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Wednesday, 3 August 2011

सुनते थे नाम हम-आह १९५३

सन १९५३ की फिल्म आह के लिए शंकर जयकिशन ने
एक से बढ़कर एक धुनें बनायीं। फिल्म का दर्द भरा गीत
हो या मस्ती भरा, हर गीत सुनने में अच्छा लगता है।
फिल्म से एक थोडा तेज गति वाला गीत सुनवाते हैं
लता मंगेशकर की आवाज़ में। गीत फिल्माया गया है
विजय लक्ष्मी पर जो एक पार्टी में ये गीत गा रही हैं।






गीत के बोल:



सुनते थे नाम हम जिन का बहार से
देखा तो डोला जिया झूम झूम के
सुनते थे नाम हम जिन का बहार से
देखा तो डोला जिया झूम झूम के

छुपते रहे जो मेरी नज़र से
दिल बोले मेरा तुम ही तो हो
आँखों से रंग मेरे दिल के उमंग पे
डाला तो डोला जिया झूम झूम के

सुनते थे नाम हम जिन का बहार से
देखा तो डोला जिया झूम झूम के

ठुकरा चुके थे जिन की मुहब्बत
क्यों उन पे दीवाने हुए
तड़पा के प्यार ने जब हम को प्यार से
छेड़ा तो बोला जिया झूम झूम के

सुनते थे नाम हम जिन का बहार से
देखा तो डोला जिया झूम झूम के

पहले कहीं ये दिल न झुका था
क्या जानूँ अब क्या हो गया
जाओ न आज कल तुम हम को छोड़ के
अपना तो डोला जिया झूम झूम के

सुनते थे नाम हम जिन का बहार से
देखा तो डोला जिया झूम झूम के
...................................
Sunte the naam ham-Aah 1953

Sunday, 17 July 2011

ठण्डी पवन चले-फूटपाथ १९५३

एक गीत सुनवाते हैं आपको तीन गायकों की आवाजों में . ये लिया
गया है फिल्म फुटपाथ से . इस फिल्म का ये चौथा गीत है ब्लॉग पर.
तलत महमूद के साथ प्रेमलता और आशिमा बैनर्जी की आवाजें हैं.


ऐसे शोर्ट एंड स्वीट गीत बहुत भाते हैं मुझे क्यूंकि बोल लिखने में भी
ज्यादा कसरत नहीं करना पढ़ती है. गीत सरदार जाफरी का लिखा हुआ है
या मजरूह का, इस बारे में कोई प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध नहीं है
अतः हम दोनों के नाम टैग में डाल देते हैं.




गीत के बोल:

ठण्डी पवन चले
साँझ ढले
कू कू कोयल बोले
जिया डोले जिया डोले
पवन चले

प्यारे-प्यारे बाल सँवारे
शाम आई ले के नज़ारे
प्यारे-प्यारे बाल सँवारे
शाम आई ले के नज़ारे

नीले-नीले पीले-पीले
नीले-नीले पीले-पीले
देखो गगन में भी फूल खिले
पवन चले

चन्दा-तारे करें इशारे
आओ खेलें हमें पुकारे
चन्दा-तारे करें इशारे
आओ खेलें हमें पुकारे

कह दो चुन्नू, कह दो मुन्नू
कह दो चुन्नू, कह दो मुन्नू
रात होने को है हम चले
पवन चले

ठण्डी पवन चले
साँझ ढले
कू कू कोयल बोले
जिया डोले जिया डोले
पवन चले
-----------------------------------
Thandi pawan Chale-Footpath 1953

मिटटी से खेलते हो बार बार किसलिए-पतिता १९५३

आइये लता के एक श्रेष्ठ दर्दीले गीत पर थोड़ी चर्चा की जाए। गीत के
बोल दर्द की सियाही से निकले से सुनाई पढ़ते हैं। गीत की खूबसूरती
ये है की शुरुआत से पहले हेमंत कुमार की आवाज़ में 'रघुपति राजा राम'
भजन की कुछ पंक्तियाँ हैं । फिल्म का नाम पतिता है और यह फिल्म
अपने समय की काफी बोल्ड विषय वाली फिल्म मानी जाती है थी। एक
पतिता को उचित स्थान दिलाने की जद्दोजहद में लगे नायक से नायिका
गीत के माध्यम से प्रश्न कर रही है जो खुद भी मस्तिष्क में चल रही
कशमकश से परेशां है।

