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Thursday, 8 December 2011

ये देस परदेस -देस परदेस १९७८

एक गीत पेश है जिसने मुझे काफी प्रभावित किया और देव आनंद
के साथ साथ किशोर कुमार को भी ज्यादा पसंद करने की वजहें
बनायीं वो है फिल्म देस परदेस का गीत-ये देस परदेस। देस परदेस
हिंदी फिल्म सिनेमा का एक मील का पत्थर है। संभवतः ये देव आनंद
के निर्देशन वाली अंतिम बड़ी हिट फिल्म थी। इसके बाद आई लूटमार
भी काफी चली मगर इस फिल्म जैसा प्रभाव नहीं जगा पाई।

फिल्म देस परदेस के सभी गीत हिट हुए और आज भी उतने ही चाव से
सुने जाते हैं। रेडियो-अदरक लहसुन भी कई बार इस फिल्म के गीत
बजाते मिल जाते हैं। फ़िल्म के बाकी गीतों में और प्रस्तुत गीत में क्या
फर्क रहा मेरे लिए:देस परदेस के अन्य गीत मैं भी साथ साथ गुनगुनाने की
कोशिश करता और फिल्म के शीर्षक गीत को केवल ध्यान से सुनता। कुछ गीत
केवल तल्लीनता से सुनने में ही आनंद आता और उन गीतों के साथ अपनी
आवाज़ की मिलावट करके कानों पर बोझ डालना मेरे हिसाब से उचित नहीं
है।



गीत के बोल:

ये देस परदेस

हे, खुशियाँ यहीं पे
मिलेंगी हमें रे
सपना है अपना
ये देस परदेस

खुशियाँ यहीं पे
मिलेंगी हमें रे
अपना है अपना
ये देस परदेस

वही पुराने हैं, सारे फसाने,
नया है लेकिन जहाँ
अरे रस्ते नये हैं, ये मन्ज़िल नई है
लेकिन वही आसमाँ
सपना है सपना
अपना है अपना
ये देस परदेस

अकेला नहीं हूँ मैं, तेरे बिना
संग मेरे तेरी याद है
मिलकर खिलें फूल हर रंग के,
बस यही मेरी फरियाद है
सपना है सपना
अपना है अपना
ये देस परदेस
...............................
Ye des pardes-Des Pardes 1978

Tuesday, 6 December 2011

बोलो क्या हमको दोगे -छुपा रुस्तम १९७३

निस्संदेह ये वर्ष कला और सिनेमा जगत के लिए त्रासदायी रहा है। इस वर्ष
अनेक नामचीन हस्तियों ने नश्वर संसार से विदा ली। उन कलाकारों की बस यादें
ही चित्र, चलचित्र और आवाज़ के रूप में हमें उनकी उपस्थिति का एहसास कराती
रहेंगी।

देव आनंद मेरे पसंदीदा कलाकारों में से एक हैं। उनके १-२ गीत रोज ही याद आ
जाते हैं। परसों के रोज मुझे एक गीत विशेष रूप से याद आया वो है फिल्म
छुपा रुस्तम का गीत-बोलो क्या हमको दोगे। इसमें शुरू में केवल 'आंय' बोला गया
है देव आनंद द्वारा। ये एक शब्द ही उनके अंदाज़ को बयां करने के लिए काफी है।
अब ये आप बूझिये कि ये शब्द किशोर कुमार की आवाज़ में है या स्वयं देव आनंद
की आवाज़ में। किशोर कुमार जिन्होंने देव आनंद के लिए विशेष तौर पर गीत गाये ,
यूँ कहिये पार्श्व गायन के मामले में वे या तो स्वयं के लिए या फिर केवल देव आनंद
के लिए ही परदे पर गीत गाते। ये सिलसिला कम से कम सन १९६९ में आई आराधना
के पहले तक तो चला। कभी कभी तो ये लगने लगता जैसे देव आनंद स्वयं परदे पर
गीत गा रहे हों। तय है कि किशोर के गाये देव आनंद अभिनीत गीतों में अतिरिक्त ऊर्जा
का संचार होता महसूस होता है।

बहुत कम ऐसे कलाकार हुए हैं हिंदी सिनेमा जगत में जिनके गीत देखते समय गीत
और धुन पर से ध्यान कुछ देर के लिए हट जाता है उनमें से एक हैं देव आनंद। उन्हें
सदाबहार यूँ ही नहीं कहा जाता है। वे हमेशा सक्रिय दिखलाई दिए और फिल्म उद्योग
के बाल, युवा, बुज़ुर्ग सभी वर्गों के लिए प्रेरणास्रोत बने रहे।

गीत कम सुना हुआ है इसलिए कम देखा गया भी कह सकते हैं इसको। इस गीत
में जो कि सन ७० के दशक के पूर्वार्ध का गीत है, देव आनंद अपनी पूरी ऊर्जा के
साथ नायिका से कदम ताल मिलते हुए जीवन्तता प्रदान कर रहे हैं। गायक-गायिका हैं
किशोर कुमार और आशा भोंसले। गीत सचिन देव बर्मन की संगीत फैक्ट्री की उपज है
जिसकी रचना की है गीतकार नीरज ने।




गीत के बोल:

पूछो पूछो, पूछो ना
बोलो क्या हमको दोगे
'आंय'
बोलो क्या हमको दोगे
दिल जो हमने तुमको बिना मांगे दे दिया हँसते हँसते
बोलो क्या हमको दोगे
बोलो क्या हमको दोगे
दिल जो हमने तुमको बिना मांगे दे दिया हँसते हँसते
पूछो क्या हमसे लोगे, पूछो
दिल जो हमने तुमसे बिना पूछे ले लिया हँसते हँसते
पूछो क्या हमसे लोगे

बहका करें जो तेरी बाँहों में
महका करें जो तेरी राहों में
बहका करें जो तेरी बाँहों में
महका करें जो तेरी राहों में
देखा करें जो तेरी चाहों में
घर बसा लें जो हम तेरी ही निगाहों में
तो क्या हमको दोगे
बोलो क्या हमको दोगे
दिल जो हमने तुमको बिना मांगे दे दिया हँसते हँसते
बोलो क्या हमको दोगे

