गोरी बाजरे के खेत में दिखे या चने के खेत में, गोरी ही रहेगी और हमेशा
सुन्दर और प्यार करने लायक दिखाई देगी। हिंदी फिल्मों की फिलासफ़ी
के अनुसार ऐसा कई गीतों में और दृश्यों में अनुभव किया होगा दर्शक ने।
युग परिवर्तन के साथ साथ केवल नायक नायिका की वेश भूषा ही बदली
होगी, मूल भाव जस का तस है।
खेत एक समय(आज भी हैं) भांति भांति के क्रियाकलापों का केंद्र हुआ करते
थे। इसमें कूटनीति की चर्चा, मसाला कुटाई की चर्चा से लगा कर भावनाओं की
कुटाई तक कई मसले हल किये जाते रहे। अब इतने महत्पूर्ण पहलू का दोहन
अगर कवि और गीतकार नहीं करेंगे तो ये तो खेत और खलिहान की उपेक्षा वाली
बात हो जाएगी न।
आपको पिछले वर्ष एक गीत सुनवाया था फिल्म चाचा जिंदाबाद से जिसमें एक
पंक्ति है-बाजरे के खेत में सुरतिया दिखा जा गोरी।
आज आपको चने के खेत पर केंद्रित गीत सुनवा रहे हैं। इसे आप कृषि प्रधान
या पर्यावरण प्रेमी गीत की संज्ञा प्रदान कर सकते हैं। फिल्म का नाम है अंजाम
जिसमें शाहरुख खान और माधुरी दीक्षित की प्रमुख भूमिकाएं हैं। गीत गाया
है खटिया पटिया गीतों से चर्चा में आई गायिका पूर्णिमा ने। पूर्णिमा ने कई गीत
गाये हैं मगर उनके वे गीत सबसे ज्यादा पसंद किये जाते हैं जिनमें उत्तेजना जगाने
वाला भाव होता है। ये उनकी आवाज़ का ही कमाल है जो सुनने वालों को उनकी
आवाज़ का दीवाना बना देता है, ये पहलू उनकी कई समकालीन गायिकाओं की
आवाज़ से नदारद है।
गीत के बोल:
अठरह बरस की कंवारी कली थी
घूंघट में मुखड़ा छुपा के चली थी
अठरह बरस की कंवारी कली थी
घूंघट में मुखड़ा छुपा के चली थी
फँसी गोरी
फँसी गोरी चने के खेत में
हुई चोरी चने के खेत में
पहले तो जुल्मे ने पकड़ी कलाई
फिर उसने चुपके से ऊँगली दबी
पहले तो जुल्मे ने पकड़ी कलाई
फिर उसने चुपके से ऊँगली दबी
जोरा जोरी
जोरा जोरी चने के खेत में
हुई चोरी चने के खेत में
तू तू तू तू, तू तू तू तू
मेरे आगे पीछे शिकारियों के घेरे
बैठे वहां सारे जवानी के लुटेरे
हाँ, मेरे आगे पीछे शिकारियों के घेरे
बैठे वहां सारे जवानी के लुटेरे
हारी मैं हारी पुकार के
यहाँ वहां देखूं निहार के
यहाँ वहां देखूं निहार के
जोबन पे चुनरी गिरा के चली थी
हाँ, जोबन पे चुनरी गिरा के चली थी
हाथों में कंगना सजा के चली थी
चूड़ी टूटी
चूड़ी टूटी चने के खेत में
जोरा जोरी चने के खेत में
तौबा मेरी तौबा, निगाहें ना मिलाऊँ
ऐसे कैसे सब को कहानी मैं बताऊँ
तौबा मेरी तौबा, निगाहें ना मिलाऊँ
ऐसे कैसे सब को कहानी मैं बताऊँ
क्या क्या हुआ मेरे साथ रे
कोई भी तो आया ना हाथ रे
कोई भी तो आया ना हाथ रे
लहंगे में गोटा जड़ा के चली थी
लहंगे में गोटा जड़ा के चली थी
बालों में गजरा लगा के चली थी
बाली छूटी
बाली छूटी चने के खेत में
ओ जोरा जोरी चने के खेत में
अठरह बरस की कंवारी कली थी
घूंघट में मुखड़ा छुपा के चली थी
फँसी गोरी
फँसी गोरी चने के खेत में
रे हुई चोरी चने के खेत में
पहले तो जुल्मी ने पकड़ी कलाई
फिर उसने चुपके से ऊँगली दबाई
जोरा जोरी
जोरा जोरी चने के खेत में
रे हुई चोरी चने के खेत में
...............................
Chane ke khet mein-Anjaam १९९४
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Tuesday, 25 October 2011
Monday, 12 September 2011
सैयां के साथ मढैया में-ईना मीना डीका १९९४
हर भाषा का अपना अपना आनंद होता है। पानी को पनैया , मढ़िया
को मढैया, इनके साथ सैयां-बलैयां की तुकबंदी हो तो क्या बात है !
