राजेश रोशन के संगीत निर्देशन में सुनिए एक गीत फिल्म उल्टा सीधा
से। इस युगल गीत को गाया है किशोर कुमार और लता मंगेशकर ने।
गीत मजरूह का लिखा हुआ है। उन बिरले गीतों में से एक है जिनमें
राज बब्बर को किशोर कुमार की आवाज़ पर होंठ हिलाने का मौका मिला
है। रति अग्निहोत्री को कई गीत मिले हैं लता मंगेशकर की आवाज़ वाले।
फिल्म दुनिया की गिनती की लंबी अभिनेत्रियों में से एक रति हमेशा अपने
नायकों से ज्यादा लंबी सी दिखाई देती रहीं।
राजश्री वालों को इस दुर्लभ विडियो को लोड करने के लिए सहृदय धन्यवाद।
गीत के बोल:
हो, हो
आ आ आ आ आ आ हो हो
यार की गली दिन बहार का हाय
आ गया मज़ा आज प्यार का हाय
यार की गली दिन बहार का हाय
आ गया मज़ा आज प्यार का हाय
हो हो, हो हो, हो हो हो हो हो
यार की गली दिन बहार का हाय
आ गया मज़ा आज प्यार का हाय
हो हो, हो हो, हो हो हो हो हो
एक तेरी नज़र है एक मेरी नज़र है
एक तेरी नज़र है एक मेरी नज़र है
बीच में अब नहीं यार कोई
पर्दा है न दीवार कोई
बस इसी का तो इंतज़ार था हाय
आ गया मज़ा आज प्यार का हाय
हो हो, हो हो, हो हो हो हो हो
बात छुप छुप के मेरी जान कर नहीं
राज़ अपना है किसी का डर नहीं
बात छुप छुप के मेरी जान कर नहीं
राज़ अपना है किसी का डर नहीं
प्यार कर ले आज तो दिल खोल के आ
रोज दिलबर मिलेगा कहाँ ऐसा हसीं मौका आ
हाथ से मिला हाथ यार का हाये
आ गया मज़ा आज प्यार का हाय
हो हो, हो हो, हो हो हो हो हो
ला ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला
दिल तेरा भी प्यासा दिल मेरा भी प्यासा
दिल तेरा भी प्यासा, प्यासा
दिल मेरा भी प्यासा ,प्यासा
यूँ डूबे मोहब्बत में जानी
के सर से गुजार जाए पानी
इस कदर दिल बेकरार था हाय
आ गया मज़ा आज प्यार का हाय
यार की गली दिन बहार का हाय
अरे, आ गया मज़ा आज प्यार का हाय
हो हो, हो हो, हो हो हो हो हो
...............................
Yaar ki gali-Ulta Seedha 1981
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Monday, 1 August 2011
Tuesday, 19 July 2011
दिल क्या है एक शीशा है -लावा १९८५
८० के दशक में चला जाए. एक फिल्म है लावा जिसके गाने बहुत बजे थे
और फिल्म फ्लॉप थी. इस फिल्म से एक युगल गीत सुनवाते हैं आपको .
इसको युगल गीत कहना शायद उचित नहीं होगा क्यूंकि इसमें तीसरा कोण
भी मौजूद है यानि कि तीसरी आवाज़. ये फिल्म प्रेम त्रिकोण पर आधारित
है.
फिल्म डिम्पल कपाडिया की दूसरी पारी की फिल्म है जिसमें नायक राजीव कपूर
उनसे ज्यादा युवा नज़र आते हैं. इस कहानी के तीसरे कोण हैं राज बब्बर. एक
पार्टी में ये गीत गाया जा रहा है. आशा भोंसले के साथ किशोर कुमार और
शैलेन्द्र सिंह की आवाजें हैं. गीत में बॉलीवुड के रिटायर्ड और सेमी-रिटायर्ड
कलाकारों को रोज़गार मिला है-मदन पुरी, राजेंद्र नाथ, नरेन्द्र नाथ,सुधीर और
रमा विज़. गीत में आपको कुलभूषण खरबन्दा भी कहीं नज़र आ जायेंगे जो
फिल्म की मुख्य स्टार कास्ट का हिस्सा हैं .
