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Thursday, 14 June 2012

वो हसीं दर्द दे दो-हमसाया १९६८

आज एक मकान में सूखते कपड़ों के बीच एक साये(petticoat) को सूखते  
देख एक कहावत याद आई-गर्दिश में साया भी साथ छोड़ देता है। उस
कहावत के याद आते आते एक हमसाये की याद भी आई जो अचानक
से गायब हो गया था समय के थपेड़ों में। लोग क्यूँ गायब हो जाते हैं
इसका पुख्ता जवाब मिलना असंभव सा है।

खैर फिल्म हमसाया से एक बेहद लोकप्रिय गीत सुनते हैं आज जिसे
गाया है आशा भोंसले ने। इसे फिल्माया गया है माला सिन्हा और जॉय
मुखर्जी पर। माला सिन्हा पर फिल्माए लता के गाये हिट गीत आपने
बहुतेरे सुने होंगे, ये दुर्लभ सा है। क्यूँ ना हो, फिल्म में संगीत नैयर का
जो है। अब नैयर हैं तो लता के गीत आपको फिल्म में कैसे मिल सकते
हैं भाई ? गीत शेवान रिज़वी साहब ने लिखा है

गीत क्या है जनाब   आवाज़ और वाद्य यंत्रों की आवाजों का अद्भुत मिश्रण
है और किसी भी आवाज़ की अनुपस्थिति की कल्पना करना असंभव सा
है। गीत की ताल मनमोहक किस्म की है जो दिमाग की सीढियां तुरंत ही
चढ़ जाती है।




गीत के बोल:

वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ
वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ
वो निगाह मुझ पे डालो, कि मैं ज़िंदगी बना लूँ

वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ

मैं तुमसे मांगती हूँ, ज़रा अपना हाथ दे दो
मुझे आज ज़िंदगी की, वो सुहागरात दे दो
जिसे ले के कुछ मांगूं, और मांग में सजा लूँ

वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ
वो निगाह मुझ पे डालो, कि मैं ज़िंदगी बना लूँ

वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ

मेरी आरज़ू तो देखो, तुम्हें सामने बिठा कर
कभी दिल के पास लाकर, कभी दिलरुबा बना कर
कोई दास्तान सुन लूँ, कोई दास्तां सुना लूँ

वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ
वो निगाह मुझ पे डालो, कि मैं ज़िंदगी बना लूँ

वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ

मैंने प्यार के अलावा कभी तुमसे कुछ ना माँगा
तुम्हें जाने क्या समझ कर मैंने हर कदम पे चाहा
मेरा आज फैसला है तुम्हें हमसफ़र बना लूं

वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ
वो निगाह मुझ पे डालो, कि मैं ज़िंदगी बना लूँ

वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ
..........................................
Wo haseen dard de do-Humsaya 1968

Wednesday, 19 October 2011

चाँद आहें भरेगा-फूल बने अंगारे-१९६३

चाँद को देख के जनता जनार्दन आहें भरती है। इस गीत में चाँद के आहें
भरने का जिक्र है। चाँद आहें क्यूँ भरेगा ये जानने के लिए सुनें पूरा गीत ।
बहुत खूबसूरत गीत है ये सुनने और देखने में। गीत शुरू होता है माला सिन्हा
के भावपूर्ण चेहरे को दिखाते हुए। आम दर्शक/श्रोता जो शायद राजेंद्र कुमार या
दिलीप कुमार को देखना चाहता है हर रोमांटिक गीत में उसको जोर का झटका
धीरे से लगता है राजकुमार की शक्ल देख के।

कुछ भी हो, गीत एक हिट गीत है और इसमें माला सिन्हा ने जो कमसिन और
अर्ध परिपक्व कन्याओं जैसे भाव चेहरे पर लाये हैं उससे आज की पीढ़ी की
कन्याओं, बालाओं, युवतियों को थोड़ा सबक लेना चाहिए कि शर्माया-वर्माया
कैसे जाये।

गीत में चाँद से आहें भराई हैं आनंद बक्षी साहब से और उन्हें धुन पर तैराया है
संगीतकार बन्धुओं कल्याणजी आनंदजी ने।



गीत के बोल:

चाँद आहें भरेगा
फूल दिल थाम लेंगे
चाँद आहें भरेगा
फूल दिल थाम लेंगे
हुस्न की बात चली तो
सब तेरा नाम लेंगे

ऐसा चेहरा हैं तेरा
जैसे रोशन सवेरा
जिस जगह तू नहीं है
उस जगह है अँधेरा
ऐसा चेहरा हैं तेरा
जैसे रोशन सवेरा
जिस जगह तू नहीं है
उस जगह है अँधेरा

कैसे फिर चैन तुझ बिन
तेरे बदनाम लेंगे
कैसे फिर चैन तुझ बिन
तेरे बदनाम लेंगे
हुस्न की बात चली तो
सब तेरा नाम लेंगे

चाँद आहें भरेगा

आँख नाजुक सी कलियाँ
बात मिसरी की डालियाँ
होंठ गंगा के साहिल जुल्फें
जन्नत की गलियाँ
आँख नाजुक सी कलियाँ
बात मिसरी की डालियाँ
होंठ गंगा के साहिल जुल्फें
जन्नत की गलियाँ

तेरी खातिर फरिश्तें
सर पे इल्जाम लेंगे
तेरी खातिर फरिश्तें
सर पे इल्जाम लेंगे
हुस्न की बात चली तो
सब तेरा नाम लेंगे

चाँद आहें भरेगा

चुप न होगी हवा भी
कुछ कहेगी घटा भी
और मुमकिन है तेरा
जिक्र कर दे खुदा भी
चुप न होगी हवा भी
कुछ कहेगी घटा भी
और मुमकिन है तेरा
जिक्र कर दे खुदा भी

फिर तो पत्थर भी शायद
जफ्त से काम लेंगे
फिर तो पत्थर भी शायद
जफ्त से काम लेंगे

चाँद आहें भरेगा
फूल दिल थाम लेंगे
हुस्न की बात चली तो
सब तेरा नाम लेंगे

चाँद आहें भरेगा
...................................
Chand aahen bharega-Phool bane angaare-1963

Thursday, 28 July 2011

इब्तिदा-ए-इश्क में हम -हरियाली और रास्ता १९६२

आज फरियाली का नाश्ता करते हुए एक फिल्म का नाम याद आया
हरियाली और रास्ता. फिल्म सन १९६२ की है जनाब. गीत एक युगल
गीत है लता और मुकेश की आवाजों में. गीत हलके फुल्के मूड वाला
है जिसे अपनी अपनी फ्री इस्टाइल में गाया जा रहा है परदे पर. फैशनेबल
स्वेटर के साथ सरकारी दफ्तर के चपरासी की टोपी का कुछ अजीब सा
कोम्बिनेशन लिए नायक बर्फीले पहाड़ों में कामगार मजदूर सरीखी दिख
रही नायिका के साथ गीत गा रहा है. बर्फीले इलाकों में ऐसी टोपी पहने
शायद ही आप किसी को देखें. अब शायद आप समझ गए होंगे कि फिल्म
जगत में इस जुमले का प्रयोग ज्यादा क्यूँ होता है-"अलग हट के"
नायक नायिका अति गदगद हैं उसकी क्या वज़ह है इसके लिए आपको एक
बार फिल्म अवश्य देखना पड़ेगी.

गीत लिखा है हसरत जयपुरइ ने और इसकी धुन बनायीं है शंकर जयकिशन
ने. फिल्म के सबसे लोकप्रिय गीतों में इसकी गिनती होती है.





गीत के बोल:

इब्तिदा-ए-इश्क़ में हम सारी रात जागे
अल्ला जाने क्या होगा आगे
मौला जाने क्या होगा आगे
दिल में तेरी उलफ़त के बंधने लगे धागे,
अल्ला जाने क्या होगा आगे
मौला जाने क्या होगा आगे

क्या कहूँ कुछ कहाँ नहीं जाए
बिन कहे भी रहा नहीं जाए
रात-रात भर करवट मैं बदलूँ
दर्द दिल का सहा नहीं जाए
नींद मेरी आँखों से दूर-दूर भागे,
अल्ला जाने क्या होगा आगे
मौला जाने क्या होगा आगे

