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Thursday, 8 December 2011

ये देस परदेस -देस परदेस १९७८

एक गीत पेश है जिसने मुझे काफी प्रभावित किया और देव आनंद
के साथ साथ किशोर कुमार को भी ज्यादा पसंद करने की वजहें
बनायीं वो है फिल्म देस परदेस का गीत-ये देस परदेस। देस परदेस
हिंदी फिल्म सिनेमा का एक मील का पत्थर है। संभवतः ये देव आनंद
के निर्देशन वाली अंतिम बड़ी हिट फिल्म थी। इसके बाद आई लूटमार
भी काफी चली मगर इस फिल्म जैसा प्रभाव नहीं जगा पाई।

फिल्म देस परदेस के सभी गीत हिट हुए और आज भी उतने ही चाव से
सुने जाते हैं। रेडियो-अदरक लहसुन भी कई बार इस फिल्म के गीत
बजाते मिल जाते हैं। फ़िल्म के बाकी गीतों में और प्रस्तुत गीत में क्या
फर्क रहा मेरे लिए:देस परदेस के अन्य गीत मैं भी साथ साथ गुनगुनाने की
कोशिश करता और फिल्म के शीर्षक गीत को केवल ध्यान से सुनता। कुछ गीत
केवल तल्लीनता से सुनने में ही आनंद आता और उन गीतों के साथ अपनी
आवाज़ की मिलावट करके कानों पर बोझ डालना मेरे हिसाब से उचित नहीं
है।



गीत के बोल:

ये देस परदेस

हे, खुशियाँ यहीं पे
मिलेंगी हमें रे
सपना है अपना
ये देस परदेस

खुशियाँ यहीं पे
मिलेंगी हमें रे
अपना है अपना
ये देस परदेस

वही पुराने हैं, सारे फसाने,
नया है लेकिन जहाँ
अरे रस्ते नये हैं, ये मन्ज़िल नई है
लेकिन वही आसमाँ
सपना है सपना
अपना है अपना
ये देस परदेस

अकेला नहीं हूँ मैं, तेरे बिना
संग मेरे तेरी याद है
मिलकर खिलें फूल हर रंग के,
बस यही मेरी फरियाद है
सपना है सपना
अपना है अपना
ये देस परदेस
...............................
Ye des pardes-Des Pardes 1978

Sunday, 28 August 2011

थोडा है थोड़े की ज़रूरत है-खट्टा मीठा १९७७

फिल्म नरम गरम से एक गीत और याद आया फिल्म खट्टा मीठा

का। निहायत ही खुशनुमा और उम्मीदें जगाने वाला गीत है ये।

इस फिल्म के कथानक ने मुझे काफी प्रभावित किया।



गीत का सार है-थोड़ा ही तो चाहिए। जीवन में थोड़ा थोड़ा सब

कुछ प्रसाद स्वरुप मिलता रहे तो आनंद ही आनंद है। आनंद तो है

मगर थोड़े में संतोष करने पर ही।



गीत लिखा है गुलज़ार ने और इसे गाया है किशोर कुमार एवं

लता मंगेशकर ने। इसे आप राजेश रोशन द्वारा संगीतबद्ध सर्वश्रेष्ठ

रचनाओं में से एक गिन सकते हैं। गुलज़ार बिना कुछ अलग हट के

और कुछ लीक से हटकर बने गीतों की आप कल्पना नहीं कर सकते

हैं. भारतीय सिनेमा का एक अवश्यक तत्त्व से हैं गुलज़ार। गुलज़ार

को हिंदी फ़िल्मी गीत में प्रयोगधर्मिता का मसीहा कहें तो अतिशयोक्ति

नहीं होना चाहिए।



गीत को आप परफेक्ट युगल गीत कह सकते हैं। ऐसे गीत सुनने में बेहद

रोचक लगते हैं जिसमें दो शब्द गायक, दो शब्द गायिका गाये। इसे आप

अकेले गुनगुनाएं तो आनंद नहीं आएगा। साथ में कोई होना ज़रूरी है इसे

गुनगुनाने के लिए। खुशकिस्मत हैं वो लोग जिन्हें साथ में कोई ना कोई

गुनगुनाने वाला मिलता है।



गीत में आपको महानायक अमिताभ की एक झलक दिख जाएगी।







हुं हुं हुं, हे हे हे, ला ला ला ला ला ला



थोड़ा है थोड़े की ज़रूरत है

ज़िंदगी फिर भी अहा ख़ूबसूरत है

थोड़ा है थोड़े की ज़रूरत है



जिस दिन पैसा होगा

वो दिन कैसा होगा

उस दिन पहिये घूमेंगे

और क़िस्मत के लब चूमेंगे

बोलो ऐसा होगा



थोड़ा है थोड़े की ज़रूरत है



सुन सुन सुन हवा चली, सबा चली

तेरे आँचल से उड़ के घटा चली



सुन सुन सुन कहाँ चली कहाँ चली

मैं छूने ज़रा आसमाँ चली

बादल पे उड़ना होगा

थोड़ा है, थोड़े की

ज़रूरत है, हाँ ज़रूरत है, हो ज़रूरत है



हमने सपना देखा है

कोई अपना देखा है

हमने सपना देखा है

कोई अपना देखा है

जब रात का घूँघट उतरेगा

और दिन की डोली गुज़रेगी

तब सपना पूरा होगा

थोड़ा है, थोड़े की

ज़रूरत है

ज़िंदगी, फिर भी अहा, ख़ूबसूरत है

थोड़ा है, थोड़े की, ज़रूरत है

..............................................

