अरसे बाद एक मित्र से मुलाक़ात हुई एक हॉस्पिटल में । बहुत दिनों
बाद मिले तो वे कुछ भावुक और कुछ हॉस्पिटेबल से हो उठे। उनका
हॉस्पिटल में हॉस्पिटेबल होना कुछ अनूठा सा लगा। अस्पताल के कैंटीन
में वे चाय और समोसे के लिए आग्रह करने लगे। ज्ञात हो वे अपनी तरफ
से आग्रह वैसे भी कम किया करते थे और हम लोगों से आग्रह की अपेक्षा
रखने वालों में से एक थे। ये उन दिनों की बात है जब हम लोग एक शैक्षणिक
संस्था में कुछ क्षण के लिए ज्ञान के छींटे और अनुभव बटोरने जाया करते थे।
हमने भी कुछ पुराने ज़माने का उधार वसूलने वाले अंदाज़ में ४ समोसे डकार
लिए जो सामान्य व्यक्ति और बीमार दोनों के लिए समान रूप से उपयुक्त लगते
थे स्वाद में। बस, ताज़े बने हुए थे इसलिए हम उसे पूड़ी-सब्जी वाले अंदाज़ में
खा गए। उसके बाद हैं थोड़ी सी शर्म अवश्य आई इस बात को ले कर कि अस्पताल
में हम मरीज़ के हाल-चाल जानने के बजाये पेट भरने का कार्य कर रहे हैं। शायद
ये भाव जो मन में उपजा वह हमारे मित्र कि अंतरात्मा से निकले स्वर की वजह से
हुआ हो:अरे यार ऐसे ठूंस रहे हो जैसे जन्म जन्मांतर से भूखे हो। उनके चेहरे पर
समोसे खाने की प्रक्रिया के बाद हॉस्पिटलिटी वाले भाव नदारद थे और जो भाव थे
उनको देख के हमारे मन में “पिटी” वाले भाव उभारना शुरू हो गए।
हुआ यूँ वे अपने किसी बीमार मित्र को देखने वहां आये हुए थे । बीमार शब्द से याद
आया–बीमा+मार । हर एक को बीमा अवश्य करवा लेना चाहिए। कम से कम वो
बीमारी की मार(इलाज़ का खर्चा)से तो कुछ हद तक बचेगा।
आइये आपको अस्पताल की पृष्ठभूमि पर बना एक गीत सुनवाते हैं। इस गीत में भी
आपको अस्पताल के कुछ हिस्से दिखलाई दे जायेंगे। नायक एक्स रे की फिल्म देखते
देखते अतीत की सुनहरी यादों में खो खो जाता है। फिल्म की कहानी अस्पताल में
घूमती है। अभी तो फिल्म के नायक नायिका खुशनुमा से गीत में खुश दिखायी दे रहे
हैं। आगे आने वाले गीतों में हम चर्चा करेंगे फ़िल्मी अस्पताल के बारे में।
गीत है फिल्म दिल एक मंदिर से जिसमें राजेंद्र कुमार और मीना कुमारी एक रोमांटिक
गीत में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं जिसे लिखा है हसरत जयपुरी ने और इसकी
धुन बनाई है शंकर जयकिशन ने।
गीत के बोल:
यहाँ कोई नहीं तेरा मेरे सिवा
कहती है झूमती गाती हवा
तुम सबको छोड़ कर आ जाओ, आ जाओ, आ जाओ
तुम सबको छोड़ कर आ जाओ, आ जाओ, आ जाओ
बादल भी बन के पानी एक दिन तो बरसता है
लोहा भी जल के आग में एक दिन तो पिघलता है
जिस दिल में हो मोहब्बत एक दिन तो तडपता है
यहाँ कोई नहीं तेरा मेरे सिवा
कहती है झूमती गाती हवा
तुम सबको छोड़ कर आ जाओ, आ जाओ, आ जाओ
तुम सबको छोड़ कर आ जाओ, आ जाओ, आ जाओ
तेरे मन की उलझनें सुलझाना चाहता हूँ
तुझे आज से अपनी मैं बनाना चाहता हूँ
मन के सुनहरे मंदिर में बिठाना चाहता हूँ
यहाँ कोई नहीं तेरा मेरे सिवा
कहती है झूमती गाती हवा
तुम सबको छोड़ कर आ जाओ, आ जाओ, आ जाओ
तुम सबको छोड़ कर आ जाओ, आ जाओ, आ जाओ
...........................................
Yahan koi nahin tera mere siwa-Dil ek mandir 1963
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Friday, 16 December 2011
Thursday, 4 August 2011
अंदाज़ मेरा मस्ताना-दिल अपना और प्रीत परायी १९६०
ये शायद मीना कुमारी के ट्रेजेडी क्वीन की छबि वाले युग में प्रवेश करने
के पहले के खुशनुमा गीतों में से एक है. एक ड्रीम सीक्वेंस की तरह सा
ये गीत एक मस्त धुन के दायरे में कैद है. मीना कुमारी के साथ इस दृश्य
में अभिनेता राजकुमार हैं. एक शब्द-तकलीना इस गीत का आकर्षण है.
इसका क्या मतलब है और क्यूँ प्रयोग हुआ है मेरे स्टार पर खोज जारी है.
गीत लिखा है शैलेन्द्र ने जिसे गाया है लता मंगेशकर के साथ महिला कोरस
ने. शंकर जयकिशन ने फिल्म दिल अपना और प्रीत परायी फिल्म का संगीत
तैयार किया है.
गीत के बोल:
अंदाज़ मेरा मस्ताना,
माँगे दिल का नज़राना
ज़रा सोच के आँख मिलाना,
हो जाए न तू दीवाना
के हम भी जवाँ हैं, समा भी जवाँ है
न फिर हम से कहना
मेरा दिल कहाँ है, मेरा दिल कहाँ है
तकलीना
अंदाज़ मेरा मस्ताना,
माँगे दिल का नज़राना
ज़रा सोच के आँख मिलाना,
हो जाए न तू दीवाना
के हम भी जवाँ हैं, समा भी जवाँ है
न फिर हम से कहना
मेरा दिल कहाँ है, मेरा दिल कहाँ है
प्यार की किताब हूँ मैं सच हूँ फिर भी ख़्वाब हूँ मैं
देखकर सुरूर आए, वो अजब शराब हूँ मैं
मैं हूँ जवानी का रंगीं तराना, रंगीं तराना
तकलीना
अंदाज़ मेरा मस्ताना,
माँगे दिल का नज़राना
ज़रा सोच के आँख मिलाना,
हो जाए न तू दीवाना
के हम भी जवाँ हैं, समा भी जवाँ है
न फिर हम से कहना
मेरा दिल कहाँ है, मेरा दिल कहाँ है
तुझको मेरी जुस्तुजू है मुझको तेरी आरज़ू है
मेरे दिल का आईना तू दिल के आईने में तू है
हम से ही रोशन है सारा ज़माना, सारा ज़माना
तकलीना
अंदाज़ मेरा मस्ताना,
माँगे दिल का नज़राना
ज़रा सोच के आँख मिलाना,
हो जाए न तू दीवाना
के हम भी जवाँ हैं, समा भी जवाँ है
न फिर हम से कहना
मेरा दिल कहाँ है, मेरा दिल कहाँ है
मैं किधर हूँ तू कहाँ है ये ज़मीं या आसमाँ है
मेरे तेरे प्यार की ये क्या अजीब दास्ताँ है
मीठा सा ये दर्द भी है सुहाना, दर्द सुहाना
तकलीना
अंदाज़ मेरा मस्ताना,
माँगे दिल का नज़राना
ज़रा सोच के आँख मिलाना,
हो जाए न तू दीवाना
के हम भी जवाँ हैं, समा भी जवाँ है
न फिर हम से कहना
मेरा दिल कहाँ है, मेरा दिल कहाँ है
.........................................