दिल में जागी प्रीत की ज्वाला
जबसे मैंने होश सम्भाला
मैं हूँ तेरे प्यार की सीमा
तू मेरा राही मतवाला
मेरे मन की बीना में तेरे राग जागे,
अल्ला जाने क्या होगा आगे
मौला जाने क्या होगा आगे

तूने जब से आँख मिलाई
दिल से इक आवाज़ ये आई
चल के अब तारों में रहेंगे
प्यार के हम तो हैं सौदाई
मुझको तेरी सूरत भी चाँद रात लागे,
अल्ला जाने क्या होगा आगे
मौला जाने क्या होगा आगे
....................................
Ibteda-e-ishq mein ham-Hariyali aur rasta 1962

Sunday, 17 July 2011

आप आए तो खयाल-ए-दिल-ए-नाशाद-गुमराह १९६३

गीत को अगर एक पंक्ति या वाक्य में लिखा जाए तो यूँ होगा -
आप जले पर नमक छिडकने चले आये. इसी बात को कई
पहलुओं के साथ आहिस्ता से कहा गया है इस गीत में साहिर द्वारा.
आखिर में सब बातों को याद करने के लिए अफ़सोस भी व्यक्त
किया गया है.

बात आहिस्ता से भले ही कही गयी हो मगर महेंद्र कपूर की बुलंद
आवाज़ में है. महेंद्र कपूर को दो फिल्मों के गीत से बहुत फायदा
हुआ-गुमराह और हमराज़. दोनों ही फिल्मों में रवि का संगीत है.

एक फ़िल्मी गीत को रेकोर्ड करने के लिए साजिंदों की कितनी जमात
हो सकती है इस गीत से अंदाजा लगाइए. ये बात दीगर है कि इन
साजिंदों को गायकों की तुलना में चवन्नी या अठन्नी ही प्राप्त होती है.
और शायद एक बात और गौर करने लायक है-सितार बजाने वाले शास्त्रीय
संगीत के कलाकार आराम से नीचे खुली जगह में बैठ के सितार वादन
करते हैं, यहाँ टीन की छोटी फोल्डिंग कुर्सी पर असुविधाजनक तरीके से
साजिन्दे सितार बजने की चेष्टा कर रहे हैं.




गीत के बोल:

आप आए तो खयाल-ए-दिल-ए-नाशाद आया
आप आए तो खयाल-ए-दिल-ए-नाशाद आया
कितने भूले हुए ज़ख्मों का पता याद आया
आप आए

आप के लब पे कभी अपना भी नाम आया था
शोख नजरों सी मुहब्बत का सलाम आया था
उम्र भर साथ निभाने का पयाम आया था
उम्र भर साथ निभाने का पयाम आया था
आपको देख के वो अहदे वफा याद आया

कितने भूले हुए ज़ख्मों का पता याद आया
आप आए तो खयाल-ए-दिल-ए-नाशाद आया
आप आए

रूह में जल उठे बुझती हुई यादों के दिए
कैसे दीवाने थे हम आपको पाने के लिए
यूँ तो कुछ कम नहीं जो आपने एहसान किए
यूँ तो कुछ कम नहीं जो आपने एहसान किए
पर जो मांगे से ना पाया वो सिला याद आया

कितने भूले हुए ज़ख्मों का पता याद आया
आप आए तो खयाल-ए-दिल-ए-नाशाद आया
आप आए

आज वो बात नहीं फिर भी कोई बात तो है
मेरे हिस्से में ये हल्की सी मुलाकात तो है
ग़ैर का हो के भी ये हुस्न मेरे साथ तो है
ग़ैर का हो के भी ये हुस्न मेरे साथ तो है
हाय किस वक्त मुझे कब का गिला याद आया

कितने भूले हुए ज़ख्मों का पता याद आया
आप आए तो खयाल-ए-दिल-ए-नाशाद आया
आप आए
.......................................
Aap aaye to khayal-e-dil-e-nashaad-Gumrah 1963

तेरी शोख नज़र का इशारा-पतंग १९६०

आपको सुनवाते हैं पतंग फिल्म से एक युगल गीत जो मुकेश और लता का गाया हुआ
है. इसके बोल लिखे हैं राजेंद्र कृष्ण ने और संगीत तैयार किया है चित्रगुप्त ने.
सन १९६० की फिल्म पतंग में राजेंद्र कुमार और माला सिन्हा क्रमशः नायक नायिका
हैं.

