Social Icons

Showing posts with label Talat Mehmood. Show all posts
Showing posts with label Talat Mehmood. Show all posts

Sunday, 17 July 2011

ठण्डी पवन चले-फूटपाथ १९५३

एक गीत सुनवाते हैं आपको तीन गायकों की आवाजों में . ये लिया
गया है फिल्म फुटपाथ से . इस फिल्म का ये चौथा गीत है ब्लॉग पर.
तलत महमूद के साथ प्रेमलता और आशिमा बैनर्जी की आवाजें हैं.


ऐसे शोर्ट एंड स्वीट गीत बहुत भाते हैं मुझे क्यूंकि बोल लिखने में भी
ज्यादा कसरत नहीं करना पढ़ती है. गीत सरदार जाफरी का लिखा हुआ है
या मजरूह का, इस बारे में कोई प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध नहीं है
अतः हम दोनों के नाम टैग में डाल देते हैं.




गीत के बोल:

ठण्डी पवन चले
साँझ ढले
कू कू कोयल बोले
जिया डोले जिया डोले
पवन चले

प्यारे-प्यारे बाल सँवारे
शाम आई ले के नज़ारे
प्यारे-प्यारे बाल सँवारे
शाम आई ले के नज़ारे

नीले-नीले पीले-पीले
नीले-नीले पीले-पीले
देखो गगन में भी फूल खिले
पवन चले

चन्दा-तारे करें इशारे
आओ खेलें हमें पुकारे
चन्दा-तारे करें इशारे
आओ खेलें हमें पुकारे

कह दो चुन्नू, कह दो मुन्नू
कह दो चुन्नू, कह दो मुन्नू
रात होने को है हम चले
पवन चले

ठण्डी पवन चले
साँझ ढले
कू कू कोयल बोले
जिया डोले जिया डोले
पवन चले
-----------------------------------
Thandi pawan Chale-Footpath 1953

Tuesday, 28 June 2011

तेरी निगाहों में तेरी ही बाहों में -बहाना १९६०

जादू है या नशा है मालूम नहीं मगर जूने पुराने गीतों की तासीर
और असर आश्चर्यजनक है। मधुर गीत सुनने के लिए किसी भी
बहाने की ज़रुरत नहीं है अतः आज आपको फिल्म बहाना से एक
गीत सुनवा देते हैं। सन १९६० की फिल्म में ये मधुर गीत है जिसे
आशा और तलत महमूद ने गाया है। राजेंद्र कृष्ण के लिखे गीत
की धुन बनाई है मदन मोहन ने।



गीत के बोल:

तेरी निगाहों में तेरी ही बाहों में
रहने को जी चाहता है
दिल में छुपाई हुई बात सजन से
कहने को जी चाहता है

तेरी निगाहों में तेरी ही बाहों में
रहने को जी चाहता है

तेरी निगाहों में

दिल ये हमारा घर है तुम्हारा
आओ जी, आ के बस जाओ जी
दिल ये हमारा घर है तुम्हारा
आओ जी, आ के बस जाओ जी
नैन हमारे देखे ख़्वाब तुम्हारे
ज़रा ख़्वाबों में आ के हँस जाओ जी
जान से प्यारा हमें, घर ये तुम्हारा यहाँ
रहने को जी चाहता है

तेरी निगाहों में तेरी ही बाहों में
रहने को जी चाहता है

तेरी निगाहों में

देखो जी देखो और किसी को
दिल में न अपने बसाना जी
प्यार भरा ये वादा हम तो न भूले पिया
तुम भी इसे न भुलाना जी
प्रीत हमारी रहे दुनिया से न्यारी यही
कहने को जी चाहता है

तेरी निगाहों में तेरी ही बाहों में
रहने को जी चाहता है
दिल में छुपाई हुई बात सजन से
कहने को जी चाहता है

तेरी निगाहों में तेरी ही बाहों में
रहने को जी चाहता है

तेरी निगाहों में
........................
Teri nigahon mein-Bahana 1960

Tuesday, 7 June 2011

नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख-शिकस्त १९५३

क से क्लासिक। सबकी क्लासिक की अपनी अपनी परिभाषा होती
है। आइये एक क्लासिक गीत देखें और सुनें। इसके क्लासिक होने का
सबसे पहला कारण ये है कि ये शैलेन्द्र का लिखा हुआ गीत है और
प्रेरणादाई गीत है। संगीतमय फिल्म शिकस्त से ये गीत लिया
गया है। ब्लॉग पर ये शिकस्त फिल्म का तीसरा गीत है। पिछले
दो गीत तलत महमूद की आवाज़ में हैं, इसमें रफ़ी की आवाज़ है।





