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Saturday, 3 September 2011

क्यों झुकी-झुकी हैं पलकें-छैला बाबू १९६७

फिल्म छैला बाबू से एक मधुर गीत आपको सुनवाया था पहले। अब सुनवाते हैं
एक मधुर युगल गीत जिसमें नायक नायिका की झुकी हुई पलकों के बारे में
प्रश्न कर रहा है। इन्टरनेट की दुनिया जानकारियों के खजाने से भरी पड़ी है। कई
श्रोता और दर्शक ऐसे भी मिलेंगे आपको जिनके पास दुर्लभ जानकारी होती है। ये
बात और है कि इन दुर्लभ जानकारियों को जगह जगह से इकठ्ठा कर के कुछ चंपुओं
ने सारा श्रेय लेने के लिए कुछ वेबसाइट बना मारी हैं जिन्हें देख के ऐसा लगता है
मानो उन्होंने पैदा होते साथ ही पी एच डी कर मारी हो. इनमें से अधिकतर चंपुओं
की साईट आंग्ल भाषा में है।

गीत और फिल्म के बारे में चर्चा कि जाए। यू ट्यूब पर गीत के नीचे दो कमेन्ट लिखे
हैं जिनसे ये पता चलता है कि इस फिल्म के नायक वही हैं-सलीम जावेद की जोड़ी वाले
सलीम. गौरतलब है पिछले गीत में फिल्म के दुसरे नायक थे-सुबिराज। इस गीत में
सलीम के साथ नायिका हैं जेब रहमान। फिल्म के निर्माता नवसारी निवासी हैं और वहां
के एक सिनेमा के मालिक हैं जैसा कि एक कमेन्ट में उल्लेख है। जहाँगीर टॉकीज़ या
भारत सिनेमा बनवाया था नौशेरवां बारिया ने। सन १९५६ में फिल्म गणेश महिमा से
इसका व्यवसाय शुरू हुआ। जैसा कि विकी के लिंक पर कांतिभाई ने उल्लेख किया है-
गायक मोहम्मद रफ़ी ने इसके स्टेज पर एक लाइव शो भी किया सन १९५७ में जिसमें
उन्होंने प्यासा फिल्म जो कि उस समय रिलीज़ नहीं हुई थी, का एक गीत गा कर वहां
के श्रोताओं को अचंभित किया था। इस सिनेमा को बरसों तक रूसी और नवल नामक
दो भाइयों ने चलाया।

नेट पर उपलब्ध जानकारियों में फिल्म के निर्माता की जगह लिखा मिलेगा-आर. एच.
मुल्लन प्रोडक्शंस । अब ये आप खोजिये कि इस फिल्म का असली निर्माता कौन है ?

एक दिलचस्प बात और बताते चलें आपको. फिल्म के निर्देशक के. परवेज़ हैं जिन्होंने
अपना नाम बाद में कल्पतरु रख लिया और कई परिवारिक फ़िल्में बनाई ८० के दशक
में. उनकी अधिकांश फिल्मों में आपको लक्ष्मी प्यारे का संगीत मिलेगा.




गीत के बोल:

क्यों झुकी-झुकी हैं पलकें
क्यों झुकी-झुकी हैं पलकें मेरी जाँ ये बात क्या है
क्यों झुकी-झुकी हैं पलकें मेरी जाँ ये बात क्या है
मेरे दिल मैं कैसे कह दूँ मुझे प्यार हो गया है
क्यों झुकी-झुकी हैं पलकें

ये घटा भी आज हम पर मोती लुटा रही है
हमें देख कर कली भी सर को झुका रही है
मेरे दिल की बात सुनने ये हवा भी आ रही है
ये गगन भी देखता है देखे तो हर्ज क्या है

क्यों झुकी-झुकी हैं पलकें मेरी जाँ ये बात क्या है
मेरे दिल मैं कैसे कह दूँ मुझे प्यार हो गया है
क्यों झुकी-झुकी हैं पलकें

ये शरम न हमसे कीजे हम भी तो हैं तुम्हारे
किरनों से माँग भर दें कर दो अगर इशारे
दिल गा रहा है नग़मा बस में नहीं हमारे
मौसम भी झूमता है झूमें तो हर्ज क्या है
मेरे दिल मैं कैसे कह दूँ मुझे प्यार हो गया है

