निस्संदेह ये वर्ष कला और सिनेमा जगत के लिए त्रासदायी रहा है। इस वर्ष
अनेक नामचीन हस्तियों ने नश्वर संसार से विदा ली। उन कलाकारों की बस यादें
ही चित्र, चलचित्र और आवाज़ के रूप में हमें उनकी उपस्थिति का एहसास कराती
रहेंगी।
देव आनंद मेरे पसंदीदा कलाकारों में से एक हैं। उनके १-२ गीत रोज ही याद आ
जाते हैं। परसों के रोज मुझे एक गीत विशेष रूप से याद आया वो है फिल्म
छुपा रुस्तम का गीत-बोलो क्या हमको दोगे। इसमें शुरू में केवल 'आंय' बोला गया
है देव आनंद द्वारा। ये एक शब्द ही उनके अंदाज़ को बयां करने के लिए काफी है।
अब ये आप बूझिये कि ये शब्द किशोर कुमार की आवाज़ में है या स्वयं देव आनंद
की आवाज़ में। किशोर कुमार जिन्होंने देव आनंद के लिए विशेष तौर पर गीत गाये ,
यूँ कहिये पार्श्व गायन के मामले में वे या तो स्वयं के लिए या फिर केवल देव आनंद
के लिए ही परदे पर गीत गाते। ये सिलसिला कम से कम सन १९६९ में आई आराधना
के पहले तक तो चला। कभी कभी तो ये लगने लगता जैसे देव आनंद स्वयं परदे पर
गीत गा रहे हों। तय है कि किशोर के गाये देव आनंद अभिनीत गीतों में अतिरिक्त ऊर्जा
का संचार होता महसूस होता है।
बहुत कम ऐसे कलाकार हुए हैं हिंदी सिनेमा जगत में जिनके गीत देखते समय गीत
और धुन पर से ध्यान कुछ देर के लिए हट जाता है उनमें से एक हैं देव आनंद। उन्हें
सदाबहार यूँ ही नहीं कहा जाता है। वे हमेशा सक्रिय दिखलाई दिए और फिल्म उद्योग
के बाल, युवा, बुज़ुर्ग सभी वर्गों के लिए प्रेरणास्रोत बने रहे।
गीत कम सुना हुआ है इसलिए कम देखा गया भी कह सकते हैं इसको। इस गीत
में जो कि सन ७० के दशक के पूर्वार्ध का गीत है, देव आनंद अपनी पूरी ऊर्जा के
साथ नायिका से कदम ताल मिलते हुए जीवन्तता प्रदान कर रहे हैं। गायक-गायिका हैं
किशोर कुमार और आशा भोंसले। गीत सचिन देव बर्मन की संगीत फैक्ट्री की उपज है
जिसकी रचना की है गीतकार नीरज ने।
गीत के बोल:
पूछो पूछो, पूछो ना
बोलो क्या हमको दोगे
'आंय'
बोलो क्या हमको दोगे
दिल जो हमने तुमको बिना मांगे दे दिया हँसते हँसते
बोलो क्या हमको दोगे
बोलो क्या हमको दोगे
दिल जो हमने तुमको बिना मांगे दे दिया हँसते हँसते
पूछो क्या हमसे लोगे, पूछो
दिल जो हमने तुमसे बिना पूछे ले लिया हँसते हँसते
पूछो क्या हमसे लोगे
बहका करें जो तेरी बाँहों में
महका करें जो तेरी राहों में
बहका करें जो तेरी बाँहों में
महका करें जो तेरी राहों में
देखा करें जो तेरी चाहों में
घर बसा लें जो हम तेरी ही निगाहों में
तो क्या हमको दोगे
बोलो क्या हमको दोगे
दिल जो हमने तुमको बिना मांगे दे दिया हँसते हँसते
बोलो क्या हमको दोगे
हे हे हे हे
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
हो हो हो हो
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
दुश्मन जलेंगे जब मिलेंगे हम
प्यासे कभी न फिर रहेंगे हम
जल रहा है
बहुत
तो जलने दो
दुश्मन जलेंगे जब मिलेंगे हम
प्यासे कभी न फिर रहेंगे हम
जन्नत बना लेंगे ज़मीन पे हम
खुशियाँ रहेंगी और रहेंगे हम अब
पूछो के तुम क्या हमसे लोगे, पूछो
पूछो क्या हमसे लोगे
दिल जो हमने तुमसे बिना पूछे ले लिया हा हा हा हा
पूछो क्या हमसे लोगे
तेरी बाँहों का जब सहारा हो
रास्ता फिर कितना ही अँधियारा हो
हो हो हो हो, हो हो हो
तेरी बाँहों का जब सहारा हो
रास्ता फिर कितना ही अँधियारा हो
उठते ही तूफ़ान तुम किनारा हो
जो कुछ अपना है वो सब कुछ तुम्हारा
हाँ तो क्या हमको दोगे
बोलो क्या हमको दोगे
दिल जो हमने तुमको बिना मांगे दे दिया हँसते हँसते
बोलो क्या हमको दोगे
पूछो क्या हमसे लोगे
बोलो क्या हमको दोगे
पूछो क्या हमसे
बोलो क्या हमको
पूछो, बोलो
ओ पूछो, बोलो
......................................
Bolo kya hamko doge-Chhupa Rustom 1973
Showing posts with label SD Burman. Show all posts
Showing posts with label SD Burman. Show all posts
Tuesday, 6 December 2011
Friday, 26 August 2011
मन मोर हुआ मतवाला-अफसर १९५०
आपको फिल्म अफसर से एक गीत सुनवाया था कुछ महीने पहले।
आइये सुन जाये फिल्म से एक और गीत जो बेहद लोकप्रिय गीत
है सुरैया की आवाज़ में। फिल्म अपने ज़माने की एक हिट फिल्म है
और इसका संगीत भी बहुत लोकप्रिय था फिल्म रिलीज़ के समय और
उसके बाद। किसने जादू डाला रे ? पूछते पूछते गायिका सुनने वालों
पर जादू कर जाती है।
गीत पंडित नरेन्द्र शर्मा ने लिखा है जिन्होंने ५० के दशक में फिल्मों
के लिए काफी गीत लिखे। उस समय गीतों की गुणवत्ता बेहतर थी।
६० के दशक में उनके लिखे गीत फिल्मों में इक्का दुक्का ही सुनाई दिए।
प्रस्तुत गीत सुरैया द्वारा गाया गया है और फिल्म में उन्हीं पर फिल्माया
भी गया है। फिल्म में देव आनंद और सुरैया की जोड़ी है जो अपने ज़माने
की एक हिट जोड़ी कही जाती थी ।
गीत सरल प्रकृति का है और कुछ कुछ पंकज मालिक की संगीत रचनाओं
की भांति सुनाई देता है। सचिन देव बर्मन ने जिस युग में सिनेमा संगीत
क्षेत्र में पदार्पण किया उस युग का असर तो उनके संगीत में मिलेगा ही
मगर समय के साथ साथ उन्होंने अपनी अलग शैली विकसित कर ली जो
उनके भक्त आसानी से पहचान जाते हैं और कुछ हद तक सामान्य श्रोता भी।
गीत के बोल:
मन मोर
मन मोर हुआ मतवाला
किसने जादू डाला रे
किसने जादू डाला
अरे किसने जादू डाला
मन मोर
घिर घिर आई
घिर घिर आई प्रीत बदरिया
बोले प्राण पपीहा, पिया पिया पिया
जिया शरमाये, हे हे हे
जिया शरमाये
मुस्काई अरमानों की जयमाला
मतवाला हुआ, मतवाला
किसने जादू डाला रे
किसने जादू डाला
अरे किसने जादू डाला
मन मोर
तुम सुहाग हो मैं सुहागिनी
सुहागिनी, मैं सुहागिनी
तुम सुर हो मैं मधुर रागिनी
मधुर रागिनी, मैं सुहागिनी
तुम सुहाग हो
तुम नस नस रस की फुहार
मैं रोम रोम मधुशाला
मतवाला हुआ, मतवाला
किसने जादू डाला रे
किसने जादू डाला रे
किसने जादू डाला
मन मोर
...............................
Man mor hua matwala-Afsar 1950
आइये सुन जाये फिल्म से एक और गीत जो बेहद लोकप्रिय गीत
है सुरैया की आवाज़ में। फिल्म अपने ज़माने की एक हिट फिल्म है
और इसका संगीत भी बहुत लोकप्रिय था फिल्म रिलीज़ के समय और
उसके बाद। किसने जादू डाला रे ? पूछते पूछते गायिका सुनने वालों
पर जादू कर जाती है।
गीत पंडित नरेन्द्र शर्मा ने लिखा है जिन्होंने ५० के दशक में फिल्मों
के लिए काफी गीत लिखे। उस समय गीतों की गुणवत्ता बेहतर थी।
६० के दशक में उनके लिखे गीत फिल्मों में इक्का दुक्का ही सुनाई दिए।
प्रस्तुत गीत सुरैया द्वारा गाया गया है और फिल्म में उन्हीं पर फिल्माया
भी गया है। फिल्म में देव आनंद और सुरैया की जोड़ी है जो अपने ज़माने
की एक हिट जोड़ी कही जाती थी ।
गीत सरल प्रकृति का है और कुछ कुछ पंकज मालिक की संगीत रचनाओं
की भांति सुनाई देता है। सचिन देव बर्मन ने जिस युग में सिनेमा संगीत
क्षेत्र में पदार्पण किया उस युग का असर तो उनके संगीत में मिलेगा ही
मगर समय के साथ साथ उन्होंने अपनी अलग शैली विकसित कर ली जो
उनके भक्त आसानी से पहचान जाते हैं और कुछ हद तक सामान्य श्रोता भी।
गीत के बोल:
मन मोर
मन मोर हुआ मतवाला
किसने जादू डाला रे
किसने जादू डाला
अरे किसने जादू डाला
मन मोर
घिर घिर आई
घिर घिर आई प्रीत बदरिया
बोले प्राण पपीहा, पिया पिया पिया
जिया शरमाये, हे हे हे
जिया शरमाये
मुस्काई अरमानों की जयमाला
मतवाला हुआ, मतवाला
किसने जादू डाला रे
किसने जादू डाला
अरे किसने जादू डाला
मन मोर
तुम सुहाग हो मैं सुहागिनी
सुहागिनी, मैं सुहागिनी
तुम सुर हो मैं मधुर रागिनी
मधुर रागिनी, मैं सुहागिनी
तुम सुहाग हो
तुम नस नस रस की फुहार
मैं रोम रोम मधुशाला
मतवाला हुआ, मतवाला
किसने जादू डाला रे
किसने जादू डाला रे
किसने जादू डाला
मन मोर
...............................
Man mor hua matwala-Afsar 1950
Labels:
1950,
Afsar,
Pt. Narendra Sharma,
SD Burman,
Suraiya
Saturday, 16 July 2011
शिव जी बिहाने चले-मुनीमजी १९५५
सावन के महीने में आपको फिल्म सावन का एक गीत सुनवा दिया. इसके
बोलों में अगर कुछ त्रुटियाँ हों तो ध्यानाकर्षण अपेक्षित है पाठकों से.
आज आपको एक सावन स्पेशल फ़िल्मी धार्मिक गीत सुनवाते हैं। फिल्म
मुनीमजी में इसे एक नाट्य कार्यक्रम के रूप में दिखाया गया है। एक अरसा
हो गया इसको सुने हुए। वैसे भी भक्ति की ज़रुरत संकट या अपनी इच्छा
पूर्ती के लिए पढ़ती है। ऐसा ज्यादा अनुभव में आता है। जिनमें भक्ति स्वतः
उत्पन्न हो, ऐसे प्राणी उँगलियों पर गिने जा सकते हैं। गीत प्रस्तुत करने
कि इच्छा शिवरात्रि के अवसर पर थी मगर संभव न हो पाया.
खैर गीत पर चर्चा की जाए। नाट्य जगत का संगीत से रिश्ता बहुत पुराना है।
अक्सर आपने देखा होगा नाट्य या प्रह्सनों के दौरान एक सूत्रधार या तो
कहानी बयान करता मिलता या फिर कोई गीत सुना कर कहानी को आगे
बढ़ने का काम करता या फिर जो नाटक सर के उपर से गुजरते प्रतीत होते
उनको दर्शकों के भेजे में डालने का प्रयत्न करता। कुल मिलकर बिना सूत्रधार
के मजा नहीं आता। लम्बे ३-४ घंटे के किसी नाटक में तो मैंने १०-१२ गीत
सुन डाले। जब भी झपकी लग जाती गाने वालों की ज़ोर की आवाजें उठ बैठने
को बाध्य कर देती। कई बार तो यूँ होता कि पर्दा गिरने के बाद ही पता चलता
कि नाटक ख़त्म हो गया है।
गीत में शिव जी की बारात निकाल रही है। उनके गण आसपास नृत्य करते हुए
ख़ुशी से झूम रहे हैं। गीत लिखा है शैलेन्द्र ने और धुन बनाई है एस डी बर्मन ने।
गायक कलाकार हैं हेमंत कुमार।
चलते चलते एक इच्छा मैं भी एक अपनी छोड़ते चलता हूँ और स्तुति करता हूँ ।
हे-प्रभु उन ब्लॉग एग्रीगेटर्स के मालिकों को क्षमा कर देना जिन्होंने एक पोस्ट
वाले ब्लॉग तो सूची में डाल दिए और हमें तरसा रहे हैं। एक ले दे के चिट्ठाजगत
ही बचा था ट्रैफिक मिलने को वो भी बंद पड़ा हुआ है। चंपूगिरी और चमचागिरी
हमसे होती नहीं तो क्या करें बताएं , ज्ञान दें, और , थोड़े फुरसतिये समर्पित
किस्म के टिप्पणीकार भेज दे जो खाली पन्ने की पोस्ट देख के भी वाह वाह का
चटका लगायें।
गीत के बोल:
बम बम भोला
बम बम भोला
बम बम भोला
बम बम भोला
ओ शिवजी बिहाने चले
पालकी सजाये के
भभूति लगाये के ना
ओ शिवजी बिहाने चले
पालकी सजाये के
को: भभूति लगाये के
पालकी सजाये के ना
ओ जब शिव बाबा करे तैयारी
कैसे सकल समान हो
दाहिने अंग त्रिशूल विराजे
नाचे भूत शैतान हो
ब्रह्मा चलें विष्णु चलें
लै के वेद पुराण हो
शंख चक्र और गदा धनुष लै
चलें श्री भगवान हो
और बन-ठन के चलें बोम भोला
लिए भांग धतूरा का गोला
बोले ये हरदम
चले लड़का पराये के
भभूति लगाये के
पालकी सजाये के ना
ओ शिवजी बिहाने चले
पालकी सजाये के
भभूति लगाये के
पालकी सजाये के ना
हो ई आयी हो ई आया
हो ई आयी हो ई आया
आ आ आ आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ आ आ आ आ
हे: ओ माता मतदिन पर चंचल ली
तिलक जली लीलार हो
काला नाग गर्दन के नीचे
वोहू दिलन फुसकार हो
लोटा फेंक के भाग चलैली
ताविज निकल लिलार हो
इन के संग बिबाह न करबो
गौरी रही कुँवारी हो
कहे पार्वती समझायी
बतिया मानो हमरो माई
जै हा राइहा ला हम करमवा लिखाए के
भभूति लगाये के
पालकी सजाये के ना
ओ शिवजी बिहाने चले
पालकी सजाये के
भभूति लगाये के
पालकी सजाये के ना
ओम नमः शिवाय
......स्वाहा ....
