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Friday, 16 December 2011

यहाँ कोई नहीं तेरा मेरे सिवा -दिल एक मंदिर १९६३

अरसे बाद एक मित्र से मुलाक़ात हुई एक हॉस्पिटल में । बहुत दिनों
बाद मिले तो वे कुछ भावुक और कुछ हॉस्पिटेबल से हो उठे। उनका
हॉस्पिटल में हॉस्पिटेबल होना कुछ अनूठा सा लगा। अस्पताल के कैंटीन
में वे चाय और समोसे के लिए आग्रह करने लगे। ज्ञात हो वे अपनी तरफ
से आग्रह वैसे भी कम किया करते थे और हम लोगों से आग्रह की अपेक्षा
रखने वालों में से एक थे। ये उन दिनों की बात है जब हम लोग एक शैक्षणिक
संस्था में कुछ क्षण के लिए ज्ञान के छींटे और अनुभव बटोरने जाया करते थे।
हमने भी कुछ पुराने ज़माने का उधार वसूलने वाले अंदाज़ में ४ समोसे डकार
लिए जो सामान्य व्यक्ति और बीमार दोनों के लिए समान रूप से उपयुक्त लगते
थे स्वाद में। बस, ताज़े बने हुए थे इसलिए हम उसे पूड़ी-सब्जी वाले अंदाज़ में
खा गए। उसके बाद हैं थोड़ी सी शर्म अवश्य आई इस बात को ले कर कि अस्पताल
में हम मरीज़ के हाल-चाल जानने के बजाये पेट भरने का कार्य कर रहे हैं। शायद
ये भाव जो मन में उपजा वह हमारे मित्र कि अंतरात्मा से निकले स्वर की वजह से
हुआ हो:अरे यार ऐसे ठूंस रहे हो जैसे जन्म जन्मांतर से भूखे हो। उनके चेहरे पर
समोसे खाने की प्रक्रिया के बाद हॉस्पिटलिटी वाले भाव नदारद थे और जो भाव थे
उनको देख के हमारे मन में “पिटी” वाले भाव उभारना शुरू हो गए।

हुआ यूँ वे अपने किसी बीमार मित्र को देखने वहां आये हुए थे । बीमार शब्द से याद
आया–बीमा+मार । हर एक को बीमा अवश्य करवा लेना चाहिए। कम से कम वो
बीमारी की मार(इलाज़ का खर्चा)से तो कुछ हद तक बचेगा।

आइये आपको अस्पताल की पृष्ठभूमि पर बना एक गीत सुनवाते हैं। इस गीत में भी
आपको अस्पताल के कुछ हिस्से दिखलाई दे जायेंगे। नायक एक्स रे की फिल्म देखते
देखते अतीत की सुनहरी यादों में खो खो जाता है। फिल्म की कहानी अस्पताल में
घूमती है। अभी तो फिल्म के नायक नायिका खुशनुमा से गीत में खुश दिखायी दे रहे
हैं। आगे आने वाले गीतों में हम चर्चा करेंगे फ़िल्मी अस्पताल के बारे में।

गीत है फिल्म दिल एक मंदिर से जिसमें राजेंद्र कुमार और मीना कुमारी एक रोमांटिक
गीत में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं जिसे लिखा है हसरत जयपुरी ने और इसकी
धुन बनाई है शंकर जयकिशन ने।




गीत के बोल:

यहाँ कोई नहीं तेरा मेरे सिवा
कहती है झूमती गाती हवा
तुम सबको छोड़ कर आ जाओ, आ जाओ, आ जाओ
तुम सबको छोड़ कर आ जाओ, आ जाओ, आ जाओ

बादल भी बन के पानी एक दिन तो बरसता है
लोहा भी जल के आग में एक दिन तो पिघलता है
जिस दिल में हो मोहब्बत एक दिन तो तडपता है

यहाँ कोई नहीं तेरा मेरे सिवा
कहती है झूमती गाती हवा
तुम सबको छोड़ कर आ जाओ, आ जाओ, आ जाओ
तुम सबको छोड़ कर आ जाओ, आ जाओ, आ जाओ

तेरे मन की उलझनें सुलझाना चाहता हूँ
तुझे आज से अपनी मैं बनाना चाहता हूँ
मन के सुनहरे मंदिर में बिठाना चाहता हूँ

यहाँ कोई नहीं तेरा मेरे सिवा
कहती है झूमती गाती हवा
तुम सबको छोड़ कर आ जाओ, आ जाओ, आ जाओ
तुम सबको छोड़ कर आ जाओ, आ जाओ, आ जाओ
...........................................
Yahan koi nahin tera mere siwa-Dil ek mandir 1963

Saturday, 3 September 2011

क्यों झुकी-झुकी हैं पलकें-छैला बाबू १९६७

फिल्म छैला बाबू से एक मधुर गीत आपको सुनवाया था पहले। अब सुनवाते हैं
एक मधुर युगल गीत जिसमें नायक नायिका की झुकी हुई पलकों के बारे में
प्रश्न कर रहा है। इन्टरनेट की दुनिया जानकारियों के खजाने से भरी पड़ी है। कई
श्रोता और दर्शक ऐसे भी मिलेंगे आपको जिनके पास दुर्लभ जानकारी होती है। ये
बात और है कि इन दुर्लभ जानकारियों को जगह जगह से इकठ्ठा कर के कुछ चंपुओं
ने सारा श्रेय लेने के लिए कुछ वेबसाइट बना मारी हैं जिन्हें देख के ऐसा लगता है
मानो उन्होंने पैदा होते साथ ही पी एच डी कर मारी हो. इनमें से अधिकतर चंपुओं
की साईट आंग्ल भाषा में है।

गीत और फिल्म के बारे में चर्चा कि जाए। यू ट्यूब पर गीत के नीचे दो कमेन्ट लिखे
हैं जिनसे ये पता चलता है कि इस फिल्म के नायक वही हैं-सलीम जावेद की जोड़ी वाले
सलीम. गौरतलब है पिछले गीत में फिल्म के दुसरे नायक थे-सुबिराज। इस गीत में
सलीम के साथ नायिका हैं जेब रहमान। फिल्म के निर्माता नवसारी निवासी हैं और वहां
के एक सिनेमा के मालिक हैं जैसा कि एक कमेन्ट में उल्लेख है। जहाँगीर टॉकीज़ या
भारत सिनेमा बनवाया था नौशेरवां बारिया ने। सन १९५६ में फिल्म गणेश महिमा से
इसका व्यवसाय शुरू हुआ। जैसा कि विकी के लिंक पर कांतिभाई ने उल्लेख किया है-
गायक मोहम्मद रफ़ी ने इसके स्टेज पर एक लाइव शो भी किया सन १९५७ में जिसमें
उन्होंने प्यासा फिल्म जो कि उस समय रिलीज़ नहीं हुई थी, का एक गीत गा कर वहां
के श्रोताओं को अचंभित किया था। इस सिनेमा को बरसों तक रूसी और नवल नामक
दो भाइयों ने चलाया।

नेट पर उपलब्ध जानकारियों में फिल्म के निर्माता की जगह लिखा मिलेगा-आर. एच.
मुल्लन प्रोडक्शंस । अब ये आप खोजिये कि इस फिल्म का असली निर्माता कौन है ?

एक दिलचस्प बात और बताते चलें आपको. फिल्म के निर्देशक के. परवेज़ हैं जिन्होंने
अपना नाम बाद में कल्पतरु रख लिया और कई परिवारिक फ़िल्में बनाई ८० के दशक
में. उनकी अधिकांश फिल्मों में आपको लक्ष्मी प्यारे का संगीत मिलेगा.