क्यों झुकी-झुकी हैं पलकें मेरी जाँ ये बात क्या है
मेरे दिल मैं कैसे कह दूँ मुझे प्यार हो गया है
क्यों झुकी-झुकी हैं पलकें
........................................
Kyun jhuki jhuki hai palken-Chhaila Babu 1967

Thursday, 25 August 2011

तेरे प्यार ने मुझे गम दिया -छैला बाबू १९६७

गीत सुनकर ऐसा लगता ही नहीं है कि ये सन १९६७ की फिल्म से होगा।

ध्वनियाँ इसकी कुछ पुराने युग की प्रतीत होती हैं। सन १९६७ तक हिंदी

फिल्म संगीत में शोरगुल का आगमन हो चुका था। ये मधुर गीत भी एक

अनजान सी फिल्म से है। धन्यवाद यू ट्यूब का जिसकी बदौलत ऐसी

गुमनाम सी फिल्मों के मधुर गीत भी देखने - सुनने को मिल जाते हैं।



गीत है सन १९६७ की फिल्म छैला बाबू से। इसका संगीत तैयार किया है

लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने। गीत असद भोपाली की कलम से निकला है।

गीत में जो नायिका हैं उनका नाम नाज़/ज़ेब रहमान है, हीरो को आप

पहचानिये। एक क्लू देते हैं आपको-नायक एक चरित्र अभिनेता के रूप में

ज्यादा प्रसिद्ध हुए हैं।









geet ke bol:



तेरे प्यार ने मुझे गम दिया तेरे गम की उम्र दराज़ हो

तेरे प्यार ने मुझे गम दिया तेरे गम की उम्र दराज़ हो

वो ज़माना आये खुदा करे मेरे प्यार पर तुझे नाज़ हो



तेरे प्यार ने



मेरा प्यार लूटने वाले जा तू तमाम उम्र जवान रहे

मेरा प्यार लूटने वाले जा तू तमाम उम्र जवान रहे

तेरी जिंदगी में बहार हो,

तेरी जिंदगी में बहार हो मेरी जिंदगी में खिजां रहे

मेरे साथ हो मेरी बेबसी तेरे साथ नगमों का साज़ हो



तेरे प्यार ने मुझे गम दिया तेरे गम की उम्र दराज़ हो

तेरे प्यार ने



कहीं और चल मेरे दिल यहाँ कभी लौट कर नहीं आयेंगे

कहीं और चल मेरे दिल यहाँ कभी लौट कर नहीं आयेंगे

मिली दिल लगाने की वो सजा

मिली दिल लगाने की वो सजा कभी भी दिल न लगाएंगे

उसे क्या पता की वफ़ा है क्या, जिसे बेवफाई पर नाज़ हो



तेरे प्यार ने मुझे गम दिया तेरे गम की उम्र दराज़ हो

वो ज़माना आये खुदा करे मेरे प्यार पर तुझे नाज़ हो



तेरे प्यार ने



....................................

Tere pyar ne mujhe gham diya-Chhaila Babu 1967

Sunday, 26 June 2011

आसमान के नीचे-ज्वैल थीफ १९६७

फिल्म ज्वैल थीफ का एक गीत शैलेन्द्र ने लिखा और बाकी गीत
मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखे, कारण आपको इस फिल्म का पहला
गीत सुनवाते वक़्त बताया गया था।

इस फिल्म के सभी गीत लोकप्रिय हुए। प्रस्तुत गीत एक फुरसती सा
गीत है, फिल्म की सिचुएशन के हिसाब से। नायक नायिका सज संवर
के बाग़ में गीत गा रहे हैं। देव आनंद का जो सिर पर टोपी रखने का
अंदाज़ है वो काफ़ी सारी ४०-५० के दशक की विलायती फिल्मों में
आप देख सकते हैं। अच्छी बात है, कोई भी स्टाइल जो पसंद आये उसे
अपना लेना चाहिए। इस स्टाइल का बहुत इस्तेमाल हुआ है फिल्मों
में।