Andaz mera mastana-Dil Apna Aur Preet Parayi 1960
के पहले के खुशनुमा गीतों में से एक है. एक ड्रीम सीक्वेंस की तरह सा
ये गीत एक मस्त धुन के दायरे में कैद है. मीना कुमारी के साथ इस दृश्य
में अभिनेता राजकुमार हैं. एक शब्द-तकलीना इस गीत का आकर्षण है.
इसका क्या मतलब है और क्यूँ प्रयोग हुआ है मेरे स्टार पर खोज जारी है.
गीत लिखा है शैलेन्द्र ने जिसे गाया है लता मंगेशकर के साथ महिला कोरस
ने. शंकर जयकिशन ने फिल्म दिल अपना और प्रीत परायी फिल्म का संगीत
तैयार किया है.
गीत के बोल:
अंदाज़ मेरा मस्ताना,
माँगे दिल का नज़राना
ज़रा सोच के आँख मिलाना,
हो जाए न तू दीवाना
के हम भी जवाँ हैं, समा भी जवाँ है
न फिर हम से कहना
मेरा दिल कहाँ है, मेरा दिल कहाँ है
तकलीना
अंदाज़ मेरा मस्ताना,
माँगे दिल का नज़राना
ज़रा सोच के आँख मिलाना,
हो जाए न तू दीवाना
के हम भी जवाँ हैं, समा भी जवाँ है
न फिर हम से कहना
मेरा दिल कहाँ है, मेरा दिल कहाँ है
प्यार की किताब हूँ मैं सच हूँ फिर भी ख़्वाब हूँ मैं
देखकर सुरूर आए, वो अजब शराब हूँ मैं
मैं हूँ जवानी का रंगीं तराना, रंगीं तराना
तकलीना
अंदाज़ मेरा मस्ताना,
माँगे दिल का नज़राना
ज़रा सोच के आँख मिलाना,
हो जाए न तू दीवाना
के हम भी जवाँ हैं, समा भी जवाँ है
न फिर हम से कहना
मेरा दिल कहाँ है, मेरा दिल कहाँ है
तुझको मेरी जुस्तुजू है मुझको तेरी आरज़ू है
मेरे दिल का आईना तू दिल के आईने में तू है
हम से ही रोशन है सारा ज़माना, सारा ज़माना
तकलीना
अंदाज़ मेरा मस्ताना,
माँगे दिल का नज़राना
ज़रा सोच के आँख मिलाना,
हो जाए न तू दीवाना
के हम भी जवाँ हैं, समा भी जवाँ है
न फिर हम से कहना
मेरा दिल कहाँ है, मेरा दिल कहाँ है
मैं किधर हूँ तू कहाँ है ये ज़मीं या आसमाँ है
मेरे तेरे प्यार की ये क्या अजीब दास्ताँ है
मीठा सा ये दर्द भी है सुहाना, दर्द सुहाना
तकलीना
अंदाज़ मेरा मस्ताना,
माँगे दिल का नज़राना
ज़रा सोच के आँख मिलाना,
हो जाए न तू दीवाना
के हम भी जवाँ हैं, समा भी जवाँ है
न फिर हम से कहना
मेरा दिल कहाँ है, मेरा दिल कहाँ है
.........................................
Andaz mera mastana-Dil Apna Aur Preet Parayi 1960
Monday, 25 July 2011
आज तो मेरी हँसी उडाई-गोमती के किनारे १९७२
मजरूह के लिखे संवेदना को झंझोड़ने वाले गीतों में से एक है फ़िल्म
गोमती के किनारे से लता मंगेशकर का गाया हुआ ये गीत। मीना कुमारी
की इस अन्तिम फ़िल्म का निर्देशन सावन कुमार टाक ने किया था, जनता
को देखने को नहीं मिली। अब ज़रूर इस फिल्म की सी डी, डी वी डी मिलने
लगी है। मौका मिले तो एक बार अवश्य देखिएगा इसे।
लखनऊ शहर गोमती नदी के किनारे बसा हुआ है. इस फिल्म की कथा
कुछ कुछ यही इंगित करती है कि इस शहर की ही एक कहानी है ये.
लखनऊ की संस्कृति से मुजरा शब्द अछूता नहीं रहा कभी। तवायफ़ और
उनके नृत्य संगीत इत्यादि पर प्रकाश डालता जनादेश का एक लेख ज़रूर
पढ़ें- पहले बदनाम, फिर गुमनाम
गीत आदम जात के दोमुंहेपन पर करारा तमाचा सा है। आदमी के नंगेपन
की इन्तेहा ये है कि वो जिस जगह से इस नश्वर संसार में प्रकट होता है,
सयाना होने पर बार बार वहीँ जाना चाहता है। प्रकट होने के वक्त के कष्ट
को वो भूल कर उन गलियारों में वो आनंद ढूँढने लगता है। हवस के अन्धों
को रिश्ते, समाज रीति-रिवाज सब दिखलाई देने बंद हो जाते हैं। अपना
खुद का घर तो ऐसे लोगों का अपवाद होता है और वे पैसे के बल पर घर
से बाहर कोई भी बदतमीजी करने के लिए स्वतन्त्र होते हैं। मर्यादा और
परंपरा की दुहाई देने वाले बाहर निकल कर खुद अनियंत्रित और अमर्यादित
हो जाते हैं । सामाजिक ढांचे को सबसे ज्यादा क्षति साधन समर्थ और संकीर्ण
मानसिकता वाले लोग पहुंचाते हैं। गीत के अंतिम अंतरे में इसी बात पर
गौर किया गया है।
कोठे पर बैठे कलाकारों में आप आई. एस. जौहर को आसानी से पहचान
पाएंगे।
गाने के बोल:
आज तो मेरी हंसी उडाई
जैसे भी चाह पुकारा
आज तो मेरी हंसी उडाई
जैसे भी चाह पुकारा
कल जो मुझे इन गलियों में लाया
वो भी था हाथ तुम्हारा
आज तो मेरी हंसी उडाई
जैसे भी चाह पुकारा
लुटे यहाँ चमन अंधेरों ने
बिके यहाँ बदन अंधेरों में
लुटे यहाँ चमन अंधेरों ने
बिके यहाँ बदन अंधेरों में
भूली भटकी इस बस्ती में, हो ओ ओ
रूप की चांदी रात के सोने का व्यापार है सारा
कल जो मुझे इन गलियों में लाया
वो भी था हाथ तुम्हारा
आज तो मेरी हंसी उडाई
जैसे भी चाह पुकारा
सोचा कभी मैं भी हूँ एक इंसान भी
मैं भी कभी बहन भी हूँ कभी माँ भी
सोचा कभी मैं भी हूँ एक इंसान भी
मैं भी कभी बहन भी हूँ कभी माँ भी
तुम तो प्यासी प्यासी ऑंखें ले के, हो ओ ओ
करने को आये मेरे लबों पर मेरे लहू का नज़ारा
कल जो मुझे इन गलियों में लाया
वो भी था हाथ तुम्हारा
आज तो मेरी हंसी उडाई
जैसे भी चाह पुकारा
सबको गुनाहों में मगन देखा
देखा शरीफों का चलन देखा
सबको गुनाहों में मगन देखा
देखा शरीफों का चलन देखा
सबकी इनायत हाय देखी मैंने, हो ओ ओ
मेरे ही दिल के टुकड़े को मेरा आशिक कह कर पुकारा
कल जो मुझे इन गलियों में लाया
वो भी था हाथ तुम्हारा
..................................