गीत के बोल:

क्यों झुकी-झुकी हैं पलकें
क्यों झुकी-झुकी हैं पलकें मेरी जाँ ये बात क्या है
क्यों झुकी-झुकी हैं पलकें मेरी जाँ ये बात क्या है
मेरे दिल मैं कैसे कह दूँ मुझे प्यार हो गया है
क्यों झुकी-झुकी हैं पलकें

ये घटा भी आज हम पर मोती लुटा रही है
हमें देख कर कली भी सर को झुका रही है
मेरे दिल की बात सुनने ये हवा भी आ रही है
ये गगन भी देखता है देखे तो हर्ज क्या है

क्यों झुकी-झुकी हैं पलकें मेरी जाँ ये बात क्या है
मेरे दिल मैं कैसे कह दूँ मुझे प्यार हो गया है
क्यों झुकी-झुकी हैं पलकें

ये शरम न हमसे कीजे हम भी तो हैं तुम्हारे
किरनों से माँग भर दें कर दो अगर इशारे
दिल गा रहा है नग़मा बस में नहीं हमारे
मौसम भी झूमता है झूमें तो हर्ज क्या है
मेरे दिल मैं कैसे कह दूँ मुझे प्यार हो गया है

क्यों झुकी-झुकी हैं पलकें मेरी जाँ ये बात क्या है
मेरे दिल मैं कैसे कह दूँ मुझे प्यार हो गया है
क्यों झुकी-झुकी हैं पलकें
........................................
Kyun jhuki jhuki hai palken-Chhaila Babu 1967

Saturday, 13 August 2011

बहारों की बारात आ गई-यकीन १९६९

फिल्म यकीन से एक गाना तो झट जुबान पे आ जाता है वो है फिल्म

का शीर्षक गीत। इतना भी याद आता है कि इस फिल्म में धर्मेन्द्र और

शर्मिला टैगोर हैं। इनकी जोड़ी भी कुछ ही फिल्मों में देखी होगी आपने।

३ फ़िल्में तो मुझे याद आती है-अनुपमा, चुपके चुपके और देवर। देवर

में थोड़ा अलग सा किस्सा था।



हिंदी फिल्म के नायक/हीरो अगर सामान्य पृठभूमि वाले होंगे तो भी उनके

पास गज़ब का सामान होता है। इस फिल्म के हीरो के पास एक शानदार

कार है। अब कार शानदार हो या ना हो, इससे विशेष फर्क नहीं पढता जब

नायिका ज्यादा आकर्षण का केंद्र हो बनिस्बत फिल्म में दिख रहे बाकी के

सामानों के। अब आप ये मत पूछ लीजियेगा कि गाने कि शुरुआत में नायिका

काली साडी पहने हुए है और नायक की कार के शीशे में वो सफ़ेद साडी पहने

दिखाई देती है.



एक बात ज़रूर कार चलने वालों से कहना चाहूँगा-अगर इतना स्टीयरिंग आप

गलती से भी न घुमाएँ किसी पुल पर चलते समय, अन्यथा आपके गाने के

अंतरे नाले या नदी में सुनाई देंगे. या तो फ़िल्मी कार का स्टीयरिंग खराब है,

या फिर उसमें विशेष प्रावधान किया हुआ है, या फिर कार एक जगह पर खड़ी

है और पुल पीछे सरक रहा है.



एक बात में तो सामान्य जीवन और फिल्म कम से कम एक सरीखी

लगते हैं-कार का टायर पंचर होना। गौरतलब है कि टायर पंचर होने

के बाद बदलने वाली कसरत में जिसको पसीना कम निकलता हो वो

भी पसीने से लथ-पथ हो जाता है, उस स्तिथि में नायक का उसी जोश

के साथ गीत गाना और मुस्कुराना अतिश्योक्ति सी लगती है। खैर गीत

सुनिए जो हसरत जयपुरी का लिखा हुआ है और इसकी धुन बनाई है

शंकर जयकिशन ने। मोहम्मद रफी ने इसे गाया है जो कि धर्मेन्द्र के

पसंदीदा गायक रहे हैं।







गीत के बोल:





बहारों की बारात आ गई

ख़ुशी को ले के साथ आ गई

सुनो तो मेरे दिल सुनो तो मेरी जान

होठों पे दिल कि बात आ गई



बहारों की बारात आ गई

ख़ुशी को ले के साथ आ गई

सुनो तो मेरे दिल सुनो तो मेरी जान

होठों पे दिल की बात आ गई



बहारों की बारात



मुझसे देखो ना शरमाना तुम

मेरी बाहों में खो जाना तुम

मुझसे देखो ना शरमाना तुम

मेरी बाहों में खो जाना तुम

इंतजारी की हद हो चुकी

और ज्यादा ना तरसना तुम

और ज्यादा ना तरसना तुम



बहारों की बारात आ गई

ख़ुशी को ले के साथ आ गई

सुनो तो मेरे दिल सुनो तो मेरी जान

होठों पे दिल की बात आ गई



बहारों की बारात



आज छेड़ी हवाओं ने भी

प्यार की मस्त शहनाईयां

आज छेड़ी हवाओं ने भी

प्यार की मस्त शहनाईयां

वादियाँ बन गयीं हैं दुल्हन

जैसे उनकी हों परछाईयाँ

जैसे उनकी हों परछाईयाँ



बहारों की बारात आ गई

ख़ुशी को ले के साथ आ गई

सुनो तो मेरे दिल सुनो तो मेरी जान

होठों पे दिल की बात आ गई



बहारों की बारात

.................................

Baharon ki baraat-Yakeen 1969

Wednesday, 3 August 2011

सुनते थे नाम हम-आह १९५३

सन १९५३ की फिल्म आह के लिए शंकर जयकिशन ने
एक से बढ़कर एक धुनें बनायीं। फिल्म का दर्द भरा गीत
हो या मस्ती भरा, हर गीत सुनने में अच्छा लगता है।
फिल्म से एक थोडा तेज गति वाला गीत सुनवाते हैं
लता मंगेशकर की आवाज़ में। गीत फिल्माया गया है
विजय लक्ष्मी पर जो एक पार्टी में ये गीत गा रही हैं।






गीत के बोल:



सुनते थे नाम हम जिन का बहार से
देखा तो डोला जिया झूम झूम के
सुनते थे नाम हम जिन का बहार से
देखा तो डोला जिया झूम झूम के

छुपते रहे जो मेरी नज़र से
दिल बोले मेरा तुम ही तो हो
आँखों से रंग मेरे दिल के उमंग पे
डाला तो डोला जिया झूम झूम के

सुनते थे नाम हम जिन का बहार से
देखा तो डोला जिया झूम झूम के

ठुकरा चुके थे जिन की मुहब्बत
क्यों उन पे दीवाने हुए
तड़पा के प्यार ने जब हम को प्यार से
छेड़ा तो बोला जिया झूम झूम के

सुनते थे नाम हम जिन का बहार से
देखा तो डोला जिया झूम झूम के

पहले कहीं ये दिल न झुका था
क्या जानूँ अब क्या हो गया
जाओ न आज कल तुम हम को छोड़ के
अपना तो डोला जिया झूम झूम के

सुनते थे नाम हम जिन का बहार से
देखा तो डोला जिया झूम झूम के
...................................
Sunte the naam ham-Aah 1953

Tuesday, 2 August 2011

जाने न नज़र पहचाने जिगर-आह १९५३

भीगने के बाद कपडे उतार कर ड्रम में बैठ कर मधुर गीत कैसे गाया जाए
राज कपूर सिखा रहे हैं फिल्म आह के इस गीत में। उनके साथ नर्गिस की
जोड़ी है. लता और मुकेश की आवाज़ में ये सदाबहार युगल गीत सुनिए।
इसे भी हसरत जयपुरी ने लिखा है और धुन बनायीं है शंकर जयकिशन ने।
फिल्म बरसात के साथ १९४९ में शुरू हुयी शैलेन्द्र, हसरत, शंकर जयकिशन
की चौकड़ी की संगीतमय धमा-चौकड़ी ने काफी समय तक हिंदी फिल्म संगीत
जगत में अपना डंका बजाया ।




गीत के बोल:

जाने न नज़र पहचाने जिगर
ये कौन जो दिल पर छाया
मेरा अंग अंग मुस्काया
मेरा अंग अंग मुस्काया