वास्को-डी-गामा को धरती पर दूसरे देशों की खोज का श्रेय जाता है
तो हिंदी फिल्मों के निर्देशकों को भी धन्यवाद् देने की ज़रुरत है जिनकी
वजह से हमें दूसरे देशों के बारे में जानकारी मिलती है । आम जनता
विलायत की सैर के ख्वाब देखती रहती है लेकिन ये हसरत फिल्मों के
माध्यम से, अधूरी ही सही, देख देख कर पूरी अवश्य हो जाती है ।

गीत गाया है लता और किशोर ने। गीत की धुन है सचिन देव बर्मन की।
ये काफ़ी घिसा हुआ अर्थात बजा हुआ युगल गीत है और आपने इसको
एक ना एक बार ज़रूर सुना होगा।



गीत के बोल:

आसमान के नीचे,
आसमान के नीचे ...आगे
हम आज अपने पीछे
हम आज अपने पीछे ... फिर
प्यार का जहाँ बसा के चले
कदम के निशां बना के चले

आसमान के नीचे
हम आज अपने पीछे
प्यार का जहाँ बसा के चले
कदम के निशां बना के चले

आसमान के नीचे
हम आज अपने पीछे
प्यार का जहाँ बसा के चले
कदम के निशां बना के चले

तुम चले तो फूल जैसे आँचल के रँग से
सज गई राहें, सज गई राहें
पास आओ मै पहना दूँ चाहत का हार ये
खुली खुली बाहें, खुली खुली बाहें
जिस का हो आँचल खुद ही चमन
कहिये वो क्यूँ हार बाहों के डाले

अरे आसमान के नीचे
हम आज अपने पीछे
प्यार का जहाँ बसा के चले
कदम के निशां बना के चले

बोलती हैं आज आँखें कुछ भी न आज तुम
कहने दो हमको, कहने दो हमको
बेखुदी बढ़ती चली है अब तो ख़ामोश ही
रहने दो हमको, रहने दो हमको
इक बार एक बार, मेरे लिये
कह दो खनकें, लाल होंठों के प्याले

आसमान के नीचे
हम आज अपने पीछे
प्यार का जहाँ बसा के चले
कदम के निशां बना के चले

साथ मेरे चल के देखो आई हैं धूम से
अब की बहारें, अब की बहारें
हर गली हर मोड़ पे वो दोनों के नाम से
हमको पुकारे, तुमको पुकारे
कह दो बहारों से, आए न इधर
उन तक उठ कर, हम नहीं जाने वाले

आसमान के नीचे
हम आज अपने पीछे
प्यार का जहाँ बसा के चले
कदम के निशां बना के चले
...............................
Aasman ke neeche-Jewl Thief 1967

Wednesday, 22 June 2011

लोग कहते हैं कि हम-बहू बेगम १९६७

साहिर का है अंदाज़-ए-बयां और। ख़वातीनों हाज़रात, महबूब
से किनारा करने का खुशनुमा ख्याल और किस के दिमाग में
आ कर कागज़ पर उतर सकता है। किनारा करने की बात पर
रज़ामंदी मांगी जा रही है, समाज की बंदिशें या फिर कोई और
वजह ऐसा करने को प्रेरित कर रही हैं जानने के लिए आपको
बहू बेगम फिल्म एक बार ज़रूर देखना पड़ेगी।

साहिर के गीतों से फिल्म के निर्देशक का काम कभी कभी बहुत
आसान हो जाया करता था। आम दर्शक तो धुन से ही आनंद उठा
लिया करता लेकिन दिमाग खपाने वाले दर्शक गीत की गहराई
में उतर कर नायक की करतब-ए-एक्टिंग को गीत के शब्दों और
भावों से मिलाने की असफल कोशिश में लग जाते। साहिर के गीतों
पर कुछ ही संजीदा कलाकारों ने बढ़िया अभिनय किया है।

कमबख्त दिल तो मानता नहीं है क्या किया जाये, इश्क की
खुमारी दिल पर झाड फानूस की धूल माफिक चिपकी रहती है,
कुछ करने या ना करने की जायज़ वजहें होना ज़रूरी है। अब
जुदा हो ही रहे हैं तो सारे अरमान पूरे करते चलें और ये जुमला
दोहराते चलें-किनारा कर लें।

प्रेम त्रिकोण पर आधारित इस फिल्म में कई यादगार गीत हैं।
ये गीत थोड़ा कम सुना जाता है और गीतों की तुलना में। गीत
मधुर है इसलिए हमने इसे पहले चुना है सुनने के लिए।




