Social Icons

Showing posts with label Khayyam. Show all posts
Showing posts with label Khayyam. Show all posts

Sunday, 17 July 2011

ठण्डी पवन चले-फूटपाथ १९५३

एक गीत सुनवाते हैं आपको तीन गायकों की आवाजों में . ये लिया
गया है फिल्म फुटपाथ से . इस फिल्म का ये चौथा गीत है ब्लॉग पर.
तलत महमूद के साथ प्रेमलता और आशिमा बैनर्जी की आवाजें हैं.


ऐसे शोर्ट एंड स्वीट गीत बहुत भाते हैं मुझे क्यूंकि बोल लिखने में भी
ज्यादा कसरत नहीं करना पढ़ती है. गीत सरदार जाफरी का लिखा हुआ है
या मजरूह का, इस बारे में कोई प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध नहीं है
अतः हम दोनों के नाम टैग में डाल देते हैं.




गीत के बोल:

ठण्डी पवन चले
साँझ ढले
कू कू कोयल बोले
जिया डोले जिया डोले
पवन चले

प्यारे-प्यारे बाल सँवारे
शाम आई ले के नज़ारे
प्यारे-प्यारे बाल सँवारे
शाम आई ले के नज़ारे

नीले-नीले पीले-पीले
नीले-नीले पीले-पीले
देखो गगन में भी फूल खिले
पवन चले

चन्दा-तारे करें इशारे
आओ खेलें हमें पुकारे
चन्दा-तारे करें इशारे
आओ खेलें हमें पुकारे

कह दो चुन्नू, कह दो मुन्नू
कह दो चुन्नू, कह दो मुन्नू
रात होने को है हम चले
पवन चले

ठण्डी पवन चले
साँझ ढले
कू कू कोयल बोले
जिया डोले जिया डोले
पवन चले
-----------------------------------
Thandi pawan Chale-Footpath 1953

Monday, 23 May 2011

कैसा जादू डाला रे बलमा -फुटपाथ १९५३

आपको फिल्म फुटपाथ के दो गीत हम सुनवा चुके हैं अब तक।

फुटपाथ का अर्थ है पैदल चलने वालों के लिए रास्ता। सड़क
वाहनों के लिए बनाई जाती है, मगर हमारे देश में आपको
दुपहिया वाहन चालक फुटपाथ का उपयोग और पैदल चालक
सड़क का दुरूपयोग करते हुए मिल जायेंगे। आधुनिक परिभाषा
है इसकी-अतिक्रमित सार्वजनिक स्थान जिसका सब्जी बेचने
वाले से लेकर पंचर जोड़ने वाले तक सभी सामान रूप से अपनी
पैतृक संपत्ति समझ के उपयोग करते हों। छोटे बच्चे इसको अपनी
तोतली भाषा में फूट-फाट भी कहते हैं, जी हाँ वही स्थान जो सडक
के किनारे थोड़ा ऊंचा सा एक पट्टी जैसा सड़क के साथ साथ
दूर तक बना हुआ दिखाई देता है। कुछ फुटपाथों की दुर्दशा देख
कर लगता हैं बच्चे इसको सही रूप में पहचान लेते हैं जो हम जैसे
मूढ़ मति इतना ज्ञान बटोर कर भी नहीं कर पाते।

खैर फिल्म फुटपाथ में फुटपाथ का कितना उपयोग हुआ ये मुझे
समझ नहीं आया। फिल्म का तीसरा गीत सुनते हैं जो अपने समय
के लिहाज़ से काफी बोल्ड गीत है। मीना कुमारी इस गीत में
आपको संगीतमय स्नान करती दिखाई देंगी। आशा भोंसले की
आवाज़ है, मजरूह के बोल हैं और संगीत एक बार फिर से
ख़य्याम साहब का। ये गीत वैसे हिंदी फिल्मों के प्रसिद्ध स्नान
गीतों की श्रेणी में नहीं आता है।



गीत के बोल:

कैसा जादू डाला रे बलमा ना जाने
खड़े खड़े मचले रे सैयां नहीं माने

कैसा जादू डाला रे बलमा ना जाने
खड़े खड़े मचले रे सैयां नहीं माने

ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला

कैसा जादू डाला रे बलमा ना जाने
खड़े खड़े मचले रे सैयां नहीं माने

गीत के बाकी बोल की ज़रुरत महसूस करें तो एक चटका लगा
के ब्लॉग को धन्य करें।

Friday, 4 February 2011

नज़र से फूल चुनती है नज़र-अहिस्ता अहिस्ता

नए चेहरों पर फिल्माया गया एक गीत पेश है। फिल्म रिलीज़
के वक़्त दोनों ही चेहरे नए थे। पद्मिनी कोल्हापुरे को ज़रूर जनता
पहचानने लगी थी तब तक। फिल्म का नाम है-अहिस्ता अहिस्ता
और प्रस्तुत गीत फिल्म का शीर्षक गीत है। फिल्म के गीत काफी
लोकप्रिय थे रिलीज़ के वक़्त और उसके बाद इक्का दुक्का गीत आज
भी सुनाई दे जाते हैं कभी। गीत नक्श लायलपुरी का लिखा हुआ है
और संगीत तैयार किया है खय्याम ने। आशा भोंसले और अनवर
इसके पार्श्व गायक हैं। नायक हैं शशि कपूर के सुपुत्र कुणाल कपूर।



गीत के बोल :

नजर से फूल चुनती हैं नजर
नजर से फूल चुनती हैं नजर, आहिस्ता, आहिस्ता
आहिस्ता, आहिस्ता
मोहब्बत रंग लाती हैं मगर
मोहब्बत रंग लाती हैं मगर, आहिस्ता, आहिस्ता
आहिस्ता, आहिस्ता

दुआएं दे रहे हैं पेड, मौसम जोगिया सा हैं
तुम्हारा साथ है् जब से, हर एक मंझर नया सा हैं
दुआएं दे रहे हैं पेड, मौसम जोगिया सा हैं
तुम्हारा साथ है् जब से, हर एक मंझर नया सा हैं
हसीं लगने लगी हर रहगुजर,
आहिस्ता, आहिस्ता

बहुत अच्छे हो तुम, फिर भी हमे तुम से हया क्यों है
तुम ही बोलो हमारे दरमियाँ ये फासला क्यों हैं
बहुत अच्छे हो तुम, फिर भी हमे तुमसे हया क्यों है
तुम ही बोलो हमारे दरमियाँ ये फासला क्यों हैं
मजा जब हैं के तय हो ये सफर, आहिस्ता, आहिस्ता
आहिस्ता, आहिस्ता

हमेशा से अकेलेपन में कोई मुस्कुराता हैं
ये रिश्ता प्यार का हैं, आसमां से बन के आता हैं
हमेशा से अकेलेपन में कोई मुस्कुराता हैं
ये रिश्ता प्यार का हैं, आसमां से बनके आता हैं
मगर होती हैं दिल को ये खबर, आहिस्ता, आहिस्ता
आहिस्ता, आहिस्ता

नजर से फूल चुनती हैं नजर, आहिस्ता, आहिस्ता
आहिस्ता, आहिस्ता
मोहब्बत रंग लाती हैं मगर, आहिस्ता, आहिस्ता
आहिस्ता, आहिस्ता
...................................................
Nazar se phool chunti hai nazar-Ahista ahista 1981

Saturday, 29 January 2011

तुम अपना रंज ओ ग़म अपनी परेशानी -शगुन १९६४

आपको फिल्म शगुन का एक गीत सुमन कल्याणपुर का गाया
हुआ हम सुनवा चुके हैं। आइये एक और गीत सुना जाये इसी फिल्म
का जो जगजीत कौर की आवाज़ में है। जगजीत उर्फ़ श्रीमती
ख़य्याम ने कुछ एक गीत गए हैं हिंदी फिल्मों में और शायद
सभी में संगीत ख़य्याम का ही है। साहिर का लिखा हुआ ये गीत
मुझे बेहद पसंद है और कभी कभार इसे सुन लिया करता
हूँ-वजह -इसके बोल। प्यानो की मधुर आवाज़ के साथ गीत का
आगाज़ होता है। गीत शायद निवेदिता नाम की कलाकार पर
फिल्माया गया है।