Thoda hai thode ki zaroorat-Khatta Meetha 1977

Sunday, 21 August 2011

मच गया शोर सारी नगरी रे-खुद्दार १९८२

आज जन्माष्टमी क पर्व है। आइये इस अवसर पर आपको एक गीत

सुनवाते हैं अमिताभ और परवीन बॉबी पर फिल्माया गया फिल्म

खुद्दार से है। मजरूह सुल्तानपुरी ने इस गीत को लिखा है और धुन

बनायीं है राजेश रोशन ने। इस गीत को गाया है लता मंगेशकर और

किशोर कुमार ने। मटकी फोड़ कार्यक्रम इस अवसर पर अवश्य होता

है। इस गीत में उसका भी आनंद ले लीजिये।











गीत के बोल:



मच गया शोर सारी नगरी रे, सारी नगरी रे

आया बिरज का बांका संभाल तेरी गगरी रे

आया बिरज का बांका संभाल तेरी गगरी रे

मच गया शोर सारी नगरी रे, सारी नगरी रे

आया बिरज का बांका संभाल तेरी गगरी रे

हो आया बिरज का बांका संभाल तेरी गगरी रे



देखो अरे देखो कहीं ऐसा न हो जाए

चोरी करे माखन तेरा जिया भी चुराए

देखो अरे देखो कहीं ऐसा न हो जाए

चोरी करे माखन तेरा जिया भी चुराए

अरे धमकता है इतना तू किसको

डरता है कौन आने दे उसको

डरता है कौन आने दे उसको

ऐसे न बहुत बोलो

मत ठुमक ठुमक दोलो

चिल्लाओगी बहुत गोरी

जब उलट देगा तोरी

गगरी आ के बीच डगरी रे



मच गया शोर सारी नगरी रे, सारी नगरी रे

आया बिरज का बांका संभाल तेरी गगरी रे

आया बिरज का बांका संभाल तेरी गगरी रे



ला रा ला ला ला रा ला ला ला

ला रा ला ला ला रा ला ला ला



जाने क्या करता अगर होता कहीं गोरा

जा के जमुना में ज़रा शक्ल देखे छोरा

जाने क्या करता अगर होता कहीं गोरा

जा के जमुना में ज़रा शक्ल देखे छोरा

बिंदिया चमकाती रस्ते में न जा

मनचला भी है गोकुल का राजा

मनचला भी है गोकुल का राजा

पड़ जाये नहीं पाला राधा से कहीं लाला

फिर रोयेगा गोविंदा मारेंगी ऐसा फंदा

गर गर से बंधेगी ऐसी चुनरी रे



मच गया शोर सारी नगरी रे, सारी नगरी रे

आया बिरज का बांका संभाल तेरी गगरी रे

हो ओ ओ आया बिरज का बांका संभाल तेरी गगरी रे



अरे मच गया शोर सारी नगरी रे, सारी नगरी रे

आया बिरज का बांका संभाल तेरी गगरी रे

हो आया बिरज का बांका संभाल तेरी गगरी रे

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Mach Gaya Shor Sari Nagri-Khuddar 1982

Saturday, 6 August 2011

देखा तुझे तो-कोयला १९९७

क से कोट , क से कोयला. फिल्म निर्देशकों ने शाहरुख खान को

उनकी शुरूआती फिल्मों में खूब ओवर साइज़ कोट पहनाए. आइये सुनें

राकेश रोशन निर्देशित कोयला फिल्म से एक हिट गीत. फिल्म ज्यादा

नहीं चली मगर इसके गीत थोड़े बहुत बजे जिसमें सबसे ज्यादा बजा

प्रस्तुत गीत . यह गीत अलका याग्निक और कुमार सानू की आवाजों

में है. नायिका को तो आप पहचान ही गए होंगे-हुसैन की गज-गामिनी.



कुमार सानू को "हो" उनके अधिकतर गीतों में जबरन ठूंसी हुई लगती

है. शायद किसी ने भी उनको ये नहीं बताया कि उनकी "हों हों " सुनने

में कतई कर्णप्रिय नहीं लगती है.



गीत माधुरी दीक्षित पर ही केंद्रित है और नायक इसमें एक सहायक कलाकार

जितनी भूमिका निभा रहा है. माधुरी की उपस्थिति से भी फिल्म की जो

बॉक्स ऑफिस की स्तिथि थी उस पर कोई सुधार नहीं आया.













गीत के बोल:



देखा तुझे तो हो गयी दीवानी

पा लूं तुझे तो मर न जाऊं कहीं



देखा तुझे तो हो गयी दीवानी

पा लूं तुझे तो मर न जाऊं कहीं



तेरे संग जीने को आया

तन मन अपना देने लाया



देखा तुझे तो जीने लगे हम

पा लें तुझे तो न हो मरने का गम





खुश नसीबी से मुझे प्यार इतना मिल गया

आज आँचल ही मेरा मुझको कम लगने लगा

हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ

खुश नसीबी से मुझे प्यार इतना मिल गया

आज आँचल ही मेरा मुझको कम लगने लगा

मांगने तेरा हाथ मैं आया

देने सारा जीवन लाया



देखा तुझे तो, हाँ जीने लगे हम

पा लें तुझे तो न हो मरने का गम



चाहना न चाहना किसके बस की बात है

दिल का आज आना किसी पर किस्मतों के हाथ है

हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ

चाहना न चाहना किसके बस की बात है

दिल का आज आना किसी पर किस्मतों के हाथ है

पहले प्यार को मिटते न देखा

ये तो है पत्थर कि रेखा



देखा तुझे तो हो गयी दीवानी

पा लूं तुझे तो मर न जाऊं कहीं



तेरे संग जीने को आया

तन मन अपना देने लाया



देखा तुझे तो, हाँ जीने लगे हम

पा लें तुझे तो न हो मरने का गम

.........................

