सन १९५३ की फिल्म आह के लिए शंकर जयकिशन ने
एक से बढ़कर एक धुनें बनायीं। फिल्म का दर्द भरा गीत
हो या मस्ती भरा, हर गीत सुनने में अच्छा लगता है।
फिल्म से एक थोडा तेज गति वाला गीत सुनवाते हैं
लता मंगेशकर की आवाज़ में। गीत फिल्माया गया है
विजय लक्ष्मी पर जो एक पार्टी में ये गीत गा रही हैं।
गीत के बोल:
सुनते थे नाम हम जिन का बहार से
देखा तो डोला जिया झूम झूम के
सुनते थे नाम हम जिन का बहार से
देखा तो डोला जिया झूम झूम के
छुपते रहे जो मेरी नज़र से
दिल बोले मेरा तुम ही तो हो
आँखों से रंग मेरे दिल के उमंग पे
डाला तो डोला जिया झूम झूम के
सुनते थे नाम हम जिन का बहार से
देखा तो डोला जिया झूम झूम के
ठुकरा चुके थे जिन की मुहब्बत
क्यों उन पे दीवाने हुए
तड़पा के प्यार ने जब हम को प्यार से
छेड़ा तो बोला जिया झूम झूम के
सुनते थे नाम हम जिन का बहार से
देखा तो डोला जिया झूम झूम के
पहले कहीं ये दिल न झुका था
क्या जानूँ अब क्या हो गया
जाओ न आज कल तुम हम को छोड़ के
अपना तो डोला जिया झूम झूम के
सुनते थे नाम हम जिन का बहार से
देखा तो डोला जिया झूम झूम के
...................................
Sunte the naam ham-Aah 1953
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Wednesday, 3 August 2011
Tuesday, 2 August 2011
जाने न नज़र पहचाने जिगर-आह १९५३
भीगने के बाद कपडे उतार कर ड्रम में बैठ कर मधुर गीत कैसे गाया जाए
राज कपूर सिखा रहे हैं फिल्म आह के इस गीत में। उनके साथ नर्गिस की
जोड़ी है. लता और मुकेश की आवाज़ में ये सदाबहार युगल गीत सुनिए।
इसे भी हसरत जयपुरी ने लिखा है और धुन बनायीं है शंकर जयकिशन ने।
फिल्म बरसात के साथ १९४९ में शुरू हुयी शैलेन्द्र, हसरत, शंकर जयकिशन
की चौकड़ी की संगीतमय धमा-चौकड़ी ने काफी समय तक हिंदी फिल्म संगीत
जगत में अपना डंका बजाया ।
गीत के बोल:
जाने न नज़र पहचाने जिगर
ये कौन जो दिल पर छाया
मेरा अंग अंग मुस्काया
मेरा अंग अंग मुस्काया
आवाज़ ये किसकी आती है
जो छेड़ के दिल को जाती है
आवाज़ ये किसकी आती है
जो छेड़ के दिल को जाती है
मैं सुन के जिसे शर्मा जाऊँ
है कौन जो दिल में समाया
मेरा अंग अंग मुस्काया
मेरा अंग अंग मुस्काया
जाने न नज़र पहचाने जिगर
ये कौन जो दिल पर छाया
मुझे रोज़ रोज़ तड़पाया
मुझे रोज़ रोज़ तड़पाया
ढूँढेंगे उसे हम तारों में
सावन की ठण्डी बहारों में
ढूँढेंगे उसे हम तारों में
सावन की ठण्डी बहारों में
पर हम भी किसी से कम तो नहीं
क्यों रूप को अपने छुपाया
मुझे रोज़ रोज़ तड़पाया
मुझे रोज़ रोज़ तड़पाया
बिन देखे जिसको प्यार करूँ
गर देखूँ उस को जान भी दूँ
बिन देखे जिसको प्यार करूँ
गर देखूँ उस को जान भी दूँ
एक बार कहो ओ जादूगर
ये कौन सा खेल रचाया
मेरा अंग अंग मुस्काया
मेरा अंग अंग मुस्काया
..................................
Jaane na nazar-Aah 1953
राज कपूर सिखा रहे हैं फिल्म आह के इस गीत में। उनके साथ नर्गिस की
जोड़ी है. लता और मुकेश की आवाज़ में ये सदाबहार युगल गीत सुनिए।
इसे भी हसरत जयपुरी ने लिखा है और धुन बनायीं है शंकर जयकिशन ने।
फिल्म बरसात के साथ १९४९ में शुरू हुयी शैलेन्द्र, हसरत, शंकर जयकिशन
की चौकड़ी की संगीतमय धमा-चौकड़ी ने काफी समय तक हिंदी फिल्म संगीत
जगत में अपना डंका बजाया ।
गीत के बोल:
जाने न नज़र पहचाने जिगर
ये कौन जो दिल पर छाया
मेरा अंग अंग मुस्काया
मेरा अंग अंग मुस्काया
आवाज़ ये किसकी आती है
जो छेड़ के दिल को जाती है
आवाज़ ये किसकी आती है
जो छेड़ के दिल को जाती है
मैं सुन के जिसे शर्मा जाऊँ
है कौन जो दिल में समाया
मेरा अंग अंग मुस्काया
मेरा अंग अंग मुस्काया
जाने न नज़र पहचाने जिगर
ये कौन जो दिल पर छाया
मुझे रोज़ रोज़ तड़पाया
मुझे रोज़ रोज़ तड़पाया
ढूँढेंगे उसे हम तारों में
सावन की ठण्डी बहारों में
ढूँढेंगे उसे हम तारों में
सावन की ठण्डी बहारों में
पर हम भी किसी से कम तो नहीं
क्यों रूप को अपने छुपाया
मुझे रोज़ रोज़ तड़पाया
मुझे रोज़ रोज़ तड़पाया
बिन देखे जिसको प्यार करूँ
गर देखूँ उस को जान भी दूँ
बिन देखे जिसको प्यार करूँ
गर देखूँ उस को जान भी दूँ
एक बार कहो ओ जादूगर
ये कौन सा खेल रचाया
मेरा अंग अंग मुस्काया
मेरा अंग अंग मुस्काया
..................................
