फिल्म नया दौर के साथ कुछ रोचक किस्से जुड़े हुए हैं. सुनते हैं कि
पहले नायिका के रोल में मधुबाला को लिया जाना था. उनकी जगह
वैजयंतीमाला आ गयीं. उसी तरह से ओ पी नय्यर भी मूल योजना का
हिस्सा नहीं थे. उन्हें भी बाद में अनुबंधित किया गया.
ओ पी नय्यर ने जो गीत इस फिल्म के लिए बनाये वो आज भी उतने ही
उत्साह से सुने जाते हैं, विशेषकर एक गीत जिसे शादी ब्याह के अवसर पर
खूब बजाया और गाया जाता है. ये युगल गीत जो इधर प्रस्तुत है आज उसे
भी खूब सुना जाता है. गायक हैं आशा और रफ़ी.
साहिर लुधियानवी ने इस फिल्म के गीत लिखे हैं. साहिर ने बी. आर. चोपड़ा की
कई फिल्मों के लिए गीत लिखे, अधिकतर में संगीत एन. दत्ता या रवि का होता.
ऐसा क्यूँ इसकी कहानी फिर कभी, फिलहाल ये गीत सुनिए.
गीत के बोल:
हो, उड़ें जब जब ज़ुल्फ़ें तेरी
हो, उड़ें जब जब ज़ुल्फ़ें तेरी
हो, उड़ें जब जब ज़ुल्फ़ें तेरी
हो, उड़ें जब जब ज़ुल्फ़ें तेरी
कुँवारियों का दिल मचले
कुँवारियों का दिल मचले
जिन्द मेरिये
जब ऐसे चिकने चेहरे
जब ऐसे चिकने चेहरे
तो कैसे ना नज़र फिसले
तो कैसे ना नज़र फिसले
जिन्द मेरिये
हो, रुत प्यार करन की आई
रुत प्यार करन की आई
हो, रुत प्यार करन की आई
हो, रुत प्यार करन की आई
के बेरियों के बेर पक गये
के बेरियों के बेर पक गये
जिन्द मेरिये
कभी डाल इधर भी फेरा
कभी डाल इधर भी फेरा
के तक-तक नैन थक गये
के तक-तक नैन थक गये
जिन्द मेरिये
हो, उस गाँव से सँवर कभी साजक़े
हो, उस गाँव से सँवर कभी साजक़े
हो, उस गाँव से सँवर कभी साजक़े
हो, उस गाँव से सँवर कभी साजक़े
के जहाँ मेरा यार बसता
के जहाँ मेरा यार बसता
जिन्द मेरिये
पानी लेने के बहाने आजा
पानी लेने के बहाने आजा
के तेरा मेरा इक रस्ता
के तेरा मेरा इक रस्ता
जिन्द मेरिये
हो, तुझे चाँद के बहाने देखूँ
हो, तुझे चाँद के बहाने देखूँ
तुझे चाँद के बहाने देखूँ
तुझे चाँद के बहाने देखूँ
तू छत पर आजा गोरिये
तू छत पर आजा गोरिये
जिन्द मेरिये
अभी छेड़ेंगे गली के सब लड़के
अभी छेड़ेंगे गली के सब लड़के
के चाँद बैरी छिप जाने दे
के चाँद बैरी छिप जाने दे
जिन्द मेरिये
हो, तेरी चाल है नागन जैसी
हो, तेरी चाल है नागन जैसी
तेरी चाल है नागन जैसी
हो, तेरी चाल है नागन जैसी
रे जोगी तुझे ले जायेंगे
रे जोगी तुझे ले जायेंगे
जिन्द मेरिये
जायेँ कहीं भी मगर हम सजना
हो, जायेँ कहीं भी मगर हम सजना
यह दिल तुझे दे जायेंगे
यह दिल तुझे दे जायेंगे
जिन्द मेरिये
...................................