ओम नमः शिवाय
ओ जब शिव बाबा मड़वा गईले
होला मंगलाचार हो
बाबा पंडित वेद विचारे
होला गुस्सा चार हो
बजरबटी की लगी झालरी
नागिन की अधिकार हो
विज मड़वा मे नावन अईली
करे झंगन वड़ीयार हो
ए गो नागिन गह्लन विदाई
नावन गिऊले चले परायी
सब हँसे लगैला
देवता ठठाय के
भभूति लगाये के
पालकी सजाये के ना
ओ शिवजी बिहाने चले
पालकी सजाये के
भभूति लगाये के
पालकी सजाये के ना
ओ कोमल रूप धरे शिव-शंकर
खुशी भये नर-नारी हो
राजही नाचन गान कराइले
इज्जत रहें हमार हो
रहे वर साथी शिव-शंकर से
केहू के न पावल पार हो
इन के जटा से गंगा बहिली
महिमा अगम अपार हो
जय शिव-शंकर ध्यान लगाये
इन के तीनों लोक दिखाये
कहे दुःख हरण यही
छडो बनवाए के
भभूति लगाये के
पालकी सजाये के ना
ओ शिवजी बिहाने चले
पालकी सजाये के
भभूति लगाये के
पालकी सजाये के ना
ओ शिवजी बिहाने चले
पालकी सजाये के
भभूति लगाये के
पालकी सजाये के ना
ओ शिवजी बिहाने चले
पालकी सजाये के
भभूति लगाये के
पालकी सजाये के ना
....................................
Shivji Bihane Chale-Munimji 1955
बोलों में अगर कुछ त्रुटियाँ हों तो ध्यानाकर्षण अपेक्षित है पाठकों से.
आज आपको एक सावन स्पेशल फ़िल्मी धार्मिक गीत सुनवाते हैं। फिल्म
मुनीमजी में इसे एक नाट्य कार्यक्रम के रूप में दिखाया गया है। एक अरसा
हो गया इसको सुने हुए। वैसे भी भक्ति की ज़रुरत संकट या अपनी इच्छा
पूर्ती के लिए पढ़ती है। ऐसा ज्यादा अनुभव में आता है। जिनमें भक्ति स्वतः
उत्पन्न हो, ऐसे प्राणी उँगलियों पर गिने जा सकते हैं। गीत प्रस्तुत करने
कि इच्छा शिवरात्रि के अवसर पर थी मगर संभव न हो पाया.
खैर गीत पर चर्चा की जाए। नाट्य जगत का संगीत से रिश्ता बहुत पुराना है।
अक्सर आपने देखा होगा नाट्य या प्रह्सनों के दौरान एक सूत्रधार या तो
कहानी बयान करता मिलता या फिर कोई गीत सुना कर कहानी को आगे
बढ़ने का काम करता या फिर जो नाटक सर के उपर से गुजरते प्रतीत होते
उनको दर्शकों के भेजे में डालने का प्रयत्न करता। कुल मिलकर बिना सूत्रधार
के मजा नहीं आता। लम्बे ३-४ घंटे के किसी नाटक में तो मैंने १०-१२ गीत
सुन डाले। जब भी झपकी लग जाती गाने वालों की ज़ोर की आवाजें उठ बैठने
को बाध्य कर देती। कई बार तो यूँ होता कि पर्दा गिरने के बाद ही पता चलता
कि नाटक ख़त्म हो गया है।
गीत में शिव जी की बारात निकाल रही है। उनके गण आसपास नृत्य करते हुए
ख़ुशी से झूम रहे हैं। गीत लिखा है शैलेन्द्र ने और धुन बनाई है एस डी बर्मन ने।
गायक कलाकार हैं हेमंत कुमार।
चलते चलते एक इच्छा मैं भी एक अपनी छोड़ते चलता हूँ और स्तुति करता हूँ ।
हे-प्रभु उन ब्लॉग एग्रीगेटर्स के मालिकों को क्षमा कर देना जिन्होंने एक पोस्ट
वाले ब्लॉग तो सूची में डाल दिए और हमें तरसा रहे हैं। एक ले दे के चिट्ठाजगत
ही बचा था ट्रैफिक मिलने को वो भी बंद पड़ा हुआ है। चंपूगिरी और चमचागिरी
हमसे होती नहीं तो क्या करें बताएं , ज्ञान दें, और , थोड़े फुरसतिये समर्पित
किस्म के टिप्पणीकार भेज दे जो खाली पन्ने की पोस्ट देख के भी वाह वाह का
चटका लगायें।
गीत के बोल:
बम बम भोला
बम बम भोला
बम बम भोला
बम बम भोला
ओ शिवजी बिहाने चले
पालकी सजाये के
भभूति लगाये के ना
ओ शिवजी बिहाने चले
पालकी सजाये के
को: भभूति लगाये के
पालकी सजाये के ना
ओ जब शिव बाबा करे तैयारी
कैसे सकल समान हो
दाहिने अंग त्रिशूल विराजे
नाचे भूत शैतान हो
ब्रह्मा चलें विष्णु चलें
लै के वेद पुराण हो
शंख चक्र और गदा धनुष लै
चलें श्री भगवान हो
और बन-ठन के चलें बोम भोला
लिए भांग धतूरा का गोला
बोले ये हरदम
चले लड़का पराये के
भभूति लगाये के
पालकी सजाये के ना
ओ शिवजी बिहाने चले
पालकी सजाये के
भभूति लगाये के
पालकी सजाये के ना
हो ई आयी हो ई आया
हो ई आयी हो ई आया
आ आ आ आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ आ आ आ आ
हे: ओ माता मतदिन पर चंचल ली
तिलक जली लीलार हो
काला नाग गर्दन के नीचे
वोहू दिलन फुसकार हो
लोटा फेंक के भाग चलैली
ताविज निकल लिलार हो
इन के संग बिबाह न करबो
गौरी रही कुँवारी हो
कहे पार्वती समझायी
बतिया मानो हमरो माई
जै हा राइहा ला हम करमवा लिखाए के
भभूति लगाये के
पालकी सजाये के ना
ओ शिवजी बिहाने चले
पालकी सजाये के
भभूति लगाये के
पालकी सजाये के ना
ओम नमः शिवाय
......स्वाहा ....
ओम नमः शिवाय
ओ जब शिव बाबा मड़वा गईले
होला मंगलाचार हो
बाबा पंडित वेद विचारे
होला गुस्सा चार हो
बजरबटी की लगी झालरी
नागिन की अधिकार हो
विज मड़वा मे नावन अईली
करे झंगन वड़ीयार हो
ए गो नागिन गह्लन विदाई
नावन गिऊले चले परायी
सब हँसे लगैला
देवता ठठाय के
भभूति लगाये के
पालकी सजाये के ना
ओ शिवजी बिहाने चले
पालकी सजाये के
भभूति लगाये के
पालकी सजाये के ना
ओ कोमल रूप धरे शिव-शंकर
खुशी भये नर-नारी हो
राजही नाचन गान कराइले
इज्जत रहें हमार हो
रहे वर साथी शिव-शंकर से
केहू के न पावल पार हो
इन के जटा से गंगा बहिली
महिमा अगम अपार हो
जय शिव-शंकर ध्यान लगाये
इन के तीनों लोक दिखाये
कहे दुःख हरण यही
छडो बनवाए के
भभूति लगाये के
पालकी सजाये के ना
ओ शिवजी बिहाने चले
पालकी सजाये के
भभूति लगाये के
पालकी सजाये के ना
ओ शिवजी बिहाने चले
पालकी सजाये के
भभूति लगाये के
पालकी सजाये के ना
ओ शिवजी बिहाने चले
पालकी सजाये के
भभूति लगाये के
पालकी सजाये के ना
....................................
Shivji Bihane Chale-Munimji 1955
Labels:
1955,
Bhakti Geet,
Dev Anand,
Hemant Kumar,
Munimji,
SD Burman,
Shailendra
दिन ढल जाए हाय रात ना जाए-गाईड १९६५
कुछ गीत कठिन होना भी ज़रूरी हैं. अगर हर गीत आम आदमी
गुनगुनाते-गुनगुनाते गाने लग जाए तो पार्श्व गायन के लिए लंबी
कतार लग जायेगी. सुनने में सरल सा लगता ये गीत तो ऐसा है
कि मंजे हुए गायक भी इसे गाते समय डगमगा जाते हैं और इस
गीत की खूबी ये है कि संगीत के बिना इसको गुनगुनाने पर कुछ
रिक्तता का आभास होता है. इस तरीके से बना है ये कि बिना
संगीत के टुकड़ों के ये न तो गुनगुनाने में अच्छा लगता है और
शायद सुनने में भी न लगे. इसको ही कहते हैं बोल और धुन का
एक दूसरे से कस कर बंधा होना.
प्रस्तुत गीत है फिल्म गाईड से जो हिंदी फिल्म सिनेमा इतिहास का
एक मील का पत्थर है. शैलेन्द्र के लिखे गीत को स्वरबद्ध किया है
संगीतकार सचिन देव बर्मन ने. इस गीत को कातिल बनाने में
सैक्सोफोन ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी है जो कि मनोहारी सिंह ने
बजायी है. उम्मीद है इसमें बजी बांसुरी ज़रूर प्रसिद्द बांसुरी वादक
हरिप्रसाद चौरसिया की ही होगी.
गीत के बोल:
आ, आ आ आ आ आ
दिन ढल जाए हाय रात ना जाए,
तू तो ना आए तेरी याद सताए
दिन ढल जाए हाय रात ना जाए,
तू तो ना आए तेरी याद सताए
दिन ढल जाए
प्यार में जिनके सब जग छोड़ा,
और हुए बदनाम,
उनके ही हाथों हाल हुआ ये,
बैठे हैं दिल को थाम,
अपने कभी थे, अब हैं पराए
दिन ढल जाए हाय रात ना जाए,
तू तो ना आए तेरी याद सताए
दिन ढल जाए
ऐसी ही रिमझिम, ऐसी फुहारें,
ऐसी ही थी बरसात,
खुद से जुदा और जग से पराए,
हम दोनों थे साथ,
फिर से वो सावन अब क्यों ना आए
दिन ढल जाए हाय रात ना जाए,
तू तो ना आए तेरी याद सताए
दिन ढल जाए
दिल के मेरे पास हो इतने,
फिर भी हो कितने दूर,
तुम मुझसे, मैं दिल से परेशान,
दोनों हैं मजबूर,
ऐसे में किसको कौन मनाए
दिन ढल जाए हाय रात ना जाए,
तू तो ना आए तेरी याद सताए
दिन ढल जाए
..........................
Din dhal jaaye-Guide 1964
गुनगुनाते-गुनगुनाते गाने लग जाए तो पार्श्व गायन के लिए लंबी
कतार लग जायेगी. सुनने में सरल सा लगता ये गीत तो ऐसा है
कि मंजे हुए गायक भी इसे गाते समय डगमगा जाते हैं और इस
गीत की खूबी ये है कि संगीत के बिना इसको गुनगुनाने पर कुछ
रिक्तता का आभास होता है. इस तरीके से बना है ये कि बिना
संगीत के टुकड़ों के ये न तो गुनगुनाने में अच्छा लगता है और
शायद सुनने में भी न लगे. इसको ही कहते हैं बोल और धुन का
एक दूसरे से कस कर बंधा होना.
प्रस्तुत गीत है फिल्म गाईड से जो हिंदी फिल्म सिनेमा इतिहास का
एक मील का पत्थर है. शैलेन्द्र के लिखे गीत को स्वरबद्ध किया है
संगीतकार सचिन देव बर्मन ने. इस गीत को कातिल बनाने में
सैक्सोफोन ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी है जो कि मनोहारी सिंह ने
बजायी है. उम्मीद है इसमें बजी बांसुरी ज़रूर प्रसिद्द बांसुरी वादक
हरिप्रसाद चौरसिया की ही होगी.
गीत के बोल:
आ, आ आ आ आ आ
दिन ढल जाए हाय रात ना जाए,
तू तो ना आए तेरी याद सताए
दिन ढल जाए हाय रात ना जाए,
तू तो ना आए तेरी याद सताए
दिन ढल जाए
प्यार में जिनके सब जग छोड़ा,
और हुए बदनाम,
उनके ही हाथों हाल हुआ ये,
बैठे हैं दिल को थाम,
अपने कभी थे, अब हैं पराए
दिन ढल जाए हाय रात ना जाए,
तू तो ना आए तेरी याद सताए
दिन ढल जाए
ऐसी ही रिमझिम, ऐसी फुहारें,
ऐसी ही थी बरसात,
खुद से जुदा और जग से पराए,
हम दोनों थे साथ,
फिर से वो सावन अब क्यों ना आए
दिन ढल जाए हाय रात ना जाए,
तू तो ना आए तेरी याद सताए
दिन ढल जाए
दिल के मेरे पास हो इतने,
फिर भी हो कितने दूर,
तुम मुझसे, मैं दिल से परेशान,
दोनों हैं मजबूर,
ऐसे में किसको कौन मनाए
दिन ढल जाए हाय रात ना जाए,
तू तो ना आए तेरी याद सताए
दिन ढल जाए
..........................