इनको दालैयाँ, सबजैयाँ के साथ रोटियाँ, पूड़ैयाँ और पराठैयाँ खाते खाते
सुनें तो और भी आनंद आएगा।
फिल्मों के खटिया-पटिया गीतों को सुनने में भी अलग प्रकार का आनंद
अनुभव में आता है। इन गीतों की धुन आकर्षक बनाई जाती है
ताकि ये लोगों की जुबां पे आसानी से चढ़ जाएँ। आइये सुनें एक
चटैया-मढैया गीत जो फिल्म 'ईना मीना डीका' से लिया गया
है। इसे फिल्माया गया है ऋषि कपूर और जूही चावला पर। ये गीत
काफी लोकप्रिय हुआ था। गायिका पूर्णिमा की आवाज़ का
इस्तेमाल बॉलीवुड के संगीतकारों ने ऐसे खटीया पटिया वाले कई
गीत बनाने में की है। कुमार सानू साथ में गा रहे हैं। समीर के
लिखे बोलों को धुन में बंधा है आनंद मिलिंद ने। आनंद मिलिंद ९०
के दशक में काफी सक्रिय रहे। ध्यान से इस गीत को सुनें तो आप
पाएंगे अनजान पुत्र समीर की साहित्यिक बुनियाद काफी मजबूत है।
गीत के बोल:
सैयां के साथ मढैया में
मढैया में
बड़ा मज़ा आये रजिया में
सैयां के साथ मढैया में
मढैया में
बड़ा मज़ा आये रजैया में
टूट गई चूड़ी कलैया में
कलैया में
कलैया में
टूट गई चूड़ी कलैया में
कलैया में
बड़ा मज़ा आये रजैया में
ऐ, सैयां के साथ मढैया में
मढैया में
बड़ा मज़ा आये रजैया में
मुश्किल से मौका मेरे हाथ आये,
हाँ, मुश्किल से मौका मेरे हाथ आये
करके बहाना कहीं दूर जाये
बेदर्दी कब से पड़ा मेरे पीछे
बैयाँ पकड़ के ज़बरदस्ती खींचे
लपक झपक के लड़ैया में
लड़ैया में
बड़ा मज़ा आये रजैया में
हाँ, सैयां के साथ मढैया में
मढैया में
बड़ा मज़ा आये रजैया में
नाज़ुक बड़ी है जवानी की डोरी
नाज़ुक बड़ी है जवानी की डोरी
माने ना कहना करे जोराजोरी
नस नस में मस्ती चढ़े हौले हौले
मौसम सुहाना जिया मोरा डोले
जब जुगनू चमके तलैया में
तलैया में
बड़ा मज़ा आये रजैया में
सैयां के साथ मढैया में
मढैया में
बड़ा मज़ा आये रजैया में
टूट गई चूड़ी कलैया में
कलैया में
कलैया में
टूट गई चूड़ी कलैया में
कलैया में
बड़ा मज़ा आये रजैया में
ऐ,सैयां के साथ मढैया में
मढैया में
बड़ा मज़ा आये लड़ैया में
बड़ा मज़ा आये रजैया में
हाँ, बड़ा मज़ा आये रजैया में
...................................................
Saiyan ke saath madhaiya mein-Eena Meena Deeka 1994
को मढैया, इनके साथ सैयां-बलैयां की तुकबंदी हो तो क्या बात है !
इनको दालैयाँ, सबजैयाँ के साथ रोटियाँ, पूड़ैयाँ और पराठैयाँ खाते खाते
सुनें तो और भी आनंद आएगा।
फिल्मों के खटिया-पटिया गीतों को सुनने में भी अलग प्रकार का आनंद
अनुभव में आता है। इन गीतों की धुन आकर्षक बनाई जाती है
ताकि ये लोगों की जुबां पे आसानी से चढ़ जाएँ। आइये सुनें एक
चटैया-मढैया गीत जो फिल्म 'ईना मीना डीका' से लिया गया
है। इसे फिल्माया गया है ऋषि कपूर और जूही चावला पर। ये गीत
काफी लोकप्रिय हुआ था। गायिका पूर्णिमा की आवाज़ का
इस्तेमाल बॉलीवुड के संगीतकारों ने ऐसे खटीया पटिया वाले कई
गीत बनाने में की है। कुमार सानू साथ में गा रहे हैं। समीर के
लिखे बोलों को धुन में बंधा है आनंद मिलिंद ने। आनंद मिलिंद ९०
के दशक में काफी सक्रिय रहे। ध्यान से इस गीत को सुनें तो आप
पाएंगे अनजान पुत्र समीर की साहित्यिक बुनियाद काफी मजबूत है।
गीत के बोल:
सैयां के साथ मढैया में
मढैया में
बड़ा मज़ा आये रजिया में
सैयां के साथ मढैया में
मढैया में
बड़ा मज़ा आये रजैया में
टूट गई चूड़ी कलैया में
कलैया में
कलैया में
टूट गई चूड़ी कलैया में
कलैया में
बड़ा मज़ा आये रजैया में
ऐ, सैयां के साथ मढैया में
मढैया में
बड़ा मज़ा आये रजैया में
मुश्किल से मौका मेरे हाथ आये,
हाँ, मुश्किल से मौका मेरे हाथ आये
करके बहाना कहीं दूर जाये
बेदर्दी कब से पड़ा मेरे पीछे
बैयाँ पकड़ के ज़बरदस्ती खींचे
लपक झपक के लड़ैया में
लड़ैया में
बड़ा मज़ा आये रजैया में
हाँ, सैयां के साथ मढैया में
मढैया में
बड़ा मज़ा आये रजैया में
नाज़ुक बड़ी है जवानी की डोरी
नाज़ुक बड़ी है जवानी की डोरी
माने ना कहना करे जोराजोरी
नस नस में मस्ती चढ़े हौले हौले
मौसम सुहाना जिया मोरा डोले
जब जुगनू चमके तलैया में
तलैया में
बड़ा मज़ा आये रजैया में
सैयां के साथ मढैया में
मढैया में
बड़ा मज़ा आये रजैया में
टूट गई चूड़ी कलैया में
कलैया में
कलैया में
टूट गई चूड़ी कलैया में
कलैया में
बड़ा मज़ा आये रजैया में
ऐ,सैयां के साथ मढैया में
मढैया में
बड़ा मज़ा आये लड़ैया में
बड़ा मज़ा आये रजैया में
हाँ, बड़ा मज़ा आये रजैया में
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Saiyan ke saath madhaiya mein-Eena Meena Deeka 1994
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1994,
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Eena Meena Deeka,
Juhi Chawla,
Kumar Sanu,
Poornima,
Rishi Kapoor,
Sameer
Tuesday, 19 July 2011
तेरा चाँद सा चेहरा-हमसे बढ़ कर कौन १९९८
सन १९९८ की एक फिल्म से गीत सुनवाते हैं आपको। इसमें नायक
हैं सुनील शेट्टी और नायिका हैं दीप्ति भटनागर। संगीत विजू शाह का
है वही, फिल्म त्रिदेव में भी जिन्होंने संगीत दिया है। फिल्म त्रिदेव में
पैसेंजर ट्रेन और एक्सप्रेस ट्रेन की गति वाले गाने थे, ये है सुपरफास्ट
ट्रेन की स्पीड वाला. 'धूम छींक फटाक' वाली ताल पर गीत बना है.