Ude jab jab zulfen teri-Naya daur 1957
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Monday, 18 July 2011
Sunday, 26 June 2011
आसमान के नीचे-ज्वैल थीफ १९६७
फिल्म ज्वैल थीफ का एक गीत शैलेन्द्र ने लिखा और बाकी गीत
मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखे, कारण आपको इस फिल्म का पहला
गीत सुनवाते वक़्त बताया गया था।
इस फिल्म के सभी गीत लोकप्रिय हुए। प्रस्तुत गीत एक फुरसती सा
गीत है, फिल्म की सिचुएशन के हिसाब से। नायक नायिका सज संवर
के बाग़ में गीत गा रहे हैं। देव आनंद का जो सिर पर टोपी रखने का
अंदाज़ है वो काफ़ी सारी ४०-५० के दशक की विलायती फिल्मों में
आप देख सकते हैं। अच्छी बात है, कोई भी स्टाइल जो पसंद आये उसे
अपना लेना चाहिए। इस स्टाइल का बहुत इस्तेमाल हुआ है फिल्मों
में।
वास्को-डी-गामा को धरती पर दूसरे देशों की खोज का श्रेय जाता है
तो हिंदी फिल्मों के निर्देशकों को भी धन्यवाद् देने की ज़रुरत है जिनकी
वजह से हमें दूसरे देशों के बारे में जानकारी मिलती है । आम जनता
विलायत की सैर के ख्वाब देखती रहती है लेकिन ये हसरत फिल्मों के
माध्यम से, अधूरी ही सही, देख देख कर पूरी अवश्य हो जाती है ।
गीत गाया है लता और किशोर ने। गीत की धुन है सचिन देव बर्मन की।
ये काफ़ी घिसा हुआ अर्थात बजा हुआ युगल गीत है और आपने इसको
एक ना एक बार ज़रूर सुना होगा।
गीत के बोल:
आसमान के नीचे,
आसमान के नीचे ...आगे
हम आज अपने पीछे
हम आज अपने पीछे ... फिर
प्यार का जहाँ बसा के चले
कदम के निशां बना के चले
आसमान के नीचे
हम आज अपने पीछे
प्यार का जहाँ बसा के चले
कदम के निशां बना के चले
आसमान के नीचे
हम आज अपने पीछे
प्यार का जहाँ बसा के चले
कदम के निशां बना के चले
तुम चले तो फूल जैसे आँचल के रँग से
सज गई राहें, सज गई राहें
पास आओ मै पहना दूँ चाहत का हार ये
खुली खुली बाहें, खुली खुली बाहें
जिस का हो आँचल खुद ही चमन
कहिये वो क्यूँ हार बाहों के डाले
अरे आसमान के नीचे
हम आज अपने पीछे
प्यार का जहाँ बसा के चले
कदम के निशां बना के चले
बोलती हैं आज आँखें कुछ भी न आज तुम
कहने दो हमको, कहने दो हमको
बेखुदी बढ़ती चली है अब तो ख़ामोश ही
रहने दो हमको, रहने दो हमको
इक बार एक बार, मेरे लिये
कह दो खनकें, लाल होंठों के प्याले
आसमान के नीचे
हम आज अपने पीछे
प्यार का जहाँ बसा के चले
कदम के निशां बना के चले
साथ मेरे चल के देखो आई हैं धूम से
अब की बहारें, अब की बहारें
हर गली हर मोड़ पे वो दोनों के नाम से
हमको पुकारे, तुमको पुकारे
कह दो बहारों से, आए न इधर
उन तक उठ कर, हम नहीं जाने वाले
आसमान के नीचे
हम आज अपने पीछे
प्यार का जहाँ बसा के चले
कदम के निशां बना के चले
...............................