गीत के बोल:


तुम अपना रंज-ओ-ग़म, अपनी परेशानी मुझे दे दो
तुम्हें ग़म की क़सम, इस दिल की वीरानी मुझे दे दो

ये माना मैं किसी क़ाबिल नहीं हूँ इन निगाहों में
ये माना मैं किसी क़ाबिल नहीं हूँ इन निगाहों में
बुरा क्या है अगर, ये दुख ये हैरानी मुझे दे दो

तुम अपना रंज-ओ-ग़म, अपनी परेशानी मुझे दे दो

मैं देखूँ तो सही, दुनिया तुम्हें कैसे सताती है
मैं देखूँ तो सही, दुनिया तुम्हें कैसे सताती है
कोई दिन के लिये, अपनी निगहबानी मुझे दे दो

तुम अपना रंज-ओ-ग़म, अपनी परेशानी मुझे दे दो

वो दिल जो मैने मांगा था मगर गैरों ने पाया था
वो दिल जो मैने मांगा था मगर गैरों ने पाया था
बड़ी ख्वाहिश है अगर, उसकी पशेमानी मुझे दे दो

तुम अपना रंज-ओ-ग़म, अपनी परेशानी मुझे दे दो

Tuesday, 11 January 2011

शाम-ए-ग़म की क़सम-फुटपाथ १९५३

आपको मखमली आवाज़ सुनवाते हैं बहुत दिनों बाद।
तलत महमूद की आवाज़ में ये सदाबहार गीत सुनिए
फिल्म फुटपाथ से। सन १९५३ से ये गीत श्रोताओं को
आनंदित करता आ रहा है। मजरूह के बोलों को सुरों
में पिरोया है खय्याम ने। दिलीप कुमार की ट्रेजेडी किंग
की इमेज में ऐसे गीतों का योगदान बहुत रहा। इस गीत
को अक्सर श्रोता दुखी अवस्था में सुना करते हैं और ऐसा
सुना जाता है कि इसको सुनने के बाद वे अवसाद से बाहर
आ जाते हैं। कुछ कुछ होम्योपैथी के इलाज़ की तरह.....





गीत के बोल:

शाम-ए-ग़म की क़सम आज ग़मगीं हैं हम
आ भी जा आ भी जा आज मेरे सनम
शाम-ए-ग़म की क़सम

दिल परेशान है रात वीरान है
देख जा किस तरह आज तनहा हैं हम
शाम-ए-ग़म की क़सम

चैन कैसा जो पहलू में तू ही नहीं
मार डाले न दर्द-ए-जुदाई कहीं
रुत हंसीं हैं तो क्या चाँदनी है तो क्या
चाँदनी ज़ुल्म है और जुदाई सितम

शाम-ए-ग़म की क़सम आज ग़मगीं हैं हम
आ भी जा आ भी जा आज मेरे सनम
शाम-ए-ग़म की क़सम

अब तो आ जा के अब रात भी सो गई
ज़िन्दगी ग़म के सेहराव में खो गई
अब तो आ जा के अब रात भी सो गई
ज़िन्दगी ग़म के सेहराव में खो गई
ढूँढती हैं नज़र तू कहाँ हैं मगर
देखते देखते आया आँखों में ग़म

शाम-ए-ग़म की क़सम आज ग़मगीं हैं हम
आ भी जा आ भी जा आज मेरे सनम
शाम-ए-ग़म की क़सम
..............................
Sham-e-gham ki kasam-Footpath 1952

Monday, 10 January 2011

सो जा मेरे प्यारे-फुटपाथ १९५३

हिंदी फिल्म संगीत का खज़ाना अजब गज़ब लोरियों से भरा पड़ा है।
अधिकतर लोकप्रिय लोरियां आपको पुरानी फिल्मों में ही मिलेंगी।
बॉलीवुड का मानना है कि फ़िल्मी बच्चे बड़े हो गए हैं अतः इस ज़माने
में लोरियों की आवश्यकता नहीं है। आजकल लोरी की जगह दूसरे किस्म
के गानों ने ले ली है। उदाहरण के लिए बच्चे बड़े हो गए हैं और शायद
आईटम-सोंग ज्यादा देखना सुनना पसंद करते हैं।