हे हे हे हे
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
हो हो हो हो
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला

दुश्मन जलेंगे जब मिलेंगे हम
प्यासे कभी न फिर रहेंगे हम
जल रहा है
बहुत
तो जलने दो
दुश्मन जलेंगे जब मिलेंगे हम
प्यासे कभी न फिर रहेंगे हम
जन्नत बना लेंगे ज़मीन पे हम
खुशियाँ रहेंगी और रहेंगे हम अब
पूछो के तुम क्या हमसे लोगे, पूछो
पूछो क्या हमसे लोगे
दिल जो हमने तुमसे बिना पूछे ले लिया हा हा हा हा
पूछो क्या हमसे लोगे

तेरी बाँहों का जब सहारा हो
रास्ता फिर कितना ही अँधियारा हो
हो हो हो हो, हो हो हो
तेरी बाँहों का जब सहारा हो
रास्ता फिर कितना ही अँधियारा हो
उठते ही तूफ़ान तुम किनारा हो
जो कुछ अपना है वो सब कुछ तुम्हारा
हाँ तो क्या हमको दोगे
बोलो क्या हमको दोगे
दिल जो हमने तुमको बिना मांगे दे दिया हँसते हँसते
बोलो क्या हमको दोगे

पूछो क्या हमसे लोगे
बोलो क्या हमको दोगे
पूछो क्या हमसे
बोलो क्या हमको
पूछो, बोलो
ओ पूछो, बोलो
......................................
Bolo kya hamko doge-Chhupa Rustom 1973

Friday, 28 October 2011

गलियों गलियों-स्वामी दादा १९८२

टी वी पर इतने सारे घोटाले दिखाए जाते हैं और इतने लुभावने कार्यक्रम
आते हैं कि आम आदमी भी करोडपति बन जाने के ख्वाब देखने लगता है।
मीडिया मसाले लगा कर घोटालों की ख़बरें पेश करता है। गौर करने लायक
बात ये है कि इन सबके बीच कहीं भी पांच रूपये के नोट और चिल्लर के गायब
हो जाने का समाचार नहीं मिलता है, जिसकी वजह से आज आम जनता काफी
परेशान और जबरन अनावश्यक वस्तुएं खरीदने को मजबूर है, जहाँ देखो चिल्लर
का टोटा या उसकी कमी का रोना।

अरबों रूपये के घोटाले होने के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था टिकी हुयी है, ये शायद
हमारा मजबूत विश्वास ही है जो सब झेल जाता है। और वो भी बर्दाश्त करने के माद्दे
से भी बहुत बाहर जा कर।

एक गीत है जिसमें पांच के नोट का जिक्र है, आज भी प्रासंगिक है। ये है सन १९८२ की
फिल्म स्वामी दादा का गीत। गीत कानों को सुकून प्रदान करने वाला है।



गीत के बोल:

पांच के नोट में अब क्या दम है ?
हो हो हो, दस का नोट सिगरट को भी कम है
हो हो हो, अब हरे नोट का मोल है क्या
सोचो कुछ ऊंची बात ज़रा
अब बात करो तो लाखों की
देखेंगे ख्वाब करोड़ों के

गलियों गलियों ख़ाक बहुत दिन हमने छानी
हो, बदला है अब दौर बादल जाएगी कहानी
हो, एक बंजारन कल बनेगी महलों की रानी
हो ओ ओ ओ
गलियों गलियों ख़ाक बहुत दिन हमने छानी
बदला है अब दौर बादल जाएगी कहानी
हो,एक बंजारन कल बनेगी महलों की रानी

हो ओ ओ ओ
गलियों गलियों ख़ाक बहुत दिन हमने छानी

आज संवर के देखा जो दर्पण
अपनी नज़र से शर्मा गई
किस के हुनर का चल गया जादू
कहाँ से कहाँ आ गई
ओ, मेरा हाथ

इस हीरे के हार में क्या है अपना मोल तो अंको
तुम क्या हो क्या बन सकते हो अपने दिल में झांको
झूठे नकली सपने देखे,
झूठे नकली सपने देखे, असली बात ना जानी
हो ओ ओ ओ

गलियों गलियों ख़ाक बहुत दिन हमने छानी
हो, बदला है अब दौर बादल जाएगी कहानी

मिल के मेरे साथ चलो तो वो दुनिया दिखलाऊँ
जीते जी वो जन्नत कैसे मिलती है बतलाऊँ
तुमको मसीहा मान लिया है अब जाना है और कहाँ
तुमसे मिले तो देखे उजाले वरना धुआं थे दोनों जहाँ
बदलें हम और यूँ बदलें,
बदलें हम और यूँ बदलें, हो दुनिया को हैरानी
हो ओ ओ ओ

गलियों गलियों ख़ाक बहुत दिन हमने छानी
हो, बदला है अब दौर बादल जाएगी कहानी
हो,एक बंजारन कल बनेगी महलों की रानी

हो ओ ओ ओ
गलियों गलियों ख़ाक बहुत दिन हमने छानी
.........................................
Galiyon galiyon-Swami Dada 1982

Friday, 21 October 2011

सोना, सोना रूपा लायो रे-जोशीला १९७३

जोशीला नाम की एक फिल्म है सन १९७३ की। इसमें देव आनंद और
हेमा मालिनी प्रमुख कलाकार हैं। इस फिल्म को देख कर दर्शकों में जोश
जगा हो या ना हो, गीतों के श्रोताओं में जोश अवश्य ही जगा। फिल्म में
कुछ यादगार गीत हैं। आज आपको सुनवाते हैं आशा भोंसले का गाया थोड़ा
अलग सा गीत। वैसे आर डी बर्मन ने उनके लिए बहुतेरे अलग-हट-के गीत
बनाये हैं। फिल्म की खूबी साहिर लुधियानवी के लिखे गीत हैं। गीत भी कुछ
लीक से हट कर लिखा गया प्रतीत होता है।

वैसे ये पोस्ट भी अलग हट के ही है। इसे मैंने बिलकुल अलग हट के स्थान पर
लिखा था। रेलवे स्टेशन के प्लेटफोर्म पर लगी बेंच पर बैठ के। एक परिवार
के साथ दो छोटे छौने(बच्चे) चले जा रहे थे जिसमें से एक के जूतों से चूं चूं की
आवाज़ आ रही थी , उसे सुन के मुझे इस गीत का शुरूआती संगीत याद आया।
बच्चों के जूतों में चूं चूं की आवाज़ करने वाली आईटम का इस्तेमाल काफी पुराना
हो चुका है मगर सुनने में अच्छा लगता है। अगर किसी डोकरे के जूते में वही फिट
कर दिए जाएँ तो पब्लिक कहेगी-अरे मूंह से तो चूं चूं कम थी जो पैरों से भी करने
लगा बुड़ऊ?