गीत में कहीं भी पतिता शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है और नारी
चरित्र के गरिमा को इतनी खूबसूरती से पेश किया गया है की एकबारगी
आपको भी उस चरित्र से जुड़ाव सा महसूस होने लगता है और उसकी पीढ़ा
अपनी लगने लगती है।

ऐसे सरल से मगर मर्मस्पर्शी गीत किस गीतकार की कलम की देन हो सकते
हैं भला-? उषाकिरण पर फिल्माए गए और लता के गाये इस गीत को लिखा
है शैलेन्द्र ने और संवेदना को टटोलती धुन बनाई है शंकर जयकिशन ने.




गीत के बोल:

मिटटी से खेलते हो बार बार किसलिए
मिटटी से खेलते हो बार बार किसलिए
टूटे हुए खिलौनों से प्यार किसलिए
टूटे हुए खिलौनों से प्यार किसलिए

मिटटी से खेलते हो बार बार किसलिए
मिटटी से खेलते हो बार बार किसलिए

बना के जिन्दगानियाँ बिगाड़ने से क्या मिला
मेरी उम्मीद का जहाँ
मेरी उम्मीद का जहाँ उजाड़ने से क्या मिला
आई थी दो दिनों की ये बहार किसलिए

मिटटी से खेलते हो बार बार किसलिए
मिटटी से खेलते हो बार बार किसलिए

ज़रा सी धूल को हज़ार रूप नाम दे दिए
ज़रा सी जान, सर पे सात आसमान दे दिए
बर्बाद जिंदगी का ये सिंगार किसलिए

मिटटी से खेलते हो बार बार किसलिए
मिटटी से खेलते हो बार बार किसलिए

ज़मीन गैर हो गयी ये आसमान बदल गया
हवा के रुख बदल गए
हवा के रुख बदल गए हर एक फूल जल गया
बजते हैं अब ये साँसों के तार किसलिए

मिटटी से खेलते हो बार बार किसलिए
मिटटी से खेलते हो बार बार किसलिए
............................................
Mitti se khelte ho baar baar kis liye-Patita 1953

Saturday, 16 July 2011

आग छिड़क गई चांदनी-आगोश १९५३

मीना कपूर आवाज़ के मामले में गीत दत्त की बहन जैसी
सुनाई पढ़ती हैं । वैसे उनकी आवाज़ गीता की आवाज़ से
अलग है। हर आवाज़ का अपना अंदाज़ होता है, खूबियाँ
होती हैं। बस गीता की आवाज़ में दर्द ज्यादा है। मीना कपूर
ने ४० और ५० के दशक के लगभग सभी प्रमुख संगीतकारों
के लिए गीत गाये हैं। एक प्रमुख संगीतकार की तो वे
जीवनसंगिनी ही बन गयीं-अनिल बिश्वास।

ये गीत है फिल्म आगोश से और बड़ा ही मस्तमौला सा गीत
है.



गीत के बोल:

आग छिड़क गयी चांदनी ,
मेरे गोरे बदन पे
ओ मेरे कोमल मन पे, हाय
आज मैं डर गयी डर गयी डर गयी रे

आग छिड़क गयी चांदनी ,
मेरे गोरे बदन पे
ओ मेरे कोमल मन पे, हाय
आज मैं डर गयी डर गयी डर गयी रे

लहरों के संग नाचे छम छम किरणों की डोरियाँ
धीरे से पल खींचे दिल के पर्दों की डोरियाँ
झूम ही जाता है आसमान मचल गयी मेरे सजना
हाय आज मैं डर गयी डर गयी डर गयी रे

आग छिड़क गयी चांदनी ,
मेरे गोरे बदन पे
ओ मेरे कोमल मन पे, हाय
आज मैं डर गयी डर गयी डर गयी रे