मीठी और मधुर खुशनुमा लोरियां आपने बहुत सुनी होंगी। एक
दुःख भरी लोरी भी सुनिए जो फिल्म फुटपाथ में है। ये सन १९५३
कि फिल्म है. दुःख भरी लोरी गा कर बच्चे को सुलाना बहुत ही
कठिन कार्य है जो आप महसूस करेंगे इस गीत में। गीत फिल्माया
गया है मीना कुमारी पर। गीत लिखा है मजरूह ने और इसकी
धुन बनाई है खय्याम ने। आंसुओं में भीगी लोरी गाने वाली गायिका
हैं आशा भोंसले।





गीत के बोल:

सो जा मेरे प्यारे
सो जा सो जा
सो जा मेरे प्यारे
सो जा सो जा
अंखियों के तारे
सो जा सो जा
अंखियों के तारे
सो जा सो जा

रात सुहानी चंदा गाये
मीठी मीठी निंदिया आये
रात सुहानी चंदा गाये
मीठी मीठी निंदिया आये
राजदुलारे नैनन तारे सो जा
सो जा मेरे प्यारे
सो जा सो जा
अंखियों के तारे
सो जा सो जा

आहों की फ़रियाद की दुनिया
ये दुनिया बेदाज की दुनिया
आहों की फ़रियाद की दुनिया
ये दुनिया बेदाज की दुनिया
तेरी दुनिया चाँद सितारे सो जा

सो जा मेरे प्यारे
सो जा सो जा
सो जा मेरे प्यारे
सो जा सो जा

Monday, 3 January 2011

और कुछ देर ठहर-आखरी ख़त १९६६

राजेश खन्ना के खाते में शायद सबसे ज्यादा रोमांटिक गीत आये हैं।
वैसे तो सभी नायकों के हिस्से में आये होंगे मगर जिन गीतों को सबसे
ज्यादा सुना जाता है उनकी बात हो रही है। शुरूआती दौर में उनके खाते में
रफ़ी के गाये काफी गीत आये, उनमें से जो उल्लेखनीय गीत है वो हम
पहले सुनेंगे इस ब्लॉग पर। ये गीत कैफ़ी आज़मी का लिखा और ख़य्याम
द्वारा संगीतबद्ध गीत है सन १९६६ की फिल्म आखरी ख़त से।



गीत के बोल:

और कुछ देर ठहर और कुछ देर न जा
और कुछ देर ठहर और कुछ देर न जा
और कुछ देर ठहर

रात बाक़ी है अभी रात में रस बाक़ी है
पा के तुझको तुझे पाने की हवस बाक़ी है
और कुछ देर ठहर और कुछ देर न जा
और कुछ देर ठहर और कुछ देर न जा
और कुछ देर ठहर

जिस्म का रंग फ़ज़ा में जो बिखर जायेगा
मेहरबान हुस्न तेरा और निखर जायेगा
लाख ज़ालिम है ज़माना मगर इतना भी नहीं
तू जो बाहों में रहे वक़्त ठहर जायेगा
और कुछ देर ठहर और कुछ देर न जा
और कुछ देर ठहर और कुछ देर न जा
और कुछ देर ठहर

ज़िंदगी अब इन्हीं क़दमों पे लुटा दूँ तो सही
ज़िंदगी अब इन्हीं क़दमों पे लुटा दूँ तो सही
ऐ हसीन बुत मैं ख़ुदा तुझको बना दूँ तो सही
और कुछ देर ठहर और कुछ देर न जा
और कुछ देर ठहर और कुछ देर न जा
और कुछ देर ठहर
....................................
Aur kuchh der thehar-Akhiri khat 1966