आवाज़ ये किसकी आती है
जो छेड़ के दिल को जाती है
आवाज़ ये किसकी आती है
जो छेड़ के दिल को जाती है
मैं सुन के जिसे शर्मा जाऊँ
है कौन जो दिल में समाया
मेरा अंग अंग मुस्काया
मेरा अंग अंग मुस्काया

जाने न नज़र पहचाने जिगर
ये कौन जो दिल पर छाया
मुझे रोज़ रोज़ तड़पाया
मुझे रोज़ रोज़ तड़पाया

ढूँढेंगे उसे हम तारों में
सावन की ठण्डी बहारों में
ढूँढेंगे उसे हम तारों में
सावन की ठण्डी बहारों में
पर हम भी किसी से कम तो नहीं
क्यों रूप को अपने छुपाया
मुझे रोज़ रोज़ तड़पाया
मुझे रोज़ रोज़ तड़पाया

बिन देखे जिसको प्यार करूँ
गर देखूँ उस को जान भी दूँ
बिन देखे जिसको प्यार करूँ
गर देखूँ उस को जान भी दूँ
एक बार कहो ओ जादूगर
ये कौन सा खेल रचाया
मेरा अंग अंग मुस्काया
मेरा अंग अंग मुस्काया
..................................
Jaane na nazar-Aah 1953

बिछड़े हुए परदेसी-बरसात १९४९

परदेसी हिट्स में सबसे पुराना हिट गीत कह सकती है आज की पीढ़ी
इसे। वैसे इससे पहले भी हिंदी फिल्मों में परदेसी गीत(जिनमें परदेसी
शब्द का प्रयोग हुआ है) बने हैं। इस गीत ने सफलता के नए कीर्तिमान
रचे। लता मंगेशकर की आवाज़ है, नर्गिस का अभिनय है, हसरत जयपुरी
के बोल और शंकर जयकिशन का संगीत है।




गीत के बोल:

बिछड़े हुए परदेसी
बिछड़े हुए परदेसी इक बार तो आना तू
जब आँख मिलाई है नज़रें न चुराना तू
बिछड़े हुए परदेसी

वादे भी किए तूने खाई थी क़सम मेरी
वादे भी किए तूने खाई थी क़सम मेरी
वादों पे ही जीती हूँ है आस मुझे तेरी
वादों पे ही जीती हूँ है आस मुझे तेरी
इतनी है अरज मेरी
इतनी है अरज मेरी मुझको न भुलाना तू
जब आँख मिलाई है नज़रें न चुराना तू

बिछड़े हुए परदेसी

दुनिया मुझे छीने है सबने मुझे घेरा है
दुनिया मुझे छीने है सबने मुझे घेरा है
और मेरी ज़ुबाँ पर तो बस नाम ही तेरा है
और मेरी ज़ुबाँ पर तो बस नाम ही तेरा है
दुनिया न हँसे मुझ पर
दुनिया न हँसे मुझ परइतना न रुलाना तू
जब आँख मिलाई है नज़रें न चुराना तू

बिछड़े हुए परदेसी

गैरों का न हो जाना जब अपना बनाया है
गैरों का न हो जाना जब अपना बनाया है
पास आ के न खो जाना जब दिल में बसाया है
पास आ के न खो जाना जब दिल में बसाया है
जो बात कही तूने
जो बात कही तूने वो बात निभाना तू
जब आँख मिलाई है नज़रें न चुराना तू

बिछड़े हुए परदेसी
........................................
Bichhde hue pardesi-Barsaat 1949

Thursday, 28 July 2011

इब्तिदा-ए-इश्क में हम -हरियाली और रास्ता १९६२

आज फरियाली का नाश्ता करते हुए एक फिल्म का नाम याद आया
हरियाली और रास्ता. फिल्म सन १९६२ की है जनाब. गीत एक युगल
गीत है लता और मुकेश की आवाजों में. गीत हलके फुल्के मूड वाला
है जिसे अपनी अपनी फ्री इस्टाइल में गाया जा रहा है परदे पर. फैशनेबल
स्वेटर के साथ सरकारी दफ्तर के चपरासी की टोपी का कुछ अजीब सा
कोम्बिनेशन लिए नायक बर्फीले पहाड़ों में कामगार मजदूर सरीखी दिख
रही नायिका के साथ गीत गा रहा है. बर्फीले इलाकों में ऐसी टोपी पहने
शायद ही आप किसी को देखें. अब शायद आप समझ गए होंगे कि फिल्म
जगत में इस जुमले का प्रयोग ज्यादा क्यूँ होता है-"अलग हट के"
नायक नायिका अति गदगद हैं उसकी क्या वज़ह है इसके लिए आपको एक
बार फिल्म अवश्य देखना पड़ेगी.

गीत लिखा है हसरत जयपुरइ ने और इसकी धुन बनायीं है शंकर जयकिशन
ने. फिल्म के सबसे लोकप्रिय गीतों में इसकी गिनती होती है.





गीत के बोल:

इब्तिदा-ए-इश्क़ में हम सारी रात जागे
अल्ला जाने क्या होगा आगे
मौला जाने क्या होगा आगे
दिल में तेरी उलफ़त के बंधने लगे धागे,
अल्ला जाने क्या होगा आगे
मौला जाने क्या होगा आगे

क्या कहूँ कुछ कहाँ नहीं जाए
बिन कहे भी रहा नहीं जाए
रात-रात भर करवट मैं बदलूँ
दर्द दिल का सहा नहीं जाए
नींद मेरी आँखों से दूर-दूर भागे,
अल्ला जाने क्या होगा आगे
मौला जाने क्या होगा आगे

दिल में जागी प्रीत की ज्वाला
जबसे मैंने होश सम्भाला
मैं हूँ तेरे प्यार की सीमा
तू मेरा राही मतवाला
मेरे मन की बीना में तेरे राग जागे,
अल्ला जाने क्या होगा आगे
मौला जाने क्या होगा आगे

तूने जब से आँख मिलाई
दिल से इक आवाज़ ये आई
चल के अब तारों में रहेंगे
प्यार के हम तो हैं सौदाई
मुझको तेरी सूरत भी चाँद रात लागे,
अल्ला जाने क्या होगा आगे
मौला जाने क्या होगा आगे
....................................
Ibteda-e-ishq mein ham-Hariyali aur rasta 1962

Tuesday, 12 July 2011

ओ मेरा दिल ओ मेरी जाँ-आब-ए-हयात १९५५

सरदार मालिक के किसी भी गीत को सुने अरसा हो गया ।
१९५५ की फिल्म आब-ए-हयात से आज दूसरा गीत सुनवा
रहे हैं आपको। इस गीत के बोल लिखे हैं हसरत जयपुरी
ने और संगीत तैयार किया है सरदार मालिक ने। गीत को
स्मृति बिश्वास पर फिल्माया गया है। कोरस वाले गीत की
गीता दत्त प्रमुख गायिका हैं ।

स्मृति बिश्वास ने अपनी नृत्य प्रतिभा का खूब प्रदर्शन किया
है इस गीत में. एक अच्छा तेज़ गति वाला गीत है ये
मगर इसे प्रसिद्धि नहीं मिल पायी . पूरे २ घंटे की कसरत
के बाद इसके बोल लिखे जा सके हैं. उम्मीद है आपको ये ज़रूर
पसंद आएगा. अगर पसंद आये तो अपना चटका अवश्य लगायें
बजाये Ctrl+C करके अपने नोटपैड पर Ctrl+V करने के.