Dekha tujhe to-Koyla 1997

Monday, 1 August 2011

यार की गली दिन बहार का हाय-उल्टा सीधा १९८१

राजेश रोशन के संगीत निर्देशन में सुनिए एक गीत फिल्म उल्टा सीधा
से। इस युगल गीत को गाया है किशोर कुमार और लता मंगेशकर ने।
गीत मजरूह का लिखा हुआ है। उन बिरले गीतों में से एक है जिनमें
राज बब्बर को किशोर कुमार की आवाज़ पर होंठ हिलाने का मौका मिला
है। रति अग्निहोत्री को कई गीत मिले हैं लता मंगेशकर की आवाज़ वाले।
फिल्म दुनिया की गिनती की लंबी अभिनेत्रियों में से एक रति हमेशा अपने
नायकों से ज्यादा लंबी सी दिखाई देती रहीं।

राजश्री वालों को इस दुर्लभ विडियो को लोड करने के लिए सहृदय धन्यवाद।




गीत के बोल:

हो, हो
आ आ आ आ आ आ हो हो
यार की गली दिन बहार का हाय
आ गया मज़ा आज प्यार का हाय
यार की गली दिन बहार का हाय
आ गया मज़ा आज प्यार का हाय
हो हो, हो हो, हो हो हो हो हो

यार की गली दिन बहार का हाय
आ गया मज़ा आज प्यार का हाय
हो हो, हो हो, हो हो हो हो हो

एक तेरी नज़र है एक मेरी नज़र है
एक तेरी नज़र है एक मेरी नज़र है
बीच में अब नहीं यार कोई
पर्दा है न दीवार कोई
बस इसी का तो इंतज़ार था हाय
आ गया मज़ा आज प्यार का हाय
हो हो, हो हो, हो हो हो हो हो

बात छुप छुप के मेरी जान कर नहीं
राज़ अपना है किसी का डर नहीं
बात छुप छुप के मेरी जान कर नहीं
राज़ अपना है किसी का डर नहीं
प्यार कर ले आज तो दिल खोल के आ
रोज दिलबर मिलेगा कहाँ ऐसा हसीं मौका आ
हाथ से मिला हाथ यार का हाये
आ गया मज़ा आज प्यार का हाय
हो हो, हो हो, हो हो हो हो हो

ला ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला

दिल तेरा भी प्यासा दिल मेरा भी प्यासा
दिल तेरा भी प्यासा, प्यासा
दिल मेरा भी प्यासा ,प्यासा
यूँ डूबे मोहब्बत में जानी
के सर से गुजार जाए पानी
इस कदर दिल बेकरार था हाय
आ गया मज़ा आज प्यार का हाय


यार की गली दिन बहार का हाय
अरे, आ गया मज़ा आज प्यार का हाय
हो हो, हो हो, हो हो हो हो हो
...............................
Yaar ki gali-Ulta Seedha 1981

Tuesday, 19 July 2011

आप कहें और हम न आयें-देस परदेस १९७८

आपको जब पिछले दफे देस परदेस का गीत सुनाया था तब एक मित्र का
जिक्र किया था जिन्होंने रोते-धोते ज़माने के गीत ब्लॉग पर प्रस्तुत करने
की सलाह दी थी. उनकी सलाह अमल में लायी गयी लेकिन क्या किया
जाए फ़िल्मी मसाले पर इतने ब्लॉग और वेबसाइट उपलब्ध हैं कि पाठक
के सामने समस्या होती है क्या पढ़े और क्या न पढ़े. पूरे अंतरजाल पर
इतना गहरा जाल है साईट और ब्लॉग का कि विषय चुनाव भी एक समस्या
सरीखा हो जात है - आलू प्याज के भाव पढ़ें या ताजे घोटालों का विवरण.

अब सुनते हैं फिल्म देस परदेस से दूसरा गीत जो लता मंगेशकर ने गाया है
अभिनेत्री टीना मुनीम के लिए. संगीतकार राजेश रोशन ने जितने भी लता
के एकल गीत बनाये हैं उनमें से सबसे बढ़िया ५६ चुन लीजिए और इसको
आप उस सूची में ज़रूर पाएंगे. गीत लिखा है अमित खन्ना ने. विडियो में
से एक अंतरा नदारद है .

गीत 'स्टेज' पर गाया जा रहा है अतः इसे इसी श्रेणी में रख लेते हैं. आगे
चल के उप-श्रेणियाँ भी बना लेंगे-४ फीट का स्टेज, १० फीट ऊंचा स्टेज इत्यादि



गीत के बोल:


आप कहें और हम न आयें, ऐसे तो हालात नहीं, ओ
मँज़िल पे पहुँचेंगे कैसे, आपका जब तक साथ नहीं, ओ
आप कहें और हम न आयें, ऐसे तो हालात नहीं, ओ

चाहने वालों की आज दुनिया में चाहने वाले आ गए
उल्फ़त की मय आँखों से लो आज पिलाने आ गए
आप पियें और आप न झूमें आपके बस की बात नहीं, ओ
मँज़िल पे पहुँचेंगे कैसे आपका जब तक साथ नहीं