Friday, 3 December 2010

बहारों मेरा जीवन भी संवारो-आखरी ख़त १९६६

राजेश खन्ना की काले पीले ज़माने की फिल्म। इसमें उनके
साथ इन्द्राणी मुखर्जी और एक बच्चे ने काम किया है। पूरी
फिल्म बच्चे के इर्द गिर्द घूमती है। फिल्म के गीत कैफ़ी आज़मी
के लिखे हुए हैं और संगीत तैयार किया ख़य्याम ने। फिल्म से
एक लता का गाया मधुर गीत सुनवाते हैं आपको। चेतन आनंद
निर्देशित ये फिल्म एक बार ज़रूर देखनी चाहिए फिल्म प्रेमियों
को। बच्चे ने फिल्म के नायक नायिका से अच्छी एक्टिंग की है।
मन्नू भंडारी की एक कहानी-आपका बंटी पर आधारित इस फिल्म
ने अलोचाकों के बीच वाहवाही ज़रूर बटोरी भले ही टिकट घर पर
नोट ना बटोरें हों।

गीत के साथ प्रस्तुत कमेंट्स में एक जानकारी यूँ हैं-इस गीत के लिए
सितार वादक उस्ताद रईस खान को विशेष तौर पर पाकिस्तान से
बुलवाया गया था जबकि हमारे देश में सितार वादकों की कोई कमी
नहीं। दूसरे संगीतकार भी सितार वादकों की सेवाएँ नियमित रूप से
लेते रहे हैं। अब ये जानकारी कितनी प्रमाणिक है कहा नहीं जा सकता।
खैर बाकी की जानकारी भी दिए देते हैं आपको-ये गीत राग 'पहाड़ी '
पर आधारित है।



गीत के बोल:

बहारों, मेरा जीवन भी सँवारों
बहारों, मेरा जीवन भी सँवारों

कोई आए कहीं से
कोई आए कहीं से, यूँ पुकारो
बहारों, मेरा जीवन भी सँवारों,
बहारों

तुम्हीं से दिल ने सीखा है तड़पना
तुम्हीं से दिल ने सीखा है तड़पना

तुम्हीं को दोष दूंगी
तुम्हीं को दोष दूंगी, ऐ नज़ारों
बहारों, मेरा जीवन भी सँवारों,
बहारों

रचाओ कोई कजरा लाओ गजरा
रचाओ कोई कजरा लाओ गजरा

लचकती डालियों तुम
लचकती डालियों तुम, फूल बहारों
बहारों, मेरा जीवन भी सँवारों,
बहारों

लगाओ मेरे इन हाथों में मेहंदी
लगाओ मेरे इन हाथों में मेहंदी

सजाओ माँग मेरी
सजाओ माँग मेरी, या सिधारो,
बहारों, मेरा जीवन भी सँवारों,
बहारों

Monday, 29 November 2010

रंग रंगीला सांवरा -बारूद १९६०

हमने बात की थी ख़य्याम के पंजाबी स्वाद वाले हिंदी गीतों
की। आइये सुना जाए एक गीत फिल्म बारूद से जो कि सन
१९६० की फिल्म है। अगर आप इस गीत में संजीव कुमार जैसे
दिख रहे कलाकार को पहचान जाएँ तो अपने आप को पक्का
फिल्म प्रेमी समझिये। परदे पर गीत गा रही हैं अभिनेत्री कुमकुम
जिनकी स्क्रीन प्रेजेंस ज़बरदस्त हुआ करती थी और शायद
ये बात उनकी समकालीन नायिकाओं के लिए इर्ष्या का विषय
हो । उनपर फिल्माए गए गीत फिल्म की मुख्य नायिका वाले
गीत से तकरीबन हमेशा ही बेहतर नज़र आते। नारी सुलभ
अदाओं से भरपूर ये गीत रोचक है ।

सिनेमा हाल का पर्दा जंगी आकार का हुआ करता है और उस पर
नायक नायिका का आकार भी भीमकाय दिखा करता है। जब काया
बड़ी दिखेगी तो हंसी और आंसू भी बड़े दिखाई देंगे। शायद यही वजह
हो सिनेमा हॉल में हंसी का बगीचा पैदा होने और आंसुओं के तालाब
भरने के।

जिनको गीतों की श्रेणियां बनाने का शौक है उनके लिए सुझाव-
इस गीत को आप 'मटका' गीत की श्रेणी में रख सकते हैं। गीत
में १००-५० तो दिखाई दे ही रहे हैं ना।