गीत के बोल:
ता रा रा रा रा रा , ता रा रा रा रा रा
ला रा रा रा , रा रा रा रा रा रा
दिल क्या है एक शीशा है
शीशे में एक तस्वीर है
तस्वीर पे लिखा है तेरा नाम तुझे सलाम
दिल क्या है एक शीशा है
शीशे में एक तस्वीर है
तस्वीर पे लिखा है तेरा नाम तुझे सलाम
सुन रहे हैं लोग ये
दास्तान दिल थाम के
सुन रहे हैं लोग ये
दास्तान दिल थाम के
नाम मेरा जुड गया
साथ तेरे नाम के
इस प्यार में हम हो गए बदनाम तुझे सलाम
दिल क्या है एक शीशा है
शीशे में एक तस्वीर है
तस्वीर पे लिखा है तेरा नाम तुझे सलाम
आज इस दुनिया की सब
हमने सब रस्में तोड़ दीं
हो, आज इस दुनिया की सब
हमने सब रस्में तोड़ दीं
एक वादा कर लिया
सारी कसमें तोड़ दीं
आँखों ने दिल को दे दिया पैगाम तुझे सलाम
दिल क्या है एक शीशा है
शीशे में एक तस्वीर है
तस्वीर पे लिखा है तेरा नाम तुझे सलाम
जिंदगी भर के लिए
ये मोहब्बत कम न हो
जिंदगी भर के लिए
ये मोहब्बत कम न हो
दिल लगाये वो जिसे
जान का भी गम न हो
हर एक के बस का नहीं ये काम तुझे सलाम
दिल क्या है एक शीशा है
शीशे में एक तस्वीर है
तस्वीर पे लिखा है तेरा नाम तुझे सलाम
................................
Dil kya hai ek sheesha hai-Laava 1985
और फिल्म फ्लॉप थी. इस फिल्म से एक युगल गीत सुनवाते हैं आपको .
इसको युगल गीत कहना शायद उचित नहीं होगा क्यूंकि इसमें तीसरा कोण
भी मौजूद है यानि कि तीसरी आवाज़. ये फिल्म प्रेम त्रिकोण पर आधारित
है.
फिल्म डिम्पल कपाडिया की दूसरी पारी की फिल्म है जिसमें नायक राजीव कपूर
उनसे ज्यादा युवा नज़र आते हैं. इस कहानी के तीसरे कोण हैं राज बब्बर. एक
पार्टी में ये गीत गाया जा रहा है. आशा भोंसले के साथ किशोर कुमार और
शैलेन्द्र सिंह की आवाजें हैं. गीत में बॉलीवुड के रिटायर्ड और सेमी-रिटायर्ड
कलाकारों को रोज़गार मिला है-मदन पुरी, राजेंद्र नाथ, नरेन्द्र नाथ,सुधीर और
रमा विज़. गीत में आपको कुलभूषण खरबन्दा भी कहीं नज़र आ जायेंगे जो
फिल्म की मुख्य स्टार कास्ट का हिस्सा हैं .