कसा हुआ है तीर हुस्न का, ज़रा सम्भल के रहियेगा
नज़र नज़र को मारेगी तो, कातिल हमें न कहियेगा
चाल चली है सोच के हमने इस खेल में अपनी मात नहीं, ओ

पास आ के ये आपके हमें होने लगा एहसास है
दम है तो बस आपके दमसे आप ही से साँस है
बयान करें जो हाल-ए-दिल को ऐसे कोई जज़्बात नहीं, ओ

आप कहें और हम न आयें, ऐसे तो हालात नहीं
मँज़िल पे पहुँचेंगे कैसे, आपका जब तक साथ नहीं
....................................
Aap kahen aur ham na aayen-Des Pardes 1978

Saturday, 9 July 2011

बादल तो आये-दिल्लगी १९७८

राजेश रोशन ने भी और संगीतकारों की तरह लता मंगेशकर
के लिए विशेष धुनें बनायीं. कुछ गीत उनमें से ऐसे हैं जो
जनता के द्वारा ज्यादा नहीं सुने गए. धर्मेन्द्र, हेमा मालिनी
अभिनीत फिल्म 'दिल्लगी ' से एक मधुर गीत सुनवा रहे
हैं आपको. सन १९७८ में इस गीत का पदार्पण हुआ था .




गीत के बोल :

बादल तो आये लहरों के साये
ओ आने वाले पर तुम न आये
बादल तो आये लहरों के साये
ओ आने वाले पर तुम न आये

तुम ज़िन्दगी में यूँ मेरी आ कर
गुम हो गए हो ऐसे मुझको भुला कर
मैं प्यार तेरा दिल में सजा कर
बैठी हूँ कब से आस लगा कर

दुःख मेरे दिल के होंठों पे आये
ओ आने वाले पर तुम तो न आये

आवाज़ मेरी आ जाओ सुन के
रौंदो ना सपने हाय मेरे नयन के
इस पार तुमसे किसी भी जतन से
मैं राज़ अपने सारे कह दूँगी मन के

ख़ामोश रह के ये दर्द पाए
ओ आने वाले पर तुम तो न आये

बादल तो आये लहरों के साये
ओ आने वाले पर तुम तो न आये
तुम तो न आये

........................
Baadal to aaye-Dillagi 1978

Saturday, 18 June 2011

ये मेरा जीवन तेरे लिए -बाबू १९८५

आप फिल्म बाबू(१९८५) के दो गीत पहले सुन चुके हैं,
अब सुनिए किशोर का गाया फिल्म का एक और गीत।
फिल्म में राजेश खन्ना का नाम बाबू हो। वो अपना सारा
जीवन एक परिवार के लिए समर्पित कर देता है। उस
परिवार की बच्ची के साथ नायक गीत गा रहा है। फिल्म
का ये गीत भी काफी लोकप्रिय है। बोल एक बार फिर से
मजरूह के हैं और संगीत राजेश रोशन का।




गीत के बोल:


ये मेरा जीवन तेरे लिए है
ये मेरा जीवन तेरे लिए है
जीवन का सपना तेरे लिए है
माँग ले हँस के क्या चाहिए तुझे
माँग ले हँस के क्या चाहिए तुझे
मेरी तो दुनिया तेरे लिए है

ये मेरा जीवन

hurrr ha ha

डाली पे बैठी छोटी सी चिड़िया
काँधे पे मेरे नन्हीं सी गुड़िया
डाली पे बैठी छोटी सी चिड़िया
काँधे पे मेरे नन्हीं सी गुड़िया
चिड़िया से भी सुन्दर मेरी गुड़िया
चिड़िया से भी सुन्दर मेरी गुड़िया

ये मेरा जीवन तेरे लिए है
जीवन का सपना तेरे लिए है
माँग ले हँस के क्या चाहिए तुझे
मेरी तो दुनिया तेरे लिए है

ये मेरा जीवन

देखा था सपना जो ज़िन्दगी का
ये भी तो वैसा ही दिन है ख़ुशी का
देखा था सपना जो ज़िन्दगी का
ये भी तो वैसा ही दिन है ख़ुशी का
जीने का ढंग तुझसे मैने सीखा
जीने का ढंग तुझसे मैने सीखा

ये मेरा जीवन तेरे लिए है
जीवन का सपना तेरे लिए है
माँग ले हँस के क्या चाहिए तुझे
मेरी तो दुनिया तेरे लिए है

ये मेरा जीवन

मानो बदल जाए दोनों की मंज़िल
फिर भी रहेगा साथ मेरा दिल
मानो बदल जाए दोनों की मंज़िल
फिर भी रहेगा साथ मेरा दिल
चाहेंगे तो मिलना नहीं मुश्क़िल
चाहेंगे तो मिलना नहीं मुश्क़िल
ये मेरा जीवन तेरे लिए है
जीवन का सपना तेरे लिए है
माँग ले हँस के क्या चाहिए तुझे
मेरी तो दुनिया तेरे लिए है

ये मेरा जीवन
........................
Ye mera jeewan-Babu 1985

Monday, 13 June 2011

तेरे जैसा यार कहाँ-याराना १९८१

बहुत अरसे के बाद कोई फ़रमाइश आई है। चलिए एक गीत सुनते हैं
अमिताभ बच्चन अभिनीत फिल्म याराना से। दोस्ती के नाम कुर्बान
ये गीत गाया है किशोर कुमार ने। सन १९८१ की फिल्म याराना बॉक्स
ऑफिस पर भले ना चली हो इसके गीत बहुत बजे थे। दोस्त हों तो
ऐसे जो वक़्त पर काम आयें और बिना कुछ मांगे ही आपकी मदद करें
जो दोस्त की ख़ुशी में खुश ना हुआ और दुःख में दुखी ना हुआ वो
दोस्त कैसा।

