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Sunday, 28 August 2011

इक बात सुनी है चाचाजी-नरम गरम १९८१

हिंदी फिल्मों में अभिनेता-गायक, अभिनेत्री-गायिका बहुत हुए हैं. समय

समय पर अनियमित गायक अभिनेताओं की सेवाएं भी ली गयीं. कुछ अलग

हट के दिखने सुनाने की कोशिश में भी कभी ऐसे प्रयोग हुए. किसी ने सोचा

भी न होगा कि शत्रुघ्न सिन्हा की खरखरी आवाज़ में कोई गीत सुनने को मिलेगा.

ये करिश्मा हुआ फिल्म नरम गरम में जिसमें उन्होंने सुषमा श्रेष्ठ के साथ एक

युगल गीत गाया. संगीतकार हैं आर डी बर्मन जिन्होंने ये करिश्मा करवाया

गुलज़ार के बोलों पर. इसमें संभावित खाते पीते घर से आने वाली दुल्हन को

चाची "बुलडोज़र" का संबोधन दिया जा रहा है. गीत में दिख रही दुबली पतली

कन्या का नाम किरण वैराले है और उसने फिल्म में शत्रुघ्न की भतीजी का रोल

किया है.







गीत के बोल:





हाँ

इक बात सुनी है चाचाजी बतलाने वाली है

इक बात सुनी है चाचाजी बतलाने वाली है

अरे घर में एक अनोखी चीज़ आने वाली है

हाँ रे भैया ने फिर कोई लड़की देखी है

तेरी चाची- बुलडोज़र, आने वाली है



इक बात सुनी है चाचाजी बतलाने वाली है



दिन और रात की खिट-पिट होगी होर्न बजायेगी

अच्छे ख़ासे घर को वो गैराज बनायेगी

दिन और रात की खिट-पिट होगी होर्न बजायेगी

अच्छे ख़ासे घर को वो गैराज बनायेगी

अरे आप को ऐं वैं चाची से खतरा लगता है

शादी हो जाये तो फिर देखें कैसा लगता है

अरे आयेगी ही अब तो वो जो आने वाली है



इक बात सुनी है चाचाजी बतलाने वाली है

हाँ घर में एक अनोखी चीज़ आने वाली है

हाँ रे भैया ने फिर कोई लड़की देखी है

तेरी चाची- बुलडोज़र, आने वाली है



जाने अब क्या होगा वो क्या हाल बनायेगी

मूँह से खाता था वो नाकों चने चबवायेगी

जाने अब क्या होगा वो क्या हाल बनायेगी

मूँह से खाता था वो नाकों चने चबवायेगी

गोभी आलू बने तो कहना आलू गोभी दे

हाल न खाना माल न खाना, खाना बाकी जो भी दे

अरे आयेगी ही अब तो वो जो आने वाली है



इक बात सुनी है चाचाजी बतलाने वाली है

हाँ घर में एक अनोखी चीज़ आने वाली है

हाँ रे भैया ने फिर कोई लड़की देखी है

तेरी चाची- बुलडोज़र, आने वाली है

..............................................

Ek baat suni hai chacha ji-Naram Garam 1981

Monday, 1 August 2011

तेरा आसरा है एक तेरा ही सहारा-धुआं १९८१

आज आपको एक भक्ति गीत सुनवाते हैं फिल्म धुन से जो
सन १९८१ की फिल्म है. मजरूह के लिखे, लता मंगेशकर के
गाये और राहुल देव बर्मन के स्वरबद्ध इस गीत को फिल्माया
गया है राखी पर. धुआं एक सस्पेंस फिल्म है जो कम
चलने वाली फिल्मों की श्रेणी में आती है.





गीत के बोल:

तेरा आसरा है एक तेरा ही सहारा
तेरा आसरा है एक तेरा ही सहारा
तू ही जो नहीं कौन है फिर हमारा
तेरा आसरा है एक तेरा ही सहारा
तेरा आसरा है

हो, तू जलसागर हमको बहा ले
अपनी ही लहरों में उठा के,
हो ओ ओ ओ ओ ओ
तेरे किनारे कब से खड़े हैं
जनम जनम के प्यासे
ऐसी बुझा के लगे न दुबारा

तेरा आसरा है एक तेरा ही सहारा
तेरा आसरा है एक तेरा ही सहारा
तू ही जो नहीं कौन है फिर हमारा
तेरा आसरा है

कैसी सभा ये तूने सजाई
सब एक दूजे से पराये
हो ओ ओ ओ ओ ओ
तू चाहे देखे सबका तमाशा
हमसे तो देखा न जाए
क्या तेरे प्यार का यही फल है सारा

तेरा आसरा है एक तेरा ही सहारा
तेरा आसरा है एक तेरा ही सहारा
तू ही जो नहीं कौन है फिर हमारा
तेरा आसरा है एक तेरा ही सहारा
तेरा आसरा है
...................................
Tera aasra hai-Dhuan 1981

Thursday, 14 July 2011

मारा ठुमका बदल गयी चाल -क्रांति १९८१

आपको ठुमकेदार गीत सुनवाते हैं एक. फिल्म का नाम है क्रांति.
अपने समय की बड़ी हिट फिल्म थी ये. गीत भी इसके सुपर हिट
थे. गीत फिल्माया गया है परवीन बोबी पर. गीत लिखा है प्रसिद्द
गीतकार संतोष आनंद ने जिनकी पहचान देश भक्ति गीतों के लिए
ज्यादा है. उन्होंने मनोज कुमार की फिल्मों में ही गीत ज्यादा लिखे
हैं.

