आइये आपको एक रोमांटिक गीत सुनवाते हैं। ये असली छाया गीत
है, श्वेत श्याम युग का और इसमें भाव भंगिमाएं भी कुछ श्याम
वर्ण सी हैं । गीत की सिचुएशन कुछ विरोधाभासी किस्म की सी है।
नायक रोमांटिक मूड में है और नायिका बेबस और लाचार सी दिखती
है। नायक हैं गुरुदत्त और नायिका माला सिन्हा।
नायक न्यूनतम और दृढ़ प्रतिज्ञ से भावों के साथ गीत गा रहा है
और नायिका अपनी पूरी अभिनय क्षमता का प्रदर्शन कर रही है और
काफी ज़द्दो ज़हद के बाद आखिरकार समर्पण वाली मुद्रा में आ जाती
है। मदन मोहन के साथ हसरत जयपुरी ने बहुत कम फिल्मों में गीतों
पर काम किया है। इस गीत के लिए तो मानना पड़ेगा कि हसरत जयपुरी
का रोमांटिक गीतों को लिखने के मामले में कोई सानी नहीं। गीत में
संगीत कहीं कहीं लाऊड हो जाता है, इसको मदन मोहन भक्तों की भाषा
में बोलें तो-इतना तो चलता है गाने में.
गीत के बोल :
तू मेरे सामने है
तेरी जुल्फें हैं खुली
तेरा आँचल है ढला
मैं भला होश में कैसे रहूँ
तू मेरे सामने है
तेरी जुल्फें हैं खुली
तेरा आँचल है ढला
मैं भला होश में कैसे रहूँ
तू मेरे सामने है
तेरी जुल्फें हैं खुली
तेरा आँचल है ढला
मैं भला होश में कैसे रहूँ
तेरी आँखें तो छलकते हुए पैमाने हैं
तेरी आँखें तो छलकते हुए पैमाने हैं
और तेरे होंठ लरजते हुए मैखाने हैं
मेरे अरमान इसी बात पे दीवाने हैं
मैं भला होश में कैसे रहूँ, कैसे रहूँ
तू मेरे सामने है
तेरी जुल्फें हैं खुली
तेरा आँचल है ढला
मैं भला होश में कैसे रहूँ
तू जो हँसती है तो बिजली सी चमक जाती है
तू जो हँसती है तो बिजली सी चमक जाती है
तेरी साँसों से ग़ुलाबों की महक आती है
तू जो चलती है तो कुदरत भी बहक जाती है
मैं भला होश में कैसे रहूँ, कैसे रहूँ
तू मेरे सामने है
तेरी जुल्फें हैं खुली
तेरा आँचल है ढला
मैं भला होश में कैसे रहूँ
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Too mere samne hai-Suhagan 1964
Sunday, 5 June 2011
तू मेरे सामने है-सुहागन १९६४
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