गीत के बोल:

मेरा दिल आ हा हा
ओ मेरी जाँ ओ हो हो
ओ मेरा दिल ओ मेरी जाँ चाहे ले ले
चाहे ले ले
इक प्यार ज़रा सा दे दे
ओ इक प्यार ज़रा सा दे दे

ओ मेरा दिल ओ मेरी जाँ चाहे ले ले
चाहे ले ले
इक प्यार ज़रा सा दे दे
ओ इक प्यार ज़रा सा दे दे
ओ दे दे दे दे दे दे दे दे दे दे
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला

ये पहली पहली चाहत
ये बहकी बहकी हालत
ये पहली पहली चाहत
ये बहकी बहकी हालत
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
तू फूल है मैं हूँ रंगत
तू फूल है मैं हूँ रंगत
ये झूमी झूमी जन्नत
ये झूमी झूमी जन्नत
प्यार की, ये परी तेरे दर पे खड़ी
प्यार की, ये परी तेरे दर पे खड़ी
आ इधर आ हा हा
ओ जादूगर ओ हो हो
आ इधर ओ जादूगर मतवाले
ला इश्क़ की दुनिया दे दे
ओ ला इश्क़ की दुनिया दे दे

ओ मेरा दिल ओ मेरी जाँ चाहे ले ले
चाहे ले ले
इक प्यार ज़रा सा दे दे, दे दे
इक प्यार ज़रा सा दे दे
ओ दे दे दे दे दे दे दे दे दे दे
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला

अनमोल खुशी की लड़ियाँ
मुश्किल से मिले ये घड़ियाँ
अनमोल खुशी की लड़ियाँ
मुश्किल से मिले ये घड़ियाँ
दो रोज़ के ये अफ़साने
दो रोज़ के ये अफ़साने
कल क्या हो ख़ुदा ही जाने
कल क्या हो ख़ुदा ही जाने
महरबाँ नौजवां
महरबाँ नौजवां
ये समा फिर कहाँ
जान-ए-मन आ हा हा
मेरा बन ओ हो हो
जान-ए-मन मेरा बन अलबेले
अलबेले
तू झूम के हाँ तो कह दे
ओ तू झूम के हाँ तो कह दे

ओ मेरा दिल ओ मेरी जाँ चाहे ले ले
चाहे ले ले
इक प्यार ज़रा सा दे दे, दे दे
इक प्यार ज़रा सा दे दे
ओ दे दे दे दे दे दे दे
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला

ये रात का फ़ैला दामन
हर तारा दिल की धड़कन
ये रात का फ़ैला दामन
हर तारा दिल की धड़कन
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
ना ताज हुकूमत मांगूं
ना ताज हुकूमत मांगूं
मैं तुझसे मोहब्बत मांगूं
मैं तुझसे मोहब्बत मांगूं
चांदनी
रात है
चांदनी रात है
तू मेरे साथ है

ये जहाँ आ हा हा
है तेरा ओ हो हो
ये जहाँ है तेरा दिलवाले
दिलवाले
क़दमों में जगह ही दे दे
ओ क़दमों में जगह ही दे दे

ओ मेरा दिल ओ मेरी जाँ चाहे ले ले
चाहे ले ले
इक प्यार ज़रा सा दे दे, दे दे
इक प्यार ज़रा सा दे दे
ओ दे दे दे दे दे दे दे
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
...........................
O mera dil o meri jaan-Aab-e-Hayat 1955

Monday, 11 July 2011

आ जाओ तड़पते हैं अरमां-आवारा १९५१

लता मंगेशकर की आवाज़ में सुना जाये एक उच्च कोटि का दर्द भरा गीत.
ये लिया गया है फिल्म आवारा से. हसरत जयपुरी ने कई बढ़िया दर्द भरे
गीत भी लिखे हैं. ये उनकी लेखन शैली का एक शानदार नमूना है. उनकी
उपमाएं समकालीन गीतकारों के समान ही लेकिन थोड़ी अलग सी लगती हैं.
उदाहरण के लिए- चाँद के डोले में आई नज़र. प्रयोग करने में वे भी नहीं
चूके और हमें उस वजह से कुछ अनूठी चीज़ें सुनने को मिलीं

प्रस्तुत गीत नर्गिस के ऊपर फिल्माया गया है जिनकी भावाभिव्यक्ति लता के
गीतों पर आला दर्जे की रही हमेशा.

अभी हमने संगीत पक्ष की तो बात ही नहीं की है. इस हिट फिल्म का संगीत
तैयार किया है शंकर जयकिशन की जोड़ी ने. फिल्म के सभी गाने बेहद लोकप्रिय
हैं और सबसे ज्यादा लोकप्रिय गीत होने का सेहरा बंधा था मुकेश के गाये शीर्षक
गीत पर-“आवारा हूँ”.




गीत के बोल:

आ जाओ तड़पते हैं अरमां
आ जाओ तड़पते हैं अरमां
अब रात गुज़रने वाली है
अब रात गुज़रने वाली है
मै रोऊँ यहाँ, तुम चुप हो वहां
अब रात गुज़रने वाली है
अब रात गुज़रने वाली है

ओ, चाँद की रंगत उड़ने लगी
वो तारों के दिल अब डूब गये
डूब गये

है दर्द भरा बेचैन समां
अब रात गुज़रने वाली है
अब रात गुज़रने वाली है

इस चाँद के डोले में आई नज़र
इस चाँद के डोले में आई नज़र
यह रात की दुलहन चल दी किधर
चल दी किधर

आवाज़ तो दो, खोये हो कहाँ
अब रात गुज़रने वाली है
अब रात गुज़रने वाली है

घबरा के नज़र भी हार गई
घबरा के नज़र भी हार गई
तकदीर को भी नींद आने लगी
नींद आने लगी

तुम आते नहीं, मै जाऊं कहाँ
अब रात गुज़रने वाली है
अब रात गुज़रने वाली है
अब रात गुज़रने वाली है
अब रात गुज़रने वाली है
अब रात गुज़रने वाली है
........................................
Aa jao tadapte hain armaan-Awara 1951

ऐहसान तेरा होगा मुझ पर २-जंगली १९६१

लता की आवाज़ में ये गीत आप सुन चुके हैं अब सूना
जाए रफ़ी की आवाज़ में जो ज्यादा लोकप्रिय है. शम्मी कपूर
इसको परदे पर गा रहे हैं. वो जो अलसाया नशीलापन है जिनमें
ये पंक्तियाँ गई जा रही हैं- "रोने कहोगे रो लेंगे अब" , वो रफ़ी
की आवाज़ की एक विशेष खूबी है.



गीत के बोल:

ऐहसान तेरा होगा मुझ पर
दिल चाहता है वो कहने दो, मुझे
तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे
पलकों की छाँव में रहने दो

ऐहसान तेरा होगा मुझ पर
दिल चाहता है वो कहने दो, मुझे
तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे
पलकों की छाँव में रहने दो

ऐहसान तेरा होगा मुझ पर

तुमने मुझको हँसना सिखाया
तुमने मुझको हँसना सिखाया
रोने कहोगे रो लेंगे अब
आँसू का हमारे ग़म ना करो
वो बहते तो बहने दो, मुझे
तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे
पलकों की छाँव में रहने दो

ऐहसान तेरा होगा मुझ पर

चाहे बना दो चाहे मिटा दो
चाहे बना दो चाहे मिटा दो
मर भी गए तो देंगे दुआएँ
उड़-उड़ के कहेंगी खाक सनम
ये दर्द-ए-मुहब्बत सहने दो, मुझे
तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे
पलकों की छाँव में रहने दो

ऐहसान तेरा होगा मुझ पर
दिल चाहता है वो कहने दो, मुझे
तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे
पलकों की छाँव में रहने दो
..............................
Ehsan tera hoga mujh par 2-Junglee

Thursday, 30 June 2011

अब मेरा कौन सहारा-बरसात १९४९

नर्गिस और राजकपूर की जोड़ी की ये तीसरी फिल्म थी। इसमें
राज कपूर के साले साहब-प्रेमनाथ भी हैं उनके साथ। बरसात
फिल्म ने फिल्म सिनेमा को नए समीकरण दिखाए तो कुछ
समीकरण बदले भी। बदलते युगों के युग्म पर कुछ घटनाएँ
होती हैं कुछ वैसी ही यह फिल्म है जिसे हम ५० के दशक में
हिंदी सिनेमा में होने वाले बदलाव का बिगुल जैसा कह सकते हैं।
ऐसी उस दौर की कुछ और प्रतिनिधि फ़िल्में भी हैं जिनपर चर्चा
आगे उन फिल्मों के गीतों की प्रस्तुति के समय हम करेंगे ।