Jaane na nazar-Aah 1953
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बिछड़े हुए परदेसी-बरसात १९४९
परदेसी हिट्स में सबसे पुराना हिट गीत कह सकती है आज की पीढ़ी
इसे। वैसे इससे पहले भी हिंदी फिल्मों में परदेसी गीत(जिनमें परदेसी
शब्द का प्रयोग हुआ है) बने हैं। इस गीत ने सफलता के नए कीर्तिमान
रचे। लता मंगेशकर की आवाज़ है, नर्गिस का अभिनय है, हसरत जयपुरी
के बोल और शंकर जयकिशन का संगीत है।
गीत के बोल:
बिछड़े हुए परदेसी
बिछड़े हुए परदेसी इक बार तो आना तू
जब आँख मिलाई है नज़रें न चुराना तू
बिछड़े हुए परदेसी
वादे भी किए तूने खाई थी क़सम मेरी
वादे भी किए तूने खाई थी क़सम मेरी
वादों पे ही जीती हूँ है आस मुझे तेरी
वादों पे ही जीती हूँ है आस मुझे तेरी
इतनी है अरज मेरी
इतनी है अरज मेरी मुझको न भुलाना तू
जब आँख मिलाई है नज़रें न चुराना तू
बिछड़े हुए परदेसी
दुनिया मुझे छीने है सबने मुझे घेरा है
दुनिया मुझे छीने है सबने मुझे घेरा है
और मेरी ज़ुबाँ पर तो बस नाम ही तेरा है
और मेरी ज़ुबाँ पर तो बस नाम ही तेरा है
दुनिया न हँसे मुझ पर
दुनिया न हँसे मुझ परइतना न रुलाना तू
जब आँख मिलाई है नज़रें न चुराना तू
बिछड़े हुए परदेसी
गैरों का न हो जाना जब अपना बनाया है
गैरों का न हो जाना जब अपना बनाया है
पास आ के न खो जाना जब दिल में बसाया है
पास आ के न खो जाना जब दिल में बसाया है
जो बात कही तूने
जो बात कही तूने वो बात निभाना तू
जब आँख मिलाई है नज़रें न चुराना तू
बिछड़े हुए परदेसी
........................................
Bichhde hue pardesi-Barsaat 1949
इसे। वैसे इससे पहले भी हिंदी फिल्मों में परदेसी गीत(जिनमें परदेसी
शब्द का प्रयोग हुआ है) बने हैं। इस गीत ने सफलता के नए कीर्तिमान
रचे। लता मंगेशकर की आवाज़ है, नर्गिस का अभिनय है, हसरत जयपुरी
के बोल और शंकर जयकिशन का संगीत है।
गीत के बोल:
बिछड़े हुए परदेसी
बिछड़े हुए परदेसी इक बार तो आना तू
जब आँख मिलाई है नज़रें न चुराना तू
बिछड़े हुए परदेसी
वादे भी किए तूने खाई थी क़सम मेरी
वादे भी किए तूने खाई थी क़सम मेरी
वादों पे ही जीती हूँ है आस मुझे तेरी
वादों पे ही जीती हूँ है आस मुझे तेरी
इतनी है अरज मेरी
इतनी है अरज मेरी मुझको न भुलाना तू
जब आँख मिलाई है नज़रें न चुराना तू
बिछड़े हुए परदेसी
दुनिया मुझे छीने है सबने मुझे घेरा है
दुनिया मुझे छीने है सबने मुझे घेरा है
और मेरी ज़ुबाँ पर तो बस नाम ही तेरा है
और मेरी ज़ुबाँ पर तो बस नाम ही तेरा है
दुनिया न हँसे मुझ पर
दुनिया न हँसे मुझ परइतना न रुलाना तू
जब आँख मिलाई है नज़रें न चुराना तू
बिछड़े हुए परदेसी
गैरों का न हो जाना जब अपना बनाया है
गैरों का न हो जाना जब अपना बनाया है
पास आ के न खो जाना जब दिल में बसाया है
पास आ के न खो जाना जब दिल में बसाया है
जो बात कही तूने
जो बात कही तूने वो बात निभाना तू
जब आँख मिलाई है नज़रें न चुराना तू
बिछड़े हुए परदेसी
........................................
Bichhde hue pardesi-Barsaat 1949
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Friday, 15 July 2011
जाऊं मैं कहाँ ये ज़मीन -मिस इंडिया १९५७
आपको श्वेत श्याम युग से एक तेज धुन वाला युगल गीत
सुनवाते हैं. आकर्षक ध्वनि संयोजन से गीत शुरू होता है.
स्टेज पर नशेड़ी सा एक युवक लड़खड़ाते हुए गाना चालू करता
है. इतना नहीं लडखडाता है कि माइक ले के स्टेज के नीचे
टपक जाए. ये है फिल्म का नायक जिसने पार्टी में शायद
ज्यादा पी ली है. पी कितनी भी ली हो गाना सुर ताल में
गायेगा. ये हैं फिल्म के नायक प्रदीप कुमार. एक बात बस
समझ नहीं आई कि मन्ना डे वाले अंतरे एक से क्यूँ हैं इस
गीत में. कहीं ये पुराने ज़माने का 'कॉपी कट पेस्ट' एरर तो
नहीं ?
ये एक गीयर बदलने वाला गीत है. तेज संगीत के और हा हा
के बाद कुछ धीमा धीमा सा गीत सुनाई देता है. तेज वाले भाग
में नायिका शीला वाज़ हैं तो धीमे वाले भाग में नर्गिस.
अभिनेत्री नर्गिस के कैरियर की वे फ़िल्में अधिकांश दर्शकों
को याद हैं जिनमें इन्होने राज कपूर के साथ काम किया है.
सिवाए मदर इंडिया (१९५७) और रात और दिन(१९६४) के
इक्का दुक्का फ़िल्में और हैं जो प्रसिद्ध हुई हैं. सन १९५७ में
एक फिल्म आई थी-मिस इंडिया. इसमें उन्होंने एक आधुनिक
समय की नारी की भूमिका अदा की है. समय से आगे की
भूमिकाएं या फ़िल्में अक्सर नहीं चला करती हैं. इस फिल्म
का संगीत भी थोडा सा ही बजा वो भी सचिन देव बर्मन के
भक्तों के घर. गीत लता मंगेशकर और मन्ना डे का गाया हुआ
है. बोल लिखे हैं राजेंद्र कृष्ण ने.