गीत के बोल:

हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ

नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
इसके रूप का सिंगार कर के देख
इसपे जो भी है निसार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख

नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
इसके रूप का सिंगार कर के देख
इसपे जो भी है निसार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख

सच कभी तो होंगे ख़्वाब और ख़याल, तेरे ख़्वाब और ख़याल
हो तेरे ख़्वाब और ख़याल
कब तलक रहेंगे बेक़सी के जाल, दिल पे बेक़सी के जाल
हो दिल पे बेक़सी के जाल
वक़्त सुन चुका है तेरे दिल का हाल तेरे दिल का हाल
वक़्त सुन चुका है तेरे दिल का हाल तेरे दिल का हाल
और चार दिन गुज़ार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
इसपे जो भी है निसार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख

दिल के तार छू के गा रहा है कौन गीत गा रहा है कौन
हो गीत गा रहा है कौन
ले के ये बहारें आ रहा है कौन मुस्कुरा रहा है कौन
हो मुस्कुरा रहा है कौन
तन पे और मन पे छा रहा है कौन छा रहा है कौन
तन पे और मन पे छा रहा है कौन छा रहा है कौन
अपना दिल किसी पे हार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
इसपे जो भी है निसार कर के देख

नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
इसके रूप का सिंगार कर के देख
इसपे जो भी है निसार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख

हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
इसके रूप का सिंगार कर के देख
इसपे जो भी है निसार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख

नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
इसके रूप का सिंगार कर के देख
इसपे जो भी है निसार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख


नींद से धरती को जो जगायेगा ज़मीं को जो जगायेगा
ज़मीं को जो जगायेगा
बीज आँसुओं के जो बिछायेगा जो मेहनतें लुटायेगा
जो मेहनतें लुटायेगा
फूल उसके आँगन में मुस्कुरायेगा मुस्कुरायेगा
फूल उसके आँगन में मुस्कुरायेगा मुस्कुरायेगा
और चार दिन गुज़ार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
इसपे जो भी है निसार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख

गा रही है धरती गीत प्यार के सुहाने गीत प्यार के
सुहाने गीत प्यार के
दिन गुज़र चुके हैं इंतज़ार के हो तेरे इंतज़ार के
हो तेरे इंतज़ार के
चुप न रह पपीहे ये मन को मार के मन को मार के
चुप न रह पपीहे मन को मार के मन को मार के
आयेंगे पिया पुकार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
आयेंगे पिया पुकार कर के देख

नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
इसके रूप का सिंगार कर के देख
इसपे जो भी है निसार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
.....................................
Nayi zindai se pyar kar ke dekh-Shikast 1953

Monday, 6 June 2011

तुम्हीं तो मेरी पूजा हो-सुहागन १९६४

फिल्म सुहागन(१९६४) से आपको पूर्व में २ गीत सुनवा चुके हैं।
अब सुनिए फिल्म का तीसरा गीत जो कि लता और तलत
की आवाज़ में एक युगल गीत है। इस फिल्म का एक युगल गीत
जो आपने पहले सुना था वो मन्ना डे और लता की आवाज़ में है।
६० के दशक के आते तलत महमूद को फिल्मों में गीत मिलना
कम हो गये। बदलते ज़माने और पसंद के साथ दूसरे गायक दृश्य
में दिखाई देने लगे। दूसरे संगीतकार जहाँ उनसे किनारा करने लगे,
मदन मोहन ने उन्हें कुछ गीत अवश्य दिए गाने को. मदन मोहन
ने तलत महमूद को फिल्म जहाँआरा में भी अवसर दिए।






गीत के बोल:


तुम्हीं तो मेरी पूजा हो
हाँ हाँ हाँ आ आ आ आ
तुम्हीं तो मेरी पूजा हो
तुम्हें दिल में बसाया है

तुम्हीं तो मेरी दुनिया हो
हाँ हाँ हाँ हाँ आ आ आ आ
तुम्हीं तो मेरी दुनिया हो
तुम्हें दिल से लगाया है