गीत में दिखने वाले कुछ और कलाकारों के नाम इस प्रकार से हैं-
प्रदीप कुमार, धीरज कुमार, शशिकला और टॉम आल्टर. बाकी के
अगर मैं पहचान पाता तो फिल्म जगत वाले मुझे ऑनररी पी एच डी
दे देते ना.




गीत के बोल:

पिला दे साकी मिला के हमको
शराब आधी गुलाब आधा, हिक
मिलेगा रोज ये हश्र तुम्हें भी
हजाब आधा सबाब आधा

मारा ठुमका, आ
मारा ठुमका बदल गयी चाल मितवा
देखो देखो रे हमरा कमाल मितवा
देखो देखो रे हमरा कमाल मितवा

मारा ठुमका बदल गयी चाल मितवा
देखो देखो रे हमरा कमाल, हिक
देखो देखो रे हमरा कमाल मितवा

मैं चिड़ी रे चिड़ी देख मैं तो उडी
मैं चिड़ी रे चिड़ी देख मैं तो उडी
अपने बाबुल की मैं तो अकेली कुडी
आशियाना बना ले मुझे घर में बसा ले
आशियाना बना ले मुझे घर में बसा ले
मेरा क्या है मैं जा के मुडी न मुडी
मुडी न मुडी, मुडी न मुडी
मार डालूंगी खुद को संभाल मितवा
देखो देखो रे हमरा कमाल मितवा
देखो देखो रे हमरा कमाल मितवा

मारा ठुमका, आ
मारा ठुमका बदल गयी चाल मितवा
देखो देखो रे हमरा कमाल मितवा

कोई आये भी न कोई जाए भी ना
कोई आये भी न कोई जाए भी ना
आज से अपना नाटक शुरू हो गया
पहले लैला मरेगी फिर मजनू मरेगा
पहले लैला मरेगी फिर मजनू मरेगा
फिर दोनों को जिंदा किया जायेगा,
किया जायेगा, किया जायेगा
नीला अम्बर मैं कर दूँगी लाल मितवा
देखो देखो रे हमरा कमाल मितवा
.................................
Maara thumka-Kranti 1981

Monday, 27 June 2011

कौन किसी को बांध सका-कालिया १९८१

कुछ चीज़ों का कुदरती साथ होता है, कुछ का होता अदरकी साथ और
कुछ का हम जबरन बना दिया करते हैं। चोली दामन का साथ एक
जग-जाहिर उदाहरण है। बम्बई के वड़ापाव की ही बात ली जाये। बिना
वडे का पाव या बिना पाव का वडा बम्बई, जिसे हम अब मुंबई कहते हैं,
के निवासियों को थोड़ा अटपटा सा लगता है। ये तो क्षेत्र विशेष का
उदाहरण हो गया।

एक उदाहरण और-कुछ लोगों का मानना है कि मौसंबी के जूस में
ग्लूकोज़ का होना ज़रूरी है। एक ज़माना था जब लगभग हर बीमार
को मौसंबी के रस में ग्लूकोज़ मिला के दिया जाता। अब जो जनता
शौकिया तौर पर बाज़ार में जा कर जूस पीती उसे ग्लूकोज़ नहीं
मिलता तो पूछती-इसमें गुल्लू-कोज़ नहीं मिलाया ?

फिल्मों में भी ऐसे आवश्यक तत्त्व होते हैं। आज आपको अमिताभ की
फिल्म का एक गीत सुनवाते हैं इसमें जो कलाकार परदे पर गीत गा रहा
है उसका नाम है-राम शेट्टी। ये जनाब आपको ८० के दशक की लगभग
हर उस फिल्म में जिसमें अमिताभ ने काम किया है, मिल जायेंगे।

एक समय था जब अमिताभ की फिल्मों में महमूद होते, कभी उनकी
फिल्मों में मुकरी होते। आज आप महसूस करेंगे उनके साथ दो शख्सों
की उपस्थिति-परेश रावल और शरद सक्सेना। समय समय पर ऐसे
आवश्यक तत्वों में बदलाव होता रहा। अमिताभ के पूरे फ़िल्मी
कैरियर को अगर ४ खण्डों में बांटा जाये तो हर दौर की कुछ अलग
विशेषताएं आपको मिलेंगी। इसपर विस्तृत चर्चा फिर कभी।

गीत सुना जाये जिसे लिखा है मजरूह सुल्तानपुरी ने और धुन बनाई
राहुल देव बर्मन ने। गायक कलाकार हैं मोहम्मद रफ़ी।



गीत के बोल:

कौन किसी को बांध सका
हाँ, कौन किसी को बाँध सका
सय्याद तो एक दीवाना है
तोड़ के पिंजरा एक न एक दिन
पंछी को उड़ जाना है

कौन किसी को बांध सका
सय्याद तो एक दीवाना है
तोड़ के पिंजरा एक न एक दिन
पंछी को उड़ जाना है

अंगड़ाई ले कर के जागी है नौजवानी
अंगड़ाई ले कर के जागी है नौजवानी
सपने नये हैं और ज़ंजीर है पुरानी
पहरेदार फ़ांके से
बरसो राम धड़ाके से
होशियार भई सब होशियार
रात अंधेरी, रुत बरखा और
ग़ाफ़िल सारा ज़माना है
तोड़ के पिंजरा एक न एक दिन
पंछी को उड़ जाना है