एक बड़े शामियाने से अगर पहनने के कपडे निकाले जाएँ तो कुछ
कुछ वैसे ही बनेंगे जैसे की इस गीत में बालाएं पहने हुए हैं.
गीत के बोल:
हे हे हे हे हे हे, हे हे हे हे हे हे
हो, हा हा हा
हे हे हे हे हे, हो हो
हा हा, हो हो, हा हा हा हा हा
जाऊं मैं कहाँ,
हाय, जाऊं मैं कहाँ
ये ज़मीन ये जहां छोड़ के
राह में मुझे,
चल दिया कारवां छोड़ के
जाऊं मैं कहाँ,
ये ज़मीन ये जहां छोड़ के
राह में मुझे,
चल दिया कारवां छोड़ के
जाऊं मैं कहाँ
हो हो हो हो हो हो हो हो
हो हो हा हा हा हा हा
ये भीगी भीगी रातें
ये घुमड़ घुमड़ बरसातें
ऐसे में दिल से कर ले
दो चार नज़र की बातें
ये भीगी भीगी रातें
ये घुमड़ घुमड़ बरसातें
ऐसे में दिल से कर ले
दो चार नज़र की बातें
बाँहों में आ के सो जा,
सो जा, सो जा
जाऊं मैं कहाँ,
ये ज़मीन ये जहां छोड़ के
राह में मुझे,
चल दिया कारवां छोड़ के
जाऊं मैं कहाँ
रात गुज़रती जाए
आस नज़र न आये
रात गुज़रती जाए
आस नज़र न आये
रो न सकूं अब
रोते रोते आंसू भी शरमाये
हो हो हो, जाऊं मैं कहाँ
ये ज़मीन ये जहां छोड़ के
राह में मुझे
चल दिया कारवां छोड़ के
जाऊं मैं कहाँ
हो हो हो हो हा हा हा हा
हो हो हा हा हो हो हो
ये भीगी भीगी रातें
ये घुमड़ घुमड़ बरसातें
ऐसे में दिल से कर ले
दो चार नज़र की बातें
ये भीगी भीगी रातें
ये घुमड़ घुमड़ बरसातें
ऐसे में दिल से कर ले
दो चार नज़र की बातें
बाँहों में आ के सो जा,
सो जा, सो जा
..............................
Jaoon main kahan-Miss India 1957
सुनवाते हैं. आकर्षक ध्वनि संयोजन से गीत शुरू होता है.
स्टेज पर नशेड़ी सा एक युवक लड़खड़ाते हुए गाना चालू करता
है. इतना नहीं लडखडाता है कि माइक ले के स्टेज के नीचे
टपक जाए. ये है फिल्म का नायक जिसने पार्टी में शायद
ज्यादा पी ली है. पी कितनी भी ली हो गाना सुर ताल में
गायेगा. ये हैं फिल्म के नायक प्रदीप कुमार. एक बात बस
समझ नहीं आई कि मन्ना डे वाले अंतरे एक से क्यूँ हैं इस
गीत में. कहीं ये पुराने ज़माने का 'कॉपी कट पेस्ट' एरर तो
नहीं ?
ये एक गीयर बदलने वाला गीत है. तेज संगीत के और हा हा
के बाद कुछ धीमा धीमा सा गीत सुनाई देता है. तेज वाले भाग
में नायिका शीला वाज़ हैं तो धीमे वाले भाग में नर्गिस.
अभिनेत्री नर्गिस के कैरियर की वे फ़िल्में अधिकांश दर्शकों
को याद हैं जिनमें इन्होने राज कपूर के साथ काम किया है.
सिवाए मदर इंडिया (१९५७) और रात और दिन(१९६४) के
इक्का दुक्का फ़िल्में और हैं जो प्रसिद्ध हुई हैं. सन १९५७ में
एक फिल्म आई थी-मिस इंडिया. इसमें उन्होंने एक आधुनिक
समय की नारी की भूमिका अदा की है. समय से आगे की
भूमिकाएं या फ़िल्में अक्सर नहीं चला करती हैं. इस फिल्म
का संगीत भी थोडा सा ही बजा वो भी सचिन देव बर्मन के
भक्तों के घर. गीत लता मंगेशकर और मन्ना डे का गाया हुआ
है. बोल लिखे हैं राजेंद्र कृष्ण ने.
एक बड़े शामियाने से अगर पहनने के कपडे निकाले जाएँ तो कुछ
कुछ वैसे ही बनेंगे जैसे की इस गीत में बालाएं पहने हुए हैं.
गीत के बोल:
हे हे हे हे हे हे, हे हे हे हे हे हे
हो, हा हा हा
हे हे हे हे हे, हो हो
हा हा, हो हो, हा हा हा हा हा
जाऊं मैं कहाँ,
हाय, जाऊं मैं कहाँ
ये ज़मीन ये जहां छोड़ के
राह में मुझे,
चल दिया कारवां छोड़ के
जाऊं मैं कहाँ,
ये ज़मीन ये जहां छोड़ के
राह में मुझे,
चल दिया कारवां छोड़ के
जाऊं मैं कहाँ
हो हो हो हो हो हो हो हो
हो हो हा हा हा हा हा
ये भीगी भीगी रातें
ये घुमड़ घुमड़ बरसातें
ऐसे में दिल से कर ले
दो चार नज़र की बातें
ये भीगी भीगी रातें
ये घुमड़ घुमड़ बरसातें
ऐसे में दिल से कर ले
दो चार नज़र की बातें
बाँहों में आ के सो जा,
सो जा, सो जा
जाऊं मैं कहाँ,
ये ज़मीन ये जहां छोड़ के
राह में मुझे,
चल दिया कारवां छोड़ के
जाऊं मैं कहाँ
रात गुज़रती जाए
आस नज़र न आये
रात गुज़रती जाए
आस नज़र न आये
रो न सकूं अब
रोते रोते आंसू भी शरमाये
हो हो हो, जाऊं मैं कहाँ
ये ज़मीन ये जहां छोड़ के
राह में मुझे
चल दिया कारवां छोड़ के
जाऊं मैं कहाँ
हो हो हो हो हा हा हा हा
हो हो हा हा हो हो हो
ये भीगी भीगी रातें
ये घुमड़ घुमड़ बरसातें
ऐसे में दिल से कर ले
दो चार नज़र की बातें
ये भीगी भीगी रातें
ये घुमड़ घुमड़ बरसातें
ऐसे में दिल से कर ले
दो चार नज़र की बातें
बाँहों में आ के सो जा,
सो जा, सो जा
..............................