Din dhal jaaye-Guide 1964
Labels:
1965,
Dev Anand,
Guide,
Mohd. Rafi,
SD Burman,
Shailendra,
Waheeda Rehman
Friday, 15 July 2011
जाऊं मैं कहाँ ये ज़मीन -मिस इंडिया १९५७
आपको श्वेत श्याम युग से एक तेज धुन वाला युगल गीत
सुनवाते हैं. आकर्षक ध्वनि संयोजन से गीत शुरू होता है.
स्टेज पर नशेड़ी सा एक युवक लड़खड़ाते हुए गाना चालू करता
है. इतना नहीं लडखडाता है कि माइक ले के स्टेज के नीचे
टपक जाए. ये है फिल्म का नायक जिसने पार्टी में शायद
ज्यादा पी ली है. पी कितनी भी ली हो गाना सुर ताल में
गायेगा. ये हैं फिल्म के नायक प्रदीप कुमार. एक बात बस
समझ नहीं आई कि मन्ना डे वाले अंतरे एक से क्यूँ हैं इस
गीत में. कहीं ये पुराने ज़माने का 'कॉपी कट पेस्ट' एरर तो
नहीं ?
ये एक गीयर बदलने वाला गीत है. तेज संगीत के और हा हा
के बाद कुछ धीमा धीमा सा गीत सुनाई देता है. तेज वाले भाग
में नायिका शीला वाज़ हैं तो धीमे वाले भाग में नर्गिस.
अभिनेत्री नर्गिस के कैरियर की वे फ़िल्में अधिकांश दर्शकों
को याद हैं जिनमें इन्होने राज कपूर के साथ काम किया है.
सिवाए मदर इंडिया (१९५७) और रात और दिन(१९६४) के
इक्का दुक्का फ़िल्में और हैं जो प्रसिद्ध हुई हैं. सन १९५७ में
एक फिल्म आई थी-मिस इंडिया. इसमें उन्होंने एक आधुनिक
समय की नारी की भूमिका अदा की है. समय से आगे की
भूमिकाएं या फ़िल्में अक्सर नहीं चला करती हैं. इस फिल्म
का संगीत भी थोडा सा ही बजा वो भी सचिन देव बर्मन के
भक्तों के घर. गीत लता मंगेशकर और मन्ना डे का गाया हुआ
है. बोल लिखे हैं राजेंद्र कृष्ण ने.
एक बड़े शामियाने से अगर पहनने के कपडे निकाले जाएँ तो कुछ
कुछ वैसे ही बनेंगे जैसे की इस गीत में बालाएं पहने हुए हैं.
गीत के बोल:
हे हे हे हे हे हे, हे हे हे हे हे हे
हो, हा हा हा
हे हे हे हे हे, हो हो
हा हा, हो हो, हा हा हा हा हा
जाऊं मैं कहाँ,
हाय, जाऊं मैं कहाँ
ये ज़मीन ये जहां छोड़ के
राह में मुझे,
चल दिया कारवां छोड़ के
जाऊं मैं कहाँ,
ये ज़मीन ये जहां छोड़ के
राह में मुझे,
चल दिया कारवां छोड़ के
जाऊं मैं कहाँ
हो हो हो हो हो हो हो हो
हो हो हा हा हा हा हा
ये भीगी भीगी रातें
ये घुमड़ घुमड़ बरसातें
ऐसे में दिल से कर ले
दो चार नज़र की बातें
ये भीगी भीगी रातें
ये घुमड़ घुमड़ बरसातें
ऐसे में दिल से कर ले
दो चार नज़र की बातें
बाँहों में आ के सो जा,
सो जा, सो जा
जाऊं मैं कहाँ,
ये ज़मीन ये जहां छोड़ के
राह में मुझे,
चल दिया कारवां छोड़ के
जाऊं मैं कहाँ
रात गुज़रती जाए
आस नज़र न आये
रात गुज़रती जाए
आस नज़र न आये
रो न सकूं अब
रोते रोते आंसू भी शरमाये
हो हो हो, जाऊं मैं कहाँ
ये ज़मीन ये जहां छोड़ के
राह में मुझे
चल दिया कारवां छोड़ के
जाऊं मैं कहाँ
हो हो हो हो हा हा हा हा
हो हो हा हा हो हो हो
ये भीगी भीगी रातें
ये घुमड़ घुमड़ बरसातें
ऐसे में दिल से कर ले
दो चार नज़र की बातें
ये भीगी भीगी रातें
ये घुमड़ घुमड़ बरसातें
ऐसे में दिल से कर ले
दो चार नज़र की बातें
बाँहों में आ के सो जा,
सो जा, सो जा
..............................
Jaoon main kahan-Miss India 1957
सुनवाते हैं. आकर्षक ध्वनि संयोजन से गीत शुरू होता है.
स्टेज पर नशेड़ी सा एक युवक लड़खड़ाते हुए गाना चालू करता
है. इतना नहीं लडखडाता है कि माइक ले के स्टेज के नीचे
टपक जाए. ये है फिल्म का नायक जिसने पार्टी में शायद
ज्यादा पी ली है. पी कितनी भी ली हो गाना सुर ताल में
गायेगा. ये हैं फिल्म के नायक प्रदीप कुमार. एक बात बस
समझ नहीं आई कि मन्ना डे वाले अंतरे एक से क्यूँ हैं इस
गीत में. कहीं ये पुराने ज़माने का 'कॉपी कट पेस्ट' एरर तो
नहीं ?
ये एक गीयर बदलने वाला गीत है. तेज संगीत के और हा हा
के बाद कुछ धीमा धीमा सा गीत सुनाई देता है. तेज वाले भाग
में नायिका शीला वाज़ हैं तो धीमे वाले भाग में नर्गिस.
अभिनेत्री नर्गिस के कैरियर की वे फ़िल्में अधिकांश दर्शकों
को याद हैं जिनमें इन्होने राज कपूर के साथ काम किया है.
सिवाए मदर इंडिया (१९५७) और रात और दिन(१९६४) के
इक्का दुक्का फ़िल्में और हैं जो प्रसिद्ध हुई हैं. सन १९५७ में
एक फिल्म आई थी-मिस इंडिया. इसमें उन्होंने एक आधुनिक
समय की नारी की भूमिका अदा की है. समय से आगे की
भूमिकाएं या फ़िल्में अक्सर नहीं चला करती हैं. इस फिल्म
का संगीत भी थोडा सा ही बजा वो भी सचिन देव बर्मन के
भक्तों के घर. गीत लता मंगेशकर और मन्ना डे का गाया हुआ
है. बोल लिखे हैं राजेंद्र कृष्ण ने.
एक बड़े शामियाने से अगर पहनने के कपडे निकाले जाएँ तो कुछ
कुछ वैसे ही बनेंगे जैसे की इस गीत में बालाएं पहने हुए हैं.
गीत के बोल:
हे हे हे हे हे हे, हे हे हे हे हे हे
हो, हा हा हा
हे हे हे हे हे, हो हो
हा हा, हो हो, हा हा हा हा हा
जाऊं मैं कहाँ,
हाय, जाऊं मैं कहाँ
ये ज़मीन ये जहां छोड़ के
राह में मुझे,
चल दिया कारवां छोड़ के
जाऊं मैं कहाँ,
ये ज़मीन ये जहां छोड़ के
राह में मुझे,
चल दिया कारवां छोड़ के
जाऊं मैं कहाँ
हो हो हो हो हो हो हो हो
हो हो हा हा हा हा हा
ये भीगी भीगी रातें
ये घुमड़ घुमड़ बरसातें
ऐसे में दिल से कर ले
दो चार नज़र की बातें
ये भीगी भीगी रातें
ये घुमड़ घुमड़ बरसातें
ऐसे में दिल से कर ले
दो चार नज़र की बातें
बाँहों में आ के सो जा,
सो जा, सो जा
जाऊं मैं कहाँ,
ये ज़मीन ये जहां छोड़ के
राह में मुझे,
चल दिया कारवां छोड़ के
जाऊं मैं कहाँ
रात गुज़रती जाए
आस नज़र न आये
रात गुज़रती जाए
आस नज़र न आये
रो न सकूं अब
रोते रोते आंसू भी शरमाये
हो हो हो, जाऊं मैं कहाँ
ये ज़मीन ये जहां छोड़ के
राह में मुझे
चल दिया कारवां छोड़ के
जाऊं मैं कहाँ
हो हो हो हो हा हा हा हा
हो हो हा हा हो हो हो
ये भीगी भीगी रातें
ये घुमड़ घुमड़ बरसातें
ऐसे में दिल से कर ले
दो चार नज़र की बातें
ये भीगी भीगी रातें
ये घुमड़ घुमड़ बरसातें
ऐसे में दिल से कर ले
दो चार नज़र की बातें
बाँहों में आ के सो जा,
सो जा, सो जा
..............................
Jaoon main kahan-Miss India 1957
Labels:
1957,
Lata Mangeshkar,
Manna Dey,
Miss India,
Nargis,
Pradeep Kumar,
Rajinder Krishan,
SD Burman
Wednesday, 13 July 2011
मेरी पायलिया गीत तेरे गाये-जुगनू १९७३
एक किलो के करीब गहने पहन कर नाचना आसान नहीं होता.
गीत प्रस्तुत है फिल्म जुगनू से. लता मंगेशकर का गाया और
हेमा मालिनी पर फिल्माया गया ये गीत मुझे तब से पसंद है
जबसे इसे फिल्म रिलीज़ के बाद पहली बार सुना था . हेमा
मालिनी फिल्म के अनुसार एक स्टेज शो में नाच रही हैं. उनका
नृत्य आनंदित करने वाला है और सिनेमा हॉल के अनुभव के
आधार पर मैंने पाया कि हर वर्ग का दर्शक इसको ध्यान से देख
कर खुश हो रहा था.
इस गीत पर गांव की नौटंकी में भी एक डांस देखा था जो कि डांस
मच्छर के भिनभिनाने जैसा था.
इस गीत की 'टुर्र रर्र रा टिपर टिपर' वाली ध्वनि आकर्षित करती
रही सदा. ये गीत इस बात का सबूत है कि सचिन देव बर्मन का
संगीत जैसे जैसे उनकी उम्र बढती गयी, जवान होता गया. सन
१९७३ में लता के गाये और संगीतकारों के गीतों से तुलना इस गीत
से कर के देख लीजिए, खुद आपको अंदाज़ा हो जायेगा कि उनके
संगीत में समय के साथ बदलाव होते चले हैं और उन्होंने दूसरों से
बेहतर धुनें बनाने का प्रयास किया है. एक बात तो ज़रूर है, आप
इस गीत की सन ५० के गीतों से तुलना नहीं कर सकते. सचिन देव
बर्मन के ज्ञानी भक्त फिल्म जुगनू के गीत को ख़ारिज कर देते हैं
क्यूंकि वे इसकी "फैली हुई सपनों की बाहें-घर नंबर ४४" तुलना करने
लग जाते हैं.
गीत के बोल:
मेरी पायलिया गीत तेरे गाये, हाय
मेरी पायलिया गीत तेरे गाये
चलूँ थम थम के, घुँघरू छनक जाये
मेरी पायलिया गीत तेरे गाये
चलूँ थम थम के, घुँघरू छनक जाये
मेरी पायलिया गीत तेरे गाये
तन डोले रे धितंग तितंग
मन बोले रे धितंग तितंग
अम्बुआ की डाली पे जब कोयल बोले
हौले हौले बिरहन का मन पापी डोले
किसे नींद आये किसे चैन आये
पिया याद आये जिया धड़क जाए
मेरी पायलिया गीत तेरे गाये
चलूँ थम थम के घुँघरू छनक जाये
मेरी पायलिया गीत तेरे गाये
घर बैठी शरमाऊँ गली में न आऊँ
लट बिखरे मन भटके कहीं खो ना जाऊँ
घर बैठी शरमाऊँ गली में न आऊँ
लट बिखरे मन भटके कहीं खो ना जाऊँ
डगर में हाय, नज़र मिल जाये
कमर बलखाये, चुनर सरक जाये
मेरी पायलिया गीत तेरे गाये
चलूँ थम थम के घुँघरू छनक जाये
मेरी पायलिया गीत तेरे गाये
पी मेरे, बिन तेरे, जिया नाहिं लागे
सारी रैना मेरे नैना रहें जागे जागे
पी मेरे, बिन तेरे, जिया नाहिं लागे
सारी रैना मेरे नैना रहें जागे जागे
अगन सी बन में, लगे सावन में
मेरे आँगन में, बिजली चमक जाये
मेरी पायलिया गीत तेरे गाये
चलूँ थम थम के घुँघरू छनक जाये
मेरी पायलिया गीत तेरे गाये
.....................................
Meri payaliya geet tere gaaye-Jugnu 1973
गीत प्रस्तुत है फिल्म जुगनू से. लता मंगेशकर का गाया और
हेमा मालिनी पर फिल्माया गया ये गीत मुझे तब से पसंद है
जबसे इसे फिल्म रिलीज़ के बाद पहली बार सुना था . हेमा
मालिनी फिल्म के अनुसार एक स्टेज शो में नाच रही हैं. उनका
नृत्य आनंदित करने वाला है और सिनेमा हॉल के अनुभव के
आधार पर मैंने पाया कि हर वर्ग का दर्शक इसको ध्यान से देख
कर खुश हो रहा था.
इस गीत पर गांव की नौटंकी में भी एक डांस देखा था जो कि डांस
मच्छर के भिनभिनाने जैसा था.
इस गीत की 'टुर्र रर्र रा टिपर टिपर' वाली ध्वनि आकर्षित करती
रही सदा. ये गीत इस बात का सबूत है कि सचिन देव बर्मन का
संगीत जैसे जैसे उनकी उम्र बढती गयी, जवान होता गया. सन
१९७३ में लता के गाये और संगीतकारों के गीतों से तुलना इस गीत
से कर के देख लीजिए, खुद आपको अंदाज़ा हो जायेगा कि उनके
संगीत में समय के साथ बदलाव होते चले हैं और उन्होंने दूसरों से
बेहतर धुनें बनाने का प्रयास किया है. एक बात तो ज़रूर है, आप
इस गीत की सन ५० के गीतों से तुलना नहीं कर सकते. सचिन देव
बर्मन के ज्ञानी भक्त फिल्म जुगनू के गीत को ख़ारिज कर देते हैं
क्यूंकि वे इसकी "फैली हुई सपनों की बाहें-घर नंबर ४४" तुलना करने
लग जाते हैं.