एक दिलचस्प चीज़ ये है गीत में कि अमिताभ के हाथ में जो माईक है
वो खोये की बर्फी की तरह इधर उधर मुड जाता है आसानी से।




गीत के बोल:

तेरे जैसा यार कहाँ कहाँ ऐसा याराना
याद करेगी दुनिया तेरा मेरा अफसाना
तेरे जैसा यार कहाँ कहाँ ऐसा याराना
याद करेगी दुनिया तेरा मेरा अफसाना

तेरे जैसा यार कहाँ कहाँ ऐसा याराना

मेरी ज़िन्दगी सँवारी मुझको गले से लगा के
बैठा दिया फ़लक पे मुझे ख़ाक़ से उठा के
मेरी ज़िन्दगी सँवारी मुझको गले से लगा के
बैठा दिया फ़लक पे मुझे ख़ाक़ से उठा के
यारा तेरी यारी को मैने तो ख़ुदा माना
याद करेगी दुनिया तेरा मेरा अफसाना

मेरे दिल की ये दुआ है कभी दूर तू न जाए
तेरे बिना हो जीना वो दिन कभी न आए
मेरे दिल की ये दुआ है कभी दूर तू न जाए
तेरे बिना हो जीना वो दिन कभी न आए
तेरे संग जीना यहां तेरे संग मर जाना
याद करेगी दुनिया तेरा मेरा अफसाना
.....................................
Tere jaisa yaar kahan-Yaarana 1981

ऐ हवा मेरे संग चल-बाबू १९८५

आपको फिल्म बाबू(राजेश खन्ना वाली) का एक गीत पहले
सुनवाया था। अब सुनिए रति अग्निहोत्री के ऊपर फिल्माया गया
लता मंगेशकर का गाया एक गीत। फिल्म रिलीज़ के वक़्त और
उसके २-३ साल बाद तक ये गीत बहुत बजा था। गाँव और गाँव
जैसे शहरों के मेले में नौटंकी में इस गीत के ऊपर स्कूल के बच्चों
वाली पी. टी. कसरत जैसी मुद्राओं में नौटंकी की काबिल डांसर्स
नृत्य किया करती थीं। वैसे इस गीत में नायिका जो नृत्य कर रही
है वो थोड़ा ही बेहतर है। गीत की ताल और गीत के फिल्मांकन
में ज्यादा तादतम्य नहीं है लेकिन बाकी मसाला काफी है गीत
में आपको बहलाने के लिए। ढप ढप और टपर टपर की ताल
राजेश रोशन के संगीत की विशेषता है। दीपक पाराशर नाम
के कलाकार रति अग्निहोत्री के साथ आपको परदे पर दिखाई
देंगे। नृत्य देख के मुझे कुछ भ्रष्ट भाषा के शब्द याद आ जाते हैं
- उच्कंती, कूदंती, बल्खंती और नाचंती।

गीत मजरूह सुल्तानपुरी का लिखा हुआ है इसलिए आपको इसके
बोल सुहाने लगेंगे। मजरूह के ज़माने तक दिल में हलचल ही मचा
करती थी आजकल के दौर में होने लगी है- सन सनन साँय साँय।





गीत के बोल:

ऐ हवा मेरे संग संग चल
मेरे दिल में हुई हलचल

ऐ हवा मेरे संग संग चल
मेरे दिल में हुई हलचल

कहे दरिया का पानी कल कल
तुझे आस मिलन की हर पल

ऐ हवा मेरे संग संग चल
मेरे दिल में हुई हलचल

रुक ना सकूं मैं दौड़ी आऊँ
फिर कुछ सोच के मैं घबराऊँ
रुक ना सकूं मैं दौड़ी आऊँ
फिर कुछ सोच के मैं घबराऊँ

ऐ हवा मेरे संग संग चल
मेरे दिल में हुई हलचल

तूने कैसा जादू किया है
बिन डोर के मुझे बांध दिया है
तूने कैसा जादू किया है
बिन डोर के मुझे बांध दिया है

ऐ हवा मेरे संग संग चल
मेरे दिल में हुई हलचल

कठपुतली सी नाच रही हूँ
कैसे कहूं तुझे ढूंढ रही हूँ
कठपुतली सी नाच रही हूँ
कैसे कहूं तुझे ढूंढ रही हूँ

ऐ हवा मेरे संग संग चल
मेरे दिल में हुई हलचल

कहे दरिया का पानी कल कल
तुझे आस मिलन की हर पल

ऐ हवा मेरे संग संग चल
मेरे दिल में हुई हलचल
...............................
Ae hawa mere sang sang chal-Babu 1985

Sunday, 12 June 2011

मैं कौन सा गीत सुनाऊँ-दिल्लगी १९७८

एक फुरसती ज़माना था जब जनता नदी नाले के किनारे बैठा करती,
गप शाप मारती और गीत गाती और सुनती। उस दौर की कल्पना
करना भी शायद आधुनिक युग में affordable नहीं है। साफ़ सुथरी
फ़िल्में बनाने के लिए विख्यात बासु चटर्जी की इस फिल्म ने
ज्यादा बिज़नेस नहीं किया मगर जनता द्वारा सराही अवश्य
गई। ये जी जनाब सराहने वाली जनता है ना, उसके बलबूते पर
बॉलीवुड की रोजी रोटी नहीं चलती। वो चलती है जब सिनेमा हॉल
की आगे की सीट से पीछे की सीट तक जगह ना बची हो। जिसे हम
चवन्नी क्लास कहते हैं, कई नामचीन नायकों की रोजी रोटी वहीँ से
निकल के आई। कभी कभार आंशिक कडकी के चलते हम भी उस
क्लास का आनंद उठा चुके हैं।