फ़िल्म बरसात से तीसरा गीत पेश है। नर्गिस के ऊपर फिल्माया
गया अधिक कर्णप्रिय गीत सन १९४९ से सुनने वालों को आनंद दे
रहा है। एक दर्द भरा गीत जिसका फिल्मांकन भी बढ़िया है आपको
अंत तक बांधे रखेगा । ऐसे गीतों में किसी रंग की आवश्यकता नहीं
होती, ये तो श्वेत श्याम में भी ऐसा कमाल दिखाते हैं कि देखने वाला
भूल जाता है कि वो श्वेत श्याम फिल्म देख रहा है या रंगीन।

हुस्नलाल भगतराम के संगीत की जो ध्वनियाँ हैं वैसी ही साजों की
आवाजें इस गीत में भी हैं मगर थोड़ी तेज़ गति में ।



गीत के बोल:

अब मेरा कौन सहारा
अब मेरा कौन सहारा
अब मेरा कौन सहारा
अब मेरा कौन सहारा
मेरे बलम
मेरे बलम मुझको ना भुलाना
अब मेरा कौन सहारा
अब मेरा कौन सहारा

तुझसे बिछड़ कर दूर हुई
मिलने से मजबूर हुई
तुझसे बिछड़ कर दूर हुई
मिलने से मजबूर हुई
रो-रो के दिल ने तुझको पुकारा

अब मेरा कौन सहारा
अब मेरा कौन सहारा

तुझसे मिलन की आस लगी
नैना रस की प्यास लगी
नैना रस्ते
मुझको है तेरा गम भी न्यारा

अब मेरा कौन सहारा
अब मेरा कौन सहारा

पंख लगे उड़ जाऊं मैं
लेकिन कैसे आऊँ मैं
पंख लगे उड़ जाऊं मैं
लेकिन कैसे आऊँ मैं
बेबस हुयी किस्मत ने मारा

अब मेरा कौन सहारा
अब मेरा कौन सहारा
..............................
Ab mera kaun sahara-Barsaat 1949

Saturday, 18 June 2011

ऐहसान तेरा होगा मुझ पर १ -जंगली १९६१

आपको एक मधुर और लोकप्रिय गीत सुनवाते हैं फिल्म जंगली से।

इस फिल्म से दूसरा गीत पेश कर रहे हैं ब्लॉग पर। लता मंगेशकर

की आवाज़ में ये गीत फिल्माया गया है सायरा बानो पर। नायिका गीत

के माध्यम से नायक से मोहब्बत कबूल फरमाने की गुज़ारिश कर रही

है। युवा सायरा बानो और युवावस्था की आखिरी सीढ़ी पर खड़े

वाले शम्मी की ये फिल्म जनता द्वारा बेहद पसंद की गई, विशेषकर

इसके गीतों की वजह से। हसरत जयपुरी का लिखा हुआ गीत है और

संगीत शंकर जयकिशन ने तैयार किया है। गीत के अंतरे में लता की

आवाज़ को आप सुरों की ऊंची पट्टी पर पहुँचते पाएंगे। ये केवल एक

दो शब्दों तक ही सीमित है मगर काफी कष्टदायी होता है किसी भी

गायक गायिका के लिए। वैसे भी हिंदी फिल्म संगीतकारों ने लता

मंगेशकर से काफी ऊंची पट्टी वाले गाने गवाए हैं। सलिल चौधरी

साहब उस काम में उस्ताद रहे हैं और उन्होंने एक से बढ़कर एक

सुर खींचने वाले गाने लता को दिए। चलिए गीत सुना जाये, इस मुद्दे

पर चर्चा फिर कभी। गीत थोड़े अलग अंदाज़ में गाया गया है

और आप पाएंगे जैसे खुद सायरा ही ये गीत परदे पर गा रही हों।











गीत के बोल:



एहसान तेरा होगा मुझ पर

दिल चाहता है वो कहने दो, मुझे

तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे

पलकों की छाँव में रहने दो



एहसान तेरा होगा मुझ पर

दिल चाहता है वो कहने दो, मुझे

तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे

पलकों की छाँव में रहने दो



एहसान तेरा होगा मुझ पर



तुमने मुझको हँसना सिखाया

तुमने मुझको हँसना सिखाया

रोने कहोगे रो लेंगे अब

आँसू का हमारे ग़म ना करो

वो बहते तो बहने दो, मुझे

तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे

पलकों की छाँव में रहने दो



एहसान तेरा होगा मुझ पर



चाहे बना दो, चाहे मिटा दो,

चाहे बना दो, चाहे मिटा दो,

मर भी गए तो देंगे दुआएँ

उड़-उड़ के कहेंगी खाक सनम

ये दर्द-ए-मुहब्बत सहने दो, मुझे

तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे

पलकों की छाँव में रहने दो



एहसान तेरा होगा मुझ पर

दिल चाहता है वो कहने दो, मुझे

तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे

पलकों की छाँव में रहने दो

.................................

Ehsan tera hoga mujh par 1-Junglee 1961

Thursday, 9 June 2011

मैं रंगीला प्यार का राही-छोटी बहन १९५९

आइये एक हास्य गीत सुनें। गाने के बोल ज्यादा मजाकिया नहीं हैं
मगर ये फिल्माया गया है महमूद और शुभा खोटे की प्रसिद्ध जोड़ी पर।
फिल्म छोटी बहन के २ गीत आप सुन चुके हैं इस ब्लॉग पर। ये तीसरा
गीत है। गीत गाया है सुबीर सेन और लता मंगेशकर ने। इस गीत
को सुबीर जैसा गा रहे हैं वैसे ही बोल लिखने का प्रयास कर रहा हूँ।
भूल चूक लेनी देनी। हर दूसरा बंगाली गायक उन दिनों हेमंत कुमार
का दूर का रिश्तेदार सुनाई पढता। तांगा बहुत दिन से ना सड़क पे दिखा
और ना ही किसी बम्बैया गीत में, सो आज देख लेते हैं । उम्मीद है
इस गीत पर घोड़े ने भी खुश हो कर कुछ आवाजें ज़रूर निकाली होंगी।
ताँगे के नीचे लगी घंटी की आवाज़ तक सुना दी गई है गीत में।




गीत के बोल:

मैं रंगीला प्यार का राही
दुर मेरी मंजिल
शोख नज़र का तीर तुने मारा
दिल हुआ घाईल

तेरे लिए ही संभाल के रखा था
प्यार भरा ये दिल
तेरे इशारों पे चलता रहेगा
ओ मेरे कातिल

मैं रंगीला प्यार का राही
दुर मेरी मंजिल
शोख नज़र का तीर तुने मारा
दिल हुआ घाईल

हा हा हा हा हा हा
हा हा हा हा हा हा

हा हा हा हा हा हा
हा हा हा हा हा हा

तेरी राह पर जो मैं रुक गया
मुझे रही ना अपनी खबर
तेरी राह पर जो मैं रुक गया
मुझे रही ना अपनी खबर
मेरे साथ चल मेरे हमसफ़र
अब तेरी मेरी एक डगर
मेरे साथ चल मेरे हमसफ़र
अब तेरी मेरी एक डगर
अब तेरी मेरी एक डगर

मैं रंगीला प्यार का राही
दुर मेरी मंजिल
शोख नज़र का तीर तुने मारा
दिल हुआ घाईल

जो आज है वो कभी ना था
ये चमन पे उजला निखर
जो आज है वो कभी ना था
ये चमन पे उजला निखर
ये रंग है मेरे प्यार का
जो खिला है बन के बाहर
ये रंग है मेरे प्यार का
जो खिला है बन के बाहर
जो खिला है बन के बाहर

तेरे लिए ही संभाल के रखा था
प्यार भरा ये दिल
तेरे इशारों पे चलता रहेगा
ओ मेरे कातिल