Aaj to meri hansi udaai-Gomti ke kinare 1972
गोमती के किनारे से लता मंगेशकर का गाया हुआ ये गीत। मीना कुमारी
की इस अन्तिम फ़िल्म का निर्देशन सावन कुमार टाक ने किया था, जनता
को देखने को नहीं मिली। अब ज़रूर इस फिल्म की सी डी, डी वी डी मिलने
लगी है। मौका मिले तो एक बार अवश्य देखिएगा इसे।
लखनऊ शहर गोमती नदी के किनारे बसा हुआ है. इस फिल्म की कथा
कुछ कुछ यही इंगित करती है कि इस शहर की ही एक कहानी है ये.
लखनऊ की संस्कृति से मुजरा शब्द अछूता नहीं रहा कभी। तवायफ़ और
उनके नृत्य संगीत इत्यादि पर प्रकाश डालता जनादेश का एक लेख ज़रूर
पढ़ें- पहले बदनाम, फिर गुमनाम
गीत आदम जात के दोमुंहेपन पर करारा तमाचा सा है। आदमी के नंगेपन
की इन्तेहा ये है कि वो जिस जगह से इस नश्वर संसार में प्रकट होता है,
सयाना होने पर बार बार वहीँ जाना चाहता है। प्रकट होने के वक्त के कष्ट
को वो भूल कर उन गलियारों में वो आनंद ढूँढने लगता है। हवस के अन्धों
को रिश्ते, समाज रीति-रिवाज सब दिखलाई देने बंद हो जाते हैं। अपना
खुद का घर तो ऐसे लोगों का अपवाद होता है और वे पैसे के बल पर घर
से बाहर कोई भी बदतमीजी करने के लिए स्वतन्त्र होते हैं। मर्यादा और
परंपरा की दुहाई देने वाले बाहर निकल कर खुद अनियंत्रित और अमर्यादित
हो जाते हैं । सामाजिक ढांचे को सबसे ज्यादा क्षति साधन समर्थ और संकीर्ण
मानसिकता वाले लोग पहुंचाते हैं। गीत के अंतिम अंतरे में इसी बात पर
गौर किया गया है।
कोठे पर बैठे कलाकारों में आप आई. एस. जौहर को आसानी से पहचान
पाएंगे।
गाने के बोल:
आज तो मेरी हंसी उडाई
जैसे भी चाह पुकारा
आज तो मेरी हंसी उडाई
जैसे भी चाह पुकारा
कल जो मुझे इन गलियों में लाया
वो भी था हाथ तुम्हारा
आज तो मेरी हंसी उडाई
जैसे भी चाह पुकारा
लुटे यहाँ चमन अंधेरों ने
बिके यहाँ बदन अंधेरों में
लुटे यहाँ चमन अंधेरों ने
बिके यहाँ बदन अंधेरों में
भूली भटकी इस बस्ती में, हो ओ ओ
रूप की चांदी रात के सोने का व्यापार है सारा
कल जो मुझे इन गलियों में लाया
वो भी था हाथ तुम्हारा
आज तो मेरी हंसी उडाई
जैसे भी चाह पुकारा
सोचा कभी मैं भी हूँ एक इंसान भी
मैं भी कभी बहन भी हूँ कभी माँ भी
सोचा कभी मैं भी हूँ एक इंसान भी
मैं भी कभी बहन भी हूँ कभी माँ भी
तुम तो प्यासी प्यासी ऑंखें ले के, हो ओ ओ
करने को आये मेरे लबों पर मेरे लहू का नज़ारा
कल जो मुझे इन गलियों में लाया
वो भी था हाथ तुम्हारा
आज तो मेरी हंसी उडाई
जैसे भी चाह पुकारा
सबको गुनाहों में मगन देखा
देखा शरीफों का चलन देखा
सबको गुनाहों में मगन देखा
देखा शरीफों का चलन देखा
सबकी इनायत हाय देखी मैंने, हो ओ ओ
मेरे ही दिल के टुकड़े को मेरा आशिक कह कर पुकारा
कल जो मुझे इन गलियों में लाया
वो भी था हाथ तुम्हारा
..................................
Aaj to meri hansi udaai-Gomti ke kinare 1972
Wednesday, 22 June 2011
लोग कहते हैं कि हम-बहू बेगम १९६७
साहिर का है अंदाज़-ए-बयां और। ख़वातीनों हाज़रात, महबूब
से किनारा करने का खुशनुमा ख्याल और किस के दिमाग में
आ कर कागज़ पर उतर सकता है। किनारा करने की बात पर
रज़ामंदी मांगी जा रही है, समाज की बंदिशें या फिर कोई और
वजह ऐसा करने को प्रेरित कर रही हैं जानने के लिए आपको
बहू बेगम फिल्म एक बार ज़रूर देखना पड़ेगी।
साहिर के गीतों से फिल्म के निर्देशक का काम कभी कभी बहुत
आसान हो जाया करता था। आम दर्शक तो धुन से ही आनंद उठा
लिया करता लेकिन दिमाग खपाने वाले दर्शक गीत की गहराई
में उतर कर नायक की करतब-ए-एक्टिंग को गीत के शब्दों और
भावों से मिलाने की असफल कोशिश में लग जाते। साहिर के गीतों
पर कुछ ही संजीदा कलाकारों ने बढ़िया अभिनय किया है।
कमबख्त दिल तो मानता नहीं है क्या किया जाये, इश्क की
खुमारी दिल पर झाड फानूस की धूल माफिक चिपकी रहती है,
कुछ करने या ना करने की जायज़ वजहें होना ज़रूरी है। अब
जुदा हो ही रहे हैं तो सारे अरमान पूरे करते चलें और ये जुमला
दोहराते चलें-किनारा कर लें।
प्रेम त्रिकोण पर आधारित इस फिल्म में कई यादगार गीत हैं।
ये गीत थोड़ा कम सुना जाता है और गीतों की तुलना में। गीत
मधुर है इसलिए हमने इसे पहले चुना है सुनने के लिए।
गीत के बोल:
लोग कहते हैं कि हम तुमसे किनारा कर लें
तुम जो कह दो तो सितम ये भी गवारा कर लें
लोग कहते हैं
तुमने जिस हाल-ए-परेशानी से निकला था हमें
आसरा दे के मोहब्बत का संभाला था हमें
सोचते हैं के वही
सोचते हैं के वही हाल दुबारा कर लें
तुम जो कह दो तो सितम ये भी गवारा कर लें
लोग कहते हैं
यूँ भी अब तुमसे मुलाक़ात अब नहीं होने की
मिल भी जाओ
मिल भी जाओ तो कोई बात नहीं होने की
आखिरी बार बस अब
आखिरी बार बस अब जिक्र तुम्हारा कर लें
तुम जो कह दो तो सितम ये भी गवारा कर लें
लोग कहते हैं
आखिरी बार ख्यालों में बुला लें तुमको
आखिरी बार कलेजे से लगा लें तुमको
और फिर अपने तड़पने
और फिर अपने तड़पने का नज़ारा कर लें
तुम जो कह दो तो सितम ये भी गवारा कर लें
लोग कहते हैं कि हम तुमसे किनारा कर लें
तुम जो कह दो तो सितम ये भी गवारा कर लें
लोग कहते हैं
.....................