नायक-नायिका दोनों मोटर साईकिल, कार और बोट पर सैर करते नज़र
आते हैं। श्रेणी बनाने वाले इसको बहुत सी श्रेणियों में रख सकते हैं।
दीपक आनंद इस फिल्म के निर्देशक हैं. बहुसितारा फिल्म में २ नायक और
२ नायिकाएं हैं। दूसरे नायक सैफ अली खान हैं और दूसरी दूसरी नायिका
हैं सोनाली बेंद्रे । फिल्म की नायिकाएं दोनों ही दुबली पतली हैं बस फर्क
इतना है कि दीप्ति का चेहरा थोडा बड़ा है सोनाली के चेहरे से.
गीत के बोल:
तेरा चाँद सा चेहरा नज़र में रहे
आ हा हा आ हा हा आ हा हा
हाँ, तेरा चाँद सा चेहरा नज़र में रहे
तो चांदनी को क्या देखें
तुझे देखने के बाद हम
अब और किसी को क्या देखें
तेरा चाँद सा चेहरा नज़र में रहे
तो चांदनी को क्या देखें
तुझे देखने के बाद हम
अब और किसी को क्या देखें
तेरा चाँद सा चेहरा नज़र में रहे
नज़र में रहे
आ तू है गुलाबों की परी
तेर हर अदा है मदभरी
मदहोश मैं तो हो गया
देखी जो तेरी दिलवरी
होश मेरे उड़ाने लगा
तेरे इश्क में खोये तो आशिक बने
आ हा हा आ हा हा आ हा हा
हाँ, तेरे इश्क में खोये तो आशिक बने
इस आशिकी को क्या देखें
तुझे देखने के बाद हम
अब और किसी को क्या देखें
तेरा चाँद सा चेहरा नज़र में रहे
नज़र में रहे
......................................
Tera chand sa chehra nazar mein rahe-Humse badhkar kaun 1998
हैं सुनील शेट्टी और नायिका हैं दीप्ति भटनागर। संगीत विजू शाह का
है वही, फिल्म त्रिदेव में भी जिन्होंने संगीत दिया है। फिल्म त्रिदेव में
पैसेंजर ट्रेन और एक्सप्रेस ट्रेन की गति वाले गाने थे, ये है सुपरफास्ट
ट्रेन की स्पीड वाला. 'धूम छींक फटाक' वाली ताल पर गीत बना है.
नायक-नायिका दोनों मोटर साईकिल, कार और बोट पर सैर करते नज़र
आते हैं। श्रेणी बनाने वाले इसको बहुत सी श्रेणियों में रख सकते हैं।
दीपक आनंद इस फिल्म के निर्देशक हैं. बहुसितारा फिल्म में २ नायक और
२ नायिकाएं हैं। दूसरे नायक सैफ अली खान हैं और दूसरी दूसरी नायिका
हैं सोनाली बेंद्रे । फिल्म की नायिकाएं दोनों ही दुबली पतली हैं बस फर्क
इतना है कि दीप्ति का चेहरा थोडा बड़ा है सोनाली के चेहरे से.
गीत के बोल:
तेरा चाँद सा चेहरा नज़र में रहे
आ हा हा आ हा हा आ हा हा
हाँ, तेरा चाँद सा चेहरा नज़र में रहे
तो चांदनी को क्या देखें
तुझे देखने के बाद हम
अब और किसी को क्या देखें
तेरा चाँद सा चेहरा नज़र में रहे
तो चांदनी को क्या देखें
तुझे देखने के बाद हम
अब और किसी को क्या देखें
तेरा चाँद सा चेहरा नज़र में रहे
नज़र में रहे
आ तू है गुलाबों की परी
तेर हर अदा है मदभरी
मदहोश मैं तो हो गया
देखी जो तेरी दिलवरी
होश मेरे उड़ाने लगा
तेरे इश्क में खोये तो आशिक बने
आ हा हा आ हा हा आ हा हा
हाँ, तेरे इश्क में खोये तो आशिक बने
इस आशिकी को क्या देखें
तुझे देखने के बाद हम
अब और किसी को क्या देखें
तेरा चाँद सा चेहरा नज़र में रहे
नज़र में रहे
......................................
Tera chand sa chehra nazar mein rahe-Humse badhkar kaun 1998
Sunday, 10 July 2011
हिंदी फ़िल्म में बरसात ६- रिमझिम रिमझिम-१९४२ ऐ लव स्टोरी १९९३
बारिश के मौसम में एक गीत और याद आ गया. सन १९४२ की
फ़िल्मी प्रेम कथा से अगला गीत पेश है.
फ़िल्मी बरसात वाला ये गीत अनिल कपूर और मनीषा कोइराला
पर फ़िल्माया गया है.
गीत के बोल:
रिमझिम रिमझिम रुमझुम रुमझुम
भीगी भीगी रुत में तुम हम हम तुम
चलते हैं, चलते हैं
बजता है जलतरंग टीन की छत पे जब
मोतियों जैसा जल बरसे
बूंदों की ये छड़ी लायी है वो घडी
जिसके लिए हम तरसे
हो हो हो,
बजता है जलतरंग टीन की छत पे जब
मोतियों जैसा जल बरसे
बूंदों की ये छड़ी लायी है वो घडी
जिसके लिए हम तरसे
हा हा हा रिमझिम रिमझिम रुमझुम रुमझुम
भीगी भीगी रुत में तुम हम हम तुम
हो चलते हैं, चलते हैं
बादल की चादरें ओढ़े हैं वादियाँ,
सारी दिशायें सोयी हैं
सपनों के गाँव में भीगी सी छाव में
दो आत्माएं खोयी हैं
हो बादल की चादरें ओढ़े हैं वादियाँ,
सारी दिशायें सोयी हैं
सपनों के गाँव में भीगी सी छाव
में दो आत्माएं खोयी हैं
रिमझिम रिमझिम ,ला ला
रुमझुम रुमझुम , ला ला
भीगी भीगी रुत में ,हा हा
तुम हम हम तुम
हो चलते हैं, चलते हैं
आयी हैं देखने झीलों के आईने,
बालों को खोले घटाएं
राह है धुंआ धुंआ जायेंगे हम कहाँ,
आओ यहीं रह जायें
हो हो हो आयी हैं देखने झीलों के आईने,
बालों को खोले घटाएं
राह है धुंआ धुंआ जायेंगे हम कहाँ,
आओ यहीं रह जायें
रिमझिम रिमझिम,रिमझिम
रुमझुम रुमझुम,रुमझुम
भीगी भीगी रुत में, हे हे
तुम हम हम तुम
हो चलते हैं, चलते हैं
रिमझिम रिमझिम
रिमझिम रिमझिम
रुमझुम रुमझुम
रुमझुम रुमझुम
भीगी भीगी रुत में
भीगी भीगी रुत में
हो चलते है, चलते है
...................................