गीत के बोल:
ता रा रा रा रा रा , ता रा रा रा रा रा
ला रा रा रा , रा रा रा रा रा रा
दिल क्या है एक शीशा है
शीशे में एक तस्वीर है
तस्वीर पे लिखा है तेरा नाम तुझे सलाम
दिल क्या है एक शीशा है
शीशे में एक तस्वीर है
तस्वीर पे लिखा है तेरा नाम तुझे सलाम
सुन रहे हैं लोग ये
दास्तान दिल थाम के
सुन रहे हैं लोग ये
दास्तान दिल थाम के
नाम मेरा जुड गया
साथ तेरे नाम के
इस प्यार में हम हो गए बदनाम तुझे सलाम
दिल क्या है एक शीशा है
शीशे में एक तस्वीर है
तस्वीर पे लिखा है तेरा नाम तुझे सलाम
आज इस दुनिया की सब
हमने सब रस्में तोड़ दीं
हो, आज इस दुनिया की सब
हमने सब रस्में तोड़ दीं
एक वादा कर लिया
सारी कसमें तोड़ दीं
आँखों ने दिल को दे दिया पैगाम तुझे सलाम
दिल क्या है एक शीशा है
शीशे में एक तस्वीर है
तस्वीर पे लिखा है तेरा नाम तुझे सलाम
जिंदगी भर के लिए
ये मोहब्बत कम न हो
जिंदगी भर के लिए
ये मोहब्बत कम न हो
दिल लगाये वो जिसे
जान का भी गम न हो
हर एक के बस का नहीं ये काम तुझे सलाम
दिल क्या है एक शीशा है
शीशे में एक तस्वीर है
तस्वीर पे लिखा है तेरा नाम तुझे सलाम
................................
Dil kya hai ek sheesha hai-Laava 1985
Sunday, 10 July 2011
झूमता गाता सावन आया -जज़्बात १९८०
बारिश के मौसम में फिर एक गीत और याद आ गया. सन १९८० की
फ़िल्म जज़्बात से अगला गीत पेश है. एक अनजान सी फ़िल्म है
जिसके गीत पर ज़रीना वहाब होंठ हिला रही हैं. महेंद्र देहलवी के बोलों
को संगीत में ढाला है राजकमल ने और आवाज़ है सुलक्षणा पंडित की .
ज़रीना वहाब ने इस गीत पर काफी मेहनत की होगी. फिल्म गर ज्यादा
न चले तो सब बेकार हो जाता है. महेंद्र देहलवी साहब ने सावन को आग
लगा दी है इस गीत में. फ़िल्मी गीत में कभी सावन आग लगाता है तो
कभी सावन को आग लगा दी जाती है.
गीत के बोल:
हो हो हो हो हो हो
हो हो हो हो हो हो
हो ओ ओ हो
हो ओ ओ ओ
झूमता गाता सावन आया
पर न लाया साजन को
झूमता गाता सावन आया
पर न लाया साजन को
जो सावन बिन साजन आए
आग लगे उस सावन को
झूमता गाता सावन आया
पर न लाया साजन को
जो सावन बिन साजन आए
आग लगे उस सावन को
झूमता गाता सावन आया
सावन आया, हो ओ ओ, हो ओ ओ
रिमझिम रिमझिम बरखा बरसे
ऐसे में प्रियतम ये मनवा
तेरे मिलन को तरसे
सखियाँ झूलें, हाय प्यार के झूले
उसको झूला कौन झुलाये
जिसको साजन भूले
ओ आ जा पिया ओ आ जा रे
झुलना झुला जा रे
ओ आ जा पिया
ओ ओ, झुलना झुला जा रे
तकते हैं नैन तेरी राह दिनन
तू अब तो दरस दिखा जा रे
तेरे नाम की
तेरे नाम की रट लागी है
मन तड़पे तेरे दर्शन को
जो सावन बिन साजन आए
आग लगे उस सावन को
झूमता गाता सावन आया
सावन आया, हो ओ ओ, हो ओ ओ
....................................
Jhoomta gaata sawan aaya-Jazbaat 1980
फ़िल्म जज़्बात से अगला गीत पेश है. एक अनजान सी फ़िल्म है
जिसके गीत पर ज़रीना वहाब होंठ हिला रही हैं. महेंद्र देहलवी के बोलों
को संगीत में ढाला है राजकमल ने और आवाज़ है सुलक्षणा पंडित की .
ज़रीना वहाब ने इस गीत पर काफी मेहनत की होगी. फिल्म गर ज्यादा
न चले तो सब बेकार हो जाता है. महेंद्र देहलवी साहब ने सावन को आग
लगा दी है इस गीत में. फ़िल्मी गीत में कभी सावन आग लगाता है तो
कभी सावन को आग लगा दी जाती है.