रात सुहानी चुपके से कुछ कानों में कह गयी
मेरे दिल की बात बेदर्दी दिल में ही रह गयी
तारे भी संग हैं सितारे हँसे मदमस्त नज़ारे
हाय, आज मैं डर गयी डर गयी डर गयी रे

आग छिड़क गयी चांदनी ,
मेरे गोरे बदन पे
ओ मेरे कोमल मन पे, हाय
आज मैं गिर गयी गिर गयी गिर गयी रे

चाँद की शीतल छांव में सब दुनिया सो गयी
मेरी दुनिया प्यार की खुशियों में खो गयी
बैठे हैं वो आग लगा के मगर दामन को बचा के
हाय आज मैं डर गयी डर गयी डर गयी रे

आग छिड़क गयी चांदनी ,
मेरे गोरे बदन पे
ओ मेरे कोमल मन पे, हाय
आज मैं गिर गयी गिर गयी गिर गयी रे
....................................
Aag chhidak gayi chandni-Aagosh 1953

Monday, 11 July 2011

छोटी सी ये ज़िंदगानी रे-आह १९५३

गायक - मुकेश
गीतकार-शैलेन्द्र
संगीतकार -शंकर जयकिशन
फिल्म -आह
वर्ष-१९५३
श्रेणी-तांगा गीत

* परदे पर तांगे में गायक मुकेश स्वयं हैं.



गीत के बोल:

छोटी सी ये ज़िंदगानी रे
चार दिन की जवानी तेरी
हाय रे हाय
ग़म की कहानी तेरी

छोटी सी ये ज़िंदगानी रे
चार दिन की जवानी तेरी
हाय रे हाय
ग़म की कहानी तेरी

शाम हुई ये देश बीराना
तुझ को अपने बलम घर जाना,
सजन घर जाना
शाम हुई ये देश बीराना
तुझ को अपने बलम घर जाना,
सजन घर जाना
राह में मूरख मत लुट जाना,
मत लुट जाना

छोटी सी ये ज़िंदगानी रे
चार दिन की जवानी तेरी
हाय रे हाय
ग़म की कहानी तेरी

छोटी सी ये ज़िंदगानी रे
चार दिन की जवानी तेरी
हाय रे हाय
ग़म की कहानी तेरी

बाबुल का घर छूटा जाये
अखियन घोर अँधेरा छाये,
जी दिल घबराये
आँख से टपके दिल का खज़ाना
दिल का खज़ाना

छोटी सी ये ज़िंदगानी रे
चार दिन की जवानी तेरी
हाय रे हाय
ग़म की कहानी तेरी

छोटी सी ये ज़िंदगानी रे
चार दिन की जवानी तेरी
हाय रे हाय
ग़म की कहानी तेरी
...............................
Chhoti si ye zindagani-Aah 1953

Tuesday, 7 June 2011

नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख-शिकस्त १९५३

क से क्लासिक। सबकी क्लासिक की अपनी अपनी परिभाषा होती
है। आइये एक क्लासिक गीत देखें और सुनें। इसके क्लासिक होने का
सबसे पहला कारण ये है कि ये शैलेन्द्र का लिखा हुआ गीत है और
प्रेरणादाई गीत है। संगीतमय फिल्म शिकस्त से ये गीत लिया
गया है। ब्लॉग पर ये शिकस्त फिल्म का तीसरा गीत है। पिछले
दो गीत तलत महमूद की आवाज़ में हैं, इसमें रफ़ी की आवाज़ है।





गीत के बोल:

हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ

नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
इसके रूप का सिंगार कर के देख
इसपे जो भी है निसार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख

नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
इसके रूप का सिंगार कर के देख
इसपे जो भी है निसार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख

सच कभी तो होंगे ख़्वाब और ख़याल, तेरे ख़्वाब और ख़याल
हो तेरे ख़्वाब और ख़याल
कब तलक रहेंगे बेक़सी के जाल, दिल पे बेक़सी के जाल
हो दिल पे बेक़सी के जाल
वक़्त सुन चुका है तेरे दिल का हाल तेरे दिल का हाल
वक़्त सुन चुका है तेरे दिल का हाल तेरे दिल का हाल
और चार दिन गुज़ार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
इसपे जो भी है निसार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख

दिल के तार छू के गा रहा है कौन गीत गा रहा है कौन
हो गीत गा रहा है कौन
ले के ये बहारें आ रहा है कौन मुस्कुरा रहा है कौन
हो मुस्कुरा रहा है कौन
तन पे और मन पे छा रहा है कौन छा रहा है कौन
तन पे और मन पे छा रहा है कौन छा रहा है कौन
अपना दिल किसी पे हार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
इसपे जो भी है निसार कर के देख

नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
इसके रूप का सिंगार कर के देख
इसपे जो भी है निसार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख

हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
इसके रूप का सिंगार कर के देख
इसपे जो भी है निसार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख

नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
इसके रूप का सिंगार कर के देख
इसपे जो भी है निसार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख


नींद से धरती को जो जगायेगा ज़मीं को जो जगायेगा
ज़मीं को जो जगायेगा
बीज आँसुओं के जो बिछायेगा जो मेहनतें लुटायेगा
जो मेहनतें लुटायेगा
फूल उसके आँगन में मुस्कुरायेगा मुस्कुरायेगा
फूल उसके आँगन में मुस्कुरायेगा मुस्कुरायेगा
और चार दिन गुज़ार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
इसपे जो भी है निसार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख

गा रही है धरती गीत प्यार के सुहाने गीत प्यार के
सुहाने गीत प्यार के
दिन गुज़र चुके हैं इंतज़ार के हो तेरे इंतज़ार के
हो तेरे इंतज़ार के
चुप न रह पपीहे ये मन को मार के मन को मार के
चुप न रह पपीहे मन को मार के मन को मार के
आयेंगे पिया पुकार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
आयेंगे पिया पुकार कर के देख

नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
इसके रूप का सिंगार कर के देख
इसपे जो भी है निसार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
.....................................
Nayi zindai se pyar kar ke dekh-Shikast 1953

Monday, 23 May 2011

कैसा जादू डाला रे बलमा -फुटपाथ १९५३

आपको फिल्म फुटपाथ के दो गीत हम सुनवा चुके हैं अब तक।

फुटपाथ का अर्थ है पैदल चलने वालों के लिए रास्ता। सड़क
वाहनों के लिए बनाई जाती है, मगर हमारे देश में आपको
दुपहिया वाहन चालक फुटपाथ का उपयोग और पैदल चालक
सड़क का दुरूपयोग करते हुए मिल जायेंगे। आधुनिक परिभाषा
है इसकी-अतिक्रमित सार्वजनिक स्थान जिसका सब्जी बेचने
वाले से लेकर पंचर जोड़ने वाले तक सभी सामान रूप से अपनी
पैतृक संपत्ति समझ के उपयोग करते हों। छोटे बच्चे इसको अपनी
तोतली भाषा में फूट-फाट भी कहते हैं, जी हाँ वही स्थान जो सडक
के किनारे थोड़ा ऊंचा सा एक पट्टी जैसा सड़क के साथ साथ
दूर तक बना हुआ दिखाई देता है। कुछ फुटपाथों की दुर्दशा देख
कर लगता हैं बच्चे इसको सही रूप में पहचान लेते हैं जो हम जैसे
मूढ़ मति इतना ज्ञान बटोर कर भी नहीं कर पाते।

खैर फिल्म फुटपाथ में फुटपाथ का कितना उपयोग हुआ ये मुझे
समझ नहीं आया। फिल्म का तीसरा गीत सुनते हैं जो अपने समय
के लिहाज़ से काफी बोल्ड गीत है। मीना कुमारी इस गीत में
आपको संगीतमय स्नान करती दिखाई देंगी। आशा भोंसले की
आवाज़ है, मजरूह के बोल हैं और संगीत एक बार फिर से
ख़य्याम साहब का। ये गीत वैसे हिंदी फिल्मों के प्रसिद्ध स्नान
गीतों की श्रेणी में नहीं आता है।



गीत के बोल:

कैसा जादू डाला रे बलमा ना जाने
खड़े खड़े मचले रे सैयां नहीं माने

कैसा जादू डाला रे बलमा ना जाने
खड़े खड़े मचले रे सैयां नहीं माने

ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला

कैसा जादू डाला रे बलमा ना जाने
खड़े खड़े मचले रे सैयां नहीं माने

गीत के बाकी बोल की ज़रुरत महसूस करें तो एक चटका लगा
के ब्लॉग को धन्य करें।

Tuesday, 11 January 2011

शाम-ए-ग़म की क़सम-फुटपाथ १९५३

आपको मखमली आवाज़ सुनवाते हैं बहुत दिनों बाद।
तलत महमूद की आवाज़ में ये सदाबहार गीत सुनिए
फिल्म फुटपाथ से। सन १९५३ से ये गीत श्रोताओं को
आनंदित करता आ रहा है। मजरूह के बोलों को सुरों
में पिरोया है खय्याम ने। दिलीप कुमार की ट्रेजेडी किंग
की इमेज में ऐसे गीतों का योगदान बहुत रहा। इस गीत
को अक्सर श्रोता दुखी अवस्था में सुना करते हैं और ऐसा
सुना जाता है कि इसको सुनने के बाद वे अवसाद से बाहर
आ जाते हैं। कुछ कुछ होम्योपैथी के इलाज़ की तरह.....





गीत के बोल:

शाम-ए-ग़म की क़सम आज ग़मगीं हैं हम
आ भी जा आ भी जा आज मेरे सनम
शाम-ए-ग़म की क़सम

दिल परेशान है रात वीरान है
देख जा किस तरह आज तनहा हैं हम
शाम-ए-ग़म की क़सम

चैन कैसा जो पहलू में तू ही नहीं
मार डाले न दर्द-ए-जुदाई कहीं
रुत हंसीं हैं तो क्या चाँदनी है तो क्या
चाँदनी ज़ुल्म है और जुदाई सितम

शाम-ए-ग़म की क़सम आज ग़मगीं हैं हम
आ भी जा आ भी जा आज मेरे सनम
शाम-ए-ग़म की क़सम

अब तो आ जा के अब रात भी सो गई
ज़िन्दगी ग़म के सेहराव में खो गई
अब तो आ जा के अब रात भी सो गई
ज़िन्दगी ग़म के सेहराव में खो गई
ढूँढती हैं नज़र तू कहाँ हैं मगर
देखते देखते आया आँखों में ग़म

शाम-ए-ग़म की क़सम आज ग़मगीं हैं हम
आ भी जा आ भी जा आज मेरे सनम
शाम-ए-ग़म की क़सम
..............................
Sham-e-gham ki kasam-Footpath 1952

Monday, 10 January 2011

सो जा मेरे प्यारे-फुटपाथ १९५३

हिंदी फिल्म संगीत का खज़ाना अजब गज़ब लोरियों से भरा पड़ा है।
अधिकतर लोकप्रिय लोरियां आपको पुरानी फिल्मों में ही मिलेंगी।
बॉलीवुड का मानना है कि फ़िल्मी बच्चे बड़े हो गए हैं अतः इस ज़माने
में लोरियों की आवश्यकता नहीं है। आजकल लोरी की जगह दूसरे किस्म
के गानों ने ले ली है। उदाहरण के लिए बच्चे बड़े हो गए हैं और शायद
आईटम-सोंग ज्यादा देखना सुनना पसंद करते हैं।


मीठी और मधुर खुशनुमा लोरियां आपने बहुत सुनी होंगी। एक
दुःख भरी लोरी भी सुनिए जो फिल्म फुटपाथ में है। ये सन १९५३
कि फिल्म है. दुःख भरी लोरी गा कर बच्चे को सुलाना बहुत ही
कठिन कार्य है जो आप महसूस करेंगे इस गीत में। गीत फिल्माया
गया है मीना कुमारी पर। गीत लिखा है मजरूह ने और इसकी
धुन बनाई है खय्याम ने। आंसुओं में भीगी लोरी गाने वाली गायिका
हैं आशा भोंसले।





गीत के बोल:

सो जा मेरे प्यारे
सो जा सो जा
सो जा मेरे प्यारे
सो जा सो जा
अंखियों के तारे
सो जा सो जा
अंखियों के तारे
सो जा सो जा