कौन किसी को बांध सका
सय्याद तो एक दीवाना है
तोड़ के पिंजरा एक न एक दिन
पंछी को उड़ जाना है

हो ओ ओ ओ हो ओ हो ओ
खिड़की से रुकता है झोंका कहीं हवा का ?
हिल जायें दीवारें ऐसा करो धमाका
खिड़की से रुकता है झोंका कहीं हवा का ?
हिल जायें दीवारें ऐसा करो धमाका
बोले ढोल ताशे से
बरसो राम धड़ाके से
होशियार भई सब होशियार
देख के भी न, कोई देखे
ऐसा कुछ रंग जमाना है

तोड़ के पिंजरा, एक न एक दिन, पंछी को उड़ जाना है
कौन किसी को बाँध सका, सय्याद तो इक दीवाना है
तोड़ के पिंजरा, एक न एक दिन, पंछी को उड़ जाना है

कह दो शिकारी से फंदा लगा के देखे
कह दो शिकारी से फंदा लगा के देखे
अब जिसमें हिम्मत हो रस्ते में आ के देखे
निकला शेर हाँके से
बरसो राम धड़ाके से
होशियार भई सब होशियार
जाने वाले को जाना है और
सीना तान के जाना है
तोड़ के पिंजरा एक न एक दिन
पंछी को उड़ जाना है

कौन किसी को बांध सका
सय्याद तो एक दीवाना है
तोड़ के पिंजरा एक न एक दिन
पंछी को उड़ जाना है

कौन किसी को बांध सका
सय्याद तो एक दीवाना है
तोड़ के पिंजरा एक न एक दिन
पंछी को उड़ जाना है
................................
Kaun kisi ko bandh saka-Kaalia 1981

Sunday, 19 June 2011

दुःख सुख की हर एक माला-कुदरत १९८१

कुछ काम अधूरे ही रह जाते हैं। फिल्म संगीत क्षेत्र में भी ऐसे कुछ
वाकये हैं। रफ़ी का गाया ये गीत केवल फिल्म के साउंड ट्रैक पर ही
उपलब्ध है। फिल्म के एल पी रेकोर्ड पर आपको ये गीत नए गायक
चंद्रशेखर गाडगीळ की आवाज़ में मिलेगा। रफ़ी के कुछ अंतिम गीतों
में से एक है और गीत में कुछ अजीब सी कशिश है और जब भी इसको
सुनो, ये गीत मस्तिष्क में उथल पुथल मचा देता है। मजरूह के लिखे
गीत की धुन तैयार की है राहुल देव बर्मन ने और इस फिल्म का शीर्षक
गीत चार हिस्सों में पार्श्व में बजता है।






गीत के बोल:

दुःख सुख की हर एक माला
कुदरत ही पिरोती है
दुःख सुख की हर एक माला
कुदरत ही पिरोती है
हाथों की लकीरों में
ये जागती है सोती है

दुःख सुख की हर एक माला
कुदरत ही पिरोती है

यादों की शमा ये बने
भूले नज़रों में कभी
आने वाले कल पे हँसे
खिलती बहारों में कभी
एक हाथ में अँधियारा
एक हाथ में ज्योति है

दुःख सुख की हर एक माला
कुदरत ही पिरोती है

आहों के ज़नाजे दिल में
आँखों में चिताएं गम की
उड़ गई आस दिल से
चली वो हवाएं गम की
तूफ़ान के सीने में ये
चैन से सोती है

दुःख सुख की हर एक माला
कुदरत ही पिरोती है

खुद को छुपाने वालों का
पल पल ये पीछा ये करे
सजा देती है ये ऐसी
तन मन छलनी करे
फिर दिल का हर एक घाव
अश्कों से ये धोती है

दुःख सुख की हर एक माला
कुदरत ही पिरोती है
हाथों की लकीरों में
ये जागती है सोती है
दुःख सुख की हर एक माला
कुदरत ही पिरोती है
...........................
Dukh sukh ki har ek maala-Kudrat 1981

Monday, 13 June 2011

तेरे जैसा यार कहाँ-याराना १९८१

बहुत अरसे के बाद कोई फ़रमाइश आई है। चलिए एक गीत सुनते हैं
अमिताभ बच्चन अभिनीत फिल्म याराना से। दोस्ती के नाम कुर्बान
ये गीत गाया है किशोर कुमार ने। सन १९८१ की फिल्म याराना बॉक्स
ऑफिस पर भले ना चली हो इसके गीत बहुत बजे थे। दोस्त हों तो
ऐसे जो वक़्त पर काम आयें और बिना कुछ मांगे ही आपकी मदद करें
जो दोस्त की ख़ुशी में खुश ना हुआ और दुःख में दुखी ना हुआ वो
दोस्त कैसा।

एक दिलचस्प चीज़ ये है गीत में कि अमिताभ के हाथ में जो माईक है
वो खोये की बर्फी की तरह इधर उधर मुड जाता है आसानी से।




गीत के बोल:

तेरे जैसा यार कहाँ कहाँ ऐसा याराना
याद करेगी दुनिया तेरा मेरा अफसाना
तेरे जैसा यार कहाँ कहाँ ऐसा याराना
याद करेगी दुनिया तेरा मेरा अफसाना