Rimjhim rimjhim-1942 A Love Story
फ़िल्मी प्रेम कथा से अगला गीत पेश है.
फ़िल्मी बरसात वाला ये गीत अनिल कपूर और मनीषा कोइराला
पर फ़िल्माया गया है.
गीत के बोल:
रिमझिम रिमझिम रुमझुम रुमझुम
भीगी भीगी रुत में तुम हम हम तुम
चलते हैं, चलते हैं
बजता है जलतरंग टीन की छत पे जब
मोतियों जैसा जल बरसे
बूंदों की ये छड़ी लायी है वो घडी
जिसके लिए हम तरसे
हो हो हो,
बजता है जलतरंग टीन की छत पे जब
मोतियों जैसा जल बरसे
बूंदों की ये छड़ी लायी है वो घडी
जिसके लिए हम तरसे
हा हा हा रिमझिम रिमझिम रुमझुम रुमझुम
भीगी भीगी रुत में तुम हम हम तुम
हो चलते हैं, चलते हैं
बादल की चादरें ओढ़े हैं वादियाँ,
सारी दिशायें सोयी हैं
सपनों के गाँव में भीगी सी छाव में
दो आत्माएं खोयी हैं
हो बादल की चादरें ओढ़े हैं वादियाँ,
सारी दिशायें सोयी हैं
सपनों के गाँव में भीगी सी छाव
में दो आत्माएं खोयी हैं
रिमझिम रिमझिम ,ला ला
रुमझुम रुमझुम , ला ला
भीगी भीगी रुत में ,हा हा
तुम हम हम तुम
हो चलते हैं, चलते हैं
आयी हैं देखने झीलों के आईने,
बालों को खोले घटाएं
राह है धुंआ धुंआ जायेंगे हम कहाँ,
आओ यहीं रह जायें
हो हो हो आयी हैं देखने झीलों के आईने,
बालों को खोले घटाएं
राह है धुंआ धुंआ जायेंगे हम कहाँ,
आओ यहीं रह जायें
रिमझिम रिमझिम,रिमझिम
रुमझुम रुमझुम,रुमझुम
भीगी भीगी रुत में, हे हे
तुम हम हम तुम
हो चलते हैं, चलते हैं
रिमझिम रिमझिम
रिमझिम रिमझिम
रुमझुम रुमझुम
रुमझुम रुमझुम
भीगी भीगी रुत में
भीगी भीगी रुत में
हो चलते है, चलते है
...................................
Rimjhim rimjhim-1942 A Love Story
Tuesday, 5 July 2011
तेरे बिना ओ मेरे सनम-लक्ष्य १९९४
लक्ष्य नाम से दो फ़िल्में याद हैं। एक तो ये है जिसका गीत आपको
सुनवा रहे हैं आज। दूसरी अभी ६-७ साल पहले आई थी। कुमार सानू
और कविता कृष्णमूर्ति का गाया ये मधुर गीत शायद आपको सुनने
को ना मिला हो। युग बदलने के साथ माधुर्य कहीं गोल ना हो गया हो,
ऐसी शंकाओं को झुठलाता ये गीत यही साबित करता है कि कभी भी
पूरे कुवें में भांग पढ़ी नहीं मिलेगी आपको, थोड़ी कसर बाकी रह ही जाती
है। गीत लिखा है मजरूह सुल्तानपुरी ने । फिल्म में रोनित रॉय और
प्रियंका प्रमुख भूमिकाओं में हैं।
गीत के बोल:
तेरे बिना ओ मेरे सनम
रह ना सकेंगे हम
तेरे बिना ओ मेरे सनम
रह ना सकेंगे हम
ये दिल जान-ए-जाना
माने नहीं दीवाना, तेरी कसम
तेरे बिना ओ मेरे सनम
रह ना सकेंगे हम
तेरे बिना ओ मेरे सनम
रह ना सकेंगे हम
ये दिल जान-ए-जाना
माने नहीं दीवाना, तेरी कसम
तेरे बिना ओ मेरे सनम
रह ना सकेंगे हम
तेरे बिना ओ मेरे सनम
रह ना सकेंगे हम
आ जा मैं कब से आँखें लगाये
राहों में बैठी पलकें बिछाए
ऐसा ना होगा कि जो तू पुकारे
और हम ना आयें चाहत के मारे
आये हो जान-ए-जाना तो आ के नहीं जाना
मेरी कसम
तेरे बिना ओ मेरे सनम
रह ना सकेंगे हम
हो ओ ओ ओ ओ ओ
तेरे बिना ओ मेरे सनम
रह ना सकेंगे हम
अब तो लगी को तू ही बुझाये
लग जा गले से तो चैन आये
ऐसी सिमट जाऊं बाँहों में तेरी
घुल जाएँ साँसें साँसों में तेरी
ज़माने से छुपा लूं मैं दिल में बसा लूं
तुझको सनम
तेरे बिना ओ मेरे सनम
रह ना सकेंगे हम
तेरे बिना ओ मेरे सनम
रह ना सकेंगे हम
ये दिल जान-ए-जाना
माने नहीं दीवाना, तेरी कसम
तेरे बिना ओ मेरे सनम
रह ना सकेंगे हम
तेरे बिना ओ मेरे सनम
रह ना सकेंगे हम
...............................