गीत के बोल:

लोग कहते हैं कि हम तुमसे किनारा कर लें
तुम जो कह दो तो सितम ये भी गवारा कर लें
लोग कहते हैं

तुमने जिस हाल-ए-परेशानी से निकला था हमें
आसरा दे के मोहब्बत का संभाला था हमें
सोचते हैं के वही
सोचते हैं के वही हाल दुबारा कर लें
तुम जो कह दो तो सितम ये भी गवारा कर लें
लोग कहते हैं

यूँ भी अब तुमसे मुलाक़ात अब नहीं होने की
मिल भी जाओ
मिल भी जाओ तो कोई बात नहीं होने की
आखिरी बार बस अब
आखिरी बार बस अब जिक्र तुम्हारा कर लें
तुम जो कह दो तो सितम ये भी गवारा कर लें
लोग कहते हैं

आखिरी बार ख्यालों में बुला लें तुमको
आखिरी बार कलेजे से लगा लें तुमको
और फिर अपने तड़पने
और फिर अपने तड़पने का नज़ारा कर लें
तुम जो कह दो तो सितम ये भी गवारा कर लें

लोग कहते हैं कि हम तुमसे किनारा कर लें
तुम जो कह दो तो सितम ये भी गवारा कर लें
लोग कहते हैं
.....................
Log kehte hain ki hum-Bahu Begum 1967

Wednesday, 15 June 2011

उड़ के पवन के...रुक जा ऐ हवा-शागिर्द १९६७

एक मधुर गीत सुनवाते हैं आपको लता मंगेशकर
की आवाज़ में। मजरूह सुल्तानपुरी के लिखे गीत की
तर्ज़ बनाई है लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने।

सायरा बानो और जॉय मुखर्जी पर फिल्माया गया ये गीत
आपको फिल्म शागिर्द में देखने को मिलेगा। कर्णप्रिय होने के
साथ साथ दर्शनीय गीत है और इसका आकर्षण पक्षियों की
आवाजें प्रचुर मात्र में सुनाई देती हैं जो इसे खूबसूरत बनाती हैं।

अल्हड, मस्त बोल और अदाओं वाला ये गीत रात्रि के वक़्त सुनने
में सबसे ज्यादा आनंद देता है।



गीत के बोल:


हो ओ ओ ओ
रुक जा, रुक जा, रुक जा

उड़ के पवन के रंग चलूंगी
मैं भी तिहारे संग चलूंगी

रुक जा ऐ हवा, थम जा ऐ बहार
रुक जा ऐ हवा, थम जा ऐ बहार


उड़ के पवन के रंग चलूंगी
मैं भी तिहारे संग चलूंगी

रुक जा ऐ हवा, थम जा ऐ बहार
रुक जा ऐ हवा, थम जा ऐ बहार


परबत परबत तेरी महक है
लट मेरी भी दूर तलक है
देखो रे डाली डाली
देखो रे डाली डाली
खिली मेरे तन की लाली
हो ओ ओ ओ ओ ओ रुक जा
जो तू है वोही मैं हूँ

रुक जा ऐ हवा, थम जा ऐ बहार
रुक जा ऐ हवा, थम जा ऐ बहार

झरना दर्पण ले के निहारे
बूंदों का गहना तन पे संवारे
लहरें झूला झुलायें
लहरें झूला झुलायें
मेरे लिए गीत गएँ
हो ओ ओ ओ ओ ओ रुक जा
पनघट की, मैं हूँ गोरी

रुक जा ऐ हवा, थम जा ऐ बहार
रुक जा, जा ऐ हवा, थम जा ऐ बहार

हो ओ ओ, हो ओ ओ

देख ज़रा सा तू मुझे छू के
पग बजते हैं बिन घुँघरू के
जो तेरी ताल में है
जो तेरी ताल में है
वही मेरी चाल में है
हो ओ ओ ओ ओ ओ रुक जा
मैं हिरनिया, मैं चकोरी