गीत के बोल:
मेरी पायलिया गीत तेरे गाये, हाय
मेरी पायलिया गीत तेरे गाये
चलूँ थम थम के, घुँघरू छनक जाये
मेरी पायलिया गीत तेरे गाये
चलूँ थम थम के, घुँघरू छनक जाये
मेरी पायलिया गीत तेरे गाये
तन डोले रे धितंग तितंग
मन बोले रे धितंग तितंग
अम्बुआ की डाली पे जब कोयल बोले
हौले हौले बिरहन का मन पापी डोले
किसे नींद आये किसे चैन आये
पिया याद आये जिया धड़क जाए
मेरी पायलिया गीत तेरे गाये
चलूँ थम थम के घुँघरू छनक जाये
मेरी पायलिया गीत तेरे गाये
घर बैठी शरमाऊँ गली में न आऊँ
लट बिखरे मन भटके कहीं खो ना जाऊँ
घर बैठी शरमाऊँ गली में न आऊँ
लट बिखरे मन भटके कहीं खो ना जाऊँ
डगर में हाय, नज़र मिल जाये
कमर बलखाये, चुनर सरक जाये
मेरी पायलिया गीत तेरे गाये
चलूँ थम थम के घुँघरू छनक जाये
मेरी पायलिया गीत तेरे गाये
पी मेरे, बिन तेरे, जिया नाहिं लागे
सारी रैना मेरे नैना रहें जागे जागे
पी मेरे, बिन तेरे, जिया नाहिं लागे
सारी रैना मेरे नैना रहें जागे जागे
अगन सी बन में, लगे सावन में
मेरे आँगन में, बिजली चमक जाये
मेरी पायलिया गीत तेरे गाये
चलूँ थम थम के घुँघरू छनक जाये
मेरी पायलिया गीत तेरे गाये
.....................................
Meri payaliya geet tere gaaye-Jugnu 1973
Labels:
1973,
Anand Bakshi,
Dharmendra,
Hema Malini,
Jugnu,
Lata Mangeshkar,
SD Burman
Sunday, 26 June 2011
आसमान के नीचे-ज्वैल थीफ १९६७
फिल्म ज्वैल थीफ का एक गीत शैलेन्द्र ने लिखा और बाकी गीत
मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखे, कारण आपको इस फिल्म का पहला
गीत सुनवाते वक़्त बताया गया था।
इस फिल्म के सभी गीत लोकप्रिय हुए। प्रस्तुत गीत एक फुरसती सा
गीत है, फिल्म की सिचुएशन के हिसाब से। नायक नायिका सज संवर
के बाग़ में गीत गा रहे हैं। देव आनंद का जो सिर पर टोपी रखने का
अंदाज़ है वो काफ़ी सारी ४०-५० के दशक की विलायती फिल्मों में
आप देख सकते हैं। अच्छी बात है, कोई भी स्टाइल जो पसंद आये उसे
अपना लेना चाहिए। इस स्टाइल का बहुत इस्तेमाल हुआ है फिल्मों
में।
वास्को-डी-गामा को धरती पर दूसरे देशों की खोज का श्रेय जाता है
तो हिंदी फिल्मों के निर्देशकों को भी धन्यवाद् देने की ज़रुरत है जिनकी
वजह से हमें दूसरे देशों के बारे में जानकारी मिलती है । आम जनता
विलायत की सैर के ख्वाब देखती रहती है लेकिन ये हसरत फिल्मों के
माध्यम से, अधूरी ही सही, देख देख कर पूरी अवश्य हो जाती है ।
गीत गाया है लता और किशोर ने। गीत की धुन है सचिन देव बर्मन की।
ये काफ़ी घिसा हुआ अर्थात बजा हुआ युगल गीत है और आपने इसको
एक ना एक बार ज़रूर सुना होगा।
गीत के बोल:
आसमान के नीचे,
आसमान के नीचे ...आगे
हम आज अपने पीछे
हम आज अपने पीछे ... फिर
प्यार का जहाँ बसा के चले
कदम के निशां बना के चले
आसमान के नीचे
हम आज अपने पीछे
प्यार का जहाँ बसा के चले
कदम के निशां बना के चले
आसमान के नीचे
हम आज अपने पीछे
प्यार का जहाँ बसा के चले
कदम के निशां बना के चले
तुम चले तो फूल जैसे आँचल के रँग से
सज गई राहें, सज गई राहें
पास आओ मै पहना दूँ चाहत का हार ये
खुली खुली बाहें, खुली खुली बाहें
जिस का हो आँचल खुद ही चमन
कहिये वो क्यूँ हार बाहों के डाले
अरे आसमान के नीचे
हम आज अपने पीछे
प्यार का जहाँ बसा के चले
कदम के निशां बना के चले
बोलती हैं आज आँखें कुछ भी न आज तुम
कहने दो हमको, कहने दो हमको
बेखुदी बढ़ती चली है अब तो ख़ामोश ही
रहने दो हमको, रहने दो हमको
इक बार एक बार, मेरे लिये
कह दो खनकें, लाल होंठों के प्याले
आसमान के नीचे
हम आज अपने पीछे
प्यार का जहाँ बसा के चले
कदम के निशां बना के चले
साथ मेरे चल के देखो आई हैं धूम से
अब की बहारें, अब की बहारें
हर गली हर मोड़ पे वो दोनों के नाम से
हमको पुकारे, तुमको पुकारे
कह दो बहारों से, आए न इधर
उन तक उठ कर, हम नहीं जाने वाले
आसमान के नीचे
हम आज अपने पीछे
प्यार का जहाँ बसा के चले
कदम के निशां बना के चले
...............................
Aasman ke neeche-Jewl Thief 1967
मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखे, कारण आपको इस फिल्म का पहला
गीत सुनवाते वक़्त बताया गया था।
इस फिल्म के सभी गीत लोकप्रिय हुए। प्रस्तुत गीत एक फुरसती सा
गीत है, फिल्म की सिचुएशन के हिसाब से। नायक नायिका सज संवर
के बाग़ में गीत गा रहे हैं। देव आनंद का जो सिर पर टोपी रखने का
अंदाज़ है वो काफ़ी सारी ४०-५० के दशक की विलायती फिल्मों में
आप देख सकते हैं। अच्छी बात है, कोई भी स्टाइल जो पसंद आये उसे
अपना लेना चाहिए। इस स्टाइल का बहुत इस्तेमाल हुआ है फिल्मों
में।
वास्को-डी-गामा को धरती पर दूसरे देशों की खोज का श्रेय जाता है
तो हिंदी फिल्मों के निर्देशकों को भी धन्यवाद् देने की ज़रुरत है जिनकी
वजह से हमें दूसरे देशों के बारे में जानकारी मिलती है । आम जनता
विलायत की सैर के ख्वाब देखती रहती है लेकिन ये हसरत फिल्मों के
माध्यम से, अधूरी ही सही, देख देख कर पूरी अवश्य हो जाती है ।
गीत गाया है लता और किशोर ने। गीत की धुन है सचिन देव बर्मन की।
ये काफ़ी घिसा हुआ अर्थात बजा हुआ युगल गीत है और आपने इसको
एक ना एक बार ज़रूर सुना होगा।
गीत के बोल:
आसमान के नीचे,
आसमान के नीचे ...आगे
हम आज अपने पीछे
हम आज अपने पीछे ... फिर
प्यार का जहाँ बसा के चले
कदम के निशां बना के चले
आसमान के नीचे
हम आज अपने पीछे
प्यार का जहाँ बसा के चले
कदम के निशां बना के चले
आसमान के नीचे
हम आज अपने पीछे
प्यार का जहाँ बसा के चले
कदम के निशां बना के चले
तुम चले तो फूल जैसे आँचल के रँग से
सज गई राहें, सज गई राहें
पास आओ मै पहना दूँ चाहत का हार ये
खुली खुली बाहें, खुली खुली बाहें
जिस का हो आँचल खुद ही चमन
कहिये वो क्यूँ हार बाहों के डाले
अरे आसमान के नीचे
हम आज अपने पीछे
प्यार का जहाँ बसा के चले
कदम के निशां बना के चले
बोलती हैं आज आँखें कुछ भी न आज तुम
कहने दो हमको, कहने दो हमको
बेखुदी बढ़ती चली है अब तो ख़ामोश ही
रहने दो हमको, रहने दो हमको
इक बार एक बार, मेरे लिये
कह दो खनकें, लाल होंठों के प्याले
आसमान के नीचे
हम आज अपने पीछे
प्यार का जहाँ बसा के चले
कदम के निशां बना के चले
साथ मेरे चल के देखो आई हैं धूम से
अब की बहारें, अब की बहारें
हर गली हर मोड़ पे वो दोनों के नाम से
हमको पुकारे, तुमको पुकारे
कह दो बहारों से, आए न इधर
उन तक उठ कर, हम नहीं जाने वाले
आसमान के नीचे
हम आज अपने पीछे
प्यार का जहाँ बसा के चले
कदम के निशां बना के चले
...............................
Aasman ke neeche-Jewl Thief 1967
Monday, 23 May 2011
डोली में बिठाई के कहार-अमर प्रेम १९७१
अभिनेत्री शर्मिला टैगोर की शायद सबसे यादगार फिल्मों
में से एक है-अमर प्रेम, सन १९७१ की फिल्म जो एक मील का
पत्थर फिल्म भी है हिंदी सिनेमा इतिहास की। फिल्म एक से
बढ़ कर एक नायब गीतों से भरी हुई है। फिल्म के ३ गीत मुझे
बेहद पसंद हैं, प्रस्तुत गीत उनमें से एक है। इस फिल्म के गीत
आनंद बक्षी के लिखे हुए हैं। संगीत तैयार किया है आर डी बर्मन
ने। इस गीत को आर डी के पिता सचिन देव बर्मन ने गाया है। ये
संभवतः पुत्र के संगीत निर्देशन में पिता का गाया हुआ एकमात्र
गीत है। एस. डी. बर्मन ने हिंदी में कम ही गीत गाये हैं, मगर जितने
भी गाये हैं वे गुणवत्ता की दृष्टि से उत्तम की श्रेणी में आते हैं। उनकी
भारी सी, खनक और खरखराहट के मिश्रण वाली आवाज़ में अजीब
आकर्षण है। गीत को बांसुरी कि आवाज़ ने और मर्मस्पर्शी बना दिया
है। गीत फिल्म में दो हिस्सों में सुनाई देता है। उस दयालु आत्मा का
धन्यवाद् जिसने दोनों हिस्सों को जोड़कर यू-ट्यूब पर प्रस्तुत किया है।
गीत के बोल:
हो रामा रे, हो रामा
डोली में बिठाई के कहार
डोली में बिठाई के कहार
लाये मोहे सजना के द्वार
हो, डोली में बिठाई के कहार
बीते दिन खुशियों के चार
दे के दुख मन को हजार
डोली में बिठाई के कहार
मर के निकलना था, हो
मर के निकलना था घर से सँवरिया के,
जीते-जी निकलना पड़ा
फूलों जैसे पावों में पड़ गए छाले,
काँटों पे जो चलना पड़ा
पतझड़, बन गई
पतझड़, ओ बन गई
पतझड़ बैरन बहार।
डोली में बिठाई के कहार
जितने हैं अनसुन मेरी, ओ
जितने हैं आँसू मेरी अँखियों में उतना
नदिया में नाहि रे नीर
ओ लिखने वाले तूने लिख दी ये कैसी मेरी,
टूटी नैया जैसी तकदीर।
रूठा मांझी, ओ मांझी
रूठा मांझी, ओ मांझी रे
रूठा माँझी टूटे पतवार।
डोली में बिठाई के कहार
टूटा पहले मेरा मन हो
टूटा पहले मनवा में, चूड़ियाँ टूटीं,
हुए सारे सपने यूँ चूर
कैसा हुआ धोखा आया, पवन का झोंका,
मिट गया मेरा सिंदूर।
लुट गए ओ रामा
लुट गए ओ रामा मेरे
लुट गए सोलह श्रृंगार
डोली में बिठाई के कहार
लाये मोहे सजना के द्वार
हो, डोली में बिठाई के कहार
..................................
Doli mein bithayi ke kahar-Amar prem 1971
में से एक है-अमर प्रेम, सन १९७१ की फिल्म जो एक मील का
पत्थर फिल्म भी है हिंदी सिनेमा इतिहास की। फिल्म एक से
बढ़ कर एक नायब गीतों से भरी हुई है। फिल्म के ३ गीत मुझे
बेहद पसंद हैं, प्रस्तुत गीत उनमें से एक है। इस फिल्म के गीत
आनंद बक्षी के लिखे हुए हैं। संगीत तैयार किया है आर डी बर्मन
ने। इस गीत को आर डी के पिता सचिन देव बर्मन ने गाया है। ये
संभवतः पुत्र के संगीत निर्देशन में पिता का गाया हुआ एकमात्र
गीत है। एस. डी. बर्मन ने हिंदी में कम ही गीत गाये हैं, मगर जितने
भी गाये हैं वे गुणवत्ता की दृष्टि से उत्तम की श्रेणी में आते हैं। उनकी
भारी सी, खनक और खरखराहट के मिश्रण वाली आवाज़ में अजीब
आकर्षण है। गीत को बांसुरी कि आवाज़ ने और मर्मस्पर्शी बना दिया
है। गीत फिल्म में दो हिस्सों में सुनाई देता है। उस दयालु आत्मा का
धन्यवाद् जिसने दोनों हिस्सों को जोड़कर यू-ट्यूब पर प्रस्तुत किया है।
गीत के बोल:
हो रामा रे, हो रामा
डोली में बिठाई के कहार
डोली में बिठाई के कहार
लाये मोहे सजना के द्वार
हो, डोली में बिठाई के कहार
बीते दिन खुशियों के चार
दे के दुख मन को हजार
डोली में बिठाई के कहार
मर के निकलना था, हो
मर के निकलना था घर से सँवरिया के,
जीते-जी निकलना पड़ा
फूलों जैसे पावों में पड़ गए छाले,
काँटों पे जो चलना पड़ा
पतझड़, बन गई
पतझड़, ओ बन गई
पतझड़ बैरन बहार।
डोली में बिठाई के कहार
जितने हैं अनसुन मेरी, ओ
जितने हैं आँसू मेरी अँखियों में उतना
नदिया में नाहि रे नीर
ओ लिखने वाले तूने लिख दी ये कैसी मेरी,
टूटी नैया जैसी तकदीर।
रूठा मांझी, ओ मांझी
रूठा मांझी, ओ मांझी रे
रूठा माँझी टूटे पतवार।
डोली में बिठाई के कहार
टूटा पहले मेरा मन हो
टूटा पहले मनवा में, चूड़ियाँ टूटीं,
हुए सारे सपने यूँ चूर
कैसा हुआ धोखा आया, पवन का झोंका,
मिट गया मेरा सिंदूर।
लुट गए ओ रामा
लुट गए ओ रामा मेरे
लुट गए सोलह श्रृंगार
डोली में बिठाई के कहार
लाये मोहे सजना के द्वार
हो, डोली में बिठाई के कहार
..................................
