फिर आ गया सन १९७२. क्या किया जाए, उस वर्ष बहुत से मधुर गीत
जो बने थे. एक और सुन लेते हैं. बहुत दिन से ओ. पी. नैयर के संगीत
वाले गीत नहीं सुने हैं. आज आपके लिए लिया है फिल्म 'एक बार मुस्कुरा
दो' से एक गीत. फिल्म के सभी गीत काफी दफे सुने गए हैं और ये नैयर
के सबसे सफल एल्बम में गिना जाता है. नैयर की खूबी थी कि वे एक
फिल्म के लिए धुनें बनाते तो ऐसी बनाते कि श्रोता सभी गीतों को सुने.
इस चक्कर में कभी कभी एक ही फिल्म के गीत सगे भाई बहनों जैसे
सुनाई देते जैसे कि उनकी एक हिट फिल्म फागुन के गीत हैं. काम चलाऊ
धुनें उनकी फिल्मों में ने के बराबर मिलेगी आपको. उनका गाने/हिट का
अनुपात कई समकालीनों से बेहतर है.
प्रस्तुत गीत कि विशेषता ये है कि ये मुकेश कि आवाज़ में है. मुकेश से
नय्यर ने बहुत कम गीत गवाए. रफ़ी के बाद उनकी पसंद महेंद्र कपूर रहे.
प्रस्तुत गीत में मुकेश के साथ आशा भोंसले की आवाज़ है जो नय्यर खेमे
कि प्रमुख गायिका रहीं.
फिल्म के नायक हैं देव मुखर्जी और नायिका हैं तनुजा. दोनों में से शायद
तनुजा बेहतर अभिनय कर लेती हैं. गीत किस्मत फिल्म के गीत की
याद ज़रूर ही दिलाएगा जिसमें संगीत नैयर का ही है. नायक महिला के
वेश में और नायिका पुरुष भेस में. गीत शमसुल हुदा बिहारी का लिखा
हुआ है.
गीत के बोल:
ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
आ आ आ आ, आ आ, आ आ आ आ
ये दिल ले कर नज़राना आ गया तेरा दीवाना
ये दिल ले कर नज़राना आ गया तेरा दीवाना
दिलबर जानी न देना दिल तोड़ तोड़ तोड़
दिलबर जानी न देना दिल तोड़ तोड़ तोड़
ये प्यार है गहरा सागर है डूब के तुझको जाना
ये प्यार है गहरा सागर है डूब के तुझको जाना
दिलबर जानी जा जा रे पल्ला छोड़ छोड़ छोड़
दिलबर जानी जा जा रे पल्ला छोड़ छोड़ छोड़
ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
नस-नस में है बिजली कहीं जल ना जाना
कहीं जल ना जाना, जल ना जाना
सोच समझकर हमसे ज़रा दिल टकराना
ज़रा दिल टकराना, दिल टकराना
राह प्यार की बड़ी कठिन है कहाँ चला मर जाने, ओ
दिलबर जानी जा जा रे पल्ला छोड़ छोड़ छोड़
दिलबर जानी जा जा रे पल्ला छोड़ छोड़ छोड़
ये दिल ले कर नज़राना आ गया तेरा दीवाना
दिलबर जानी न देना दिल तोड़ तोड़ तोड़
दिलबर जानी न देना दिल तोड़ तोड़ तोड़
ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
टूट पड़े ये बिजली तो क़िस्मत चमके
अरे क़िस्मत चमके, क़िस्मत चमके
आग में तप कर सोना और भी दमके
अरे और भी दमके, और भी दमके
हार-जीत की बात प्यार में चली किसे समझाने
ओ दिलबर जानी न देना दिल तोड़ तोड़ तोड़
दिलबर जानी न देना दिल तोड़ तोड़ तोड़
ये प्यार है गहरा सागर है डूब के तुझको जाना
दिलबर जानी जा जा रे पल्ला छोड़ छोड़ छोड़
दिलबर जानी जा जा रे पल्ला छोड़ छोड़ छोड़
.................................