तुम्हीं तो मेरी दुनिया हो

इबादत है निगाहों की तुझी को देखते रहना
तेरी हर बात को सहना
तुम्हीं तो मेरे साथी हो तुम्हें अपना बनाया है

तुम्हीं तो मेरी पूजा हो

तमन्ना है इन आँखों की तुम्हारे ही नज़ारे हों
जहाँ देखूँ तुम्हें देखूँ हसीं जलवे तुम्हारे हों
हसीं जलवे तुम्हारे हों
तुम्हीं ने मेरी मंज़िल को बहारों से सजाया है

तुम्हीं तो मेरी दुनिया हो

तुम्हारे हाथ में है अब हमारी लाज का आँचल
न बह जाए कहीं देखो हमारी आँख का काजल
न बह जाए कहीं देखो हमारी आँख का काजल
हमारी आंख का काजल

तुम्हीं तो मेरी दुनिया हो
तुम्हीं तो मेरी पूजा हो
......................................
Tumhin to meri pooja ho-Suhagan 1964

Saturday, 21 May 2011

नैन मिले नैन हुए बाँवरे-तराना १९५१

आपको पुरानी तराना फिल्म का एक भी गीत नहीं सुनाया है अभी तक।
आज आपको इस हिट मुज़िकल फिल्म से एक गीत सुनवाते हैं जो
सुबह सुबह के किसी रेडियो प्रोग्राम में आपने ज़रूर सुना होगा।

कुछ haunting(भूतिया नहीं) melodies अक्सर बिना किसी वजह से
याद आ जाती हैं और आप उनको गुनगुनाने लग जाते हैं। ये भी एक ऐसा
ही युगल गीत है। इस गीत में बहुत स्कोप है आहें भरने का विशेषकर प्रेमी
युगल के लिए। प्रेम धवन के सरल से मगर प्रभावी बोलों को एक
आकर्षक धुन पर तैराया है संगीतकार अनिल बिस्वास ने। अनिल बिश्वास
जैसे कुशल चितेरे फिल्म संगीत जगत में कम ही हुए हैं। हिंदी गीत जो आज हम
आज सुनते हैं उसके स्वरुप को व्यवस्थित करने का श्री अनिल बिस्वास को
ही जाता है। गीत में सौम्यता को शुरू से आखिर तक कायम रखने की कला
में अनिल बिश्वास सिद्धहस्त थे। गीत फिल्माया गया है दो नामी कलाकारों
पर-दिलीप कुमार और मधुबाला।



गीत के बोल:

नैन मिले नैन हुए बाँवरे
नैन मिले नैन हुए बाँवरे
चैन कहाँ मोहे सजन संवरे
नैन हुए बाँवरे
नैन मिले नैन हुए बाँवरे
नैन मिले नैन हुए बाँवरे

देखते ही देखते मैं खो गई
देखते ही देखते मैं खो गई
जागते ही जागते मैं सो गई
जागते ही जागते मैं सो गई
अब कभी मैं जागना ना चाहूँ रे
अब कभी मैं जागना ना चाहूँ रे

नैन हुए बावरे

चलते चलते पाँव मेरे थम गये
चलते चलते पाँव मेरे थम गये
तुम मिले तो दिल के सारे ग़म गये
तुम मिले तो दिल के सारे ग़म गये
मिल गयी ज़ुल्फ़ों की ठंड़ी छाँव रे
मिल गयी ज़ुल्फ़ों की ठंड़ी छाँव रे
नैन हुए बावरे

धड़कने दिल की छुपाऊँ किस तरह
ऐ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
धड़कने दिल की छुपाऊँ किस तरह
लाज का घूँघट उठाऊँ किस तरह
लाज का घूँघट उठाऊँ किस तरह
किस तरह साजन तेरी बन जाऊँ रे
किस तरह साजन तेरी बन जाऊँ रे
नैन हुए बावरे

नैनों से नैना तेरे कुछ कह गये
ऐ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
नैनों से नैना तेरे कुछ कह गये
प्यार की लहरों में दो दिल बह गये
प्यार की लहरों में दो दिल बह गये
अब रुके ना प्रीत की ये नाव रे
अब रुके ना प्रीत की ये नाव रे
नैन हुए बावरे