Doli mein bithayi ke kahar-Amar prem 1971
Labels:
1971,
Amar Prem,
Anand Bakshi,
RD Burman,
SD Burman,
Sharmila Tagore
Friday, 21 January 2011
अब तो है तुमसे हर ख़ुशी-अभिमान १९७३
फिल्म अभिमान के पिछले गीत में हमने पुरुष स्वाभिमान को
लगने वाली ठेस का जिक्र किया था। किस प्रकार नारी के अधिक
प्रतिभावान होने को पुरुष हजम नहीं कर पाता है। इस गीत में आप
पाएंगे की नायिका एक के बाद एक बुलंदी की सीढ़ियों को चढ़ती जा
रही है और नायक इन सब के बीच कहीं आपने आप को खोने लगा
है। कुंठित कलाकार का चरित्र अभिनय अमिताभ ने बढ़िया निभाया
है।
एक बात फिर भी तय है कि फिल्म में जया ने अमिताभ से ज्यादा
अच्छा अभिनय किया है।
गीत के बोल:
अब तो है तुम से, हर ख़ुशी अपनी
अब तो है तुम से, हर ख़ुशी अपनी
तुम पे मरना है, ज़िन्दगी अपनी, हो हो
अब तो है तुम से, हर ख़ुशी अपनी
जब हो गया तुम पे, ये दिल दीवाना
जब हो गया तुम से, ये दिल दीवाना
फिर चाहे जो भी कहे, हमको ज़माना
कोई बनाये बातें, चाहे अब जितनी, हो हो
अब तो है तुम से, हर ख़ुशी अपनी
तेरे प्यार में बदनाम दूर दूर हो गए
तेरे प्यार में बदनाम दूर दूर हो गए
तेरे साथ हम भी सनम मशहूर हो गए
देखो कहाँ ले जाये, बेखुदी अपनी, हो हो
अब तो है तुम से, हर ख़ुशी अपनी
तुम पे मरना है, ज़िन्दगी अपनी, हो हो
अब तो है तुम से, हर ख़ुशी अपनी
लगने वाली ठेस का जिक्र किया था। किस प्रकार नारी के अधिक
प्रतिभावान होने को पुरुष हजम नहीं कर पाता है। इस गीत में आप
पाएंगे की नायिका एक के बाद एक बुलंदी की सीढ़ियों को चढ़ती जा
रही है और नायक इन सब के बीच कहीं आपने आप को खोने लगा
है। कुंठित कलाकार का चरित्र अभिनय अमिताभ ने बढ़िया निभाया
है।
एक बात फिर भी तय है कि फिल्म में जया ने अमिताभ से ज्यादा
अच्छा अभिनय किया है।
गीत के बोल:
अब तो है तुम से, हर ख़ुशी अपनी
अब तो है तुम से, हर ख़ुशी अपनी
तुम पे मरना है, ज़िन्दगी अपनी, हो हो
अब तो है तुम से, हर ख़ुशी अपनी
जब हो गया तुम पे, ये दिल दीवाना
जब हो गया तुम से, ये दिल दीवाना
फिर चाहे जो भी कहे, हमको ज़माना
कोई बनाये बातें, चाहे अब जितनी, हो हो
अब तो है तुम से, हर ख़ुशी अपनी
तेरे प्यार में बदनाम दूर दूर हो गए
तेरे प्यार में बदनाम दूर दूर हो गए
तेरे साथ हम भी सनम मशहूर हो गए
देखो कहाँ ले जाये, बेखुदी अपनी, हो हो
अब तो है तुम से, हर ख़ुशी अपनी
तुम पे मरना है, ज़िन्दगी अपनी, हो हो
अब तो है तुम से, हर ख़ुशी अपनी
हिंदी फिल्म में बरसात-हम तुम तुम हम हम तुम -त्याग १९७७
आपको सुनवाते हैं एक बर्मन ब्रांड का लता-किशोर युगल गीत।
ये भी एक बरसाती गीत है मगर बरसात दूसरे अंतरे में होगी।
इस गीत की सबसे बड़ी विशेषता बता दूं-कलाकारों की कुछ ख़ास
खूबियाँ अपने चरम पर हैं-जैसे शर्मिला के गालों के गड्ढे कुछ
ज्यादा स्पष्ट और बड़े नज़र आ रहे हैं। उनकी एक और ख़ास बात
ये है कि अभिनय करते वक़्त उनके होंठ काफी कंपकंपाते हैं
विशेषकर रोने धोने वाले दृश्यों में। इस गीत में वे काफी गदगद
हैं फिर भी होंठ कंपकंपा रहे हैं।
राजेश खन्ना जो गर्दन हिला हिला कर अभिनय किया करते थे
उनकी गर्दन भी कुछ ज्यादा ही घूम रही है इस गीत में। मानना
पड़ेगा गीत के फिल्मांकन करनेवाले के दिमाग को, जिसने दोनों
के USP का बखूबी प्रयोग किया है।
गीत आनंद बक्षी का लिखा हुआ है और इसके संगीतकार हैं
एस डी बर्मन जिनकी ये आखिरी प्रदर्शित फिल्म है । काफी
कर्णप्रिय गीत है ये ।
गीत के बोल:
हम तुम तुम हम हम तुम
एक नदी के हैं दो किनारे
हम तुम तुम हम हम तुम
कैसे मिलेंगे प्रीतम हो प्यारे
हम तुम तुम हम हम तुम
ऐसे मिलेंगे कि देखेंगे सारे
हम तुम तुम हम हम तुम
दूर क्या है पास क्या है
सुन ओ जीवन साथी
आर पार बहती धार
हमको है मिलाती
दूर क्या है पास क्या है
सुन ओ जीवन साथी
आर पार बहती धार
हमको है मिलाती
जीवन है जबसे ना जाने कब से
जीवन है जबसे ना जाने कब से
हम हैं तुम्हारे तुम हो हमारे
हम तुम तुम हम हम तुम
ऐसे मिलेंगे कि देखेंगे सारे
हम तुम तुम हम हम तुम
मान लेते हैं के चलो
तुमने ये कहा है
दिल मगर हमारा जाने
क्यूँ धड़क रहा है
मान लेते हैं के चलो
तुमने ये कहा है
दिल मगर हमारा जाने
क्यूँ धड़क रहा है
भीगे नज़ारे जैसे ये सारे
भीगे नज़ारे जैसे ये सारे
भीग ना जाएँ यूँ नैना हमारे
हम तुम तुम हम हम तुम
ऐसे मिलेंगे कि देखेंगे सारे
हम तुम तुम हम हम तुम
ये भी एक बरसाती गीत है मगर बरसात दूसरे अंतरे में होगी।
इस गीत की सबसे बड़ी विशेषता बता दूं-कलाकारों की कुछ ख़ास
खूबियाँ अपने चरम पर हैं-जैसे शर्मिला के गालों के गड्ढे कुछ
ज्यादा स्पष्ट और बड़े नज़र आ रहे हैं। उनकी एक और ख़ास बात
ये है कि अभिनय करते वक़्त उनके होंठ काफी कंपकंपाते हैं
विशेषकर रोने धोने वाले दृश्यों में। इस गीत में वे काफी गदगद
हैं फिर भी होंठ कंपकंपा रहे हैं।
राजेश खन्ना जो गर्दन हिला हिला कर अभिनय किया करते थे
उनकी गर्दन भी कुछ ज्यादा ही घूम रही है इस गीत में। मानना
पड़ेगा गीत के फिल्मांकन करनेवाले के दिमाग को, जिसने दोनों
के USP का बखूबी प्रयोग किया है।
गीत आनंद बक्षी का लिखा हुआ है और इसके संगीतकार हैं
एस डी बर्मन जिनकी ये आखिरी प्रदर्शित फिल्म है । काफी
कर्णप्रिय गीत है ये ।
गीत के बोल:
हम तुम तुम हम हम तुम
एक नदी के हैं दो किनारे
हम तुम तुम हम हम तुम
कैसे मिलेंगे प्रीतम हो प्यारे
हम तुम तुम हम हम तुम
ऐसे मिलेंगे कि देखेंगे सारे
हम तुम तुम हम हम तुम
दूर क्या है पास क्या है
सुन ओ जीवन साथी
आर पार बहती धार
हमको है मिलाती
दूर क्या है पास क्या है
सुन ओ जीवन साथी
आर पार बहती धार
हमको है मिलाती
जीवन है जबसे ना जाने कब से
जीवन है जबसे ना जाने कब से
हम हैं तुम्हारे तुम हो हमारे
हम तुम तुम हम हम तुम
ऐसे मिलेंगे कि देखेंगे सारे
हम तुम तुम हम हम तुम
मान लेते हैं के चलो
तुमने ये कहा है
दिल मगर हमारा जाने
क्यूँ धड़क रहा है
मान लेते हैं के चलो
तुमने ये कहा है
दिल मगर हमारा जाने
क्यूँ धड़क रहा है
भीगे नज़ारे जैसे ये सारे
भीगे नज़ारे जैसे ये सारे
भीग ना जाएँ यूँ नैना हमारे
हम तुम तुम हम हम तुम
ऐसे मिलेंगे कि देखेंगे सारे
हम तुम तुम हम हम तुम
Labels:
1977,
Kishore Kumar,
Lata Mangeshkar,
Rajesh Khanna,
SD Burman,
Sharmila Tagore,
Tyaag
Wednesday, 19 January 2011
ओ जानेवाले हो सके तो लौट के आना-बंदिनी १९६३
फिल्म बंदिनी के इस गीत के लिए भी किसी विवरण की
आवश्यकता नहीं है क्यूंकि ये गीत अपने आप में अपने
अनूठेपन का विवरण देता सुनाई पढता है। फिल्म सिनेमा
इतिहास के सबसे उम्दा विरह गीतों में से एक है ये।
गीत के बोल:
ओ जाने वाले हो सके तो लौट के आना
ओ हो ओ ओ ओ
ओ जाने वाले हो सके तो लौट के आना
ये घाट तू ये बाट कहीं भूल न जाना
जाने वाले हो सके तो लौट के आना
बचपन के तेरे मीत तेरे संग के सहारे
बचपन के तेरे मीत तेरे संग के सहारे
ढूँढेंगे तुझे गली-गली सब ये ग़म के मारे
पूछेगी हर निगाह कल तेरा ठिकाना
हो ओ ओ ओ
जाने वाले हो सके तो लौट के आना
हो ओ ओ ओ
हो ओ ओ ओ
दे दे के ये आवाज़ कोई हर घड़ी बुलाए
दे दे के ये आवाज़ कोई हर घड़ी बुलाए
फिर जाए जो उस पार कभी लौट के न आए
है भेद ये कैसा कोई कुछ तो बताना
हो ओ ओ ओ
जाने वाले हो सके तो लौट के आना
ये घाट तू ये बाट कहीं भूल न जाना
हो ओ ओ ओ
जाने वाले हो सके तो लौट के आना
.................................
O jaanewale ho sake to-Bandini 1963
आवश्यकता नहीं है क्यूंकि ये गीत अपने आप में अपने
अनूठेपन का विवरण देता सुनाई पढता है। फिल्म सिनेमा
इतिहास के सबसे उम्दा विरह गीतों में से एक है ये।
गीत के बोल:
ओ जाने वाले हो सके तो लौट के आना
ओ हो ओ ओ ओ
ओ जाने वाले हो सके तो लौट के आना
ये घाट तू ये बाट कहीं भूल न जाना
जाने वाले हो सके तो लौट के आना
बचपन के तेरे मीत तेरे संग के सहारे
बचपन के तेरे मीत तेरे संग के सहारे
ढूँढेंगे तुझे गली-गली सब ये ग़म के मारे
पूछेगी हर निगाह कल तेरा ठिकाना
हो ओ ओ ओ
जाने वाले हो सके तो लौट के आना
हो ओ ओ ओ
हो ओ ओ ओ
दे दे के ये आवाज़ कोई हर घड़ी बुलाए
दे दे के ये आवाज़ कोई हर घड़ी बुलाए
फिर जाए जो उस पार कभी लौट के न आए
है भेद ये कैसा कोई कुछ तो बताना
हो ओ ओ ओ
जाने वाले हो सके तो लौट के आना
ये घाट तू ये बाट कहीं भूल न जाना
हो ओ ओ ओ
जाने वाले हो सके तो लौट के आना
.................................