तेरे जैसा यार कहाँ कहाँ ऐसा याराना

मेरी ज़िन्दगी सँवारी मुझको गले से लगा के
बैठा दिया फ़लक पे मुझे ख़ाक़ से उठा के
मेरी ज़िन्दगी सँवारी मुझको गले से लगा के
बैठा दिया फ़लक पे मुझे ख़ाक़ से उठा के
यारा तेरी यारी को मैने तो ख़ुदा माना
याद करेगी दुनिया तेरा मेरा अफसाना

मेरे दिल की ये दुआ है कभी दूर तू न जाए
तेरे बिना हो जीना वो दिन कभी न आए
मेरे दिल की ये दुआ है कभी दूर तू न जाए
तेरे बिना हो जीना वो दिन कभी न आए
तेरे संग जीना यहां तेरे संग मर जाना
याद करेगी दुनिया तेरा मेरा अफसाना
.....................................
Tere jaisa yaar kahan-Yaarana 1981

Sunday, 5 June 2011

जहाँ तेरी ये नज़र है-कालिया १९८१

फिल्म कालिया सन १९८१ की फिल्म है। उस दौर में अमिताभ को किशोर
कुमार के गीत बहुत मिले परदे पर होंठ हिलाने के लिए। ये जोड़ी जनता को
पसंद थी तो अधिकतर निर्देशक किशोर कुमार से ही अमिताभ वाले गाने
गवाते।

फिल्म कालिया का ये गीत सबसे ज्यादा लोकप्रिय गीत है। एक पार्टी में
ये गीत गाया जा रहा है और किसी जमेस बोंड की फिल्म माफिक सुरंग
आपको इस गीत में दिखाई देगी। फिल्म के निर्देशक टीनू आनंद हैं। फिल्म
व्यावसायिक दृष्टि से बहुत सफल नहीं हुयी। गीत मजरूह सुल्तानपुरी की
कलम से निकला है तो संगीत राहुल देव बर्मन की सांगीतिक घुड्शाला से।

अब तो आप समझ ही गये होंगे कि नज़र किधर है-उन मोहतरमा के हार
पर जिनका हाथ पकड़ कर खलनायक अमजद खान नृत्य शुरू करते हैं।



गीत के बोल:

हे हे
धीम फटा फट धिन्गरी पका
पका का का का का का का
धीम फटा फट धिन्गरी पका
पका का का का का का का

जहाँ तेरी ये नज़र है मेरी जान मुझे खबर है
जहाँ तेरी ये नज़र है मेरी जान मुझे खबर है
बच ना सका कोई आये कितने
लम्बे हैं मेरे हाथ इतने
देख इधर यार ध्यान किधर है
अरे देख इधर यार ध्यान किधर है
जहाँ तेरी ये नज़र है मेरी जान मुझे खबर है

क्यूँ नहीं जानी तू ये समझता
काम नहीं ये है तेरे बस का
कुक डू कू कू

क्यूँ नहीं जानी तू ये समझता
काम नहीं ये है तेरे बस का
होश में आ जा ध्यान किधर है
अरे, होश में आ जा ध्यान किधर है

जहाँ तेरी ये नज़र है मेरी जान मुझे खबर है

मेरी तरफ जो उठा है तन के
कट के वही हाथ गिरा बदन से
अरे मेरी तरफ जो उठा है तन के
कट के वही हाथ गिरा बदन से
सामने आये किस का जिगर है
हाँ, सामने आये किस का जिगर है

जहाँ तेरी ये नज़र है मेरी जान मुझे खबर है

चाल ये बंदा ऐसी भी चल जाये
बंद हो मुट्ठी अरे चीज़ निकल जाये
गिली गिली गिली गिली

अरे चाल ये बंदा ऐसी भी चल जाये
बंद हो मुट्ठी अरे चीज़ निकल जाये
ये भी करिश्मा देख इधर है
हाँ, ये भी करिश्मा देख इधर है

जहाँ तेरी ये नज़र है मेरी जान मुझे खबर है
जहाँ तेरी ये नज़र है मेरी जान मुझे खबर है
बच ना सका कोई आये कितने
लम्बे हैं मेरे हाथ इतने
देख इधर यार ध्यान किधर है
अरे देख इधर यार ध्यान किधर है
............................................
Jahan teri ye nazar hai-Kaalia 1981

Monday, 30 May 2011

लेकिन मेरा दिल-गैर फ़िल्मी गीत नाजिया हसन

पुरानी यादें कभी-कभी तीव्र गति से आती जाती हैं। फिल्म सल्तनत
के गीत सुनते हुए कल्याणजी आनंदजी के ८० के दशक के गीतों
पर ध्यान गया। फिल्म क़ुरबानी के गीत याद आये और याद आयीं
एक खूबसूरत चेहरे और आवाज़ की मालकिन नाज़िया हसन।
प्रस्तुत गीत एक प्राइवेट एल्बम से है जिसका संगीत बिद्दू ने
तैयार किया है। इस एल्बम-डिस्को दीवाने ने बिक्री के सारे
रिकोर्ड तोड़े थे ८० के दशक में।



गीत के बोल:

हवा चलती रहे, लोग मिलते रहें
लेकिन मेरा दिल

लेकिन मेरा दिल,
मेरा दिल रो रहा है
लेकिन मेरा दिल,
मेरा दिल रो रहा है

तुम ना हो तो मैं कुछ भी नहीं
सूनी सूनी सी मेरी ज़िन्दगी
तुम ना हो तो मैं कुछ भी नहीं
सूनी सूनी सी मेरी ज़िन्दगी