नैन मिले नैन हुए बावरे
चैन कहाँ मोहे सजन साँवरे
नैन हुए बावरे
.....................................
Nain mile nain hue banwre-Tarana 1951

Saturday, 14 May 2011

ऐ मेरे दिल कहीं और चल २- दाग १९५२

"प्यासा हूँ मगर लोग समझते हैं पिया सा"- वाह साहब क्या पंक्तियाँ
हैं पिछले गीत की। आप सभी ने ये ज़रूर एक ना एक बार सुना होगा
कि कोई शराबी नाली में पड़ा है और कुत्ता उसका मुंह चाट रहा है।
मैंने २-३ बार देखा भी है। कुछ रोज़ पहले ध्यान से देखने पर
पाया कुत्ता उस व्यक्ति के होंठ भी चाट के साफ़ कर रहा है। अमूमन
ऐसे दृश्य केवल वहीँ देखे जा सकते हैं जहाँ कुत्ते पाले होते
हैं और कुत्तों को घर के सदस्य की तरह रखा जाता है। वैसी
जगहों पर उनकी चाटा-चाटी को भी खुली छूट होती है।

प्रस्तुत गीत एक प्रसिद्ध फिल्म दाग से है। सन १९५२ की दाग।
१९५२ की दाग शैलेन्द्र के गीतों के लिए याद की जाती है
तो सन १९७३ वाली साहिर के गीतों के लिए। प्रस्तुत गीत में
नायक कुत्ते को निमंत्रण देता सा प्रतीत होता है-आ जा मेरे
पीछे पीछे, मैं आगे चल के गिरने वाला हूँ उसके बाद तेरी जो
मर्ज़ी हो करना। इस फिल्म के लिए नायक को फ़िल्म फेयर
पुरस्कार मिला था। नायक को तो आप पहचान ही गए होंगे।
गीत गाया है तलत महमूद ने और इसकी धुन तैयार की है
शंकर जयकिशन ने।




गीत के बोल:

ऐ मेरे दिल कहीं और चल
गम की दुनिया से दिल भर गया
ढूंढ ले अब कोई घर नया
ऐ मेरे दिल कहीं और चल
गम की दुनिया से दिल भर गया
ढूंढ ले अब कोई घर नया
ऐ मेरे दिल कहीं और चल

चल जहां गम के मारे ना हों
झूठी आशा के तारे ना हों
चल जहां गम के मारे ना हों
झूठी आशा के तारे ना हों
झूठी आशा के तारे ना हों
इन बहारों से क्या फ़ायदा
जिस में दिल की कली जल गई
ज़ख्म फिर से हरा हो गया

ऐ मेरे दिल कहीं और चल

चार आंसू कोई रो दिया
फेर के मुंह कोई चल दिया
चार आंसू कोई रो दिया
फेर के मुंह कोई चल दिया
फेर के मुंह कोई चल दिया
लुट रहा था किसी का जहाँ
देखती रह गई ये ज़मीन
चुप रहा बेरहम आसमान

ऐ मेरे दिल कहीं और चल
........................................
Ae mere dil kahin aur chaal(Talat)-Daag 1952

Saturday, 29 January 2011

बेरहम आसमाँ मेरी मंज़िल बता-बहाना १९६०

मदन मोहन को ग़ज़ल किंग कहा जाता था ऐसा मैंने
जगह जगह पढ़ा है। तलत महमूद ग़ज़ल गायकी
में काफी नाम कमा कर गए हैं। अपनी थरथराती आवाज़
की खूबी के साथ उन्होंने हिंदी फिल्म संगीत में खूब
झंडे गाड़े। तलत महमूद का नाम ६० के दशक के
आते आते लोग भूलने लगे। ये गीत उनके आखिरी दौर
के गीतों में शामिल है। मदन मोहन के संगीत को पसंद
करने वाले ज़रूर इस गीत को चाव से सुना करते हैं
या फिर जो गायक तलत महमूद के गीत ज्यादा सुना
करते हैं। खैर राजेंद्र कृष्ण के लिखे और मदन
मोहन के संगीत से सजे इस गीत का आनंद उठाइए।



गीत के बोल:

बेरहम आसमाँ मेरी मंज़िल बता है कहाँ
बेरहम आसमाँ

जो न सोचा था वो हो गया
क्यों नसीबा मेरा सो गया
ग़म की ऐसी घटा छा गयी
चैन दिल का कहीं खो गया
ये बता किस लिये
ले रहा है मेरा इम्तिहाँ