Aasman ke neeche-Jewl Thief 1967
मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखे, कारण आपको इस फिल्म का पहला
गीत सुनवाते वक़्त बताया गया था।
इस फिल्म के सभी गीत लोकप्रिय हुए। प्रस्तुत गीत एक फुरसती सा
गीत है, फिल्म की सिचुएशन के हिसाब से। नायक नायिका सज संवर
के बाग़ में गीत गा रहे हैं। देव आनंद का जो सिर पर टोपी रखने का
अंदाज़ है वो काफ़ी सारी ४०-५० के दशक की विलायती फिल्मों में
आप देख सकते हैं। अच्छी बात है, कोई भी स्टाइल जो पसंद आये उसे
अपना लेना चाहिए। इस स्टाइल का बहुत इस्तेमाल हुआ है फिल्मों
में।
वास्को-डी-गामा को धरती पर दूसरे देशों की खोज का श्रेय जाता है
तो हिंदी फिल्मों के निर्देशकों को भी धन्यवाद् देने की ज़रुरत है जिनकी
वजह से हमें दूसरे देशों के बारे में जानकारी मिलती है । आम जनता
विलायत की सैर के ख्वाब देखती रहती है लेकिन ये हसरत फिल्मों के
माध्यम से, अधूरी ही सही, देख देख कर पूरी अवश्य हो जाती है ।
गीत गाया है लता और किशोर ने। गीत की धुन है सचिन देव बर्मन की।
ये काफ़ी घिसा हुआ अर्थात बजा हुआ युगल गीत है और आपने इसको
एक ना एक बार ज़रूर सुना होगा।
गीत के बोल:
आसमान के नीचे,
आसमान के नीचे ...आगे
हम आज अपने पीछे
हम आज अपने पीछे ... फिर
प्यार का जहाँ बसा के चले
कदम के निशां बना के चले
आसमान के नीचे
हम आज अपने पीछे
प्यार का जहाँ बसा के चले
कदम के निशां बना के चले
आसमान के नीचे
हम आज अपने पीछे
प्यार का जहाँ बसा के चले
कदम के निशां बना के चले
तुम चले तो फूल जैसे आँचल के रँग से
सज गई राहें, सज गई राहें
पास आओ मै पहना दूँ चाहत का हार ये
खुली खुली बाहें, खुली खुली बाहें
जिस का हो आँचल खुद ही चमन
कहिये वो क्यूँ हार बाहों के डाले
अरे आसमान के नीचे
हम आज अपने पीछे
प्यार का जहाँ बसा के चले
कदम के निशां बना के चले
बोलती हैं आज आँखें कुछ भी न आज तुम
कहने दो हमको, कहने दो हमको
बेखुदी बढ़ती चली है अब तो ख़ामोश ही
रहने दो हमको, रहने दो हमको
इक बार एक बार, मेरे लिये
कह दो खनकें, लाल होंठों के प्याले
आसमान के नीचे
हम आज अपने पीछे
प्यार का जहाँ बसा के चले
कदम के निशां बना के चले
साथ मेरे चल के देखो आई हैं धूम से
अब की बहारें, अब की बहारें
हर गली हर मोड़ पे वो दोनों के नाम से
हमको पुकारे, तुमको पुकारे
कह दो बहारों से, आए न इधर
उन तक उठ कर, हम नहीं जाने वाले
आसमान के नीचे
हम आज अपने पीछे
प्यार का जहाँ बसा के चले
कदम के निशां बना के चले
...............................