रात सुहानी चंदा गाये
मीठी मीठी निंदिया आये
रात सुहानी चंदा गाये
मीठी मीठी निंदिया आये
राजदुलारे नैनन तारे सो जा
सो जा मेरे प्यारे
सो जा सो जा
अंखियों के तारे
सो जा सो जा

आहों की फ़रियाद की दुनिया
ये दुनिया बेदाज की दुनिया
आहों की फ़रियाद की दुनिया
ये दुनिया बेदाज की दुनिया
तेरी दुनिया चाँद सितारे सो जा

सो जा मेरे प्यारे
सो जा सो जा
सो जा मेरे प्यारे
सो जा सो जा

Sunday, 5 December 2010

बांसुरिया काहे बजाई-आगोश १९५३

लता मंगेशकर की आवाज़ में एक गीत और सुना
जाए फिल्म आगोश से। इस गीत को लिखा है गीतकार
शैलेन्द्र ने और धुन बनाई है रोशन ने। ऐसा लगता है
फिल्म आगोश के लिए संगीतकार रोशन ने कई गीतकारों
की सेवाएँ लीं। पिछला लता का गया गीत कैफ इरफानी
का लिखा हुआ था। इस गीत में लता का बखूबी साथ
दिया है एक और गायिका-सुधा मल्होत्रा ने। बच्चों पर
फिल्माया गया ये गीत मधुर है। इसको शायद ही कभी
आपने सुना होगा पहले । कान्हा के लिए सुधा मल्होत्रा
की आवाज़ और राधा के लिए लता की आवाज़ इस्तेमाल
की गई है। ये जो 'ढिक्का चिका-ढिक्का चिका' ताल इस्तेमाल
की गई है वो आपको राजेश रोशन के कई गीतों में संशोधित
रूप में मिलेगी।

बहुत ही सॉफ्ट किस्म का युगल गीत है ये और जबसे इसे देखा
है मैं इसका फैन बन गया हूँ। पहले कुछ एक बार इसे सुना भर
था।



गीत के बोल:


लता- बाँसुरिया काहे बजाई बिन सुने रहा नहीं जाये रे
सुधा- मीठी नज़र काहे मिलाई बिन देखे रहा नहीं जाये रे
लता- बाँसुरिया काहे बजाई बिन सुने रहा नहीं जाये रे

लता- जाने अनजाने जब मुख पे किसी के आये
तेरा नाम, तेरा नाम
जाने अनजाने
सर से सरक जाये चुनरी सहेली करे बदनाम, बदनाम
होवे रे हमरी जगत हँसाई रे कान्हा
बाँसुरिया काहे बजाई बिन सुने रहा नहीं जाये रे

सुधा- मीठी नज़र काहे मिलाई बिन देखे रहा नहीं जाये रे

सुधा-हँस हँस जादू कर जावें दो नैन तेरे, नैन तेरे
ये दो नैन तेरे
तुम जित जावो उत जावें दो नैन मेरे, नैन मेरे
ये दो नैन मेरे
हो गई हमरी निंदिया पराई हो राधा
मीठी नज़र काहे मिलाई बिन देखे रहा नहीं जाये रे

लता- बाँसुरिय काहे बजाई बिन सुने रहा नहीं जाये रे

छोड़ो छोड़ो हमरी बैन बिहारी हमें छेड़ो ना, छेड़ो ना
सुधा-बतियाँ बना के
बतियाँ बना के हमें अपना बना के मुख फेरो ना, फेरो ना

लता- प्रेम डगरिया बड़ी दुखदाई रे
कान्हा बाँसुरिया काहे बजाई बिन सुने रहा नहीं जाये रे

सुधा-मीठी नज़र काहे मिलाई बिन देखे रहा नहीं जाये रे

लता- बिन सुने रहा नहीं जाये रे

सुधा-ओ बिन देखे रहा नहीं जाये रे

तू है चंदा तो मैं हूँ चकोर-आगोश १९५३

लता मंगेशकर और किशोर कुमार की आवाज़ में आपने
कई युगल गीत सुने होंगे। अधिकतर गीत आपने सुने होंगे
जो लक्ष्मीकांत प्यारेलाल, एस. डी. बर्मन , कल्याणजी आनंदजी
और आर. डी. बर्मन के संगीत निर्देशन वाले हैं। एक गीत
आपको भूपेन हजारिका के संगीत वाला भी सुनवा चुके हैं
इस ब्लॉग पर फिल्म आरोप (१९७३) से