गीत के बोल:
हो हो हो हो हो हो
हो हो हो हो हो हो
हो ओ ओ हो
हो ओ ओ ओ
झूमता गाता सावन आया
पर न लाया साजन को
झूमता गाता सावन आया
पर न लाया साजन को
जो सावन बिन साजन आए
आग लगे उस सावन को
झूमता गाता सावन आया
पर न लाया साजन को
जो सावन बिन साजन आए
आग लगे उस सावन को
झूमता गाता सावन आया
सावन आया, हो ओ ओ, हो ओ ओ
रिमझिम रिमझिम बरखा बरसे
ऐसे में प्रियतम ये मनवा
तेरे मिलन को तरसे
सखियाँ झूलें, हाय प्यार के झूले
उसको झूला कौन झुलाये
जिसको साजन भूले
ओ आ जा पिया ओ आ जा रे
झुलना झुला जा रे
ओ आ जा पिया
ओ ओ, झुलना झुला जा रे
तकते हैं नैन तेरी राह दिनन
तू अब तो दरस दिखा जा रे
तेरे नाम की
तेरे नाम की रट लागी है
मन तड़पे तेरे दर्शन को
जो सावन बिन साजन आए
आग लगे उस सावन को
झूमता गाता सावन आया
सावन आया, हो ओ ओ, हो ओ ओ
....................................
Jhoomta gaata sawan aaya-Jazbaat 1980
Labels:
1980,
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Mahendra Dehalvi,
Raj Babbar,
Rajkamal,
Sulakshana Pandit,
Zarina Wahab
Wednesday, 19 January 2011
छल्ला-लौंग दा लश्कारा १९८६
गुरदास मान(ਗੁਰਦਾਸ ਮਾਨ) पंजाबी संगीत में नामी हस्ती हैं। उनके साथ
परदे पर आपको हिंदी सिनेमा की एक बड़ी हस्ती भी दिखेगी-राज बब्बर।
आज सुनिए युगों पुराना पंजाबी लोक गीत-छल्ला। इसको समय समय
पर कई कलाकाओं ने अपने अंदाज़ में गाया है। फिल्म में संगीत
जगजीत सिंह का है,जी हाँ वही-प्रसिद्ध ग़ज़ल गायक।
गीत के बोल:
हो जावो नी कोई मोर लियावो,
नी मेरे नाल गया आज्ज लड़ के,
ओह अल्लाह करे जे आ जावे सोहना,
देवां जान कदमा विच धर के
हो छल्ला बेरी ओये बूर ऐ, वे वतन माहि दा
दूर ऐ, वे जाना पहले
पूर ऐ, वे गल सुन छल्लेया
छोरा, वे काहदा ला अई झोरा
ओ छल्ला खूह ते धरिये, छल्ला खूह ते धरिये
छल्ला खूह ते धरिये, वे गल्लां मूह ते करिए,
वे सच्चे रब तों डरिये, वे गल सुन छल्लेया
ढोला, वे रब्ब तों साद अई ओहला.
ओ छल्ला कालियां मर्चां होए ,
ओ छल्ला कालियां मर्चां
छल्ला कालियां मर्चां
छल्ला कालियां मर्चां, वे मोहरा पी के
मर्सां, वे सिरे तेरे चढ्सन,
वे गल सुन छल्लेया ,
ढोल वे साद के कीट अई कोला
हो छल्ला नौ नौ खेवे,
हो छल्ला नौ नौ खेवे
छल्ला नौ नौ खेवे
छल्ला नौ नौ खेवे वे पुत्तर मिठड़े मेवे,
वे अल्लाह सभ नु देवे,
वे गल सुन छल्लेया
कांवां , वे मांवां ठंडियाँ छांवां
हो छल्ला कण दियां डंडियाँ होए,
हो छल्ला कण दियां डंडियाँ
छल्ला कण दियां डंडियाँ
छल्ला कण दियां डंडियाँ
छल्ला कण दियां डंडियाँ , वे सारे पिंड विच भंडियाँ,
वे गल्लां छज्ज पा छंदियाँ,
वे गल सुन छल्लेया
ढोल, वे साड के कीत अई कोला.