Log kehte hain ki hum-Bahu Begum 1967
से किनारा करने का खुशनुमा ख्याल और किस के दिमाग में
आ कर कागज़ पर उतर सकता है। किनारा करने की बात पर
रज़ामंदी मांगी जा रही है, समाज की बंदिशें या फिर कोई और
वजह ऐसा करने को प्रेरित कर रही हैं जानने के लिए आपको
बहू बेगम फिल्म एक बार ज़रूर देखना पड़ेगी।
साहिर के गीतों से फिल्म के निर्देशक का काम कभी कभी बहुत
आसान हो जाया करता था। आम दर्शक तो धुन से ही आनंद उठा
लिया करता लेकिन दिमाग खपाने वाले दर्शक गीत की गहराई
में उतर कर नायक की करतब-ए-एक्टिंग को गीत के शब्दों और
भावों से मिलाने की असफल कोशिश में लग जाते। साहिर के गीतों
पर कुछ ही संजीदा कलाकारों ने बढ़िया अभिनय किया है।
कमबख्त दिल तो मानता नहीं है क्या किया जाये, इश्क की
खुमारी दिल पर झाड फानूस की धूल माफिक चिपकी रहती है,
कुछ करने या ना करने की जायज़ वजहें होना ज़रूरी है। अब
जुदा हो ही रहे हैं तो सारे अरमान पूरे करते चलें और ये जुमला
दोहराते चलें-किनारा कर लें।
प्रेम त्रिकोण पर आधारित इस फिल्म में कई यादगार गीत हैं।
ये गीत थोड़ा कम सुना जाता है और गीतों की तुलना में। गीत
मधुर है इसलिए हमने इसे पहले चुना है सुनने के लिए।
गीत के बोल:
लोग कहते हैं कि हम तुमसे किनारा कर लें
तुम जो कह दो तो सितम ये भी गवारा कर लें
लोग कहते हैं
तुमने जिस हाल-ए-परेशानी से निकला था हमें
आसरा दे के मोहब्बत का संभाला था हमें
सोचते हैं के वही
सोचते हैं के वही हाल दुबारा कर लें
तुम जो कह दो तो सितम ये भी गवारा कर लें
लोग कहते हैं
यूँ भी अब तुमसे मुलाक़ात अब नहीं होने की
मिल भी जाओ
मिल भी जाओ तो कोई बात नहीं होने की
आखिरी बार बस अब
आखिरी बार बस अब जिक्र तुम्हारा कर लें
तुम जो कह दो तो सितम ये भी गवारा कर लें
लोग कहते हैं
आखिरी बार ख्यालों में बुला लें तुमको
आखिरी बार कलेजे से लगा लें तुमको
और फिर अपने तड़पने
और फिर अपने तड़पने का नज़ारा कर लें
तुम जो कह दो तो सितम ये भी गवारा कर लें
लोग कहते हैं कि हम तुमसे किनारा कर लें
तुम जो कह दो तो सितम ये भी गवारा कर लें
लोग कहते हैं
.....................
Log kehte hain ki hum-Bahu Begum 1967
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Roshan,
Sahir Ludhiyanwi
Monday, 23 May 2011
कैसा जादू डाला रे बलमा -फुटपाथ १९५३
आपको फिल्म फुटपाथ के दो गीत हम सुनवा चुके हैं अब तक।
फुटपाथ का अर्थ है पैदल चलने वालों के लिए रास्ता। सड़क
वाहनों के लिए बनाई जाती है, मगर हमारे देश में आपको
दुपहिया वाहन चालक फुटपाथ का उपयोग और पैदल चालक
सड़क का दुरूपयोग करते हुए मिल जायेंगे। आधुनिक परिभाषा
है इसकी-अतिक्रमित सार्वजनिक स्थान जिसका सब्जी बेचने
वाले से लेकर पंचर जोड़ने वाले तक सभी सामान रूप से अपनी
पैतृक संपत्ति समझ के उपयोग करते हों। छोटे बच्चे इसको अपनी
तोतली भाषा में फूट-फाट भी कहते हैं, जी हाँ वही स्थान जो सडक
के किनारे थोड़ा ऊंचा सा एक पट्टी जैसा सड़क के साथ साथ
दूर तक बना हुआ दिखाई देता है। कुछ फुटपाथों की दुर्दशा देख
कर लगता हैं बच्चे इसको सही रूप में पहचान लेते हैं जो हम जैसे
मूढ़ मति इतना ज्ञान बटोर कर भी नहीं कर पाते।
खैर फिल्म फुटपाथ में फुटपाथ का कितना उपयोग हुआ ये मुझे
समझ नहीं आया। फिल्म का तीसरा गीत सुनते हैं जो अपने समय
के लिहाज़ से काफी बोल्ड गीत है। मीना कुमारी इस गीत में
आपको संगीतमय स्नान करती दिखाई देंगी। आशा भोंसले की
आवाज़ है, मजरूह के बोल हैं और संगीत एक बार फिर से
ख़य्याम साहब का। ये गीत वैसे हिंदी फिल्मों के प्रसिद्ध स्नान
गीतों की श्रेणी में नहीं आता है।
गीत के बोल:
कैसा जादू डाला रे बलमा ना जाने
खड़े खड़े मचले रे सैयां नहीं माने
कैसा जादू डाला रे बलमा ना जाने
खड़े खड़े मचले रे सैयां नहीं माने
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
कैसा जादू डाला रे बलमा ना जाने
खड़े खड़े मचले रे सैयां नहीं माने
गीत के बाकी बोल की ज़रुरत महसूस करें तो एक चटका लगा
के ब्लॉग को धन्य करें।
फुटपाथ का अर्थ है पैदल चलने वालों के लिए रास्ता। सड़क
वाहनों के लिए बनाई जाती है, मगर हमारे देश में आपको
दुपहिया वाहन चालक फुटपाथ का उपयोग और पैदल चालक
सड़क का दुरूपयोग करते हुए मिल जायेंगे। आधुनिक परिभाषा
है इसकी-अतिक्रमित सार्वजनिक स्थान जिसका सब्जी बेचने
वाले से लेकर पंचर जोड़ने वाले तक सभी सामान रूप से अपनी
पैतृक संपत्ति समझ के उपयोग करते हों। छोटे बच्चे इसको अपनी
तोतली भाषा में फूट-फाट भी कहते हैं, जी हाँ वही स्थान जो सडक
के किनारे थोड़ा ऊंचा सा एक पट्टी जैसा सड़क के साथ साथ
दूर तक बना हुआ दिखाई देता है। कुछ फुटपाथों की दुर्दशा देख
कर लगता हैं बच्चे इसको सही रूप में पहचान लेते हैं जो हम जैसे
मूढ़ मति इतना ज्ञान बटोर कर भी नहीं कर पाते।
खैर फिल्म फुटपाथ में फुटपाथ का कितना उपयोग हुआ ये मुझे
समझ नहीं आया। फिल्म का तीसरा गीत सुनते हैं जो अपने समय
के लिहाज़ से काफी बोल्ड गीत है। मीना कुमारी इस गीत में
आपको संगीतमय स्नान करती दिखाई देंगी। आशा भोंसले की
आवाज़ है, मजरूह के बोल हैं और संगीत एक बार फिर से
ख़य्याम साहब का। ये गीत वैसे हिंदी फिल्मों के प्रसिद्ध स्नान
गीतों की श्रेणी में नहीं आता है।
गीत के बोल:
कैसा जादू डाला रे बलमा ना जाने
खड़े खड़े मचले रे सैयां नहीं माने
कैसा जादू डाला रे बलमा ना जाने
खड़े खड़े मचले रे सैयां नहीं माने
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
कैसा जादू डाला रे बलमा ना जाने
खड़े खड़े मचले रे सैयां नहीं माने
गीत के बाकी बोल की ज़रुरत महसूस करें तो एक चटका लगा
के ब्लॉग को धन्य करें।
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Khayyam,
Majrooh Sultanpuri,
Meena Kumari
Thursday, 19 May 2011
जा री जा री ओ कारी बदरिया-आज़ाद १९५५
कुछ गीत बचपन की यादों से जुड़े होते हैं तो कुछ के साथ
पचपन की उम्र जुडी होती है। आज की पीढ़ी के हिसाब से
ये गीत काफी बुज़ुर्ग गीत है । एक पडोसी चौबे जी जो
बनारस निवासी थे, अक्सर अपने माइके(उनका पैतृक घर
बनारस में था) जाया करते। उनकी बीवी थी जौनपुर की,
मगर वो अपने माइके जाने को उतनी उत्सुक नहीं होती
जितने कि चौबे जी। चौबे जी के जाते ही उनकी श्रीमती
बात बात में उल्लेख करतीं-वो घर गए हैं, वो बनारस गए हैं,
वो यू. पी. गए हैं, इत्यादि।
वे जब जब जाते, हम लोग ऊंचे सुर में ये गाना गाया करते-
जा री जा री ओ कारी बदरिया.................उत्तर प्रदेश गए हैं
सांवरिया.......