आइये अब सुनें एक सन १९५३ की फिल्म आगोश से इन्हीं
का एक युगल गीत जिसका संगीत रोशन ने तैयार किया
है। बोल इन्दीवर के हैं। सहायक अभिनेता और अभिनेत्री
पर ये गीत फिल्माया गया है और फिल्म के नायक नायिका
नासिर खान और नूतन दर्शकों के बीच बैठे दिखाई दे रहे हैं।
सहायक पुरुष कलाकार तो आगा जैसे लग रहे हैं बाकी का
पता नहीं जी कौन कौन है।



गीत के बोल:

तू है चंदा तो मैं हूँ चकोर
तेरी मेरी प्रीत लगी
हाय रे प्रीत लगी

ओ टूटे ना लगन की डोर
तेरी मेरी प्रीत लगी
हाय रे प्रीत लगी

तू है चंदा तो मैं हूँ चकोर
तेरी मेरी प्रीत लगी
हाय रे प्रीत लगी

देखा देखी हो गई
मिल गए नैन से नैन
तू भी है बेचैन
एख ले मैं भी हूँ बेचैन
हो ये भेद ना दे कोई खोल
तू है चंदा तो मैं हूँ चकोर
तेरी मेरी प्रीत लगी
हाय रे प्रीत लगी

तू है चंदा तो मैं हूँ चकोर
तेरी मेरी प्रीत लगी
हाय रे प्रीत लगी

मैं हूँ तेरी नार छबीली
तू है मेरा छैल
जैसे फैले आंख में काजल
बात गई है फैल
हो, गली कूचों में है यही शोर
तेरी मेरी प्रीत लगी
हाय रे प्रीत लगी

तू है चंदा तो मैं हूँ चकोर
तेरी मेरी प्रीत लगी
हाय रे प्रीत लगी

आंचल में बाल डाल डाल के
सोची है क्या बात
देखो टूट ना जाए बलमा
जीवन भर का साथ
हो, भले दुनिया लगा ले जोर
तेरी मेरी प्रीत लगी
हाय रे प्रीत लगी

तू है चंदा तो मैं हूँ चकोर
तेरी मेरी प्रीत लगी
हाय रे प्रीत लगी

तू है चंदा तो मैं हूँ चकोर
तेरी मेरी प्रीत लगी
हाय रे प्रीत लगी

Thursday, 2 December 2010

आ जा रे अब मेरा दिल पुकारा-आह १९५३

दो साल पीछे चलते हैं। आपने सन १९५५ का गीत
सुन लिया है अब आपको "किलासिक सैड सोंग"
सुनवाते हैं। हमारे एक मित्र शंकर जयकिशन के
भक्त हैं जो अक्सर 'किलासिक गीत' सुनवाते हैं हमें
जब भी उनके निवास का दौरा करो। पेशे से वो
मास्टर जो हैं, तो हाथ में गिलास ले कर बच्चों की
किलास भी लेते हैं। उनका मानना है इस गीत को सुनने
से अच्छे अच्छों की ऑंखें साफ़ हो जाती हैं। ऊपर
गिलास से आशय 'पानी के गिलास' से हैं श्रीमान ।

फिल्म आह एक महत्वकांक्षी फिल्म थी जिसके साथ
बॉक्स ऑफिस ने बेरुखी दिखाई जबकि फिल्म में एक
से बढ़कर एक मधुर गीत हैं । फिल्म इतिहास में कई
ऐसी फ़िल्में हैं जो बड़े बड़े नाम और हिट संगीत
होने के बावजूद दर्शकों द्वारा नकार दी गयीं। नर्गिस
और राज कपूर पर फिल्माए गए गीत संगीत प्रेमी
कई वजहों से चाव से देखते हैं । ये गीत हसरत का
लिखा हुआ है और गायक हैं-मुकेश, लता मंगेशकर।