गीत फिल्माया गया है नायिका हेमा मालिनी और अन्य बॉलीवुड में रोजी-रोटी
के लिए रोजाना जद्दो-जहद करने वाले अन्य अनजान से महत्वाकांक्षी सहयोगी
कलाकारों पर।

दर्शक दीर्घा में जो दो अन्य कलाकार हैं उनके नाम इस प्रकार से हैं-सुधीर और बिंदु।
गीत के बीच में दो अन्य महिला कलाकार दिखते हैं वे हैं- सुलोचना और पद्मा खन्ना।
गीत में आगे आपको इफ्तेखार भी पुलिस ऑफिसर की भूमिका में नज़र आयेंगे।

गीत कुछ हाई-फ्रीक्वेंसी ख्यालों से बंधा हुआ है। फिर भी आपको बतलाये देते हैं कि
फिल्म की सिचुएशन के मुताबिक ये नायिका द्वारा नायक की भाव भंगिमाओं और
कृत्यों के ऊपर कटाक्ष सा है। नायिका को ये लगता है कि नायक धन के लोभ में
कुछ आड़ी टेडी हरकतें कर रहा है।




गीत के बोल:


रु रु, रु, रु रु

ओ, सोना, सोना रूपा, सोना रूपा
सोना रूपा लायो रे
सोना रे, सोना
सोना रूपा, सोना रूपा लायो रे
ये सोना, ले जा रे
ये रूपा, ले जा रे
मुझे तो, दिल दे जा
मुझे तो, दिल दे जा

आ, सोना मिले तो लोग आजकल दिल को कभी ना लें
प्रीत के मुंह पर कालिख मल दें, प्यार को ठोकर दें
ओ सखी री, अब है ज़माना दूसरा
आ आ आ आ आ आ आ
सोना, सोना रे
सोना रूपा, सोना रूपा लायो रे
ये सोना, ले जा रे
ये रूपा, ले जा रे
मुझे तो, दिल दे जा
मुझे तो, दिल दे जा

आ, सोना मिले तो लोग आजकल दिल को कभी ना लें
प्रीत के मुंह पर कालिख मल दें प्यार को ठोकर दें
ओ सखी री, अब है ज़माना दूसरा
आ आ आ आ आ आ आ आ
सोना, सोना रे
सोना रूपा, सोना रूपा लायो रे

जादू भरे इशारे सब झूठे हैं
मतलब भरे सहारे सब छूटे हैं
या बा
वादे कभी ना सुनना पछताएगी
सपने कभी ना बुनना लुट जायेगी
ओ ओ ओ सखी री, अब है ज़माना दूसरा
आ आ आ
सोना, सोना रे
सोना रूपा, सोना रूपा लायो रे
ये सोना, ले जा रे
ये रूपा, ले जा रे
मुझे तो दिल दे जा
मुझे तो दिल दे जा
ला ला ला ला ला ला ला ला
सोना, सोना रे

पलकों तले ठिकाना कोई मांगे ना
दिल का भरा खजाना कोई मांगे ना
या बा
अपना इन्हें ना बना संसारी हैं
सदमे पड़ेंगे कहना व्यापारी हैं
ओ सखी री अब है ज़माना दूसरा
आ आ आ
सोना, सोना रे
सोना रूपा, सोना रूपा लायो रे
ये सोना, ले जा रे
ये रूपा, ले जा रे
मुझे तो दिल दे जा
मुझे तो दिल दे जा

आ, सोना मिले तो लोग आजकल दिल को कभी ना लें
प्रीत के मुंह पर कालिख मल दें प्यार को ठोकर दें
ओ ओ ओ सखी री अब है ज़माना दूसरा
आ आ आ आ आ आ आ
सोना, सोना रे
सोना रूपा, सोना रूपा लायो रे
सोना, सोना रे
........................
Sona Rupa Layo Re-Joshila 1973

Saturday, 6 August 2011

जीवन नैया बहती जाए-ज़लज़ला १९५२

आइये सुनते हैं एक क्लासिक गीत. जो चीज़ें जूनी पुरानी हो जाती
हैं उनको भी क्लासिक कहा जाता है. प्रस्तुत गीत कर्णप्रिय कोरस वाला
गीत है.

अब चूंकि गीत क्लासिक है अतः इसके लिए विवरण की कोई आवश्यकता
नहीं है. फिर भी अगर आप कुछ जाना चाहें इसके बारे में तो पोस्ट के टैग
टटोल लीजियेगा. फिल्म का नाम है ज़लज़ला जो सन १९५२ की फिल्म है.



गीत के बोल:


हई हो हई हई
हई हो हई हई
जीवन नय्या
नय्या बहती जाये
नय्या बहती जाये
हई हो हई हो
हई हो हई हो
हई हो हई हो

ग़म के थपेड़े
थपेड़े सहती जाये
थपेड़े सहती जाये
हई हो हई हो
हई हो हई हो
हई हो हई हो

आयें मुसाफ़िर जायें मुसाफ़िर
दिल का धोखा खायें ए मुसाफ़िर
राह में लूटे जायें मुसाफ़िर
लेकिन नय्या
नय्या बहती जाये
नय्या बहती जाये
हई हो हई हो
हई हो हई हो
हई हो हई हो

जीवन नय्या
नय्या बहती जाये
नय्या बहती जाये
हई हो हई हो
हई हो हई हो
हई हो हई हो

दूर किनारा गहरा पानी
तेज़ भँवर लहरें दीवानी
राग हवाओं
राग हवाओं के तूफ़ानी
लेकिन नय्या
नय्या बहती जाये
नय्या बहती जाये
हई हो हई हो
हई हो हई हो
हई हो हई हो