Aasman ke neeche-Jewl Thief 1967
Monday, 20 June 2011
दिल की दुनिया बसा के सांवरिया-अमरदीप १९५८
फिल्म अमरदीप से तीसरा गीत पेश है लता मंगेशकर की
आवाज़ में। बोल लिखे हैं रेजेंद्र कृष्ण ने और संगीतकार
हैं सी रामचंद्र। गीत फिल्माया गया है वैजयंतीमाला पर।
गीत विडियो मिक्सिंग के प्रभाव के कारण मुझे बारम्बार
याद आ जाता है। थोड़ा दुखी करने वाला गीत है लेकिन सुनने
में अच्छा लगता है इसलिए इसे सुन लेते हैं कभी कभी।
अब हर गीत में लोजिक, मैजिक और झिक झिक ज़रूरी नहीं
हैं ना जी ? फिर भी आपको सी रामचंद्र और दूसरे संगीतकारों
में फर्क बताये देते हैं-सी रामचंद्र ने गायकों को ज्यादा मौका
दिया बजाये वाद्य यंत्रों के। साजों की बाजीगरी उन्होंने लगभग
हमेशा ही नियंत्रण में रखी। सन ५८ के दूसरे संगीतकारों के बनाये
और लता के गाये गीत सुन लीजिये। फर्क आप खुद ब खुद
समझ जायेंगे। गीत में लता की आवाज़ के अलावा आप बांसुरी की
आवाज़ को ज्यादा स्पष्ट सुन पाएंगे। इसके अलावा रामचंद्र का
पसंदीदा साज़ मैन्डोलिन की झलक भी कहीं कहीं सुनाई देगी।
वायलिन के अनावश्यक शोर में शायद सी रामचंद्र का ज्यादा
विश्वास नहीं रहा ।
गीत के बोल:
दिल की दुनिया बसा के सांवरिया
दिल की दुनिया बसा के सांवरिया
तुम ना जाने कहाँ खो गये, खो गये
साथ रहना था सारी उमरिया
दूर नज़रों से दूर क्यूँ हो गये, हो गये
जाने वाले, जाने वाले पता तेरा मैंने
आती जाती बहारों से पूछा
जाने वाले पता तेरा मैंने
आती जाती बहारों से पूछा
चुप रहे जब ज़मीन के नज़ारे
आसमान के सितारों से पूछा
चुप रहे जब ज़मीन के नज़ारे
आसमान के सितारों से पूछा
सुन के बादल भी मेरी कहानी
सुन के बादल भी मेरी कहानी
बेबसी पर मेरी रो गये, रो गये
दिल की दुनिया बसा के सांवरिया
तुम ना जाने कहाँ खो गये, खो गये
हंस रहा है
हंस रहा है ये ज़ालिम ज़माना
अपनी खुशियों की महफ़िल सजाये
हंस रहा है ये ज़ालिम ज़माना
अपनी खुशियों की महफ़िल सजाये
मैं अकेली मगर रो रही हूँ
तेरी यादों को दिल से लगाये
मैं अकेली मगर रो रही हूँ
तेरी यादों को दिल से लगाये
बहते बहते ये आंसू भी हारे
बहते बहते ये आंसू भी हारे
आ के पलकों पे हैं सो गये, सो गये
दिल की दुनिया बसा के सांवरिया
तुम ना जाने कहाँ खो गये, खो गये
......................................
Dil ki duniya basa ke sanwariya-Amardeep 1958
आवाज़ में। बोल लिखे हैं रेजेंद्र कृष्ण ने और संगीतकार
हैं सी रामचंद्र। गीत फिल्माया गया है वैजयंतीमाला पर।
गीत विडियो मिक्सिंग के प्रभाव के कारण मुझे बारम्बार
याद आ जाता है। थोड़ा दुखी करने वाला गीत है लेकिन सुनने
में अच्छा लगता है इसलिए इसे सुन लेते हैं कभी कभी।
अब हर गीत में लोजिक, मैजिक और झिक झिक ज़रूरी नहीं
हैं ना जी ? फिर भी आपको सी रामचंद्र और दूसरे संगीतकारों
में फर्क बताये देते हैं-सी रामचंद्र ने गायकों को ज्यादा मौका
दिया बजाये वाद्य यंत्रों के। साजों की बाजीगरी उन्होंने लगभग
हमेशा ही नियंत्रण में रखी। सन ५८ के दूसरे संगीतकारों के बनाये
और लता के गाये गीत सुन लीजिये। फर्क आप खुद ब खुद
समझ जायेंगे। गीत में लता की आवाज़ के अलावा आप बांसुरी की