एक समय था फिल्म देखने वाले ये कहते-राजेंद्र कुमार की फिल्म है इसमें गाने बढ़िया
होंगे. श्वेत श्याम युग की अधिकतर वे फ़िल्में जिनमें राजेंद्र कुमार ने अभिनय किया
मधुर गीतों से भरपूर होती थीं. सत्तर के दशक में ये धारणा थोड़ी बदलना शुरू हुयी.
राजेंद्र कुमार के जुबली कुमार बनने की प्रक्रिया में उनकी फिल्मों के संगीत का भी बड़ा
योगदान रहा है.

श्रेणी बनाने के शौकीनों के लिए सुझाव - इसे शोख नज़र गीत , नाव गीत कहा
जा सकता है.





गीत के बोल:


तेरी शोख नज़र का इशारा
मेरी वीरान रातों का तारा
तेरी शोख नज़र का इशारा

तेरी बाँहों का जब है सहारा
पिया मझधार भी है किनारा
तेरी बाँहों का जब है सहारा

तेरी शोख नज़र का इशारा
मेरी वीरान रातों का तारा
तेरी शोख नज़र का इशारा

निकले हैं राही मस्ती में डूबे
मंजिल का क्या है ,मिले न मिले
निकले हैं राही मस्ती में डूबे
मंजिल का क्या है ,मिले न मिले

तुम साथ हो तो किस्मत पे अपनी
शिकवे कहाँ के कहाँ के गीले

ओ जी हो
तेरी शोख नज़र का इशारा
मेरी वीरान रातों का तारा
तेरी शोख नज़र का इशारा

तेरी बाँहों का जब है सहारा
पिया मझधार भी है किनारा
तेरी बाँहों का जब है सहारा


एक ख्वाब सा है या है कहानी
कुछ है यकीन कुछ यकीन भी नहीं
एक ख्वाब सा है या है कहानी
कुछ है यकीन कुछ यकीन भी नहीं
हम तो ये जानें सच है या सपना
जो तुम नहीं हो तो हम भी नहीं

हो जी हो
तेरी बाँहों का जब है सहारा
पिया मझधार भी है किनारा
तेरी बाँहों का जब है सहारा

तेरी शोख नज़र का इशारा
मेरी वीरान रातों का तारा
तेरी शोख नज़र का इशारा
.........................
Teri shokh nazar ka ishara-Patang 1960

Monday, 11 July 2011

दिल से दिल टकराये-लव मैरिज १९५९

गायक-गीता दत्त, मोहम्मद रफ़ी
गीतकार-शैलेन्द्र
संगीतकार-शंकर जयकिशन
फिल्म-लव मैरिज
वर्ष-१९५९




गीत के बोल:

दिल से दिल टकराये,
फिर दोनों घबराये
सब्र की डोरी टूट गई तो
लव मैरिज कर लाये
लव मैरिज कर लाये

दिल से दिल टकराये
फिर दोनों घबराये
सब्र की डोरी टूट गई तो
लव मैरिज कर लाये
लव मैरिज कर लाये

दिल से दिल टकराये
फिर दोनों घबराये
सब्र की डोरी टूट गई तो
लव मैरिज कर लाये
लव मैरिज कर लाये

वो उत्तर के पंछी थे
और वो दक्षिण की मैना
ली ली ली ली ली ली ली ली ली या
वो उत्तर के पंछी थे
और वो दक्षिण की मैना
एक रोज़ एक बाग़ में
यूँ ही लड़ गये नैना
एक रोज़ एक बाग़ में
यूँ ही लड़ गये नैना
दिल दे के घर आये
घर आ कर पच्छताये
सब्र की डोरी टूट गई तो
लव मैरिज कर लाये
लव मैरिज कर लाये