बेरहम आसमाँ

बुझ गया है ये दिल इस तरह
चाँद पिछले पहर जिस तरह
इतनी तारीकियों में बता
राह ढूंढे कोई किस तरह
खो गयीं मन्ज़िलें
हो गया गुम कहीं कारवाँ

बेरहम आसमाँ

जा रहें हैं न जाने किधर
देख सकती नहीं कुछ नज़र
छोड़ दी नाव मंझधार में
किस किनारे लगे क्या ख़बर
क्या करें दूर तक
रोशनी का नहीं है निशाँ

बेरहम आसमाँ

मुझसे क़िसमत ने धोखा किया
हर क़दम पे नया ग़म दिया
है ख़ुशी की क़सम कि यहाँ
चैन का साँस तक न लिया
बुझ गया दिल मेरा
रास आया न तेरा जहाँ

बेरहम आसमाँ

तेरी दुनियाँ में यूँ हम जिये
आँसुओं के समुन्दर पिये
दिल में शिक़वे तड़पते रहे
होंठ लेकिन हमेशा सिये
कब तलक़ हम रहें
तेरी दुनिया में यूँ बेज़ुबाँ

बेरहम आसमाँ

अब कोई भी तमन्ना नहीं
अब यहाँ हम को जीना नहीं
ज़िंदगी अब तेरे जाम से
एक क़तरा भी पीना नहीं
मौत को भेज के
ख़त्म कर दे मेरी दास्तां

बेरहम आसमाँ

Tuesday, 11 January 2011

शाम-ए-ग़म की क़सम-फुटपाथ १९५३

आपको मखमली आवाज़ सुनवाते हैं बहुत दिनों बाद।
तलत महमूद की आवाज़ में ये सदाबहार गीत सुनिए
फिल्म फुटपाथ से। सन १९५३ से ये गीत श्रोताओं को
आनंदित करता आ रहा है। मजरूह के बोलों को सुरों
में पिरोया है खय्याम ने। दिलीप कुमार की ट्रेजेडी किंग
की इमेज में ऐसे गीतों का योगदान बहुत रहा। इस गीत
को अक्सर श्रोता दुखी अवस्था में सुना करते हैं और ऐसा
सुना जाता है कि इसको सुनने के बाद वे अवसाद से बाहर
आ जाते हैं। कुछ कुछ होम्योपैथी के इलाज़ की तरह.....





गीत के बोल:

शाम-ए-ग़म की क़सम आज ग़मगीं हैं हम
आ भी जा आ भी जा आज मेरे सनम
शाम-ए-ग़म की क़सम

दिल परेशान है रात वीरान है
देख जा किस तरह आज तनहा हैं हम
शाम-ए-ग़म की क़सम

चैन कैसा जो पहलू में तू ही नहीं
मार डाले न दर्द-ए-जुदाई कहीं
रुत हंसीं हैं तो क्या चाँदनी है तो क्या
चाँदनी ज़ुल्म है और जुदाई सितम

शाम-ए-ग़म की क़सम आज ग़मगीं हैं हम
आ भी जा आ भी जा आज मेरे सनम
शाम-ए-ग़म की क़सम

अब तो आ जा के अब रात भी सो गई
ज़िन्दगी ग़म के सेहराव में खो गई
अब तो आ जा के अब रात भी सो गई
ज़िन्दगी ग़म के सेहराव में खो गई
ढूँढती हैं नज़र तू कहाँ हैं मगर
देखते देखते आया आँखों में ग़म

शाम-ए-ग़म की क़सम आज ग़मगीं हैं हम
आ भी जा आ भी जा आज मेरे सनम
शाम-ए-ग़म की क़सम
..............................
Sham-e-gham ki kasam-Footpath 1952

Sunday, 12 December 2010

सावन के झूले पड़े-प्यार की प्यास १९६१

मधुर गीतों की श्रृंखला में अगला गीत प्रस्तुत है फिल्म
प्यार की प्यास से। ये सन १९६१ की फिल्म है। गीत के
बोल लिखे हैं पंडित भारत व्यास ने और धुन बनाई है
वसंत देसाई ने। तलत महमूद और लता इस गीत के
गायक गायिका हैं। लता और तलत की आवाज़ में युगल
गीत ऐसे सुनाई पढ़ते हैं मानो रेशम की कोमलता और
शहद की मधुरता का मेल हो।