ओ छल्ला गल दी वे गानी,
छल्ला गल दी गानी
छल्ला गल दी गानी
छल्ला गल दी गानी वे तुर गए दिलं दे जानी
वे मेरी दुखन दी कहानी, वे आ के सुन जा
ढोल वे तेत्तों साद अई ओला
ओ छल्ला पाया आई गहणे होए,
ओ छल्ला पाया आई गहणे
छल्ला पाया आई गहणे
छल्ला पाया आई गहणे
छल्ला पाया आई गहणे, वे सजन वेली ना रहणे
वे दुःख ते जिंदड़ी दे सहने, वे गल सुन छल्या
ढोल वे कहदा पाणा अई रौला
इसके बोल में सुधार करने में मेरी मदद करें।
...........................................
Chhalla(Gurdaas Maan)-Laung da lishkara 1986
परदे पर आपको हिंदी सिनेमा की एक बड़ी हस्ती भी दिखेगी-राज बब्बर।
आज सुनिए युगों पुराना पंजाबी लोक गीत-छल्ला। इसको समय समय
पर कई कलाकाओं ने अपने अंदाज़ में गाया है। फिल्म में संगीत
जगजीत सिंह का है,जी हाँ वही-प्रसिद्ध ग़ज़ल गायक।
गीत के बोल:
हो जावो नी कोई मोर लियावो,
नी मेरे नाल गया आज्ज लड़ के,
ओह अल्लाह करे जे आ जावे सोहना,
देवां जान कदमा विच धर के
हो छल्ला बेरी ओये बूर ऐ, वे वतन माहि दा
दूर ऐ, वे जाना पहले
पूर ऐ, वे गल सुन छल्लेया
छोरा, वे काहदा ला अई झोरा
ओ छल्ला खूह ते धरिये, छल्ला खूह ते धरिये
छल्ला खूह ते धरिये, वे गल्लां मूह ते करिए,
वे सच्चे रब तों डरिये, वे गल सुन छल्लेया
ढोला, वे रब्ब तों साद अई ओहला.
ओ छल्ला कालियां मर्चां होए ,
ओ छल्ला कालियां मर्चां
छल्ला कालियां मर्चां
छल्ला कालियां मर्चां, वे मोहरा पी के
मर्सां, वे सिरे तेरे चढ्सन,
वे गल सुन छल्लेया ,
ढोल वे साद के कीट अई कोला
हो छल्ला नौ नौ खेवे,
हो छल्ला नौ नौ खेवे
छल्ला नौ नौ खेवे
छल्ला नौ नौ खेवे वे पुत्तर मिठड़े मेवे,
वे अल्लाह सभ नु देवे,
वे गल सुन छल्लेया
कांवां , वे मांवां ठंडियाँ छांवां
हो छल्ला कण दियां डंडियाँ होए,
हो छल्ला कण दियां डंडियाँ
छल्ला कण दियां डंडियाँ
छल्ला कण दियां डंडियाँ
छल्ला कण दियां डंडियाँ , वे सारे पिंड विच भंडियाँ,
वे गल्लां छज्ज पा छंदियाँ,
वे गल सुन छल्लेया
ढोल, वे साड के कीत अई कोला.
ओ छल्ला गल दी वे गानी,
छल्ला गल दी गानी
छल्ला गल दी गानी
छल्ला गल दी गानी वे तुर गए दिलं दे जानी
वे मेरी दुखन दी कहानी, वे आ के सुन जा
ढोल वे तेत्तों साद अई ओला
ओ छल्ला पाया आई गहणे होए,
ओ छल्ला पाया आई गहणे
छल्ला पाया आई गहणे
छल्ला पाया आई गहणे
छल्ला पाया आई गहणे, वे सजन वेली ना रहणे
वे दुःख ते जिंदड़ी दे सहने, वे गल सुन छल्या
ढोल वे कहदा पाणा अई रौला
इसके बोल में सुधार करने में मेरी मदद करें।
...........................................