गीत गाया है लता मंगेशकर और साथी कलाकारों ने। परदे पर
महिला मंडल के बीच आपको अभिनेत्री टुनटुन भी नज़र आ जाएँगी।
गीत लिखा है हसरत जयपुरी ने और तर्ज़ बनाई है ख़य्याम ने।



गीत के बोल:

रंग रंगीला सांवरा
रंग रंगीला सांवरा
मोहे मिल गयो जमुना पार
हुए बांके नैना चार
इब मैं का बोलूं सरकार
इब मैं का बोलूं, हो

रंग रंगीला सांवरा
मोहे मिल गयो जमुना पार
हुए बांके नैना चार
इब मैं का बोलूं सरकार
इब मैं का बोलूं, होए

नीर भरन को जब जब जाऊं
ताके चन्द्र चकोर
अररारारा ताके चन्द्र चकोर
आते जाते रोक ले रास्ता
ना माने चितचोर
अररारारा ना माने चितचोर

धागा हो तो तोर भी डालूँ
धागा हो तो तोर भी डालूँ
बीच पे किसका जोर
ननदिया छेड़े बीच बाज़ार
इब मैं का बोलूं सरकार
इब मैं का बोलूं, हो

रंग रंगीला सांवरा
मोहे मिल गयो जमुना पार
हुए बांके नैना चार
इब मैं का बोलूं सरकार
इब मैं का बोलूं, होए

नटखट मोहन बाज़ ना आया
दीनी गागर फोड़
अररारारा दीनी गागर फोड़

फूल से नाज़ुक नरम कलाई
जालिम ने दी मोड़
अररारारा जालिम ने दी मोड़

फँस गई मोरी जान गज़ब में
फँस गई मोरी जान गज़ब में
मैं भागी चुनरी छोड़
ननदिया छेड़े बीच बाज़ार
इब मैं का बोलूं सरकार
इब मैं का बोलूं, हो

रंग रंगीला संवारा
मोहे मिल गयो जमुना पार
हुए बांके नैना चार
इब मैं का बोलूं सरकार
इब मैं का बोलूं, होए

Sunday, 28 November 2010

जीत ही लेंगे बाज़ी हम तुम-शोला और शबनम १९६१

एक और फ्लेश बैक वाला गीत सुन लिया जाए।

धर्मेन्द्र ने कई रोमांटिक फिल्मों में अभिनय किया है।
ये उनके फ़िल्मी जीवन के प्रथम दौर की फिल्म है
साहब क्या लाजवाब गीत मिला उनको परदे पर
जिसे हम सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ कर्णप्रिय युगल गीतों
में गिनते हैं। धर्मेन्द्र के साथ परदे पर 'तरला' नामक
अभिनेत्री हैं जिन्हें मैंने किसी और फिल्म में देखा
हो याद नहीं। गीत लिखा है ..... ने और पिछले गीत की
तरह इसकी धुन भी बनाई है खय्याम ने। बस गीतकार
बदल गए हैं-कैफ़ी आज़मी। खय्याम ने जितना भी संगीत
दिया वो सौम्य किस्म का है। कभी कभार ही उन्होंने
शोरगुल वाले फार्मूले का इस्तेमाल किया है। उनके
संगीतबद्ध ठेठ पंजाबी गीत भी कर्णप्रिय हैं। फ़िल्म 'शोला और
शबनम' के इस गीत में बस दूसरे अंतरे की एक पंक्ति ही
सुनने में खटकती है जहाँ नायक कहता है-तू भी पल भर
रूठे ना । ये पंक्ति पहली पंक्ति के साथ मेल नहीं खाती।


गीत के बोल:

फूल को ढूंढें प्यासा भंवरा
दीपक को परवाना

दुनिया अपने रब को पुकारे
दुनिया अपने रब को पुकारे
तुझको तेरा दीवाना
आ जा, आ जा, आ जा, आ जा