Jaoon main kahan-Miss India 1957
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Monday, 11 July 2011
आ जाओ तड़पते हैं अरमां-आवारा १९५१
लता मंगेशकर की आवाज़ में सुना जाये एक उच्च कोटि का दर्द भरा गीत.
ये लिया गया है फिल्म आवारा से. हसरत जयपुरी ने कई बढ़िया दर्द भरे
गीत भी लिखे हैं. ये उनकी लेखन शैली का एक शानदार नमूना है. उनकी
उपमाएं समकालीन गीतकारों के समान ही लेकिन थोड़ी अलग सी लगती हैं.
उदाहरण के लिए- चाँद के डोले में आई नज़र. प्रयोग करने में वे भी नहीं
चूके और हमें उस वजह से कुछ अनूठी चीज़ें सुनने को मिलीं
प्रस्तुत गीत नर्गिस के ऊपर फिल्माया गया है जिनकी भावाभिव्यक्ति लता के
गीतों पर आला दर्जे की रही हमेशा.
अभी हमने संगीत पक्ष की तो बात ही नहीं की है. इस हिट फिल्म का संगीत
तैयार किया है शंकर जयकिशन की जोड़ी ने. फिल्म के सभी गाने बेहद लोकप्रिय
हैं और सबसे ज्यादा लोकप्रिय गीत होने का सेहरा बंधा था मुकेश के गाये शीर्षक
गीत पर-“आवारा हूँ”.
गीत के बोल:
आ जाओ तड़पते हैं अरमां
आ जाओ तड़पते हैं अरमां
अब रात गुज़रने वाली है
अब रात गुज़रने वाली है
मै रोऊँ यहाँ, तुम चुप हो वहां
अब रात गुज़रने वाली है
अब रात गुज़रने वाली है
ओ, चाँद की रंगत उड़ने लगी
वो तारों के दिल अब डूब गये
डूब गये
है दर्द भरा बेचैन समां
अब रात गुज़रने वाली है
अब रात गुज़रने वाली है
इस चाँद के डोले में आई नज़र
इस चाँद के डोले में आई नज़र
यह रात की दुलहन चल दी किधर
चल दी किधर
आवाज़ तो दो, खोये हो कहाँ
अब रात गुज़रने वाली है
अब रात गुज़रने वाली है
घबरा के नज़र भी हार गई
घबरा के नज़र भी हार गई
तकदीर को भी नींद आने लगी
नींद आने लगी
तुम आते नहीं, मै जाऊं कहाँ
अब रात गुज़रने वाली है
अब रात गुज़रने वाली है
अब रात गुज़रने वाली है
अब रात गुज़रने वाली है
अब रात गुज़रने वाली है
........................................
Aa jao tadapte hain armaan-Awara 1951
ये लिया गया है फिल्म आवारा से. हसरत जयपुरी ने कई बढ़िया दर्द भरे
गीत भी लिखे हैं. ये उनकी लेखन शैली का एक शानदार नमूना है. उनकी
उपमाएं समकालीन गीतकारों के समान ही लेकिन थोड़ी अलग सी लगती हैं.
उदाहरण के लिए- चाँद के डोले में आई नज़र. प्रयोग करने में वे भी नहीं
चूके और हमें उस वजह से कुछ अनूठी चीज़ें सुनने को मिलीं
प्रस्तुत गीत नर्गिस के ऊपर फिल्माया गया है जिनकी भावाभिव्यक्ति लता के
गीतों पर आला दर्जे की रही हमेशा.
अभी हमने संगीत पक्ष की तो बात ही नहीं की है. इस हिट फिल्म का संगीत
तैयार किया है शंकर जयकिशन की जोड़ी ने. फिल्म के सभी गाने बेहद लोकप्रिय
हैं और सबसे ज्यादा लोकप्रिय गीत होने का सेहरा बंधा था मुकेश के गाये शीर्षक
गीत पर-“आवारा हूँ”.
गीत के बोल:
आ जाओ तड़पते हैं अरमां
आ जाओ तड़पते हैं अरमां
अब रात गुज़रने वाली है
अब रात गुज़रने वाली है
मै रोऊँ यहाँ, तुम चुप हो वहां
अब रात गुज़रने वाली है
अब रात गुज़रने वाली है
ओ, चाँद की रंगत उड़ने लगी
वो तारों के दिल अब डूब गये
डूब गये
है दर्द भरा बेचैन समां
अब रात गुज़रने वाली है
अब रात गुज़रने वाली है
इस चाँद के डोले में आई नज़र
इस चाँद के डोले में आई नज़र
यह रात की दुलहन चल दी किधर
चल दी किधर
आवाज़ तो दो, खोये हो कहाँ
अब रात गुज़रने वाली है
अब रात गुज़रने वाली है
घबरा के नज़र भी हार गई
घबरा के नज़र भी हार गई
तकदीर को भी नींद आने लगी
नींद आने लगी
तुम आते नहीं, मै जाऊं कहाँ
अब रात गुज़रने वाली है
अब रात गुज़रने वाली है
अब रात गुज़रने वाली है
अब रात गुज़रने वाली है
अब रात गुज़रने वाली है
........................................
Aa jao tadapte hain armaan-Awara 1951
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छोटी सी ये ज़िंदगानी रे-आह १९५३
गायक - मुकेश
गीतकार-शैलेन्द्र
संगीतकार -शंकर जयकिशन
फिल्म -आह
वर्ष-१९५३
श्रेणी-तांगा गीत
* परदे पर तांगे में गायक मुकेश स्वयं हैं.