रुक जा ऐ हवा, थम जा ऐ बहार

उड़ के पवन के रंग चलूंगी
मैं भी तिहारे संग चलूंगी

रुक जा ऐ हवा, थम जा ऐ बहार
रुक जा ऐ हवा, थम जा ऐ बहार
...........................
Ud ke pawan ke...ruk ja ae hawa-Shagird 1967

Tuesday, 7 June 2011

तुम अगर साथ देने का वादा करो-हमराज़ १९६७

फिल हमराज़ का एक खूबसूरत गीत हम सुन चुके हैं। आइये दूसरा
ज़बरदस्त हिट गीत सुनें इसी फिल्म से। पता नहीं किस जगह की
(शायद काश्मीर या चंबा) सुन्दर वादियों में गीत फिल्माया गया है।
one film wonder-विम्मी के साथ सुनील दत्त नायक हैं इस गीत में।
विम्मी के हिस्से का मुस्कुराने का काम भी सुनील दत्त कर रहे हैं इस
गीत में। गीत साहिर का लिखा हुआ है और धुन बनाई है संगीतकार
रवि ने। गीत दमदार है और एक्टिंग की इस गीत में ज्यादा ज़रुरत नहीं
समझी निर्देशक ने अतः कैमरा इधर उधर घुमा कर इतिश्री कर ली गई
है।



गीत के बोल:

तुम अगर साथ देने का वादा करो
में यूँ ही मस्त नगमे लुटाता रहूँ
तुम मुझे देख कर मुस्कुराती रहो
में तुम्हे देख कर गीत गाता रहूँ

तुम अगर साथ देने का वादा करो
में यूँ ही मस्त नगमे लुटाता रहूँ

आ आ आ आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ आ आ आ आ

कितने जलवे फिजाओं में बिखरे मगर
मैंने अब तक किसी को पुकारा नहीं
तुमको देखा तो नज़रें यह कहने लगीं
हमको चेहरे से हटना गवारा नहीं
तुम अगर मेरी नज़रों के आगे रहो
में हर एक शय से नज़रें चुराता रहूँ

तुम अगर साथ देने का वादा करो
में यूँ ही मस्त नगमे लुटाता रहूँ

मैंने ख्वाबों में बरसों तराशा जिसे
तुम वही संगमरमर की तस्वीर हो

हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ

तुम न समझो तुम्हारा मुक़दर हूँ में
में समझता हूँ तुम मेरी तकदीर हो
तुम अगर मुझको अपना समझने लगो
में बहारों की महफ़िल सजाता रहूँ

तुम अगर साथ देने का वादा करो
में यूँ ही मस्त नगमे लुटाता रहूँ

हा आ आ आ आ आ आ आ आ
हा आ आ आ आ आ आ आ आ
................................
Tum agar saath dene ka wada karo-Hamraaz 1967

Tuesday, 12 April 2011

किसी पत्थर की मूरत से-हमराज़ १९६७

बॉलीवुड ने 'बेबी डॉल' से लगाकर 'उड़द दाल' तक सब कुछ देख लिया है
और शायद दर्शकों ने भी। बस लिफाफे समय के साथ बदलते जाते हैं
ख़त का मजमून वही रहता है जिसका अंदेशा अक्सर होता है।

कुछ अभिनेत्रियों को दर्शक देख कर असमंजस में पढ़ जाते हैं कि उनके
खूबसूरत चेहरे से नज़र हटे तो अभिनय हो रहा है या नहीं इसके बारे में
सोचें। इस पशोपेश में पड़े दर्शक की जब तक कुछ समझ में आये पिक्चर
का "the end" परदे पर प्रकट हो जाता है। जिनके जल्दी समझ आ जाता
है वे मानने लगते हैं कि ऐसी अभिनेत्रियाँ तो साबुन-तेल के विज्ञापनों के
लिए ही सबसे उपयुक्त हैं ।

अब साहब प्रस्तुत गीत एक साहित्यकार-कम-गीतकार की कलम से निकला
है तो हमें भी थोड़ी भाषाई माथापच्ची अवश्य करनी होगी वरन मज़ा नहीं
आएगा।

इस गीत में अभिनय जैसी कोई चीज़ ढूँढने की ज्यादा कोशिश ना ही करें तो
बेहतर होगा। गाने वाला ऐसे हाव भाव दर्शा रहा है जैसे उसे जबरन गाना पढ़
रहा हो , बीच बीच में वो मुस्कुरा के कन्फ्यूज़ कराता है जैसे उसे आनंद आ रहा
हो , और सुनने वाला ऐसे सुन रहा है जैसे बोटनी की क्लास में केमिस्ट्री का
प्रवचन चालू हो गया हो।