Ye dil le ke nazrana-Ek baar muskura do 1972
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Tuesday, 19 July 2011
Saturday, 16 July 2011
रोज़ शाम आती थी-इम्तिहान १९७४
अभिनेत्री नूतन और तनूजा का कैरियर साठ के और सत्तर के दशक में
साथ साथ चला. नूतन ने तो जल्दी ही अपना ऊंचा मुकाम हासिल कर
लिया फिल्म जगत में मगर तनूजा को काफी संघर्ष के बावजूद, (यहाँ
संघर्ष का तात्पर्य अभिनय कला से हैं न कि फ़िल्में पाने के लिए संघर्ष
से) वो स्थान नहीं मिल पाया की उनकी किसी एक फिल्म को दर्शक
याद करें. प्रस्तुत गीत लिया गया है फिल्म इम्तिहान से जो सन १९७४
की फिल्म है. मजरूह के आकर्षक बोलों को स्वर दिया है लता मंगेशकर
ने. फिल्म में संगीत है लक्ष्मीकांत प्यारेलाल का. इस गीत में विनोद खन्ना
ने बेहतर अभिनय किया है. नायिका के कपडे कुछ अजीब से लगेंगे आपको
सन ७० के आस पास और बाद में कुछ एक फ़िल्में ऐसी आयीं जिनमें
नायकों और नायिकाओं की पोशाकें कुतूहल का विषय हुआ करती थीं.
गीत में कैमरे के साथ एक फ़िल्टर लगाया गया है जिससे सुनहरी धूप वाले
समय को भी शाम बना दिया गया है. ये करिश्मा पकड़ में आ जाता है
गीत के बीच में, जहाँ आधी धूप आधी छांव वाली कहानी दिखाई देती है.
ये होता है अन्तर शुरू होते समय. ऐसे कारनामे विडियो का मज़ा किरकिरा
कर देते हैं.
गीत के बोल:
ला ला ला ला ला ला ला ला ला
रोज़ शाम आती थी मगर ऐसी न थी
रोज़ रोज़ घटा छाती थी मगर ऐसी न थी
रोज़ शाम आती थी मगर ऐसी न थी
रोज़ रोज़ घटा छाती थी मगर ऐसी न थी
ये आज मेरी ज़िन्दगी में कौन आ गया
रोज़ शाम आती थी मगर ऐसी न थी
रोज़ रोज़ घटा छाती थी मगर ऐसी न थी
डाली में ये किसका हाथ करे इशारे बुलाए मुझे
झूमती चंचल हवा छूके तन गुदगुदाए मुझे
हौले हौले धीरे धीरे कोई गीत मुझको सुनाए
प्रीत मन में जगाए
खुली आँख सपने दिखाए
दिखाए दिखाए दिखाए
खुली आँख सपने दिखाए
ये आज मेरी ज़िन्दगी में कौन आ गया
रोज़ शाम आती थी मगर ऐसी न थी
रोज़ रोज़ घटा छाती थी मगर ऐसी न थी
अरमानों का रंग है जहाँ पलकें उठाती हूँ मैं
हँस हँस के है देखती जो भी मूरत बनाती हूँ मैं
जैसे कोई मोहे छेड़े दिल खो और भी जाती हूँ मैं
जगमगाती हूँ मैं
दीवानी हुई जाती हूँ मैं
दीवानी दीवानी दीवानी
दीवानी हुई जाती हूँ मैं
ये आज मेरी ज़िन्दगी में कौन आ गया
रोज़ शाम आती थी मगर ऐसी न थी
रोज़ रोज़ घटा छाती थी मगर ऐसी न थी
....................................
Roz shaam aati thi-Imtihaan 1974
साथ साथ चला. नूतन ने तो जल्दी ही अपना ऊंचा मुकाम हासिल कर
लिया फिल्म जगत में मगर तनूजा को काफी संघर्ष के बावजूद, (यहाँ
संघर्ष का तात्पर्य अभिनय कला से हैं न कि फ़िल्में पाने के लिए संघर्ष
से) वो स्थान नहीं मिल पाया की उनकी किसी एक फिल्म को दर्शक
याद करें. प्रस्तुत गीत लिया गया है फिल्म इम्तिहान से जो सन १९७४
की फिल्म है. मजरूह के आकर्षक बोलों को स्वर दिया है लता मंगेशकर
ने. फिल्म में संगीत है लक्ष्मीकांत प्यारेलाल का. इस गीत में विनोद खन्ना
ने बेहतर अभिनय किया है. नायिका के कपडे कुछ अजीब से लगेंगे आपको
सन ७० के आस पास और बाद में कुछ एक फ़िल्में ऐसी आयीं जिनमें
नायकों और नायिकाओं की पोशाकें कुतूहल का विषय हुआ करती थीं.