बासु की खूबी ये है कि उन्होंने हमारे इर्द गिर्द के और आम जीवन
के सामान्यतया ना छुए जाने वाले पहलुओं को बहुत सहजता से
प्रस्तुत किया परदे पर, दर्शक को यही लगा जैसे वो रोजमर्रा की
कोई आम घटना से रूबरू हो रहा हो। बाकी के निर्देशक अवास्तविकता
को वास्तविकता में तब्दील करने का प्रयत्न करते रहे और बासु चटर्जी
वास्तविकता को सरलता से प्रस्तुत करने में। शत प्रतिशत वास्तविक
हम किसी भी फ़िल्मी कथानक को नहीं कह सकते क्यूंकि नाटकीयता
आवश्यक तत्त्व है मंच और फिल्मों का। फर्क करना होता है हमें तो
बस नाटकीयता, जीवंत नाटकीयता, अति नाटकीयता, फूहड़ता और
मूढ़ता में । कल्पनाशीलता जब इनमे से किसी भी एक तत्त्व से चिपक
जाती है तो उसी तत्त्व विशेष को बढावा देती है। कल्पनाशीलता निर्देशक
के पास होना पहली अनिवार्य शर्त है, उसके बाद नंबर आता है कलाकारों
का। कल्पनाशीलता प्रस्तुतीकरण को बेहतर बनाने का काम करती है।

प्रस्तुत गीत में आपको जो कलाकार दिखाई देंगे उनके नाम इस
प्रकार से हैं-धर्मेन्द्र, असरानी, हेमा मालिनी और मिठू मुखर्जी।
पांचवे शख्स को शायद आप ना पहचान पायें तो आपको एक क्लू
देता हूँ-महाभारत सीरियल में मामा शकुनि की भूमिका निभाने
वाला कलाकार।



गीत के बोल:

मैं कौन सा गीत सुनाऊँ
क्या गाऊं जो पिया बस जाये
तेरे तन मन में
खिल जाएँ सोयी कलियाँ, हाय कलियाँ
और बहारें आयें सूनी बगियाँ में

ये कैसे अचानक बिना कोई आहट
चले आये हो तुम मेरी ज़िन्दगी में
तुम्हें आज पा कर मैं सब कुछ भुला कर
मगन हो के डूबी हुई हूँ ख़ुशी में

इतने ही रंग सलोने, हाय सलोने
भर गये हैं मेरे खाली सावन में

मैं कौन सा गीत सुनाऊँ
क्या गाऊं जो पिया बस जाये
तेरे तन मन में

कभी तुम सहारा बनोगे हमारा
मैं ये बात कल तक नहीं मानती थी
मगर आज कैसे ये लगता है जैसे
मैं हर जनम में तुम्हें जानती थी
लगता है सारी दुनिया, सारी दुनिया
भर गई है जैसे सज के कण कण में

मैं कौन सा गीत सुनाऊँ
क्या गाऊं जो पिया बस जाये
तेरे तन मन में
खिल जाएँ सोयी कलियाँ, हाय कलियाँ
और बहारें आयें सूनी बगियाँ में

.....................................
Main kaun sa geet sunaaon-Dillagi 1978

Saturday, 29 January 2011

तुमसे नहीं पहचान मेरी-एक ही रास्ता १९७७

आइये विनोद मेहरा पर फिल्माया गया एक और गीत सुनें।
ये है फिल्म एक ही रास्ता से। एक बच्चे से हीरो मुखातिब
है और गीत के माध्यम से अपना रिश्ता मजबूत करने का
प्रयत्न करता दिखलाई पढ़ रहा है। वर्मा मालिक के लिखे
गीत को गाया है रफ़ी ने और इसकी तर्ज़ बनाई है रोशन
पुत्र राजेश ने। ये एक कम सुना गया गीत है इसलिए इसको
पहले सुनने का प्रयास करते हैं। फिल्म 'एक ही रास्ता' के बाकी
गीत हम सुनेंगे आगे.....





गीत के बोल:

तुमसे नहीं पहचान मेरी लेकिन ऐसे लगता है
पहले भी किसी युग में अपना साथ रहा हो जैसे

तुमसे नहीं पहचान मेरी लेकिन ऐसे लगता है
पहले भी किसी युग में अपना साथ रहा हो जैसे

तुझे देख के भूली बिसरी तस्वीर उभर आती है
याद कि धुंधली सी परछाई दिल में उतार जाती है
दोनों को ना याद हो, हो सकता है ऐसे
पहले भी किसी युग में अपना साथ रहा हो जैसे

तुझसे मेरा क्या नाता जब समझ नहीं पाता हूँ
डूब के मैं गहराईयों में सोच के ये रह जाता हूँ
किसी जनम में तूने कोई वचन लिया हो जैसे
पहले भी किसी युग में अपना साथ रहा हो जैसे

तुमसे नहीं पहचान मेरी लेकिन ऐसे लगता है
पहले भी किसी युग में अपना साथ रहा हो जैसे
......................................
Tumse nahin pehchan meri-Ek hi rasta 1977