सब्र की डोरी टूट गई तो
लव मैरिज कर लाये
लव मैरिज कर लाये

कब तक छत पर लेट कर
करते तारों से बातें
ली ली ली ली ली ली ली ली ली या
कब तक छत पर लेट कर
करते तारों से बातें
नींद चली गई रूठ के
कैसे कटतीं रातें
नींद चली गई रूठ के
कैसे कटतीं रातें
अपनों से शरमाये
ग़ैरों से कतराये
सब्र की डोरी टूट गई तो
लव मैरिज कर लाये
लव मैरिज कर लाये

दिल से दिल टकराये
फिर दोनों घबराये
सब्र की डोरी टूट गई तो
लव मैरिज कर लाये
लव मैरिज कर लाये

दिल से दिल टकराये
फिर दोनों घबराये
सब्र की डोरी टूट गई तो
लव मैरिज कर लाये
लव मैरिज कर लाये
...............................
Dil se dil takraye-Love Marriage 1959

Wednesday, 6 July 2011

तसवीर तेरी दिल में-माया १९६१

फिल्म माया के गीत में वायलिन की आवाज़ का जिक्र हम कर चुके
हैं अब सुनिए बांसुरी की मनमोहक तान वाला मधुर युगल गीत।
इसे गाया है लता और रफ़ी ने। ये गीत भी ऊंची तान पर जाता
है और इसे गुनगुनाना आसान नहीं है जबकि सुननेवाला असफल
कोशिश ज़रूर करता है। गीत फिल्माया गया है देव आनंद और माला
माला सिन्हा पर। बोल मजरूह के हैं और संगीत सलिल चौधरी का। गीत
बेहद रोमांटिक है और इसकी सादगी के सभी कायल हैं। सरल और
सौम्य तरीके से अपनी भावनाओं का इज़हार कैसे किया जाये इस
गीत से सीखा जा सकता है।



गीत के बोल :

तसवीर तेरी दिल में,
जिस दिन से उतारी है,

तसवीर तेरी दिल में,
जिस दिन से उतारी है,
फिरूँ तुझे संग ले के,
नए-ऩए रंग ले के,
सपनों की महफिल में

तसवीर तेरी दिल में,
जिस दिन से उतारी है,
फिरूँ तुझे संग ले के,
नए-ऩए रंग ले के,
सपनों की महफिल में

तसवीर तेरी दिल में

माथे की बिंदिया तू है सनम,
नैनों का कजरा पिया तेरा ग़म
माथे की बिंदिया तू है सनम,
नैनों का कजरा पिया तेरा ग़म
नैन के नीचे-नीचे, रहूँ तेरे पीछे-पीछे,
चलूँ किसी मंजिल में

तसवीर तेरी दिल में,
जिस दिन से उतारी है,
फिरूँ तुझे संग ले के,
नए-ऩए रंग ले के,
सपनों की महफिल में

तसवीर तेरी दिल में

तुमसे नज़र जब गई है मिल,
जहाँ हैं कदम तेरे वहीं मेरा दिल
तुमसे नज़र जब गई है मिल,
जहाँ हैं कदम तेरे वहीं मेरा दिल
झुकें जहाँ पलकें तेरी, खुलें जहाँ ज़ुल्फें तेरी,
रहूँ उसी मंज़िल में

तसवीर तेरी दिल में,
जिस दिन से उतारी है,
फिरूँ तुझे संग ले के,
नए-ऩए रंग ले के,
सपनों की महफिल में

तसवीर तेरी दिल में

तूफ़ान उठाएगी दुनिया मगर,
रूक ना सकेगा दिल का सफ़र
तूफ़ान उठाएगी दुनिया मगर,
रूक ना सकेगा दिल का सफ़र
यूँ ही नजर मिलती होगी,
यूँ ही शमाँ जलती होगी,
तेरी-मेरी मंजिल में।

तसवीर तेरी दिल में,
जिस दिन से उतारी है,
फिरूँ तुझे संग ले के,
नए-ऩए रंग ले के,
सपनों की महफिल में