क्या है ये जीना
तेरे बिन ऐ सनम
क्या है ये जीना
तेरे बिन ऐ सनम

लेकिन मेरा दिल,
मेरा दिल रो रहा है
लेकिन मेरा दिल,
मेरा दिल रो रहा है

ऐसे क्यूँ रूठ गये हो तुम
अब तो भूल जाओ सारा गम
ऐसे क्यूँ रूठ गये हो तुम
अब तो भूल जाओ सारा गम
आ जाओ पास मेरे
मेरे पास सनम
आ जाओ मेरे पास
मेरे पास सनम

लेकिन मेरा दिल,
मेरा दिल रो रहा है
लेकिन मेरा दिल,
मेरा दिल रो रहा है
...............................................................................
Lekin mera dil-Disco Deewane-Nazia Hasan

Friday, 4 February 2011

नज़र से फूल चुनती है नज़र-अहिस्ता अहिस्ता

नए चेहरों पर फिल्माया गया एक गीत पेश है। फिल्म रिलीज़
के वक़्त दोनों ही चेहरे नए थे। पद्मिनी कोल्हापुरे को ज़रूर जनता
पहचानने लगी थी तब तक। फिल्म का नाम है-अहिस्ता अहिस्ता
और प्रस्तुत गीत फिल्म का शीर्षक गीत है। फिल्म के गीत काफी
लोकप्रिय थे रिलीज़ के वक़्त और उसके बाद इक्का दुक्का गीत आज
भी सुनाई दे जाते हैं कभी। गीत नक्श लायलपुरी का लिखा हुआ है
और संगीत तैयार किया है खय्याम ने। आशा भोंसले और अनवर
इसके पार्श्व गायक हैं। नायक हैं शशि कपूर के सुपुत्र कुणाल कपूर।



गीत के बोल :

नजर से फूल चुनती हैं नजर
नजर से फूल चुनती हैं नजर, आहिस्ता, आहिस्ता
आहिस्ता, आहिस्ता
मोहब्बत रंग लाती हैं मगर
मोहब्बत रंग लाती हैं मगर, आहिस्ता, आहिस्ता
आहिस्ता, आहिस्ता

दुआएं दे रहे हैं पेड, मौसम जोगिया सा हैं
तुम्हारा साथ है् जब से, हर एक मंझर नया सा हैं
दुआएं दे रहे हैं पेड, मौसम जोगिया सा हैं
तुम्हारा साथ है् जब से, हर एक मंझर नया सा हैं
हसीं लगने लगी हर रहगुजर,
आहिस्ता, आहिस्ता

बहुत अच्छे हो तुम, फिर भी हमे तुम से हया क्यों है
तुम ही बोलो हमारे दरमियाँ ये फासला क्यों हैं
बहुत अच्छे हो तुम, फिर भी हमे तुमसे हया क्यों है
तुम ही बोलो हमारे दरमियाँ ये फासला क्यों हैं
मजा जब हैं के तय हो ये सफर, आहिस्ता, आहिस्ता
आहिस्ता, आहिस्ता

हमेशा से अकेलेपन में कोई मुस्कुराता हैं
ये रिश्ता प्यार का हैं, आसमां से बन के आता हैं
हमेशा से अकेलेपन में कोई मुस्कुराता हैं
ये रिश्ता प्यार का हैं, आसमां से बनके आता हैं
मगर होती हैं दिल को ये खबर, आहिस्ता, आहिस्ता
आहिस्ता, आहिस्ता

नजर से फूल चुनती हैं नजर, आहिस्ता, आहिस्ता
आहिस्ता, आहिस्ता
मोहब्बत रंग लाती हैं मगर, आहिस्ता, आहिस्ता
आहिस्ता, आहिस्ता
...................................................
Nazar se phool chunti hai nazar-Ahista ahista 1981

Monday, 10 January 2011

यार तेरे सब नाच रहे-शाका १९८१

सर्दी का मौसम है आपके जोड़ जाम हो रहे होंगे। आइये आपको
नचाने वाला गीत सुनाएँ। इस गीत पर आप कुर्सी या सोफे पर बैठे
बैठे हिल कर भी नाच सकते हैं। फिल्म का नाम है शाका और परदे
पर इस गीत को कोरस के साथ मुख्य रूप से गाया है शत्रुघ्न सिन्हा
ने। गायक कलाकार हैं मोहम्मद रफ़ी। गीत का संगीत तैयार किया
है राजेश रोशन ने और ये गीत आपने शादी ब्याह के अवसर पर ज़रूर
एक आध बार सुना होगा, मेरा अनुमान है। गीत वर्मा मालिक साहब ने
लिखा है।

दूल्हे के भेस में हैं प्रेम चोपड़ा , इससे आप ये अंदाज़ा ना लगा लें कि ये
बदमाशों की बारात है। वैसे एक बात तो माननी पड़ेगी इस भेस में
प्रेम चोपड़ा कुछ शरीफ से नज़र आ रहे हैं।



गीत के बोल:

यार तेरे सब नाच रहे हैं
यार तेरे सब नाच रहे
तेरी सज के चली बारात
तेरे मैं सदके जावां

होए होए होए होए
यार तेरे सब नाच रहे हैं
होए होए होए होए
यार तेरे सब नाच रहे
तेरी सज के चली बारात
तेरे मैं सदके जावां
होए होए होए होए