O jaanewale ho sake to-Bandini 1963
Labels:
1963,
Ashok Kumar,
Bandini,
Mukesh,
Nutan,
SD Burman,
Shailendra
Monday, 27 December 2010
दिल लगा के कदर गई प्यारे- काला पानी १९५८
अभी दो दिन पहले नलिनी जयवंत के दुखद निधन की खबर सुनने में
आई। ५० के दशक की सुपर सितारा रहीं नलिनी जयवंत अपने आशियाने
में शांत ज़िन्दगी व्यतीत कर रही थीं। उनकी मौत पर भी सवाल खड़े हो
चुके हैं। उनकी रहस्मय परिस्थितियों में मौत की शंका व्यक्त की जा रही है।
जीवन के आखरी दिनों में उन्होंने दो जीवों को अपने घर में शरण दी थी वे भी
अब बेसहारा हो गए हैं। कमोबेश यही स्तिथि हर जीव के साथ हो जाती है जब
उस पर से स्नेह का साया उठ जाता है। चकाचौंध की ज़िन्दगी बिताने वाले
कलाकारों का ऐसा अंत मन को व्यथित करता है, शायद नियति को यही मंज़ूर
होता है , जितनी शोहरत उन्हें जीवन के पूर्वार्ध में प्राप्त होती है उतनी ही गुमनामी
में उन्हें उत्तरार्ध में मिलती है । कुछ ही कलाकार खुशकिस्मत होते हैं जिनका नाम
मरते दम तक जनता द्वारा लिया जाता है। नलिनी बॉलीवुड की पहली फैशन क्वीन
के रूप में पहचानी जाती थीं। ईश्वर दिवंगत आत्मा की आत्मा को शांति प्रदान करे।
आइये सुनें एक गीत देव आनंद और नलिनी जयवंत अभिनीत एक पुराणी फिल्म
काला पानी से जो सन १९५८ में आई थी। गीत में स्वर आशा भोंसले का है और धुन
एस डी बर्मन की। ये गीत काफी चर्चित और लोकप्रिय हुआ था।
गीत के बोल:
आ आ आ
ऊ ऊ ऊ
दिल लगा के क़दर गई प्यारे
दिल लगा के क़दर गई प्यारे
दिल लगा के
पूछे ना कोई फिरूं बेसहारे
पूछे ना कोई फिरूं बेसहारे
दिल लगा के क़दर गई प्यारे
दिल लगा के
धिन ता धा ता ता ता धा
बोली बोले दुनिया सारी
मैं राजा तुमसे हारी
क्या करूं मैं नैनामारी
कहो ना क्या करूं मैं नैनामारी
कोई कुछ पुकारे
कोई कुछ पुकारे
दिल लगा के क़दर गई प्यारे
दिल लगा के
दिल लगा के
दिल लगा के
धिन ता धा ,ता ता ता धा
ना कोई साथी ना कोई बेली
सोऊँ-जागूँ मैं अकेली
सूनी सेजिया सूनी हवेली
देखो ना सूनी सेजिया सूनी हवेली
ये सोचा था मन में बसूँगी तिहारे
दिल लगा के क़दर गई प्यारे
दिल लगा के
पूछे ना कोई फिरूं बेसहारे
दिल लगा के क़दर गई प्यारे
..............................
Dil laga ke kadar gayi pyare-Kala Pani 1958
आई। ५० के दशक की सुपर सितारा रहीं नलिनी जयवंत अपने आशियाने
में शांत ज़िन्दगी व्यतीत कर रही थीं। उनकी मौत पर भी सवाल खड़े हो
चुके हैं। उनकी रहस्मय परिस्थितियों में मौत की शंका व्यक्त की जा रही है।
जीवन के आखरी दिनों में उन्होंने दो जीवों को अपने घर में शरण दी थी वे भी
अब बेसहारा हो गए हैं। कमोबेश यही स्तिथि हर जीव के साथ हो जाती है जब
उस पर से स्नेह का साया उठ जाता है। चकाचौंध की ज़िन्दगी बिताने वाले
कलाकारों का ऐसा अंत मन को व्यथित करता है, शायद नियति को यही मंज़ूर
होता है , जितनी शोहरत उन्हें जीवन के पूर्वार्ध में प्राप्त होती है उतनी ही गुमनामी
में उन्हें उत्तरार्ध में मिलती है । कुछ ही कलाकार खुशकिस्मत होते हैं जिनका नाम
मरते दम तक जनता द्वारा लिया जाता है। नलिनी बॉलीवुड की पहली फैशन क्वीन
के रूप में पहचानी जाती थीं। ईश्वर दिवंगत आत्मा की आत्मा को शांति प्रदान करे।
आइये सुनें एक गीत देव आनंद और नलिनी जयवंत अभिनीत एक पुराणी फिल्म
काला पानी से जो सन १९५८ में आई थी। गीत में स्वर आशा भोंसले का है और धुन
एस डी बर्मन की। ये गीत काफी चर्चित और लोकप्रिय हुआ था।
गीत के बोल:
आ आ आ
ऊ ऊ ऊ
दिल लगा के क़दर गई प्यारे
दिल लगा के क़दर गई प्यारे
दिल लगा के
पूछे ना कोई फिरूं बेसहारे
पूछे ना कोई फिरूं बेसहारे
दिल लगा के क़दर गई प्यारे
दिल लगा के
धिन ता धा ता ता ता धा
बोली बोले दुनिया सारी
मैं राजा तुमसे हारी
क्या करूं मैं नैनामारी
कहो ना क्या करूं मैं नैनामारी
कोई कुछ पुकारे
कोई कुछ पुकारे
दिल लगा के क़दर गई प्यारे
दिल लगा के
दिल लगा के
दिल लगा के
धिन ता धा ,ता ता ता धा
ना कोई साथी ना कोई बेली
सोऊँ-जागूँ मैं अकेली
सूनी सेजिया सूनी हवेली
देखो ना सूनी सेजिया सूनी हवेली
ये सोचा था मन में बसूँगी तिहारे
दिल लगा के क़दर गई प्यारे
दिल लगा के
पूछे ना कोई फिरूं बेसहारे
दिल लगा के क़दर गई प्यारे
..............................
Dil laga ke kadar gayi pyare-Kala Pani 1958
Labels:
1958,
Asha Bhosle,
Kaala Pani,
Majrooh Sultanpuri,
Nalini Jaywant,
SD Burman
Saturday, 25 December 2010
मोरा गोरा अंग लईले-बंदिनी १९६३
इस गीत के लिए किसी विवरण की आवश्यकता नहीं है क्यूंकि
विवरण कई बार कई जगह पर आप पढ़ चुके होंगे। तब भी हम
उस विवरण को अपने अंदाज़ में आपके लिए परोस देते हैं।
फिल्म 'सितारों से आगे' के संगीत तैयार होने के वक़्त लता
और संगीतकार सचिन देव बर्मन में अनबन हुई थी जो कुछ
साल तक चली। उसके बाद लता ने जो पहला गीत एस. डी.
के लिए गाया वो यही था-फिल्म बंदिनी का गीत। दोनों के
सम्बन्ध फिर से मधुर बनाने में एस डी के पुत्र आर डी की
भूमिका भी थी। खैर जो हुआ अच्छा हुआ संगीत क्षेत्र के लिए।
लता की अनुपस्थिति में आशा भोंसले को बर्मन खेमे में गाने
का मौका मिला और उन्होंने कई अविस्मरणीय गीत गा लिए
उस दौरान । फिल्म 'लाजवंती' और 'चलती का नाम गाडी' ऐसी
कुछ फ़िल्में हैं जिनमे आपको लता का एक भी गीत नहीं मिलेगा
अन्यथा एस डी के संगीत वाली फिल्म में लता का एक गाना ना
हो, थोडा अचम्भे का विषय है कहा जाता है कि ये गुलज़ार का
प्रथम हिंदी फ़िल्मी गीत है। गीत के बोल हालाँकि शैलेन्द्र के
अंदाज़ वाले हैं और इसमें खट्टी मीठी आँखों का कोई जिक्र नहीं
है इसलिए थोडा संदेह सा होने लगता है कि इसका असली गीतकार
कौन है ? खैर हम उस जानकारी पर विश्वास करके चलते हैं जो
म्यूजिक एल्बम के विवरण द्वारा प्राप्त होती है।
गीत के बोल:
मोरा गोरा रंग लई ले, मोहे श्याम रंग दई दे
छुप जाऊँगी रात ही में, मोहे पी का संग दई दे
मोरा गोरा रंग लई ले, मोहे श्याम रंग दई दे
छुप जाऊँगी रात ही में, मोहे पी का संग दई दे
एक लाज़ रोके पईयाँ, एक मोह खींचे बईयाँ
एक लाज़ रोके पईयाँ, एक मोह खींचे बईयाँ
जाऊँ किधर ना जानू, हमका कोई बताई दे
हो ओ ओ ओ ओ ओ
मोरा गोरा रंग लई ले, मोहे श्याम रंग दई दे
छुप जाऊँगी रात ही में, मोहे पी का संग दई दे
बदरी हटा के चंदा, चुपके से झाँके चंदा
बदरी हटा के चंदा, चुपके से झाँके चंदा
तोहे राहू लागे बैरी मुसकाए जी जलाई के
हो ओ ओ ओ ओ ओ
मोरा गोरा रंग लई ले, मोहे श्याम रंग दई दे
छुप जाऊँगी रात ही में, मोहे पी का संग दई दे
कुछ खो दिया है पाइ के, कुछ पा लिया गँवाई के
कुछ खो दिया है पाइ के, कुछ पा लिया गँवाई के
कहाँ ले चला है मनवा मोहे बाँवरी बनाइ के
हो ओ ओ ओ ओ ओ
मोरा गोरा रंग लई ले, मोहे श्याम रंग दई दे
छुप जाऊँगी रात ही में, मोहे पी का संग दई दे
विवरण कई बार कई जगह पर आप पढ़ चुके होंगे। तब भी हम
उस विवरण को अपने अंदाज़ में आपके लिए परोस देते हैं।
फिल्म 'सितारों से आगे' के संगीत तैयार होने के वक़्त लता
और संगीतकार सचिन देव बर्मन में अनबन हुई थी जो कुछ
साल तक चली। उसके बाद लता ने जो पहला गीत एस. डी.
के लिए गाया वो यही था-फिल्म बंदिनी का गीत। दोनों के
सम्बन्ध फिर से मधुर बनाने में एस डी के पुत्र आर डी की
भूमिका भी थी। खैर जो हुआ अच्छा हुआ संगीत क्षेत्र के लिए।
लता की अनुपस्थिति में आशा भोंसले को बर्मन खेमे में गाने
का मौका मिला और उन्होंने कई अविस्मरणीय गीत गा लिए
उस दौरान । फिल्म 'लाजवंती' और 'चलती का नाम गाडी' ऐसी
कुछ फ़िल्में हैं जिनमे आपको लता का एक भी गीत नहीं मिलेगा
अन्यथा एस डी के संगीत वाली फिल्म में लता का एक गाना ना
हो, थोडा अचम्भे का विषय है कहा जाता है कि ये गुलज़ार का
प्रथम हिंदी फ़िल्मी गीत है। गीत के बोल हालाँकि शैलेन्द्र के
अंदाज़ वाले हैं और इसमें खट्टी मीठी आँखों का कोई जिक्र नहीं
है इसलिए थोडा संदेह सा होने लगता है कि इसका असली गीतकार
कौन है ? खैर हम उस जानकारी पर विश्वास करके चलते हैं जो
म्यूजिक एल्बम के विवरण द्वारा प्राप्त होती है।
गीत के बोल:
मोरा गोरा रंग लई ले, मोहे श्याम रंग दई दे
छुप जाऊँगी रात ही में, मोहे पी का संग दई दे
मोरा गोरा रंग लई ले, मोहे श्याम रंग दई दे
छुप जाऊँगी रात ही में, मोहे पी का संग दई दे
एक लाज़ रोके पईयाँ, एक मोह खींचे बईयाँ
एक लाज़ रोके पईयाँ, एक मोह खींचे बईयाँ
जाऊँ किधर ना जानू, हमका कोई बताई दे
हो ओ ओ ओ ओ ओ
मोरा गोरा रंग लई ले, मोहे श्याम रंग दई दे
छुप जाऊँगी रात ही में, मोहे पी का संग दई दे
बदरी हटा के चंदा, चुपके से झाँके चंदा
बदरी हटा के चंदा, चुपके से झाँके चंदा
तोहे राहू लागे बैरी मुसकाए जी जलाई के
हो ओ ओ ओ ओ ओ
मोरा गोरा रंग लई ले, मोहे श्याम रंग दई दे
छुप जाऊँगी रात ही में, मोहे पी का संग दई दे
कुछ खो दिया है पाइ के, कुछ पा लिया गँवाई के
कुछ खो दिया है पाइ के, कुछ पा लिया गँवाई के
कहाँ ले चला है मनवा मोहे बाँवरी बनाइ के
हो ओ ओ ओ ओ ओ
मोरा गोरा रंग लई ले, मोहे श्याम रंग दई दे
छुप जाऊँगी रात ही में, मोहे पी का संग दई दे
Saturday, 18 December 2010
साला मैं तो साहब बन गया-सगीना १९७४
बिना विवरण वाला एक गीत प्रस्तुत है। आशा है आपको
पसंद आएगा। स्वच्छता जीवन का एक आवश्यक तत्त्व है
और इसी को ब्लॉग पर भी अमल में लाने की कोशिश जारी है।
टिप्पणी वाले स्थान में तो वैसे भी बहुत सफाई रहती है, थोड़ी
पोस्ट वाले स्थान में भी दर्शायी जाए। वो तो देखिये कमबख्त
हाथ की उँगलियाँ हरकत करती रहती है और देखते ही देखते
७ लाइन टाइप हो गयीं।
गीत के बोल:
साला मैं तो साहब बन गया
अरे, साला मैं तो साहब बन गया
रे, साहब बनके कैसा तन गया
ये सूट मेरा देखो, ये बूट मेरा देखो
जैसे गोरा कोई लन्दन का
वाह फकीरे! वाह फकीरे
वाह फकीरे, सूट पहनकर कैसा कूड़े फंडे
कौवा जैसे पंख मयूर का अपनी दम में बांधे
अपना दम में बांधे
अरे क्या जानो हम इस भेजा में क्या-क्या नक्षा खींचा
लीडर लोग की ऊंची बातें, क्या समझे तुम नीचा?
क्या समझे तुम नीचा?
मेरा वो सब जाहिलपन गया
साला मैं तो साहब बन गया
साला मैं तो साहब बन गया
रे, साहब बनके कैसा तन गया
ये सूट मेरा देखो, ये बूट मेरा देखो
जैसे गोरा कोई लन्दन का
सूरत है बन्दर की फिर भी लगती है अलबेली
कैसा राजा भोज बना है मेरा गंगू तेली
तेरा गंगू तेली
तुम लंगोटी-वाला ना बदला मैं ना बदलेगा
तुम सब साला लोग का किस्मत, हम साला बदलेगा
हम साला बदलेगा
सीना देखो कैसा तन गया!