Tere bina o mere sanam-Laqshya 1994
सुनवा रहे हैं आज। दूसरी अभी ६-७ साल पहले आई थी। कुमार सानू
और कविता कृष्णमूर्ति का गाया ये मधुर गीत शायद आपको सुनने
को ना मिला हो। युग बदलने के साथ माधुर्य कहीं गोल ना हो गया हो,
ऐसी शंकाओं को झुठलाता ये गीत यही साबित करता है कि कभी भी
पूरे कुवें में भांग पढ़ी नहीं मिलेगी आपको, थोड़ी कसर बाकी रह ही जाती
है। गीत लिखा है मजरूह सुल्तानपुरी ने । फिल्म में रोनित रॉय और
प्रियंका प्रमुख भूमिकाओं में हैं।
गीत के बोल:
तेरे बिना ओ मेरे सनम
रह ना सकेंगे हम
तेरे बिना ओ मेरे सनम
रह ना सकेंगे हम
ये दिल जान-ए-जाना
माने नहीं दीवाना, तेरी कसम
तेरे बिना ओ मेरे सनम
रह ना सकेंगे हम
तेरे बिना ओ मेरे सनम
रह ना सकेंगे हम
ये दिल जान-ए-जाना
माने नहीं दीवाना, तेरी कसम
तेरे बिना ओ मेरे सनम
रह ना सकेंगे हम
तेरे बिना ओ मेरे सनम
रह ना सकेंगे हम
आ जा मैं कब से आँखें लगाये
राहों में बैठी पलकें बिछाए
ऐसा ना होगा कि जो तू पुकारे
और हम ना आयें चाहत के मारे
आये हो जान-ए-जाना तो आ के नहीं जाना
मेरी कसम
तेरे बिना ओ मेरे सनम
रह ना सकेंगे हम
हो ओ ओ ओ ओ ओ
तेरे बिना ओ मेरे सनम
रह ना सकेंगे हम
अब तो लगी को तू ही बुझाये
लग जा गले से तो चैन आये
ऐसी सिमट जाऊं बाँहों में तेरी
घुल जाएँ साँसें साँसों में तेरी
ज़माने से छुपा लूं मैं दिल में बसा लूं
तुझको सनम
तेरे बिना ओ मेरे सनम
रह ना सकेंगे हम
तेरे बिना ओ मेरे सनम
रह ना सकेंगे हम
ये दिल जान-ए-जाना
माने नहीं दीवाना, तेरी कसम
तेरे बिना ओ मेरे सनम
रह ना सकेंगे हम
तेरे बिना ओ मेरे सनम
रह ना सकेंगे हम
...............................
Tere bina o mere sanam-Laqshya 1994
Friday, 14 January 2011
महबूब सनम तुझे मेरी कसम -किस्मत १९९४
फिल्म खिलौना के पिछले गीत से एक गीत और याद आ गया जी
ऑटो- मैटी- कली जी । फिल्मों के गीतों में भाई-भाई और भाई-बहन
का रिश्ता जो है। भाई बहन के रिश्ते पर रेमो फर्नान्डीज़ ने एक गीत
भी तो गाया है- ओ मेरी मुन्नी नन्ने मुन्ने 'बाई-बे ' ।
अब जो गीत याद आया है वो भी सुन लीजिये। उदित नारायण और
साधना सरगम की आवाज़ में जिसे फिल्माया गया है गोविंदा और
ममता कूल-करणी पर। वैसे लोग उनकी अदाओं को देख कर कूल के
बजाये उसका विलोम हो जाते थे। इस गीत में भी आपको फायर ब्रिगेड
वाली फ़िल्मी बरसात देखने को मिलेगी। कौन कहता है कि सलमान खान
या धर्मेन्द्र ने ही अपनी कमीज़ परदे पर उतारी है। इस गीत को देख लीजिये
इसमें ये काम अहिस्ता से हो रहा है और मीडिया खामखा सलमान के पीछे
पड़ा रहता है। ये बात और है कि इसमें बनियान भी पहनी गई है कमीज़
के नीचे । ये एक ऑथेंटिक फ़िल्मी गीत है और इसमें एक जोड़ी पोषाक
में ही पूरे गाने का फिल्मांकन हो गया है। निर्देशक को धन्यवाद् -थोडा
इस गीत को रियलिस्टिक बनाने के लिए। चलते चलते आपको बता दिया
जाए कि ये फिल्म का सबसे हिट गीत है। बोल समीर के हैं और संगीत
चित्रगुप्त पुत्र आनंद-मिलिंद का।
गीत के बोल :
महबूब सनम तुझे मेरी कसम
महबूब सनम तुझे मेरी कसम
ना हाथ लगा गोरे तन को
कुछ कुछ होता है
कुछ कुछ होता है
महबूब सनम तुझे मेरी कसम
महबूब सनम तुझे मेरी कसम
मुझे देख ना ऐसी नज़रों से
कुछ कुछ होता है
कुछ कुछ होता है
देखूं मैं तो देखूं दीवाना बन के
जाए कहाँ जाए दीवानी तन के
कैसे मैं बताऊँ तुझे है क्या पता
ऐसे में हो जाए ना देखो जी खता
ज़रा सा छोने दे गुलाबी गालों को
सम्भालूँ कैसे मैं घनेरे बालों को
इनकार ना कर, तकरार ना कर
इनकार ना कर, तकरार ना कर
ना चल ऐसे बाल खा खा के
कुछ कुछ होता है
कुछ कुछ होता है
कुछ कुछ होता है
कुछ कुछ होता है
काहे को सताए अनाड़ी मुझको
ऐसे कैसे दे दूं जवानी तुझको
ख्वाबों कि कहानी अधूरी ना रहे
सीने से लगा ले ये दूरी ना रहे
तेरी इन बातों से बड़ा डर लागे रे
तुझे जब देखूं तो मोहब्बत जागे रे
अब दूर ना जा यूँ पास ना आ
अब दूर ना जा यूँ पास ना आ
आ के ना लिपट मेरी बाँहों से
कुछ कुछ होता है
कुछ कुछ होता है
कुछ कुछ होता है
कुछ कुछ होता है
महबूब सनम तुझे मेरी कसम
महबूब सनम तुझे मेरी कसम
मुझे देख ना ऐसी नज़रों से
कुछ कुछ होता है
कुछ कुछ होता है
कुछ कुछ होता है
कुछ कुछ होता है
........................................