तसवीर तेरी दिल में

............................
Tasveer teri dil mein-Maya 1961

Monday, 6 June 2011

तुम्हीं तो मेरी पूजा हो-सुहागन १९६४

फिल्म सुहागन(१९६४) से आपको पूर्व में २ गीत सुनवा चुके हैं।
अब सुनिए फिल्म का तीसरा गीत जो कि लता और तलत
की आवाज़ में एक युगल गीत है। इस फिल्म का एक युगल गीत
जो आपने पहले सुना था वो मन्ना डे और लता की आवाज़ में है।
६० के दशक के आते तलत महमूद को फिल्मों में गीत मिलना
कम हो गये। बदलते ज़माने और पसंद के साथ दूसरे गायक दृश्य
में दिखाई देने लगे। दूसरे संगीतकार जहाँ उनसे किनारा करने लगे,
मदन मोहन ने उन्हें कुछ गीत अवश्य दिए गाने को. मदन मोहन
ने तलत महमूद को फिल्म जहाँआरा में भी अवसर दिए।






गीत के बोल:


तुम्हीं तो मेरी पूजा हो
हाँ हाँ हाँ आ आ आ आ
तुम्हीं तो मेरी पूजा हो
तुम्हें दिल में बसाया है

तुम्हीं तो मेरी दुनिया हो
हाँ हाँ हाँ हाँ आ आ आ आ
तुम्हीं तो मेरी दुनिया हो
तुम्हें दिल से लगाया है

तुम्हीं तो मेरी दुनिया हो

इबादत है निगाहों की तुझी को देखते रहना
तेरी हर बात को सहना
तुम्हीं तो मेरे साथी हो तुम्हें अपना बनाया है

तुम्हीं तो मेरी पूजा हो

तमन्ना है इन आँखों की तुम्हारे ही नज़ारे हों
जहाँ देखूँ तुम्हें देखूँ हसीं जलवे तुम्हारे हों
हसीं जलवे तुम्हारे हों
तुम्हीं ने मेरी मंज़िल को बहारों से सजाया है

तुम्हीं तो मेरी दुनिया हो

तुम्हारे हाथ में है अब हमारी लाज का आँचल
न बह जाए कहीं देखो हमारी आँख का काजल
न बह जाए कहीं देखो हमारी आँख का काजल
हमारी आंख का काजल

तुम्हीं तो मेरी दुनिया हो
तुम्हीं तो मेरी पूजा हो
......................................
Tumhin to meri pooja ho-Suhagan 1964

Sunday, 5 June 2011

तू मेरे सामने है-सुहागन १९६४

आइये आपको एक रोमांटिक गीत सुनवाते हैं। ये असली छाया गीत
है, श्वेत श्याम युग का और इसमें भाव भंगिमाएं भी कुछ श्याम
वर्ण सी हैं । गीत की सिचुएशन कुछ विरोधाभासी किस्म की सी है।
नायक रोमांटिक मूड में है और नायिका बेबस और लाचार सी दिखती
है। नायक हैं गुरुदत्त और नायिका माला सिन्हा।

नायक न्यूनतम और दृढ़ प्रतिज्ञ से भावों के साथ गीत गा रहा है
और नायिका अपनी पूरी अभिनय क्षमता का प्रदर्शन कर रही है और
काफी ज़द्दो ज़हद के बाद आखिरकार समर्पण वाली मुद्रा में आ जाती
है। मदन मोहन के साथ हसरत जयपुरी ने बहुत कम फिल्मों में गीतों
पर काम किया है। इस गीत के लिए तो मानना पड़ेगा कि हसरत जयपुरी
का रोमांटिक गीतों को लिखने के मामले में कोई सानी नहीं। गीत में
संगीत कहीं कहीं लाऊड हो जाता है, इसको मदन मोहन भक्तों की भाषा
में बोलें तो-इतना तो चलता है गाने में.