आवाज़ को ज्यादा स्पष्ट सुन पाएंगे। इसके अलावा रामचंद्र का
पसंदीदा साज़ मैन्डोलिन की झलक भी कहीं कहीं सुनाई देगी।
वायलिन के अनावश्यक शोर में शायद सी रामचंद्र का ज्यादा
विश्वास नहीं रहा ।
गीत के बोल:
दिल की दुनिया बसा के सांवरिया
दिल की दुनिया बसा के सांवरिया
तुम ना जाने कहाँ खो गये, खो गये
साथ रहना था सारी उमरिया
दूर नज़रों से दूर क्यूँ हो गये, हो गये
जाने वाले, जाने वाले पता तेरा मैंने
आती जाती बहारों से पूछा
जाने वाले पता तेरा मैंने
आती जाती बहारों से पूछा
चुप रहे जब ज़मीन के नज़ारे
आसमान के सितारों से पूछा
चुप रहे जब ज़मीन के नज़ारे
आसमान के सितारों से पूछा
सुन के बादल भी मेरी कहानी
सुन के बादल भी मेरी कहानी
बेबसी पर मेरी रो गये, रो गये
दिल की दुनिया बसा के सांवरिया
तुम ना जाने कहाँ खो गये, खो गये
हंस रहा है
हंस रहा है ये ज़ालिम ज़माना
अपनी खुशियों की महफ़िल सजाये
हंस रहा है ये ज़ालिम ज़माना
अपनी खुशियों की महफ़िल सजाये
मैं अकेली मगर रो रही हूँ
तेरी यादों को दिल से लगाये
मैं अकेली मगर रो रही हूँ
तेरी यादों को दिल से लगाये
बहते बहते ये आंसू भी हारे
बहते बहते ये आंसू भी हारे
आ के पलकों पे हैं सो गये, सो गये
दिल की दुनिया बसा के सांवरिया
तुम ना जाने कहाँ खो गये, खो गये
......................................
Dil ki duniya basa ke sanwariya-Amardeep 1958
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Lata Mangeshkar,
Rajinder Krishan,
Vaijayantimala
Tuesday, 31 May 2011
बाकड़ बम बम बम-कठपुतली १९५७
अमिया चक्रवर्ती के सिनेमा का मैं बहुत बड़ा फैन हूँ। आइये उनकी
फिल्म से एक गीत सुना जाये। फिल्म का नाम है कठपुतली जो
सन १९५७ की फिल्म है। वैजयंतीमाला एक कुशल नृत्यांगना के
साथ साथ एक बढ़िया अदाकारा भी हैं। आज उन्हीं पर फिल्माया
गया और लता का गाया गीत सुनवा रहे हैं आपको। इसका संगीत
शंकर जयकिशन का तैयार किया हुआ है । गीत की ध्वनि बच्चों
को भी आकर्षित करती है।
गीत के बोल:
ओ बाकड़ बम बम बम बम बाजे डमरू
बाजे डमरू
नाच रे मयूर झनझना के घुँघरू
बाकड़ बम बम बम बम बाजे डमरू
बाजे डमरू
नाच रे मयूर झनझना के घुँघरू
ओ बाकड़ बम बम बम बम बाजे डमरू
बाजे डमरू
नाच रे मयूर झनझना के घुँघरू
बाकड़ बम बम बम
आसमान पे देखो आज सात रंग छाये
अपने दिल में आग ले के बादल काले आये
आसमान पे देखो आज सात रंग छाये
अपने दिल में आग ले के बादल काले आये
बादल गरजे मेघ बरसे चहूँ ओर सावन लहराए
ओ सावन लहराए
नाच रे मयूर झनझना के घुँघरू
ओ बाकड़ बम बम बम बम बाजे डमरू
बाजे डमरू
नाच रे मयूर झनझना के घुँघरू
ओ बाकड़ बम बम बम बम बाजे डमरू
बाजे डमरू
नाच रे मयूर झनझना के घुँघरू
बाकड़ बम बम बम
मच रहा है डाल डाल पंछियों का शोर
आ गई है प्यार ले के अब सुहानी भोर
मच रहा है डाल डाल पंछियों का शोर
आ गई है प्यार ले के अब सुहानी भोर
भंवर घूमे फूल चूमे बांधे प्रीत की डोर
ओ प्रीत की डोर
नाच रे मयूर झनझना के घुँघरू
ओ बाकड़ बम बम बम बम बाजे डमरू
बाजे डमरू
नाच रे मयूर झनझना के घुँघरू
ओ बाकड़ बम बम बम बम बाजे डमरू
बाजे डमरू
नाच रे मयूर झनझना के घुँघरू
बाकड़ बम बम बम
.................................