Monday, 10 January 2011

यार तेरे सब नाच रहे-शाका १९८१

सर्दी का मौसम है आपके जोड़ जाम हो रहे होंगे। आइये आपको
नचाने वाला गीत सुनाएँ। इस गीत पर आप कुर्सी या सोफे पर बैठे
बैठे हिल कर भी नाच सकते हैं। फिल्म का नाम है शाका और परदे
पर इस गीत को कोरस के साथ मुख्य रूप से गाया है शत्रुघ्न सिन्हा
ने। गायक कलाकार हैं मोहम्मद रफ़ी। गीत का संगीत तैयार किया
है राजेश रोशन ने और ये गीत आपने शादी ब्याह के अवसर पर ज़रूर
एक आध बार सुना होगा, मेरा अनुमान है। गीत वर्मा मालिक साहब ने
लिखा है।

दूल्हे के भेस में हैं प्रेम चोपड़ा , इससे आप ये अंदाज़ा ना लगा लें कि ये
बदमाशों की बारात है। वैसे एक बात तो माननी पड़ेगी इस भेस में
प्रेम चोपड़ा कुछ शरीफ से नज़र आ रहे हैं।



गीत के बोल:

यार तेरे सब नाच रहे हैं
यार तेरे सब नाच रहे
तेरी सज के चली बारात
तेरे मैं सदके जावां

होए होए होए होए
यार तेरे सब नाच रहे हैं
होए होए होए होए
यार तेरे सब नाच रहे
तेरी सज के चली बारात
तेरे मैं सदके जावां
होए होए होए होए

हो ओ ओ ओ,
बरसों बाद मिल है हमको
बरसों बाद मिल है हमको
किस्मत वाली रात, होए

बरसों बाद मिल है हमको
किस्मत वाली रात
तेरे मैं सदके जावां

हो, यार तेरे सब नाच रहे
तेरी सज के चली बारात
तेरे मैं सदके जावां

साफ़े का रंग मतवाला
तेरे कुर्ते का रंग मतवाला
और सेहरा करे इशारे, हे ऐ ऐ

आज ही पूरे होंगे अब दिल के अरमान तुम्हारे
कुछ न कुछ तो हो के रहेगा
कुछ न कुछ तो हो के रहे
जब होगी दिल की बात, होय
कुछ न कुछ तो हो के रहेगा
जब होगी दिल की बात
तेरे मैं सदक़े जावाँ

यार तेरे सब नाच रहे तेरी सज के चली बारात
तेरे मैं सदक़े जावाँ

दूल्हे का मेरा रब रखवाला
दूल्हे का मेरा रब रखवाला
ये चला है दुल्हन लाने
दूल्हे के दिल में क्या-क्या ये बात न कोई जाने
जिसके लिये बेचैन है तू
जिसके लिये बेचैन है तू वो बिगड़ी बनेगी बात, होय
जिसके लिये बेचैन है तू वो बिगड़ी बनेगी बात
तेरे मैं सदक़े जावाँ

यार तेरे सब नाच रहे तेरी सज के चली बारात
तेरे मैं सदक़े जावाँ

फिर न मिले तुझे ऐसी घड़ी
फिर न मिले तुझे ऐसी घड़ी
जी भर के ख़ुशी मना ले
कोई हसरत रहे ना बाकी ऐसा रंग जमा ले, होय
अगर ये मौक़ा निकल गया तो
अगर ये मौक़ा निकल गया तो मलता रहेगा हाथ
होय
अगर ये मौक़ा निकल गया तो मलता रहेगा हाथ
तेरे मैं सदक़े जावाँ
यार तेरे सब नाच रहे हैं
होय होय होय होय

यार तेरे सब नाच रहे तेरी सज के चली बारात
तेरे मैं सदक़े जावाँ
यार तेरे सब नाच रहे तेरी सज के चली बारात
तेरे मैं सदक़े जावाँ

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Yaar tere sab nach rahe hain-Shaaka 1981

Tuesday, 23 November 2010

ऐ दीवाने दिल-तराजू १९९७

ये गीत क्यूँ पसंद आया-सीधी वजह इसमें कुछ नई प्रकार
की ध्वनियाँ। दुबला पतला हीरो और धागे जैसी पतली हीरोइन
कपडे का पूरा थान पहने आपको इस गीत में १००-२०० की भीड़
के साथ डोलते दिखेंगे।

यह गीत है तराजू फिल्म का। इस युगल गीत को गाया है
कुमार सानू और अलका याग्निक ने। समीर के बोलों पर धुन
बनाई है राजेश रोशन ने या यूँ कहिये पहले से तैयार धुन पर
बोल लिखे गए हैं। इस गीत को प्रायमरी स्कूल के मास्टर
अ आ इ ई ऊ ऊ........ सीखने के लिए बखूबी इस्तेमाल कर
सकते हैं। कोरस की जो आवाज़ है वो 'ऐ' और' ई' के बीच की
ध्वनि निकाल रही है, मैंने 'ई' को चुना है, क्षमा चाहूँगा।





गीत के बोल:

ई ई ई ई, ई ई ई ई, ई ई ई ई
ऐ ऐ ऐ ऐ
ई ई ई ई, ई ई ई ई, ई ई ई ई
ऐ ऐ ऐ ऐ
ई ई ई ई, ई ई ई ई, ई ई ई ई
ae ae ae ae
ई ई ई ई, ई ई ई ई, ई ई ई ई
ऐ ऐ ऐ ऐ