Mehboob sanam tujhe meri kasam-Kismat 1994
ऑटो- मैटी- कली जी । फिल्मों के गीतों में भाई-भाई और भाई-बहन
का रिश्ता जो है। भाई बहन के रिश्ते पर रेमो फर्नान्डीज़ ने एक गीत
भी तो गाया है- ओ मेरी मुन्नी नन्ने मुन्ने 'बाई-बे ' ।
अब जो गीत याद आया है वो भी सुन लीजिये। उदित नारायण और
साधना सरगम की आवाज़ में जिसे फिल्माया गया है गोविंदा और
ममता कूल-करणी पर। वैसे लोग उनकी अदाओं को देख कर कूल के
बजाये उसका विलोम हो जाते थे। इस गीत में भी आपको फायर ब्रिगेड
वाली फ़िल्मी बरसात देखने को मिलेगी। कौन कहता है कि सलमान खान
या धर्मेन्द्र ने ही अपनी कमीज़ परदे पर उतारी है। इस गीत को देख लीजिये
इसमें ये काम अहिस्ता से हो रहा है और मीडिया खामखा सलमान के पीछे
पड़ा रहता है। ये बात और है कि इसमें बनियान भी पहनी गई है कमीज़
के नीचे । ये एक ऑथेंटिक फ़िल्मी गीत है और इसमें एक जोड़ी पोषाक
में ही पूरे गाने का फिल्मांकन हो गया है। निर्देशक को धन्यवाद् -थोडा
इस गीत को रियलिस्टिक बनाने के लिए। चलते चलते आपको बता दिया
जाए कि ये फिल्म का सबसे हिट गीत है। बोल समीर के हैं और संगीत
चित्रगुप्त पुत्र आनंद-मिलिंद का।
गीत के बोल :
महबूब सनम तुझे मेरी कसम
महबूब सनम तुझे मेरी कसम
ना हाथ लगा गोरे तन को
कुछ कुछ होता है
कुछ कुछ होता है
महबूब सनम तुझे मेरी कसम
महबूब सनम तुझे मेरी कसम
मुझे देख ना ऐसी नज़रों से
कुछ कुछ होता है
कुछ कुछ होता है
देखूं मैं तो देखूं दीवाना बन के
जाए कहाँ जाए दीवानी तन के
कैसे मैं बताऊँ तुझे है क्या पता
ऐसे में हो जाए ना देखो जी खता
ज़रा सा छोने दे गुलाबी गालों को
सम्भालूँ कैसे मैं घनेरे बालों को
इनकार ना कर, तकरार ना कर
इनकार ना कर, तकरार ना कर
ना चल ऐसे बाल खा खा के
कुछ कुछ होता है
कुछ कुछ होता है
कुछ कुछ होता है
कुछ कुछ होता है
काहे को सताए अनाड़ी मुझको
ऐसे कैसे दे दूं जवानी तुझको
ख्वाबों कि कहानी अधूरी ना रहे
सीने से लगा ले ये दूरी ना रहे
तेरी इन बातों से बड़ा डर लागे रे
तुझे जब देखूं तो मोहब्बत जागे रे
अब दूर ना जा यूँ पास ना आ
अब दूर ना जा यूँ पास ना आ
आ के ना लिपट मेरी बाँहों से
कुछ कुछ होता है
कुछ कुछ होता है
कुछ कुछ होता है
कुछ कुछ होता है
महबूब सनम तुझे मेरी कसम
महबूब सनम तुझे मेरी कसम
मुझे देख ना ऐसी नज़रों से
कुछ कुछ होता है
कुछ कुछ होता है
कुछ कुछ होता है
कुछ कुछ होता है
........................................
Mehboob sanam tujhe meri kasam-Kismat 1994
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Saturday, 11 December 2010
सागर से गहरा है प्यार हमारा- मझधार १९९४
एक महानुभाव से मैं कल एक मसाज-अरंजेर पर बात कर रहा था ।
जी हाँ सारे मेसेंजर दिमाग और आँखों की अच्छी मसाज जो करते
हैं सो इनका इससे बेहतर नाम मुझे नहीं सूझ रहा। उसपर वार्तालाप
के दौरान एक गीत पर चर्चा हुई-गुटुर गुटुर-फिल्म दलाल के। मेरे
मित्र ने कहा-अच्छे गीत भी सुना करो। मैंने उदाहरण पूछा तो झट
उन्होंने नाम लिया इस गीत का-सागर से गहरा है प्यार हमारा।
खैर मेरे वो मित्र मेरे संगीत प्रेम से ज्यादा वाकिफ नहीं हैं। उनकी
खातिर मैं ये गीत यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ। इस गीत की स्वर लहरियां
मुझे पसंद है और जब भी कहीं सुनाई देता है कोशिश करता हूँ इसको
पूरा सुनने की। वार्तालाप के बाद मेरे मित्रा मुझे फिल्म मझधार का
ये गीत बतलाने के पश्चात मुझे चैट की मझधार में छोड़ गए। गीत
फिल्माया गया है मनीषा कोइराला और राहुल रॉय पर। राहुल रॉय
अपनी एक्टिंग से ज्यादा अपने केश विन्यास की वजह से पहचाने
गए हैं।
गीत के बोल:
सागर से गहरा है प्यार हमारा
हम मर जायेंगे जी नहीं पायेंगे
हम मर जायेंगे जी नहीं पायेंगे
साथ कभी छूटा जो तुम्हारा,
आ आ आ , तुम्हारा
सागर से गहरा है प्यार हमारा
हम मर जायेंगे जी नहीं पायेंगे
हम मर जायेंगे जी नहीं पायेंगे
साथ कभी छूटा जो तुम्हारा
आ आ आ , तुम्हारा
सागर से गहरा है प्यार हमारा
सीने में दिल दिल में धड़कन
धड़कन में तू है समाया
सीने में दिल दिल में धड़कन
धड़कन में तू है समाया
कितने दिनों तड़पी हूँ मैं
तब जा के है तुझको पाया
मेरे दिल पे मेरे यार
अब है तेरा इख्तियार
अब है तेरा इख्तियार
सागर से गहरा है प्यार हमारा
सागर से गहरा है प्यार हमारा
ऐ मेरे दोस्त किस्मत मेरी
देखो है क्या रंग लायी
ऐ मेरे दोस्त किस्मत मेरी
देखो है क्या रंग लायी
अपने मिलन की रुत हसीं
बरसों के है बाद आई
दूरियों को अब मिटा
आ गले से लग जा
आ गले से लग जा
सागर से गहरा है प्यार हमारा
सागर से गहरा है प्यार हमारा
शाम-ओ-सहर मेरी नज़र
करती है दीदार तेरा
शाम-ओ-सहर मेरी नज़र
करती है दीदार तेरा
तेरे बिना क्या ज़िन्दगी
तू ही है संसार मेरा
अब ना चाहत होगी कम
मैंने ली है ये कसम
मैंने ली है ये कसम
सागर से गहरा है प्यार हमारा
सागर से गहरा है प्यार हमारा
हम मर जायेंगे जी नहीं पायेंगे
हम मर जायेंगे जी नहीं पायेंगे
साथ कभी छूटा जो तुम्हारा
आ आ आ , तुम्हारा
सागर से ......... हमारा
सागर से गहरा है प्यार हमारा
...............................................
