी मर्ज़ी पे चल रहें हैं, ख़ता हमारी क्या हो

जब चाहा यारा तुमने, आँखों से मारा तुमने
होंठों से ज़िन्दा कर दिया
..............................................
Jab chaha yaara tumne-Zabardast 1985

Sunday, 5 June 2011

वो तेरी दुनिया नहीं-डकैत १९८७

डकैत समस्या पर कई फ़िल्में बनी हैं हिंदी सिनेमा जगत में।
इनमें से अधिकतर फ़िल्में ७० के दशक में बनीं और खूब चलीं।
८० के दशक में रोमांटिक फिल्मों का दौर आया और बाकी के
सारे विषय पीछे छूट गये। इस दौर में कुछ फ़िल्में लीक से हट कर
भी बनीं जिनमें से अधिकतर बॉक्स ऑफिस की पटरी से ज़ल्दी
उतर भी गयीं। ऐसी ही एक फिल्म है-डकैत जिसमे सनी देओल ने
डकैत की भूमिका निभाई। फिल्म परेश रावल के जीवंत अभिनय
के लिए याद की जाती है तो दूसरी वजह इसके मधुर गीत हैं।

प्रस्तुत गीत में नायिका नायक से फ़रियाद कर रही है, उसे विद्रोह
के रास्ते से सामान्य जीवन की तरफ लाने की संगीतमय कोशिश।
गीत में अभिनेत्री मीनाक्षी शेषाद्री ने बढ़िया अभिनय किया है। गीत
कर्णप्रिय है और इसे आप कभी कभार अवश्य सुन सकते हैं।




गीत के बोल:

वो तेरी दुनिया नहीं
वो तेरी महफ़िल नहीं
उस तरफ मत जा
उधार, रस्ता तो है मंजिल नहीं

वो तेरी दुनिया नहीं
वो तेरी महफ़िल नहीं
उस तरफ मत जा
उधर, रस्ता तो है मंजिल नहीं

वो तेरी दुनिया नहीं
वो तेरी महफ़िल नहीं

हर कसम को तोड़ कर
हर एक वादा तोड़ कर
हर कसम को तोड़ कर
हर एक वादा तोड़ कर
जा रहा है आज तू
नफरत से सबको छोड़ कर
क्या मेरी, क्या मेरी
क्या मेरी चाहत भी तेरे
प्यार के काबिल नहीं
उस तरफ मत जा
उधर, रस्ता तो है मंजिल नहीं

वो तेरी दुनिया नहीं
वो तेरी महफ़िल नहीं

गीत बुलबुल का है ये
कोयल की मीठी कूक है
ज़िन्दगी है फूल
तेरे हाथ में बन्दूक है
तू मेरा, तू मेरा
तू मेरा साजन है, साजन
तू कोई कातिल नहीं

उस तरफ मत जा
उधर, रस्ता तो है मंजिल नहीं

वो तेरी दुनिया नहीं
वो तेरी महफ़िल नहीं

..................................
Wo teri duniya nahin-Dacait 1987

Tuesday, 12 April 2011

देखो ये कौन आया-सवेरे वाली गाडी १९८६

सन १९८६ के कम गाने इस ब्लॉग पर शामिल हुए हैं अभी तक।
जो गीत मुझे पसंद हैं सन ८६ के उनमे से एक और प्रस्तुत है
आज आपके लिए। फिल्म भले ना चली हो, इसके गाने मुझे
ज़रूर हौंट करते रहते हैं। ये एक युगल गीत है सुरेश वाडकर
और आशा भोंसले की आवाज़ में। मेरे ख्याल से आर. डी. बर्मन
ने सुरेश वाडकर की आवाज़ का और संगीतकारों की तुलना में
बेहतर इस्तेमाल किया है। सनी देवल और पूनम ढिल्लों पर
फिल्माए गाये इस गीत में एक आवाज़ और भी है जो गीत के
शुरू में है जिसके बारे में मैं ये सुनिश्चित नहीं कर पाया की ये
एस. जानकी की आवाज़ है या चित्रा की। दोनों ही दक्षिण भारत
की नामचीन गायिकाएं हैं। उल्लेखनीय है कि इस फिल्म में इन
दोनों गायिकाओं ने एक भी गीत नहीं गाया है।

अगर ये फिल्म राजस्थानी पृष्ठभूमि पर बनी है तो यही बात खटकने
वाली है कि इसमें दक्षिण भारतीय सी सुनाई पढने वाली आवाजों
का प्रयोग पार्श्व में क्यूँ किया गया है। हालाँकि ये शिकायत आगे
सुनाई देने वाले मधुर गीत के बाद लगभग ख़त्म सी हो जाती है।
गाने में तोते का होना ज़रूरी था या नहीं ये आप निश्चित कीजिये ।





गीत के बोल:

देखो ये कौन आया
देखो ये कौन आया

मुझको उड़ा लाया
मुझको उड़ा लाया

देखो ये कौन आया
देखो ये कौन आया
मेरी सदा पे भूल के रास्ता
ऐ दिल ये कौन आया

मुझको उड़ा लाया
मुझको उड़ा लाया
किसकी सदा पे झोंका हवा का
मुझको उड़ा लाया

देखो ये कौन आया
हा आ आ आ आ आ
मुझको उड़ा लाया

मेरे वीराने को किसने सजा दिया
हाँ, मेरे वीराने को किसने सजा दिया
रौनक ज़रा देखो
ओ,रौनक ज़रा देखो

कुछ तो नहीं है
क्या जाने तुमको कैसा नशा छाया

देखो ये कौन आया
देखो ये कौन आया

बातें बनाते हो क्यूँ सच्चे झूठे
हाँ, बातें बनाते हो क्यूँ सच्चे झूठे
सपने दिखाते हो
सपने दिखाते हो

हो, फिर से तो कहना
मैंने सुना नहीं क्या तुमने फ़रमाया

मुझको उड़ा लाया
हा आ आ आ आ आ
मुझको उड़ा लाया

आ मेरी बाँहों में बैठा हूँ कबसे
हाँ, आ मेरी बाँहों में बैठा हूँ कबसे
मैं तेरी राहों में
हो मैं तेरी राहों में
जलते हुए भी जबसे पड़ा है
दिल पे तेरा साया

देखो ये कौन आया
ओ,देखो ये कौन आया

मेरी सदा पे भूल के रास्ता
ऐ दिल ये कौन आया

मुझको उड़ा लाया
हो ओ ओ ओ ओ ओ
मुझको उड़ा लाया
किसकी सदा पे झोंका हवा का
मुझको उड़ा लाया

ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला
 
 
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