डूब गये, डूब गये
मौत के हो गहरी अंधियारे
डूब गये
डूब गये सब चाँद सितारे
डूब गये
अंधे हो गये
अंधे हो गये रस्ते सारे
लेकिन नय्या
नय्या बहती जाये
नय्या बहती जाये
हई हो हई हो
हई हो हई हो
हई हो हई हो

मंज़िल मंज़िल बढ़ते जाओ
बढ़ते जाओ बढ़ते जाओ
तूफ़ानों से मत घबराओ
मत घबराओ मत घबराओ
मिल के साथी ज़ोर लगाओ

हई हो हई हो
हई हो हई हो
हई हो हई हो
हई हो हई हो
हई हो हई हो
हई हो हई हो
..............................
Jeevan naiya behti jaaye-Zalzala 1952

Tuesday, 19 July 2011

आप कहें और हम न आयें-देस परदेस १९७८

आपको जब पिछले दफे देस परदेस का गीत सुनाया था तब एक मित्र का
जिक्र किया था जिन्होंने रोते-धोते ज़माने के गीत ब्लॉग पर प्रस्तुत करने
की सलाह दी थी. उनकी सलाह अमल में लायी गयी लेकिन क्या किया
जाए फ़िल्मी मसाले पर इतने ब्लॉग और वेबसाइट उपलब्ध हैं कि पाठक
के सामने समस्या होती है क्या पढ़े और क्या न पढ़े. पूरे अंतरजाल पर
इतना गहरा जाल है साईट और ब्लॉग का कि विषय चुनाव भी एक समस्या
सरीखा हो जात है - आलू प्याज के भाव पढ़ें या ताजे घोटालों का विवरण.

अब सुनते हैं फिल्म देस परदेस से दूसरा गीत जो लता मंगेशकर ने गाया है
अभिनेत्री टीना मुनीम के लिए. संगीतकार राजेश रोशन ने जितने भी लता
के एकल गीत बनाये हैं उनमें से सबसे बढ़िया ५६ चुन लीजिए और इसको
आप उस सूची में ज़रूर पाएंगे. गीत लिखा है अमित खन्ना ने. विडियो में
से एक अंतरा नदारद है .

गीत 'स्टेज' पर गाया जा रहा है अतः इसे इसी श्रेणी में रख लेते हैं. आगे
चल के उप-श्रेणियाँ भी बना लेंगे-४ फीट का स्टेज, १० फीट ऊंचा स्टेज इत्यादि



गीत के बोल:


आप कहें और हम न आयें, ऐसे तो हालात नहीं, ओ
मँज़िल पे पहुँचेंगे कैसे, आपका जब तक साथ नहीं, ओ
आप कहें और हम न आयें, ऐसे तो हालात नहीं, ओ

चाहने वालों की आज दुनिया में चाहने वाले आ गए
उल्फ़त की मय आँखों से लो आज पिलाने आ गए
आप पियें और आप न झूमें आपके बस की बात नहीं, ओ
मँज़िल पे पहुँचेंगे कैसे आपका जब तक साथ नहीं

कसा हुआ है तीर हुस्न का, ज़रा सम्भल के रहियेगा
नज़र नज़र को मारेगी तो, कातिल हमें न कहियेगा
चाल चली है सोच के हमने इस खेल में अपनी मात नहीं, ओ

पास आ के ये आपके हमें होने लगा एहसास है
दम है तो बस आपके दमसे आप ही से साँस है
बयान करें जो हाल-ए-दिल को ऐसे कोई जज़्बात नहीं, ओ

आप कहें और हम न आयें, ऐसे तो हालात नहीं
मँज़िल पे पहुँचेंगे कैसे, आपका जब तक साथ नहीं
....................................
Aap kahen aur ham na aayen-Des Pardes 1978

Sunday, 17 July 2011

किसका रस्ता देखे-जोशीला १९७३

जेल की सलाखों के पीछे बंद नौजवान एक दिमाग का दही बनाने
वाला गीत कैसे गा सकता है. सोचने वाली बात है.

पढ़ा लिखा नौकरीपेशा नायक हालातों के चलते सलाखों के पीछे पहुँच
जाता है. वहाँ वो इस उम्मीद में गीत गा रहा है मानो नक्कारखाने
में तूती की आवाज़ सुनने वाला कोई आ जायेगा. और, आ भी जाता
है, सुन्दर नायिका जिसके आने के बाद उसकी जिंदगी में फिर से बहार
लौटने वाली है. अपनी यादों में लुडकते लड़खड़ाते वो आखिर मंजिल की
सीढ़ियों पर फिर से पहुँच जाता है. दो नायिकाएं दिखाई देती हैं गीत
में-राखी और हेमा मालिनी. जेलर की भूमिका में हैं मनमोहन कृष्ण.

बोल साहिर के हैं और धुन राहुल देव बर्मन की. गायक को आप पहचान
ही गए होंगे. गीत की पञ्च लाइन है-कोई नहीं जो यूँ ही जहाँ में, बाँटे
पीर पराई.



गीत के बोल:

किसका रस्ता देखे ऐ दिल ऐ सौदाई

किसका रस्ता देखे ऐ दिल ऐ सौदाई
मीलों है ख़ामोशी, बरसों है तन्हाई
भूली दुनिया कभी की, तुझे भी मुझे भी
फिर क्यों आँख भर आई

हो, किसका रस्ता देखे ऐ दिल ऐ सौदाई

कोई भी साया नहीं राहों में
कोई भी आएगा ना बाहों में
तेरे लिए मेरे लिए, कोई नहीं रोनेवाला ओ
झूठा भी नाता नहीं चाहों में
हाय, तू ही क्यों डूबा रहे आहों में
कोई किसी संग मरे, ऐसा नहीं होने वाला
कोई नहीं जो यूँ ही जहाँ में, बाँटे पीर पराई

हो, किसका रस्ता देखे ऐ दिल ऐ सौदाई

तुझे क्या बीती हुई रातों से
मुझे क्या खोई हुई बातों से
सेज नहीं चिता सही, जो भी मिले सोना होगा
गई जो डोरी छूटी हाथों से
हो, लेना क्या टूटे हुए साथों से
खुशी जहाँ माँगी तूने, वहीं मुझे रोना होगा
ना कोई तेरा ना कोई मेरा, फिर किसकी याद आई

हो, किसका रस्ता देखे ऐ दिल ऐ सौदाई
मीलों है ख़ामोशी, बरसों है तन्हाई
भूली दुनिया कभी की, तुझे भी मुझे भी
फिर क्यों आँख भर आई

किसका रस्ता देखे ऐ दिल ऐ सौदाई
............................................
Kiska rasta dekhe-Joshila 1973

Saturday, 16 July 2011

शिव जी बिहाने चले-मुनीमजी १९५५

सावन के महीने में आपको फिल्म सावन का एक गीत सुनवा दिया. इसके
बोलों में अगर कुछ त्रुटियाँ हों तो ध्यानाकर्षण अपेक्षित है पाठकों से.