गीत के बोल:
छोटी सी ये ज़िंदगानी रे
चार दिन की जवानी तेरी
हाय रे हाय
ग़म की कहानी तेरी
छोटी सी ये ज़िंदगानी रे
चार दिन की जवानी तेरी
हाय रे हाय
ग़म की कहानी तेरी
शाम हुई ये देश बीराना
तुझ को अपने बलम घर जाना,
सजन घर जाना
शाम हुई ये देश बीराना
तुझ को अपने बलम घर जाना,
सजन घर जाना
राह में मूरख मत लुट जाना,
मत लुट जाना
छोटी सी ये ज़िंदगानी रे
चार दिन की जवानी तेरी
हाय रे हाय
ग़म की कहानी तेरी
छोटी सी ये ज़िंदगानी रे
चार दिन की जवानी तेरी
हाय रे हाय
ग़म की कहानी तेरी
बाबुल का घर छूटा जाये
अखियन घोर अँधेरा छाये,
जी दिल घबराये
आँख से टपके दिल का खज़ाना
दिल का खज़ाना
छोटी सी ये ज़िंदगानी रे
चार दिन की जवानी तेरी
हाय रे हाय
ग़म की कहानी तेरी
छोटी सी ये ज़िंदगानी रे
चार दिन की जवानी तेरी
हाय रे हाय
ग़म की कहानी तेरी
...............................
Chhoti si ye zindagani-Aah 1953
गीतकार-शैलेन्द्र
संगीतकार -शंकर जयकिशन
फिल्म -आह
वर्ष-१९५३
श्रेणी-तांगा गीत
* परदे पर तांगे में गायक मुकेश स्वयं हैं.
गीत के बोल:
छोटी सी ये ज़िंदगानी रे
चार दिन की जवानी तेरी
हाय रे हाय
ग़म की कहानी तेरी
छोटी सी ये ज़िंदगानी रे
चार दिन की जवानी तेरी
हाय रे हाय
ग़म की कहानी तेरी
शाम हुई ये देश बीराना
तुझ को अपने बलम घर जाना,
सजन घर जाना
शाम हुई ये देश बीराना
तुझ को अपने बलम घर जाना,
सजन घर जाना
राह में मूरख मत लुट जाना,
मत लुट जाना
छोटी सी ये ज़िंदगानी रे
चार दिन की जवानी तेरी
हाय रे हाय
ग़म की कहानी तेरी
छोटी सी ये ज़िंदगानी रे
चार दिन की जवानी तेरी
हाय रे हाय
ग़म की कहानी तेरी
बाबुल का घर छूटा जाये
अखियन घोर अँधेरा छाये,
जी दिल घबराये
आँख से टपके दिल का खज़ाना
दिल का खज़ाना
छोटी सी ये ज़िंदगानी रे
चार दिन की जवानी तेरी
हाय रे हाय
ग़म की कहानी तेरी
छोटी सी ये ज़िंदगानी रे
चार दिन की जवानी तेरी
हाय रे हाय
ग़म की कहानी तेरी
...............................
Chhoti si ye zindagani-Aah 1953
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Thursday, 30 June 2011
अब मेरा कौन सहारा-बरसात १९४९
नर्गिस और राजकपूर की जोड़ी की ये तीसरी फिल्म थी। इसमें
राज कपूर के साले साहब-प्रेमनाथ भी हैं उनके साथ। बरसात
फिल्म ने फिल्म सिनेमा को नए समीकरण दिखाए तो कुछ
समीकरण बदले भी। बदलते युगों के युग्म पर कुछ घटनाएँ
होती हैं कुछ वैसी ही यह फिल्म है जिसे हम ५० के दशक में
हिंदी सिनेमा में होने वाले बदलाव का बिगुल जैसा कह सकते हैं।
ऐसी उस दौर की कुछ और प्रतिनिधि फ़िल्में भी हैं जिनपर चर्चा
आगे उन फिल्मों के गीतों की प्रस्तुति के समय हम करेंगे ।
फ़िल्म बरसात से तीसरा गीत पेश है। नर्गिस के ऊपर फिल्माया
गया अधिक कर्णप्रिय गीत सन १९४९ से सुनने वालों को आनंद दे
रहा है। एक दर्द भरा गीत जिसका फिल्मांकन भी बढ़िया है आपको
अंत तक बांधे रखेगा । ऐसे गीतों में किसी रंग की आवश्यकता नहीं
होती, ये तो श्वेत श्याम में भी ऐसा कमाल दिखाते हैं कि देखने वाला
भूल जाता है कि वो श्वेत श्याम फिल्म देख रहा है या रंगीन।
हुस्नलाल भगतराम के संगीत की जो ध्वनियाँ हैं वैसी ही साजों की
आवाजें इस गीत में भी हैं मगर थोड़ी तेज़ गति में ।
गीत के बोल:
अब मेरा कौन सहारा
अब मेरा कौन सहारा
अब मेरा कौन सहारा
अब मेरा कौन सहारा
मेरे बलम
मेरे बलम मुझको ना भुलाना
अब मेरा कौन सहारा
अब मेरा कौन सहारा
तुझसे बिछड़ कर दूर हुई
मिलने से मजबूर हुई
तुझसे बिछड़ कर दूर हुई
मिलने से मजबूर हुई
रो-रो के दिल ने तुझको पुकारा
अब मेरा कौन सहारा
अब मेरा कौन सहारा
तुझसे मिलन की आस लगी
नैना रस की प्यास लगी
नैना रस्ते
मुझको है तेरा गम भी न्यारा
अब मेरा कौन सहारा
अब मेरा कौन सहारा
पंख लगे उड़ जाऊं मैं
लेकिन कैसे आऊँ मैं
पंख लगे उड़ जाऊं मैं
लेकिन कैसे आऊँ मैं
बेबस हुयी किस्मत ने मारा
अब मेरा कौन सहारा
अब मेरा कौन सहारा
..............................
