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Sunday, 17 July 2011

ठण्डी पवन चले-फूटपाथ १९५३

एक गीत सुनवाते हैं आपको तीन गायकों की आवाजों में . ये लिया
गया है फिल्म फुटपाथ से . इस फिल्म का ये चौथा गीत है ब्लॉग पर.
तलत महमूद के साथ प्रेमलता और आशिमा बैनर्जी की आवाजें हैं.


ऐसे शोर्ट एंड स्वीट गीत बहुत भाते हैं मुझे क्यूंकि बोल लिखने में भी
ज्यादा कसरत नहीं करना पढ़ती है. गीत सरदार जाफरी का लिखा हुआ है
या मजरूह का, इस बारे में कोई प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध नहीं है
अतः हम दोनों के नाम टैग में डाल देते हैं.




गीत के बोल:

ठण्डी पवन चले
साँझ ढले
कू कू कोयल बोले
जिया डोले जिया डोले
पवन चले

प्यारे-प्यारे बाल सँवारे
शाम आई ले के नज़ारे
प्यारे-प्यारे बाल सँवारे
शाम आई ले के नज़ारे

नीले-नीले पीले-पीले
नीले-नीले पीले-पीले
देखो गगन में भी फूल खिले
पवन चले

चन्दा-तारे करें इशारे
आओ खेलें हमें पुकारे
चन्दा-तारे करें इशारे
आओ खेलें हमें पुकारे

कह दो चुन्नू, कह दो मुन्नू
कह दो चुन्नू, कह दो मुन्नू
रात होने को है हम चले
पवन चले

ठण्डी पवन चले
साँझ ढले
कू कू कोयल बोले
जिया डोले जिया डोले
पवन चले
-----------------------------------
Thandi pawan Chale-Footpath 1953

Monday, 23 May 2011

कैसा जादू डाला रे बलमा -फुटपाथ १९५३

आपको फिल्म फुटपाथ के दो गीत हम सुनवा चुके हैं अब तक।

फुटपाथ का अर्थ है पैदल चलने वालों के लिए रास्ता। सड़क
वाहनों के लिए बनाई जाती है, मगर हमारे देश में आपको
दुपहिया वाहन चालक फुटपाथ का उपयोग और पैदल चालक
सड़क का दुरूपयोग करते हुए मिल जायेंगे। आधुनिक परिभाषा
है इसकी-अतिक्रमित सार्वजनिक स्थान जिसका सब्जी बेचने
वाले से लेकर पंचर जोड़ने वाले तक सभी सामान रूप से अपनी
पैतृक संपत्ति समझ के उपयोग करते हों। छोटे बच्चे इसको अपनी
तोतली भाषा में फूट-फाट भी कहते हैं, जी हाँ वही स्थान जो सडक
के किनारे थोड़ा ऊंचा सा एक पट्टी जैसा सड़क के साथ साथ
दूर तक बना हुआ दिखाई देता है। कुछ फुटपाथों की दुर्दशा देख
कर लगता हैं बच्चे इसको सही रूप में पहचान लेते हैं जो हम जैसे
मूढ़ मति इतना ज्ञान बटोर कर भी नहीं कर पाते।

खैर फिल्म फुटपाथ में फुटपाथ का कितना उपयोग हुआ ये मुझे
समझ नहीं आया। फिल्म का तीसरा गीत सुनते हैं जो अपने समय
के लिहाज़ से काफी बोल्ड गीत है। मीना कुमारी इस गीत में
आपको संगीतमय स्नान करती दिखाई देंगी। आशा भोंसले की
आवाज़ है, मजरूह के बोल हैं और संगीत एक बार फिर से
ख़य्याम साहब का। ये गीत वैसे हिंदी फिल्मों के प्रसिद्ध स्नान
गीतों की श्रेणी में नहीं आता है।



गीत के बोल:

कैसा जादू डाला रे बलमा ना जाने
खड़े खड़े मचले रे सैयां नहीं माने

कैसा जादू डाला रे बलमा ना जाने
खड़े खड़े मचले रे सैयां नहीं माने

ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला

कैसा जादू डाला रे बलमा ना जाने
खड़े खड़े मचले रे सैयां नहीं माने

गीत के बाकी बोल की ज़रुरत महसूस करें तो एक चटका लगा
के ब्लॉग को धन्य करें।

Tuesday, 11 January 2011

शाम-ए-ग़म की क़सम-फुटपाथ १९५३

आपको मखमली आवाज़ सुनवाते हैं बहुत दिनों बाद।
तलत महमूद की आवाज़ में ये सदाबहार गीत सुनिए
फिल्म फुटपाथ से। सन १९५३ से ये गीत श्रोताओं को
आनंदित करता आ रहा है। मजरूह के बोलों को सुरों
में पिरोया है खय्याम ने। दिलीप कुमार की ट्रेजेडी किंग
की इमेज में ऐसे गीतों का योगदान बहुत रहा। इस गीत
को अक्सर श्रोता दुखी अवस्था में सुना करते हैं और ऐसा
सुना जाता है कि इसको सुनने के बाद वे अवसाद से बाहर
आ जाते हैं। कुछ कुछ होम्योपैथी के इलाज़ की तरह.....





गीत के बोल:

शाम-ए-ग़म की क़सम आज ग़मगीं हैं हम
आ भी जा आ भी जा आज मेरे सनम
शाम-ए-ग़म की क़सम

दिल परेशान है रात वीरान है
देख जा किस तरह आज तनहा हैं हम
शाम-ए-ग़म की क़सम

चैन कैसा जो पहलू में तू ही नहीं
मार डाले न दर्द-ए-जुदाई कहीं
रुत हंसीं हैं तो क्या चाँदनी है तो क्या
चाँदनी ज़ुल्म है और जुदाई सितम

शाम-ए-ग़म की क़सम आज ग़मगीं हैं हम
आ भी जा आ भी जा आज मेरे सनम
शाम-ए-ग़म की क़सम

अब तो आ जा के अब रात भी सो गई
ज़िन्दगी ग़म के सेहराव में खो गई
अब तो आ जा के अब रात भी सो गई
ज़िन्दगी ग़म के सेहराव में खो गई
ढूँढती हैं नज़र तू कहाँ हैं मगर
देखते देखते आया आँखों में ग़म

शाम-ए-ग़म की क़सम आज ग़मगीं हैं हम
आ भी जा आ भी जा आज मेरे सनम
शाम-ए-ग़म की क़सम
..............................
Sham-e-gham ki kasam-Footpath 1952

Monday, 10 January 2011

सो जा मेरे प्यारे-फुटपाथ १९५३

हिंदी फिल्म संगीत का खज़ाना अजब गज़ब लोरियों से भरा पड़ा है।
अधिकतर लोकप्रिय लोरियां आपको पुरानी फिल्मों में ही मिलेंगी।
बॉलीवुड का मानना है कि फ़िल्मी बच्चे बड़े हो गए हैं अतः इस ज़माने
में लोरियों की आवश्यकता नहीं है। आजकल लोरी की जगह दूसरे किस्म
के गानों ने ले ली है। उदाहरण के लिए बच्चे बड़े हो गए हैं और शायद
आईटम-सोंग ज्यादा देखना सुनना पसंद करते हैं।


मीठी और मधुर खुशनुमा लोरियां आपने बहुत सुनी होंगी। एक
दुःख भरी लोरी भी सुनिए जो फिल्म फुटपाथ में है। ये सन १९५३
कि फिल्म है. दुःख भरी लोरी गा कर बच्चे को सुलाना बहुत ही
कठिन कार्य है जो आप महसूस करेंगे इस गीत में। गीत फिल्माया
गया है मीना कुमारी पर। गीत लिखा है मजरूह ने और इसकी
धुन बनाई है खय्याम ने। आंसुओं में भीगी लोरी गाने वाली गायिका
हैं आशा भोंसले।





गीत के बोल:

सो जा मेरे प्यारे
सो जा सो जा
सो जा मेरे प्यारे
सो जा सो जा
अंखियों के तारे
सो जा सो जा
अंखियों के तारे
सो जा सो जा

रात सुहानी चंदा गाये
मीठी मीठी निंदिया आये
रात सुहानी चंदा गाये
मीठी मीठी निंदिया आये
राजदुलारे नैनन तारे सो जा
सो जा मेरे प्यारे
सो जा सो जा
अंखियों के तारे
सो जा सो जा

आहों की फ़रियाद की दुनिया
ये दुनिया बेदाज की दुनिया
आहों की फ़रियाद की दुनिया
ये दुनिया बेदाज की दुनिया
तेरी दुनिया चाँद सितारे सो जा

सो जा मेरे प्यारे
सो जा सो जा
सो जा मेरे प्यारे
सो जा सो जा
 
 
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