आज आपको एक सावन स्पेशल फ़िल्मी धार्मिक गीत सुनवाते हैं। फिल्म
मुनीमजी में इसे एक नाट्य कार्यक्रम के रूप में दिखाया गया है। एक अरसा
हो गया इसको सुने हुए। वैसे भी भक्ति की ज़रुरत संकट या अपनी इच्छा
पूर्ती के लिए पढ़ती है। ऐसा ज्यादा अनुभव में आता है। जिनमें भक्ति स्वतः
उत्पन्न हो, ऐसे प्राणी उँगलियों पर गिने जा सकते हैं। गीत प्रस्तुत करने
कि इच्छा शिवरात्रि के अवसर पर थी मगर संभव न हो पाया.

खैर गीत पर चर्चा की जाए। नाट्य जगत का संगीत से रिश्ता बहुत पुराना है।
अक्सर आपने देखा होगा नाट्य या प्रह्सनों के दौरान एक सूत्रधार या तो
कहानी बयान करता मिलता या फिर कोई गीत सुना कर कहानी को आगे
बढ़ने का काम करता या फिर जो नाटक सर के उपर से गुजरते प्रतीत होते
उनको दर्शकों के भेजे में डालने का प्रयत्न करता। कुल मिलकर बिना सूत्रधार
के मजा नहीं आता। लम्बे ३-४ घंटे के किसी नाटक में तो मैंने १०-१२ गीत
सुन डाले। जब भी झपकी लग जाती गाने वालों की ज़ोर की आवाजें उठ बैठने
को बाध्य कर देती। कई बार तो यूँ होता कि पर्दा गिरने के बाद ही पता चलता
कि नाटक ख़त्म हो गया है।

गीत में शिव जी की बारात निकाल रही है। उनके गण आसपास नृत्य करते हुए
ख़ुशी से झूम रहे हैं। गीत लिखा है शैलेन्द्र ने और धुन बनाई है एस डी बर्मन ने।
गायक कलाकार हैं हेमंत कुमार।

चलते चलते एक इच्छा मैं भी एक अपनी छोड़ते चलता हूँ और स्तुति करता हूँ ।
हे-प्रभु उन ब्लॉग एग्रीगेटर्स के मालिकों को क्षमा कर देना जिन्होंने एक पोस्ट
वाले ब्लॉग तो सूची में डाल दिए और हमें तरसा रहे हैं। एक ले दे के चिट्ठाजगत
ही बचा था ट्रैफिक मिलने को वो भी बंद पड़ा हुआ है। चंपूगिरी और चमचागिरी
हमसे होती नहीं तो क्या करें बताएं , ज्ञान दें, और , थोड़े फुरसतिये समर्पित
किस्म के टिप्पणीकार भेज दे जो खाली पन्ने की पोस्ट देख के भी वाह वाह का
चटका लगायें।




गीत के बोल:

बम बम भोला
बम बम भोला
बम बम भोला
बम बम भोला

ओ शिवजी बिहाने चले
पालकी सजाये के
भभूति लगाये के ना

ओ शिवजी बिहाने चले
पालकी सजाये के
को: भभूति लगाये के
पालकी सजाये के ना

ओ जब शिव बाबा करे तैयारी
कैसे सकल समान हो
दाहिने अंग त्रिशूल विराजे
नाचे भूत शैतान हो
ब्रह्मा चलें विष्णु चलें
लै के वेद पुराण हो
शंख चक्र और गदा धनुष लै
चलें श्री भगवान हो
और बन-ठन के चलें बोम भोला
लिए भांग धतूरा का गोला
बोले ये हरदम
चले लड़का पराये के

भभूति लगाये के
पालकी सजाये के ना

ओ शिवजी बिहाने चले
पालकी सजाये के
भभूति लगाये के
पालकी सजाये के ना

हो ई आयी हो ई आया
हो ई आयी हो ई आया

आ आ आ आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ आ आ आ आ

हे: ओ माता मतदिन पर चंचल ली
तिलक जली लीलार हो
काला नाग गर्दन के नीचे
वोहू दिलन फुसकार हो
लोटा फेंक के भाग चलैली
ताविज निकल लिलार हो
इन के संग बिबाह न करबो
गौरी रही कुँवारी हो
कहे पार्वती समझायी
बतिया मानो हमरो माई
जै हा राइहा ला हम करमवा लिखाए के

भभूति लगाये के
पालकी सजाये के ना

ओ शिवजी बिहाने चले
पालकी सजाये के
भभूति लगाये के
पालकी सजाये के ना

ओम नमः शिवाय
......स्वाहा ....
ओम नमः शिवाय

ओ जब शिव बाबा मड़वा गईले
होला मंगलाचार हो
बाबा पंडित वेद विचारे
होला गुस्सा चार हो
बजरबटी की लगी झालरी
नागिन की अधिकार हो
विज मड़वा मे नावन अईली
करे झंगन वड़ीयार हो
ए गो नागिन गह्लन विदाई
नावन गिऊले चले परायी
सब हँसे लगैला
देवता ठठाय के