गीत की पंक्ति-'रो रो के गम भी हारा' सुनकर ये यकीन
हो जाता है कि आशा और लता गायकी में भी बहनें हैं।
ऐसे बहुत कम वाकिये हैं जिनमें दोनों बहनों की आवाजों
में अंतर कर पाना मुश्किल हो जाता है।

मैं तो बस गीत के उस लॉन्ग शोट का विशेष रूप से
मुरीद हूँ जिसमे नायिका कहती है "घबराए हाय रे दिल"
और कैमरा घबरा के दूर भाग जाता है। देखिये १.३२
पर विडियो ।



गीत के बोल:

आ जा रे
आ जा रे, अब मेरा दिल पुकारा
रो रो के ग़म भी हारा
बदनाम ना हो प्यार मेरा, आ जा रे

आ जा रे, अब मेरा दिल पुकारा
रो रो के ग़म भी हारा
बदनाम ना हो प्यार मेरा, आ जा रे

आ आ आ आ आ आ आ आ आ
हं हं हं हं हं हं हं हं हं हं

मौत मेरी तरफ़ आने लगी
जान तेरी तरफ़ जाने लगी
बोल शाम-ए-जुदाई क्या करे
बोल शाम-ए-जुदाई क्या करे
आस मिलने की तड़पाने लगी

आ जा रे, अब मेरा दिल पुकारा
रो रो के ग़म भी हारा
बदनाम ना हो प्यार मेरा, आ जा रे

हो ओ ओ, घबराये हाय ये दिल
हो ओ ओ, घबराये हाय ये दिल
सपनों में आ के कभी मिल
सपनों में आ के कभी मिल

आ जा रे, अब मेरा दिल पुकारा
रो रो के ग़म भी हारा
बदनाम ना हो प्यार मेरा, आ जा रे

आ आ आ आ आ आ आ आ आ
हं हं हं हं हं हं हं हं हं हं

आपने बीमार-ए-ग़म को देख ले
हो सके तो तू हमको देख ले
तूने देखा ना होगा ये समा
तूने देखा ना होगा ये समा
कैसे जाता है दम को देख ले

आ जा रे, अब मेरा दिल पुकारा
रो रो के ग़म भी हारा
बदनाम ना हो प्यार मेरा, आ जा रे

Wednesday, 1 December 2010

मोहब्बत एक शोला है-आगोश १९५३

काले पीले दौर की तरफ चला जाए फिर से, सन १९५३ में,
और सुनिए फिल्म आगोश से एक गीत जो कैफ इरफानी
का लिखा और रोशन का संगीतबद्ध किया हुआ है। इसे गा
रही हैं लता मंगेशकर। परदे पर होंठ हिलाने का श्रेय मिला
है नूतन को।

कभी कभी विचार आता है की गीत के साथ चिपकाये गए
विवरण में १३ का या १९ का पहाडा छाप दिया करूं। विवरण
कितने लोग पढ़ते हैं ये समझना काफी आड़ी टेड़ी खीर है।



गीत के बोल


मुहब्बत एक शोला है,
बचा दामन ज़माने
बचा दामन ज़माने
हुए हम ख़ाक यूं जलकर
जले कोई तो जाने
बचा दामन ज़माने

नहीं मालूम क्या मंज़ूर है
तकदीर को मेरी
तकदीर को मेरी
नहीं मालूम क्या मंज़ूर है
तकदीर को मेरी
तकदीर को मेरी
कटे हैं आज तक रोते
मेरे सावन सुहाने
बचा दामन ज़माने

बहे आंसू हंसी किस्मत
लूटे अरमान भी मेरे
अरमान भी मेरे
बहे आंसू हंसी किस्मत
लूटे अरमान भी मेरे
अरमान भी मेरे
रहे फरियाद ही बन कर मेरे रंगीन तराने
बचा दामन ज़माने

किसी से दिल लगा के हम यहाँ बर्बाद हो गए
बर्बाद हो गए
किसी से दिल लगा के हम बर्बाद हो गए
बर्बाद हो गए
ये जलता सा जिगर अपना,
ये जलते से फ़साने
बचा दामन ज़माने
 
 
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