गीत के बोल :

तू मेरे सामने है
तेरी जुल्फें हैं खुली
तेरा आँचल है ढला
मैं भला होश में कैसे रहूँ

तू मेरे सामने है
तेरी जुल्फें हैं खुली
तेरा आँचल है ढला
मैं भला होश में कैसे रहूँ

तू मेरे सामने है
तेरी जुल्फें हैं खुली
तेरा आँचल है ढला
मैं भला होश में कैसे रहूँ

तेरी आँखें तो छलकते हुए पैमाने हैं
तेरी आँखें तो छलकते हुए पैमाने हैं
और तेरे होंठ लरजते हुए मैखाने हैं
मेरे अरमान इसी बात पे दीवाने हैं
मैं भला होश में कैसे रहूँ, कैसे रहूँ

तू मेरे सामने है
तेरी जुल्फें हैं खुली
तेरा आँचल है ढला
मैं भला होश में कैसे रहूँ

तू जो हँसती है तो बिजली सी चमक जाती है
तू जो हँसती है तो बिजली सी चमक जाती है
तेरी साँसों से ग़ुलाबों की महक आती है
तू जो चलती है तो कुदरत भी बहक जाती है
मैं भला होश में कैसे रहूँ, कैसे रहूँ

तू मेरे सामने है
तेरी जुल्फें हैं खुली
तेरा आँचल है ढला
मैं भला होश में कैसे रहूँ

................................
Too mere samne hai-Suhagan 1964

Tuesday, 12 April 2011

जो गुज़र रही है मुझपर-मेरे हुज़ूर १९६८

सन १९६७ वाले पिछले गीत के सुरीले प्यानो ने एक और सुरीले
गीत की याद ताज़ा करवा दी। उल्लेखनीय है कि ये गीत एक साल बाद
यानि कि १९६८ में प्रकट हुआ। इस गीत में प्यानो के उस्ताद शंकर
जयकिशन का जादू है। संगीतकार जोड़ी शंकर जयकिशन ने प्यानो
का बहुत इस्तेमाल किया है अपने गीतों में। ये भी ऐसा ही एक गीत
है जिसमें गीत का कद कलाकारों के अभिनय से बड़ा प्रतीत होगा
आपको। ये मेरा एक पसंदीदा गीत है। गीत परदे पर गा रहे हैं
राजकुमार। गीत के बोल और कलाकारों के हाव भाव से आप
अचम्भे में पढ़ जायेंगे कि ख़ुशी का इज़हार हो रहा है या दुःख का।
इस भाव को भांपने के लिए आपको ये फिल्म देखनी पड़ेगी। वैसे
अगर आप माला सिन्हा का चेहरा ध्यान से देखेंगे तो कुछ कुछ
समझ पाएंगे कि क्या माजरा है।

हसरत जयपुरी के लिखे बोलों में प्राण फूंके हैं मोहम्मद रफ़ी ने
संगीतकार शंकर जयकिशन के इशारों पर।

..........................



गीत के बोल:

हा आ आ , हा आ आ आ

जो गुज़र रही है मुझपर उसे कैसे मैं बताऊँ
जो गुज़र रही है मुझपर उसे कैसे मैं बताऊँ
वो ख़ुशी मिली है मुझको, मैं ख़ुशी से मर ना जाऊं
वो ख़ुशी मिली है मुझको, मैं ख़ुशी से मर ना जाऊं

मेरे दिल की धडकनों का ये पयाम तुमको पहुंचे
मैं तुम्हारा हमनशीन हूँ ये सलाम तुमको पहुंचे
उसे बंदगी मैं समझूं जो तुम्हारे काम आऊँ

वो ख़ुशी मिली है मुझको, मैं ख़ुशी से मर ना जाऊं
हाँ, जो गुज़र रही है मुझपर उसे कैसे मैं बताऊँ

मेरे दिल की महफिलों में वो मुकाम है तुम्हारा
के खुदा के बाद लब पर, बस नाम है तुम्हारा
मेरी आरजू यही है, मैं तुम्हारे गीत गाऊँ

वो ख़ुशी मिली है मुझको, मैं ख़ुशी से मर ना जाऊं
हाँ, जो गुज़र रही है मुझपर उसे कैसे मैं बताऊँ

.......................................
Jo guzar rahi hai mujhpar-Mere huzoor 1968