हो ओ ओ ओ,
बरसों बाद मिल है हमको
बरसों बाद मिल है हमको
किस्मत वाली रात, होए

बरसों बाद मिल है हमको
किस्मत वाली रात
तेरे मैं सदके जावां

हो, यार तेरे सब नाच रहे
तेरी सज के चली बारात
तेरे मैं सदके जावां

साफ़े का रंग मतवाला
तेरे कुर्ते का रंग मतवाला
और सेहरा करे इशारे, हे ऐ ऐ

आज ही पूरे होंगे अब दिल के अरमान तुम्हारे
कुछ न कुछ तो हो के रहेगा
कुछ न कुछ तो हो के रहे
जब होगी दिल की बात, होय
कुछ न कुछ तो हो के रहेगा
जब होगी दिल की बात
तेरे मैं सदक़े जावाँ

यार तेरे सब नाच रहे तेरी सज के चली बारात
तेरे मैं सदक़े जावाँ

दूल्हे का मेरा रब रखवाला
दूल्हे का मेरा रब रखवाला
ये चला है दुल्हन लाने
दूल्हे के दिल में क्या-क्या ये बात न कोई जाने
जिसके लिये बेचैन है तू
जिसके लिये बेचैन है तू वो बिगड़ी बनेगी बात, होय
जिसके लिये बेचैन है तू वो बिगड़ी बनेगी बात
तेरे मैं सदक़े जावाँ

यार तेरे सब नाच रहे तेरी सज के चली बारात
तेरे मैं सदक़े जावाँ

फिर न मिले तुझे ऐसी घड़ी
फिर न मिले तुझे ऐसी घड़ी
जी भर के ख़ुशी मना ले
कोई हसरत रहे ना बाकी ऐसा रंग जमा ले, होय
अगर ये मौक़ा निकल गया तो
अगर ये मौक़ा निकल गया तो मलता रहेगा हाथ
होय
अगर ये मौक़ा निकल गया तो मलता रहेगा हाथ
तेरे मैं सदक़े जावाँ
यार तेरे सब नाच रहे हैं
होय होय होय होय

यार तेरे सब नाच रहे तेरी सज के चली बारात
तेरे मैं सदक़े जावाँ
यार तेरे सब नाच रहे तेरी सज के चली बारात
तेरे मैं सदक़े जावाँ

................................
Yaar tere sab nach rahe hain-Shaaka 1981

Sunday, 5 December 2010

नीला आसमान सो गया-सिलसिला १९८१

सिलसिला एक प्रेम त्रिकोण पर आधारित कहानी है।
इसमें अमिताभ बच्चन, जाया भादुड़ी और रेखा
ने अभिनय किया है। यश चोपड़ा जो कि त्रिकोण
से खासा लगाव रखते हैं उन्होंने ये एक विश्वसनीय
सी फिल्म बनाई, मगर समय से थोडा आगे होने
की वजह से फिल्म ने अच्छा व्यवसाय नहीं किया।

फिल्म की विशेषता नए रंग रूप में निखरी रेखा
के कोस्तुमे थे। रेखा सन १९८० के बाद जबसे उन्होंने
योग करना शुरू किया एक नई तरोताज़ा काया के
साथ नज़र आयीं। इस फिल्म में लभगग उन्होंने ४००
के करीब परिधान पहने हैं। ये तथ्य एक रेखा के
फैन ने मुझे बताया। मुझ में इतना ध्यान लगा
के कपडे गिनने का धैर्य नहीं है।

जावेद अख्तर ने अपनी प्रतिभा के साथ न्याय करते
हुए कुछ अच्छे गीत लिखे हैं फिल्म के लिए और
संगीतकार शिव हरि का तो कहना ही क्या जिन्होंने
एक से बढ़ कर एक धुनें तैयार की फिल्म के लिए ।
फिल्म का संगीत खासा लोकप्रिय है और इसके गीत
आज भी सुने जाते हैं। सिलसिला फिल्म से ये गीत
मुझे सबसे ज्यादा पसंद है। ये लता मंगेशकर वाला
संस्करण है। इसी गीत को अमिताभ ने भी गाया है।



गीत के बोल:

नीला आसमान सो गया
नीला आसमान सो गया हो
नीला आसमान सो गया

आंसुओं में चाँद डूबा रात मुरझाई
ज़िन्दगी में दूर तक फैली है तन्हाई
जो गुज़रे हम पे वो कम है
तुम्हारे गम का मौसम है
नीला आसमान सो गया
नीला आसमान सो गया

हो, याद की वादी में गूंजे बीते अफ़साने
याद की वादी में गूंजे बीते अफ़साने
हमसफ़र जो कल थे अब ठहरे वो बेगाने
मोहब्बत आज प्यासी है
बड़ी गहरी उदासी है
नीला आसमान सो गया हो
नीला आसमान सो गया