Chhalla(Gurdaas Maan)-Laung da lishkara 1986
Thursday, 16 December 2010
जनम जनम का साथ है हमारा तुम्हारा -भीगी पलकें १९८२
कुछ फिल्मों ने प्रेमियों के मन पर काफी प्रभाव डाला
उनमे से एक है-भीगी पलकें जो सन १९८२ में आई थी।
राज बब्बर और स्मिता पाटिल ने इसमें अभिनय किया है
जो बाद में एक दूसरे के जीवन साथी भी बन गए। ये गीत
मानो उन्हीं के लिए लिखा सा प्रतीत होता है। ये है लता और
रफ़ी के गाये युगल गीतों में से आखिरी एक गीत। इसकी
रेकॉर्डिंग सन १९८० या उससे पहले हो गई होगी । फिल्म
का नाम है-भीगी पलकें जिसमे कलाकारों की पलकें कम
भीगी दिखीं और दर्शकों कि ज्यादा और ये शायद दर्शकों के
लिए ही ऐसा नाम रखा गया होगा। फिल्म को महिला दर्शकों
ने काफी पसंद किया।
गीत की बात की जाए- गीत को सदाबहार गीत का दर्ज़ा प्राप्त
है। गीत लिखा है एम्. जी. हशमत ने और धुन बनाई है जोड़ी
जुगल किशोर-तिलक राज ने। इस फिल्म में स्मिता पाटिल का
अभिनय बेजोड़ है और राज बब्बर उस लेवल पर आने के लिए
संघर्षरत ही दिखे हैं। राज बब्बर समर्थ कलाकार हैं और अपने
कई समकालीनों से बेहतर मगर अभिव्यक्ति के मामले में
स्मिता उनसे कई कदम आगे हैं। फिल्म में अगर केवल एक
नाम स्मिता पाटिल का हो तो बस यही बहाना बहुत है फिल्म
देखने का।
गीत के बोल:
जनम जनम का साथ हैं तुम्हारा हमारा, तुम्हारा हमारा
अगर ना मिलते इस जीवन में, लेते जनम दोबारा
जनम जनम का साथ हैं तुम्हारा हमारा, तुम्हारा हमारा
अगर ना मिलते इस जीवन में, लेते जनम दोबारा
जब से घूमे धरती, सूरज चाँद सितारे
तब से मेरी निगाहें, समझे तेरे इशारे
रूप बदल कर साजन मैंने, फिर से तुम्हे पुकारा
जनम जनम का साथ हैं तुम्हारा हमारा, तुम्हारा हमारा
अगर ना मिलते इस जीवन में, लेते जनम दोबारा
प्यार के पंख लगा के, दूर कहीं उड़ जायें
जहाँ हवाएं गम की, हम तक पहुच ना पायें
खुशियों की ख़ुशबू से महके, घर संसार हमारा
जनम जनम का साथ हैं तुम्हारा हमारा, तुम्हारा हमारा
अगर ना मिलते इस जीवन में, लेते जनम दोबारा
...........................................