भभूति लगाये के
पालकी सजाये के ना

ओ शिवजी बिहाने चले
पालकी सजाये के
भभूति लगाये के
पालकी सजाये के ना

ओ कोमल रूप धरे शिव-शंकर
खुशी भये नर-नारी हो
राजही नाचन गान कराइले
इज्जत रहें हमार हो
रहे वर साथी शिव-शंकर से
केहू के न पावल पार हो
इन के जटा से गंगा बहिली
महिमा अगम अपार हो
जय शिव-शंकर ध्यान लगाये
इन के तीनों लोक दिखाये
कहे दुःख हरण यही
छडो बनवाए के

भभूति लगाये के
पालकी सजाये के ना

ओ शिवजी बिहाने चले
पालकी सजाये के
भभूति लगाये के
पालकी सजाये के ना

ओ शिवजी बिहाने चले
पालकी सजाये के
भभूति लगाये के
पालकी सजाये के ना

ओ शिवजी बिहाने चले
पालकी सजाये के
भभूति लगाये के
पालकी सजाये के ना
....................................
Shivji Bihane Chale-Munimji 1955

दिन ढल जाए हाय रात ना जाए-गाईड १९६५

कुछ गीत कठिन होना भी ज़रूरी हैं. अगर हर गीत आम आदमी
गुनगुनाते-गुनगुनाते गाने लग जाए तो पार्श्व गायन के लिए लंबी
कतार लग जायेगी. सुनने में सरल सा लगता ये गीत तो ऐसा है
कि मंजे हुए गायक भी इसे गाते समय डगमगा जाते हैं और इस
गीत की खूबी ये है कि संगीत के बिना इसको गुनगुनाने पर कुछ
रिक्तता का आभास होता है. इस तरीके से बना है ये कि बिना
संगीत के टुकड़ों के ये न तो गुनगुनाने में अच्छा लगता है और
शायद सुनने में भी न लगे. इसको ही कहते हैं बोल और धुन का
एक दूसरे से कस कर बंधा होना.

प्रस्तुत गीत है फिल्म गाईड से जो हिंदी फिल्म सिनेमा इतिहास का
एक मील का पत्थर है. शैलेन्द्र के लिखे गीत को स्वरबद्ध किया है
संगीतकार सचिन देव बर्मन ने. इस गीत को कातिल बनाने में
सैक्सोफोन ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी है जो कि मनोहारी सिंह ने
बजायी है. उम्मीद है इसमें बजी बांसुरी ज़रूर प्रसिद्द बांसुरी वादक
हरिप्रसाद चौरसिया की ही होगी.




गीत के बोल:

आ, आ आ आ आ आ
दिन ढल जाए हाय रात ना जाए,
तू तो ना आए तेरी याद सताए
दिन ढल जाए हाय रात ना जाए,
तू तो ना आए तेरी याद सताए
दिन ढल जाए

प्यार में जिनके सब जग छोड़ा,
और हुए बदनाम,
उनके ही हाथों हाल हुआ ये,
बैठे हैं दिल को थाम,
अपने कभी थे, अब हैं पराए

दिन ढल जाए हाय रात ना जाए,
तू तो ना आए तेरी याद सताए
दिन ढल जाए

ऐसी ही रिमझिम, ऐसी फुहारें,
ऐसी ही थी बरसात,
खुद से जुदा और जग से पराए,
हम दोनों थे साथ,
फिर से वो सावन अब क्यों ना आए

दिन ढल जाए हाय रात ना जाए,
तू तो ना आए तेरी याद सताए
दिन ढल जाए

दिल के मेरे पास हो इतने,
फिर भी हो कितने दूर,
तुम मुझसे, मैं दिल से परेशान,
दोनों हैं मजबूर,
ऐसे में किसको कौन मनाए

दिन ढल जाए हाय रात ना जाए,
तू तो ना आए तेरी याद सताए
दिन ढल जाए
..........................
Din dhal jaaye-Guide 1964

Monday, 11 July 2011

दिल से दिल टकराये-लव मैरिज १९५९

गायक-गीता दत्त, मोहम्मद रफ़ी
गीतकार-शैलेन्द्र
संगीतकार-शंकर जयकिशन
फिल्म-लव मैरिज
वर्ष-१९५९




गीत के बोल:

दिल से दिल टकराये,
फिर दोनों घबराये
सब्र की डोरी टूट गई तो
लव मैरिज कर लाये
लव मैरिज कर लाये

दिल से दिल टकराये
फिर दोनों घबराये
सब्र की डोरी टूट गई तो
लव मैरिज कर लाये
लव मैरिज कर लाये

दिल से दिल टकराये
फिर दोनों घबराये
सब्र की डोरी टूट गई तो
लव मैरिज कर लाये
लव मैरिज कर लाये

वो उत्तर के पंछी थे
और वो दक्षिण की मैना
ली ली ली ली ली ली ली ली ली या
वो उत्तर के पंछी थे
और वो दक्षिण की मैना
एक रोज़ एक बाग़ में
यूँ ही लड़ गये नैना
एक रोज़ एक बाग़ में
यूँ ही लड़ गये नैना
दिल दे के घर आये
घर आ कर पच्छताये
सब्र की डोरी टूट गई तो
लव मैरिज कर लाये
लव मैरिज कर लाये

सब्र की डोरी टूट गई तो
लव मैरिज कर लाये
लव मैरिज कर लाये

कब तक छत पर लेट कर
करते तारों से बातें
ली ली ली ली ली ली ली ली ली या
कब तक छत पर लेट कर
करते तारों से बातें
नींद चली गई रूठ के
कैसे कटतीं रातें
नींद चली गई रूठ के
कैसे कटतीं रातें
अपनों से शरमाये
ग़ैरों से कतराये
सब्र की डोरी टूट गई तो
लव मैरिज कर लाये
लव मैरिज कर लाये

दिल से दिल टकराये
फिर दोनों घबराये
सब्र की डोरी टूट गई तो
लव मैरिज कर लाये
लव मैरिज कर लाये

दिल से दिल टकराये
फिर दोनों घबराये
सब्र की डोरी टूट गई तो
लव मैरिज कर लाये
लव मैरिज कर लाये
...............................
Dil se dil takraye-Love Marriage 1959