साला मैं तो साहब बन गया
अरे, साला मैं तो साहब बन गया
रे, साहब बनके कैसा तन गया
ये सूट मेरा देखो, ये बूट मेरा देखो
जैसे गोरा कोई लन्दन का
.............................
Saala main to sahab ban gaya-Sagina 1974
पसंद आएगा। स्वच्छता जीवन का एक आवश्यक तत्त्व है
और इसी को ब्लॉग पर भी अमल में लाने की कोशिश जारी है।
टिप्पणी वाले स्थान में तो वैसे भी बहुत सफाई रहती है, थोड़ी
पोस्ट वाले स्थान में भी दर्शायी जाए। वो तो देखिये कमबख्त
हाथ की उँगलियाँ हरकत करती रहती है और देखते ही देखते
७ लाइन टाइप हो गयीं।
गीत के बोल:
साला मैं तो साहब बन गया
अरे, साला मैं तो साहब बन गया
रे, साहब बनके कैसा तन गया
ये सूट मेरा देखो, ये बूट मेरा देखो
जैसे गोरा कोई लन्दन का
वाह फकीरे! वाह फकीरे
वाह फकीरे, सूट पहनकर कैसा कूड़े फंडे
कौवा जैसे पंख मयूर का अपनी दम में बांधे
अपना दम में बांधे
अरे क्या जानो हम इस भेजा में क्या-क्या नक्षा खींचा
लीडर लोग की ऊंची बातें, क्या समझे तुम नीचा?
क्या समझे तुम नीचा?
मेरा वो सब जाहिलपन गया
साला मैं तो साहब बन गया
साला मैं तो साहब बन गया
रे, साहब बनके कैसा तन गया
ये सूट मेरा देखो, ये बूट मेरा देखो
जैसे गोरा कोई लन्दन का
सूरत है बन्दर की फिर भी लगती है अलबेली
कैसा राजा भोज बना है मेरा गंगू तेली
तेरा गंगू तेली
तुम लंगोटी-वाला ना बदला मैं ना बदलेगा
तुम सब साला लोग का किस्मत, हम साला बदलेगा
हम साला बदलेगा
सीना देखो कैसा तन गया!
साला मैं तो साहब बन गया
अरे, साला मैं तो साहब बन गया
रे, साहब बनके कैसा तन गया
ये सूट मेरा देखो, ये बूट मेरा देखो
जैसे गोरा कोई लन्दन का
.............................
Saala main to sahab ban gaya-Sagina 1974
Labels:
1974,
Dilip Kumar,
Kishore Kumar,
Majrooh Sultanpuri,
Sagina,
SD Burman
आग लगी हमरी झोपडिया में-सगीना १९७४
बिना विवरण वाला एक और गीत प्रस्तुत है। आपको पिछला
गीत बहुत पसंद आया तो मैंने सोचा एक और दे दिया जाए-
गीत, विवरण रहित। हीरो को आप पहचान ही गए हैं।
अरे भाई विवरण दे दिया तो आप सुनेंगे क्या। गीत खुद
अपना विवरण देने में समर्थ जो है। सुन भी लीजिये और
देख भी लीजिये। पूरे पैसे वसूल की गारंटी है। गीत के बोल
अलबत्ता दिए देते हैं आपकी सहूलियत के लिए।
गीत के बोल:
ऊपर वाला दुखियों की नाहीं सुनता रे
सोता है, बहुत जागा है ना
ऊपर वाला दुखियों की नहीं सुनता रे
कौन है जो उसको गगन से उतारे
बन-बन-बन मेरे जैसा बन
इस जीवन का यही है जतन, साला यही है जतन
अरे गम की आग बुझाना है तो हमसे सीखो यार
आग लगी
आग लगी हमारी झोपडिया में हम गावें मल्हार
देख भाई कितने तमाशे की जिंदगानी हमार
हे भोले-भाले ललवा खाए जा रोटी बासी
अरे ये ही खा के जवां होगा बेटा
भोले-भाले ललवा खाए जा रोटी बासी
बड़ा हो के बनेगा साहेब का चपरासी
खेल-खेल-खेल माती में होली खेल
गाल में गुलाल है ना जुल्फों में तेल
अरे अपनी भी जवानी क्या है सुना तैने यार
आग लगी
आग लगी हमारी झोपडिया में हम गावें मल्हार
हे सजनी तू काहे आई नगरी हमारी
चल जा भाग जा भाग
सजनी तू काहे आई नगरी हमारी
धरे सा बिदेसी बाबू बहियाँ तुम्हारी
थाम-थाम-थाम गोरी ज़रा थाम
नाहीं लुट जायेगी राम कसम
अरे केहूं नाहीं आएगा रे सुन के पुकार
आग लगी
आग लगी हमारी झोपडिया में हम गावें मल्हार
..................................
Aag lagi hamri jhopadiya mein-Sagina 1974
गीत बहुत पसंद आया तो मैंने सोचा एक और दे दिया जाए-
गीत, विवरण रहित। हीरो को आप पहचान ही गए हैं।
अरे भाई विवरण दे दिया तो आप सुनेंगे क्या। गीत खुद
अपना विवरण देने में समर्थ जो है। सुन भी लीजिये और
देख भी लीजिये। पूरे पैसे वसूल की गारंटी है। गीत के बोल
अलबत्ता दिए देते हैं आपकी सहूलियत के लिए।
गीत के बोल:
ऊपर वाला दुखियों की नाहीं सुनता रे
सोता है, बहुत जागा है ना
ऊपर वाला दुखियों की नहीं सुनता रे
कौन है जो उसको गगन से उतारे
बन-बन-बन मेरे जैसा बन
इस जीवन का यही है जतन, साला यही है जतन
अरे गम की आग बुझाना है तो हमसे सीखो यार
आग लगी
आग लगी हमारी झोपडिया में हम गावें मल्हार
देख भाई कितने तमाशे की जिंदगानी हमार
हे भोले-भाले ललवा खाए जा रोटी बासी
अरे ये ही खा के जवां होगा बेटा
भोले-भाले ललवा खाए जा रोटी बासी
बड़ा हो के बनेगा साहेब का चपरासी
खेल-खेल-खेल माती में होली खेल
गाल में गुलाल है ना जुल्फों में तेल
अरे अपनी भी जवानी क्या है सुना तैने यार
आग लगी
आग लगी हमारी झोपडिया में हम गावें मल्हार
हे सजनी तू काहे आई नगरी हमारी
चल जा भाग जा भाग
सजनी तू काहे आई नगरी हमारी
धरे सा बिदेसी बाबू बहियाँ तुम्हारी
थाम-थाम-थाम गोरी ज़रा थाम
नाहीं लुट जायेगी राम कसम
अरे केहूं नाहीं आएगा रे सुन के पुकार
आग लगी
आग लगी हमारी झोपडिया में हम गावें मल्हार
..................................
Aag lagi hamri jhopadiya mein-Sagina 1974
Labels:
1974,
Dilip Kumar,
Kishore Kumar,
Majrooh Sultanpuri,
Sagina,
SD Burman
Tuesday, 14 December 2010
कर ले प्यार कर ले के दिन हैं यही -तलाश १९६९
हिंदी फिल्मों में अचंभित करने वाली पोशाकें अक्सर हेलन ने
ही पहनी हैं। आज की अभिनेत्रियाँ कितना भी पतले वस्त्रों में
सज संवर लें मगर वे सब पुराने दौर की हेलन की बराबरी नहीं
कर सकती। हेलन ने बहुत ही सहजता और गरिमा के साथ इन
गीतों को प्रस्तुत किया जो आम नायिकाओं के बस के बाहर पहले
भी था और अब भी है। या तो नायिकाएं सहज होने का प्रयत्न
करने लगतीं या फिर नृत्य करने का। दोनों काम एक साथ
बमुश्किल किसी किसी नायिका से हो पाते। दरअसल चपलता
और सहजता ये दोनों गुण एक साथ बहुत ही कम देखे जाते
हैं। ऐसे ही मामले में हम लोग विलक्षण शब्द का प्रयोग
करते हैं।
ओ पी रल्हन के निर्देशन में बनी तलाश में एक हेलन का पर
फिल्माया और आशा का गाया गीत है जो उस ज़माने के हिसाब
से काफी आगे था और ये कर्णप्रिय भी है। गीत के बोल लिखे हैं
मजरूह सुल्तानपुरी ने और धुन बनाई है एस डी बर्मन ने। संभव
है इस गीत में एस डी के पुत्र पंचम का भी कुछ योगदान हो, क्यूंकि
वे लम्बे समय अपने पिता के सहायक रहे। पिछले गीत में आपने
खरगोश की पूँछ देखी थी इस गीत में तो ऐसा लगता है मानो कोई
नारंगी रंग का बड़ा सा पक्षी नायिका के सर पर बिठा रखा हो। अब
आप ही बताइए ऐसी विचित्र स्तिथियों में डांस करना क्या बच्चों
का खेल है ? गौर फरमाएं इस गीत को देख कर किसी दर्शक को
लास वेगास और पैरिस की याद आ रही है। संभव है कि निर्देशक
ने किसी विलायती फिल्म में किसी क्लब डांसर का कॉसट्यूम
देख कर हूबहू हिंदी फिल्म की नायिका को पहना दिया हो।
गीत में सभी कुछ लाजवाब है-बोल, संगीत , गायकी, नृत्य
और प्रस्तुतीकरण।
गीत के बोल:
हा हा हा हा हा हा हा हा
हा हा हा हा
हं हं हं हं हं हं हं हं हं हं
हं हं हं हं
हाय हैंडसम
यहाँ बैठ सकती हूँ ?
माफ़ कीजियेगा
हाय प्रिंस
अकेले हो
शाद्दी नहीं की
प्यार भी नहीं
आ हा हा हा हा हा
इन्होने अभी तक प्यार भी नहीं किया
ऊं हूँ हूँ हूँ
कर ले प्यार कर ले के दिन हैं यही
पर चोरी से कोई देखे ना कहीं
कर ले प्यार कर ले के दिन हैं यही
ऐ,पर चोरी से कोई देखे ना कहीं
अरे पगले, नज़र मिला, जहाँ मिले तुझे कोई हसीं
कर ले प्यार कर ले के दिन हैं यही
पर चोरी से कोई देखे ना कहीं
कर ले प्यार कर ले के दिन हैं यही
ऐ ऐ ऐ ऐ ऐ
पर चोरी से कोई देखे ना कहीं
आ मैं तुझे बतला दूँ ये प्यार का रस्ता चलना
आ मैं तुझे बतला दूँ ये प्यार का रस्ता चलना
रंगीन होंठ किसी के छू कर बिन शोलों के जलना
रंगीन होंठ किसी के छू कर बिन शोलों के जलना
आँख में आँखें डाल के कुछ ना कहना और मचलना
अरे हा, अरे हा, हा, हा रे
आ के सम्भाले कोई तो फिर ना सम्भलना
अरे पगले, नज़र मिला, जहाँ मिले तुझे कोई हसीं
कर ले प्यार कर ले के दिन हैं यही
ऐ,पर चोरी से कोई देखे ना कहीं
आज ही अपने दिल में रख ले तू कोई हसीना
आज ही अपने दिल में रख ले तू कोई हसीना
फिर झूम के ज़ुल्फ़ों के साये में रोज़ नज़र से पीना
फिर झूम के ज़ुल्फ़ों के साये में रोज़ नज़र से पीना
सीख ले मरना आज किसी पे ले के धड़कता सीना
अरे हा, अरे हा, हा, हा रे
मरना ना सीखा तूने तो फिर क्या जीना
अरे पगले, नज़र मिला, जहाँ मिले तुझे कोई हसीं
कर ले प्यार कर ले के दिन हैं यही
ऐ,पर चोरी से कोई देखे ना कहीं
................................................
Kar Le Pyar Kar Le Ke Din Hain Yahi-Talaash 1969
ही पहनी हैं। आज की अभिनेत्रियाँ कितना भी पतले वस्त्रों में
सज संवर लें मगर वे सब पुराने दौर की हेलन की बराबरी नहीं
कर सकती। हेलन ने बहुत ही सहजता और गरिमा के साथ इन
गीतों को प्रस्तुत किया जो आम नायिकाओं के बस के बाहर पहले
भी था और अब भी है। या तो नायिकाएं सहज होने का प्रयत्न
करने लगतीं या फिर नृत्य करने का। दोनों काम एक साथ
बमुश्किल किसी किसी नायिका से हो पाते। दरअसल चपलता
और सहजता ये दोनों गुण एक साथ बहुत ही कम देखे जाते
हैं। ऐसे ही मामले में हम लोग विलक्षण शब्द का प्रयोग
करते हैं।
ओ पी रल्हन के निर्देशन में बनी तलाश में एक हेलन का पर
फिल्माया और आशा का गाया गीत है जो उस ज़माने के हिसाब
से काफी आगे था और ये कर्णप्रिय भी है। गीत के बोल लिखे हैं
मजरूह सुल्तानपुरी ने और धुन बनाई है एस डी बर्मन ने। संभव
है इस गीत में एस डी के पुत्र पंचम का भी कुछ योगदान हो, क्यूंकि
वे लम्बे समय अपने पिता के सहायक रहे। पिछले गीत में आपने
खरगोश की पूँछ देखी थी इस गीत में तो ऐसा लगता है मानो कोई
नारंगी रंग का बड़ा सा पक्षी नायिका के सर पर बिठा रखा हो। अब
आप ही बताइए ऐसी विचित्र स्तिथियों में डांस करना क्या बच्चों
का खेल है ? गौर फरमाएं इस गीत को देख कर किसी दर्शक को
लास वेगास और पैरिस की याद आ रही है। संभव है कि निर्देशक
ने किसी विलायती फिल्म में किसी क्लब डांसर का कॉसट्यूम
देख कर हूबहू हिंदी फिल्म की नायिका को पहना दिया हो।
गीत में सभी कुछ लाजवाब है-बोल, संगीत , गायकी, नृत्य
और प्रस्तुतीकरण।
गीत के बोल:
हा हा हा हा हा हा हा हा
हा हा हा हा
हं हं हं हं हं हं हं हं हं हं
हं हं हं हं
हाय हैंडसम
यहाँ बैठ सकती हूँ ?