Sagar se gehra hai pyaar hamara-Majhdhaar 1994
जी हाँ सारे मेसेंजर दिमाग और आँखों की अच्छी मसाज जो करते
हैं सो इनका इससे बेहतर नाम मुझे नहीं सूझ रहा। उसपर वार्तालाप
के दौरान एक गीत पर चर्चा हुई-गुटुर गुटुर-फिल्म दलाल के। मेरे
मित्र ने कहा-अच्छे गीत भी सुना करो। मैंने उदाहरण पूछा तो झट
उन्होंने नाम लिया इस गीत का-सागर से गहरा है प्यार हमारा।
खैर मेरे वो मित्र मेरे संगीत प्रेम से ज्यादा वाकिफ नहीं हैं। उनकी
खातिर मैं ये गीत यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ। इस गीत की स्वर लहरियां
मुझे पसंद है और जब भी कहीं सुनाई देता है कोशिश करता हूँ इसको
पूरा सुनने की। वार्तालाप के बाद मेरे मित्रा मुझे फिल्म मझधार का
ये गीत बतलाने के पश्चात मुझे चैट की मझधार में छोड़ गए। गीत
फिल्माया गया है मनीषा कोइराला और राहुल रॉय पर। राहुल रॉय
अपनी एक्टिंग से ज्यादा अपने केश विन्यास की वजह से पहचाने
गए हैं।
गीत के बोल:
सागर से गहरा है प्यार हमारा
हम मर जायेंगे जी नहीं पायेंगे
हम मर जायेंगे जी नहीं पायेंगे
साथ कभी छूटा जो तुम्हारा,
आ आ आ , तुम्हारा
सागर से गहरा है प्यार हमारा
हम मर जायेंगे जी नहीं पायेंगे
हम मर जायेंगे जी नहीं पायेंगे
साथ कभी छूटा जो तुम्हारा
आ आ आ , तुम्हारा
सागर से गहरा है प्यार हमारा
सीने में दिल दिल में धड़कन
धड़कन में तू है समाया
सीने में दिल दिल में धड़कन
धड़कन में तू है समाया
कितने दिनों तड़पी हूँ मैं
तब जा के है तुझको पाया
मेरे दिल पे मेरे यार
अब है तेरा इख्तियार
अब है तेरा इख्तियार
सागर से गहरा है प्यार हमारा
सागर से गहरा है प्यार हमारा
ऐ मेरे दोस्त किस्मत मेरी
देखो है क्या रंग लायी
ऐ मेरे दोस्त किस्मत मेरी
देखो है क्या रंग लायी
अपने मिलन की रुत हसीं
बरसों के है बाद आई
दूरियों को अब मिटा
आ गले से लग जा
आ गले से लग जा
सागर से गहरा है प्यार हमारा
सागर से गहरा है प्यार हमारा
शाम-ओ-सहर मेरी नज़र
करती है दीदार तेरा
शाम-ओ-सहर मेरी नज़र
करती है दीदार तेरा
तेरे बिना क्या ज़िन्दगी
तू ही है संसार मेरा
अब ना चाहत होगी कम
मैंने ली है ये कसम
मैंने ली है ये कसम
सागर से गहरा है प्यार हमारा
सागर से गहरा है प्यार हमारा
हम मर जायेंगे जी नहीं पायेंगे
हम मर जायेंगे जी नहीं पायेंगे
साथ कभी छूटा जो तुम्हारा
आ आ आ , तुम्हारा
सागर से ......... हमारा
सागर से गहरा है प्यार हमारा
...............................................
Sagar se gehra hai pyaar hamara-Majhdhaar 1994
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Tuesday, 30 November 2010
इस तरह आशिक़ी का असर-इम्तिहान १९९४
पहले सोचा आपको पुरानी ७० के दशक वाली इम्तिहान
का गीत सुन्वाओं फिर विचार बदला, सोचा सुननेवालों का
भी एक इम्तिहान लेना चाहिए। अरे भाई बहुत से दर्शक इस
फिल्म को देख कर इम्तिहान दे चुके हैं आप एक गीत नहीं
सुन सकते ?