Wednesday, 6 July 2011

तसवीर तेरी दिल में-माया १९६१

फिल्म माया के गीत में वायलिन की आवाज़ का जिक्र हम कर चुके
हैं अब सुनिए बांसुरी की मनमोहक तान वाला मधुर युगल गीत।
इसे गाया है लता और रफ़ी ने। ये गीत भी ऊंची तान पर जाता
है और इसे गुनगुनाना आसान नहीं है जबकि सुननेवाला असफल
कोशिश ज़रूर करता है। गीत फिल्माया गया है देव आनंद और माला
माला सिन्हा पर। बोल मजरूह के हैं और संगीत सलिल चौधरी का। गीत
बेहद रोमांटिक है और इसकी सादगी के सभी कायल हैं। सरल और
सौम्य तरीके से अपनी भावनाओं का इज़हार कैसे किया जाये इस
गीत से सीखा जा सकता है।



गीत के बोल :

तसवीर तेरी दिल में,
जिस दिन से उतारी है,

तसवीर तेरी दिल में,
जिस दिन से उतारी है,
फिरूँ तुझे संग ले के,
नए-ऩए रंग ले के,
सपनों की महफिल में

तसवीर तेरी दिल में,
जिस दिन से उतारी है,
फिरूँ तुझे संग ले के,
नए-ऩए रंग ले के,
सपनों की महफिल में

तसवीर तेरी दिल में

माथे की बिंदिया तू है सनम,
नैनों का कजरा पिया तेरा ग़म
माथे की बिंदिया तू है सनम,
नैनों का कजरा पिया तेरा ग़म
नैन के नीचे-नीचे, रहूँ तेरे पीछे-पीछे,
चलूँ किसी मंजिल में

तसवीर तेरी दिल में,
जिस दिन से उतारी है,
फिरूँ तुझे संग ले के,
नए-ऩए रंग ले के,
सपनों की महफिल में

तसवीर तेरी दिल में

तुमसे नज़र जब गई है मिल,
जहाँ हैं कदम तेरे वहीं मेरा दिल
तुमसे नज़र जब गई है मिल,
जहाँ हैं कदम तेरे वहीं मेरा दिल
झुकें जहाँ पलकें तेरी, खुलें जहाँ ज़ुल्फें तेरी,
रहूँ उसी मंज़िल में

तसवीर तेरी दिल में,
जिस दिन से उतारी है,
फिरूँ तुझे संग ले के,
नए-ऩए रंग ले के,
सपनों की महफिल में

तसवीर तेरी दिल में

तूफ़ान उठाएगी दुनिया मगर,
रूक ना सकेगा दिल का सफ़र
तूफ़ान उठाएगी दुनिया मगर,
रूक ना सकेगा दिल का सफ़र
यूँ ही नजर मिलती होगी,
यूँ ही शमाँ जलती होगी,
तेरी-मेरी मंजिल में।

तसवीर तेरी दिल में,
जिस दिन से उतारी है,
फिरूँ तुझे संग ले के,
नए-ऩए रंग ले के,
सपनों की महफिल में

तसवीर तेरी दिल में

............................
Tasveer teri dil mein-Maya 1961

Sunday, 26 June 2011

आसमान के नीचे-ज्वैल थीफ १९६७

फिल्म ज्वैल थीफ का एक गीत शैलेन्द्र ने लिखा और बाकी गीत
मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखे, कारण आपको इस फिल्म का पहला
गीत सुनवाते वक़्त बताया गया था।

इस फिल्म के सभी गीत लोकप्रिय हुए। प्रस्तुत गीत एक फुरसती सा
गीत है, फिल्म की सिचुएशन के हिसाब से। नायक नायिका सज संवर
के बाग़ में गीत गा रहे हैं। देव आनंद का जो सिर पर टोपी रखने का
अंदाज़ है वो काफ़ी सारी ४०-५० के दशक की विलायती फिल्मों में
आप देख सकते हैं। अच्छी बात है, कोई भी स्टाइल जो पसंद आये उसे
अपना लेना चाहिए। इस स्टाइल का बहुत इस्तेमाल हुआ है फिल्मों
में।

वास्को-डी-गामा को धरती पर दूसरे देशों की खोज का श्रेय जाता है
तो हिंदी फिल्मों के निर्देशकों को भी धन्यवाद् देने की ज़रुरत है जिनकी
वजह से हमें दूसरे देशों के बारे में जानकारी मिलती है । आम जनता
विलायत की सैर के ख्वाब देखती रहती है लेकिन ये हसरत फिल्मों के
माध्यम से, अधूरी ही सही, देख देख कर पूरी अवश्य हो जाती है ।

गीत गाया है लता और किशोर ने। गीत की धुन है सचिन देव बर्मन की।
ये काफ़ी घिसा हुआ अर्थात बजा हुआ युगल गीत है और आपने इसको
एक ना एक बार ज़रूर सुना होगा।



गीत के बोल:

आसमान के नीचे,
आसमान के नीचे ...आगे
हम आज अपने पीछे
हम आज अपने पीछे ... फिर
प्यार का जहाँ बसा के चले
कदम के निशां बना के चले

आसमान के नीचे
हम आज अपने पीछे
प्यार का जहाँ बसा के चले
कदम के निशां बना के चले

आसमान के नीचे
हम आज अपने पीछे
प्यार का जहाँ बसा के चले
कदम के निशां बना के चले

तुम चले तो फूल जैसे आँचल के रँग से
सज गई राहें, सज गई राहें
पास आओ मै पहना दूँ चाहत का हार ये
खुली खुली बाहें, खुली खुली बाहें
जिस का हो आँचल खुद ही चमन
कहिये वो क्यूँ हार बाहों के डाले

अरे आसमान के नीचे
हम आज अपने पीछे
प्यार का जहाँ बसा के चले
कदम के निशां बना के चले

बोलती हैं आज आँखें कुछ भी न आज तुम
कहने दो हमको, कहने दो हमको
बेखुदी बढ़ती चली है अब तो ख़ामोश ही
रहने दो हमको, रहने दो हमको
इक बार एक बार, मेरे लिये
कह दो खनकें, लाल होंठों के प्याले

आसमान के नीचे
हम आज अपने पीछे
प्यार का जहाँ बसा के चले
कदम के निशां बना के चले

साथ मेरे चल के देखो आई हैं धूम से
अब की बहारें, अब की बहारें
हर गली हर मोड़ पे वो दोनों के नाम से
हमको पुकारे, तुमको पुकारे
कह दो बहारों से, आए न इधर
उन तक उठ कर, हम नहीं जाने वाले