Janam Janam Ka Sath Hai Hamara Tumhara-Bheegi Palkein 1982
उनमे से एक है-भीगी पलकें जो सन १९८२ में आई थी।
राज बब्बर और स्मिता पाटिल ने इसमें अभिनय किया है
जो बाद में एक दूसरे के जीवन साथी भी बन गए। ये गीत
मानो उन्हीं के लिए लिखा सा प्रतीत होता है। ये है लता और
रफ़ी के गाये युगल गीतों में से आखिरी एक गीत। इसकी
रेकॉर्डिंग सन १९८० या उससे पहले हो गई होगी । फिल्म
का नाम है-भीगी पलकें जिसमे कलाकारों की पलकें कम
भीगी दिखीं और दर्शकों कि ज्यादा और ये शायद दर्शकों के
लिए ही ऐसा नाम रखा गया होगा। फिल्म को महिला दर्शकों
ने काफी पसंद किया।
गीत की बात की जाए- गीत को सदाबहार गीत का दर्ज़ा प्राप्त
है। गीत लिखा है एम्. जी. हशमत ने और धुन बनाई है जोड़ी
जुगल किशोर-तिलक राज ने। इस फिल्म में स्मिता पाटिल का
अभिनय बेजोड़ है और राज बब्बर उस लेवल पर आने के लिए
संघर्षरत ही दिखे हैं। राज बब्बर समर्थ कलाकार हैं और अपने
कई समकालीनों से बेहतर मगर अभिव्यक्ति के मामले में
स्मिता उनसे कई कदम आगे हैं। फिल्म में अगर केवल एक
नाम स्मिता पाटिल का हो तो बस यही बहाना बहुत है फिल्म
देखने का।
गीत के बोल:
जनम जनम का साथ हैं तुम्हारा हमारा, तुम्हारा हमारा
अगर ना मिलते इस जीवन में, लेते जनम दोबारा
जनम जनम का साथ हैं तुम्हारा हमारा, तुम्हारा हमारा
अगर ना मिलते इस जीवन में, लेते जनम दोबारा
जब से घूमे धरती, सूरज चाँद सितारे
तब से मेरी निगाहें, समझे तेरे इशारे
रूप बदल कर साजन मैंने, फिर से तुम्हे पुकारा
जनम जनम का साथ हैं तुम्हारा हमारा, तुम्हारा हमारा
अगर ना मिलते इस जीवन में, लेते जनम दोबारा
प्यार के पंख लगा के, दूर कहीं उड़ जायें
जहाँ हवाएं गम की, हम तक पहुच ना पायें
खुशियों की ख़ुशबू से महके, घर संसार हमारा
जनम जनम का साथ हैं तुम्हारा हमारा, तुम्हारा हमारा
अगर ना मिलते इस जीवन में, लेते जनम दोबारा
...........................................
Janam Janam Ka Sath Hai Hamara Tumhara-Bheegi Palkein 1982
Wednesday, 24 November 2010
तेरा चेहरा मुझे गुलाब लगे-आपस की बात १९८१
अनजान की बात छिड़ी है तो उनका लिखा हुआ एक और गीत
सुनें जो कर्णप्रिय है और ८० के दशक से है। ये राज बब्बर पर
फिल्माया गया है। राज बब्बर उन दिनों नवागंतुकों की कतार
में शामिल थे। बाद में उन्होंने अपना अलग मुकाम बना लिया।
फ़िल्में इतनी बन चुकी हैं की किस किस का नाम और विवरण
याद रखा जाए। ये समस्या लगभग सभी संगीत प्रेमियों को आती
है। मैं तो ये भी भूल चुका था कि इस फिल्म में राज बब्बर के साथ
पूनम ढिल्लों हैं। फिल्म का नाम है आपस की बात। इसमें संगीत
अन्नू मलिक का है, चौंक गए ना। जी हाँ अन्नू मलिक स्वयं अपने
संगीत पर नज़र डालते होंगे तो चौंक जाते होंगे। उन्होंने हमेशा
समय समय पर श्रोताओं को चकित किया है। उसकी एक वजह
साफ़ है-जड़ें मजबूत हैं। सरदार मलिक पुत्र होने का कुछ तो फ़ायदा
होना चाहिए ना। ये बात और है कि उन्होंने कई ऐसी ऊंची मंजिलें तय
कर ली है आज, जिसके बारे में उनके पिता शायद सपने ही देखा करते