मैं रंगीला प्यार का राही
दुर मेरी मंजिल
शोख नज़र का तीर तुने मारा
दिल हुआ घाईल

फुर्र्र्र या हा
ऐ हा हा हा हा हा
.................................
Main rangeela pyar ka raahi-Chhoti behan 1959

Monday, 6 June 2011

तुम्हीं तो मेरी पूजा हो-सुहागन १९६४

फिल्म सुहागन(१९६४) से आपको पूर्व में २ गीत सुनवा चुके हैं।
अब सुनिए फिल्म का तीसरा गीत जो कि लता और तलत
की आवाज़ में एक युगल गीत है। इस फिल्म का एक युगल गीत
जो आपने पहले सुना था वो मन्ना डे और लता की आवाज़ में है।
६० के दशक के आते तलत महमूद को फिल्मों में गीत मिलना
कम हो गये। बदलते ज़माने और पसंद के साथ दूसरे गायक दृश्य
में दिखाई देने लगे। दूसरे संगीतकार जहाँ उनसे किनारा करने लगे,
मदन मोहन ने उन्हें कुछ गीत अवश्य दिए गाने को. मदन मोहन
ने तलत महमूद को फिल्म जहाँआरा में भी अवसर दिए।






गीत के बोल:


तुम्हीं तो मेरी पूजा हो
हाँ हाँ हाँ आ आ आ आ
तुम्हीं तो मेरी पूजा हो
तुम्हें दिल में बसाया है

तुम्हीं तो मेरी दुनिया हो
हाँ हाँ हाँ हाँ आ आ आ आ
तुम्हीं तो मेरी दुनिया हो
तुम्हें दिल से लगाया है

तुम्हीं तो मेरी दुनिया हो

इबादत है निगाहों की तुझी को देखते रहना
तेरी हर बात को सहना
तुम्हीं तो मेरे साथी हो तुम्हें अपना बनाया है

तुम्हीं तो मेरी पूजा हो

तमन्ना है इन आँखों की तुम्हारे ही नज़ारे हों
जहाँ देखूँ तुम्हें देखूँ हसीं जलवे तुम्हारे हों
हसीं जलवे तुम्हारे हों
तुम्हीं ने मेरी मंज़िल को बहारों से सजाया है

तुम्हीं तो मेरी दुनिया हो

तुम्हारे हाथ में है अब हमारी लाज का आँचल
न बह जाए कहीं देखो हमारी आँख का काजल
न बह जाए कहीं देखो हमारी आँख का काजल
हमारी आंख का काजल

तुम्हीं तो मेरी दुनिया हो
तुम्हीं तो मेरी पूजा हो
......................................
Tumhin to meri pooja ho-Suhagan 1964

Sunday, 5 June 2011

तू मेरे सामने है-सुहागन १९६४

आइये आपको एक रोमांटिक गीत सुनवाते हैं। ये असली छाया गीत
है, श्वेत श्याम युग का और इसमें भाव भंगिमाएं भी कुछ श्याम
वर्ण सी हैं । गीत की सिचुएशन कुछ विरोधाभासी किस्म की सी है।
नायक रोमांटिक मूड में है और नायिका बेबस और लाचार सी दिखती
है। नायक हैं गुरुदत्त और नायिका माला सिन्हा।

नायक न्यूनतम और दृढ़ प्रतिज्ञ से भावों के साथ गीत गा रहा है
और नायिका अपनी पूरी अभिनय क्षमता का प्रदर्शन कर रही है और
काफी ज़द्दो ज़हद के बाद आखिरकार समर्पण वाली मुद्रा में आ जाती
है। मदन मोहन के साथ हसरत जयपुरी ने बहुत कम फिल्मों में गीतों
पर काम किया है। इस गीत के लिए तो मानना पड़ेगा कि हसरत जयपुरी
का रोमांटिक गीतों को लिखने के मामले में कोई सानी नहीं। गीत में
संगीत कहीं कहीं लाऊड हो जाता है, इसको मदन मोहन भक्तों की भाषा
में बोलें तो-इतना तो चलता है गाने में.



गीत के बोल :

तू मेरे सामने है
तेरी जुल्फें हैं खुली
तेरा आँचल है ढला
मैं भला होश में कैसे रहूँ

तू मेरे सामने है
तेरी जुल्फें हैं खुली
तेरा आँचल है ढला
मैं भला होश में कैसे रहूँ

तू मेरे सामने है
तेरी जुल्फें हैं खुली
तेरा आँचल है ढला
मैं भला होश में कैसे रहूँ

तेरी आँखें तो छलकते हुए पैमाने हैं
तेरी आँखें तो छलकते हुए पैमाने हैं
और तेरे होंठ लरजते हुए मैखाने हैं
मेरे अरमान इसी बात पे दीवाने हैं
मैं भला होश में कैसे रहूँ, कैसे रहूँ

तू मेरे सामने है
तेरी जुल्फें हैं खुली
तेरा आँचल है ढला
मैं भला होश में कैसे रहूँ

तू जो हँसती है तो बिजली सी चमक जाती है
तू जो हँसती है तो बिजली सी चमक जाती है
तेरी साँसों से ग़ुलाबों की महक आती है
तू जो चलती है तो कुदरत भी बहक जाती है
मैं भला होश में कैसे रहूँ, कैसे रहूँ

तू मेरे सामने है
तेरी जुल्फें हैं खुली
तेरा आँचल है ढला
मैं भला होश में कैसे रहूँ

................................
Too mere samne hai-Suhagan 1964

Friday, 3 June 2011

मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा-पगला कहीं का १९७०

'वेदांत के सिद्धांत' और 'आबरा का डबरा' एक दूसरे के पर्याय हैं। वेदांत एक
मित्र मण्डली का सदस्य है। अकाउंटिंग के पेशे में नहीं होता तो शायद वो
एक सफल राजनीतिक वक्ता या सम्पादकीय लिखने वाला पत्रकार बन
सकता था। किन किन चीज़ों के parallel draw करता था वो, हमारे दिमाग
के कल्पना-कोष से बाहर होते थे। इतनी सफाई और चतुराई के साथ ही
वो विषय परिवर्तन करता कि कब 'मूंग की दाल' से दिल्ली के 'जंतर मंतर'
के बारे में जानकारी शुरू हो जाती, पता ही नहीं चलता। उसकी इसी खूबी
के चलते उसको उसी के समकक्ष एक मित्र ने 'आबरा का डबरा, की पदवी
भी दे डाली। आज आपको अपने मित्र की पसंद का एक गीत सुनाता हूँ।

गीत लिखा है हसरत जयपुरी ने जिन्होंने शंकर जयकिशन के लिए कई
रोमांटिक गीत लिखे। आवाज़ मन्ना डे की है। गीत में आपको कई हास्य
कलाकार दिखाई देंगे नायक शम्मी कपूर और नायिका आशा पारेख के
अलावा।




गीत के बोल:

क्यूँ मारा, क्यूँ मारा
क्यूँ मारा, क्यूँ मारा
क्यूँ क्यूँ क्यूँ क्यूँ क्यूँ क्यूँ क्यूँ
मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा
वो खेत में चारा चरती थी
तेरे बाप का वो क्या करती थी
हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ, हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ
मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा
वो खेत में चारा चरती थी
तेरे बाप का वो क्या करती थी
हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ, हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ
मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा

वो लड्डू पड़े खाती है, हाँ
वो पेड़ों पे चढ़ जाती है, हाँ
वो लड्डू पड़े खाती है
वो पेड़ों पे चढ़ जाती है
ये मच्छर बीन बजाते हैं
वो अपना राग सुनती है
वो छुम्मक छुम्मक नाचे जब मैं दिल का बजाऊँ
मैं दिल का बजाऊँ एक तारा

मेरी भैंस को डंडा
मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा
वो खेत में चारा चरती थी
तेरे बाप का वो क्या करती थी
मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा

अरे घर का ये एक स्टेशन है, हाँ
ये झंडी प्यारी प्यारी है
अरे घर का ये एक स्टेशन है
ये झंडी प्यारी प्यारी है
हम सब तो रेल के डिब्बे हैं
वो अपनी इंजन गाडी है
वो गुस्सा जब भी करती है
तो बन जाती है
तो बन जाती है, अंगारा

मेरी भैंस को डंडा
मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा
वो खेत में चारा चरती थी
तेरे बाप का वो क्या करती थी
मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा

बंधू रे बंधू रे
वो जान से बढ़ कर प्यारी है
बंधू रे, बंधू रे
क्या बोलूं मैं,
क्या बोलूं मैं एक कटारी है
बंधू रे, बंधू रे
वो जान से बढ़ कर प्यारी है, हाँ
क्या बोलूं मैं एक कटारी है, हाँ
वो जान से बढ़ कर प्यारी है
क्या बोलूं मैं एक कटारी है
कजरारी उसकी अँखियाँ हैं
इस बात से अपनी यारी है
मैंने तो अपनी कल्लो का है नाम रखा
है नाम रखा, जहान आरा

मेरी भैंस को डंडा
मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा
वो खेत में चारा चरती थी
तेरे बाप का वो क्या करती थी
मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा

मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा
वो खेत में चारा चरती थी
तेरे बाप का वो क्या करती थी
हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ, हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ
मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा
वो खेत में चारा चरती थी
तेरे बाप का वो क्या करती थी
हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ, हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ
मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा
वो खेत में चारा चरती थी
तेरे बाप का वो क्या करती थी
हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ, हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ
मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा
.................................
Meri bhains ko danda kyun maara-Pagla kahin ka 1970

Sunday, 17 April 2011

तेरा जलवा जिसने देखा-उजाला १९५९

'यादों की बारात चली है' कल इस ग़ज़ल को सुना मैंने कई दिन बाद।
ये ग़ुलाम अली की गाई एक ग़ज़ल है। इसको सुनकर वाकई यादों
की बारात सी निकलने लग जाती है। प्रस्तुत गीत के याद आने के
पीछे बहुत से कारण हैं-1)अभिनेता राजकुमार, 2) मिटटी के दिए पर
आधारित देसी सारंगी बजता हुआ एक अधेड़ उम्र युवक जो कल मिला
और 3)लगभग कुमकुम जैसी कमनीय काया वाली एक बाला के सड़क
पर गुज़रते हुए दर्शन हो जाना। इसके बाद थोड़ा दिमाग लगाया गया कि
एक गीत है जिसमे तीनों तत्त्व मौजूद हैं। तो साहब पहुँच गए सर खुजाते
हुए मुकाम पर और गीत याद आया सन १९५९ की फिल्म उजाला का जो है
-तेरा जलवा जिसने देखा।

कुमकुम कि स्क्रीन प्रेजेंस पर पहले हम चर्चा कर चुके हैं। उनकी भाव भंगिमाओं
के आगे उनकी समकालीन अभिनेत्रियाँ पानी भरती नज़र आतीं। किसी ने कुमकुम
की तारीफ में लिखा है- हिप्नोटिक डांसर- सही है। इस गीत की वजह से फिल्म हमने
सिनेमा हाल में जा कर २ बार देखी थी ।



गीत के बोल:

तेरा जलवा जिसने देखा वो तेरा हो गया
मैं हो गई किसी की कोई मेरा हो गया
तेरा जलवा जिसने देखा वो तेरा हो गया
मैं हो गई किसी की कोई मेरा हो गया

क्या देखा था तुझमे दिल तेरा हो गया
ये सोचते ही सोचते सवेरा हो गया
क्या देखा था तुझमे दिल तेरा हो गया
ये सोचते ही सोचते सवेरा हो गया

है मुझमे भी ऐसा अनोखा सा जादू
जो देखे वो होता है दिल से बेकाबू
लगे तोसे नैना तो नैना ना लागे
ख्यालों में डूबी हूँ तेरे ओ बाबू
तू आया तो महफ़िल में उजाला हो गया
मैं हो गई किसी की कोई मेरा हो गया

तेरा जलवा जिसने देखा वो तेरा हो गया
मैं हो गई किसी की कोई मेरा हो गया

तेरी एक झलक ने वो हालत बना दी
मेरे तन-बदन में मुहब्बत जगा दी
अभी भूल कर को इधर बहते पानी
किनारे पे रहती हूँ फिर भी मैं प्यासी
अब दिल का क्यूँ करें ग़म गया सो गया
मैं हो गई किसी की कोई मेरा हो गया

तेरा जलवा जिसने देखा वो तेरा हो गया
मैं हो गई किसी की कोई मेरा हो गया

बुलाती हैं तुझको ये आंचल की छैयां
जरा मुस्कुरा दे पडूं तोरे पैयाँ
कसम है तुझे दिल की जाने तमन्ना
तुझे हमने माना है अपना ही सैंया
मैं अकेली वो तेरा ज़माना हो गया
मैं हो गई किसी की कोई मेरा हो गया

तेरा जलवा जिसने देखा वो तेरा हो गया
मैं हो गई किसी की कोई मेरा हो गया
क्या देखा था तुझमे दिल तेरा हो गया
ये सोचते ही सोचते सवेरा हो गया
.................................
Tera Jalwa Jisne Dekha-Ujala 1959

Tuesday, 12 April 2011

जो गुज़र रही है मुझपर-मेरे हुज़ूर १९६८

सन १९६७ वाले पिछले गीत के सुरीले प्यानो ने एक और सुरीले
गीत की याद ताज़ा करवा दी। उल्लेखनीय है कि ये गीत एक साल बाद
यानि कि १९६८ में प्रकट हुआ। इस गीत में प्यानो के उस्ताद शंकर
जयकिशन का जादू है। संगीतकार जोड़ी शंकर जयकिशन ने प्यानो
का बहुत इस्तेमाल किया है अपने गीतों में। ये भी ऐसा ही एक गीत
है जिसमें गीत का कद कलाकारों के अभिनय से बड़ा प्रतीत होगा
आपको। ये मेरा एक पसंदीदा गीत है। गीत परदे पर गा रहे हैं
राजकुमार। गीत के बोल और कलाकारों के हाव भाव से आप
अचम्भे में पढ़ जायेंगे कि ख़ुशी का इज़हार हो रहा है या दुःख का।
इस भाव को भांपने के लिए आपको ये फिल्म देखनी पड़ेगी। वैसे
अगर आप माला सिन्हा का चेहरा ध्यान से देखेंगे तो कुछ कुछ
समझ पाएंगे कि क्या माजरा है।

हसरत जयपुरी के लिखे बोलों में प्राण फूंके हैं मोहम्मद रफ़ी ने
संगीतकार शंकर जयकिशन के इशारों पर।

..........................