गीत के बोल:



हो, हो, हो
कहाँ छुपे हो मन के मितवा
नैना भये उदासे
छलक रहा है दुःख का सागर
हम प्यासे के प्यासे

हो, हो, हो, हो
सावन के झूले पड़े
सावन के झूले पड़े
सैयां जी हमें तुम कहाँ भूले पड़े
ओ, ओ, ओ

ये नैना जो तुम से लड़े
गोरी जी तोरी पलकन के नीचे खड़े

सावन के झूले पड़े

तुम नहीं आये हमको भूले
हमरे अंगना फुलवा ना फूले
हमको अकेली देख सहेली
कहती है क्यूँ ना खिलती चमेली
बेलरिया ना मंडवे चढ़े
सैयां जी हमें तुम कहाँ भूले पड़े

ओ, ओ, ओ

ये नैना जो तुम से लड़े
गोरी जी तोरी पलकन के नीचे खड़े

सावन के झूले पड़े
हो, ओ ओ ओ

तोरे दिल में हमरा दिल है
जैसे तोरे नैन में तिल है
हमरे मिलन बिन ये मनभावन
सावन भी तो क्या है सावन
पीपल के पतवे झडे
तोरे मोरे जब तक ना नैना लड़े

सावन के झूले पड़े
हो, ओ ओ ओ
......................................
Sawan ke jhoole pade-Pyar ki pyaas 1961

Saturday, 20 November 2010

आंसू समझ के क्यूँ मुझे-छाया १९६१

दो फिल्मों के गीत सुनने में मुझे हमेशा कन्फ्यूज़न होता । वो हैं
छाया और माया । दोनों फ़िल्में सन १९६१ में आयीं। दोनों में ही
सलिल चौधरी का संगीत है। आइये इस फिल्म से आपको एक
मधुर गाना सुनवाया जाए। सुनील दत्त और आशा पारेख अभिनीत
फिल्म छाया में सुनील दत्त के लिए सलिल ने तलत महमूद की
आवाज़ का इस्तेमाल किया है, और कुछ अविस्मर्णीय रचनाएँ दी
हिंदी फिल्म संगीत जगत को। प्रस्तुत गीत कर्णप्रिय तो है ही साथ
साथ इसे गुनगुनाना कठिन कार्य है। लम्बी सांस लेने की ज़रुरत
पढ़ती है बीच बीच में। इस फिल्म के गीत राजेंद्र कृष्ण ने लिखे हैं।



गीत के बोल:

आंसू समझ के क्यूँ मुझे आँख से तुमने गिरा दिया
मोती किसी के प्यार का मिटटी में क्यूँ मिला दिया
आंसू समझ के क्यूँ मुझे

जो ना चमन में खिल सका मैं वो गरीब फूल हूँ
जो ना चमन में खिल सका मैं वो गरीब फूल हूँ
जो कुछ भी हूँ बाहर की छोटी सी एक भूल हूँ
जिस ने खिला के खुद मुझे खुद ही मुझे भुला दिया

आंसू समझ के क्यूँ मुझे आँख से तुमने गिरा दिया
आंसू समझ के क्यूँ मुझे

नगमा हूँ कब मगर मुझे अपने पे कोई नाज़ था
नगमा हूँ कब मगर मुझे अपने पे कोई नाज़ था
गाया गया हूँ जिस पे मैं टूटा हुआ वो साज़ था
जिस ने सुना वो हंस दिया, हंस के मुझे रुला दिया

आंसू समझ के क्यूँ मुझे आँख से तुमने गिरा दिया
आंसू समझ के क्यूँ मुझे

मेरी खता मुआफ मैं भूले से आ गया यहाँ
मेरी खता मुआफ मैं भूले से आ गया यहाँ
वरना मुझे भी है खबर मेरा नहीं है ये जहाँ
डूब चला था नींद में अच्छा किया जगा दिया

आंसू समझ के क्यूँ मुझे आँख से तुमने गिरा दिया
आंसू समझ के क्यूँ मुझे
............................
Ansoo samajh ke kyun mujhe-Chhaya 1961
 
 
www.lyrics2nd.blogspot.com