Bakad bam bam bam-Kathputli 1957
फिल्म से एक गीत सुना जाये। फिल्म का नाम है कठपुतली जो
सन १९५७ की फिल्म है। वैजयंतीमाला एक कुशल नृत्यांगना के
साथ साथ एक बढ़िया अदाकारा भी हैं। आज उन्हीं पर फिल्माया
गया और लता का गाया गीत सुनवा रहे हैं आपको। इसका संगीत
शंकर जयकिशन का तैयार किया हुआ है । गीत की ध्वनि बच्चों
को भी आकर्षित करती है।
गीत के बोल:
ओ बाकड़ बम बम बम बम बाजे डमरू
बाजे डमरू
नाच रे मयूर झनझना के घुँघरू
बाकड़ बम बम बम बम बाजे डमरू
बाजे डमरू
नाच रे मयूर झनझना के घुँघरू
ओ बाकड़ बम बम बम बम बाजे डमरू
बाजे डमरू
नाच रे मयूर झनझना के घुँघरू
बाकड़ बम बम बम
आसमान पे देखो आज सात रंग छाये
अपने दिल में आग ले के बादल काले आये
आसमान पे देखो आज सात रंग छाये
अपने दिल में आग ले के बादल काले आये
बादल गरजे मेघ बरसे चहूँ ओर सावन लहराए
ओ सावन लहराए
नाच रे मयूर झनझना के घुँघरू
ओ बाकड़ बम बम बम बम बाजे डमरू
बाजे डमरू
नाच रे मयूर झनझना के घुँघरू
ओ बाकड़ बम बम बम बम बाजे डमरू
बाजे डमरू
नाच रे मयूर झनझना के घुँघरू
बाकड़ बम बम बम
मच रहा है डाल डाल पंछियों का शोर
आ गई है प्यार ले के अब सुहानी भोर
मच रहा है डाल डाल पंछियों का शोर
आ गई है प्यार ले के अब सुहानी भोर
भंवर घूमे फूल चूमे बांधे प्रीत की डोर
ओ प्रीत की डोर
नाच रे मयूर झनझना के घुँघरू
ओ बाकड़ बम बम बम बम बाजे डमरू
बाजे डमरू
नाच रे मयूर झनझना के घुँघरू
ओ बाकड़ बम बम बम बम बाजे डमरू
बाजे डमरू
नाच रे मयूर झनझना के घुँघरू
बाकड़ बम बम बम
.................................
Bakad bam bam bam-Kathputli 1957
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Shailendra,
Shankar Jaikishan,
Vaijayantimala
Tuesday, 23 November 2010
अरे छोड़ दे सजनिया पतंग मेरी-नागिन १९५४
नागिन सन १९५४ की फिल्म है और ज़बरदस्त हिट फिल्म है।
इसके गीत इतने बजे कि लोगों को याद हो गए। पिछले गीत
को सुनने के बाद ये ही सबसे पहले दिमाग में आता है। वजह
क्या है आप ढूंढिए। फिल्म में एक नौटंकी में नायक प्रदीप कुमार
और नायिका वैजयंतीमाला ये गीत गा रहे हैं। हेमंत कुमार और
लता मंगेशकर के गाये इस गीत को लिखा है राजेंद्र कृष्ण ने और
धुन बनाई है हेमंत कुमार ने।
गीत के बोल:
अरी छोड़ दे सजनिया
छोड़ दे पतंग मेरी छोड़ दे
ऐसे छोड़ूँ न बलमवा
नैनवा के डोर पहले जोड़ दे
अरी छोड़ दे सजनिया
छोड़ दे पतंग मेरी छोड़ दे
ऐसे छोड़ूँ न बलमवा
नैनवा के डोर पहले जोड़ दे
आशाओं का मांजा लागा
रंगी प्यार से डोरी
आशाओं का मांजा लागा
रंगी प्यार से डोरी
तेरे मुहल्ले उड़ते उड़ते
आई चोरी चोरी