गीत के बोल:

हा आ आ , हा आ आ आ

जो गुज़र रही है मुझपर उसे कैसे मैं बताऊँ
जो गुज़र रही है मुझपर उसे कैसे मैं बताऊँ
वो ख़ुशी मिली है मुझको, मैं ख़ुशी से मर ना जाऊं
वो ख़ुशी मिली है मुझको, मैं ख़ुशी से मर ना जाऊं

मेरे दिल की धडकनों का ये पयाम तुमको पहुंचे
मैं तुम्हारा हमनशीन हूँ ये सलाम तुमको पहुंचे
उसे बंदगी मैं समझूं जो तुम्हारे काम आऊँ

वो ख़ुशी मिली है मुझको, मैं ख़ुशी से मर ना जाऊं
हाँ, जो गुज़र रही है मुझपर उसे कैसे मैं बताऊँ

मेरे दिल की महफिलों में वो मुकाम है तुम्हारा
के खुदा के बाद लब पर, बस नाम है तुम्हारा
मेरी आरजू यही है, मैं तुम्हारे गीत गाऊँ

वो ख़ुशी मिली है मुझको, मैं ख़ुशी से मर ना जाऊं
हाँ, जो गुज़र रही है मुझपर उसे कैसे मैं बताऊँ

.......................................
Jo guzar rahi hai mujhpar-Mere huzoor 1968

Friday, 17 December 2010

मिल गए मिल गए आज मेरे सनम-कन्यादान १९६९

ऐसे गाने थोड़े रोचक होते हैं जिनमे नायिकाएं उछल कूद के
कुछ ऐलान सा करती हैं। एक गीत आपको सुनवा चुके हैं
फिल्म मैं सुन्दर हूँ से। अब सुनिए एक गीत फिल्म कन्यादान से
जिसमे वाकई बहुत उछल कूद करके नायिका ढिंढोरा पीट
रही है-मिल गए मिल गए आज मेरे सनम। गीत में हास्य का
पुट है और उसे महसूस करने के लिए आपको इसे शुरू से अंत
तक देखना पड़ेगा। नायिका के ज़मीन पर कदम नहीं पड़ रहे हैं
और वो इतनी खुश है की कूद कूद के माउंट एवेरेस्ट पर भी चढ़
जाएगी ऐसा लगता है। ऐसे गीतों के फिल्मांकन के लिए नायिका
आशा पारेख एक उपयुक्त उम्मीदवार थीं।

मैं सुन्दर हूँ फिल्म सन १९७१ में आई थी जबकि कन्यादान
फिल्म सन १९६९ में। क्रम से सुनने के शौकीनों को पहले ७१
का गीत सुनना चाहिए फिर ६९ का गीत। दोनों फिल्मों में संगीत
शंकर जयकिशन का है और दोनों ही गीत लता द्वारा गाये गए हैं।



गीत के बोल :

मिल गए मिल गए आज मेरे सनम
मिल गए मिल गए आज मेरे सनम
आज मेरे ज़मीन पर नहीं हैं कदम
आज मेरे ज़मीन पर नहीं हैं कदम

मिल गए मिल गए आज मेरे सनम
मिल गए मिल गए आज मेरे सनम
आज मेरे ज़मीन पर नहीं हैं कदम
आज मेरे ज़मीन पर नहीं हैं कदम

ऐ नज़रों ज़रा काम इतना करो
ऐ नज़रों ज़रा काम इतना करो
तुम मेरी मांग में आज मोती भरो
तुम मेरी मांग में आज मोती भरो

एक उजाला हुआ ढल गई शाम-ए-ग़म
एक उजाला हुआ ढल गई शाम-ए-ग़म
आज मेरे ज़मीन पर नहीं हैं कदम

मिल गए मिल गए आज मेरे सनम
मिल गए मिल गए आज मेरे सनम
आज मेरे ज़मीन पर नहीं हैं कदम
आज मेरे ज़मीन पर नहीं हैं कदम

वो कहाँ छुप रहे थे मैं हैरान थी
वो कहाँ छुप रहे थे मैं हैरान थी
मेरी सदियों से उनसे ही पहचान थी
मेरी सदियों से उनसे ही पहचान थी

ऐसे किस्से ज़माने में होते हैं कम
ऐसे किस्से ज़माने में होते हैं कम
आज मेरे ज़मीन पर नहीं हैं कदम

मिल गए मिल गए आज मेरे सनम
मिल गए मिल गए आज मेरे सनम
आज मेरे ज़मीन पर नहीं हैं कदम
आज मेरे ज़मीन पर नहीं हैं कदम

उम्र भर की तड़प को करार आ गया
उम्र भर की तड़प को करार आ गया
उनसे ऑंखें मिलीं मुझको प्यार आ गया
उनसे ऑंखें मिलीं मुझको प्यार आ गया

याद करती रही मैं उनको दम-बदम
याद करती रही मैं उनको दम-बदम
आज मेरे ज़मीन पर नहीं हैं कदम

मिल गए मिल गए आज मेरे सनम
मिल गए मिल गए आज मेरे सनम
आज मेरे ज़मीन पर नहीं हैं कदम
आज मेरे ज़मीन पर नहीं हैं कदम
..................................
Mil gaye mil gaye aaj mere sanam-Kanyadan 1969

Tuesday, 7 December 2010

गम छोड़ के मनाओ रंगरेली -गुमनाम १९६५

फिल्म गुमनाम से एक गीत पेश है जो कि समुद्र किनारे
फिल्माया गया है और ढेर सारे कलाकारों को आप इस गीत
में देखेंगे उनमे से एक हैं हेलन जो कि परदे पर इस गीत को
गा रही हैं। जिस प्रोडक्ट का वर्णन पिछली पोस्ट में किया गया
था वो इधर उपलब्ध नहीं है मगर ये शोर्ट ड्रेस वाला एक सोबर
गीत है जिसे आप देख कर आनंदित होंगे।

फिल्म का नाम ही बस गुमनाम है। ये अपने समय की एक
प्रसिद्ध होरर फिल्म थी । बहु सितारा फिल्म के इस गीत में
आपको नंदा, प्राण और मदन पुरी दिखाई देंगे हेलन के अलावा।

गीत में बैगपाइपर नाम के वाद्य का इस्तेमाल किया गया है।
गीत लिखा है हसरत जयपुरी ने और धुन बनाई है शंकर जयकिशन
ने। गायिका की आवाज़ आप पहचानते ही होंगे।



गीत के बोल:

हो इस दुनिया में जीना है तो सुन लो मेरी बात
हो इस दुनिया में जीना है तो सुन लो मेरी बात
गम छोड़ के मनाओ रंगरेली
और मान लो जों कहे किट्टी केली
गम छोड़ के मनाओ रंगरेली
और मान लो जों कहे किट्टी केली

जीना उसका जीना है जो हँसते गाते जी ले
जुल्फों की घनघोर घटा में नैन के सागर पी ले
जीना उसका जीना है जो हँसते गाते जी ले
जुल्फों की घनघोर घटा में नैन के सागर पी ले

जो करना है आज ही कर लो कल को किसने देखा
आई है रंगीन बहारें ले के दिन रंगीले।

हो इस दुनिया में जीना है तो सुन लो मेरी बात
इस दुनिया में जीना है तो सुन लो मेरी बात
गम छोड़ के मनाओ रंगरेली
और मान लो जों कहे किट्टी केली
गम छोड़ के मनाओ रंगरेली
और मान लो जों कहे किट्टी केली

मैं अलबेली चिंगारी हूँ नाचूं और लहराओं
दामन दामन फूल खिलाऊँ और खुशियाँ बरसाऊँ
मैं अलबेली चिंगारी हूँ नाचूं और लहराओं
दामन दामन फूल खिलाऊँ और खुशियाँ बरसाऊँ


दुनियावालों तुम क्या जानो जीने की ये बातें
आओ मेरे नज़दीक तो मैं ये बातें समझाऊँ

हो इस दुनिया में जीना है तो सुन लो मेरी बात
इस दुनिया में जीना है तो सुन लो मेरी बात
गम छोड़ के मनाओ रंगरेली
और मान लो जों कहे किट्टी केली
गम छोड़ के मनाओ रंगरेली
और मान लो जों कहे किट्टी केली

जो भी होगा हम देखेंगे गम से क्यूँ घबराएँ
इस दुनिया के बाग़ में लाखों पंछी आये जाएँ
जो भी होगा हम देखेंगे गम से क्यूँ घबराएँ
इस दुनिया के बाग़ में लाखों पंछी आये जाएँ

ऐश के बन्दों ऐश करो तुम छोडो ये ख़ामोशी
लोग हुए हैं जिंदादिल हैं जो चाहे कर जाएँ

हो इस दुनिया में जीना है तो सुन लो मेरी बात
इस दुनिया में जीना है तो सुन लो मेरी बात
गम छोड़ के मनाओ रंगरेली
और मान लो जों कहे किट्टी केली
गम छोड़ के मनाओ रंगरेली
और मान लो जों कहे किट्टी केली
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Gham Chhod Ke Manao Rangreli-Gumnaam 1965
 
 
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