जीत ही लेंगे बाज़ी हम तुम
खेल अधूरा छूटे ना

प्यार का बंधन
जनम का बंधन
जनम का बंधन टूटे ना
प्यार का बंधन टूटे ना

जीत ही लेंगे बाज़ी हम तुम
खेल अधूरा छूटे ना

प्यार का बंधन
जनम का बंधन
जनम का बंधन टूटे ना

आ आ हा हा हा आ आ

मिलता है जहाँ धरती से गगन
मिलता है जहाँ धरती से गगन
आओ वहीँ हम जाएँ

तू मेरे लिए
मैं तेरे लिए
तू मेरे लिए
मैं तेरे लिए

इस दुनिया को ठुकराएँ
इस दुनिया को ठुकराएँ

दूर बसा लें दिल की जन्नत
जिसको ज़माना लुटे ना

प्यार का बंधन
जनम का बंधन
जनम का बंधन टूटे ना

प्यार का बंधन टूटे ना

हं हं हं ला ला ला ला ला
आ आ आ आ आ आ आ आ आ हं हं हं हं

मिलने की ख़ुशी ना मिलने का गम
ख़त्म ये झगडे हो जाएँ
मिलने की ख़ुशी ना मिलने का गम
ख़त्म ये झगडे हो जाएँ

तू तू ना रहे
मैं मैं ना रहूँ
तू तू ना रहे
मैं मैं ना रहूँ

एक दूजे में खो जाएँ
एक दूजे में खो जाएँ

मैं भी ना छोडूं पल भर दामन
मैं भी ना छोडूं पल भर दामन
तू भी पल भर रूठे ना

प्यार का बंधन
जनम का बंधन
जनम का बंधन टूटे ना

प्यार का बंधन टूटे ना

प्यार का बंधन
जनम का बंधन
जनम का बंधन टूटे ना

प्यार का बंधन टूटे ना

मेरी निगाह ने क्या काम-मोहब्बत इसको कहते हैं १९६५

एक गंभीर किस्म का रोमांटिक गीत पेश है। फिल्म
'मोहब्बत इसको कहते हैं' का एक रोमांटिक युगल गीत
आपको सुनवाया जा चुका है। अब सुनिए रफ़ी की
आवाज़ में एकल गीत। संतुलन, तहजीब और दायरे
के भीतर घूमते इस गीत में सभी कुछ इतने आहिस्ता
से कहा जा रहा है कि किसी को तनिक भी अटपटा ना
लगे और बात भी बान जाए। परदे पर इस गीत को
मराठी सिनेमा के नामचीन कलाकार रमेश देव गा रहे हैं
और हमारे रोमांटिक हीरो शशि कपूर बिस्तर पर
पड़े पड़े सुन रहे हैं। गीत शायद अभिनेत्री नंदा के लिए
गाया जा रहा है। गीत में फ्लेश बैक का दृश्य खूबसूरती
से इस्तेमाल किया गया है जिसमे शशि कपूर और नंदा
लगभग गीत की एक एक पंक्ति पर अभिनय करते नज़र
आ रहे हैं।




गीत के बोल:


मेरी निगाह ने क्या काम लाजवाब किया
मेरी निगाह ने क्या काम लाजवाब किया

उन्हीं को लाखों हसीनों में इंतेखाब किया

मेरी निगाह ने क्या

वो आये घर में बाहर आ के रुक गई जैसे
वो आये घर में बाहर आ के रुक गई जैसे
फिजा में फूलों की डाली सी झुक गई जैसे

कुछ इस अदा से किसी शोख ने हिजाब किया
कुछ इस अदा से किसी शोख ने हिजाब किया

मेरी निगाह ने क्या

वो ज़ुल्फ़-ए-नाज़ खुली खुल के कुछ ढलक सी गई
सितारे टूट पड़े चांदनी छलक सी गई
जो मैंने चेहरा-ए-जाना को बेनकाब किया

मेरी निगाह ने क्या काम लाजवाब किया
मेरी निगाह ने क्या

के मेरे गीत में वो रंग है नजाकत है
के मेरे गीत में वो रंग है नजाकत है
के सब उसी निगाह-ए-नाज़ की इनायत है
के मुझ से जर्रे को चमका के आफ़ताब किया

मेरी निगाह ने क्या काम लाजवाब किया
उन्हीं को लाखों हसीनों में इंतेखाब किया
 
 
www.lyrics2nd.blogspot.com