नीला आसमान सो गया
नीला आसमान सो गया
नीला आसमान सो गया

Wednesday, 1 December 2010

शाम रंगीन हुई है -कानून और मुजरिम १९८१

मुख्या धारा के सिनेमा से अधिकतर फ़िल्मी पत्रकारों, लेखकों
और नए नवेले ज्यादा प्याज खाने वाले चिट्ठाकारों का मतलब
होता बड़े बड़े निर्देशकों की फ़िल्में। अब उनकी सूची पहले से ही
बंधी हुई होती ही तो वे महिमामंडन भी गिने चुने लोगों का किया
करते हैं। कुछ का हाल तो ये है कि वे पोंडीचेरी के प्राकृतिक सौंदर्य
पे साधिकार लिखते हैं और वहां गुलमोहर और चीड के वृक्षों की
संख्या पर टिप्पणी करते हैं। अमूमन संगीत प्रेमी भी अधिकांश
अवसरों पर अपने अपने फैवरेट ' पिटारी बाई' और 'भोंगड़े भाई'
के आख्यान में ही व्यस्त दिखाई देते हैं। ऐसे में आम जनता को
ये कैसे पता चलेगा कि इतिहास की तह में क्या क्या छुपा हुआ है ।
एक तो इतिहास वो होता है जो बंद कमरे में कुछ लोगों की सीमित
जानकारी के आधार पर लिखा जाता ही जिसमे शब्द जाल ज्यादा
होता है तथ्य कम, कागज़ ज़रूर। ऐसी ऐतिहासिक किताबों के मोटे
मोटे और चिकने से होते हैं। कीमत ऐसी कि आम आदमी की सोच
के बाहर हो। ऐसी कुछ किताबें पढ़ कर भी सयाने लोग मसाला लिखा
करते हैं । दूसरा इतिहास वो जो पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित होता है ।
ऐसा इतिहास भी कम लोगों की पहुँच में होता है। अब मान लीजिये
किसी लेखक ने अपनी आत्मकथा में ये तथ्य छुपाया कि उसकी पीठ में
एग्ज़ीमा था, तो वो आपको उसके निकटस्थ निवासियों से मालूम
पढ़ जायेगा। इतनी फुर्सत किसी को नहीं है जो वास्तविकता जाने
के लिए वर्जिश करे अतः जो सामने प्रस्तुत है उसी को सत्य मानते
हुए इतिश्री कर ली जाती है।

आज एक गीत आपको सुनवाते हैं जो गुमनाम सी अनदेखी फिल्म
कानून और मुजरिम से है- शाम रंगीन हुई है। इस युगल गीत को
गाया है सुरेश वाडकर और उषा मंगेशकर ने। १९८१ में आई फिल्म
कानून और मुजरिम के इस गीत के अलावा फिल्म के बाकी गीत
आपको एल पी रिकॉर्ड के ऊपर ही मिलेंगे।

ये एक ऐसा गीत है जिसकी फरमाइश बहुत आया करती रेडियो पर।
गाँव-गाँव से, मजनू का टीला से और झुमरी तलैया से। बरकाकाना का
नाम भी कभी कभार सुनाई दे जाता । ये बरकाकाना नामक जगह बिहार
से अलग होकर बने राज्य झारखण्ड में मौजूद है ।

सन १९८१ में पुराने दौर के कुछ संगीतकार सक्रिय थे। ख़य्याम ने तो
फिल्म कभी कभी की रेकोर्ड तोड़ सफलता के बाद काफी फिल्मों में संगीत
दिया मगर सी अर्जुन फिल्म 'जय संतोषी माँ' की अपार सफलता के
बावजूद हिंदी फिल्म क्षेत्र में कुछ खास नहीं कर पाए या यूँ कहें उनको
करने नहीं दिया गया ।

सुनिए कैफ़ी आज़मी का लिखा ये गीत जो आज भी सुनने में वही आनंद
देता है जो सन ८१ में दिया करता था।




गीत के बोल:

शाम रंगीन हुई है तेरे आँचल की तरह
सुरमई रंग सजा है तेरे काजल की तरह

पास हो तुम मेरे दिल के मेरे आँचल की तरह
मेरी आँखों में बसे हो मेरे काजल की तरह

शाम रंगीन हुई है तेरे आँचल की तरह

आसमान है मेरे अरमानों का दर्पण जैसे
आसमान है मेरे अरमानों का दर्पण जैसे
दिल यूं धडके मेरा खनके तेरे कंगन जैसे

मस्त हैं आज हवाएं मेरी पायल की तरह
सुरमई रंग सजा है तेरे काजल की तरह

शाम रंगीन हुई है तेरे आँचल की तरह

मेरी हस्ती पे कभी यूं कोई छाया ही ना था
मेरी हस्ती पे कभी यूं कोई छाया ही ना था
तेरे नज़दीक मैं पहले कभी आया ही ना था

मैं हूँ धरती की तरह तुम किसी बादल की तरह
सुरमई रंग सजा है तेरे काजल की तरह

आ आ आ, शाम रंगीन हुयी है तेरे आँचल की तरह

ऐसी रंगीन मुलाक़ात का मतलब क्या है
ऐसी रंगीन मुलाक़ात का मतलब क्या है
इन छलकते हुए जज़्बात का मतलब क्या है

आज हर दर्द भुला दो किसी पागल की तरह
सुरमई रंग सजा है तेरे आँचल की तरह

शाम रंगीन हुई है तेरे आँचल की तरह
पास हो तुम मेरे दिल के मेरे आँचल की तरह
शाम रंगीन हुई है तेरे आँचल की तरह
पास हो तुम मेरे दिल के मेरे आँचल की तरह

Wednesday, 24 November 2010

तेरा चेहरा मुझे गुलाब लगे-आपस की बात १९८१

अनजान की बात छिड़ी है तो उनका लिखा हुआ एक और गीत
सुनें जो कर्णप्रिय है और ८० के दशक से है। ये राज बब्बर पर
फिल्माया गया है। राज बब्बर उन दिनों नवागंतुकों की कतार
में शामिल थे। बाद में उन्होंने अपना अलग मुकाम बना लिया।