होंगे। अन्नू मालिक ने अपनी गायक बनने की हसरत भी पूरी
कर ली।
गीत किशोर कुमार का गाया हुआ है और राज बब्बर को किशोर कुमार
के १-२ गीत ही मिले होंगे परदे पर होंठ हिलाने के लिए। ये निस्संदेह
अन्नू मलिक की एक बेहतर रचना है।
गीत के बोल:
तेरा चेहरा मुझे गुलाब लगे,
दोनों आलम में लाजवाब लगे
दिन को देखूं तो आफताब लगे,
शब् को देखूं तो माहताब लगे
तेरा चेहरा मुझे गुलाब लगे
दोनों आलम में लाजवाब लगे
रोज मिलते हो पर नहीं मिलते,
ऐसा मिलना भी मुझको ख्वाब लगे
पढ़ता रहता हु तेरी सूरत को,
तेरी सूरत मुझे किताब लगे
तेरा चेहरा मुझे गुलाब लगे
दोनों आलम में लाजवाब लगे
तेरी आँखों की मस्तियाँ तौबा,
मुझको छलकी हुयी शराब लगे
जब भी चमके घटा में बिजली,
मुझको तेरा ही वो शबाब लगे
तेरा चेहरा मुझे गुलाब लगे
दोनों आलम में लाजवाब लगे
तुझको देखूं तो किस तरह देखूं,
रुख पे किरणों के सौ नकाब लगे
प्यार शायद इसी को कहते हैं,
एक मुझसे ही क्यों हिजाब लगे
तेरा चेहरा मुझे गुलाब लगे
दोनों आलम में लाजवाब लगे
सुनें जो कर्णप्रिय है और ८० के दशक से है। ये राज बब्बर पर
फिल्माया गया है। राज बब्बर उन दिनों नवागंतुकों की कतार
में शामिल थे। बाद में उन्होंने अपना अलग मुकाम बना लिया।
फ़िल्में इतनी बन चुकी हैं की किस किस का नाम और विवरण
याद रखा जाए। ये समस्या लगभग सभी संगीत प्रेमियों को आती
है। मैं तो ये भी भूल चुका था कि इस फिल्म में राज बब्बर के साथ
पूनम ढिल्लों हैं। फिल्म का नाम है आपस की बात। इसमें संगीत
अन्नू मलिक का है, चौंक गए ना। जी हाँ अन्नू मलिक स्वयं अपने
संगीत पर नज़र डालते होंगे तो चौंक जाते होंगे। उन्होंने हमेशा
समय समय पर श्रोताओं को चकित किया है। उसकी एक वजह
साफ़ है-जड़ें मजबूत हैं। सरदार मलिक पुत्र होने का कुछ तो फ़ायदा
होना चाहिए ना। ये बात और है कि उन्होंने कई ऐसी ऊंची मंजिलें तय
कर ली है आज, जिसके बारे में उनके पिता शायद सपने ही देखा करते
होंगे। अन्नू मालिक ने अपनी गायक बनने की हसरत भी पूरी
कर ली।
गीत किशोर कुमार का गाया हुआ है और राज बब्बर को किशोर कुमार
के १-२ गीत ही मिले होंगे परदे पर होंठ हिलाने के लिए। ये निस्संदेह
अन्नू मलिक की एक बेहतर रचना है।
गीत के बोल:
तेरा चेहरा मुझे गुलाब लगे,
दोनों आलम में लाजवाब लगे
दिन को देखूं तो आफताब लगे,
शब् को देखूं तो माहताब लगे
तेरा चेहरा मुझे गुलाब लगे
दोनों आलम में लाजवाब लगे
रोज मिलते हो पर नहीं मिलते,
ऐसा मिलना भी मुझको ख्वाब लगे
पढ़ता रहता हु तेरी सूरत को,
तेरी सूरत मुझे किताब लगे
तेरा चेहरा मुझे गुलाब लगे
दोनों आलम में लाजवाब लगे
तेरी आँखों की मस्तियाँ तौबा,
मुझको छलकी हुयी शराब लगे
जब भी चमके घटा में बिजली,
मुझको तेरा ही वो शबाब लगे
तेरा चेहरा मुझे गुलाब लगे
दोनों आलम में लाजवाब लगे
तुझको देखूं तो किस तरह देखूं,
रुख पे किरणों के सौ नकाब लगे
प्यार शायद इसी को कहते हैं,
एक मुझसे ही क्यों हिजाब लगे
तेरा चेहरा मुझे गुलाब लगे
दोनों आलम में लाजवाब लगे
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