Ab mera kaun sahara-Barsaat 1949
राज कपूर के साले साहब-प्रेमनाथ भी हैं उनके साथ। बरसात
फिल्म ने फिल्म सिनेमा को नए समीकरण दिखाए तो कुछ
समीकरण बदले भी। बदलते युगों के युग्म पर कुछ घटनाएँ
होती हैं कुछ वैसी ही यह फिल्म है जिसे हम ५० के दशक में
हिंदी सिनेमा में होने वाले बदलाव का बिगुल जैसा कह सकते हैं।
ऐसी उस दौर की कुछ और प्रतिनिधि फ़िल्में भी हैं जिनपर चर्चा
आगे उन फिल्मों के गीतों की प्रस्तुति के समय हम करेंगे ।
फ़िल्म बरसात से तीसरा गीत पेश है। नर्गिस के ऊपर फिल्माया
गया अधिक कर्णप्रिय गीत सन १९४९ से सुनने वालों को आनंद दे
रहा है। एक दर्द भरा गीत जिसका फिल्मांकन भी बढ़िया है आपको
अंत तक बांधे रखेगा । ऐसे गीतों में किसी रंग की आवश्यकता नहीं
होती, ये तो श्वेत श्याम में भी ऐसा कमाल दिखाते हैं कि देखने वाला
भूल जाता है कि वो श्वेत श्याम फिल्म देख रहा है या रंगीन।
हुस्नलाल भगतराम के संगीत की जो ध्वनियाँ हैं वैसी ही साजों की
आवाजें इस गीत में भी हैं मगर थोड़ी तेज़ गति में ।
गीत के बोल:
अब मेरा कौन सहारा
अब मेरा कौन सहारा
अब मेरा कौन सहारा
अब मेरा कौन सहारा
मेरे बलम
मेरे बलम मुझको ना भुलाना
अब मेरा कौन सहारा
अब मेरा कौन सहारा
तुझसे बिछड़ कर दूर हुई
मिलने से मजबूर हुई
तुझसे बिछड़ कर दूर हुई
मिलने से मजबूर हुई
रो-रो के दिल ने तुझको पुकारा
अब मेरा कौन सहारा
अब मेरा कौन सहारा
तुझसे मिलन की आस लगी
नैना रस की प्यास लगी
नैना रस्ते
मुझको है तेरा गम भी न्यारा
अब मेरा कौन सहारा
अब मेरा कौन सहारा
पंख लगे उड़ जाऊं मैं
लेकिन कैसे आऊँ मैं
पंख लगे उड़ जाऊं मैं
लेकिन कैसे आऊँ मैं
बेबस हुयी किस्मत ने मारा
अब मेरा कौन सहारा
अब मेरा कौन सहारा
..............................
Ab mera kaun sahara-Barsaat 1949
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Monday, 20 June 2011
बन के सुहागन रही अभागन-आधी रात १९५०
एक बार किसी ने फरमाइश की-मेलंकली किसिम के गीत सुनवाओ।
हमने कहा ज़रूर। हमने उसे हुस्नलाल भगतराम द्वारा संगीतबद्ध
कुछ गीत सुनवा दिए। जो गीत सुनवाए थे उनमें से एक था फिल्म
आधी रात का यह गीत-बन के सुहागन रही अभागन। सन १९५० की
फिल्म आधी रात में अशोक कुमार और नर्गिस प्रमुख भूमिकाओं
में हैं। सरशर सैलानी का लिखा गीत गा रही हैं लता मंगेशकर।
पुराने फ़िल्मी गीत इस मायने में भी बढ़िया लगा करते थे कि २-३ मिनट
में ख़त्म हो जाया करते थे। आजकल के गीतों में बोलों से ज्यादा वाद्य
यंत्रों की आवाजें होती हैं जिन्हें कभी कभी ज़बरदस्ती झेलना पड़ता है।
गीत के बोल:
बन के सुहागन, रही अभागन
फूट गई तक़दीर मेरी
फूट गई तक़दीर मेरी
फूटी हुई तक़दीर के आगे
चल न सकी तदबीर मेरी
चल न सकी तदबीर मेरी
बन के सुहागन, रही अभागन
फूट गई तक़दीर मेरी
फूट गई तक़दीर मेरी
दिल में आग आँखों में पानी
दिल में आग आँखों में पानी
हाय मेरी बरबाद जवानी
हाय मेरी बरबाद जवानी
किसको सुनाऊँ ग़म की कहानी
कौन बँधाए धीर मेरी
कौन बँधाए धीर मेरी
बन के सुहागन, रही अभागन
फूट गई तक़दीर मेरी
फूट गई तक़दीर मेरी
ख़ून के आँसू पीती हूँ मैं
ख़ून के आँसू पीती हूँ मैं
मौत की आस पे जीती हूँ मैं
मौत की आस पे जीती हूँ मैं
इसके सिवा ऐ दुनिया वालो
कोई नहीं तक़दीर मेरी
फूट गई तक़दीर मेरी
बन के सुहागन, रही अभागन
फूट गई तक़दीर मेरी
फूट गई तक़दीर मेरी
................................
Ban ke suhagan-Aadi Raat 1950
हमने कहा ज़रूर। हमने उसे हुस्नलाल भगतराम द्वारा संगीतबद्ध
कुछ गीत सुनवा दिए। जो गीत सुनवाए थे उनमें से एक था फिल्म
आधी रात का यह गीत-बन के सुहागन रही अभागन। सन १९५० की
फिल्म आधी रात में अशोक कुमार और नर्गिस प्रमुख भूमिकाओं
में हैं। सरशर सैलानी का लिखा गीत गा रही हैं लता मंगेशकर।
पुराने फ़िल्मी गीत इस मायने में भी बढ़िया लगा करते थे कि २-३ मिनट
में ख़त्म हो जाया करते थे। आजकल के गीतों में बोलों से ज्यादा वाद्य
यंत्रों की आवाजें होती हैं जिन्हें कभी कभी ज़बरदस्ती झेलना पड़ता है।
गीत के बोल:
बन के सुहागन, रही अभागन
फूट गई तक़दीर मेरी
फूट गई तक़दीर मेरी
फूटी हुई तक़दीर के आगे
चल न सकी तदबीर मेरी
चल न सकी तदबीर मेरी
बन के सुहागन, रही अभागन
फूट गई तक़दीर मेरी
फूट गई तक़दीर मेरी
दिल में आग आँखों में पानी
दिल में आग आँखों में पानी
हाय मेरी बरबाद जवानी
हाय मेरी बरबाद जवानी
किसको सुनाऊँ ग़म की कहानी
कौन बँधाए धीर मेरी
कौन बँधाए धीर मेरी
बन के सुहागन, रही अभागन
फूट गई तक़दीर मेरी
फूट गई तक़दीर मेरी
ख़ून के आँसू पीती हूँ मैं
ख़ून के आँसू पीती हूँ मैं
मौत की आस पे जीती हूँ मैं
मौत की आस पे जीती हूँ मैं
इसके सिवा ऐ दुनिया वालो
कोई नहीं तक़दीर मेरी
फूट गई तक़दीर मेरी
बन के सुहागन, रही अभागन
फूट गई तक़दीर मेरी
फूट गई तक़दीर मेरी
................................