खैर ये तो एक प्रसंग हुआ, गीत के बारे में बात की जाये। फिल्म
आज़ाद का संगीत बेहद लोकप्रिय हुआ और ये फिल्म के सबसे
लोकप्रिय गीतों में से एक है। मीना कुमारी पर फिल्माए और
लता द्वारा गए इस गीत के रचयिता हैं-राजेंद्र कृष्ण और
संगीत दिया है सी रामचंद्र ने। गीत के सभी उपलब्ध विडियो पर
टेल पड़े हुए हैं यू ट्यूब पर, अतः संगीतकार सी रामचंद्र की फोटू
देख देख कर ही गीत का आनंद उठा लीजिये।
गीत के बोल:
जा री जा री ओ कारी बदरिया
जा री जा री ओ कारी बदरिया
मत बरसो री मोरी नगरिया
परदेस गए हैं सांवरिया
जा री जा री ओ कारी बदरिया
जा री जा री ओ कारी बदरिया
कहे धीरे धीरे शोर मचाये री
कहे धीरे धीरे शोर मचाये री
मेरा नरम करजवा जलाये री
मेरा नरम करजवा जलाये री
मेरा मनवा जले, कोई बस ना चले
मेरा मनवा जले, कोई बस ना चले
हाय तक तक के सूनी डगरिया
जा री जा री ओ कारी बदरिया
जा री जा री ओ कारी बदरिया
मत बरसो री मोरी नगरिया
परदेस गए हैं सांवरिया
जा री जा री ओ कारी बदरिया
जा री जा री ओ कारी बदरिया
जइयो जइयो री देश पिया के
जइयो जइयो री देश पिया के
कहियो दुखड़े तू मेरे जिया के
कहियो दुखड़े तू मेरे जिया के
कहियो छम छम रोये, अखियाँ न सोये
कहियो छम छम रोये, अखियाँ न सोये
हुई याद में पी की बाँवरिया
जा री जा री ओ कारी बदरिया
जा री जा री ओ कारी बदरिया
मत बरसो री मोरी नगरिया
परदेस गए हैं सांवरिया
जा री जा री ओ कारी बदरिया
जा री जा री ओ कारी बदरिया
.......................................
Ja ri ja ri o kari badariya-Azaad 1955
पचपन की उम्र जुडी होती है। आज की पीढ़ी के हिसाब से
ये गीत काफी बुज़ुर्ग गीत है । एक पडोसी चौबे जी जो
बनारस निवासी थे, अक्सर अपने माइके(उनका पैतृक घर
बनारस में था) जाया करते। उनकी बीवी थी जौनपुर की,
मगर वो अपने माइके जाने को उतनी उत्सुक नहीं होती
जितने कि चौबे जी। चौबे जी के जाते ही उनकी श्रीमती
बात बात में उल्लेख करतीं-वो घर गए हैं, वो बनारस गए हैं,
वो यू. पी. गए हैं, इत्यादि।
वे जब जब जाते, हम लोग ऊंचे सुर में ये गाना गाया करते-
जा री जा री ओ कारी बदरिया.................उत्तर प्रदेश गए हैं
सांवरिया.......
खैर ये तो एक प्रसंग हुआ, गीत के बारे में बात की जाये। फिल्म
आज़ाद का संगीत बेहद लोकप्रिय हुआ और ये फिल्म के सबसे
लोकप्रिय गीतों में से एक है। मीना कुमारी पर फिल्माए और
लता द्वारा गए इस गीत के रचयिता हैं-राजेंद्र कृष्ण और
संगीत दिया है सी रामचंद्र ने। गीत के सभी उपलब्ध विडियो पर
टेल पड़े हुए हैं यू ट्यूब पर, अतः संगीतकार सी रामचंद्र की फोटू
देख देख कर ही गीत का आनंद उठा लीजिये।
गीत के बोल:
जा री जा री ओ कारी बदरिया
जा री जा री ओ कारी बदरिया
मत बरसो री मोरी नगरिया
परदेस गए हैं सांवरिया
जा री जा री ओ कारी बदरिया
जा री जा री ओ कारी बदरिया
कहे धीरे धीरे शोर मचाये री
कहे धीरे धीरे शोर मचाये री
मेरा नरम करजवा जलाये री
मेरा नरम करजवा जलाये री
मेरा मनवा जले, कोई बस ना चले
मेरा मनवा जले, कोई बस ना चले
हाय तक तक के सूनी डगरिया
जा री जा री ओ कारी बदरिया
जा री जा री ओ कारी बदरिया
मत बरसो री मोरी नगरिया
परदेस गए हैं सांवरिया
जा री जा री ओ कारी बदरिया
जा री जा री ओ कारी बदरिया
जइयो जइयो री देश पिया के
जइयो जइयो री देश पिया के
कहियो दुखड़े तू मेरे जिया के
कहियो दुखड़े तू मेरे जिया के
कहियो छम छम रोये, अखियाँ न सोये
कहियो छम छम रोये, अखियाँ न सोये
हुई याद में पी की बाँवरिया
जा री जा री ओ कारी बदरिया
जा री जा री ओ कारी बदरिया
मत बरसो री मोरी नगरिया
परदेस गए हैं सांवरिया
जा री जा री ओ कारी बदरिया
जा री जा री ओ कारी बदरिया
.......................................