बैरी दुनिया कहीं न तोड़ दे
पतंग मेरी छोड़ दे
ऐसे छोड़ूँ न बलमवा
नैनवा के डोर पहले जोड़ दे
अरमानों की डोर लूटने
खड़े है दुनियवाले
बाँके चरख़ीवाले
अरमानों की डोर लूटने
खड़े है दुनियवाले
बाँके चरख़ीवाले
ऊँचे नीलगगन में
छोड़ दे पतंग मेरी छोड़ दे
ऐसे छोड़ूँ न बलमवा
नैनवा के डोर पहले जोड़ दे
देख चली ये संग हवा के
बलखाती इठलाती
सैयाँ बलखाती इठलाती
चीर के बैरी जग का सीना
गीत प्यार के गाती
देखो गीत प्यार के गाती
हैं किस में इतना ज़ोर
जो काटे डोर सामने आये न
फिर मेरी अटरिया पे
छोड़ दे पतंग सैयाँ छोड़ दे
ऐसे छोड़ूँ न सजनिया
नैनवा के डोर पहले जोड़ दे
सैयाँ छोड़ दे पतंग मेरी छोड़ दे
गोरी नैनवा के डोर पहले जोड़ दे
सैयाँ छोड़ दे पतंग मेरी छोड़ दे
गोरी नैनवा के डोर पहले जोड़ दे
सैयाँ छोड़ दे पतंग मेरी छोड़ दे
गोरी नैनवा के डोर पहले जोड़ दे
सैयाँ छोड़ दे पतंग मेरी छोड़ दे
इसके गीत इतने बजे कि लोगों को याद हो गए। पिछले गीत
को सुनने के बाद ये ही सबसे पहले दिमाग में आता है। वजह
क्या है आप ढूंढिए। फिल्म में एक नौटंकी में नायक प्रदीप कुमार
और नायिका वैजयंतीमाला ये गीत गा रहे हैं। हेमंत कुमार और
लता मंगेशकर के गाये इस गीत को लिखा है राजेंद्र कृष्ण ने और
धुन बनाई है हेमंत कुमार ने।
गीत के बोल:
अरी छोड़ दे सजनिया
छोड़ दे पतंग मेरी छोड़ दे
ऐसे छोड़ूँ न बलमवा
नैनवा के डोर पहले जोड़ दे
अरी छोड़ दे सजनिया
छोड़ दे पतंग मेरी छोड़ दे
ऐसे छोड़ूँ न बलमवा
नैनवा के डोर पहले जोड़ दे
आशाओं का मांजा लागा
रंगी प्यार से डोरी
आशाओं का मांजा लागा
रंगी प्यार से डोरी
तेरे मुहल्ले उड़ते उड़ते
आई चोरी चोरी
बैरी दुनिया कहीं न तोड़ दे
पतंग मेरी छोड़ दे
ऐसे छोड़ूँ न बलमवा
नैनवा के डोर पहले जोड़ दे
अरमानों की डोर लूटने
खड़े है दुनियवाले
बाँके चरख़ीवाले
अरमानों की डोर लूटने
खड़े है दुनियवाले
बाँके चरख़ीवाले
ऊँचे नीलगगन में
छोड़ दे पतंग मेरी छोड़ दे
ऐसे छोड़ूँ न बलमवा
नैनवा के डोर पहले जोड़ दे
देख चली ये संग हवा के
बलखाती इठलाती
सैयाँ बलखाती इठलाती
चीर के बैरी जग का सीना
गीत प्यार के गाती
देखो गीत प्यार के गाती
हैं किस में इतना ज़ोर
जो काटे डोर सामने आये न
फिर मेरी अटरिया पे
छोड़ दे पतंग सैयाँ छोड़ दे
ऐसे छोड़ूँ न सजनिया
नैनवा के डोर पहले जोड़ दे
सैयाँ छोड़ दे पतंग मेरी छोड़ दे
गोरी नैनवा के डोर पहले जोड़ दे
सैयाँ छोड़ दे पतंग मेरी छोड़ दे
गोरी नैनवा के डोर पहले जोड़ दे
सैयाँ छोड़ दे पतंग मेरी छोड़ दे
गोरी नैनवा के डोर पहले जोड़ दे
सैयाँ छोड़ दे पतंग मेरी छोड़ दे
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