फ़िल्में इतनी बन चुकी हैं की किस किस का नाम और विवरण
याद रखा जाए। ये समस्या लगभग सभी संगीत प्रेमियों को आती
है। मैं तो ये भी भूल चुका था कि इस फिल्म में राज बब्बर के साथ
पूनम ढिल्लों हैं। फिल्म का नाम है आपस की बात। इसमें संगीत
अन्नू मलिक का है, चौंक गए ना। जी हाँ अन्नू मलिक स्वयं अपने
संगीत पर नज़र डालते होंगे तो चौंक जाते होंगे। उन्होंने हमेशा
समय समय पर श्रोताओं को चकित किया है। उसकी एक वजह
साफ़ है-जड़ें मजबूत हैं। सरदार मलिक पुत्र होने का कुछ तो फ़ायदा
होना चाहिए ना। ये बात और है कि उन्होंने कई ऐसी ऊंची मंजिलें तय
कर ली है आज, जिसके बारे में उनके पिता शायद सपने ही देखा करते
होंगे। अन्नू मालिक ने अपनी गायक बनने की हसरत भी पूरी
कर ली।

गीत किशोर कुमार का गाया हुआ है और राज बब्बर को किशोर कुमार
के १-२ गीत ही मिले होंगे परदे पर होंठ हिलाने के लिए। ये निस्संदेह
अन्नू मलिक की एक बेहतर रचना है।




गीत के बोल:

तेरा चेहरा मुझे गुलाब लगे,
दोनों आलम में लाजवाब लगे
दिन को देखूं तो आफताब लगे,
शब् को देखूं तो माहताब लगे

तेरा चेहरा मुझे गुलाब लगे
दोनों आलम में लाजवाब लगे

रोज मिलते हो पर नहीं मिलते,
ऐसा मिलना भी मुझको ख्वाब लगे
पढ़ता रहता हु तेरी सूरत को,
तेरी सूरत मुझे किताब लगे

तेरा चेहरा मुझे गुलाब लगे
दोनों आलम में लाजवाब लगे

तेरी आँखों की मस्तियाँ तौबा,
मुझको छलकी हुयी शराब लगे
जब भी चमके घटा में बिजली,
मुझको तेरा ही वो शबाब लगे

तेरा चेहरा मुझे गुलाब लगे
दोनों आलम में लाजवाब लगे

तुझको देखूं तो किस तरह देखूं,
रुख पे किरणों के सौ नकाब लगे
प्यार शायद इसी को कहते हैं,
एक मुझसे ही क्यों हिजाब लगे

तेरा चेहरा मुझे गुलाब लगे
दोनों आलम में लाजवाब लगे

Tuesday, 23 November 2010

नहीं लगता हाय दिल तेरे बिना -जेल यात्रा १९८१

एक गीत फिल्म जेल यात्रा से। उनींदे से विनोद खन्ना हडबडा के उठ
बैठते हैं जब कानों में नायिका रीना रॉय का गीत सुनाई पड़ता है। पूरे
गीत में वो हैरान से दिख रहे हैं। मजरूह के लिखे और लता मंगेशकर
के गाये गीत को संगीत में बांधा है राहुल देव बर्मन ने। इस गीत के बाद
आपको वो दो गीत सुनवायेंगे जो जेल यात्रा के इस गीत को सुनने के
बाद याद आते हैं।



गीत के बोल:

नहीं लगता हाय दिल तेरे बिना नहीं लगता
नहीं लगता हाय दिल तेरे बिना नहीं लगता

आज गले मिलके मर जाऊं
एक यही है रास्ता
तन्हा रहना रोज तड़पना
मुझसे ना हो सकता


नहीं लगता, लगता
नहीं लगता हाय दिल तेरे बिना नहीं लगता
हो नहीं लगता हाय दिल तेरे बिना नहीं लगता

आज गले मिलके मर जाऊं
एक यही है रास्ता
तन्हा रहना रोज तड़पना
मुझसे ना हो सकता

नहीं लगता हाय दिल तेरे बिना नहीं लगता
हो नहीं लगता हाय दिल तेरे बिना नहीं लगता

इसे कहाँ ले के जाऊं मैं
के दो घडी चैन पाऊँ मैं

शोला सा रंग है
जलता बुझता अंग है
तेरी लगी कैसी बुझाऊँ मैं
आज मिलन की ओढ़ लगा दे
एक यही है रास्ता
तन्हा रहना रोज तड़पना
मुझसे ना हो सकता

नहीं लगता लगता
नहीं लगता हाय दिल तेरे बिना नहीं लगता
हो नहीं लगता हाय दिल तेरे बिना नहीं लगता

पिया बाहर फिर से आई है
नई वजह फिर से लायी है
मैं फिर से खो गई
दीवानी सी हो गई
मुझा पकड़ हाय दुहाई है
यारों की बाहों में गिर जाऊं
एक यही है रास्ता
तन्हा रहना रोज तड़पना
मुझसे ना हो सकता

नहीं लगता लगता
नहीं लगता हाय दिल तेरे बिना नहीं लगता
हो नहीं लगता हाय दिल तेरे बिना नहीं लगता

आज गले मिलके मर जाऊं
एक यही है रास्ता
तन्हा रहना रोज तड़पना
मुझसे ना हो सकता

नहीं लगता हाय दिल तेरे बिना नहीं लगता
हो नहीं लगता हाय दिल तेरे बिना नहीं लगता
 
 
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