Ja ri ja ri o kari badariya-Azaad 1955
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Tuesday, 11 January 2011
मेरी नींदों में तुम-नया अंदाज़ १९५६
शमशाद बेगम की स्पष्ट और गूँज भरी आवाज़ के संगीत प्रेमी कायल
हैं। एक अमर युगल गीत सुनिए किशोर कुमार और शमशाद बेगम
की आवाज़ में। किशोर कुमार और मीना कुमारी पर फिल्माए गए इस
गीत के हजारों दीवाने हैं और आज भी उत्ब्ने ही चाव से इसे सुनते हैं जितने
चाव से वे फिल्म की रिलीज़ के आस पास सुना करते थे। अब तो साधन
बहुत हो गए हैं गीत सुनने के इसलिए पुराने गीतों को अपनी पसंद
अनुसार सुनना आसान हो गया है। ये एक goose bump पैदा करने वाला
गीत है।
गीत के बोल:
किशोर: मेरी नींदों में तुम, मेरे ख़्वाबों में तुम
हो चुके हम तुम्हारी मोहब्बत में गुम
मेरी नींदों में तुम, मेरे ख़्वाबों में तुम
हो चुके हम तुम्हारी मोहब्बत में गुम
शमशाद: मन की बीना की धुन, तू बालम आज सुन
मेरी नज़रों ने तुझ को लिया आज चुन
मन की बिना की धुन, तू बालम आज सुन
मेरी नज़रों ने तुझ को लिया आज चुन
मन की बीना की धुन, तू बालम आज सुन
शमशाद: मेरी दिल की लगी तू, मेरी जिंदगी तू
मेरी हर नज़र है तेरी दास्ताँ
मेरी दिल की लगी तू, मेरी जिंदगी तू
मेरी हर नज़र है तेरी दास्ताँ
किशोर: मेरे दिल की बहारें तुम्ही को पुकारें
तुम्ही से है आबाद मेरा जहां
मेरे दिल की बहारें तुम्ही को पुकारें
तुम्ही से है आबाद मेरा जहां
शमशाद: तू मेरा नाज़ है, मेरा अंदाज़ है, दिल की आवाज़ है
किशोर: मेरी नींदों में तुम, मेरे ख़्वाबों में तुम
हो चुके हम तुम्हारी मोहब्बत में गुम
शमशाद: मन की बीना की धुन, तू बालम आज सुन
मेरी नज़रों ने तुझ को लिया आज चुन
मन की बीना की धुन, तू बालम आज सुन
मेरी नज़रों ने तुझ को लिया आज चुन
मन की बीना की धुन, तू बालम आज सुन
शमशाद: दिल पे छाई ख़ुशी है लबों पर हंसी है
खिली है तेरे प्यार की चांदनी
किशोर: घूमती है निगाहें नशा छा रहा है
के दिल गा रहा है तेरी रागिनी
शमशाद: होले होले सजन मेरा कहता है मन
अब तो लागी लगन
किशोर: मेरी नींदों में तुम, मेरे ख़्वाबों में तुम
हो चुके हम तुम्हारी मोहब्बत में गुम
शमशाद: मन की बीना की धुन, तू बालम आज सुन
शमशाद: तुम मेरे हो गए हो तो ये चाँद तारे
ये सारे नज़ारे मेरे हो गए
किशोर: दिल हुआ है दीवाना समा है सुहाना
कहें क्या तेरे प्यार में खो गए
शमशाद: रात गाने लगी गुनगुनाने लगी
नींद छाने लगी
किशोर: मेरी नींदों में तुम, मेरे ख़्वाबों में तुम
हो चुके हम तुम्हारी मोहब्बत में गुम
शमशाद: मन की बीना की धुन, तू बालम आज सुन
........................................
Meri neendon mein tum-Naya Andaz 1956
हैं। एक अमर युगल गीत सुनिए किशोर कुमार और शमशाद बेगम
की आवाज़ में। किशोर कुमार और मीना कुमारी पर फिल्माए गए इस
गीत के हजारों दीवाने हैं और आज भी उत्ब्ने ही चाव से इसे सुनते हैं जितने
चाव से वे फिल्म की रिलीज़ के आस पास सुना करते थे। अब तो साधन
बहुत हो गए हैं गीत सुनने के इसलिए पुराने गीतों को अपनी पसंद
अनुसार सुनना आसान हो गया है। ये एक goose bump पैदा करने वाला
गीत है।
गीत के बोल:
किशोर: मेरी नींदों में तुम, मेरे ख़्वाबों में तुम
हो चुके हम तुम्हारी मोहब्बत में गुम
मेरी नींदों में तुम, मेरे ख़्वाबों में तुम
हो चुके हम तुम्हारी मोहब्बत में गुम
शमशाद: मन की बीना की धुन, तू बालम आज सुन
मेरी नज़रों ने तुझ को लिया आज चुन
मन की बिना की धुन, तू बालम आज सुन
मेरी नज़रों ने तुझ को लिया आज चुन
मन की बीना की धुन, तू बालम आज सुन
शमशाद: मेरी दिल की लगी तू, मेरी जिंदगी तू
मेरी हर नज़र है तेरी दास्ताँ
मेरी दिल की लगी तू, मेरी जिंदगी तू
मेरी हर नज़र है तेरी दास्ताँ
किशोर: मेरे दिल की बहारें तुम्ही को पुकारें
तुम्ही से है आबाद मेरा जहां
मेरे दिल की बहारें तुम्ही को पुकारें
तुम्ही से है आबाद मेरा जहां
शमशाद: तू मेरा नाज़ है, मेरा अंदाज़ है, दिल की आवाज़ है
किशोर: मेरी नींदों में तुम, मेरे ख़्वाबों में तुम
हो चुके हम तुम्हारी मोहब्बत में गुम
शमशाद: मन की बीना की धुन, तू बालम आज सुन
मेरी नज़रों ने तुझ को लिया आज चुन
मन की बीना की धुन, तू बालम आज सुन
मेरी नज़रों ने तुझ को लिया आज चुन
मन की बीना की धुन, तू बालम आज सुन
शमशाद: दिल पे छाई ख़ुशी है लबों पर हंसी है
खिली है तेरे प्यार की चांदनी
किशोर: घूमती है निगाहें नशा छा रहा है
के दिल गा रहा है तेरी रागिनी
शमशाद: होले होले सजन मेरा कहता है मन
अब तो लागी लगन
किशोर: मेरी नींदों में तुम, मेरे ख़्वाबों में तुम
हो चुके हम तुम्हारी मोहब्बत में गुम
शमशाद: मन की बीना की धुन, तू बालम आज सुन
शमशाद: तुम मेरे हो गए हो तो ये चाँद तारे
ये सारे नज़ारे मेरे हो गए
किशोर: दिल हुआ है दीवाना समा है सुहाना
कहें क्या तेरे प्यार में खो गए
शमशाद: रात गाने लगी गुनगुनाने लगी
नींद छाने लगी
किशोर: मेरी नींदों में तुम, मेरे ख़्वाबों में तुम
हो चुके हम तुम्हारी मोहब्बत में गुम
शमशाद: मन की बीना की धुन, तू बालम आज सुन
........................................