Ban ke suhagan-Aadi Raat 1950
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Friday, 3 December 2010
मेरी आँखों में बस गया कोई रे-बरसात १९४९
पहाड़ी पर ही घूमा जाए थोड़ी देर। फिल्म बरसात में बहुत
सी पहाड़ियां दिखाई देती हैं। अगला गीत जो आपको सुनवाया
जा रहा है वो भी राग पहाड़ी पर आधारित है. इस गीत को भी
लता मंगेशकर ने गाया है। शंकर जयकिशन की बतौर स्वतंत्र
संगीत निर्देशक पहली फिल्म में मधुर गीतों की ओवरलोडिंग
थी। ऐसा लगा मानो बहुत दिन से वे ढेर सारे मधुर गीत सुनाने
के लिए बेताब थे। सारी कसर उन्होंने फिल्म बरसात में निकाल
ली। उन दिनों वैसे भी एक फिल्म में ढेर सारे गीत हुआ करते थे,
इसलिए सब चल गया और ऐसा चला कि आज तक पब्लिक उसके
जादू से मुक्त नहीं हुई है। बरसात ने संगीत-वाणिज्य के क्षेत्र में धन
की बहुत अच्छी बरसात की। गीत का फिल्मांकन आला दर्जे का है
और चकित करने वाला है। गीत में आपको विलंबित और द्रुत दोनों
गत का आनंद मिलेगा।
गीत के बोल:
मेरी आँखों में बस गया कोई रे
मोहे नींद न आये मैं का करूँ
मेरी आँखों में बस गया कोई रे
मोहे नींद न आये मैं का करूँ
मेरी आँखों में बस गया कोई रे
मोहे नींद न आये मैं का करूँ
मेरी आँखों में बस गया कोई
मुस्काये जब रात की बिंदिया, हो ओ ओ
मुस्काये जब रात की बिंदिया
उड़ जाये आँखों से निंदिया
उड़ जाये आँखों से निंदिया
ठंडी ठंडी मैं आहें भरूँ
ठंडी ठंडी मैं आहें भरूँ
हाये मैं का करूँ
हाये मैं का करूँ
हाये मैं का करूँ
मेरी आँखों में बस गया कोई
बात करें जब चाँद सितारे
बात करें जब चाँद सितारे
जल बरसायें नैन हमारे
जल बरसायें नैन हमारे
तेरी याद में रो रो मरूँ
तेरी याद में रो रो मरूँ
हाये मैं का करूँ
हाये मैं का करूँ
हाये मैं का करूँ
मेरी आँखों में बस गया कोई रे
मोहे नींद न आये मैं का करूँ
मेरी आँखों में बस गया कोई
सी पहाड़ियां दिखाई देती हैं। अगला गीत जो आपको सुनवाया
जा रहा है वो भी राग पहाड़ी पर आधारित है. इस गीत को भी
लता मंगेशकर ने गाया है। शंकर जयकिशन की बतौर स्वतंत्र
संगीत निर्देशक पहली फिल्म में मधुर गीतों की ओवरलोडिंग
थी। ऐसा लगा मानो बहुत दिन से वे ढेर सारे मधुर गीत सुनाने
के लिए बेताब थे। सारी कसर उन्होंने फिल्म बरसात में निकाल
ली। उन दिनों वैसे भी एक फिल्म में ढेर सारे गीत हुआ करते थे,
इसलिए सब चल गया और ऐसा चला कि आज तक पब्लिक उसके
जादू से मुक्त नहीं हुई है। बरसात ने संगीत-वाणिज्य के क्षेत्र में धन
की बहुत अच्छी बरसात की। गीत का फिल्मांकन आला दर्जे का है
और चकित करने वाला है। गीत में आपको विलंबित और द्रुत दोनों
गत का आनंद मिलेगा।
गीत के बोल:
मेरी आँखों में बस गया कोई रे
मोहे नींद न आये मैं का करूँ
मेरी आँखों में बस गया कोई रे
मोहे नींद न आये मैं का करूँ
मेरी आँखों में बस गया कोई रे
मोहे नींद न आये मैं का करूँ
मेरी आँखों में बस गया कोई
मुस्काये जब रात की बिंदिया, हो ओ ओ
मुस्काये जब रात की बिंदिया
उड़ जाये आँखों से निंदिया
उड़ जाये आँखों से निंदिया
ठंडी ठंडी मैं आहें भरूँ
ठंडी ठंडी मैं आहें भरूँ
हाये मैं का करूँ
हाये मैं का करूँ
हाये मैं का करूँ
मेरी आँखों में बस गया कोई
बात करें जब चाँद सितारे
बात करें जब चाँद सितारे
जल बरसायें नैन हमारे
जल बरसायें नैन हमारे
तेरी याद में रो रो मरूँ
तेरी याद में रो रो मरूँ
हाये मैं का करूँ
हाये मैं का करूँ
हाये मैं का करूँ
मेरी आँखों में बस गया कोई रे
मोहे नींद न आये मैं का करूँ
मेरी आँखों में बस गया कोई
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Thursday, 2 December 2010
आ जा रे अब मेरा दिल पुकारा-आह १९५३
दो साल पीछे चलते हैं। आपने सन १९५५ का गीत
सुन लिया है अब आपको "किलासिक सैड सोंग"
सुनवाते हैं। हमारे एक मित्र शंकर जयकिशन के
भक्त हैं जो अक्सर 'किलासिक गीत' सुनवाते हैं हमें
जब भी उनके निवास का दौरा करो। पेशे से वो
मास्टर जो हैं, तो हाथ में गिलास ले कर बच्चों की
किलास भी लेते हैं। उनका मानना है इस गीत को सुनने
से अच्छे अच्छों की ऑंखें साफ़ हो जाती हैं। ऊपर
गिलास से आशय 'पानी के गिलास' से हैं श्रीमान ।
फिल्म आह एक महत्वकांक्षी फिल्म थी जिसके साथ