गीत में कैमरे के साथ एक फ़िल्टर लगाया गया है जिससे सुनहरी धूप वाले
समय को भी शाम बना दिया गया है. ये करिश्मा पकड़ में आ जाता है
गीत के बीच में, जहाँ आधी धूप आधी छांव वाली कहानी दिखाई देती है.
ये होता है अन्तर शुरू होते समय. ऐसे कारनामे विडियो का मज़ा किरकिरा
कर देते हैं.
गीत के बोल:
ला ला ला ला ला ला ला ला ला
रोज़ शाम आती थी मगर ऐसी न थी
रोज़ रोज़ घटा छाती थी मगर ऐसी न थी
रोज़ शाम आती थी मगर ऐसी न थी
रोज़ रोज़ घटा छाती थी मगर ऐसी न थी
ये आज मेरी ज़िन्दगी में कौन आ गया
रोज़ शाम आती थी मगर ऐसी न थी
रोज़ रोज़ घटा छाती थी मगर ऐसी न थी
डाली में ये किसका हाथ करे इशारे बुलाए मुझे
झूमती चंचल हवा छूके तन गुदगुदाए मुझे
हौले हौले धीरे धीरे कोई गीत मुझको सुनाए
प्रीत मन में जगाए
खुली आँख सपने दिखाए
दिखाए दिखाए दिखाए
खुली आँख सपने दिखाए
ये आज मेरी ज़िन्दगी में कौन आ गया
रोज़ शाम आती थी मगर ऐसी न थी
रोज़ रोज़ घटा छाती थी मगर ऐसी न थी
अरमानों का रंग है जहाँ पलकें उठाती हूँ मैं
हँस हँस के है देखती जो भी मूरत बनाती हूँ मैं
जैसे कोई मोहे छेड़े दिल खो और भी जाती हूँ मैं
जगमगाती हूँ मैं
दीवानी हुई जाती हूँ मैं
दीवानी दीवानी दीवानी
दीवानी हुई जाती हूँ मैं
ये आज मेरी ज़िन्दगी में कौन आ गया
रोज़ शाम आती थी मगर ऐसी न थी
रोज़ रोज़ घटा छाती थी मगर ऐसी न थी
....................................
Roz shaam aati thi-Imtihaan 1974
Wednesday, 13 July 2011
काहे को बुलाया मुझे बालमा-हमशक्ल १९७४
जैसे मोगली सीरियल के शीर्षक गीत "चड्डी पहन के फूल खिला है"
पसंद आने की कोई विशेष वजह नहीं है वैसे ही प्रस्तुत गीत के पसंद
आने के पीछे भी कोई ख़ास कारण नहीं है। इसको सुनते सुनते कान
पक गये हैं। आकर्षक धुन एकमात्र जायज़ वजह हो सकती है इस गीत
को इतनी बार सुन लिया है कि याद नहीं। इसकी शुरूआती "हाय हाय"
और "जा तोसे बोलूं ना, घूँघट खोलूं ना" बोल दिमाग में बैठ से गये हैं।
ये आकर्षक युगल गीत है राजेश खन्ना के डबल डोज़ वाली अर्थात डबल रोल
वाली फिल्म हमशकल से। इसका एक गीत आपको सुनवा चुके हैं पहले
जिसमें मौसमी चटर्जी थीं राजेश खन्ना के साथ और 'झूम ना झूम ना'
कर रही थीं।
गीत के बोल:
हाय हाय
काहे को बुलाया
काहे को बुलाया मुझे बालमा प्यार में नाम से
प्यार के नाम से
काहे को बुलाया मुझे बालमा प्यार में नाम से
प्यार के नाम से
राधा ने यही पूछा था एक दिन रूठ कर श्याम से
रूठ कर श्याम से
जा तोसे बोलूँ ना घूँघटा खोलूँ ना डोलूँ ना मैं संग तेरे
जा तोसे बोलूँ ना घूँघटा खोलूँ ना डोलूँ ना मैं संग तेरे
रोज़ जो तुम रूठोगी ऐसे गुज़रेंगे दिन मेरे कैसे
जीने नहीं देगा मुझे चार दिन प्यार आराम से
प्यार आराम से
काहे को बुलाया मुझे बालमा प्यार में नाम से
