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Wednesday, 3 August 2011

सुनते थे नाम हम-आह १९५३

सन १९५३ की फिल्म आह के लिए शंकर जयकिशन ने
एक से बढ़कर एक धुनें बनायीं। फिल्म का दर्द भरा गीत
हो या मस्ती भरा, हर गीत सुनने में अच्छा लगता है।
फिल्म से एक थोडा तेज गति वाला गीत सुनवाते हैं
लता मंगेशकर की आवाज़ में। गीत फिल्माया गया है
विजय लक्ष्मी पर जो एक पार्टी में ये गीत गा रही हैं।






गीत के बोल:



सुनते थे नाम हम जिन का बहार से
देखा तो डोला जिया झूम झूम के
सुनते थे नाम हम जिन का बहार से
देखा तो डोला जिया झूम झूम के

छुपते रहे जो मेरी नज़र से
दिल बोले मेरा तुम ही तो हो
आँखों से रंग मेरे दिल के उमंग पे
डाला तो डोला जिया झूम झूम के

सुनते थे नाम हम जिन का बहार से
देखा तो डोला जिया झूम झूम के

ठुकरा चुके थे जिन की मुहब्बत
क्यों उन पे दीवाने हुए
तड़पा के प्यार ने जब हम को प्यार से
छेड़ा तो बोला जिया झूम झूम के

सुनते थे नाम हम जिन का बहार से
देखा तो डोला जिया झूम झूम के

पहले कहीं ये दिल न झुका था
क्या जानूँ अब क्या हो गया
जाओ न आज कल तुम हम को छोड़ के
अपना तो डोला जिया झूम झूम के

सुनते थे नाम हम जिन का बहार से
देखा तो डोला जिया झूम झूम के
...................................
Sunte the naam ham-Aah 1953

Tuesday, 2 August 2011

जाने न नज़र पहचाने जिगर-आह १९५३

भीगने के बाद कपडे उतार कर ड्रम में बैठ कर मधुर गीत कैसे गाया जाए
राज कपूर सिखा रहे हैं फिल्म आह के इस गीत में। उनके साथ नर्गिस की
जोड़ी है. लता और मुकेश की आवाज़ में ये सदाबहार युगल गीत सुनिए।
इसे भी हसरत जयपुरी ने लिखा है और धुन बनायीं है शंकर जयकिशन ने।
फिल्म बरसात के साथ १९४९ में शुरू हुयी शैलेन्द्र, हसरत, शंकर जयकिशन
की चौकड़ी की संगीतमय धमा-चौकड़ी ने काफी समय तक हिंदी फिल्म संगीत
जगत में अपना डंका बजाया ।




गीत के बोल:

जाने न नज़र पहचाने जिगर
ये कौन जो दिल पर छाया
मेरा अंग अंग मुस्काया
मेरा अंग अंग मुस्काया

आवाज़ ये किसकी आती है
जो छेड़ के दिल को जाती है
आवाज़ ये किसकी आती है
जो छेड़ के दिल को जाती है
मैं सुन के जिसे शर्मा जाऊँ
है कौन जो दिल में समाया
मेरा अंग अंग मुस्काया
मेरा अंग अंग मुस्काया

जाने न नज़र पहचाने जिगर
ये कौन जो दिल पर छाया
मुझे रोज़ रोज़ तड़पाया
मुझे रोज़ रोज़ तड़पाया

ढूँढेंगे उसे हम तारों में
सावन की ठण्डी बहारों में
ढूँढेंगे उसे हम तारों में
सावन की ठण्डी बहारों में
पर हम भी किसी से कम तो नहीं
क्यों रूप को अपने छुपाया
मुझे रोज़ रोज़ तड़पाया
मुझे रोज़ रोज़ तड़पाया

बिन देखे जिसको प्यार करूँ
गर देखूँ उस को जान भी दूँ
बिन देखे जिसको प्यार करूँ
गर देखूँ उस को जान भी दूँ
एक बार कहो ओ जादूगर
ये कौन सा खेल रचाया
मेरा अंग अंग मुस्काया
मेरा अंग अंग मुस्काया
..................................
Jaane na nazar-Aah 1953

Monday, 11 July 2011

छोटी सी ये ज़िंदगानी रे-आह १९५३

गायक - मुकेश
गीतकार-शैलेन्द्र
संगीतकार -शंकर जयकिशन
फिल्म -आह
वर्ष-१९५३
श्रेणी-तांगा गीत

* परदे पर तांगे में गायक मुकेश स्वयं हैं.