बॉक्स ऑफिस ने बेरुखी दिखाई जबकि फिल्म में एक
से बढ़कर एक मधुर गीत हैं । फिल्म इतिहास में कई
ऐसी फ़िल्में हैं जो बड़े बड़े नाम और हिट संगीत
होने के बावजूद दर्शकों द्वारा नकार दी गयीं। नर्गिस
और राज कपूर पर फिल्माए गए गीत संगीत प्रेमी
कई वजहों से चाव से देखते हैं । ये गीत हसरत का
लिखा हुआ है और गायक हैं-मुकेश, लता मंगेशकर।
गीत की पंक्ति-'रो रो के गम भी हारा' सुनकर ये यकीन
हो जाता है कि आशा और लता गायकी में भी बहनें हैं।
ऐसे बहुत कम वाकिये हैं जिनमें दोनों बहनों की आवाजों
में अंतर कर पाना मुश्किल हो जाता है।
मैं तो बस गीत के उस लॉन्ग शोट का विशेष रूप से
मुरीद हूँ जिसमे नायिका कहती है "घबराए हाय रे दिल"
और कैमरा घबरा के दूर भाग जाता है। देखिये १.३२
पर विडियो ।
गीत के बोल:
आ जा रे
आ जा रे, अब मेरा दिल पुकारा
रो रो के ग़म भी हारा
बदनाम ना हो प्यार मेरा, आ जा रे
आ जा रे, अब मेरा दिल पुकारा
रो रो के ग़म भी हारा
बदनाम ना हो प्यार मेरा, आ जा रे
आ आ आ आ आ आ आ आ आ
हं हं हं हं हं हं हं हं हं हं
मौत मेरी तरफ़ आने लगी
जान तेरी तरफ़ जाने लगी
बोल शाम-ए-जुदाई क्या करे
बोल शाम-ए-जुदाई क्या करे
आस मिलने की तड़पाने लगी
आ जा रे, अब मेरा दिल पुकारा
रो रो के ग़म भी हारा
बदनाम ना हो प्यार मेरा, आ जा रे
हो ओ ओ, घबराये हाय ये दिल
हो ओ ओ, घबराये हाय ये दिल
सपनों में आ के कभी मिल
सपनों में आ के कभी मिल
आ जा रे, अब मेरा दिल पुकारा
रो रो के ग़म भी हारा
बदनाम ना हो प्यार मेरा, आ जा रे
आ आ आ आ आ आ आ आ आ
हं हं हं हं हं हं हं हं हं हं
आपने बीमार-ए-ग़म को देख ले
हो सके तो तू हमको देख ले
तूने देखा ना होगा ये समा
तूने देखा ना होगा ये समा
कैसे जाता है दम को देख ले
आ जा रे, अब मेरा दिल पुकारा
रो रो के ग़म भी हारा
बदनाम ना हो प्यार मेरा, आ जा रे
सुन लिया है अब आपको "किलासिक सैड सोंग"
सुनवाते हैं। हमारे एक मित्र शंकर जयकिशन के
भक्त हैं जो अक्सर 'किलासिक गीत' सुनवाते हैं हमें
जब भी उनके निवास का दौरा करो। पेशे से वो
मास्टर जो हैं, तो हाथ में गिलास ले कर बच्चों की
किलास भी लेते हैं। उनका मानना है इस गीत को सुनने
से अच्छे अच्छों की ऑंखें साफ़ हो जाती हैं। ऊपर
गिलास से आशय 'पानी के गिलास' से हैं श्रीमान ।
फिल्म आह एक महत्वकांक्षी फिल्म थी जिसके साथ
बॉक्स ऑफिस ने बेरुखी दिखाई जबकि फिल्म में एक
से बढ़कर एक मधुर गीत हैं । फिल्म इतिहास में कई
ऐसी फ़िल्में हैं जो बड़े बड़े नाम और हिट संगीत
होने के बावजूद दर्शकों द्वारा नकार दी गयीं। नर्गिस
और राज कपूर पर फिल्माए गए गीत संगीत प्रेमी
कई वजहों से चाव से देखते हैं । ये गीत हसरत का
लिखा हुआ है और गायक हैं-मुकेश, लता मंगेशकर।
गीत की पंक्ति-'रो रो के गम भी हारा' सुनकर ये यकीन
हो जाता है कि आशा और लता गायकी में भी बहनें हैं।
ऐसे बहुत कम वाकिये हैं जिनमें दोनों बहनों की आवाजों
में अंतर कर पाना मुश्किल हो जाता है।
मैं तो बस गीत के उस लॉन्ग शोट का विशेष रूप से
मुरीद हूँ जिसमे नायिका कहती है "घबराए हाय रे दिल"
और कैमरा घबरा के दूर भाग जाता है। देखिये १.३२
पर विडियो ।
गीत के बोल:
आ जा रे
आ जा रे, अब मेरा दिल पुकारा
रो रो के ग़म भी हारा
बदनाम ना हो प्यार मेरा, आ जा रे
आ जा रे, अब मेरा दिल पुकारा
रो रो के ग़म भी हारा
बदनाम ना हो प्यार मेरा, आ जा रे
आ आ आ आ आ आ आ आ आ
हं हं हं हं हं हं हं हं हं हं
मौत मेरी तरफ़ आने लगी
जान तेरी तरफ़ जाने लगी
बोल शाम-ए-जुदाई क्या करे
बोल शाम-ए-जुदाई क्या करे
आस मिलने की तड़पाने लगी
आ जा रे, अब मेरा दिल पुकारा
रो रो के ग़म भी हारा
बदनाम ना हो प्यार मेरा, आ जा रे
हो ओ ओ, घबराये हाय ये दिल
हो ओ ओ, घबराये हाय ये दिल
सपनों में आ के कभी मिल
सपनों में आ के कभी मिल
आ जा रे, अब मेरा दिल पुकारा
रो रो के ग़म भी हारा
बदनाम ना हो प्यार मेरा, आ जा रे
आ आ आ आ आ आ आ आ आ
हं हं हं हं हं हं हं हं हं हं
आपने बीमार-ए-ग़म को देख ले
हो सके तो तू हमको देख ले
तूने देखा ना होगा ये समा
तूने देखा ना होगा ये समा
कैसे जाता है दम को देख ले
आ जा रे, अब मेरा दिल पुकारा
रो रो के ग़म भी हारा
बदनाम ना हो प्यार मेरा, आ जा रे
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