Friday, 10 December 2010

चलो एक बार फिर से-गुमराह १९६३

मिलने के पहले भी तो हम अजनबी थे। मिलने के
बाद फिर से अजनबी बन जाएँ। साहिर लुधियानवी
ने प्रेम को नए नए कोण से देख लिया। जितने प्रमाणिक
उनके गीत लगते हैं प्रेम के मामले में उतने दूसरों के
नहीं-ऐसा मैंने एक साहिर प्रेमी को कहते सुना। मैं
भी सोच में पड़ गया की ऐसा क्या क्या है साहिर के
रोमांटिक गीतों में कि जनता तारीफों के पुल बांधती
नहीं अघाती ।

तो जनाब उनके गीतों में कुछ कटु सच्चाई की मिलावट
भी पायी जाती है। केवल कल्पना ही नहीं उन्होंने
अपने अनुभव भी निचोड़ डाले हैं गीतों में। साहिर की
लिखी नज़्म प्रस्तुत है फिल्म गुमराह से। इसमें भी
उन्होंने -वो अफसाना जिसे अंजाम तक लाना ना हो
मुमकिन उसे एक खूबसूरत मोड़ देकर छोड़ना अच्छा,
यहाँ भूलने की जगह छोड़ना शब्द इस्तेमाल किया गया
है, क्यूंकि भूलना तो संभव ही नहीं है , या रिश्ते जब
बोझ बन जाते हैं तो उन्हें तोडना ही बेहतर है- का सन्देश
देते हैं।

प्रेम त्रिकोण पर आधारित ये फिल्म सन १९६३ में सिनेमा
घरों में प्रकट हुई थी। प्रस्तुत गीत के लिए महेंद्र कपूर
को सर्वश्रेष्ठ गायक के फिल्मफैयर पुरस्कार से नवाजा
जा चूका है। उस साल की बाकी दो प्रविष्टियों में जो गीत
थे वो इस प्रकार से हैं -१) मेरे महबूब तुझे मेरी मोहब्बत
की कसम फिल्म मेरे महबूब से रफ़ी का गाया हुआ और
२) जो वादा किया वो-ताजमहल से लता का गाया हुआ।
साहिर को फिल्म ताजमहल के गीत लेखन के लिए
फिल्मफैयर पुरस्कार दिया गया। संगीतकार रवि के
लिए भी ये फिल्म फायदेमंद साबित हुई। बी आर चोपड़ा
की आगे आनेवाली अधिकांश फिल्मों में आपको
संगीतकार रवि का संगीत मिलेगा।



गीत के बोल:

चलो एक बार फिर से, अजनबी बन जाये हम दोनों
चलो एक बार फिर से, अजनबी बन जाये हम दोनों

ना मैं तुमसे कोई उम्मीद रखूँ दिलनवाज़ी की
ना तुम मेरी तरफ देखो गलत अंदाज़ नज़रों से
ना मेरे दिल की धड़कन लडखडाये मेरी बातों में
ना ज़ाहिर हो तुम्हारी कश्म-कश का राज़ नज़रों से

चलो एक बार फिर से, अजनबी बन जाये हम दोनों
चलो एक बार फिर से, अजनबी बन जाये हम दोनों

तुम्हें भी कोई उलझान रोकती है पेशकदमी से
मुझे भी लोग कहते हैं, की यह जलवे पराये हैं
मेरे हमराह भी रुसवाइयां हैं मेरे माज़ी की
मेरे हमराह भी रुसवाइयां हैं मेरे माज़ी की
तुम्हारे साथ भी गुजरी हुई रातों के साये हैं

चलो एक बार फिर से, अजनबी बन जाये हम दोनों
चलो एक बार फिर से, अजनबी बन जाये हम दोनों

तार्रुफ़ रोग हो जाए तो उसको भूलना बेहतर
ताल्लुक बोझ बन जाए तो उसको तोड़ना अच्छा
वो अफसाना जिसे अंजाम तक लाना ना हो मुमकिन
वो अफसाना जिसे अंजाम तक लाना ना हो मुमकिन
उसे एक खूबसूरत मोड़ देकर छोड़ना अच्छा

चलो एक बार फिर से, अजनबी बन जाये हम दोनों
चलो एक बार फिर से, अजनबी बन जाये हम दोनों
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Chalo ek baar fir se ajnabi ban jaayen ham dono-Gumrah 1963
 
 
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