गीत के बोल:

छोटी सी ये ज़िंदगानी रे
चार दिन की जवानी तेरी
हाय रे हाय
ग़म की कहानी तेरी

छोटी सी ये ज़िंदगानी रे
चार दिन की जवानी तेरी
हाय रे हाय
ग़म की कहानी तेरी

शाम हुई ये देश बीराना
तुझ को अपने बलम घर जाना,
सजन घर जाना
शाम हुई ये देश बीराना
तुझ को अपने बलम घर जाना,
सजन घर जाना
राह में मूरख मत लुट जाना,
मत लुट जाना

छोटी सी ये ज़िंदगानी रे
चार दिन की जवानी तेरी
हाय रे हाय
ग़म की कहानी तेरी

छोटी सी ये ज़िंदगानी रे
चार दिन की जवानी तेरी
हाय रे हाय
ग़म की कहानी तेरी

बाबुल का घर छूटा जाये
अखियन घोर अँधेरा छाये,
जी दिल घबराये
आँख से टपके दिल का खज़ाना
दिल का खज़ाना

छोटी सी ये ज़िंदगानी रे
चार दिन की जवानी तेरी
हाय रे हाय
ग़म की कहानी तेरी

छोटी सी ये ज़िंदगानी रे
चार दिन की जवानी तेरी
हाय रे हाय
ग़म की कहानी तेरी
...............................
Chhoti si ye zindagani-Aah 1953

Thursday, 2 December 2010

आ जा रे अब मेरा दिल पुकारा-आह १९५३

दो साल पीछे चलते हैं। आपने सन १९५५ का गीत
सुन लिया है अब आपको "किलासिक सैड सोंग"
सुनवाते हैं। हमारे एक मित्र शंकर जयकिशन के
भक्त हैं जो अक्सर 'किलासिक गीत' सुनवाते हैं हमें
जब भी उनके निवास का दौरा करो। पेशे से वो
मास्टर जो हैं, तो हाथ में गिलास ले कर बच्चों की
किलास भी लेते हैं। उनका मानना है इस गीत को सुनने
से अच्छे अच्छों की ऑंखें साफ़ हो जाती हैं। ऊपर
गिलास से आशय 'पानी के गिलास' से हैं श्रीमान ।

फिल्म आह एक महत्वकांक्षी फिल्म थी जिसके साथ
बॉक्स ऑफिस ने बेरुखी दिखाई जबकि फिल्म में एक
से बढ़कर एक मधुर गीत हैं । फिल्म इतिहास में कई
ऐसी फ़िल्में हैं जो बड़े बड़े नाम और हिट संगीत
होने के बावजूद दर्शकों द्वारा नकार दी गयीं। नर्गिस
और राज कपूर पर फिल्माए गए गीत संगीत प्रेमी
कई वजहों से चाव से देखते हैं । ये गीत हसरत का
लिखा हुआ है और गायक हैं-मुकेश, लता मंगेशकर।

गीत की पंक्ति-'रो रो के गम भी हारा' सुनकर ये यकीन
हो जाता है कि आशा और लता गायकी में भी बहनें हैं।
ऐसे बहुत कम वाकिये हैं जिनमें दोनों बहनों की आवाजों
में अंतर कर पाना मुश्किल हो जाता है।

मैं तो बस गीत के उस लॉन्ग शोट का विशेष रूप से
मुरीद हूँ जिसमे नायिका कहती है "घबराए हाय रे दिल"
और कैमरा घबरा के दूर भाग जाता है। देखिये १.३२
पर विडियो ।



गीत के बोल:

आ जा रे
आ जा रे, अब मेरा दिल पुकारा
रो रो के ग़म भी हारा
बदनाम ना हो प्यार मेरा, आ जा रे

आ जा रे, अब मेरा दिल पुकारा
रो रो के ग़म भी हारा
बदनाम ना हो प्यार मेरा, आ जा रे

आ आ आ आ आ आ आ आ आ
हं हं हं हं हं हं हं हं हं हं

मौत मेरी तरफ़ आने लगी
जान तेरी तरफ़ जाने लगी
बोल शाम-ए-जुदाई क्या करे
बोल शाम-ए-जुदाई क्या करे
आस मिलने की तड़पाने लगी

आ जा रे, अब मेरा दिल पुकारा
रो रो के ग़म भी हारा
बदनाम ना हो प्यार मेरा, आ जा रे

हो ओ ओ, घबराये हाय ये दिल
हो ओ ओ, घबराये हाय ये दिल
सपनों में आ के कभी मिल
सपनों में आ के कभी मिल

आ जा रे, अब मेरा दिल पुकारा
रो रो के ग़म भी हारा
बदनाम ना हो प्यार मेरा, आ जा रे

आ आ आ आ आ आ आ आ आ
हं हं हं हं हं हं हं हं हं हं

आपने बीमार-ए-ग़म को देख ले
हो सके तो तू हमको देख ले
तूने देखा ना होगा ये समा
तूने देखा ना होगा ये समा
कैसे जाता है दम को देख ले

आ जा रे, अब मेरा दिल पुकारा
रो रो के ग़म भी हारा
बदनाम ना हो प्यार मेरा, आ जा रे
 
 
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