आसमान के नीचे
हम आज अपने पीछे
प्यार का जहाँ बसा के चले
कदम के निशां बना के चले
...............................
Aasman ke neeche-Jewl Thief 1967

Thursday, 6 January 2011

हूँ मैं एक नया तराना-फरार १९५५

'नया' थीम और शब्द के ऊपर आपको नए साल कई शुरुआत में एक गीत
सुनवाया
था। एक और गीत सुनिए जिसमे नए तराने के जिक्र है। एक
क्लब
सॉन्ग है ये। एक दाढ़ी वाला स्टेज पर गिटार भांज रहा है। गीता
बाली नृत्य कर रही हैं और परदे पर इसे गा रही हैं। गायिका गीता दत्त ने
पार्श्व गायन किया है। प्रेम धवन के लिखे गीत की तर्ज़ बनाई है संगीतज्ञ
अनिल बिश्वास ने।



गीत के बोल:

हर इक नज़र इधर उधार
है बेक़रार मेरे लिए
महफ़िल का दिल धड़क रहा है बार बार
मेरे लिए

हूँ मैं इक नया तराना इक नया फ़साना
इक नई कहानी हूँ मैं
इक रंग रंगीली इक छैल छबीली
मद मस्त जवानी हूँ मैं
हूँ मैं इक नया तराना इक नया फ़साना
इक नई कहानी हूँ मैं
इक रंग रंगीली इक छैल छबीली
मद मस्त जवानी हूँ मैं
हूँ मैं इक नया तराना

रूप की रानी नाम है मेरा
दिल तडपाना काम है मेरा
रूप की रानी नाम है मेरा
दिल तडपाना काम है मेरा
कोई कहे मतवाली
कोई कहे भोली भाली
कोई कहे दीवानी हूँ मैं
इक रंग रंगीली इक छैल छबीली
मद मस्त जवानी हूँ मैं
हूँ मैं इक नया तराना

मेरी अदाएं मेरे बहाने
कोई ना समझे कोई ना जाने
मेरी अदाएं मेरे बहाने
कोई ना समझे कोई ना जाने
इक पवन झकोला इक उड़न खटोला
इक याद खाली(??) हूँ मैं
इक रंग रंगीली इक छैल छबीली
मद मस्त जवानी हूँ मैं

हूँ मैं इक नया तराना
इक नया फ़साना इक नई कहानी हूँ मैं
इक रंग रंगीली एक छैल छबीली
मदमस्त जवानी हूँ मैं

हूँ मैं एक नया तराना
हूँ मैं

Monday, 22 November 2010

लिखा है तेरी आँखों में-तीन देवियाँ १९६५

अभिनेत्री नंदा और भारतीय नारी की छबि एक दूसरे के पर्याय लगते
थे रुपहले परदे पर। एक फिल्म आई थी सन में -तीन देवियाँ। इस फिल्म
में देव आनंद के साथ तीन देवियों ने काम किया था। ये हैं-नंदा, कल्पना और
सिमी ग्रेवाल। फिल्म में कुछ यूँ होता है की तीनों देवियाँ देव आनन्द पर फ़िदा
हो जाती हैं और शायद तीनों पर देव आनंद। अब समस्या तीन में से एक को चुनने
की है। फिल्म के अंत में फिल्म का नायक देव आनंद एक मनोवैज्ञानिक के पास
जाता है। वहां उसे समाधान मिल जाता है। भुट्टा खाने वाली अभिनेत्री ही उसकी
पसंद मालूम पढ़ती है। ज्ञात हो फिल्म के एक दृश्य में देव आनंद और नंदा भुट्टे
का आनंद लेते नज़र आते हैं। भुट्टे का आनंद लेने के साथ दोनों एक गीत गाते हैं।
आइये वही गीत सुनें। हिंदी फिल्म जगत का ये सबसे मधुर भुट्टा-गीत है। वैसे
कई गीत हैं जो बाजरे के खेत में भी फिल्माए गए हैं। निर्देशक अमरजीत का जवाब
नहीं जिन्होंने भुट्टे(मकई) के खेत को भी खूबसूरत बना डाला। मजरूह के बोल,
एस. डी. बर्मन का संगीत और आवाजें लता, किशोर की हैं।



गीत के बोल:

लिखा है तेरी आँखों में, किसका अफ़साना
लिखा है तेरी आँखों में, किसका अफ़साना
अगर इसे समझ सको, मुझे भी समझाना

लिखा है तेरी आँखों में, किसका अफ़साना

जवाब सा किसी तमन्ना का,
लिखा तो है मगर अधूरा सा
अरे ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
जवाब सा किसी तमन्ना का,
लिखा तो है मगर अधूरा सा
हो ओ ओ कैसी न हो मेरी हर बात अधूरी,
अभी हूँ आधा दीवाना

लिखा है तेरी आँखों में, किसका अफ़साना
अगर इसे समझ सको, मुझे भी समझाना

लिखा है तेरी आँखों में, किसका अफ़साना

जो कुछ नहीं तो ये इशारे क्यूँ,
ठहर गए मेरे सहारे क्यूँ
अरे ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
जो कुछ नहीं तो ये इशारे क्यूँ,
ठहर गए मेरे सहारे क्यूँ

थोड़ा सा हसीनों का सहारा ले के चलना,
है मेरी आदत रोज़ाना

लिखा है तेरी आँखों में, किसका अफ़साना
अगर इसे समझ सको, मुझे भी समझाना
लिखा है तेरी आँखों में, किसका अफ़साना

यहाँ वहाँ फ़िज़ा में आवारा,
अभी तलक़ ये दिल है बेचारा
अरे ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
यहाँ वहाँ फ़िज़ा में आवारा,
अभी तलक़ ये दिल है बेचारा

हो ओ ओ, दिल को तेरे तो हम ख़ाक ना समझे
तुझी को हमने पहचाना

लिखा है तेरी आँखों में, किसका अफ़साना
अगर इसे समझ सको, मुझे भी समझाना
लिखा है तेरी आँखों में, किसका अफ़साना
 
 
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