Meri neendon mein tum-Naya Andaz 1956
Monday, 10 January 2011
सो जा मेरे प्यारे-फुटपाथ १९५३
हिंदी फिल्म संगीत का खज़ाना अजब गज़ब लोरियों से भरा पड़ा है।
अधिकतर लोकप्रिय लोरियां आपको पुरानी फिल्मों में ही मिलेंगी।
बॉलीवुड का मानना है कि फ़िल्मी बच्चे बड़े हो गए हैं अतः इस ज़माने
में लोरियों की आवश्यकता नहीं है। आजकल लोरी की जगह दूसरे किस्म
के गानों ने ले ली है। उदाहरण के लिए बच्चे बड़े हो गए हैं और शायद
आईटम-सोंग ज्यादा देखना सुनना पसंद करते हैं।
मीठी और मधुर खुशनुमा लोरियां आपने बहुत सुनी होंगी। एक
दुःख भरी लोरी भी सुनिए जो फिल्म फुटपाथ में है। ये सन १९५३
कि फिल्म है. दुःख भरी लोरी गा कर बच्चे को सुलाना बहुत ही
कठिन कार्य है जो आप महसूस करेंगे इस गीत में। गीत फिल्माया
गया है मीना कुमारी पर। गीत लिखा है मजरूह ने और इसकी
धुन बनाई है खय्याम ने। आंसुओं में भीगी लोरी गाने वाली गायिका
हैं आशा भोंसले।
गीत के बोल:
सो जा मेरे प्यारे
सो जा सो जा
सो जा मेरे प्यारे
सो जा सो जा
अंखियों के तारे
सो जा सो जा
अंखियों के तारे
सो जा सो जा
रात सुहानी चंदा गाये
मीठी मीठी निंदिया आये
रात सुहानी चंदा गाये
मीठी मीठी निंदिया आये
राजदुलारे नैनन तारे सो जा
सो जा मेरे प्यारे
सो जा सो जा
अंखियों के तारे
सो जा सो जा
आहों की फ़रियाद की दुनिया
ये दुनिया बेदाज की दुनिया
आहों की फ़रियाद की दुनिया
ये दुनिया बेदाज की दुनिया
तेरी दुनिया चाँद सितारे सो जा
सो जा मेरे प्यारे
सो जा सो जा
सो जा मेरे प्यारे
सो जा सो जा
अधिकतर लोकप्रिय लोरियां आपको पुरानी फिल्मों में ही मिलेंगी।
बॉलीवुड का मानना है कि फ़िल्मी बच्चे बड़े हो गए हैं अतः इस ज़माने
में लोरियों की आवश्यकता नहीं है। आजकल लोरी की जगह दूसरे किस्म
के गानों ने ले ली है। उदाहरण के लिए बच्चे बड़े हो गए हैं और शायद
आईटम-सोंग ज्यादा देखना सुनना पसंद करते हैं।
मीठी और मधुर खुशनुमा लोरियां आपने बहुत सुनी होंगी। एक
दुःख भरी लोरी भी सुनिए जो फिल्म फुटपाथ में है। ये सन १९५३
कि फिल्म है. दुःख भरी लोरी गा कर बच्चे को सुलाना बहुत ही
कठिन कार्य है जो आप महसूस करेंगे इस गीत में। गीत फिल्माया
गया है मीना कुमारी पर। गीत लिखा है मजरूह ने और इसकी
धुन बनाई है खय्याम ने। आंसुओं में भीगी लोरी गाने वाली गायिका
हैं आशा भोंसले।
गीत के बोल:
सो जा मेरे प्यारे
सो जा सो जा
सो जा मेरे प्यारे
सो जा सो जा
अंखियों के तारे
सो जा सो जा
अंखियों के तारे
सो जा सो जा
रात सुहानी चंदा गाये
मीठी मीठी निंदिया आये
रात सुहानी चंदा गाये
मीठी मीठी निंदिया आये
राजदुलारे नैनन तारे सो जा
सो जा मेरे प्यारे
सो जा सो जा
अंखियों के तारे
सो जा सो जा
आहों की फ़रियाद की दुनिया
ये दुनिया बेदाज की दुनिया
आहों की फ़रियाद की दुनिया
ये दुनिया बेदाज की दुनिया
तेरी दुनिया चाँद सितारे सो जा
सो जा मेरे प्यारे
सो जा सो जा
सो जा मेरे प्यारे
सो जा सो जा
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Sunday, 12 December 2010
ऐसे तो ना देखो-भीगी रात १९६५
इसके मुखड़े के बोल पढ़ के तीन देवियाँ के गाने की
गलतफ़हमी हो जाती है। वो गीत रफ़ी का गाया एकल
गीत था जबकि प्रस्तुत गीत सुमन और रफ़ी का गाया
युगल गीत है। कालिदास के निर्देशन में बनी फिल्म
भीगी रात का संगीत अच्छा है। हमारी कोशिश है
की आपको पहले कम प्रचलित और कम सुने गए गीत
सुनवाए जाएँ ताकि आपको कुछ अतिरिक्त जानकारी मिलती
रहे। रईसी वाला गीत है। नायक नायिका कार में बैठ
के घूमने निकले है और गीत भी गाते हैं। गीत के
नीचे आपको एक कमेन्ट मिलेगा-grossly underrated for
obvious रेअसोंस- इस तरह की टिप्पणियों से अर्थ निकलना
बड़ी टेढ़ी खीर होता है। या तो लिखने वाला ये कहना
चाहता है कि रफ़ी और सुमन के गाये युगल गीत लता-रफ़ी
के गाये युगल गीतों की तुलना में कमतर आंके जाते हैं
या उसका इशारा दूसरे संगीतकारों और रोशन के
संगीत में तुलना से है। फिलहाल सम्भावना पहले कारण
की ज्यादा नज़र आ रही है। सुमन को प्रथम श्रेणी की
गायिका मानने से कई संगीत प्रेमी इनकार जो करते हैं
सीधी वजह उनकी आवाज़ लता की आवाज़ के सबसे निकट
होना। खैर ये तुलना वुलना का चक्कर छोड़ें और सुनें इस
मधुर गीत को।

भीगी रात के पिछले गीत में नायिका रूठी हुई थी। इसमें थोड़ी
खुश नज़र आ रही है और कुछ खिसियाने अंदाज़ में नायक के
साथ गीत गाना शुरू करती हैं-जैसे कहना चाह रही हों-"शर्म से
यहीं गड़ जाएँ ना कहीं हम" !!
गीत के बोल:
ऐसे तो ना देखिये के बहक जाएँ कहीं हम
आखिर को एक इंसान हैं फ़रिश्ता तो नहीं हम
हाय, ऐसी ना कहो बात के मर जाएँ यहीं हम
आखिर को एक इंसान है फ़रिश्ता तो नहीं हम
अंगडाई सी लेती है जो ख़ुशबू भरी जुल्फें
ख़ुशबू भरी जुल्फें
गिरती हैं तेरे सुर्ख लबों पर तेरी जुल्फें
लबों पर तेरी जुल्फें
जुल्फें ना तेरी चूम लें
जुल्फें ना तेरी चूम लें ऐ माहजबीं हम
आखिर को एक इंसान हैं फ़रिश्ता तो नहीं हम
आ हा हा, आ आ आ आ आ, हं हं हं हं हं
सुन सुन के तेरी बात नशा छाने लगा है
नशा छाने लगा है
खुद अपने भी प्यार तो कुछ आने लगा है
है ऐ ऐ, आने लगा है।
रखना है कहीं पाँव तो
रखना है कहीं पाँव तो रखते हैं कहीं हम
आखिर को एक इंसान है फ़रिश्ता तो नहीं हम
भीगा सा ये रुख-ए-नाज़ ये हल्का सा पसीना
ये हल्का सा पसीना
हाय
ये नाचती आँखों के भंवर दिल का सफीना
दिल का सफीना
सोचा है के अब डूब के
सोचा है के अब डूब के रह जाएँ यहीं हम
आखिर को एक इंसान हैं फ़रिश्ता तो नहीं हम
हाय, ऐसी ना कहो बात के मर जाएँ यहीं हम
आखिर को एक इंसान हैं फ़रिश्ता तो नहीं हम
आ हा हा, आ आ आ आ आ, हं हं हं हं हं
हं हं हं हं हं हं हं
......................................................................
Aise to na dekhiye ke behak jayen-Bheegi Raat 1965
गलतफ़हमी हो जाती है। वो गीत रफ़ी का गाया एकल
गीत था जबकि प्रस्तुत गीत सुमन और रफ़ी का गाया
युगल गीत है। कालिदास के निर्देशन में बनी फिल्म
भीगी रात का संगीत अच्छा है। हमारी कोशिश है
की आपको पहले कम प्रचलित और कम सुने गए गीत
सुनवाए जाएँ ताकि आपको कुछ अतिरिक्त जानकारी मिलती
रहे। रईसी वाला गीत है। नायक नायिका कार में बैठ
के घूमने निकले है और गीत भी गाते हैं। गीत के
नीचे आपको एक कमेन्ट मिलेगा-grossly underrated for
obvious रेअसोंस- इस तरह की टिप्पणियों से अर्थ निकलना
बड़ी टेढ़ी खीर होता है। या तो लिखने वाला ये कहना
चाहता है कि रफ़ी और सुमन के गाये युगल गीत लता-रफ़ी
के गाये युगल गीतों की तुलना में कमतर आंके जाते हैं
या उसका इशारा दूसरे संगीतकारों और रोशन के
संगीत में तुलना से है। फिलहाल सम्भावना पहले कारण
की ज्यादा नज़र आ रही है। सुमन को प्रथम श्रेणी की
गायिका मानने से कई संगीत प्रेमी इनकार जो करते हैं
सीधी वजह उनकी आवाज़ लता की आवाज़ के सबसे निकट
होना। खैर ये तुलना वुलना का चक्कर छोड़ें और सुनें इस
मधुर गीत को।
भीगी रात के पिछले गीत में नायिका रूठी हुई थी। इसमें थोड़ी
खुश नज़र आ रही है और कुछ खिसियाने अंदाज़ में नायक के
साथ गीत गाना शुरू करती हैं-जैसे कहना चाह रही हों-"शर्म से
यहीं गड़ जाएँ ना कहीं हम" !!