ये उस दौर की फिल्म है जब शर्मिला टैगोर पुत्र उर्फ़ नायक
सैफ अली खान "सेफ" माने जाते थे। वो इसलिए कि एक्टिंग
आये या ना आये, फिल्म पिटे चाहे हिट हो उनको फ़िल्में मिलती
रहेंगी, ऐसा कई लोगों का मानना था। इस मामले में बच्चन पुत्र
उतना भाग्यशाली नहीं रहे। खैर एक्टिंग ना इस फिल्म की
नायिका से बनी ना नायक से, अलबत्ता गीत ने ही हिट होकर
कुछ फिल्म में कमाल दिखाया। गीत फायज़ अनवर का है और
धुन अनु मालिक की। ये अनु के भी उस दौर का संगीत है जिस
दौर में वो हर दूसरी फिल्म के संगीत में बाज़ीगर के संगीत की
झलक दिखलाने कि कोशिश करते। गीत गाया है कुमार सानू ने।
गीत फिल्माया गया है सनी देओल पर। ये एक चमत्कारी गीत भी है।
जैसे ही हीरो गिटार बजाता है उसमें से प्यानो की आवाज़ निकलती है।
ऐसा करने के बाद वो टार्ज़न की माफिक खिड़की से कूदकर फर्श पर
आ जाता हैं। या कौनसा गिटार है भाई जो पूरे गीत में प्यानो की
आवाज़ निकाल रहा है। विचित्र वीणा के अविष्कारक विश्व मोहन
भट्ट ने शायद ये गीत नहीं देखा है।
चलते चलते आपको इस गीत के फ़्रांसिसी भाई से भी मिलवा देते हैं:
Yves Montand - Les Feuilles Mortes
ये भाई हालाँकि उम्र में बड़ा है और इसकी पैदाइश san १९५१ की है।
गीत के बोल:
इस तरह आशिक़ी का असर छोड़ जाऊँगा
इस तरह आशिक़ी का असर छोड़ जाऊँगा
इस तरह आशिक़ी का असर छोड़ जाऊँगा
तेरे चेहरे पे अपनी नज़र छोड़ जाऊँगा
तेरे चेहरे पे अपनी नज़र छोड़ जाऊँगा
इस तरह आशिक़ी का असर छोड़ जाऊँगा
तेरे चेहरे पे अपनी नज़र छोड़ जाऊँगा
मैं दीवाना बन गया हूँ कैसी ये मुहब्बत है
ज़िन्दगी से बढ़कर अब तेरी ज़रूरत है
मुझको तू चाहिए तेरा प्यार चाहिए
एक बार नहीं सौ बार चाहिए
हर साँस मैं अपनी तुझपे लुटाऊँगा
दिल के लहू से तेरी माँग सजाऊँगा
तेरे चेहरे पे अपनी नज़र छोड़ जाऊँगा
इस तरह आशिक़ी का असर छोड़ जाऊँगा
तेरे चेहरे पे अपनी नज़र छोड़ जाऊँगा
प्यार क्या है दर्द क्या है दीवाने समझते हैं
इश्क़ में जलने का मतलब आशिक़ ही समझते हैं
मैं तड़पता हूँ तुझसे कुछ न कहूँ
बिन कहे भी मगर मैं तो रह न सकूँ
इस बेखुदी में आखिर कहाँ चैन पाऊँगा
मर के भी मैं तुझसे जुदा हो न पाऊँगा
तेरे चेहरे पे अपनी नज़र छोड़ जाऊँगा
इस तरह आशिक़ी का असर छोड़ जाऊँगा
तेरे चेहरे पे अपनी नज़र छोड़ जाऊँगा
का गीत सुन्वाओं फिर विचार बदला, सोचा सुननेवालों का
भी एक इम्तिहान लेना चाहिए। अरे भाई बहुत से दर्शक इस
फिल्म को देख कर इम्तिहान दे चुके हैं आप एक गीत नहीं
सुन सकते ?
ये उस दौर की फिल्म है जब शर्मिला टैगोर पुत्र उर्फ़ नायक
सैफ अली खान "सेफ" माने जाते थे। वो इसलिए कि एक्टिंग
आये या ना आये, फिल्म पिटे चाहे हिट हो उनको फ़िल्में मिलती
रहेंगी, ऐसा कई लोगों का मानना था। इस मामले में बच्चन पुत्र
उतना भाग्यशाली नहीं रहे। खैर एक्टिंग ना इस फिल्म की
नायिका से बनी ना नायक से, अलबत्ता गीत ने ही हिट होकर
कुछ फिल्म में कमाल दिखाया। गीत फायज़ अनवर का है और
धुन अनु मालिक की। ये अनु के भी उस दौर का संगीत है जिस
दौर में वो हर दूसरी फिल्म के संगीत में बाज़ीगर के संगीत की
झलक दिखलाने कि कोशिश करते। गीत गाया है कुमार सानू ने।
गीत फिल्माया गया है सनी देओल पर। ये एक चमत्कारी गीत भी है।
जैसे ही हीरो गिटार बजाता है उसमें से प्यानो की आवाज़ निकलती है।
ऐसा करने के बाद वो टार्ज़न की माफिक खिड़की से कूदकर फर्श पर
आ जाता हैं। या कौनसा गिटार है भाई जो पूरे गीत में प्यानो की
आवाज़ निकाल रहा है। विचित्र वीणा के अविष्कारक विश्व मोहन
भट्ट ने शायद ये गीत नहीं देखा है।
चलते चलते आपको इस गीत के फ़्रांसिसी भाई से भी मिलवा देते हैं:
Yves Montand - Les Feuilles Mortes
ये भाई हालाँकि उम्र में बड़ा है और इसकी पैदाइश san १९५१ की है।
गीत के बोल:
इस तरह आशिक़ी का असर छोड़ जाऊँगा
इस तरह आशिक़ी का असर छोड़ जाऊँगा
इस तरह आशिक़ी का असर छोड़ जाऊँगा
तेरे चेहरे पे अपनी नज़र छोड़ जाऊँगा
तेरे चेहरे पे अपनी नज़र छोड़ जाऊँगा
इस तरह आशिक़ी का असर छोड़ जाऊँगा
तेरे चेहरे पे अपनी नज़र छोड़ जाऊँगा
मैं दीवाना बन गया हूँ कैसी ये मुहब्बत है
ज़िन्दगी से बढ़कर अब तेरी ज़रूरत है
मुझको तू चाहिए तेरा प्यार चाहिए
एक बार नहीं सौ बार चाहिए
हर साँस मैं अपनी तुझपे लुटाऊँगा
दिल के लहू से तेरी माँग सजाऊँगा
तेरे चेहरे पे अपनी नज़र छोड़ जाऊँगा
इस तरह आशिक़ी का असर छोड़ जाऊँगा
तेरे चेहरे पे अपनी नज़र छोड़ जाऊँगा
प्यार क्या है दर्द क्या है दीवाने समझते हैं
इश्क़ में जलने का मतलब आशिक़ ही समझते हैं
मैं तड़पता हूँ तुझसे कुछ न कहूँ
बिन कहे भी मगर मैं तो रह न सकूँ
इस बेखुदी में आखिर कहाँ चैन पाऊँगा
मर के भी मैं तुझसे जुदा हो न पाऊँगा
तेरे चेहरे पे अपनी नज़र छोड़ जाऊँगा
इस तरह आशिक़ी का असर छोड़ जाऊँगा
तेरे चेहरे पे अपनी नज़र छोड़ जाऊँगा
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