अब गीत का विवरण भी हो जाये-गीत गाया है महेंद्र कपूर ने और इसे फिल्माया
गया है अभिनेता सुनील दत्त और नायिका विम्मी पर। गीत साहिर लुधियानवी का
है जिसकी उतनी ही खूबसूरत तर्ज़ के जिम्मेदार हैं संगीतकार रवि।

ये महेंद्र कपूर के सबसे लोकप्रिय गीतों में से एक है। फिल्म हमराज़ के सभी गीत
लोकप्रिय हैं और सुपर-डुपर हिट की श्रेणी में आते हैं। इस सुपर डुपर के बीच
मैं क्यों लपर-लपर कर रहा हूँ भाई



गीत के बोल:

किसी पत्थर की मूरत से मोहब्बत का इरादा है
परस्तिश की तमन्ना है इबादत का इरादा है

किसी पत्थर की मूरत से मोहब्बत का इरादा है
परस्तिश की तमन्ना है इबादत का इरादा है
किसी पत्थर की मूरत से

जो दिल की धडकनें समझे ना आँखों की जुबां समझे
जो दिल की धडकनें समझे ना आँखों की जुबां समझे
नज़र की गुफ्तगूँ समझे ना ज़ज्बों का बयां समझे
नज़र की गुफ्तगूँ समझे ना ज़ज्बों का बयां समझे
उसी के सामने उसकी शिकायत का इरादा है
उसी के सामने उसकी शिकायत का इरादा है

किसी पत्थर की मूरत से मोहब्बत का इरादा है
परस्तिश की तमन्ना है इबादत का इरादा है
किसी पत्थर की मूरत से

सुना है हर जवान पत्थर के दिल में आग होती है
सुना है हर जवान पत्थर के दिल में आग होती है
मगर जब तक ना छेड़ो शर्मगी परदे में सोती है
ये सोचा है दिल की बात उसके रूबरू कह दें
नतीजा कुछ भी निकले आज अपनी आरज़ू कह दें
हर एक बेजान तकल्लुफ से बगावत का इरादा है
हर एक बेजान तकल्लुफ से बगावत का इरादा है

किसी पत्थर की मूरत से

मोहब्बत बेरुखी से और भड़केगी वो क्या जानें
मोहब्बत बेरुखी से और भड़केगी वो क्या जानें
तबियत इस अदा पे और फडकेगी वो क्या जानें
तबियत इस अदा पे और फडकेगी वो क्या जानें
वो क्या जाने की अपना किस क़यामत का इरादा है
वो क्या जाने की अपना किस क़यामत का इरादा है

किसी पत्थर की मूरत से मोहब्बत का इरादा है
परस्तिश की तमन्ना है इबादत का इरादा है
किसी पत्थर की मूरत से
......................................
Kisi patthar ki moorat se-Hamraaz 1967

Wednesday, 19 January 2011

हमने जो देखे सपने-परिवार १९६७

फिल्म बंदिनी के गीत से एक मधुर गीत और याद आया.
हालाँकि इसे ब्लॉग पर शामिल किया जा चूका है मगर
रिवीज़न करते हुए इसे एक बार और सुन लेते हैं.
बाकी का विवरण इधर है-फिल्म परिवार का गीत




गाने के बोल:

हमने जो देखे सपने
हमने जो देखे सपने,
सच हो गए वो अपने
ओ मेरे साजना दिन आ गए हैं प्यार के
मेरे साजना दिन आ गए करार के

हम ने जो देखे सपने,
सच हो गए वो अपने
हो मेरे साजना

ऐसे ही सदा सजधज के मेरी
आँखों में रहो जवान तुम
ऐसे ही सदा सजधज के मेरी
आँखों में रहो जवां तुम
मैं साया बन के साथ चलूँ
मैं साया बन के साथ चलूँ
मुझे ले चलो जहाँ तुम