ओऊ, ऊह

ऐ दीवाने दिल कर दी क्या मुश्किल
ऐ दीवाने दिल कर दी क्या मुश्किल
इश्क में ऐसा लगे कि मेरी जान निकली जाए

ई ई ई ई, ई ई ई ई, ई ई ई ई
ऐ ऐ ऐ ऐ
ई ई ई ई, ई ई ई ई, ई ई ई ई
ऐ ऐ ऐ ऐ

ऐ दीवाने दिल कर दी क्या मुश्किल
ऐ दीवाने दिल कर दी क्या मुश्किल
इश्क में ऐसा लगे कि मेरी जान निकली जाए

ई ई ई ई, ई ई ई ई, ई ई ई ई
ऐ ऐ ऐ ऐ
ई ई ई ई, ई ई ई ई, ई ई ई ई
ऐ ऐ ऐ ऐ

जब से दखा है तुझपे मरती हूँ
मैं तन्हाई में आहें भारती हूँ
जब से दखा है तुझपे मरती हूँ
मैं तन्हाई में आहें भारती हूँ

पहले ना था मैं दीवाना
चाहत क्या है अब है जाना
प्यार तो ऐसा दर्द है धीरे धीरे तडपाये

ई ई ई ई, ई ई ई ई, ई ई ई ई
ऐ ऐ ऐ ऐ
ई ई ई ई, ई ई ई ई, ई ई ई ई
ऐ ऐ ऐ ऐ

ऐ दीवाने दिल कर दी क्या मुश्किल
इश्क में ऐसा लगे कि मेरी जान निकली जाए

जागे जागे से, सोये सोये से
हम तो रहते हैं खोये खोये से
हाँ, जागे जागे से, सोये सोये से
हम तो रहते हैं खोये खोये से
उलझे गेसू, बिखरा काजल
सारे कहते हैं हम हैं पागल
दीवाने हम, दीवाने हैं कौन हमें समझाए

ऐ दीवाने दिल कर दी क्या मुश्किल
ऐ दीवाने दिल कर दी क्या मुश्किल
इश्क में ऐसा लगे कि मेरी जान निकली जाए

ई ई ई ई, ई ई ई ई, ई ई ई ई
ऐ ऐ ऐ ऐ
ई ई ई ई, ई ई ई ई, ई ई ई ई
ऐ ऐ ऐ ऐ
ई ई ई ई, ई ई ई ई, ई ई ई ई
ऐ ऐ ऐ ऐ

ऐ ऐ ऐ ऐ, ऐ ऐ ऐ ऐ, ऐ ऐ ऐ ऐ
ऐ ऐ ऐ ऐ
ई ई ई ई, ई ई ई ई, ई ई ई ई
ऐ ऐ ऐ ऐ
ई ई ई ई, ई ई ई ई, ई ई ई ई
ऐ ऐ ऐ ऐ
ई ई ई ई, ई ई ई ई, ई ई ई ई
ऐ ऐ ऐ ऐ

Saturday, 20 November 2010

शाम हुई चढ़ आई रे बदरिया-आखिर क्यों १९८५

'क' शब्द से राकेश रोशन का पुराना नाता लगता है ।
इस फिल्म के नाम में भी एक शब्द है जो 'क' से
शुरू होता है। उनके ससुर जे. ओमप्रकाश को 'अ'
अक्षर से विशेष लगाव था। इस फिल्म के निर्देशक
जे. ओमप्रकाश ही हैं। ये एक सफल फिल्म है। इसके
गीत भी फुरसत और तबियत से तैयार किये गए हैं ।
गीत के बोल, धुन और स्मिता का अभिनय सभी कुछ
लाजवाब है। स्मिता पाटिल ने भारतीय नारी की छबि
खूबसूरत ढंग से निखारी थी हिंदी फिल्मों में। "कोई जब
तुम्हारा ह्रदय तोड़ दे" , "फूल तुम्हे भेजा है ख़त में"
वाले इन्दीवर साहब के बोल हैं इसमें और सुर दिए हैं
स्वर सम्राज्ञी लता मंगेशकर ने।





गीत के बोल :

आ आ आ, आ आ आ, आ आ
हूँ ऊं ऊं ऊं ऊं ऊं ऊं ऊं ऊं ऊं ऊं ऊं

शाम हुई चढ़ आई रे बदरिया
शाम हुई चढ़ आई रे बदरिया
अबहूँ न आये मोरे श्याम संवरिया
शाम हुई चढ़ आई रे बदरिया
अबहूँ न आये मोरे श्याम संवरिया
शाम हुई चढ़ आई रे बदरिया
शाम हुई चढ़ आई रे बदरिया

हो ओ ओ ओ
हा आ आ आ

अनछुए होंठ मेरे खोये खोये नैन मेरे
गूंजते हैं पर्णों में मधुर मधुर बोल तेरे
मेरे साथ बैन करे, हो
मेरे साथ बैन करे मोरी अटरिया

शाम हुई चढ़ आई रे बदरिया
शाम हुई चढ़ आई रे बदरिया

सोलह बरस बीते गिन गिन रतियाँ
पी से मिलन चली संग की सखियाँ
अब तो ले लो पिया, हो
अब तो ले लो पिया आ के खबरिया

शाम हुई चढ़ आई रे बदरिया

प् नि सा रे नि सा रे नि सा रे नि ध प्
आ आ आ आ आ आ आ आ आ

शाम हुई चढ़ आई रे बदरिया
अबहूँ न आये मोरे श्याम संवरिया
शाम हुई चढ़ आई रे बदरिया
शाम हुई चढ़ आई रे बदरिया
 
 
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