माफ़ कीजियेगा
हाय प्रिंस
अकेले हो
शाद्दी नहीं की
प्यार भी नहीं
आ हा हा हा हा हा
इन्होने अभी तक प्यार भी नहीं किया
ऊं हूँ हूँ हूँ
कर ले प्यार कर ले के दिन हैं यही
पर चोरी से कोई देखे ना कहीं
कर ले प्यार कर ले के दिन हैं यही
ऐ,पर चोरी से कोई देखे ना कहीं
अरे पगले, नज़र मिला, जहाँ मिले तुझे कोई हसीं
कर ले प्यार कर ले के दिन हैं यही
पर चोरी से कोई देखे ना कहीं
कर ले प्यार कर ले के दिन हैं यही
ऐ ऐ ऐ ऐ ऐ
पर चोरी से कोई देखे ना कहीं
आ मैं तुझे बतला दूँ ये प्यार का रस्ता चलना
आ मैं तुझे बतला दूँ ये प्यार का रस्ता चलना
रंगीन होंठ किसी के छू कर बिन शोलों के जलना
रंगीन होंठ किसी के छू कर बिन शोलों के जलना
आँख में आँखें डाल के कुछ ना कहना और मचलना
अरे हा, अरे हा, हा, हा रे
आ के सम्भाले कोई तो फिर ना सम्भलना
अरे पगले, नज़र मिला, जहाँ मिले तुझे कोई हसीं
कर ले प्यार कर ले के दिन हैं यही
ऐ,पर चोरी से कोई देखे ना कहीं
आज ही अपने दिल में रख ले तू कोई हसीना
आज ही अपने दिल में रख ले तू कोई हसीना
फिर झूम के ज़ुल्फ़ों के साये में रोज़ नज़र से पीना
फिर झूम के ज़ुल्फ़ों के साये में रोज़ नज़र से पीना
सीख ले मरना आज किसी पे ले के धड़कता सीना
अरे हा, अरे हा, हा, हा रे
मरना ना सीखा तूने तो फिर क्या जीना
अरे पगले, नज़र मिला, जहाँ मिले तुझे कोई हसीं
कर ले प्यार कर ले के दिन हैं यही
ऐ,पर चोरी से कोई देखे ना कहीं
................................................
Kar Le Pyar Kar Le Ke Din Hain Yahi-Talaash 1969
Labels:
1969,
Asha Bhosle,
Helen,
Majrooh Sultanpuri,
OP Ralhan,
Rajendra Kumar,
SD Burman,
Talash
Monday, 22 November 2010
लिखा है तेरी आँखों में-तीन देवियाँ १९६५
अभिनेत्री नंदा और भारतीय नारी की छबि एक दूसरे के पर्याय लगते
थे रुपहले परदे पर। एक फिल्म आई थी सन में -तीन देवियाँ। इस फिल्म
में देव आनंद के साथ तीन देवियों ने काम किया था। ये हैं-नंदा, कल्पना और
सिमी ग्रेवाल। फिल्म में कुछ यूँ होता है की तीनों देवियाँ देव आनन्द पर फ़िदा
हो जाती हैं और शायद तीनों पर देव आनंद। अब समस्या तीन में से एक को चुनने
की है। फिल्म के अंत में फिल्म का नायक देव आनंद एक मनोवैज्ञानिक के पास
जाता है। वहां उसे समाधान मिल जाता है। भुट्टा खाने वाली अभिनेत्री ही उसकी
पसंद मालूम पढ़ती है। ज्ञात हो फिल्म के एक दृश्य में देव आनंद और नंदा भुट्टे
का आनंद लेते नज़र आते हैं। भुट्टे का आनंद लेने के साथ दोनों एक गीत गाते हैं।
आइये वही गीत सुनें। हिंदी फिल्म जगत का ये सबसे मधुर भुट्टा-गीत है। वैसे
कई गीत हैं जो बाजरे के खेत में भी फिल्माए गए हैं। निर्देशक अमरजीत का जवाब
नहीं जिन्होंने भुट्टे(मकई) के खेत को भी खूबसूरत बना डाला। मजरूह के बोल,
एस. डी. बर्मन का संगीत और आवाजें लता, किशोर की हैं।
गीत के बोल:
लिखा है तेरी आँखों में, किसका अफ़साना
लिखा है तेरी आँखों में, किसका अफ़साना
अगर इसे समझ सको, मुझे भी समझाना
लिखा है तेरी आँखों में, किसका अफ़साना
जवाब सा किसी तमन्ना का,
लिखा तो है मगर अधूरा सा
अरे ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
जवाब सा किसी तमन्ना का,
लिखा तो है मगर अधूरा सा
हो ओ ओ कैसी न हो मेरी हर बात अधूरी,
अभी हूँ आधा दीवाना
लिखा है तेरी आँखों में, किसका अफ़साना
अगर इसे समझ सको, मुझे भी समझाना
लिखा है तेरी आँखों में, किसका अफ़साना
जो कुछ नहीं तो ये इशारे क्यूँ,
ठहर गए मेरे सहारे क्यूँ
अरे ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
जो कुछ नहीं तो ये इशारे क्यूँ,
ठहर गए मेरे सहारे क्यूँ
थोड़ा सा हसीनों का सहारा ले के चलना,
है मेरी आदत रोज़ाना
लिखा है तेरी आँखों में, किसका अफ़साना
अगर इसे समझ सको, मुझे भी समझाना
लिखा है तेरी आँखों में, किसका अफ़साना
यहाँ वहाँ फ़िज़ा में आवारा,
अभी तलक़ ये दिल है बेचारा
अरे ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
यहाँ वहाँ फ़िज़ा में आवारा,
अभी तलक़ ये दिल है बेचारा
हो ओ ओ, दिल को तेरे तो हम ख़ाक ना समझे
तुझी को हमने पहचाना
लिखा है तेरी आँखों में, किसका अफ़साना
अगर इसे समझ सको, मुझे भी समझाना
लिखा है तेरी आँखों में, किसका अफ़साना
थे रुपहले परदे पर। एक फिल्म आई थी सन में -तीन देवियाँ। इस फिल्म
में देव आनंद के साथ तीन देवियों ने काम किया था। ये हैं-नंदा, कल्पना और
सिमी ग्रेवाल। फिल्म में कुछ यूँ होता है की तीनों देवियाँ देव आनन्द पर फ़िदा
हो जाती हैं और शायद तीनों पर देव आनंद। अब समस्या तीन में से एक को चुनने
की है। फिल्म के अंत में फिल्म का नायक देव आनंद एक मनोवैज्ञानिक के पास
जाता है। वहां उसे समाधान मिल जाता है। भुट्टा खाने वाली अभिनेत्री ही उसकी
पसंद मालूम पढ़ती है। ज्ञात हो फिल्म के एक दृश्य में देव आनंद और नंदा भुट्टे
का आनंद लेते नज़र आते हैं। भुट्टे का आनंद लेने के साथ दोनों एक गीत गाते हैं।
आइये वही गीत सुनें। हिंदी फिल्म जगत का ये सबसे मधुर भुट्टा-गीत है। वैसे
कई गीत हैं जो बाजरे के खेत में भी फिल्माए गए हैं। निर्देशक अमरजीत का जवाब
नहीं जिन्होंने भुट्टे(मकई) के खेत को भी खूबसूरत बना डाला। मजरूह के बोल,
एस. डी. बर्मन का संगीत और आवाजें लता, किशोर की हैं।
गीत के बोल:
लिखा है तेरी आँखों में, किसका अफ़साना
लिखा है तेरी आँखों में, किसका अफ़साना
अगर इसे समझ सको, मुझे भी समझाना
लिखा है तेरी आँखों में, किसका अफ़साना
जवाब सा किसी तमन्ना का,
लिखा तो है मगर अधूरा सा
अरे ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
जवाब सा किसी तमन्ना का,
लिखा तो है मगर अधूरा सा
हो ओ ओ कैसी न हो मेरी हर बात अधूरी,
अभी हूँ आधा दीवाना
लिखा है तेरी आँखों में, किसका अफ़साना
अगर इसे समझ सको, मुझे भी समझाना
लिखा है तेरी आँखों में, किसका अफ़साना
जो कुछ नहीं तो ये इशारे क्यूँ,
ठहर गए मेरे सहारे क्यूँ
अरे ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
जो कुछ नहीं तो ये इशारे क्यूँ,
ठहर गए मेरे सहारे क्यूँ
थोड़ा सा हसीनों का सहारा ले के चलना,
है मेरी आदत रोज़ाना
लिखा है तेरी आँखों में, किसका अफ़साना
अगर इसे समझ सको, मुझे भी समझाना
लिखा है तेरी आँखों में, किसका अफ़साना
यहाँ वहाँ फ़िज़ा में आवारा,
अभी तलक़ ये दिल है बेचारा
अरे ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
यहाँ वहाँ फ़िज़ा में आवारा,
अभी तलक़ ये दिल है बेचारा
हो ओ ओ, दिल को तेरे तो हम ख़ाक ना समझे
तुझी को हमने पहचाना
लिखा है तेरी आँखों में, किसका अफ़साना
अगर इसे समझ सको, मुझे भी समझाना
लिखा है तेरी आँखों में, किसका अफ़साना
Labels:
1965,
Dev Anand,
Kishore Kumar,
Lata Mangeshkar,
Majrooh Sultanpuri,
Nanda,
SD Burman,
Teen Deviyan
Sunday, 21 November 2010
चोरों को सारे नज़र आते हैं चोर-नया ज़माना १९७१
फिल्म नया ज़माना(१९७१) से एक मीठा गीत और सुनवाया जाए आपको।
फिल्म में एक गरीब बाला पर चोरी का इलज़ाम लगाया जाता है। वो गीत
गा कर जवाब दे रही है। गरीब बाला का रोल किया है अरुणा ईरानी ने।
आनंद बक्षी ने इस गीत को लिखा है और इस फिल्म में संगीत है सचिन देव
बर्मन का। १९७१ की फिल्म है और संगीतकार अपने पूरे यौवन के जौहर दिखला
के संगीत दे रहे हैं और अपने पुत्र पंचम को ज़बरदस्त टक्कर देते से प्रतीत
होते हैं। फिल्म नया ज़माना का संगीत काफी सराहा गया और सुना गया।
गीत के बोल:
सौ इलज़ाम लगाये
ओ मेरे नाम लगाये
आपने सौ इलज़ाम लगाये
हूँ, चुप क्यूँ हो गए
कहिये कुछ और
चोरों को सारे नज़र आते हैं चोर
के, चोरों को सारे नज़र आते हैं चोर
सौ इलज़ाम लगाये
ओ मेरे नाम लगाये
आपने सौ इलज़ाम लगाये
कहिये कुछ और
चोरों को सारे नज़र आते हैं चोर
के, चोरों को सारे नज़र आते हैं चोर
मेहरबानी शुक्रिया
घर बुला के बेईज्ज़त किया
हाँ, मेहरबानी शुक्रिया
घर बुला के बेईज्ज़त किया
मेरी तलाशी तो ले ली सरकार
अपने गिरेबान में भी झांकिए एक बार
इस बात पर पे ज़रा कीजिये गौर
के, चोरों को सारे नज़र आते हैं चोर
चोरों को सारे नज़र आते हैं चोर
क्यूँ कि मैं हूँ एक गरीब
बेसहारा और बदनसीब
क्यूँ कि मैं हूँ एक गरीब
बेसहारा और बदनसीब
ताने हजारों सहे हो के मजबूर
पर मैं अब न चुप रहूंगी ऐ हुज़ूर
हाँ हाँ मचा दूँगी आज शोर
के, चोरों को सारे नज़र आते हैं चोर
चोरों को सारे नज़र आते हैं चोर
सौ इलज़ाम लगाये
ओ मेरे नाम लगाये
आपने सौ इलज़ाम लगाये
कहिये कुछ और
चोरों को सारे नज़र आते हैं चोर
चोरों को सारे नज़र आते हैं चोर
फिल्म में एक गरीब बाला पर चोरी का इलज़ाम लगाया जाता है। वो गीत
गा कर जवाब दे रही है। गरीब बाला का रोल किया है अरुणा ईरानी ने।
आनंद बक्षी ने इस गीत को लिखा है और इस फिल्म में संगीत है सचिन देव
बर्मन का। १९७१ की फिल्म है और संगीतकार अपने पूरे यौवन के जौहर दिखला
के संगीत दे रहे हैं और अपने पुत्र पंचम को ज़बरदस्त टक्कर देते से प्रतीत
होते हैं। फिल्म नया ज़माना का संगीत काफी सराहा गया और सुना गया।
गीत के बोल:
सौ इलज़ाम लगाये
ओ मेरे नाम लगाये
आपने सौ इलज़ाम लगाये
हूँ, चुप क्यूँ हो गए
कहिये कुछ और
चोरों को सारे नज़र आते हैं चोर
के, चोरों को सारे नज़र आते हैं चोर
सौ इलज़ाम लगाये
ओ मेरे नाम लगाये
आपने सौ इलज़ाम लगाये
कहिये कुछ और
चोरों को सारे नज़र आते हैं चोर
के, चोरों को सारे नज़र आते हैं चोर
मेहरबानी शुक्रिया
घर बुला के बेईज्ज़त किया
हाँ, मेहरबानी शुक्रिया
घर बुला के बेईज्ज़त किया
मेरी तलाशी तो ले ली सरकार
अपने गिरेबान में भी झांकिए एक बार
इस बात पर पे ज़रा कीजिये गौर
के, चोरों को सारे नज़र आते हैं चोर
चोरों को सारे नज़र आते हैं चोर
क्यूँ कि मैं हूँ एक गरीब
बेसहारा और बदनसीब
क्यूँ कि मैं हूँ एक गरीब
बेसहारा और बदनसीब
ताने हजारों सहे हो के मजबूर
पर मैं अब न चुप रहूंगी ऐ हुज़ूर
हाँ हाँ मचा दूँगी आज शोर
के, चोरों को सारे नज़र आते हैं चोर
चोरों को सारे नज़र आते हैं चोर
सौ इलज़ाम लगाये
ओ मेरे नाम लगाये
आपने सौ इलज़ाम लगाये
कहिये कुछ और
चोरों को सारे नज़र आते हैं चोर
चोरों को सारे नज़र आते हैं चोर
Labels:
1971,
Anand Bakshi,
Aruna Irani,
Lata Mangeshkar,
Naya Zamana,
SD Burman
Subscribe to:
Posts (Atom)