हमने जो देखे सपने,
सच हो गए वो अपने
हो मेरे साजना

हम जनम जनम के साथी हैं
पूजा है प्रीत हमारी
हम जनम जनम के साथी हैं
पूजा है प्रीत हमारी
इस जनम भी तुमको पा ही लिया
इस जनम भी तुमको पा ही लिया
मैं हो गई तुम्हारी

हमने जो देखे सपने,
सच हो गए वो अपने
हो मेरे साजना दिन आ गए हैं प्यार के
मेरे साजना दिन आ गए करार के
हमने जो देखे सपने,
सच हो गए वो अपने
हो मेरे साजन
.............................
Hamne jo dekhe sapne-Parivar 1967

Saturday, 18 December 2010

कसमे वादे प्यार वफ़ा सब बातें हैं-उपकार १९६७

बहुत दिन हो गए आपको प्रेरणा और प्रेरणादायक गीतों के
बारे में कुछ बताये हुए। कुछ गीत वे होते हैं जिनसे श्रोता
प्रेरणा लेते हैं। कुछ गीत ऐसे होते हैं जिनसे संगीतकार
प्रेरणा लेते हैं। आज हम ऐसे गीत के बारे में बात करेंगे
जो संगीतकारों के संभावित आदान प्रदान से तैयार हुआ।

एक फिल्म आई थी सन १९६७ में- उपकार जिसका ये गीत-
कसमे वादे प्यार वफ़ा सब बातें हैं बातों का क्या-बहुत ही
लोकप्रिय हुआ था। इस गीत को तमिल भाषा में संगीतकार
इलाया राजा ने भी तैयार किया-Kanavu Kaanum । दोनों
गीत आपके लिए प्रस्तुत हैं। तमिल भाषा मुझे नहीं आती मगर
इतना अंदाजा लगाया जा सकता है की गीत के बोल ज़रूर सत्य
वचन जैसे ही होंगे।

ऐसा समझा जाता है कि दोनों संगीतकार एक दूसरे से प्रेरित
हुए। जैसे भौतिकी में होता है-mutual induction वैसे ही इस
संगीत के असर को हम कह सकते हैं-mutual inspiration।

फिल्म उपकार का गीत परदे पर गा रहे हैं प्रसिद्ध खलनायक
और चरित्र अभिनेता-प्राण । नैराश्य के भावों को उन्होंने
बहुत ही उम्दा ढंग से प्रदर्शित किया है। गीत इन्दीवर की
कलम से निकला है। इस गीत के लिए सन १९६८ में गायक
मन्ना डे को सर्वश्रेष्ठ गायक का राष्ट्रीय पुरस्कार भी दिया गया।

फिल्म उपकार का विडियो गीत:



तमिल फिल्म "ningal kedavai(Neengal Kettavai)-1984" का विडियो गीत:
Lyrics:Kaviyarasu Vairamuthu, Music:Ilaiyaraja, Singer-Yesudas



हिंदी गीत के बोल:

कसमे वादे प्यार वफ़ा सब बातें हैं बातों का क्या
कसमे वादे प्यार वफ़ा सब बातें हैं बातों का क्या
कोई किसी का नहीं ये झूठे नाते हैं नातों का क्या

कसमे वादे प्यार वफ़ा सब बातें हैं बातों का क्या

होगा मसीहा आ आ आ
होगा मसीहा सामने तेरे
फिर भी न तू बच पायेगा
तेरा अपना, आ आ आ आ आ
तेर अपना खून ही आखिर
तुझको आग लगायेगा
आसमान में, ऐ ऐ
आसमान मे उड़ने वाले मिट्टी में मिल जायेगा

कसमे वादे प्यार वफ़ा सब, बातें हैं बातों का क्या

सुख में तेरे, ऐ ऐ ऐ
सुख में तेरे साथ चलेंगे
दुख में सब मुख मोड़ेंगे
दुनिया वाले, ऐ ऐ ऐ ऐ
दुनिया वाले तेरे बनकर
तेरा ही दिल तोड़ेंगे
देते हैं, ऐ ऐ
देते हैं भगवान को धोखा, इनसान को क्या छोड़ेंगे

कसमे वादे प्यार वफ़ा सब, बातें हैं बातों का क्या
..........................................
Kasme Vaade Pyar Wafa Sab Batein Hain-Upkar 1967
 
 
www.lyrics2nd.blogspot.com