प्यार के नाम से
काली घटाओं में, ठंडी हवाओं में, आओ कहें हाल दिल का
काली घटाओं में, ठंडी हवाओं में, आओ कहें हाल दिल का
ओ, प्यार में दिन तो ढल जाता है, रात का जादू चल जाता है
जिया लगता है धड़कने पिया, आजकल शाम से
आजकल शाम से
राधा ने यही पूछा था एक दिन रूठ कर श्याम से
रूठ कर श्याम से
तौबा मैं क्या करूँ
तौबा मैं क्या करूँ बदनामी से डरूँ
मोहे बड़ी लाज आए
हमने कोई की है चोरी, प्यार किया है हमने गोरी
लोगों से जो हम ऐसे डरने लगे तो गए काम से
तो गए काम से
काहे को बुलाया मुझे बालमा प्यार में नाम से
प्यार के नाम से
राधा ने यही पूछा था एक दिन रूठ कर श्याम से
रूठ कर श्याम से
...................................
Kaahe ko bulaya-Humshakal 1974
पसंद आने की कोई विशेष वजह नहीं है वैसे ही प्रस्तुत गीत के पसंद
आने के पीछे भी कोई ख़ास कारण नहीं है। इसको सुनते सुनते कान
पक गये हैं। आकर्षक धुन एकमात्र जायज़ वजह हो सकती है इस गीत
को इतनी बार सुन लिया है कि याद नहीं। इसकी शुरूआती "हाय हाय"
और "जा तोसे बोलूं ना, घूँघट खोलूं ना" बोल दिमाग में बैठ से गये हैं।
ये आकर्षक युगल गीत है राजेश खन्ना के डबल डोज़ वाली अर्थात डबल रोल
वाली फिल्म हमशकल से। इसका एक गीत आपको सुनवा चुके हैं पहले
जिसमें मौसमी चटर्जी थीं राजेश खन्ना के साथ और 'झूम ना झूम ना'
कर रही थीं।
गीत के बोल:
हाय हाय
काहे को बुलाया
काहे को बुलाया मुझे बालमा प्यार में नाम से
प्यार के नाम से
काहे को बुलाया मुझे बालमा प्यार में नाम से
प्यार के नाम से
राधा ने यही पूछा था एक दिन रूठ कर श्याम से
रूठ कर श्याम से
जा तोसे बोलूँ ना घूँघटा खोलूँ ना डोलूँ ना मैं संग तेरे
जा तोसे बोलूँ ना घूँघटा खोलूँ ना डोलूँ ना मैं संग तेरे
रोज़ जो तुम रूठोगी ऐसे गुज़रेंगे दिन मेरे कैसे
जीने नहीं देगा मुझे चार दिन प्यार आराम से
प्यार आराम से
काहे को बुलाया मुझे बालमा प्यार में नाम से
प्यार के नाम से
काली घटाओं में, ठंडी हवाओं में, आओ कहें हाल दिल का
काली घटाओं में, ठंडी हवाओं में, आओ कहें हाल दिल का
ओ, प्यार में दिन तो ढल जाता है, रात का जादू चल जाता है
जिया लगता है धड़कने पिया, आजकल शाम से
आजकल शाम से
राधा ने यही पूछा था एक दिन रूठ कर श्याम से
रूठ कर श्याम से
तौबा मैं क्या करूँ
तौबा मैं क्या करूँ बदनामी से डरूँ
मोहे बड़ी लाज आए
हमने कोई की है चोरी, प्यार किया है हमने गोरी
लोगों से जो हम ऐसे डरने लगे तो गए काम से
तो गए काम से
काहे को बुलाया मुझे बालमा प्यार में नाम से
प्यार के नाम से
राधा ने यही पूछा था एक दिन रूठ कर श्याम से
रूठ कर श्याम से
...................................
Kaahe ko bulaya-Humshakal 1974
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