गीत के बोल:
ऐसे तो ना देखिये के बहक जाएँ कहीं हम
आखिर को एक इंसान हैं फ़रिश्ता तो नहीं हम
हाय, ऐसी ना कहो बात के मर जाएँ यहीं हम
आखिर को एक इंसान है फ़रिश्ता तो नहीं हम
अंगडाई सी लेती है जो ख़ुशबू भरी जुल्फें
ख़ुशबू भरी जुल्फें
गिरती हैं तेरे सुर्ख लबों पर तेरी जुल्फें
लबों पर तेरी जुल्फें
जुल्फें ना तेरी चूम लें
जुल्फें ना तेरी चूम लें ऐ माहजबीं हम
आखिर को एक इंसान हैं फ़रिश्ता तो नहीं हम
आ हा हा, आ आ आ आ आ, हं हं हं हं हं
सुन सुन के तेरी बात नशा छाने लगा है
नशा छाने लगा है
खुद अपने भी प्यार तो कुछ आने लगा है
है ऐ ऐ, आने लगा है।
रखना है कहीं पाँव तो
रखना है कहीं पाँव तो रखते हैं कहीं हम
आखिर को एक इंसान है फ़रिश्ता तो नहीं हम
भीगा सा ये रुख-ए-नाज़ ये हल्का सा पसीना
ये हल्का सा पसीना
हाय
ये नाचती आँखों के भंवर दिल का सफीना
दिल का सफीना
सोचा है के अब डूब के
सोचा है के अब डूब के रह जाएँ यहीं हम
आखिर को एक इंसान हैं फ़रिश्ता तो नहीं हम
हाय, ऐसी ना कहो बात के मर जाएँ यहीं हम
आखिर को एक इंसान हैं फ़रिश्ता तो नहीं हम
आ हा हा, आ आ आ आ आ, हं हं हं हं हं
हं हं हं हं हं हं हं
......................................................................
Aise to na dekhiye ke behak jayen-Bheegi Raat 1965
मोहब्बत से देखा खफा हो गए हैं-भीगी रात १९६५
रोशन ने अपने कैरियर के उत्तरार्ध में गीत की ध्वनियों
में हल्का ईको प्रभाव का काफी प्रयोग किया। ये अक्सर
गायक की आवाज़ के लिए प्रयोग में लायी जाती। कुछ
गीतों में वाद्य यन्त्र के साथ भी इसका प्रयोग हुआ है मगर
सुनने वाले का ध्यान वाद्य यन्त्र के साथ हुए खिलवाड़ पर
कम जाता है इसलिए उसको अभी नज़रअंदाज़ कर के
चलते हैं।
रफ़ी के गाये रोमांटिक गीतों के सृजन कर्ताओं में केवल
ओ पी नय्यर और शंकर जयकिशन ही नहीं बल्कि रोशन
भी शामिल हैं। ये गीत लिखा है मजरूह ने और इसे रुपहले
परदे पर गा रहे हैं प्रदीप कुमार । साथ में जो अभिनेत्री हैं
वो मीना कुमारी हैं।
गीत के बोल:
मोहब्बत से देखा खफा हो गए हैं
हसीं आज कल के खुदा हो गए हैं
हसीं आज कल के खुदा हो गए हैं
अदाओं में थी सादगी अब से पहले
हो ओ ओ, अदाओं में थी सादगी अब से पहले
वल्लाह
कहाँ रंग थे ये सुनहरे रुपहले
हो ओ ओ नज़र मिलते ही
नज़र मिलते ही क्या से क्या हो गए हैं
हसीं आज कल के खुदा हो गए हैं
किसी मोड़ पे बन के सूरज निकलना
हो ओ ओ, किसी मोड़ पे बन के सूरज निकलना
तौबा
कहीं धुप में चाँदनी बन के चलाना
हो ओ ओ जिधर देखो जलवा
जिधर देखो जलवानुमां हो गए हैं
हसीं आज कल के खुदा हो गए हैं
यहाँ तो लगा दिल पे एक ज़ख्म गहरा
हो ओ ओ, यहाँ तो लगा दिल पे एक ज़ख्म गहरा
हाय
वहां सिर्फ उनका ये अंदाज़ ठहरा
हो ओ ओ खता कर के भी
खता कर के भी बे-खता हो गए हैं
हसीं आज कल के खुदा हो गए हैं
........................................................
Mohabbat se dekha khafa ho gaye-Bheegi Raat 1965
में हल्का ईको प्रभाव का काफी प्रयोग किया। ये अक्सर
गायक की आवाज़ के लिए प्रयोग में लायी जाती। कुछ
गीतों में वाद्य यन्त्र के साथ भी इसका प्रयोग हुआ है मगर
सुनने वाले का ध्यान वाद्य यन्त्र के साथ हुए खिलवाड़ पर
कम जाता है इसलिए उसको अभी नज़रअंदाज़ कर के
चलते हैं।
रफ़ी के गाये रोमांटिक गीतों के सृजन कर्ताओं में केवल
ओ पी नय्यर और शंकर जयकिशन ही नहीं बल्कि रोशन
भी शामिल हैं। ये गीत लिखा है मजरूह ने और इसे रुपहले
परदे पर गा रहे हैं प्रदीप कुमार । साथ में जो अभिनेत्री हैं
वो मीना कुमारी हैं।
गीत के बोल:
मोहब्बत से देखा खफा हो गए हैं
हसीं आज कल के खुदा हो गए हैं
हसीं आज कल के खुदा हो गए हैं
अदाओं में थी सादगी अब से पहले
हो ओ ओ, अदाओं में थी सादगी अब से पहले
वल्लाह
कहाँ रंग थे ये सुनहरे रुपहले
हो ओ ओ नज़र मिलते ही
नज़र मिलते ही क्या से क्या हो गए हैं
हसीं आज कल के खुदा हो गए हैं
किसी मोड़ पे बन के सूरज निकलना
हो ओ ओ, किसी मोड़ पे बन के सूरज निकलना
तौबा
कहीं धुप में चाँदनी बन के चलाना
हो ओ ओ जिधर देखो जलवा
जिधर देखो जलवानुमां हो गए हैं
हसीं आज कल के खुदा हो गए हैं
यहाँ तो लगा दिल पे एक ज़ख्म गहरा
हो ओ ओ, यहाँ तो लगा दिल पे एक ज़ख्म गहरा
हाय
वहां सिर्फ उनका ये अंदाज़ ठहरा
हो ओ ओ खता कर के भी
खता कर के भी बे-खता हो गए हैं
हसीं आज कल के खुदा हो गए हैं
........................................................
Mohabbat se dekha khafa ho gaye-Bheegi Raat 1965
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Mohd. Rafi,
Pradeep Kumar,
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